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Census Rules सख्त: संपत्ति की गलत जानकारी देने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान

लखनऊ जनगणना में किसी तथ्य को जानबूझकर छिपाने पर जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11 के तहत एक हजार रुपये जुर्माना एवं तीन साल की सजा का प्रावधान है। इस मामले में उत्तरदाता एवं प्रगणक के लिए दंड का एक समान प्रावधान है, जबकि जनगणना में प्राप्त तथ्यों को कोई प्रगणक बाहर साझा करता है तो आरोप साबित होने पर भी दंड का प्रावधान है। जनगणना में बुधवार  को सातवें दिन भी स्वगणना हुई। स्वगणना के दौरान कुछ लोगों के तथ्यों को छिपाने की चर्चा के बीच प्रगणक एवं पर्यवेक्षक भी सतर्क हो गए हैं। उनमें जनगणना अधिनियम के प्रावधानों की बातें हो रही हैं। यदि हाउस लिस्टिंग ब्लॉक में ज्यादा अनियमितता पाई जाएगी तो प्रगणक जिम्मेदार होंगे। वहीं किसी ब्लॉक में रहने वालों की संख्या बहुत कम होगी तो संदेह के आधार पर फिर पुनरीक्षण कराया जा सकता है। गोरखपुर में चार्ज अधिकारी/एसडीएम सदर दीपक गुप्ता ने बताया कि जनगणना में प्रगणक घर-घर जाएंगे और भौतिक सत्यापन करके ही फीडिंग करेंगे। यदि किसी का बड़ा मकान है और उसने कमरे की संख्या कम बता दी है तो जनगणना कर्मी उसकी जांच करेंगे। यदि किसी के घर में दो या तीन कारें हैं और मकान मालिक उसमें एक ही कार को अपना बता रहा है तो हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट सहित अन्य माध्यम से भी जांच की जाएगी। जनगणना में तथ्य छिपाया तो होगी तीन साल की जेल इसे लेकर जिला जनगणना अधिकारी विनीत कुमार सिंह ने बताया कि जनगणना में किसी को चल-अचल संपत्ति छिपाने की आवश्यकता नहीं है। इसके तथ्यों से आयकर एवं अन्य सुविधाओं का कोई सरोकार नहीं है। जनगणना के दौरान किसी विवाद के बाद आरोप साबित होने पर जनगणना अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी। जनगणना फॉर्म में हैरान कर देने वाले सवाल वहीं, जनगणना के लिए भरे जाने वाले फॉर्म में कई सवाल और सही विकल्प हैरान कर देने वाले हैं। 34 सवालों में से एक सवाल यह भी है कि आपकी पत्नी कितनी हैं? अगर पत्नी दो होंगी तो डबल फैमिली यानी दो दंपति का विकल्प भरना होगा। अगर एक महिला के दो पति हों तो सिंगल फैमिली यानी एक दंपति माना जाएगा। किसी भी परिवार में दंपति की गणना पत्नी की संख्या से ही निर्धारित होगी। जितनी पत्नियां, उतने ही दंपति। परिवार में दादा-दादी, पिता-माता और पुत्र-बहू हों तो इसका मतलब यह नहीं कि मुखिया वही होगा जो बड़ा होगा। यानी जरूरी नहीं है कि दादा या पिता ही मुखिया हों, कोई भी हो सकता है। परिवार के सदस्य जिसे मुखिया बताएंगे, वही फॉर्म में भरा जाएगा। जनगणना के लिए फॉर्म पूरी स्टडी से तैयार किया गया है। परिवार में चाहे जितने पुरुष और चाहे जितने उम्रदराज लोग हों, उन्होंने कहा कि बहू, पत्नी, दादी या पुत्री मुखिया है तो उसका ही नाम भरा जाएगा। परिवार की मुखिया उस परिवार की कोई भी महिला हो सकती है। मुखिया के लिए उम्र की सीमा नहीं है।

LPG पर सरकार सख्त: समय पर जवाब नहीं देने वालों की सब्सिडी हो सकती है बंद

LPG सब्सिडी को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। अगर आप भी LPG सब्सिडी ले रहे हैं और आपकी आय ज्यादा है, तो अपने फोन के इनबॉक्स पर नजर रखें। जी हां, क्योंकि गैस एजेंसियां कभी भी आपकी सब्सिडी खत्म कर सकती हैं। आइए इसको विस्तार से समझते हैं। नईदिल्ली बढ़ती वैश्विक ऊर्जा कीमतों और सरकारी खजाने पर बढ़ते बोझ के बीच केंद्र सरकार ने रसोई गैस (LPG) सब्सिडी को लेकर एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। अब सरकारी तेल कंपनियां (Oil Marketing Companies) जैसे इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) इनकम टैक्स विभाग के डेटा का इस्तेमाल करके उन लोगों की पहचान कर रही हैं, जो सब्सिडी पाने के हकदार नहीं हैं। इन लोगों की पहचान करने के बाद कंपनियां जल्द से जल्द इनकी सब्सिडी बंद करेंगी। अगर ग्राहक को लगता है कि वो सब्सिडी के पात्र हैं, तो उन्हें 7 दिनों का मौका मिलेगा। आइए इसको विस्तार से समझते हैं। क्या है नया नियम और कार्रवाई? 'मिंट' की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार उन उपभोक्ताओं की सब्सिडी बंद करने की तैयारी में है, जिनकी सालाना आय ₹10 लाख या उससे ज्यादा है। सरकार का मानना है कि संपन्न परिवारों को सब्सिडी देने के बजाय इस पैसे का इस्तेमाल गरीबों की मदद और देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए किया जाना चाहिए। इस दिशा में तेल कंपनियों ने नीचे दिए गए कुछ कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। SMS के जरिए चेतावनी कंपनियों ने उन ग्राहकों को मैसेज भेजना शुरू कर दिया है जिनके टैक्स रिकॉर्ड बताते हैं कि उनकी या उनके परिवार के किसी सदस्य की ग्रॉस टैक्सेबल इनकम (Gross Taxable Income) निर्धारित सीमा से अधिक है। 7 दिन का अल्टीमेटम मैसेज में साफ कहा गया है कि अगर ग्राहक को लगता है कि डेटा गलत है, तो वह 7 दिनों के अंदर आपत्ति दर्ज करा सकता है। ऐसा न करने पर उनकी गैस सब्सिडी स्थायी रूप से बंद कर दी जाएगी। शिकायत का मौका उपभोक्ता कंपनियों की टोल-फ्री हेल्पलाइन या उनकी आधिकारिक वेबसाइट (पोर्टल) पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। क्यों सख्त हो रही है सरकार? यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। इससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) पर दबाव बढ़ रहा है। सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। जहां एक तरफ सब्सिडी का बढ़ता खर्च है, तो वहीं दूसरी तरफ राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) है। इससे पहले भी तेल कंपनियों ने सब्सिडी बचाने के लिए कई कदम उठाए थे, जो नीचे दिए गए हैं।     नए कनेक्शन पर अस्थायी रोक:- फिलहाल नए गैस कनेक्शन देने की रफ्तार धीमी कर दी गई है।     रिफिल बुकिंग की अवधि बढ़ाना:- गैस सिलेंडर दोबारा बुक करने के बीच के समय को बढ़ाया गया है ताकि खपत पर नियंत्रण रहे। विदेशी मुद्रा बचाने के लिए 'इमरजेंसी' तैयारी खबरों की मानें तो प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), वित्त मंत्रालय और RBI के अधिकारियों के बीच हाल ही में कई बैठकें हुई हैं। सरकार न केवल ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी पर विचार कर रही है, बल्कि सोना और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे 'गैर-जरूरी' सामानों के आयात पर भी प्रतिबंध लगाने की योजना बना रही है ताकि डॉलर को बचाया जा सके।

तपती गर्मी के बीच खुशखबरी: आ रहा है मॉनसून, मौसम विभाग ने जताई बारिश की संभावना

नई दिल्ली बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम की वजह से देश के अधिकांश हिस्सों में मौसम सक्रिय हो गया है. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियां दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में मॉनसून की समय से पहले दस्तक के लिए बेहद अनुकूल बन रही हैं. बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में एक कम दबाव का क्षेत्र यानी लो प्रेशर एरिया बन गया है, जो अगले कुछ घंटों में और अधिक मजबूत होने की संभावना है. इस सिस्टम के प्रभाव से दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी. साथ ही इस सिस्टम से मॉनसून उत्तरी दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। उत्तर भारत में आज आंधी-बारिश का अलर्ट यूपी-बिहार समेत पांच राज्यों में आज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. बिहार और उत्तराखंड के सभी जिलों में जबकि उत्तर प्रदेश के 38 जिलों में बारिश होने की संभावना जताई गई है. हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में आंधी-तूफान और बारिश से जनजीवन प्रभावित है. इस बीच मौसम विभाग ने अगले दो दिन के लिए प्रदेश में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में बारिश का दौर दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रहने वाला है. मौसम विभाग के अनुसार, केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में 14 से 17 मई के बीच भारी बारिश हो सकती है. वहीं, असम, मेघालय और मणिपुर सहित अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में भी कई जगहों पर अच्छी बारिश की संभावना है. बंगाल की खाड़ी में बने इस सिस्टम का असर ओडिशा में भी साफ दिखाई देगा, जहां राज्य के कई हिस्सों में अगले 6 दिनों तक बारिश का अनुमान है. ओडिशा के 20 जिलों में बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। कब होगी मॉनसून की एंट्री? भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां तेजी से अनुकूल होती जा रही हैं. सप्ताह के अंत तक दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के कुछ इलाकों में मॉनसून की एंट्री हो सकती है. इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में बारिश, आंधी, बिजली गिरने, ओलावृष्टि और कुछ क्षेत्रों में भीषण गर्मी का मिश्रित असर देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और श्रीलंका के उत्तरी तट के पास बना कम दबाव का क्षेत्र अब उत्तर दिशा की ओर बढ़ रहा है. इसके चलते अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की आशंका है। उत्तर भारत में मौसम में बदलाव DTE के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ ऊपरी हवाओं में चक्रवाती रूप में बना हुआ है. इसके प्रभाव से 12 से 15 मई तक दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. गरज-चमक के साथ हवाओं की रफ्तार 30 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. पूर्वी राजस्थान में धूल भरी आंधी चलने का भी अंदेशा है। मौसम विभाग ने खराब मौसम में खुले में न निकलने की सलाह दी है.  पहाड़ी राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश व बर्फबारी जारी रह सकती है. कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की भी संभावना है, जिससे फलों और सब्जियों की फसलों को नुकसान हो सकता है। पूर्वी भारत में बारिश और तेज हवाएं बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और ओडिशा में अगले कुछ दिनों तक बारिश और तेज हवाओं का असर रहेगा. बिहार में ओलावृष्टि, झारखंड और ओडिशा में गरज के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं. सिक्किम और उत्तर बंगाल के पर्वतीय इलाकों में भारी बारिश (64.5-115.5 मिमी) का येलो अलर्ट जारी है। दक्षिण भारत में बारिश और हवाएं तमिलनाडु, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल में भी बारिश व गरज-चमक का दौर रहेगा. कई जगहों पर 30-50 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। कहां चलेगी लू और भीषण गर्मी? डाउन टू अर्थ की खबर के मुताबिक, एक तरफ जहां कई राज्यों में बारिश से राहत मिल रही है. वहीं, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है. पश्चिम राजस्थान और गुजरात में 12 से 17 मई तक लू चलने की संभावना है. पूर्वी राजस्थान, पश्चिम मध्य प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में भी तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है।

राफेल की ताकत होगी और मजबूत: फ्रांस देगा तकनीकी डेटा, भारत में रिपेयर होंगी MICA मिसाइलें

नई दिल्ली  राफेल और मिराज-2000 जैसे लड़ाकू विमानों में लगने वाली MICA मिसाइलों की मरम्मत भारत में ही की जा सकेगी। फ्रांसीसी कंपनी MBDA ने भारतीय वायुसेना (IAF) के साथ इस बारे में करार किया है। इसके तहत भारत में ही MICA मिसाइलों का आधुनिकीकरण किया जा सकेगा और साथ ही फ्रांस से खरीदे गए राफेल की भी मरम्मत की जा सकेगी। इस समझौते के लिए अरसे से कोशिशें की जा रही थीं। फ्रांसीसी कंपनी भारत में MICA के रखरखाव और मरम्मत केंद्र स्थापित करेगी। राफेल और मिराज में लगने वाले मिसाइलों की भी मरम्मत     OPEXNews की एक खबर के अनुसार, MBDA और IAF के इस नए समझौते में भारतीय डसॉल्ट राफेल लड़ाकू विमानों और आधुनिक मिराज 2000 विमानों द्वारा उपयोग की जाने वाली MICA मिसाइलों की मरम्मत और मध्यम स्तर के आधुनिकीकरण के लिए स्थानीय क्षमताओं की तैनाती का प्रावधान है।     भारत और MBDA ने MICA हवा से हवा मिसाइल के लिए एक नए समर्थन समझौते की घोषणा की है। इस समझौते के तहत भारतीय वायु सेना MICA के लिए एक घरेलू मरम्मत केंद्र स्थापित और संचालित करेगी, जबकि MBDA कलपुर्जे, तकनीकी डेटा और ट्रेनिंग देगी।     दरअसल, मिसाइलें रिपेयर नहीं, ओवरहॉल होती हैं। एक बार लॉन्च होने के बाद मिसाइल नष्ट हो जाती है। मरम्मत का मतलब उसके भंडारण (Storage) के दौरान खराबी को ठीक करना या उसकी उम्र बढ़ाने के लिए उसे सर्विस करना है। मिसाइल भंडार हमेशा भरा रहेगा     भारत वायु सेना ने बताया कि यह सेंटर मिसाइल भंडार को फिर से तैयार करने में लगने वाले समय को कम करेगा और वायु सेना की युद्धक तत्परता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा। फ्रांस आवश्यक उपकरण और तकनीकी दस्तावेज उपलब्ध कराएगा और स्थानीय कर्मियों को प्रशिक्षण देगा।     इस सुविधा की स्थापना का निर्णय ऑपरेशन सिंदूर के बाद लिया गया, जिसके दौरान भारत ने लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और वायु रक्षा प्रणालियों का सक्रिय रूप से इस्तेमाल किया गया था। MICA मिसाइलें क्या होती हैं, भारत क्यों कर रहा इस्तेमाल     MICA मिसाइल एक बहुमुखी हवा से हवा में मार करने वाला हथियार है। इसे फ्रांसीसी में (MICA:Missile d'Interception, de Combat et d'Auto-défense) कहा जाता है, जिसका शाब्दिक अर्थ है-'अवरोधन, युद्ध और आत्मरक्षा के लिए मिसाइल'। यह एक फ्रांसीसी वायुरोधी मल्टीपल टार्गेट्स वाली हर मौसम में दागो और भूल जाओ वाली लघु से मध्यम दूरी की मिसाइल प्रणाली है, जिसका निर्माण MBDA फ्रांस द्वारा किया गया है।     MICA दो वर्जन में उपलब्ध है। MICA-RF सक्रिय रडार सीकर, जबकि MICA-IR इमेजिंग इन्फ्रारेड सीकर से लैस है। दोनों को लंबी दूरी (60-80 किमी) और करीबी लड़ाई में लक्ष्यों को भेदने के लिए डिजाइन किया गया है। मिसाइल का वजन लगभग 112 किलोग्राम है, जिसमें 12 किलोग्राम का उच्च-विस्फोटक वारहेड लगा है और यह लगभग मैक 4 की गति तक पहुंच सकती है। कारगिल युद्ध के बाद शुरू हुआ जंगी विमानों का आधुनिकीकरण 1999 के कारगिल युद्ध के बाद भारत ने अपने वायुसेना बेड़े का बड़े पैमाने पर आधुनिकीकरण शुरू किया और इन्फ्रारेड (MICA IR) और रडार (MICA RF) होमिंग हेड से लैस मिसाइलों के MBDA संस्करणों की मांग की। 2011 में दोनों पक्षों ने 50 मिराज 2000 लड़ाकू विमानों को मिराज 2000I/TI मानक में अपग्रेड करने के लिए एक करार पर हस्ताक्षर किए, जिसमें इन मिसाइलों के एडवांस संस्करणों का एकीकरण भी शामिल था। इस समझौते की टाइमिंग बेहद अहम     भारत को 2000 के दशक की शुरुआत में मिराज-2000 के आधुनिकीकरण के साथ-साथ MICA मिसाइलें मिलनी शुरू हुईं। यह समझौता ऐसे समय में घोषित किया गया है जब भारत कई और राफेल जेट खरीदने पर विचार कर रहा है। भारत घरेलू रखरखाव क्षमताओं का निर्माण करके MICA मिसाइल भंडार को बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।     स्थानीय मरम्मत और पुनर्निर्माण केंद्र होने से दागी गई या खराब मिसाइलों की त्वरित आपूर्ति सुनिश्चित होती है, जो तीव्र गति वाले अभियानों या संकटों के दौरान अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे विदेशी मरम्मत चक्रों पर निर्भरता कम होती है और विदेशी शिपिंग या निर्यात अनुमोदन में होने वाली देरी से बचा जा सकता है। उदाहरण के लिए, मध्य पूर्व में हाल ही में हुए अभियानों में एमआईसीए राउंड की खपत हुई, जिससे पर्याप्त भंडार की आवश्यकता स्पष्ट होती है।

NEET पेपर लीक में बड़ा खुलासा, नासिक से खरीदकर हरियाणा में ऊंचे दाम पर बेचने वाला आरोपी पकड़ा गया

नासिक NEET परीक्षा 2026 रद्द होने की खबर के बाद देशभर में नाराजगी का माहौल है. पेपर लीक और धांधली के आरोपों के चलते यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है. पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है. नासिक (महाराष्ट्र) से एक आरोपी शुभम खैरनार को गिरफ्तार किया गया है. शुरुआती जानकारी के अनुसार, बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BAMS) के छात्र शुभम खैरनार पेपर लीक करने के आरोप में पकड़ा गया है. बताया जा रहा है कि टेलीग्राम ऐप के माध्यम से एक अन्य आरोपी के जरिए पेपर लीक की सूचना मिली थी, जिसका पुणे में होने का संदेह है. इसके अलावा शुभम खैरनार पर आरोप है कि उसने पेपर 10 लाख रुपये में खरीदा था, जिसे बाद में हरियाणा के एक खरीदार को 15 लाख रुपये में बेच दिया. सीबीआई की चार टीमें नासिक में क्राइम ब्रांच यूनिट-2 के दफ्तर पहुंचीं और आरोपी शुभम खैरनार को अपनी हिरासत में लिया. शुभम खैरनार को नासिक क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया था. वहीं, एसओजी ने उन 150 छात्रों और 70 अभिभावकों की सूची सीबीआई को सौंपी है, जिन्हें लीक हुए कथित गेस पेपर (Guess Paper) मिले थे. इसके अलावा, एसओजी की हिरासत में मौजूद 13 एमबीबीएस काउंसलर्स को भी सीबीआई के हवाले किया गया है. NEET काउंसलरों के अनुसार, NEET का अधिकतम कट-ऑफ 600 अंक है और दिलचस्प बात यह है कि लीक हुए गेस पेपर में भी 600 अंकों के प्रश्न थे, जो NEET के प्रश्न पत्र में भी आए थे. 600 अंकों का यह कट-ऑफ देश के टॉप मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश सुनिश्चित करता है. गुरुग्राम से एक युवक हिरासत में NEET पेपर लीक मामले में SIT टीम ने गुरुग्राम से यश यादव नाम के युवक को भी हिरासत में लिया है. जानकारी के अनुसार, राजस्थान SIT और गुरुग्राम क्राइम ब्रांच की टीम ने यश को हिरासत में लिया. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पेपर लीक मामले में यश यादव की भूमिका क्या रही है, लेकिन राजस्थान SIT टीम का गुरुग्राम आना और यश को हिरासत में लेना पेपर लीक मामले में बड़ी साजिश का खुलासा करता हुआ नजर आ रहा है. CBI ने शुरू की जांच पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है. सीबीआई ने शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग से मिली लिखित शिकायत के आधार पर NEET UG 2026 परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक मामले में एफआईआर दर्ज की है.  शिकायत में कहा गया है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने 3 मई को NEET UG परीक्षा आयोजित की थी. इसमें आरोप लगाया गया है कि परीक्षा से पहले एनटीए को NEET (UG) 2026 परीक्षा से संबंधित कुछ दस्तावेजों के प्रसारित होने की शिकायत और सूचना मिली थी. इन आरोपों से परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं. मामले को लेकर सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है. सीबीआई की विशेष टीमें गठित कर जांच के लिए कई जगहों पर भेजी गई हैं.

पाकिस्तान की ‘मानव ढाल’ रणनीति? ब्रह्मोस के बाद हैंगर में छिपे फाइटर जेट, रनवे पर उतारा जेडी वेंस का विमान

चंडीगढ़  पाकिस्तान एक बार फिर अपनी दोहरी नीति का शिकार नजर आ रहा है. भारत के ब्रह्मोस मिसाइल हमलों से हुए घावों को ढकने के लिए आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर ने जो रणनीति अपनाई, वह अब उल्टी पड़ रही है. नूर खान एयरबेस पर ईरानी सैन्य विमानों को छिपाने की रिपोर्ट्स ने पाकिस्तान को बुरी तरह फंसा दिया है. सोचिए, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस का प्लेन उसी रनवे पर उतारा गया, जहां ईरान के जेट छिपे हुए थे. ये रिपोर्ट सच निकली तो यह घटनाक्रम पाकिस्तान को महागद्दार साबित करने वाला है. वैसे पहले भी पाकिस्तान ऐसा ही कर चुका है लेकिन डोनाल्ड ट्रंप की पुचकार पर पहली बार इस देश ने उन्हें अपनी औकात दिखाई है। CBS न्यूज की हालिया रिपोर्ट के बताती है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अप्रैल में ईरान के साथ सीजफायर की घोषणा के कुछ दिन बाद ही ईरान ने अपने सैन्य विमानों को पाकिस्तान में छिपाया. जिन विमानों को पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर पार्क करवा दिया, उनमें RC-130 टोही विमान भी शामिल है. ईरान अमेरिकी या इजरायली हमलों से अपने एसेट्स को बचाना चाहता था और इसमें उसका साथ दिया पाकिस्तान ने. ये वही पाकिस्तान है, जो खुद को वाशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थ बता रहा था, वो हौले से ईरानी खेमे में सरक गया। पाकिस्तान की गद्दारी तो देखिए पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए इसे डेलिगेशन लॉजिस्टिक्स बताया, लेकिन तथ्य कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं. इस बीच आसिम मुनीर की दोहरी छवि भी चर्चा में रही. ईरानी डेलिगेशन का स्वागत करते समय वे कॉम्बैट गियर में थे, जबकि जेडी वैंस के आने पर सूट-बूट में. नूर खान एयरबेस, जो पिछले साल भारत के ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस हमलों से क्षतिग्रस्त हुआ था, एक बार फिर सुर्खियों में है. मुनीर ने इस बेस को ढाल बनाने की कोशिश की, लेकिन यह अब पाकिस्तान की कमजोरी का प्रतीक बन गया है. ये पाकिस्तान के दोहरे चेहरे का सिंबल बन गया है, जो कभी भी पाला बदल सकता है। अमेरिकी सीनेटर ने उठाए सवाल अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान की इस भूमिका पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने मध्यस्थ की भूमिका पर पुनर्विचार की मांग की और कहा कि पाकिस्तान की निष्पक्षता पर संदेह है. ग्राहम की टिप्पणियों ने वाशिंगटन में पाकिस्तान के प्रति बढ़ते अविश्वास को रेखांकित किया. ईरान के साथ पाकिस्तान के संबंध लंबे समय से चले आ रहे हैं- साझा सीमा, ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय संतुलन के नाम पर. साल 1979 की ईरानी क्रांति के बाद भी दोनों देशों ने एक-दूसरे को समर्थन दिया, लेकिन अमेरिका, पाकिस्तान का प्रमुख सहयोगी रहा है. वो उससे अरबों डॉलर की सैन्य और आर्थिक मदद, F-16 जैसे हथियार और आतंकवाद के खिलाफ साझा अभियान चलाता रहा है. बावजूद इसके पाकिस्तान ईरान को शरण दे रहा है. ये उसकी नीयत पर सवाल उठाता है। कूटनीति या दोगलापन?     पाकिस्तान न तो पूर्ण रूप से अमेरिकी ब्लॉक में है और न ही चीनी-ईरानी धुरी में. चीन के साथ CPEC और सैन्य सहयोग और ईरान के साथ गुप्त संबंध बनाए रखना उसे अमेरिका की नजर में अविश्वसनीय बनाता है।     ब्रह्मोस हमलों के बाद पाकिस्तान ने अपनी वायु रक्षा को मजबूत करने का दावा किया, लेकिन ईरानी जेट छिपाने से उसकी क्षमता और विश्वसनीयता दोनों पर सवाल उठ गए हैं।     पाकिस्तान अब बुरी तरह फंस गया है. एक तरफ अमेरिका से सहायता की उम्मीद, दूसरी तरफ ईरान और चीन के साथ पुराने गठजोड़ उसे कठघरे में खड़ा करता है. जेडी वेंस का प्लेन उसी एयरबेस पर उतरा, जो संकेत देता है कि अमेरिका की भी नजर उसकी हर चाल पर है।     फिलहाल, पाकिस्तान सिर्फ अपना स्वार्थ देख रहा है, यही वजह है कि उसने सऊदी अरब के साथ अपने पैक्ट के तहत सेनाएं न भेजने के लिए ईरान से भी समझौता कर लिया. भले ही इससे वो अमेरिका की आंखों में धूल झोंक रहा है।  

देश के चर्चित पारिवारिक विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: ‘महाभारत छोटा लगेगा’, 30 हजार करोड़ के केस में सुनवाई

नई दिल्ली दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की मां रानी कपूर और उनकी पत्नी प्रिया कपूर के बीच पारिवारिक ट्रस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में विवाद जारी है। इसी बीच शीर्ष न्यायालय ने मामले की तुलना महाभारत से कर दी। जस्टिस जेबी पारदीवाला ने कह दिया कि इस विवाद के सामने इतना बड़ा युद्ध भी छोटा लग रहा है। खास बात है कि संजय की मां की तरफ से शीर्ष न्यायालय में याचिका दाखिल की गई है। वहीं, इससे पहले अदालत की तरफ से भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को मामले में मध्यस्थ बनाया गया था। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में 80 वर्षीय रानी की याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान जस्टिस पारदीवाला ने कहा, 'हम मैदान में उतर गए हैं। महाभारत भी बहुत छोटी लगेगी। हम इस मामले को देखेंगे।' फिलहाल, कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए 14 मई की तारीख तय की है। नई याचिका में क्या सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी नई अर्जी में रानी कपूर ने एक बड़ी मांग रखी है। उन्होंने अदालत से अपील की है कि जब तक मध्यस्थता की प्रक्रिया चल रही है, तब तक प्रिया सचदेव कपूर और अन्य संबंधित लोगों को आरके फैमिली ट्रस्ट के कामकाज में दखल देने से रोका जाए। 18 मई को होने वाली बोर्ड मीटिंग पर भी रोक लगाने की मांग की है। यह मीटिंग रघुवंशी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड के नोटिस पर बुलाई गई थी, जिसका विवादित संपत्ति के एक बड़े हिस्से पर कब्जा बताया जाता है। याचिका में कहा गया है कि इस मीटिंग का असली मकसद बोर्ड में अपनी पसंद के नए डायरेक्टर नियुक्त करना है। CJI चंद्रचूड़ बने मध्यस्थ 7 मई, गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस चंद्रचूड़ को इस मामले में मध्यस्थ नियुक्त किया था। न्यायालय ने पक्षों से खुले दिमाग से मध्यस्थता की कार्यवाही में भाग लेने का आग्रह करते हुए कहा कि वे सार्वजनिक रूप से कोई बयान न दें और विवाद के बारे में सोशल मीडिया पर कुछ नहीं कहें। तब बेंच ने कहा था, ‘यह एक पारिवारिक विवाद है। इसे केवल परिवार के सदस्यों तक ही सीमित रहने दें। इसे मनोरंजन का स्रोत नहीं बनाया जाना चाहिए।’ बेंच ने कहा था, ‘हम मध्यस्थ से प्रारंभिक रिपोर्ट मिलने की प्रतीक्षा करेंगे और उसके बाद मामले में आगे की कार्यवाही करेंगे। पीठ ने कहा कि मध्यस्थ की फीस और अन्य तौर-तरीके पक्षों से परामर्श करके तय किए जाएंगे। इसने पक्षों को मध्यस्थ से संपर्क करने का निर्देश दिया। पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि मध्यस्थता केवल परिवार के सदस्यों से संबंधित मामलों तक ही सीमित रहेगी।’ शीर्ष अदालत ने 27 अप्रैल को संजय कपूर की मां द्वारा दायर उस मामले में प्रिया कपूर और अन्य से जवाब मांगा था, जिसमें पारिवारिक ट्रस्ट को अमान्य घोषित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। पीठ ने 80 वर्षीय रानी कपूर द्वारा दायर याचिका पर प्रिया कपूर और अन्य को नोटिस जारी किया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि अक्टूबर 2017 में उनके नाम पर गठित ट्रस्ट 'जाली, मनगढ़ंत और धोखाधड़ी वाले' दस्तावेजों का परिणाम था।

रेलवे कर्मियों की बढ़ी सैलरी: DA में इजाफा, जल्द खाते में आएगा 4 माह का एरियर

नई दिल्‍ली भारतीय रेलवे के कर्मचारियों के लिए गुड न्‍यूज आई है. रेलवे बोर्ड ने भी महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में 2 फीसदी की बढ़ोतरी कर दिया है. यह वृद्धि 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगी. इसका मतलब हुआ की कर्मचारियों को चार महीने का एरियर मिलेगा. इस बढ़ोतरी के साथ ही डीए अब 58% से बढ़कर 60% हो गया है। इसका बढोतरी का लाभ सभी कार्यरत रेलवे कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और फैमिली पेंशनभोगियों को मिलेगा जो 7वें वेतन आयोग के दायरे में आते हैं. उम्मीद है कि मई महीने की सैलरी और पेंशन में बढ़ी हुई दरें और बकाया राशि जुड़कर आएगी, जिससे कर्मचारियों के हाथ में आने वाला पैसा बढ़ जाएगा। साल में दो बार होता है DA में बदलाव महंगाई भत्ते में साल में दो बार संशोधन किया जाता है. पहला 1 जनवरी से और दूसरा 1 जुलाई से. डीए में बदलाव ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI) के आंकड़ों के आधार परकिया जाता है ताकि महंगाई के असर को कम किया जा सके. अप्रैल में ने केंद्र सरकार के सभी कर्मचारियों के डीए में भी 2% की बढ़ोतरी हुई थी। 12 लाख को फायदा भारतीय रेलवे देश के सबसे बड़े नियोक्ताओं में से एक है. इस फैसले से करीब 12 लाख कर्मचारियों और पेंशनर्स को फायदा होगा और उनका वेतन वेतन बढ़ेगा। रेलवे पेंशनर्स को कितना फायदा होगा? रेल मंत्रालय के 7 मई 2026 के आदेश के मुताबिक, रेलवे पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स को मिलने वाला DR अब बेसिक पेंशन का 60 फीसदी मिलेगा. इससे लाखों रिटायर्ड कर्मचारियों की मासिक आय बढ़ जाएगी.यह बढ़ोतरी अलग-अलग पेंशन स्तरों पर प्रभावी रूप से लागू होगी। यहां आसान भाषा में समझें कि आपके पेंशन लेवल के हिसाब से आपकी मंथली इनकम कितनी बढ़ जाएगी….     अगर किसी पेंशनर की बेसिक पेंशन 10,000 रुपये है, तो पहले उसे 58 फीसदी DR के हिसाब से कुल 15,800 रुपये मिलते थे. अब 60 फीसदी DR लागू होने के बाद उसे हर महीने 16,000 रुपये मिलेंगे. यानी हर महीने 200 रुपये का सीधा फायदा होगा.     ₹20,000 बेसिक पेंशन पाने वालों की पेंशन अब ₹31,600 से बढ़कर ₹32,000 हो जाएगी. इससे हर महीने ₹400 का फायदा होगा.     अगर बेसिक पेंशन 30,000 रुपये है, तो 2 फीसदी DR बढ़ने से उसकी मासिक पेंशन में करीब 600 रुपये की बढ़ोतरी होगी.     ₹40,000 बेसिक पेंशन वालों की पेंशन अब ₹63,200 से बढ़कर ₹64,000 हो जाएगी. इससे ₹800 महीने का फायदा होगा.     अगर बेसिक पेंशन ₹50,000 है, तो अब कुल पेंशन ₹79,000 से बढ़कर ₹80,000 हो जाएगी. यानी हर महीने ₹1,000 ज्यादा मिलेंगे.     ₹60,000 बेसिक पेंशन पाने वाले पेंशनर्स को अब ₹94,800 की जगह ₹96,000 मिलेंगे. इससे हर महीने ₹1,200 का फायदा होगा.     वहीं ₹70,000 बेसिक पेंशन वाले पेंशनर्स की कुल पेंशन अब ₹1,10,600 से बढ़कर ₹1,12,000 हो जाएगी. यानी हर महीने ₹1,400 की बढ़ोतरी होगी. कब से लागू होगी नई DR दर? सरकार ने साफ किया है कि DR में यह 2 फीसदी बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएगी. इसका मतलब यह है कि रेलवे पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स को बढ़ी हुई पेंशन के साथ पिछले महीनों का एरियर भी दिया जाएगा. एरियर जल्द ही उनके खातों में आ जाएगा। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स का भी DA- DR बढ़ा 18 अप्रैल 2026 को पीएम नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए अतिरिक्त DA और DR किस्त को मंजूरी दी थी. इसके तहत DA और DR को 58 फीसदी से बढ़ाकर 60 फीसदी किया गया है. सरकार का कहना है कि यह फैसला बढ़ती महंगाई से राहत देने के लिए लिया गया है.

इजरायली PM ने भारत को लेकर कही बड़ी बात: बोले- भारतीयों का इजरायल के प्रति प्यार अद्भुत

नई दिल्ली इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बार फिर भारत की दिल खोलकर तारीफ की है। उन्होंने कहा है कि भारत में इजरायल के लिए बेशुमार प्यार है। इस दौरान नेतन्याहू ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है कि दुनियाभर में इजरायल अलग-थलग पड़ता जा रहा है। नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए इजरायल को बदनाम करने की साजिश की जा रही है। अमेरिकी न्यूज प्रोग्राम '60 मिनट्स' को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में इजरायल के लिए जो सम्मान है, वह असाधारण है। अपनी भारत यात्रा को याद करते हुए नेतन्याहू ने कहा, “मेरी भारत यात्रा किसी 'लव फेस्ट' यानी प्यार के उत्सव जैसी थी। वहां की जनता के मन में इजरायल के लिए गहरी सहानुभूति और सम्मान है।” वहीं PM मोदी का जिक्र करते हुए उन्होंने याद किया कि जब प्रधानमंत्री मोदी इजरायल आए थे, तो उनका स्वागत भी उतनी ही गर्मजोशी से किया गया था। नेतन्याहू ने आगे कहा कि उनकी पत्नी सारा और उन्हें भारत में जो प्यार मिला, वह दिखाता है कि इजरायल दुनिया में अकेला नहीं है। इजरायल के खिलाफ चल रहा प्रोपेगैंडा… नेतन्याहू ने आगे आरोप लगाया कि कुछ देश सोशल मीडिया के जरिए इजरायल को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिमी मीडिया और सोशल मीडिया पर इजरायल के खिलाफ गलत नैरेटिव सेट किया जा रहा है। इजरायली पीएम ने आगे स्वीकार किया कि वे अब तक इस 'प्रोपेगेंडा' का प्रभावी ढंग से मुकाबला नहीं कर पाए हैं, लेकिन अब इजरायल इस इन्फॉर्मेशन वॉर में पलटवार करने के लिए तैयार है। ईरान युद्ध को लेकर क्या दावा? इंटरव्यू के दौरान नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ की गई गुप्त सैन्य कार्रवाइयों पर भी बात की। उन्होंने दावा किया कि इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े 20 वैज्ञानिकों को मार गिराया दिया है। नेतन्याहू ने बताया कि 'ऑपरेशन राइजिंग लॉयन' के तहत शुरुआती एक मिनट के भीतर ही 12 वैज्ञानिकों को ढेर कर दिया गया था, जबकि 8 बाद में मारे गए। उन्होंने दावा किया कि इन ऑपरेशनों ने ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को काफी पीछे धकेल दिया है।

महंगाई के मोर्चे पर राहत भरी खबर: अप्रैल में CPI 3.48%, खाने-पीने की कई चीजें हुईं सस्ती

नई दिल्ली  अप्रैल 2026 के लिए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) और कंज्यूमर फूड प्राइस इंडेक्स (CFPI) पर आधारित खुदरा महंगाई दर के अनंतिम (Provisional) आंकड़े जारी कर दिए गए हैं। नए आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में आम जनता को महंगाई के मोर्चे पर मिली-जुली राहत मिली है। जहां एक तरफ आलू-प्याज जैसी रोजमर्रा की सब्जियों के दाम घटे हैं, वहीं सोने-चांदी के गहनों और टमाटर ने आम आदमी की जेब पर भारी बोझ डाला है। महंगाई रफ्तार पकड़ रही है। अप्रैल में भारत में खुदरा महंगाई में बड़ा उछाल देखने को मिला है। देश में खुदरा महंगाई को दिखाने वाले संकेतक कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में 3.48 % का उछाल आया है। यह लगातार छठवां महीना है, जब देश में महंगाई बढ़ी है। इससे पहले मार्च 2026 में CPI 3.40% पर पहुंच गया था। लगातार छठवें महीने बढ़ी महंगाई देश में महंगाई एक बार फिर आम आदमी की जेब पर दबाव बढ़ाने लगी है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2026 में खुदरा महंगाई दर यानी CPI Inflation बढ़कर 3.48% पर पहुंच गई। मार्च 2026 में यह 3.40% थी। लगातार छठे महीने CPI में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे महंगाई अब 1 साल के शीर्ष स्तर पर पहुंच गई है। रसोई का बजट फिर बिगड़ा खाद्य महंगाई भी बढ़कर 4.20% हो गई है। ग्रामीण इलाकों में खाद्य महंगाई 4.26% और शहरी क्षेत्रों में 4.10% रही। इसका सीधा असर रसोई के बजट पर पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल में भोजन और पेय पदार्थों की महंगाई 4.01% दर्ज हुई। चांदी ने दिया सबसे बड़ा झटका सबसे ज्यादा झटका कीमती धातुओं ने दिया। चांदी के गहनों की महंगाई दर 144.34% रही, जबकि सोना, डायमंड और प्लैटिनम ज्वेलरी 40.72% महंगी हुई। नारियल, टमाटर और फूलगोभी की कीमतों में भी तेज उछाल देखने को मिला। इन चीजों में मिली राहत हालांकि कुछ वस्तुओं में राहत भी मिली है। आलू की कीमतों में 23.69% और प्याज में 17.67% की गिरावट दर्ज की गई। मोटर कार और एयर कंडीशनर जैसी वस्तुएं भी सस्ती हुई हैं। किन राज्यों में सबसे ज्यादा महंगाई? राज्यों की बात करें तो तेलंगाना में सबसे ज्यादा 5.81% महंगाई दर्ज हुई। इसके बाद पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु का नंबर रहा। वहीं दिल्ली में महंगाई दर 1.96% रही, जो बड़े राज्यों में अपेक्षाकृत कम है। कैटेगरी अप्रैल 2026 मार्च 2026 स्थिति खुदरा महंगाई दर (CPI) 3.48% 3.40% बढ़ोतरी खाद्य महंगाई (CFPI) 4.20% 3.87% बढ़ोतरी ग्रामीण महंगाई 3.74% 3.63% बढ़ोतरी शहरी महंगाई 3.16% 3.11% बढ़ोतरी भोजन और पेय पदार्थ 4.01% 3.40% बढ़ोतरी हाउसिंग इंफ्लेशन 2.15% — स्थिर चांदी ज्वेलरी महंगाई 144.34% 148.42% बेहद ऊंची गोल्ड/डायमंड/प्लैटिनम ज्वेलरी 40.72% 45.88% ऊंची टमाटर महंगाई 35.28% 36.00% ऊंची फूलगोभी महंगाई 25.58% 34.16% ऊंची आलू -23.69% -19.03% सस्ता प्याज -17.67% -27.78% सस्ता सबसे ज्यादा महंगाई वाला राज्य तेलंगाना (5.81%) — शीर्ष पर दिल्ली महंगाई दर 1.96% — अपेक्षाकृत कम   RBI की बढ़ सकती है टेंशन महंगाई में लगातार बढ़ोतरी भारतीय रिजर्व बैंक के लिए भी चिंता बढ़ा सकती है। अगर आने वाले महीनों में खाद्य कीमतों में राहत नहीं मिलती है तो ब्याज दरों पर RBI का रुख सख्त हो सकता है। ऐसे में EMI से लेकर रोजमर्रा के खर्च तक आम आदमी पर दबाव और बढ़ने की आशंका है।