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प्रशांत किशोर फिर चर्चा में: नई शर्तों के साथ राजनीति से दूरी और मौन व्रत की घोषणा

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में शून्य पर सिमटने वाली जनसुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने आखिरकार सामने आ ही गए। पटना में उन्होंने प्रेस वार्ता की। उन्होंने पार्टी की हार की जिम्मेदारी ली। उन्होंने कहा कि हमलोगों से जरूर कुछ गलती हुई है। इसलिए ऐसा परिणाम दिया। जनता ने हमलोगों को नहीं चुना। जनता ने हमलोगों पर विश्वास नहीं दिखाया। इस हार की जिम्मेदारी पूरी तरह से मेरी है। जिस प्रयास से हमलोग जुड़े थे, उनका विश्वास नहीं जीत पाया। हमलोग सामूहिक तौर पर हारे हैं। जो लोग जीतकर आए, उन्हें मैं बधाई देता हूं। सीएम नीतीश कुमार और भाजपा को बधाई। हमलोग बिहार से गरीबी दूर करने और पलायन कम होने की कामना करते हैं। मैं बिहार की जनता की अपेक्षाओं पर खड़ा नहीं उतर सका, इसके लिए मैं माफी चाहता हूं। प्रायश्चित के तौर पर मैं भितिहरवा गांधी आश्रम में एक दिन का मौन उपवास रखूंगा। जो भी जनसुराज के साथी हैं, सभी लोग भितिहरवा गांधी आश्रम में 24 घंटे का उपवास रखूंगा। प्रशांत किशोर ने कहा कि गलती हो सकती है। लेकिन, हमने गुनाह नहीं किया है। मैं सिर उठाकर कह सकता हूं कि मैंने कोई गुनाह नहीं किया है। मैंने जातियों का जहर फैलाने का गुनाह नहीं किया। मैंने जनता का मत खरीदने की कोशिश नहीं की। जिस तरह महाभारत में अभिमन्यु को घेरकर छल से मार दिया गया। लेकिन, महाभारत नहीं जीता नहीं गया। जीत उसकी ही हुई जो धर्म के साथ थे। हमलोग फिर से खड़े होंगे। हमलोग जब तक जीतेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं। जब तक व्यवस्था को सुधार नहीं देते तब तक पीछे नहीं हटेंगे। अब दोगुनी मेहनत से बिहार की जनता के लिए काम करेंगे। प्रशांत किशोर ने कहा कि 10 हजार रुपये की बड़ी चर्चा हो रही है। यह बात सही नहीं है। 10 हजार रुपये के लिए जनता अपने बच्चों का भविष्य नहीं बेच सकते हैं। लोगों ने सिर्फ 10 हजार रुपये के लिए अपना वोट नहीं बेचा। चुनाव आयोग पर भी टीका-टिप्पणी करने का वक्त नहीं है। पूरा सरकारी तंत्र लगाया गया यह बताने में कि अगर आप एनडीए को वोट करते हैं, आप दो लाख रुपये दिया जाएगा। इसके लिए 10 हजार रुपये बयाना के तौर पर दिया गया। हर विधानसभा जीविका, आंगनबाड़ी, ममता, प्रवासी मजदूरों को करीब 29 हजार करोड़ रुपये सरकार ने बांट दिए। 40 हजार करोड़ रुपये की योजना लाई। हमलोग आपके लिए लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं प्रशांत किशोर ने कहा कि सरकार से मैं अपील करता हूं कि आपने जिन्हें 10 हजार रुपये दिए, उन सभी महिलाओं को दो लाख रुपये दे दीजिए। ताकि वह अपना रोजगार खड़ा कर सके। अगर ऐसा नहीं हुआ तो 10 हजार रुपये केवल वोट के लिए खरीदे गए। मैंने जदयू को 25 सीटों से अधिक आने पर मैंने राजनीति से संन्यास लेने की बात कही थी। मैं इस पर अब भी अडिग हूं। नीतीश कुमार को 25 सीट से ज्यादा न आनी चाहिए थी और न आती। लेकिन, 10 हजार रुपये देकर उन्होंने वोट खरीदा। मैंने आज एलान करता हूं कि अगले छह महीने में एनडीए सरकार ने 10 हजार देने वालों को दो लाख रुपये दे देगी तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा। मैंने आपको शिकायत करने के लिए नंबर भी जारी कर दिया। यह चौबीसों घंटे सातों दिन चालू रहेगा। अगर आपके खाते में दो लाख रुपये छह महीने के अंदर नहीं आते हैं तो आप इस पर फोन कर जानकारी दें। हमलोग आपके लिए लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। 'मैं जनसुराज में किसी पद पर नहीं हूं, इसलिए संन्यास नहीं ले सकता' वहीं जदयू को 25 सीटों से अधिक आने पर सन्यास लेने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं जनसुराज में किसी पद पर नहीं हूं। इसलिए मैं किस हक से संन्यास लूं। मैंने राजनीति छोड़ने की बात कही थी। मैं इस बात पर अडिग हूं। मैंने राजनीति नहीं कर रहा हूं। नीतीश सरकार ने डेढ़ करोड़ लोगों को 10-10 हजार रुपये दिए हैं। पूरे देश में बहस छिड़ी हुई है। चुनाव आयोग ने चुनाव के दौरान पैसे बांटने दिए, यह उनकी गलती है? इस पर मैंने टिप्पणी नहीं करूंगा। प्रशांत किशोर ने दावा किया कि हमलोग हारे नहीं हैं। हमलोग तो रेस में ही नहीं हैं। पीके ने उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी पर भी उठाया सवाल प्रशांत किशोर ने कहा कि मधुबनी क्षेत्र में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का सिंबल कोई नहीं जानता है। लेकिन, उस क्षेत्र में सवा लाख वोट आया। जो लोग कई साल से वहां राजनीति कर रहे हैं, उन्हें हजार में वोट आया है। कई सीटें ऐसी है कि चुनाव से 10 दिन पहले तय हुआ कि इस सीट से कौन सी पार्टी चुनाव लड़ेगी? इसके बाद उस पार्टी उन सीटों पर एक लाख से ज्यादा वोट आया है। मेरा यही सवाल है कि ऐसी कौन सी विधा है कि यह लोग ऐसा कर दिए। हमलोग तीन साल से उस क्षेत्र में घूमे। करीब 30 प्रतिशत लोगों को उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का सिंबल नहीं पता था। ऐसे में एक लाख से ज्यादा वोट कैसे आ गया? यह बड़ा सवाल है। पाकिस्तान के इमरान खान का भी पीके ने दिया उदाहरण प्रशांत किशोर ने पाकिस्तानी में इमरान खान के चुनाव लड़ने के मॉडल का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान में इमरान खान ने करीब 25-30 साल पहले अपनी पार्टी शुरू की। उनकी पार्टी ने सात सीटों पर चुनाव लड़ी थे। सभी सीटों पर इमरान खान की पार्टी हार गई। तो मेरे चुनाव लड़ने या नहीं लड़ना फैसला एक अलग विषय है लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि पिछले तीन साल में जनसुराज ने जो भी प्रयास किया, उसे जनता ने स्वीकार नहीं किया। मुझे लालू यादव, नीतीश कुमार, सम्राट चौधरी, अशोक चौधरी जैसे धुरंधर नेताओं की तरह बिहार की समझ नहीं है। क्योंकि, मैंने भ्रष्टाचार नहीं किया। मुझे नहीं समझ है कि बिहार को जातियों, धर्म के नाम पर बिहार को कैसे बांटा जाए? मुझे नहीं समझ है कि बिहार में 10 हजार रुपया देकर वोट कैसे खरीदे जाए।  

20 को शपथ समारोह: BJP-JDU के बराबर मंत्री, चिराग–मांझी–कुशवाहा की पार्टियों को मिला प्रतिनिधित्व

पटना बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के नेतृत्व में नई सरकार की प्रक्रिया तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज कैबिनेट की बैठक के बाद राज्यपाल इस्तीफा सौंपेंगे और इसके बाद नई सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। 20 नवंबर को शपथ ग्रहण समारोह होगा। नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। उनके समेत कुल 36 मंत्री नई सरकार में मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। इसका फॉर्मूला तय हो चुका है। एनडीए के सभी घटक दल के नेता नीतीश कुमार से मुख्यमंत्री आवास पर जाकर मिल चुके हैं। नई सरकार में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाईटेड से 16, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से दो, हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा से एक-एक मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। 24 से 48 घंटे में सभी पार्टियां अपने-अपने मंत्रियों की सूची फाइनल कर लेगी।   दिल्ली में हुई थी एनडीए के वरिष्ठ नेताओं की बैठक दरअसल, रविवार को पीएम नरेंद्र मोदी के एनडीए के वरिष्ठ नेताओं के साथ हुई थी। इसमें नई सरकार के रूपरेखा पर बातचीत हुई। इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह के साथ जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की बैठक में किस पार्टी के कितने मंत्री होंगे? यह तय हो चुका है। इधर, एनडीए के घटक दल अपने-अपने विधायक दल के नेता चुनने की कवायत में लगे हैं। चिराग पासवान ने अपने दल का नेता राजू तिवारी को चुना है। जानिए, क्या है फॉर्मूला मंत्री बनाने का दिल्ली में पीएम मोदी के साथ हुई बैठक में छह विधायकों पर एक मंत्री बनाने का फॉर्मूला तय हुआ है। इसके आधार पर जदयू के खाते में सीएम नीतीश कुमार समेत 16 मंत्री, भाजपा के खाते में दो डिप्टी सीएम समेत 16 मंत्री, लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के खाते में दो मंत्री पद देने की बात सामने आ रही है। हालांकि, चिराग की पार्टी के नेता अपने खाते में तीन मंत्री चाहते हैं। उनका कहना है कि अगर छह विधायकों के फॉर्मूले को मनाना है तो उस हिसाब से उनके 19 विधायक हैं। इसलिए तीन मंत्री का पद देना ज्यादा बेहतर होगा। राजनीतिक पंडितो का कहना है कि विधायकों की संख्या के आधार पर भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। इसलिए वह दो सीएम सीएम समेत 16 मंत्री को शपथ दिला सकती है। वहीं जदयू को सीएम पद के साथ 15 मंत्री शपथ दिला सकते हैं। अगर जदयू 15 पर मान लेती है तो इसका फायदा चिराग को मिलेगा। इस स्थिति में चिराग की पार्टी में तीन मंत्री शपथ ले पाएंगे। जानिए किस पार्टी के कितने विधायक एनडीए ने 243 सदस्यीय विधानसभा में 200 से अधिक सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया। इसमें भाजपा ने अधिकतम 89 सीटें जीतीं, उसके बाद जदयू ने 85 सीटें जीतीं, जबकि केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) ने 19 सीटें हासिल की। वहीं जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा से पांच और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा से चार विधायक बने। 

नीतीश कुमार को जदयू विधायक दल की कमान, भाजपा ने सम्राट चौधरी को बनाया नेता—विजय सिन्हा उपनेता

पटना जनता दल यूनाईटेड के नवनिर्वाचित विधायकों ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को फिर से अपना नेता चुन लिया है। बुधवार सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री आवास में जदयू के विधायक दल की बैठक हुई। साढ़े 11 बजे जदयू के विधायकों ने सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को विधायक दल का नेता चुन लिया है। जदयू के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने कहा कि बिहार की जनता उत्साहित है, उन्होंने नीतीश कुमार अपना नेता चुना है। मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी की पहली और अंतिम पसंद नीतीश कुमार ही हैं। नई सरकार में मंत्री बनाए जाने के सवाल पर रजक ने कहा कि इसका फैसला नीतीश कुमार करेंगे। विधायक दल की बैठक से पहले जदयू विधायक मनोरमा देवी ने कहा कि यह बिहार के लिए बहुत अच्छा दिन है। हमारे अभिभावक नीतीश कुमार जी हैं और वह सभी के कल्याण के लिए काम करेंगे। इधर, भारतीय जनता पार्टी के विधायकों की बैठक पार्टी कार्यालय में हो रही है। भाजपा के विधायकों ने सम्राट चौधरी के विधायक दल का नेता चुन लिया है। यानी वह डिप्टी सीएम बनेंगे। वहीं विजय सिन्हा को उपनेता चुना गया है। वह भी दूसरे डिप्टी सीएम बन सकते हैं। लेकिन, दूसरे डिप्टी सीएम पद के लिए फिलहाल मंथन जारी है। भाजपा दोनों डिप्टी सीएम का पद अपने पास रखना चाहती है। इधर, 19 सीट लाने वाली चिराग पासवान की पार्टी एक डिप्टी सीएम समेत तीन मंत्री का पद चाहती है। इस मुद्दे पर भी बातचीत चल रही है। दोपहर 3.30 बजे विधानसभा के सेंट्रल हॉल में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की बैठक होगी। इसमें भारतीय जनता पार्टी, जनता दल यूनाईटेड, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा, लोक जनशक्ति पार्टी के सभी नव निर्वाचित विधायक और नीतीश कुमार, चिराग पासवान, संतोष सुमन, उपेंद्र कुशवाहा, सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा मौजूद रहेंगे। इधर, कुछ ही देर में गृह मंत्री अमित शाह भी पटना पहुंचेंगे। वह भारतीय जनता पार्टी की बैठक में शामिल होंगे।

बिहार विधानसभा का अध्यक्ष के लिए प्रेम कुमार और तारकिशोर आगे

पटना बिहार विधानसभा का अध्यक्ष बनने के लिए एनडीए के घटक दलों में लंबी कतार है। जदयू भी अध्यक्ष पद पर दावा कर रहा है, लेकिन भाजपा निश्चिंत है। भाजपा के वरिष्ठ विधायक प्रेम कुमार और पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद का नाम आगे चल रहा है। कुमार नौंवी बार गया शहर से विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। वे विपक्ष के नेता भी रह चुके हैं। निवर्तमान मंत्रिमंडल में सहकारिता मंत्री हैं। वे अति पिछड़ी जाति से आते हैं। तारकिशोर प्रसाद पांचवीx बार कटिहार से भाजपा उम्मीदवार की हैसियत से चुनाव जीते हैं। वे 2020-22 के बीच राज्य के उपमुख्यमंत्री रहे हैं। सामाजिक समीकरण के हिसाब से वे वैश्य बिरादरी के हैं, जिन्हें भाजपा का कोर वोटर माना जाता है। इनके अलावा दानापुर के भाजपा विधायक रामकृपाल यादव को भी इस पद के योग्य माना जा रहा है।रामकृपाल केंद्र सरकार में राज्यमंत्री रहे हैं।वे उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें लोकसभा, राज्यसभा, विधान परिषद और विधानसभा सदस्य बनने का अवसर मिला है। वे पटना नगर निगम के डिप्टी मेयर भी रह चुके हैं। अगर यह पद जदयू के हिस्से में जाता है तो 17वीं विधानसभा के उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव को अध्यक्ष पद पर बिठाया जा सकता है। सहज और मृदुभाषी नरेंद्र नारायण यादव मधेपुरा जिला के आलमनगर विधानसभा क्षेत्र से लगातार आठवीं बार विधायक चुने गए हैं। नेतृत्व का हरेक निर्णय स्वीकार्य: प्रेम कुमार भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रेम कुमार ने कहा है कि केंद्रीय नेतृत्व का हरेक निर्णय उन्हें स्वीकार्य है। विधानसभा अध्यक्ष बनने के प्रश्न पर मंगलवार को उन्होंने कहा-नेतृत्व अगर निर्देश देता है तो वे इस भूमिका को सहर्ष स्वीकार करेंगे। उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा उनसे मिलने पहुंचे थे। सिन्हा ने कहा कि प्रेम कुमार ने पार्टी की ओर से दी गई हरेक भूमिका का निर्वहन गंभीरता से किया किया है। कृषि और सहकारिता मंत्री के रूप में उनकी सेवा यादगार है।

विधानसभा नियुक्ति विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने कहा—अभी नहीं होगी CBI जांच

रांची झारखंड विधानसभा में नियुक्तियों और पदोन्नतियों में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल इस मामले में सीबीआई जांच शुरू नहीं होगी। अदालत ने मंगलवार को सीबीआई द्वारा दायर उस इंटरलोक्यूटरी आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें उसने विधानसभा नियुक्ति घोटाले पर लगी रोक हटाकर प्रारंभिक जांच (प्रिलिमिनरी इन्क्वायरी) आगे बढ़ाने की अनुमति मांगी थी। चीफ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने सुनवाई के दौरान झारखंड विधानसभा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि यह मामला राजनीति से प्रेरित है।  जब भी इस तरह के मुद्दे आते हैं, सीबीआई बिना कारण बीच में कूद पड़ती है। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा की याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट पहले ही सीबीआई जांच पर रोक लगा चुकी है, इसलिए सीबीआई का इस मामले में आगे बढ़ने का कोई आधार नहीं है। सीबीआई की ओर से एएसजी एसवी राजू ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि नियुक्तियों में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं और एजेंसी को जांच करने दी जानी चाहिए। हालांकि, पीठ ने यह तर्क अस्वीकार कर दिया और कहा कि दायर आवेदन स्वीकार करने योग्य नहीं है। सुनवाई के दौरान पीठ ने सीबीआई की भूमिका पर तीखी टिप्पणी की। सीजेआई गवई ने सवाल किया, ''आप अपनी राजनीतिक लड़ाइयों के लिए एजेंसी का इस्तेमाल क्यों करते हैं? कई मामलों में हमने कहा है कि जांच एजेंसियों के दुरुपयोग पर रोक लगनी चाहिए।'' दरअसल, सामाजिक कार्यकर्ता शिव शंकर शर्मा ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि विधानसभा में बड़े पैमाने पर अवैध नियुक्तियां हुई हैं, जिनकी सीबीआई कराई जानी चाहिए। याचिका में कहा गया था कि 2018 में तत्कालीन राज्यपाल ने विधानसभा में हुई कथित अनियमितताओं की जांच के लिए 30 बिंदुओं पर कार्रवाई का निर्देश दिया था, लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ। सितंबर 2024 में झारखंड हाईकोर्ट ने शर्मा की याचिका स्वीकार करते हुए सीबीआई को प्रारंभिक जांच का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि आरोप गंभीर हैं और इनमें ''उच्च पदों पर बैठे लोगों की मिलीभगत'' की आशंका है, इसलिए राज्य पुलिस द्वारा निष्पक्ष जांच संभव नहीं मानी जा सकती।  हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ झारखंड विधानसभा और राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की। इस याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट ने बिना मजबूत आधार के, राज्य की एजेंसी को अयोग्य बताते हुए सीधे सीबीआई को पहली जांच एजेंसी बना दिया, जो न्यायिक दृष्टि से सही नहीं है। इस याचिका पर नवंबर 2024 में सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सीबीआई जांच के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पहले यह तय किया जाएगा कि क्या सीबीआई को सीधे जांच सौंपने का आधार मजबूत था या नहीं। मामले की अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट सीबीआई के आवेदन और हाईकोर्ट के आदेश की वैधता पर विस्तृत सुनवाई करेगा।

नई सरकार का मंत्रिमंडल फाइनल? इस मंत्रालय पर बढ़ी खींचतान, BJP-JDU में मंथन तेज

पटना  बिहार में नई सरकार बनने से पहले जेडीयू–बीजेपी गठबंधन में मंत्रिमंडल के स्वरूप और विभागों के बंटवारे को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। दिल्ली में जेडीयू नेताओं राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह और कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ करीब ढाई घंटे लंबी बैठक हुई। सूत्रों के अनुसार, बैठक में मंत्रालयों के बंटवारे, विधानसभा अध्यक्ष पद और दोनों दलों की भूमिकाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। गृह मंत्रालय पर अटका मामला बीजेपी इस बार गृह मंत्रालय और शिक्षा विभाग अपने पास चाहती है और इसके बदले स्वास्थ्य व वित्त मंत्रालय छोड़ने के लिए तैयार है। जेडीयू शिक्षा विभाग छोड़ने पर सहमत दिख रही है, लेकिन गृह मंत्रालय को लेकर स्थिति जस की तस बनी हुई है। साल 2005 से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गृह मंत्रालय अपने पास रखते आए हैं। कानून-व्यवस्था, पुलिस प्रशासन और भ्रष्टाचार नियंत्रण पर सीधी पकड़ की वजह से वे इसे छोड़ने के पक्ष में नहीं हैं। ऐसे में गृह मंत्रालय को लेकर सहमति बनना अभी मुश्किल माना जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष पद पर बनी सहमति विधानसभा अध्यक्ष पद को लेकर चली खींचतान अब खत्म हो गई है। बीजेपी के खाते में विधानसभा अध्यक्ष और जेडीयू के खाते में उपाध्यक्ष पद तय कर दिया गया है। इसके बाद मंत्रिमंडल की संभावित संरचना पर बातचीत और तेज हो गई है। संभावित विभागीय बंटवारा   बीजेपी के खाते में संभावित प्रमुख विभाग: राजस्व सहकारिता पशु एवं मत्स्य संसाधन विधि लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण उद्योग पर्यटन पथ निर्माण (बीजेपी गृह और शिक्षा विभाग भी चाहती है; बदले में स्वास्थ्य और वित्त छोड़ने की पेशकश) जेडीयू के खाते में संभावित प्रमुख विभाग: कृषि खान एवं भूतत्व जल संसाधन संसदीय कार्य ऊर्जा योजना एवं विकास विज्ञान एवं प्रावैधिकी तकनीकी शिक्षा ग्रामीण विकास खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण अंतिम सहमति का इंतजार दोनों दलों के बीच कुल हिस्सेदारी लगभग तय मानी जा रही है। फिलहाल सबसे बड़ा मतभेद गृह मंत्रालय को लेकर है, जिसे नीतीश कुमार अपने पास रखने पर अडिग हैं। विधानसभा अध्यक्ष पद पर सहमति के बाद उम्मीद है कि आज देर रात एक और बैठक होगी, जिसमें सरकार की अंतिम रूपरेखा स्पष्ट होने की संभावना है।  

कैबिनेट विस्तार की आहट: BJP–JDU के इन नेताओं को मिल सकता है मंत्री पद

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद अब नीतीश कुमार के नेतृत्व में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया चल रही है। नीतीश कैबिनेट में भाजपा, जदयू, लोजपा-रामविलास, हम और आरएलएम से कितने और कौन-कौन मंत्री होंगे इस पर भी मंथन जारी है। पटना से दिल्ली तक एनडीए नेताओं की बैठकों का दौर चल रहा है। अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार, नई नीतीश कैबिनेट में 8 से 10 नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है। इनमें नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड से अधिकतर पुराने चेहरों को ही मौका दिया जाएगा। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी लगभग आधे मंत्री बदल सकती है।   विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कई दावे किए जा रहे हैं। इनमें बताया जा रहा है कि 20 नवंबर को पटना के गांधी मैदान में होने वाले भव्य शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ डिप्टी सीएम समेत 20 मंत्री भी शपथ ले सकते हैं। फिर कुछ दिन बाद कैबिनेट का विस्तार करके अन्य मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह कराया जाएगा। बिहार चुनाव 2025 के नतीजों में एनडीए को कुल 243 में से 202 सीटों पर जीत मिली। भाजपा ने 89, जदयू ने 85, लोजपा-आर ने 19, हम ने 5 और आरएलएम ने 4 सीटों पर जीत दर्ज की। फॉर्मूले के अनुसार 6 विधायक पर एक मंत्री बनाया जाना है। इस हिसाब से भाजपा से सर्वाधिक 15 बन सकते हैं। जबकि जदयू से 13-14 नेताओं को मंत्रि परिषद में जगह दी जा सकती है। वहीं, चिराग पासवान की पार्टी लोजपा-आर से 3 और जीतनराम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा एवं उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा से एक-एक मंत्री बनाया जा सकता है। जदयू में अधिकतर पुराने चेहरे रिपीट होंगे? नीतीश कुमार की पार्टी में पुराने चेहरों को ही कैबिनेट में रिपीट किए जाने की चर्चा चल रही है। हालांकि, पिछली बार मंत्री रहे सुमित कुमार सिंह जेडीयू के टिकट पर चुनाव हार गए हैं, उनकी जगह किसी नए चेहरे को शामिल किया जा सकता है। वहीं, एक-दो मौजूदा मंत्रियों का भी पत्ता कट सकता है। उनकी जगह नए नेताओं को कैबिनेट में जगह दी जा सकती है। जदयू से चर्चा में ये नए चेहरे जेडीयू से जिन नए नामों की चर्चा चल रही है, उनमें पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशावाहा का नाम रेस में सबसे आगे है। इस चुनाव में सबसे बड़ी जीत दर्ज करने वाले रूपौली से विधायक बने कलाधर मंडल को भी कैबिनेट में जगह मिल सकती है। उनके अलावा, राहुल कुमार सिंह, सुधांशु शेखर, पन्ना लाल सिंह पटेल का नाम भी चर्चा में है। भाजपा से ये नए चेहरे बन सकते हैं मंत्री नीतीश कैबिनेट में भाजपा से ज्यादा नए चेहरे देखने को मिल सकते हैं। भाजपा से जिन नए चेहरों के मंत्री बनने की चर्चा है, उनमें राणा रणधीर, गायत्री देवी और विजय कुमार खेमका का नाम शामिल है। उपेंद्र कुशवाहा और चिराग पासवान की पार्टी से भी पहली बार नए मंत्री बनाए जाएंगे। वहीं, जीतनराम मांझी की पार्टी से उनके बेटे संतोष सुमन के ही दोबारा मंत्री बनने की संभावना है। भारतीय जनता पार्टी पिछली बार की तरह स्पीकर का पद भी अपने पास रख सकती है। हालांकि, जेडीयू की नजर भी विधानसभा अध्यक्ष के पद पर है। दूसरी ओर, नई नीतीश सरकार में कितने डिप्टी सीएम होंगे, इस पर अभी स्थिति साफ नहीं है। अटकलों के अनुसार, भाजपा से दो डिप्टी सीएम बनाए जा सकते हैं। चिराग की पार्टी से भी एक चेहरा डिप्टी सीएम बनाए जाने की चर्चा है, लेकिन इसकी संभावना कम नजर आ रही है।  

लालू यादव का संदेश: परिवार विवाद के बीच विधायकों को समझाया, दिया विश्वास

नई दिल्ली  लालू प्रसाद यादव यूपीए सरकार के दौर में अपने राजनीतिक करियर के शीर्ष पर थे। करीब दो दशकों तक उनका जलवा कायम रहा, लेकिन अब वह अपनी पार्टी आरजेडी की खराब हालत देखने को विवश हैं। आरजेडी का नेतृत्व भले ही वह राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर कर रहे हैं, लेकिन कामकाज तेजस्वी यादव ही संभालते हैं। इस बीच बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार मिली है तो पार्टी से लेकर परिवार तक कलह मच गई है। बेटी रोहिणी आचार्य, बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने खुलकर तेजस्वी पर निशाना साधा है और उन्हें हार का जिम्मेदार बताया है। वहीं सोमवार को आरजेडी के विधायकों की मीटिंग में तेजस्वी यादव को विधायक दल का नेता चुन लिया गया।   यह मीटिंग भी घटनापूर्ण रही और कई मसले उठे। सबसे पहले तो तेजस्वी यादव ही भावुक हो गए और उन्होंने विधायकों से नेतृत्व से हटने तक की पेशकश कर दी। तेजस्वी यादव ने कहा कि यदि विधायक चाहते हैं कि मैं हट जाऊं तो मैं इसके लिए तैयार हूं और किसी अन्य व्यक्ति को नेता चुना जा सकता है। इस दौरान लालू यादव खुद सामने आए और उन्होंने विधायकों से कहा कि वे तेजस्वी को नेता बने रहने के लिए मनाएं। इसके बाद लालू यादव ने विधायकों से यह भी कहा कि वे पार्टी को मजबूत करने पर फोकस करें। उन्होंने कहा कि परिवार का झगड़ा आंतरिक मसला है और इसे वह सुलझा लेंगे। लालू यादव ने नेताओं से कहा कि परिवार का विवाद आतंरिक मसला है और मैं इसे सुलझा लूंगा। उन्होंने विधायकों से कहा कि वे फिलहाल संगठन को मजबूत करने पर फोकस करें। बता दें कि बिहार चुनाव की हार ने आरजेडी के आतंरिक झगड़े को सरेआम कर दिया है। तेजस्वी यादव के करीबियों पर बहन रोहिणी आचार्य ने ही हमला बोला है। रोहिणी के अलावा बेटे तेजप्रताप भी खिलाफ, तेजस्वी पर क्या कहा था उन्होंने संजय यादव और रमीज नेमत खान पर हमला किया था। उनका कहना था कि मैंने पार्टी और परिवार को छोड़ने का फैसला किया है। ऐसा ही करने के लिए मुझसे संजय यादव और रमीज खान ने कहा था। इसके साथ ही रोहिणी ने खुद पर चप्पल उछालने का भी आरोप लगाया था। वहीं इस मामले में हमला करते हुए तेजप्रताप ने तो अपने छोटे भाई को फेलस्वी करार दिया।

तेजस्वी-रमीज पर घिरा नया विवाद: रोहिणी आचार्य के आरोपों से UP में हलचल

कौशांबी (मंझनपुर)  बिहार चुनाव-2025 के परिणामों में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की करारी हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के परिवार का विवाद के साथ बलरामपुर के पूर्व सांसद रिजवान जहीर के दामाद रमीज खान का नाम अचानक सुर्खियों में आ गया। रमीज अब तक लाइम लाइट में नहीं थे लेकिन लालू यादव को अपनी किडनी देने वाली बेटी रोहिणी आचार्य ने रमीज खान पर गंभीर आरोप लगाए तो बिहार से यूपी तक उनकी चर्चा होने लगी। रोहिणी आचार्य का बयान आने के बाद से ही यूपी में भी रमीज की असलियत खंगाली जा रही है। कौशाम्बी में अचानक रमीज खान की क्रिमिनल हिस्ट्री खंगाली गई है। डीजीपी कार्यालय ने रविवार की रात इसका ब्यौरा तलब किया। कौशाम्बी के कोखराज थाना में रमीज के खिलाफ केस दर्ज है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के करीबी रमीज खान पुत्र नियामत खान निवासी भंगहा कला, शीतलपुर, जिला बलरामपुर की रविवार की रात अचानक जिले में क्रिमिनल हिस्ट्री खंगाली जाने लगी। डीजीपी कार्यालय ने रमीज खान के बारे में रिपोर्ट मांगी थी। रमीज खान के खिलाफ कोखराज थाना में दो केस दर्ज है। पहला केस हत्या का है। रमीज खान ने प्रतापगढ़ के जेठवारा के प्रापर्टी डीलर शकील की 25 लाख रुपये के लेनदेन में हत्या कर रोही बाईपास के समीप सड़क किनारे लाश फेंकी थी। फरारी के दौरान भी पुलिस ने एक और केस दर्ज किया था। इसके बाद आरोपी को पुलिस ने वर्ष 2023 में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। रमीज पर आरोप है कि बिहार चुनाव के दौरान उसने आरजेडी के नेताओं के साथ मिलकर सनातन धर्म के खिलाफ दुष्प्रचार किया था। इसके अलावा कई राजनेताओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणी भी की थी। अब चुनाव खत्म होने के बाद यूपी सरकार ने शिकंजा कसते हुए रमीज खान की कुंडली खंगालनी शुरू कर दी है। रविवार की देर रात ही डीजीपी कार्यालय को कौशाम्बी में दर्ज मुकदमों की सूचना भेज दी गई थी। लालू की बेटी रोहिणी आचार्य ने भी लगाए हैं आरोप तेजस्वी यादव के करीबी बलरामपुर के पूर्व सांसद रिजवान जहीर का दामाद रमीज खान चुनाव खत्म होने के बाद से चर्चित नाम हो गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि मतगणना परिणाम आने के बाद आरजेडी के अगुवा लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने रमीज खान के ही खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे। रोहिणी आचार्य का बयान आने के बाद से ही रमीज की असलियत खंगाली जा रही है। युवाओं की टोली ले गया था रमीज खान कहा जा रहा है कि बिहार चुनाव में भाजपा और सनातन धर्म के खिलाफ हेट कैम्पेनिंग चलाने के लिए रमीज खान ने ही पूरी रणनीति बनाई थी। आरोप है कि वह इसके लिए पश्चिमी यूपी के युवाओं की एक बड़ी टोली लेकर बिहार गया था। बिहार चुनाव का परिणाम आने के बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ तो उसकी चर्चा एक ‘खलनायक’ के तौर पर होने लगी। क्या बोली पुलिस एएसपी राजेश कुमार ने कहा कि बिहार में सनातन धर्म के खिलाफ हेट कैम्पेनिंग चलाने के आरोपी रमीज खान के खिलाफ डीजीपी आफिस ने रिपोर्ट मांगी थी। कोखराज थाना में उसको खिलाफ दो केस दर्ज हैं, इसकी रिपोर्ट डीजीपी कार्यालय को भेज दी गई है।  

बैठक में भावुक हुए तेजस्वी यादव, कहा— अगर मैं बोझ हूँ तो हटा दीजिए

नई दिल्ली  बिहार विधानसभा चुनाव की हार को पचाना लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी के लिए मुश्किल हो रहा है। उनके बेटे तेजस्वी यादव भले ही आरजेडी विधायक दल के फिर से नेता चुन लिए गए हैं, लेकिन पार्टी में सब कुछ सहज नहीं है। यहां तक कि तेजस्वी यादव सोमवार को विधायक दल की मीटिंग के दौरान भावुक हो गए। उन्होंने अपनी तरफ से ही यहां तक कह दिया कि यदि विधायक चाहें तो नेतृत्व छोड़ने को तैयार हूं। उन्होंने कहा कि विधायकों की राय हो तो वे अपनी ओर से किसी अन्य व्यक्ति को अपना नेता चुन सकते हैं। उन्होंने साथी विधायकों से कहा कि यदि उन्हें लगता है कि मेरे स्थान पर किसी और के आने से संगठन मजबूत हो सकता है तो ऐसा कर सकते हैं।   मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एक विधायक ने कहा कि तेजस्वी यादव टिकट बंटवारे और हार को लेकर लगे आरोपों से आहत थे। मीटिंग के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि आखिर मैं क्या करूं। परिवार को देखूं या फिर पार्टी को देखूं। बहन रोहिणी आचार्य की ओर से लगाए आरोपों के चलते तेजस्वी यादव फिलहाल दबाव की स्थिति में दिख रहे हैं। हालांकि अब तक उन्होंने खुलकर कुछ भी कहा नहीं है। उनके सलाहकार और करीबी संजय यादव एवं रमीज नेमत खान पर भी आरोप लग रहे हैं कि तेजस्वी यादव सिर्फ उनकी ही सुनते हैं और कार्यकर्ताओं से दूर हो गए हैं। भावुक हुआ माहौल, लालू यादव को खुद देना पड़ा दखल तेजस्वी यादव की ओर से अचानक ऐसे ऑफर से माहौल भावुक दिखा। वहां मौजूद तमाम विधायक आग्रह करने लगे कि आप ही हमारे नेता रहें। इस बीच खुद लालू यादव ने दखल दिया और उन्होंने विधायकों से कहा कि वे राजी करें। इसके बाद विधायकों ने सर्वसम्मति से तेजस्वी यादव को अपना नेता चुन लिया। इस दौरान राबड़ी देवी, मीसा भारती और तेजस्वी यादव के करीबी संजय यादव भी मौजूद थे। बता दें कि मीसा भारती को भी असंतुष्ट बताया जा रहा है, लेकिन वह खुलकर कुछ भी नहीं कह रही हैं। दरअसल आरजेडी को इस चुनाव में 25 सीटें ही मिली हैं, जबकि वह 143 पर उतरी थी। वह तीसरे नंबर का दल बन गई है, जिसे पार्टी के लिए करारा झटका माना जा रहा है। मीटिंग में EVM पर उठे सवाल, बोले- ऐसे नतीजे गड़बड़ी करके ही आए इससे पहले 2010 में ही ऐसा हुआ था, जब आरजेडी को महज 22 सीटें मिली थीं। तब नेता विपक्ष का पद भी नहीं मिल पाया था, लेकिन इस बार नेता विपक्ष बनने में तेजस्वी यादव कामयाब रहे हैं। तेजस्वी यादव को नेता चुने जाने वाली मीटिंग में जगदानंग सिंह ने कहा कि हमारी यह हार ईवीएम के चलते हुई है। उन्होंने कहा कि इन मशीनों का बेजा इस्तेमाल हुआ है। उनकी इस दलील को विधायक भाई वीरेंद्र ने भी सही ठहराया। उन्होंने कहा कि हमें ईवीएम के खिलाफ लड़ना होगा। हमें डिमांड करनी चाहिए कि इलेक्शन सिर्फ बैलेट पेपर से ही हो।