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WHO की चेतावनी के बाद रायपुर एयरपोर्ट सतर्क, बाहर से आने वाले हर यात्री की हो रही स्क्रीनिंग

रायपुर   इबोला वायरस को लेकर वैश्विक स्तर पर बढ़ती चिंता के बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर अलर्ट जारी कर दिया गया है. स्वास्थ्य विभाग ने बाहरी राज्यों और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की अनिवार्य जांच शुरू कर दी है. अभी तक भारत में इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारें एहतियाती तौर पर पूरी तरह सतर्क हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर एयरपोर्ट और अन्य प्रवेश बिंदुओं पर निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।  रायपुर एयरपोर्ट पर सख्ती, यात्रियों की जांच अनिवार्य इबोला संक्रमण की आशंका को देखते हुए छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने रायपुर एयरपोर्ट पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं. एयरपोर्ट पर आने वाले यात्रियों की स्वास्थ्य जांच अनिवार्य कर दी गई है. इसके लिए एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति भी की जा रही है, जो स्क्रीनिंग, निगरानी और आपातकालीन व्यवस्था का समन्वय करेगा. संदिग्ध लक्षण वाले यात्रियों की तुरंत पहचान कर उन्हें आइसोलेशन और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।  देशभर में निगरानी तेज, केंद्र सरकार अलर्ट मोड में इबोला के खतरे को लेकर केंद्र सरकार भी सतर्क है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल भारत में इबोला का एक भी मामला सामने नहीं आया है, लेकिन एहतियात के तौर पर सभी व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है. देश के सभी एयरपोर्ट, बंदरगाह और सीमावर्ती क्षेत्रों पर स्क्रीनिंग और निगरानी बढ़ा दी गई है. एनसीडीसी, आईसीएमआर और अन्य एजेंसियों को ट्रैकिंग, टेस्टिंग और सर्विलांस के लिए लगातार तैयार रहने को कहा गया है।  WHO के अलर्ट के बाद बढ़ी सतर्कता विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में अफ्रीका के कांगो और युगांडा में फैले इबोला प्रकोप को ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न' घोषित किया है. इस प्रकोप के बाद दुनिया भर के देशों ने निगरानी बढ़ा दी है. भारत में भी इसी के चलते एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य जांच को अनिवार्य किया गया है।  SOP और एडवाइजरी जारी, राज्यों को निर्देश स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इनमें स्क्रीनिंग, क्वारंटाइन, इलाज, लैब जांच और संक्रमण रोकथाम से जुड़े प्रोटोकॉल शामिल हैं. साथ ही, अंतरराष्ट्रीय यात्रियों में बुखार या अन्य लक्षणों पर विशेष नजर रखने और तुरंत रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।  क्या है इबोला और कितनी है गंभीरता इबोला एक खतरनाक वायरल रोग है, जिसमें मृत्यु दर काफी अधिक होती है. यह संक्रमित व्यक्ति या जानवर के खून और शारीरिक तरल पदार्थ के संपर्क से फैलता है. इसके लक्षणों में तेज बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, उल्टी, दस्त और गंभीर मामलों में रक्तस्राव शामिल हैं. इस बीमारी का ऊष्मायन काल 2 से 21 दिनों तक हो सकता है।  फिलहाल भारत सुरक्षित, लेकिन सतर्कता जरूरी स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि भारत में अभी तक इबोला का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है. हालांकि वैश्विक यात्रा और संक्रमण के खतरे को देखते हुए सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती. रायपुर समेत देशभर के एयरपोर्ट पर बढ़ाई गई निगरानी और सख्ती इसी दिशा में उठाया गया एहतियाती कदम है, ताकि समय रहते किसी भी खतरे को टाला जा सके। 

गंगा दशहरा पर CM डॉ. यादव ने किया श्रमदान, देवी सागर तालाब सफाई अभियान में लिया हिस्सा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गंगा दशहरा पर देवी सागर तालाब में किया श्रमदान धार के ऐतिहासिक देवी सागर तालाब के गहरीकरण कार्य का हुआ शुभारंभ  धार  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धार जिले के धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के देवी सागर तालाब के गहरीकरण कार्य का शुभारंभ कर स्वयं श्रमदान भी किया। जल संरक्षण और जल स्रोतों के संवर्धन को लेकर राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत गंगा दशहरा के अवसर पर हुए इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देवी तालाब में विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया तथा श्रमदान कर जल बचाने में जन-सहभागिता का संदेश भी दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक सामाजिक अभियान है। प्रदेशभर में जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से जल बचाने और पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने में सहभागिता निभाने का आह्वान किया। इस अवसर पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, नगरीय विकास एवं आवास तथा धार जिले के प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व मंत्री राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव, विधायिका श्रीमती नीना विक्रम वर्मा, विधायक कालू सिंह ठाकुर सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि गंगा दशहरा उत्सव प्रदेशभर में एक साथ मनाया गया। इसके अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों में जल स्रोतों का पूजन किया गया तथा गंगा कलश यात्राएं भी निकाली गईं। कार्यक्रमों के माध्यम से जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता का संदेश दिया गया। धार के देवीसागर तालाब का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व देवी सागर तालाब धार के ऐतिहासिक साढ़े बारह तालाबों में से एक प्रमुख जल संरचना है। ऐतिहासिक जल प्रबंधन धार के परमार राजाओं और बाद में पवार शासकों ने जल संरक्षण की अद्भूत तकनीकों का विकास किया था। यह बरसों से धार नगर को जलापूर्ति की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। धार नगर के साढ़े बारह तालाब कुशल इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है। देवी सागर तालाब के संरक्षण के लिए नगरीय निकाय द्वारा प्रतिवर्ष जन जागृति अभियान चलाकर सामाजिक संगठनों के सहयोग से तालाब की निरंतर सफाई कराई जाती है। इस तालाब की निर्माण योजना ऐसी थी कि अन्य ऊपरी तालाबों का अतिरिक्त पानी बहकर इस झील में आता था, जो शहर की जलापूर्ति हमेशा बनाए रखने में सहायक है। इस तालाब के किनारे ऊँची पहाड़ी पर स्थित गढ़ कालिका माता मंदिर देश भर के श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण आस्था का केंद्र है। शांत और सुरम्य वातावरण के कारण यह स्थान स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण स्थल है।  

रेलवे की हाईटेक पहल, AI कैमरों से ट्रेनों की होगी मॉनिटरिंग; हादसे रोकने में मिलेगी मदद

फरीदाबाद  देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल दिल्ली-मुंबई रूट पर ट्रेन हादसों को रोकने के लिए रेलवे अब हाईटेक तकनीक का सहारा लेने जा रहा है। फरीदाबाद रेल सेक्शन में एमवीआईएस ( मशीन विजन इंस्पेक्शन सिस्टम ) लगाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। यह सिस्टम ट्रेनों के पहियों और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जों की निगरानी करेगा और किसी भी तकनीकी खराबी की जानकारी तुरंत कंट्रोल रूम तक पहुंचाएगा। इस सिस्टम को उत्तर रेलवे के दिल्ली डिवीजन में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लगाने की तैयारी है। ये सिस्टम एआई आधारित एक तकनीक है जिसे चलती ट्रेनों में लटके हुए कल पुर्जे, ढीले या गायब पुर्जों का पता लगाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। रेल मंत्रालय की टीम ने इस परियोजना को लेकर सर्वे कार्य शुरू कर दिया है। यह सिस्टम निजामुद्दीन से पलवल के बीच लगाया जाना है। 300 से अधिक ट्रेनों का होता है परिचालन दिल्ली मुंबई रूट का यह रेल मार्ग देश के सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त कॉरिडोर में शामिल है। क्योंकि इस रूट से देश की सबसे तेज चलने वाली गतिमान एक्सप्रेस, वंदे भारत समेत रोजाना करीब 300 से अधिक ट्रेनें देश के अलग अलग हिस्सों के लिए आती जाती हैं। इनमें मेल एक्सप्रेस ट्रेनों की संख्या करीब 220 है। जबकि 80 से अधिक मालगाड़ियां संचालित होती हैं। इस रूट से दौड़ने वाले ट्रेनों की रफ्तार 120 से 130 किलोमीटर प्रति घंटे की होती है। बल्लभगढ़ स्टेशन से आगे गतिमान की रफ्तार 140 से 150 किमी की हो जाती है। एमवीआईएस सिस्टम रखेगा नजर रेलवे अधिकारियों के अनुसार एमवीआईएस एक अत्याधुनिक एआई आधारित तकनीक है। इसमें ट्रैक के किनारे विशेष कैमरे और सेंसर लगाए जाएंगे, जो तेज गति से गुजर रही ट्रेनों की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करेंगे। यह सिस्टम खास तौर पर ट्रेनों के पहियों, एक्सल, ब्रेक सिस्टम और अन्य बाहरी हिस्सों की जांच करेगा। यदि किसी ट्रेन में कोई पुर्जा ढीला, टूटा, लटका हुआ या गायब पाया जाता है तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करेगा। सिस्टम की मॉनिटरिंग दिल्ली स्थित कंट्रोल रूम से की जाएगी। वहां मौजूद तकनीकी विशेषज्ञ लगातार ट्रेनों से प्राप्त डेटा और तस्वीरों पर नजर रखेंगे। किसी भी संदिग्ध स्थिति में संबंधित स्टेशन और रेलवे अधिकारियों को तुरंत सूचना भेजी जाएगी, ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके। अभी मैन्युअल तरीके होती है जांच रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस एमवीआईएस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह चलती ट्रेन की रियल टाइम मॉनिटरिंग करेगी। अभी तक ट्रेनों की तकनीकी जांच मुख्य रूप से मैन्युअल तरीके से की जाती रही है, जिसमें समय अधिक लगता है और कई बार छोटी तकनीकी खामियां पकड़ में नहीं आ पातीं। यही दुर्घटना का कारण बनती है। सिस्टम ऐसे करेगा काम     रेल अधिकारियों के मुताबिक एमवीआईएस सिस्टम की ट्रैक के किनारे लगाए जाने वाला हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरों और सेंसर का एक नेटवर्क है।     जब ट्रेनें तेजी से गुजरती हैं, तो यह सिस्टम उनके पहियों, बोगियों और निचले हिस्सों (अंडर-गियर) की तस्वीरें और वीडियो कैप्चर करता है।     इसका एआई सॉफ्टवेयर इन तस्वीरों को पल भर में स्कैन करके पता लगा लेता है कि कोई पुर्जा असामान्य रूप से लटक तो नहीं रहा है, कोई स्प्रिंग टूटी हुई तो नहीं है, या कोई बोल्ट/पार्ट्स गायब तो नहीं हैं।     यदि कोई तकनीकी खराबी मिलती है, तो यह सिस्टम तुरंत संबंधित अधिकारियों को अलर्ट भेज देता है। सर्वे शुरू, जल्द लगाने की तैयारी रेल अधिकारियों के मुताबिक उत्तर रेलवे के दिल्ली डिवीजन में इसे फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जा रहा है। भविष्य में इसे देश के अन्य महत्वपूर्ण रेल मार्गों पर भी लगाया जाएगा। रेलवे का मानना है कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से न केवल ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि यात्रियों को भी अधिक सुरक्षित सफर कर सकेंगे। अधिकारियों ने बताया कि इसे लगाने के लिए सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है। संभवत: इसे नीलम पुल के या उसके आसपास इसे लगाया जाएगा।

बंजर से उपजाऊ बनेगा लद्दाख, इगू-फे नहर का पानी लाएगा हरित क्रांति

 स्पितुक   उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की देखरेख में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में स्पितुक इलाके की बंजर भूमि को हरा भरा बनाने की दिशा में अभियान ने जोर पकड़ लिया है। लद्दाख के स्पितुक गांव में लगभग 800 एकड़ बंजर व क्षतिग्रस्त भूमि के पुनर्जीवन के लिए एक महत्वाकांक्षी पारिस्थितिक व भूमि पुनर्स्थापन अभियान छेड़ दिया गया है। यह जानकारी रविवार को उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने दी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य सरल व किफायती फ्रेशवाटर इंजीनियरिंग तकनीक के माध्यम से सदियों से सूखी पड़ी भूमि को फिर से उपजाऊ बनाना है। इस पहल के तहत हाल ही में पुनर्जीवित किए गए इगू–फे नहर से अतिरिक्त पानी को साधारण मशीनों की मदद से स्पितुक क्षेत्र की बंजर भूमि तक पहुंचाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि निरंतर मीठे पानी के प्रवाह से सूखी मिट्टी में नमी लौटने से नुकसान दायक तत्व बाहर निकल जाएंगे व प्राकृतिक वनस्पति का विकास शुरू हो जाएगा। 4,300 हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई हो रही इससे धीरे-धीरे यह बंजर इलाका उपजाऊ व नमी-संरक्षित पारिस्थितिकी तंत्र में बदल सकेगा। उपराज्यपाल ने स्पितुक इलाकों का दौरा कर क्षेत्र में हरियाली लाने की दिशा में हो रहे कार्याें के बारे में जानकारी ली। बंजर भूमि को उपजाउ बनाने का अभियान लद्दाख में पहले से सफल रहे प्रोजेक्ट हिम सरोवर की उपलब्धियों को आगे बढ़ाता है। यह इगू–फे नहर पुनर्जीवन परियोजना का पूरक भी है। इस नहर के जरिए इस समय लद्दाख में 4,300 हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई हो रही है। बंजर इलाकों में नहर से पानी पहुंचने से वहां पर पेड़ पौधे लगाने की मुहिम जोर पकड़ लेगी। बंजर भूमि को उपजाउ बनाने की परियोजना से भूजल स्तर में सुधार, मिट्टी का कटाव रोकने, भूमि की उर्वरता बढ़ाने व टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई है। पहल से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह माडल भविष्य में लद्दाख सहित अन्य शुष्क क्षेत्रों में भी पारिस्थितिक बदलाव व बंजर भूमि पुनर्जीवन के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन सकता है।

खंडवा को मिलेगा विकास का नया रास्ता, एक रोड से जुड़ेंगे 3 बड़े ग्रोथ सेंटर

खंडवा शहर की किस्मत एक बायपास रोड से खुलने की संभावना है। खंडवा-इंदौर रोड के बाद रूधि-देशगांव बायपास मार्ग पर सबसे ज्यादा विकास की संभावनाएं देखी जा रही है। इस रोड पर एक निर्माणाधीन, एक प्रस्तावित और एक पूर्व से चल रहा औद्योगिक सेंटर आ रहा है। जिसके चलते खंडवा-रूधि बायपास नए उद्योग धंधों का हब बनने की कगार पर है। इतना ही नहीं, पिछले तीन साल में इस रोड पर जमीन के भाव भी बेतहाशा बढ़े हैं। 521 करोड़ की लागगत से बन रहा फोरलेन देशगांव से रूधि तक बन रहे फोरलेन रोड की लंबाई 28.68 किमी है और इसकी लागत 521.21 करोड़ की है। भविष्य में यह रोड बैतूल, खंडवा, खरगोन, बड़वानी से बड़ोदरा तक जाएगा। जिसमें मप्र में इसकी लंबाई 105.778 किमी की रहेगी। फिलहाल इस रोड का काम लगभग 65 प्रतिशत पूरा हो चुका है। रोड में दो बड़े रेल ओवर ब्रिज है, जिनका काम रेलवे के सुपरविजन में चल रहा है। चार माइनर ब्रिज में से तीन पूरी तरह से कंपलिट हो चुके हैं और चौथे माइनर ब्रिज का काम भी अंतिम चरण में है। इस रोड पर 12 अंडर पास ब्रिज भी पूरे हो चुके हैं। इंवेस्टर्स की पहली पसंद बन रहा रूधि-देशगांव बायपास पर कुल 15 गांव स्थित है। पिछले तीन-चार में पंजीयक विभाग का रेकॉर्ड देखा जाए तो सबसे ज्यादा बिल्डर्स, इंवेस्टर्स, उद्योगपतियों सहित कॉलोनी डेवलपर्स ने इस रोड पर ही निवेश किया है। इस रोड पर कई उद्योगपतियों, इंवेस्टर्स द्वारा भविष्य में बड़े होटल्स, मॉल, बिजनेस पार्क तक खोले जाने की योजनाएं है। यहां जमीन की बढ़ती मांग को देखते हुए पंजीयक विभाग भी इस रोड पर सिंचित और असिंचित जमीनों के भाव एक समान कर चुका है। दो साल में यहां जमीन के भाव करीब 120 प्रतिशत तक बढ़े हैं। रूधि औद्योगिक क्षेत्र को भी मिलेगी ग्रोथ इस रोड पर इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर देशगांव दो नेशनल हाईवे का सेंटर बन रहा है। यहां जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र द्वारा एक लॉजिस्टिक हब प्रस्तावित है। एक कॉलोनाइजर भी यहां बिजनेस पार्क डेवलप करने वाले है। इस मार्ग पर खंडवा के पास सुरगांव निपानी ग्रोथ सेंटर का काम तेजी से चल रहा है, जो इस साल के अंत तक पूरा होने की संभावना है। इंदौर-महाराष्ट्र से सीधी कनेक्टिविटी के चलते ग्रोथ सेंटर में कई उद्योग आने को तैयार है। वहीं, रूधि ग्रोथ सेंटर जो कई वर्षों से खाली पड़ा है, उसे भी ग्रोथ मिलने की पूरी संभावना है। महाराष्ट्र, गुजरात से सीधी कनेक्टिविटी एनएचएआइ द्वारा नागपुर-बड़ोदरा मार्ग का काम शुरू कर दिया गया है, जिसमें सबसे मुख्य रूधि-देशगांव बायपास है। बड़ोदरा-बैतूल हाईवे पर भी पांच चरण में से दो का काम चल रहा है। बैतूल से ये रोड आगे महाराष्ट्र के नागपुर से जुड़ रहा है। बैतूल के हैवारखेड़ी से जुलवानिया (बड़वानी) तक सात चरणों में 286 किमी की रोड बनेगी। इसमें खंडवा जिले अंतर्गत इस मार्ग के पहले चरण का काम रूधि-देशगांव बायपास के रूप में चल रहा है। दिसंबर के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य देशगांव-रूधि फोरलेन हाईवे का काम 65 प्रतिशत पूरा हो चुका है। दिसंबर के अंत तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है। यह रोड महाराष्ट्र और गुजरात के साथ इंदौर-इच्छापुर-एदलाबाद से जुडऩे पर दक्षिण और उत्तर भारत से भी सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी। भविष्य में इस मार्ग पर विकास की अपार संभावनाएं हैं। आशुतोष सोनी, परियोजना निदेशक एनएचएआइ

जिमखाना खाली कराना सरकार के लिए चुनौती, अब मैदान में उतरे सिंघवी

नईदिल्ली  दिल्ली के ऐतिहासिक जिमखाना क्लब (Delhi Gymkhana Club) को खाली कराने के केंद्र सरकार के फैसले पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. क्लब के स्थायी सदस्य और कर्मचारी अब इस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं. सरकार ने क्लब को 5 जून तक 27.3 एकड़ जमीन और पूरी संपत्ति खाली करने का निर्देश दिया है।  सरकार का कहना है कि सफदरजंग रोड स्थित यह जमीन ‘अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र’ में आती है और इसका इस्तेमाल रक्षा ढांचे और सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए किया जाएगा. हालांकि क्लब के कई सदस्यों ने सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया है।  अभिषेक मनु सिंघवी लड़ेंगे केस जानकारी के मुताबिक क्लब की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी को कानूनी लड़ाई के लिए नियुक्त किया गया है. बताया जा रहा है कि दिल्ली हाईकोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की जाएंगी. एक याचिका क्लब के सदस्यों की ओर से और दूसरी करीब 600 कर्मचारियों की ओर से दायर होगी।  113 साल पुराने इस क्लब के स्थायी सदस्यों ने रविवार को लंबी बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की. यह बैठक उस आदेश के एक दिन बाद हुई, जिसमें भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने क्लब से उसकी इमारत, लॉन और अन्य सुविधाएं खाली करने को कहा था. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि सरकार की तरफ से नियुक्त क्लब की जनरल कमेटी ने L&DO को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट होने तक यथास्थिति बनाए रखने की मांग की है।  सरकारी अधिकारियों का कहना है कि सरकार लीज की शर्तों के तहत ‘सार्वजनिक हित’ में जमीन वापस लेने के लिए पूरी तरह अधिकृत है. दिल्ली जिमखाना क्लब उन दुर्लभ मामलों में शामिल है, जहां सरकार ने स्थायी लीज को समय से पहले खत्म कर ‘री-एंट्री’ की प्रक्रिया शुरू की है।  ‘सैकड़ों कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर खतरा’ रिपोर्ट के मुताबिक, क्लब के सदस्य और कर्मचारी इसे अचानक लिया गया फैसला बता रहे हैं. उनका कहना है कि इससे न केवल क्लब की विरासत खतरे में पड़ जाएगी, बल्कि सैकड़ों कर्मचारियों की आजीविका भी प्रभावित होगी. क्लब से जुड़े रिटायर्ड जनरल पीके सहगल ने कहा कि सदस्यों ने सर्वसम्मति से सरकार के आदेश को अदालत में चुनौती देने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि बिना किसी पूर्व चेतावनी के लिया गया यह फैसला 600 कर्मचारियों की नौकरियों पर संकट खड़ा कर देगा।  कर्मचारियों में भी इस फैसले को लेकर गहरी नाराजगी है. जिमखाना एम्प्लॉयी वेलफेयर एसोसिएशन ने सरकार के आदेश का विरोध करते हुए कहा कि कई कर्मचारी पिछले 25-26 साल से यहां काम कर रहे हैं और अब उनकी रोजी-रोटी छिनने का खतरा पैदा हो गया है. एसोसिएशन के अध्यक्ष नंदन सिंह नेगी ने कहा कि कर्मचारी और उनके परिवार बेहद परेशान हैं. एक कर्मचारी ने कहा, ‘हमारी झुग्गियां पहले ही टूट रही हैं और अब नौकरी भी चली जाएगी. आखिर हम कहां जाएंगे?’ 1930 से मौद है जिमखाना क्लब कुछ सदस्यों ने सरकार के सुरक्षा संबंधी तर्क पर भी सवाल उठाए हैं. क्लब के एक पूर्व महासचिव ने कहा कि क्लब 1930 के दशक से यहां मौजूद है, जबकि प्रधानमंत्री आवास 1984 में इस इलाके में शिफ्ट हुआ था. अगर सुरक्षा का इतना बड़ा मुद्दा होता तो इतने वर्षों तक कोई समस्या क्यों नहीं हुई? टीओआई के मुताबिक, क्लब के सदस्य नितिन वर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार ‘काल्पनिक’ आधार पर क्लब को बंद करना चाहती है. उन्होंने कहा कि क्लब में सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं और हर व्यक्ति की जांच होती है।  इस पूरे विवाद पर देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल किरन बेदी ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि दिल्ली जिमखाना क्लब सिर्फ एक संपत्ति नहीं, बल्कि देश की खेल और संस्थागत विरासत का हिस्सा है. किरण बेदी ने कहा कि यहां देश के बेहतरीन टेनिस मुकाबले हुए हैं और इस जगह से कई पीढ़ियों की यादें जुड़ी हुई हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस फैसले पर दोबारा विचार करेगी।  पूर्व रॉ प्रमुख और क्लब के पूर्व अध्यक्ष एएस दुलत ने कहा कि सदस्य सरकार के फैसले के खिलाफ याचिका दायर करने के लिए हस्ताक्षर अभियान चला रहे हैं. वहीं इतिहासकार स्वप्ना लिडले ने क्लब के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि आजादी से पहले यह ब्रिटिश अधिकारियों का क्लब हुआ करता था, लेकिन 1945 के बाद भारतीयों को भी सदस्यता मिलने लगी. उन्होंने कहा कि विभाजन के समय पाकिस्तान जा रहे अधिकारियों के लिए यहां कई विदाई समारोह भी आयोजित हुए थे।  अब यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ा विवाद बनता जा रहा है. आने वाले दिनों में दिल्ली हाईकोर्ट में इस पर सुनवाई होने की संभावना है। 

मुसलमानों को बनाया निशाना! शरिया स्कीम के जरिए हजारों करोड़ की ठगी का आरोप

 नई दिल्ली शरिया कानून के मुताबिक ब्याज (रिबा) कमाना हराम होता है और कई मुसलमान इस वजह से अपना पैसा बैंकों में भी जमा नहीं कराते हैं। ऐसे ही मुसलमानों को टारगेट करके एक महिला ने 6 हजार करोड़ रुपये जुटा लिए और 3000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। लालच दिया जाता था कि शरिया के नियमों का पालन करते हुए निवेश पर सालाना 36 फीसदी का मुनाफा मिलेगा। शुरुआत में कुछ लोगों को इसी तरह मोटा मुनाफा देकर विश्वास जीता गया और फिर हजारों करोड़ रुपये डकार लिए गए। पीटीआई के मुताबिक, ईडी ने कहा कि शेख, हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज और अन्य पर 36 प्रतिशत से अधिक वार्षिक मुनाफे का वादा करके लोगों से 5,978 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाने का आरोप है। हालांकि, वे मूल राशि भी वापस करने में विफल रहे जिससे 1.72 लाख से अधिक निवेशकों से 3,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में ईडी की अब तक की जांच और अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि पिछले सप्ताह गुरुग्राम से गिरफ्तार की गई नौहेरा शेख ने शरिया कानून के मुताबिक मुसलमानों को निवेश और भारी मुनाफे का लालच दिया था और हजारों करोड़ रुपये जुटा लिए। सुप्रीम कोर्ट की ओर से बेल खारिज किए जाने और सरेंडर के आदेश के बाद नौहेरा एक महीने से अधिक समय से फरार चल रही थी। महाठगी की आरोपी शेख ने अदालतों और जांच एजेंसियों को कई बार गच्चा दिया था। उसने सुप्रीम कोर्ट को यह कहकर भी भ्रमिक करने की कोशिश की कि उसने हैदराबाद पुलिस के सामने सरेंडर किया था, लेकिन उसे हिरासत में लेने से इनकार कर दिया गया। नौहेरा शेख की 400 करोड़ की संपत्ति जब्त नौहेरा शेख के पास मौजूद 400 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है और पीड़ितों को इसे लौटाने की प्रक्रिया चल रही है। ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, नौहेरा शेख, उसके परिजनों और अन्य ने लाखों लोगों को अपनी पोंजी स्कीम में निवेश के लिए लालच दिया और उनकी कमाई हड़प ली। शुरुआत में निवेश करने वालों को भारी-भरकम मुनाफा भी दिया गया, लेकिन बाद में करीब 1.7 लाख जमाकर्ताओं ने अपनी गाढ़ी कमाई शरिया वाले निवेश के नाम पर गंवा दी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जांच का आदेश दिया था और ईडी से कहा था कि जब्त संपत्तियों की नीलामी करके पीड़ितों को रकम लौटाई जाए। आरोपी और उसके सहयोगियों ने कई शपथ पत्र दायर करके संपत्तियों की बिक्री में देरी की भरसक कोशिश की। उसके एक सहयोगी ने अपना नाम 'कल्याण बनर्जी' बताते हुए खुद को पीएमओ का अधिकारी बताने की कोशिश की। उसे जनवरी में गिरफ्तार कर लिया गया था। हीरा ग्रुप के जरिए की गई ठगी 2024 में जब एजेंसी ने नौहेरा के घर पर छापेमारी की तो 12 लग्जरी गाड़ियां बरामद की गईं, जिनमें बीएमडब्ल्यू और मर्सिडीज बेंज जैसी महंगी कारें शामिल थीं। 92 लाख रुपये कैश भी बरामद किया गया था। नौहेरा शेख ने 'हीरा ग्रुप' नाम से कंपनी बनाई थी, जिसके जरिए इतनी बड़ी रकम की ठगी की गई। शेख ने हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के जरिए लोगों को निवेश के लिए आकर्षित किया। उसने खासतौर पर मुसलमानों को टारगेट बनाया जो शरिया के कानून के मुताबिक निवेश करना चाहते थे। ईडी के मुताबिक उसने 36 फीसदी सालाना मुनाफे का लालच दिया। लेकिन बाद में लोगों को मूलधन भी वापस नहीं कर पाई। गुरुग्राम में पहचान बदल रह रही थी नौहेरा गुरुग्राम में पकड़ी गई नौहेरा शेख यहां अपनी पहचान बदलकर रह रही थी। ईडी और हरियाणा पुलिस के जॉइंट ऑपरेशन के दौरान पकड़ी गई नौहेरा शेख सेक्टर 45 में रह रही थी। फर्जी आधार के जरिए उसने अपना नाम शेख खामर जहां बताया था।

राज्यसभा चुनाव को लेकर BJP की बड़ी रणनीति, तीसरी सीट जीतने पर भी नजर

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर राज्यसभा चुनाव की सरगर्मी तेज हो गई है। इस बार बीजेपी रणनीति में बड़ा बदलाव करने जा रही है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी इस बार 'सवर्ण' चेहरे पर दांव लगाने की तैयारी में है। बीजेपी अपनी दो सुरक्षित सीटों के साथ कांग्रेस के कब्जे वाली तीसरी सीट पर भी नजर रखे हुए है। पार्टी तीसरी सीट जीतकर दिल्ली (केंद्रीय नेतृत्व) को 'गिफ्ट' देना चाहती है। इसके लिए बीजेपी कांग्रेस से आए किसी नेता को चेहरा बना सकती है। पार्टी की नजर उन विधायकों पर भी है जो कांग्रेस का खेल बिगाड़ सकते हैं। पहली सीट का गणित सामान्य वर्ग को मौका देने की वजह मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं। इनका कार्यकाल 26 जून 2026 को समाप्त होगा। इनमें दो सीटें बीजेपी (डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन) और एक सीट कांग्रेस (दिग्विजय सिंह) के पास है। बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, पिछले चुनावों में पार्टी ने दलित, ओबीसी और महिला कार्ड खेलकर सामाजिक संतुलन साधा था। इस बार समीकरण बदल रहे हैं। पार्टी अब ठाकुर या ब्राह्मण कोटे से किसी कद्दावर चेहरे को राज्यसभा भेजना चाहती है। इसी कड़ी में अरविंद भदौरिया और कांतदेव सिंह के नाम चर्चा में हैं। दोनों नेता आरएसएस के करीबी माने जाते हैं और संगठन में गहरी पकड़ रखते हैं। 1. कांतदेव सिंह (प्रदेश उपाध्यक्ष): विंध्य क्षेत्र से आने वाले कांतदेव सिंह की जमीनी पकड़ मजबूत मानी जाती है। यदि बीजेपी किसी क्षत्रिय चेहरे को चुनती है तो वे सबसे प्रबल दावेदार हैं। वे प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के करीबी हैं। उज्जैन संभाग के प्रभारी रहने के साथ सिंगरौली निकाय चुनाव में भी उनकी अहम भूमिका रही है। 2. अरविंद भदौरिया: पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया का नाम भी इस रेस में बना हुआ है। संगठन और सरकार में काम करने का उनका लंबा अनुभव पार्टी के काम आ सकता है। 2020 में मप्र में हुए सत्ता परिवर्तन में अरविंद भदौरिया की अहम भूमिका थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया 22 विधायकों के साथ कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे। तत्कालीन कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई थी। 22 विधायकों को बैंगलुरू के एक रिसॉर्ट में रखा गया था। विधायकों को अलग-अलग जगहों से बैंगलुरू ले जाने और वहां रुकवाने की जिम्मेदारी अरविंद भदौरिया के पास थी। कमलनाथ सरकार गिरने के बाद शिवराज सरकार में भदौरिया को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। हालांकि, वे 2023 का विधानसभा चुनाव हार गए थे। एससी-एसटी वर्ग को एडस्ट किया जा सकता है सवर्ण कार्ड की चर्चा के बीच बीजेपी अन्य वर्गों को भी नजरअंदाज नहीं कर रही है। एससी वर्ग: चंबल-ग्वालियर क्षेत्र में अनुसूचित जाति की बड़ी आबादी को देखते हुए लाल सिंह आर्य का नाम चर्चा में है। एसटी वर्ग: बेहतर प्रदर्शन के आधार पर डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी को दोबारा मौका मिल सकता है। मालवा के आदिवासी वोट बैंक को साधने के लिए रंजना बघेल का नाम भी चर्चा में है। जॉर्ज कुरियन: भरोसेमंद चेहरा फिर हो सकता है रिपीट केंद्रीय राज्यमंत्री जॉर्ज कुरियन को बीजेपी दोबारा राज्यसभा भेज सकती है। 1980 से पार्टी से जुड़े कुरियन उन वफादार नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने जनसंघ के दौर से पार्टी का झंडा थामे रखा है। वे फिलहाल मत्स्य पालन, पशुपालन और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। तीसरी सीट के राजनीतिक समीकरण को समझने के लिए राज्यसभा चुनाव के वोटिंग पैटर्न को समझना जरूरी है। न गुप्त मतदान, न ही ईवीएम का इस्तेमाल राज्यसभा चुनाव में न गुप्त मतदान होता है और न ही ईवीएम का इस्तेमाल होता है। राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवारों के नाम के आगे एक से चार तक नंबर लिखा होता है। इसमें विधायकों को वरीयता के आधार पर उस पर चिह्न लगाना होता है। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए जरूरी वोटों की संख्या पहले से तय होती है। यह संख्या कुल विधायक और राज्यसभा सीटों के आधार पर तय होती है। इसमें एक विधायक के वोट की वैल्यू 100 होती है। कुल विधायकों की संख्या को 100 से गुणा किया जाता है राज्यसभा चुनाव में एक फॉर्मूला इस्तेमाल किया जाता है। इसमें कुल विधायकों की संख्या को 100 से गुणा किया जाता है। इसके बाद राज्यसभा सीटों की संख्या में एक जोड़कर भाग दिया जाता है। फिर कुल संख्या में एक जोड़ा जाता है। अंत में जो संख्या निकलती है, वही जीत के लिए जरूरी होती है। कांग्रेस के पास संख्या बल, लेकिन क्रॉस वोटिंग का डर मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट कांग्रेस के खाते में मानी जा रही है। हालांकि, बीजेपी इस सीट पर भी उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। कांग्रेस को आशंका है कि कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं या मतदान से अनुपस्थित रह सकते हैं। इससे तीसरी सीट पर मुकाबला रोचक हो सकता है।     दतिया से विधायक राजेंद्र भारती का चुनाव रद्द होने के बाद यह सीट फिलहाल खाली है।     विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा की सदस्यता समाप्त करने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है। हालांकि, वे राज्यसभा चुनाव में मतदान नहीं कर पाएंगे।     बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे हाल के दिनों में बीजेपी के कार्यक्रमों में नजर आई हैं। हालांकि, उन्होंने अब तक इस्तीफा नहीं दिया है। कांग्रेस उनसे संपर्क बनाए हुए है, लेकिन पार्टी के भीतर उनकी भूमिका को लेकर असमंजस है।     अटेर से कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे बजट सत्र में उप नेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफा दे चुके हैं। उन्होंने इसके पीछे पारिवारिक कारण बताए थे।     टिमरनी से कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह हाल ही में आरएसएस से जुड़े कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर भी साझा किया गया।     सुसनेर से कांग्रेस विधायक भैंरो सिंह परिहार ने हाल ही में कहा था कि उनका संघ से वैचारिक जुड़ाव है।     कांग्रेस को आशंका है कि बीजेपी हाल ही में पार्टी छोड़कर आए किसी नेता को उम्मीदवार बना सकती है। संभावित नामों में सुरेश पचौरी की चर्चा सबसे ज्यादा है। माना जाता है कि उनके दोनों दलों के नेताओं से अच्छे संबंध हैं। कमलनाथ हो सकते हैं उम्मीदवार कांग्रेस आलाकमान … Read more

पानी संकट से निपटने को पंजाब सरकार का बड़ा कदम, DSR तकनीक अपनाएंगे किसान

चंडीगढ़  देश के सबसे अधिक भूजल संकट झेल रहे राज्यों में शामिल पंजाब में गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए राज्य सरकार ने डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस (डीएसआर) तकनीक को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने का फैसला किया है। जल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सरकार ने वर्ष 2026-27 के फसल सीजन में राज्यभर में पांच लाख एकड़ भूमि को डीएसआर तकनीक के तहत लाने का लक्ष्य तय किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पंजाब अपने वार्षिक भूजल पुनर्भरण (ग्राउंडवॉटर रिचार्ज) का 156.36 प्रतिशत तक दोहन कर रहा है। राज्य के 153 प्रशासनिक ब्लॉकों में से 111 ब्लॉक ‘ओवर एक्सप्लॉइटेड’ श्रेणी में आ चुके हैं। इसका अर्थ है कि इन क्षेत्रों में भूजल का इस्तेमाल उसकी प्राकृतिक भरपाई से कहीं अधिक हो रहा है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए पंजाब सरकार ने डीएसआर तकनीक को प्रोत्साहित करने की नीति अपनाई है। इस योजना के तहत डीएसआर अपनाने वाले किसानों को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्रति एकड़ 1500 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। आगामी वित्तीय वर्ष में डीएसआर कार्यक्रम के लिए सरकार ने 40 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025-26 में 23,410 किसानों ने डीएसआर तकनीक अपनाई थी। इन किसानों को कुल 35.38 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। डीएसआर तकनीक पंजाब सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भूजल संरक्षण, पारंपरिक धान रोपाई पर निर्भरता कम करना और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि डीएसआर तकनीक पारंपरिक धान खेती की तुलना में पानी, बिजली और श्रम लागत में उल्लेखनीय कमी लाती है। ऐसे में यह तकनीक पंजाब के कृषि और पर्यावरण संबंधी संकट से निपटने में अहम भूमिका निभा सकती है।

कप्तानी बचाना होगा मुश्किल! IPL 2026 के बाद इन स्टार खिलाड़ियों की छिन सकती है कमान

नई दिल्ली IPL 2026 लीग स्टेज का अंत हो गया है। 10 में से 4 ही टीमों को प्लेऑफ का टिकट मिला है, वहीं 6 टीमें टूर्नामेंट से बाहर हो गई है। प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई करने वाली टीमों में डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के अलावा गुजरात टाइटंस, सनराइजर्स हैदराबाद और राजस्थान रॉयल्स शामिल हैं। वहीं दिल्ली कैपिटल्स, पंजाब किंग्स, चेन्नई सुपर किंग्स, लखनऊ सुपर जाएंट्स, कोलकाता नाइट राइडर्स और मुंबई इंडियंस प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो गई है। आईपीएल 2026 के प्लेऑफ में ना पहुंचने वाली 6 में से 5 टीमों के कप्तान रडार पर हैं। टीम के साथ-साथ उनकी निजी परफॉर्मेंस भी कुछ खास नहीं रही है, जिस वजह से अगले सीजन उनसे कप्तानी छीनी जा सकती है। आईए जानते हैं इन कप्तानों के बारे में-     हार्दिक पांड्या- गुजरात टाइटंस को एक ट्रॉफी समेत कुल दो बार फाइनल में पहुंचाने वाले कप्तान हार्दिक पांड्या की जब से मुंबई इंडियंस की टीम में वापसी हुई है, तब से उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है। पांड्या अब कुल तीन सीजन में एमआई की कप्तानी कर चुके हैं, जिसमें से एक ही बार वह 5 बार की इस चैंपियन टीम को प्लेऑफ तक पहुंचा पाए हैं। बाकी दो बार टीम बॉटम ऑफ द टेबल ही रही है। आईपीएल 2026 में तो हार्दिक पांड्या का गेंद और बल्ले से भी प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। कप्तानी का दबाव उनके परफॉर्मेंस पर साफ देखने को मिला। अगर एमआई को अपनी साख बचानी है तो अगले सीजन कप्तान बदलने की जरूरत है, हां हार्दिक पांड्या बतौर खिलाड़ी जरूर खेल सकते हैं।     हार्दिक पांड्या IPL 2026- 10 मैच 206 रन और 4 विकेट     रुतुराज गायकवाड़- एमआई के अलावा चेन्नई सुपर किंग्स ने भी आईपीएल की 5 ट्रॉफी जीती है, पिछले तीन सीजन इस टीम के लिए भी काफी खराब रहे हैं। सीएसके पिछले तीन सीजन में एक भी बार प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाई है। आईपीएल 2026 उनके लिए ठीक-ठाक रहा। शुरुआत थोड़ी खराब हुई, मगर बीच में टीम ने जरूर वापसी की। हालांकि प्लेऑफ का टिकट उन्हें इस बार भी नहीं मिला। पूरे सीजन कप्तानी का दबाव गायकवाड़ पर दिखा, उनका बैटिंग स्ट्राइक रेट 125 से भी कम का था। इस सीजन धोनी भी उनका मार्गदर्शन करने के लिए नहीं थे। सीएसके के पास संजू सैमसन के रूप में एक तैयार कप्तान है, जो आईपीएल में पहले भी कप्तानी कर चुका है।     रुतुराज गायकवाड़ IPL 2026- 14 मैच 337 रन     ऋषभ पंत- 27 करोड़ के ऋषभ पंत की कप्तानी पर भी तलवार लटकी है। पिछले दो सीजन में देखने को मिला है कि लखनऊ सुपर जाएंट्स सीजन की शुरुआत में काफी खराब खेलती है, उनकी बैटिंग-बॉलिंग दोनों निराश करती है, मगर जैसे ही टीम टूर्नामेंट से बाहर होती है या होने की कगार पर होती है सभी खिलाड़ी फॉर्म में लौट जाते हैं, सभी खुलकर खेलने लगते हैं और अंत में टीम कुछ मैच जीतती भी है। पंत का निजी परफॉर्मेंस हालांकि उनके स्टैंडर्ड के हिसाब से काफी खराब रहा है। एलएसजी उन्हें रिटेन तो कर सकती है, मगर कप्तान बदलने का समय आ गया है। टीम में मिचेल मार्श और एडन मारक्रम जैसे दो अनुभवी इंटरनेशनल कप्तान भी है।     ऋषभ पंत IPL 2026- 14 मैच 312 रन     अक्षर पटेल- अक्षर पटेल एक बेहतरीन खिलाड़ी है, मगर उनमें एक लीडर की झलक नहीं दिखाई देती। दिल्ली कैपिटल्स को एक ऐसे कप्तान की जरूरत है जो आगे आकर टीम को लीड करे और जीत का रास्ता दिखाए। डीसी की टीम में केएल राहुल एक ऐसा नाम है, जो आईपीएल में पहले भी कप्तानी कर चुका है। एलएसजी को वह प्लेऑफ तक लेकर गए हैं। अक्षर का निजी परफॉर्मेंस में भी बतौर कप्तान काफी कमी आई है।     अक्षर पटेल IPL 2026- 14 मैच 173 रन और 11 विकेट     अजिंक्य रहाणे- 2024 की चैंपियन कोलकाता नाइट राइडर्स की किस्मत ट्रॉफी जीतने के बाद मानों अचानक पलट गई। मेंटोर गौतम गंभीर टीम इंडिया के हेड कोच बन गए, वहीं टीम ने चैंपियन कप्तान श्रेयस अय्यर को भी रिलीज कर दिया। अय्यर को रिलीज करने के बाद जब केकेआर की टीम नीलामी में उतरी तो उन्हें कोई बड़ा लीडर अपनी टीम में नहीं जोड़ा। अनुभवी अजिंक्य रहाणे को उन्होंने अंत में कप्तानी सौंपी, मगर उनके अंडर टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। केकेआर को एग्रेसिव कप्तान की जरूरत है जो नई सोच के साथ टीम को आगे ले जा सके।