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युवाओं के भविष्य को संवार रहा ग्लोबल स्किल पार्क, साकार हो रहा CM डॉ. यादव का सपना

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विजन को साकार कर रहा ग्लोबल स्किल पार्क कौशल प्रशिक्षण से अंतर्राष्ट्रीय रोजगार तक पहुंच रहे मध्यप्रदेश के युवा तीन प्रशिक्षणार्थियों को मिला हंगरी जॉब भोपाल संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क कौशल विकास की उस नई कार्य संस्कृति का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है, जहां प्रशिक्षण केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को वैश्विक उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में विकसित हो रहा कौशल तंत्र अब युवाओं को अंतरराष्ट्रीय रोजगार अवसरों से भी जोड़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रदेश में कौशल विकास को औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार से जोड़ते हुए युवाओं के लिए नए अवसर निर्मित किए जा रहे हैं। इसी दिशा में कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल के मार्गदर्शन में प्रदेश में कौशल आधारित प्रशिक्षण व्यवस्थाओं को अधिक उद्योगोन्मुख और रोजगारपरक बनाया गया है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। इसी क्रम में संस्थान के बैच-9 के तीन विद्यार्थियों का चयन हंगरी में रोजगार के लिए हुआ है। चयनित विद्यार्थी हंगरी पहुंचकर अपने पेशेवर दायित्वों का निर्वहन प्रारंभ कर चुके हैं। यह उपलब्धि प्रदेश में विकसित हो रहे आधुनिक कौशल प्रशिक्षण मॉडल और उद्योगोन्मुख शिक्षा व्यवस्था को रेखांकित करती है। हंगरी में रोजगार प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में एडवांस्ड मैकेनिकल टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रम के विद्यार्थी लकी साहू तथा एडवांस्ड मैकेनिकल एंड इलेक्ट्रिकल सर्विसेज पाठ्यक्रम के विद्यार्थी रौशन कुमार एवं मयंक जांगिड़ शामिल हैं। सिवनी, चंपारण और दौसा जैसे क्षेत्रों से आने वाले इन विद्यार्थियों ने यह सिद्ध किया है कि अवसर और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिलने पर युवा वैश्विक स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना सकते हैं। एसएसआरजीएसपी में विद्यार्थियों को अत्याधुनिक मशीनों, सिम्युलेशन आधारित प्रशिक्षण, व्यवहारिक अभ्यास और उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किए गए पाठ्यक्रमों के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाता है। प्रशिक्षण प्रक्रिया में तकनीकी दक्षता के साथ-साथ कार्यस्थल अनुशासन, व्यावसायिक व्यवहार, सुरक्षा मानकों और अंतरराष्ट्रीय कार्य संस्कृति की समझ पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। यही कारण है कि संस्थान से प्रशिक्षित युवा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की अपेक्षाओं पर खरे उतर रहे हैं। कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) टेटवाल ने चयनित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि हंगरी में विद्यार्थियों का चयन प्रदेश के कौशल विकास मॉडल की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को प्रदर्शित करता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार युवाओं को केवल प्रशिक्षण नहीं, बल्कि रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य के साथ कार्य कर रही है। आधुनिक कौशल, व्यवहारिक प्रशिक्षण और उद्योगों की मांग के अनुरूप तैयार मानव संसाधन ही विकसित मध्यप्रदेश की आधारशिला बनेंगे। इन विद्यार्थियों की सफलता उस व्यापक परिवर्तन का संकेत है जिसमें मध्यप्रदेश के युवा अब स्थानीय सीमाओं से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। आने वाले समय में एसएसआरजीएसपी प्रदेश के अधिक से अधिक युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय रोजगार अवसरों से जोड़ते हुए कौशल विकास के क्षेत्र में नई उपलब्धियां स्थापित करेगा। हंगरी में इन तीनों विद्यार्थियों का चयन वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित औद्योगिक समूह SRF Limited में हुआ है। SRF विशेष रसायन, फ्लोरोकेमिकल्स, पैकेजिंग फिल्म्स और टेक्निकल टेक्सटाइल्स के क्षेत्र में कार्यरत भारत की अग्रणी विनिर्माण कंपनियों में से एक है, जिसकी उत्पादन इकाइयाँ भारत के साथ-साथ यूरोप के हंगरी सहित कई देशों में संचालित हैं। कंपनी अपनी उन्नत तकनीक, वैश्विक गुणवत्ता मानकों और नवाचार आधारित कार्य संस्कृति के लिए जानी जाती है। ऐसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कंपनी में रोजगार प्राप्त करना विद्यार्थियों के कौशल, प्रशिक्षण और पेशेवर दक्षता का प्रमाण है तथा यह दर्शाता है कि एसएसआरजीएसपी से प्रशिक्षित युवा वैश्विक उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को सफलतापूर्वक स्थापित कर रहे हैं।  

वैश्विक मंच पर भारत का दबदबा, अमेरिकी रक्षा मंत्री ने समुद्री शक्ति की जमकर तारीफ की

नई दिल्ली अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सिंगापुर में कहा कि भारत एक ताकतवर देश है और अपनी सेना को आधुनिक बना रहा है. साथ ही उन्होंने दावा किया कि पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति कराने में अहम भूमिका निभाई. हालांकि भारत इस दावे को पहले से नकारता आया है।  सिंगापुर में हर साल एक बड़ी सुरक्षा बैठक होती है जिसे शांगरी-ला संवाद कहते हैं. इसमें दुनियाभर के रक्षा मंत्री और सेना के बड़े अधिकारी आते हैं. इस साल 44 देश इसमें शामिल हुए. शनिवार को अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने यहां भाषण दिया और कई बड़ी बातें कहीं।  डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाक के बीच शांति कराई, हेगसेथ का दावा हेगसेथ ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति कराने में मदद की. बात यह है कि पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक आतंकी हमला हुआ था जिसमें 26 लोग मारे गए थे. इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन तक सैन्य टकराव हुआ. फिर दोनों देशों के बीच सीजफायर यानी युद्ध विराम हुआ।  ट्रंप और अमेरिका बार-बार यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने यह शांति कराई. लेकिन भारत शुरू से यह कहता आया है कि यह समझौता सीधे भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ. किसी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं थी. भारत ने किसी भी बाहरी मध्यस्थता को साफ नकारा है।  हेगसेथ ने यह भी कहा कि दोनों देश एक दूसरे को खतरे की नजर से देखते रहेंगे और दोनों अपनी सुरक्षा के लिए मिसाइल जैसी ताकत बढ़ाना चाहेंगे. लेकिन अमेरिका इनमें से किसी को अपना दुश्मन नहीं मानता।  पाकिस्तान की भी तारीफ, ईरान से शांति वार्ता में निभा रहा भूमिका हेगसेथ ने पाकिस्तान की भी खूब तारीफ की. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के फील्ड मार्शल और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ शांति वार्ता में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. यह एक अनोखा और अच्छा विकास है।  दरअसल पाकिस्तान इस वक्त अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ी शांति वार्ता में बीच का रास्ता बना रहा है. इस्लामाबाद दोनों देशों का भरोसेमंद दोस्त माना जाता है. पिछले महीने इस्लामाबाद में दोनों पक्षों की बैठक हुई लेकिन कोई डील नहीं हो पाई. पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने कहा है कि अगली बैठक जल्द ही इस्लामाबाद में होगी।  भारत की तारीफ, अमेरिका के साथ मिलकर हथियार बनाने की बात हेगसेथ ने भारत को लेकर कई अच्छी बातें कहीं. उन्होंने कहा कि भारत एक ताकतवर देश है और अपनी सेना को लगातार आधुनिक बना रहा है. भारत खासतौर पर हिंद महासागर में ताकत का संतुलन बनाए रखने में मदद कर रहा है।  उन्होंने यह भी बताया कि भारत बड़ी और भारी सैन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी फैक्ट्री और सप्लाई की व्यवस्था तैयार कर रहा है. अमेरिका ने भारत के साथ मिलकर हथियार और सैन्य उपकरण बनाने का वादा किया है. इसे को-प्रोडक्शन कहते हैं यानी दोनों देश साथ मिलकर बनाएंगे।  अमेरिका की बड़ी इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी क्या है? हेगसेथ ने यह भी बताया कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र यानी इंडो-पैसिफिक दुनिया का सबसे अहम इलाका है. अमेरिका इस इलाके में शांति और संतुलन बनाए रखना चाहता है. वह नहीं चाहता कि कोई एक देश पूरे इलाके पर अपना दबदबा बना ले. उन्होंने सीधे चीन का नाम लेते हुए कहा कि कोई भी देश, चीन सहित, इस इलाके में अपना वर्चस्व नहीं थोप सकता।  हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका चीन से कोई टकराव नहीं चाहता और ट्रंप के समय से अमेरिका-चीन के रिश्ते पहले से बेहतर हुए हैं।  अमीर देश अपनी सुरक्षा का खर्च खुद उठाएं हेगसेथ ने एक और बड़ी बात कही. उन्होंने कहा कि जो देश पैसे वाले हैं वे अपनी सुरक्षा का खर्च खुद उठाएं. अमेरिका अब उनके लिए पैसे नहीं लगाएगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका को सहयोगी चाहिए, न कि ऐसे देश जो सिर्फ उस पर निर्भर हों. जापान, साउथ कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, फिलीपींस और भारत जैसे देशों की उन्होंने तारीफ की कि वे अपनी रक्षा में खुद निवेश कर रहे हैं। 

बाबा बागेश्वर ने खोली ‘पर्ची’, कहा- PM मोदी से पहले ही बंद कर दिया था ये काम; नया चुनाव मॉडल जरूरी

छतरपुर बाबा बागेश्‍वर धीरेंद्र कृष्‍ण शास्‍त्री ने कहा कि भारत को अब “एक देश, एक चुनाव” की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ना चाहिए. उनके अनुसार देश में बार-बार होने वाले चुनाव न केवल हजारों करोड़ रुपये खर्च करवा रहे हैं, बल्कि प्रशासनिक मशीनरी और सुरक्षा बलों को भी लंबे समय तक चुनावी ड्यूटी में उलझाए रखते हैं. उनका ऐसा बयान सामने आया है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है. बद्रीनाथ धाम में कठिन साधना पूरी करने के बाद अपने अनुयायियों को संबोधित करते हुए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस बार किसी धार्मिक विषय के बजाय देश की चुनावी व्यवस्था पर खुलकर अपनी राय रखी।  धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में “वन नेशन, वन इलेक्शन” को लेकर पहले से ही राजनीतिक बहस जारी है. बागेश्वर महाराज ने कहा कि यदि पंच, सरपंच, पार्षद, मेयर, विधायक और सांसद तक के चुनाव एक साथ कराए जाएं तो देश का समय, धन और संसाधन तीनों बच सकते हैं. उन्होंने इसे केवल राजनीतिक सुधार नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से जुड़ा विषय बताया. उनके इस बयान ने समर्थकों के बीच उत्साह और राजनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।  चुनावी खर्च पर उठाया बड़ा सवाल धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि देश में लगभग हर साल किसी न किसी स्तर पर चुनाव होते रहते हैं. लोकसभा, विधानसभा, नगर निकाय और पंचायत चुनावों की वजह से लगातार सरकारी संसाधन खर्च होते हैं. उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव कराने में हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जिनका उपयोग विकास कार्यों में किया जा सकता है।  पंच से सांसद तक एक साथ चुनाव की वकालत बागेश्वर महाराज का कहना है कि यदि सभी चुनाव एक साथ कराए जाएं तो उम्मीदवारों को भी राहत मिलेगी. एक ही चुनावी अभियान में गांव के पंच से लेकर सांसद तक के उम्मीदवार जनता के बीच जा सकेंगे. इससे चुनावी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और कम खर्चीली बन सकती है।  प्रशासन और सुरक्षा बलों पर भी पड़ता है दबाव उन्होंने कहा कि हर चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अमला चुनावी ड्यूटी में लग जाता है. इससे कई बार नियमित प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं. यदि चुनाव एक साथ हों तो सुरक्षा बलों और सरकारी मशीनरी पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव भी कम होगा।  PM मोदी के कहने से पहले ही बंद कर दिया था यह काम बागेश्वर बाबा के नाम से प्रसिद्ध धीरेंद्र शास्त्री ने सीना ठोककर दावा किया है कि, यदि देश में डीजल पेट्रोल बचाने में सबसे ज्यादा योगदान किसी का है तो वह मैं हूं। उन्होंने कहा कि, यदि कोई कहे तो मैं लिखकर देने को तैयार हूं कि एक महीने में एक लीटर डीजल भी नहीं फूंका। बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री अपने तर्क और बयानों के लिए भी पहचाने जाते हैं। वे अल्हड़ और देसी और चुटीले अंदाज में बोलने के लिए फेमस है। उनका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वे दावा कर रहे हैं कि देश में यदि डीजल-पेट्रोल बचाने की बात आएगी तो सीना ठोक के कह सकता हूं कि सबसे ज्यादा मेरा योगदान हैं। वे पीएम मोदी द्वारा पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का जिक्र करते हुए बात कर रहे थे। सीना ठोककर बोले, मैं लिखकर देने को तैयार हूं धीरेंद्र शास्त्री कथा के दौरान यह बात पंडाल में मौजूद लोगों से कर रहे थे। उन्होंने पीएम मोदी की डीजल-पेट्रोल बचाने की अपील का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कोई यदि कहे तो मैं लिखकर देने को तैयार हूं, एक महीने में मैंने एक लीटर भी डीजल नहीं फूंका। बद्रीनाथ में गुप्ता साधना के बाद कथा कर रहे आपको बता दें कि धीरेंद्र शास्त्री बीते 25 दिन से उत्तराखंड देवभूमि में साधना कर रहे हैं। भगवान बद्रीनाथ के धाम में नारायण पर्वत की गुप्ता में एकातिंक साधना में लीन थे। एक छोटी सी गुफा में बर्फीले पहाड़ों के बीच वे साधना में ली थे। दो दिन पहले ही वे साधना पूरी कर नीचे आए और फिर नारायण पर्वत की 13 किलोमीटर की दुर्गम परिक्रमा भी की है।  आर्थिक मजबूती से जोड़ा मुद्दा अपने संबोधन में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने देश की आर्थिक स्थिति का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि दुनिया में डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है और ऐसे समय में भारत को संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग करना चाहिए. उनके अनुसार चुनावी खर्च में कमी लाकर विकास और बुनियादी ढांचे पर ज्यादा निवेश किया जा सकता है।  क्यों चर्चा में है ‘एक देश, एक चुनाव’? देश में लंबे समय से यह बहस चल रही है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं या नहीं. समर्थकों का तर्क है कि इससे चुनावी खर्च कम होगा और प्रशासनिक संसाधनों की बचत होगी. वहीं आलोचकों का मानना है कि इससे संघीय ढांचे और क्षेत्रीय मुद्दों पर असर पड़ सकता है. बागेश्वर महाराज का बयान इस बहस को धार्मिक और सामाजिक मंच से भी नई ऊर्जा देता दिखाई दे रहा है। 

झारखंड महिला टी20 टूर्नामेंट के लिए तैयार JSCA स्टेडियम, 3 जून से शुरू होगा रोमांच

रांची  इस टूर्नामेंट के सभी मुकाबले रांची के जेएससीए ओवल ग्राउंड में खेले जाएंगे. इस प्रतियोगिता में कुल चार टीमें हिस्सा लेंगी. इसमें कोल्हान डायनामोज, छोटानागपुर ब्लास्टर्स, संथाल चैलेंजर्स और पलामू वारियर्स जैसे टीमें खिताब के लिए आपस में भिड़ेंगी।  टूर्नामेंट का पूरा शेड्यूल इस प्रतियोगिता की शुरुआत 03 जून को होगी, जहां सुबह 08:00 बजे के पहले मुकाबले में कोल्हान डायनामोज का सामना छोटानागपुर ब्लास्टर्स से होगा. इसी दिन दोपहर 12:30 बजे टूर्नामेंट का दूसरा मैच संथाल चैलेंजर्स और पलामू वारियर्स के बीच खेला जाएगा. इसके बाद 04 जून को सुबह 08:00 बजे कोल्हान डायनामोज की टीम संथाल चैलेंजर्स के खिलाफ मैदान पर उतरेगी. वहीं, दोपहर 12:30 बजे होने वाले दूसरे मुकाबले में छोटानागपुर ब्लास्टर्स और पलामू वारियर्स की टीमें आमने-सामने होंगी।  लीग स्टेज का आखिरी मुकाबला  लीग चरण के अंतिम दिन यानी 06 जून को सुबह 08:00 बजे कोल्हान डायनामोज और पलामू वारियर्स के बीच भिड़ंत होगी. इसके बाद दोपहर 12:30 बजे छोटानागपुर ब्लास्टर्स का मुकाबला संथाल चैलेंजर्स से होगा, जिसके बाद फाइनल में पहुंचने वाली टॉप दो टीमों का फैसला हो जाएगा।  07 जून को होगा महामुकाबला लीग स्टेज का समापन होने के बाद, अंक तालिका की टॉप 2 टीमें सीधे फाइनल में अपनी जगह बनाएंगी. टूर्नामेंट का ग्रैंड फिनाले 07 जून को सुबह 09:30 बजे से खेला जाएगा, जहां इस सीजन की चैंपियन टीम का फैसला होगा। 

Mindy Kaling ने साझा किया तीसरी प्रेग्नेंसी का अनुभव, बोलीं- ‘इस बार सब कुछ ज्यादा सहज था’

लॉस एंजिल्स  हॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और लेखिका मिंडी कैलिंग एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी तीसरी प्रेग्नेंसी और उस दौरान के अनुभव को लेकर बात की। मिंडी ने बताया कि यह समय उनके लिए आरामदायक दौर था। इस दौरान उन्हें लंबे समय तक बेड रेस्ट पर रहना पड़ा, जिससे उन्हें खुद का समझने का अवसर मिला। मिंडी कैलिंग ने गिगली स्क्वाड पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान बताया, ''मेरी तीसरी प्रेग्नेंसी में डॉक्टरों ने मुझे लगभग छह हफ्तों तक पूरी तरह आराम करने की सलाह दी थी। इस दौरान मुझे ज्यादातर समय बिस्तर पर ही रहना पड़ा, जिससे मुझे खुद का ध्यान रखने का मौका मिला।'' बता दें कि मिंडी कैलिंग तीन बच्चों की मां है, कैथरीन, स्पेंसर, और एनी। एनी का जन्म फरवरी 2024 में हुआ था। अपने अनुभव को साझा करते हुए मिंडी कैलिंग ने कहा, ''बेड रेस्ट के दौरान भी मेरा काम पूरी तरह नहीं रुका। मैं घर से ही अपनी कई जरूरी मीटिंग्स और काम करती रहीं। मैं अक्सर बिस्तर पर लेटे-लेटे ही वीडियो कॉल के जरिए मीटिंग्स में शामिल होती थीं। इस दौरान मुझे महसूस हुआ कि जब कोई व्यक्ति मेडिकल कारण से आराम कर रहा हो, तो लोग इसे ज्यादा गंभीरता से लेते हैं, और यह मेरे लिए काम करने का एक सुविधाजनक तरीका बन गया।'' मिंडी ने कहा, ''इस दौरान मैं अक्सर पजामा पहनकर ही अपनी मीटिंग्स कर लेती थी। मुझे यह काफी आरामदायक लगता था और किसी भी तरह की औपचारिकता निभाने की जरूरत नहीं पड़ती थी। मेरे लिए यह एक अलग तरह का अनुभव था।'' अपनी प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ के बीच संतुलन पर बात करते हुए मिंडी ने बताया, "मैं तीन बच्चों की मां हूं और इसके बावजूद अपने काम को पूरी जिम्मेदारी से संभालती हूं। मातृत्व मेरे जीवन का एक बड़ा हिस्सा है, लेकिन मैंने कभी अपने करियर को इससे पीछे नहीं जाने दिया।'' मिंडी कैलिंग ने आगे कहा, ''मुझे मशहूर वेब सीरीज 'यूफोरिया' बहुत पसंद है, लेकिन मैं खुद ऐसा शो नहीं लिख सकती, क्योंकि मेरी दुनिया मेरे अनुभव और लेखन शैली से काफी अलग है। इस शो में ड्रग्स, रिश्तों और जटिल भावनाओं को बहुत गहराई से दिखाया गया है। यह बेहद प्रभावशाली है, लेकिन मेरी अपनी लेखन शैली उससे अलग है।'' मिंडी ने कहा, "मैं हमेशा उन कहानियों की ओर आकर्षित होती हूं, जिनमें संघर्ष करने वाले और अंडरडॉग लोग होते हैं। ऐसे किरदार जो शुरुआत में कमजोर लगते हैं, लेकिन अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से आगे बढ़ते हैं।"

मुख्यमंत्री बदलने की अटकलें तेज, 3 जून को DK शिवकुमार की ताजपोशी और कैबिनेट फेरबदल संभव

बेंगलुरु  कर्नाटक में चल रही सियासी उथल-पुथल के बीच बड़ा अपडेट सामने आया है। सूत्रों का कहना है कि डीके शिवकुमार 3 जून यानी बुधवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। उनके साथ 10 अन्य मंत्री भी शपथ ले सकते हैं। इसके बाद 18 जून के बाद कैबिनेट का विस्तार किया जा सकता है। राज्यसभा चुनाव होने के बाद कर्नाटक में कैबिनेट विस्तार की संभावना है। कैबिनेट में भी बड़ा फेरबदल राज्य सरकार में चल रहे नेतृत्व परिवर्तन के बीच पार्टी नेतृत्व शनिवार को होने वाली कांग्रेस विधायक दल (CLP) की एक महत्वपूर्ण बैठक की तैयारी कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि डीके शिवकुमार की कैबिनेट में 50 फीसदी नए चेहरे हो कते हैं कर्नाटक विधान परिषद के चीफ विप सलीम अहमद ने शुक्रवार को कहा कि कैबिनेट के गठन, क्षेत्रीय एवं सामाजिक (जातीय) प्रतिनिधित्व और संभावित उप-मुख्यमंत्रियों की नियुक्ति के संबंध में अंतिम निर्णय सीएलपी बैठक के बाद कांग्रेस आलाकमान की ओर से लिया जाएगा। शाम तक हो सकती है औपचारिक घोषणा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला इस बैठक में शामिल होने वाल हैं। शाम तक मुख्यमंत्री के नाम की औपचारिक घोषणा भी हो सकती है। इसके बाद शपथ ग्रहण की तारीख का भी ऐलान किया जा सकता है। बता दें कि मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के कांग्रेस आलाकमान के निर्देशों के बाद अपना इस्तीफा सौंप दिया है और राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने शुक्रवार को इस्तीफा स्वीकार कर लिया। कम नहीं होगा सिद्धारमैया का दबदबा राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधायकों, पिछड़ा वर्ग समूहों और जमीनी कार्यकर्ताओं पर श्री सिद्दारमैया की मजबूत पकड़ सत्ता के औपचारिक हस्तांतरण के बाद भी राज्य कांग्रेस की दिशा तय करती रहेगी। कांग्रेस आलाकमान सिद्दारमैया के प्रभावशाली 'अहिंडा' सामाजिक गठबंधन (जिसमें अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित शामिल हैं) को छेड़ने से बच रहा है। यह गठबंधन कर्नाटक में पार्टी की चुनावी सफलता का मुख्य केंद्र रहा है। राज्यसभा का ऑफर क्यों नकारा? राज्यसभा की भूमिका स्वीकार करने के बजाय कर्नाटक की राजनीति में ही सक्रिय रहने का सिद्दारमैया का फैसला साफ संकेत देता है कि वे राज्य के राजनीतिक मामलों में अपना सीधा प्रभाव बनाए रखना चाहते हैं। कांग्रेस नेतृत्व के सामने अब दो शक्ति केंद्रों के बीच संतुलन बनाने का कठिन काम है – सरकार पर शिवकुमार का नियंत्रण और पार्टी के सामाजिक व संगठनात्मक आधार पर सिद्दारमैया का प्रभाव। इसके अलावा, कांग्रेस के रणनीतिकारों को डर है कि इस नेतृत्व परिवर्तन से पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों का समर्थन कमजोर हो सकता है, क्योंकि ये वर्ग वर्षों से सिद्दारमैया के साथ मजबूती से जुड़े रहे हैं। सीएम बनने के बाद शुरू होगी असली चुनौती जानकारों का मानना है कि डीके शिवकुमार की असली परीक्षा पद संभालने के बाद शुरू हो सकती है, जहां उन्हें प्रशासनिक नियंत्रण सुनिश्चित करना होगा और साथ ही सिद्दारमैया के खेमे को कर्नाटक कांग्रेस के भीतर एक समानांतर राजनीतिक व्यवस्था के रूप में विकसित होने से रोकना होगा।

देश में नहीं थम रहा बाल विवाह, पश्चिम बंगाल टॉप पर; केरल और दिल्ली की सराहना

नई दिल्ली "पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब…" यह कहावत हम सब बचपन से सुनते आ रहे हैं, लेकिन आज भी हमारे देश की लाखों बेटियों के हाथों से किताबें छीनकर, उनके नाजुक कंधों पर घर-गृहस्थी का भारी बोझ लाद दिया जाता है। सपनों को पंख लगाने की उम्र में उन्हें शादी के मंडप में धकेल दिया जाता है। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) की ताजा सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) स्टैटिस्टिकल रिपोर्ट 2024 के विधिक और सांख्यिकीय आंकड़े बताते हैं कि तमाम कड़े कानूनों और जागरूकता अभियानों के बावजूद समाज से बाल विवाह (Child Marriage) का यह कूट डंक पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हर चौथी लड़की की शादी 21 से पहले देश में महिलाओं के विवाह की मौजूदा स्थिति को लेकर जारी हुए आंकड़े समाज की सोच पर कूट सवाल खड़े करते हैं। साल 2024 में भारत में जितनी भी महिलाओं की शादियां हुईं, उनका सांख्यिकीय गणित कुछ इस प्रकार है:     18 साल से कम (नाबालिग): 2.1% लड़कियां ऐसी थीं जिनकी विधिक उम्र पूरी होने से पहले ही शादी कर दी गई।     18 से 20 साल के बीच: 24.5% लड़कियों का विवाह इस उम्र में हुआ।     21 वर्ष या उससे अधिक: राहत की बात है कि 73.5% महिलाओं की शादी 21 साल के बाद हुई।     चौंकाने वाला सच: देश में आज भी हर चार में से एक महिला (करीब 26.6%) की शादी विधिक रूप से परिपक्व होने यानी 21 साल की उम्र पूरी करने से पहले ही कर दी जा रही है। हालांकि, अच्छी खबर यह है कि अब भारत में महिलाओं की शादी की औसत उम्र बढ़कर 23.1 वर्ष हो गई है। बाल विवाह में पश्चिम बंगाल टॉप पर अगर राज्यों के स्तर पर इस सामाजिक बुराई का कूट विश्लेषण करें, तो पूर्वी और मध्य भारत के हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं: बाल विवाह में पश्चिम बंगाल टॉप पर अगर राज्यों के स्तर पर इस सामाजिक बुराई का कूट विश्लेषण करें, तो पूर्वी और मध्य भारत के हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं: राज्य (States) बाल विवाह का प्रतिशत (18 साल से कम)** विधिक एवं कूट स्थिति (Current Status)** पश्चिम बंगाल 6.3% पूरे देश में शीर्ष (Top) स्थान पर, स्थिति सबसे गंभीर। झारखंड 4.9% देश में दूसरे स्थान पर, ग्रामीण इलाकों में दर अधिक। असम 2.8% पूर्वोत्तर राज्यों में सामाजिक सुधारों की गति धीमी। बिहार / ओडिशा 2.6% दोनों राज्यों में स्थिति समान रूप से चिंताजनक बनी हुई है। राजस्थान 2.4% ऐतिहासिक रूप से बदनाम यह राज्य अब राष्ट्रीय औसत के करीब आ रहा है। राष्ट्रीय औसत (2.1%) के बराबर और नीचे वाले राज्य गुजरात और मध्य प्रदेश: इन दोनों राज्यों में बाल विवाह का ग्राफ ठीक राष्ट्रीय औसत यानी 2.1% पर टिका है। दक्षिण और बड़े राज्य: तेलंगाना (1.8%), आंध्र प्रदेश (1.7%) और उत्तर प्रदेश (1.6%) की स्थिति राष्ट्रीय औसत से थोड़ी बेहतर है। पहाड़ी और औद्योगिक राज्य: उत्तराखंड में यह आंकड़ा 1.5%, जम्मू और कश्मीर में 1.2% और महाराष्ट्र में 1.0% दर्ज किया गया है।  दिल्ली और केरल ने पेश की मिसाल   इस स्याह तस्वीर के बीच देश के कुछ राज्यों ने कूट बदलाव की एक बेहद खूबसूरत और उम्मीद जगाने वाली मिसाल पेश की है: केरल: साक्षरता में अव्वल रहने वाले इस राज्य में बाल विवाह लगभग ना के बराबर यानी महज 0.04% रह गया है। दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली ने इस मोर्चे पर इतिहास रच दिया है। पूरे सर्वे के दौरान दिल्ली से बाल विवाह का एक भी मामला (0%) रिपोर्ट नहीं हुआ है। बेहतर प्रदर्शन: हिमाचल प्रदेश (0.4%), हरियाणा (0.7%), कर्नाटक व तमिलनाडु (0.8%) और पंजाब (0.9%) ने भी इस कुप्रथा को 1% से नीचे समेटने में विधिक सफलता पाई है।     ग्रामीण बनाम शहरी भारत   आमतौर पर माना जाता है कि शहरों में शिक्षा और जागरूकता के कारण बाल विवाह नहीं होते। राष्ट्रीय औसत भी यही कहता है कि ग्रामीण भारत में बाल विवाह 2.4% है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह महज 1.1% है। लेकिन पश्चिम बंगाल से आए आंकड़े समाजशास्त्रियों को चौंका रहे हैं। बंगाल के ग्रामीण इलाकों में बाल विवाह की दर 5.9% है, जबकि वहां के शहरी इलाकों में यह ग्राफ बढ़कर 7.6% तक पहुंच गया है, जो कि देश के शहरी औसत से सात गुना ज्यादा है। इसके विपरीत, झारखंड के ग्रामीण इलाकों में यह दर 5.8% है।  स्वास्थ्य और आर्थिक स्वतंत्रता पर असर स्वास्थ्य और विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि बेटियों के जीवन के साथ एक गंभीर खिलवाड़ है। शिक्षा पर ब्रेक: कम उम्र में शादी होने की वजह से लड़कियों को बीच में ही स्कूल-कॉलेज छोड़ना पड़ता है। स्वास्थ्य को खतरा: विधिक रूप से शारीरिक परिपक्वता आने से पहले ही वे गर्भवती हो जाती हैं, जिससे मातृ मृत्यु दर (MMR) और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य संबंधी कूट खतरे बढ़ जाते हैं। आर्थिक बेड़ियां: शिक्षा अधूरी रहने के कारण ये लड़कियां कभी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं बन पातीं और जीवनभर घरेलू निर्भरता के चक्रव्यूह में फंसी रह जाती हैं।  

स्टॉप लाइन और जेब्रा क्रॉसिंग पार करना पड़ेगा भारी, अमृतसर में AI कैमरे रखेंगे नजर

अमृतसर अमृतसर में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के लिए अब सावधान रहने का समय आ गया है। अमृतसर ट्रैफिक पुलिस ने आज से ऑनलाइन चालान प्रणाली को लागू कर दिया है। इसके तहत ट्रैफिक सिग्नलों और प्रमुख चौकों पर लगे लगभग 1300 सीसीटीवी कैमरों की मदद से नियम तोड़ने वालों पर नजर रखी जाएगी। आज से उल्लंघन होने पर स्वचालित रूप से ऑनलाइन चालान जारी किया जाएगा। इस संबंध में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (यातायात) अमनदीप कौर ने बताया कि इस व्यवस्था को पहले परीक्षण आधार पर शुरू किया गया था औ अब इसे पूरी तरह लागू कर दिया गया है। उन्होंने वाहन चालकों से अपील की कि वे ट्रैफिक सिग्नलों पर निर्धारित स्टॉप लाइन और जेब्रा क्रॉसिंग के पीछे ही अपने वाहन रोकें। यातायात पुलिस के अनुसार यदि कोई वाहन चालक स्टॉप लाइन पार करता है या जेब्रा क्रॉसिंग पर वाहन खड़ा करता है तो उसका ऑनलाइन चालान स्वतः दर्ज हो जाएगा। 1300 हाईटैक कैमरे रखेंगे नजर शहर में स्थापित तकरीबन 1300 कैमरे आधुनिक कैमरे दूर से ही वाहन नंबर पढ़ने और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की पहचान करने में सक्षम हैं। इससे पूरी चालान प्रक्रिया बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के संचालित की जा सकेगी। यातायात पुलिस का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा और वाहन चालकों में ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। साथ ही चौकों पर लगने वाले जाम और अव्यवस्था को भी काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा। जानें किन 7 चौको पर शुरू हुआ ई-चालान अधिकारियों के अनुसार शुरुआती चरण में यह प्रणाली शहर के कुछ प्रमुख चौकों पर लागू की जाएगी। इनमें नोवेल्टी चौक, क्रिस्टल चौक, न्यू रियाल्टो चौक, रेलवे स्टेशन के आसपास का क्षेत्र, भंडारी पुल और क्वींस रोड क्षेत्र शामिल हैं। इन स्थानों पर ट्रैफिक दबाव अधिक होने के कारण नियमों के उल्लंघन की घटनाएं भी ज्यादा सामने आती हैं। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कदम लोगों को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षित और व्यवस्थित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। ऐसे में वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे ट्रैफिक संकेतों का पालन करें और स्टॉप लाइन तथा जेब्रा क्रॉसिंग का सम्मान करें, ताकि अनावश्यक चालान से बचा जा सके।

MP राज्यसभा चुनाव में बड़ा सस्पेंस, कमलनाथ या किसी बाहरी चेहरे पर दांव लगाएगी कांग्रेस?

भोपाल  मध्य प्रदेश में 18 जून को राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव हैं। कांग्रेस के खाते में एक सीट जा रही है। यह सीट दिग्विजय सिंह की है। दिग्विजय सिंह पहले ही राज्यसभा जाने से मना कर चुके हैं। ऐसे में अटकलें हैं कि पूर्व सीएम कमलनाथ को राज्यसभा भेजा सकता है। बुधवार को नई दिल्ली में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की है। इसके बाद चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राज्यसभा की तीन सीटें हो रही हैं खाली मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं। इनमें दो सीटें बीजेपी की हैं। जनवरी में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने घोषणा की थी कि वह मध्य प्रदेश से जून में होने वाले राज्यसभा चुनावों के लिए कांग्रेस की एकमात्र सीट खाली कर देंगे। उम्मीदवारों की है लंबी सूची प्रदेश कांग्रेस सूत्रों के अनुसार जून में होने वाले राज्यसभा चुनावों के लिए एआईसीसी के पास उम्मीदवारों की एक लंबी सूची है। इस सूची में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पवन खेड़ा, पूर्व राज्यसभा सांसद बी के हरिप्रसाद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत सहित कई अन्य नाम शामिल हैं। कांग्रेस की आएंगी पांच सीटें वहीं, इस रेस में कमलनाथ का नाम शामिल होता है तो इससे चयन प्रक्रिया आसान नहीं होगी, क्योंकि राज्यसभा की कुल 26 सीटें खाली होने के बावजूद कांग्रेस के हिस्से में केवल पांच सीटें ही आएंगी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस की एक सीट खाली हो रही है। ऐसे में यह काफी महत्वपूर्ण है। कांग्रेस में नहीं मिला कोई पद दरअसल, 2022-23 में कमलनाथ को कथित रूप से एआईसीसी अध्यक्ष बनने का प्रस्ताव मिला था। 2024 में कमलनाथ और उनके बेटे नकुलनाथ को बीजेपी में जाने की चर्चा हुई थी। इसके बाद से कांग्रेस में उन्हें कोई पद नहीं मिला है। कमलनाथ छिंदवाड़ा से सांसद रह चुके हैं। अपनी सीट उन्होंने बेटे के लिए छोड़ दी थी लेकिन 2024 में नकुलनाथ चुनाव हार गए। माना जा रहा है प्रबल दावेदार वहीं, दिग्विजय सिंह के बाद मध्य प्रदेश के कमलनाथ ही कांग्रेस में ऐसे कद्दावर नेता हैं, जिनके नाम पर उम्मीद की जा सकती है कि क्रॉस वोटिंग न हो। इसी साल मार्च में हुए राज्यसभा चुनावों में हरियाणा और ओडिशा में कांग्रेस के लिए क्रॉस-वोटिंग एक बड़ी समस्या बनकर उभरी थी। प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों का दावा है कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के अलावा किसी अन्य उम्मीदवार को शायद ही 61 विधायकों का समर्थन मिल पाए। दो विधायक हैं वोट से वंचित मध्य प्रदेश में कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म हो गई है। विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा को वोटिंग का अधिकार नहीं है। तीसरी एमलए निर्मला सप्रे के खिलाफ हाईकोर्ट में दल बदल का मामला लंबित है। ऐसे में हो सकता है कि वह भी वोट न दें। एमपी से राज्यसभा की एक सीट पर जीत के लिए 58 विधायकों की जरूरत है। कांग्रेस के पास इस आंकड़े से सिर्फ तीन वोट अधिक हैं। इसलिए स्थिति नाजुक है। बीजेपी के पास हैं 165 विधायक वहीं, मध्य प्रदेश में बीजेपी के पास 165 विधायक हैं। ऐसे में दो सीटों पर उनकी जीत पक्की है। इसके बाद उनके पास 49 विधायक बचते हैं। राज्य बीजेपी के एक वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा कि अगर कांग्रेस के अंदर गुटबाजी होती है तो बीजेपी तीसरी सीट पर चुनाव करवाने का मौका भुनाने से पीछे नहीं हटेगी।

ममता बनर्जी को बड़ा झटका! अपने बूथ पर ही पिछड़े TMC नेता, EC रिपोर्ट ने खोली पोल

कलकत्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पहली बार पूर्ण बहुमत हासिल कर ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाली भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई मजबूत किलों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) द्वारा जारी बूथ स्तर के आंकड़ों से पता चलता है कि टीएमसी के प्रमुख 36 नेताओं में से केवल 14 नेता ही अपनी सीट बचा पाए हैं। टीएमसी 22 दिग्गज नेताओं को करारी हार का सामना करना पड़ा है। हैरान करने वाली बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई मौजूदा मंत्रियों को अपने ही घरेलू वॉर्डों और उन सीटों पर शिकस्त झेलनी पड़ी है, जिन्हें कभी टीएमसी का अभेद्य गढ़ माना जाता था। 16 वरिष्ठ टीएमसी नेता अपनी सीटों के महज एक-तिहाई या उससे भी कम पोलिंग बूथों पर जीत दर्ज कर सके। भवानीपुर में शुभेंदु अधिकारी का दबदबा भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी ने 2021 के उपचुनाव में बड़ी जीत हासिल की थी। वहां इस बार भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें करारी शिकस्त दी। यह लगातार दूसरा विधानसभा चुनाव है जब शुभेंदु ने ममता बनर्जी को पराजित किया है। भवानीपुर के कुल 270 पोलिंग बूथों में से ममता बनर्जी केवल 62 बूथों पर ही बढ़त बना सकीं। ममता बनर्जी ने अपने घरेलू पोलिंग स्टेशन बूथ संख्या 207 पर 63.33% वोट शेयर के साथ जीत जरूर दर्ज की, लेकिन वह पूरी सीट बचाने के लिए नाकाफी रहा। ममता केवल 54 बूथों पर 50% से अधिक वोट हासिल कर पाईं। शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर के 197 बूथों पर 50% से अधिक वोट शेयर के साथ एकतरफा जीत हासिल की, जिसमें 44 बूथ ऐसे थे जहां उन्हें 80% से अधिक वोट मिले। 3 मंत्रियों को नहीं मिला 15% बूथों पर भी समर्थन टीएमसी के चार प्रमुख चेहरे और मंत्री सुजीत बोस, ब्रात्य बसु, चंद्रिमा भट्टाचार्य और प्रदीप मजूमदार अपनी सीटों के कुल पोलिंग बूथों में से 15% बूथों पर भी जीत हासिल नहीं कर सके। इन चारों ही मंत्रियों को भाजपा उम्मीदवारों ने बड़े अंतर से हराया। केवल तीन टीएमसी मंत्री मोहम्मद गुलाम रब्बानी, अखरुज्जमां और सबीना यास्मिन ही ऐसे रहे जिन्होंने अपनी सीटों के 80% से अधिक पोलिंग बूथों पर शानदार जीत दर्ज की। अपने ही घर में घिरे नेता आंकड़ों के मुताबिक, इन 36 प्रमुख नेताओं में से 25 नेता उसी निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता के रूप में रजिस्टर्ड थे, जहां से वे चुनाव लड़ रहे थे। इन 25 नेताओं में से केवल 9 नेता अपने घरेलू पोलिंग बूथ पर जीत दर्ज कर सके, जिनमें से 6 अंततः अपनी पूरी सीट हार गए और केवल 3 को ही अंतिम जीत मिली। कुल मिलाकर, अपने घरेलू बूथ पर जीतने वाले 16 वरिष्ठ टीएमसी नेताओं में से सिर्फ 6 ही अपनी विधानसभा सीट जीत पाए। भाजपा की रणनीति रही सफल आंकड़े बताते हैं कि टीएमसी के दिग्गजों को बेदखल करने के लिए भाजपा ने बेहद रणनीतिक जीत दर्ज की। जिन 22 सीटों पर टीएमसी के बड़े नेता हारे उनमें से 15 सीटें ऐसी थीं जहां भाजपा ने कुल बूथों के 30% से भी कम हिस्से पर 50% से अधिक वोट शेयर हासिल किया था, फिर भी वे सीट जीतने में कामयाब रहे। भाजपा के सौरव सिकदार ने पूर्व वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य को हरा दिया, जबकि सिकदार केवल 3.78% बूथों पर ही 50% से अधिक वोट शेयर हासिल कर पाए थे। जीत का बड़ा अंतर जिन 22 सीटों पर टीएमसी के दिग्गज हारे, उनमें से 16 सीटों पर आधे से अधिक पोलिंग बूथों में भाजपा उम्मीदवार और टीएमसी उम्मीदवार के बीच 10 प्रतिशत से अधिक वोटों का फासला था। दूसरी तरफ, टीएमसी के जो 14 प्रमुख नेता चुनाव जीते हैं उनमें पूर्व विधानसभा अध्यक्ष चंद्रनाथ सिन्हा (बोलपुर) और पुलक रॉय (उलूबेरिया दक्षिण) शामिल हैं। ये दोनों नेता अपनी सीटों के आधे से अधिक बूथों पर भाजपा से 10% से अधिक वोटों से पिछड़ने के बावजूद अंतिम रूप से सीट जीतने में सफल रहे। टीएमसी के लिए सबसे एकतरफा और बड़ी जीत गोलपोखर में मोहम्मद गुलाम रब्बानी और सुजापुर में सबीना यास्मिन की सीटों पर दर्ज की गई।