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ईरान में हालात बिगड़े, हजारों लोग उजड़े; 32 हजार लोग अफगानिस्तान पहुंचे – UN की रिपोर्ट

नई दिल्ली संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन ने रविवार को बताया कि ईरान में बिगड़ते हालात की वजह से बड़ी संख्या में लोग अपना घर छोड़ कर दूसरे देश जा रहे हैं। कई शहरों में घर और जरूरी सेवाओं से जुड़ी इमारतें तबाह हो गई हैं, इसलिए लोग सुरक्षित जगहों की तलाश में निकल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कई लोग देश के उत्तरी इलाकों की ओर जा रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वहां हालात कुछ सुरक्षित हैं। एजेंसी ने बताया कि लोग ईरान के 20 से ज्यादा प्रांतों में अलग-अलग जगहों पर शरण ले रहे हैं और राहत शिविरों पर दबाव बढ़ रहा है। इसके अलावा, कई लोग पड़ोसी देशों का रुख कर रहे हैं। करीब 32 हजार लोग अफगानिस्तान और लगभग 4 हजार लोग पाकिस्तान पहुंच चुके हैं, जबकि कई हवाई अड्डे और बॉर्डर अभी बंद हैं। वहीं, ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के प्रमुख ने रविवार को बताया कि पूरे ईरान में अमेरिका और इजरायल के हमलों में 24,500 से ज्यादा सार्वजनिक स्थल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें लगभग 20,000 आवासीय इकाइयां, 4,500 व्यावसायिक केंद्र और 69 स्कूल शामिल हैं। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी बयान में बताया गया कि अमेरिका-इजरायल के हमलों में कम से कम 202 बच्चे और 223 महिलाएं मारी गई हैं, जिनमें तीन गर्भवती भी शामिल हैं।फार्स न्यूज एजेंसी के बयान में कहा गया है कि मारे गए12 बच्चे पांच साल से कम उम्र के थे। दूसरी ओर, इजरायल में भी बड़ी संख्या में लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। द टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार, इजरायल के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि पिछले 24 घंटों में ईरान के साथ लड़ाई की वजह से 108 घायल लोगों को अस्पताल ले जाया गया। इजरायली स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि 28 फरवरी से रविवार सुबह तक, 3,195 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से 81 अभी अस्पताल में हैं।

होर्मुज तनाव के बीच ट्रंप ने मांगा सहयोग, साउथ कोरिया ने रखी अपनी शर्तें

सोल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहयोगी देशों पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए संयुक्त प्रयास का दबाव बना रहे हैं। जिन देशों का ट्रंप ने ट्रुथ पोस्ट में नाम लिया, उनमें से चीन और यूके साफतौर पर कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं। इस बीच दक्षिण कोरिया की भी प्रतिक्रिया आई है जिसने समीक्षा की बात कह डाली है। रविवार को दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा, "हम इस मामले पर अमेरिका के साथ मिलकर काम करेंगे और पूरी तरह से समीक्षा करने के बाद ही कोई फैसला लेंगे।" होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के व्यापार के सबसे अहम जलमार्गों में से एक है, ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से लगभग बंद ही पड़ा है। ऊर्जा की आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। हालांकि शनिवार को ही खबर आई कि भारत के दो जहाज शिवालिक और नंदा देवी एलपीजी की बड़ी खेप लेकर स्ट्रेट को पार कर चुके हैं। शनिवार को ही ट्रंप ने सोशल पोस्ट में दुनिया की चिंताओं को ध्यान में रख दावा किया था कि जल्द ही ऊर्जा आपूर्ति को ध्यान में रख कदम उठाए जाएंगे। उम्मीद जताई कि देश (खास तौर पर चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन का नाम लेते हुए) "इस इलाके में वॉरशिप भेजेंगे" ताकि यह पक्का हो सके कि जहाज फिर से होर्मुज से गुजर सकें। अमेरिका के राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर लिखा, "जो देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल हासिल करते हैं, उन्हें ही इस रास्ते की देखभाल करनी चाहिए, और हम उनकी बहुत ज्यादा मदद करेंगे!" लेकिन रविवार को ही इससे पहले, जापान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात पर सवाल उठाया कि क्या टोक्यो होर्मुज में युद्धपोत भेजेगा। प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के नीति प्रमुख ताकायुकी कोबायाशी ने सार्वजनिक प्रसारक एनएचके पर कहा, "सुरक्षा के मिशन पर सावधानीपूर्वक फैसला लेना होगा।" कोबायाशी ने जापानी कानून का हवाला देते हुए इसे थोड़ा कठिन भी बताया है।

टैक्स सुधार में नाकामी पड़ी भारी, IMF की 1 अरब डॉलर की किस्त के लिए पाकिस्तान की बातचीत रुकी

नई दिल्ली  पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के बीच एक अरब डॉलर की किस्त जारी करने को लेकर चल रही बातचीत एक बार फिर ठप पड़ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी वजह मौजूदा बजट की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवाल और टैक्‍स कलेक्‍शन का कम होना है। कराची के अखबार 'बिजनेस रिकॉर्डर' के अनुसार, आईएमएफ ने एक बार फिर पाकिस्तान के टैक्स सिस्टम पर सवाल उठाए हैं। आईएमएफ का कहना है क‍ि राजस्व लक्ष्य हासिल होना मुश्किल दिखाई देता है। लेख में कहा गया है, “यह चिंता जायज है। पाकिस्तान की कर व्यवस्था लंबे समय से कमजोर प्रदर्शन करती रही है। देश का टैक्स-टू-जीडीपी अनुपात 9-10 प्रतिशत के आसपास ही अटका है, जो समान उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में सबसे कम है। कर दायरा सीमित है, अनौपचारिक अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी है और कर अनुपालन भी कमजोर है।” दशकों से हर आईएमएफ कार्यक्रम में पाकिस्तान से कर प्रशासन सुधारने, कर आधार बढ़ाने और राजस्व लक्ष्य बढ़ाने की मांग की जाती रही है, लेकिन इन प्रयासों के बावजूद नतीजे सीमित ही रहे हैं। औपचारिक क्षेत्र अभी भी कर का अधिकांश बोझ उठाता है, जबकि संपत्ति के बड़े हिस्से, खासतौर पर खुदरा कारोबार, कृषि और अन्य क्षेत्रों पर बहुत कम कर लगता है या वे पूरी तरह व्यवस्था से बाहर हैं। अनौपचारिक अर्थव्यवस्था, जिसे अक्सर जीडीपी का लगभग 40 प्रतिशत माना जाता है, काफी हद तक कर प्रणाली की पकड़ से बाहर है। लेख के मुताबिक, पाकिस्तान की वित्तीय समस्या केवल इतनी नहीं है कि सरकार बहुत कम राजस्व जुटाती है। उतनी ही बड़ी समस्या यह भी है कि सार्वजनिक क्षेत्र में भारी वित्तीय घाटा जारी है और इस पर निर्णायक सुधार नहीं हो पाए हैं। इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण घाटे में चलने वाले सार्वजनिक उपक्रमों से होने वाला लगातार नुकसान है। पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) और पाकिस्तान स्टील मिल्स जैसी संस्थाओं ने वर्षों में भारी घाटा जमा किया है। इनकी देनदारियों का बोझ राष्ट्रीय खजाने पर पड़ता है, जिसे सब्सिडी, गारंटी और कर्ज पुनर्गठन के माध्यम से वहन किया जाता है। ये संस्थान मुख्य रूप से इसलिए जीवित हैं क्योंकि सरकारें इनके पुनर्गठन या निजीकरण से जुड़े राजनीतिक जोखिमों का सामना करने से हिचकती हैं। फ‍िर भी इनके वित्तीय नुकसान हर साल सैकड़ों अरब रुपए तक पहुंच जाते हैं, जो चुपचाप सार्वजनिक संसाधनों को खत्म करते रहते हैं। लेख के अनुसार, अजीब बात यह है कि जहां आईएमएफ कार्यक्रम राजस्व लक्ष्यों पर बहुत जोर देते हैं, वहीं सार्वजनिक उपक्रमों में सुधार की तत्काल आवश्यकता उतनी मजबूत नहीं दिखाई देती। निजीकरण की योजनाएं धीमी गति से आगे बढ़ती हैं, पुनर्गठन की समय-सीमा बार-बार टलती है और घाटे में चल रही संस्थाओं को सरकारी वित्तीय सहायता मिलती रहती है। पाकिस्तान के ऊर्जा क्षेत्र में एक और बड़ा वित्तीय संकट मौजूद है। देश का सर्कुलर डेब्ट (बिजली व्यवस्था के भीतर बकाया भुगतान की जटिल श्रृंखला) कई लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। आईएमएफ अक्सर इस वित्तीय अंतर को कम करने के लिए बिजली दरें बढ़ाने पर जोर देता रहा है। लेकिन केवल दरें बढ़ाने से उस प्रणाली की समस्या हल नहीं होगी जो अक्षमता और कमजोर प्रशासन से ग्रस्त है। बिजली वितरण कंपनियों के गहरे पुनर्गठन और बेहतर प्रबंधन के बिना यह सर्कुलर डेब्ट फिर से बढ़ जाता है। लेख में यह भी कहा गया कि एक अन्य पहलू जिस पर लगातार पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता, वह है गैर-उत्पादक या अत्यधिक सार्वजनिक खर्च। केंद्र और प्रांतीय बजटों में अब भी भारी प्रशासनिक खर्च, गलत तरीके से दी जा रही सब्सिडी और राजनीतिक कारणों से शुरू की गई विकास योजनाएं शामिल हैं, जिनका आर्थिक लाभ सीमित होता है। लेख के अनुसार, वित्तीय अनुशासन केवल अधिक राजस्व जुटाने से हासिल नहीं हो सकता। इसके लिए यह भी जरूरी है कि सार्वजनिक धन कैसे खर्च किया जा रहा है, इसकी गंभीर समीक्षा की जाए।

पहाड़ों पर लौटी सर्दी: बदरीनाथ, केदारनाथ और हेमकुंड साहिब में बर्फबारी से मौसम सुहाना

रुद्रप्रयाग रविवार को रुद्रप्रयाग और चमोली जनपद में अचानक आए बदलाव के चलते केदारनाथ-बदरीनाथ, हेमकुंड साहिब, गौरसों सहित ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई। इससे दोनों धाम में ठंड का प्रकोप बढ़ गया है। वहीं दोनों जनपदों के घाटी वाले क्षेत्रों में बारिश से मौसम ठंडा हो गया। ठंड का प्रकोप बढ़ते ही लोगों को दोबारा गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ा। वहीं पिछले तीन-चार दिन से धधक रहे जंगलों को वर्षा से राहत मिली है। चारो ओर छाया आग का धुआं भी काफी हद तक छंट गया है। इससे स्थानीय लोगों के साथ ही आग बुझने से जुटे वनकर्मियों ने राहत की सांस ली है। रविवार सुबह से ही केदारनाथ धाम में बादल छाए रहे और मौसम बदला-बदला नजर आया। दोपहर बाद अचानक बर्फबारी शुरू हो गई, जिससे पूरे क्षेत्र में ठंडक बढ़ गई। हालांकि धाम में करीब एक से दो इंच तक ही बर्फ जमी, लेकिन तापमान में गिरावट के कारण कड़ाके की ठंड महसूस की गई। रुद्रप्रयाग जिला मुख्यालय समेत अन्य घाटी क्षेत्रों में हल्की बारिश दर्ज की गई, जिससे मौसम में ठंडक लौट आई। ऊंचाई वाले क्षेत्रों तुंगनाथ, मध्यमेश्वर में भी हल्की बर्फबारी हुई, जिससे पूरे क्षेत्र में सर्दी का असर बढ़ गया है। वहीं चमोली जिले में दोपहर बाद हेमकुंड, बदरीनाथ, गौरसों सहित ऊंची चोटियों पर बर्फबारी और निचले इलाकों में वर्षा हुई। कई दिनों बाद हुई वर्षा के चलते काश्तकारों के चेहरे भी खिल उठे हैं। काश्तकारों का कहना है कि यह वर्षा फसलों के साथ ही जंगलों में लगी आग बुझने में मददगार होगी। जिले में छाई धुंध भी वर्षा से साफ हो गई है। जिले के मंडल घाटी, निजमुला घाटी, देवाल, कर्णप्रयाग सहित अन्य क्षेत्रों में लगी आग भी वर्षा के चलते बुझ गई है। इसके चलते वन विभाग ने भी राहत की सांस ली है।  

बर्फबारी का असर: जम्मू-कश्मीर की अहम सड़क बंद, यात्रियों को परेशानी

पुंछ  भारी बर्फबारी के चलते मुगल रोड पर यातायात फिलहाल बंद कर दिया गया है। खराब मौसम और सड़क पर जमी बर्फ के कारण प्रशासन ने एहतियातन वाहनों की आवाजाही रोक दी है। यात्रियों को फिलहाल इस मार्ग पर यात्रा न करने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। जानकारी के अनुसार पीर पंजाल की ऊंची पहाड़ियों में ताज़ा बर्फबारी के बाद रविवार को ऐतिहासिक मुगल रोड पर यातायात अस्थायी रूप से रोक दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि लगातार हो रही बर्फबारी, खासकर पीर की गली और आसपास के क्षेत्रों में, सड़क को बेहद फिसलन भरा और वाहनों के आवागमन के लिए असुरक्षित बना दिया है। किसी भी संभावित दुर्घटना से बचने के लिए एहतियात के तौर पर प्रशासन ने यातायात को रोक दिया। संबंधित सड़क रखरखाव एजेंसियों और जिला प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है तथा मौसम में सुधार होने के बाद बर्फ हटाने का कार्य शुरू किया जाएगा।   इस बीच यात्रियों को सलाह दी गई है कि जब तक सड़क को आधिकारिक रूप से सुरक्षित घोषित नहीं किया जाता, तब तक मुगल रोड पर यात्रा करने से बचें। जम्मू-कश्मीर ट्रैफिक पुलिस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और यातायात बहाली को लेकर आगे की जानकारी जारी करेगी।

अटल टनल में भारी जाम: बर्फबारी का दीदार करने पहुंचे सैकड़ों वाहन फंसे, पुलिस ने संभाला मोर्चा

मनाली रविवार को हिमपात के दीदार करने पर्यटन स्थलों की ओर गए पर्यटकों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ा है। अटल टनल के दोनों छोर में आधा फीट तक हिमपात हुआ है। भारी हिमपात होने के कारण मुश्किलें भी बढ़ी हैं। हालांकि, पर्यटकों ने दिन भर बर्फ के फाहों का आनंद लिया, लेकिन भारी बर्फबारी उनके लिए परेशानी का कारण बन गई। अटल टनल से धुंधी तक उतराई में पर्यटन वाहन स्किड होने शुरू हुए जिस कारण हॉकी पुल से लेकर अटल टनल के दूसरे छोर तक लगभग आठ किमी लंबा जाम लग गया। हालांकि, लाहुल स्पीति पुलिस ने तीन बजे ही पर्यटकों को वापस भेजना शुरू कर दिया तथा मनाली पुलिस ने भी तीन बजे सोलंग नाला में चेक पोस्ट के आगे पर्यटक वाहनों को लाहुल की ओर जाने पर रोक लगा दी। लेकिन लगभग डेढ़ हजार पर्यटक वाहनों के ट्रैफिक जाम सभी के लिए दिक्कत का कारण बन गया। मनाली व लाहुल पुलिस टीमें अपनी अपनी ओर से पर्यटक वाहनों को निकालने में जुटी रही। भारी संख्या में पर्यटक लाहुल रवाना हुए थे सिस्सु थाना प्रभारी मुकेश राठौर ने बताया कि भारी हिमपात होता देख पर्यटकों को मनाली भेजना शुरू कर दिया था लेकिन पर्यटकों की संख्या अधिक होने व जाम लगने के कारण दिक्कत हुई। उन्होंने बताया कि देर शाम तक पुलिस ट्रैफिक सुचारु करने में जुटी हुई है। अटल टनल के दोनों छोर में भारी हिमपात होने से सैकड़ों पर्यटक वाहन फंसे, मनाली पुलिस रेस्क्यू में जुटी, अटल टनल के साउथ पोर्टल से तीन किमी दूर हाकी पुल तक उतराई में स्किड हो रहे वाहन  डीएसपी मनाली केडी शर्मा ने कहा कि हिमपात का क्रम तेज होता देख तीन बजे पर्यटकों को अटल टनल की ओर जाने की लिए रोक दिया था लेकिन सुबह से भारी संख्या में पर्यटक लाहुल रवाना हुए थे। अटल टनल से हॉकी पुल तक वाहन स्किड हो रहे हैं इस कारण ट्रैफिक जाम लगा। उन्होंने बताया कि पुलिस टीम भारी हिमपात के बीच वाहनों को निकालने में जुटी हुई है। उन्होंने बताया कि अधिकतर पर्यटकों को रेस्क्यू कर लिया है जबकि शेष पर्यटक वाहनों को निकालने का काम जारी है।  

दौलत की रेस में भारतीय महिला का जलवा, सावित्री जिंदल बनीं दुनिया की सबसे अमीर महिला

  नई दिल्ली फोर्ब्स 2026 की ताजा रैंकिंग के अनुसार दुनिया में महिला अरबपतियों की संख्या पिछले साल के 406 से बढ़कर अब 481 हो गई है। रिटेल जायंट वॉलमार्ट की एलिस वॉल्टन ने एक बार फिर अपना नंबर-1 का पायदान बरकरार रखा है वहीं भारत की सावित्री जिंदल 39.1 अरब डॉलर (करीब 3.2 लाख करोड़ रुपये) की नेटवर्थ के साथ दुनिया की 7वीं सबसे अमीर महिला बन गई हैं। कौन हैं दुनिया की 3 सबसे शक्तिशाली अमीर महिलाएं?     एलिस वॉल्टन (अमेरिका): वॉलमार्ट की विरासत को संभालने वाली एलिस की संपत्ति 11.1 लाख करोड़ रुपये है। शेयरों में उछाल ने उन्हें टॉप पर बनाए रखा है।     फ्रैंकोइस बेटेनकोर्ट मेयर्स (फ्रांस): मशहूर ब्यूटी ब्रांड लॉरियल (L'Oreal) की मालकिन फ्रैंकोइस 8.3 लाख करोड़ रुपये की मालकिन हैं। वे सौंदर्य प्रसाधन की दुनिया की बेताज रानी हैं।     जूलिया कोच (अमेरिका): कोच इंक (Koch Inc.) की प्रमुख जूलिया की नेटवर्थ 6.7 लाख करोड़ रुपये है। एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उनकी कंपनी का बड़ा प्रभाव है। दुनिया की टॉप-10 महिला अरबपति (नेटवर्थ लाख करोड़ में): रैंक नाम देश मुख्य कंपनी/क्षेत्र 1 एलिस वॉल्टन अमेरिका वॉलमार्ट (रिटेल) 2 फ्रैंकोइस बेटेनकोर्ट मेयर्स फ्रांस लॉरियल (कॉस्मेटिक्स) 3 जूलिया कोच अमेरिका कोच इंक (केमिकल्स) 4 आइरिस फॉन्टबोना चिली माइनिंग (कॉपर) 5 जैकलीन मार्स अमेरिका मार्स इंक (कैंडी/पेट फूड) 6 राफेला अपोंटे–डायमंट स्विट्जरलैंड शिपिंग (लॉजिस्टिक्स) 7 सावित्री जिंदल भारत जिंदल ग्रुप (स्टील/पावर) 8 मिरियम एडेलसन अमेरिका लास वेगास सैंड्स (कैसीनो) 9 एबिगेल जॉनसन अमेरिका फिडेलिटी (इन्वेस्टमेंट) 10 झेंग शुलियांग चीन हॉन्गकिआयो (एल्युमिनियम)   भारत की सावित्री जिंदल ने दी दिग्गजों को टक्कर जिंदल ग्रुप की सावित्री जिंदल इस सूची में 7वें स्थान पर हैं। स्टील, पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे भारी उद्योगों में जिंदल परिवार की पकड़ ने सावित्री जिंदल की संपत्ति में बड़ा इजाफा किया है। वे न केवल भारत की सबसे अमीर महिला हैं, बल्कि एशिया की आर्थिक शक्ति का भी प्रतिनिधित्व करती हैं। कैसे बढ़ी महिलाओं की दौलत? विशेषज्ञों का मानना है कि स्टॉक मार्केट में तेजी, तांबे और एल्युमिनियम जैसी वस्तुओं की वैश्विक मांग में वृद्धि और तकनीकी विस्तार ने इन महिला अरबपतियों की संपत्ति को नए आयाम दिए हैं। फिडेलिटी की एबिगेल जॉनसन जैसी महिलाओं ने क्रिप्टो और डिजिटल निवेश के जरिए भी अपनी पकड़ मजबूत की है।

युद्ध और आपदा में भारत बना रक्षक, विदेशियों को भी सुरक्षित निकालने में सबसे आगे

नई दिल्ली दुनिया भर में युद्ध और संकटग्रस्त क्षेत्रों में फंसे नागरिकों को सुरक्षित निकालने के मामले में भारत को सबसे “प्रोएक्टिव और रिस्पॉन्सिव” देशों में से एक बताया गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े निकासी अभियानों के जरिए हजारों नागरिकों को संघर्ष क्षेत्रों से सुरक्षित बाहर निकाला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने तेज कूटनीतिक प्रयास, सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और सैन्य लॉजिस्टिक्स के जरिए कई सफल ऑपरेशन चलाए।  इनमें प्रमुख अभियान शामिल हैं:     Operation Raahat – यमन संकट के दौरान निकासी     Operation Sankat Mochan – दक्षिण सूडान से भारतीयों की वापसी     Operation Ganga – रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान छात्रों की निकासी     Operation Kaveri – सूडान संकट में राहत अभियान     इन अभियानों के जरिए हजारों भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाया गया। विदेशी नागरिकों की भी मदद रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत ने केवल अपने नागरिकों को ही नहीं बल्कि संकट के समय अन्य देशों के नागरिकों को भी सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की, जिससे भारत की मानवीय छवि मजबूत हुई। जब मध्य-पूर्व में Iran और Israel के बीच तनाव बढ़ा, तब भारतीय सरकार ने स्थिति पर लगातार नजर रखी और निकासी के लिए तैयारियां तेज कीं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा सरकार की “सबसे बड़ी प्राथमिकता” है।  ‘ऑपरेशन सिंधु’ से सुरक्षित वापसी     2025 में पश्चिम एशिया के तनाव के दौरान भारत ने Operation Sindhu शुरू किया।     इस अभियान के तहत भारतीय नागरिकों को पहले Armenia पहुंचाया गया और फिर विशेष विमानों से भारत लाया गया।     रिपोर्ट के अनुसार इस प्रक्रिया को बेहद व्यवस्थित और सुरक्षित बताया गया। रूस-यूक्रेन युद्ध में सबसे बड़ा मिशन रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत ने Russia–Ukraine War में फंसे नागरिकों को निकालने के लिए Operation Ganga शुरू किया। इस अभियान में  23,000 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया। 18 देशों के 147 विदेशी नागरिकों को भी मदद मिली। इन लोगों को पहले पोलैंड, रोमानिया, हंगरी, स्लोवाकिया और मोल्दोवा जैसे पड़ोसी देशों में पहुंचाया गया और फिर विशेष उड़ानों से भारत लाया गया।  

14 करोड़ के सोना-चांदी के साथ तस्करी गैंग पकड़ा गया, दिल्ली से कोलकाता तक फैला नेटवर्क

नई दिल्ली राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने दिल्ली और कोलकाता के बीच सक्रिय एक संगठित सोना तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान एजेंसी ने 14.13 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का सोना, चांदी और भारतीय मुद्रा बरामद कर छह लोगों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बरामदगी में 8,286.81 ग्राम सोना शामिल है जिसकी कीमत लगभग 13.41 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके अलावा 7,350.4 ग्राम चांदी जिसकी कीमत करीब 19.67 लाख रुपये है और 51.74 लाख रुपये की भारतीय नकदी भी जब्त की गई है। यह कार्रवाई सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत की गई है। ‎डीआरआई को मिली विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर यह ऑपरेशन शुरू किया गया था। अधिकारियों को सूचना मिली थी कि तस्करी का सोना ट्रेन के जरिए राष्ट्रीय राजधानी लाया जा रहा है। सूचना के आधार पर अधिकारियों ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर कोलकाता से ट्रेन द्वारा पहुंचे एक यात्री को रोका। जांच में उसके पास विदेशी मार्किंग वाला सोना मिला, जिसे स्टेशन के बाहर मौजूद एक व्यक्ति को सौंपा जाना था। मौके पर ही सोना लेकर आए व्यक्ति और रिसीवर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों से पूछताछ के बाद जांच दिल्ली के अन्य ठिकानों तक पहुंची। डीआरआई की आगे की कार्रवाई में शहर में चल रही एक अवैध सोना गलाने की इकाई का पता चला, जहां विदेशी मूल के सोने को पिघलाकर उसकी पहचान मिटाई जाती थी और बाद में उसे घरेलू सर्राफा बाजार में बेचा जाता था। छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने वहां से अतिरिक्त सोना-चांदी और बड़ी मात्रा में भारतीय नकदी बरामद की। इस अवैध यूनिट का संचालन करने वाले प्रबंधक को भी गिरफ्तार कर लिया गया। जांच आगे बढ़ने पर डीआरआई की टीम कोलकाता पहुंची, जहां तस्करी नेटवर्क के कथित मास्टरमाइंड का पता चला। वह एक अन्य अवैध मेल्टिंग यूनिट में मिला, जहां से और पिघलाया हुआ सोना बरामद हुआ। उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारियों के अनुसार, दो अन्य कैरियरों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उन्हें विदेश से तस्करी कर लाया गया सोना मिलता था, जिसे पहचान मिटाने के लिए पिघलाया जाता था और फिर ट्रेन के जरिए दिल्ली भेजा जाता था। तस्करी, परिवहन, सोना गलाने और बाजार में खपाने की साजिश में शामिल सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर सक्षम अदालत में पेश किया गया है। मामले में आगे की जांच जारी है। भारत में सोने पर ऊंचे आयात शुल्क और घरेलू बाजार में इसकी मजबूत मांग के कारण सोना तस्करी लंबे समय से प्रवर्तन एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। तस्कर अक्सर सोने को अलग-अलग शहरों के रास्ते भेजकर और उसकी पहचान बदलकर बाजार में उतारने की कोशिश करते हैं।

खर्ग द्वीप हमले का बदला! ईरान के हमलों से दुबई-कुवैत एयरपोर्ट दहले, कई धमाकों से हड़कंप

कुवैत कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी ड्रोन से हमले किए गए। हालांकि इन हमलों में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। इसके अलावा फुजैराह में धुआं उठते देखाय गया। यहां एक जॉर्डन के नागरिक के घायल होने की खबर है। दुबई में ईरान मिसाइल अटैक भी कर रहा है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी युद्ध भयानक रूप लेता जा रहा है। इस युद्ध के चलते पूरी दुनिया में फ्यूल का संकट खड़ा हो गया है। वहीं ईरान लगातार अपने पड़ोसी देशों में भी हमला कर रहा है। यूएई के दुबई में ईरान ने हमले बंद ही नहीं किए। रविवार को भी दुबई के मरीना और अल सुफूह इलाके में जोरदार धमाके हुए और काला धुआं उठताा हुआ दिखाई दिया। बतादें कि इस युद्ध को भी 16 दिन बीत रहे हैं।   कुवैत एयरपोर्ट पर हमला इसके अलावा कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी ड्रोन से हमले किए गए। हालांकि इन हमलों में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। इसके अलावा फुजैराह में धुआं उठते देखाय गया। यहां एक जॉर्डन के नागरिक के घायल होने की खबर है। दुबई में ईरान मिसाइल अटैक भी कर रहा है। हालांकि यहां एयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात है। अमेरिका के खर्ग द्वीप पर हमले के बाद तनाव और बढ़ गया है। इसे ईरान की रीढ़ की हड्डी कहा जा सकता है क्योंकि यहीं से ईरान 90 फीसदी तेल का आयात करता है। ईरान ने करीब 1800 मिसाइल और ड्रोन अटैक यूएई पर किए हैं। इसके अलावा अन्य देशों में भी जमकर ड्रोन और मिसाइल अटैक हुए हैं। यूएई में ईरान ने 1600 ड्रोन, 294 मिसाइल और 15 क्रूज मिसाइल अटैक किए। इनमें कम से कम 294 लोग मारे गए हैं और 141 घायल हुए हैं। शनिवार को ही ईरान ने 33 ड्रोन हमले कर दिए। वहीं ड्रोन और मिसाइल अटैक की फुटेज सोशल मीडिया पर डालने वाले 10 विदेशियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। भारत के लिए भी खड़ी हो रही परेशानी पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की स्थिति, भारत के निर्यात के लिए अनिश्चितता पैदा कर रही है। निर्यातक बदलते हालात पर नजर रखे हुए हैं, क्योंकि अतिरिक्त शुल्क और लंबा परिवहन समय माल की आवाजाही को प्रभावित कर रहे हैं। परिधान उद्योग के एक विशेषज्ञ ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण अगले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया क्षेत्र में जाने वाले निर्यात ऑर्डर में कमी आ सकती है और वहां खपत भी घट सकती है। भारत के कुल परिधान निर्यात का लगभग 11.8 प्रतिशत हिस्सा उन पश्चिम एशियाई देशों में जाता है, जो इस समय युद्ध के प्रभाव में हैं। भारत का तैयार वस्त्र निर्यात संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इजराइल, कुवैत, ओमान, कतर, इराक, बहरीन और ईरान जैसे देशों को वित्त वर्ष 2024-25 में 1.9 अरब डॉलर का रहा, जो 2023-24 में 1.82 अरब डॉलर था। कुल मिलाकर भारत का परिधान निर्यात वित्त वर्ष 2024-25 में 15.97 अरब डॉलर रहा, जबकि 2023-24 में यह 14.51 अरब डॉलर था। चमड़ा निर्यातक परिषद के चेयरमैन रमेश कुमार जुनेजा ने कहा कि फारस की खाड़ी में जाने वाले माल की ढुलाई फिलहाल पूरी तरह रुक गई है। उन्होंने कहा, "बीमा शुल्क बढ़ गया है। 20 फुट के कंटेनर पर यह 1,200 अमेरिकी डॉलर और 40 फुट पर 2,400 अमेरिकी डॉलर बढ़ गया है।"