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एमपी कांग्रेस में फिर से संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया, ओंकार और सिद्धार्थ समेत कई जिलाध्यक्षों की बारी

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) संगठन में बड़े फेरबदल की तैयारी में है। पार्टी के भीतर 'शौक' के लिए पद पर काबिज नेताओं और निष्क्रिय पदाधिकारियों के खिलाफ अब सख्त रुख अपनाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के 71 जिला अध्यक्षों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड तैयार हो चुका है, संगठन सृजन अभियान की लंबी प्रक्रिया के बाद एमपी में बनाए गए कांग्रेस के जिलाध्यक्षों में कई दिग्गज उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की ओर से एमपी भेजे गए वामसी रेड्‌डी की समीक्षा में करीब 12 जिला अध्यक्षों की रिपोर्ट चिंताजनक पाई गई है। अब एआईसीसी यानी राष्ट्रीय नेतृत्व को जिलाध्यक्षों की रिव्यू रिपोर्ट भेजी जाएगी। दिल्ली की हरी झंडी मिलने के बाद पुअर परफॉरमेंस वाले जिला अध्यक्षों को हटाया जा सकता है। बडे़ नेता भी जिलाध्यक्ष के तौर पर कमजोर साबित हुए पार्टी सूत्रों की मानें तो जिन जिला अध्यक्षों की रिपोर्ट रिव्यू में कमजोर मिली है। उनमें सीनियर लीडर भी बतौर जिलाध्यक्ष फेल साबित हुए हैं। पूर्व मंत्री और कांग्रेस की सेंट्रल इलेक्शन कमेटी (CEC) के मेंबर ओमकार सिंह मरकाम(जिलाध्यक्ष डिंडोरी) , सतना विधायक और ओबीसी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाह(जिलाध्यक्ष सतना), मंडला के पूर्व विधायक डॉ अशोक मर्सकोले(जिलाध्यक्ष मंडला) जैसे नेता भी जिलों में अपेक्षा पर खरे नहीं उतरे। इंदौर शहर अध्यक्ष को भी बदला जा सकता है कांग्रेस के सूत्र बताते हैं कि पार्टी आलाकमान इंदौर के शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे के निर्णयों और बयानों से संगठन नाराज है। दिग्विजय सिंह के इंदौर में एक प्रदर्शन को लेकर चिंटू चौकसे ने बयान दिया था। पार्षदों के वंदे मातरम विवाद पर पार्टी आलाकमान से चर्चा किए बिना की गई बयानबाजी के बाद अब इंदौर में शहर अध्यक्ष को बदला जा सकता है। आठ महीने पहले हुई थी जिलाध्यक्षों की नियुक्ति पिछले साल जून 2025 में भोपाल में राहुल गांधी ने संगठन सृजन अभियान की शुरुआत की थी। करीब दो महीनों के लंबे मंथन और बैठकों के बाद जिला अध्यचों के नाम तय किए गए थे। अब सिर्फ पद नहीं, काम जरूरी बैठक में ब्लॉक अध्यक्षों को साफ शब्दों में संदेश दिया गया कि अब जिम्मेदारी मिलने का मतलब केवल पद संभालना नहीं, बल्कि सक्रिय रूप से काम करना है। उन्हें निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में मंडल, ब्लॉक, गांव और वार्ड स्तर तक संगठन का मजबूत ढांचा खड़ा करें और हर स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय बनाएं। नेताओं ने यह भी कहा कि अब केवल कागजों पर कमेटियां बनाकर सूची भेजना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि हर नियुक्ति और हर इकाई का फिजिकल वेरिफिकेशन किया जाएगा। यदि कोई पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारी से अनजान पाया गया, तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।  परफॉर्मेंस पर टिकेगा भविष्य, समीक्षा तय बैठक में संगठन के भीतर जवाबदेही तय करने पर विशेष जोर दिया गया। जिला अध्यक्षों के काम का मूल्यांकन पहले से जारी है। ब्लॉक अध्यक्षों के काम की भी छह महीने बाद समीक्षा की जाएगी। इससे साफ संकेत मिला कि आने वाले समय में संगठन में परफॉर्मेंस बेस्ड सिस्टम लागू होगा, जहां सक्रिय और काम करने वाले नेताओं को ही आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। जन संवाद के जरिए जनता से सीधा संपर्क बढ़ाने की रणनीति संगठन प्रभारी संजय कामले ने कहा कि अब हर ब्लॉक स्तर पर जन संवाद कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए कि वे रोजाना लोगों से मिलें, उनकी समस्याएं सुनें और उन्हें पार्टी की विचारधारा से जोड़ें। नेताओं का मानना है कि जनता से सीधा संवाद ही संगठन को मजबूत करने का सबसे प्रभावी तरीका है और इससे पार्टी की पकड़ फिर से मजबूत होगी।   2028 चुनाव को ध्यान में रखकर तैयार हो रहा संगठन पूरे सम्मेलन में यह साफ दिखा कि कांग्रेस अब 2023 की हार के बाद संगठन को दोबारा मजबूत करने में जुटी है। ब्लॉक स्तर से लेकर बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए मजबूत आधार तैयार करने की कोशिश की जा रही है। हर परिवार से 100 रुपए लेने का प्रस्ताव भी चर्चा में बैठक के दौरान एक अहम प्रस्ताव यह भी सामने आया कि हर विधानसभा क्षेत्र में प्रत्येक परिवार से 100 रुपए सहयोग राशि ली जाए। इस राशि को जिला और ब्लॉक स्तर पर ही खर्च किया जाएगा, ताकि संगठन को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सके और स्थानीय स्तर पर गतिविधियां तेज हो सकें। नेताओं का मानना है कि इससे न केवल संसाधन जुटेंगे, बल्कि आम लोगों के साथ पार्टी का सीधा जुड़ाव भी बढ़ेगा। 

BJP चुनावी मोड में, MP की 70 कमजोर सीटों पर मंत्रियों की तैनाती, रणनीति में बड़ा बदलाव

भोपाल मध्य प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी अभी से सक्रिय हो गई है। पार्टी ने साल 2026 में ही खुद की मजबूती और मैदानी रणनीती के लिए काम करना शुरु कर दिया है।दरअसल विधानसभा की सभी 230 सीटें जीतने का लक्ष्य तय करके भाजपा ने मिशन 2028 के लिए रणनीति बनाई है। इस रणनीति के तहत भाजपा कमजोर सीटों पर सबसे अधिक फोकस करने वाली है।  रणनीति के तहत करीब 70 सीटों को चिह्नित करके भाजपा ने जहां संगठनात्मक गतिविधियों को बढ़ा दिया है, वहीं यहां मंत्रियों को भी मैदान में उतारने की फैसला भाजपा ने कर लिया है। कमजोर सीटों पर भाजपा को मजबूत करने की जिम्मेदारी मंत्रियों पर जानकारी के मुताबिक पार्टी की रणनीति कमजोर सीटों पर भाजपा को मजबूत करने की है और इसके लिए मंत्रियों को जिम्मा सौंप दिया है। मंत्रियों को लगातार वहां पर रात बिताने के साथ ही बैठकें करने का निर्देश दिया गया है।साथ ही  हार के कारणों को तलाशने का भी जिम्मा सौंपा गया है। भाजपा इस काम में निकाय और त्रि स्तरीय पंचायती राज चुनावों से पहले ही जुट गई है। इस काम के लिए भाजपा ने प्रदेश पदाधिकारियों, संभाग प्रभारी एवं जिला प्रभारियों को टाइम लाइन थमा दी गई है। जिसमें प्रदेश अध्यक्ष से लेकर बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को जनता व कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें करने की बात कही गई है।  पार्टी की  नई गाइडलाइन के तहत प्रदेशाध्यक्ष से लेकर दिग्गज नेताओं को महीने भर का शैड्यूल समझा दिया गया है। बूथ स्तर पर पकड़ मजबूत करने के लिए पार्टी का लक्ष्य प्रत्येक बूथ पर 51 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करना है। इसके लिए पन्ना प्रमुखों को सक्रिय कर घर-घर संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। वहीं अल्पसंख्यक और जातिगत समीकरण को देखते हुए इन सीटों पर नजदीकी विधायकों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाने का निर्देश दिया गया है।भाजपा की नई रणनीति को लेकर पार्टी मुख्यालय में संभाग और जिला प्रभारियों की बैठक में टारगेट सेट किए गए हैं। लिहाजा इस लक्ष्य की प्राप्ति को हासिल करने के लिए सबको सामूहिक जिम्मेदारी और धरातल पर काम करने के लिए कहा गया है।

गिरिराज सिंह का हमला: राहुल गांधी पर लगाए गंभीर आरोप, संसद में बयान से मचा सियासी घमासान

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि वे संसद में एलओपी की तरह व्यवहार नहीं कर रहे थे, बल्कि पाकिस्तान की भाषा बोल रहे थे। लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के गिरने पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि मेरा मानना है कि कांग्रेस और विपक्षी दल हमेशा से ही महिला-विरोधी रहे हैं। राजनीतिक दलों के लोग भले ही इस बात का जश्न मना लें कि पीएम मोदी का विधेयक गिरा दिया गया, लेकिन देश उन्हें कभी माफ नहीं करेगा, और देश की महिलाएं उन्हें कभी माफ नहीं करेंगी। राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि उनकी बातों से मुझे बहुत दुख हुआ, इसलिए नहीं कि वह गाली-गलौज कर रहे थे, बल्कि इसलिए कि यह देश का दुर्भाग्य है कि मेरे विपक्ष के नेता इस तरह की बातें कर रहे हैं। कल राहुल गांधी ने न सिर्फ पीएम को अशब्द बोला, बल्कि बालाकोट और 'ऑपरेशन सिंदूर' के मुद्दे पर पाकिस्तान की भाषा बोल रहे थे। वह वही कह रहे थे, जो पाकिस्तान कह रहा था। भाजपा सांसद मनन मिश्रा ने कहा कि यह इस देश के लिए बहुत दुख की बात है, और यह राहुल गांधी, कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों का दुर्भाग्य है। देश में एक बड़ा बदलाव होने वाला था। पीएम मोदी ने राजनीति में महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया था। लोकसभा में 33 फीसदी महिलाओं को चुना जाना चाहिए था, लेकिन विपक्ष ने इस बात को नहीं समझा। भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि कांग्रेस पार्टी अपने राजनीतिक हितों के लिए महिलाओं को सिर्फ वोट बैंक समझती है। अपने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए विपक्षी ने इस देश की महिलाओं को गुमराह किया है। भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा कि जिस तरह से विपक्षी पार्टियों ने इस विधेयक के खिलाफ वोट किया, उन्हें शर्म आनी चाहिए, फिर भी वे जश्न मना रहे हैं। जब 2023 में यह विधेयक पास हुआ था तो इन विपक्षी पार्टियों ने कहा था कि इसे जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए, लेकिन जिस तरह से कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने इस विधेयक के खिलाफ वोट किया, उससे यह साफ हो जाता है कि वे देश की आम महिलाओं को अधिकार नहीं देना चाहते।

दिल्ली में सियासत गरमाई: महिला आरक्षण बिल को लेकर भाजपा का प्रदर्शन, राहुल गांधी पर निशाना

नई दिल्ली लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पास नहीं होने पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में शनिवार को भाजपा सांसदों ने राहुल गांधी के घर के बाहर विरोध जताया। प्रदर्शन में वरिष्ठ भाजपा सांसद हेमा मालिनी भी मौजूद रहीं। प्रदर्शनकारियों ने राहुल गांधी का पुतला भी जलाया गया। प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस पर नारी शक्ति का अपमान करने का आरोप लगाया और हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर मोतीलाल नेहरू मार्ग से सुनहरी बाग रोड स्थित राहुल गांधी के घर तक मार्च करते हुए पहुंचे। कुछ महिला प्रदर्शनकारियों ने अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए अपने माथे पर काली पट्टियां बांधी हुई थीं। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने उग्र प्रदर्शन को देखते हुए कुछ कार्यकर्ताओं और नेताओं को डिटेन किया, जिन्हें मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि विपक्ष की मानसिकता महिलाओं के सशक्तीकरण के प्रति उनके असली इरादों को उजागर करती है। देश की महिलाएं सब कुछ देख रही हैं और समझ रही हैं। 'नारी शक्ति' के साथ हुए इस अन्याय का जवाब जरूर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले तीस साल से इस देश की आधी आबादी लगातार अपमान सहती आ रही है। इस बिल को सदन में बार-बार लाया गया है। कभी इसे फाड़ दिया जाता है, कभी फेंक दिया जाता है और कभी इसका विरोध किया जाता है। इसके पीछे क्या वजह है। कभी वे कहते हैं कि उन्हें परिसीमन नहीं चाहिए, तो कभी कहते हैं कि उन्हें पुनर्गठन नहीं चाहिए। कभी वे कहते हैं कि इसे 543 सीटों के अंदर ही लागू करो, तो कभी कहते हैं कि सीटों की संख्या बढ़ाओ। कभी वे कुछ खास राज्यों की बात करते हैं, तो कभी आरक्षण के अंदर आरक्षण की और कभी मुस्लिम महिलाओं की। आज मैं विपक्ष के नेताओं से यह पूछना चाहती हूं, अगर वे मुस्लिम महिलाओं के इतने ही बड़े शुभचिंतक थे तो जब पीएम मोदी ने तीन तलाक कानून पेश किया था, तब उन्होंने उसका विरोध क्यों किया था। मथुरा लोकसभा सीट से सांसद हेमा मालिनी ने कहा कि कि विपक्ष ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को पारित कराने के सभी प्रयासों को विफल कर दिया। ऐसा लगता है कि विपक्ष को 'नारी शक्ति' पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को उनका हक दिलाने की पूरी कोशिश की। पिछले कई वर्षों से प्रधानमंत्री महिलाओं को नई सुविधाएं और अधिकार देने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। वह चाहते हैं कि महिलाएं निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल हों, लेकिन विपक्ष ऐसा नहीं होने देना चाहता। हेमा मालिनी ने कहा कि संसद सत्र के दौरान महिला आरक्षण विधेयक संसद में अटक गया। यह उन महिलाओं के लिए एक दुखद दिन था, जो राष्ट्रीय मामलों में अपनी अधिक भागीदारी की उम्मीद कर रही थीं। व्यक्तिगत रूप से मैं काफी निराश थी, क्योंकि मतदान से ठीक पहले मैंने संसद में इस विधेयक के महत्व पर अपनी बात रखी थी। प्रधानमंत्री मोदी आज रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे और सभी महिलाओं के लिए इस विधेयक के महत्व के बारे में बात करेंगे। मैं आप सभी से अनुरोध करती हूं कि आप उनका संबोधन अवश्य सुनें। भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि यह बड़े शर्म की बात है कि जिस दिन कांग्रेस पार्टी और विपक्ष के सभी गठबंधन सहयोगियों ने इस देश की महिलाओं के साथ विश्वासघात किया, वे उस दिन को ऐसे मना रहे हैं मानो यह कोई जीत हो। उन्होंने कहा कि कल राहुल गांधी और सभी विपक्षी दलों ने इस देश की मातृ शक्ति की पीठ में छुरा घोंपा है और उनके साथ विश्वासघात किया है। कल विपक्ष ने यह तय कर लिया है कि उनकी मंशा यह है कि वे महिलाओं की भूमिका को केवल मतदान केंद्र तक ही सीमित रखना चाहते हैं और जब सत्ता में भागीदारी की बात आती है तो वे अपने हाथ पीछे खींच लेते हैं। दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि महिलाओं में भारी गुस्सा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं को अधिकार देना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस ने उनको छीनने का काम किया है और यह गुस्सा कांग्रेस को भस्म कर देगा और उसे तबाह कर देगा। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि मेरा दिल रो रहा है, लेकिन देश और दिल्ली की महिलाएं जाग चुकी हैं। उन्होंने कहा कि असली बात समझिए। जब ​​इसे पास होना था, तो सब एक साथ आ गए थे, लेकिन जिस दिन इसे लागू होना था, उन्होंने इसे गिरा दिया। भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा कि कांग्रेस और इंडी गठबंधन की पार्टियों ने बहनों के साथ कभी न्याय नहीं किया। उन्होंने आरक्षण की बात तो की, लेकिन लोकसभा और राज्यसभा दोनों में इस विधेयक को पास कराने की कभी कोशिश नहीं की। 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में 33 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है। इसे 2029 तक लागू करने की कोशिश की गई थी, लेकिन कांग्रेस और इंडी गठबंधन के लोगों ने एक बार फिर इस विधेयक के खिलाफ क्रॉस-वोटिंग की है। भाजपा नेता रमेश बिधूड़ी ने कहा कि इतिहास के पन्नों में इसे एक गौरवशाली अध्याय के तौर पर नहीं, बल्कि एक काले अध्याय के तौर पर याद किया जाएगा कि देश की आधी आबादी यानी महिलाओं को उनका हक मिलना चाहिए। यह मांग कोई नई नहीं है और पिछले चार दशकों से कांग्रेस किसी न किसी तरह से इस मुद्दे पर लोगों को गुमराह करती आ रही है।

विपक्ष पर NDA का तंज तेज, कांग्रेस पर लगाया गंभीर आरोप—नारी शक्ति के मुद्दे पर सियासी घमासान

नई दिल्ली महिला आरक्षण संशोधन बिल को लेकर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें देश की महिलाओं के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने इसे 'देश के लिए काला दिवस' बताते हुए कहा कि इतना महत्वपूर्ण विधेयक बहाने बनाकर गिरा दिया गया। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, "इतना ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण बिल, महिलाओं को संसद में जगह देना, इसमें क्या आपत्ति हो सकती है? बहाना बनाकर इस महत्वपूर्ण बिल को गिराया गया। मैं मानता हूं कि यह देश के लिए एक काला दिवस रहा है।" केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने कहा, "कांग्रेस जो कह रही कि ये जो बिल गिरा वो ऐतिहासिक कदम है, उनकी नजर में ऐतिहासिक इसलिए है, क्योंकि इस देश की नारी शक्ति और पीएम के नारी सशक्तिकरण के प्रयास को उन्होंने गिरा दिया, इसलिए उनके लिए ये ऐतिहासिक हो सकता है। आधी आबादी को 33 प्रतिशत आरक्षण देकर उनके साथ न्याय करने वाला ये कदम था, लेकिन विपक्ष को इसे गिराकर खुशी हो रही है तो यही कांग्रेस का चरित्र है।" भाजपा सांसद दामोदर अग्रवाल ने कहा, "131वां संविधान संशोधन विधेयक 2029 में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के उद्देश्य से पेश किया गया था। इसमें 2023 के 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण अधिनियम) में जरूरी और सुधारों के प्रावधान भी शामिल थे।" भाजपा सांसद संजय जयसवाल ने कहा, "हम सड़कों पर उतरेंगे और महिलाओं को समझाएंगे कि किस तरह से विरोधी दलों ने उनके अधिकार को लोकसभा में रोका है। हमें पूरा विश्वास है कि देश की महिलाएं विपक्ष के सांसदों को इतना मजबूर कर देंगी कि अगले 3 महीने में यह बिल निश्चित तौर पर पास कराना उनकी मजबूरी हो जाएगी।" भाजपा नेता शशांक मणि ने कहा, "कांग्रेस को मालूम होना चाहिए कि पूरे देश की 50 प्रतिशत आबादी इनसे आक्रोश में है। कांग्रेस जिसे विजय घोषित कर रही है, उन्हीं की हार होगी। कल देश की हार हुई, कांग्रेस की जीत नहीं हुई है, बल्कि उनकी भी हार हुई है। मैं नहीं समझ पा रहा हूं कि इसके पीछे इनका क्या ज्ञान है? हम लोग माताओं-बहनों के लिए लगे रहेंगे और अगली बार हम इस बिल को लाएंगे और पारित करेंगे।" भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा, "लोकतंत्र में महिलाओं को अधिकार देने के विचार की हत्या करने वाला यह विपक्ष अगर इसको महिलाओं का अपमान करके अपनी जीत मान रहा है तो निश्चित रूप से वो एक बड़ी पराजय के लिए अपने आप को तैयार कर रहे हैं।" भाजपा सांसद मनन कुमार मिश्रा ने कहा, "कल जो विपक्ष के नेताओं ने किया, यह देश का दुर्भाग्य है और देश के लिए काफी दुखद है। कल उन्होंने अपनी मंशा को जाहिर कर दिया। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश की महिलाओं को उचित भागीदारी देने के लिए बहुत बढ़िया कदम लिया गया था, उसको विपक्ष ने विफल किया है। वो नहीं चाहते हैं कि देश की महिलाएं सशक्त हों। आने वाले समय में महिलाएं उन्हें अच्छे से सबक सिखाएंगी।" भाजपा सांसद रवि किशन ने कहा, "विपक्ष ने महिलाओं के भविष्य को हराया है। ये महिला विरोधी हैं। ये महिलाओं को कमजोर बना रहे हैं। इससे दुखद कुछ नहीं हो सकता।"

महिला आरक्षण पर सियासत तेज: विपक्ष लिखेगा नरेंद्र मोदी को पत्र, पुराना बिल लागू करने की अपील

नई दिल्ली विपक्षी दल ने पुराने महिला आरक्षण बिल को तुरंत लागू करने के लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखने की तैयारी में हैं। हाल ही में लोकसभा में सरकार का नया बिल दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण गिर गया। विपक्ष का कहना है कि वे आरक्षण के साथ हैं, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना गलत है।   विपक्षी दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखने की तैयारी में हैं। इस पत्र में पुराने महिला आरक्षण बिल को लागू करने की मांग की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, इसको लेकर इंडिया गठबंधन के दल देशभर में मीडिया वार्ता भी करेंगे। इन सभाओं में वे यह स्पष्ट करेंगे कि वे महिला आरक्षण का पूरा समर्थन करते हैं, लेकिन सरकार इसकी आड़ में देश का राजनीतिक नक्शा बदलने की कोशिश कर रही है।   हाल ही में हुई एक बैठक में सोनिया गांधी ने अपने सभी सहयोगी दलों का आभार जताया। विशेष सत्र के आखिरी दिन से पहले ANI से बात करते हुए, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार से कहा की, वे सोमवार को ही पुराना महिला आरक्षण बिल संसद में पेश करें। उन्होंने कहा कि जिस बिल पर पहले से सभी दलों की सहमति थी, उसे तुरंत लाना चाहिए। प्रियंका गांधी के अनुसार, अगर सरकार ऐसा करती है तो विपक्ष इसका पूरा साथ देगा।   यह विवाद तब बढ़ा जब शुक्रवार को लोकसभा में 'संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026' नही पास हो पाया। इस बिल को पास करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी। वोटिंग के दौरान बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जिससे यह जरूरी आंकड़ा नहीं छू सका। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बिल के गिरने की पुष्टि की। सरकार ने इस बिल को परिसीमन से जोड़ा था। गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले सुधार को रोक रहे हैं। दूसरी ओर, राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं का कहना है कि वे आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना चुनावी ढांचे को बदलने की एक साजिश है। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने साफ किया है कि सरकार अब इससे जुड़े अन्य बिलों पर आगे नहीं बढ़ेगी। संसद का यह विशेष सत्र तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के चुनावी हलचल के बीच आयोजित किया गया था।

BJP का प्रियंका गांधी पर वार: ‘कांग्रेस ने महिलाओं के अधिकार छीने जाने का जश्न मनाया

नई दिल्ली महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन बिल लोकसभा में गिर गए. ये बिल लोकसभा में गिरने के बाद राजनीतिक दलों की रार अब संसद से सड़कों पर आ गई है. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके लोकसभा की मौजूदा सदस्य संख्या में ही महिला आरक्षण लागू किया जाए. उन्होंने ये बिल गिरने को संविधान और विपक्षी एकता की जीत बताया।  प्रियंका गांधी पर अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ओर से रविशंकर प्रसाद और स्मृति ईरानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पलटवार किया. स्मृति ईरानी ने कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक एहसान जताया गया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने इस बात का जश्न मनाया कि देश की महिलाओं का अधिकार कैसे छीना गया।  कांग्रेस को संविधान में विश्वास नहीं, प्रियंका गांधी की भाषा गलत: रविशंकर प्रसाद कांग्रेस महिलाओं के खिलाफ है, अधिकार ना देकर जश्न मना रहे हैं: किरेन रिजिजू स्मृति ईरानी ने कहा कि आज कांग्रेस की ओर से कटाक्ष किया गया कि बीजेपी में किसी ने मसीहा बनने की कोशिश की. ट्रिपल तलाक एक अभिशाप बन कर रहा जब कांग्रेस की सरकार थी. उन्होंने चुनाव के बीच सेशन के विपक्ष के आरोप पर कहा कि सेशन के बीच हिमाचल प्रदेश में चुनाव हुए और जीत किसकी हुई, बताने की जरूरत नहीं है।  रविशंकर प्रसाद ने प्रियंका गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सामान्य तौर पर मैं प्रियंका गांधी पर टिप्पणी नहीं करता. उन्होंने कहा कि लेकिन आज प्रियंका गांधी ने क्या बोला कि देश की महिलाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि उनकी भाषा गलत थी. महिलाएं कोई वस्तु नहीं हैं।  रविशंकर प्रसाद ने कहा कि महिलाओं की आकांक्षाओं को कुचला गया. कांग्रेस का क्रूर चेहरा सामने आया है. यह दर्द हर महिला याद रखेगी. उन्होंने कांग्रेस की समझ पर भी सवाल उठाए और कहा कि उनको संविधान समझाना पड़ेगा. पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हम इसे लेकर गांव-गांव तक जाएंगे।  संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि महिलाओं को आरक्षण देने का बिल विपक्ष ने पारित नहीं होने दिया, इससे हम सभी दुखी हैं. उन्होंने कहा कि दुखी हम इसलिए हैं, क्योंकि महिलाओं को उनका अधिकार नहीं देने दिया गया. रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी अगर यह कहते हैं कि महिलाओं को आरक्षण देना अलोकतांत्रिक है, तो उनको हम कैसे समझा सकते हैं।  किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस पर महिला विरोधी पार्टी होने का ठप्पा लग गया है. उन्होंने कहा कि यह इतना महत्वपूर्ण बिल था. लोकसभा में, राज्यों की विधानसभा में अधिक महिलाएं चुनकर के आएं, इसमें कांग्रेस पार्टी को क्या आपत्ति हो सकती है. किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा। 

स्मृति ईरानी का अखिलेश यादव पर जवाब: ‘गोरखपुर से चुनाव लड़कर दिखाएं दम’

वाराणसी  लोकसभा में सपा सांसद अखिलेश यादव के बयान के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि पुराने विषयों को लेकर सवाल उठाना आसान है. अगर इतना ही दम है तो अपने पैतृक क्षेत्र (कन्नौज) को छोड़कर गोरखपुर से चुनाव लड़कर दिखाएं. लेकिन उनमें इतना दम नहीं. हमने तो कांग्रेस अध्यक्ष को उनके गढ़ (अमेठी) में हराया है. ईरानी ने उपरोक्त बातें वाराणसी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहीं।  स्मृति ईरानी का पलटवार  दरअसल, संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए स्मृति ईरानी पर 'सास-बहू' सीरियल को लेकर तंज कसा. इस पर पलटवार करते हुए स्मृति ईरानी ने कहा जिन्हें राजनीति विरासत में मिली है, उन्हें उनकी याद आना अच्छा है. उन्होंने अखिलेश को सीरियल छोड़कर संसद के काम पर ध्यान देने और महिला सशक्तीकरण बिल का समर्थन करने की सलाह दी. ईरानी ने कहा कि उन्होंने अपनी पहचान मेहनत से बनाई है।  बकौल स्मृति ईरानी- 'मुझ जैसी कामकाजी महिला ने किसी और के गढ़ में जाकर परचम गाड़ा और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष को हराया है. अगर आप इतना ही दमखम रखते हैं तो पैतृक सीट छोड़कर गोरखपुर से लड़कर दिखाएं. कामकाजी महिला पर टिप्पणी करना आसान होता है, खासकर उनके लिए जिन्होंने कभी खुद कहीं नौकरी ना की हो. हम जैसे लोग टैक्स भरते हैं, इसलिए नहीं कि सदन में सास-बहू की बातें हो. संसद में जाकर अपने संसदीय कार्य पर ध्यान दें. हालांकि, इस बात की खुशी भी है कि उनका उत्तर प्रदेश में विपक्ष में रहना सुनिश्चित है. क्योंकि यूपी की राजनीति करने वालों को इतना पता है कि गांव-गांव और पात-पात घूमते-घूमते इतना वक्त बीत जाता है कि सीरियल देखने का टाइम एक गंभीर राजनेता के पास नहीं होता है।  इससे पहले पूर्व मंत्री ने 'एक्स' पर लिखा- 'सुना है आज अखिलेश जी ने संसद में मुझे याद किया. अच्छा है, जिनको राजनीति धरोहर में मिली, वे उनको भी याद करते हैं जो अपने दम पर आसमान में सुराख करते हैं. कामकाजी औरत पर वे टिप्पणी करते हैं जिन्होंने जिंदगी में कभी कोई नौकरी नहीं की. सीरियल से हटाकर संसद पर ध्यान लगाएं, महिलाओं के संबल हेतु अहम बिल पास कराएं।  अखिलेश यादव का शायराना तंज इसके बाद सपा मुखिया ने एक बार फिर पलटवार किया. चार लाइन लिखकर उन्होंने स्मृति ईरानी और बीजेपी पर जनता से दूर होने का आरोप लगाया. उन्होंने लिखा- हर बात से अगर साजिश की बू आई न होती, यकीन करते लोग अगर बात जुमलाई न होती, दरअसल अगर अवाम से दोस्ती निभाई होती, तो इतनी जल्दी विदाई की घड़ी आई न होती. फिलहाल, दोनों नेताओं के बीच यह जुबानी जंग अब और तेज हो गई है. यूपी चुनाव से पहले इस बयानबाजी ने सूबे का सियासी पारा हाई कर दिया है. अब देखना होगा कि ईरानी के इस बयान के बाद अखिलेश की ओर से क्या रिएक्शन आएगा। 

महिला आरक्षण पर कांग्रेस का वादा अधूरा, मायावती ने सपा को भी घेरा

लखनऊ  बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने एक बार फिर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर बड़ा हमला बोला है. मायावती का कहना है कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस अब जो बड़ी-बड़ी बातें कर रही है, वो महज एक दिखावा है. उन्होंने कांग्रेस को गिरगिट की तरह रंग बदलने वाली पार्टी करार देते हुए साफ कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब उसने कभी SC, ST और OBC के आरक्षण का कोटा पूरा करने की कोशिश नहीं की. मायावती का यह वार सीधे तौर पर कांग्रेस के उस दावे पर है जिसमें वो अब इन वर्गों के हक की बात कर रही है।  मायावती ने पुरानी बातों को याद दिलाते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा इन वर्गों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के साथ खिलवाड़ किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस जब केंद्र की सरकार चला रही थी, तब उसने कभी भी पिछड़ों या दलितों के कोटे को भरने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया. आज वही पार्टी महिला आरक्षण के बहाने वोट बैंक की राजनीति कर रही है।  यही नहीं, मायावती ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए मंडल कमीशन का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि ओबीसी समाज को जो 27 प्रतिशत आरक्षण मिला, उसे भी कांग्रेस ने लागू नहीं किया था. यह बीएसपी की मेहनत और लगातार किए गए प्रयासों का ही नतीजा था कि उस समय की वी.पी. सिंह सरकार ने इसे आखिरकार लागू किया. मायावती ने साफ संदेश दिया कि जो काम कांग्रेस दशकों में नहीं कर पाई, उसे BSP ने लड़कर करवाया।  जब सरकार में होती है सपा, तो भूल जाती है पिछड़ों का हक मायावती के निशाने पर सिर्फ कांग्रेस ही नहीं थी, उन्होंने समाजवादी पार्टी को भी जमकर घेरा. उन्होंने यूपी का एक पुराना किस्सा याद दिलाते हुए कहा कि 1994 में जब पिछड़े मुस्लिमों को ओबीसी का फायदा देने की रिपोर्ट आई थी, तो उस वक्त की सपा सरकार ने उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया था. लेकिन जब 1995 में बीएसपी की सरकार बनी, तो इस फैसले को तुरंत लागू कर दिया गया. मायावती ने तंज कसते हुए कहा कि सपा जब सत्ता से बाहर होती है, तो बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन सरकार में आते ही इनका रवैया पूरी तरह बदल जाता है।  मायावती ने जनता को सावधान करते हुए कहा कि कांग्रेस और सपा जैसी पार्टियां केवल अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए रंग बदलती हैं. सत्ता में रहते हुए इनका रवैया जातिवादी और तिरस्कार से भरा होता है, लेकिन चुनाव आते ही ये लोग छलावा करने लगते हैं. उन्होंने लोगों से अपील की कि इन दोहरे चरित्र वाली पार्टियों से हमेशा बचकर रहना चाहिए, क्योंकि ये कभी भी दलितों, पिछड़ों और मुस्लिमों का भला नहीं चाहतीं।  महिला आरक्षण को लेकर चल रही देरी पर भी मायावती ने अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि अगर सरकार इसे 2011 की जनगणना के आधार पर लागू करना चाहती है, तो उसे जल्दी करना चाहिए. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर आज कांग्रेस सत्ता में होती, तो वह भी बीजेपी की तरह ही कदम उठाती. यानी घुमा-फिराकर बात वही है कि बड़ी पार्टियों के लिए इन वर्गों का कल्याण कभी प्राथमिकता नहीं रहा।  आखिर में मायावती ने एक बड़ी सलाह देते हुए कहा कि एससी, एसटी, ओबीसी और मुस्लिम समाज को किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए. उन्होंने कहा कि फिलहाल जो कुछ भी मिल रहा है उसे स्वीकार करें, लेकिन असली मजबूती तभी आएगी जब यह समाज खुद अपने पैरों पर खड़ा होगा. मायावती ने साफ शब्दों में कहा कि अपने समाज को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाना ही इस समस्या का एकमात्र समाधान है। 

कांग्रेस में राज्यसभा सीट को लेकर बढ़ा कास्ट प्रेशर, दलित- ब्राह्मणों के बाद सिंधी समाज ने भी किया दावेदारी

भोपाल  मध्य प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद खाली हुई सीट को लेकर कांग्रेस के भीतर खींचतान तेज हो गई है। पार्टी में जातीय समीकरणों को लेकर दबाव(कास्ट प्रेशर) लगातार बढ़ रहा है। जहां पहले दलित और फिर विंध्य के ब्राह्मणों की ओर से दावेदारी पेश की गई थी, वहीं अब इस रेस में सिंधी समाज की भी एंट्री हो गई है। सिंधी प्रतिनिधित्व की मांग उठी रीवा शहर कांग्रेस कमेटी के महामंत्री दिलीप ठारवानी ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को पत्र लिखकर सिंधी समाज से राज्यसभा प्रतिनिधि भेजने की मांग उठाई है। ठारवानी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को संबोधित पत्र में लिखा है कि वे लंबे समय से कांग्रेस के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं और उनका परिवार पीढ़ियों से पार्टी की विचारधारा से जुड़ा है। सिंधी समाज देशभर में कांग्रेस के प्रति अपनी आस्था और योगदान के लिए जाना जाता है। आगामी राज्यसभा चयन में सिंधी समाज से एक योग्य और समर्पित प्रतिनिधि के रूप में उनके नाम पर विचार किया जाए। इस पत्र की प्रतिलिपि मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को भी भेजी गई है। त्रिकोणीय हुआ जातीय समीकरण दलित वर्ग: दिग्विजय सिंह के राज्यसभा जाने से इनकार करने के बाद कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने दलित वर्ग के नेता को राज्यसभा भेजे जाने की मांग की थी। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा भी इसका समर्थन कर चुके हैं। ब्राह्मण समाज: विंध्य क्षेत्र के ब्राह्मण नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में उमंग सिंघार और जीतू पटवारी से मुलाकात की थी। उनका तर्क है कि विंध्य में ब्राह्मण समाज का बड़ा प्रभाव है, जिसे राज्यसभा के जरिए प्रतिनिधित्व देना जरूरी है। सिंधी समाज: अब दिलीप ठारवानी की दावेदारी ने इस रेस को और दिलचस्प बना दिया है। ठारवानी का मानना है कि यदि उन्हें अवसर मिलता है, तो वे संसद में पार्टी की नीतियों और जनहित के मुद्दों को पूरी निष्ठा से उठाएंगे। प्रदेश भर में सिंधी समाज कांग्रेस से जुडे़गा। सीट बचाने के लिए कांग्रेस की घेराबंदी मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटें जून में रिक्त हो रही हैं। विधानसभा में दलीय स्थिति के अनुसार कांग्रेस को एक सीट मिल सकती है। इस पर प्रदेश के नेता को ही भेजने की मांग उठ रही है। विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष डा. गोविंद सिंह ने प्रदेश से किसी भी जमीनी नेता को भेजने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी नेताओं का मन टटोलने में लगे हैं। उन्होंने वरिष्ठ विधायक अजय सिंह से भी भेंट की। इसे राज्यसभा चुनाव की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है क्योंकि कांग्रेस के पास एक सदस्य भेजने के लिए चार विधायक ही अतिरिक्त हैं। उधर, भाजपा भी तीसरी सीट पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस ने पिछले दो बार पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को राज्यसभा भेजा था। वे तीसरी बार जाने के इच्छुक नहीं हैं और पार्टी नेतृत्व को अपनी भावना से अवगत भी करा चुके हैं। साथ ही यह भी कह चुके हैं कि यदि किसी एससी वर्ग के व्यक्ति को भेजा जाता है तो उन्हें प्रसन्नता होगी। दरअसल, वे एक बार फिर दलित एजेंडे पर काम कर रहे हैं और बड़ा सम्मेलन भोपाल में कर चुके हैं। प्रदेश में एससी वर्ग के मतदाता कई सीटों पर प्रभावी भूमिका में हैं। उधर, ओबीसी समीकरण के चलते पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव और महिला प्रतिनिधित्व के हिसाब से मीनाक्षी नटराजन के नाम चर्चा में हैं। उधर, डा.सिंह ने यह मांग रख दी कि प्रदेश के किसी जमीनी नेता को राज्यसभा भेजा जाए। अन्य नेता भी इसके पक्ष में हैं। इसी बीच पूर्व नेता प्रतिपक्ष डा.गोविंद सिंह, अजय सिंह और जीतू पटवारी के बीच दो दिन पहले हुई बैठक को चुनाव की तैयारी से जोड़कर देखा गया। दरअसल, यह कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का चुनाव है। यदि आवश्यक संख्या बल से अधिक होने के बाद भी पार्टी अपना सदस्य नहीं बनवा पाती है तो कार्यकर्ताओं में जोश भरने के प्रयास प्रभावित होंगे। इसका असर अगले साल होने वाले नगरीय निकाय और पंचायत के चुनावों पर भी पड़ सकता है। यही कारण है कि कांग्रेस अभी से घर को सुरक्षित करने में जुट गई है। उधर, जीतू पटवारी ने साफ कर दिया है कि उनके पास प्रदेश अध्यक्ष पद की बड़ी जिम्मेदारी है और उसके लिए पूरा समय देना आवश्यक है। पार्टी जब प्रदेश इकाई से परामर्श करेगी तो कार्यकर्ताओं की भावना से अवगत कराया जाएगा।