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सुशासन तिहार: चौपाल में मिली राहत, सरलाबाई मरावी की समस्या का मुख्यमंत्री ने किया त्वरित समाधान

रायपुर सुशासन तिहार के अंतर्गत ग्राम सरोधी में आयोजित चौपाल में शासन की संवेदनशीलता और त्वरित कार्यवाही का एक भावनात्मक उदाहरण सामने आया। सरोधी की रहने वाली सरलाबाई मरावी ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के समक्ष अपनी समस्या रखी और कुछ ही पलों में उसका समाधान भी मिल गया। सरलाबाई मरावी, पति  लल्लूराम मरावी, एक साधारण कृषक परिवार से हैं। उनके पास लगभग 5 एकड़ कृषि भूमि है और परिवार में उनका एक बेटा है। खेती ही उनके जीवनयापन का मुख्य साधन है। चौपाल के दौरान सरलाबाई ने बताया कि उन्होंने एक माह पहले किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत 1.50 लाख रुपए के ऋण के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली थी। मुख्यमंत्री ने जैसे ही यह बात सुनी, उन्होंने मौके पर ही अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए और तुरंत निराकरण सुनिश्चित कराया। अपनी समस्या का त्वरित समाधान होते देख सरलाबाई भावुक हो उठीं। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी बात इतनी जल्दी सुनी जाएगी और समाधान भी मिल जाएगा। उनकी आंखों में संतोष और चेहरे पर राहत साफ झलक रही थी। सरलाबाई ने यह भी बताया कि उन्हें महतारी वंदन योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है, जिससे घरेलू खर्चों में सहारा मिलता है। उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज उन्हें महसूस हुआ कि सरकार वास्तव में गांव-गांव तक पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनका समाधान कर रही है। ग्राम सरोधी की यह घटना इस बात का सजीव प्रमाण है कि सुशासन तिहार केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन में भरोसा और राहत लेकर आने वाली पहल बन चुका है।

सुशासन तिहार: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पीएम जनमन के हितग्राही को सौंपी खुशियों की चाबी

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत जारी राज्यव्यापी दौरे में आज खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के छुईखदान विकासखंड के ग्राम सरोधी में प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत सुभान सिंह मेरावी को उनके नवनिर्मित आवास की चाबी सौंपकर गृह प्रवेश कराया। सुभान सिंह ने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि मुख्यमंत्री स्वयं उनके गांव आकर उन्हें यह सौभाग्य देंगे। उनके लिए यह केवल घर नहीं, बल्कि सम्मान और विश्वास का प्रतीक है।बउन्होंने बताया कि उन्हें वन अधिकार पट्टा के तहत 3 एकड़ 2 डिसमिल भूमि मिली है, जिस पर खेती कर वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। साथ ही उनकी पत्नी को महतारी वंदन योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता भी मिल रही है, जिससे घरेलू जरूरतों में सहयोग मिल रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने ग्रामीणों से संवाद करते हुए कहा कि शासन का लक्ष्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे शासन की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

सरकारी स्कूल छात्रों के लिए राहत: नौवीं–दसवीं में फेल विद्यार्थियों को मिलेगा दूसरा मौका

नई दिल्ली  शिक्षा निदेशालय ने सरकारी स्कूलों के उन विद्यार्थियों को एक और मौका दिया है जो नौवीं या 10वीं में लगातार असफल हो रहे हैं। निदेशालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआइओएस) के माध्यम से 10वीं में दाखिले के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। आवेदन की अंतिम तिथि सात जुलाई 2026 तय की गई है। साथ ही स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे पात्र विद्यार्थियों से संपर्क कर उन्हें इस योजना के लिए प्रेरित करें और आवश्यक दस्तावेज जुटाकर समय पर आवेदन सुनिश्चित करें। इस योजना का उद्देश्य स्कूल छोड़ने की कगार पर पहुंचे विद्यार्थियों को मुख्यधारा की शिक्षा में वापस लाना है, ताकि वे 10वीं पास कर आगे की पढ़ाई जारी रख सकें। सिर्फ दिल्ली के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी कर सकेंग आवेदन निर्देशों के अनुसार, केवल वही विद्यार्थी इस योजना के तहत आवेदन कर सकेंगे, जो दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे थे और नौवीं या 10वीं में कम से कम दो बार फेल या कंपार्टमेंट लाए हैं। वहीं, जो विद्यार्थी पहली बार शैक्षणिक सत्र 2025-26 में फेल हुए हैं, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा और उन्हें अपने स्कूल में ही पढ़ाई जारी रखनी होगी। दाखिले की पूरी प्रक्रिया आनलाइन एमआइएस माड्यूल के जरिए संबंधित स्कूल के प्रधानाचार्य द्वारा पूरी की जाएगी। ये कक्षाएं दिल्ली के करीब 75 निर्धारित सरकारी स्कूलों में संचालित की जाएंगी, जहां अलग-अलग स्टडी सेंटर बनाए जाएंगे। निदेशालय ने कहा कि पांच विषयों तक का पंजीकरण शुल्क सरकार वहन करेगी, लेकिन परीक्षा शुल्क विद्यार्थियों को देना होगा। 300 रुपये की परीक्षा शुल्क तय परीक्षा शुल्क 300 रुपये प्रति विषय, प्रायोगिक के लिए 150 रुपये प्रति विषय और ट्रांसफर आफ क्रेडिट के लिए 230 रुपये प्रति विषय निर्धारित किया गया है। विद्यार्थियों को विषय चयन में भी विकल्प दिए गए हैं, जिनमें हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, सामाजिक विज्ञान के साथ विज्ञान, पेंटिंग और गृह विज्ञान जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा विद्यार्थी डाटा एंट्री आपरेशन विषय को अतिरिक्त रूप से चुन सकते हैं।  

सुहागनगरी में महिला मार्केट का काम तेज, कोटला रोड पर बनेगा आधुनिक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स

 फिरोजाबाद उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद सुहागनगरी में महिलाओं के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक खरीदारी का माहौल तैयार करने की दिशा में नगर निगम ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। महिलाओं के लिए एक अलग महिला मार्केट बनाने की योजना पर काम तेज कर दिया गया है। करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित इस मार्केट के लिए स्थल का चयन कर लिया गया है और अब टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। इस मार्केट का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित वातावरण में खरीदारी के साथ-साथ रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, इस विशेष मार्केट में महिलाओं से जुड़े उत्पादों की दुकानें होंगी और यहां सुरक्षा, स्वच्छता व अन्य आवश्यक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा। यह मार्केट न सिर्फ स्थानीय महिलाओं के लिए सुविधाजनक होगा, बल्कि शहर के विकास में भी योगदान देगा। नगर निगम का निर्माण विभाग पिछले काफी समय से योजना के क्रियान्वयन को लेकर मंथन कर रहा है। नवनिर्मित प्रोजेक्ट के अनुसार महिला मार्केट में आधी आबादी के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। विभागीय जानकारी के अनुसार वित्तीय निविदाएं खुलने खुलने के साथ ही अगली कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। महिला मार्केट के निर्माण का कार्य नगर निगम के निर्माण विभाग की देखरेख में किया जाएगा। महिला मार्केट को लेकर सहायक अभियंता द्वारा अधीनस्थ अधिकारियों के बीच काफी देर तक विचार विमर्श किया गया। शासन की स्वीकृति मिलने के बाद योजना के क्रियान्वयन की तैयारी तेज कर दी गई है। फिलहाल महिला मार्केट के लिए कोटला रोड स्थित पीडी जैन इंटर कॉलेज के सामने खाली पड़ी जमीन को चयनित किया गया है। धनराशि बढ़ाने के लिए शासन को लिखेंगे पत्र विभागीय जानकारी के अनुसार महिला मार्केट के लिए निर्माण विभाग द्वारा शासन के समक्ष जो डीपीआर भेजा गया था। उसमें निर्माण लागत की धनराशि छह करोड़ निर्धारित की गई थी। शासन ने इसमें कटौती करते हुए यह धनराशि पांच करोड़ कर दी। ऐसा समझा जाता है कि निर्माण पर अधिक धनराशि खर्च होने के कारण विभाग फिर से इस संबंध में शासन को पत्र लिखेगा। जल्द करेगी आर्किटेक्ट टीम सर्वे नगर निगम का निर्माण विभाग महिला मार्केट के निर्माण को लेकर आर्किटेक्ट टीम का सहयोग लिया जाएगा। विभागीय अधिकारी इस संबंध में जल्द ही आगरा की एक आर्किटेक्ट टीम से संपर्क स्थापित करेंगे। आर्किटेक्ट टीम द्वारा जल्द ही निर्माण स्थल का सर्वे किया जाएगा। प्रस्ताव को सदन में भी पारित किया मेयर कामिनी राठौर ने बताया कि शहर की महिलाओं को सुरक्षित खरीदारी स्थल मुहैया कराने के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा महिला मार्केट का निर्माण कराए जाने का निर्णय लिया गया है। इस प्रस्ताव को सदन में भी पारित किया गया है।  

योगी सरकार की कैबिनेट बैठक में मेडिकल कॉलेज के बगल में निशुल्क भूमि हस्तांतरण को मंजूरी

लखनऊ  तथागत बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में राजकीय नर्सिंग कॉलेज की स्थापना का मार्ग सोमवार को प्रशस्त हो गया। योगी सरकार की कैबिनेट बैठक में नर्सिंग कॉलेज की स्थापना के लिए कुशीनगर के मेडिकल कॉलेज (स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय) के बगल में स्थित सीलिंग भूमि में से 0.405 हेक्टेयर भूमि चिकित्सा शिक्षा विभाग को निशुल्क हस्तांतरित करने को मंजूरी मिल गई है।  केंद्र सहायतित योजना के तहत भारत सरकार ने प्रदेश को 27 नर्सिंग कॉलेज आवंटित किए हैं। इन नर्सिंग कॉलेजों में जनपद कुशीनगर भी शामिल है। केंद्र सरकार की तरफ से प्रति नर्सिंग कॉलेज की लागत 10 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। इसमें 60 प्रतिशत केंद्र का अंश होगा जबकि 40 प्रतिशत राज्यांश है।  कुशीनगर में राजकीय नर्सिंग कॉलेज की स्थापना के लिए पडरौना तहसील के मौजा रामपुर में स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) के बगल में 1.054 हेक्टेयर सीलिंग भूमि में से 0.405 हेक्टेयर भूमि का निशुल्क हस्तांतरण होना था। यह भूमि पडरौना-कुबेरस्थान मुख्य मार्ग से 500 मीटर दक्षिण में स्थित है। राजकीय नर्सिंग कॉलेज को निशुल्क भूमि हस्तांतरण के लिए प्रदेश कैबिनेट ने सोमवार को मंजूरी दे दी। कुशीनगर मेडिकल कॉलेज में राजकीय नर्सिंग कॉलेज की स्थापना से उच्च स्तरीय चिकित्सा में सहायता तो मिलेगी ही, स्थानीय स्तर पर रोजगार का भी सृजन होगा।

विद्यालयों में परिपूर्ण जीवन शिक्षा की ओर कदम – आनंद सभा कार्यशालाए

भोपाल  राज्य आनंद संस्थान द्वारा प्रदेश में शिक्षा को मानवीय एवं मूल्य-आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत प्रदेश के शासकीय स्कूली शिक्षकों के लिये 6 दिवसीय आवासीय कार्यशालाओं की श्रृंखला आयोजित की जा रही है, जिसका शुभारंभ वाल्मी, ईटीसी सेंटर नीलबड़ और राज्य आनंद संस्थान में मुख्य कार्यपालन अधिकारी  आशीष कुमार ने किया। इस व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 18 कार्यशालाएँ आयोजित होंगी, जिनमें प्रदेश के सभी जिलों से लगभग 2160 शिक्षक सहभागिता करेंगे। राज्य आनंद संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी  आशीष कुमार ने कहा कि आनंद सभा के अंतर्गत हमारा लक्ष्य है कि विद्यालयों में आनंद सभा के माध्यम से विद्यार्थियों को जीवन के गहरे मूल्यों से जोड़ा जाए। यह पहल शिक्षा व्यवस्था में एक सांस्कृतिक परिवर्तन का प्रयास है। जब शिक्षक स्वयं इन मूल्यों को आत्मसात करेंगे, तभी वे विद्यार्थियों तक इन्हें प्रभावी ढंग से पहुँचा पाएंगे। आनंद सभा मूल्य आधारित शिक्षा की दिशा में एक महत्वाकांक्षी सतत प्रयास है। राज्य आनंद संस्थान के निदेशक  सत्यप्रकाश आर्य ने कहा कि आनंद सभा विद्यालयों में विद्यार्थियों के समग्र विकास और आंतरिक आनंद का एक सशक्त माध्यम है। यह केवल शिक्षा का विस्तार नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों की ओर एक यात्रा है। कार्यशालाओं के माध्यम से हम शिक्षकों को तैयार कर रहे हैं, जिससे वे विद्यार्थियों को आत्मविश्वास, सहयोग और जिम्मेदारी की भावना से जोड़ सकें। आनंद सभा विद्यार्थियों को केवल सफल नागरिक ही नहीं, बल्कि संवेदनशील और जिम्मेदार इंसान बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। यह पहल शिक्षा प्रणाली को केवल विषयगत ज्ञान तक सीमित न रखते हुए उसे जीवन-कौशल, आंतरिक आनंद एवं समग्र व्यक्तित्व विकास से जोड़ने का प्रयास है। विद्यालयीन शिक्षा विद्यार्थी के भावी जीवन को दक्षता से जीने का आधार बनाती है। इन कार्यशालाओं में प्रदेश के सभी जिलों से चयनित शिक्षक भाग ले रहे हैं। यह प्रशिक्षण उन्हें विद्यालयों में आनंद सभा के संचालन के लिये तैयार करेगा। कुल 18 कार्यशालाएँ आयोजित की जा रही हैं। प्रत्येक कार्यशाला 6 दिन की आवासीय अवधि में होगी। इसमें प्रदेश के सभी जिलों से लगभग 2160 शिक्षक भाग लेंगे। प्रशिक्षण में संवाद सत्र, समूह चर्चा, समझ-सुविधा-संबंध की चर्चा, अभ्यास पुस्तिका की गतिविधियाँ और विद्यार्थियों के साथ सकारात्मक संवाद की तकनीकें शामिल होंगी। आनंद सभा का महत्व विद्यालयीन शिक्षा विद्यार्थियों को दक्षता से जीवन जीने का आधार प्रदान करती है। लेकिन शिक्षा का उद्देश्य केवल सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को परिपूर्ण जीवन जीने के योग्य बनाना भी है। इसी दृष्टि से राज्य आनंद संस्थान ने आनंद सभा की परिकल्पना की है। आनंद सभा में विद्यार्थी किसी विषय की पढ़ाई नहीं करते, बल्कि जीवन कौशल और मानवीय मूल्यों को अनुभवात्मक गतिविधियों के माध्यम से समझते हैं। इसमें संवाद, सहयोग, क्षमा, कृतज्ञता, संकल्प शक्ति, समाज और प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व जैसी गतिविधियाँ शामिल होती हैं। इसका उद्देश्य है कि विद्यार्थी केवल सफल ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से सशक्त होकर परिपूर्ण जीवन जी सकें। साथ ही जीवन के विभिन्न आयामों स्वयं, परिवार, समाज एवं प्रकृति के साथ हमारे संबंधों और जिम्मेदारियों को समझने का अवसर मिलता है। कार्यशाला के सत्रों में सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों पर विशेष बल दिया जाता है। स्वयं और शरीर के अंतर को समझना, संबंधों में संवेदनशीलता विकसित करना, क्षमा मांगने और क्षमा करने का महत्व, कृतज्ञता का भाव, दूसरों की सहायता करने की प्रवृत्ति, तथा संकल्प शक्ति का सकारात्मक उपयोग जैसे विषयों को अनुभवात्मक गतिविधियों के माध्यम से सिखाया जाता है। इन गतिविधियों का उद्देश्य केवल सैद्धांतिक ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर आंतरिक परिवर्तन की प्रक्रिया को प्रारंभ करना है। जब विद्यार्थी इन मूल्यों को अनुभव के स्तर पर समझने लगते हैं, तो उनका व्यवहार, दृष्टिकोण और जीवनशैली सकारात्मक रूप से परिवर्तित होने लगती है।  

ग्वालियर प्रदेश के एजुकेशन हब के रूप में नई पहचान गढ़ने की ओर अग्रसर है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ऐतिहासिक नगरी ग्वालियर प्राचीन काल से ही वीरता, विद्वता और कला का शिखर रही है। ऋषि गालव विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ ही ग्वालियर प्रदेश के एजुकेशन हब के रूप में नई पहचान गढ़ने की ओर अग्रसर है। एक विश्वविद्यालय शिक्षा का केन्द्र होने के साथ ही राष्ट्र निर्माण का भी स्थल होता है। ऋषि गालव के नाम पर बनने वाला यह संस्थान हमारी आने वाली पीढ़ियों को संस्कार, संस्कृति और कौशल से सुसज्जित कर राष्ट्र निर्माण का अग्रदूत बनाएगा। मध्य भारत शिक्षा समिति के संस्थापक श्रद्धेय सदाशिव गणेश गोखले का त्याग पूजनीय है, उन्होंने 85 वर्ष पहले 21 जुलाई 1941 को इस समिति नींव रख पराधीनता के कठिन काल में शिक्षा की अलख जगाने का संकल्प लिया। एक स्कूल से शुरू हुआ यह सफर चार महाविद्यालयों, पांच विद्यालयों और एक खेल अकादमी तक पहुंचा। वर्तमान में विभिन्न संस्थाओं में 5 हजार से अधिक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। ऋषि गालव विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परम्परा के साथ आधुनिक विज्ञान और टेक्नोलॉजी की शिक्षा भी छात्रों को मिलेगी। इसका लक्ष्य ऐसा नागरिक तैयार करना है, जो ज्ञानवान, चरित्रवान, नवाचारी और समाज के लिए उत्तरदायी हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ऋषि गालव विश्वविद्यालय के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। नई शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों में योग्यता, दक्षता और चरित्र निर्माण पर दिया जा रहा है विशेष ध्यान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान कृष्ण, कंस वध के बाद शिक्षा ग्रहण करने उज्जैन पधारे और इस दौरान उन्होंने सुदामा से मित्रता की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत की। यह इस बात का संकेत है कि गरीब-अमीर के बीच कोई परदा नहीं होना चाहिए। इसी समय हमें द्रोणाचार्य और द्रुपद के संदर्भ से शिक्षा के दुरूपयोग का उदाहरण भी प्राप्त होता है, परंतु नालंदा, तक्षशिला विश्वविद्यालयों के माध्यम से मानवता के मूल्यों के प्रसार का उदाहरण भी भारतीय ज्ञान परम्परा में विद्यमान है। इसी भाव का अनुसरण करते हुए प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से नई शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों में योग्यता, दक्षता और चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने पश्चिम बंगाल का संदर्भ देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में देश की सीमाओं तक राष्ट्रवादी विचारों का विस्तार लगातार जारी है। काले कोट के स्थान पर साफे के साथ भारतीय वेशभूषा में दीक्षांत समारोह की परम्परा की गई आरंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऋषि गालव विश्वविद्यालय सरकार और समाज के साझा प्रयासों का एक सजीव उदाहरण बनेगा। राष्ट्रवादी विचारों को समर्पित इस विश्वविद्यालय की पूर्ण गौरव और गरिमा के साथ स्थापना में राज्य सरकार हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। शिक्षा जीवन की सबसे बड़ी पूंजी इै, इसे आधार मानकर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई नवाचार किए हैं। इस क्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति को कुलगुरू का सम्मानजनक और श्रद्धापूर्ण संबोधन प्रदान किया गया है। संपूर्ण प्रदेश में गुरू पूर्णिमा का आयोजन भी इसी क्रम का नवाचार है। काले कोट के स्थान पर साफे के साथ भारतीय वेशभूषा में दीक्षांत समारोह की परम्परा आरंभ की गई। पहले कई-कई वर्षों तक दीक्षांत समारोह आयोजित नहीं होते थे, अब हर साल हर विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह किए जा रहे हैं। तात्या टोपे, क्रांतिसूर्य टंट्या भील और रानी अवंतीबाई लोधी के नाम पर आरंभ किए गए विश्वविद्यालय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुना में तात्या टोपे विश्वविद्यालय और खरगोन में क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय स्थापित किया गया। सागर में केन्द्रीय विश्वविद्यालय पहले से ही था, इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय आरंभ किया गया। प्रदेश के सभी 55 जिलों में पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना कर इन्हें नई शिक्षा नीति के अनुरूप बहुसंकाय कॉलेजों के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्य भारत शिक्षा समिति को ऋषि गालव की गौरवशाली परम्परा को विश्वविद्यालय के रूप में पुनर्जीवित करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अगले साल गुरूपूर्णिमा तक आरंभ करने का संकल्प पूर्ण हो यही कामना है। मनुष्य के साथ परिवेष का विकास ही वास्तविक विकास है-  सुरेश सोनी मुख्य वक्ता एवं राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य  सुरेश सोनी ने कहा कि सड़क, भवन व अन्य अधोसंरचनाओं का निर्माण एवं आविष्कार केवल परिवेश का विकास है। वास्तविक विकास वह होता है जिसमें मनुष्य के साथ परिवेश का भी विकास हो। मनुष्य अधिक संवेदनशील, विचारवान व व्यापक दृष्टिकोण वाले हों। इसी पुनीत उद्देश्य को लेकर मध्यभारत शिक्षा समिति द्वारा ऋषि गालव विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है। विश्वविद्यालय द्वारा रोजगारपरक शिक्षा के साथ-साथ मनुष्य के चरित्र निर्माण पर भी जोर दिया जायेगा। साथ ही भरोसा जताया कि यहाँ पढ़कर निकले विद्यार्थी नालंदा व तक्षशिला विश्वविद्यालय की तरह विश्वभर में भारतीय ज्ञान का परचम लहरायेंगे। उन्होंने कहा कि खुशी की बात है सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति भी इसी भावना के साथ बनाई गई है कि ज्ञान, चरित्र व संस्कार के साथ युवा अपने पैरों पर खड़े हों। साथ ही दूसरों को भी रोजगार व नौकरी देने वाले बनें।  सोनी ने उपकरण एवं गैजेट्स इत्यादि पर अत्यधिक निर्भरता पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि चेतन व अचेतन के समन्वय से हम आगे बढ़ेंगे तो अच्छा परिवार, अच्छा समाज व अच्छा देश तैयार कर सकेंगे। साथ ही पर्यावरण जैसी समस्याओं के समाधान का मार्ग भी हम निकाल सकेंगे। उन्होंने कहा हमारी दृष्टि ऐसी होना चाहिए जो आधुनिकता व मूल परंपरा के साथ समन्वय बनाकर विकास का मार्ग प्रशस्त करती हो।  सोनी ने कहा कि एआई का उपयोग तो करें पर अपने बौद्धिक कौशल को कम न होने दें। केवल सैन्य शक्ति की बदौलत देश महान नहीं बनते :  अशोक पाण्डे कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ मध्यभारत प्रांत के संघचालक  अशोक पाण्डे ने कहा कोई भी देश केवल सैन्य शक्ति की बदौलत महान नहीं बन सकता। महान बनने के लिए शिक्षा व संस्कारों की जरूरत होती है। ऋषि गालव विश्वविद्यालय की स्थापना इसी भाव के साथ की जा रही है। शिक्षा का मुख्य उद्देश्य श्रेष्ठतम जीवन मूल्यों की स्थापना है : उच्च शिक्षा मंत्री  परमार उच्च शिक्षा मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि श्रेष्ठतम जीवन मूल्यों को स्थापित करना शिक्षा का मुख्य उद्देश्य होता है। … Read more

महतारी वंदन योजना से सशक्त हुई केकती बाई की जिंदगी

रायपुर सुशासन तिहार के तहत मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का ग्राम सरोधी में आयोजित चौपाल कार्यक्रम केवल प्रशासनिक संवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आम जनजीवन में आए सकारात्मक बदलावों की जीवंत तस्वीर भी बन गया।इसी चौपाल में सामने आई एक ऐसी कहानी, जिसने सरकारी योजनाओं के वास्तविक प्रभाव को भावनात्मक रूप से उजागर किया। ग्राम सरोधी की निवासी मती केकती मरावी, अपने पति  राजेंद्र मेरावी और तीन बच्चों—चिंरजीव, किरण और विक्रांत के साथ एक साधारण किसान परिवार से जुड़ी हैं। खेती-किसानी ही उनके जीवन का मुख्य आधार है, लेकिन सीमित आय के बीच परिवार का खर्च चलाना हमेशा एक चुनौती रहा है। केकती बाई बताती हैं कि महतारी वंदन योजना ने उनके जीवन में नई रोशनी लाई है। अब तक उन्हें योजना की 26 किश्तें मिल चुकी हैं, जिससे वे घर के छोटे-छोटे खर्चों में हाथ बंटा पा रही हैं। पहले जहां हर छोटी जरूरत के लिए सोच-विचार करना पड़ता था, वहीं अब उनके पास आत्मनिर्भरता का एक आधार बन गया है। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों से वे “स्वच्छता दीदी” के रूप में भी कार्य कर रही हैं, जिससे उन्हें प्रतिमाह 1000 रुपए की अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। इसके साथ ही उज्ज्वला योजना के तहत निःशुल्क गैस सिलेंडर मिलने से उनके परिवार के स्वास्थ्य में भी सुधार आया है और रसोई का काम आसान हुआ है। केकती बाई केवल अपने परिवार तक ही सीमित नहीं रहीं, बल्कि वे “जय मां बंजारी महिला स्व सहायता समूह” की अध्यक्ष भी हैं। समूह के माध्यम से उन्हें 15 हजार रुपए का अनुदान मिला है, जिससे वे अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। भावुक होते हुए केकती बाई ने कहा कि आज उनका परिवार पहले से कहीं अधिक सशक्त और आत्मविश्वासी महसूस करता है। उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं ने उनके जीवन को नई दिशा दी है। ग्राम सरोधी की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि जब योजनाएं सही हितग्राहियों तक पहुंचती हैं, तो वे केवल आर्थिक मदद नहीं देतीं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की नई राह भी खोलती हैं।

सीएम योगी बोले: यूपी अब वित्तीय अनुशासन के साथ आगे बढ़ रहा है

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लोक भवन में सहकारी समितियां एवं पंचायत लेखा परीक्षा विभाग के नव चयनित लेखा परीक्षकों को नियुक्ति-पत्र वितरित किया। कार्यक्रम में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, अपर मुख्य सचिव वित्त दीपक कुमार, सचिव वित्त संदीप कौर, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एसएन साबत आदि उपस्थित थे। सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में हुए व्यापक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि बदलते भारत के साथ उत्तर प्रदेश ने भी नई पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले और उसके बाद के उत्तर प्रदेश का अंतर किसी से छिपा नहीं है और यह परिवर्तन हर क्षेत्र में देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार की प्राथमिकता कानून का राज और सुरक्षा होती है, लेकिन इसके साथ ही बेहतर वित्तीय प्रबंधन और अनुशासन भी उतना ही आवश्यक है। यदि वित्तीय अनुशासन नहीं होता और बिना बजट के खर्च होते, तो उत्तर प्रदेश आज बीमारू राज्य की छवि से बाहर नहीं निकल पाता। योगी आदित्यनाथ ने लोक भवन में आयोजित करीब 500 नव चयनित युवाओं के नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि वित्तीय कुप्रबंधन का उदाहरण जेपीएनआइसी (जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर) है। जिसकी प्रारंभिक लागत 200 करोड़ रुपये थी, लेकिन 860 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद परियोजना आज भी अधूरी है। मुख्यमंत्री ने 2017 के शुरुआती दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय प्रदेश की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि कोई बैंक उत्तर प्रदेश को कर्ज देने के लिए तैयार नहीं था। उन्होंने बताया कि सरकार ने निर्णय लिया कि बिना कर्ज लिए वित्तीय अनुशासन के साथ विकास कार्य किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आज स्थिति बदल चुकी है। उदाहरण देते हुए उन्होंने गंगा एक्सप्रेसवे का उल्लेख किया, जो करीब 600 किलोमीटर लंबा है और जिस पर 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए हैं। इसके साथ ही नौ इंडस्ट्रियल और लाजिस्टिक हब विकसित किए जा रहे हैं, जिनके लिए 7000 एकड़ भूमि ली गई है। कुल मिलाकर इस परियोजना पर लगभग 42 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज बड़े प्रोजेक्ट के लिए बैंक स्वयं निवेश की पेशकश करते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश अब आत्मनिर्भर वित्तीय प्रबंधन के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पहले तो प्रदेश में हजारों करोड़ रुपये के कई घोटाले हुए, लेकिन वर्तमान सरकार ने वित्तीय कुप्रबंधन को सुधारते हुए प्रदेश को अनुशासित वित्तीय ढांचे में आगे बढ़ाया है, जिसके परिणाम आज स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। वित्तमंत्री के जिले में किसका चयन हुआ उन्हें भी नहीं पता मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले हर पेपर लीक हो जाता था लेकिन अब इसकी पुख्ता व्यवस्था की गई है। उन्होंने वित्त मंत्री की ओर इशारा करते हुए कहा कि शाहजहांपुर से कई कैंडिडेट चयनित हुए हैं। वित्त मंत्री वहीं के हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि किसका चयन हो रहा है। पहले पेपर लीक होता था तो जो बचा रहता था वह चाचा भतीजे पूरा कर देते थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ की मुस्लिम बेटी का चयन हुआ है। यह सबूत है कि कहीं किसी भी तरह का भेदभाव नहीं हुआ है। इसके लिए बोर्ड को बधाई। जो भी युवा योग्य होगा उसे नौकरी मिलेगी और अयोग्य लोगों की दाल नहीं गलेगी। उन्होंने कहा कि नियुक्ति पत्र पाने वालों में बड़ी संख्या में बेटियां है। यह साबित करता है कि बेटियां किसी से पीछे नहीं हैं और उन्हें हर हाल में अधिकार देना पड़ेगा। कोई कितना भी विरोध कर ले, लेकिन बेटियों को कोई पीछे नहीं कर सकता है।  

पीएम-कुसुम योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला

भोपाल नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री  राकेश शुक्ला ने कहा है कि प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा अनुसार पूरी ऊर्जा के साथ कार्य करें। हमें प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा वर्ष 2030 के लिये तय किये गये लक्ष्य को हासिल करने में मध्यप्रदेश को अग्रणी बनाना है। मंत्री  शुक्ला ने कहा कि लक्ष्य की प्राप्ति के मार्ग में आने वाली सभी बाधाओं को हम सब मिलकर दूर करेंगे। मंत्री  शुक्ला पीएम-कुसुम योजना (कंपोनेंट ‘अ’ एवं ‘स’) के अंतर्गत सौर ऊर्जा परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं संचालन के लिए दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव  मनु वास्तव, एमडी मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम  अमनवीर सिंह बैंस, जीआईजेड के प्रोजेक्ट हेड  बर्नार्ड और सोलर एनर्जी डेवलपर्स मौजूद थे। कार्यशाला में मंत्री  शुक्ला एवं अन्य अतिथियों ने कुसुम योजना अंतर्गत स्थापित किए जाने वाले सौर संयंत्रों के ग्रिड पर लोड संबंधी रिपोर्ट का विमोचन भी किया। मंत्री  शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश में सौर ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार तीव्र गति से हो रहा है। राज्य सरकार द्वारा पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत सौर परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक नीतिगत समर्थन प्रदान किया जा रहा है, जिससे किसानों एवं उपभोक्ताओं को लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये पॉवर परचेज एग्रीमेंट की प्रक्रियाओं को सरल एवं पारदर्शी बनाया जा रहा है तथा डेवलपर्स को समयबद्ध स्वीकृतियां प्रदान करने पर विशेष बल दिया जा रहा है। इससे परियोजनाएं निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण हो सकेंगी। मंत्री  शुक्ला ने बताया कि राज्य में वृहद स्तर पर सौर ऊर्जा क्षमता विकसित की जा रही है। इसके लिए तकनीकी मूल्यांकन, ग्रिड समन्वय एवं आवश्यक आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सौर परियोजनाओं में आने वाली तकनीकी एवं संचालन संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए विशेषज्ञ संस्थाओं के सहयोग से कार्य किया जा रहा है। मंत्री  शुक्ला ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं डेवलपर्स, यूटिलिटीज एवं अन्य हितधारकों के लिए उपयोगी मंच प्रदान करती हैं, जहां वे अपने अनुभव साझा कर बेहतर समाधान प्राप्त कर सकते हैं। एसीएस नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा  वास्तव ने कहा कि पीएम-कुसुम योजना में सौर ऊर्जा परियोजनाओं का क्रियान्वयन राज्य में सुनियोजित एवं चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बड़े पैमाने पर परियोजनाओं के विकास के साथ-साथ उनके तकनीकी एवं वाणिज्यिक पक्षों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एमडी ऊर्जा विकास निगम  बैंस ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य डेवलपर्स, यूटिलिटीज एवं अन्य संबंधित हितधारकों की तकनीकी दक्षता को सुदृढ़ करना है, जिससे सौर ऊर्जा परियोजनाओं के गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जा सके। प्रदेश में “सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना” के अंतर्गत 493 उपकेंद्रों के माध्यम से लगभग 4022 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिये जीआईजेड, पीआरडीसी एवं आई-डेक की टीमें उपकेंद्रों के तकनीकी एवं कंडिशनल आंकलन का कार्य कर रही हैं। कार्यशाला में रिएक्टिव पॉवर मैनेजमेंट, ग्रिड स्टडीज, टाइम सीरीज लोड फ्लो विश्लेषण, सोलर पीवी प्रोजेक्ट डेवलपमेंट, गुणवत्ता प्रबंधन, सोलर मॉड्यूल की कार्यक्षमता एवं प्रदर्शन तथा जोखिम प्रबंधन सहित विभिन्न तकनीकी विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत जानकारी दी जा रही है। विकासकों द्वारा अपने अनुभव भी साझा किये जा रहे हैं। मंगलवार को कार्यशाला का समापन होगा।