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PF ट्रांसफर में 10 साल की देरी पड़ी भारी: सॉफ्टवेयर खराबी का बहाना बना EPFO, कोर्ट ने लगाया जुर्माना

चंडीगढ़ क्या कोई 10 तक सॉफ्टवेयर में खराबी का बहाना बनाकर पीएफ का पैसा लटकाए रह सकता है? मामला चंडीगढ़ का है। एक कर्मचारी ने सितंबर 2010 में कर्मचारी पुराने पीएफ खाते की रकम नए खाते में ट्रांसफर करने के लिए अप्लाई किया, लेकिन उसका फंड ट्रांसफर नहीं किया गया। थक हारकर कर्मचारी ने उपभोक्ता आयोग का सहारा लिया। आयोग ने ईपीएफओ पर 50,000 रुपये का हर्जाना लगाया और मुकदमे का खर्च भी देने का आदेश दिया।  खबर के मुताबिक चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) लगभग एक दशक की देरी के लिए सॉफ्टवेयर में खराबी को बहाना नहीं बना सकता। क्या था मामला श्री गर्ग पुणे की कंपनी टेक महिंद्रा में काम करते थे। फरवरी 2009 में उन्होंने कंपनी छोड़ दी और जुलाई 2010 में इंफोसिस में जॉइन किया। सितंबर 2010 में उन्होंने टेक महिंद्रा वाले पुराने पीएफ खाते की रकम नए खाते में ट्रांसफर करने के लिए आवेदन किया। इसके बाद ईपीएफओ की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। श्री गर्ग ने आरटीआई भी दायर की। इसके बाद अप्रैल 2020 में जाकर ईपीएफओ ने सिर्फ 6.21 लाख रुपये ट्रांसफर किए, जबकि गर्ग के अनुसार उन्हें 11.07 लाख रुपये मिलने चाहिए थे। ईपीएफओ ने ब्याज न देने की वजह खाते को इनऑपरेटिव हो जाने और सॉफ्टवेयर तकनीकी खामियों को बताया। ईपीएफओ को सॉफ्टवेयर की समस्या का बहाना नहीं चलेगा उपभोक्ता आयोग ने ईपीएफओ की इस दलील को खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि सिर्फ मौखिक दावे करने और बिना ठोस सबूत के सॉफ्टवेयर की समस्या को लगभग दस साल की देरी का वैध कारण नहीं माना जा सकता। देरी की इतनी लंबी अवधि अपने आप में सेवा में कमी और अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस है। सुनवाई के दौरान फंड ट्रांसफर, लेकिन… हालांकि मामले की सुनवाई के दौरान ईपीएफओ ने गर्ग के खाते में अतिरिक्त 3.67 लाख रुपये और 64,841 रुपये ट्रांसफर कर दिए, लेकिन आयोग ने ईपीएफओ पर 50,000 रुपये का हर्जाना और मुकदमे का खर्च भी लगाया। आयोग ने साफ किया कि तकनीकी अड़चनों को देरी का सही कारण बताने के लिए ईपीएफओ को पर्याप्त दस्तावेज पेश करने चाहिए थे, जो उसने नहीं किए। यह फैसला उन लाखों कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है, जिन्हें नौकरी बदलने पर पीएफ ट्रांसफर में लंबी देरी का सामना करना पड़ता है। आयोग ने ईपीएफओ को यह राशि 60 दिनों के भीतर देने का आदेश दिया है, अन्यथा इस पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

NEET-UG 2026 री-एग्जाम तय, NTA बोला परीक्षा की शुचिता जरूरी

नई दिल्ली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने मंगलवार को 3 मई को आयोजित NEET-UG 2026 एग्जाम को पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दिया और दोबारा परीक्षा कराने का ऐलान किया. इस फैसले पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के महानिदेशक (DG) अभिषेक सिंह ने माना कि यह फैसला छात्रों, अभिभावकों और खुद एनटीए के लिए बेहद कठिन और शर्मनाक है, लेकिन परीक्षा की पवित्रता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता. अभिषेक सिंह ने आजतक को बताया कि 7 मई की देर रात हमें कुछ व्हाट्सएप मैसेज मिले थे, जिनमें ऐसे क्वेश्चन शेयर किए गए थे, जो नीट परीक्षा के क्वेश्चन पेपर से मिलते-जुलते पाए गए. इन व्हाट्सएप मैसेज को जांच के लिए तुरंत कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भेजा गया. उन्होंने कहा कि परीक्षा वाले दिन किसी प्रकार की गड़बड़ी की शिकायत नहीं मिली थी और परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई थी, लेकिन एनटीए ने पेपर लीक के आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की. एनटीए के डायरेक्टर जनरल ने बताया कि 8 और 9 मई को एजेंसियों ने इन व्हाट्सएप मैसेज की जांच की और 10 व 11 मई को कुछ आरोप सही होने की जानकारी मिली. इसके बाद एनटीए ने फैसला लिया कि यदि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर जरा भी सवाल उठता है तो इसे रद्द करना ही ठीक रहेगा. एनटीए प्रमुख ने कहा कि यह तय करना अभी जल्दबाजी होगी कि पेपर लीक कितने बड़े स्तर पर हुआ था और कितने लोगों तक क्वेश्चन पेपर पहुंचा था. उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है. सीबीआई ही तय करेगी कि मामला किसी एक राज्य तक सीमित था या कई राज्यों तक फैला हुआ था. नासिक की एक प्रिंटिंग प्रेस का नाम सामने आने पर पूछे गए सवाल पर अभिषेक सिंह ने कहा कि वह जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहते. उन्होंने कहा कि सीबीआई सभी रिकॉर्ड, सबूत और आरोपों की जांच करेगी और दोषियों की पहचान करेगी. उन्होंने यह भी कहा कि एनटीए परीक्षा से पहले लगातार सतर्क था और कई शिकायतों की जांच की गई थी. एजेंसी ने 120 टेलीग्राम चैनल भी ब्लॉक किए थे. छात्रों से अपील की गई थी कि यदि उन्हें किसी तरह की गड़बड़ी की जानकारी मिले तो तुरंत रिपोर्ट करें. पहले वाले रजिस्ट्रेशन से ही री-एग्जाम एनटीए के डायरेक्टर जनरल अभिषेक सिंह ने आजतक को बताया कि मई 2026 NEET-UG एग्जाम सेशन के लिए छात्रों द्वारा रजिस्ट्रेशन के वक्त दी गई जानकारी और उनके द्वारा चुने गए परीक्षा केंद्र दोबारा आयोजित होने वाली परीक्षा के लिए मान्य रहेंगे. छात्रों को दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने या किसी तरह की फीस देने की जरूरत नहीं होगी. साथ ही एनटीए पहले भरे गए फॉर्म के दौरान जो फीस ली गई थी, उसे छात्रों को वापस करेगा. उन्होंने कहा कि भले ही इससे एनटीए पर आर्थिक बोझ पड़ेगा, लेकिन एजेंसी का लक्ष्य निष्पक्ष, पारदर्शी और त्रुटिरहित परीक्षा कराना है. जल्द जारी होगा री-एग्जाम का शेड्यूल एनटीए प्रमुख ने कहा कि जल्द दोबारा परीक्षा आयोजित कराई जाएगी. इसकी तारीख और नए एडमिट कार्ड जारी करने सहित आगे की सभी जानकारियां एजेंसी के आधिकारिक चैनलों के जरिए अभ्यर्थियों के साथ साझा की जाएंगी. उन्होंने अभ्यर्थियों और अभिभावकों से अपील की कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट खबरों और अफवाहों पर ध्यान न दें. अभिषेक सिंह ने कहा, 'अगर कोई यह सोचता है कि वह छात्रों के भविष्य और परीक्षा प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ कर सकता है, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा. दोषियों को गिरफ्तार किया जाएगा, जेल भेजा जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की जाएगी.'

फिर लौटेगा f? PM मोदी की अपील के बाद नामी कंपनियों ने शुरू की तैयारी

नई दिल्ली ईरान में बीते करीब ढाई महीनों से चल रही भीषण जंग की आंच अब भारत तक आने लगी है। पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को पेट्रोल और डीजल की बचत के लिए वर्क फ्रॉम होम के मॉडल को फिर से कोरोना के दिनों की तरह लागू करने की अपील की थी। उन्होंने सोने की खरीद भी कम करने समेत कुल 7 अपील की थी, जिनमें सबसे अहम वर्क फ्रॉम होम ही है। इस बीच रिलायंस और टाटा समूह जैसे देश के बड़े कॉरपोरेट संस्थान फिर से वर्क फ्रॉम होम की नीति लागू करने पर विचार कर रहे हैं। फिलहाल मंथन चल रहा है कि इस नीति को कैसे लागू किया जाए कि कामकाज प्रभावित न हो और पेट्रोल और डीजल की बचत भी संभव हो। मुकेश अंबानी के मालिकाना हक वाली कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसकी सहयोगी संस्थाओं में फिलहाल हाइब्रिड मॉडल लागू है। इस बीच कंपनी के प्रवक्ता का कहना है कि हम पीएम मोदी की अपील के आधार पर फिर से आकलन कर रहे हैं कि कैसे इस फैसले को और प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकता है। अब तक टाटा ने इस संबंध में कोई फैसला नहीं लिया है, लेकिन समूह की सभी कंपनियों में इसे लेकर विचार चल रहा है। वहीं आईटी सेक्टर की कई कंपनियों में तो फिलहाल वर्क फ्रॉम होम की नीति लागू है। हालात सुधरने के बाद ज्यादातर कंपनियों ने हाइब्रिड मॉडल लागू किया है। इसके तहत सीनियर लोगों को ऑफिस बुलाया जा रहा है और जूनियर स्टाफ घर से ही काम कर रहे हैं। यही नहीं बड़ी संख्या में जिन्हें जाना भी पड़ रहे हैं, उन्हें भी वैकल्पिक तौर पर घरों से ही काम करने का मौका मिल रहा है। जानकारों का कहना है कि पीएम नरेंद्र मोदी की अपील कोर आईटी कंपनियों के लिए तो ठीक है, लेकिन इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स में लगी कंपनियां इसे कैसे लागू करेंगी। यह सोचने वाली बात है। जैसे एल एंड टी के ज्यादातर कर्मचारी तो ऑनसाइट काम करते हैं। फिर भी इन कंपनियों की ओर से कर्मचारियों से कहा जा रहा है कि वे जहां तक संभव हो, यात्रा में कटौती करें। 10 मई 2026 को सिकंदराबाद में पीएम मोदी ने नागरिकों से 'देशभक्तिपूर्ण व्यवहार' में बदलाव लाने की अपील की. उन्होंने कहा कि हमें पेट्रोल-डीजल का कम इस्तेमाल करना चाहिए, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और कारपूलिंग को बढ़ावा देना चाहिए और जितना हो सके वर्क फ्रॉम होम (WFH) या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर वापस लौटना चाहिए. इतना ही नहीं, उन्होंने एक साल तक सोना (Gold) न खरीदने और शादियां भारत के अंदर ही करने की सलाह दी है. उनका कहना है कि जो विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) हम तेल खरीदने में खर्च करते हैं, उसे बचाना हर भारतीय की जिम्मेदारी है। इस पूरे संकट की जड़ एक युद्ध है. फरवरी 2026 में अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमलों के बाद 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' का रास्ता बंद हो गया है, जहां से भारत का 54% कच्चा तेल आता है. नतीजा यह हुआ कि जो कच्चा तेल 2025 में 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, वह मई 2026 तक 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत तेल बाहर से मंगाता है, इसलिए दुनिया के किसी भी कोने में हुई अशांति सीधे हमारी रसोई और गाड़ी की टंकी पर असर डालती है। कुछ कंपनियों को तुरंत ही पलटने होंगे फैसले बता दें कि कोरोना काल में बड़े पैमाने पर वर्क फ्रॉम होम की पॉलिसी कॉरपोरेट सेक्टर में लागू हुई थी। अब यदि फिर से यह लागू हुई तो कई कंपनियों को अपने फैसले पलटने होंगे। बीते कुछ सालों में हालात बदले थे तो कंपनियां वर्क फ्रॉम ऑफिस को फिर से प्रोत्साहित कर रही थीं। अब उन्हें दोबारा कोरोना काल वाली पॉलिसी पर लौटना होगा।

सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता: श्रीनगर में दो संदिग्ध आतंकी पकड़े गए, पिस्टल और आतंकी पोस्टर मिले

 श्रीनगर जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. बाबादेम इलाके में नाका चेकिंग के दौरान पुलिस ने बाइक पर सवार दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है. जांच के दौरान दोनों के पास से हथियार, जिंदा कारतूस और प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े पोस्टर बरामद किए गए हैं. इस कार्रवाई के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान फैसल अहमद भट और फैसल अहमद गुरू के रूप में हुई है. दोनों श्रीनगर के रहने वाले बताए जा रहे हैं. पुलिस के मुताबिक, दोनों संदिग्ध बाइक पर सवार होकर इलाके से गुजर रहे थे, तभी नाका चेकिंग के दौरान उन्हें रोका गया. तलाशी लेने पर उनके पास से कई आपत्तिजनक सामान बरामद हुए। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक पिस्टल, तीन मैगजीन और 21 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं. इसके अलावा दो मोबाइल फोन और 10 LeT पोस्टर भी जब्त किए गए. बरामद पोस्टरों को लेकर जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि दोनों किसी आतंकी संगठन के लिए काम कर रहे थे या फिर किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की तैयारी में थे। इस मामले में श्रीनगर के एमआर गंज पुलिस स्टेशन में FIR नंबर 26/2025 दर्ज की गई है. पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ UAPA और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है. फिलहाल, दोनों से पूछताछ जारी है और पुलिस उनके नेटवर्क तथा अन्य संभावित संपर्कों की जांच कर रही है।

असम में फिर हिमंता सरकार: दूसरी बार मुख्यमंत्री बने हिमंता बिस्वा सरमा, 4 विधायक भी बने मंत्री

 गुवाहाटी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की विधानसभा चुनावों में शानदार जीत के बाद हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार (12 मई) को असम के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली। हिमंता का राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में यह लगातार दूसरा कार्यकाल है। यह बड़ी जीत राज्य में BJP के बढ़ते प्रभुत्व को अधिक मजबूत करती है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के चार विधायकों ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों और बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में आयोजित समारोह में शपथ ली। राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य खानापारा क्षेत्र के वेटरनरी मैदान में मगंलवार सुबह 11 बजकर 40 मिनट पर हिमंता बिस्वा सरमा और चार अन्य विधायकों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। 57 साल के हिमंता असम में लगातार दूसरी बार शपथ लेने वाले पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बन गए हैं। हिमंता बिस्वा सरमा के साथ शपथ लेने वाले चार विधायकों में BJP के अजंता नियोग और रामेश्वर तेली, जबकि उनके सहयोगी दल असम गण परिषद (AGP) के अतुल बोरा और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के चरण बोरो शामिल हैं। नियोग, बोरा और बोरो इससे पहले भी हिमंता के पहले मंत्रिमंडल में सदस्य थे। जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री तेली ने राज्य की राजनीति में फिर से वापसी की है। NDA की असम में तीसरी बार सरकार बनी है। गठबंधन पहली बार 2016 में सर्वानंद सोनोवाल के नेतृत्व में सत्ता में आया था जो अब केंद्र सरकार में मंत्री हैं। प्रधानमंत्री मोदी असम में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली NDA की तीसरी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह से पहले सोमवार रात गुवाहाटी पहुंचे। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और अन्य BJP नेताओं ने गुवाहाटी में लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पीएम मोदी का स्वागत किया। पीएम मोदी ने गुवाहाटी के खानापारा इलाके के कोइनाधोरा स्थित राज्य अतिथि गृह में रात्रि विश्राम की। शपथ ग्रहण समारोह में कई केंद्रीय मंत्री, NDA शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री, शीर्ष उद्योगपति, सत्राधिकार (वैष्णव मठों के प्रमुख) और अन्य गणमान्य व्यक्ति, BJP कार्यकर्ता और बूथ समिति अध्यक्ष शामिल थे। शपथ ग्रहण में शामिल होने वालों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, सर्बानंद सोनोवाल, शिवराज सिंह चौहान, ललन सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया और चिराग पासवान शामिल हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, गोवा के उनके समकक्ष प्रमोद सावंत, राजस्थान के भजन लाल शर्मा, बिहार के सम्राट चौधरी, छत्तीसगढ़ के विष्णु देव साय, उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी, महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस, ओडिशा के मोहन चरण माझी और मध्य प्रदेश के मोहन यादव भी शपथ ग्रहण में शामिल थे। हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली असम सरकार के शपथ ग्रहण समारोह पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, "असम में खुशी का माहौल है, डॉ हिमंत बिस्वा सरमा दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे…डॉ हिमंत बिस्वा सरमा ने जनता के कल्याण के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं… मैं विकास के लिए वोट करने के लिए राज्य की जनता को धन्यवाद देता हूं। -हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली असम सरकार के शपथ ग्रहण समारोह पर केंद्रीय मंत्री सरबानंदा सोनोवाल ने कहा, 'ये हमारे लिए एक बड़ा दिन है. असम की जनता, एनडीए के लिए ऐतिहासिक दिन… इस ऐतिहासिक घटना को देखने के लिए राज्य भर से लोग आए हैं। -शपथ के लिए निकले हिमंता बिस्वा सरमा -अजंता नियोग, अतुल बोरा और चरण बोरो भी लेंगे मंत्री पद की शपथ कैबिनेट में अनुभवी चेहरों की वापसी आज शपथ लेने वाले चार मंत्रियों में से तीन- अजंता नियोग, अतुल बोरा और चरण बोरो पिछली सरकार में भी कैबिनेट का हिस्सा थे. अजंता नियोग वित्त मंत्रालय संभाल चुकी हैं, जबकि अतुल बोरा कृषि और चरण बोरो परिवहन मंत्री थे. वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री रामेश्वर तेली की राज्य की राजनीति में वापसी हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, नए मंत्रिमंडल में कुल 18 से 19 मंत्री हो सकते हैं, जिनके नामों पर चर्चा के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सोमवार रात ही गुवाहाटी पहुंच चुके हैं। खानापारा में भव्य समारोह शपथ ग्रहण समारोह के लिए गुवाहाटी के खानापारा में विशेष तैयारियां की गई थीं. इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए एक लाख से अधिक लोग शामिल हुए, जिनमें बीजेपी के पंचायत अध्यक्ष और सदस्य शामिल हैं।

देशभर के छात्रों को बड़ा झटका: NEET UG एग्जाम रद्द, CBI करेगी पेपर लीक की जांच

 नई दिल्ली एनटीए ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2026 रद्द कर दी है। पेपर लीक होने के शक के चलते एनटीए ने यह फैसला लिया। नई तिथि का ऐलान बाद में किया जाएगा। पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई करेगी। देश भर में नीट परीक्षा का आयोजन 3 मई 2026 को किया गया था। नेशनल एनटीए ने नोटिस में कहा, 'राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी ने भारत सरकार की मंजूरी से, 3 मई 2026 को आयोजित NEET (UG) 2026 परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया है। इस परीक्षा की नई तारीखों की सूचना अलग से दी जाएगी।' आपको बता दें कि नीट यूजी परीक्षा से ही देश के मेडिकल, डेंटल व आयुष कॉेलजों में चलाए जा रहे एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीएचएमएस जैसे विभिन्न कोर्सेज में दाखिला मिलता है। एमबीबीएस कर डॉक्टर बनने का ख्वाब देख रहे 22.05 लाख विद्यार्थियों ने यह परीक्षा दी थी। 3 मई को नीट यूजी परीक्षा होने के चार दिन बाद 7 मई को एनटीए को इसके पेपर लीक से जुड़े कुछ इनपुट मिले थे। 8 मई को इनके सत्यापन व कार्रवाई के लिए इन्हें केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दिया गया था। पेपर लीक की जांच करेगी सीबीआई नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने बताया कि उन्हें जांच एजेंसियों से जो इनपुट मिले, उनके आधार पर पता चला कि मौजूदा परीक्षा प्रक्रिया को जारी नहीं रखा जा सकता। परीक्षा की नई तारीखें, एडमिट कार्ड का शेड्यूल आदि जल्द ही एजेंसी के आधिकारिक चैनलों के माध्यम से बता दिया जाएगा। एनटीए ने बताया कि सरकार ने अब इस संभावित पेपर लीक की जांच सीबीआई द्वारा की जाएगी। करीब 23 लाख छात्रों ने दी थी परीक्षा NEET (UG) 2026 परीक्षा में इस बार देशभर से करीब 23 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था। परीक्षा रद्द होने के फैसले के बाद लाखों अभ्यर्थियों और अभिभावकों के बीच चिंता और असमंजस का माहौल बना हुआ है। गेस पेपर से मैच हुए थे नीट पेपर के 120 प्रश्न आपको बता दें कि राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) के खुलासे के बाद नीट यूजी 2026 परीक्षा के पेपर लीक का शक और गहरा गया था। राजस्थान पुलिस एसओजी ने सोमवार को बताया था कि नीट यूजी परीक्षा से 15 से 1 महीने पहले से एक गैस पेपर नीट अभ्यर्थियों के बीच सर्कुलेट हो रहा था। इस गेस पेपर में करीब 410 सवाल हैं जिसमें से 120 सवाल नीट एग्जाम के केमिस्ट्री सेक्शन में हूबहू आए हैं। पूरे मैच होते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि 720 में से 600 अंक के प्रश्न गेस पेपर से आए थे जो पहले ही स्टूडेंट्स के पास पहुंच चुका था। केरल से आउट, राजस्थान के सीकर तक पहुंचा नीट यूजी पेपर लीक मामले में कहा जा रहा है कि जो गेस पेपर नीट अभ्यर्थियों के बीच पहुंच रहा था, वह केरल से आउट हुआ था और राजस्थान तक पहुंचा था। राजस्थान के सीकर में कंसलटेंसी चलाने वाले झुंझुनूं के एक शख्स के पास परीक्षा से करीब 1 महीना पहला गैस पेपर आया था। कई संदिग्धों को पकड़ा एसओजी ने ने पिछले चार दिन में देहरादून, सीकर व झुंझुनूं से 20 से ज्यादा संदिग्धों को पकड़ा है। एजेंसी से जुड़े विश्वस्त सूत्रों ने इसकी पुष्टि भी की है। जिन्हें पकड़ा है, उनमें से ज्यादातर करियर काउंसलर हैं। देहरादून से पकड़े गए संदिग्धों में एक सीकर का राकेश मंडावरिया है। उसका पीपराली रोड पर एक नामी कोचिंग संस्थान के सामने कंसल्टेंसी का ऑफिस है। राकेश की निशानदेही पर देहरादून से शनिवार देर शाम 4 और लोगों को पकड़ा है।

एक ही हमले की धमक: लाहौर-इस्लामाबाद-कराची तक मुनीर का कुनबा खतरे में, चीन पर भी दबाव

नई दिल्ली भारत ने पिछले दिनों ओडिशा के तट पर एक विनाशकारी मिसाइल का सफल ट्रायल किया है. इससे पहले डीआरडीओ की तरफ से तीन हजार किलोमीटर से भी ज्‍यादा के क्षेत्र के लिए हवाई कर्फ्यू यानी NOTAM जारी किया था. अब इसको लेकर विस्‍तृत जानकारी सामने आई है. दरअसल, भारत के रक्षा वैज्ञानिकों ने ऐसी मिसाइल का परीक्षण किया है, जो 5000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है. खास बात यह है कि इस मिसाइल में ऐसी तकनीक का इस्‍तेमाल किया गया है, जो एक साथ अलग-अलग दिशाओं में अलग-अलग टार्गेट को एक साथ तबाह करने में सक्षम है. इस मिसाइल की जद में पूरा पाकिस्‍तान है, ज‍बकि उसके यार चीन के कई महत्‍वपूर्ण ठिकाने भी इस मिसाइल की नोंक पर होंगे. इसका मतलब यह हुआ कि इस मिसाइल से लाहौर से लेकर इस्‍लामाबाद, रावलपिंडी, कराची, पेशावर जैसे शहरों को कुछ ही मिनटों में मलबे में तब्‍दील किया जा सकता है।  दरअसल, डीआरडीओ ने मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल रीएंट्री व्हीकल यानी MIRV टेक्‍नोलॉजी से लैस एडवांस अग्नि मिसाइल का परीक्षण किया है. हालांकि, डीआरडीओ की तरफ से अग्नि मिसाइल के इस वैरिएंट के बारे में कुछ नहीं बताया गया है, लेकिन मुद्दे की बात यह है कि यह मिसाइल MIRV तकनीक से लैस है. MIRV टेक्‍नोलॉजी की मदद से एक ही मिसाइल से कई टार्गेट पर निशाना साधा जा सकता है. इस तकनीक से लैस मिसाइल को इसी वजह से ‘मिसाइल बस’ भी कहा जाता है. भारत ने 8 मई 2026 को ओडिशा स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से एडवांस अग्नि बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण कर सामरिक मोर्चे पर बड़ा संदेश दिया है. इस उपलब्धि के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जिनके पास लंबी दूरी की MIRV क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइलें मौजूद हैं।  हिन्‍द महासागर में बादशाहत! रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 9 मई को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए परीक्षण की सफलता की पुष्टि की. बाद में रक्षा मंत्रालय ने बताया कि जमीन और समुद्र आधारित कई ट्रैकिंग स्टेशनों से प्राप्त टेलीमेट्री डेटा ने मिसाइल की पूरी ऑपरेशनल ट्रैजेक्टरी को सफल बताया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस परीक्षण को भारत की बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों से जोड़ते हुए कहा कि देश बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण के अनुरूप अपनी रणनीतिक क्षमता को मजबूत कर रहा है. हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि परीक्षण अग्नि-5 का था या अग्नि-6 संस्करण का, लेकिन रक्षा विशेषज्ञ इसे अग्नि-5 परिवार का एडवांस MIRV अपग्रेड मान रहे हैं, जिसकी मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर से अधिक बताई जा रही है. माना जा रहा है कि यह मिसाइल हिंद महासागर क्षेत्र में अलग-अलग लक्ष्यों को साधने में सक्षम है, जिससे भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता और ‘सेकेंड स्ट्राइक’ क्षमता दोनों मजबूत हुई हैं।  MIRV से लैस मिसाइल इस वजह से खास     भारत ने ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से एडवांस्ड अग्नि मिसाइल का सफल फ्लाइट ट्रायल किया.     रक्षा मंत्रालय के अनुसार मिसाइल में MIRV (Multiple Independently Targeted Reentry Vehicle) तकनीक का इस्तेमाल किया गया.     इस तकनीक के जरिए एक ही मिसाइल से कई अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला किया जा सकता है.     परीक्षण में मिसाइल ने कई पेलोड को अलग-अलग रणनीतिक लक्ष्यों तक सफलतापूर्वक पहुंचाया.     सभी लक्ष्यों को हिंद महासागर क्षेत्र में बड़े भौगोलिक दायरे में चुना गया था.     मिसाइल की पूरी उड़ान पर ग्राउंड और जहाज आधारित ट्रैकिंग सिस्टम से नजर रखी गई.     रक्षा मंत्रालय ने कहा कि लॉन्च से लेकर सभी पेलोड के लक्ष्य पर पहुंचने तक मिशन सफल रहा.     इस परीक्षण के साथ भारत ने फिर साबित किया कि वह एक मिसाइल से कई रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है.     मिसाइल का विकास DRDO की लैब्स ने देश की विभिन्न इंडस्ट्रीज के सहयोग से किया है.     परीक्षण के दौरान DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिक और भारतीय सेना के अधिकारी मौजूद रहे.     इससे पहले 11 मार्च 2024 को भारत ने पहली बार स्वदेशी अग्नि-5 मिसाइल का MIRV तकनीक के साथ सफल परीक्षण किया था.     हालांकि सरकार ने मिसाइल की आधिकारिक रेंज नहीं बताई, लेकिन NOTMAR नोटिस के आधार पर इसकी मारक क्षमता करीब 3,600 किलोमीटर मानी जा रही है. MIRV टेक्‍नोलॉजी के क्‍या फायदे? MIRV तकनीक रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. सामान्य बैलिस्टिक मिसाइल जहां एक वारहेड ले जाती है, वहीं MIRV तकनीक वाली मिसाइल एक साथ कई वारहेड लेकर अलग-अलग दिशाओं में हमला कर सकती है. इसमें डिकॉय और पेनिट्रेशन एड्स का भी इस्तेमाल किया जाता है, जिससे दुश्मन की मिसाइल रक्षा प्रणाली को भेदना आसान हो जाता है. यही वजह है कि अमेरिका, रूस और चीन जैसे बड़े परमाणु शक्ति संपन्न देशों ने इस तकनीक को अपनी रणनीतिक क्षमता का अहम हिस्सा बनाया हुआ है. अब भारत भी इस श्रेणी में मजबूती से शामिल होता दिखाई दे रहा है. यह परीक्षण मुख्य रूप से चीन को रणनीतिक संदेश देने वाला है. हाल के वर्षों में चीन ने अपने परमाणु कार्यक्रम में तेजी लाई है. शिनजियांग क्षेत्र में मिसाइल साइलो निर्माण, DF-41 जैसी MIRV मिसाइलों की तैनाती, हाइपरसोनिक हथियारों का विकास और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने भारत की चिंताएं बढ़ाई हैं. ऐसे में भारत का यह परीक्षण सामरिक संतुलन कायम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. MIRV तकनीक आखिर होती क्या है? MIRV यानी Multiple Independently Targeted Re-Entry Vehicle ऐसी मिसाइल तकनीक है, जिसमें एक ही बैलिस्टिक मिसाइल कई परमाणु वारहेड लेकर जाती है. अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद ये वारहेड अलग-अलग दिशाओं में जाकर अलग-अलग लक्ष्यों को निशाना बना सकते हैं. यानी एक मिसाइल से कई ठिकानों पर हमला संभव हो जाता है. भारत के हालिया परीक्षण की सबसे बड़ी खासियत क्या रही? भारत ने उन्नत अग्नि बैलिस्टिक मिसाइल के जरिए MIRV तकनीक का सफल परीक्षण किया है. इस परीक्षण ने दिखाया कि भारत अब लंबी दूरी तक कई लक्ष्यों पर एक साथ सटीक हमला करने की क्षमता हासिल कर चुका है. इसे भारत की सामरिक ताकत में बड़ा इजाफा माना जा रहा है. चीन और पाकिस्तान के संदर्भ में … Read more

डोरेमॉन के नोबिता का असली शहर जापान में मिला, फैंस ने की भावनाओं की झलक

टोक्यो   आप सभी अपने घर में कभी न कभी डोरेमॉन कार्टून तो देखा ही होगा। वही डोरेमॉन जो अपने गैजेट्स के लिए काफी फेमस है और उनसे अपने दोस्त नोबिता की मदद करता है। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा वीडियो वायरल हुआ है जिसमें डोरेमॉन के असली शहर को जिसमें स्कूल और बिल्डिंगों को हूबहू वैसा ही दिखाया गया है जैसा वे कार्टून की काल्पनिक दुनिया में हैं। एक भारतीय कंटेंट क्रिएटर ने सार्थक सचदेवा ने जापान की लगभग 6,000 किलोमीटर की यात्रा करके ये जगह ढूंढ़ी है। वीडियो में जापान के एक शांत आवासीय इलाके की उनकी यात्रा को दिखाया गया है, जो लोकप्रिय कार्टून के नोबिता और डोरेमोन की दुनिया से काफी मिलता-जुलता है।   इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो  इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @sarthaksachdevva नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इसमें सार्थक कैमरा अपनी ओर घुमाते हुए उत्साह से कहा कि वह इस घर को देखने के लिए भारत से जापान तक का लंबा सफर तय करके आए हैं। इसके बाद वीडियो में संकरी गलियों, छोटे घरों और शांत सड़कों के मनोरम दृश्य दिखाए गए, जिन्हें देखकर दर्शकों को तुरंत डोरेमॉन के जाने-पहचाने दृश्यों की याद आ गई।मोहल्ले से गुज़रते हुए, सार्थक ने उन बारीकियों की ओर इशारा किया जिन्हें पुराने प्रशंसक तुरंत पहचान गए। एक सड़क की ओर इशारा करते हुए उन्होंने समझाया कि दर्शकों ने नोबिता को श्रृंखला में अनगिनत बार "ठीक इसी सड़क" से स्कूल जाते, दोस्तों से मिलते या खेल के मैदान की ओर भागते हुए देखा है। हूबहू वैस ही दिखा नजारा  मोहल्ले का शांत वातावरण, साफ-सुथरी सड़कें और सादगीपूर्ण घर उस सौम्य, रोजमर्रा की सुंदरता को दर्शाते थे जिसने डोरेमॉन को पीढ़ियों से दर्शकों के लिए इतना सुकून भरा बना दिया था। वीडियो के कई दृश्य कार्टून के दृश्यों से हूबहू मिलते-जुलते थे, जिससे यह दौरा पर्यटन की बजाय बचपन की यादों में खो जाने जैसा महसूस हुआ। वीडियो के कैप्शन में लिखा था, "वास्तविक जीवन में डोरेमोन के ठिकाने।" हालांकि डोरेमॉन की कहानी टोक्यो में घटित होती है, लेकिन कई प्रशंसक इसकी दृश्य शैली को श्रृंखला की निर्माता फुजिको एफ. फुजियो से जुड़े वास्तविक जीवन के स्थानों से जोड़ते हैं, जिनका जन्म ताकाओका में हुआ था। यूजर्स को भी पसंद आया वीडियो  यह वीडियो स्कूल के बाद डोरेमॉन देखते हुए बड़े हुए लोगों के बीच तेज़ी से ऑनलाइन वायरल हो गया। कई दर्शकों ने माना कि मोहल्ले को असल ज़िंदगी में देखकर वे भावुक हो गए, और कई लोगों ने इसे बचपन का सपना सच होने जैसा बताया। कई लोगों ने कहा कि यह क्लिप उन्हें डोरेमोन के गैजेट्स, नोबिता के कारनामों और उस दुनिया की सादगी भरे एहसास की याद दिलाती है जो आज भी सालों बाद भी बेहद जानी-पहचानी लगती है। एक यूजर ने सिर्फ "रोंगटे खड़े हो गए" लिखा, जबकि दूसरे ने कहा, "सुनहरे दिन।" एक तीसरे व्यक्ति ने कहा, "डोरेमॉन से जुड़ी हमारी बचपन की भावनाएं," जबकि चौथे व्यक्ति ने कहा, "इस वीडियो ने मेरा दिन बना दिया।"

2024 की राह में बीजेपी की भरपाई: बंगाल की सफलता और राष्ट्रपति चुनाव

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) 2024 लोकसभा चुनाव में अपने दम पर बहुमत नहीं ला पाई थी, इसके बाद माना जा रहा था कि उसका दबदबा घटने लगेगा. लेकिन अब हालात फिर बदले हैं. पश्चिम बंगाल में दो-तिहाई से ज्यादा सीटों पर जीतना हो, या फिर दूसरे राज्यों के विधानसभा चुनाव, सब में बीजेपी का प्रदर्शन दमदार रहा. ऐसे में अगले साल के राष्ट्रपति चुनाव में पार्टी को अपर हैंड मिलेगा।  महाराष्ट्र, बंगाल और बिहार जैसे बड़े राज्यों में सहयोगी दलों के साथ बीजेपी ने चुनाव जीते. ये तीनों राज्य राष्ट्रपति चुनाव में उत्तर प्रदेश के बाद सबसे अधिक महत्व वाले माने जाते हैं।  तीनों में NDA की जीत ने मानो लोकसभा में हुए नुकसान की भरपाई कर दी है. क्योंकि विधानसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन से सहयोगियों के साथ भी शर्तों को तय करने की उसकी शक्ति कमजोर हो सकती थी।  बता दें कि 2024 में बीजेपी की सीटों की संख्या 303 से घटकर 240 हो गई थी. इस गिरावट से 2022 में 10,86,431 की कुल संख्या वाले निर्वाचक मंडल (राष्ट्रपति चुनने वाले) में बीजेपी के वोटों को 44,100 का झटका लगा था. तब बीजेपी बहुमत के लिए 272 का आंकड़ा पार करने के लिए टीडीपी और जेडीयू पर निर्भर थी, तब विपक्ष ने दावा किया था कि सरकार जल्द ही गिर जाएगी।  हालांकि, दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद, बीजेपी की स्थिति काफी मजबूत है. कैसे मिलेगा फायदा राष्ट्रपति चुनाव के लिए संसद और विधानसभाओं के सभी निर्वाचित सदस्य निर्वाचक मंडल बनाते हैं. इसमें हर एक सांसद के वोट की वैल्यू बराबर (2022 में 700 थी) होती है. लेकिन विधायक के वोट का महत्व उसकी विधानसभा की जनसंख्या (1971 की जनगणना के अनुसार) के आकार पर निर्भर करता है।  जैसे, 2022 में उत्तर प्रदेश के एक विधायक के वोट की वैल्यू 208 थी, जो सिक्किम के एक विधायक के वोट की वैल्यू (7) से लगभग 30 गुना अधिक थी. 2027 राष्ट्रपति चुनाव में भी यह नंबर कमोबेश उतना ही रहने के आसार हैं. ऐसे में बड़े राज्यों में जीत से बीजेपी को सीधा फायदा होगा।  जैसे, हरियाणा में बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल. महाराष्ट्र विधानसभा में एनडीए की संख्या, जो 288 सदस्यों वाली है, पिछले राष्ट्रपति चुनाव के दौरान 150 से अधिक से बढ़कर 237 विधायक हो गई है. बिहार विधानसभा में भी उसकी संख्या 125 से बढ़कर 202 हो गई है. पश्चिम बंगाल में अब उसके पास 77 विधायकों के मुकाबले 207 विधायक हैं।  ऐसे में अगले साल जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले, उत्तर प्रदेश सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि निर्वाचक मंडल में उसके 83,800 से अधिक वोटों का भारी दबदबा है।   

वर्क फ्रॉम होम से खजाना भरेगा: 1 करोड़ लोगों की 3-दिन की आदत से होगी ₹70,000 करोड़ की बचत

मुंबई  भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है. देश अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. ऐसे में जब भी पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है या अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें उछलती हैं तो उसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था, महंगाई और आम आदमी की जेब पर पड़ता है. इसी पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील बेहद अहम मानी जा रही है, जिसमें उन्होंने लोगों से ईंधन की बचत के लिए कोरोना काल की तरह वर्क फ्रॉम होम अपनाने की बात कही।  प्रधानमंत्री की यह अपील सिर्फ एक अस्थायी सलाह नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, विदेशी मुद्रा बचत और शहरी ट्रैफिक संकट से जुड़ा बड़ा आर्थिक संदेश है. अगर देश में बड़े पैमाने पर कंपनियां हफ्ते में 2 से 3 दिन वर्क फ्रॉम होम लागू कर दें, तो इसका असर सिर्फ कर्मचारियों की सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा फायदा हो सकता है।  दरअसल भारत के बड़े शहरों- दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और गुरुग्राम में करोड़ों लोग रोज ऑफिस आने-जाने के लिए निजी वाहन इस्तेमाल करते हैं. एक औसत कर्मचारी रोज 20 से 40 किलोमीटर तक सफर करता है. अगर सिर्फ एक करोड़ कर्मचारी भी हफ्ते में 3 दिन घर से काम करें और रोज औसतन 30 किलोमीटर की यात्रा बच जाए तो हर दिन करीब 30 करोड़ किलोमीटर की वाहन आवाजाही कम हो सकती है. सामान्य माइलेज के हिसाब से यह रोज लगभग दो करोड़ लीटर पेट्रोल-डीजल की बचत के बराबर बैठता है।  70,000 करोड़ रुपये की बचत इसी गणना को सालभर के स्तर पर देखें तो करीब 700 से 750 करोड़ लीटर ईंधन की बचत संभव है. मौजूदा कीमतों के हिसाब से इसकी आर्थिक वैल्यू 70,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बैठती है. यह रकम कई राज्यों के सालाना बजट के बराबर है. यानी सिर्फ काम करने के तरीके में बदलाव से भारत हजारों करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचा सकता है।  प्रधानमंत्री मोदी ने बीती रात देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि पेट्रोल, डीजल और गैस का इस्तेमाल संयम के साथ करना समय की जरूरत है. उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान अपनाए गए वर्क फ्रॉम होम मॉडल का जिक्र करते हुए कहा कि जहां संभव हो, वहां कंपनियां और संस्थान घर से काम करने की व्यवस्था पर फिर से विचार करें. पीएम का संकेत साफ था कि ऊर्जा बचत अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आर्थिक रणनीति का हिस्सा बन चुकी है।  कोरोना काल में हो चुका है सफल प्रयोग कोरोना काल में भारत ने पहली बार बड़े स्तर पर देखा कि डिजिटल इकोनॉमी और रिमोट वर्किंग मॉडल कैसे लाखों लोगों के लिए प्रभावी साबित हो सकते हैं. आईटी, मीडिया, बैंकिंग, कंसल्टिंग और कई सर्विस सेक्टर कंपनियों ने बिना ऑफिस आए भी कामकाज जारी रखा. उस दौर में शहरों की सड़कों पर ट्रैफिक कम हुआ, प्रदूषण घटा और ईंधन की खपत में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई थी. अब सरकार उसी अनुभव को सीमित लेकिन रणनीतिक रूप में फिर अपनाने की बात कर रही है।  वर्क फ्रॉम होम का सबसे बड़ा फायदा केवल ईंधन बचत नहीं है. इससे ट्रैफिक जाम कम होंगे, सार्वजनिक परिवहन पर दबाव घटेगा और शहरों में प्रदूषण का स्तर नीचे आएगा. कर्मचारी रोज के सफर में खर्च होने वाला समय परिवार या उत्पादक काम में लगा सकेंगे. कंपनियों के लिए भी ऑफिस स्पेस, बिजली और ऑपरेशन कॉस्ट में कमी संभव है।  हाइब्रिड मॉडल में हो सकती करोड़ों नौकरियां हालांकि, यह मॉडल हर सेक्टर में लागू नहीं हो सकता. मैन्युफैक्चरिंग, परिवहन, रिटेल, हेल्थकेयर और फिजिकल सर्विस सेक्टर में कर्मचारियों की मौजूदगी जरूरी रहती है. लेकिन भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था में करोड़ों नौकरियां ऐसी हैं जिन्हें हाइब्रिड मॉडल में आसानी से चलाया जा सकता है।  विशेषज्ञों का मानना है कि अगर केंद्र सरकार कंपनियों को प्रोत्साहन दे, राज्यों के साथ मिलकर ग्रीन वर्क पॉलिसी जैसी पहल शुरू करे और बड़े शहरों में हाइब्रिड ऑफिस संस्कृति को बढ़ावा दिया जाए, तो भारत अपने तेल आयात बिल में बड़ी कमी ला सकता है. इससे चालू खाते के घाटे पर दबाव घटेगा और रुपया भी मजबूत हो सकता है।