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अमित शाह की भविष्यवाणी: तीन राज्यों में कांग्रेस को कितनी सीटें मिलेंगी, एक में जीरो की संभावना

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार करते हुए अमित शाह ने कांग्रेस को लेकर भी बड़ी भविष्यवाणी कर दी है। बंगाल की सत्ता पर काबिज होने का दावा करने वाली भाजपा के नेता ने कहा कि मैं राहुल गांधी को बताना चाहती हूं कि कांग्रेस यहां खाता भी नहीं खोल पाएगी। दमदम में एक रैली को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि मैं राहुल गांधी को बता दूं कि बंगाल में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल सकेगा। इसके अलावा उन्होंने दो और राज्यों तमिलनाडु और पुदुचेरी को लेकर भी कांग्रेस के बारे में भविष्यवाणी की। अमित शाह ने कहा कि पुदुचेरी और तमिलनाडु में कांग्रेस का आंकड़ा दहाई तक नहीं पहुंचेगा यानी वह 10 या उससे ज्यादा सीटें नहीं हासिल कर सकेगी। बंगाल के दमदम में अमित शाह ने वोटरों से देश के नाम वोट करने करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आप लोग अपना वोट घुसपैठिया मुक्त बंगाल के लिए करें। आप किसी विधायक या फिर भाजपा की सरकार बनाने के लिए मतदान ना करें बल्कि बंगाल को घुसपैठ से फ्री कराने के लिए वोट डालें। इस बीच पश्चिम बंगाल में पहले राउंड की वोटिंग की तैयारियां तेज हो गई हैं। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को मतदान स्थलों पर पहुंचाने की तैयारी चल रही है। इसके अलावा सुरक्षा के दस्ते भी लगातार मतदान स्थलों पर पहुंच रहे हैं। फिलहाल चुनाव में जुड़ा स्टाफ मतदान स्थलों पर जरूरी प्रक्रिया को पूरा करने में जुटा है। बरहमपुर की निर्वाचन अधिकारी रोशनी रॉय ने कहा कि सभी तैयारियां सही से चल रही हैं। उन्होंने कहा कि हमें सारी सामग्री मिल गई है। इस बार चुनाव पहले के मुकाबले थोड़ा अलग है और सख्ती भी ज्यादा रहेगी। लेकिन कोई समस्या नहीं है और सब कुछ अच्छे से चल रहा है। वहीं वरिष्ठ राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने बंगाल में इमरजेंसी जैसी हालत है। केंद्र सरकार की ओर से स्टेट मशीनरी का बेजा इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त के माध्यम से ही यह तय कराया जा रहा है कि बंगाल में भाजपा की जीत हो जाए। सिब्बल बोले- गुजरात से 5000 लोग बंगाल ला जा रहे इसके अलावा कपिल सिब्बल ने यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि वह तो नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बात को स्वामी विवेकानंद का बनाकर बोल देते हैं। उन्हें इतिहास और संविधान के बारे में कुछ पता ही नहीं है। उन्हें सिर्फ बुलडोजर जैसी चीजों के बारे में ही पता है। उन्होंने कहा कि भाजपा तो बाहर से चुनाव के लिए लोग ला रही है। सिब्बल ने कहा कि गुजरात से ही 5 हजार लोगों को बंगाल लाया गया है। इसके लिए स्पेशल ट्रेन ही चला दी गई है।

निर्मला सप्रे की विधायकी पर हाईकोर्ट का अहम फैसला, विधानसभा अध्यक्ष से सुनवाई की नई तारीख तय

जबलपुर  मध्य प्रदेश की राजनीति में दलबदल का मामला एक बार फिर गरमा गया है. बीना से विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई. यह मामला तब चर्चा में आया जब लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने वाली निर्मला सप्रे ने बीजेपी का हाथ थाम लिया था।  कांग्रेस नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सप्रे के इस कदम को गलत बताते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. सिंघार की याचिका में मांग की गई कि निर्मला सप्रे की विधायकी को तुरंत शून्य (रद्द) घोषित किया जाए. उनकी दलील है कि दल बदलने के बाद सप्रे को विधायक बने रहने का हक नहीं है।  हाईकोर्ट ने दी नई तारीख कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अपना पक्ष रखा. सरकार की तरफ से बताया गया कि 9 अप्रैल को विधानसभा अध्यक्ष के सामने इस मामले की सुनवाई होनी थी. लेकिन, प्रशासनिक व्यस्तता के चलते उस दिन सुनवाई नहीं हो सकी. इस आधार पर सरकार ने हाईकोर्ट से थोड़ा और वक्त मांगा. कोर्ट ने स्थिति को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष के सामने सुनवाई के लिए अब 22 अप्रैल की नई तारीख तय कर दी है।  खुद को बता दिया था कांग्रेसी पूरे विवाद में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया था, जब पिछली सुनवाई में निर्मला सप्रे ने खुद को ‘कांग्रेसी’ बताया था. उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में सबको हैरान कर दिया था, क्योंकि वह सार्वजनिक रूप से बीजेपी में शामिल हुई थीं. अब सवाल यह है कि अगर वह खुद को कांग्रेसी कह रही हैं, तो उनकी सदस्यता पर क्या असर पड़ेगा? हाईकोर्ट अब इस मामले पर 29 अप्रैल को अगली सुनवाई करेगा. तब तक यह देखना होगा कि 22 अप्रैल को विधानसभा अध्यक्ष के सामने होने वाली सुनवाई में क्या नतीजे निकलते हैं. क्या निर्मला सप्रे अपनी विधायकी बचा पाएंगी या उन्हें अपनी सदस्यता गंवानी पड़ेगी?

अरविंद केजरीवाल का बड़ा बयान—तमिलनाडु में M. K. Stalin का कोई विकल्प नहीं

चेन्नई आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चेन्नई में मीडिया से बातचीत करते हुए तमिलनाडु की राजनीति और मौजूदा हालात पर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने डीएमके और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की जमकर तारीफ की। केजरीवाल ने कहा कि स्टालिन और उनकी पार्टी हमेशा उनके साथ खड़ी रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले पांच सालों में तमिलनाडु में काफी विकास हुआ है और जब भी देश में कोई बड़ा मुद्दा सामने आता है, स्टालिन की आवाज राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठती है। उन्होंने तमिलनाडु की जनता से अपील की कि वे डीएमके गठबंधन का समर्थन करें। उन्होंने बताया कि सोमवार को उन्होंने और स्टालिन ने एक साथ रोड शो किया था, जिसे लोगों का जबरदस्त समर्थन मिला। उनके मुताबिक, स्टालिन एक बेहद लोकप्रिय नेता हैं और जनता उन्हें काफी पसंद करती है। स्टालिन और उनके रिश्ते भाई जैसे हैं और उनका समर्थन आगे भी जारी रहेगा। भाजपा पर निशाना साधते हुए केजरीवाल ने कहा कि तमिलनाडु के लोग भाजपा की राजनीति को पसंद नहीं करते, इसलिए पार्टी राज्य में अपनी जगह नहीं बना पाई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एआईएडीएमके पूरी तरह भाजपा के प्रभाव में है। केजरीवाल ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि लोग एनडीए को वोट नहीं देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भाजपा को एक भी सीट मिलती है, तो वह यहां सरकार बनाने की कोशिश करेगी और इससे राज्य में हो रहे अच्छे कामों पर असर पड़ सकता है। केजरीवाल ने भाजपा को सबसे भ्रष्ट पार्टी बताते हुए कहा कि दिल्ली में भी लोग भाजपा से जल्दी ही परेशान हो गए हैं। गुजरात का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां लंबे समय से भाजपा की सरकार है, लेकिन हालात अच्छे नहीं हैं। वहीं, उन्होंने साफ किया कि अब वे इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं। चेन्नई बहुत सुंदर शहर है और यहां के लोग स्टालिन के कामों की सराहना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब जनता खुश है, तो किसी विकल्प की जरूरत नहीं होती, हालांकि लोकतंत्र में हर किसी को चुनाव लड़ने का अधिकार है, इसलिए विजय का चुनाव लड़ना भी स्वाभाविक है। केजरीवाल ने तमिलनाडु की ब्रेकफास्ट योजना की भी सराहना की और इसे एक अच्छी पहल बताया। उन्होंने महिला आरक्षण को लेकर कहा कि यह असल में परिसीमन से जुड़ा मामला है, जो लोकतंत्र को प्रभावित कर सकता है, इसलिए उन्होंने इसका विरोध किया।

दिल्ली में पीएम मोदी से मिले सम्राट चौधरी, बिहार के विकास रोडमैप पर अहम चर्चा

नई दिल्ली बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ दिनों बाद सम्राट चौधरी ने मंगलवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिष्टाचार मुलाकात की। सीएम बनने के बाद पहली बार सम्राट चौधरी राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे और प्रधानमंत्री से मुलाकात की है। इस दौरान 'समृद्ध बिहार' पर चर्चा की गई। प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से इस मुलाकात की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी गई। पीएमओ की तरफ से पीएम मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बीच हुई मुलाकात की तस्वीरों को भी साझा किया गया है। वहीं, सम्राट चौधरी ने पीएम मोदी से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आज नई दिल्ली में शिष्टाचार मुलाकात की। 'विकसित भारत और समृद्ध बिहार' के विजन पर मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। प्रधानमंत्री का स्नेह एवं सहयोग बिहार की प्रगति को नई गति प्रदान कर रहा है।'' सूत्रों के मुताबिक, बिहार सीएम के इस दिल्ली दौरे के दौरान राज्य में होने वाले संभावित मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा हो सकती है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इसमें भाजपा कोटे से मंत्रियों के नामों पर अंतिम मुहर लग सकती है। वर्तमान में बिहार सरकार का मंत्रिमंडल अधूरा है और इसे जल्द से जल्द विस्तार देने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। राज्य में मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री ने ही शपथ ली थी। जनता दल (यूनाइटेड) की ओर से बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय चौधरी को डिप्टी सीएम बनाया गया, जबकि भाजपा कोटे से अभी तक किसी भी विधायक को मंत्री नहीं बनाया गया। बिहार में कुल 33 मंत्रियों का प्रावधान है, लेकिन अभी तक एक भी पूर्ण मंत्रिमंडल का गठन नहीं हो सका है। ऐसे में नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती जल्द से जल्द कैबिनेट का विस्तार कर राज्य के विकास को गति देना है। बता दें कि 24 अप्रैल को बिहार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है, जिसमें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सदन में विश्वास मत प्रस्ताव पेश करेंगे और अपनी सरकार के बहुमत को साबित करने की कोशिश करेंगे।

कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने PM मोदी को ‘आतंकवादी’ कहा, फिर सफाई दी

 चेन्नई कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी को आतंकवादी कह दिया. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा है कि मोदी आतंकवादी हैं और उनकी पार्टी बराबरी के सिद्धांत में विश्वास नहीं करती है. खड़गे ने कहा कि AIADMK लोकतंत्र को कमजोर कर रही है और पेरियार और आम्बेडकर के सिद्धांतों के खिलाफ काम कर रही है।  हालांकि बाद में खड़गे सफाई देते नजर आए. उन्होंने कहा कि, 'मैंने आतंकवादी नहीं कहा, मैंने कहा कि वे आतंकित कर रहे हैं।  कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने बाद में कहा कि वे यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि वे धमकाते हैं. उन्होंने कहा, "मैं यह स्पष्ट करना चाहता था कि मोदी हमेशा धमकाते हैं. मैंने आपको क्रम बताया था, IT, ED। सभी संस्थाएं उनके हाथों में हैं. मैंने कभी यह नहीं कहा कि वह एक आतंकवादी हैं. वह लोगों को आतंकित कर रहे हैं।  तमिलनाडु में चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चेन्नई में कहा कि मोदी और शाह ने पहले भी चुनी हुई सरकारों को गिराने की कोशिशें की हैं. आप जानते हैं, 11 सालों में उन्होंने कई सरकारें गिरायी, विधायकों को खरीदा, राज्यसभा सांसदों को खरीदा. इन लोगों ने धनबल और मसल पावर का इस्तेमाल किया. इनके हाथ में जो संस्थाएं हैं, जैसे कि CBI, ED, IT सभी संस्थानों का वे गलत प्रयोग कर रहे हैं और राजनीतिक दलों के नेताओं पर छापा मरवा रहे हैं।  चेन्नई में पत्रकारों को संबोधित करते हुए खड़गे ने AIADMK के प्रधानमंत्री के साथ हाथ मिलाने के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, 'वे (AIADMK) मोदी के साथ कैसे मिल सकते हैं? वह (मोदी) एक आतंकवादी हैं। और वह समानता में विश्वास नहीं रखते। उनकी पार्टी भी समानता और न्याय में विश्वास नहीं रखती। और ये लोग उनके साथ मिल रहे हैं, इसका मतलब है कि वे लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं।' खड़गे का मोदी सरकार पर आरोप कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “कश्मीर में 26 लोग इसलिए मारे गए क्योंकि मोदी सरकार ने वहां पर्यटकों को सुरक्षा मुहैया नहीं कराई। मोदी कश्मीर नहीं गए क्योंकि खुफिया एजेंसियों ने उन्हें ऐसा करने से मना किया था। आपने (केंद्र सरकार ने) पर्यटकों से वहां (पहलगाम) न जाने को क्यों नहीं कहा? अगर आपने उन्हें बताया होता तो 26 लोगों की जान बच सकती थी और यह छोटा सा युद्ध भी रुक सकता था।” विदेश नीति को लेकर भी खड़गे ने मोदी सरकार को घेरा मल्लिकार्जुन खड़गे ने विदेश नीति को लेकर भी मोदी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी पिछले 11 सालों से लगातार विदेश यात्राएं कर रहे हैं, लेकिन जब भारत को पाकिस्तान को बेनकाब करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन की जरूरत थी, तो कोई भी देश हमारा साथ देने के लिए आगे नहीं आया। पिछले 11 सालों में प्रधानमंत्री मोदी ने 151 विदेश यात्राएं की हैं और 72 देशों का दौरा किया है। इनमें से 10 बार उन्होंने अमेरिका का दौरा किया है। फिर भी मोदी सरकार की विदेश नीति के तहत हमारा देश अकेला खड़ा है। क्या प्रधानमंत्री का काम सिर्फ विदेश जाकर फोटो खिंचवाना है?” उमर अब्दुल्ला ने खीर भवानी मंदिर में की पूजा-अर्चना, जानें कश्मीरी पंडितों के लिए क्यों खास ये धार्मिक स्थल खड़गे ने कहा कि आईएमएफ ने पाकिस्तान को 1.4 बिलियन डॉलर का बेलआउट लोन दिया है लेकिन किसी ने भी भारत के रुख का समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा कि जब हमारे बहादुर सशस्त्र बल आतंकवादियों के खिलाफ अभियान चला रहे थे, तब अचानक सीजफायर की घोषणा कर दी गई।

तेज प्रताप यादव का बयान: ‘राहुल गांधी को मीट-मुर्गा बनाएं, प्रियंका ही INDIA ब्लॉक की नेता बनें’

 पटना बिहार सरकार में पूर्व मंत्री और जनशक्ति जनता दल के संस्थापक तेज प्रताप यादव ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के INDIA ब्लॉक का चेहरा बनने की अटकलों के बारे में पूछे जाने पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने इस दौरान कांग्रेस सांसद और लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना भी साधा।  बिहार की राजनीति पर राहुल गांधी के हालिया बयान पर तेज प्रताप यादव ने कहा, "राहुल गांधी इसी सब चीज में फंसे रहेंगे. शुरू से तो बुलेट चलाते हुए उनको शौक नहीं पूरा हुआ. अब इनको कुर्सी पर बैठने का लालच हो गया है. लालचपंती से दूर रहें. और वो जो अपना कुकिंग कर रहे थे, मीट-मुर्गा बना रहे थे, वही बनाते रहें।  उन्होंने आगे कहा कि प्रियंका गांधी ही चला सकती हैं. वे इंदिरा जी की तरह हैं, वही चला सकती हैं. राहुल गांधी से चलने वाला नहीं है।  बिहार की गद्दी पर बैठना है क्या?' तेज प्रताप यादव ने कहा, "यात्रा लगा लेने से, बुलेट पर बैठ जाने से और एक-दूसरे पर आरोप लगाने से कुछ नहीं होगा. अब नीतीश कुमार जी के बारे में बोल रहे हैं. नीतीश जी छोड़कर गए, दूसरे आदमी आए और सीएम बने. ये दूसरे राज्य में हैं, इनको क्यों लालचपंती लग रहा है. इनको बिहार की गद्दी पर बैठना है क्या।  राहुल ने नीतीश पर क्या कहा था? कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा, जिन्होंने पिछले हफ़्ते मुख्यमंत्री पद इस्तीफ़ा दे दिया था. राहुल गांधी ने उन्हें 'कॉम्प्रोमाइज्ड' बताया और आरोप लगाया कि JD(U) प्रमुख के पिछले कामों की वजह से बीजेपी उन पर पूरी तरह से कंट्रोल कर पा रही है।  राहुल गांधी ने नीतीश पर यह हमला तब किया, जब कांग्रेस नेता तमिलनाडु के थूथुकुडी में एक चुनावी रैली में बोल रहे थे. गौर करने वाली बात है कि नीतीश कुमार अब राज्यसभा सांसद हैं।  राहुल गांधी ने नीतीश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा, "बीजेपी नीतीश को मुख्यमंत्री पद से इसलिए हटा पाई, क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री किसी दबाव में थे और राज्यसभा भेजे जाने के बाद उन्होंने एक शब्द भी नहीं बोला. बिहार के सबसे लंबे वक्त तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश ने 14 अप्रैल को इस्तीफा दे दिया था।  JD(U) नेता का नाम लिए बिना, कांग्रेस नेता ने कहा, "ज़रा देखिए कि हाल ही में बिहार में क्या हुआ है. मुख्यमंत्री को हटा दिया गया है और उनकी जगह एक बीजेपी नेता को बैठा दिया गया है. ऐसा क्यों? क्योंकि बिहार के मुख्यमंत्री किसी दबाव में हैं. उन्होंने एक शब्द भी नहीं बोला और चुपचाप राज्यसभा चले गए।  बिहार का उदाहरण देते हुए, राहुल ने तमिलनाडु के लिए भी वैसी ही चिंता जताई और कहा कि बीजेपी एक ऐसी राज्य सरकार चाहती है, जिस पर वह पूरी तरह से अपना कंट्रोल रख सके।  राहुल ने आगे कहा, “उनके (नीतीश) पिछले कामों की वजह से बीजेपी उन्हें पूरी तरह से अपने काबू में कर पाई. वे (बीजेपी) यहां तमिलनाडु में भी यही करना चाहते हैं. वे ऐसी सरकार चाहते हैं, जिस पर उनका पूरा कंट्रोल हो. वे ऐसा मुख्यमंत्री चाहते हैं, जो ठीक वही करे जो वे कहें. और ऐसा हम उन्हें कभी भी नहीं करने देंगे। 

सपा सरकार का वादा: अखिलेश यादव ने कहा- 300 यूनिट बिजली फ्री और महिलाओं को 40 हजार पेंशन

 लखनऊ सपा मुखिया अखिलेश यादव ने लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में बुंदेलखंड और अन्य जिलों से आए कार्यकर्ताओं के बीच भविष्य की योजनाओं का खुलासा किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार आने पर उपभोक्ताओं को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जाएगी. इसके साथ ही, महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम उठाते हुए उन्होंने सालाना 40 हजार रुपये पेंशन देने का वादा भी किया. अखिलेश यादव ने वर्तमान सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए स्मार्ट मीटर और बढ़ती महंगाई को मुख्य मुद्दा बनाया, जिससे आम जनता त्रस्त है।  स्मार्ट मीटर और बिजली बिल पर साधा निशाना अखिलेश यादव ने बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर के नाम पर उपभोक्ताओं का शोषण किया जा रहा है और बिलों में बेतहाशा बढ़ोतरी हो रही है।  सपा मुखिया ने दावा किया कि बिजली कंपनियों से एडवांस कमीशन लेने के कारण आम लोगों से अधिक वसूली की जा रही है, जिससे जनता में भारी गुस्सा है।  खाद की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रहार पार्टी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं से बातचीत के दौरान उन्होंने खाद की कमी और बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं का मुद्दा भी उठाया. अखिलेश ने कहा कि प्रदेश की जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रही है. उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट होने की अपील की ताकि 2027 में बदलाव लाया जा सके और समाजवादी नीतियों के जरिए महंगाई व भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सके। 

कांग्रेस के कई जिला अध्यक्षों की बढ़ी मुश्किलें, दिग्गज नेताओं की कुर्सी पर मंडराया खतरा

भोपाल  मध्यप्रदेश कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की आहट तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अब जिला अध्यक्षों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट के आधार पर सख्त फैसले की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक 9 से ज्यादा जिला अध्यक्षों की छुट्टी लगभग तय मानी जा रही है। खास बात यह है कि जिन नेताओं से संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने और जनता के बीच पार्टी की पकड़ बढ़ाने की उम्मीद की गई थी, वे उसी कसौटी पर खरे नहीं उतर सके। बताया जा रहा है कि कई ऐसे जिला अध्यक्ष भी डेंजर जोन में हैं, जिन्हें सीधे राहुल गांधी की सहमति से जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन संगठन विस्तार, कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और जमीनी सक्रियता के मामले में उनकी रिपोर्ट बेहद कमजोर पाई गई। यही वजह है कि अब कांग्रेस नेतृत्व किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं दिख रहा। सूत्रों के अनुसार डिंडोरी जिला अध्यक्ष ओमकार सिंह मरकाम, सतना ग्रामीण के सिद्धार्थ कुशवाह, मंडला के अशोक मर्सकोले समेत ग्वालियर ग्रामीण, रतलाम शहर, मंदसौर, अनूपपुर, दतिया, रीवा ग्रामीण, मऊगंज और आगर मालवा के जिला अध्यक्षों की रिपोर्ट खराब बताई जा रही है। हालांकि कुछ जिलाध्यक्ष जातिगत और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के कारण राहत पा सकते हैं। करीब 8 महीने पहले संगठन सृजन अभियान के तहत इन जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की गई थी। उद्देश्य था कि बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत किया जाए, कांग्रेस की गतिविधियों को तेज किया जाए और जनता के मुद्दों पर लगातार संघर्ष किया जाए। लेकिन कई जिलों में अपेक्षित काम नहीं हुआ। AICC की ओर से वामसी चंद रेड्डी को समीक्षा के लिए भेजा गया था। उन्होंने चार दिनों तक वन-टू-वन चर्चा कर जिला अध्यक्षों की रिपोर्ट तैयार की। इस दौरान संगठन की मजबूती, ब्लॉक-मंडलम-पंचायत और वार्ड समितियों के गठन, AICC और PCC के कार्यक्रमों के क्रियान्वयन, प्रेस कॉन्फ्रेंस, धरना-प्रदर्शन, जिला कार्यकारिणी बैठकों और कनेक्ट सेंटर को रिपोर्टिंग जैसे कई बिंदुओं पर सवाल पूछे गए। जानकारी के मुताबिक डिंडोरी के ओमकार सिंह मरकाम और रतलाम ग्रामीण के सिद्धार्थ कुशवाहा ने तो अपने कामकाज की रिपोर्ट तक कनेक्ट सेंटर को नहीं भेजी, जिससे उनकी स्थिति और कमजोर मानी जा रही है। प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि जिन नेताओं को संगठन की नई ऊर्जा बनने के लिए जिम्मेदारी दी गई थी, वे अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे। अब पार्टी ऐसे चेहरों को हटाकर नए और सक्रिय नेतृत्व को मौका देने के पक्ष में नजर आ रही है। आने वाले दिनों में इस पर बड़ा फैसला सामने आ सकता है, जिससे प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में हलचल और तेज होना तय है।  

एमपी कांग्रेस में फिर से संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया, ओंकार और सिद्धार्थ समेत कई जिलाध्यक्षों की बारी

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) संगठन में बड़े फेरबदल की तैयारी में है। पार्टी के भीतर 'शौक' के लिए पद पर काबिज नेताओं और निष्क्रिय पदाधिकारियों के खिलाफ अब सख्त रुख अपनाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के 71 जिला अध्यक्षों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड तैयार हो चुका है, संगठन सृजन अभियान की लंबी प्रक्रिया के बाद एमपी में बनाए गए कांग्रेस के जिलाध्यक्षों में कई दिग्गज उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की ओर से एमपी भेजे गए वामसी रेड्‌डी की समीक्षा में करीब 12 जिला अध्यक्षों की रिपोर्ट चिंताजनक पाई गई है। अब एआईसीसी यानी राष्ट्रीय नेतृत्व को जिलाध्यक्षों की रिव्यू रिपोर्ट भेजी जाएगी। दिल्ली की हरी झंडी मिलने के बाद पुअर परफॉरमेंस वाले जिला अध्यक्षों को हटाया जा सकता है। बडे़ नेता भी जिलाध्यक्ष के तौर पर कमजोर साबित हुए पार्टी सूत्रों की मानें तो जिन जिला अध्यक्षों की रिपोर्ट रिव्यू में कमजोर मिली है। उनमें सीनियर लीडर भी बतौर जिलाध्यक्ष फेल साबित हुए हैं। पूर्व मंत्री और कांग्रेस की सेंट्रल इलेक्शन कमेटी (CEC) के मेंबर ओमकार सिंह मरकाम(जिलाध्यक्ष डिंडोरी) , सतना विधायक और ओबीसी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाह(जिलाध्यक्ष सतना), मंडला के पूर्व विधायक डॉ अशोक मर्सकोले(जिलाध्यक्ष मंडला) जैसे नेता भी जिलों में अपेक्षा पर खरे नहीं उतरे। इंदौर शहर अध्यक्ष को भी बदला जा सकता है कांग्रेस के सूत्र बताते हैं कि पार्टी आलाकमान इंदौर के शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे के निर्णयों और बयानों से संगठन नाराज है। दिग्विजय सिंह के इंदौर में एक प्रदर्शन को लेकर चिंटू चौकसे ने बयान दिया था। पार्षदों के वंदे मातरम विवाद पर पार्टी आलाकमान से चर्चा किए बिना की गई बयानबाजी के बाद अब इंदौर में शहर अध्यक्ष को बदला जा सकता है। आठ महीने पहले हुई थी जिलाध्यक्षों की नियुक्ति पिछले साल जून 2025 में भोपाल में राहुल गांधी ने संगठन सृजन अभियान की शुरुआत की थी। करीब दो महीनों के लंबे मंथन और बैठकों के बाद जिला अध्यचों के नाम तय किए गए थे। अब सिर्फ पद नहीं, काम जरूरी बैठक में ब्लॉक अध्यक्षों को साफ शब्दों में संदेश दिया गया कि अब जिम्मेदारी मिलने का मतलब केवल पद संभालना नहीं, बल्कि सक्रिय रूप से काम करना है। उन्हें निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में मंडल, ब्लॉक, गांव और वार्ड स्तर तक संगठन का मजबूत ढांचा खड़ा करें और हर स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय बनाएं। नेताओं ने यह भी कहा कि अब केवल कागजों पर कमेटियां बनाकर सूची भेजना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि हर नियुक्ति और हर इकाई का फिजिकल वेरिफिकेशन किया जाएगा। यदि कोई पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारी से अनजान पाया गया, तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।  परफॉर्मेंस पर टिकेगा भविष्य, समीक्षा तय बैठक में संगठन के भीतर जवाबदेही तय करने पर विशेष जोर दिया गया। जिला अध्यक्षों के काम का मूल्यांकन पहले से जारी है। ब्लॉक अध्यक्षों के काम की भी छह महीने बाद समीक्षा की जाएगी। इससे साफ संकेत मिला कि आने वाले समय में संगठन में परफॉर्मेंस बेस्ड सिस्टम लागू होगा, जहां सक्रिय और काम करने वाले नेताओं को ही आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। जन संवाद के जरिए जनता से सीधा संपर्क बढ़ाने की रणनीति संगठन प्रभारी संजय कामले ने कहा कि अब हर ब्लॉक स्तर पर जन संवाद कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए कि वे रोजाना लोगों से मिलें, उनकी समस्याएं सुनें और उन्हें पार्टी की विचारधारा से जोड़ें। नेताओं का मानना है कि जनता से सीधा संवाद ही संगठन को मजबूत करने का सबसे प्रभावी तरीका है और इससे पार्टी की पकड़ फिर से मजबूत होगी।   2028 चुनाव को ध्यान में रखकर तैयार हो रहा संगठन पूरे सम्मेलन में यह साफ दिखा कि कांग्रेस अब 2023 की हार के बाद संगठन को दोबारा मजबूत करने में जुटी है। ब्लॉक स्तर से लेकर बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए मजबूत आधार तैयार करने की कोशिश की जा रही है। हर परिवार से 100 रुपए लेने का प्रस्ताव भी चर्चा में बैठक के दौरान एक अहम प्रस्ताव यह भी सामने आया कि हर विधानसभा क्षेत्र में प्रत्येक परिवार से 100 रुपए सहयोग राशि ली जाए। इस राशि को जिला और ब्लॉक स्तर पर ही खर्च किया जाएगा, ताकि संगठन को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सके और स्थानीय स्तर पर गतिविधियां तेज हो सकें। नेताओं का मानना है कि इससे न केवल संसाधन जुटेंगे, बल्कि आम लोगों के साथ पार्टी का सीधा जुड़ाव भी बढ़ेगा। 

BJP चुनावी मोड में, MP की 70 कमजोर सीटों पर मंत्रियों की तैनाती, रणनीति में बड़ा बदलाव

भोपाल मध्य प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी अभी से सक्रिय हो गई है। पार्टी ने साल 2026 में ही खुद की मजबूती और मैदानी रणनीती के लिए काम करना शुरु कर दिया है।दरअसल विधानसभा की सभी 230 सीटें जीतने का लक्ष्य तय करके भाजपा ने मिशन 2028 के लिए रणनीति बनाई है। इस रणनीति के तहत भाजपा कमजोर सीटों पर सबसे अधिक फोकस करने वाली है।  रणनीति के तहत करीब 70 सीटों को चिह्नित करके भाजपा ने जहां संगठनात्मक गतिविधियों को बढ़ा दिया है, वहीं यहां मंत्रियों को भी मैदान में उतारने की फैसला भाजपा ने कर लिया है। कमजोर सीटों पर भाजपा को मजबूत करने की जिम्मेदारी मंत्रियों पर जानकारी के मुताबिक पार्टी की रणनीति कमजोर सीटों पर भाजपा को मजबूत करने की है और इसके लिए मंत्रियों को जिम्मा सौंप दिया है। मंत्रियों को लगातार वहां पर रात बिताने के साथ ही बैठकें करने का निर्देश दिया गया है।साथ ही  हार के कारणों को तलाशने का भी जिम्मा सौंपा गया है। भाजपा इस काम में निकाय और त्रि स्तरीय पंचायती राज चुनावों से पहले ही जुट गई है। इस काम के लिए भाजपा ने प्रदेश पदाधिकारियों, संभाग प्रभारी एवं जिला प्रभारियों को टाइम लाइन थमा दी गई है। जिसमें प्रदेश अध्यक्ष से लेकर बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को जनता व कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें करने की बात कही गई है।  पार्टी की  नई गाइडलाइन के तहत प्रदेशाध्यक्ष से लेकर दिग्गज नेताओं को महीने भर का शैड्यूल समझा दिया गया है। बूथ स्तर पर पकड़ मजबूत करने के लिए पार्टी का लक्ष्य प्रत्येक बूथ पर 51 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करना है। इसके लिए पन्ना प्रमुखों को सक्रिय कर घर-घर संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। वहीं अल्पसंख्यक और जातिगत समीकरण को देखते हुए इन सीटों पर नजदीकी विधायकों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाने का निर्देश दिया गया है।भाजपा की नई रणनीति को लेकर पार्टी मुख्यालय में संभाग और जिला प्रभारियों की बैठक में टारगेट सेट किए गए हैं। लिहाजा इस लक्ष्य की प्राप्ति को हासिल करने के लिए सबको सामूहिक जिम्मेदारी और धरातल पर काम करने के लिए कहा गया है।