samacharsecretary.com

सीमा पार तस्करी पर बड़ा वार, अमृतसर में हथियार-हवाला रैकेट का भंडाफोड़

अमृतसर  अमृतसर जिला शहरी पुलिस ने  सीमा पार संचालित अवैध हथियार तस्करी और हवाला नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक अफगान नागरिक सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से आठ अत्याधुनिक पिस्तौल और सात जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।  विदेशी तस्कर के संपर्क में थे आरोपी प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी विदेश में बैठे एक तस्कर के संपर्क में थे, जो छिपे हुए ड्रॉप प्वाइंट्स के जरिए अवैध हथियारों की खेप भेजता था। पुलिस के अनुसार ये हथियार आपराधिक तत्वों तक पहुंचाए जाने थे, जहां से उन्हें आगे सप्लाई किया जाना था। पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने बताया कि  थाना इस्लामाबाद और थाना गेट हकीमां में केस दर्ज किए गए हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने, विदेश में बैठे संचालकों तक पहुंचने और आगे-पीछे के संपर्कों की जांच में जुटी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी व अतिरिक्त बरामदगी की संभावना है।  उन्होंने कहा कि अवैध हथियार तस्करी, हवाला कारोबार और संगठित अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। 

महाभारत के 5 महान योद्धा जिन्हें सीधे युद्ध में नहीं हराया जा सका

इसमें कोई शक नहीं कि महाभारत काल में पृथ्वी पर ऐसे-ऐसे योद्धा मौजूद थे, जिनकी ताकत देवताओं से भी अधिक मानी जाती थी. जब महाभारत का युद्ध शुरू हुआ, तो कौरव और पांडव, दोनों पक्षों के लिए इन महारथियों को हराना लगभग नामुमकिन था. यही वजह थी कि धर्म की जीत सुनिश्चित करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण को कई बार रणनीति, छल और युक्ति का सहारा लेना पड़ा. अगर ऐसा नहीं किया जाता, तो भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य और कर्ण जैसे योद्धाओं को हराना संभव नहीं था और शायद पांडव कभी जीत ही नहीं पाते. आज हम आपको महाभारत के उन 5 योद्धाओं के बारे में बताएंगे, जिन्हें सीधे युद्ध में नहीं, बल्कि रणनीति और छल से मारा गया. भीष्म पितामह भीष्म पितामह महाभारत के सबसे अनुभवी और शक्तिशाली योद्धाओं में से एक थे. उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत लिया था और उन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था. युद्ध में वे कौरवों के सेनापति थे और लगातार 10 दिनों तक पांडवों की सेना का भारी विनाश करते रहे. उन्हें हराना लगभग असंभव था. तब श्रीकृष्ण की योजना के अनुसार अर्जुन ने शिखंडी को अपने रथ के आगे खड़ा किया. भीष्म ने शिखंडी को स्त्री मानते हुए उस पर हथियार उठाने से इंकार कर दिया. उसी क्षण अर्जुन ने तीरों की वर्षा कर दी और भीष्म को शरशैया पर लिटा दिया. द्रोणाचार्य गीता के मुताबिक, द्रोणाचार्य, कौरव-पांडव दोनों के गुरु थे और अत्यंत शक्तिशाली योद्धा भी. जब तक वे युद्ध में थे, पांडवों की सेना को भारी नुकसान हो रहा था. उन्हें हराने का एक ही तरीका था, उन्हें मानसिक रूप से तोड़ना. श्रीकृष्ण की योजना के तहत भीम ने अश्वत्थामा नाम के हाथी को मार दिया और यह खबर फैलाई गई कि अश्वत्थामा मारा गया. जब युधिष्ठिर ने यह बात कही, तो द्रोणाचार्य को विश्वास हो गया कि उनका पुत्र मर चुका है. दुख में उन्होंने हथियार छोड़ दिए, और उसी समय धृष्टद्युम्न ने उनका वध कर दिया. जयद्रथ जयद्रथ, दुर्योधन का बहनोई था और अभिमन्यु की मृत्यु में उसकी बड़ी भूमिका थी. इससे क्रोधित होकर अर्जुन ने प्रतिज्ञा ली कि वह अगले दिन सूर्यास्त से पहले जयद्रथ का वध करेंगे, अन्यथा अग्नि में प्रवेश कर लेंगे. कौरवों ने जयद्रथ की कड़ी सुरक्षा कर दी, जिससे अर्जुन के लिए उसे मारना लगभग असंभव हो गया. तब श्रीकृष्ण ने अपनी माया से सूर्य को ढक दिया, जिससे अंधेरा हो गया. जयद्रथ को लगा कि सूर्यास्त हो चुका है और वह बाहर आ गया. तभी श्रीकृष्ण ने माया हटाई और अर्जुन ने तुरंत उसका वध कर दिया. कर्ण कर्ण महाभारत के सबसे वीर और दानवीर योद्धाओं में से एक था. उसके पास जन्म से मिले कवच और कुंडल थे, जो उसे लगभग अजेय बनाते थे. श्रीकृष्ण की योजना के तहत इंद्र ने ब्राह्मण का रूप लेकर कर्ण से उसके कवच-कुंडल दान में मांग लिए. दानवीर कर्ण ने बिना सोचे-समझे उन्हें दे दिया. युद्ध के दौरान कर्ण का रथ कीचड़ में फंस गया. जब वह उसे निकालने के लिए नीचे उतरा, तब श्रीकृष्ण के कहने पर अर्जुन ने निहत्थे कर्ण पर वार कर दिया और उसका वध कर दिया. दुर्योधन दुर्योधन अत्यंत बलशाली योद्धा था. उसकी मां गांधारी के वरदान के कारण उसका शरीर लगभग अजेय हो गया था. जब भीम और दुर्योधन के बीच गदा युद्ध हुआ, तो भीम उसे हरा नहीं पा रहे थे. तभी श्रीकृष्ण ने इशारे से बताया कि दुर्योधन की जांघ (कमर के नीचे का हिस्सा) कमजोर है. गदा युद्ध के नियमों के विरुद्ध जाकर भीम ने दुर्योधन की जांघ पर वार किया, जिससे उसकी मृत्यु हुई.

‘राधे-राधे’ के जयकारों के बीच CM भजनलाल ने पूरी की गिरिराज परिक्रमा

जयपुर  राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार रात पत्नी गीता शर्मा के साथ गिरिराज महाराज की सात कोसीय परिक्रमा पूर्ण की. पूंछरी स्थित श्रीनाथजी मंदिर से CM दंपति ने सात दंडवत कर परिक्रमा की शुरुआत की. परिक्रमा मार्ग में जगह-जगह CM का भव्य स्वागत हुआ. श्रद्धालु 'राधे-राधे' के जयकारों के साथ उनकी एक झलक पाने को परिक्रमा मार्ग के किनारे खड़े रहे. कई श्रद्धालुओं ने मोबाइल में CM की तस्वीरें कैद कीं. राधा कुंड में दीपदान की CM भजनलाल शर्मा ने परिक्रमा के दौरान दानघाटी मंदिर में दर्शन-पूजन किया. इसके बाद राधाकुंड पहुंचकर दीपदान किया. खास बात ये रही कि राधाकुंड में CM ने स्थानीय चाय की थड़ी पर रुककर चाय का आनंद भी लिया. श्रद्धालुओं से की बातचीत परिक्रमा के दौरान CM ने दंडवत कर रहे श्रद्धालुओं से रुककर बातचीत की. श्रद्धालुओं का हालचाल जाना और अभिवादन स्वीकार किया. परिक्रमा पूरी करने से पहले वह अपनी पूंछरी स्थित प्याऊ पर 5 मिनट बैठकर व्यवस्थाओं को देखा. CM के आगे-आगे भजन-कीर्तन करती मंडली चल रही थी. पूरा माहौल भक्तिमय हो गया. 200 पुलिसकर्मी सुरक्षा में तैनात सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे. उत्तर प्रदेश के मथुरा और राजस्थान के डीग जिले के करीब 200 पुलिसकर्मी CM की सुरक्षा में तैनात रहे. CM ने करीब 7 घंटे में सप्त कोशीय परिक्रमा पूर्ण की. परिक्रमा का समापन भी पूंछरी स्थित श्रीनाथजी मंदिर में ही किया गया. CM ने कहा कि गिरिराज महाराज की कृपा से ही परिक्रमा निर्विघ्न पूरी हुई. ब्रज की परंपरा और आस्था को नमन किया देश प्रदेश की खुशहाली की कामना की

वास्तु नियम: रोटी परोसते समय इन बातों का रखें ध्यान, बढ़ेगी बरकत

 वास्तु शास्त्र में रसोई घर (Kitchen) और भोजन करने के तरीकों को लेकर कई महत्वपूर्ण नियम बताए गए हैं. ऐसा माना जाता है कि रसोई में मां अन्नपूर्णा का वास होता है. वास्तु शास्त्र के मुताबिक, भोजन परोसने का तरीका घर की आर्थिक स्थिति, सुख-समृद्धि और सदस्यों के आपसी संबंधों को सीधे प्रभावित करता है. रोटी परोसते समय वास्तु शास्त्र के अनुसार निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. 1. थाली में कभी न परोसें तीन रोटियां वास्तु और हिंदू संस्कृति में थाली में एक साथ तीन रोटियां परोसना बेहद अशुभ माना जाता है. दरअसल, 3 नंबर को पूजा-पाठ या शुभ कार्यों में वर्जित माना जाता है. इसके अलावा, पारंपरिक रूप से मृतक के श्राद्ध या त्रयोदशी संस्कार के समय ही थाली में तीन रोटियां रखी जाती हैं. ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और परिवार के सदस्यों के बीच आपसी कलह या मानसिक तनाव हो सकता है. यदि किसी को तीन रोटियां खानी भी हैं, तो पहले दो परोसें, उसके बाद एक और दे सकते हैं. 2. हाथ में लेकर न दें रोटी अक्सर लोग जल्दबाजी में तवे से रोटी उतारकर सीधे हाथ में लेकर किसी को दे देते हैं. वास्तु के अनुसार यह बहुत बड़ी गलती है. नियम: रोटी हमेशा किसी प्लेट, थाली या केंटर (रोटी रखने के बर्तन) में रखकर ही सम्मानपूर्वक परोसनी चाहिए. प्रभाव: हाथ में रोटी देना दरिद्रता को आमंत्रण देने जैसा माना जाता है. इससे घर की बरकत चली जाती है और कमाया हुआ धन व्यर्थ के कामों में खर्च होने लगता है. 3. मेहमान को या खाने वाले को बैठकर ही परोसें खाना खाने वाले व्यक्ति का आसन सही होना जरूरी है, साथ ही परोसने वाले को भी कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए. दिशा का महत्व: भोजन करने वाले का मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए. दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भोजन करना पितरों का मार्ग माना जाता है, जो सामान्य परिस्थितियों में वर्जित है. परोसने का तरीका: हमेशा आदर और शांत मन से भोजन परोसें. गुस्से या चिड़चिड़ेपन में परोसा गया भोजन खाने वाले के शरीर और मन पर नकारात्मक असर डालता है. 4. बासी आटे की रोटी न बनाएं आजकल फ्रिज में गूंथा हुआ आटा रखकर अगले दिन उसकी रोटियां बनाना आम बात हो गई है, लेकिन वास्तु और स्वास्थ्य दोनों के लिहाज से यह गलत है. प्रभाव: वास्तु शास्त्र के अनुसार, बासी आटे का संबंध राहु और केतु से होता है. ऐसे आटे की रोटी घर में बीमारी, आलस्य और नकारात्मक ऊर्जा लेकर आती है. हमेशा ताजा आटा गूंथकर ही रोटियां बनानी चाहिए. 5. पहली और आखिरी रोटी का नियम वास्तु शास्त्र के मुताबिक, किचन में रोटियां बनाते समय पहली और आखिरी रोटी का एक विशेष नियम होता है. पहली रोटी (गौ ग्रास): तवे पर बनने वाली पहली रोटी हमेशा गाय के लिए निकालनी चाहिए. इससे घर के सभी देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और पितृदोष से मुक्ति मिलती है. आखिरी रोटी: सबसे आखिरी में बनने वाली रोटी कुत्ते या किसी अन्य जानवर के लिए निकालनी चाहिए. इससे राहु-केतु और शनि शांत रहते हैं.

11 जून 2026 को बुध का नक्षत्र परिवर्तन, सभी राशियों पर पड़ेगा असर

 ज्योतिष शास्त्र में बुद्धि, तर्क, संवाद और व्यापार के कारक ग्रह बुध का नक्षत्र परिवर्तन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, 11 जून 2026 को बुध देव अपनी चाल बदलते हुए एक खास नक्षत्र में प्रवेश करने जा रहे हैं, जिसका असर सभी 12 राशियों पर देखने को मिलेगा. कब और किस नक्षत्र में होगा प्रवेश? बुध देव राहु के आर्द्रा नक्षत्र से निकलकर पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. पुनर्वसु आकाश मंडल का सातवां नक्षत्र है और इसके स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं. गुरु के नक्षत्र में बुध का आना बौद्धिक क्षमता और ज्ञान में वृद्धि कराता है. पंचांग के मुताबिक, 11 जून 2026, गुरुवार को सुबह 11 बजकर 30 मिनट पर बुध का यह गोचर होगा. इस बार बुध देव इस नक्षत्र में लंबे समय तक रहने वाले हैं. वे 8 अगस्त 2026 तक इसी नक्षत्र में विराजमान रहेंगे (इस दौरान बुध की स्थिति में वक्री और मार्गी चाल का चक्र भी शामिल रहेगा). इन राशियों को होगा जबरदस्त लाभ वृषभ राशि (Taurus) धन की आवक: आर्थिक रूप से यह समय शानदार रहेगा. आसानी से धन की उपलब्धता बनी रहेगी और कई नए अवसर सामने आएंगे. पारिवारिक यात्रा: परिवार के साथ किसी मनोरंजक या धार्मिक यात्रा पर जाने का प्लान बन सकता है. पैतृक संपत्ति से भी लाभ होने के आसार हैं. मिथुन राशि (Gemini) करियर में उन्नति: नौकरीपेशा जातकों को कार्यस्थल पर वरिष्ठ अधिकारियों और बॉस का पूरा सहयोग मिलेगा. प्रमोशन या वेतन वृद्धि के योग बन रहे हैं. आर्थिक स्थिति: व्यापार के क्षेत्र में मुनाफे की अच्छी संभावनाएं हैं. अटका हुआ धन वापस मिल सकता है. व्यक्तिगत जीवन: आपकी वाणी में मधुरता आएगी, जिससे सामाजिक दायरा बढ़ेगा और व्यक्तित्व में निखार आएगा. संतान पक्ष से कोई शुभ समाचार मिल सकता है. सिंह राशि (Leo) आर्थिक लाभ: धन कमाने के एक से अधिक माध्यम तैयार होंगे. निवेश से भी अच्छा रिटर्न मिलने की उम्मीद है. पारिवारिक जीवन: घर के सदस्यों का भरपूर सहयोग मिलेगा. पुराने बिगड़े हुए रिश्ते और आपसी तालमेल में सुधार होगा. प्रेम जीवन में खुशियां आएंगी. करियर: कार्यस्थल पर चल रहे पुराने विवाद या राजनीति से मुक्ति मिलेगी. कन्या राशि (Virgo) व्यापार और नया काम: नया बिजनेस शुरू करने या किसी नई योजना पर काम करने के लिए यह समय बेहद अनुकूल है. प्रॉपर्टी या वाहन खरीदने के योग भी बन रहे हैं. सकारात्मक बदलाव: रचनात्मक क्षमता और आत्मविश्वास में भारी बढ़ोतरी होगी. बैंकिंग, शिक्षा और लेखन से जुड़े लोगों को विशेष सफलता मिलेगी. पारिवारिक सहयोग: अटके हुए सरकारी काम बड़ों के आशीर्वाद से पूरे होंगे और परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ेगी.

सीतामढ़ी में दर्दनाक हादसा: आंधी में घर पर गिरा पीपल का पेड़, एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत

पटना पूरे बिहार में मौसम का मिजाज बिहारियों को खूब छका रहा है। कई जिलों में भीषण गर्मी का प्रकोप है तो कई जगहों पर आंधी-बारिश ने लोगों को हैरान कर रखा है। सीतामढ़ी जिले में आंधी-बारिश की वजह से बड़ा हादसा भी हो गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यहां तेज आंधी के बाद एक घर पर पेड़ गिर गया। पेड़ गिरने की वजह से एक ही परिवार के 5 सदस्यों की मौत हो गई है। घटना सोमवर की रात करीब 11 बजे की बताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यहां एक कच्चे मकान पर पीपल का पेड़ गिर पड़ा। अचानक मकान पर पेड़ गिरने की वजह से मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। रात के वक्त घर के अंदर सो रहे लोग मकान के मलबे में दब गए। हालांकि, गांव वालों ने मौके पर तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया और लोगों को मलबे के नीचे से निकालने की कोशिश शुरू की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक स्थानीय लोगों ने बताया है कि यह पीपल का पेड़ काफी पुराना था। पेड़ की जड़ें कमजोर हो चुकी थीं। अचानक तेज हवा चलने की वजह से पेड़ मकान पर आ गिरा जिसकी वजह से यह हादसा हुआ। इधर इस घटना की सूचना मिलने के बाद सदर एसडीपीओ राजीव कुमार भी दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे थे। प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत और बचाव कार्य का जायजा लिया। मृतकों में सिकंदर सहनी की 28 वर्षीय पत्नी पूजा देवी, 7 साल का उनका बेटा राजकुमार, 5 साल की बेटी शिवानी, 2 साल के बेटे वीरभद्र कुमार और महीने के बेटे लाइगर कुमार शामिल हैं। इस हादसे में वीरभद्र घायल हो गया था जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान वीरभद्र ने दम तोड़ दिया। आंधी से कई जगह गिरे पेड़ जिले में सोमवार को दिनभर भीषण गर्मी और उमस से लोग परेशान रहे। सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण जनजीवन प्रभावित रहा। हालांकि शाम होते-होते मौसम ने करवट ली और तेज आंधी के साथ कई इलाकों में बारिश हुई। जिससे लोगों को काफी राहत मिली। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कहीं हल्की तो कहीं मध्यम दर्जे की वर्षा दर्ज की गई। बारिश शुरू होने के साथ तापमान में गिरावट आई और वातावरण सुहावना हो गया। दिनभर की गर्मी से परेशान लोगों ने राहत की सांस ली। वहीं तेज आंधी के कारण कई स्थानों पर पेड़ और पेड़ों की डालियां टूटकर सड़कों पर गिर गईं। जिससे कुछ समय के लिए आवागमन बाधित रहा। बाईपास रोड स्थित चक महिला के राजकीय मध्य विद्यालय के समीप एक बड़ा पेड़ बिजली के तार पर गिर पड़ा। घटना के बाद गौशाला और डुमरा की ओर जाने वाले मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। सड़क पर पेड़ गिरने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। आगे कैसा रहेगा मौसम इधर सीतामढ़ी जिले में मौसम को लेकर विभाग ने पूर्वानुमान जताया है कि अगले कुछ दिनों तक जिले में गर्मी और उमस का असर बना रह सकता है। हालांकि, कहीं-कहीं हल्के बादल छाने की संभावना है। लेकिन इससे तापमान में विशेष कमी आने की उम्मीद नहीं है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने और स्वास्थ्य संबंधी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। लगातार बनी गर्मी ने लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर दिया है और हर किसी को अब मानसून की बारिश का इंतजार है।

26/11 के अनसुने नायकों को मुख्यमंत्री साय का सलाम, ‘भारत भाग्य विधाता’ की प्री-लॉन्च स्क्रीनिंग में हुए शामिल

26/11 के अनसुने नायकों को सलाम : मुख्यमंत्री श्री साय  ‘भारत भाग्य विधाता’ की प्री-लॉन्च स्क्रीनिंग में हुए शामिल सेवा, साहस और समर्पण की कहानी है ‘भारत भाग्य विधाता’ : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय 26/11 मुंबई आतंकी हमले के दौरान सेवा और साहस का परिचय देने वाले स्वास्थ्यकर्मियों की अनकही कहानी को समर्पित है फिल्म रायपुर  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय  राजधानी रायपुर के जोरा मॉल में आयोजित ‘भारत भाग्य विधाता’ फिल्म की प्री-लॉन्च स्क्रीनिंग सेरेमनी में शामिल हुए। इस अवसर पर उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय एवं परिजन भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में प्रख्यात अभिनेत्री एवं सांसद सुश्री कंगना रनौत, फिल्म के निर्देशक श्री मनोज तापड़िया सहित फिल्म जगत से जुड़े कलाकार, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए बड़े सौभाग्य का विषय है कि सुश्री कंगना रनौत की फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ की स्क्रीनिंग प्रदेश में आयोजित हो रही है और इस अवसर पर वे स्वयं यहां पधारी हैं। उन्होंने कहा कि माता कौशल्या की जन्मभूमि और भगवान श्रीराम के ननिहाल छत्तीसगढ़ में सुश्री कंगना रनौत का हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। मुख्यमंत्री श्री साय ने फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों, तकनीकी विशेषज्ञों और पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह एक ऐसी कहानी है, जो उन अनसुने और अनदेखे नायकों को सम्मान देती है, जिनके असाधारण योगदान को अक्सर पर्याप्त पहचान नहीं मिल पाती। उन्होंने कहा कि आज इस स्क्रीनिंग में सुश्री कंगना रनौत और उनकी टीम के साथ स्वास्थ्य विभाग की बहनों की उपस्थिति इस फिल्म की भावना को और अधिक सार्थक बनाती है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह गर्व की बात है कि फिल्म के निर्देशक श्री मनोज तापड़िया छत्तीसगढ़ की माटी के पुत्र हैं। उन्होंने यहां जन्म लिया, यहीं पले-बढ़े और लंबे समय तक मुंबई में रहकर इस महत्वपूर्ण विषय पर आधारित फिल्म की कहानी लिखी। मुख्यमंत्री ने कहा कि 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमले में पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा निर्दोष लोगों पर अंधाधुंध गोलीबारी की गई, जिसमें अनेक लोगों की जान गई। उस कठिन समय में अस्पतालों में कार्यरत महिला नर्सों, डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना सैकड़ों लोगों की जान बचाई और घायलों की सेवा की। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ऐसे अनेक योद्धा होते हैं, जिनकी कहानियां समाज के सामने नहीं आ पातीं। सुश्री कंगना रनौत ने स्वयं नर्स की भूमिका निभाकर उन स्वास्थ्यकर्मियों के साहस, सेवा और समर्पण की कहानी देश के सामने लाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने कहा कि दुनिया में कई ऐसे लोग होते हैं, जो बड़े कार्य कर जाते हैं, लेकिन उन्हें उचित पहचान नहीं मिल पाती। यह फिल्म ऐसे ही लोगों को समर्पित है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह भी अत्यंत सौभाग्य का विषय है कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इस फिल्म को ‘भारत भाग्य विधाता’ नाम प्रदान किया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से सुश्री कंगना रनौत, उनकी पूरी टीम और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सभी कर्मियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर अभिनेत्री एवं सांसद सुश्री कंगना रनौत ने कहा कि फिल्म के निर्देशक श्री मनोज तापड़िया छत्तीसगढ़ की धरती पर जन्मे हैं, यहीं पले-बढ़े हैं और इस प्रदेश के बेटे हैं। उन्होंने आग्रह किया था कि यदि फिल्म की स्क्रीनिंग छत्तीसगढ़ में आयोजित की जाए तो यह उनके लिए गर्व का विषय होगा। सुश्री रनौत ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने व्यस्ततम कार्यक्रमों के बीच समय निकालकर इस आयोजन में शामिल होकर कलाकारों और पूरी टीम का सम्मान बढ़ाया है तथा सभी का उत्साहवर्धन किया है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ में आपातकालीन परिस्थितियों में उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करने वाले ‘भारत भाग्य विधाता वॉरियर्स’ को सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में श्री जागेश्वर कुमार धीवर, श्री नारायण सिंह नायक, श्रीमती भुनेश्वरी तिवारी, श्रीमती रोहिणी वर्मा, श्रीमती उर्मिला भगत, श्रीमती रोशनी, श्री विजय शंकर कश्यप, श्रीमती मीना सिंह, श्रीमती ममता कपूर, श्रीमती मीना शर्मा, श्रीमती जमुनाबाई, श्रीमती लक्ष्मी मेनन तथा श्रीमती विजया लक्ष्मी पिल्लई शामिल हैं। इस अवसर पर मंत्रिमंडल के सदस्य, सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, सांसद श्रीमती रूप कुमारी चौधरी, विधायकगण, जनप्रतिनिधि, फिल्म जगत से जुड़े कलाकार तथा मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित थे।

मेयर चुनाव पर सबकी नजरें, मोहाली की कमान किसे मिलेगी? AAP ने नहीं खोले पत्ते

मोहाली नगर निगम मोहाली को मंगलवार को नया मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर मिलने जा रहा है, लेकिन इन तीनों अहम पदों पर आम आदमी पार्टी किसे जिम्मेदारी सौंपेगी, इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर बरकरार है। बहुमत होने के बावजूद पार्टी ने अभी तक अपने उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, जिससे आखिरी समय तक सस्पेंस बना हुआ है। पार्टी सूत्रों के अनुसार नामों पर अंतिम मुहर हाईकमान लगाएगा और इसकी घोषणा चयन से ठीक पहले या मौके पर ही किए जाने की संभावना है। नगर निगम आयुक्त संदीप सिंह के अनुसार मंगलवार दोपहर तीन बजे निगम सदन की विशेष बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक की शुरुआत नवनिर्वाचित पार्षदों के शपथ ग्रहण समारोह से होगी, जिसके बाद मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव की प्रक्रिया पूरी करवाई जाएगी। मतदान हाथ खड़े कराकर कराया जाएगा। नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 27 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके अलावा विधायक कुलवंत सिंह को भी सदन में मतदान का अधिकार प्राप्त है। चार निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा भी पार्टी नेताओं द्वारा किया जा रहा है। ऐसे में तीनों पदों पर आप उम्मीदवारों की जीत तय है। दिलचस्प बात यह है कि बहुमत के बावजूद पार्टी नेतृत्व उम्मीदवारों के नामों को लेकर पूरी गोपनीयता बरत रहा है। मेयर पद के लिए इनके नामों की हो रही चर्चा मेयर पद के लिए सबसे चर्चित नाम लगातार तीसरी बार पार्षद बने सरबजीत सिंह समाना का है। विधायक कुलवंत सिंह के पुत्र होने के साथ साथ संगठन और स्थानीय राजनीति में उनकी सक्रियता को देखते हुए उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा है। हालांकि पार्टी के भीतर अन्य नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं। वाटर सप्लाई एवं सीवरेज बोर्ड के चेयरमैन डाॅ. सनी अहलूवालिया, वरिष्ठ पार्षद गुरमीत कौर तथा चौथी बार चुनाव जीतकर आए सुखदेव सिंह पटवारी को भी संभावित दावेदारों में गिना जा रहा है। वहीं सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पदों को लेकर भी कई नाम सामने आ रहे हैं। रमनप्रीत कौर कुंभड़ा, गुरमीत कौर, आरपी शर्मा, हरपाल सिंह चन्ना और गुरमुख सिंह सोहल के नाम राजनीतिक चर्चाओं में प्रमुखता से लिए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि पार्टी महिला प्रतिनिधित्व, वरिष्ठता और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए अंतिम फैसला ले सकती है। इस बीच करीब 22 पार्षदों के हिमाचल प्रदेश दौरे की चर्चा भी राजनीतिक हलकों में बनी हुई है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से कई पार्षदों के फोन स्विच आफ हैं और वे हिमाचल प्रदेश के किसी रिसार्ट में ठहरे हुए हैं। हालांकि पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनावी व्यस्तता के बाद सभी पार्षद सामूहिक रूप से विश्राम के लिए गए हैं और मंगलवार को सीधे निगम सदन पहुंचकर शपथ ग्रहण व मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे। ये नेता मेयर पद के दावेदार…     विधायक के बेटे का नाम आगे: आम आदमी पार्टी में मेयर पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। इनमें मोहाली के विधायक कुलवंत सिंह के बेटे और पार्षद सरबजीत सिंह समाना का नाम सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वह वार्ड-42 से 458 वोटों के अंतर से अपना चुनाव जीते।     दूसरी और चौथी बार के पार्षद रेस में: वाटर सप्लाई एवं सीवरेज बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनी अहलूवालिया रेस में हैं। वे पार्टी के उच्च नेताओं के साथ जुड़े हुए हैं। उन्होंने अपना चुनाव वार्ड-6 से 269 वोटों के अंतर से जीता। इसके अलावा पति-पत्नी दोनों दूसरी बार पार्षद बनने वाली गुरमीत कौर भी मेयर की रेस में हैं। वह वार्ड-3 से 182 वोटों के अंतर से जीतकर पार्षद बनी है। चौथे नंबर पर सुखदेव सिंह पटवारी हैं, जो चौथी बार अपना चुनाव जीते हैं। वह वार्ड-34 से पार्षद बने हैं।     मंत्री कर सकते है नाम का ऐलान: पार्टी सूत्रों का कहना है कि महिला प्रतिनिधित्व, वरिष्ठता और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर अंतिम फैसला लिया जाएगा। संभावना है कि पंजाब के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अमन अरोड़ा मोहाली पहुंचकर उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करें।     कांग्रेस ने निपेंद्र सिंह रंगी पर लगाया दांव: दूसरी ओर कांग्रेस ने चुनाव से एक दिन पहले अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। पार्टी ने निपेंद्र सिंह रंगी को कांग्रेस पार्षद दल का नेता चुना है। वार्ड-18 से 123 वोटों के अंतर से चुनाव जीते हैं। रंगी ने दावा किया कि कांग्रेस के 12 पार्षद एकजुट हैं और पार्टी निगम सदन में मजबूती के साथ चुनाव लड़ेगी। बहुमत के बाद भी बनी हुई है उत्सुकता नगर निगम में बहुमत आम आदमी पार्टी के पास है, इसलिए मेयर पद पर उसका कब्जा लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि, उम्मीदवार के नाम को लेकर पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं ने चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। अब सभी की निगाहें आज होने वाली बैठक और अंतिम क्षणों में होने वाले राजनीतिक फैसलों पर टिकी हैं। 29 मई को आए थे नतीजे बता दें कि मोहाली नगर निगम के चुनाव 26 मई को हुए थे, और इसके नतीजे 29 मई 2026 को घोषित किए गए। मोहाली नगर निगम में कुल 50 पार्षद हैं। बहुमत के लिए यहां 26 वोटों की जरूरत होती है। 50 निर्वाचित पार्षद और 1 स्थानीय विधायक का वोट मिलकर सदन में कुल 51 वोट बनते हैं। इस बार आम आदमी पार्टी (AAP) 27 सीटें, कांग्रेस (INC) 12 सीटें, शिरोमणि अकाली दल (SAD) 4 सीटें, भारतीय जनता पार्टी (BJP) 3 सीटें और निर्दलीय 4 सीटें जीते हैं। विधायक AAP का है, जिससे उनकी वोटों की संख्या 28 है। पिछली बार कांग्रेस के मेयर बने, इस बार चुनाव नहीं लड़े इससे पहले वर्ष 2021 के चुनाव के बाद कांग्रेस के अमरजीत सिंह जीती सिद्धू मोहाली के मेयर बने थे। वह पंजाब के पूर्व मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू के भाई हैं। इस बार वह चुनाव नहीं लड़े। हालांकि, अमरजीत सिंह जीती सिद्धू के परिवार से एडवोकेट कंवरबीर सिंह रूबी सिद्धू (बलबीर सिंह सिद्धू के बेटे) कांग्रेस की टिकट पर वार्ड नंबर 10 से चुनाव लड़े थे। वह चुनाव हार गए। अभी तक किसी नाम पर अंतिम निर्णय नहीं आम आदमी पार्टी की … Read more

पारंपरिक कौशल और आधुनिक तकनीक के समन्वय से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था: मुख्यमंत्री

वस्त्रोद्योग के लिए नई कौशल विकास व्यवस्था तैयार हो, ग्रामोद्योग और माटीकला क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं को मिले नई गति : मुख्यमंत्री पारंपरिक कौशल और आधुनिक तकनीक के समन्वय से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था: मुख्यमंत्री उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार होगा कुशल मानव संसाधन, प्रशिक्षण और रोजगार को जोड़ने पर जोर ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और पारंपरिक कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश वित्तीय सहायता, कौशल विकास, तकनीकी उन्नयन और विपणन सुविधाओं को एकीकृत रूप से विकसित किया जाए लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वस्त्र क्षेत्र की वर्तमान आवश्यकताओं और भविष्य की संभावनाओं के अनुरूप व्यापक कौशल विकास कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र में निवेश, उत्पादन और रोजगार की दृष्टि से देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उद्योगों को समय पर प्रशिक्षित और दक्ष मानव संसाधन उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि कौशल विकास कार्यक्रमों का लक्ष्य केवल प्रशिक्षण तक सीमित न होकर युवाओं को रोजगार और आजीविका से जोड़ना होना चाहिए। बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार समर्थ योजना के अंतर्गत अब तक 2.28 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जबकि 1.60 लाख से अधिक प्रशिक्षार्थियों को रोजगार से जोड़ा गया है। महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही है और कुल प्रशिक्षार्थियों में उनका हिस्सा 87 प्रतिशत से अधिक है। वहीं उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के माध्यम से भी बड़ी संख्या में युवाओं को वस्त्र क्षेत्र से संबंधित विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रदान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वस्त्र क्षेत्र में तकनीकी बदलाव अत्यंत तेजी से हो रहे हैं। ऑटोमेशन, आधुनिक मशीनरी तथा टेक्निकल टेक्सटाइल्स जैसे नए क्षेत्रों के विस्तार को देखते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को समयानुकूल बनाया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं का आकलन करते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक उपयोगी और रोजगारपरक बनाया जाए। बैठक में अधिकारियों ने वस्त्र क्षेत्र के लिए प्रस्तावित कौशल विकास व्यवस्था की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसमें उद्योगों, प्रशिक्षण संस्थानों तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए प्रशिक्षण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। साथ ही प्रशिक्षण की गुणवत्ता, पारदर्शिता, निगरानी और रोजगार परिणामों को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी आधारित व्यवस्थाओं के विकास पर भी चर्चा हुई। माटीकला क्षेत्र की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण रोजगार से सीधे जुड़ा हुआ है। मिट्टी से निर्मित उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ बड़ी संख्या में कारीगर परिवारों की आजीविका का आधार भी हैं। उन्होंने माटीकला उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने, कारीगरों को आधुनिक डिजाइन, सोलर चाक उपलब्ध कराने, नई तकनीक, बेहतर उपकरण, वित्तीय सहायता और विपणन सुविधाओं से जोड़ने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के अंतर्गत वर्ष 2019-20 से वर्ष 2025-26 तक 1,331 इकाइयों की स्थापना की गई है। इन इकाइयों में 3,302.37 लाख रुपये का पूंजी निवेश हुआ है तथा 557.18 लाख रुपये की मार्जिन मनी सहायता उपलब्ध कराई गई है। माटीकला महोत्सवों, प्रदर्शनियों और मेलों के माध्यम से कारीगरों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और विपणन के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वर्ष 2025-26 में 300 इकाइयों की स्थापना के लक्ष्य के सापेक्ष बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री ने लंबित ऋण प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण और लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध रूप से पहुंचाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक उद्योगों को केवल संरक्षण की नहीं, बल्कि नवाचार, ब्रांडिंग, डिजिटलीकरण और आधुनिक बाजार से जुड़ाव की आवश्यकता है। माटीकला के उत्पादों को ई-कॉमर्स, डिजाइन विकास और आधुनिक विपणन प्रणालियों से जोड़कर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई पहचान दिलाई जा सकती है। उन्होंने विभागों को समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर प्रशिक्षण, बैंकों से समन्वय बनाकर वित्तीय सहायता, तकनीकी उन्नयन, विपणन और रोजगार सृजन की पूरी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

परमा एकादशी 2026: 11 जून को रखा जाएगा दुर्लभ व्रत

एक साल में कुल 24 एकादशी आती हैं, यानी हर महीने दो एकादशी होती हैं, यह बात हम सभी जानते हैं. लेकिन, इन सभी एकादशियों में एक ऐसी भी एकादशी होती है, जो हर साल नहीं आती है. यह है परमा एकादशी, जो केवल अधिक मास के दौरान और वह भी लगभग 3 साल में एक बार ही पड़ती है. यही कारण है कि इसे बेहद विशिष्ट और दुर्लभ एकादशी माना जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, जब अधिकमास लगता है, तभी कृष्ण पक्ष की एकादशी को परमा एकादशी कहा जाता है. यह बाकी 24 एकादशियों से अलग है क्योंकि इसका आगमन केवल विशेष संयोग में ही होता है. इसलिए इसका महत्व भी कई गुना अधिक माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सभी एकादशियों पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है और पापों से मुक्ति व पुण्य की प्राप्ति की कामना की जाती है. लेकिन परमा एकादशी को परम यानी सर्वोच्च एकादशी कहा गया है, क्योंकि यह मोक्ष प्रदान करने वाली मानी जाती है. परमा एकादशी की तिथि और समय इस बार परमा एकादशी को लेकर लोगों में तारीख को लेकर थोड़ा भ्रम है, लेकिन स्पष्ट रूप से यह व्रत 11 जून 2026 को रखा जाएगा. एकादशी तिथि इस बार 10 जून की रात 12 बजकर 57 मिनट से शुरू होते ही 11 जून की रात 10 बजकर 36 मिनट पर समाप्त होगी. इसलिए व्रत 11 जून को ही किया जाएगा. विशेष योग इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और शोभन योग बन रहे हैं, जो बेहद शुभ माने जाते हैं. इस दिन किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना अधिक होती है, खासकर व्यापार और करियर से जुड़े कामों में. परमा एकादशी का पौराणिक महत्व पुराणों में वर्णन मिलता है कि धन के देवता कुबेर ने भी परमा एकादशी का व्रत किया था, जिसके प्रभाव से उन्हें धनाध्यक्ष का पद प्राप्त हुआ था. वहीं सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र, जिन्होंने अपना राज्य, परिवार और सब कुछ खो दिया था, उन्होंने भी इस व्रत का पालन किया था. इसके प्रभाव से उन्हें अपना खोया हुआ राज्य, परिवार और वैभव पुनः प्राप्त हुआ था. इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि यह एकादशी जीवन में सुख, समृद्धि और पुनःस्थापना का मार्ग खोलने वाली मानी जाती है. अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि परमा एकादशी का व्रत रखने और भगवान विष्णु का पूजन करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा था कि जो व्यक्ति इस दिन श्रद्धा से व्रत और पूजा करता है, उसे वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। परमा एकादशी व्रत विधि व्रत से एक दिन पहले (10 जून) रात में भारी भोजन न करें. सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान करें. घर के मंदिर की सफाई कर दीपक जलाएं. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. पीले पुष्प विष्णु जी को और लाल पुष्प लक्ष्मी जी को अर्पित करें. गंगाजल से स्नान, तिलक और अक्षत अर्पित करें. फल, मिष्ठान और तुलसी दल के साथ भोग लगाएं आरती करें. मंत्र जाप: ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 108 बार जाप करें. शाम को पुनः पूजा करें, भजन-कीर्तन करें और भगवान से अपनी मनोकामना प्रार्थना करें. व्रत के लाभ परमा एकादशी का व्रत रखने से मानसिक शांति और स्थिरता मिलती है. जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है. धन और समृद्धि के मार्ग खुलते हैं. कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं आध्यात्मिक उन्नति होती है.