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किसानों के हित में प्रदेश सरकार की निरंतर पहल: ऊर्जा मंत्री तोमर

प्रदेश सरकार किसानों के हित में निरंतर कर रही कार्य : ऊर्जा मंत्री तोमर म.प्र. नियामक आयोग द्वारा टैरिफ आदेश जारी भोपाल  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा है कि म.प्र. सरकार प्रदेश के किसानों के हित में निरंतर कार्य कर रही है। जैसे कि अटल कृषि ज्योति योजना के तहत 10 हॉर्स पावर तक के कृषि उपभोक्ताओं के बिलों पर म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी विद्युत दरों पर सब्सिडी स्वीकृत की जाती है, जिसके अनुसार उपभोक्ता द्वारा दी जाने वाली राशि नियामक आयोग द्वारा जारी दरों की मात्र लगभग 7 प्रतिशत राशि ही जमा करना होती है जबकि म.प्र. सरकार कृषि उपभोक्ताओं के बिलों का लगभग 93 प्रतिशत राशि सब्सिडी के रूप में वहन करती है। इसके अतिरिक्त राज्य शासन की अटल गृह ज्योति योजना के तहत 150 यूनिट प्रति माह तक मासिक खपत वाले घरेलू उपभोक्ताओं को प्रथम 100 यूनिट पर मात्र 100 रूपये एवं अतिरिक्त 50 यूनिट पर वास्तविक दर से भुगतान करने का प्रावधान है। अतः घरेलू उपभोक्ताओं को 100 यूनिट तक के बिल पर पूर्व के भांति अटल गृह ज्योति योजना के तहत मात्र 100 रुपये का ही भुगतान करना होगा जबकि 100 यूनिट खपत पर शहर के प्रत्येक घरेलू उपभोक्ताओं की तरफ से शासन द्वारा सब्सिडी के रूप में लगभग 600 रूपये वहन किये जायेंगे। इस प्रकार के घरेलू उपभोक्ता जिनको सरकार सब्सिडी प्रदान कर रही है उनकी संख्या पूरे प्रदेश में लगभग एक करोड़ है, जबकि प्रदेश में कुल लगभग 38 लाख कृषि उपभोक्ता हैं जो सब्सिडी का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इस प्रकार चालू वित्तीय वर्ष में सरकार द्वारा लगभग 25 हजार 800 करोड़ सब्सिडी के रूप में वहन किये जा रहे है। उल्लेखनीय है कि आयोग के निर्देश पर एम.पी. पॉवर मैनेजमेंट कंपनी द्वारा प्रत्येक माह एफ.पी.पी.ए.एस. (Fuel & Power Purchase Adjustment Surcharge) की दरें जारी की जाती है। विगत माह में यह दर (Minus) -1.71 प्रतिशत थी, जो कि इस माह में (Minus) – 0.63 प्रतिशत के आदेश भी जारी किये गये है। यह दरें आयोग द्वारा जारी ऊर्जा प्रभार पर लागू रहेंगी। अतः प्रत्येक उपभोक्ता श्रेणी पर लागू ऊर्जा प्रभार पर 0.63 प्रतिशत की कमी कर उपभोक्ताओं के बिलों की गणना की जायेगी । विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी टैरिफ आदेश के मुख्य बिन्दु 1. विद्युत दरों में विगत वर्ष में लागू दरों की तुलना में वितरण कंपनियों द्वारा मांगी गयी 10.19 प्रतिशत वृद्धि के विरूद्ध मात्र 4.8 प्रतिशत की औसत दर वृद्धि की गई है। 2. मौसमी उपभोक्ताओं (एच.वी.4) तथा मेट्रो रेल (एच.वी.9): के टैरिफ में कोई वृद्धि नहीं। 3. उच्च दाब घरेलू (HV-6), उच्च दाब कृषि (HV-5) एवं उच्च दाब मेट्रो श्रेणी के उपभोक्ताओं के न्यूनतम प्रभार समाप्त किये गये। इसके पूर्व विगत वर्षों में निम्न दाब घरेलू, गैर घरेलू, पब्लिक वॉटर वर्कस एवं स्ट्रीट लाईट, निम्न दाब औद्यौगिक, निम्न दाब कृषि एवं उच्च दाब मौसमी (SEASONAL) श्रेणी के उपभोक्ताओं पर न्यूनतम प्रभार समाप्त किये जा चुके हैं। 4. विगत वर्ष की भांति उपभोक्ताओं को मीटर रेट अथवा मीटरिंग चार्ज नहीं लगेंगे। 5. 10 किलो वॉट तक भार वाले ऐसे सभी उपभोक्ताओं, जहां स्मार्ट मीटर स्थापित हैं, को सौर घंटों (प्रातः 09:00 बजे से सायं 05:00 बजे) के मध्य उपयोग की गयी बिजली पर 20 प्रतिशत की छूट विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी जारी रहेगी। इन उपभोक्ताओं को शीर्ष मांग अवधि में कोई भी सरचार्ज देय नहीं रहेगा। 6. उच्च दाब उपभोक्ताओं जिन पर टीओडी दरें लागू हैं, पर रात्रिकालीन उपभोग (रात्रि 10 बजे में प्रातः 6 बजे तक) की छूट यथावत। 7. जो उपभोक्ता पर्यावरण के लिये जागरुक हैं और केवल रिन्यूएबल एनर्जी से ही बिजली जलाना चाहते हैं, वह 0.30/- रुपये प्रति यूनिट का अतिरिक्त भुगतान कर ग्रीन एनर्जी से बिजली उपयोग कर सकते हैं। इन दरों में विगत वर्ष की तुलना में लगभग 43 प्रतिशत की कमी। 8. नवीन तथा चालू उच्च दाब अतिरिक्त उच्च दाब उपभोक्ताओं के लिये उपलब्ध छूट/प्रोत्साहन की व्यवस्था आंशिक संशोधन के साथ यथावत। 9. उच्च दाब/अति उच्च दाब उपभोक्ताओं को अन्य छूट/प्रोत्साहन की व्यवस्था यथावत जारी रहेगी। 10. प्रीपेड उपभोक्ताओं को छूट प्रोत्साहन की व्यवस्था जारी रहेगी। 11. शीघ्र / ऑनलाईन भुगतान के लिए छूट / प्रोत्साहन की व्यवस्था जारी रहेगी। 12. खुली पहुँच (Open Access) उपभोक्ताओं के अतिरिक्त अधिभार में कमी। 13. विद्युत वितरण कंपनियों के लिए शोध एवं विकास (R&D) फंड की व्यवस्था। इससे तकनीकी हस्तक्षेप, संचालन दक्षता में सुधार एवं लागत में बचत का अध्ययन हो सकेगा। संपूर्ण टैरिफ आदेश आयोग की वेबसाइट www.mperc.in पर उपलब्ध है। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा: सनातन संस्कृति में यज्ञ का महत्व सर्वोत्तम

सनातन संस्कृति में यज्ञ का महत्व सर्वश्रेष्ठ है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव बड़े पुण्य व देवताओं की कृपा से मिलता है मनुष्य का शरीर मुख्यमंत्री डॉ. यादव छिंदवाड़ा के सहस्त्र चंडी महायज्ञ में सपत्नीक हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति में यज्ञ का महत्व सर्वश्रेष्ठ है। यज्ञ के माध्यम से देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन धन्य हो जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति में बड़े पुण्य व देवताओं की कृपा से मनुष्य का शरीर मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को छिंदवाड़ा के सिहोरा मॉल स्थित रामेश्वरम धाम में सहस्त्र चंडी महायज्ञ के समापन अवसर पर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यज्ञ में सहभागी होकर व्यक्ति अपने जीवन में जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना करता है और यश, सुख तथा समृद्धि की कामना करता है। ऐसे आयोजनों से सनातन संस्कृति के प्रति आस्था मजबूत होती है और सात्विक भाव से जनता की सेवा करने की प्रेरणा मिलती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवद्गीता के उपदेशों को जीवन में आत्मसात करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उपस्थित जनसमुदाय को नववर्ष विक्रम संवत 2083 की शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति पथ पर आगे बढ़ रहा है और निडरता के साथ कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि आज नवरात्रि के पावन पर्व पर हनुमान लोक का लोकार्पण भी हुआ है। उन्होंने कहा कि यह शरीर पंचतत्व से बना होता है जिसमें पांच कर्मेन्द्रियां और पांच ज्ञानेन्द्रियां होती है। इन दसों इंद्रियों से लगातार सात्विक भाव से कार्य करने पर सात्विक शक्ति उत्पन्न होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सपत्नीक सहस्त्र चंडी महायज्ञ में शामिल हुए और लगभग 3200 श्रद्धालुओं के साथ प्रदेश की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करते हुए यज्ञ में पूर्णाहुति दी। महायज्ञ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संतविवेक जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया तथा यज्ञ स्थल की परिक्रमा भी की। इसके साथ ही उन्होंने सिहोरामाल स्थित भगवान शंकर के मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के लिए मंगलकामनाएं कीं। इस अवसर पर सांसद विवेक बंटी साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव का इस सहस्त्र चंडी महायज्ञ में शामिल होना गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि माँ दुर्गा का आशीर्वाद प्रदेश को मिलता रहे। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में नंबर वन कार्य हो रहे हैं।  

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत जल गंगा संवर्धन अभियान में स्टॉप डैम और चेक डैम का मरम्मत व नवीनीकरण कार्य

जल गंगा संवर्धन अभियान प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-वाटरशेड विकास 1.0 में निर्मित स्टॉप डैम एवं चेक डैम की मरम्मत एवं नवीनीकरण के किए जाएंगे कार्य वाटरशेड विकास के अंतर्गत 68 कंटूर ट्रेंच, 91 गेबियन संरचनाएं, 842 खेत-तालाब, 26 स्टॉप डैम, 204 चेक डैम, 281 तालाब, 76 रिचार्ज शाफ्ट सहित 19 अन्य जल संरचनाओं का किया जाएगा निर्माण भोपाल  जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन एवं सतत विकास को सुदृढ़ आधार प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान अभियान चलाया जा रहा है। 19 मार्च से शुरू हुआ यह अभियान 30 जून 2026 तक चलेगा। प्रदेश सरकार द्वारा चलाया जा रहा यह महाअभि‍यान केवल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के समग्र विकास, ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण एवं भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण जन-अभियान के रूप में चल रहा है। इस वर्ष अभियान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-वाटरशेड विकास के कार्यों को भी शामिल किया गया है। वाटरशेड विकास 2.0 के अंतर्गत 68 कंटूर ट्रेंच, 91 गेबियन संरचनाएं, 842 खेत-तालाब, 26 स्टॉप डैम, 204 चेक डैम, 281 तालाब, 76 रिचार्ज शाफ्ट तथा 19 अन्य जल संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा। इन कार्यों के माध्यम से वर्षा जल का अधिकतम संचयन, भू-जल पुनर्भरण, मृदा संरक्षण एवं जल उपलब्धता में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित की जाएगी। इससे किसानों को सिंचाई सुविधा में विस्तार एवं कृषि उत्पादन में वृद्धि का प्रत्यक्ष लाभ प्राप्‍त हो सकेगा। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-वाटरशेड विकास 1.0 के अंतर्गत पूर्व में निर्मित स्टॉप डैम एवं चेक डैम की मरम्मत एवं नवीनीकरण के कार्य भी किए जाएंगे। इससे न केवल इन संरचनाओं की कार्यक्षमता पुनर्स्थापित होगी, बल्कि जल संरक्षण के पूर्व प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी। अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शिता एवं सतत निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकी का उपयोग किया जाएगा। वाटरशेड विकास 2.0 के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की निगरानी WMS पोर्टल के माध्यम से की जाएगी, जिससे कार्यों की वास्तविक समय पर प्रगति का आंकलन संभव हो सकेगा। वाटरशेड विकास 1.0 के कार्यों का चयन सिपरी सॉफ्टवेयर से कर उन्हें मनरेगा पोर्टल से जोड़ा गया है। इससे उनके अनुश्रवण, गुणवत्ता नियंत्रण एवं समयबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जा सकेगा।  

भोपाल मेट्रो को मिली हरी झंडी, प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम की शुरुआत, दिल्ली जैसी सुविधा मिलेगी

भोपाल  शहर में मेट्रो की धीमी रफ्तार को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब सुधार की दिशा में काम शुरू हो गया है। सुभाष नगर से एम्स तक के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। करीब 30 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 800 करोड़ रुपए का टेंडर दिया गया है। अभी मेट्रो एक ही ट्रैक पर चल रही है। यही वजह है कि यात्रियों को ट्रेन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। मौजूदा समय में एक ट्रेन के बाद दूसरी ट्रेन आने में करीब 75 मिनट लग जाते हैं। ऐसे में रोजाना सफर करने वालों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। दरअसल, सुभाष नगर से एम्स के बीच डाउन ट्रैक पर ही ट्रेन दोनों तरफ चलाई जा रही है। यानी जो ट्रेन आगे जाती है, वही उसी ट्रैक से वापस लौटती है। अप ट्रैक तैयार तो है, लेकिन सिग्नलिंग सिस्टम के बिना उस पर संचालन संभव नहीं है। इसी कारण मेट्रो अपनी पूरी क्षमता से नहीं चल पा रही। मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक, सिग्नलिंग सिस्टम लगने के बाद हालात बदल जाएंगे। दोनों ट्रैक पर एक साथ ट्रेनें चल सकेंगी और उनके बीच का अंतर भी कम होगा। इससे ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी और यात्रियों को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। जानकार बताते हैं कि सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो सेवा के लिए बेहद जरूरी होता है। यही सिस्टम ट्रेनों की गति, उनके बीच की दूरी और सुरक्षा को नियंत्रित करता है। इसके बिना मल्टी-ट्रैक संचालन संभव नहीं होता। मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि काम पूरा होने के बाद सेफ्टी ट्रायल कराया जाएगा। इसके लिए कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) को बुलाया जाएगा। उनकी मंजूरी मिलने के बाद ही अप ट्रैक पर नियमित संचालन शुरू किया जाएगा। दिल्ली मेट्रो जैसी आधुनिक तकनीक भोपाल में भी लागू की जा रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे मेट्रो सेवा ज्यादा भरोसेमंद और तेज होगी। अभी कम स्पीड और ज्यादा इंतजार के कारण यात्रियों की संख्या भी सीमित है, लेकिन आने वाले समय में इसमें बढ़ोतरी होने की संभावना है। शहर के लोगों के लिए यह राहत की खबर है। अगर सब कुछ तय समय पर पूरा होता है, तो भोपाल मेट्रो आने वाले महीनों में ज्यादा सुविधाजनक और उपयोगी साबित हो सकती है। मेट्रो की रीढ़ होता है सिग्नलिंग सिस्टम जानकारों के मुताबिक सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो नेटवर्क का सबसे अहम हिस्सा होता है। यही तय करता है कि ट्रेन कितनी दूरी पर चलेगी। ट्रेन की अधिकतम और न्यूनतम गति नियंत्रित करता है। ट्रेनों के बीच सुरक्षित गैप बनाए रखता है। ऑटोमेटेड ऑपरेशन और इमरजेंसी कंट्रोल संभालता है। सिस्टम के बिना मल्टी-ट्रैक ऑपरेशन संभव नहीं होता, जिससे पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पाता। अप्रैल में फिर होगा सेफ्टी ट्रायल     सिग्नलिंग का काम पूरा होने के बाद मेट्रो प्रबंधन एक बार फिर कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) को निरीक्षण के लिए बुलाएगा।     जरूरी परीक्षण और सेफ्टी क्लियरेंस मिलने के बाद ही अप ट्रैक पर भी नियमित संचालन शुरू किया जाएगा। दिल्ली मेट्रो जैसी तकनीक लगेगी भोपाल मेट्रो में वही आधुनिक सिग्नलिंग तकनीक लागू की जा रही है, जो दिल्ली मेट्रो में इस्तेमाल होती है। इस तकनीक के लागू होने के बाद ट्रेन दोनों ट्रैक पर चल सकेंगी। ट्रेनों के बीच का अंतर (हेडवे) कम होगा और फ्रिक्वेंसी तेजी से बढ़ाई जा सकेगी।

एमपी में शराब नीलामी का 8वां राउंड शुरू, 1 अप्रैल की डेडलाइन, खाली पड़े ठेके और नया दांव

भोपाल  मध्य प्रदेश में नए वित्तीय वर्ष यानी 1 अप्रैल से पहले सभी शराब दुकानों को नीलाम करने की चुनौती से जूझ रहे आबकारी विभाग ने अपने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। भारी-भरकम ग्रुप में दुकानें न बिकने के कारण अब सरकार 'सिंगल शॉप' (एकल दुकान) मॉडल पर उतर आई है। यानी अब कोई भी छोटा ठेकेदार केवल एक दुकान के लिए भी बोली लगा सकेगा। भोपाल और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में ठेकेदारों की बेरुखी ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है, जिसके बाद बेस प्राइज (आरक्षित मूल्य) में भी 10% की कटौती कर दी गई है। क्या है सरकार की मजबूरी? शुरुआती राउंड में विभाग ने पिछले साल की तुलना में बेस प्राइज 20% बढ़ाकर रखा था, लेकिन ठेकेदारों ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई। आठवें राउंड की बिडिंग तक केवल 60% दुकानें ही नीलाम हो सकी हैं। भोपाल, जबलपुर, रतलाम, कटनी, शाजापुर, आलीराजपुर, दमोह, झाबुआ और नीमच जैसे जिलों में बड़ी संख्या में दुकानें अब भी नहीं बिकी हैं। सरकार को इस साल शराब से 19,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व जुटाना है, जो इस धीमी रफ्तार से खतरे में नजर आ रहा है। ऐसे समझें पूरा खेल: क्यों बदला नियम? पहले दुकानों को बड़े समूहों में नीलाम किया जा रहा था, जिससे छोटे ठेकेदार बाहर हो गए थे और बड़े सिंडिकेट मनमानी कीमत मांग रहे थे। अब एक दुकान-एक बोली के नियम से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। विभाग को उम्मीद है कि इस लचीलेपन से बचे हुए 40% ठेके भी 31 मार्च की रात तक उठ जाएंगे। एक्सपर्ट की राय क्या है? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ सालों में शराब की खपत और ठेकेदारों के मुनाफे के गणित में अंतर आया है। सरकार का 20% इजाफा ठेकेदारों को भारी लग रहा था। अब 10% की कटौती और सिंगल शॉप मॉडल ही एकमात्र रास्ता बचा था ताकि 1 अप्रैल से दुकानें बंद न रहें।  

समाधान योजना से 25 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं ने लिया लाभ: ऊर्जा मंत्री तोमर

समाधान योजना में 25 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं ने लिया लाभ : ऊर्जा मंत्री तोमर 31 मार्च तक एकमुश्त राशि जमा करने पर सरचार्ज में मिलेगी 90 प्रतिशत तक की छूट भोपाल  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि समाधान योजना में अब तक 25 लाख 75 हजार बिजली उपभोक्ताओं में सरचार्ज में छूट का लाभ लिया है। उन्होंने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 के द्वितीय व अंतिम चरण को 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है। पूर्व में यह योजना 28 फरवरी तक लागू थी। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 3 नवम्बर को समाधान योजना 2025-26 की शुरुआत हुई थी। समाधान योजना में तीन माह से अधिक के बकायादार उपभोक्ताओं को एकमुश्त राशि जमा करने पर 90 प्रतिशत तक सरचार्ज में छूट का लाभ दिया जा रहा है। मंत्री तोमर ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि यदि वे तीन माह से अधिक के बकाएदार हैं और योजना में अभी तक शामिल नहीं हो पाए वे अब 31 मार्च तक योजना में शामिल होकर अपना बकाया बिल एकमुश्त जमा करके 90 फीसदी तक सरचार्ज माफी का लाभ उठा सकते हैं। 420 करोड़ 93 लाख का सरचार्ज हुआ माफ मध्यप्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 में अभी तक 25 लाख 75 हजार बिजली उपभोक्ताओं ने इस योजना का लाभ लिया है। कुल 1231 करोड़ 68 लाख रूपये जमा किये गये हैं, जबकि 420 करोड़ 93 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 7 लाख 63 हजार बकायादार उपभोक्ताओं ने अपना पंजीयन कराकर लाभ लिया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खाते में 701 करोड़ 91 लाख से अधिक की मूल राशि जमा हुई है, जबकि 301 करोड़ 22 लाख रूपए का सरचार्ज माफ किया गया है। इसी तरह पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 9 लाख 62 हजार उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया है। कंपनी के खाते में 275 करोड़ 46 लाख रूपये जमा हुए हैं, जबकि 83 करोड़ 77 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 8 लाख 50 हजार उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया है। कंपनी के खाते में 254 करोड़ 31 लाख रूपये जमा हुए हैं, जबकि 35 करोड़ 94 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। समाधान योजना 2025-26 एक नजर में समाधान योजना 2025-26 का उद्देश्य 3 माह से अधिक अवधि के उपभोक्ताओं को बकाया विलंबित भुगतान के सरचार्ज पर छूट प्रदान करना है। यह योजना जल्दी आएं, एकमुश्त भुगतान कर ज्यादा लाभ पाएं के सिद्धांत पर आधारित है। योजना में एक मुश्त भुगतान करने पर 70 से 90 फीसदी तथा किस्तों में भुगतान करने पर 50 से 60 फ़ीसदी तक सरचार्ज माफ किया जा रहा है। समाधान योजना 2025-26 का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को कंपनी के पोर्टल पर पंजीयन करना है। पंजीयन के दौरान अलग-अलग उपभोक्ता श्रेणी के लिए पंजीयन राशि निर्धारित की गई है। घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 10 प्रतिशत तथा गैर घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत भुगतान कर पंजीयन कराकर योजना में शामिल होकर लाभ उठा सकते हैं। योजना की विस्तृत जानकारी तीनों कंपनियों की वेबसाइटों पर भी देखी जा सकती है। साथ ही विद्युत वितरण केंद्र में पहुंचकर भी योजना के संबंध में जानकारी ले सकते हैं।  

स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश नवीनीकरण के लिए 28 मार्च तक खुला रहेगा पोर्टल

स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश नवीनीकरण के लिए 28 मार्च तक खुला रहेगा प्रवेश पोर्टल स्नातक (द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ वर्ष) तथा स्नातकोत्तर (तृतीय सेमेस्टर) के परीक्षार्थियों के लिए प्रवेश नवीनीकरण के लिए विशेष अवसर भोपाल उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के विद्यार्थियों के व्यापक शैक्षणिक हितों एवं भविष्य की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए, स्नातक (द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ वर्ष) तथा स्नातकोत्तर (तृतीय सेमेस्टर) के परीक्षार्थियों के लिए प्रवेश नवीनीकरण (Admission Renewal) के लिए विशेष अवसर प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी उच्च शिक्षा डॉ दिवा मिश्रा ने बताया कि यह विशेष सुविधा उन विद्यार्थियों के लिए प्रदान की गई है, जो प्रवेश नवीनीकरण के लिए निर्धारित तिथि के उपरांत पूरक परीक्षा परिणामों की घोषणा के कारण नियत समय-सीमा में अपनी प्रवेश औपचारिकताएं पूर्ण करने से वंचित रह गए थे। प्रवेश पोर्टल को 28 मार्च 2026 तक सक्रिय (Activate) किया जा रहा है। संबंधित विद्यार्थी, इस विस्तारित अवधि का लाभ उठाकर अपने प्रवेश नवीनीकरण की प्रक्रिया अनिवार्य रूप से पूर्ण करें। समस्त शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत संचालित महाविद्यालयों के शेष पात्र विद्यार्थियों का त्वरित चिन्हांकन कर, उनका प्रवेश नवीनीकरण एवं शुल्क समय सीमा में जमा करवाना सुनिश्चित करें। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह सुविधा सीमित अवधि के लिए ही उपलब्ध होगी, इसलिए सभी संबंधित विद्यार्थी एवं संस्थान निर्धारित समय-सीमा का कड़ाई से पालन करें, जिससे किसी भी विद्यार्थी की शैक्षणिक निरंतरता बाधित न हो।  

भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया का विस्तार: आष्टा और सोनकच्छ तक, छह जिलों के 2500 गांव होंगे शामिल

भोपाल  भोपाल विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया की पहली रिपोर्ट तैयार कर ली है। इस रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया का कुल क्षेत्रफल 12 हजार वर्ग किलोमीटर होगा। इसमें सीहोर जिले का आष्टा और देवास जिले का सोनकच्छ इलाका भी शामिल होगा, जो भोपाल और इंदौर को जोड़ने वाला बड़ा जंक्शन बनेगा। रिपोर्ट अब नगरीय विकास एवं आवास विभाग को सौंप दी गई है। वहीं इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया का क्षेत्रफल 14 हजार वर्ग किलोमीटर से ज्यादा हो जाएगा।  छह जिलों की 30 तहसीलें शामिल  भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया में भोपाल, सीहोर, रायसेन, राजगढ़, विदिशा और नर्मदापुरम जिलों की कुल 30 तहसीलें और लगभग 2500 गांव शामिल किए जाएंगे। नर्मदापुरम जिले का सिर्फ 6 प्रतिशत हिस्सा ही इसमें लिया गया है। इटारसी को इस एरिया में नहीं जोड़ा गया है। इसमें शामिल प्रमुख तहसीलें और इलाके में बैरसिया, हुजूर, कोलार, आष्टा, बुधनी, दोराहा, इछावर, जावर, रेहटी, सीहोर, श्यामपुर, गोहरगंज, रायसेन, सुल्तानपुर, ब्यावरा, खुजनेर, नरसिंहगढ़, पचौर, राजगढ़, सारंगपुर, सुठालिया, गुलाबगंज, विदिशा, डोलरिया, होशंगाबाद, माखन नगर आदि शामिल हैं।  इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया भी बढ़ेगा इंदौर विकास प्राधिकरण ने पहले सर्वे में 39 शहरों और 1786 गांवों को मिलाकर 9989 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्रफल बताया था। लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर अब इसमें और इलाके जोड़े जा रहे हैं। नया क्षेत्रफल 14 हजार वर्ग किलोमीटर तक पहुंच जाएगा। यह फायदा होगा दोनों शहरों की बड़ी परियोजनाएं अब मिलकर बनाई जाएंगी। शहरों को जोड़ने, सड़क-बिजली-नल-पानी जैसी सुविधाएं देने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। जमीन अधिग्रहण, अतिक्रमण या विभागों के बीच तकरार जैसी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। केंद्र सरकार बड़े शहरों के विकास के लिए अलग से पैकेज देगी। ट्रिलियन प्लस आबादी वाले शहरों को विशेष फंड मिलेगा। दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों को भी 5-5 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त मदद मिलेगी। 6 माह में तैयार होगी रिपोर्ट  बीडीए ने सभी शामिल इलाकों की पूरी जानकारी मांगी है। कृषि, राजस्व, परिवहन, लोक निर्माण, उद्योग, पर्यटन, जल संसाधन समेत कई विभागों से जनसंख्या, उद्योग, लोगों की आय और रोजगार संबंधी आंकड़े मांगे गए हैं। रिपोर्ट तैयार करने में 6 महीने और लग सकते हैं। इसके बाद विस्तृत प्लानिंग शुरू होगी। इस फैसले से भोपाल-इंदौर क्षेत्र में विकास की रफ्तार तेज हो जाएगी और लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। 

भोपाल में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रियों में तेजी, सात दिनों में 4,399 रजिस्ट्रियां, 96.61 करोड़ रुपये का कारोबार

भोपाल  जिले में वित्तीय वर्ष 2026-27 में 740 स्थानों पर प्रॉपर्टी की दरों में वृद्धि होना लगभग तय है। इसका प्रस्ताव जिला मूल्यांकन समिति ने केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेज दिया है, जिस पर गुरुवार को बैठक भी आयोजित की गई है। ऐसे में प्रॉपर्टी की दरों में वृद्धि का असर प्रॉपर्टी के कारोबार में दिखाई देने लगा है। नवरात्र के शुभ मुहूर्त और वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम दिनों में पंजीयन कार्यालयों में जमकर लोगों की भीड़ उमड़ रही है। जानकारी के अनुसार आईएसबीटी, परी बाजार और बैरसिया में स्थित पंजीयन कार्यालयों में सुबह 10 से देर रात तक दस्तावेज रजिस्टर्ड करने का काम तेजी से किया जा रहा है। 19 मार्च से शुरू हुए नवरात्र के साथ अब तक सात दिन में करीब चार हजार 399 रिकॉर्ड रजिस्ट्रियां हुई हैं, जिनसे लगभग 96.61 करोड़ रुपये का राजस्व विभाग को प्राप्त हुआ है। कार्यालयों में बुधवार को भी बड़ी संख्या में लोग जमीन, मकान, प्लॉट और रीसेल प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री करवाने पहुंचे। सुबह से शुरू हुआ काम रात करीब आठ बजे तक चलता रहा, इस दौरान एक दिन में रिकॉर्ड 820 रजिस्ट्रियों के साथ 19.23 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। प्रॉपर्टी के खरीदारों की संख्या बढ़ते देख विभाग ने कार्यालय का समय बढ़ाते हुए सात बजे कर दिया है और प्रति सब रजिस्ट्रार को 65 स्लॉट कर दिए हैं। ऐसे में अब एक दिन में 13 सब रजिस्ट्रार 800 रजिस्ट्रियां कर सकेंगे। 31 मार्च तक जारी रहेगा रजिस्ट्रियों का सिलसिला वित्तीय वर्ष 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन का प्रस्ताव केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड के पास पहुंच चुका है। बोर्ड प्रस्ताव को पास कर देता है तो जिले के 740 स्थानों पर औसत 12 प्रतिशत वृद्धि होगी। वहीं अनेक स्थान ऐसे हैं जहां पर 30 प्रतिशत से लेकर 150 प्रतिशत तक प्रापर्टी की दरें बढ़ जाएंगी। ऐसे में वर्तमान दरों पर रजिस्ट्री करवाने के लिए 31 मार्च तक रजिस्ट्रियों का सिलसिला जारी रहेगा। सात दिन में हुईं रजिस्ट्रियां और राजस्व दिन रजिस्ट्री राजस्व गुरुवार65307 शुक्रवार5925.54 शनिवार3172.50 रविवार377 09 सोमवार58541 मंगलवार 67812.40 बुधवार82019.23 कुल 4,39996.61 (नोट- राशि करोड़ों रुपये में) संपदा टू सॉफ्टवेयर से मिल रही रफ्तार वरिष्ठ जिला पंजीयक स्वप्नेश शर्मा ने बताया कि संपदा टू सॉफ्टवेयर बेहतर तरीके से काम कर रहा है। सब रजिस्ट्रार तय समय पर लोगों की रजिस्ट्रियां कर रहे हैं, ऐसे में प्रति आधा घंटे में एक दर्जन रजिस्ट्रियां की जा रही हैं। इसके जरिए लोग आसानी से स्लॉट भी बुक कर पा रहे हैं।

एमपी में 7 दिन में व्हाट्सएप पर बर्थ सर्टिफिकेट, नया डिजिटल मॉडल होगा फायदेमंद

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार अब आम लोगों को बड़ी सुविधा देने जा रही है। बचपन से लेकर स्कूल, नौकरी और सरकारी कार्यों तक के लिए जरूरी माना जाने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज है जन्म प्रमाण पत्र। जिसे लेने के लिए बच्चों के माता पिता या अन्य परिजनों को कई बार लगातार अस्पताल के चक्कर काटने पड़ते हैं। यहां तक कि लंबी लाइन में इंतजार भी करना होता है। लेकिन अब इस पूरी झंझट को खत्म करने और इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए राज्य सरकार यह नई सुविधा करने जा रही है। इसके तहत अब 7 दिन में आपके व्हाट्सएप (Whatsapp) मोबाइल नंबर पर बच्चे का जन्मप्रमाण पत्र (Birth Certificate) आ जाएगा। प्रदेश भर में लागू होगा नया डिजिटल मॉडल यह नया डिजिटल मॉडल (MP New Digital Model) प्रदेश भर में लागू करने की तैयारी है। मॉडल लागू होते ही करोड़ों परिवार इसका लाभ ले सकेंगे। इन्हें घर बैठे ही अपने बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र मिल जाएगा। वह भी केवल 7 दिन में बता दें कि वर्तमान में यह सुविधा (Whatsapp) केवल भोपाल के हमीदिया अस्पताल में ही चल रही है। वहां इसे काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। अब सरकार ने इसे पूरे मध्य प्रदेश में लागू करने का फैसला लिया है। क्या होंगे फायदे? -जन्म प्रमाण पत्र बनाने की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल हो जाएगी। -परिजनों को अस्पताल जाकर बार-बार फॉलो-अप करने या लंबी कतारों में खड़े होने की जरूरत नहीं पडे़गी। -जन्म के 7 दिन के अंदर प्रमाण पत्र वॉट्सएप पर ही उपलब्ध हो जाएगा। -यह प्रक्रिया सरल, तेज और पारदर्शी हो जाएगी। सबसे ज्यादा राहत इन्हें इस नये डिजिटल मॉडल की पहल (Birth Certificate on whatsapp) से खासकर नवजात शिशु के माता-पिता को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। क्यों कि अभी तक जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए इन्हें कई बार अस्पताल जाना पड़ता था और प्रक्रिया में काफी समय लग जाता था। नया मॉडल इस परेशानी को पूरी तरह खत्म कर देगा। डिजिटल इंडिया की ओर एक और महत्वपूर्ण कदम सरकार का कहना है कि यह कदम डिजिटल इंडिया में एक और महत्वपूर्ण प्रयास है। नया मॉडल लागू होने के बाद मध्य प्रदेश के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में जन्म पंजीकरण की प्रक्रिया और अधिक सुगम और आसान हो जाएगी।