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नवरात्रि ऐप पर डर्टी चैट और प्लानिंग का खुलासा, विवा कॉलेज के गरबा ग्रुप में सामने आई गंभीर बात

विरार  देश में इस समय नवरात्री की धूम है. हर तरफ पूजा पाठ से लेकर गरबा तक कई रांगा-रंग कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है. इसी बीच महाराष्ट्र के विरार इलाके से नवरात्रि के पावन मौके पर एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है. यहां न्यू विवा कॉलेज में डांडिया के दौरान कुछ छात्रों ने लड़कियों का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया ऐप डिस्कॉर्ड पर डाला और उन पर अश्लील कमेंट भी किए. यह मामला सामने आने पर कार्यक्रम आयोजकों ने तुरंत इसकी शिकायत पुलिस को दी, जिसके बाद FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है. लड़कियों के वीडियो डाल किए गंदे कमेंट्स पुलिस FIR के मुताबिक, न्यू विवा कॉलेज में पिछले 20 सालों से नवरात्रि पर गरबा का आयोजन होता है. इसमें कॉलेज के छात्र, पूर्व छात्र और इलाके के लोग शामिल होते हैं. इस बार भी 22 सितंबर से 26 सितंबर तक गरबा का कार्यक्रम चला. इसी दौरान कॉलेज के एक छात्र ने डांडिया खेलती लड़कियों का वीडियो बनाया और उसे डिस्कॉर्ड पर पोस्ट कर दिया. न सिर्फ इतना, बल्कि उसने और एक अन्य युवक ने इन वीडियो पर अश्लील भाषा में कमेंट भी किए. कैसे लगा आरोपी का पता? दरअसल, 26 सितंबर की शाम को कॉलेज में डांडिया का कार्यक्रम चल ही रहा था कि एक अज्ञात व्यक्ति कॉलेज प्रशासन के पास पहुंचा और बताया कि एक छात्र ने लड़कियों का वीडियो डालकर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक बातें लिखी हैं. इसके बाद कॉलेज ने जब अन्य छात्रों से पूछताछ की, तो पता चला कि वीडियो शाहिद नाम के छात्र ने अपने मोबाइल और व्हाट्सएप नंबर (9765383955) से डिस्कॉर्ड पर डाला है. वहीं, फैज नाम के एक और अकाउंट से उन पर गंदे कमेंट्स किए गए हैं. पुलिस की कार्रवाई इस घटना की शिकायत मिलते ही विरार पुलिस ने शाहिद और फैज नामक अकाउंट होल्डर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने इस हरकत से समाज और लड़कियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है. फिलहाल जांच जारी है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन अकाउंट्स को कौन-कौन चला रहा था और वीडियो कैसे शेयर किए गए.

रहस्य खुला: हेडगेवार ने संघ की स्थापना की थी सिर्फ 17 साथियों के साथ, इस घर से हुई शुरुआत

नई दिल्ली  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 साल पूरे हो रहे हैं। 2 अक्तूबर को होने वाले विजयादशमी पर्व के साथ ही RSS अपनी स्थापना के 100 सालों के उत्सव को मनाने की शुरुआत कर रहा है। कभी नागपुर के मोहिते का वाड़ा नाम की जगह पर शुरू हुआ संगठन भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर के तमाम देशों में चल रहा है। करोड़ों स्वयंसेवकों के साथ आरएसएस एक लंबी यात्रा पूरी कर चुका है। इस संगठन ने भारत छोड़ो आंदोलन, आजादी, विभाजन, आपातकाल से लेकर अब तक देश और समाज के जीवन में कई उतार चढ़ाव देखे। यही नहीं तीन बार प्रतिबंधों का भी सामना किया, लेकिन हर बार आरएसएस पहले से ज्यादा मजबूत होकर उभरा। आरएसएस की स्थापना से जुड़ी पहली मीटिंग डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के घर पर ही हुई थी, जो संघ के संस्थापक थे। 27 सितंबर, 1925 को पहली मीटिंग हुई थी और संयोग से वह दशहरे का दिन था। तभी से आरएसएस दशहरे को एक उत्सव के रूप में मनाता है और इस दिन पथ संचलनों का भी आयोजन किया जाता है। दिलचस्प तथ्य यह है कि जिस दिन आरएसएस की स्थापना हुई थी, उस समय 17 लोग ही डॉ. हेडगेवार के साथ मौजूद थे। इनमें से कुछ लोगों ने आगे सालों तक संघ का कार्य किया, जबकि कुछ लोगों की राह अलग भी हुई। इन 17 नामों में ये लोग शामिल थे। हेडगेवार के जिस घर पर आरएसएस की पहली बैठक हुई थी, आज वह देश भर के स्वयंसेवकों के लिए आस्था का केंद्र रहा है। अकसर देश भर के स्वयंसेवक यहां पहुंचते रहे हैं और यादें ताजा करते रहे हैं। बता दें कि डॉ. हेडगेवार एक दौर में कांग्रेस में ही थे और तब मध्य प्रांत के अध्यक्ष हुआ करते थे। लेकिन उन्होंने कांग्रेस छोड़कर आरएसएस का गठन किया। उनका उद्देश्य था कि स्वतंत्र भारत में हिंदू समाज की जागरूकता के लिए एक संगठन का निर्माण हो। डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार 2.    बापूजी साठे 3.    प्रल्हाद ठाकरे 4.    बालाजी हेडगेवार 5.    बापूराव भेड़ी 6.    भाऊजी कावरे 7.    अन्ना सोहनी 8.    विश्वनाथ राव केलकर 9.    रघुनाथराव बांडे 10.    अन्ना वैद्य 11.    नरहर पालेकर 12.    दादाराव परमार्थ 13.     अन्नाजी गायकवाड़ 14.    बाबूराव तेलंग 15.    तात्या तेलंग 16.     बालासाहेब आठाल्ये 17.     भाऊजी दाफे

ट्रंप की नई योजना से गाज़ा का भूगोल बदला, बफर ज़ोन और रंगबिरंगे मैप का विश्लेषण

गाज़ा  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा युद्ध को खत्म करवाने के लिए नया प्लान तैयार किया है. उन्होंने व्हाइट हाउस में इस प्लान को जारी किया. ट्रंप ने यह भी कहा है कि इजरायली पीएम बेंजामिन नेतान्याहू इस प्लान से सहमत हैं. इसके साथ ही ट्रंप ने गाजा का नया नक्शा तैयार किया है. इस नक्शे के अनुसार गाजा और इजरायल के बीच अब हमेशा के लिए एक बफर जोर रहेगा. यानी कि इस रेखा के पार न तो इजरायली सैनिक जा सकेंगे, न ही फिलीस्तीन के लोग आ सकेंगे.  ट्रंप ने कहा कि इजरायल और अन्य देशों ने उनके द्वारा बताई गई रूपरेखा को स्वीकार कर लिया है. ट्रंप ने कहा, "अगर हमास इसे स्वीकार कर लेता है, तो इस प्रस्ताव में सभी शेष बंधकों को तुरंत रिहा करने का प्रावधान है, लेकिन किसी भी स्थिति में 72 घंटे से ज़्यादा समय नहीं लगेगा." इस प्रावधान के तहत हमास को सभी जीवित और मृत बंधकों को रिहा करना होगा. इजरायल-गाजा बॉर्डर पर बफर जोन राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा जारी नक्शे में तीन लाइनें हैं. नीली, पीली और लाल. इसके बाद बफर जोन है. नीली वो रेखा है जहां तक अभी इजरायली रक्षा बलों का नियंत्रण है.  ये रेखा खान यूनुस के पास है.  इसके बाद राफा से होकर पीली रेखा गुजरती है. इसे फर्स्ट विदड्राअल लाइन कहा गया है. इस पीली रेखा का मतलब है कि बंधकों के छोड़े जाने के साथ ही इजरायली सेना पीली रेखा तक आ जाएगी.  इसके बाद सेकेंड विदड्राअल लाइन है. ये लाल रेखा है. यानी कि सेकेंड विदड्राअल के बाद इजरायल की सेना यहां आकर रूक जाएगी.   इसके बाद बफर जोन शुरू होता है. इजरायल के सैनिक थर्ड विदड्राअल के बाद यहीं आकर रुक जाएंगे.    हमास को चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है, "मुझे उम्मीद है कि हम शांति के लिए एक समझौता करेंगे, और अगर हमास इस समझौते को अस्वीकार कर देता है, जो हमेशा संभव है, तो इस डील से सिर्फ वे ही बच जाएंगे.  अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी देते हुए कहा, "बाकी सभी ने इसे स्वीकार कर लिया है. लेकिन मुझे लगता है कि हमें एक सकारात्मक जवाब मिलेगा. लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है, तो जैसा कि आप जानते हैं बीबी (इजरायली पीएम), आपको जो करना होगा, उसके लिए हमारा पूरा समर्थन है." प्रस्ताव में कहा गया है, "इजरायली सेना बंधकों की रिहाई की तैयारी के लिए सहमत रेखा पर वापस लौट जाएगी." इस प्लान  में यह भी कहा गया है कि गाजा का "गाजा के लोगों के लाभ के लिए पुनर्विकास" किया जाएगा, और "यदि दोनों पक्ष इस प्रस्ताव पर सहमत होते हैं, तो युद्ध तुरंत समाप्त हो जाएगा." इजरायल रिहा करेगा 250 कैदी हमास द्वारा सभी बंधकों को रिहा कर दिए जाने के बाद इजरायल 250 आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों को रिहा करेगा, साथ ही 7 अक्टूबर 2023 के बाद हिरासत में लिए गए 1,700 गाजावासियों को भी रिहा करेगा. इजरायल रिहा किए गए प्रत्येक इज़रायली बंधक के बदले, 15 मृत गाजावासियों के अवशेष भी रिहा करेगा.  गाजा छोड़ने को स्वतंत्र होंगे हमास सदस्य सभी बंधकों की वापसी के बाद, शांति की राह पर चलने को इच्छुक हमास के सदस्यों को माफी दे दी जाएगी. इसके लिए उन्हें अपने हथियार सरेंडर करने होंगे. गाज़ा छोड़ने के इच्छुक हमास सदस्यों को उनके गंतव्य देशों तक सुरक्षित मार्ग प्रदान किया जाएगा.  गाजा में हमास का नहीं होगा कोई रोल  हमास और अन्य गुट इस बात पर सहमत हैं कि वे गाजा के शासन में प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष या किसी भी रूप में कोई भूमिका नहीं निभाएंगे. सुरंगों और हथियार उत्पादन सुविधाओं सहित सभी सैन्य, आतंकवादी और आक्रामक बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया जाएगा और उनका पुनर्निर्माण नहीं किया जाएगा.    

हेमा मालिनी के नेतृत्व में NDA की टीम करेगी करूर दौरा, जानें पूरा मिशन

नई दिल्ली तमिलनाडु के करूर में TVK की रैली के दौरान हुई भगदड़ में अब तक 41 लोगों की मौत हो चुकी है। इस दर्दनाक हादसे के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने एक 8 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया है। यह टीम हादसे की वजहों की जांच करेगी और पीड़ित परिवारों से भी मिलेगी। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस समिति का गठन किया है। इस टीम में भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर, तेजस्वी सूर्या, बृजलाल, अपराजिता सरंगी, रेखा शर्मा, शिवसेना के श्रीकांत शिंदे और TDP के के. पुट्टा महेश कुमार शामिल हैं। इस समिति की संयोजक भाजपा सांसद और अभिनेत्री हेमा मालिनी होंगी।   कहां-कहां जाएगी NDA की टीम? भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। बयान के अनुसार, यह टीम घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का आकलन करेगी और एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगी। इससे पहले केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन और तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन के साथ पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार हर संभव मदद उपलब्ध कराएगी। सीतारमण ने करूर के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल का भी दौरा किया और घायलों का हालचाल जाना। स्टालिन का संदेश तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस घटना को बहुत बड़ी त्रासदी बताया। उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्हें घटना की जानकारी मिली उन्होंने तुरंत जिला प्रशासन को सक्रिय कर सभी जरूरी कदम उठाने के आदेश दिए। स्टालिन ने अपने वीडियो संदेश में कहा, करूर में जो हुआ वह एक क्रूर त्रासदी है। यह ऐसा हादसा है जो पहले कभी नहीं हुआ और भविष्य में भी कभी नहीं होना चाहिए। मैंने अस्पातल जाकर जो दृश्य देखे वे अब भी मेरी आंखों के समने ताजा हैं।  

कैंसर मरीजों के लिए उम्मीद की किरण: IIT मद्रास ने लॉन्च किया जीनोम और टिशू बैंक

नई दिल्ली  कैंसर अभी भी दुनिया भर में एक जानलेवा बीमारी है, और भारत भी इससे अछूता नहीं है. बढ़ते मामलों के चलते वैसा इलाज चाहिए जो हर व्यक्ति के जीन और टिशू के अनुकूल हो. इस ज़रूरत को देखते हुए आईआईटी मद्रास ने एक नई पहल की है, एक कैंसर जीनोम और टिशू बैंक बनाकर, जो भारत में पर्सनलाइज्ड (व्यक्ति-विशेष) कैंसर उपचार को एक नई राह दे सकती है. सवाल आता हो कि कैसे करेगा काम ये बैंक? तो इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य है देश भर के कैंसर रोगियों से लगभग 7,000 ट्यूमर सैंपल्स इकट्ठे करना और उन्हें लैब में बढ़ाना. इन नमूनों पर अलग-अलग थेरेपी ट्राय की जाएगी, ताकि यह देखा जाए कि किस थेरेपी का कौन से रोगी पर सबसे असर है. इस तरह, डॉक्टर अनुमान लगाने की बजाय पहले यह जान सकेंगे कि किस इलाज से बेहतर परिणाम मिलेंगे. आईआईटी मद्रास की खोज आईआईटी मद्रास की टीम ने पहले ही एक दिलचस्प खोज की है. आपको बता दें कि एक स्तन कैंसर में ऐसा म्यूटेशन पाया है जो भारत में ज्यादा आम है, जबकि पश्चिमी देशों में नहीं. इससे यह पता चलता है कि सिर्फ विदेशी जीनोमिक डेटा पर भरोसा करना सही नहीं है, बल्कि भारत-विशिष्ट अध्ययन ज़रूरी हैं. भारत में नयापन और असर यह कैंसर जीनोम-टिशू बैंक भारत के एटलस (Bharat Cancer Genome Atlas) से जुड़ा है. इस डेटाबेस में भारत के कई कैंसर मामलों का जीनोमिक डेटा शामिल किया जाएगा. यह इंफॉर्मेशन डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को मदद करेगी कि कौन सी दवाएं और इलाज कैसे काम करें. इस पहल का एक बड़ा मकसद है प्रिसिजन मेडिसिन लाना यानी ऐसा इलाज जो हर रोगी की जीन और बॉडी प्रोफ़ाइल को ध्यान में रखते हुए तय किया जाए. इससे इलाज अधिक असरदार होगा, साइड इफेक्ट कम होंगे और मरीज को बेहतर जीवन मिलेगा. क्यों जरूरी होते हैं कैंसर जीनोम और टिशू बैंक कैंसर जीनोम और टिशू बैंक जरूरत इसलिए पड़ती है क्योंकि हर इंसान के डीएनए अलग होते हैं. कैंसर भी अलग अलग लोगों में अलग तरीकों से बढ़ता है. अभी तक ज्यादातर इलाज विदेशी रिसर्च और डेटा पर होते हैं, जबकि भारतीयों के जीन और टिश्यूज में अंतर पाया जाता है. अगर भारतीयों के पास अपना डेटा और टिश्यू बैंक होगा तो डॉक्टर और वैज्ञानिकों को समझने में आसानी होगी कि किस तरह का कैंसर ज्यादा होता है और कौन सी दवा या थेरेपी बेहतर असर करेगी. दूसरा कारण है कि कैंसर के इलाज में समय और सटीकता बहुत मायने रखती है. अगर डॉक्टरों के पास पहले से जानकारी होती कि किस मरीज को कौन सी दवा कितनी असरदार होती, तो इलाज में देरी नहीं होगी और सही दवा और थेरेपी भी दी जा सकेगी.  

ई-व्हीकल यूज़र्स के लिए खुशखबरी! सरकार लगाएगी 72 हजार चार्जिंग स्टेशन, PM E-Drive को मिला बूस्ट

नई दिल्ली इलेक्ट्रिक कार खरीदने से पहले हर किसी के जेहन सबसे बड़ा सवाल चार्जिंग इंफ्रा को लेकर ही उठता है. ड्राइविंग रेंज की चिंता को तो कार कंपनियों ने काफी हद तक बड़े बैटरी पैक से दूर करने की कोशिश की है. लेकिन अब भी लोग ये सोचते हैं कि, “इलेक्ट्रिक कार ले तो लें… लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का क्या?”. इलेक्ट्रिक कारों की कीमत के बाद दूसरी सबसे बड़ी टेंशन यही है, जिसने भारत में EV क्रांति की रफ्तार धीमी कर दी है. अब सरकार इस सबसे बड़े रोड़े को हटाने की तैयारी में है.  भारी उद्योग मंत्रालय ने प्रधानमंत्री ई-ड्राइव (PM E-Drive) योजना के तहत पब्लिक ईवी चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए विस्तृत ऑपरेशनल गाइडलाइंस जारी की है. यह गाइडलाइंस न सिर्फ उद्योग जगत बल्कि आम उपभोक्ता के लिए भी अहम साबित होंगी, क्योंकि अब भारत में चार्जिंग स्टेशनों की संख्या और पहुंच दोनों में बड़ा विस्तार देखने को मिलेगा. इसमें साफ कहा गया है कि पब्लिक चार्जिंग स्टेशन बनाने वालों को तगड़ी सब्सिडी मिलेगी. कहीं 70%, कहीं 80%, और सरकारी इमारतों में लगे फ्री चार्जर पर तो पूरी 100% सब्सिडी दी जाएगी. सरकार की 10,000 करोड़ रुपये की PM E-Drive योजना में से 2,000 करोड़ रुपये चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होंगे. इसका लक्ष्य है 72,300 नए पब्लिक चार्जिंग स्टेशन, बैटरी स्वैपिंग और बैटरी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना. योजना का जोर खासतौर पर मेट्रो शहरों, स्मार्ट सिटीज़, राज्य की राजधानियों और नेशनल व स्टेट हाईवे जैसे हाई-डेन्सिटी इलाकों पर होगा. गाइडलाइंस के मुताबिक-      सरकारी इमारतों (जैसे दफ्तर, अस्पताल, स्कूल, रेज़िडेंशियल कॉम्प्लेक्स) में यदि पब्लिक के लिए मुफ्त चार्जिंग की सुविधा दी जाएगी, तो 100% सब्सिडी मिलेगी.     PSU आउटलेट्स, एयरपोर्ट, मेट्रो/बस स्टेशन, बंदरगाह और NHAI टोल प्लाज़ा पर बने चार्जिंग स्टेशनों को 80% तक इंफ्रास्ट्रक्चर और 70% तक EVSE सब्सिडी दी जाएगी.     मॉल, मार्केट और सड़कों पर बने स्टेशन को 80% सब्सिडी सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर पर मिलेगी।     बैटरी स्वैपिंग और बैटरी चार्जिंग स्टेशन भी 80% सब्सिडी के दायरे में आएंगे. सब्सिडी की गणना ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) द्वारा तय बेंचमार्क कॉस्ट या वास्तविक लागत (जो भी कम हो) के आधार पर होगी. उदाहरण के लिए, 50 kW तक के चार्जर पर 6.04 लाख रुपये और 150 kW से अधिक पर 24 लाख रुपये की लागत तय है. वहीं, एक 50 kW CCS-II चार्जर की बेंचमार्क कॉस्ट 7.25 लाख रुपये और 100 kW CCS-II चार्जर की 11.68 लाख रुपये तय की गई है. योजना का सबसे अहम पहलू यह है कि चार्जिंग स्टेशनों को नेशनल यूनिफाइड EV चार्जिंग हब से जोड़ा जाएगा. इससे यूज़र्स को रियल-टाइम में चार्जिंग स्टेशन की लोकेशन, उपलब्धता और पेमेंट ऑप्शन मिलेंगे. भारत में फिलहाल करीब 30,000 पब्लिक EV चार्जिंग स्टेशन हैं, जो मौजूदा ईवी डिमांड की तुलना में बेहद कम माने जाते हैं. यही वजह है कि सरकार ने इस योजना में चार्जिंग नेटवर्क को प्राथमिकता दी है. योजना का लक्ष्य है 22,100 फास्ट चार्जर (कारों के लिए), 1,800 (बसों के लिए) और 48,400 चार्जर (टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर के लिए) पब्लिक चार्जर इंस्टॉल करना है. इस पूरी परियोजना की इंप्लीमेंटिंग एजेंसी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) होगी. सब्सिडी दो चरणों में जारी की जाएगी, जिसमें परफॉर्मेंस और कम्प्लायंस मानकों को पूरा करना अनिवार्य होगा. चार्जिंग स्टैंडर्ड्स भी तय कर दिए गए हैं-      टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर: लाइट EV DC (IS-17017-2-6) और लाइट EV AC/DC कॉम्बो (IS-17017-2-7) – 12 kW तक.     कार और बसें: CCS-II (IS-17017-2-3) – 50 kW से 250 kW तक.     हेवी ड्यूटी ई-बसेस और ई-ट्रक: CCS-II (250–500 kW), हर गन से कम से कम 120 kW आउटपुट. इस नई गाइडलाइन से यह साफ हो रहा है कि, भारत सरकार अब चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की दिशा में आक्रामक रणनीति अपना रही है. जानकारों का भी मानना है कि चार्जिंग नेटवर्क का रणनीतिक विस्तार ही वह निर्णायक कदम होगा, जिससे देश में EV अपनाने की गति दोगुनी हो सकती है. क्या है PM E-Drive स्कीम? पीएम ई-ड्राइव (PM E-Drive) यानी प्राइम मिनिस्टर इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट, भारत सरकार की नई योजना है, जिसे 1 अक्टूबर 2024 से लागू किया गया है और यह मार्च 2026 तक चलेगी. इसका मकसद देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) को बढ़ावा देना और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करना है. करीब 10,900 करोड़ रुपये के बजट वाली इस योजना के तहत ई-टू व्हीलर, ई-थ्री व्हीलर, ई-बस और ई-ट्रक जैसे वाहनों पर सब्सिडी मिलेगी. साथ ही, सरकार 72,000 से ज़्यादा चार्जिंग स्टेशन और बैटरी स्वैपिंग पॉइंट्स लगाने की तैयारी में है.  इस योजना की खासियत यह है कि सब्सिडी सीधे ग्राहक तक e-voucher सिस्टम से पहुँचेगी और चार्जिंग स्टेशनों को नेशनल यूनिफाइड EV चार्जिंग हब से जोड़ा जाएगा. ताकि लोकेशन और पेमेंट की सुविधा आसान हो. सरकार चाहती है कि पेट्रोल-डीज़ल पर निर्भरता कम हो, प्रदूषण कम हो और आम लोगों को EV अपनाने में “रेंज एंग्ज़ाइटी” यानी चार्जिंग की चिंता न रहे.

पृथ्वी की चाल में बदलाव! नासा ने बताया—चीन की मेगा डैम परियोजना से खिसकी धरती की धुरी, सिकुड़ा समय

बीजिंग  चीन के थ्री गॉर्जेस डैम (Three Gorges Dam) को दुनिया की सबसे बड़ी हाइड्रोपावर परियोजना माना जाता है. अब नासा ने इस बांध को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है. वैज्ञानिकों ने बताया कि इस डैम में संचित पानी की अपार मात्रा ने पृथ्वी की धुरी को करीब 2 सेंटीमीटर तक खिसका दिया है. इतना ही नहीं, पृथ्वी के घूमने की गति में भी मामूली बदलाव दर्ज किया गया है. नासा के मुताबिक थ्री गॉर्जेस डैम में अरबों टन पानी संग्रहीत है. जब यह पानी पृथ्वी की सतह पर फैलने के बजाय एक जगह पर इकट्ठा हो गया, तो मास डिस्ट्रीब्यूशन यानि द्रव्यमान का वितरण बदल गया. अब इसका असर पृथ्वी के घूमने की गति पर पड़ा. नासा ने कहा कि पृथ्वी की घूर्णन गति में बदलाव की वजह से ही दिन लगभग 0.06 माइक्रोसेकंड छोटा हो गया है. आखिर कैसे बदली पृथ्वी की चाल? थ्री गॉर्जेस डैम चीन का एक इंजीनियरिंग चमत्कार है, जो यांग्त्जी नदी पर स्थित है. यह दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रोइलेक्ट्रिक डैम है, जो ऊर्जा उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण और नेविगेशन सुधार के लिए बनाया गया. डैम का निर्माण 1994 में शुरू हुआ और 2012 में पूर्ण रूप से चालू हो गया. यह सैंडौपिंग, यिचांग शहर के पास हूबेई प्रांत में मौजूद हैं. इसकी इंजीनियरिंग को समझाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक उदाहरण दिया है- जैसे कोई फिगर स्केटर अपने हाथ फैलाकर धीमे घूमता है और हाथ समेटकर तेजी से. बिल्कुल उसी तरह जब द्रव्यमान खिसकता है तो पृथ्वी की घूर्णन गति भी प्रभावित होती है. यही वजह है कि दिन छोटे हो रहे हैं. चीन की खतरनाक इंजीनियरिंग चीन के थ्री गॉर्जेस डैम में इतना पानी आ सकता है कि यह अकेले ही 22,500 मेगावॉट से अधिक बिजली पैदा कर सकता है. यह न केवल चीन की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करता है बल्कि बाढ़ नियंत्रण और नेविगेशन को भी बेहतर बनाता है. हालांकि अब यह सामने आया है कि इसकी शक्ति पृथ्वी जैसे ग्रह की भौतिक संरचना पर भी प्रभाव डालने में सक्षम है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बदलाव आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में महसूस नहीं किया जा सकता, लेकिन यह दिखाता है कि बड़े पैमाने पर इंसानी परियोजनाएं ग्रह की प्राकृतिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं. नासा ने इसे एक अहम उदाहरण बताया है कि कैसे इंसान की बनाई हुई संरचनाएं भी पृथ्वी की गतिशीलता पर असर डाल सकती हैं.

सुप्रीम कोर्ट नाराज़! फ्रॉड केस में बेल देने पर दो जजों को भेजा ट्रेनिंग पर, निचली अदालतों को चेतावनी

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने धोखाधड़ी के एक मामले में दी गई जमानत को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने मजिस्ट्रेट और सेशन जज के जमानत देने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए हैं. दोनों न्यायिक अधिकारियों को दिल्ली न्यायिक अकादमी में सात दिन की स्पेशल ट्रेनिंग का निर्देश दिया गया है. अदालत ने कहा कि चार्जशीट सामग्री की जांच किए बिना जमानत आदेश पारित किए गए थे.  कोर्ट ने पाया कि गंभीर तथ्यात्मक मैट्रिक्स के बावजूद जमानत नहीं दी जानी चाहिए थी. अदालत ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को मामले में जांच अधिकारियों की भूमिका की जांच करने का भी निर्देश दिया है.  जमानत के सिद्धांतों को तथ्यों से जोड़ा जाना चाहिए, उन्हें शून्यता में लागू नहीं किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने जाहिर की नाराजगी कोर्ट ने साफ कहा कि अगर वह एसीएमएम (ACMM) द्वारा आरोपी को जमानत दिए जाने और सेशन जज द्वारा इस पर हस्तक्षेप करने से इनकार करने के तरीके को नजरअंदाज करता है, तो यह अपनी ड्यूटी में फेल होगा. कोर्ट ने जमानत दिए जाने के आदेशों को रद्द करते हुए, दोनों न्यायिक अधिकारियों को करीब सात दिनों के विशेष न्यायिक प्रशिक्षण से गुजरने का निर्देश दिया.  कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से गुजारिश किया है कि दिल्ली न्यायिक अकादमी में ट्रेनिंग की उचित व्यवस्था की जाए, जिसमें उच्च न्यायालयों के फैसलों के महत्व पर न्यायिक अधिकारियों को संवेदनशील बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमानत आदेश चार्जशीट सामग्री की जांच किए बिना ही पारित कर दिए गए थे. कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि एसीएमएम (ACMM) का आदेश चार्जशीट में उपलब्ध सामग्री की जांच किए बिना कैसे पारित कर दिया गया. कोर्ट ने खुद नोट किया था कि 'धोखाधड़ी की कथित घटना में दोनों आरोपियों की भूमिका को चार्जशीट में स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है.' कोर्ट ने कहा कि जमानत के मामले मुख्य रूप से कानून के किसी भी सिद्धांत को लागू करने से पहले तथ्यों और परिस्थितियों पर तय किए जाने चाहिए. प्रक्रियागत खामियां और जांच अधिकारियों की भूमिका… कोर्ट ने जमानत देने के तरीके में हुई कुछ प्रक्रियागत अनियमितताओं को भी उजागर किया, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि आरोपी तकनीकी रूप से कोर्ट की कस्टडी में थे, फिर भी उन्हें औपचारिक रिहाई आदेश के बिना ही कोर्ट से जाने दिया गया था. अदालत ने यह भी कहा कि जांच अधिकारियों (IOs) की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. इसके चलते, दिल्ली पुलिस आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से आईओज (IOs) के आचरण की जांच करने और प्राथमिकता के आधार पर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है. क्या है मामला? यह मामला आरोपी पति और उसकी सह-आरोपी पत्नी से संबंधित था, जिन पर एक करोड़ नब्बे लाख रुपये लेने और जमीन हस्तांतरित करने का वादा करने का आरोप था. बाद में पता चला कि वह जमीन पहले ही गिरवी रख दी गई थी और किसी तीसरे पक्ष को बेची जा चुकी थी. अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि आरोपी आदतन अपराधी हैं और उनके खिलाफ इसी तरह के छह मामले लंबित हैं. कोर्ट ने जमानत रद्द करने का एक प्रमुख कारण आरोपियों का आचरण बताया. 2019 में हाई कोर्ट ने मध्यस्थता की ख्वाहिश जताने पर उन्हें अंतरिम सुरक्षा दी थी, लेकिन करीब चार साल बीत जाने के बाद भी मध्यस्थता प्रक्रिया से कोई नतीजा नहीं निकला. कोर्ट ने कहा कि गंभीर तथ्यात्मक मैट्रिक्स के रोशनी में जमानत नहीं दी जानी चाहिए थी. कोर्ट ने दोहराया कि जमानत के सिद्धांत हमेशा विशिष्ट मामलों के तथ्यों के साथ जुड़े होने चाहिए.  

UIDAI ने बदले आधार से जुड़े नियम, जरूरी अपडेट नहीं किया तो आधार हो सकता है निष्क्रिय

भोपाल    आधार कार्ड को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है। जिन लोगों के आधार कार्ड बने हुए 10 या इससे ज्यादा साल हो चुके हैं उनका आधार कार्ड रद्द हो सकता है। आधार कार्ड एक नागरिक के जीवन में अहम दस्तवेज है जो किसी भी काम काज के लिए सबसे पहले मांगा जाता है फिर चाहे वह सरकार की तरफ से दिया जाने वाला कोई लाभ हो या फिर हमारे मोबाइल से लेकर कोई काम, ऐसे में अगर किसी का आधार कार्ड रद्द हो जाए तो कितना मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।  लेकिन इन सभी सेवाओं का फायदा तभी मिल पाता है, जब आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर एक्टिव और सही हो। इसको लेकर एक नई अपडेट जारी कि गई है। जितने भी आधार कार्ड धारक हैं, सभी को यह जानना जरूरी है कि क्या-क्या अपडेट आप सभी को करना होगा। हाल ही में एक नई सूचना आई है कि अगर आप अपने आधार कार्ड को 10 साल से अपडेट नहीं कर रहे हैं, तो आपका आधार कार्ड बंद (डीएक्टिवेट) हो सकता है। इससे आपको कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। पहले मोबाइल नंबर ऑनलाइन अपडेट किया जा सकता था, लेकिन अब UIDAI ने यह सुविधा बंद कर दी है। अब अगर आपको अपने आधार कार्ड से जुड़े मोबाइल नंबर को बदलना है तो आपको नजदीकी आधार सेवा केंद्र जाकर ही यह काम करना होगा। तो इसलिए अब जल्दी अपने नजदीकी आधार केंद्र में जाएं और अपना मोबाइल नंबर अपडेट करवाएं।   आधार अपडेट के नए शुल्क और अनिवार्य नियम 1 अक्टूबर 2025 से आधार कार्ड में सामान्य सुधार (जैसे नाम या पता) के लिए 75 रुपये का शुल्क लगेगा. वहीं, अगर आप बायोमेट्रिक जानकारी, जैसे फिंगरप्रिंट, आइरिस या फोटो बदलना चाहते हैं, तो इसके लिए 125 रुपये देने होंगे. बच्चों (7 से 17 साल) के बायोमेट्रिक अपडेट के लिए भी अब 125 रुपये का शुल्क देना होगा. हालांकि, नया आधार कार्ड बनवाने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, ये पहले की तरह मुफ्त ही रहेगा. UIDAI के सीईओ, भुवनेश्वर कुमार के मुताबिक 1 अक्टूबर 2025 से 10 साल पुराने आधार कार्ड को अपडेट कराना अनिवार्य होगा. ये उन लोगों के लिए एक अतिरिक्त खर्च हो सकता है जो ग्रामीण और छोटे शहरों में रहते हैं. अगर आपने पिछले दस सालों में अपना आधार अपडेट नहीं कराया है, तो अब आपको अपने दस्तावेज जमा करके ये नया शुल्क देना होगा. बच्चों और किशोरों के लिए बायोमेट्रिक अपडेट एक अच्छी खबर ये है कि 5 से 7 साल के बच्चों और 15 से 17 साल के किशोरों को अब बायोमेट्रिक अपडेट के लिए कोई फीस नहीं देनी होगी. पहले ये 50 रुपये थी, जिसे अब माफ कर दिया गया है. हालांकि, इन आयु वर्गों के लिए बायोमेट्रिक अपडेट कराना अनिवार्य है. अगर इसे समय पर नहीं कराया गया, तो उनका आधार कार्ड अवैध हो सकता है. आधार कार्ड पर अब नहीं दिखेगा पति या पिता का नाम 15 अगस्त 2025 से, नए आधार कार्ड पर 18 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए पिता या पति का नाम नहीं दिखेगा. ये जानकारी सिर्फ UIDAI के रिकॉर्ड में रहेगी. इस बदलाव से बार-बार नाम बदलने की जरूरत नहीं होगी और लोगों की प्राइवेसी भी सुरक्षित रहेगी, खासकर महिलाओं के लिए ये एक बड़ा कदम है. जन्मदिन और ‘केयर ऑफ’ कॉलम में बदलाव अब आपके आधार कार्ड पर जन्मतिथि सिर्फ साल (जैसे 1990) के रूप में दिखेगी, जबकि पूरी जन्मतिथि (जैसे 01/01/1990) UIDAI के रिकॉर्ड में ही रहेगी. इसके अलावा, कार्ड से 'केयर ऑफ' (C/o) कॉलम हटा दिया गया है. अब आपके आधार कार्ड पर सिर्फ आपका नाम, उम्र और पता ही दिखाई देगा. एड्रेस अपडेट के लिए नए दस्तावेज और डिजिटल प्रक्रिया जनवरी 2025 से पता बदलने के लिए सिर्फ बैंक स्टेटमेंट या यूटिलिटी बिल (बिजली, पानी, गैस का बिल) ही स्वीकार होंगे. अन्य सुधारों जैसे नाम या जन्मतिथि के लिए पैन कार्ड, वोटर आईडी या बर्थ सर्टिफिकेट ही मान्य होंगे. 1 अक्टूबर 2025 से अपडेट की प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल हो जाएगी. इसका मतलब है कि आप UIDAI की वेबसाइट (uidai.gov.in) या mAadhaar ऐप पर रिक्वेस्ट सबमिट करके नजदीकी आधार केंद्र पर अपने डॉक्यूमेंट्स वेरिफाई करा सकते हैं. इसके बाद अपडेट ऑनलाइन ही हो जाएगा. ये सभी बदलाव लोगों को आधार अपडेट कराने में सहूलियत देने और कार्ड की जानकारी को और सुरक्षित बनाने के लिए किए जा रहे हैं.

सीमा पार दोस्ती को मिलेगी रफ्तार: भारत-भूटान के बीच चलेंगी ट्रेनें, दो नई रेल परियोजनाओं को मिली मंजूरी

नई दिल्ली भारत और भूटान के रिश्तों को नई मजबूती देने के लिए सरकार ने सोमवार को 4,033 करोड़ रुपये की लागत से दो बड़े रेल प्रोजेक्ट को हरी झंडी दिखा दी. इन परियोजनाओं से न सिर्फ दोनों देशों के बीच संपर्क बढ़ेगा, बल्कि व्यापार, पर्यटन और लोगों की आवाजाही भी आसान हो जाएगी. सबसे खास बात, अब आप ट्रेन से सीधे भूटान जा सकेंगे. पश्चिम बंगाल में हासीमारा तक ट्रेन थी, अब यह सीधे भूटान के गालेफू तक चलेगी. अब तक हा पहला प्रोजेक्ट असम के कोकराझार से भूटान के गालेफू तक रेल लाइन बिछाने का है. 69 किलोमीटर लंबी इस लाइन पर 3,456 करोड़ रुपये खर्च होंगे. दूसरा प्रोजेक्ट पश्चिम बंगाल के बनरहाट से भूटान के समत्से को जोड़ने के लिए है। इसकी लंबाई 20 किलोमीटर होगी और इस पर 577 करोड़ रुपये की लागत आएगी. रेल मंत्री अश्व‍िनी वैष्‍णव ने फैसले की जानकारी देते हुए कहा, भारत और भूटान के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं. भारत,भूटान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और उसके अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारतीय बंदरगाह अहम भूमिका निभाते हैं. भूटान के समत्से और गालेफू बड़े एक्सपोर्ट-इंपोर्ट हब हैं,जो भारत-भूटान की करीब 700 किलोमीटर लंबी सीमा को जोड़ते हैं. भारत ने भरोसा दिया है कि भूटान के इन आर्थिक केंद्रों को बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे. यह भूटान में बनने वाला पहला रेल प्रोजेक्ट है,जो भारत से सीधा जोड़ेगा. लोगों और सामान की आवाजाही पहले से कहीं आसान हो जाएगी. इस प्रोजेक्ट से इलाके के लोगों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसर बढ़ेंगे. गालेफू को एक माइंडफुलनेस सिटी (शांतिपूर्ण और आधुनिक शहर) के रूप में विकसित किया जा रहा है,जिससे पर्यटन और निवेश को बढ़ावा मिलेगा. क‍िसी तीसरे देश का दखल नहीं भारत और भूटान के बीच नई रेल लाइन परियोजना पर विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि यह पूरी तरह द्विपक्षीय समझौते (MoU) के आधार पर हो रही है और इसमें किसी तीसरे देश का कोई हस्तक्षेप नहीं है. उन्होंने साफ किया कि यह कदम चीन को सीधा संदेश है कि भूटान में भारत की साझेदारी मजबूत है और बाहरी दखल की गुंजाइश नहीं है. इस रेल लाइन से दोनों देशों के बीच कनेक्टिविटी और भरोसा और गहरा होगा, साथ ही व्यापार और पर्यटन के नए रास्ते भी खुलेंगे। इसे भारत की रणनीतिक पहल माना जा रहा है. आवाजाही आसान होगी विदेश सच‍िव विक्रम मिसरी ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूटान यात्रा पर गए थे. भूटान और भारत के बीच आपसी संबंध काफी अच्छे रहे हैं. भारतीय निजी कंपनी भूटान में पावर प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं. कनेक्टिविटी को लेकर रोड कनेक्टिविटी पर काफी काम हुआ है. हम इसे और आगे बढ़ाने की कोश‍िश कर रहे हैं. इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और लोगों की आवाजाही और आसान होगी. पूरा होने में चार साल लगेंगे  भारत और भूटान को जोड़ने वाली कोकराझार (असम) से गालेफू (भूटान) तक नई रेल लाइन बनाने का काम शुरू हो रहा है. इस प्रोजेक्ट पर करीब 3,456 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसे पूरा करने में 4 साल लगेंगे. रूट की लंबाई: 69 किलोमीटर भूटान का इलाका: सरपांग जिला भारत का इलाका: असम के कोकराझार और चिरांग जिले कुल स्टेशन: 6 बड़े पुल: 29 छोटे पुल: 65 महत्वपूर्ण ब्रिज: 2 वायडक्ट (लंबा ऊंचा पुल): 2 रूब्स (रेलवे अंडरब्रिज): 39 रोब्स (रेलवे ओवरब्रिज): 1 गुड्स शेड (माल लोडिंग-प्वाइंट): 2 इस रेल लाइन से भारत-भूटान के बीच व्यापार और पर्यटन को नई रफ्तार मिलेगी और सीमा क्षेत्रों के लोगों को भी बड़ा फायदा होगा. सीमावर्ती इलाकों में रोजगार भी बढ़ेगा विशेषज्ञों का मानना है कि यह रेल कनेक्टिविटी न केवल दोनों देशों के बीच आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगी, बल्कि सीमावर्ती इलाकों के लोगों को रोजगार और विकास के नए अवसर भी उपलब्ध कराएगी. पर्यटक आसानी से भूटान तक ट्रेन से सफर कर सकेंगे, जिससे पर्यटन उद्योग को भी गति मिलेगी. भारत और भूटान लंबे समय से एक-दूसरे के भरोसेमंद साझेदार रहे हैं. इन प्रोजेक्ट्स को इस रिश्ते को और गहराई देने वाला कदम माना जा रहा है. सरकार का मानना है कि जब ये लाइनें तैयार होंगी, तो लोगों की जिंदगी और कारोबार दोनों ही और बेहतर तरीके से जुड़ जाएंगे.