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पेंशनर्स के परिवारों को राहत, फैमिली पेंशन के लिए नया खाता खोलने की जरूरत नहीं

नई दिल्ली  केंद्रीय पेंशनभोगियों और उनके जीवनसाथी के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर है. पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW) तथा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार, मुख्य पेंशनभोगी के निधन के बाद उनके पति या पत्नी के साथ चल रहा जॉइंट बैंक अकाउंट बंद नहीं किया जाएगा. इसके साथ ही, फैमिली पेंशन शुरू कराने के लिए जीवित जीवनसाथी को कोई भी नया सिंगल बैंक अकाउंट खोलने की आवश्यकता नहीं होगी. सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य संकट की घड़ी में बुजुर्गों को बैंकों की लंबी कागजी कार्रवाई और चक्कर काटने से बचाना है।  क्या है नया नियम और व्यवस्था? पेंशन विभाग और बैंकिंग नियमों के मुताबिक, यदि पेंशनभोगी का अपने जीवनसाथी के साथ "आइदर और सर्वाइवर" (Either or Survivor) या "फॉर्मर और सर्वाइवर" मोड में संयुक्त खाता है, तो पेंशनभोगी की मृत्यु के बाद उसी खाते में फैमिली पेंशन ट्रांसफर की जाएगी. बैंक इस मौजूदा जॉइंट अकाउंट को ही सिंगल अकाउंट में परिवर्तित कर देगा. इसके लिए पूरी बैंकिंग प्रक्रिया को नए सिरे से दोहराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।  फैमिली पेंशन शुरू कराने की आसान प्रक्रिया पेंशनभोगी के निधन के बाद परिवार को सबसे पहले संबंधित बैंक शाखा को सूचित करना होगा. इसके लिए जीवनसाथी को केवल निम्नलिखित दस्तावेज जमा करने होंगे:     मृत्यु प्रमाण पत्र: पेंशनभोगी के निधन की आधिकारिक पुष्टि के लिए.     PPO की कॉपी: यदि पीपीओ में पति/पत्नी का नाम फैमिली पेंशन के लिए पहले से दर्ज है, तो काम बेहद आसान हो जाता है।      साधारण आवेदन पत्र और KYC: बैंक खाते का स्टेटस अपडेट करने के लिए एक साधारण फॉर्म और पहचान पत्र।  इन दस्तावेजों को जमा करते ही बैंक केंद्रीय पेंशन प्रसंस्करण केंद्र (CPPC) को सूचना भेजेगा और उसी खाते में फैमिली पेंशन क्रेडिट होना शुरू हो जाएगी. इस प्रक्रिया में जीवित पति/पत्नी को 'फॉर्म 14' भरने की भी जरूरत नहीं पड़ती।  देरी से बचने के लिए अभी करें ये काम विशेषज्ञों के अनुसार, अक्सर फैमिली पेंशन में देरी नियमों की वजह से नहीं, बल्कि दस्तावेजों में कमियों के कारण होती है. इसलिए पेंशनभोगियों को समय रहते ये कदम उठाने चाहिए: नाम की स्पेलिंग जांचें: सुनिश्चित करें कि पीपीओ, आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खाते में जीवनसाथी के नाम की स्पेलिंग बिल्कुल एक जैसी हो।  KYC अपडेट रखें: बैंक खाते का नो-योर-कस्टमर (KYC) रिकॉर्ड हमेशा अपडेटेड रखें ताकि खाता कभी फ्रीज न हो।  जॉइंट अकाउंट मोड: यदि खाता जॉइंट नहीं है, तो उसे तुरंत 'आइदर या सर्वाइवर' मोड में बदलवा लें। 

काकोली घोष दस्तीदार का बड़ा राजनीतिक कदम, NCPI की कमान संभाली; NDA में एंट्री की तैयारी

कोलकाता तृणमूल कांग्रेस (TMC) से बगावत करने वाले सांसदों ने दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए एक बड़ा 'मास्टरस्ट्रोक' चला है। 20 बागी टीएमसी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर लिया है और अब इस पार्टी की कमान पूरी तरह से अपने हाथों में ले ली है। कभी टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी की बेहद करीबी मानी जाने वालीं और इस बगावत का प्रमुख चेहरा बनीं काकोली घोष दस्तीदार को NCPI का नया अध्यक्ष चुन लिया गया है। कैसे हुआ यह 'तख्तापलट'? सूत्रों के मुताबिक, बागी गुट और NCPI के बीच एक आपसी सहमति से यह टेकओवर हुआ है। काकोली घोष की ताजपोशी से ठीक दो दिन पहले NCPI की तत्कालीन अध्यक्ष शेवली कुंडू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 30 मई को चार बार की सांसद काकोली घोष दस्तीदार को आधिकारिक तौर पर इस पार्टी (NCPI) का अध्यक्ष चुन लिया गया। रविवार को 20 बागी सांसदों के गुट ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की और उन्हें इस अनजान पार्टी के साथ अपने विलय की आधिकारिक जानकारी दी, जिसके बाद से यह पार्टी रातों-रात राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गई है। अभिषेक बनर्जी से नाराजगी बनी बगावत की वजह टीएमसी के भीतर मचे इस घमासान की असल जड़ ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के अघोषित उत्तराधिकारी अभिषेक बनर्जी को माना जा रहा है। बागी सांसदों का आरोप है कि अभिषेक बनर्जी का रवैया बेहद 'अहंकारी' है और उन्होंने पार्टी के आंतरिक ढांचे को पूरी तरह दरकिनार कर दिया है। इसी कथित मनमानी के चलते सांसदों में गुस्सा पनपा, जो अंततः इस बड़ी बगावत में तब्दील हो गया। बीजेपी नेताओं का मिला परदे के पीछे से साथ इस पूरे घटनाक्रम में बीजेपी आधिकारिक तौर पर तो कुछ नहीं कह रही है, लेकिन बागी सांसदों को उसका पूरा सहयोग मिला है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और अनुभवी सांसद निशिकांत दुबे ने बागी गुट के साथ लगातार चर्चा कर उनकी आगे की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाई। बागी सांसदों की कई अहम बैठकें सीधे केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर ही हुईं। NDA में शामिल होने की अपील रविवार को स्पीकर ओम बिरला को दिए गए विलय के पत्र में इन 20 सांसदों ने खुद को बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA का हिस्सा बताया है। उन्होंने मांग की है कि चूंकि अब तक वे टीएमसी के साथ विपक्ष में बैठते थे, इसलिए अब उन्हें सत्ताधारी गठबंधन (NDA) के साथ सीटें आवंटित की जाएं। क्या है NCPI (नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया)? NCPI को जनवरी 2023 में एक राजनीतिक दल के तौर पर मान्यता मिली थी। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में इसका पता पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के सांकराइल का है। यह पार्टी चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड 2000 से अधिक गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) में से एक है। साल 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में इस पार्टी ने 4 उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से एक उम्मीदवार को सबसे ज्यादा महज 536 वोट ही मिल सके थे। सुदीप बंद्योपाध्याय भी बागियों के साथ छह बार के सांसद और बागियों में सबसे वरिष्ठ सदस्य सुदीप बंद्योपाध्याय भी कुछ दिन पहले ही इस गुट में शामिल हो गए हैं। उन्होंने यह कदम काकोली घोष के NCPI के 'राजनीतिक मामलों की समिति' द्वारा अध्यक्ष चुने जाने के बाद उठाया। आगे क्या होगा? अगर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस विलय को अपनी मंजूरी दे देते हैं, तो यह भारतीय राजनीति का एक बड़ा उलटफेर होगा। कल तक संसद या किसी भी राज्य विधानसभा में एक भी सदस्य न रखने वाली पार्टी NCPI रातों-रात लोकसभा की 5वीं सबसे बड़ी पार्टी और सत्ताधारी NDA का दूसरा सबसे बड़ा दल बन जाएगी।

खजराना गणेश मंदिर के लिए फाइनल हुआ खास डिजाइन, 5 प्रतिमाओं को पहनाए जाएंगे स्वर्ण मुकुट

इंदौर  विश्व प्रसिद्ध इंदौर के खजराना गणेश मंदिर में श्रद्धालु लगातार दिल खोलकर दान कर रहे हैं. दानपेटियों में नगदी के अलावा सोना-चांदी भी भक्त दान कर रहे हैं. इसके अलावा कई भक्त मंदिर प्रबंधन समिति को सीधा सोना दान कर रहे हैं. ये स्वर्ण दान उस अभियान में कारगर साबित होने वाला है, जिसके तहत गर्भगृह में भगवान गणेश के साथ ही रिद्धि-सिद्धि भी स्वर्ण मुकुट धारण करेंगी. इसके अलावा गर्भगृह में शुभ और लाभ की प्रतिमाओं को भी सोने का मुकुट सुशोभित किया जाएगा।  स्वर्ण मुकुट अभियान: अभी ढाई किलो सोना और चाहिए अभी तक खजराना मंदिर प्रबंधन समिति को करीब साढ़े 5 किलो सोना दान में मिल चुका है. टारगेट 8 किलो सोना जुटाने का है. इस सोने से 5 स्वर्ण मुकुट बनाए जाने हैं. 3 दिन पहले ही एक श्रद्धालु ने दो तोला सोना भगवान गणेश को अर्पित किया है. अभी 5 स्वर्ण मुकुट बनाने के लिए करीब ढाई किलो सोने की और जरूरत है. अभी खजराना गणेश को 1 किलो सोने का मुकुट तिल चतुर्थी, गणेश चतुर्थी पर पहनाया जाता है. योजना के अनुसार नए मुकुट के साथ एक किलो का स्वर्ण छत्र, मां रिद्धि-सिद्धि के मुकुट 600-600 ग्राम के नए के बनेंगे. लाभ-शुभ के मुकुट 100-100 ग्राम के नए बनवाए जाएंगे।  श्रद्धालु दानपेटी में अर्पित करते हैं सोने की ज्वैलरी खजराना गणेश मंदिर में पूरे देश से श्रद्धालु पहुंचते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार यहां दान करते हैं. विदेश में रहने वाले बप्पा के भक्त भी दानराशि भेजते हैं. हाल ही में दान पेटियां जब खोली गईं और काउंटिंग की गई तो ये राशि करीब 1.78 करोड़ निकली. दान पेटियों में सोना, चांदी, हीरे जड़े आभूषण भी मिले. नगद राशि को मंदिर के विकास में इस्तेमाल किया जाता है. भक्तों के लिए सुविधाए विकसित की जाती हैं।  दानपेटी और प्रत्यक्ष रूप से मिले सोने को सहेजकर रखा जाता है, क्योंकि इसी सोने से स्वर्ण मुकुट बनने हैं. गणेश चतुर्थी पर खजराना गणेश मंदिर में भगवान गणपति का 5 करोड़ के गहनों से श्रृंगार किया गया. सिर पर हीरे मोती से जड़ा सोने का मुकुट धारण किए हुए खजराना गणेश सुसज्जित हुए, बप्पा का मनमोहक श्रृंगार देख भक्त भावविभोर हो गए थे।  सोने के रेट बढ़ने का असर भी दिखा हालांकि बीते एक से डेढ़ साल के अंदर सोने के बेतहाशा बढ़ते रेट के कारण दान में कुछ कमी आई है. लेकिन इसके बाद भी भक्तों के साथ ही मंदिर प्रबंधन समिति को भरोसा है कि 8 किलो सोना इकट्ठा करने का टारगेट बहुत जल्द पूरा होगा. खजराना गणेश मंदिर के पंडित अशोक भट्ट बताते हैं "गर्भगृह स्थित भगवान गणेश महाराज के साथ ही रिद्धि, सिद्धि, शुभ और लाभ की प्रतिमाओं के लिए नए स्वर्ण मुकुट तैयार करने की प्लानिंग है. स्वर्ण मुकुट की स्पेशल डिजाइन तैयार हो चुकी है. इस काम के लिए लक्ष्य के अनुसार कुल 8 किलो सोना चाहिए।  डेढ़ हजार लोगों को रोजाना मुफ्त भोजन खजराना गणेश मंदिर में आने वाली दानराशि का इस्तेमाल केवल मंदिर के विस्तार व विकास के लिए नहीं होता बल्कि यहां अन्न क्षेत्र में रोजाना करीब डेढ़ हजार लोगों को मुफ्त में भोजन कराया जाता है. इसके साथ ही गरीब व असहाय लोगों के इलाज पर राशि खर्च की जाती है. इस कार्य में पूरा इंदौर शहर साथ देता है। 

ग्लोबल मार्केट में निवेश करने वालों के लिए खुशखबरी, ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म्स को मिली हरी झंडी

मुंबई  विदेश के शेयर बाजारों में निवेश करने की चाहत रखते हैं तो ये खबर आपके लिए है। दरअसल, भारत के चार बड़े रिटेल ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म जेरोधा, ग्रो, एंजल वन और Upstox को GIFT सिटी के जरिए अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी शेयरों में निवेश की सुविधा शुरू करने की मंजूरी मिल गई है। इन कंपनियों को इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) से जरूरी मंजूरी मिली है। बता दें कि IFSCA, GIFT सिटी के इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) में काम करने वाले फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स, सेवाओं और संस्थानों के लिए रेगुलेटर है। कब से शुरू होगी सुविधा? मनीकंट्रोल की एक खबर के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी शेयरों में निवेश की सुविधा अगले दो से तीन महीनों में शुरू होने की उम्मीद है। जानकारी के मुताबिक ब्रोकरेज कंपनियां टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन, टेस्टिंग और कंप्लायंस की प्रक्रियाएं पूरी कर रही हैं। इसी के साथ ये ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म उन कंपनियों की लिस्ट में शामिल हो जाएंगे जो GIFT सिटी के जरिए विदेशी इक्विटी में निवेश की सुविधा देती हैं। रिपोर्ट के अनुसार जेरोधा और Upstox ब्रोकर-डीलर के तौर पर काम करेंगे जबकि ग्रो और एंजेल वन ग्लोबल एक्सेस प्रोवाइडर (GAP) फ्रेमवर्क के तहत यह सेवा देंगे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जेरोधा और Upstox के विदेशी पार्टनर्स – जैसे ViewTrade इंटरनेशनल, Interactive ब्रोकर्स और Alpaca सिक्योरिटीज के जरिए ट्रेड करने की उम्मीद है। धन को मिल चुकी है मंजूरी ये मंजूरी धन (Dhan) द्वारा US स्टॉक में निवेश की सुविधा शुरू करने के कुछ दिनों बाद मिली है, जो यह दिखाता है कि भारतीय निवेशकों को ग्लोबल मार्केट तक एक्सेस देने में ब्रोकरेज फर्मों की दिलचस्पी बढ़ रही है। ब्रोकरेज कंपनियां अगले कुछ महीनों में इसे लॉन्च करने की तैयारी कर रही हैं। बता दें कि स्मॉलकेस, INDmoney और HDFC सिक्योरिटीज जैसे कई प्लेटफॉर्म पहले से ही अलग-अलग तरीकों से अंतरराष्ट्रीय स्टॉक तक एक्सेस दे रहे हैं। अब जेरोधा, ग्रो, एंजल वन और Upstox के आने से रिटेल निवेशकों की विदेशी बाजारों तक एक्सेस और बढ़ सकती है। बता दें कि हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय निवेश की मांग बढ़ी है क्योंकि भारतीय निवेशक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर में निवेश करना चाहते हैं। GIFT सिटी क्या है? गुजरात में स्थित GIFT सिटी भारत के इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर का घर है, जो एक खास फाइनेंशियल जो है और इसे सीमा-पार फाइनेंशियल सेवाओं और ट्रांजैक्शन को आसान बनाने के लिए बनाया गया है। विदेशी सिक्योरिटीज तक एक्सेस बढ़ाने के लिए IFSCA ने ग्लोबल एक्सेस प्रोवाइडर (GAP) फ्रेमवर्क शुरू किया है। इसके तहत, GIFT सिटी से काम करने वाली रेगुलेटेड कंपनियां निवेशकों को भारत-आधारित रेगुलेटरी स्ट्रक्चर के जरिए विदेशी स्टॉक, दूसरी अंतरराष्ट्रीय सिक्योरिटीज तक एक्सेस दे सकती हैं।

एक दिन, तीन बड़े मैच! अफगानिस्तान से भिड़ेगी टीम इंडिया, महिला विश्व कप का भी होगा रोमांच

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए 17 जून बेहद व्यस्त और रोमांच से भरपूर रहने वाला है। खास बात यह है कि टीम इंडिया की तीन अलग-अलग टीमें एक ही दिन अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेलती नजर आएंगी। सुबह श्रीलंका में भारत A की चुनौती होगी, दोपहर में सीनियर पुरुष टीम अफगानिस्तान से भिड़ेगी और शाम होते-होते महिला टीम टी20 विश्व कप में जीत का सिलसिला आगे बढ़ाने के इरादे से मैदान में उतरेगी। ऐसे में क्रिकेट प्रेमियों को पूरे दिन टीवी स्क्रीन से नजरें हटाने का मौका शायद ही मिले। भारत A के लिए ‘करो या मरो’ का मुकाबला सबसे पहले एक्शन की शुरुआत श्रीलंका से होगी, जहां तिलक वर्मा की कप्तानी में भारत A टीम त्रिकोणीय सीरीज (Team India) खेल रही है। भारतीय टीम ने टूर्नामेंट की शुरुआत जीत के साथ की थी, लेकिन इसके बाद अफगानिस्तान A से हार और श्रीलंका A के खिलाफ सुपर ओवर में मिली शिकस्त ने फाइनल की राह मुश्किल बना दी है। अब भारत A के सामने अफगानिस्तान A के खिलाफ जीत दर्ज करना बेहद जरूरी हो गया है। यह मुकाबला दांबुला के रंगीरी दांबुला इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा और भारतीय समयानुसार सुबह 10 बजे शुरू होगा। इस मैच का परिणाम तय करेगा कि भारत A फाइनल की दौड़ में बना रहेगा या नहीं। शुभमन गिल की अगुआई में सीरीज जीतने का मौका इसके बाद नजरें लखनऊ के इकाना स्टेडियम पर टिकेंगी, जहां भारत और अफगानिस्तान की सीनियर टीमें तीन मैचों की वनडे सीरीज के दूसरे मुकाबले में आमने-सामने होंगी। पहले वनडे में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बढ़त हासिल की थी और अब शुभमन गिल की कप्तानी वाली टीम की कोशिश होगी कि दूसरा मुकाबला जीतकर सीरीज अपने नाम कर ली जाए। यह मुकाबला दोपहर 1:30 बजे शुरू होगा। चूंकि यह 50 ओवर का मैच है, इसलिए क्रिकेट प्रेमियों को देर शाम तक रोमांच देखने को मिलेगा। महिला विश्व कप में नीदरलैंड्स से होगी भिड़ंत दिन का तीसरा मुकाबला आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 में खेला जाएगा। हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारतीय महिला टीम ने अपने पहले मुकाबले में पाकिस्तान को हराकर शानदार शुरुआत की थी। अब अगली चुनौती नीदरलैंड्स की है। इंग्लैंड के हेडिंग्ले मैदान पर होने वाला यह मुकाबला भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे शुरू होगा। भारत की कोशिश लगातार दूसरी जीत दर्ज कर सेमीफाइनल की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाने की होगी। दिलचस्प बात यह है कि शाम के समय कुछ घंटों के लिए भारतीय पुरुष और महिला टीमों (Team India) के मुकाबले एक साथ चलते दिखाई देंगे। जहां एक ओर सीनियर पुरुष टीम वनडे मैच के अंतिम चरण में होगी, वहीं दूसरी ओर महिला टीम टी20 विश्व कप में अपनी चुनौती पेश कर रही होगी। ऐसे में क्रिकेट फैंस को चैनल बदलने की कड़ी परीक्षा भी देनी पड़ सकती है। 17 जून का पूरा मैच शेड्यूल मुकाबला                                                       टूर्नामेंट                             स्थान                    भारतीय समय भारत A बनाम अफगानिस्तान A           श्रीलंका त्रिकोणीय सीरीज                दांबुला, श्रीलंका           सुबह 10:00 बजे भारत बनाम अफगानिस्तान (दूसरा वनडे)     अफगानिस्तान का भारत दौरा     लखनऊ                      दोपहर 1:30 बजे भारत महिला बनाम नीदरलैंड्स महिला     ICC महिला टी20 विश्व कप 2026     हेडिंग्ले, इंग्लैंड            शाम 7:00 बजे सुबह की शुरुआत युवा खिलाड़ियों के संघर्ष से होगी, दोपहर में सीनियर टीम सीरीज जीतने उतरेगी और रात में महिला टीम विश्व कप अभियान को मजबूती देने की कोशिश करेगी। एक ही दिन तीन भारतीय टीमों का मैदान पर उतरना बेहद दुर्लभ अवसर होता है। ऐसे में 17 जून भारतीय क्रिकेट कैलेंडर के सबसे व्यस्त और रोमांचक दिनों में से एक साबित हो सकता है।  

एथेनॉल फ्यूल से होगी बचत या बढ़ेगा खर्च? E85 और E100 का पूरा गणित समझें

नई दिल्ली  भारत में अब E85 पेट्रोल मिलना शुरू हो गया है. E85 का मतलब है ऐसा ईंधन जिसमें 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है. फिलहाल यह कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध है, जिनमें दिल्ली जैसे शहर भी शामिल हैं. सरकार का लक्ष्य अगले साल तक इसे देशभर के करीब 5,000 पेट्रोल पंपों तक पहुंचाने का है. दिल्ली में जहां सामान्य पेट्रोल की कीमत करीब 102 रुपये प्रति लीटर है, वहीं E85 करीब 82 रुपये प्रति लीटर में बेचा जा रहा है. यानी इसकी कीमत लगभग 20 रुपये कम रखी गई है. हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि आज देश में मिलने वाले सामान्य पेट्रोल में भी लगभग 20 प्रतिशत एथेनॉल पहले से मिलाया जा रहा है, जिसे E20 कहा जाता है।  E20 पेट्रोल लगभग सभी पेट्रोल वाहनों के लिए उपलब्ध है, लेकिन E85 हर गाड़ी में नहीं डाला जा सकता. इसके लिए फ्लेक्स फ्यूल इंजन वाली कार या मोटरसाइकिल होना जरूरी है. ऐसी गाड़ियों की खासियत यह है कि इनमें E20, E85 या भविष्य में आने वाला E100 यानी 100 प्रतिशत एथेनॉल वाला ईंधन भी इस्तेमाल किया जा सकता है. भारत में अब फ्लेक्स फ्यूल तकनीक वाली कारें और दोपहिया वाहन बाजार में आने लगे हैं. सरकार का उद्देश्य लोगों को धीरे धीरे ऐसे वाहनों की ओर प्रोत्साहित करना है ताकि पेट्रोल पर निर्भरता कम हो और देश का आयात बिल घट सके।  सरकार एथेनॉल को बढ़ावा क्यों दे रही है एथेनॉल का उत्पादन भारत में ही किया जाता है, जबकि कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करना पड़ता है. अगर अधिक लोग एथेनॉल आधारित ईंधन अपनाते हैं तो देश को कम कच्चा तेल खरीदना पड़ेगा और विदेशी मुद्रा की बचत होगी. इसी सोच के तहत सरकार ने तेल कंपनियों से E85 की कीमत सामान्य पेट्रोल से कम रखने को कहा है।  क्या 20 रुपये सस्ता ईंधन सच में सस्ता साबित होगा पहली नजर में 20 रुपये प्रति लीटर कम कीमत काफी आकर्षक लगती है, लेकिन असली सवाल माइलेज का है. एथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में ऊर्जा कम होती है, इसलिए एक लीटर एथेनॉल पर गाड़ी उतनी दूरी तय नहीं कर पाती जितनी एक लीटर पेट्रोल पर करती है. यही वजह है कि केवल प्रति लीटर कीमत देखकर फैसला करना सही नहीं होगा. वास्तविक खर्च इस बात पर निर्भर करेगा कि गाड़ी एक लीटर ईंधन में कितने किलोमीटर चलती है।  ब्राजील का अनुभव क्या कहता है एथेनॉल आधारित परिवहन की बात करें तो ब्राजील दुनिया के सबसे पुराने और सफल उदाहरणों में शामिल है. वहां 1975 से एथेनॉल को बढ़ावा देने की नीति लागू है और 2003 के बाद फ्लेक्स फ्यूल वाहनों का तेजी से विस्तार हुआ. आज वहां अधिकांश गाड़ियां ऐसी हैं जिनमें पेट्रोल और एथेनॉल दोनों का इस्तेमाल किया जा सकता है।  ब्राजील में एक मशहूर सिद्धांत है जिसे 70 प्रतिशत नियम कहा जाता है. इसका मतलब यह है कि एथेनॉल वाला ईंधन तभी आर्थिक रूप से फायदेमंद माना जाता है जब उसकी कीमत सामान्य पेट्रोल की कीमत के लगभग 70 प्रतिशत या उससे कम हो, यानी करीब 30 प्रतिशत सस्ती हो. इसका कारण यह है कि वहां के अनुभव के अनुसार एथेनॉल पर माइलेज पेट्रोल की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत कम मिलती है. अगर कोई गाड़ी एक लीटर शुद्ध पेट्रोल पर 10 किलोमीटर चलती है तो वही गाड़ी एक लीटर शुद्ध एथेनॉल पर लगभग 7 किलोमीटर चलती है।  भारत के E20 और E85 का गणित अगर मान लिया जाए कि कोई वाहन 100 प्रतिशत पेट्रोल पर 10 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देता है, तो E20 में मौजूद 80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत एथेनॉल के आधार पर उसकी अनुमानित माइलेज करीब 9.4 किलोमीटर प्रति लीटर बैठती है. इसी तरह E85 में 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है. उसी गणना के आधार पर इसकी अनुमानित माइलेज करीब 7.5 किलोमीटर प्रति लीटर हो सकती है. इसका मतलब यह हुआ कि E20 की तुलना में E85 पर माइलेज लगभग 20 प्रतिशत कम हो सकती है. इसी अंतर को ध्यान में रखते हुए E85 की कीमत सामान्य पेट्रोल से लगभग 20 रुपये प्रति लीटर कम रखी गई है।  क्या उपभोक्ता को फायदा होगा मौजूदा गणना के आधार पर ऐसा लगता है कि कम कीमत और कम माइलेज लगभग एक दूसरे को संतुलित कर देते हैं. यानी E85 इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ता को कोई बड़ा अतिरिक्त आर्थिक फायदा नहीं मिलेगा, लेकिन उसे कोई खास नुकसान भी नहीं होना चाहिए।  देश को हो सकता है बड़ा लाभ अगर बड़ी संख्या में लोग फ्लेक्स फ्यूल इंजन वाली गाड़ियां अपनाते हैं और E85 या भविष्य में E100 जैसे ईंधनों का इस्तेमाल बढ़ता है तो इसका सबसे बड़ा फायदा देश को होगा. इससे पेट्रोल और कच्चे तेल के आयात में कमी आ सकती है, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और डॉलर पर निर्भरता घट सकती है. लंबे समय में इससे भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये की स्थिति को भी मजबूती मिल सकती है. कुल मिलाकर, मौजूदा आंकड़ों के आधार पर E85 उपभोक्ता के लिए कोई चमत्कारी बचत का साधन नहीं दिखता, लेकिन ऊर्जा सुरक्षा और आयातित तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम जरूर साबित हो सकता है।   

मध्य प्रदेश में बन रहे 6 मेगा कॉरिडोर, जानिए आपके जिले को क्या होगा फायदा

 भोपाल  ग्वालियर और नागपुर शहरों को सिक्सलेन हाइवे से जोड़ने के लिए नए कारीडोर का सर्वे तेजी से चल रहा है. इस कॉरिडोर को केंद्र सरकार द्वारा सहमति मिलने के बाद सरकार द्वारा फिजिबिलिटी सर्वे कराया जा रहा है. जिसमें ये देखा जाएगा कि इस कॉरिडोर पर कैसा ट्रैफिक रहेगा. फिलहाल ये तय किया गया है कि 40 हजार करोड़ की लागत से 569 किमी लंबा सिक्सलेन हाइवे बनाया जाएगा, जो मध्य प्रदेश के 9 जिलों से गुजरेगा. इन सभी जिलों में सिक्सलेन कॉरिडोर के किनारे इंडस्ट्रियल क्लस्टर की स्थापना की जाएगी, जो इन जिलों के व्यवसाय में पंख लगाएंगे।   मध्य प्रदेश की सड़कों पर रफ्तार और विकास का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। सूबे के सभी 55 जिलों की तस्वीर बदलने और उनके बीच की दूरी को कम करने के लिए सरकार एक मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। राज्य में 6 नए इकोनॉमिक कॉरिडोर (आर्थिक गलियारे) तैयार किए जा रहे हैं, जो करीब 3,300 किलोमीटर लंबे होंगे। लगभग 36,483 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट से बनने वाले इन एक्सप्रेस-वे ग्रिड का निर्माण कार्य साल 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह महापरियोजना न केवल सफर को आसान बनाएगी, बल्कि विंध्य, बुंदेलखंड, मालवा-निमाड़ और नर्मदा अंचल की आर्थिक रीढ़ को भी मजबूत करेगी। बालाघाट से बैतुल तक और बिलासपुर-रायपुर से होते हुए गुजरात सीमा तक कनेक्टिविटी का यह जाल प्रदेश के औद्योगिक और व्यापारिक विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। आइए जानते हैं कि मध्य प्रदेश को रफ्तार देने वाले ये छह इकोनॉमिक कॉरिडोर कौन से हैं और इनसे प्रदेश को क्या लाभ होगा: 1. मालवा-निमाड़ विकासपथ (कुल लंबाई: 450 किमी) मालवा और निमाड़ अंचल को आर्थिक रूप से और समृद्ध बनाने के लिए इस कॉरिडोर को 7,972 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। इसके तहत गरोठ से उज्जैन के बीच 136 किलोमीटर और इंदौर से बुरहानपुर के बीच 215 किलोमीटर का रूट शामिल है। साल 2027 तक पूरा होने वाला यह मार्ग मंदसौर, उज्जैन, इंदौर, खंडवा और बुरहानपुर जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों को सीधे जोड़ेगा। 2. विंध्य एक्सप्रेस-वे (कुल लंबाई: 676 किमी) करीब 3,809 करोड़ रुपये के बजट से बनने वाला यह एक्सप्रेस-वे राजधानी भोपाल से शुरू होकर प्रदेश के 10 जिलों से गुजरेगा। इसमें सागर, दमोह, कटनी और रीवा जैसे बड़े शहर शामिल हैं। इसके पूरी तरह चालू हो जाने के बाद भोपाल से रीवा और ऊर्जा धानी सिंगरौली तक का सफर बेहद आसान और बेहद कम समय में तय होने लगेगा। 3. बुंदेलखंड विकासपथ (कुल लंबाई: 330 किमी) बुंदेलखंड क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर करने और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए यह 330 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर बनाया जा रहा है। लगभग 3,357 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह पथ भोपाल, रायसेन, विदिशा, सागर और छतरपुर को आपस में जोड़ेगा, जिससे पर्यटन और व्यापार दोनों को रफ्तार मिलेगी। 4. अटल प्रगतिपथ (कुल लंबाई: 299 किमी) चंबल अंचल के विकास को रफ्तार देने के लिए 299 किलोमीटर लंबे अटल प्रगतिपथ की रूपरेखा तैयार की गई है। यह कॉरिडोर दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से शुरू होकर बुंदेलखंड कॉरिडोर से जाकर मिल जाएगा। इससे श्योपुर, मुरैना और भिंड जैसे चंबल के जिलों को सीधा फायदा होगा और यहां नए उद्योगों के रास्ते खुलेंगे। 5. नर्मदा प्रगतिपथ (कुल लंबाई: 867 किमी) नर्मदा नदी के समानांतर बनने वाला यह कॉरिडोर इस पूरी योजना का सबसे लंबा (867 किलोमीटर) हिस्सा है। यह मार्ग झाबुआ, धार, इंदौर, देवास, सीहोर, रायसेन, नरसिंहपुर, जबलपुर और डिंडौरी जैसे जिलों को एक सूत्र में पिरोएगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह छत्तीसगढ़ के रायपुर और बिलासपुर को मध्य प्रदेश के रास्ते सीधे गुजरात की सीमाओं से जोड़ देगा। 6. मध्यभारत विकासपथ (कुल लंबाई: 746 किमी) यह कॉरिडोर विशेष रूप से मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को दुनिया के सामने लाने के लिए डिजाइन किया गया है। 746 किलोमीटर लंबा यह मार्ग भीमबैठका, भोजपुर, सांची, उदयगिरी, चंदेरी, ओरछा और दतिया जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को जोड़ेगा। इसके अलावा, इस कॉरिडोर के जरिए मुरैना से लेकर बैतुल तक सीधी और निर्बाध कनेक्टिविटी मिल सकेगी।  

‘महा-भूकंप’ का खतरा? 1000 वर्षों से जमा हो रहा तनाव लॉस एंजेलिस के लिए बन सकता है चुनौती

 कैलिफोर्निया वैज्ञानिकों ने एक नए शोध में चेतावनी दी है कि दक्षिणी कैलिफोर्निया की दो सबसे प्रमुख फॉल्ट लाइनों सैन एंड्रियास और सैन जैसिंटो  में पिछले 1000 सालों की तुलना में इस समय सबसे अधिक दबाव जमा हो चुका है. यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई और यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के विशेषज्ञों के नेतृत्व में किए गए इस स्टडी ने भूकंपीय खतरों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।  शोधकर्ताओं ने एक आधुनिक 'फिजिक्स-बेस्ड मॉडल' का उपयोग करके साल 1000 ईस्वी (CE) से लेकर वर्तमान समय तक इन फॉल्ट्स पर बढ़ते दबाव को ट्रैक किया है. इस स्टडी के परिणाम बताते हैं कि लॉस एंजेलिस और रिवरसाइड जैसे घने बसे हुए महानगरीय क्षेत्रों के नीचे जमीन के भीतर एक बहुत बड़ा खतरा पनप रहा है, जो कभी भी एक बड़े विनाशकारी भूकंप का रूप ले सकता है।  क्या है यह नया शोध और कैसे मापा गया दबाव? इस ऐतिहासिक शोध में वैज्ञानिकों ने पारंपरिक तरीकों से हटकर एक खास कंप्यूटर मॉडल का इस्तेमाल किया है, जो पृथ्वी के भीतर होने वाली भौतिक हलचलों और टेक्टोनिक प्लेटों के दबाव को समझता है. इस मॉडल की मदद से पिछले एक हजार साल के डेटा का विश्लेषण किया गया, जिससे यह पता चल सके कि समय के साथ इन फॉल्ट्स के अलग हिस्सों पर कितना दबाव बढ़ा या घटा है।  स्टडी में पाया गया कि सैन एंड्रियास फॉल्ट के 'मोजावे साउथ' हिस्से पर दबाव बढ़कर 2.8 मेगापास्कल (MPa) तक पहुंच गया है. वहीं दूसरी ओर, सैन जैसिंटो फॉल्ट की 'बरनार्डिनो स्ट्रैंड' पर यह दबाव और भी अधिक यानी 3.6 मेगापास्कल (MPa) दर्ज किया गया है।  वैज्ञानिकों के अनुसार, पिछले 1000 वर्षों के इतिहास में इन दोनों जगहों पर दबाव का यह अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है. यह दबाव इस बात का संकेत है कि धरती के नीचे की चट्टानें अब अपनी सहनशीलता की आखिरी सीमा पर हैं।  कजोन पास: महा-भूकंप का संभावित केंद्र इस पूरे शोध में सबसे चिंताजनक बात 'कजोन पास' को लेकर सामने आई है. कजोन पास वह भौगोलिक स्थान है जहां सैन एंड्रियास और सैन जैसिंटो फॉल्ट्स एक-दूसरे के बेहद करीब आते हैं. वैज्ञानिक इस जगह को एक मुख्य 'जंक्शन' या संपर्क बिंदु मान रहे हैं।  कजोन पास के कारण दोनों फॉल्ट्स आपस में इस तरह जुड़ सकते हैं कि यदि किसी एक फॉल्ट पर भूकंप की शुरुआत होती है, तो उसका कंपन या दरार दूसरे फॉल्ट को भी सक्रिय कर देगी.अगर ऐसा होता है, तो यह कई दरारों का एक साथ टूटना होगा, जो इतिहास के किसी भी सामान्य भूकंप से कहीं ज्यादा बड़ा और विनाशकारी हो सकता है।  दो बड़ी फॉल्ट लाइनों के एक साथ मिलने से पैदा होने वाला भूकंप रिक्टर पैमाने पर 7.5 या उससे भी अधिक तीव्रता का हो सकता है, जिससे दक्षिणी कैलिफोर्निया के एक बहुत बड़े हिस्से में भारी तबाही मच सकती है।  दशकों की शांति बढ़ा रही है बड़ा खतरा कैलिफोर्निया के इतिहास पर नजर डालें तो सैन एंड्रियास के मोजावे साउथ हिस्से में साल 1857 के बाद से कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है. वहीं सैन जैसिंटो की बरनार्डिनो शाखा में आखिरी बार साल 1968 में हलचल देखी गई थी. पिछले कई दशकों या कहें तो सदियों की यह शांति वास्तव में कोई राहत की बात नहीं है, बल्कि यह एक बड़े खतरे की दस्तक है।  जब दो टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में रगड़ खाती हैं और उनके बीच की फॉल्ट लाइन हिलती नहीं है, तो वहां लगातार ऊर्जा और दबाव जमा होता रहता है. इसे सिस्मिक गैप कहा जाता है. चूंकि पिछले 150 से अधिक सालों से मोजावे साउथ सेगमेंट पूरी तरह शांत है, इसलिए वहां इतनी भारी मात्रा में दबाव जमा हो चुका है कि जब भी यह फॉल्ट टूटेगा, तो इससे निकलने वाली ऊर्जा अकल्पनीय होगी।  यह भविष्यवाणी नहीं, बल्कि तैयारी की चेतावनी है इस शोध की मुख्य लेखिका लिलियन बर्कहार्ड ने स्पष्ट किया है कि उनके इस स्टडी का उद्देश्य किसी निश्चित तारीख या समय पर भूकंप आने की भविष्यवाणी करना बिल्कुल नहीं है. वर्तमान विज्ञान के पास ऐसी कोई तकनीक नहीं है जो यह बता सके कि भूकंप ठीक किस दिन या किस समय आएगा।  बर्कहार्ड के अनुसार, इस रिसर्च का असली मकसद प्रशासन और आम जनता को आने वाले कल के लिए बेहतर तरीके से तैयार करना है. यह डेटा लॉस एंजेलिस, रिवरसाइड और सैन बर्नार्डिनो जैसे शहरों के लिए आपदा प्रबंधन और शहरी नियोजन में बेहद मददगार साबित होगा।  इस जानकारी का उपयोग करके स्थानीय सरकारें अपने बिल्डिंग कोड को और सख्त बना सकती हैं, ताकि भविष्य में बनने वाली इमारतें इतने ऊंचे दबाव से पैदा होने वाले झटकों को झेल सकें. इसके अलावा, पुराने बुनियादी ढांचे, जैसे कि पुल, पानी की पाइपलाइनें और बिजली ग्रिड को मजबूत करने के लिए भी इस डेटा का इस्तेमाल किया जा सकता है। 

लुधियाना-हलवारा एयरपोर्ट की बढ़ी लोकप्रियता, 49% सीटें रहीं फुल; एयरलाइंस उत्साहित

लुधियाना लुधियाना के हलवारा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरने को लेकर यात्रियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने 15 मई से 10 जून तक का यात्री डेटा जारी किया है।  एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अनुसार, नए एयरपोर्ट के लिहाज से यह आंकड़ा संतोषजनक माना जा रहा है। यात्रियों के क्रेज से एयरलाइंस की उम्मीदें जगी हैं। इस एयरपोर्ट ने शुरुआती 26 दिनों यानि 15 मई से 10 जून तक उम्मीद से कई ज्यादा यात्री आए हैं। यात्रियों के क्रेज को देखते हुए कुछ दिन पहले एयर इंडिया ने लुधियाना से कनेक्टिंग फ्लाइट का शेड्यूल भी जारी किया था।     कुल उड़ानें और सीटें: हलवारा एयरपोर्ट से फिलहाल रोजाना औसतन 4 उड़ानें (आने और जाने वाली मिलाकर) संचालित हो रही हैं। हलवारा एयरपोर्ट पर उतरने वाले एयर इंडिया के जहाज में यात्रियों के लिए 138 सीटें हैं। इस लिहाज से हर दिन एयरपोर्ट पर कुल 552 सीटों (आने जाने की) की उपलब्धता रहती है। 26 दिनों के संचालन के दौरान एयरलाइंस के पास कुल 14352 सीटें उपलब्ध थीं।     सीटें बुक होने का प्रतिशत: इन 14352 उपलब्ध सीटों में से 7,008 यात्रियों ने सफर किया। इस हिसाब से पहले ही महीने में हलवारा एयरपोर्ट पर लगभग 49% सीटें बुक हुईं, जिसे एविएशन इंडस्ट्री में नए एयरपोर्ट के लिए एक बेहतरीन शुरुआत माना जाता है।     हर फ्लाइट में औसतन 68 यात्री कर रहे सफर: एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के आंकड़ो की केलकुलेशन करें तो 26 दिनों में 4 उड़ानों के हिसाब से कुल 104 फ्लाइट्स ने टेकऑफ और लैंडिंग की। इसमें 7,008 यात्रियों ने सफर किया, यानी हर फ्लाइट में औसतन 67 से 68 यात्री सफर कर रहे हैं। इस तरह एक दिन में औसतन 272 यात्री फ्लाइट्स से आ जा रहे हैं।     समर वेकेशन में मिला उछाल: समर वेकेशन पर जाने वाले लोगों ने हलवारा एयरपोर्ट का खूब इस्तेमाल किया। हवाई अड्डे के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 10 जून के बीच 1,368 यात्री हलवारा हवाई अड्डे पर पहुंचे, जो प्रतिदिन औसतन लगभग 137 यात्री हैं। यह 15 मई से 31 मई के बीच की अवधि की तुलना में 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।     1,921 यात्रियों ने हवाई अड्डे से यात्रा की: इसी तरह, 1 से 10 जून के दौरान प्रस्थान (जाने वाले यात्रियों) में 67 प्रतिशत की भारी वृद्धि देखी गई, जिसमें 1,921 यात्रियों ने हवाई अड्डे से यात्रा की, जो दैनिक औसतन लगभग 192 यात्री हैं। मई में, जब उड़ान संचालन शुरू हुआ था, प्रति दिन औसत आगमन 105 यात्री था जबकि औसत प्रस्थान 115 यात्री प्रति दिन था। एयर इंडिया इसे मान रही है बेहद पॉजिटिव साइन हलवारा से मुख्य रूप से उड़ानें संचालित कर रही एयर इंडिया और एयरपोर्ट अथॉरिटी इस रिस्पॉन्स से बेहद गदगद हैं। एयर इंडिया के सूत्रों के मुताबिक, किसी भी नए घरेलू या इंटरनेशनल रूट पर शुरुआती महीने में 49% की ऑक्यूपेंसी मिलना और हर फ्लाइट में औसतन 67+ यात्रियों का होना एक बेहद पॉजिटिव साइन है। बिजनेस ट्रैवलर्स व कॉर्पोरेट बुकिंग बढ़ने की उम्मीद लुधियाना पंजाब का सबसे बड़ा औद्योगिक शहर (इंडस्ट्रियल हब) है। यहां के कारोबारियों और एनआरआई (NRI) को पहले दिल्ली या अमृतसर जाना पड़ता था। एयर इंडिया का मानना है कि आने वाले दिनों में जैसे ही बिजनेस ट्रैवलर्स और कॉर्पोरेट बुकिंग्स बढ़ेंगी, यह ऑक्यूपेंसी 70 से 80 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने की समीक्षा हाल ही में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी खुद दिल्ली से हवाई मार्ग से हलवारा पहुंचे और उन्होंने एयरपोर्ट अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने इस शानदार शुरुआत के लिए टीम की तारीफ की।

Monsoon 2026 Update: मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक तय, कई जिलों में बारिश और आंधी का अलर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश में मौसम ने फिर करवट ली है। IMD ने अगले 5 दिनों के लिए प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक, बारिश, वज्रपात और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून लगातार आगे बढ़ रहा है और उसके प्रभाव से प्रदेश में व्यापक वर्षा गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। MP में मानसून का इंतजार अब अंतिम चरण में दिखाई दे रहा है। आईएमडी के अनुसार सोमवार को प्रदेश का वातावरण तेजी से मानसूनी स्वरूप ग्रहण कर रहा है। रात के तापमान में गिरावट, हवा में बढ़ती नमी और अधिकांश क्षेत्रों में हो रही बारिश संकेत है कि मानसून के आगमन के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं। प्रदेश के अधिकांश जिलों में न्यूनतम तापमान सामान्य से कम दर्ज किया गया। राजधानी भोपाल में न्यूनतम तापमान 20.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से लगभग 5 डिग्री कम है। राजगढ़, दमोह, शिवपुरी और ग्वालियर जैसे जिलों में भी रात का तापमान सामान्य से 3 से 4 डिग्री नीचे दर्ज हुआ। यह स्थिति बताती है कि बादलों और नमी की उपस्थिति के कारण वातावरण में शीतलता बनी हुई है। शिवपुरी में सबसे अधिक बारिश दर्ज पिछले 24 घंटों में शिवपुरी में 20.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो प्रदेश में सर्वाधिक रही। इसके अलावा मालांजखंड, ग्वालियर, जबलपुर और गुना में भी बारिश रिकॉर्ड की गई। हालांकि वर्षा अभी पूरे प्रदेश में एक समान नहीं हुई है, लेकिन यह स्पष्ट संकेत है कि वातावरण में पर्याप्त नमी और अस्थिरता मौजूद है।     अगले 5 दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और आंधी की संभावना।     कुछ जिलों में 50-60 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकती हैं तेज हवाएं।     भोपाल, विदिशा, रायसेन, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा समेत कई जिले अलर्ट पर।     ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग के कई जिलों में भी मौसम बदलेगा।     मानसून महाराष्ट्र, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में आगे बढ़ चुका है। प्रदेश के किन इलाकों में रहेगा ज्यादा असर मौसम विभाग के अनुसार 16 से 20 जून के बीच भोपाल, विदिशा, रायसेन, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, जबलपुर, डिंडोरी, उमरिया, कटनी, शहडोल, अनूपपुर, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, दमोह, सागर और आसपास के जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। दिन-रात के तापमान में 2 से 5 डिग्री गिरावट बारिश की गतिविधियों के चलते प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान में 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। कई जिलों में मौसम सुहावना बना हुआ है। खरीफ फसलों के लिए वरदान साबित होगी बारिश मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यदि अगले कुछ दिनों तक समुद्री नमी का प्रवाह इसी तरह बना रहता है तो मध्यप्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मानसून का तेजी से विस्तार हो सकता है। किसानों से लेकर आम नागरिकों तक सभी की निगाहें अब उस पहली व्यापक मानसूनी बारिश पर टिकी हैं, जो गर्मी से राहत देने के साथ खरीफ फसलों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। मौसम विभाग की सलाह     खराब मौसम के दौरान पेड़ों और कमजोर संरचनाओं से दूर रहें।     बिजली चमकने पर खुले मैदान में न जाएं।     किसान फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम करें।     तेज हवा और बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें।