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जून 2026 में 5 बड़े ग्रह बदलेंगे चाल, 5 राशियों की चमकेगी किस्मत

 ज्योतिष शास्त्र के नजरिए से जून 2026 का महीना बेहद खास और हलचल से भरा रहने वाला है.  इस महीने ब्रह्मांड के 5 सबसे प्रभावशाली ग्रह—गुरु, शुक्र, सूर्य, मंगल और बुध—अपनी चाल बदलने जा रहे हैं.  ग्रहों के इस बड़े फेरबदल (Grah Gochar) से कई दुर्लभ संयोग बनेंगे, जिसका सीधा असर सभी 12 राशियों के जीवन पर पड़ेगा. लेकिन 5 भाग्यशाली राशियां ऐसी हैं, जिनकी किस्मत का ताला इस महीने खुलने वाला है. इन जातकों को करियर में ऊंची उड़ान के साथ-साथ धन-दौलत और मानसिक शांति का बंपर लाभ मिलेगा. जून 2026 में कब-कब बदलेंगे ग्रह?इस महीने की शुरुआत से ही ग्रहों के गोचर का सिलसिला शुरू हो जाएगा: 2 जून (02:25 AM): सबसे पहले देवगुरु बृहस्पति (गुरु) का बड़ा गोचर होगा. 8 जून (05:47 PM): सुख-वैभव के दाता शुक्र कर्क राशि में प्रवेश करेंगे. 15 जून (12:58 PM): ग्रहों के राजा सूर्य देव मिथुन राशि में गोचर करेंगे. 21 जून (12:07 AM): ऊर्जा और साहस के कारक मंगल वृषभ राशि में कदम रखेंगे. 22 जून (03:41 PM): बुद्धि के देवता बुध कर्क राशि में प्रवेश करेंगे. इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत मेष राशि (Aries) –  राशि के जातकों के लिए जून का महीना पराक्रम और विजय लेकर आ रहा है. ग्रहों के शुभ प्रभाव से आपके भीतर एक नई ऊर्जा का संचार होगा, जिससे आप अपने दुश्मनों पर हावी रहेंगे. लाभ: लंबे समय से रुके हुए और अटके काम तेजी से पूरे होंगे. करियर व धन: आपकी आमदनी के फ्लो में कोई रुकावट नहीं आएगी.  सोशल नेटवर्क मजबूत होगा, जिसका सीधा फायदा आपके करियर को आगे बढ़ाने में मिलेगा. मिथुन राशि (Gemini) – आर्थिक संकटों से मुक्तिमिथुन राशि वालों के लिए यह गोचर आर्थिक मोर्चे पर किसी वरदान से कम नहीं है.  मां लक्ष्मी की विशेष कृपा से आपका फाइनेंशियल ग्राफ तेजी से ऊपर जाएगा. लाभ: आय के स्रोतों में बढ़ोतरी होगी और पुराना धन संकट दूर होगा. बिजनेस व परिवार: व्यापार विस्तार की योजनाएं इस समय सफल साबित होंगी. वैवाहिक जीवन में खुशियां रहेंगी और संतान सुख के योग भी बन रहे हैं. कर्क राशि (Cancer) – पद-प्रतिष्ठा और प्रमोशन का समयकर्क राशि के जातकों के लिए जून का महीना तरक्की के नए दरवाजे खोलने वाला है.  अगर आप लंबे समय से नौकरी में बदलाव या प्रमोशन की राह देख रहे थे, तो आपकी यह इच्छा पूरी हो सकती है. लाभ: समाज और कार्यक्षेत्र में आपका मान-सम्मान, पद और प्रभाव बढ़ेगा. धन व मानसिक शांति: कमाई के नए जरिया बनेंगे जिससे बैंक बैलेंस मजबूत होगा. घर-परिवार में मांगलिक या धार्मिक कार्य होने से मन को असीम शांति मिलेगी. कन्या राशि (Virgo) – सुख-संपत्ति में होगी भारी वृद्धिकन्या राशि के जातकों पर इस महीने धन की देवी मां लक्ष्मी मेहरबान रहेंगी.  आपके भौतिक सुख-साधनों में इजाफा होगा. लाभ: धन, वैभव, सुख और प्रॉपर्टी में बढ़ोतरी की प्रबल संभावना है. करियर व परिवार: नौकरीपेशा लोगों को आगे बढ़ने के बेहतरीन मौके मिलेंगे. माता का पूरा सहयोग और स्नेह मिलेगा, बस उनकी सेहत का थोड़ा ध्यान रखें. आपकी बातचीत की शैली (वाणी) लोगों को प्रभावित करेगी. वृश्चिक राशि (Scorpio) – यात्राओं से लाभ और अचानक धन प्राप्तिवृश्चिक राशि वालों के लिए जून का महीना अप्रत्याशित (unexpected) लाभ लेकर आ रहा है. कुछ ऐसे काम अचानक बन जाएंगे जिनकी आपने उम्मीद भी नहीं की होगी. लाभ: बिजनेस या नौकरी के सिलसिले में की गई यात्राएं बेहद फायदेमंद साबित होंगी. नए लोगों से संपर्क बढ़ेगा जो भविष्य में तरक्की का रास्ता साफ करेंगे. सावधानी: आर्थिक स्थिति मजबूत होने के बावजूद आपको फिजूलखर्ची पर थोड़ा कंट्रोल रखना होगा. महीने के अंत तक कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है.

दिल्ली बैठक से निकले बड़े संकेत, अभी बरकरार रहेगा पंजाब कांग्रेस प्रधान

चंडीगढ़ पंजाब कांग्रेस के नेताओं में खींचतान का मुद्दा दिल्ली में उठा। पार्टी हाईकमान ने पंजाब अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, पूर्व डिप्टी सीएम व सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा और पार्टी प्रभारी भूपेश सिंह बघेल को दिल्ली बुलाया था।   राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और केसी वेणुगोपाल के समक्ष हुई बैठक में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष को बदलने की मांग उठी। एक नेता ने गिद्दड़बाहा निकाय चुनाव में कांग्रेस की हार का जिक्र किया। यह इलाका अध्यक्ष वड़िंग का ही है।  हाईकमान ने विधानसभा चुनाव तक अध्यक्ष न बदलने का संकेत दिया। प्रभारी भूपेश बघेल ने बताया कि केसी वेणुगोपाल चार महीने पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं। उन्होंने इस मसले पर बार-बार बात न करने को कहा। बाजवा का बैठक छोड़ना और एकजुटता का निर्देश नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा बैठक बीच में ही छोड़कर चले गए। भूपेश बघेल ने बताया कि उन्हें अचानक काम पड़ गया था। उन्होंने सूचित करके जाने की बात कही। पार्टी ने सभी नेताओं को एकजुटता से आगे बढ़ने का निर्देश दिया है। कांग्रेस का लक्ष्य विधानसभा चुनाव जीतकर सरकार बनाना है। 

जन्मतिथि में 30 फरवरी लिखना पड़ा भारी, HC ने महिला को भारतीय मानने से किया इनकार

गुवाहाटी  गुवाहाटी हाईकोर्ट ने एक मुस्लिम महिला को भारतीय नागरिक मानने से इनकार करने वाले फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा है। इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने एक बेहद अजीबोगरीब तथ्य को उजागर किया। अदालत ने पाया कि महिला ने अपने दस्तावेजों में अपनी जन्मतिथि 30.02.1990 (30 फरवरी 1990) बताई थी, जो पूरी तरह से अमान्य और असंभव है। ऐसा इसलिए क्योंकि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार फरवरी के महीने में कभी 30 दिन होते ही नहीं हैं। जस्टिस संजय कुमार मेधी और जस्टिस प्रांजल दास की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि बिना किसी मजबूत दस्तावेजी सबूत के केवल मौखिक गवाही के आधार पर महिला का अपने पूर्वजों से संबंध स्थापित नहीं किया जा सकता है। क्या है पूरा मामला? यह मामला दिसंबर 2006 का है। दरंग मंगलदोई के पुलिस अधीक्षक ने महिला की राष्ट्रीयता पर संदेह जताते हुए एक संदर्भ फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल को भेजा था। ट्रिब्यूनल से इस मामले पर राय मांगी गई थी। नोटिस मिलने के बाद महिला ट्रिब्यूनल के सामने पेश हुई और खुद को भारतीय नागरिक साबित करने के लिए अपने लिखित बयान के साथ 9 दस्तावेज और गवाह पेश किए। उसने खुद को आकाश अली नाम के व्यक्ति का वंशज बताया, जिनका नाम 1966 की मतदाता सूची में शामिल था। कोर्ट ने क्यों खारिज किए दावे? महिला ने ट्रिब्यूनल के सामने कई दस्तावेज पेश किए थे। उनमें 1966 की मतदाता सूची भी थी, जिसमें उसके कथित दादा आकाश अली का नाम था। 1993 की मतदाता सूची में नूर इस्लाम (आकाश अली के बेटे) और जहूरा के नाम थे, जिन्हें महिला ने अपने माता-पिता बताया था। अदालत और ट्रिब्यूनल ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। दस्तावेजों को साबित नहीं किया जा सका ट्रिब्यूनल ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि केवल दस्तावेज जमा कर देने से उनके भीतर लिखी बातें सच साबित नहीं हो जातीं। दस्तावेजों की सत्यता की पुष्टि उन गवाहों द्वारा की जानी चाहिए जो उनके प्रामाणिक होने की गवाही दे सकें। महिला ने अपने हलफनामे में यह भी दावा किया कि उसके दादा आकाश अली का नाम 2010 की मतदाता सूची में अबू बकर के रूप में दर्ज था और ये दोनों नाम एक ही व्यक्ति के थे, जिसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया। अदालत ने विशेष रूप से इस बात पर ध्यान दिया कि याचिकाकर्ता द्वारा बताई गई जन्मतिथि 30 फरवरी 1990 पूरी तरह से अमान्य थी। केवल मौखिक गवाही काफी नहीं याचिकाकर्ता के वकील एम. देव ने दलील दी कि जमा की गई मतदाता सूचियां प्रमाणित प्रतियां थीं, जो साक्ष्य अधिनियम की धारा 74 के तहत सार्वजनिक दस्तावेज हैं। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि ट्रिब्यूनल की इस आपत्ति को छोड़ भी दिया जाए तब भी सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या याचिकाकर्ता अपने पूर्वज आकाश अली के साथ अपना संबंध साबित कर पाई? अदालत ने कहा, "यह पूरी तरह स्थापित कानून है कि ऐसे मामलों में केवल मौखिक गवाही लिंक स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं होती है। इसके लिए पुख्ता दस्तावेजी सबूत अनिवार्य हैं।" अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि चूंकि दस्तावेजों के मूल लेखकों या संबंधित अधिकारियों ने इसकी गवाही नहीं दी थी, इसलिए ट्रिब्यूनल द्वारा इन सबूतों को स्वीकार न करना किसी भी तरह से गैर-कानूनी नहीं था। इसी के साथ अदालत ने ट्रिब्यूनल के फैसले को सही ठहराते हुए महिला की याचिका खारिज कर दी।

चुनावी मुकाबले का अनोखा फैसला! पंजाब में कहीं सिक्का उछला, कहीं पर्ची ने तय की जीत

जालंधर. निकाय चुनावों में इस बार कई परिवारों ने राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ दिखाई। कहीं पति-पत्नी और बेटे ने जीत का परचम लहराया तो कहीं सास ने चुनावी मैदान मार लिया। वहीं कुछ राजनीतिक परिवारों को हार का भी सामना करना पड़ा। पंजाब के अलग-अलग शहरों से निकले ये दिलचस्प नतीजे चर्चा का विषय बने रहे। दोराहा नगर कौंसिल चुनाव में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार सुदर्शन कुमार शर्मा ने लगातार सातवीं बार जीत दर्ज कर नया रिकॉर्ड कायम किया। खास बात यह रही कि उनके परिवार ने भी चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया। अलग-अलग वार्डों से चुनाव लड़ रहीं उनकी पत्नी प्रिया शर्मा और पुत्र अनमोल शर्मा ने भी जीत हासिल की। तीनों की जीत के बाद दोराहा में पूरे परिवार की राजनीतिक पकड़ चर्चा में रही। मोहाली नगर निगम चुनाव में भी पति-पत्नी की जोड़ी ने जीत दर्ज की। वार्ड नंबर चार से हरविंदर सिंह और वार्ड नंबर तीन से उनकी पत्नी गुरमीत कौर विजयी रहीं। उधर, कोटकपूरा में भी एक ही परिवार के तीन सदस्यों ने जीत दर्ज कर सबका ध्यान खींचा। वार्ड नंबर 10 से आम आदमी पार्टी के स्वतंत्र जोशी विजयी रहे, जबकि वार्ड 11 से उनकी भाभी विजयप्रीत जोशी और वार्ड 16 से उनके बेटे एरन जोशी ने भी चुनाव जीत लिया। बठिंडा नगर निगम चुनाव में पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संघवी की सास हरबंस कौर ने जीत हासिल कर राजनीतिक हलकों में चर्चा बटोरी। मानसा में टास व पर्ची से हुआ विजेता का फैसला मानसा की नगर पंचायत जोगा और बोहा मैदो उम्मीदवार टास व पर्ची डालने के बाद जीते। जोगा के वार्ड नंबर एक में दो उम्मीदवारों को 141-141 वोट मिले। इसके बादटास में सीपीआई की सुखजिंदर कौर विजेता बनीं। बोहा के वार्ड नंबर 10 में दो उम्मीदवारों को 256-256 वोट मिलने के बाद डब्बे में से पर्ची निकाली गई। इसमें अकाली दल के गुरमीत सिंह विजेता बने। उधर, बटाला में आम आदमी पार्टी के कार्यकारी प्रधान शैरी कलसी के परिवार को झटका लगा। पार्टी टिकट पर चुनाव लड़ रहे उनके भाई अमृत कलसी और बहन उत्तमजीत कौर को कांग्रेस उम्मीदवारों के हाथों हार का सामना करना पड़ा। विनिंग नंबर है 65 मोहाली नगर निगम चुनाव में वार्ड नंबर 34 से आम आदमी पार्टी के सुखदेव सिंह पटवारी 65 वोट से जीते। वे पिछले निगम चुनाव में भी 65 वोट से ही जीते थे।

पर्यटकों को झटका! नंदनवन जू और जंगल सफारी की टिकट दरें बढ़ीं, AC बस किराया भी महंगा

रायपुर. नवा रायपुर के नंदनवन जू और जंगल सफारी में घूमना पर्यटकों के लिए अब महंगा हो सकता है. वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने जू के प्रवेश शुल्क, सफारी राइड और अन्य सुविधाओं की नई दरें जारी कर दी है. कई श्रेणियों में टिकट रेट 50% तक बढ़ाई गई हैं, जबकि कुछ कैटेगरी में यह बढ़ोतरी दोगुनी से भी अधिक है. नई प्रस्तावित दरों के अनुसार 6 से 12 साल तक के बच्चों का टिकट 25 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये और 12 वर्ष से अधिक आयु के आगंतुकों का टिकट 50 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये किया गया है. विदेशी नागरिकों के लिए यह शुल्क 200 रुपये से बढ़कर 500 रुपये हो गया है. वहीं दिव्यांगजन और 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को वैध पहचान पत्र के आधार पर फ्री एंट्री जारी रहेगी. हालांकि सुविधा यह वीकेंड, सार्वजनिक अवकाश और सरकारी छुट्टियों पर लागू नहीं होगी. सफारी टिकट भी महंगी सफारी के लिए 6 से 12 वर्ष के बच्चों का टिकट सामान्य बस में 100 रुपये, एसी बस में 150 रुपये और इलेक्ट्रिक बस में 175 रुपये लगेंगे. वयस्कों के लिए यह 150, 200 और 250 रुपये होगा. विदेशी पर्यटकों के लिए सफारी के लिए 750 रुपये से 1250 रुपये तक के रेट तय किए गए हैं. जिप्सी सफारी के नए रेट जिप्सी से सफारी घूमने के लिए प्रति व्यक्ति 700 रुपए और पूरी जिप्सी लेने पर 3,500 रुपए देना होगा. वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए यह दर 350 रुपये प्रति व्यक्ति और 2,000 रुपये प्रति जिप्सी रखी गई है. वहीं विदेशी पर्यटकों को प्रति व्यक्ति 1,500 रुपये और प्रति जिप्सी 7,000 रुपये शुल्क देना होगा. फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर लगेगा भी शुल्क अगर आपको जंगल सफारी और नंदनवन जू में फोटोग्राफी करनी है तो इसके लिए एक दिन का 5000 रुपये और कमर्शियल वीडियोग्राफी या फिल्म शूटिंग के लिए एक दिन का 15,000 रुपये शुल्क देना होगा. यह अनुमति संबंधित अधिकारियों की स्वीकृति के अधीन होगी. शैक्षणिक भ्रमण पर मिलेगी छूट सरकारी स्कूलों के कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को फ्री एंट्री दी जाएगी. वहीं कक्षा 9 से 12 तक के सरकारी स्कूलों के बच्चों को 50 प्रतिशत और निजी स्कूलों के छात्रों को 20 प्रतिशत की छूट मिलेगी.

CBI ने मेरठ कैंट बोर्ड के नामित सदस्य को रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचा

मेरठ यूपी में भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी मुहिम के तहत धड़ाधड़ कार्रवाई की जा रही है। विजिलेंस, एंटी करप्शन के बाद अब सीबीआई ने भी रिश्वतखोरों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मेरठ में सीबीआई ने कार्रवाई करते हुए मेरठ कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य डॉ. सतीश चंद्र शर्मा को तीन लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। सीबीआई की टीम देर रात तक इस मामले में पूछताछ करती रही। हालांकि पूरी कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। ​प्राप्त जानकारी के अनुसार भाजपा नेता और कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य डॉ. सतीश शर्मा ने किसी सरकारी कार्य के एवज में एक ठेकेदार से रिश्वत की मांग की थी। ठेकेदार ने इसकी शिकायत सीबीआई से की जिसके बाद टीम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जाल बिछाया। जैसे ही ठेकेदार ने रिश्वत की रकम डॉ. सतीश शर्मा को सौंपी मौके पर मौजूद सीबीआई की टीम ने उन्हें रंगेहाथ दबोच लिया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद सीबीआई की टीम ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए मेरठ के पल्लवपुरम स्थित अंसल टाउन में छापेमारी की। सूत्रों के अनुसार डॉ. सतीश शर्मा के आवास और अन्य ठिकानों पर दस्तावेजों की गहन छानबीन की जा रही है। ​सीबीआई की टीम फिलहाल मामले से जुड़े अन्य तथ्यों और संलिप्त लोगों की जानकारी जुटाने में लगी है। देर रात तक आगे की पूछताछ और कार्रवाई जारी थी। ​ कैंट बोर्ड में मचा हड़कंप ​कैंट बोर्ड के सदस्य की इस तरह से गिरफ्तारी के बाद से स्थानीय प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। यह घटना भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश मानी जा रही है। डॉ. सतीश चंद्र शर्मा भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं, भाजपा नेता होने के नाते ही उन्हें कैंट बोर्ड में फरवरी-2022 में सदस्य नामित किया गया था। तब से उन्हें हर छह माह पर अवधि विस्तार दिया जा रहा है। हापुड़ से जीएसटी विभाग का स्टेनो 24 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार वहीं दूसरी ओर हापुड़ में विजिलेंस की टीम ने रिश्वतखोर को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। टीम ने जीएसटी विभाग में सहायक आयुक्त राज्य कर खंड-4 के स्टेनो को 24 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़ा है। ग्राम दादरी निवासी चमन सिंह ने विजिलेंस टीम से शिकायत कर बताया था कि मोदीनगर रोड पर उसकी सावित्री बीज भंडार नाम से दुकान है। उन्होंने इसका जीएसटी नंबर लिया हुआ है। सहायक आयुक्त राज्य कर खंड-4 के स्टेनो जयदीप ने उनसे आठ मई को फोन कर अपने ऑफिस में आकर मिलने को कहा था। जब वह उनके ऑफिस गया तो स्टेनो जयदीप ने अपने कम्प्यूटर की स्क्रीन पर 48,000 रुपये का टैक्स शिकायतकर्ता की तरफ दिखाया। स्टेनो ने कहा कि अगर इसके आधे 24 हजार रुपये उसे दे दें तो वह सारे टैक्स को अपने स्तर पर खत्म कर देगा। चमन सिंह ने कहा कि उनके ऊपर ऐसा कोई टैक्स नहीं बनता है और न ही उसे किसी तरह का नोटिस दिया गया। अगर ऐसा कोई टैक्स बनता है तो वह उसे जमा करने को तैयार हैं। लेकिन स्टेनो जयदीप द्वारा 24 हजार रुपये की लगातार मांग की जाती रही। शिकायत के बाद विजिलेंस टीम ने आरोपी की धरपकड़ को जाल बिछाना शुरू कर दिया। शुक्रवार सुबह विजिलेंस टीम निरीक्षक रेनूका सिंह के नेतृत्व में रेवती कुंज स्थित जीएसटी कार्यालय पहुंची। चमन सिंह, स्टेनो जयदीप के पास पहुंचा और रिश्वत की रकम उसे सौंपी। जैसे ही आरोपी ने रुपये लिए विजिलेंस टीम ने तत्काल उसे दबोच लिया। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक मनीष चौहान ने बताया विजिलेंस टीम की तहरीर पर स्टेनो जयदीप के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है।

सावधान! बाजार में बिक रहे थे केमिकल वाले फल, छापेमारी में भारी मात्रा में केले जब्त

खैरागढ़. खैरागढ़ जिले में गर्मियों के मौसम में लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बड़ा अभियान चलाते ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। तीन दिनों तक चले विशेष जांच अभियान में सड़े-गले फल नष्ट कराए गए, गंदगी मिलने पर जूस सेंटर बंद कराया गया और केमिकल से फल पकाने वाले प्रतिष्ठान पर छापा मारकर बड़ी मात्रा में केले जब्त किए गए। कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल के मार्गदर्शन में चलाए गए इस अभियान का नेतृत्व अभिहित अधिकारी सिद्धार्थ पांडे ने किया। खाद्य सुरक्षा अधिकारी दीपक धृतलहरे की टीम ने जिले के फल बाजारों, मंडियों और प्रतिष्ठानों में लगातार निरीक्षण किया। छुईखदान के नया बस स्टैंड क्षेत्र में जांच के दौरान करीब 20 किलो सड़े-गले आम, 5 दर्जन केले, पपीता और अंगूर मौके पर नष्ट कराए गए। इसी दौरान एक गन्ना जूस सेंटर में भारी गंदगी और खुले में रखी बर्फ मिलने पर खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को गंभीर मानते हुए दुकान तत्काल बंद करा दी गई। इतवारी बाजार और पुराना बस स्टैंड क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए 15 किलो खराब आम, 20 दर्जन केले और 3 तरबूज नष्ट कराए गए। अभियान की सबसे बड़ी कार्रवाई 29 मई को गंडई तहसील के वार्ड नंबर 7 स्थित खंडेलवाल फल भंडार में हुई, जहां बिना खाद्य पंजीयन के हानिकारक केमिकल से फल पकाने का मामला उजागर हुआ। टीम ने छापेमारी के दौरान गोल्डन टच एथिलीन रिपनर, टैग पूरन 3G और टैगपान लिक्विड जैसे केमिकल बरामद किए। कच्चे आम और केले के नमूने जांच के लिए भेजे गए, जबकि अस्वच्छ तरीके से रखे गए 60 कैरेट केले जब्त किए गए, जिनकी कीमत लगभग 50 से 60 हजार रुपए बताई जा रही है। जांच के दौरान अधिकारियों ने साफ कहा कि कृत्रिम तरीके से फल पकाने, रसायनों के इस्तेमाल और खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर अब सख्त कार्रवाई होगी। अधिकारी सिद्धार्थ पांडे ने कहा कि आमजन की सेहत से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

पंजाब में फिर चला आम आदमी पार्टी का जादू, 8 में से 5 नगर निगमों पर किया कब्जा

चंडीगढ़  पंजाब के नगर निकाय चुनावों के नतीजों ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति की दिशा तय करने के संकेत दे दिए हैं. चुनाव नतीजों में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) सबसे मजबूत दल के रूप में उभरकर सामने आई है, जबकि कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) कुछ कम सफल रही हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन नतीजों का असर आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति और राजनीतिक समीकरणों पर साफ दिखाई देगा।  नगर निगम, पंचायतों और परिषदों में AAP का दमदार प्रदर्शन शाम 8 बजे तक उपलब्ध नतीजों और रुझानों के अनुसार, AAP ने नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया. आठ नगर निगमों में से पांच पर आम आदमी पार्टी ने कब्जा जमाया. पार्टी ने बरनाला, मोहाली, मोगा, बठिंडा और बटाला नगर निगमों में जीत हासिल की. वहीं कांग्रेस को कपूरथला नगर निगम में सफलता मिली. भाजपा ने अबोहर नगर निगम में जीत दर्ज की, जबकि पठानकोट नगर निगम में वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।  75 नगर परिषदों में से 40 पर पार्टी की जीत नगर परिषद चुनावों में भी AAP ने बढ़त बनाए रखी. राज्य की 75 नगर परिषदों में से 40 पर पार्टी ने जीत हासिल की. कांग्रेस 18 परिषदों तक सीमित रही, जबकि शिरोमणि अकाली दल को 10 परिषदों में जीत मिली. भाजपा के खाते में चार नगर परिषदें गईं, जबकि तीन परिषदों में निर्दलीय और अन्य उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।  11 नगर पंचायतों पर काबिज आम आदमी पार्टी नगर पंचायतों के नतीजों में भी आम आदमी पार्टी सबसे आगे रही. जिन 20 नगर पंचायतों में मतदान हुआ था, उनमें से 11 पर AAP ने जीत दर्ज की. कांग्रेस को पांच, शिरोमणि अकाली दल को दो और भाजपा को एक नगर पंचायत में सफलता मिली. एक सीट अन्य उम्मीदवारों के खाते में गई।  अगर सभी 104 निकायों के कुल प्रदर्शन को देखा जाए तो आम आदमी पार्टी ने 56 निकायों में जीत हासिल कर अपना दबदबा कायम रखा है. कांग्रेस 24 निकायों में जीत दर्ज करने में सफल रही, जबकि शिरोमणि अकाली दल के खाते में 12 निकाय गए. भाजपा ने 6 निकायों में जीत हासिल की. वहीं पठानकोट नगर निगम में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।  वार्ड स्तर पर भी आम आदमी पार्टी का दबदबा वार्ड स्तर पर भी आम आदमी पार्टी का दबदबा देखने को मिला. राज्य के सभी 1,977 वार्डों के नतीजे घोषित हो चुके हैं. इनमें आम आदमी पार्टी ने 958 वार्डों में जीत दर्ज कर सबसे बड़ा दल बनने में सफलता हासिल की. कांग्रेस 397 वार्डों के साथ दूसरे स्थान पर रही. शिरोमणि अकाली दल को 192 वार्डों में जीत मिली, जबकि भाजपा ने 172 वार्डों पर कब्जा जमाया. वहीं 251 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के उम्मीदवारों ने 7 वार्डों में जीत दर्ज की. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि निकाय चुनावों के ये नतीजे 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण संकेत हैं. आम आदमी पार्टी इन परिणामों को अपनी सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर के रूप में पेश कर सकती है. वहीं कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा के लिए यह परिणाम संगठन को मजबूत करने और नई रणनीति तैयार करने का अवसर भी माना जा रहा है. ऐसे में पंजाब की राजनीति में आने वाले महीनों में मुकाबला और अधिक दिलचस्प होने के आसार हैं।  कहां किसने दर्ज की जीत नगर निगम -8 आम आदमी पार्टी – 5 (बरनाला, मोहाली, मोगा, भटिंडा, बटाला) कांग्रेस – 1 (कपूरथला जीते) बीजेपी – 1  (अबोहर) पठानकोट – बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी लेकिन बहुमत नहीं। नगर काउंसिल – 75 आम आदमी पार्टी – 40 कांग्रेस – 18 शिरोमणि अकाली दल – 10 बीजेपी – 4 अन्य – 3 नगर पंचायत – 21 (एक पर कानूनी कारणों से चुनाव नहीं) – 20 आम आदमी पार्टी – 11 कांग्रेस – 5 शिरोमणि अकाली दल – 2 बीजेपी -1 अन्य -1 ओवरऑल पंजाब कुल निकाय – 104 आम आदमी पार्टी – 56 कांग्रेस – 24 बीजेपी – 6 शिरोमणि अकाली दल – 12 कुल वॉर्ड – 1977 नतीजे -1977 आम आदमी पार्टी – 958 कांग्रेस – 397 बीजेपी – 172 अकाली दल – 192 निर्दलीय – 251 बीएसपी – 7

होर्मुज को लेकर बढ़ा तनाव, ट्रंप बोले- शांति समझौता करीब; ईरान ने कहा- सब झूठ

तेहरान  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओऱ से ईरान के साथ संभावित समझौते का दावा किए जाने के तुरंत बाद ईरानी मिलिट्री के जुड़ी मीडिया ने उनके बयानों को खारिज कर दिया. ट्रंप ने कहा था कि तेहरान बिना किसी शुल्क के होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए 'मजबूर' हो गया है, लेकिन ईरान ने इसे तथ्यों और झूठ का मिश्रण बताते हुए कहा कि यह तेहरान में विचाराधीन समझौते का सही ड्रॉफ्ट नहीं है।  'काल्पनिक जीत दिखाने की कोशिश में ट्रंप' ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ी समाचार एजेंसी फर्स न्यूज ने वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से कहा कि ट्रंप के बयान "काल्पनिक जीत दिखाने की कोशिश" हैं।  रिपोर्ट के मुताबिक, 'Commitment for Commitment' नाम से प्रस्तावित समझौता ईरान में अंतिम मंजूरी के चरण में है, हालांकि अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. व्हाइट हाउस में वेस्ट एशिया क्राइसिस को लेकर एक अहम बैठक में शामिल होने से पहले ट्रंप ने दावा किया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य में लगी पाबंदियां लगभग समाप्त हो चुकी हैं और समुद्री यातायात सामान्य होने लगा है. यह जलमार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।  क्या है अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा? ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'ईरान तुरंत बचे हुए बारूदी सुरंगों को हटाएगा या निष्क्रिय करेगा. हमारी अभूतपूर्व नौसैनिक नाकेबंदी अब हटाई जा रही है और जलडमरूमध्य में फंसे जहाज अपने घर लौटने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं.' उन्होंने यह भी कहा कि 'अगली सूचना तक कोई धनराशि का आदान-प्रदान नहीं होगा' और कुछ अन्य मुद्दों पर भी सहमति बन चुकी है।  'होर्मुज को फिर खोलने की प्रोसेस ईरान की शर्तों पर' हालांकि ईरानी मीडिया ने दोहराया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की प्रक्रिया ईरान की शर्तों के अनुसार होगी. इसमें जहाजों की निगरानी, निरीक्षण, समुद्री सेवाएं और सुरक्षा संबंधी उपाय शामिल हो सकते हैं. रिपोर्ट में कहा गया कि बिना किसी शुल्क या शर्त के जलडमरूमध्य खोलने पर सहमति बनने का ट्रंप का दावा गलत है और मसौदा समझौते में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।  फ्रीज संपत्तियों को जारी करना भी ड्राफ्ट का हिस्सा फर्स न्यूज ने ट्रंप के उस दावे को भी खारिज किया जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान अपने परमाणु सामग्री भंडार को नष्ट करेगा. रिपोर्ट के अनुसार, जानकार सूत्रों ने इस दावे को पूरी तरह निराधार बताया है और कहा है कि समझौता ज्ञापन (MoU) में ऐसा कोई प्रावधान मौजूद नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, समझौते के ड्राफ्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ईरान की लगभग 12 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों को तत्काल जारी करना है. तेहरान का कहना है कि जब तक यह राशि जारी नहीं की जाती, तब तक वह बातचीत के अगले स्टेप में आगे नहीं बढ़ेगा।  इसके अलावा लेबनान में पूर्ण युद्धविराम, जो हिज्बुल्लाह के रुख के अनुरूप हो, भी बातचीत का एक अहम मुद्दा बताया गया है. ईरानी अधिकारियों के अनुसार, प्रतिबंधों में राहत और परमाणु कार्यक्रम पर आगे की बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब उसकी प्रमुख शर्तें पूरी होंगी. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि किसी भी अंतिम समझौते का आधार ईरान की "रेड लाइन्स" और अमेरिका के प्रति उसका 'पूर्ण अविश्वास' रहेगा।   

मान सरकार का बड़ा कदम! पंजाब में ग्रुप C-D भर्ती से खत्म हो सकता है ठेकेदारी सिस्टम

चंडीगढ़  पंजाब कैबिनेट की एक अहम बैठक दोपहर 12 बजे होगी। बैठक में ग्रुप सी और डी में ठेकेदारी सिस्टम खत्म करने पर फैसला लिया जा सकता है। इस मीटिंग में ग्रुप-सी और डी में ठेकेदारी सिस्टम को खत्म करने के फैसले पर मुहर लग सकती है। इसके बाद सरकार अपने सभी विभागों में खुद ही भर्तियां करेगी। पंजाब की मौजूदा सरकार शुरू से ही ठेका मुलाजिमों को लेकर गंभीर रही है। 22 मार्च 2022 को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शपथ ग्रहण करने के कुछ ही दिनों बाद ही ग्रुप-सी और ग्रुप-डी के 35 हजार कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने की घोषणा की थी। इसके साथ ही उन्होंने मुख्य सचिव को इस संबंध में मसौदा (ड्राफ्ट बिल) तैयार करने के निर्देश दिए थे। फिर 5 सितंबर 2022 को पंजाब कैबिनेट ने संविदा शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को नियमित करने संबंधी कल्याणकारी नीति को औपचारिक मंजूरी दी। वहीं, 21 फरवरी 2023 को पंजाब मंत्रिमंडल की बैठक में 14,417 संविदा कर्मचारियों की सेवाओं को तत्काल प्रभाव से नियमित करने के प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी प्रदान की गई। पंजाब सरकार ने अपने 4 वर्ष के कार्यकाल में कुल 65,264 युवाओं को पक्की सरकारी नौकरियां देने का दावा किया है। सरकार का दावा है कि उसके कार्यकाल के दौरान औसतन 45 युवाओं को प्रतिदिन सरकारी नौकरी मिली है। सरकारी नौकरियों के साथ-साथ औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देकर राज्य में करीब साढ़े 5 लाख निजी रोजगार के अवसर भी सृजित किए गए हैं।