samacharsecretary.com

ईंधन खपत कम करने की सलाह के बीच लॉकडाउन पर बोले किरेन रिजिजू, चर्चा तेज

नई  दिल्ली  क्या भारत में लॉकडाउन लगने वाला है? इसको लेकर मोदी सरकार के मंत्री का बड़ा बयान आया है। संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने इस पर अपडेट दी है। उन्होंने कहाकि अभी भारत में हालात इतने नहीं बिगड़े हैं कि ऐसा कदम उठाना पड़े। लेकिन खराब समय के लिए अभी से सतर्कता जरूरी है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देश के नागरिकों से तेल बचाने और अनावश्यक खर्च से बचने की सलाह दी थी। पीएम मोदी ने ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के बीच लोगों को और पैनिक बाइंग से बचने के लिए भी कहा था। केंद्रीय मंत्री रिजिजू प्रधानमंत्री के इसी बयान के संदर्भ में अपनी बात रख रहे थे। इतनी क्राइसिस नहीं कि… किरेण रिजिजू ने कहाकि भारत में इतनी क्राइसिस की हालत नहीं हैं। टाइम्स नाऊ पर बोलते हुए उन्होंने कहाकि पश्चिम एशिया में समस्या काफी ज्यादा है। इसके चलते दुनिया भर में एनर्जी क्राइसिस चल रही है। व्यापार के रास्तों पर भी असर पड़ा है। रिजिजू ने कहाकि भारत ने पश्चिम एशिया में तनाव पैदा नहीं किया है। लेकिन दुर्भाग्य से हमें इस संकट में घसीटा जा रहा है। ऐसे में हमें खुद के स्तर पर तैयारी करनी पड़ेगी। उन्होंने कहाकि हमें बाहरी दया पर निर्भर नहीं रह सकते। इन सबको देखते हुए ही प्रधानमंत्री ने एक आह्वान किया है। हमें पेट्रोल-डीजल बचाने के साथ अन्य चीजों पर भी ध्यान देना होगा। घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर केंद्रीय मंत्री ने आगे कहाकि पिछले 12 साल से पीएम मोदी, लगातार घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। साथ ही वह विदेशी आयत पर निर्भरता कम करने की कोशिशों में भी जुटे हैं। उन्होंने कहाकि पीएम मोदी ने इस दिशा में कई कदम उठाए हैं। हालांकि भारत अभी भी तेल का दूसरा सबसे बड़ा आयातक बना हुआ है। ऐसे में हमें अपने लीडर को जरूर सुनना होगा। खासकर ऐसे वक्त में जबकि वैश्विक स्तर पर मुश्किलें हैं। यह नॉर्मल समय नहीं है। विपक्ष पर भी निशाना इस दौरान रिजिजू ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहाकि कठिन समय में साथ देने की जगह, विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने में जुटा है। केंद्रीय मंत्री ने कहाकि मैं विपक्ष को संसद में जवाब देना चाहता हूं। संकट के समय, देश को अपने नेता के साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से कहाकि जब हालात सामान्य होंगे तो राजनीति कर लीजिएगा। लेकिन मुश्किल हालात में हर किसी का साथ चाहिए होता है। ऐसे में विपक्ष को यह बात भूलनी नहीं चाहिए।

चीन दौरे के बाद चर्चा में Donald Trump का विमान, सोशल मीडिया पर चीनी सामान फेंकने का दावा

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया चीन दौरे के बाद एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है. सोशल मीडिया और कई रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने चीन से मिले सभी गिफ्ट, बैज, फोन और दूसरे सामान ट्रंप के विमान एयर फोर्स वन में चढ़ने से पहले डस्टबिन में फेंक दिए।  बताया जा रहा है कि यह कदम साइबर जासूसी और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के डर की वजह से उठाया गया. दावा है कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने साफ निर्देश दिया था कि चीन की तरफ से मिला कोई भी सामान राष्ट्रपति के विमान में नहीं ले जाया जाएगा।  यह मामला तब और चर्चा में आया जब पत्रकार एमिली गुडिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट किया. उन्होंने लिखा कि अमेरिकी स्टाफ ने चीनी अधिकारियों की तरफ से दिए गए सभी सामान, जैसे क्रेडेंशियल्स, डेलिगेशन पिन, अस्थायी फोन और दूसरे आइटम इकट्ठा किए और एयर फोर्स वन में चढ़ने से पहले सीढ़ियों के नीचे रखे डस्टबिन में फेंक दिए।  पोस्ट के मुताबिक, "चीन से मिला कोई भी सामान विमान में लाने की अनुमति नहीं थी." इसके बाद सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो और तस्वीरें भी वायरल होने लगीं।  रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को चीन यात्रा के दौरान अपने निजी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस इस्तेमाल करने से भी बचने को कहा गया था. इसके बजाय डेलिगेशन के सदस्यों को अस्थायी "बर्नर फोन" दिए गए थे, ताकि किसी भी संभावित साइबर निगरानी से बचा जा सके।  इतना ही नहीं, प्रतिनिधियों के निजी फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को एयर फोर्स वन में खास "फैराडे बैग" में रखा गया था. ये ऐसे बैग होते हैं जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नल को ब्लॉक करते हैं और किसी भी तरह की ट्रैकिंग या डेटा इंटरसेप्शन को रोकने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।  हालांकि अमेरिकी प्रशासन की तरफ से इस पूरे मामले पर आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन इस घटना ने अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते अविश्वास और टेक्नोलॉजी वॉर को फिर सुर्खियों में ला दिया है।  दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच साइबर सुरक्षा, जासूसी, चिप टेक्नोलॉजी और डेटा सुरक्षा को लेकर तनाव लगातार बढ़ा है. अमेरिका पहले भी कई बार चीन पर साइबर जासूसी के आरोप लगाता रहा है, जबकि चीन इन आरोपों से इनकार करता आया है। 

पहलगाम घूमने गए पर्यटकों की कार हादसे का शिकार, दो लोगों ने गंवाई जान

श्रीनगर गुजरात से कश्मीर घूमने आए एक दंपति की शनिवार को पहलगाम में सड़क हादसे में मृत्यु हो गई। इस हादसे में वाहन चालक और तीन अन्य पर्यटकों समेत चार लोग जख्मी हो गए। सभी घायलों को उपचार के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल अनंतनाग में पहुंचाया गया है। यहां मिली जानकारी के अनुसार, पहलगाम से आड़ृ घाटी की तरफ गुजरात से आए पर्यटकों का एक दल टवैरा टैक्सी जिसका पंजीकरण नंबर जेके21ए–0379 था, में रवाना हुआ। टैक्सी को पहलगाम के साथ सटे रंगवार लारीपोरा का रहने वाला रईस अहमद बट चला रहा था। ड्राइवर ने स्टेयरिंग से खोया नियंत्रण पहलगाम से करीब चार किलोमीटर आगे एक मोढ़ पर चालक का नियंत्रण स्टेयरिंग से हट गया और टैक्सी बेकाबू होकर सड़क के नीचे गहरी खायी में जा गिरी। टैक्सी को नीचे गिरते देख, वहां सड़क से गुजर रहे अन्य वाहन रुक गए। उनमें सवार लोग भी बाहर निकल आए। सूचना मिलते ही पुलिस और सीआरपीएफ के जवान भी मौके पर पहुंच गए । सभी ने मिलकर बचाव कार्य करते हुए नीचे खायी में गिरे वाहन में फंसे सभी लोगों को बाहर निकाला और उन्हें उपचार के लिए निकटवर्ती अस्पताल पहुंचाया। दो लोगों की मौत अस्पताल में डॉक्टरों ने बविन भावसर को मृत लाया घोषित कर दिया। उसकी पत्नी अवनी भावसर जो गंभीर रूप से घायल थी, कुछ ही देर बाद में उसने भी अस्पताल में दम तोड़ दिया। दो अन्य अन्य पर्यटक अशोक भाई और उसकी पत्नी नैना बेन व चालक रईस की हालत स्थिर, लेकिन स्थिति चिंताजनक बताई जाती है। पहलगाम पुलिस ने इस सिलसिले में एक मामला दर्ज कर हादसे के कारणों की जांच शुरु कर दी है। कुछ लोगों के अनुसार, वाहन की गति तेज थी और इसी कारण पहाड़ी पर मोढ़ काटते हुए वाहन चालक के नियंत्रण से बाहर हो गया था। अलबत्ता, पहलगाम पुलिस थाना प्रभारी ने कहा कि मामले की जांच जारी है,जांच पूरी होने के बाद ही हादसे के सही कारण की पुष्टि हाे सकेगी।  

चीन को ट्रंप का कड़ा संदेश! मिले उपहार कूड़ेदान में फिंकवाए, दुनिया भर में चर्चा तेज

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चीन यात्रा के बाद सामने आई एक रिपोर्ट ने वैश्विक राजनीति और साइबर सुरक्षा जगत में हलचल मचा दी है।मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप और उनके प्रतिनिधिमंडल ने चीन में मिले कई गिफ्ट्स, बैज और स्मृति चिह्नों को अमेरिका वापस ले जाने के बजाय फेंक दिया।  क्यों फेंके गए गिफ्ट्स? अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को आशंका थी कि इन छोटे उपहारों में जासूसी डिवाइस, माइक्रोफोन या साइबर बग छिपे हो सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों को पहले से सख्त निर्देश दिए गए थे कि चीन यात्रा के दौरान मिला कोई भी सामान Air Force One पर नहीं ले जाया जाएगा। इसी वजह से वापसी के समय कई वस्तुओं को नष्ट कर दिया गया या डस्टबिन में फेंक दिया गया। दरअसल, अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से साइबर जासूसी को लेकर तनाव बना हुआ है।अमेरिकी खुफिया एजेंसियां पहले भी आरोप लगा चुकी हैं कि चीन आधुनिक तकनीक के जरिए विदेशी सरकारों, अधिकारियों और संस्थानों की निगरानी करता है। फोन भी फेंकने या पूरी तरह नष्ट करने के निर्देश विशेषज्ञों का मानना है कि छोटी इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं या स्मृति चिह्नों में बेहद सूक्ष्म जासूसी उपकरण छिपाए जा सकते हैं, जो बातचीत रिकॉर्ड करने या डेटा चोरी करने में सक्षम होते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने इस यात्रा के दौरान अपने निजी मोबाइल फोन और लैपटॉप भी साथ नहीं रखे। इसके बजाय उन्होंने “बर्नर फोन” का इस्तेमाल किया। ये अस्थायी फोन होते हैं जिन्हें सीमित समय तक उपयोग करने के बाद नष्ट कर दिया जाता है। अमेरिका लौटने से पहले इन फोन को भी फेंकने या पूरी तरह नष्ट करने के निर्देश दिए गए थे। बंद डिवाइस भी हो सकते हैक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक जासूसी तकनीक इतनी उन्नत हो चुकी है कि बंद पड़े डिवाइस भी निशाना बनाए जा सकते हैं। इसी वजह से अमेरिकी टीम ने अतिरिक्त सतर्कता बरती और किसी भी संदिग्ध वस्तु को साथ ले जाने से बचा। ट्रंप का बयान भी चर्चा में जब पत्रकारों ने ट्रंप से चीन की कथित जासूसी गतिविधियों पर सवाल पूछा, तो उन्होंने कहा, “वे हम पर जासूसी करते हैं और हम भी उन पर नजर रखते हैं।” ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने Xi Jinping से साफ कहा था कि अमेरिका भी चीन के खिलाफ साइबर ऑपरेशन चलाता है। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध, तकनीकी प्रतिबंध, डेटा सुरक्षा और साइबर हमलों के आरोपों के कारण तनाव लगातार बढ़ा है। Huawei जैसी चीनी कंपनियों पर अमेरिका पहले भी सुरक्षा और जासूसी से जुड़े आरोप लगा चुका है, जबकि चीन इन आरोपों से इनकार करता रहा है।

राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई, कहा- छात्रों के भविष्य से खिलवाड़

नई दिल्ली। मेडिकल प्रवेश परीक्षा में हुए कथित घोटाले को लेकर देश भर में मचा बवाल थमता नजर नहीं आ रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे पर अब राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। लाखों छात्रों के भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है। इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी बात रखी है। राहुल गांधी ने साफ तौर पर कहा कि यह पेपर लीक कोई साधारण चूक या प्रशासनिक गलती नहीं है। यह भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से व्यवस्था में बिठाए गए अयोग्य प्रोफेसर के गठजोड़ का नतीजा है। विचारधारा के कारण सिस्टम हुआ खोखला: राहुल गांधी राहुल गांधी ने यह गंभीर आरोप ऐसे समय में लगाया है जब देश के कोने-कोने से छात्र और उनके अभिभावक चिलचिलाती धूप में सड़कों पर उतर कर न्याय की गुहार लगा रहे हैं। कांग्रेस नेता का कहना है कि वर्तमान सरकार ने देश के सभी प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों और परीक्षा कराने वाली एजेंसियों पर अपनी विचारधारा वाले लोगों को काबिज कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेरिट और योग्यता को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। जब सिर्फ निष्ठा के आधार पर नियुक्तियां की जाती हैं, तो पूरा सिस्टम खोखला हो जाता है। एनटीए जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं का फेल होना इसी मिलीभगत का परिणाम है। इसी वजह से आज 24 लाख से अधिक होनहार युवाओं के सपनों को चकनाचूर होना पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंचा मामला यह विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। अब यह पूरा मामला देश की सर्वोच्च अदालत की दहलीज पर पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट में दायर कई याचिकाओं पर लगातार सुनवाई हो रही है। अदालत के आदेश पर ग्रेस मार्क्स वाले छात्रों की परीक्षा रद्द कर दोबारा एग्जाम कराने का फैसला आ चुका है। इसके बावजूद असली बवाल मूल पेपर लीक को लेकर बना हुआ है। इस बीच देश के कई राज्यों में पुलिस ने पेपर लीक गैंग के गुर्गों को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारियां इस बात की पुष्टि करती हैं कि परीक्षा सिस्टम में बहुत बड़ी सेंधमारी हुई थी।

PM मोदी का वैश्विक संदेश: नया भारत सीमाओं में नहीं बंधता

द हेग नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड के द हेग में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि आज का भारत अभूतपूर्व बदलाव के दौर से गुजर रहा है और उसकी आकांक्षाएं अब केवल अपनी सीमाओं तक सीमित नहीं रह गई हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब वैश्विक स्तर पर नेतृत्व की भूमिका निभाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत अब बड़े सपने देख रहा है करीब 40 मिनट के संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, “आज भारत कह रहा है कि हमें केवल परिवर्तन नहीं चाहिए, हमें सर्वश्रेष्ठ चाहिए और सबसे तेज गति चाहिए। जब आकांक्षाएं असीमित होती हैं तो प्रयास भी असीमित हो जाते हैं।” उन्होंने कहा कि भारत अब ओलंपिक की मेजबानी करना चाहता है, वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनना चाहता है, हरित ऊर्जा में नेतृत्व करना चाहता है और दुनिया की विकास शक्ति बनना चाहता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल ही में भारत ने दुनिया के सबसे बड़े और सफल एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। इससे पहले G20 Summit का सफल आयोजन भी भारत की बढ़ती वैश्विक क्षमता का उदाहरण है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम   उन्होंने बताया कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। पीएम मोदी ने कहा कि 2014 में भारत में केवल चार यूनिकॉर्न कंपनियां थीं, जबकि अब लगभग 125 सक्रिय यूनिकॉर्न कंपनियां काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय स्टार्टअप अब एआई, रक्षा, अंतरिक्ष और नवाचार के क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने हालिया विधानसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का लोकतंत्र लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में 80 से 90 प्रतिशत तक मतदान हुआ, जबकि महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। वैश्विक संकटों पर PM मोदी की चेतावनी अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने मौजूदा वैश्विक हालात पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय युद्ध, आतंकवाद, आर्थिक अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनावों के दौर से गुजर रही है। Vienna को “सिटी ऑफ पीस” बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यदि दुनिया ने समय रहते हालात नहीं संभाले तो पिछले कई दशकों की उपलब्धियां व्यर्थ हो सकती हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि युद्ध किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है और दुनिया को “विकास बनाम विनाश” के बीच चुनाव करना होगा। विपक्ष पर कटाक्ष प्रधानमंत्री ने हल्के अंदाज में विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने लोगों से पूछा कि क्या “झालमुड़ी” अब हेग तक पहुंच गई है। इसे राजनीतिक हलकों में विपक्षी दलों पर तंज के तौर पर देखा जा रहा है।  नीदरलैंड के ट्यूलिप फूल का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत कमल के लिए प्रसिद्ध है। उन्होंने कहा, ट्यूलिप और कमल दोनों हमें सिखाते हैं कि जड़ें चाहे पानी में हों या धरती में, सुंदरता और शक्ति दोनों प्राप्त की जा सकती हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा कि India और Netherlands वैश्विक मंचों पर मिलकर काम कर सकते हैं। उन्होंने व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

अफ्रीका में छिपा ISIS का खूंखार चेहरा खत्म, अबू बकर ढेर

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और नाइजीरिया की सेनाओं ने शुक्रवार को एक अभियान में इस्लामिक स्टेट समूह के एक कुख्यात आतंकी को मार गिराया। ट्रंप ने देर रात एक सोशल मीडिया पोस्ट में इस संयुक्त अभियान की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अबू बक्र अल-मैनुकी वैश्विक स्तर पर इस्लामिक स्टेट समूह का दूसरा सबसे बड़ा आतंकी था और 'उसे लगा कि वह अफ्रीका में छिप सकता है लेकिन उसे यह नहीं पता था कि हमारे पास ऐसे सूत्र हैं, जो हमें उसकी गतिविधियों की जानकारी देते रहते थे'। नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि अमेरिका अल-मैनुकी को आईएस के संगठन और वित्तपोषण में प्रमुख व्यक्ति मानता था और वह अमेरिका और उसके हितों के खिलाफ हमले की साजिश रच रहा था। आतंकी समूहों पर नजर रखने वाली संस्था 'काउंटर एक्सट्रीमिज्म प्रोजेक्ट' के अनुसार, 1982 में नाइजीरिया के बोर्नो प्रांत में जन्मे अल-मैनुकी ने 2018 में मम्मन नूर के मारे जाने के बाद पश्चिम अफ्रीका में आईएस शाखा की बागडोर संभाली थी।

रेल फाटक पर खड़ी बस बनी आग का गोला, मालगाड़ी की टक्कर से 20 से ज्यादा घायल

बैंकॉक बैंकॉक में शनिवार को एक दर्दनाक रेल हादसे में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग घायल हो गए। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हादसा शहर के मध्य क्षेत्र में स्थित एयरपोर्ट रेल लिंक स्टेशन के पास हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के मुताबिक, रेलवे क्रॉसिंग पर कई वाहन रुके हुए थे। इसी दौरान तेज रफ्तार मालगाड़ी सामने खड़ी नारंगी रंग की सार्वजनिक बस से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ट्रेन बस को काफी दूर तक घसीटते हुए ले गई। इस दौरान आसपास खड़े कई अन्य वाहन भी ट्रेन की चपेट में आ गए।  हादसे के तुरंत बाद बस में आग लग गई और देखते ही देखते वह आग का गोला बन गई।  वीडियो में कई मोटरसाइकिल सवारों को सड़क पर गिरते और उछलते हुए देखा गया। घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और लोगों की चीख-पुकार सुनाई देने लगी। Erawan Medical Center के अनुसार, हादसे में कम से कम आठ लोगों की मौत हुई है और 20 से अधिक लोग घायल हुए हैं। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इसके बाद बचाव दल जली हुई बस के भीतर पहुंचे और घायलों को बाहर निकाला। हादसे के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें ट्रेन को बस से टकराते और फिर बस में आग लगते देखा जा सकता है।

किस मंत्री को मिला कौन सा विभाग? तमिलनाडु सरकार की पूरी लिस्ट जारी

चेन्नई तमिलनाडु में ऐतिहासिक जीत हासिल करके सत्ता में आए थलापति विजय ने अब मंत्रालयों का बंटवारा कर दिया है। सीएम विजय की सिफारिश पर तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने शनिवार को इसका ऐलान किया। जारी आदेश के मुताबिक कुल नौ मंत्रियों में विभागों का बंटवारा किया गया है। मुख्यमंत्री विजय थलापति ने भी कई मंत्रालय अपने पास रखे हैं। राज्यपाल के आदेश के मुताबिक, मुख्यमंत्री विजय ने अपने पास गृह विभाग, लोक प्रशासन, सामान्य प्रशासन, विशेष कार्यक्रम कार्यान्वयन, महिला एवं युवा कल्याण, नगर प्रशासन और शहरी एवं जल आपूर्ति विभाग रखे हैं। गृह विभाग समेत अन्य प्रमुख विभागों को अपने पास रखकर विजय ने शपथ ग्रहण के दिन वाली अपनी बात को पूरा करने संकेत दिया है। शपथ के बाद विजय ने कहा था कि इस सरकार में सत्ता का केंद्र केवल वह स्वयं होंगे। हालांकि विजय ने कई अन्य मंत्रालयों का बंटवारा अपने मंत्रियों में भी किया है। विजय ने वरिष्ठ राजनेता और गोबीचेट्टिपालयम से विधायक के. ए. सेनगोत्तियान को वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी दी है। वह वित्त और पेंशन भत्तों का कार्यभार संभालेंगे। किस मंत्री को किस मंत्रालय की जिम्मेदारी? मायलापुर से विधायक और पार्टी के कोषाध्यक्ष पी.वेंकटरामन को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। वह उपभोक्ता संरक्षण और मूल्य नियंत्रण विभाग को संभालेंगे। एक मात्र महिला मंत्री एस. कीर्तना को उद्योग मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। वह उद्योग और निवेश प्रोत्साहन विभाग को संभालेंगी। इसके अलावा करैकुडी जिले के विधायक डॉ. टीके प्रभु को प्राकृतिक संसाधन मंत्री बनाया गया है। कानून मंत्रालय, उर्जा संसाधन मंत्रालय की जिम्मेदारी विजय ने अपने खास साथी और टीवीके के संयुक्त महासचिव सीटीआर निर्मल कुमार को सौंपी है। उनके पास बिजली, गैर-पारंपरिक ऊर्जा विकास, कानून, न्यायालय, जेल, भ्रष्टाचार निरोधक, विधानसभा, चुनाव और पासपोर्ट विभाग भी रहेंगे। वहीं, एग्मोर सीट से विधायक राजमोहन को स्कूल शिक्षा, तमिल विकास, सूचना एवं प्रचार मंत्री बनाया गया है। वे पुरातत्व, तमिल आधिकारिक भाषा एवं संस्कृति, सूचना एवं प्रचार, फिल्म प्रौद्योगिकी, सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, न्यूजप्रिंट नियंत्रण, स्टेशनरी तथा सरकारी प्रेस विभाग संभालेंगे। इसके अलावा पूर्व आईआरएस अधिकारी डॉक्टर के जी अरुणराज को स्वास्थ्य, चिकित्सा, शिक्षा और परिवार कल्याण विभाग मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि लोक निर्माण, खेल विकास, भवन,राजमार्ग और लघु बंदरगाह मंत्रालय का प्रभार आधव अर्जुन को दिया गया है। इसके बाद ग्रामीण विकास, पंचायती राज और सिंचाई विभाग की जिम्मेदारी टीवीके महासचिव एन आनंद को सौंपी गई है।

पाकिस्तान की बढ़ीं मुश्किलें! UAE की एयरलाइन ने फ्लाइट सेवाएं रोकीं, जानिए क्या है कारण

 दुबई यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) की लो-कॉस्ट एयरलाइन फ्लाईदुबई (Flydubai) ने पाकिस्तान को एक बड़ा झटका दिया है। एयरलाइन ने 'ऑपरेशनल कारणों' का हवाला देते हुए पाकिस्तान के तीन प्रमुख शहरों के लिए अपनी उड़ानें 26 अक्टूबर तक के लिए सस्पेंड कर दी हैं। इनमें राजधानी इस्लामाबाद, लाहौर और पेशावर शामिल हैं। हालांकि, एयरलाइन ने यह साफ किया है कि कराची से आने-जाने वाली उड़ानों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा और वे पहले की तरह ही जारी रहेंगी। इन रूट्स पर कैंसिल हुईं उड़ानें एविएशन मॉनिटर 'फ्लाइटरडार24' के मुताबिक, कम से कम 7 मई से ही इन तीन शहरों के लिए फ्लाईदुबई की उड़ानें कैंसिल चल रही हैं। प्रभावित होने वाली उड़ानों की डिटेल इस प्रकार है: इस्लामाबाद-दुबई: फ्लाइट नंबर FZ353 और FZ354 लाहौर-दुबई: फ्लाइट नंबर FZ359 और FZ360 पेशावर-दुबई: फ्लाइट नंबर FZ375 और FZ376 आपको बता दें कि फ्लाईदुबई ने जुलाई 2024 में इस्लामाबाद और लाहौर में अपना ऑपरेशन शुरू किया था, जबकि पेशावर के लिए बीते साल मई में उड़ानें शुरू की गई थीं। एयरलाइन ने यात्रियों को दी ये सलाह ईरान युद्ध शुरू होने के कुछ दिन बाद, 31 मार्च को फ्लाईदुबई की वेबसाइट पर एक बयान जारी किया गया था। इसमें बताया गया था कि एयरलाइन "फिलहाल अपने नेटवर्क पर घटे हुए शेड्यूल के साथ उड़ानें संचालित कर रही है।" एयरलाइन ने यात्रियों को सलाह दी है कि एयरपोर्ट के लिए निकलने से पहले वे लेटेस्ट अपडेट्स और अपनी फ्लाइट का स्टेटस जरूर चेक कर लें। कंपनी ने अपने बयान में 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमलों से भड़के मध्य पूर्व संघर्ष का सीधा जिक्र तो नहीं किया, लेकिन यह जरूर कहा: हम स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए हैं और उसी के मुताबिक अपने फ्लाइट शेड्यूल को अपडेट कर रहे हैं। यात्रियों और क्रू मेंबर्स की सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। ईंधन संकट: हवाई यात्रा पर मंडरा रहा बड़ा खतरा अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते जेट फ्यूल (विमान ईंधन) की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। इसके कारण एविएशन सेक्टर में बीते कई सालों का सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) ने भी पिछले महीने चेतावनी दी थी कि ईरान युद्ध से उपजे जेट फ्यूल संकट की सबसे बड़ी मार सबसे पहले एशिया पर पड़ सकती है। IATA के प्रमुख विली वॉल्श ने कहा, "मुझे लगता है कि ईंधन की संभावित कमी को देखते हुए, गर्मियों के पीक सीजन में एयरलाइंस अपनी उड़ानों के शेड्यूल में कटौती करना शुरू कर देंगी।" कर्ज वापसी के बाद अब टेलीकॉम सेक्टर से भी UAE का किनारा एविएशन सेक्टर में मिले इस झटके से ठीक पहले यूएई आर्थिक मोर्चे पर भी पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ा चुका है। बीते दिनों यूएई ने पाकिस्तान से अपने 3.5 अरब डॉलर के भारी-भरकम कर्ज की अचानक वापसी करा ली थी। यह वही कर्ज था जिसे यूएई पिछले कई सालों से रोल-ओवर कर रहा था ताकि पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार दिवालिया होने से बचा रहे। कर्ज वापसी के झटके से पाकिस्तान उबर भी नहीं पाया था कि अब यूएई की दिग्गज टेलीकॉम कंपनी ईएंड (e& जिसे पहले एतिसलात के नाम से जाना जाता था) ने भी पाकिस्तान से अपना बोरिया-बिस्तर समेटने की तैयारी शुरू कर दी है। एतिसलात के पास पाकिस्तान की सरकारी टेलीकॉम कंपनी पीटीसीएल (PTCL) में 26 फीसदी हिस्सेदारी और मैनेजमेंट कंट्रोल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी अपनी निवेश रणनीति की समीक्षा कर रही है और अपने शेयर बेचकर पाकिस्तान के टेलीकॉम मार्केट से बाहर निकलने की योजना बना रही है। दरअसल, पाकिस्तान सरकार और एतिसलात के बीच 2005 से 800 मिलियन डॉलर (करीब 6.6 खरब पाकिस्तानी रुपये) का एक बड़ा वित्तीय विवाद अनसुलझा है। इसके अलावा यूएई अपनी नई ग्लोबल 'स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी' के तहत भी पाकिस्तान से अपने निवेश वापस खींच रहा है।