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AAP के 50 विधायकों में टूट का डर, कांग्रेस ने किया बड़ा अलर्ट

चंडीगढ़   आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार को अरविंद केजरीवाल को बड़ा झटका दिया है। चड्ढा आम आदमी पार्टी के दो तिहाई राज्यसभा सांसदों को साथ लेकर भाजपा में शामिल होने वाले हैं। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पंजाब से लेकर नई दिल्ली तक उथल-पुथल मची हुई है। इसी बीच पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने आम आदमी पार्टी को सलाह दी है कि वह सचेत रहे, क्योंकि हो सकता है कि उसके 50 विधायक भी जल्दी ही भाजपा में शामिल हो जाएं। एएनआई से बात करते हुए पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने पैसा देखकर लोगों को राज्यसभा सीट दे दी। ऐसे में इन लोगों की कोई विचारधारा नहीं थी। ऐसे में ऐसा संभव था कि वह अलग होंगे, यह तो होना ही था। उन्होंने कहा, "पार्टी ने पैसा देखकर लोगों को राज्यसभा सांसद बना दिया। इनकी कोई विचारधारा तो थी नहीं। ऐसे में वह जैसे आए थे, वह वैसे ही चले गए। मुझे तो डर है कि ऐसे ही आम आदमी पार्टी के 50 विधायक भी न चले जाएं। यह तो केवल सांसद गए हैं। जब विचारधारा नहीं है, आप को लोग पैसा देखकर, इंडस्ट्री देखकर राज्यसभा सदस्य बनाओगे। और उनसे कई तरीके की मदद लोगे, तो यह होना ही था।" कार्यकर्ताओं को बनाना चाहिए था राज्यसभा सांसद: वारिंग कांग्रेस पंजाब सांसद ने कहा कि आम आदमी पार्टी को ऐसे लोगों को राज्यसभा भेजना चाहिए था, जिनकी विचारधारा पता थी। उन्हें कार्यकर्ताओं को यह सीट देनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, "जब भी पार्टी विचारधारा का व्यक्ति नहीं चुनती हैं, तो ऐसा ही होता है। वैसे भी इन राज्यसभा सांसदों की पंजाब में कोई कीमत नहीं है। ऐसा माल चाहें आम आदमी पार्टी के पास रहे, चाहें वह भाजपा के पास चला जाए। हमें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है।" यह अन्य पार्टियों के लिए सबक: वारिंग कांग्रेस पंजाब अध्यक्ष वारिंग ने कहा कि इस घटनाक्रम से अन्य पार्टियों को भी सबक लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब भी लोगों को बड़े पदों की जिम्मेदारियां दें, उसके पहले उनकी विचारधारा की जांच कर लें। अगर केवल पैसे वाले लोगों को ऐसे पद दिए जाएंगे, तो वह लोग छोड़कर भागेंगे ही। उन्होंने कहा, "कांग्रेस ने कभी भी ऐसे लोगों को राज्यसभा नहीं भेजा। कांग्रेस ने कार्यकर्ता को और विचारधारा से मेल खाने वाले व्यक्तियों को ही राज्यसभा भेजा है। इन राज्यसभा सांसदों को शामिल करके भाजपा यह न सोचे कि उन्होंने पंजाब फतह कर लिया है, क्योंकि इन सांसदों से वैसे भी पंजाब में नफरत ही थी।"

मायावती कर रहीं SIR के नफा-नुकसान का विश्लेषण, बसपा नई रणनीति के तहत कैंडिडेट का चयन कर रही है

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव की हलचल तेज हो गई है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव मिशन-2027 का बिगुल फूंक चुके हैं और एक के बाद एक चुनावी घोषणाएं भी शुरू कर दी है. बीजेपी भी सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए हरसंभव कोशिश में जुटी है और सीएम योगी भी सड़क पर उतरकर सपा-कांग्रेस को महिला विरोधी कठघरे में खड़े करने में जुटे हैं।  सपा और बीजेपी के बीच सिमटती यूपी की सियासत को बसपा प्रमुख मायावती त्रिकोणीय बनाने की कवायद में है, जिसके लिए पार्टी नेताओं के साथ लगातार बैठकें भी कर रही हैं. मायावती ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपने संभावित उम्मीदवारों के नाम का ऐलान भी शुरू कर दिया था, लेकिन अब एसआईआर प्रक्रिया के बाद उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया है।  2027 का चुनाव बसपा के लिए सियासी वजूद को बचाए रखने का है. यही वजह है कि मायावती सूबे में हुई एसआईआर अभियान से हुए फायदे और नुकसान का आकलन कर रही है, उसके लिहाज से पार्टी उम्मीदवारों का सेलेक्शन करेगी. इसके लिए मायावती ने काम भी शुरू कर दिया है. ऐसे में सवाल उठता है कि मायावती क्या बसपा को दोबारा से खड़ा कर पाएंगी?  बसपा कैंडिडेट सेलेक्शन में जुटी मायावती मायावती ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपनी चुनावी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है. मायावती के नेतृत्व में बसपा अपनी पुरानी सोशल इंजीनियरिंग को फिर से अपनाने की कोशिश में है. बसपा ने 2027 के लिए उम्मीदवारों के नाम का ऐलान शुरू कर दिया था. सूबे की 40-50 सीटों पर बसपा ने विधानसभा प्रभारी बनाकर  संभावित उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की हरी झंडी दे दी थी, लेकिन एसआईआर प्रक्रिया के बाद उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया है।  यूपी में हुए मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान से हुए फायदे-नुकसान का बसपा आकलन कर रही है. मायावती ने पिछले दिनों अपने 15 हजार बूथ कमेटियों से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है, जिसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी. बसपा ने एसआईआर अभियान में सक्रिय रूप से भाग लिया था ताकि उसके समर्थकों का नाम मतदाता सूची में बरकरार रहे. बसाप इसी आधार पर चुनावी रणनीति बनाएगी और 2027 के लिए प्रत्याशी चयन होगा।  एसआईआर के लिहाज से कैंडिडेट का चयन बसपा के एक बड़े नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पिछले दिनों लखनऊ में हुई बैठक में मायावती ने बूथ कमेटियों से रिपोर्ट मांगी है. एसआईआर अभियान में जिन पदाधिकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई, उन्हें टिकट चयन में तवज्जो दी जाएगी. खासकर जिलों में जिन संभावित प्रत्याशियों को प्रभारी बनाया गया था, उनके बारे में रिपोर्ट मिलने के बाद उनकी दावेदारी पर फैसला लिया जाएगा।  बसपा सुप्रीमो मायावती खुद इस मामले की गहनता से समीक्षा कर रही हैं. उन्होंने बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल से इस बाबत सभी जिलों से रिपोर्ट मंगाने को कहा है। खासकर पार्टी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या कम होने के बारे में बताने को कहा गया है ताकि जिनके नाम मतदाता सूची में शामिल होने से रह गए हैं, उनको आगे जुड़वाया जा सके।  कास्ट समीकरण से उम्मीदवारी पर मुहर मायावती के नेतृत्व में बसपा अपनी पुरानी सोशल इंजीनियरिंग को फिर से अपनाने की कोशिश में है. 2027 के लिए बसपा के कैंडिडेट सेलेक्शन के लिए सीट के समीकरण का भी आकलन किया जा रहा, खासकर जाति केमिस्ट्री देखी जा रही है. मायावती ने रणनीति बनाया है कि एसआईआर से सीट पर किस समाज के वोट घटे हैं और मौजूदा समय में किस समाज से वोट बढ़े हैं, उसके आकलन पर टिकट वितरण किया जा रहा।  बसपा ने मिशन-2027 के लिए प्लान बनाया है कि प्रत्येक विधानसभा सीट पर चार-चार दावेदारों का पैनल बनाकर उनको कसौटी पर परखा जा रहा है. इन्हीं में से एक को पहले विधानसभा क्षेत्र प्रभारी और बाद में प्रत्याशी घोषित कर दिया जाएगा. बसपा इस काम के लिए अपने वरिष्ठ नेताओं की एक पूरी टीम लगा रखी है,जिसमें पार्टी के मंडल और जोनल कोऑर्डिनेटर शामिल है।  मायावती अपने जोनल कोऑर्डिनेटर के जरिए सीट के जातीय समीकरण की रिपोर्ट लेती हैं और उसके बाद कैंडिडेट के चयन के लिए तय करती हैं कि किस जाति का होना चाहिए. इसके लिए जोनल कोऑर्डिनेटर को फिर उस जाति से उम्मीदवार के तलाश करने का टारगेट देती हैं. इसके बाद चार नाम का पैनल बनाकर दिया जाता है, जिसमें से मायावती किसी एक नाम को अपनी मंजूरी देती है. इसके बाद जोनल कोऑर्डिनेटर उसे प्रभारी बनाने के ऐलान करती हैं, जो चुनाव के समय प्रत्याशी होगा।  2007 के फार्मूले से 2027 जीतने का प्लान  उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव मायावती ने अकेले दम पर लड़ने का प्लान बनाया है. बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल साफ कहा कि बसपा इस बार पारंपरिक गठबंधनों से अलग राह पर चलेगी और समय से पहले कैंडिडेट घोषित कर दिए जाएंगे. प्देश अध्यक्ष का यह बयान बसपा की पुरानी 'सोशल इंजीनियरिंग' रणनीति की पुनर्वापसी का संकेत है,जिसके सहारे 2007 में पार्टी ने प्रचंड बहुमत हासिल किया था।  बसपा का फोकस मुस्लिम-ब्राह्मण-दलित समीकरण पर है. इस तरह आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बसपा संगठन और प्रत्याशियों का पैमाना तैयार किया है. ब्राह्मण और मुस्लिम कैंडिडेट को चुनावी मैदान में उतारकर और दलितों को संगठन के माध्यम से जोड़कर काम करने की योजना बनाई गई है. बसपा ने 2007 में इसी दांव से सत्ता पर काबिज हुई थी।  मायावती ने 2007 में परंपरागत दलित वोटों के साथ-साथ ब्राह्मण और मुस्लिम वोटरों को लेकर मैदान में उतरीं और इस सोशल इंजीनियरिंग ने विपक्षी दलों को चुनावी रण में धराशाई कर दिया. अब मायावती उसी फॉर्मूले को फिर आजमाना चाह रही हैं।  मायावती पिछले 3 महीने में हुई सभी बैठकों मैं यह बात कहती रही हैं कि ब्राह्मण-मुस्लिम और दलित गठजोड़ के साथ वह 2027 के विधानसभा चुनाव में जाएंगी और एक बार फिर से सत्ता में पूर्ण बहुमत के साथ वापसी करेंगी. अब लखनऊ से दिल्ली  वापस आ गई हैं, जहां से पश्चिमी यूपी के सियासी समीकरण को मजबूत करने की कवायद करेंगी?   

राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए कांग्रेस की रणनीति, कमलनाथ के नाम की चर्चा, और ये भी नाम हो सकते हैं उम्मीदवार

भोपाल  मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर कांग्रेस में गहन मंथन चल रहा है। आंकड़े के हिसाब से पार्टी भले ही मजबूत हो, लेकिन परिस्थितियां कुछ ओर ही बता रही हैं। ऐसे में दिल्ली दरबार कोई भी रिस्क लेने के मूड में नहीं है। उन्हें समझ आ रहा है कि कमलनाथ ही हैं जो कि सीट जीत कर दे सकते हैं। हालांकि राहुल गांधी की पहली पसंद मीनाक्षी नटराजन को ही बताया जा रहा है तो दिग्विजय सिंह चाहते हैं कि पीसी शर्मा को मौका दिया जाए। मध्यप्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं जिसके चुनाव होना हैं। विधायकों की संख्या के हिसाब से दो पर भाजपा की एक तरफा जीत होनी है तो तीसरी सीट के लिए 58 वोट चाहिए और कांग्रेस के पास कुल 66 वोट थे, लेकिन विधायक मुकेश मल्होत्रा को वोटिंग का अधिकार नहीं है तो दतिया विधायक राजेंद्र भारती भी संकट में है। गहन मंथन जारी इसके अलावा निर्मला सप्रे का वोट भी नहीं मिलेगा। इस गणित से 63 वोट ही बच रहे हैं जिससे रिस्क फेक्टर बड़ा हो गया। वहीं, हरियाणा में क्रॉस वोटिंग कराके भाजपा खेल कर चुकी है। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए कांग्रेस में प्रत्याशी को लेकर गहन मंथन चल रहा है। कांग्रेस सुप्रीमो व लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की पहली पसंद मीनाक्षी नटराजन है जो मध्य प्रदेश के मंदसौर से सांसद भी रह चुकी हैं और वर्तमान में मैनेजमेंट संभाल रही हैं।  रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में बदली हुई परिस्थितियों को देखते हुए पार्टी अपने वरिष्ठ नेता कमलनाथ को मैदान में उतार सकती है। उनके खड़े होने पर कांग्रेस का कोई भी विधायक क्रॉस वोटिंग नहीं कर पाएगा। तीसरी सीट फिर से पार्टी के खाते में आ जाएगी नहीं तो राज्यसभा से आकड़ा फिर कम हो जाएगा। इधर, एक समीकरण ये भी चल रहा है कि भाजपा अगर आदीवासी कार्ड खेलती है तो कमलनाथ खुद भी बाला बच्चन के नाम को आगे बढ़ा सकते हैं जिसके लिए वे खुद भी लॉबिंग कर सकते हैं। दिग्गी का पीसी शर्मा पर दांव वैसे तो राज्यसभा जाने के लिए कांग्रेस के कई नेता उत्साहित हैं। दलित कोटे से सज्जनसिंह वर्मा भी चाहते हैं कि उन्हें पार्टी मौका दे तो मौजूदा राज्यसभा सदस्य दिग्जिय सिंह ने पीसी शर्मा का नाम आगे किया जो कि कमलनाथ सरकार में मंत्री भी थे। वे ब्राह्मण समाज को उपकृत कर पार्टी की पकड़ को मजबूत होने का दावा कर रहे हैं। इधर, कमलेश्वर पटेल का नाम भी दावेदारों की सूची में दर्ज हो गया है। खींचतान में हो न जाए नुकसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बीच खींचतान जगजाहिर है। दोनों नेता एक-दूसरे को बिलकुल पसंद नहीं करते हैं। सिंघार की पटरी तो दिग्विजय सिंह से भी नहीं बैठती है, ये बात सिंह को भी समझ में आ गई थी। बड़ी बात ये है कि नाथ के आने पर पटवारी और सिंघार दोनों खुलकर मदद कर सकते हैं। उन्हें मालूम है कि नाथ सभी विधायकों से समन्वय बनाकर अपनी सीट को सुरक्षित कर लेंगे। ये भी हो सकता है कि भाजपा अपना प्रत्याशी भी नहीं उतारे।

‘झालमुड़ी खाई, मिर्ची TMC को लगी…’, पश्चिम बंगाल में बोले पीएम मोदी, तंज कसते हुए

कृष्णानगर  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर में एक जनसभा को संबोधित किया. यहां हुई विजय संकल्प सभा में पीएम मोदी ने टीएमसी सरकार और सीएम ममता बनर्जी पर हमला बोला और उनकी सरकार की नीतियों-नियमों की आलोचना की. जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने चुनावी माहौल पर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि झालमुड़ी मैंने खाई है, पर मिर्ची टीएमसी को लग रही है।  टीएमसी पर पीएम मोदी का निशाना असल में अभी हाल ही में पीएम मोदी ने पश्चिम बंगाल में झालमुड़ी खाई थी, जो चर्चा का विषय बन गई थी. इसी पर सीएम ममता ने पीएम पर निशाना साधते हुए कहा था कि 'यह कोरा नाटक था, झालमुड़ी की दुकान में माइक लगा दिया, फिर एसपीजी से झालमुड़ी बनवाई ताकि एक ड्रामा रचा जा सके! कभी चुनाव के समय वह गुफा में चले जाते हैं, कभी खुद को चायवाला बताते हैं! उन्होंने 10 रुपये निकालकर झालमुड़ी खाई, जरा सोचिए. वह झालमुड़ी पहले से ही उनके लिए तैयार की गई थी. अगर ऐसा नहीं था, तो दुकान के अंदर कैमरा क्यों लगाया गया था? उनसे पूछिए. सब ड्रामा है!' चार मई को मिठाई भी बंटेगी और झालमुड़ी भी पीएम मोदी ने ऐसी ही बयानों पर हमला बोलते हुए कहा कि चार मई को मिठाई भी बंटेगी और झालमुड़ी भी बांटी जाएगी. पीएम मोदी ने कहा कि, राज्य में पहले चरण की वोटिंग चल रही है और वह सभी मतदाताओं का अभिनंदन करते हैं. प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की कि इस बार मतदान का नया रिकॉर्ड बनाया जाना चाहिए।  पीएम मोदी ने चुनावी हिंसा के मुद्दे पर भी बात की. उन्होंने कहा कि पिछले 50 वर्षों में यह पहला चुनाव है, जिसमें हिंसा काफी कम देखने को मिली है. उन्होंने इसे चुनाव आयोग की बड़ी सफलता बताया।  अपने भाषण के दौरान पीएम मोदी ने स्थानीय संस्कृति का भी जिक्र किया और ‘झालमुरी’ को लेकर तंज कसते हुए कहा कि 4 मई को बंगाल में बीजेपी की जीत का जश्न मनाया जाएगा, जिसमें मिठाई भी बांटी जाएगी और झालमुरी भी. उन्होंने कहा कि “मैंने सुना है कि झालमुरी ने कुछ लोगों को झन्नाटेदार झटका दिया है. मैंने झालमुरी खाई है, लेकिन ‘झाल’ टीएमसी को लगा है।  प्रधानमंत्री के इस बयान को तृणमूल कांग्रेस पर सीधा हमला माना जा रहा है. रैली के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और पीएम मोदी ने एक बार फिर बंगाल में सत्ता परिवर्तन का भरोसा जताया। 

शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान: बंगाल में बदलाव नहीं हुआ तो सनातन धर्म खत्म हो जाएगा

कलकत्ता  पश्चिम बंगाल की 152 विधानसभा सीटों पर आज पहले चरण में मतदान चल रहा है। बंगाल में दो राउंड में वोटिंग होनी है और अगले राउंड का मतदान 29 अप्रैल को होगा। राज्य के नेता विपक्ष और भाजपा के सीनियर लीडर शुभेंदु अधिकारी ने भी मतदान किया और इस दौरान मीडिया वालों से बात करते हुए हिंदू कार्ड भी चल दिया। उन्होंने कहा कि इस बार परिवर्तन होगा। यही नहीं इसके आगे बोलते हुए उन्होंने कहा कि यदि बंगाल में इस बार बदलाव नहीं हुआ तो फिर सनातन बंगाल में खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग अच्छा काम कर रहे हैं। फिर भी हर जगह कुछ गुंडे घूम रहे हैं। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि हमारे पोलिंग एजेंट को ही अरेस्ट कर लिया गया है। इस मामले में सख्त ऐक्शन तुरंत लिया जाना चाहिए। शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में अपना वोट डाला। इस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग की ओर से किए इंतजामों की तारीफ की। उन्होंने जनता से बढ़-चढ़कर मतदान करने और शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि मैं शांतिपूर्ण मतदान की प्रार्थना करता हूं। मुझे उम्मीद है कि इस बार टीएमसी ज्यादा व्यवधान नहीं पहुंचा पाएगी। मतदान से पहले की रात बहुत महत्वपूर्ण होती है। हम चुनाव आयोग और केंद्रीय सुरक्षा बलों का धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने व्यवस्था को बनाए रखने में बड़ा सहयोग दिया। नंदीग्राम वही विधानसभा सीट है, जहां से 2021 में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराकर चुनाव जीता था। इस बार ममता बनर्जी ने भबानीपुर से चुनाव लड़ा है और शुभेंदु अधिकारी वहां से भी मैदान में उतरे हैं। उन्होंने एक बार फिर से यह संदेश देने की कोशिश की है कि ममता बनर्जी को वही टक्कर दे सकते हैं अथवा हरा भी सकते हैं। नंदीग्राम में पहले राउंड में ही मतदान हो रहा है तो वहीं भबानीपुर सीट पर दूसरे चरण में वोटिंग होगी। ममता का बांग्ला कार्ड बनाम भाजपा का हिंदू कार्ड भाजपा को उम्मीद है कि इस बार वह सत्ता हासिल कर सकती है। वहीं ममता बनर्जी लगातार बांग्ला कार्ड चल रही हैं, जबकि भाजपा हिंदू कार्ड के सहारे चुनावी वैतरणी पार करना चाहती है। पहले भी ममता बनर्जी बांग्ला कार्ड चलती रही हैं। इस बार उन्होंने यह आरोप मढ़ दिया है कि यदि भाजपा सत्ता में आई तो फिर बंगालियों का अंडा और मछली खाना मुश्किल हो जाएगा। इसके बाद से हालात ऐसे बन गए हैं कि भाजपा के नेता कई जगहों पर मछली खा रहे हैं और इसकी तस्वीरें जारी कर रहे हैं।

अमित शाह की भविष्यवाणी: तीन राज्यों में कांग्रेस को कितनी सीटें मिलेंगी, एक में जीरो की संभावना

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार करते हुए अमित शाह ने कांग्रेस को लेकर भी बड़ी भविष्यवाणी कर दी है। बंगाल की सत्ता पर काबिज होने का दावा करने वाली भाजपा के नेता ने कहा कि मैं राहुल गांधी को बताना चाहती हूं कि कांग्रेस यहां खाता भी नहीं खोल पाएगी। दमदम में एक रैली को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि मैं राहुल गांधी को बता दूं कि बंगाल में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल सकेगा। इसके अलावा उन्होंने दो और राज्यों तमिलनाडु और पुदुचेरी को लेकर भी कांग्रेस के बारे में भविष्यवाणी की। अमित शाह ने कहा कि पुदुचेरी और तमिलनाडु में कांग्रेस का आंकड़ा दहाई तक नहीं पहुंचेगा यानी वह 10 या उससे ज्यादा सीटें नहीं हासिल कर सकेगी। बंगाल के दमदम में अमित शाह ने वोटरों से देश के नाम वोट करने करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आप लोग अपना वोट घुसपैठिया मुक्त बंगाल के लिए करें। आप किसी विधायक या फिर भाजपा की सरकार बनाने के लिए मतदान ना करें बल्कि बंगाल को घुसपैठ से फ्री कराने के लिए वोट डालें। इस बीच पश्चिम बंगाल में पहले राउंड की वोटिंग की तैयारियां तेज हो गई हैं। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को मतदान स्थलों पर पहुंचाने की तैयारी चल रही है। इसके अलावा सुरक्षा के दस्ते भी लगातार मतदान स्थलों पर पहुंच रहे हैं। फिलहाल चुनाव में जुड़ा स्टाफ मतदान स्थलों पर जरूरी प्रक्रिया को पूरा करने में जुटा है। बरहमपुर की निर्वाचन अधिकारी रोशनी रॉय ने कहा कि सभी तैयारियां सही से चल रही हैं। उन्होंने कहा कि हमें सारी सामग्री मिल गई है। इस बार चुनाव पहले के मुकाबले थोड़ा अलग है और सख्ती भी ज्यादा रहेगी। लेकिन कोई समस्या नहीं है और सब कुछ अच्छे से चल रहा है। वहीं वरिष्ठ राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने बंगाल में इमरजेंसी जैसी हालत है। केंद्र सरकार की ओर से स्टेट मशीनरी का बेजा इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त के माध्यम से ही यह तय कराया जा रहा है कि बंगाल में भाजपा की जीत हो जाए। सिब्बल बोले- गुजरात से 5000 लोग बंगाल ला जा रहे इसके अलावा कपिल सिब्बल ने यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि वह तो नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बात को स्वामी विवेकानंद का बनाकर बोल देते हैं। उन्हें इतिहास और संविधान के बारे में कुछ पता ही नहीं है। उन्हें सिर्फ बुलडोजर जैसी चीजों के बारे में ही पता है। उन्होंने कहा कि भाजपा तो बाहर से चुनाव के लिए लोग ला रही है। सिब्बल ने कहा कि गुजरात से ही 5 हजार लोगों को बंगाल लाया गया है। इसके लिए स्पेशल ट्रेन ही चला दी गई है।

निर्मला सप्रे की विधायकी पर हाईकोर्ट का अहम फैसला, विधानसभा अध्यक्ष से सुनवाई की नई तारीख तय

जबलपुर  मध्य प्रदेश की राजनीति में दलबदल का मामला एक बार फिर गरमा गया है. बीना से विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई. यह मामला तब चर्चा में आया जब लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने वाली निर्मला सप्रे ने बीजेपी का हाथ थाम लिया था।  कांग्रेस नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सप्रे के इस कदम को गलत बताते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. सिंघार की याचिका में मांग की गई कि निर्मला सप्रे की विधायकी को तुरंत शून्य (रद्द) घोषित किया जाए. उनकी दलील है कि दल बदलने के बाद सप्रे को विधायक बने रहने का हक नहीं है।  हाईकोर्ट ने दी नई तारीख कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अपना पक्ष रखा. सरकार की तरफ से बताया गया कि 9 अप्रैल को विधानसभा अध्यक्ष के सामने इस मामले की सुनवाई होनी थी. लेकिन, प्रशासनिक व्यस्तता के चलते उस दिन सुनवाई नहीं हो सकी. इस आधार पर सरकार ने हाईकोर्ट से थोड़ा और वक्त मांगा. कोर्ट ने स्थिति को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष के सामने सुनवाई के लिए अब 22 अप्रैल की नई तारीख तय कर दी है।  खुद को बता दिया था कांग्रेसी पूरे विवाद में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया था, जब पिछली सुनवाई में निर्मला सप्रे ने खुद को ‘कांग्रेसी’ बताया था. उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में सबको हैरान कर दिया था, क्योंकि वह सार्वजनिक रूप से बीजेपी में शामिल हुई थीं. अब सवाल यह है कि अगर वह खुद को कांग्रेसी कह रही हैं, तो उनकी सदस्यता पर क्या असर पड़ेगा? हाईकोर्ट अब इस मामले पर 29 अप्रैल को अगली सुनवाई करेगा. तब तक यह देखना होगा कि 22 अप्रैल को विधानसभा अध्यक्ष के सामने होने वाली सुनवाई में क्या नतीजे निकलते हैं. क्या निर्मला सप्रे अपनी विधायकी बचा पाएंगी या उन्हें अपनी सदस्यता गंवानी पड़ेगी?

अरविंद केजरीवाल का बड़ा बयान—तमिलनाडु में M. K. Stalin का कोई विकल्प नहीं

चेन्नई आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चेन्नई में मीडिया से बातचीत करते हुए तमिलनाडु की राजनीति और मौजूदा हालात पर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने डीएमके और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की जमकर तारीफ की। केजरीवाल ने कहा कि स्टालिन और उनकी पार्टी हमेशा उनके साथ खड़ी रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले पांच सालों में तमिलनाडु में काफी विकास हुआ है और जब भी देश में कोई बड़ा मुद्दा सामने आता है, स्टालिन की आवाज राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठती है। उन्होंने तमिलनाडु की जनता से अपील की कि वे डीएमके गठबंधन का समर्थन करें। उन्होंने बताया कि सोमवार को उन्होंने और स्टालिन ने एक साथ रोड शो किया था, जिसे लोगों का जबरदस्त समर्थन मिला। उनके मुताबिक, स्टालिन एक बेहद लोकप्रिय नेता हैं और जनता उन्हें काफी पसंद करती है। स्टालिन और उनके रिश्ते भाई जैसे हैं और उनका समर्थन आगे भी जारी रहेगा। भाजपा पर निशाना साधते हुए केजरीवाल ने कहा कि तमिलनाडु के लोग भाजपा की राजनीति को पसंद नहीं करते, इसलिए पार्टी राज्य में अपनी जगह नहीं बना पाई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एआईएडीएमके पूरी तरह भाजपा के प्रभाव में है। केजरीवाल ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि लोग एनडीए को वोट नहीं देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भाजपा को एक भी सीट मिलती है, तो वह यहां सरकार बनाने की कोशिश करेगी और इससे राज्य में हो रहे अच्छे कामों पर असर पड़ सकता है। केजरीवाल ने भाजपा को सबसे भ्रष्ट पार्टी बताते हुए कहा कि दिल्ली में भी लोग भाजपा से जल्दी ही परेशान हो गए हैं। गुजरात का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां लंबे समय से भाजपा की सरकार है, लेकिन हालात अच्छे नहीं हैं। वहीं, उन्होंने साफ किया कि अब वे इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं। चेन्नई बहुत सुंदर शहर है और यहां के लोग स्टालिन के कामों की सराहना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब जनता खुश है, तो किसी विकल्प की जरूरत नहीं होती, हालांकि लोकतंत्र में हर किसी को चुनाव लड़ने का अधिकार है, इसलिए विजय का चुनाव लड़ना भी स्वाभाविक है। केजरीवाल ने तमिलनाडु की ब्रेकफास्ट योजना की भी सराहना की और इसे एक अच्छी पहल बताया। उन्होंने महिला आरक्षण को लेकर कहा कि यह असल में परिसीमन से जुड़ा मामला है, जो लोकतंत्र को प्रभावित कर सकता है, इसलिए उन्होंने इसका विरोध किया।

दिल्ली में पीएम मोदी से मिले सम्राट चौधरी, बिहार के विकास रोडमैप पर अहम चर्चा

नई दिल्ली बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ दिनों बाद सम्राट चौधरी ने मंगलवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिष्टाचार मुलाकात की। सीएम बनने के बाद पहली बार सम्राट चौधरी राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे और प्रधानमंत्री से मुलाकात की है। इस दौरान 'समृद्ध बिहार' पर चर्चा की गई। प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से इस मुलाकात की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी गई। पीएमओ की तरफ से पीएम मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बीच हुई मुलाकात की तस्वीरों को भी साझा किया गया है। वहीं, सम्राट चौधरी ने पीएम मोदी से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आज नई दिल्ली में शिष्टाचार मुलाकात की। 'विकसित भारत और समृद्ध बिहार' के विजन पर मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। प्रधानमंत्री का स्नेह एवं सहयोग बिहार की प्रगति को नई गति प्रदान कर रहा है।'' सूत्रों के मुताबिक, बिहार सीएम के इस दिल्ली दौरे के दौरान राज्य में होने वाले संभावित मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा हो सकती है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इसमें भाजपा कोटे से मंत्रियों के नामों पर अंतिम मुहर लग सकती है। वर्तमान में बिहार सरकार का मंत्रिमंडल अधूरा है और इसे जल्द से जल्द विस्तार देने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। राज्य में मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री ने ही शपथ ली थी। जनता दल (यूनाइटेड) की ओर से बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय चौधरी को डिप्टी सीएम बनाया गया, जबकि भाजपा कोटे से अभी तक किसी भी विधायक को मंत्री नहीं बनाया गया। बिहार में कुल 33 मंत्रियों का प्रावधान है, लेकिन अभी तक एक भी पूर्ण मंत्रिमंडल का गठन नहीं हो सका है। ऐसे में नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती जल्द से जल्द कैबिनेट का विस्तार कर राज्य के विकास को गति देना है। बता दें कि 24 अप्रैल को बिहार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है, जिसमें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सदन में विश्वास मत प्रस्ताव पेश करेंगे और अपनी सरकार के बहुमत को साबित करने की कोशिश करेंगे।

कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने PM मोदी को ‘आतंकवादी’ कहा, फिर सफाई दी

 चेन्नई कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी को आतंकवादी कह दिया. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा है कि मोदी आतंकवादी हैं और उनकी पार्टी बराबरी के सिद्धांत में विश्वास नहीं करती है. खड़गे ने कहा कि AIADMK लोकतंत्र को कमजोर कर रही है और पेरियार और आम्बेडकर के सिद्धांतों के खिलाफ काम कर रही है।  हालांकि बाद में खड़गे सफाई देते नजर आए. उन्होंने कहा कि, 'मैंने आतंकवादी नहीं कहा, मैंने कहा कि वे आतंकित कर रहे हैं।  कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने बाद में कहा कि वे यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि वे धमकाते हैं. उन्होंने कहा, "मैं यह स्पष्ट करना चाहता था कि मोदी हमेशा धमकाते हैं. मैंने आपको क्रम बताया था, IT, ED। सभी संस्थाएं उनके हाथों में हैं. मैंने कभी यह नहीं कहा कि वह एक आतंकवादी हैं. वह लोगों को आतंकित कर रहे हैं।  तमिलनाडु में चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चेन्नई में कहा कि मोदी और शाह ने पहले भी चुनी हुई सरकारों को गिराने की कोशिशें की हैं. आप जानते हैं, 11 सालों में उन्होंने कई सरकारें गिरायी, विधायकों को खरीदा, राज्यसभा सांसदों को खरीदा. इन लोगों ने धनबल और मसल पावर का इस्तेमाल किया. इनके हाथ में जो संस्थाएं हैं, जैसे कि CBI, ED, IT सभी संस्थानों का वे गलत प्रयोग कर रहे हैं और राजनीतिक दलों के नेताओं पर छापा मरवा रहे हैं।  चेन्नई में पत्रकारों को संबोधित करते हुए खड़गे ने AIADMK के प्रधानमंत्री के साथ हाथ मिलाने के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, 'वे (AIADMK) मोदी के साथ कैसे मिल सकते हैं? वह (मोदी) एक आतंकवादी हैं। और वह समानता में विश्वास नहीं रखते। उनकी पार्टी भी समानता और न्याय में विश्वास नहीं रखती। और ये लोग उनके साथ मिल रहे हैं, इसका मतलब है कि वे लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं।' खड़गे का मोदी सरकार पर आरोप कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “कश्मीर में 26 लोग इसलिए मारे गए क्योंकि मोदी सरकार ने वहां पर्यटकों को सुरक्षा मुहैया नहीं कराई। मोदी कश्मीर नहीं गए क्योंकि खुफिया एजेंसियों ने उन्हें ऐसा करने से मना किया था। आपने (केंद्र सरकार ने) पर्यटकों से वहां (पहलगाम) न जाने को क्यों नहीं कहा? अगर आपने उन्हें बताया होता तो 26 लोगों की जान बच सकती थी और यह छोटा सा युद्ध भी रुक सकता था।” विदेश नीति को लेकर भी खड़गे ने मोदी सरकार को घेरा मल्लिकार्जुन खड़गे ने विदेश नीति को लेकर भी मोदी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी पिछले 11 सालों से लगातार विदेश यात्राएं कर रहे हैं, लेकिन जब भारत को पाकिस्तान को बेनकाब करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन की जरूरत थी, तो कोई भी देश हमारा साथ देने के लिए आगे नहीं आया। पिछले 11 सालों में प्रधानमंत्री मोदी ने 151 विदेश यात्राएं की हैं और 72 देशों का दौरा किया है। इनमें से 10 बार उन्होंने अमेरिका का दौरा किया है। फिर भी मोदी सरकार की विदेश नीति के तहत हमारा देश अकेला खड़ा है। क्या प्रधानमंत्री का काम सिर्फ विदेश जाकर फोटो खिंचवाना है?” उमर अब्दुल्ला ने खीर भवानी मंदिर में की पूजा-अर्चना, जानें कश्मीरी पंडितों के लिए क्यों खास ये धार्मिक स्थल खड़गे ने कहा कि आईएमएफ ने पाकिस्तान को 1.4 बिलियन डॉलर का बेलआउट लोन दिया है लेकिन किसी ने भी भारत के रुख का समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा कि जब हमारे बहादुर सशस्त्र बल आतंकवादियों के खिलाफ अभियान चला रहे थे, तब अचानक सीजफायर की घोषणा कर दी गई।