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दिग्विजय चौटाला ने जारी की नई सूची, जेजेपी में शामिल हुए 18 युवा नेता

रोहतक  जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) ने अपने संगठन को और मजबूत करने के लिए युवा नेतृत्व को बढ़ावा देते हुए 18 नए युवा पदाधिकारियों की नियुक्ति की है। जेजेपी के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला ने इस नई सूची को जारी किया है। जिसमें युवा नेताओं को विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। यह कदम पार्टी के युवा विंग को और अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाने की दिशा में उठाया गया है। जेजेपी ने युवा कार्यकर्ताओं को संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया है। दिग्विजय चौटाला ने कहा हमारा लक्ष्य युवाओं को राजनीति में सशक्त भूमिका देना है ताकि वे समाज और संगठन के लिए बेहतर काम कर सकें। ये नियुक्तियां पार्टी के भविष्य को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी। जसविंदर खेहरा,   विनेश गुर्जर  और सुरेंद्र राठी को युवा वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।  युवा प्रदेश उपाध्यक्ष   राहुल सैनी, अमन शर्मा, विपिन यादव,  सुनील बूरा,  रामविलास बनियानी, राकेश सिहाग, नरेंद्र डागर, आशीष निम्बड़ी, नवीन राव, दीपक शर्मा, तेजू राव और अमित अंतिल को नियुक्त किया गया है। युवा प्रदेश प्रधान महासचिव,  राजेश कुमार, युवा प्रदेश संगठन सचिव  रणदीप सिंह मटदादू, युवा प्रदेश कार्यालय सचिव  विनीत सहरावत को नियुक्त किया गया है।  संगठन को मजबूती देने की रणनीति जेजेपी के इस कदम से संगठन को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में और अधिक प्रभावी बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। युवा नेताओं की नियुक्ति से पार्टी को नई ऊर्जा और दिशा मिलने की उम्मीद है। दिग्विजय चौटाला ने कहा ये युवा नेता पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने और समाज की बेहतरी के लिए काम करेंगे। 

AI वीडियो मामले में कांग्रेस को कोर्ट से झटका, पटना HC ने दिए हटाने के निर्देश

पटना  कांग्रेस द्वारा पीएम मोदी और उनकी मां के AI वीडियो मामले पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है.अदालत ने कांग्रेस से तत्काल रूप से इस वीडियो को हटाने का निर्देश दिया है. पटना हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश पी.बी. बाजंतरी की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निर्देश जारी किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां हीराबेन मोदी को अपमानित करने वाला ये वीडियो तत्काल प्रभाव से सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटा दिया जाए. दरअसल, 10 सितंबर को बिहार कांग्रेस के आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्ट किया गया था, जिसमें पीएम मोदी के सपने में उनकी मां का AI-आधारित चित्रण किया गया है.  वीडियो में दिवंगत हीराबेन मोदी का किरदार बेटे को राजनीतिक लाभ के लिए अपने नाम का दुरुपयोग करने पर फटकार लगाता नजर आता है. एक दृश्य में पीएम मोदी जैसा दिखने वाला शख्स बिस्तर पर लेटते हुए कहता है, 'आज की वोट चोरी हो गई, अब अच्छी नींद लो.' फिर सपने में उनकी मां प्रकट होकर उन्हें नसीहत देती हैं. वीडियो को AI GENERATED मार्क किया गया था, लेकिन बीजेपी ने इसे घिनौना और मां का अपमान करार दिया था. साथ ही इस वीडियो को खिलाफ पटना हाईकोर्ट का रुख किया था. बीजेपी ने दर्ज कराई FIR बीजेपी ने अपनी शिकायत में दावा किया गया कि ये वीडियो न केवल प्रधानमंत्री की छवि को धूमिल करने वाला है, बल्कि महिलाओं की गरिमा का उल्लंघन भी है. दिल्ली पुलिस ने पहले ही 13 सितंबर को बीजेपी कार्यकर्ता संकेत गुप्ता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत कांग्रेस नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई. FIR में वीडियो को पीएम मोदी और उनकी मां की छवि को बदनाम करने वाला बताया गया है. कांग्रेस ने किया था बचाव कांग्रेस ने अपनी इस वीडियो का बचाव किया था. पार्टी के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा, 'यह वीडियो किसी का अपमान नहीं करता. मां केवल अपने बच्चे को राजधर्म सिखा रही है, अगर पीएम को ये अपमानजनक लगता है तो ये उनकी समस्या है.' खेड़ा ने जोड़ा कि वीडियो में कोई असम्मान नहीं है और बीजेपी इसे सहानुभूति बटोरने के लिए इस्तेमाल कर रही है. बिहार कांग्रेस ने आंतरिक जांच शुरू की है ताकि पता लगाया जा सके कि वीडियो साझा करने वाले कौन जिम्मेदार थे.

आदिवासी कांग्रेस कार्यक्रम में बोले दिग्विजय सिंह – ‘धर्मांतरण अगर आस्था से हो तो अपराध नहीं’

बैतूल  मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि अगर धर्मांतरण आस्था और स्व-प्रेरणा से किया जाता है, तो यह कोई अपराध नहीं है. लेकिन जबरन या प्रलोभन से धर्मांतरण स्वीकार्य नहीं है. बीजेपी केवल अपने राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उठाती है. वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने बीजेपी पर आदिवासियों को 'वनवासी' कहकर उनकी पहचान मिटाने की कोशिश करने का आरोप लगाया. आदिवासी कांग्रेस की ओर से बैतूल जिले के भैंसदेही में आयोजित 'आदिवासी अधिकार और सशक्तिकरण शिविर' में शामिल होने आए दिग्विजय ने कहा कि आदिवासी भारत के सबसे पुराने निवासी हैं. दिग्विजय सिंह ने कहा- “हम सब तो सेंट्रल एशिया से आए हैं, असली हक और पहला अधिकार तो आदिवासियों का ही है। वे प्रकृति के पूजक हैं और संविधान उन्हें अपनी आस्था के अनुरूप धर्म पालन का पूरा अधिकार देता है। फिर भाजपा क्यों आलोचना करती है?” धर्म परिवर्तन अपराध नहीं पूर्व सीएम ने साफ कहा कि धर्म परिवर्तन अगर आस्था और स्वप्रेरणा से होता है तो अपराध नहीं है, लेकिन जबरदस्ती या प्रलोभन से धर्मांतरण स्वीकार्य नहीं। भाजपा इस मुद्दे को सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए उठाती है। उन्होंने कहा, "हम सभी मध्य एशिया से आए हैं. आदिवासियों के पास पहला और असली अधिकार है. वे प्रकृति के उपासक हैं और संविधान उन्हें अपनी आस्था का पालन करने का पूरा अधिकार देता है…." राज्यसभा सदस्य ने BJP पर 'संकीर्ण विचारधारा' रखने और 'धर्मांतरण की राजनीति' करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने आरोप लगाया कि यह पार्टी न तो संविधान को समझती है और न ही भारत की वास्तविक परंपरा को. भाजपा आदिवासियों को वनवासी कहकर उनकी पहचान मिटाना चाहती है." एक सवाल के जवाब में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि BJP गाय के नाम पर केवल राजनीति करती है, जबकि कांग्रेस सरकार के दौरान गौ आयोग का गठन किया गया था. उन्होंने कहा, "भाजपा इस मुद्दे पर केवल राजनीतिक रोटियां सेंकती है." आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने बताया कि राज्य के हर जिले में आदिवासियों के अधिकारों और सशक्तिकरण के लिए यह शिविर आयोजित किए जा रहे हैं. आदिवासी कांग्रेस सशक्तिकरण शिविर में शामिल हुए दिग्विजय सिंह भैंसदेही में मध्यप्रदेश आदिवासी कांग्रेस द्वारा आयोजित लीडरशिप डेव्हलपमेंट शिविर के समापन समारोह में शामिल हुए। आदिवासी कांग्रेस ने यह तीन दिन का आदिवासी कांग्रेस सशक्तिकरण शिविर का आयोजन किया था। विक्रांत भूरिया राष्ट्रीय अध्यक्ष आदिवासी कांग्रेस ने बताया कि राहुल गांधी ने आदिवासी कांग्रेस को पूरे देश में युवा आदिवासी नेतृत्व तैयार करने की जिम्मेदारी दी है। जिसके तहत हम प्रदेश में आदिवासी अधिकार और सशक्तिकरण शिविर करवाते हैं। उसके बाद हर जिले में जाकर यह शिविर करवा रहे हैं। इसका उद्देश्य यही है कि युवा पीढ़ी को पता रहे कि कांग्रेस ने देश के लिए क्या किया आदिवासी के क्या अधिकार हैं। किस तरह से देश में उनका शोषण हो रहा है। इस दौरान आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम और जिला कांग्रेस अध्यक्ष निलय डागा भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के बाद बैतूल पहुंचे दिग्विजय सिंह ने कोठी बाजार स्थित डागा हाउस में कांग्रेस पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं से भी चर्चा की। उन्होंने बैठक में कार्यकर्ताओं को पार्टी की मजबूती के गुर सिखाए।

मोदी बर्थडे पर शत्रुघ्न सिन्हा की खास बधाई, 1 लाइन ने जीत लिया दिल — वायरल हुआ पोस्ट

नई दिल्ली  भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपना 75वां जन्मदिन मना रहे हैं. उन्हें देश और दुनियाभर से शुभकामनाएं मिल रही हैं. राजनेता से लेकर अभिनेता तक कुछ फोन से तो कुछ सोसल मीडिया पर उनके लिए अपने जज्बातों को बयां कर रहे हैं. बॉलीवुड के ‘शॉटगन’ यानी शत्रुघ्न सिन्हा ने भी पीएम मोदी को अपनी शुभकामनाएं दीं. उन्होंने सोशल मीडिया पर पीएम मोदी के साथ अपनी एक तस्वीर शेयर की है, जिसकी सिर्फ 1 लाइन ही लोगों की दिल जीत रही है. भारत में सत्ता पक्ष से लेकर विपक्षी खेमे से भी उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं मिलीं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने भी इसे मौके पर उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना की है। विपक्षी नेताओं में बॉलीवुड अभिनेता और तृणमूल कांग्रेस सांसद शत्रुघ्न सिन्हा का भी नाम शामिल है। हालांकि, उन्हें इसके लिए ट्रोल का भी सामना करना पड़ा। हिंदी सिनेमा के दिग्गज एक्टर शत्रुघ्न सिन्हा राजनीति में भी सक्रिय हैं. तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने भी पीएम मोदी को अपनी शुभकामनाएं दीं. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पुरानी तस्वीर शेयर की. शत्रुघ्न सिन्हा ने क्या लिखा शत्रुघ्न सिन्हा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए लिखा, ‘हमारे मित्र और समाज के मित्र माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं. ईश्वर आपको सुख, शांति, आनंद, उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु प्रदान करें.’ उन्होंने अपने संदेश में अंग्रेजी में लिखा- Once a friend, always a friend indeed, जिसका अर्थ है ‘एक बार जो दोस्त बन जाए, वह सच्चे अर्थों में हमेशा दोस्त रहता है.’   शत्रुघ्न सिन्हा ने पीएम मोदी के साथ अपनी पुरानी तस्वीरें पोस्ट करते हुए एक्स पर लिखा, “मेरे सच्चे मित्र और माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं। भगवान आपको अपार खुशियां, शांति, आनंद, उत्तम स्वास्थ्य और लंबी आयु प्रदान करें।” एक दूसरे पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘एक बार दोस्त बने तो हमेशा दोस्त रहते हैं।’ उनके इस पोस्ट पर तरह-तरह के कमेंट किए जा रहे हैं। कुछ उनके फॉलोअर्स ने पूछा है कि क्या आप घर वापसी कर रहे हैं? एक ने लिखा, ''याद आ रही है वही भाजपा वाली पुरानी धमक, ममता बानो से दिल भर गया?? भाजपा से नाता तोड़ कर आजतक किस नेता का भला हुआ है??'' वहीं दूसरे ने कहा, 'अब समय आ गया है कि मोदी जी शत्रुघ्न सिन्हा को भाजपा में वापस ले लें। आखिरकार, मतभेद तो रोजमर्रा की जिंदगी में आम बात है।' आपको बता दें कि 'बिहारी बाबू' और 'शॉटगन' के नाम से मशहूर शत्रुघ्न सिन्हा पहले भाजपा में थे। वह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने बगावत कर दी और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए। पिछले चुनाव में भी उन्होंने आसनसोल सीट से शानदार जीत दर्ज की थी। बॉलीवुड से भी आईं पीएम मोदी के लिए बधाई सोशल मीडिया पर अब ‘शॉटगन’ का ये पोस्ट काफी वायरल हो रहा है. शत्रुघ्न सिन्हा के अलावा बॉलीवुड के कई स्टार्स ने उन्हें बधाई दी है. दिग्गज कलाकार मनोज जोशी, परेश रावल, जैकी श्रॉफ, मशहूर गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर सहित कई कलाकारों ने पीएम मोदी को अपने-अपने अंदाज में सोशल मीडिया पर बधाई दी है. सभी ने उनके अच्छे स्वास्थ्य और खुशियों की कामना की है. मनोज मुंतशिर ने क्या लिखा मशहूर गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर शुक्ला ने अपनी पोस्ट में मोदी सरकार के बड़े फैसलों को शामिल करते हुए लिखा, ‘370, तीन तलाक, राम मंदिर… अगर जीवन की ये तीन गाथाएं भी चुन लें, तो हम नरेंद्र मोदी के सदैव ऋणी रहेंगे. भारत के सबसे यशस्वी प्रधानमंत्री को जन्मदिवस की अशेष शुभकामनाएं.’ सोनू सूद ने ऐसे दी बधाई सोनू सूद ने भी प्रधानमंत्री की दूरदर्शिता और नेतृत्व की सराहना करते हुए लिखा, ‘इतिहास उन्हें याद रखता है, जो भविष्य को नया आकार देते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को शुभकामनाएं कि उन्हें निरंतर शक्ति, स्पष्टता और साहस प्राप्त हो, वे भारत का नेतृत्व एक परिवर्तनकारी युग में कर रहे हैं. आपकी यात्रा आपके दृष्टिकोण की तरह ही निडर बनी रहे.’

मई के आदेश का पालन नहीं हुआ, सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग को सुनाई खरी-खोटी

मुंबई  सुप्रीम कोर्ट ने मई में दिए अपने आदेश का पालन नहीं करने पर महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग को कड़ी फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि 2022 से रुके हुए राज्य के स्थानीय निकाय चुनावों को बिना किसी और समय विस्तार के 31 जनवरी, 2026 तक संपन्न करा लिए जाएं। कोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा लंबित स्थानीय निकाय चुनावों को समय पर संपन्न कराने के उसके आदेश का पालन करने में विफल रहने से काफी नाखुश थी। देश के भावी मुख्य न्यायाधीश (Next CJI) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, “जिला परिषदों, पंचायत समितियों और सभी नगर पालिकाओं सहित सभी स्थानीय निकायों के चुनाव 31 जनवरी, 2026 तक करा लिए जाएं। राज्य और राज्य निर्वाचन आयोग को और समय नहीं दिया जाएगा। अगर किसी अन्य रसद सहायता की जरूरत हो, तो 31 अक्टूबर, 2025 से पहले तुरंत अर्जी दायर की जा सकती है। उसके बाद किसी भी प्रार्थना पर विचार नहीं किया जाएगा।” 'आपकी निष्क्रियता दर्शाती है कि आप अक्षम हैं' इससे पहले पीठ को सूचित किया गया था कि नगर पालिकाओं का परिसीमन कार्य प्रगति पर है और राज्य निर्वाचन आयोग ने बोर्ड परीक्षाओं के कारण स्कूल परिसरों की अनुपलब्धता के अलावा अपर्याप्त ईवीएम सहित अन्य आधारों पर समय-सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया है। इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “क्या आप ये चुनाव पहली बार करा रहे हैं? यह बात आपको उस समय भी पता थी जब हमने पहला आदेश पारित किया था। आपकी निष्क्रियता दर्शाती है कि आप अक्षम हैं। सबसे पहले, परिसीमन कोई वैध कारण नहीं है कि आपको चुनाव रोकना चाहिए।” कोर्ट ने 6 मई को 4 महीने का समय दिया था जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस कोर्ट ने 6 मई को आपको चार महीने का समय दिया था और अब आप समय सीमा खत्म होने के 10 दिन बाद और समय मांगने के लिए नया बहाने बना रहे हैं। पीठ ने कहा, “हम इस बात पर गौर करने के लिए बाध्य हैं कि राज्य निर्वाचन आयोग निर्धारित समय-सीमा में न्यायालय के निर्देशों का पालन करने के लिए त्वरित कार्रवाई करने में विफल रहा। हालांकि, एकमुश्त रियायत के रूप में हम निम्नलिखित निर्देश जारी करना उचित समझते हैं।” न्यायालय ने कहा, “लंबित परिसीमन हर हाल में 31 अक्टूबर, 2025 तक पूरे किया जाएं। इसके बाद कोई और समय-सीमा नहीं दी जाएगी। परिसीमन प्रक्रिया चुनाव स्थगित करने का आधार नहीं होगी।” आयोग की अर्जी खारिज कोर्ट ने आगामी बोर्ड परीक्षाओं के कारण स्कूल परिसर उपलब्ध न होने के आधार पर चुनाव स्थगित करने की अर्जी खारिज कर दी और कहा कि परीक्षाएं अगले साल मार्च में होंगी। पीठ ने निर्देश दिया, “महाराष्ट्र के मुख्य सचिव, आवश्यकतानुसार चुनाव अधिकारियों और अन्य सहायक कर्मचारियों के कर्तव्यों का पालन करने के लिए आवश्यक कर्मचारियों को तुरंत तैनात करें।” पीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव के लिए आवश्यक कर्मचारियों का विवरण दो सप्ताह के भीतर मुख्य सचिव को प्रस्तुत करने को भी कहा। ईवीएम पर हलफनामा दें पीठ ने कहा कि अगर आवश्यक हो तो मुख्य सचिव अन्य विभागों के सचिवों के परामर्श से निर्वाचन आयोग द्वारा अनुरोध किए जाने के चार सप्ताह के भीतर आवश्यक कर्मचारी उपलब्ध कराएंगे। पीठ ने आदेश दिया, “आवश्यक ईवीएम की अनुपलब्धता के संबंध में, हम राज्य निर्वाचन आयोग को आवश्यक व्यवस्था करने और 30 नवंबर, 2025 तक ईवीएम की उपलब्धता के संबंध में अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हैं।” पीठ, महाराष्ट्र में लंबित निकाय चुनावों से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इससे पहले शीर्ष अदालत ने मई में एक अंतरिम आदेश जारी कर चार महीने यानी सितंबर तक चुनाव संपन्न कराने का निर्देश दिया था लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इस पर जस्टिस कांत भड़क उठे। उन्होंने राज्य के अधिकारियों को पहले दी गई समय-सीमा की याद दिलाते हुए कहा, “क्या चुनाव हो चुके हैं? आदेश मई में पारित किया गया था, चुनाव चार महीने में होने थे।” परिसीमन प्रक्रिया जारी है महाराष्ट्र सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के वकील ने कहा कि परिसीमन प्रक्रिया जारी है और उन्होंने समय-सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया। पीठ ने कहा, “आपकी निष्क्रियता अक्षमता को दर्शाती है। ये मुद्दे आपको तब भी पता थे जब हमने पहला आदेश पारित किया था।” राज्य निर्वाचन आयोग के वकील ने स्वीकार किया कि वर्तमान में 65,000 ईवीएम उपलब्ध हैं, जबकि 50,000 ईवीएम की अभी भी आवश्यकता है और उनका ऑर्डर दे दिया गया है। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि राज्य निर्वाचन आयोग निर्धारित दो सप्ताह के भीतर चुनावों की अधिसूचना जारी करने में विफल रहा और त्योहारों से लेकर कर्मचारियों की कमी तक के बहाने बताते हुए पूरी प्रक्रिया को दोबारा कर रहा है। बता दें कि 6 मई को, जस्टिस कांत की अगुवाई वाली पीठ ने जुलाई 2010 से पहले लागू ओबीसी आरक्षण के आधार पर चुनाव कराने की अनुमति दे दी थी, क्योंकि राज्य द्वारा बंठिया आयोग की सिफारिशों को पूरी तरह से लागू नहीं किया गया था। राज्य के अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के अगस्त 2022 की यथास्थिति आदेश के कारण कई स्थानीय निकायों में वर्षों से चुनाव नहीं हुए थे, जिसमें बंठिया आयोग की सिफारिश के आधार पर स्थानीय निकायों में 27% ओबीसी आरक्षण का प्रावधान किया गया था।

अपशब्दों के बाद बदली भाषा: मोहम्मद यूसुफ ने सूर्यकुमार यादव से मांगी माफी

नई दिल्ली भारतीय खिलाड़ियों ने जीत के बाद पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया, न ही सूर्यकुमार यादव ने टॉस के समय सलमान अली आगा से हाथ मिलाया. इसके बाद पाकिस्तान बौखलाया हुआ है, शोएब अख्तर से लेकर शाहिद अफरीदी तक इस पर बोल रहे हैं. लेकिन मोहम्मद यूसुफ़ ने तो सारी हदें पार कर दी थी, उन्होंने एक टीवी कार्यक्रम में सूर्यकुमार यादव को अपशब्द कहे थे. लेकिन 24 घंटे के अंदर उन्होंने इसको लेकर सफाई दी. यूसुफ़ ने ट्वीट करते हुए लिखा, "मेरा इरादा किसी भी ऐसे प्लेयर का अपमान करना नहीं था, जो अपने देश के लिए पूरे जोश और लगन से खेलता है. लेकिन जब इरफ़ान पठान ने कहा कि शाहिद अफरीदी कुत्ते की तरह भौंक रहे हैं, तो इंडियन मीडिया और लोग उनकी तारीफ़ क्यों कर रहे थे? क्या गरिमा और सम्मान की बात करने वाले सभी लोगों को उनकी इस बात को खारिज नहीं करना चाहिए था?" क्यों बौखलाए हुए हैं पाकिस्तानी दरअसल पहलगाम हमले के बाद पहली बार था, जब भारतीय क्रिकेट टीम पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच खेल रही थी. सोशल मीडिया पर विरोध के बीच टीम इंडिया ने निर्णय लिया कि पाकिस्तान के खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाएंगे और ऐसा ही किया. इसके बाद पीसीबी ने मैच रेफरी को हटाने की मांग की, जिसे आईसीसी ने खारिज कर दिया. आज पाकिस्तान का मुकाबला यूएई के साथ है. ग्रुप ए से भारतीय क्रिकेट टीम सुपर-4 के लिए क्वालीफाई कर चुकी है, जबकि आज पाकिस्तान बनाम यूएई मैच की विजेता सुपर-4 में जाने वाली दूसरी टीम होगी और हारने वाली टीम बाहर हो जाएगी.  

अवैध ‘नॉनवेज’ होटल पर बुलडोजर, विरोध में उतरा मालिक बोला – लाठीचार्ज कर लो, नहीं हटूंगा

संभल  उत्तर प्रदेश के संभल जिले में प्रशासन ने एक अवैध रूप से संचालित 'नॉनवेज' होटल को ध्वस्त कर दिया. मोहम्मद सईदुद्दीन का यह होटल बिना नक्शा पास कराए चलाया जा रहा था. प्रशासन ने पहले नोटिस दिया था, लेकिन जब अवैध निर्माण नहीं हटाया गया, तो बुलडोजर से इसे गिरा दिया गया. इस दौरान होटल संचालक और स्थानीय लोग विरोध करने के लिए इकट्ठा हो गए, जिससे मौके पर तनाव फैल गया.  क्यों चला बुलडोजर? बताया जा रहा है कि हयातनगर के सरायतरीन में मोहम्मद सईदुद्दीन द्वारा संचालित इस होटल का नक्शा पास नहीं था. संबंधित विभाग ने 12 जुलाई 2025 को होटल संचालक को अवैध निर्माण हटाने का नोटिस जारी किया था. इसके बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो नायब तहसीलदार और विनिमय क्षेत्र कार्यालय के अधिकारी बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंचे. उन्होंने आरबी एक्ट की धारा 10 के तहत कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया.  संचालक और प्रशासन में हुई तीखी बहस जब प्रशासन ने बुलडोजर से कार्रवाई शुरू की, तो होटल संचालक और वहां मौजूद भीड़ ने विरोध करना शुरू कर दिया. संचालक ने आरोप लगाया कि प्रशासन सत्ता के दबाव में काम कर रहा है और उनकी दुकान का मामला अभी भी कोर्ट में विचाराधीन है. उसने यह भी कहा कि वह पुलिस से पिटने, मरने और जेल जाने के लिए तैयार है, लेकिन अपनी जगह नहीं छोड़ेगा. इसके बाद हयातनगर थाने की पुलिस और पीएसी को बुलाया गया ताकि हालात को संभाला जा सके.  प्रशासन ने दी कार्रवाई की जानकारी संभल के एसडीएम विकास चंद्र ने बताया कि यह कार्रवाई पूरी तरह से कानूनी है. उन्होंने कहा कि आरबी एक्ट की धारा 10 के तहत अवैध निर्माण को ध्वस्त किया गया है. एसडीएम ने यह भी बताया कि नोटिस पहले ही जारी कर दिया गया था और सुनवाई के बाद ही यह कदम उठाया गया. वहीं, होटल संचालक का आरोप है कि 50 साल से उस जमीन पर उसका कब्जा है और प्रशासन उसे पलायन करने के लिए मजबूर कर रहा है.  होटल संचालक का बयान  होटल संचालक ने कहा कि 50 साल से मेरा इसी जमीन पर कब्जा है. प्रशासन के द्वारा गलत तरीके से सत्ता के दबाव में जाकर कार्रवाई की गई है, जबकि मेरी दुकान का मुकदमा भी कोर्ट में विचार अधीन है. मौके पर मेरा जायज कब्जा है. नाजायज तरीके से बुलडोजर लेकर यहां पर अधिकारी आए हैं. लेकिन अब मैं पुलिस से पिटने के लिए, मरने के लिए और जेल जाने के लिए तैयार हूं, मगर यह जगह नहीं छोडूंगा.

चलती बस में आग से मचा हड़कंप, जयपुर में हादसे के वक्त यात्रियों ने दिखाई सूझबूझ

जयपुर  जयपुर में आज बड़ा हादसा हो गया. यहां सड़क पर दौड़ती रोडवेज बस में अचानक आग लग गई. उस समय बस में करीब 30 लोग सवार थे. आग लगते ही बस में हड़कंप मच गया. यात्रियों ने बस से कूदकर अपनी जान बचाई. हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और फायर बिग्रेड को बुलाया. लेकिन फायर ब्रिगेड की टीम के पहुंचने से पहले ही आधी बस जलकर राख हो चुकी थी. गनीमत रही कि आग के कारण कोई जनहानि नहीं हुई. बस में सवार यात्रियों का सामान जलकर खाक हो गया. जानकारी के अनुसार रोडवेज बस में आग लगने की यह घटना चैनपुरा इलाके की रेलवे क्रॉसिंग पर हुई. रोडवेज की यह बस जयपुर से निवाई जा रही थी. बस यात्रियों से पूरी भरी हुई थी. उसमें करीब 30 यात्री सवार थे. रेलवे फाटक के पास अचानक बस से धुंआ उठा और फिर आग की लपटें निकलने लग गई. यह देखकर चालक ने तत्काल बस को रोक दिया. लेकिन तब तक आग बस के आगे के हिस्से को अपनी चपेट में ले चुकी थी. यात्रियों ने आनन-फानन में खिड़कियों से कूदना शुरू कर दिया आग लगते ही बस में सवार यात्रियों में चीख पुकार मच गई. यात्रियों ने आनन-फानन में खिड़कियों से कूदना शुरू कर दिया. बस में आग लगी देखकर वहां स्थानीय लोगों में भी हड़कंप मच गया. उन्होंने अपने स्तर पर पानी और मिट्टी डालकर आग बुझाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो पाए. बाद में तत्काल पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई. इस पर पुलिस मौके पर पहुंची. आग लगने के कारणों का अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है हालांकि फायर ब्रिगेड भी तत्काल ही वहां पहुंच गई थी. लेकिन आग की लपटें इतनी तेज थी कि फायर ब्रिग्रेड के आने से पहले ही आधी बस जलकर खाक हो चुकी थी. बाद में फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पाया. आग के कारण अधिकांश यात्रियों का सामान जल गया. आग किस वजह से लगी अभी तक इसका खुलासा नहीं हो पाया है. पुलिस और रोडवेज प्रशासन इसकी जांच में जुटा हुआ है. फिर प्रभावित यात्रियों को दूसरी बसों से रवाना किया गया.

5 साल में करोड़ों की दौलत: अफसर के पास मिला 1 करोड़ कैश, 1 करोड़ के गहने

गुवाहटी  यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं. असम सिविल सेवा (ACS) की एक युवा अधिकारी, जिन्हें कभी प्रशासनिक जगत का उभरता सितारा माना जा रहा था, अब जेल की सलाखों के पीछे हैं. मुख्यमंत्री की विशेष सतर्कता शाखा (Special Vigilance Cell) की छापेमारी में करोड़ों की काली कमाई उजागर हुई है.  करोड़ों की बरामदगी, सभी हुए हैरान कामरूप जिले के गोरैमरी में तैनात सर्किल ऑफिसर नूपुर बोरा को गिरफ्तार किया गया. अधिकारियों की टीम ने उनके ठिकानों पर दबिश दी तो नतीजे देखकर सभी दंग रह गए. गुवाहाटी स्थित घर से 92 लाख रुपये नकद और लगभग 1 करोड़ रुपये के गहने बरामद हुए. बरपेटा में किराए पर लिए मकान से भी 10 लाख रुपये नकद मिले. यानी पांच साल की सेवा में इस अधिकारी ने जो अकूत संपत्ति इकट्ठा की, उसने सरकार से लेकर आम जनता तक सबको चौंका दिया. एक उभरते चेहरे से गिरफ्तारी तक का सफर गोलाघाट जिले की रहने वाली नुपुर बोराह ने 2019 में सिविल सेवा में प्रवेश किया था. उस समय उन्हें मेहनती और उम्मीद जगाने वाली अफसर के तौर पर देखा जाता था. परिवार और समाज के लिए वह गर्व का कारण थीं. लेकिन प्रशासनिक ज़िंदगी का यह सफर अचानक ही भ्रष्टाचार और अवैध सौदों की कहानी बन गया. पिछले छह महीनों से उन पर गुप्त निगरानी रखी जा रही थी. आरोप था कि वह ज़मीन से जुड़े सौदों में गड़बड़ी कर रही हैं और कथित तौर पर मोटी रकम ले रही हैं. आखिरकार आरोपों पर कार्रवाई हुई और उनकी गिरफ़्तारी के साथ ही पूरा मामला सुर्खियों में आ गया. करीबी सहयोगी पर भी शिकंजा सतर्कता विभाग ने सिर्फ बोराह पर ही कार्रवाई नहीं की. टीम ने उनके करीबी माने जाने वाले बरपेटा राजस्व सर्किल ऑफिस के कर्मचारी लाट मंडल सुरजीत डेका के घर पर भी छापा मारा. जांचकर्ताओं का शक है कि बोराह और डेका ने मिलकर बरपेटा में कई ज़मीनें खरीदी हैं. अब इन संपत्तियों की जांच की जा रही है. मुख्यमंत्री का सख्त संदेश असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए साफ कहा कि नुपुर बोराह ने बरपेटा में सर्किल ऑफिसर रहते हुए हिंदुओं की ज़मीन संदिग्ध व्यक्तियों को ट्रांसफर की. इसके बदले उन्होंने मोटी रकम ली. यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. राजस्व विभाग में, खासकर अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में फैले भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी. आलीशान जीवनशैली पर सवाल इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रहा नुपुर बोराह की आलीशान जीवनशैली. उनकी आधिकारिक हैसियत एक सर्किल ऑफिसर की थी, लेकिन छापेमारी में जो संपत्ति और सोना-जवाहरात मिले, उन्होंने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया. सवाल उठ रहे हैं कि सिर्फ पांच साल की नौकरी में इतनी संपत्ति कहां से आई? लोगों ने किए खूब कमेंट सोशल मीडिया पर इस खबर ने तूफान मचा दिया है. कुछ लोगों ने लिखा कि आम नागरिक मामूली काम के लिए राजस्व दफ्तरों के चक्कर काटते हैं और वहीं अफसर करोड़ों की कमाई कर रहे हैं. एक अन्य यूज़र ने कहा कि यही वजह है कि ज़मीन से जुड़े मामले आम जनता के लिए कभी आसान नहीं होते. भ्रष्टाचार की जड़ यही है. अब आगे क्या? फिलहाल नुपुर बोराह जेल में हैं और सतर्कता विभाग उनकी संपत्ति और लेन-देन की गहन जांच कर रहा है. उनके बैंक अकाउंट, संपत्तियों और ज़मीन सौदों की जानकारी खंगाली जा रही है. साथ ही उनके सहयोगियों की भी पूछताछ चल रही है.  

8.39 लाख निर्माण श्रमिकों को मिला लाभ: छत्तीसगढ़ भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार मंडल की बड़ी उपलब्धि

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिजनों की बेहतरी के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही है। इन योजनाओं के माध्यम से श्रमिकों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति के उत्थान के लिए लगातार उन्हें आर्थिक मदद दी जा रही है। इसी सिलसिले में छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल अंतर्गत पंजीयन एवं लाभांवित श्रम विभाग द्वारा 01 जनवरी, 2024 से 15 सितम्बर, 2025 तक लगभग 7.3 लाख निर्माण श्रमिकों का पंजीयन किया गया है तथा वर्ष 2024 से 15 सितम्बर 2025 तक संचालित योजनाओं के माध्यम से लगभग 8.39 लाख श्रमिकों को लाभांवित हुए हैं, जिस पर लगभग 535.62 करोड़ रूपए व्यय किया गया है। उल्लेखनीय है कि असंगठित श्रमिकों के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन के मार्गदर्शन में एक नई पहल शुरू की गई है। असंगठित श्रमिकों एवं उनके परिवारों के समग्र विकास के लिए अम्ब्रेला योजना ‘अटल श्रम सशक्तिकरण योजना‘ प्रारंभ की गई है। प्रवासी श्रमिक साथियों को सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदाय करने हेतु प्रथम चरण में 5 राज्य क्रमशः उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, उड़ीसा, गुजरात एवं महाराष्ट्र में जहां अधिक संख्या में श्रमिक प्रवास करते हैं, वहां ‘मोर चिन्हारी भवन’ बनाया जाएगा। इसके अलावा श्रमिकों को कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने 106 निजी चिकित्सालयों से अनुबंध किया गया है। इससे उन्हें हृदय रोग, किडनी रोग, मस्तिष्क रोग, जटिल सर्जरी आदि के लिए सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल में उपचार सुविधा मिलेगी। इसी तरह राज्य शासन द्वारा श्रम विभाग की ‘अम्ब्रेला योजना अटल श्रम सशक्तिकरण योजना‘ के नाम से शुरू की गई है। इससे श्रमिकों तथा उनके परिवारों को एक ही स्थान पर सरकार के सभी योजनाओं का लाभ मिलेगा, इसके लिए ‘श्रमेव जयते‘ पोर्टल बनाया गया है। पंजीकृत श्रमिकों के द्वारा आर्थिक गतिविधि के लिए बैंक से लिए जाने वाले ऋण पर लगने वाले ब्याज में अनुदान देने के लिए जल्द ही नई योजना शुरू की जा रही है ताकि आत्म निर्भर बनते हुए स्वयं मालिक बनने की दिशा में बढ़ सकें। इसके अलावा असंगठित श्रमिकों के कल्याण हेतु संचालित योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन एवं सतत् निगरानी हेतु राज्य के प्रत्येक संभाग में संभाग स्तरीय श्रम कल्याण कार्यालय के स्थापना की जा रही है।  श्रम विभाग द्वारा मुख्यमंत्री श्रम संसाधन केन्द्र श्रमिकों की समस्याओं का शीघ्र निराकरण एवं सहायता हेतु राज्य के प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय तथा समस्त विकासखंडों में मुख्यमंत्री श्रम संसाधन केन्द्र संचालित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्रम संसाधन केन्द्र योजना अंतर्गत 01 जनवरी, 2024 से 15 सितम्बर, 2025 तक 94,300 निर्माण श्रमिकों को पंजीयन/नवीनीकरण/योजनाओं के आवेदन में सहयोग प्रदान किया गया है। छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल अंतर्गत निर्माण श्रमिकों के पंजीयन हेतु स्व-घोषणा प्रमाण पत्र छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल अंतर्गत निर्माण श्रमिकों के पंजीयन की प्रक्रिया सरल करते हुये, ठेकेदार अथवा नियोजक के अधीन कार्य करने संबंधी नियोजक से नियोजन प्रमाण पत्र के स्थान पर श्रमिकों से ही निर्माण कार्य में नियोजित होने संबंधी स्वघोषणा पत्र का प्रावधान किया गया है। उक्त सरलीकरण करने से श्रमिकों को पंजीयन कराने में सुविधा हुई है। मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल अंतर्गत निर्माण श्रमिकों के स्वयं के आवास क्रय एवं आवास निर्माण हेतु 01 लाख रूपये एकमुश्त अनुदान सहायता राशि प्रदाय किया जा रहा है। 01 जनवरी, 2024 से 15 सितम्बर, 2025 तक 1042 निर्माण श्रमिकों को नवीन आवास क्रय/आवास निर्माण हेतु अनुदान सहायता राशि प्रदाय किया जा चुका है। मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा संचालित उक्त योजनांतर्गत कक्षा 10वीं एवं कक्षा 12वीं में 75 प्रतिशत या उससे अधिक प्रतिशत प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों एवं छत्तीसगढ़ बोर्ड के मेरिट के प्रथम 10 में स्थान प्राप्त करने पर प्रत्येक श्रमिक बच्चों को राशि रूपये 01 लाख प्रोत्साहन राशि तथा रूपये 01 लाख दोपहिया वाहन क्रय करने हेतु प्रदाय किया गया है। 01 जनवरी, 2024 से 15 सितम्बर, 2025 तक निर्माण श्रमिक के 7478 पुत्र/पुत्रियों को 10 करोड़ 14 लाख 49 हजार 614 रूपए प्रदान किया गया है। प्रसूति सहायता योजना 01 जनवरी, 2024 से 15 सितम्बर, 2025 तक छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा संचालित ‘मिनीमाता महतारी जतन योजना’ अंतर्गत 65 हजार 010 महिला निर्माण श्रमिकों को लाभांवित किया गया है।शहीद वीरनारायण सिंह श्रम अन्न योजना उक्त योजना अंतर्गत पंजीकृत निर्माण, असंगठित एवं संगठित श्रमिकों को 05 रूपए में गरम एवं पौष्टिक भोजन प्रदाय किया जा रहा है। 31 दिसम्बर 2023 की स्थिति में 29 भोजन केन्द्र संचालित थे, जो कि वर्तमान में बढ़कर 17 जिलों में 37 भोजन केन्द्र हो गये हैं। 01 जनवरी, 2024 से 15 सितम्बर, 2025 विभाग द्वारा 11,35,362 यूनिट भोजन (मिल) पंजीकृत संगठित एवं असंगठित श्रमिकों को प्रदाय किया जा चुका है, जिसमें छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल द्वारा राशि रूपये रूपये 52,865,395 व्यय हुआ है। मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना सामान्य मृत्यु होने पर उसके उत्तराधिकारी को एक लाख रूपए की राशि, कार्य स्थल पर दुर्घटना से मृत्यु होने पर उसके उत्तराधिकारी को 5 लाख रूपए की राशि तथा कार्य स्थल पर दुर्घटना से स्थायी दिव्यांगता होने पर श्रमिक को ढ़ाई लाख रूपए की राशि दिए जाने का प्रावधान है। जिसके तहत् 01 जनवरी, 2024 से 15 सितम्बर, 2025 तक कुल 3658 निर्माण श्रमिकों के आश्रितों को लाभांवित किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 17 सितंबर 2024 को डी०बी०टी० के माध्यम से राशि का हस्तांतरण किया था। श्रम विभाग द्वारा प्रदेश स्तरीय श्रमिक सम्मेलन आयोजित कर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं के तहत् पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को केन्द्रीकृत डी.बी.टी. के माध्यम से लाभांवित करना प्रारंभ कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को 17 सितम्बर, 2024 से अब तक 16 योजनाओं में 6 लाख 48 हजार 633 पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को 327 करोड़ 13 लाख 53 हजार 108 रूपए से लाभांवित किया गया।