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ओडिशा उपचुनाव में गरजे सीएम विष्णुदेव: बोले, भाजपा लाएगी परिवर्तन की लहर

रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज पड़ोसी राज्य ओडिशा के नुआपाड़ा विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की धुआंधार चुनावी हुंकार भरने जा रहे हैं. संगठन के निर्देश पर सीएम साय, विधायक पुरंदर मिश्रा और सह-प्रभारी लता उसेंडी के साथ पंचमपुर में विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे. ओडिशा रवाना होने से पहले सीएम साय ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि “नुआपाड़ा में भाजपा की बहुमत वाली जीत पक्की है. हम विकास की गारंटी दे रहे हैं.” बता दें, नुआपाड़ा सीट दिवंगत बीजेडी नेता राजेंद्र ढोलकिया के निधन से खाली हुई है. 11 नवंबर को मतदान होने हैं और 14 को नतीजे सामने आएंगे. भाजपा ने इस उपचुनाव के लिए 40 स्टार प्रचारकों की फौज उतारी है, जिसमें ओडिशा सीएम मोहन माझी, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, अश्विनी वैष्णव समेत मुख्यमंत्री साय शामिल हैं. इसी बीच, एग्रीस्टेक पोर्टल में रिकॉर्ड पंजीयन के बावजूद कुछ किसानों के खेत का रकबा कम दिखने की शिकायतें सामने आईं. सीएम साय ने तुरंत अधिकारियों को निर्देश दिए-ई-केवाईसी में गड़बड़ी सुधारो, डुप्लीकेशन हटाओ. इस बार पिछले साल से एक लाख ज्यादा किसानों ने पंजीयन कराया. धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू, पारदर्शिता के लिए कमांड कंट्रोल सेंटर भी गठित. बिहार में पहले चरण के मतदान से ठीक पहले सीएम साय ने पटना में हुंकार भरी. उन्होंने कहा कि एनडीए स्पष्ट बहुमत से सरकार बना रहा है. राजद-कांग्रेस ने तो पशुओं का चारा भी खा लिया, लेकिन बिहार की जनता पीएम मोदी पर भरोसा जता रही है.

छत्तीसगढ़ राज्य उत्सव में जिंदल स्टील का शानदार स्टाल आकर्षण का केंद्र

 छत्तीसगढ़ राज्य उत्सव में जिंदल स्टील का भव्य स्टाल  छत्तीसगढ़ राज्य उत्सव में जिंदल स्टील का शानदार स्टाल आकर्षण का केंद्र राज्य उत्सव में जिंदल स्टील का भव्य प्रदर्शन, मिली लोगों की बड़ी प्रतिक्रिया रायपुर  छत्तीसगढ़ राज्य के 25वें स्थापना दिवस के अवसर पर नवा रायपुर स्थित मेला स्थल में आयोजित भव्य राज्योत्सव 2025 के दौरान जिंदल स्टील ने एक आकर्षक और जानकारीपूर्ण स्टॉल लगाया, जिसने वहां आने वाले लोगो का ध्यान अपनी ओर खींचा । जिंदल स्टील के इस स्टॉल में कंपनी के विभिन्न उत्पादों, आधुनिक तकनीक, मशीनरी डिवीजन के उन्नत उपकरणों एवं CSR गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई। साथ ही, कंपनी द्वारा पिछले 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ राज्य के विकास में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को भी प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया गया। स्टॉल में जिंदल स्टील के स्टील, स्ट्रक्चरल्स, रेल्स, प्लेट्स, मशीनरी पार्ट्स इत्यादि उत्पादों की जानकारी के साथ-साथ उनकी निर्माण प्रक्रिया और गुणवत्ता मानकों को भी दर्शाया गया। इसके अलावा, कंपनी के CSR  कार्यक्रमों के अंतर्गत शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण तथा ग्रामीण विकास से जुड़ी गतिविधियों की झलक भी दिखी. राज्योत्सव के दौरान बड़ी संख्या में आये लोग  एवं उद्योग प्रतिनिधियों, विद्यार्थियों एवं सरकारी अधिकारियों ने स्टॉल का भ्रमण किया और जिंदल स्टील के नवाचार एवं उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने बताया कि स्टॉल न केवल जानकारीपूर्ण था, बल्कि छत्तीसगढ़ में जिंदल स्टील की 25 वर्षों की उल्लेखनीय यात्रा और योगदान को गर्व के साथ प्रदर्शित भी करता है। जिंदल स्टील के प्रतिनिधियों ने बताया कि कंपनी आगे भी छत्तीसगढ़ राज्य के सर्वांगीण विकास में अपना योगदान जारी रखेगी और “विकसित छत्तीसगढ़, मजबूत भारत” के विज़न को साकार करने में सक्रिय भूमिका निभाती रहेगी।

यह सम्मेलन छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण की जीवंत तस्वीर-राज्यपाल डेका

रायपुर : लखपति दीदी महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण समृद्धि की मिसाल – उपराष्ट्रपति  राधाकृष्णन यह सम्मेलन छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण की जीवंत तस्वीर-राज्यपाल  डेका राजनांदगांव में लखपति दीदी सम्मेलन में शामिल हुए उपराष्ट्रपति राज्यपाल और मुख्यमंत्री रायपुर राजनांदगांव के स्टेट हाई स्कूल मैदान में आयोजित लखपति दीदी सम्मेलन में देश के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन, राज्यपाल श्री रमेन डेका, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि शामिल हुए। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने महतारी वंदन योजना और नियद नेल्लानार योजना के तहत 69 लाख 15 हजार 273 हितग्राहियों को कुल 647 करोड़ 28 लाख 36 हजार 500 रुपए की राशि डीबीटी के माध्यम से अंतरित की। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति श्री राधाकृष्णन ने कहा कि लखपति दीदी आत्मनिर्भरता और सम्मान का प्रतीक हैं। यह केवल आय का कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और समाज में उनके बढ़ते प्रभाव का उत्सव है। उन्होंने कहा कि राजनांदगांव जिला महिला सशक्तिकरण का उदाहरण बन चुका है, जहां महिलाएं आर्थिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर अग्रसर हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए चल रहे प्रयासों की सराहना की और कहा कि छत्तीसगढ़ आज बिजली उत्पादन, स्वास्थ्य, शिक्षा और अधोसंरचना के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि लखपति दीदी आंदोलन दिखाता है कि जब महिलाएं संगठित होती हैं, तो परिवर्तन की गाथाएं स्वयं लिखती हैं। अपने संबोधन में राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि लखपति दीदी सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि यह आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की जीवंत तस्वीर है। यह सम्मेलन इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, संकल्प और आत्मबल से कैसे समृद्धि का नया अध्याय लिखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज हर जिले में महिलाएं स्वसहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से सक्षम हो रही हैं। बलरामपुर में महिलाएं बाड़ी विकास और विपणन में, बस्तर में वनोपज से जैविक उत्पाद तैयार करने में, और कोण्डागांव में फूड प्रोसेसिंग, सिलाई-कढ़ाई जैसे कार्यों में उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं। राजनांदगांव जिले में ही लगभग 40 हजार लखपति दीदियां बनी हैं, जिनमें से 208 दीदियां सालाना 5 लाख रुपए से अधिक और 26 दीदियां 10 लाख रुपए से अधिक का व्यवसाय कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा केवल आर्थिक उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हर दीदी की कहानी प्रेरणा है। जब संकल्प और सामूहिक प्रयास जुड़ते हैं, तो आत्मनिर्भरता केवल सपना नहीं रहती, वह हकीकत बन जाती है। राज्यपाल ने पद्मश्री फूलबासन बाई यादव जैसी महिलाओं के कार्यों को आदर्श बताते हुए कहा कि उनके प्रयासों से नारी सशक्तिकरण का मार्ग और सशक्त हुआ है।  राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महिला उद्यमिता और स्वरोजगार के लिए देशभर में अनेक योजनाएं चल रही हैं, और छत्तीसगढ़ ने उन्हें ज़मीन पर उतारकर एक “सशक्त भारत, सशक्त छत्तीसगढ़” की मिसाल पेश की है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश में 7 लाख 82 हजार लखपति दीदी बनाने का है, जिनमें से अब तक 4 लाख 93 हजार दीदियां आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना से 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपए की सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि नियद नेल्लानार योजना से बस्तर के दूरस्थ इलाकों में बिजली, पानी और सड़क जैसी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि लखपति दीदी सम्मेलन नारी शक्ति की पहचान और आत्मनिर्भरता की मिसाल है। उन्होंने कहा कि राजनांदगांव जिले ने विकास की दिशा में नई ऊंचाइयां हासिल की हैं  चाहे वह पीएम आवास निर्माण हो, जल संरक्षण या कुपोषण उन्मूलन का अभियान। उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने और आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित करने हेतु पद्मश्री फूलबासन बाई यादव के योगदान की भी प्रशंसा की। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, श्रम कल्याण मंडल अध्यक्ष योगेशदत्त मिश्रा, पूर्व सांसद प्रदीप गांधी, सहित अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में महिला स्वसहायता समूह की दीदियां उपस्थित थीं।

छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव-2025 : उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 37 विभूतियों और 4 संस्थाओं को अलंकरण से किया सम्मानित

रायपुर : छत्तीसगढ रजत महोत्सव-2025 : उप राष्ट्रपति  सीपी राधाकृष्णन ने छत्तीसगढ़ के 34 अलंकरण से 37 विभूतियों एवं 4 संस्थाओं को किया सम्मानित रायपुर उप राष्ट्रपति  सीपी राधाकृष्णन ने नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के राज्य अलंकरण समारोह में छत्तीसगढ़ के 34 अलंकरण से विभिन्न क्षेत्रों से उत्कृष्ट योगदान देने वाले 37 विभूतियों एवं 4 संस्थाओं को सम्मानित किया। इस अवसर पर राज्यपाल  रमेन डेका ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय अलंकरण समारोह के अति विशिष्ट अतिथि तथा विशिष्टि अतिथि के रूप में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा, मंत्रीगण, सांसद एवं विधायकगण उपस्थित थे। राज्य अलंकरण समारोह में उप राष्ट्रपति  राधाकृष्णन एवं मुख्यमंत्री  साय ने शहीद वीरनारायण सिंह पुरस्कार  हिरेश सिन्हा जिला कांकेर को प्रदान किया। यति यतनलाल सम्मान भारतीय कुष्ठ निवारक संघ, कात्रे नगर सोठी जिला जांजगीर-चांपा, गुण्डाधूर सम्मान सु ज्ञानेश्वरी यादव राजनांदगांव, मिनीमाता सम्मान मती ललेश्वरी साहू दुर्ग, गुरूघासीदास सम्मान संयुक्त रूप से  भुवनदास जांगड़े बेमेतरा एवं  शशि गायकवाड़ बलौदाबाजार-भाटापारा,  ठाकुर प्यारेलाल सिंह पुरस्कार प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति डोमा जिला धमतरी, हबीब तनवीर सम्मान डॉ. कुंज बिहारी शर्मा जिला रायपुर, महाराजा प्रवीरचंद भंजदेव सम्मान सु चांदनी साहू जिला बिलासपुर को प्रदान किया गया।  इसी प्रकार पंडित रविशंकर शुक्ल सम्मान  राजेश अग्रवाल जिला रायपुर, पंडित सुंदरलाल शर्मा सम्मान डॉ. चिंतरंजन कर जिला रायपुर, चक्रधर सम्मान पंडित कीर्ति माधव लाल व्यास जिला दुर्ग, दाऊ मंदराजी सम्मान  रिखी क्षत्रिय जिला दुर्ग, डॉ. खूबचंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार संयुक्त रूप से  थनेन्द्र कुमार साहू जिला धमतरी एवं  वामन कुमार टिकरिहा जिला बलौदाबाजार, महाराजा अग्रसेन सम्मान  राजेन्द्र अग्रवाल राजू जिला बिलासपुर, चन्दूलाल चन्द्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार प्रिंट मीडिया हिन्दी डॉ. संदीप कुमार तिवारी रायपुर एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हिन्दी का पुरस्कार संयुक्त रूप से डॉ. सोमेश कुमार पटेल एवं  अभिषेक शुक्ला रायपुर, मधुकर खेर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार प्रिंट मीडिया अंग्रेजी सु भावना पाण्डेय जिला दुर्ग, दानवीर भामाशाह सम्मान  नीरज कुमार बाजपेयी जिला राजनांदगांव, धन्वन्तरि सम्मान डॉ. अजय कृष्ण कुलश्रेष्ठ, मती बिलासादेवी केंवट मत्स्य विकास पुरस्कार  सुखदेव दास जिला रायपुर को प्रदान किया गया। इसी तरह डॉ. भंवरसिंह पोर्ते आदिवासी सेवा सम्मान जंगो रायतार विद्या केतुल शिक्षण संस्था ग्राम दमकसा जिला कांकेर, रामानुज प्रताप सिंहदेव स्मृति श्रम यशस्वी पुरस्कार संयुक्त रूप से  मिथलेश कुमार आदिल एवं अग्रसर टीम जिला दुर्ग तथा एनटीपीसी लिमि. लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट पुसौर जिला रायगढ़ , पंडित लखनलाल मिश्र सम्मान  योगेश कुमार साहू जिला कांकेर, छत्तीसगढ़ अप्रवासी भारतीय सम्मान  मनीष तिवारी जिला रायपुर, देवदास बंजारे स्मृति पंथी नृत्य पुरस्कार  रोहित कुमार कोसरिया जिला महासमुंद, किशोर साहू सम्मान  सुनील सोनी जिला रायपुर, लक्ष्मण मस्तुरिया सम्मान  राकेश तिवारी जिला रायपुर, लाला जगदलपुरी साहित्य पुरस्कार डॉ. विनोद कुमार वर्मा जिला बिलासपुर, किशोर साहू राष्ट्रीय अलंकरण  अनुराग बसु मुम्बई को प्रदान किया गया।   बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल सम्मान संयुक्त रूप से  खेमचंद जैन राजनांदगांव, डॉ. सुरेश मणि त्रिपाठी, डॉ. भूपेन्द्र करवंदे एवं  भरतलाल सोनी रायपुर को, वीरांगन अवंतिबाई लोधी स्मृति पुरस्कार मती प्रेमशीला बघेल महासमुंद को, माता बहादुर कलारिन सम्मान मती शिल्पा पाण्डेय सृष्टि जिला सरगुजा को, पंडित माधव राव सप्रे राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मान  अवधेश कुमार नई दिल्ली तथा संस्कृत भाषा सम्मान डॉ. दादू भाई त्रिपाठी जिला रायपुर को प्रदान किया गया। 

बीजापुर में विकास की नई पहल: माओवाद प्रभावित सात गांवों में पहली बार आयोजित हुआ मेगा हेल्थ कैंप

 बीजापुर में विकास की दस्तकः धुर माओवाद प्रभावित क्षेत्र के सात गांवों में पहली बार लगा मेगा हेल्थ कैंप 989 ग्रामीणों को मिला उपचार का लाभ रायपुर कभी माओवाद की छाया में सिमटे बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक के इन्द्रावती नदी पार बसे गांवों में अब विकास की नई सुबह दिखने लगी है। छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति 2025 के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर नजर आने लगे हैं। बड़ी संख्या में माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद अब इन दुर्गम इलाकों में प्रशासन ने पहली बार सात गांवों में एक साथ मेगा हेल्थ कैंप का आयोजन किया, जिसने ग्रामीणों के जीवन में उम्मीद की नई किरण जगा दी। इस अभियान में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम शामिल रही। टीम ने उसपरी, बेलनार, सतवा, कोसलनार, ताड़पोट, उतला और इतामपार गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाए। कुल 989 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। कैंप में सामान्य जांच के 777, रक्तचाप 371, मुख कैंसर 344, ब्रेस्ट कैंसर 112, नेत्र जांच 199, दंत जांच 154, टीकाकरण 14, संपूर्ण टीकाकरण 8, मलेरिया 156, क्षय रोग 7 तथा उल्टी-दस्त के 24 प्रकरणों की जांच की गई। इनमें 54 वरिष्ठ नागरिक भी शामिल रहे।  विशेषज्ञों ने एक बालक को हृदय रोग से ग्रस्त पाया, जिसे ‘चिरायु योजना’ के तहत उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी। कैंप के दौरान बीमार ग्रामीणों का मौके पर ही उपचार कर मुफ्त दवाइयों का वितरण किया गया। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुरूप साहू और डॉ. बी.एस. साहू ने बताया कि अब दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभ हो रही हैं, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है। ग्रामीणों में भी अब भय की जगह विश्वास और आशा का माहौल दिखाई दे रहा है। वे शासन-प्रशासन से जुड़कर शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के प्रति सजग हो रहे हैं। बीजापुर कलेक्टर  संबित मिश्रा ने स्वास्थ्य विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा “शासन के निर्देशानुसार प्रशासन अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के लिए संकल्पित है। ‘नियद नेल्लानार योजना’ के तहत अंदरुनी क्षेत्रों में विकास कार्यों में तेजी आई है और प्रशासन की टीमें पूरी तत्परता से काम कर रही हैं।”जिससे बीजापुर में अब सकारात्मक बदलाव नजर आ रहे है। बीजापुर में यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है, बल्कि यह संदेश भी दे रही है कि अब माओवाद नहीं, मुख्यधारा और विकास ही बीजापुर की नई पहचान बनेगा।

विकास की नई राह: बीजापुर के माओवाद प्रभावित गांवों में पहली बार लगा मेगा हेल्थ कैंप

989 ग्रामीणों को मिला उपचार का लाभ रायपुर, कभी माओवाद की छाया में सिमटे बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक के इन्द्रावती नदी पार बसे गांवों में अब विकास की नई सुबह दिखने लगी है। छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति 2025 के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर नजर आने लगे हैं। बड़ी संख्या में माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद अब इन दुर्गम इलाकों में प्रशासन ने पहली बार सात गांवों में एक साथ मेगा हेल्थ कैंप का आयोजन किया, जिसने ग्रामीणों के जीवन में उम्मीद की नई किरण जगा दी। इस अभियान में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम शामिल रही। टीम ने उसपरी, बेलनार, सतवा, कोसलनार, ताड़पोट, उतला और इतामपार गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाए। कुल 989 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। कैंप में सामान्य जांच के 777, रक्तचाप 371, मुख कैंसर 344, ब्रेस्ट कैंसर 112, नेत्र जांच 199, दंत जांच 154, टीकाकरण 14, संपूर्ण टीकाकरण 8, मलेरिया 156, क्षय रोग 7 तथा उल्टी-दस्त के 24 प्रकरणों की जांच की गई। इनमें 54 वरिष्ठ नागरिक भी शामिल रहे। विशेषज्ञों ने एक बालक को हृदय रोग से ग्रस्त पाया, जिसे ‘चिरायु योजना’ के तहत उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी। कैंप के दौरान बीमार ग्रामीणों का मौके पर ही उपचार कर मुफ्त दवाइयों का वितरण किया गया। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुरूप साहू और डॉ. बी.एस. साहू ने बताया कि अब दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभ हो रही हैं, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है। ग्रामीणों में भी अब भय की जगह विश्वास और आशा का माहौल दिखाई दे रहा है। वे शासन-प्रशासन से जुड़कर शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के प्रति सजग हो रहे हैं। बीजापुर कलेक्टर श्री संबित मिश्रा ने स्वास्थ्य विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा “शासन के निर्देशानुसार प्रशासन अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के लिए संकल्पित है। ‘नियद नेल्लानार योजना’ के तहत अंदरुनी क्षेत्रों में विकास कार्यों में तेजी आई है और प्रशासन की टीमें पूरी तत्परता से काम कर रही हैं।”जिससे बीजापुर में अब सकारात्मक बदलाव नजर आ रहे है। बीजापुर में यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है, बल्कि यह संदेश भी दे रही है कि अब माओवाद नहीं, मुख्यधारा और विकास ही बीजापुर की नई पहचान बनेगा।

श्रद्धा और सौंदर्य का संगम – सिरौली मेला की गाथा

दक्षिणामुखी हनुमान मंदिर से जुड़ी शताब्दी पुरानी कथा, कार्तिक पूर्णिमा पर उमड़ता जनसमूह एमसीबी मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले का सिरौली ग्राम हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्रद्धा, संस्कृति और सौंदर्य का अद्भुत संगम बन जाता है। यहां स्थित दक्षिणामुखी संकट मोचन हनुमान मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि एक ऐसा स्थान भी है जहां इतिहास, किवदंती और लोकविश्वास एक सूत्र में गुंथे हैं। तीन दिवसीय सिरौली मेला का आरंभ होते ही पूरे क्षेत्र में भक्ति का वातावरण व्याप्त हो जाता है। जंगल की गोद से निकली आस्था की ज्योति इतिहासकार एवं जिला पर्यटन नोडल अधिकारी डॉ. विनोद पांडेय बताते हैं कि सिरौली मंदिर का उद्भव किसी स्थापत्य योजना से नहीं, बल्कि एक अनोखी दैवी प्रेरणा से हुआ। कहा जाता है कि लगभग सन 1924-25 से पूर्व यह इलाका घने जंगलों से घिरा था। स्थानीय गोवाहिकों को एक दिन जंगल के भीतर एक दिव्य प्रतिमा के दर्शन हुए। यह बात तत्कालीन कोरिया नरेश श्री रामानुज प्रताप सिंहदेव तक पहुंची। नरेश स्वयं अपने सेवकों के साथ इस रहस्यमयी स्थल पर आए। उन्होंने वृक्षों की सफाई कर प्रतिमा को खुदवाने का आदेश दिया, किंतु प्रतिमा का दाहिना पैर अनंत गहराई में धंसा हुआ था। रात में नरेश को स्वप्न में आदेश प्राप्त हुआ – “हनुमान जी की प्रतिमा को यहां पूजो, इसे कहीं और न ले जाओ।” इस दैवी संकेत के बाद विक्रम संवत 2016 (1924-25 ई.) में दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर की स्थापना की गई। मंदिर के प्रथम महंत स्वर्गीय नीलकंठ शुक्ल महाराज रहे। तभी से कार्तिक पूर्णिमा पर मेले की परंपरा प्रारंभ हुई, जो आज तक निरंतर जारी है। मेले में उमड़ती श्रद्धा और उल्लास की लहर हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के दिन सिरौली का यह पावन स्थल श्रद्धालुओं से भर उठता है। दूर-दराज़ के गांवों से लोग पैदल, वाहन या बैलगाड़ी से यहां पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में हनुमान जी के दर्शन, पूजा-अर्चना और मन्नतें मांगने वालों की भीड़ उमड़ती है। स्थानीय श्रद्धालु परंपरा के अनुसार भंडारे का आयोजन करते हैं। मेला प्रांगण में झूले, खिलौनों की दुकानें, पूजा सामग्री, हस्तशिल्प, और खानपान के ठेले पूरे वातावरण को रंगीन बना देते हैं। बच्चों की हंसी और शंख-घंटियों की ध्वनि के बीच आस्था की यह महक सिरौली को एक जीवंत लोक उत्सव में बदल देती है। प्रकृति की गोद में बसा यह तीर्थ मंदिर से मात्र 50-60 मीटर दूरी पर हसदो नदी कलकल बहती है, जो स्थल को और अधिक पवित्र बनाती है। वहीं लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित उदलकछार जलप्रपात अपनी श्वेतधारा से पर्यटकों को मोह लेता है। श्रद्धा के साथ-साथ प्रकृति की यह सुषमा सिरौली को आध्यात्मिक और पर्यटन – दोनों दृष्टियों से विशिष्ट बनाती है। लोक परंपरा की जीवंत धरोहर सिरौली मेला केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह हमारी लोक संस्कृति, सामाजिक एकता और ऐतिहासिक चेतना का प्रतीक है। एक सदी से अधिक समय से यह मेला निरंतर लोगों को जोड़ता आया है – पीढ़ी दर पीढ़ी भक्ति और परंपरा की यह ज्योति आज भी समान तेज से प्रज्वलित है। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर सिरौली की यह पवित्र भूमि आज भी यही संदेश देती है। “जहां आस्था है, वहीं संस्कृति जीवित है।”

जनशक्ति, संस्कृति और विकास का संगम: रजत जयंती राज्योत्सव का भव्य समापन

मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने 2047 तक पूर्ण विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प दोहराया एमसीबी मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2025 का रजत जयंती समापन अद्भुत उत्साह, सांस्कृतिक भव्यता और जनभागीदारी के साथ सम्पन्न हुआ। पूरे आयोजन स्थल में लोककला, परंपरा, विकास और गौरव का जीवंत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भरतपुर-सोनहत विधायक श्रीमती रेणुका सिंह तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल उपस्थित रहे। इनके साथ जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती यशवंती सिंह, जनपद अध्यक्ष, नगर निकाय प्रमुख एवं जिले के अन्य जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए। सभी अतिथियों ने छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलन कर राज्य गीत के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। कार्यक्रम में मुख्य आकर्षण के रूप में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को विशेष रूप से बढ़ाया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि— “रजत जयंती केवल उत्सव नहीं, यह छत्तीसगढ़ की विकास-गाथा और जनता के परिश्रम का उत्सव है। हमारा लक्ष्य 2047 तक छत्तीसगढ़ को पूर्ण विकसित और आत्मनिर्भर राज्य के रूप में स्थापित करना है।” मंत्री श्री जायसवाल ने आगे कहा कि सरकार आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सहायता योजना के माध्यम से निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को हर नागरिक तक पहुँचा रही है। उन्होंने जिले में शीघ्र ही स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत करने की भी घोषणा की।                                 इससे पूर्व कलेक्टर डी. राहुल वेंकट ने रखी जिले की विकास गाथा, कलेक्टर डी. राहुल वेंकट ने स्वागत भाषण में कहा कि एमसीबी जिला वर्ष 2022 में गठन के बाद से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, सड़क, पर्यटन और आजीविका मिशन में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्योत्सव आत्ममंथन का अवसर है कृ यह सोचने का समय है कि अगले 25 वर्षों में “नवा छत्तीसगढ़” को किस ऊँचाई तक ले जाना है। उन्होंने कहा कि यह उत्सव “जनसेवा, जनभागीदारी और जनविश्वास” का प्रतीक बन चुका है।      विभागीय प्रदर्शनी और योजनाओं का लाभ वितरण    राज्योत्सव स्थल पर लगाए गए 20 से अधिक विभागीय स्टॉल आकर्षण का केंद्र बने। शासन की योजनाओं, नवाचारों और उपलब्धियों की जानकारी देने के साथ ही विभिन्न योजनाओं के लाभ भी वितरण किए गए। श्रमिक पंजीयन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, मोटराइज्ड साइकिल, व्हीलचेयर, वनाधिकार पट्टा, स्वच्छता किट, आइस बॉक्स और मछली पकड़ने के जाल जैसी सुविधाएँ लाभार्थियों को प्रदान की गईं। विधायक रेणुका सिंह और मंत्री जायसवाल ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर लाभार्थियों से संवाद भी किया।                     समारोह में भरतपुर-सोनहत विधायक श्रीमती रेणुका सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती यशवंती सिंह सहित जनप्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ की 25 वर्ष की विकास यात्रा को जनशक्ति, मातृत्व शक्ति और युवाशक्ति की उपलब्धि बताया। सांस्कृतिक मंच पर पंथी, राउत नाचा, करमा नृत्य और पारंपरिक लोकगीतों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित स्थानीय उत्पाद और वनोपज आत्मनिर्भरता के संदेश का केंद्र बने। समापन के अवसर पर पूरे पंडाल में एक स्वर में उद्घोष गूँजा—“जय जोहार, जय छत्तीसगढ़, हमर गौरव हमर पहचान”।

उसे ढूंढ निकालो! — महादेव बेटिंग ऐप मामले में सुप्रीम कोर्ट का ईडी को कड़ा निर्देश

नई दिल्ली महादेव बेटिंग ऐप घोटाले में फरार चल रहे सह-संस्थापक रवि उप्पल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सख्त निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे आरोपी कानून और जांच एजेंसियों के साथ खेल नहीं सकते। कोर्ट ने उप्पल की याचिका खारिज करते हुए टिप्पणी की, यह चौंकाने वाला मामला है, अदालत को अब कुछ करना ही होगा। उसे ढूंढ निकालो। दुबई से भी फरार हुआ आरोपी रवि उप्पल, जो लंबे समय से दुबई में रह रहा था, भारतीय एजेंसियों के प्रत्यर्पण प्रयासों के बीच वहां से भी फरार हो गया। अब उसकी मौजूदगी का कोई स्पष्ट सुराग नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच जस्टिस एम.एम. सुंद्रेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने ईडी को उसकी तलाश की जिम्मेदारी सौंपी है। अदालत ने कहा कि उप्पल की पहुंच काफी लंबी है, तभी वह लगातार जगह बदल रहा है। ईडी का पक्ष और कोर्ट की प्रतिक्रिया अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अदालत को बताया कि रवि उप्पल को 2023 में दुबई में हिरासत में लिया गया था, लेकिन वह दुबई की जेल से भी फरार हो गया है। इस पर जस्टिस सुंद्रेश ने सख्त लहजे में कहा, वह हर बार भाग नहीं सकता। अंततः उसे इस प्रक्रिया का हिस्सा बनना ही पड़ेगा। साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत के सवाल पर हम नरमी बरतने को तैयार हैं, लेकिन सही समय आने पर ही उस पर विचार किया जाएगा। महादेव ऐप घोटाला महादेव बेटिंग ऐप कथित रूप से एक ऑनलाइन सट्टेबाज़ी नेटवर्क है, जिसके जरिए देशभर में हजारों करोड़ रुपए के लेन-देन किए गए। ईडी का आरोप है कि ऐप के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स चोरी और विदेशी निवेश नियमों का उल्लंघन किया गया। रवि उप्पल और उसका सहयोगी सौरभ चंद्राकर इस पूरे नेटवर्क के कथित मास्टरमाइंड बताए जाते हैं।

उप राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने देखा एयर शो

रायपुर, छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ पर आज नवा रायपुर के सेंध जलाशय के ऊपर भारतीय वायु सेना की प्रतिष्ठित एरोबेटिक "सूर्यकिरण" की टीम ने रोमांचक एयर शो का प्रदर्शन किया। देश के उप राष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन, राज्यपाल श्री रमेन डेका, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के साथ हजारों लोगों ने अद्भूत और रोमांचक एयर शो का आनंद लिया। आज प्रदेशवासियों के लिए वायु सेना का एयर शो कमाल का अनुभव रहा। सेंध जलाशय के ऊपर वायु सेना के फाइटर प्लेन्स ने एक के बाद एक कई हवाई करतब दिखाए। आसमान में पंछियों के झुंड की तरह बिल्कुल क्रम से उड़ने वाले फाइटर प्लेन्स के माध्यम से वायु सेना के जाबांजों ने अपने नियंत्रण और शौर्य का अद्भुत प्रदर्शन किया। विमानों के माध्यम से जब आकाश में तिरंगा लहराया तो सेंध जलाशय भारत माता की जय के नारे से गूंज उठा। एयर शो के दौरान "सूर्यकिरण" टीम के लीडर ग्रुप कैप्टन श्री अजय दशरथी ने आसमान से छत्तीसगढ़वासियों को रजत महोत्सव की बधाई दी। वहीं छत्तीसगढ़ निवासी भारतीय वायु सेना के स्क्वाड्रन लीडर श्री गौरव पटेल ने सेंध जलाशय के ऊपर अपने कॉकपिट से 'जय जोहार' और 'छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया' कहकर दर्शकों का अभिवादन किया। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप, खाद्य मंत्री श्री दयाल दास बघेल, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, कौशल विकास मंत्री गुरू खुशवंत साहेब और सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल सहित विभिन्न निगमों, मंडलों और आयोगों के पदाधिकारी भी एयर शो देखने पहुंचे थे। "सूर्यकिरण" टीम ने अनुशासन, परस्पर विश्वास, सटीकता और उत्साह के साथ एक घंटे तक वायु सेना के विमानों के साथ कलाबाजी दिखाकर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। नवा रायपुर के सेंध जलाशय में मौजूद हजारों दर्शक पायलटों के हैरतअंगेज साहस और करतबों को देखकर मंत्रमुग्ध होते रहे। विंग कमांडर श्री ए.व्ही. सिंह के नेतृत्व में वन-एफ-9 और वन-एफ-8 हेलीकॉप्टर यूनिट ने वी-17 और वी-5 हेलीकॉप्टरों से स्लीपरी और स्काई-ऑपरेशन के करतब दिखाए। 'आदिदेव' नाम के इन हेलीकॉप्टरों से केवल 15 मीटर ऊंचाई पर स्थिर रहकर 14 गरूड़ कमांडोज रस्सी के सहारे नीचे उतरे। वहीं स्काई-ऑपरेशन के दौरान आठ गरूड़ कमांडोज रस्सी पर लटककर हेलीकॉप्टर से दर्शकों के सामने से आकाश में उड़ते हुए गुजरे। इन दोनों ऑपरेशनों को लड़ाई और आपदा के दौरान जनसामान्य को बचाने के लिए किया जाता है। एयर शो में "सूर्यकिरण" की टीम के नौ हॉक-मार्क-123 फाइटर विमानों ने आसमान में हार्ट, डायमंड, लूप, ग्रोवर, डान लाइट, कॉम्बैट तेजस जैसे शानदार फार्मेशन बनाकर लोगों को रोमांचित किया। नीले आसमान में उड़ते लाल-सफेद जेट विमानों द्वारा तिरंगे की आकर्षक ट्रेल छोड़ने पर सेंध जलाशय परिसर तालियों और जय-हिंद के नारों से गूंज उठा। हज़ारों की संख्या में मौजूद नागरिक, युवा और बच्चे लगातार विमानों की कलाबाजियों को अपने कैमरों और मोबाइलों में कैद करते रहे। वायु सेना के जाबांज फाइटर पायलटों ने आसमान में दिल की आकृति बनाकर 25वें राज्योत्सव की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने तिरंगे के तीन रंगों से डीएनए की आकृति बनाकर तिरंगे के प्रति अपना सम्मान प्रस्तुत किया। उन्होंने 360° में फाइटर जेट उड़ाते हुए उल्टा जेट भी उड़ाया। तेजस और युवाओं को समर्पित अंग्रेजी अक्षर 'वाई' की आकृति बनाने के साथ ही कई करतब दिखाए। टीम का प्रदर्शन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि युवाओं में देशप्रेम, साहस और भारतीय सशस्त्र बलों में सेवा की प्रेरणा जगाने का संदेश भी देता है। एयर शो में छत्तीसगढ़ के स्क्वाड्रन लीडर श्री गौरव पटेल का शामिल होना राज्यवासियों के लिए गर्व और भावनात्मक जुड़ाव का पल था। आसमान में अपने विमान को तेज गति से उड़ाते हुए श्री पटेल ने अपने कॉकपिट से 'जय जोहार' और 'छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया' का जय घोष किया। फ्लाइट लेफ्टिनेंट सुश्री कंवल संधू ने अपनी लाइव कमेंट्री के दौरान एयर शो के रोमांचक वर्णन के साथ ही पायलटों के अनुशासन, समर्पण, प्रशिक्षण और जोखिम प्रबंधन की बारीकियों की जानकारी दी। 'सूर्यकिरण' एशिया की एकमात्र नौ लड़ाकू विमानों वाली एरोबैटिक टीम, 1996 में हुई थी स्थापना भारतीय वायु सेना की सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम (Surya Kiran Aerobatic Team) एशिया की एकमात्र नौ लड़ाकू विमानों वाली एरोबैटिक टीम है। यह विशिष्ट टीम भारत में ही निर्मित एचएएल (HAL) लाइसेंस प्राप्त हॉक एमके-132 (Mk-132) विमान उड़ाती है। इन विमानों के ज़रिए भारतीय वायु सेना की सटीकता, पेशेवर उत्कृष्टता और कौशल का अद्भुत प्रदर्शन करती है, जिसमें रोमांचक हवाई करतब और बेहद सटीक फॉर्मेशन शामिल होते हैं। सूर्यकिरण टीम को उसका मिशन विशेष बनाता है। देश के युवाओं को भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होकर देशसेवा के लिए प्रेरित करना इनका मिशन है। सूर्यकिरण टीम की स्थापना वर्ष 1996 में की गई थी। तब से यह टीम एशिया की एकमात्र नौ-विमानों वाली एरोबैटिक टीम होने का गौरव रखती है और दुनिया की कुछ चुनिंदा शीर्ष एरोबैटिक टीमों में शामिल है। यह असाधारण टीम अब तक भारत भर में 700 से अधिक प्रदर्शन कर चुकी है। साथ ही चीन, श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे कई देशों में भारत का प्रतिनिधित्व अंतरराष्ट्रीय एयर शोज़ में भी किया है। टीम मंं कुल 13 पायलट, 3 इंजीनियरिंग अधिकारी, 1 उद्घोषक (कमेन्टेटर) और 1 चिकित्सा अधिकारी शामिल हैं। सूर्यकिरण टीम भारतीय वायुसेना की उस भावना को दर्शाती है जो उत्कृष्टता, अनुशासन और टीमवर्क पर आधारित है। टीम के सभी पायलट अत्यंत कठिन प्रशिक्षण से गुजरते हैं, जिसमें जटिल एरोबैटिक मूवमेंट्स का महीनों तक अभ्यास किया जाता है। उनका बेदाग़ तालमेल और नियंत्रण ही क्लोज़ फॉर्मेशन फ्लाइंग की नींव है जहाँ नौ विमान मानो एक ही आत्मा से संचालित प्रतीत होते हैं।