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खतरनाक कैनाइन डिस्टेंपर बीमारी का खतरा, पेंच टाइगर रिजर्व में शुरू हुआ बड़ा वैक्सीनेशन अभियान

छिंदवाड़ा  पेंच टाइगर रिजर्व के बफर जोन से लगे गांव के पालतू और आवारा कुत्तों को पकड़कर वन और पशु विभाग के कर्मचारी इन दिनों इंजेक्शन लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं. दरअसल कुछ दिनों पहले कान्हा टाइगर रिजर्व और दूसरे नेशनल पार्क में कैनाइन डिस्टेंपर बीमारी के इंफेक्शन देखे गए थे. जिसके बाद सुरक्षा के लिहाज ये कदम उठाए गए हैं।  छिंदवाड़ा सिवनी के 1500 कुत्तों का होगा वैक्सिनेशन पेंच टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर देव प्रसाद जे. ने बताया कि, ''वन्यजीव स्वास्थ्य की देखभाल के लिए पेंच टाइगर रिजर्व द्वारा सिवनी एवं छिंदवाड़ा जिलों के बफर क्षेत्र के गांवों में कैनाइन डिस्टेंपर की रोकथाम के लिए व्यापक टीकाकरण अभियान प्रारंभ किया गया है. इस अभियान के अंतर्गत पेंच टाइगर रिजर्व के फील्ड स्टाफ द्वारा बफर क्षेत्र के लगभग 1500 पालतू एवं आवारा कुत्तों की पहचान कर उनका टीकाकरण एवं निगरानी की कार्यवाही शुरू की गई है. टीकाकरण अभियान की शुरुआत 31 मई 2026 को सिवनी जिले के टुरिया एवं सावंगी ग्राम तथा छिंदवाड़ा जिले के कुंभपानी गांव से की गई है।  कुछ टाइगर रिजर्व में फैला इन्फेक्शन, बरती जा रही सावधानी हाल ही में कुछ टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर इंफेक्शन फैला था. जिसके बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा सभी टाइगर रिजर्व को बीमारी की रोकथाम एवं कंट्रोल के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश एवं अलर्ट जारी किए गए हैं. इसी के चलते पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा यह टीकाकरण अभियान एक एहतियाती एवं सुरक्षा कदम के रूप में शुरू किया गया है, जिससे रिजर्व क्षेत्र एवं आसपास के वन्यजीवों को इंफेक्शन से सुरक्षित रखा जा सकेगा।  कैसे पहचाने कैनाइन डिस्टेंपर बीमारी पेंच टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने लोंगो से अपील की है कि यदि किसी कुत्ते में कैनाइन डिस्टेंपर रोग के लक्षण जैसे आंख, नाक अथवा मुंह से पानी का बहाव होना, असामान्य व्यवहार करना, दौरे आना, लगातार गोल-गोल घूमना या अन्य असामान्य गतिविधियां दिखाई दें, तो इसकी सूचना तत्काल वन विभाग के फील्ड स्टाफ अथवा निकटतम वन अधिकारी को दें, जिससे समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।  बाघों के लिए खतरा है कैनाइन डिस्टेंपर इंफेक्शन पशु चिकित्सक डॉक्टर अंकित मेश्राम ने बताया कि, "यह बीमारी कुत्तों, सियार और लोमड़ियों में होने की वजह से फैलती है. जब जंगल या टाइगर रिजर्व में बाघ इन जानवरों का शिकार करके खाते हैं तो यह बीमारी बाघों में भी पहुंच जाती है. जिसकी वजह से बाघों की मौत होने की आशंका होती है. भारत में कान्हा नेशनल पार्क और राजस्थान के सरिस्का जैसे टाइगर रिजर्व में इस बीमारी से बाघों की मौत के मामले सामने आ चुके हैं. इसके बाद ही राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी NTCA ने सुरक्षा के लिहाज से कदम उठाए हैं।  कैसे फैलता है कैनाइन डिस्टेंपर इंफेक्शन पशु चिकित्सक डॉक्टर अंकित मेश्राम ने बताया कि, ''यह बीमारी ज्यादातर कुत्तों से फैलती है. यह इन्फेक्शन वाली बीमारी बहुत जल्दी जानवरों में सर्कुलेट होती है जो जानवरों के लिए जानलेवा साबित होती है. जब कोई संक्रमित कुत्ता या जंगली जानवर खांसता, छींकता या भौंकता है, तो वायरस हवा में बूंदों के रूप में फैल जाते हैं. स्वस्थ कुत्ते सांस के जरिए इस वायरस को अंदर खींच लेते हैं।  इसके साथ ही संक्रमित कुत्ते के मूत्र, मल, लार, आंखों या नाक से निकलने वाली लार के संपर्क में आने से स्वस्थ कुत्ते भी संक्रमित हो सकते हैं. ये वायरस भोजन के बर्तन, पानी के कटोरे, खिलौनों और बिस्तर पर जीवित रह सकता है. यदि कोई गर्भवती फीमेल डॉगी इस वायरस से संक्रमित है, तो प्लेसेंटा के माध्यम से यह बीमारी उसके अजन्मे पिल्लों तक भी फैल सकती है। 

पाकिस्तान पर पानी की चोट! भारत ने चिनाब और ब्यास नदियों पर बनाई बड़ी रणनीति

नई दिल्ली केंद्र सरकार इस साल 1 अगस्त से अपने सबसे महत्वाकांक्षी नदी जोड़ो (रिवर लिंकिंग) प्रोजेक्ट्स में से एक पर काम शुरू करने जा रही है. करीब 2,300 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को 31 जुलाई 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके तहत चिनाब नदी के अतिरिक्त पानी को ब्यास नदी बेसिन में मोड़ा जाएगा. पिछले हफ्ते ही सीएनएन-न्यूज18 ने सबसे पहले इस रणनीतिक परियोजना की जानकारी दी थी. अब चैनल को इस प्रोजेक्ट का विस्तृत ब्लूप्रिंट भी मिला है।  एनएचपीसी (NHPC) के एक दस्तावेज के अनुसार, ‘लिंक-3 प्रोजेक्ट’ हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले की लाहौल घाटी में चिनाब नदी पर प्रस्तावित है. इस योजना के तहत चिनाब नदी पर 19 मीटर ऊंचा बैराज बनाया जाएगा. इसके साथ एक इंटेक स्ट्रक्चर और करीब 8.7 किलोमीटर लंबी जल परिवहन सुरंग (टनल) का निर्माण किया जाएगा. परियोजना के दूसरे चरण में जलविद्युत उत्पादन की भी संभावना रखी गई है।  पहाड़ों के बीच बनेगा बैराज दस्तावेज में बताया गया है कि प्रस्तावित बैराज के आसपास का इलाका बेहद दुर्गम और पहाड़ी है. यहां चिनाब नदी एक चौड़ी यू-आकार की घाटी से होकर बहती है. क्षेत्र की ऊंचाई लगभग 3,095 मीटर से लेकर 6,517 मीटर तक है और यहां तीखी पर्वत श्रृंखलाएं तथा गहरी घाटियां मौजूद हैं।  सिंधु की लाइफलाइन है चिनाब का पानी करीब 8.7 किलोमीटर लंबी यह सुरंग चिनाब बेसिन के अतिरिक्त पानी को ब्यास नदी प्रणाली में पहुंचाएगी. इस परियोजना को पाकिस्तान के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि चिनाब सिंधु जल संधि के तहत पश्चिमी नदियों में शामिल है, जिन पर भारत के अधिकार सीमित रहे हैं. हालांकि, पिछले वर्ष पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इस संधि को लेकर अपना रुख कड़ा कर लिया था।  पानी मोड़ने का प्रस्तावित स्थल कोस्कर गांव के पास स्थित है और यह अटल टनल रोहतांग के उत्तरी छोर से आगे पड़ता है. इस परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक इंजीनियरिंग या जलविद्युत परियोजना नहीं है, बल्कि पश्चिमी नदियों के पानी के बेहतर उपयोग की दिशा में एक बड़ा कदम है।  तो पाकिस्तान नहीं जाएगा चिनाब का पानी भारतीय नीति निर्माताओं और जल विशेषज्ञों का लंबे समय से मानना रहा है कि पश्चिमी नदियों का काफी पानी पर्याप्त भंडारण और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण बिना इस्तेमाल हुए पाकिस्तान की ओर बह जाता है. चिनाब-ब्यास लिंक परियोजना को इसी समस्या के समाधान के रूप में देखा जा रहा है।  इस प्रस्तावित बैराज के आसपास का इलाका बेहद दुर्गम और पहाड़ी है. सरकार को उम्मीद है कि इस परियोजना से उत्तर भारत में जलविद्युत उत्पादन की संभावनाएं भी मजबूत होंगी. अधिकारियों के मुताबिक, दूसरे चरण में पानी के इस नए प्रवाह का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए किया जा सकता है।  हिमालयी नदियों को भारत की सबसे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा संपत्तियों में गिना जाता है. ऐसे समय में जब देश थर्मल पावर पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है, यह परियोजना ऊर्जा और जल प्रबंधन दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 

मोबाइल नंबर ब्लॉक करने पर हाईकोर्ट सख्त, पति की शिकायत को बताया गलत

प्रयागराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ पुलिस को फटकार लगाई है। साथ ही साइबर सेल को निर्देश दिया है कि वह एक महिला के ब्लॉक किए गए मोबाइल नंबर को तुरंत बहाल करे। कोर्ट ने पुलिस की इस कार्रवाई को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए साफ किया कि राज्य की एजेंसियों की लापरवाही के कारण किसी नागरिक को इस तरह परेशान नहीं किया जा सकता। न्यूज़ वेबसाइट बार एंड बेंच के मुताबिक यह आदेश जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिवीजन बेंच ने महिला द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता महिला और उसके पति के बीच वैवाहिक विवाद चल रहा है। पति ने आपसी अनबन के कारण पत्नी के खिलाफ साइबर सेल में एक झूठी शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर पुलिस ने बिना पूरी जांच किए महिला का मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया। हाईकोर्ट ने पुलिस के रवैये पर जताई नाराजगी अदालत ने लखनऊ के साइबर सेल इंचार्ज द्वारा दाखिल व्यक्तिगत हलफनामे पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता और प्रतिवादी संख्या-5 (पति) के बीच स्पष्ट रूप से वैवाहिक विवाद है और शिकायत भी पति की ओर से की गई है। लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की साइबर सेल के प्रभारी अधिकारी द्वारा दाखिल व्यक्तिगत शपथपत्र में अपनाया गया रुख बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने साइबर पोर्टल से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर खातों या सेवाओं को ब्लॉक, डेबिट अथवा फ्रीज करने संबंधी गृह मंत्रालय के आदेशों का हवाला दिया है। ऐसे आदेशों का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए। बेंच ने आगे टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य की एजेंसियों की इस तरह की लापरवाही या दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई के कारण किसी भी नागरिक के अधिकारों का दमन नहीं किया जा सकता। जियो और पुलिस को एक हफ्ते का अल्टीमेटम हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की साइबर सेल के प्रभारी अधिकारी संबंधित टेलीकॉम सेवा प्रदाता, जो प्रथम दृष्टया जियो टेलीकॉम सर्विसेज लिमिटेड प्रतीत होती है। उससे संपर्क कर याचिकाकर्ता का मोबाइल नंबर तत्काल बहाल कराने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। साथ ही एक सप्ताह के भीतर इस संबंध में किए गए कार्यों का शपथ पत्र अदालत में दाखिल करें। अदालत ने महिला के पति को भी नोटिस जारी कर पूछा है कि निराधार और तुच्छ शिकायत दर्ज कराने के लिए उस पर हर्जाना क्यों न लगाया जाए। बता दें कि इस मामले में याचिकाकर्ता महिला की ओर से अधिवक्ता प्रशांत पांडेय ने पक्ष रखा था।

लाइट पॉल्यूशन का खतरा बढ़ा, भारत में 50% लोग कृत्रिम रोशनी के असर से प्रभावित

इंदौर  आर्टिफिशियल रोशनी की वजह से दुनिया का 80% हिस्सा प्रभावित है। 2014 से 2022 के बीच दुनिया में रात के समय आर्टिफिशियल रोशनी में लगभग 16% वृद्धि हुई। क्लाइमेट-टेक स्टार्टअप प्राणा एयर के मुताबिक भारत की 50% से अधिक आबादी हर रात आर्टिफिशियल रोशनी से होने वाले प्रदूषण का सामना करती है। बड़े शहरों की रातें 60 गुना ज्यादा चमकीली हो चुकी हैं। इंसानों, कीटों, जानवरों और पक्षियों पर भी इसका असर हो रहा है। इंसानों की नींद, फूल खिलने, पक्षियों के प्रजनन पर असर प्रकाश प्रदूषण पशु-पक्षियों में प्रवास, प्रजनन, घोंसला बनाने और अंडों से बच्चे निकलने जैसी कई जैविक प्रक्रियाओं को बदल देता है। कई रात्रिकालीन कीट विलुप्त हो रहे हैं। इंसानों की आंखों की रोशनी और नींद के साइकिल पर भी असर पड़ रहा है। रात में मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर घट रहा। इससे डायबिटीज, डिप्रेशन, हार्ट डिजीज, कैंसर जैसे रोग बढ़ने का जोखिम। चेक रिपब्लिक में स्ट्रीट लाइट ऊपर दिखी तो 3 लाख जुर्माना चेक रिपब्लिक में स्ट्रीटलाइट्स को केवल जमीन पर फोकस नहीं करने पर 3 लाख रुपए से ज्यादा जुर्माना लग सकता है। फ्रांस में रात 1 बजे के बाद दुकानों, दफ्तरों की बाहरी लाइट बंद करना जरूरी। तीन हजार केल्विन से ज्यादा नहीं लगा सकते। जर्मनी में रिहायशी इलाकों में रात 10 बजे के बाद तेज रोशनी प्रतिबंधित की गई है।

यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड का बड़ा फैसला, कलावा-मंगलसूत्र पहनकर भी दे सकेंगे एग्जाम

  लखनऊ उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने सिपाही भर्ती परीक्षा को लेकर इस बार एक बड़ा फैसला लिया है, जिससे परीक्षा देने जा रही लाखों शादीशुदा महिलाओं और अभ्यर्थियों ने राहत की सांस ली है. अक्सर परीक्षाओं में कड़े सुरक्षा नियमों के नाम पर कलावा काटने या मंगलसूत्र उतरवाने की तस्वीरें सामने आती हैं, जिससे अभ्यर्थियों को मानसिक तनाव से गुजरना पड़ता है. लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा. भर्ती बोर्ड ने साफ कर दिया है कि परीक्षा केंद्रों पर कलावा या मंगलसूत्र जैसे धार्मिक प्रतीकों को पहनने पर कोई पाबंदी नहीं होगी और चेकिंग के दौरान इन्हें जबरन हटवाया नहीं जाएगा।  स्मार्ट गैजेट्स पर 'डिजिटल' पहरा यह परीक्षा आठ जून से शुरू हो रही है. इस बार परीक्षा केंद्र में धार्मिक आस्था को सम्मान देने के साथ ही बोर्ड ने परीक्षा की शुचिता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया है. इस बार नकल माफियाओं पर लगाम लगाने के लिए सुरक्षा एजेंसियां और भी हाईटेक हो चुकी हैं. बोर्ड ने विशेष तौर पर निर्देश दिए हैं कि 'स्मार्ट मेटा चश्मे', इलेक्ट्रॉनिक पेन और अन्य छिपे हुए स्मार्ट गैजेट्स पर कड़ी निगरानी रखी जाए. सख्ती का आलम यह होगा कि परीक्षा ड्यूटी में तैनात रहने वाले कर्मचारी और शिक्षक भी केंद्र के भीतर अपना मोबाइल फोन नहीं ले जा सकेंगे. सुरक्षा को देखते हुए एग्जाम सेंटर पर सीसीटीवी की नजरें लगी रहेंगी।  28 लाख अभ्यर्थी, 75 जिले और महापरीक्षा यह उत्तर प्रदेश की अब तक की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक होने जा रही है. आगामी 8 से 10 जून के बीच होने वाली इस सिपाही भर्ती परीक्षा में 32,679 पदों के लिए प्रदेश भर से 28 लाख से अधिक अभ्यर्थी अपनी किस्मत आजमाएंगे. परीक्षा को पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में कुल 1183 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहेंगे। 

सियासी समीकरण बदलते ही केंद्र का बड़ा प्लान, परिसीमन और One Nation One Election पर बढ़े कदम

नई दिल्ली ONOE यानी एक देश एक चुनाव और परिसीमन विधेयक जल्द ही एक बार फिर संसद में पेश किया जा सकता है। खबर है कि पहली बार परिसीमन बिल पर चोट के बाद भारतीय जनता पार्टी अब बड़ी प्लानिंग कर रही है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। खास बात है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहा है, जब पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और तमिलनाडु में द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम जैसे बड़े क्षेत्रीय दलों को चुनावी हार का सामना करना पड़ा है।  रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सरकार 2029 लोकसभा चुनाव से पहले एक देश एक चुनाव बिल पेश कर सकती है। खास बात है कि अप्रैल में संविधान संशोधन बिल फेल होने के बाद अब भाजपा नए सिरे से तैयारी कर रही है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि केंद्रीय गृहमंत्रालय नया परिसीमन बिल तैयार कर रहा है। पहले क्या हुआ था जब संसद में लोकसभा की सीटों की सीमाएं दोबारा तय करने वाला परिसीमन बिल लाया गया, तो कांग्रेस, डीएमके और टीएमसी जैसी सभी विपक्षी पार्टियों INDIA गठबंधन के 230 सांसदों ने एकजुट होकर इसका विरोध किया। विपक्ष का मुख्य ऐतराज इस बात पर था कि सरकार ने महिलाओं को आरक्षण देने वाले कानून को लोकसभा की सीटें बढ़ाने के विवादित मुद्दे से जोड़ दिया है। साथ ही, विपक्ष को यह बड़ा डर भी था कि आबादी के हिसाब से सीटें तय होने पर उत्तर भारत की तुलना में दक्षिण भारत के राज्यों की सीटें कम हो जाएंगी। क्षेत्रीय दल निभाएंगे बड़ी भूमिका रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा की ये कोशिशें हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के बाद तेज हुईं हैं। सूत्रों ने अखबार को बताया कि तमिलनाडु में हार और कांग्रेस के साथ छोड़ने के बाद DMK यानी द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम 'कुछ मुद्दों' पर भाजपा के साथ बातचीत के लिए तैयार है। कहा यह भी जा रहा है कि भाजपा की नजरें टीएमसी में जारी गतिविधियों पर भी हैं। ये अटकलें ऐसे समय पर सामने आईं हैं, जब बंगाल चुनाव में हार के बाद टीएमसी नेताओं में जमकर मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं। वहीं, पार्षद स्तर के नेता इस्तीफा सौंप रहे हैं। संघवाद प्रतिदिन की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया था कि कुछ सांसद टीएमसी छोड़कर भाजपा में जा सकते हैं। ONOE पर भी बड़े ऐक्शन की तैयारी फिलहाल, संसदीय समिति की तरफ से एक देश एक चुनाव विधेयक की समीक्षा की जा रही है। अखबार से बातचीत में जेपीसी के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा था, 'कानून में जल्द ही संशोधन किया जाएगा। रिपोर्ट के मामले में हम अच्छी प्रगति कर रहे हैं और हम समय पर रिपोर्ट जमा कर देंगे।' अखबार से बातचीत में भाजपा नेता ने कहा कि राज्यों में चुनावों को देखते हुए कानून को चरणों में लागू किया जा सकता है। इसके लिए उन्होंने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा, मणिपुर, हिमाचल प्रदेश और गुजरात चुनाव का हवाला दिया है। इन राज्यों में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। DMK किस मूड में रिपोर्ट के अनुसार, DMK के एक बड़े नेता ने कहा, 'परिसीमन सीटें बढ़ाने का काम और एक देश, एक चुनाव जैसे मुद्दों पर हमारी पार्टी का फैसला सिर्फ किसी राजनीतिक विचारधारा पर नहीं, बल्कि हमेशा तमिलनाडु के हक और फायदे को देखकर तय होता है। अगर केंद्र सरकार इस बात का पक्का भरोसा दे कि जिन राज्यों ने आबादी रोकने में अच्छा काम किया है, उन्हें संसद में सीटें कम करके सजा नहीं दी जाएगी। साथ ही सबकी सहमति से एक ऐसा फॉर्मूला बनाया जाए जिससे हमारी मौजूदा सीटों का हिस्सा सुरक्षित रहे, तो इस प्रस्ताव को ठुकराने की कोई वजह नहीं है। हमारी सबसे बड़ी चिंता बस यही है कि संसद में तमिलनाडु की आवाज कमजोर नहीं पड़नी चाहिए। DMK के एक पूर्व मंत्री ने अखबार से कहा, 'अभी हम गठबंधन करने के बारे में बिल्कुल नहीं सोच रहे हैं। बीजेपी के साथ हमारे मतभेद सबको अच्छे से पता हैं। लेकिन राजनीति में चीजें कभी हमेशा के लिए एक जैसी नहीं होतीं। भारतीय संसद के इतिहास में ऐसा पहले भी हुआ है जब पार्टियों ने खास मुद्दों पर सरकार का साथ दिया है या देश को संभालने के लिए मदद की है, जैसे वाजपेयी जी के समय में हुआ था। भविष्य का कोई भी फैसला उस समय के राजनीतिक हालात पर निर्भर करेगा और इस बात पर तय होगा कि तमिलनाडु के हक और राज्यों के अधिकार सुरक्षित हैं या नहीं।' खास बात है कि कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि सरकार को प्रक्रिया का पालन करना होगा। साथ ही कोई भी कदम उठाने से पहले सभी पार्टियों के साथ बात करनी होगी।

भारत-अमेरिका समझौता अंतिम चरण में, निर्णायक बैठकों का दौर आज से शुरू

 नई दिल्ली भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बड़ा अपडेट आया है, इसे लेकर अब फाइनल निर्णय हो सकता है. अमेरिका का एक हाई लेवल प्रतिनिधिमंडल सोमवार 1 जून को भारत की चार दिवसीय यात्रा पर दिल्ली पहुंचे और इसका उद्देश्य India-US अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना है. द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर 4 जून तक बैठकों का दौर चलेगा. अमेरिकी वार्ताकारों की टीम का नेतृत्व ब्रेंडन लिंच करेंगे, जबकि भारतीय प्रतिनिधिमंडल वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन के नेतृत्व में बात आगे बढ़ाएगा।  ट्रेड डील पर 99% बातचीत पूरी इस बीच केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि भारत और अमेरिका अपने प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने के करीब हैं और 99% बातचीत पूरी हो चुकी है, जबकि छोटी-मोटी समस्याओं का समाधान किया जा रहा है. उन्होंने आगे कहा कि भारत बहुत जल्द अमेरिका के साथ पहले BTA पर साइन करेगा. गोयल के मुताबिक, इस समझौते की औपचारिक घोषणा से पहले बचे हुए कुछ मुद्दों को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों के बीच आज 2 जून से 4 जून तक चर्चा जारी रहेगी।  4 जून तक भारत में US अधिकारी India-US ट्रेड पर बातचीत 7 फरवरी को जारी संयुक्त बयान के बाद शुरू हो रही है, जिसमें दोनों देशों ने बीटीए के पहले चरण के ढांचे या एक अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमति व्यक्त की थी. अब दोनों देशों को उस समझौते के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देना है. नई दिल्ली में 4 जून तक अमेरिकी अधिकारी रहेंगे और बातचीत के सिलसिले को आगे बढ़ाएंगे।  गौरतलब है कि वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने पिछले सप्ताह एक बयान में कहा था कि दोनों पक्षों ने भारत-अमेरिका अंतरिम समझौते के ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने और बाजार पहुंच, नॉन-टैरिफ उपायों, सीमा शुल्क और व्यापार सुविधा, निवेश प्रोत्साहन और आर्थिक सुरक्षा जैसे तमाम क्षेत्रों पर व्यापक बीटीए के तहत बातचीत को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है।  भारत को लेकर टैरिफ पर बात  ड्राफ्ट को देखें, तो अमेरिका ने भारत पर टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करने पर सहमति जताई थी. इसके अलावा रूसी तेल खरीदने पर भारतीय वस्तुओं पर लगने वाले 25% अतिरिक्त टैरिफ को हटा दिया था. हालांकि, इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा था और उनके टैरिफ को अवैध घोषित किया गया था. इस कानूनी झटके के बाद, ट्रंप ने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए सभी देशों पर 10% टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया था. टैरिफ की इस बदली स्थिति पर भी दोनों पक्ष बातचीत के दौरान पुनर्विचार कर सकते हैं।  भारत ने अगले पांच सालों में 500 अरब डॉलर मूल्य के अमेरिकी एनर्जी, प्रोडक्ट्स से लेकर विमान और विमान के पुर्जे, कीमती धातुएं, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला आयात करने की योजना के संकेत भी दिए हैं।  US राजदूत ने दिए ये सिग्नल एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते शुक्रवार को भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी संकेत दिया था कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. उन्होंने IIT Delhi में यूएस-इंडिया ट्रस्ट इनिशिएटिव कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था कि पिछले हफ्ते ही भारत ने उस ट्रेड डील के अंतिम 1% को अंतिम रूप देने के लिए वाशिंगटन डीसी में एक प्रतिनिधिमंडल भेजा था और अब यहां एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करेंगे. गोर ने आगे कहा था, 'हमें पूरी उम्मीद है कि अगले कुछ हफ्तों और महीनों में व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएंगे। 

महिलाओं के लिए खुशखबरी! अन्नपूर्णा योजना के तहत मिलेगा 3000 रुपये महीना

कलकत्ता पश्चिम बंगाल की महिलाओं के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। मध्यप्रदेश की लाड़ली बहना योजना की तर्ज पर अब बंगाल सरकार ने भी महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के लिए ‘अन्नपूर्णा योजना’ शुरू करने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कल्याणी में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि 27 मई से इस योजना के आवेदन फॉर्म बांटने शुरू कर दिए जाएंगे। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना खासतौर पर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए शुरू की गई है। सरकार का लक्ष्य है कि जरूरतमंद महिलाओं को समय पर आर्थिक सहयोग मिले, ताकि वे अपने दैनिक खर्च और परिवार की आवश्यकताओं को आसानी से पूरा कर सकें।  कौन-कौन महिलाएं होंगी पात्र अन्नपूर्णा योजना का लाभ लेने के लिए महिला आवेदक को कुछ जरूरी पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा। योजना के अनुसार आवेदक महिला भारत की नागरिक होनी चाहिए और पश्चिम बंगाल की निवासी होना आवश्यक है। महिला की आयु सामान्यतः 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। इसके अलावा आवेदक के परिवार की आय राज्य सरकार द्वारा निर्धारित सीमा के भीतर होनी चाहिए। आर्थिक रूप से कमजोर, विधवा, परित्यक्ता, बेरोजगार और निम्न आय वर्ग की महिलाओं को इस योजना में प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है। हालांकि अंतिम पात्रता मानदंड आवेदन फॉर्म के दिशा-निर्देशों में स्पष्ट रूप से दिए जाएंगे। कहां मिलेगा अन्नपूर्णा योजना का आवेदन फॉर्म मुख्यमंत्री के अनुसार अन्नपूर्णा योजना के आवेदन फॉर्म राज्य सचिवालय और संबंधित सरकारी कार्यालयों से प्राप्त किए जा सकेंगे। इसके अलावा जिला प्रशासन, ब्लॉक विकास कार्यालय (BDO ऑफिस), नगर निकाय कार्यालय और पंचायत कार्यालयों में भी फॉर्म उपलब्ध कराए जाने की संभावना है। सरकार जल्द ही एक आधिकारिक सूचना जारी कर फॉर्म वितरण केंद्रों की पूरी सूची सार्वजनिक करेगी, ताकि महिलाओं को आवेदन लेने में किसी तरह की परेशानी न हो।  आवेदन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज होंगे जरूरी योजना का लाभ लेने के लिए महिलाओं को आवेदन फॉर्म के साथ कुछ जरूरी दस्तावेज संलग्न करने होंगे। इनमें आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, बैंक पासबुक की कॉपी, पासपोर्ट साइज फोटो और आय प्रमाण पत्र शामिल हो सकते हैं। यदि आवेदक विधवा, तलाकशुदा या परित्यक्ता हैं तो संबंधित प्रमाण पत्र भी जमा करना पड़ सकता है। दस्तावेजों की सत्यता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी होगा, क्योंकि गलत जानकारी देने पर आवेदन निरस्त किया जा सकता है।  फॉर्म कैसे भरें और कहां जमा करें महिलाओं को आवेदन फॉर्म सावधानीपूर्वक भरना होगा। फॉर्म में नाम, पता, आधार नंबर, बैंक खाता विवरण, मोबाइल नंबर और पारिवारिक आय से जुड़ी जानकारी सही-सही भरनी होगी। फॉर्म भरने के बाद इसे संबंधित ब्लॉक कार्यालय, नगर निगम कार्यालय, पंचायत कार्यालय या जिला प्रशासन के निर्धारित केंद्रों पर जमा करना होगा। कुछ जिलों में ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी शुरू की जा सकती है।  फॉर्म भरते समय इन बातों का रखें ध्यान आवेदन करते समय सभी जानकारी स्पष्ट और सही दर्ज करें। बैंक खाता नंबर और IFSC कोड भरते समय विशेष सावधानी बरतें, क्योंकि इसी खाते में योजना की राशि भेजी जाएगी। फॉर्म जमा करने से पहले सभी दस्तावेजों की स्वप्रमाणित प्रतियां संलग्न करें और आवेदन की एक कॉपी अपने पास सुरक्षित रखें। गलत जानकारी या अधूरे दस्तावेज आवेदन खारिज होने का कारण बन सकते हैं।  महिलाओं के लिए बड़ी राहत साबित होगी योजना पश्चिम बंगाल सरकार का कहना है कि अन्नपूर्णा योजना महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करेगी। हर महीने मिलने वाली 3,000 रुपये की सहायता से महिलाएं घरेलू जरूरतें पूरी करने के साथ आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगी। यह योजना राज्य की लाखों महिलाओं के लिए राहत और सम्मानजनक जीवन का नया आधार बन सकती है। 

राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने तेज की तैयारी, इन नेताओं के नाम सबसे आगे

नई दिल्ली राज्यसभा की 24 सीटों और कुछ राज्यों की विधान परिषद सीटों के चुनाव को लेकर भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर बैठक की। बैठक में उम्मीदवारों के चयन और सहयोगी दलों के साथ सीटों के बंटवारे पर चर्चा हुई। पार्टी ने महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी कर दी। दिग्गजों का जमावड़ा प्रधानमंत्री आवास पर दो घंटे से ज्यादा चली केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा समेत चुनाव समिति के सदस्य मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार, बैठक में राज्यसभा की 24 सीटों में भाजपा को मिलने वाली लगभग एक दर्जन सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा की गई। राज्यों से आए नामों को लेकर केंद्रीय चुनाव समिति ने मंथन किया और कई सीटों पर अपनी राय बना ली है। बैठक में महाराष्ट्र और बिहार में विधान परिषद की सीटों को लेकर भी चर्चा की गई। क्या हुई चर्चा आंध्र प्रदेश में राज्यसभा की चार सीटों में भाजपा एक सीट की मांग कर रही है। हालांकि, पार्टी ने संकेत दिए हैं कि इस मामले में राज्य में गठबंधन के प्रमुख सहयोगी मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की राय को प्रमुखता दी जाएगी। गौरतलब है कि टीडीपी भाजपा के बजाय दूसरी सहयोगी जन सेना को एक सीट देना चाहती है। बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गृहमंत्री अमित शाह के साथ अलग से भी बैठक की है। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में राज्यसभा उम्मीदवारों, विधान परिषद के उम्मीदवार और सहयोगी दलों के साथ सीटों के तालमेल को अंतिम रूप दिया गया। साथ ही पश्चिम बंगाल में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी चर्चा की गई। इन नेताओं को टिकट मिलने के आसार सूत्रों के अनुसार, मणिपुर से पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह को पार्टी टिकट दे सकती है, जबकि रिटायर हो रहे दो केंद्रीय मंत्रियों जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू को भी टिकट दिए जाने की संभावना है। संगठन की अहम बैठक आज भाजपा की एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक सोमवार को पार्टी मुख्यालय में होगी। पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारी के साथ इस बैठक में प्रदेशों के अध्यक्ष और संगठन महामंत्री भी शामिल रहेंगे। बैठक में केंद्र सरकार के सत्ता में 12 साल पूरे होने और मौजूदा कार्यकाल के दो साल पूरे होने पर देशभर में किए जाने वाले कार्यक्रमों पर चर्चा होगी। साथ ही, संगठन के विभिन्न मुद्दों पर देशभर के संगठन मंत्रियों और प्रदेश अध्यक्षों से राष्ट्रीय अध्यक्ष अद्यतन राजनीतिक और संगठनात्मक जानकारी हासिल करेंगे। इन राज्यों में फैली हैं 24 सीटें चुनावी दौर से गुजरने वाली 24 सीटों में आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक से 4-4, मध्य प्रदेश, राजस्थान से 3-3, झारखंड से 2 और अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय और मिजोरम से 1-1 सीट है।

UP फतह के लिए BJP का बड़ा प्लान, आधी टीम बदलने की चर्चा; कई नेताओं की छुट्टी तय?

लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव अभी भले दूर दिखाई देता हो, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उसकी तैयारी लगभग युद्धस्तर पर शुरू कर दी है। पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं और हालिया संगठनात्मक गतिविधियों से संकेत मिल रहे हैं कि यूपी बीजेपी में बड़ा फेरबदल होने वाला है। चर्चा यह भी है कि संगठन की लगभग आधी टीम बदली जा सकती है और ऐसे नेताओं को हटाया जा सकता है जो लंबे समय से एक साथ कई पदों पर बने हुए हैं। यह बदलाव केवल चेहरे बदलने का मामला नहीं है, बल्कि 2024 लोकसभा चुनाव में मिले झटके के बाद बीजेपी की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके जरिए वह 2027 में सत्ता की हैट्रिक लगाने की तैयारी कर रही है।  आखिर बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी? 2024 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश बीजेपी के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक झटका साबित हुआ था। 80 सीटों वाले राज्य में बीजेपी और उसके सहयोगियों का प्रदर्शन अपेक्षा से कमजोर रहा, जबकि समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन ने बड़ी बढ़त हासिल की। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने महसूस किया कि केवल सरकार के कामकाज के भरोसे चुनाव नहीं जीता जा सकता, संगठन को भी उतना ही मजबूत करना होगा। हालांकि बाद के उपचुनावों में बीजेपी ने वापसी की, लेकिन पार्टी नेतृत्व यह मानकर चल रहा है कि 2027 की लड़ाई कहीं ज्यादा कठिन होगी। इसी वजह से बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन की समीक्षा की जा रही है। दोहरे पदों पर बैठे नेताओं पर क्यों है नजर? बीजेपी की संगठनात्मक संस्कृति हमेशा "एक व्यक्ति, एक जिम्मेदारी" की बात करती रही है। लेकिन समय के साथ कई नेता ऐसे हो गए हैं जो संगठन और सत्ता दोनों में प्रभावशाली पदों पर बने हुए हैं। सूत्रों के अनुसार पार्टी अब ऐसे नेताओं की सूची तैयार कर रही है जो एक से अधिक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। पार्टी का मानना है कि चुनावी तैयारी के दौर में संगठन को पूरा समय देने वाले नेताओं की जरूरत होगी। ऐसे में कुछ नेताओं को संगठन से और कुछ को सरकार से हटाकर नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। क्या आधी टीम बदल सकती है? हालिया रिपोर्टों में संकेत मिले हैं कि प्रदेश संगठन में 50 प्रतिशत तक बदलाव संभव है। क्षेत्रीय अध्यक्षों, मोर्चा अध्यक्षों और कई प्रमुख पदाधिकारियों को बदला जा सकता है। जिला स्तर पर इसकी शुरुआत भी दिखाई देने लगी है, जहां लगातार नए जिला अध्यक्षों की नियुक्तियां हो रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी 2027 से पहले संगठन में "एंटी-इन्कम्बेंसी" नहीं आने देना चाहती। लंबे समय से एक ही पद पर बैठे नेताओं को हटाकर नए चेहरों को मौका देना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सभी 6 क्षेत्रीय अध्यक्ष भी बदले जा सकते हैं। ब्रज, अवध, काशी, गोरखपुर आदि क्षेत्रों के अध्यक्षों में बदलाव संभावित है। नए क्षेत्रीय अध्यक्षों को अपनी टीम खुद चुनने की छूट मिलेगी, ताकि स्थानीय स्तर पर नई ऊर्जा आए। युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, किसान मोर्चा, OBC, SC, ST और अल्पसंख्यक मोर्चे सहित सातों मोर्चों के अध्यक्ष बदले जा सकते हैं। पंकज चौधरी के अध्यक्ष बनने के बाद करीब 70-95 जिलों में जिलाध्यक्ष बदले जा चुके हैं। गोरखपुर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी री-शफल हुआ है। यह राज्य स्तर के बदलाव की तैयारी माना जा रहा है। 61 'कठिन' सीटों पर सबसे ज्यादा फोकस बीजेपी ने 2027 के चुनावों के लिए एक खास रणनीति बनाई है। पार्टी सबसे पहले उन 61 विधानसभा सीटों पर काम कर रही है, जहां उसे 2012, 2017 और 2022 के लगातार तीन चुनावों में हार का सामना करना पड़ा है। इन 61 सीटों का भौगोलिक बंटवारा कुछ इस तरह है: इनमें से पूर्वी और पश्चिमी यूपी की 35 सीटों में से 27 सीटें 2022 में समाजवादी पार्टी (SP) ने जीती थीं। हालांकि, स्वार, रामपुर और कुंदरकी जैसे मुश्किल माने जाने वाले इलाकों में हुए उपचुनावों में जीत मिलने के बाद से बीजेपी का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। क्षेत्र                         कुल कठिन सीटें          प्रमुख जिले पूर्वी उत्तर प्रदेश             22                   आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर, मिर्जापुर पश्चिमी उत्तर प्रदेश         13                    सहारनपुर, मुरादाबाद, बिजनौर अन्य क्षेत्र                       26                   पूरे प्रदेश में फैली अन्य सीटें मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी बीजेपी के अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पार्टी नेताओं को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे चुनाव प्रचार के शुरुआती चरण में इन्हीं 61 मुश्किल सीटों को प्राथमिकता दें। इनमें से पूर्वी और पश्चिमी यूपी की 35 सीटों में से 27 सीटें 2022 में समाजवादी पार्टी (SP) ने जीती थीं। हालांकि, स्वार, रामपुर और कुंदरकी जैसे मुश्किल माने जाने वाले इलाकों में हुए उपचुनावों में जीत मिलने के बाद से बीजेपी का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। जातीय समीकरण भी बड़ी वजह बीजेपी का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट केवल संगठनात्मक नहीं, सामाजिक भी है। 2024 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने "PDA" (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जरिए कई वर्गों में अपनी पकड़ मजबूत की थी। इसके बाद बीजेपी ने भी सामाजिक समीकरणों पर नए सिरे से काम शुरू किया है। हालिया कैबिनेट विस्तार और संगठनात्मक चर्चाओं में ओबीसी, दलित और गैर-यादव पिछड़े वर्गों को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने पर जोर देखा गया है। योगी सरकार और संगठन में तालमेल पर फोकस बीजेपी नेतृत्व की एक बड़ी चिंता संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय भी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई बैठकों के बाद कैबिनेट विस्तार और संगठनात्मक फेरबदल की चर्चाएं तेज हुई हैं। माना जा रहा है कि सरकार और संगठन के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा किया जाएगा ताकि चुनावी तैयारियों में कोई भ्रम न रहे।