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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट: अमेरिका के ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ पर ईरान का सख्त रुख

 नई दिल्ली पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने सोमवार को अमेरिकी सेना को चेतावनी दी है कि यदि वे होर्मुज में प्रवेश करते हैं, तो उन पर हमला कर दिया जाएगा। ईरान के मुख्य सैन्य कमान खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने कहा, 'हम चेतावनी देते हैं कि किसी भी विदेशी सशस्त्र बल, विशेष रूप से आक्रामक अमेरिकी सेना पर हमला किया जाएगा, यदि वे होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने का इरादा रखते हैं।' ईरान ने यह भी दावा किया कि इस जलमार्ग की सुरक्षा पूरी तरह उसके नियंत्रण में है और किसी भी जहाज के सुरक्षित मार्ग के लिए ईरानी सशस्त्र बलों के साथ समन्वय करना अनिवार्य है। अमेरिका का प्रोजेक्ट फ्रीडम अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ईरान क्यों भड़का हुआ है? दरअसल, सोमवार को अमेरिका ने होर्मुज में फंसे जहाजों को मुक्त कराने के लिए सैन्य अभियान चलाने की घोषणा की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मिशन को प्रोजेक्ट फ्रीडम का नाम दिया। ट्रंप ने कहा कि कई देशों ने अमेरिका से मदद मांगी है क्योंकि उनके व्यापारिक जहाज इस संघर्ष में बिना किसी गलती के फंसे हुए हैं। ट्रंप ने कहा, 'कई जहाजों पर भोजन और आवश्यक सामग्री खत्म हो रही है। ईरान, पश्चिम एशिया और अमेरिका की भलाई के लिए हम इन जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालेंगे।' 100 विमान और 15 हजार सैनिकों की तैनाती अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस सैन्य तैनाती की पुष्टि कर दी है। इस ऑपरेशन में गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक, 100 से अधिक विमान और लगभग 15,000 सैनिक शामिल किए गए हैं। पेंटागन के नेतृत्व में यह मिशन सोमवार सुबह से शुरू हुआ है, जिसका उद्देश्य वाणिज्यिक जहाजों के लिए नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करना है। अमेरिका के इस घोषणा के बाद ईरान ने चेतावनी दी है। पिछले कुछ दिनों से पश्चिम एशिया में शांति है, लेकिन इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति के एलान ने आग में घी डालने का काम किया है। 14-सूत्रीय शांति प्रस्ताव पर टिकी दुनिया की नजरें इस बीच यह भी खबर आई है कि पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को एक 14-सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा है, जो अमेरिका के 9-सूत्रीय प्रस्ताव के जवाब में तैयार किया गया है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने इस प्रस्ताव पर संदेह जताया है, लेकिन वे इसकी समीक्षा करने को तैयार हैं। 28 फरवरी को अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच शुरू हुए भीषण संघर्ष के बाद आठ अप्रैल से जारी युद्धविराम ने कूटनीति के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। शांति की आखिरी उम्मीद इस्लामाबाद वार्ता पाकिस्तान ने 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच पहले दौर की सीधी बातचीत की मेजबानी की थी। हालांकि उस समय कोई ठोस समझौता नहीं हो सका, लेकिन स्थिति को बिगड़ने से बचाने के लिए 21 अप्रैल को राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्धविराम को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया। इशाक डार और अब्बास अराघची की ताजा बातचीत इसी कड़ी का हिस्सा है, जहां पाकिस्तान ने स्पष्ट किया है कि केवल संवाद और कूटनीति के जरिए ही क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता हासिल की जा सकती है।

ग्वादर प्रोजेक्ट में तनाव: चीनी कंपनी की चेतावनी के बाद पाकिस्तान सरकार ने तुरंत खोली फाइलें

  पाकिस्तान सरकार ने चीन को गधे के मांस और खाल के निर्यात को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है। यह फैसला एक चीनी कंपनी की उस कड़ी चेतावनी के बाद आया है, जिसमें उसने निर्यात की मंजूरी मिलने में हो रही देरी के कारण पाकिस्तान में अपना कामकाज बंद करने की धमकी दी थी। हालात को बिगड़ता देख पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना पड़ा। क्या है पूरा विवाद? यह विवाद ग्वादर में काम करने वाली 'हनगेंग ट्रेड कंपनी' से जुड़ा है। ग्वादर चीन द्वारा समर्थित परियोजनाओं (CPEC) का एक प्रमुख केंद्र है। यह कंपनी एक बूचड़खाना चलाती है, जहां से गधे का मांस और खाल चीन भेजी जाती है। पिछले कई महीनों से पाकिस्तान के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मंत्रालय और पशु संगरोध विभाग में कंपनी के निर्यात की फाइल अटकी हुई थी। कंपनी का अल्टीमेटम और निवेशकों को चेतावनी परेशान होकर 1 मई को चीनी कंपनी ने एक सार्वजनिक बयान जारी किया। कंपनी ने कहा: गैर-बाजार कारकों और काम में आ रही सरकारी बाधाओं के कारण वे अपनी फैक्ट्री बंद करने को मजबूर हैं। उन्होंने अपने कर्मचारियों को भी संभावित छंटनी और फैक्ट्री बंद होने की सूचना दे दी थी। कंपनी ने दावा किया कि निर्यात के सभी मानक पूरे करने के बावजूद पिछले 3 महीनों से उनका शिपमेंट फंसा हुआ है और पाकिस्तानी अधिकारियों से कोई मदद नहीं मिल रही है। सबसे बड़ी बात, कंपनी ने अन्य विदेशी व्यवसायों को भी चेतावनी दी कि वे पाकिस्तान में निवेश करने से पहले यहां की नीतियों के क्रियान्वयन में मौजूद खामियों और संस्थागत अनिश्चितता का सावधानीपूर्वक आकलन कर लें। इस बयान से पाकिस्तान में विदेशी निवेश के माहौल पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का त्वरित हस्तक्षेप इस बयान के बाद पाकिस्तान सरकार में हड़कंप मच गया। प्रधानमंत्री के सलाहकार तौकीर शाह ने तुरंत इस मामले को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंचाया। शुक्रवार को पीएमओ ने सीधे इस मामले में दखल दिया, जिसके बाद रुकी हुई फाइलों ने अचानक गति पकड़ ली। अगले ही दिन (शनिवार को) पाकिस्तानी कैबिनेट ने गधे के मांस के निर्यात को अपनी मंजूरी दे दी और संबंधित विभाग ने आवश्यक परमिट भी जारी कर दिए। सरकार की यह फुर्ती इसलिए भी अहम है क्योंकि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इसी महीने के अंत में एक बड़े निवेश मंच में हिस्सा लेने के लिए चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं, और सरकार चीन को नाराज नहीं करना चाहती थी। सरकारी अधिकारियों का क्या कहना है? कैबिनेट डिवीजन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपना बचाव करते हुए कहा कि मंजूरी की प्रक्रिया नियमों के तहत ही चल रही थी और 'आर्थिक समन्वय समिति' (ECC) के फैसलों को अक्सर चरणों में लागू किया जाता है। वहीं, कुछ अन्य सरकारी अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि देरी इसलिए हुई क्योंकि चीनी कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के निर्यात के लिए आवश्यक प्रजनन मानकों जैसी कुछ शर्तों को पूरी तरह से नहीं माना था। चीन को क्यों निर्यात किए जाते हैं गधे? चीन में गधे के मांस और खासकर उसकी खाल की भारी मांग है। गधे की खाल का इस्तेमाल चीन में पारंपरिक दवाएं बनाने में किया जाता है। इन दवाओं को मुख्य रूप से ब्लड टॉनिक (खून बढ़ाने वाली दवा) और त्वचा से जुड़ी समस्याओं के इलाज के रूप में बेचा जाता है। पाकिस्तान के लिए इसका आर्थिक महत्व पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ा बाजार है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार: पाकिस्तान हर साल मांस और खाल के लिए लगभग 2,16,000 गधों का निर्यात मुख्य रूप से चीन को करता है। सरकार का अनुमान है कि यह क्षेत्र पाकिस्तान के लिए सालाना लगभग 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 30 करोड़ डॉलर) का राजस्व उत्पन्न कर सकता है, जो पाकिस्तान की वर्तमान आर्थिक स्थिति को देखते हुए एक बड़ी रकम है।

AMCA स्टेल्थ फाइटर जेट के निर्माण के लिए आंध्र सरकार ने 600 एकड़ जमीन की मंजूरी दी

हैदराबाद  आंध्र प्रदेश सरकार ने भारत के पहले स्वदेशी स्टेल्थ फाइटर जेट एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट – AMCA  के निर्माण के लिए 600 एकड़ जमीन मंजूर कर दी है. यह फैसला राज्य कैबिनेट ने लिया. यह प्लांट श्री सत्य साई जिले में बनेगा. यहां फाइनल असेंबली, प्रोटोटाइप डेवलपमेंट, ग्राउंड टेस्टिंग, फ्लाइट कॉम्प्लेक्स और वैज्ञानिकों के लिए हाउसिंग की सुविधाएं बनेंगी।  यह हब लगभग 140 AMCA स्टेल्थ जेट्स बनाने का काम करेगा. प्रोजेक्ट से करीब 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश आने की उम्मीद है. इसमें प्राइवेट कंपनियां जैसे टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, L&T और भारत फोर्ज जैसी कंपनियां पार्टनरशिप में काम करेंगी. खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट में HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) को बायपास किया गया है. इससे प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ेगी और काम तेजी से होगा।  क्यों चुना गया श्री सत्य साई जिला? इस जगह को इसलिए चुना गया क्योंकि यह बेंगलुरु में स्थित एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) के बहुत करीब है. वहां पहले से ही AMCA का डिजाइन और विकास का काम चल रहा है. इलाके में एयरस्ट्रिप भी है, जो टेस्टिंग के लिए बहुत जरूरी है. मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने 2025 में ही इस प्रोजेक्ट के लिए आंध्र प्रदेश को प्राथमिकता देने की पिच दी थी. अब कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी है।  AMCA स्टेल्थ फाइटर क्या है? AMCA भारत का पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट है. यह दुश्मन के रडार में आसानी से पकड़ा नहीं जा सकता. इसमें एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, सुपरक्रूज स्पीड, बेहतरीन एवियोनिक्स और मल्टी-रोल क्षमता होगी. यह राफेल और Su-30 MKI जैसे मौजूदा जेट्स से ज्यादा एडवांस्ड होगा. प्रोटोटाइप 2027 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।  यह प्रोजेक्ट भारत को विदेशी जेट्स पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा. प्राइवेट कंपनियों की भागीदारी से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर तेज होगा और रोजगार भी बढ़ेगा. वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए हाउसिंग बनने से टैलेंट यहां आएगा. कुल मिलाकर यह प्लांट भारत की एयरोस्पेस इंडस्ट्री को नई ऊंचाई देगा।  AMCA के 140 जेट्स बनने से भारतीय वायुसेना मजबूत होगी. यह प्रोजेक्ट निर्यात के लिए भी अवसर खोल सकता है. सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक भारत रक्षा उपकरणों में बड़ा निर्यातक बने. आंध्र प्रदेश को यह प्रोजेक्ट औद्योगिक विकास और रोजगार दोनों देगा। 

विधानसभा चुनाव 2026: बंगाल-असम में BJP की जीत, केरल में कांग्रेस-यूडीएफ मजबूत

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल में भाजपा पहली बार सत्ता पाने वाली है। उसे विधानसभा चुनाव में अब तक 198 सीटों पर बढ़त मिल चुकी है। इसके अलावा असम में भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में आई है। यही नहीं भाजपा की इस लहर का मोमेंटम केरल तक में दिखा है। दक्षिण भारत के इस राज्य में भाजपा लंबे समय से अपनी पैठ जमाने की कोशिश करती रही है, लेकिन सफल नहीं हुई है। इस बार विधानसभा चुनाव में उसे कुछ उम्मीद दिख रही है और अब तक उसके दो कैंडिडेट जीत चुके हैं। इन कैंडिडेट्स में से एक वी. मुरलीधरण भी हैं, जो कजाकुट्टम सीट से सीपीएम के कैंडिडेट के. सुरेंद्रन से जीत गए। उन्होंने 18 राउंड तक चली काउंटिंग में 428 वोटों से जीत हासिल की है। इसके अलावा नमोम सीट से पूर्व सांसद राजीव चंद्रशेखर ने भी जीत हासिल की है। इस तरह भाजपा ने बंगाल और असम के बाद केरल में भी इतिहास रच दिया है। बंगाल में उसे पहली बार सत्ता मिली है तो वहीं असम में पहले से ज्यादा बड़ी जीत के साथ भाजपा को लगातार तीसरी बार सत्ता मिलेगी। ऐसा पहली बार होगा, जब भाजपा को लगातार तीसरी बार सत्ता मिलने वाली है। यही नहीं इस चुनाव में केरल में भी कई रिकॉर्ड बने हैं। एक रिकॉर्ड यह भी है कि मुस्लिम लीग की कोई महिला कैंडिडेट पहली बार विधानसभा में पहुंचेगी। कोझोकोड की पेरंबरा सीट से फातिमा थालिया को जीत मिली है। इसके अलावा केरल में कांग्रेस ने भी रिकॉर्ड बनाया है। असम में बुरी हार झेलने वाली कांग्रेस का बंगाल में खाता तक नहीं खुला है। लेकिन केरल से उसके लिए राहत वाली खबर आई है। केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ 101 सीटों पर आगे चल रहा है। ऐसा पहली बार है, जब केरल में यूडीएफ ने 100 का आंकड़ा पार किया है। इस बीच कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कांग्रेस की जीत पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि केरल में ऐंटी-इनकम्बैंसी थी और इसका वोट कांग्रेस को मिला है। उन्होंने कहा कि जनता में पिनराई विजयन सरकार के कामकाज के प्रति गुस्सा था और हमने उसे भुनाने में सफलता हासिल की है। केसी वेणुगोपाल बोले- हमने उठाया ऐंटी-इनकम्बैंसी का फायदा केसी वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि केरल में इन नतीजों का क्रेडिट राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा और पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को जाता है। बता दें कि केरल की वायनाड सीट से ही प्रियंका वाड्रा सांसद हैं। इसके अलावा राहुल गांधी भी पहले यहीं से सांसद थे। इस बार उन्होंने दो सीटों से चुनाव लड़ा था। रायबरेली और वायनाड दोनों जगहों से वह जीते थे। अंत में उन्होंने वायनाड से इस्तीफा दे दिया था और उसके स्थान पर प्रियंका वाड्रा ने उपचुनाव लड़ा था।

भाजपा की चिंता: TMC नतीजों को नकार सकती है, चुनाव आयोग ने जताई तत्परता

कलकत्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आज आ रहे हैं। अब तक के रुझानों में भाजपा ने शतक जड़ दिया है और लगातार टीएमसी पर बढ़त बनाए हुए है। चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक भी भाजपा अब तक 171 सीटों पर बढ़त बना चुकी है, जबकि टीएमसी को 100 सीटों पर ही बढ़त है। ऐसी स्थिति में साफ माना जा रहा है कि भाजपा इस बार सत्ता हासिल कर लेगी। हालांकि आधिकारिक नतीजों के लिए इंतजार करना होगा, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि भाजपा इस बार सत्ता हासिल कर सकती है। इस बीच भाजपा ने नतीजे आने के बाद टीएमसी के रुख को लेकर भी चिंता जता दी है। खड़गपुर सदर सीट से भाजपा कैंडिडेट दिलीप घोष का कहना है कि टीएमसी की ओर से नतीजे मानने से इनकार किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए चुनाव आयोग ने पूरी तैयारी कर रखी है। उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज ही नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में हालात तब से ठीक हुए, जब चुनाव आयोग ने कमान संभाली। उन्होंने कहा कि बंगाल के हालात चिंताजनक ही रहे हैं और खूनखराबा होता रहा है, लेकिन इस बार इलेक्शन शांतिपूर्ण रहे हैं। आयोग ने बड़े पैमाने पर सुरक्षा बल तैनात किए, जिससे गड़बड़ी नहीं हो सकी। किसी व्यक्ति का कत्ल नहीं हो पाया। बता दें कि 2021 के चुनाव में हिंसा काफी हुई थी। यहां तक कि भाजपा कार्यकर्ताओं में इसे लेकर असंतोष भी था। ऐसे में इस बार जिस तरह की सुरक्षा की गई, उससे भी माहौल बदला दिखा। दिलीप घोष ने कहा कि चुनाव का नतीजा तो तय है और अब सिर्फ औपचारिक घोषणा होनी है। उन्होंने कहा कि भाजपा कोशिश करेगी कि जनता ने जिस विश्वास के साथ मतदान किया है, उस पर खरा उतरा जाए। नई सरकार और बंगाल अब भारत के साथ आगे बढ़ेंगे, वे बांग्लादेश के साथ नहीं जाएंगे। जनता बदलाव चाहती है और उन्होंने भाजपा को अच्छी संख्या में सीटें देकर सरकार बनाने का मौका दिया है। घोष ने कहा कि बंगाल में कोई कानून नहीं चल रहा था। घोष बोले- चुनाव आयोग ने संभाली व्यवस्था तो संभले हालात उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले जब निर्वाचन आयोग ने व्यवस्था संभाली तो कानून व्यवस्था में सुधार आया। चुनाव शांतिपूर्ण हुए थे और अब काउंटिंग में भी बवाल नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि अब नई सरकार भी इसी तरह से शपथ लेगी। घोष ने कहा कि पहले के चुनाव में गड़बड़ियां की जाती थीं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को घरों में ही बंद कर दिया जाता था। उन्हें 15 सालों तक वोटिंग करने से रोका गया। इस बार उन्हें चांस मिला तो उन्होंने बदलाव के लिए मतदान किया है।

Indian Passport की ताकत बढ़ी: रैंकिंग में उछाल, पाकिस्तान नीचे, रईस देश भी चौंके

लंदन पासपोर्ट ही तय करते हैं कि आप दुनिया के कितनों हिस्सों तक पहुंच सकते हैं। आपके पासपोर्ट तय करते हैं कि आपको किन देशों में वीजा फ्री एंट्री मिल सकती है या आपको किसी और देश में पहुंचने के लिए कितनी मशक्कत का सामना करना पड़ता है। हेनली पासपोर्ट इंडेक्स अलग अलग डेटा के आधार दुनिया भर के पासपोर्ट की ताकत को रैंक करता है। यह रैंकिंग इस आधार पर तय की जाती है कि किसी देश के नागरिक बिना वीजा के कितने देशों में जा सकते हैं। हेनली पासपोर्ट इंडेक्स-2026 की रिपोर्ट आ गई है जिसमें भारत के पासपोर्ट ने छलांग लगाई है जबकि अमीर देश इस लिस्ट में फिसलते नजर आ रहे हैं। सिंगापुर के लोग अपने पासपोर्ट से 192 देशों में पहुंच सकते हैं इसलिए इस लिस्ट में इसे सबसे ऊपर रखा गया है। पासपोर्ट की रैंकिंग जियो-पॉलिटिक्स, अर्थव्यवस्था, भौगोलिक स्थिति, राजनीतिक स्थिरता समेत कई फैक्टर्स पर निर्भर करता है। हेनली पासपोर्ट इंडेक्स से पता चलता है कि भारतीय पासपोर्ट की स्थिति मजबूत हुई है। भारत अब 85वें स्थान से लंबी छलांग लगाकर 75वें पायदान पर पहुंच गया है। एशिया और यूरोप के सबसे 'ताकतवर' पासपोर्ट सिंगापुर पहले नंबर पर है और उसके बाद दूसरे सबसे मजबूत पासपोर्ट के लिए तीन देशों के बीच बराबरी है। जापान, दक्षिण कोरिया और संयुक्त अरब अमीरात। इन तीनों देशों के लोग बिना वीजा के 187 देशों की यात्रा कर सकते हैं। पूर्वी या दक्षिण-पूर्वी एशिया के बाहर UAE का पासपोर्ट सबसे मजबूत है। हालांकि इसमें एक खास बात ध्यान रखने लायक है। सिंगापुर, जापान या दक्षिण कोरिया के लोगों के विपरीत UAE के नागरिकों को अमेरिका में बिना वीजा के जाने की सुविधा नहीं मिलती है। टॉप-10 शक्तिशाली पासपोर्ट वाले देश 1- सिंगापुर 2- जापान, दक्षिण कोरिया, संयुक्त अरब अमीरात 5- नॉर्वे, स्विट्जरलैंड 7- यूरोपीय यूनियन, मलेशिया, यूनाइटेड किंगडम 10- ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड

US एक्शन का असर: ट्रंप की सख्ती से मेक्सिको के नेता पद छोड़ने को मजबूर

मेक्सिको अमेरिका द्वारा मादक पदार्थों की तस्करी का आरोप लगाए जाने के बाद मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लौडिया शिनबाम की पार्टी के दो सदस्यों ने अपने पद से अस्थायी रूप से हटने की घोषणा की है। उत्तर पश्चिमी सिनालोआ राज्य से शिनबाम की पार्टी के इन सदस्यों ने बताया कि अमेरिका ने उन पर और आठ अन्य नेताओं एवं सुरक्षा अधिकारियों पर मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप लगाए हैं। अमेरिका के द्वारा ड्रग्स तस्करी का आरोप लगाए जाने के बाद मैक्सिको के सिनालोआ प्रांत के गवर्नर और मेयर ने अपना पद छोड़ दिया है. शुक्रवार मध्यरात्रि को जारी एक वीडियो संदेश में अभियोग में नामित गवर्नर रुबेन रोचा मोया ने उन आरोपों का खंडन किया. उन्होंने मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोह ‘सिनालोआ कार्टल’ को संरक्षण देने के आरोपों को खारिज किया. उन्होंने लाखों डॉलर की रिश्वत के बदले में उसे अमेरिका में मादक पदार्थों की तस्करी में मदद करने से इनकार किया. पूर्व राष्ट्रपति एंड्रेस मैनुअल लोपेज ओब्राडोर के लंबे समय से सहयोगी रहे 76 वर्षीय रोचा ने कहा, ‘मेरा ईमान साफ है. मैं अपने लोगों और अपने परिवार से आंख मिलाकर कह सकता हूं कि मैंने कभी आपको धोखा नहीं दिया और न ही कभी दूंगा.’ वहीं, सिनालोआ राज्य की राजधानी कुलियाकान के मेयर जुआन डी डियोस गामेज मेंडिविल का नाम भी अभियोग में शामिल है. उन्होंने भी आरोपों से इनकार किया और पद से हटने का ऐलान किया. शनिवार को एक विशेष मतदान में राज्य की स्थानीय कांग्रेस ने रोचा की सहयोगी येराल्डिन बोनिला वाल्वरडे को अंतरिम गवर्नर नियुक्त किया. मैक्सिको में ड्रग्स और उसकी तस्करी के कारण हिंसा भी बहुत होती है. लेकिन हाल के दिनों में अमेरिका की ओर से उस पर इस धंधे पर लगाम लगाने का भी दबाव है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को इन्हीं आरोपों के तहत उनके देश में उनके बिस्तर से गिरफ्तार कर लिया. गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, मैक्सिकन राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम को अपनी प्रगतिशील मोरेना पार्टी के हितों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा कार्टेल के खिलाफ लड़ाई तेज करने के दबाव के बीच संतुलन बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा है. शीनबाम ने कहा कि वह किसी भी ऐसे व्यक्ति का बचाव नहीं करेंगी जो अपराध करने का दोषी पाया गया हो. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर इन 10 लोगों के खिलाफ सबूत मिलते हैं, तो उन पर मैक्सिको में ही केस चलाया जाएगा. मैक्सिको में कई तरह के ड्रग कार्टेल काम करते हैं. पिछले दिनों, फरवरी 2026 में एल मेंचो नाम के ड्रग लॉर्ड और जलिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल का संंचालक की मौत काफी चर्चा में था. सिनालोआ कार्टेल मैक्सिको का सबसे शक्तिशाली ड्रग नेटवर्क है.

दिग्गज नेता रमेश चेन्निथला ने हरिपाड़ सीट जीती, CPI उम्मीदवार को करारी हार

केरल केरल में 140 सीटों वाली विधानसभा चुनाव में मतों की गिनती जारी है। कांग्रेस के दिग्गज नेता रमेश चेन्निथला ने हरिपाड़ (Haripad) विधानसभा सीट से 23,000 से अधिक वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज कर ली है। चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार उन्हें आधिकारिक रूप से विजयी घोषित कर दिया गया है। 12 मंत्री भी पीछे चल रहे रुझानों में जहां सीएम पिनाराई विजयन समेत लगभग 12 मंत्री भी अपनी प्रतिद्वदियों से पीछे चल रहे हैं। यहां कांग्रेस गठबंधन यूडीएफ की सरकार बनते दिख रही है। सीएम विजयन अपने प्रतिद्वंदी वी पी अब्दुल रशीद से पीछे चल रहे हैं। निर्वाचन क्षेत्र नाम उम्मीदवारों के नाम वोट शेयर मलप्पुरम केरलम पी.के कुन्हालीकुट्टी आईयूएमएल 7,185 70.83% लीड Puthuppally केरलम सलाह. चांडी ओमन कांग्रेस 10,740 65.51 % लीड मांकड़ा केरलम मंजलमकुझी अली आईयूएमएल 18,480 65.32% लीड एर्नाड केरलम पी.के.बशीर आईयूएमएल 6,194 65.24 % लीड एर्नाकुलम केरलम टी जे विनोद कांग्रेस 4,450 60.58% लीड कन्नूर केरलम वकील टी.ओ. मोहनन कांग्रेस 6,884 59.55% लीड

बंगाल काउंटिंग के दौरान दीदी का भरोसा बरकरार, घर के बाहर गूंजे ‘जय श्रीराम’

कोलकत्ता पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम की तस्वीर अब धीरे-धीरे साफ हो रही है। दोपहर 1 बजे तक की काउंटिंग में बीजेपी जबरदस्त बहुमत हासिल कर ली है। बीजेपी 191 सीटों पर आगे चल रही है। जबकि ममता बनर्ती की टीएमसी 95 सीटों पर सिमटती हुई दिख रही है। चुनाव आयोग के मुताबिक भाजपा 187 और टीएमसी 92 सीटों पर आगे चल रही है। जबरदस्त जीत होता देख बीजेपी कार्यकर्ता सड़कों पर उतकर जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया है। ममता बनर्जी के घर के बाहर बीजीपी कार्यकर्ताओं ने जय श्रीराम के नारे लगाए। वहीं काउंटिंग के बीच सीएम ममता बनर्जी का बयान सामने आया है। दीदी ने टीएमसी कैंडिडेट और कार्यकर्ताओं से बूथ नहीं छोड़ने की अपील की है। पश्चिम बंगाल में चुनाव में रुझानों में बड़ी जीत की संभावना के बीच बीजेपी के कुछ कार्यकर्ता ममता के घर पहुंच गए। इन लोगों ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए। वहीं पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव मतगणना के बीच ममता बनर्जी ने पहला बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि हमें काउंटिंग सेंटर जाने से रोका जा रहा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से काउंटिंग सेंटर्स न छोड़ने को कहा है। टीएमसी के कार्यकर्ता काउंटिंग सेंटर्स को न छोड़ें क्योंकि अभी सिर्फ 4 राउंड की गिनती हुई है। ममता बनर्जी ने दावा किया है कि आखिरी राउंड के बाद टीएमसी ही जीतेगी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा- “काउंटिंग एजेंट और उम्मीदवार काउंटिग सेंटर छोड़कर न आएं। यह भाजपा का प्लान है, मैं कल से ही बोल रही हूं पहले उन्हें आगे दिखाया जाएगा। कई जगह उन्होंने काउंटिंग को बंद कर रखा है। कल्याणी में ऐसी मशीनें मिली हैं जहां कोई मेल नहीं है, सेंट्रल फोर्स के जरिए हर तरफ से TMC पर अत्याचार हो रहा है। सब गलत बताया जा रहा है- ममता बनर्जी ममता बनर्जी ने कहा- “SIR के जरिए उन्होंने वोट लूटने की कोशिश की और अब भी 100 से ज्यादा सीटों पर हम आगे हैं जिसे बताया नहीं जा रहा। सब गलत बताया जा रहा है। पूरी तरह चुनाव आयोग अपनी इच्छा से काम कर रहा है और उनके साथ सेंट्रल फोर्स भी है। सेंट्रल फोर्स के साथ पुलिस भी काम कर रही है। मैं पार्टी कार्यकर्ताओं को कहती हूं कि मन खराब करने की जरूरत नहीं है, आप सूर्यास्त के बाद जीतेंगे। 2-4 राउंड की गिनती हुई है, 14-18 राउंड तक गिनती होती है, हम जीतेंगे। किसी को डरने की कोई जरूरत नहीं है।  कोलकाता पुलिस ने जीत के जश्न पर लगाई रोक कोलकाता पुलिस ने जीत के जश्न पर रोक लगा दी है। दरअसल, आज विजय जुलूस निकाले जाने वाला था, उस पर रोक लगा दी गई है। आरजी कर हत्याकांड के पीड़ित की मां रत्ना देबनाथ पनिहाटी में 5,067 वोटों से आगे भारतीय जनता पार्टी की रत्ना देबनाथ, जिन्हें आरजी कर हत्याकांड के पीड़ित की माता के रूप में जाना जाता है, पनिहाटी (111) में 13,784 वोटों के साथ आगे चल रही हैं। उनसे आगे अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के तीर्थंकर घोष हैं, जिन्हें 8,717 वोट मिले हैं. 13 में से 2 दौर के मतदान के बाद रत्ना देबनाथ रत्ना देबनाथ से 5,067 वोटों से पीछे हैं। कलातन दासगुप्ता को 3,237 वोट मिले हैं, जबकि सुभाषिश भट्टाचार्य, साधना चक्रवर्ती और संजीव कुमार घोष को क्रमशः 153, 72 और 39 वोट मिले हैं।

आज शाम 6:30 बजे BJP मुख्यालय में PM मोदी कार्यकर्ताओं से करेंगे सीधी बातचीत

नई दिल्ली पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के रुझानों में भाजपा का प्रदर्शन बेहद मजबूत नजर आ रहा है. खास तौर पर पश्चिम बंगाल और असम में पार्टी भारी बढ़त के साथ सरकार बनाने की ओर बढ़ती दिख रही है. ताजा रुझानों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में भाजपा करीब 181  सीटों पर आगे चल रही है, जबकि असम में पार्टी 95 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।  इन रुझानों के बीच पार्टी में उत्साह का माहौल है और जश्न की तैयारियां शुरू हो गई हैं. सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम करीब 6:30  बजे नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय पहुंचेंगे. यहां वह पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर सकते हैं और इस जीत के लिए उन्हें बधाई देंगे।  पश्चिम बंगाल में भाजपा का यह प्रदर्शन खास तौर पर अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्य लंबे समय से क्षेत्रीय दलों का गढ़ रहा है. ऐसे में पार्टी की यह बढ़त राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रही है. वहीं असम में भाजपा ने अपनी पकड़ बरकरार रखते हुए एक बार फिर मजबूत प्रदर्शन किया है, जिससे पार्टी का आत्मविश्वास और बढ़ा है।  इसके अलावा पुड्डुचेरी में भी भाजपा गठबंधन शानदार प्रदर्शन करता नजर आ रहा है और सरकार बनाने की स्थिति में दिख रहा है. यहां पार्टी अपने सहयोगियों के साथ मिलकर बहुमत हासिल करने के करीब पहुंच गई है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की इस बढ़त के पीछे उसकी आक्रामक चुनावी रणनीति, संगठन की मजबूत पकड़ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता अहम कारक रही है. हालांकि, अभी ये रुझान हैं और अंतिम परिणाम आना बाकी है. इसके बावजूद भाजपा खेमे में उत्साह चरम पर है. अब सभी की नजरें आधिकारिक नतीजों और उसके बाद बनने वाली सरकारों पर टिकी हैं, जो आने वाले समय में इन राज्यों की राजनीतिक दिशा तय करेंगी।  722 उम्मीदवार मैदान में राज्य की 126 विधानसभा सीटों पर 722 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 59 महिला उम्मीदवार शामिल हैं। कांग्रेस ने सबसे अधिक 99 उम्मीदवार उतारे, जिसके बाद भाजपा ने 90 उम्मीदवार उतारे। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) ने 30 सीटों पर चुनाव लड़ा। एनडीए सहयोगियों में, असम गण परिषद ने 26 उम्मीदवार उतारे, जबकि बोडो पीपुल्स फ्रंट ने 11 सीटों पर चुनाव लड़ा। विपक्षी गठबंधन में राइजर दल ने 13 उम्मीदवार उतारे, असम जातीय परिषद ने 10, माकपा ने तीन और ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस ने दो सीटों पर चुनाव लड़ा। चुनाव मैदान में शामिल अन्य पार्टियों में आम आदमी पार्टी और यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल शामिल हैं, जिन्होंने 18-18 सीटों पर चुनाव लड़ा। तृणमूल कांग्रेस ने 22 और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने 16 सीटों पर चुनाव लड़ा। इसके अलावा, 258 निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं। 9 अप्रैल को हुआ मतदान राज्य में विधानसभा चुनावों के लिए मतदान 9 अप्रैल को हुआ, जिसमें 2.50 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने अपने मत का इस्तेमाल किया। इस बार कुल 85.96 प्रतिशत मतदान हुआ।