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राउत के बयान से भड़कीं अमृता फडणवीस, जानिए क्या था विवाद

मुंबई  महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत की टिप्पणियों पर जमकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उनके पति दावोस में पिकनिक मनाने नहीं गए हैं। फडणवीस विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक में भाग लेने के लिए स्विट्जरलैंड के दावोस में हैं। अमृता ने मुंबई में एक कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'मुझे उनकी (राउत) भाषा कभी समझ नहीं आती, लेकिन मैं इतना ही कहूंगी कि अगर कोई व्यक्ति पिकनिक पर गया है, तो वह भारत और महाराष्ट्र में निवेश लाने और रोजगार बढ़ाने के लिए रोज सुबह छह बजे से रात 11 बजे तक सम्मेलन और बैठकें नहीं करता।' उन्होंने कहा, 'इसलिए मुझे लगता है कि उनका (राउत) यह बयान, उनके बाकी सभी बयानों की तरह निराधार है।' राउत ने दावोस जाने वाले नेताओं के यात्रा खर्च को सार्वजनिक करने की मांग की थी। राउत ने कहा था, 'भारत के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री दावोस में पिकनिक मना रहे हैं। भारतीय दृष्टिकोण से दावोस सम्मेलन हास्यास्पद है।' मुंबई के नए महापौर के बारे में पूछे जाने पर अमृता ने कहा कि वह एक मराठी व्यक्ति होंगे। महाराष्ट्र में 15 लाख करोड़ के निवेश पर हस्ताक्षर एजेंसी वार्ता के अनुसार, फडणवीस ने दावोस में राज्य के लिए 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश से जुड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं तथा इन निवेशों के जरिए राज्य में लगभग 13 लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। महाराष्ट्र प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के मीडिया सेल प्रमुख नवनाथ बान ने  संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी। राउत के मुख्यमंत्री की दावोस यात्रा की आलोचना पर पलटवार करते हुए बान ने कहा कि राउत को यह बताना चाहिए कि उन्होंने अपने जीवन में क्या 13 लोगों को भी रोजगार दिया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या उद्धव ठाकरे ने अपने ढाई साल के मुख्यमंत्री कार्यकाल में कम से कम 1,300 लोगों को नौकरी दी थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने राउत को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे फडणवीस की दावोस यात्रा की आलोचना कर रहे हैं, तो उन्हें यह भी बताना चाहिए कि आदित्य ठाकरे अपने दावोस दौरे से कितना निवेश लेकर लौटे थे।

नए टैक्स सिस्टम में होम लोन और मेडिकल इंश्योरेंस का असर, कैसे मिलेगा आपको फायदा?

नई दिल्ली  भारत सरकार द्वारा फरवरी 2026 में पेश किए जाने वाले केंद्रीय बजट को लेकर उम्मीदें बढ़ रही हैं. खासतौर पर नई टैक्स रिजीम (New Tax Regime) को और आकर्षक बनाने के लिए होम लोन की ब्याज छूट और मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर डिडक्शन को शामिल करने की संभावनाओं पर जोरदार चर्चा चल रही है. वर्तमान में नए रिजीम में ज्यादातर डिडक्शन्स उपलब्ध नहीं हैं, जिसकी वजह से कई टैक्सपेयर्स पुराने रिजीम को प्राथमिकता देते हैं. लेकिन अगर ये बदलाव लागू होते हैं, तो मिडल क्लास को बड़ी राहत मिल सकती है. द इकोनॉमिक टाइम्स में कई रिपोर्ट्स में एक्सपर्ट्स ने सेक्शन 80D को नई रिजीम में शामिल करने की मांग की है. नियती शाह (चार्टर्ड अकाउंटेंट और 1 Finance की पर्सनल टैक्स हेड) ने कहा कि हेल्थ इंश्योरेंस पर कैप्ड डिडक्शन (25,000-50,000 रुपये) दी जाए, क्योंकि मेडिकल इन्फ्लेशन 12-14 फीसदी सालाना है. विश्वानाथन अय्यर (ग्रेट लेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट चेन्नई के सीनियर एसोसिएट प्रोफेसर) ने अनुमान लगाया कि 15 लाख इनकम वाले के लिए 1 लाख स्टैंडर्ड डिडक्शन या हेल्थ इंश्योरेंस कैप्ड डिडक्शन से टैक्स में करीब 4,000 रुपये की बचत हो सकती है. एक अन्य रिपोर्ट में एक्सपर्ट्स ने सेक्शन 80D को दोनों रिजीम्स में उपलब्ध कराने और सीनियर्स के लिए लिमिट बढ़ाने की सिफारिश की. हेल्थ इंश्योरेंस ज्यादा अफोर्डेबल बनाने की उम्मीद बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट में नियती शाह के हवाले से लिखा गया है कि हेल्थकेयर, हाउसिंग और रिटायरमेंट पर फोकस करते हुए कहा कि हेल्थ इंश्योरेंस पर 25,000-50,000 की कैप्ड डिडक्शन और होम लोन या HRA से जुड़ी सरल फ्लैट डिडक्शन दी जाए. एसआर पटनायक (Cyril Amarchand Mangaldas के पार्टनर और टैक्सेशन हेड) ने सुझाव दिया कि सेविंग्स और फिक्स्ड डिपॉजिट पर हायर इंटरेस्ट डिडक्शन और 30 फीसदी टैक्स स्लैब थ्रेशोल्ड बढ़ाया जाए. फाइनेंशियल एक्सप्रेस और अपस्टॉक्स की रिपोर्टस में अभिषेक सोनी जैसे एक्सपर्ट्स ने होम लोन इंटरेस्ट डिडक्शन को 2 लाख से 3 लाख तक बढ़ाने की बात कही, क्योंकि प्रॉपर्टी प्राइस और EMI बढ़ गई हैं. इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया (ICAI) ने प्री-बजट मेमोरेंडम में सेक्शन 80D डिडक्शन को नए रिजीम में शामिल करने की सिफारिश की है, ताकि हेल्थ इंश्योरेंस ज्यादा अफोर्डेबल बने. अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए जीएसटी बेनिफिट्स सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी इस मुद्दे पर खूब चर्चा है. फाइनेंशियल एक्सपर्ट सुमित कपूर (@moneygurusumit) ने पोस्ट किया कि बजट 2026 में 80D हेल्थ इंश्योरेंस डिडक्शन नई रिजीम में वापस आ सकता है और होम लोन पर आंशिक डिडक्शंस की अनुमति दी जा सकती है, जिससे प्रभावी टैक्स-फ्री इनकम 17 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. सीए हिमांक सिंगला (@CAHimankSingla) ने भी इसी तरह की खबर शेयर की, जिसमें स्टैंडर्ड डिडक्शन 1-1.5 लाख, 80D डिडक्शन और होम लोन बेनिफिट्स का जिक्र है. जर्नलिस्ट निनाद शेठ ने लिखा कि बजट में होम लोन पर बड़ी इंटरेस्ट डिडक्शन और अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए जीएसटी बेनिफिट्स लगभग निश्चित हैं, जो मिडल क्लास की मांगों को ध्यान में रखते हुए ईएमआई कम कर सकते हैं. इसके अलावा फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने पुरानी रिजीम में होम लोन इंटरेस्ट रिबेट को 5 लाख तक बढ़ाने की संभावना जताई. लोन्स जगत (@loansjagat) ने होम लोन रिलीफ को 2 लाख से 5 लाख तक बढ़ाने की उम्मीद जताई. कड़क (@itskadak) ने हिंदी में पोस्ट किया कि बजट 2026 में नई टैक्स रिजीम गेम-चेंजर बन सकती है, जिसमें एचआरए और हेल्थ इंश्योरेंस शामिल होने की चर्चा है, साथ ही होम लोन और एजुकेशन लोन पर राहत. कुल मिलाकर, सोशल मीडिया पर मिडल क्लास की राहत की मांग जोरों पर है, और ये चर्चाएं मीडिया रिपोर्ट्स से मेल खाती हैं. अगर ऐसा हुआ तो टैक्सपेयर्स को कैसे और कितना फायदा? वर्तमान में नए टैक्स रिजीम में कोई डिडक्शन नहीं है, लेकिन टैक्स रेट्स कम हैं. उदाहरण के लिए – 15 लाख तक की इनकम पर प्रभावी टैक्स कम है. पुराने रिजीम में होम लोन इंटरेस्ट पर 2 लाख तक (सेक्शन 24(b)) और मेडिकल इंश्योरेंस पर 25,000 रुपये (सेक्शन 80D, सीनियर्स के लिए 50,000) की डिडक्शन है. अगर ये नए रिजीम में शामिल होते हैं, तो टैक्सपेयर्स कम रेट्स का फायदा लेते हुए भी डिडक्शन क्लेम कर सकेंगे. कैसे होगा फायदा? वर्तमान में नए टैक्स रिजीम में कोई डिडक्शन नहीं है, लेकिन टैक्स रेट्स कम हैं. उदाहरण के लिए 15 लाख तक की इनकम पर प्रभावी टैक्स कम है. पुराने रिजीम में होम लोन इंटरेस्ट पर 2 लाख तक (सेक्शन 24(b)) और मेडिकल इंश्योरेंस पर 25,000 रुपये (सेक्शन 80D, सीनियर्स के लिए 50,000) की डिडक्शन है. अगर ये नए रिजीम में शामिल होते हैं, तो टैक्सपेयर्स कम रेट्स का फायदा लेते हुए भी डिडक्शन क्लेम कर सकेंगे. होम लोन अगर 2 लाख इंटरेस्ट डिडक्शन मिलती है, तो टैक्सेबल इनकम 2 लाख कम हो जाएगी. 30% स्लैब में यह 60,000 रुपये की टैक्स सेविंग देगी. अगर लिमिट 5 लाख तक बढ़ी (जैसी कि चर्चा है), तो सेविंग 1.5 लाख रुपये तक हो सकती है. मेडिकल इंश्योरेंस: 25,000 रुपये की डिडक्शन पर 30 प्रतिशत स्लैब में 7,500 रुपये की सेविंग. सीनियर्स के लिए 50,000 पर 15,000 रुपये. अगर स्टैंडर्ड डिडक्शन (75,000) के साथ ये जोड़े जाएं, तो 15 लाख इनकम वाला व्यक्ति 12 लाख तक टैक्स-फ्री रह सकता है, और बाकी पर कम रेट्स लागू होंगे. चर्चाओं के मुताबिक, प्रभावी टैक्स-फ्री लिमिट 17 लाख तक पहुंच सकती है. मान लीजिए आपकी सालाना इनकम 15 लाख है. नए रिजीम में वर्तमान टैक्स लगभग 1.56 लाख (रिबेट के बाद) रुपये बनता है. अगर 2 लाख होम लोन + 25,000 इंश्योरेंस डिडक्शन मिले, तो टैक्सेबल इनकम 12.75 लाख हो जाएगी, और टैक्स घटकर 1.17 लाख रह सकता है, यानी 39,000 रुपये की सेविंग होगी. हाई इनकम (20 लाख) पर सेविंग और ज्यादा होगी (30 प्रतिशत स्लैब में 2.25 लाख डिडक्शंस से 67,500 रुपये की बचत होगी. फिलहाल, नए टैक्स रिजीम में अभी तक होम लोन इंटरेस्ट (सेक्शन 24(b)) और मेडिकल इंश्योरेंस (सेक्शन 80D) जैसी डिडक्शन नहीं मिलती हैं. ये पुराने रिजीम में ही उपलब्ध हैं. स्टैंडर्ड डिडक्शन 75,000 रुपये नए रिजीम में सैलरीड लोगों को मिलता है. वर्तमान में (FY 2025-26 यानी AY 2026-27) नए रिजीम के स्लैब ऐसे हैं: 4 लाख तक जीरो, 4-8 लाख 5%, 8-12 लाख 10%, 12-16 लाख 15%, … Read more

भारत-ईरान संबंध पर खामेनेई के करीबी का बड़ा बयान, चाबहार को लेकर दूर की चिंता

नईदिल्ली /तेहरान  नोबेल पीस प्राइज का सपना लेकर घूमने वाले ट्रंप ने दुनिया भर में जंग मचा दी है. ट्रंप ने पावरफुल भारत के साथ कई देशों से रिश्ते खराब करने की भी पुरजोर कोशिश की है. पहले रूस और फिर ईरान के साथ ट्रेड बंद करवाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ने टैरिफ का हथौड़ा मारा था लेकिन उनका सारा प्लान चौपट हो गया. रूस और भारत के रिश्ते तो हर हाल में मजबूत रहते हैं लेकिन अब ईरान ने भी साफ कर दिया है कि इंडिया के साथ उसके रिश्ते कितने तगड़े हैं. खामेनेई के करीबी ने India Iran के रिश्तों पर कही ऐसी बात दुनिया को लग रहा था कि अमेरिका के दबाव में भारत और ईरान के रास्ते अलग हो जाएंगे. इन कयासों के बीच तेहरान से आए एक बयान ने सबको चौंका दिया है. ईरान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सदस्य सलार विलायतमदार ने रूस के सरकारी मीडिया RT को दिए इंटरव्यू में बड़ी बात कह दी है. उन्होंने सीधे तौर पर ट्रंप प्रशासन की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ‘दुश्मनों और विरोधियों’ की उकसाने वाली कार्रवाइयों का भारत-ईरान के रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. अमेरिका को दिया तगड़ा जवाब उन्होंने भारत को एक समझदार और तर्कसंगत देश बताते हुए कहा कि ‘नई दिल्ली जानती है कि कौन अपने फायदे के लिए इस दोस्ती में दरार डालना चाहता है’. भारत की सबसे बड़ी चिंता चाबहार बंदरगाह है, जो दिल्ली के लिए मिडिल ईस्ट में तीसरी आंख है. 26 अप्रैल 2026 को अमेरिका द्वारा दी गई ‘प्रतिबंधों से छूट’ खत्म हो रही है और ट्रंप ने धमकी दी है कि जो देश ईरान के साथ बिजनेस करेंगे, उन पर 25% टैरिफ लगाया जाएगा. भारत के लिए यह पोर्ट रूस और सेंट्रल एशिया तक पहुंचने का इकलौता रास्ता है, जिसे वह चाहकर भी नहीं छोड़ सकता. दूर कर दी चाबहार वाली चिंता ये चिंता दूर करते हुए विलायतमदार ने साफ कर दिया कि चाबहार डील 2015 में फाइनल हुई थी और यह दोनों देशों के हितों के लिए है. उन्होंने चाबहार डील को सुरक्षित रखते हुए कह दिया है कि ‘भारत-ईरान के ये रिश्ते सतही राजनीतिक चालों से कहीं ज्यादा गहरे हैं’.

इंफ्लुएंसर का विवादित बयान: ‘मेरे ब्रेस्ट ने दिलवाया अमेरिका का O-1B वीजा’

ओटावा डिजिटल दौर में टैलेंट की परिभाषा अब तेजी से बदल रही है. जो पहचान कभी मंच, स्टूडियो या खेल के मैदान से बनती थी, आज वही ताकत सोशल मीडिया, व्यूज और फॉलोअर्स में नजर आती है. ऐसी ही एक चौंकाने वाली कहानी सामने आयी है. दरअसल, कनाडा की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर जूलिया ऐन की, जिन्होंने अपने ऑनलाइन कंटेंट और डिजिटल लोकप्रियता के दम पर अमेरिका का बेहद प्रतिष्ठित O-1B वीजा हासिल कर लिया. जूलिया ऐन ने खुद अपनी पोस्ट में बताया कि 'मेरे ब्रेस्ट की वजह से मुझे अमेरिका का O-1B वीजा मिला. यह मामला न सिर्फ सोशल मीडिया की ताकत दिखाता है, बल्कि अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम के बदलते चेहरे को भी उजागर करता है. तो चलिए जानते हैं क्या है मामला.  वीडियो ही बने सबूत कनाडा की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर जूलिया ऐन उस समय सुर्खियों में आ गईं, जब उन्होंने ‘असाधारण प्रतिभा (extraordinary ability) वाले कलाकारों को दिए जाने वाले अमेरिका के प्रतिष्ठित O-1B वीजा को हासिल कर लिया. इस मामले की सबसे खास बात यह रही कि जूलिया ऐन ने अपने वीजा आवेदन में पारंपरिक उपलब्धियों की बजाय अपने सोशल मीडिया कंटेंट और लोकप्रियता को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत के तौर पर पेश किया. 25 साल की जूलिया ने आवेदन के साथ ऐसे वीडियो जमा किए, जिनमें वह लो-कट शर्ट में नजर आती हैं और एक वीडियो में सैंडविच खाते हुए मजाकिया अंदाज में सवाल पूछती दिखती हैं.  जूलिया ने खुद स्वीकार किया कि यही वीडियो अमेरिकी सरकार को भेजे गए थे. टाइम्स ऑफ लंदन से बातचीत में उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा- 'शायद मेरी असाधारण प्रतिभा यही है कि मेरे ब्रेस्ट बड़े हैं.' उनका आवेदन स्वीकार कर लिया गया और वह साल 2024 में O-1B वीजा पाने वाले करीब 20,000 लोगों में शामिल हो गईं. O-1B वीजा का इतिहास O-1B वीजा को अमेरिका का बेहद खास वीजा माना जाता है. इसकी शुरुआत साल 1972 में हुई थी, जब मशहूर सिंगर जॉन लेनन को अमेरिका में रहने की अनुमति देने के लिए इसका इस्तेमाल किया गया. बाद में 1990 में इसे आधिकारिक रूप से ‘कला के क्षेत्र में असाधारण क्षमता’ रखने वाले विदेशी नागरिकों के लिए लागू किया गया. बीते 10 वर्षों में इस वीजा को पाने वालों की प्रोफाइल में बड़ा बदलाव आया है. जहां पहले बड़े कलाकार, सिंगर और सांस्कृतिक हस्तियां इसके लिए आवेदन करती थीं, वहीं अब सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, ई-स्पोर्ट्स खिलाड़ी और OnlyFans जैसे प्लेटफॉर्म्स से जुड़े कंटेंट क्रिएटर्स की संख्या तेजी से बढ़ी है. इमिग्रेशन वकीलों की राय प्रसिद्ध इमिग्रेशन वकील माइकल वाइल्ड्स के मुताबिक, यह बदलाव समय के साथ आया है. उन्होंने बताया कि पहले उनके पास सिनेड़ ओ’कॉनर और बॉय जॉर्ज जैसे बड़े कलाकारों के केस आते थे, लेकिन अब इन्फ्लुएंसर और डिजिटल क्रिएटर्स भी बड़ी संख्या में O-1B वीजा के लिए आवेदन कर रहे हैं. हालांकि, सिर्फ शारीरिक बनावट या बोल्ड वीडियो होना ही O-1B वीजा पाने के लिए काफी नहीं है. अमेरिकी इमिग्रेशन नियमों के अनुसार, आवेदक को यह साबित करना होता है कि वह अपने क्षेत्र में अलग और खास है. इसके लिए राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय पहचान, बड़ी फैन फॉलोइंग, अच्छी कमाई, व्यावसायिक सफलता और सोशल मीडिया पर मजबूत प्रभाव जैसे सबूत देने होते हैं. आंकड़ों से साबित हुई लोकप्रियता जूलिया ऐन ने अपने आवेदन में करीब दो दर्जन वीडियो, फॉलोअर्स की संख्या, आय से जुड़े दस्तावेज और जिन ब्रांड्स व प्लेटफार्म के साथ उन्होंने काम किया था, उनके एप्लीकेशन जमा किए. उनके एक वीडियो को 1.1 करोड़ से ज्यादा बार देखा जा चुका है, जिस पर लाखों लाइक और हजारों कमेंट्स हैं. जूलिया ने यह भी बताया कि वह न्यूयॉर्क में रहना चाहती थीं, क्योंकि यह यहूदी कल्चर का बड़ा केंद्र है. उनका कहना है कि उनका मजाकिया कंटेंट दुनिया में बढ़ती नफरत के माहौल के बीच लोगों को हल्के पल देने का काम करता है. डिजिटल क्रिएटर्स भी अर्थव्यवस्था का हिस्सा इमिग्रेशन वकीलों का मानना है कि जूलिया जैसी कंटेंट क्रिएटर्स को मज़ाक में नहीं लिया जाना चाहिए. वे अमेरिकी अर्थव्यवस्था में पैसा ला रही हैं और डिजिटल एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को आगे बढ़ा रही हैं. O-1B और O-1A जैसे वीजा आमतौर पर तीन साल के लिए दिए जाते हैं और बाद में इन्हें रिन्यू कराया जाता है.

डिजिटल धोखाधड़ी पर लगाम, स्कैमर्स के खिलाफ एक बटन से शुरू होगा ‘अरेस्ट’ प्रोसेस

नई दिल्‍ली.  देश में डिजिटल अरेस्‍ट की बढ़ती घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सरकार ने कारगर पैंतरा अपनाया है. गृह मंत्रालय ने डिजिटल अरेस्‍ट की समस्‍या के समाधान के लिए उच्‍च स्‍तरीय समिति बनाई थी. इस समिति ने ‘किल स्विच’ जैसे विकल्‍प सुझाए हैं, जहां एक बटन दबाते ही स्‍कैमर्स के मंसूबों पर ताला लगाया जा सकता है. इतना ही नहीं, अगर डिजिटल अरेस्‍ट के दौरान कोई वित्‍तीय नुकसान हुआ है तो उसकी भी भरपाई करने का तरीका समिति ने सुझाया है. गृह मंत्रालय की उच्‍च स्‍तरीय समिति ने ‘किल स्विच’ जैसे विकल्‍पों का सुझाव दिया है. इसका मतलब है कि अगर किसी को अपने साथ डिजिटल फर्जीवाड़े की आशंका है तो वह इस किल स्विच बटन के जरिये अपने सभी फाइनेंशियल ट्रांजेक्‍शन तत्‍काल रोक सकता है. इससे स्‍कैमर्स को खाते से पैसे निकालने या धोखाधड़ी करने का मौका ही नहीं मिलेगा और बैंक की तरफ से यूजर के सभी खाते कुछ समय के लिए फ्रीज कर दिए जाएंगे. नुकसान की भरपाई के लिए भी व्‍यवस्‍था बैंकिंग सिस्टम में धोखाधड़ी से जुड़े नुकसान को कवर करने के लिए एक बीमा व्यवस्था भी जल्द आ सकती है, क्योंकि बढ़ते डिजिटल युग के घोटाले वाणिज्यिक बैंकों को अपने जोखिम प्रबंधन ढांचे पर फिर से सोचने के लिए मजबूर कर रहे हैं. इसका मकसद ग्राहकों और पूरे वित्तीय सिस्टम की बेहतर सुरक्षा करना है. समिति ने किल स्विच के साथ ऐसे बीमा उत्‍पाद लाने का भी सुझाव दिया है. कैसे काम करेगी इमरजेंसी बटन पिछले साल दिसंबर में किल स्विच के लिए एक अंतर विभागीय समिति बनाई गई थी. इसमें अन्य विकल्पों के साथ-साथ एक इमरजेंसी बटन की व्यवस्था की जा सकती है, जिसे लेंडर्स के पेमेंट ऐप्स में जोड़ा जाएगा. जब भी कोई यूजर महसूस करे कि वह धोखाधड़ी का शिकार हो रहा है, तो वह इस बटन को दबाकर अपने सभी बैंकिंग ऑपरेशन्स तुरंत फ्रीज कर सकता है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि विचार यह है कि क्या यूजर के पेमेंट ऐप, जैसे UPI ऐप या बैंक ऐप में किल स्विच हो सकता है और जैसे ही यूजर वह बटन दबाए, कोई भी बैंक ट्रांजेक्शन संभव न हो सके. धोखाधड़ी के बाद पैसा वापस दिलाने की कोशिश समिति यह भी देख रही है कि क्या ऐसे लेन-देन की पहचान करना संभव है जो धोखाधड़ी के शिकार हो सकते हैं. साथ ही क्‍या ऐसा कोई तरीका है जिससे धोखाधड़ी के बाद उसे तुरंत कई म्यूल खातों में बांटा न जा सके, ताकि पैसों को वापस दिलाने की कोशिश की जा सके. डिजिटल अरेस्ट घोटालों में ठग पुलिस या अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारियों के रूप में वीडियो कॉल के जरिए लोगों से संपर्क करते हैं और दावा करते हैं कि वे गंभीर अपराधों की जांच के दायरे में हैं. वे अपनी विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए लीक हुए निजी डेटा का इस्तेमाल करते हैं. अक्‍सर डर और जल्दबाजी का माहौल बनाते हैं और फर्जी आईडी व गिरफ्तारी वारंट दिखाकर पीड़ितों से बड़ी रकम ऐंठ लेते हैं.  

ट्रंप के सनकी इरादों से घबराए पीएम मार्क कार्नी, ग्रीनलैंड के बाद कनाडा को लेकर भी उठीं चिंताएं

ओटावा/दावोस  डोनाल्ड ट्रंप ने  एक नया मैप सोशल मीडिया पर डाला है, जिसमें कनाडा, ग्रीनलैंड और वेनेजुएला को अमेरिका का हिस्सा दिखाया गया है। ये नक्शा एडिटेड है, लेकिन ट्रंप का इरादा नहीं। कनाडा इस बात को जान गया है कि ग्रीनलैंड के बाद अगला नंबर उसका है। डोनाल्ड ट्रंप के बयान से कनाडा के आम लोगों में भारी गुस्सा है, वो अपमान महसूस कर रहे हैं और वो धीरे धीरे अमेरिका के खिलाफ एक मजबूत संकल्प के साथ नई तैयारी में जुट गये हैं। कनाडा, ट्रंप प्रशासन की तरफ से आने वाले नई खतरनाक मांगों का सामना करने की तैयारी में जुट गया है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने 'अमेरिकी दबदबा खत्म हो गया' कहकर शुरूआत कर दी है। कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने कनाडा के आगे के रास्तों के बारे में बताया और चेतावनी दी और कहा कि "मजबूत देश इकोनॉमिक इंटीग्रेशन को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, टैरिफ को दबाव बनाने के लिए और सप्लाई चेन को शोषण करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।" लेकिन स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में मार्क कार्नी ने अमेरिका का नाम तो नहीं लिया, लेकिन उन्होंने अपने भाषण में इसे 'ग्लोबल टूट' करार दिया और कहा कि "बीच की ताकतों को मिलकर काम करना होगा क्योंकि अगर हम टेबल पर नहीं होंगे, तो हम मेन्यू में होंगे।" यानि, कनाडा और यूरोपीय देशों को अब समझ में आ रहा है, जो भारत वर्षों से कहता आया है। लेकिन अभी तक ये देश अमेरिकी दबदबे का फायदा उठा रहे थे और जब ट्रंप ने चाबी कसी है, तो उन्हें 'ग्लोबल ऑर्डर, दूसरे देशों की संप्रभुता, अमीर और गरीब देशों का फर्क' समझ में आ रहा है। अमेरिका से लड़ने की तैयारी में कनाडा? कनाडा ने अपनी दक्षिणी सीमा को मजबूत करने में लगभग एक अरब डॉलर खर्च किए हैं। अब वह आने वाले सालों में अपनी उत्तरी सीमा की सुरक्षा के लिए अरबों डॉलर और खर्च करेगा। जबकि प्रधानमंत्री कार्नी ने फिर से दोहराया कि "कनाडा, ग्रीनलैंड के साथ मजबूती से खड़ा है और ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला करने के उनके खास अधिकार का समर्थन करता है।" हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि "रूस आर्कटिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है।" उन्होंने कहा, "हम अपने NATO सहयोगियों के साथ काम कर रहे हैं, जिसमें नॉर्डिक बाल्टिक के 8 देश भी शामिल हैं, ताकि गठबंधन के उत्तरी और पश्चिमी किनारों को और सुरक्षित किया जा सके, जिसमें ओवर-द-होराइजन रडार, पनडुब्बियों, विमानों और जमीन पर, बर्फ पर सैनिकों में अभूतपूर्व निवेश शामिल है।" हाल के महीनों में कनाडा ने रक्षा, और खासकर आर्कटिक की सुरक्षा को लेकर अपनी नई प्रतिबद्धता को दिखाने पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने आर्कटिक में खतरों के लिए शुरुआती चेतावनी रडार कवरेज देने के लिए "ओवर-द-होराइजन" रडार सिस्टम के लिए 4 अरब डॉलर से ज्यादा का फंड देने का वादा किया है। उन्होंने आने वाले सालों में आर्कटिक में एक विशाल सेना से लगातार मिलिट्री मौजूदगी बढ़ाने का भी वादा किया है। लेकिन कनाडा के साथ दिक्कत ये है कि जिस अमेरिका के साथ अपनी सबसे ज्यादा लगने वाली सीमा का वो अभी तक सबसे ज्यादा फायदा उठा रहा था, वो सीमा उसके लिए सबसे मुश्किल बन चुकी है। कनाडा, अमेरिका के साथ दुनिया की सबसे बड़ी जमीनी सीमा को साझा करता है, इसके अलावा वो दूसरी तरफ ग्रीनलैंड के साथ दुनिया की सबसे बड़ी समुद्री सीमा को शेयर करता है। कनाडा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ग्रीनलैंड? ग्रीनलैंड, कनाडा और अमेरिका दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। पिछले कई दशकों से ग्रीनलैंड की सुरक्षा के लिए कनाडा ने NATO देशों और NORAD (नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड) के साथ मिलकर ऑपरेशनल डिफेंल प्लानिंग किए हैं, जिसमें इसी हफ्ते ग्रीनलैंड में एक NORAD मिशन भी शामिल है। NORAD ने एक बयान में पुष्टि की है, कि कॉन्टिनेंटल यूनाइटेड स्टेट्स और कनाडा के बेस से ऑपरेट होने वाले एयरक्राफ्ट, ग्रीनलैंड में "अलग-अलग लंबे समय से प्लान की गई NORAD एक्टिविटीज को सपोर्ट करने के लिए" होंगे, जो यूनाइटेड स्टेट्स और कनाडा, साथ ही किंगडम ऑफ डेनमार्क के बीच स्थायी डिफेंस सहयोग पर आधारित है।कनाडा के अधिकारी फिलहाल ये तय नहीं कर पाए हैं कि ग्रीनलैंड की रक्षा के लिए सैनिक भेजे जाए या नहीं। वो अभी इस बात पर विचार कर रहे हैं कि प्रतीकात्मक तौर पर सैनिकों को ग्रीनलैंड भेजने का फैसला सही रहेगा या नहीं, लेकिन प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण से साफ हो गया है कि डोनाल्ड ट्रंप के साथ कनाडा के रिश्ते काफी ज्यादा खराब होने वाले हैं। इसके अलावा उन्होंने इस महीने चीन की भी यात्रा की है। उन्होंने अमेरिका को संदेश और संकेत दोनों दे दिया है कि कनाडा के पास विकल्प हैं। ऐसे में अगर डोनाल्ड ट्रंप ज्यादा आगे बढ़ते हैं, तो अमेरिका अपने पड़ोसी देश को खो सकता है।  

भार्गवास्त्र की ताकत: एक मिसाइल से 64 टारगेट नष्ट, पाकिस्तान के ड्रोन्स पर संकट

नई दिल्‍ली भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक ऐसी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है. भार्गवास्त्र के साथ भारत अब दुनिया का एकमात्र ऐसा देश बन गया है जिसके पास एक साथ 60 से अधिक (सटीक क्षमता 64) माइक्रो-मिसाइलें दागने वाला स्वदेशी सिस्टम है. महाराष्ट्र के नागपुर में सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) द्वारा विकसित यह सिस्टम विशेष रूप से ड्रोन झुंड (Swarm Drones) को पलक झपकते ही तबाह करने के लिए बनाया गया है. 19 जनवरी 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस प्रणाली की सफलता की सराहना करते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत की एक बड़ी जीत बताया. भार्गवास्त्र: तकनीक, क्षमता और विकास की पूरी कहानी निर्माण और विकास: भार्गवास्त्र को सोलर ग्रुप की सहायक कंपनी ‘इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड’ (EEL) ने पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बनाया है. इसके सफल परीक्षण मई 2025 में गोपालपुर, ओडिशा में किए गए थे. मारने की अभूतपूर्व क्षमता: यह सिस्टम एक साथ 64 माइक्रो-मिसाइलें/रॉकेट मात्र 10 सेकंड में दाग सकता है. इसकी तुलना में दुनिया के अन्य आधुनिक सिस्टम एक बार में अधिकतम 4 मिसाइलें ही दाग पाते हैं. मल्टी-लेयर सुरक्षा: यह दो स्तरों पर काम करता है. पहला स्तर अनगाइडेड रॉकेटों का है जो 20 मीटर के दायरे में ड्रोन झुंड को खत्म करते हैं और दूसरा स्तर सटीक गाइडेड माइक्रो-मिसाइलों का है. रेंज और रडार: यह 6 से 10 किमी दूर से ही दुश्मन के ड्रोन को पहचान लेता है और 2.5 किमी की दूरी तक उन्हें पूरी तरह नष्ट कर देता है. लागत (Cost): पारंपरिक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों (जैसे S-400) के मुकाबले इसकी लागत बहुत कम है, जिससे यह ड्रोन जैसे सस्ते हमलों को रोकने के लिए एक किफायती समाधान बनता है. भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करते हुए स्वदेशी 'भार्गवास्त्र' ड्रोन-रोधी प्रणाली का सफल परीक्षण किया है. सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड द्वारा डिज़ाइन और विकसित यह कम लागत वाली प्रणाली ड्रोन स्वार्म (झुंड) के बढ़ते खतरे से निपटने में एक क्रांतिकारी कदम है. गोपालपुर सीवर्ड फायरिंग रेंज में इस प्रणाली के माइक्रो रॉकेट्स का कठिन परीक्षण किया गया, जिसमें सभी निर्धारित लक्ष्य हासिल किए गए. यह उपलब्धि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति और 'मेक इन इंडिया' मिशन की एक और सफलता को दर्शाती है. 5 महत्वपूर्ण सवाल सवाल 1: भार्गवास्त्र को ‘ड्रोन किलर’ क्यों कहा जा रहा है? जवाब: यह सिस्टम विशेष रूप से उन ड्रोन झुंडों को खत्म करने के लिए बनाया गया है जो रडार को चकमा देते हैं. इसकी 64 मिसाइलें एक साथ हमला कर किसी भी बड़े ड्रोन हमले को विफल कर सकती हैं. सवाल 2: क्या यह सिस्टम किसी भी मौसम और इलाके में काम कर सकता है? जवाब: हां, इसे रेगिस्तान से लेकर 5000 मीटर से ऊंचे बर्फीले पहाड़ों तक हर तरह के कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में तैनात किया जा सकता है. सवाल 3: भार्गवास्त्र की सबसे अनोखी बात क्या है? जवाब: इसकी ‘साल्वो मोड’ क्षमता, जिसके तहत यह दुनिया में सबसे ज्यादा (60+) मिसाइलें एक साथ दागने वाला एकमात्र सिस्टम बन गया है. सवाल 4: क्या इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान है? जवाब: हां, यह पूरी तरह से एक मोबाइल प्लेटफॉर्म (ऑल-टेरेन व्हीकल) पर आधारित है जिसे युद्ध क्षेत्र में कहीं भी तेजी से तैनात किया जा सकता है. सवाल 5: यह भारतीय सेना के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? जवाब: यह चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों के बढ़ते ड्रोन खतरे को देखते हुए भारत की रक्षा पंक्ति को अभेद्य बनाता है और कीमती मिसाइल डिफेंस सिस्टम को छोटे खतरों से बचाता है. परीक्षण का विवरण गोपालपुर में सेना वायु रक्षा (AAD) के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में 'भार्गवास्त्र' के तीन परीक्षण किए गए.  पहले दो परीक्षण: प्रत्येक में एक-एक रॉकेट दागा गया. तीसरा परीक्षण: सैल्वो मोड में दो सेकंड के अंतराल में दो रॉकेट दागे गए. चारों रॉकेट्स ने अपेक्षित प्रदर्शन किया और सभी लॉन्च पैरामीटर हासिल किए. ये परीक्षण ड्रोन हमलों के खिलाफ प्रणाली की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता को साबित करते हैं. 'भार्गवास्त्र' की विशेषताएं 'भार्गवास्त्र' एक बहुस्तरीय ड्रोन-रोधी प्रणाली है, जो छोटे और तेजी से आने वाले ड्रोनों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम है. इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं… उन्नत पहचान और हमला प्रणाली 6 से 10 किमी दूर छोटे ड्रोनों का पता लगा सकती है, जिसमें रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड (EO/IR) सेंसर, और RF रिसीवर शामिल हैं. यह 2.5 किमी की दूरी पर ड्रोनों को नष्ट कर सकती है, जिसमें 20 मीटर का घातक दायरा है. अनगाइडेड माइक्रो रॉकेट्स: पहली परत के रूप में ड्रोन झुंड को नष्ट करने के लिए. गाइडेड माइक्रो-मिसाइल: दूसरी परत के रूप में सटीक हमले के लिए (पहले ही परीक्षण किया जा चुका है. सॉफ्ट-किल परत: जैमिंग और स्पूफिंग की वैकल्पिक सुविधा, जो ड्रोनों को बिना नष्ट किए निष्क्रिय कर सकती है. मॉड्यूलर डिज़ाइन प्रणाली को उपयोगकर्ता की आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित किया जा सकता है. सेंसर और शूटर को एकीकृत कर लंबी दूरी तक लक्ष्यों को भेदने के लिए स्तरित वायु रक्षा कवर प्रदान किया जा सकता है. यह विविध भूभागों, जैसे उच्च ऊंचाई (>5000 मीटर), में काम कर सकती है, जो भारतीय सशस्त्र बलों की अनूठी जरूरतों को पूरा करती है. कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर C4I (कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशंस, कंप्यूटर्स, और इंटेलिजेंस) तकनीक से लैस, यह प्रणाली एकल ड्रोन या पूरे झुंड का आकलन और मुकाबला करने के लिए व्यापक स्थिति जागरूकता प्रदान करती है. EO/IR सेंसर कम रडार क्रॉस-सेक्शन (LRCS) लक्ष्यों की सटीक पहचान सुनिश्चित करते हैं. नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध 'भार्गवास्त्र' को मौजूदा नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध ढांचे के साथ आसानी से एकीकृत किया जा सकता है, जो इसे सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए एक व्यापक रक्षा ढाल बनाता है. वैश्विक स्तर पर अनूठी प्रणाली 'भार्गवास्त्र' को इसके डेवलपर्स ने वैश्विक स्तर पर एक अनूठी प्रणाली बताया है. हालांकि कई उन्नत देश माइक्रो-मिसाइल प्रणालियों पर काम कर रहे हैं, लेकिन बहुस्तरीय, लागत-प्रभावी और ड्रोन झुंड को नष्ट करने में सक्षम कोई स्वदेशी प्रणाली अभी तक विश्व में तैनात नहीं हुई है.      लागत-प्रभावी: पारंपरिक वायु रक्षा प्रणालियों की तुलना में 'भार्गवास्त्र' कम लागत में उच्च प्रभावशीलता प्रदान करता है.     स्वदेशी डिज़ाइन: यह प्रणाली पूरी तरह से भारत … Read more

टैरिफ केस में ट्रंप फंसे, कोर्ट के एक आदेश से अमेरिका पर भारी आर्थिक मार

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट उनके प्रशासन के खिलाफ फैसला देता है, तो अमेरिका को लगाए गए टैरिफ (आयात शुल्क) की रकम वापस करनी पड़ सकती है। उन्होंने माना कि ऐसा करना आसान नहीं होगा और इससे कई लोगों को नुकसान भी हो सकता है। ट्रंप ने कहा,“मुझे नहीं पता सुप्रीम कोर्ट क्या फैसला देगा। अब तक हमने टैरिफ के जरिए सैकड़ों अरब डॉलर की कमाई की है। अगर हम केस हार गए, तो हमें पूरी कोशिश करनी पड़ेगी कि वह पैसा वापस किया जाए।” राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि टैरिफ सिर्फ पैसे कमाने का जरिया नहीं हैं, बल्कि इससे अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा में भी बड़ा फायदा मिला है। उन्होंने कहा कि टैरिफ के कारण देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है और अमेरिका की स्थिति दुनिया में बेहतर हुई है। यह मामला इस समय अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। अगर अदालत यह तय करती है कि ट्रंप ने आपातकालीन शक्तियों का गलत इस्तेमाल कर टैरिफ लगाए, तो सरकार को अरबों डॉलर वापस करने पड़ सकते हैं। इसी बीच ट्रंप अपने 2026 के पहले विदेशी दौरे पर स्विट्ज़रलैंड के डावोस जा रहे हैं, जहां वे विश्व आर्थिक मंच (WEF) में वैश्विक नेताओं और बड़े उद्योगपतियों से मुलाकात करेंगे। वहां वे अमेरिका की व्यापार नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक भूमिका पर अपनी बात रखेंगे। टैरिफ, ग्रीनलैंड को लेकर बयान और वेनेजुएला के तेल से जुड़े फैसलों के कारण ट्रंप पहले ही कई देशों और सहयोगियों के निशाने पर हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ट्रंप की आर्थिक और व्यापार नीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

राष्ट्रीय सुरक्षा पर वायुसेना प्रमुख की दो टूक: शक्ति के साथ इच्छाशक्ति भी अनिवार्य

नई दिल्ली भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वही देश सुरक्षित रहता है जिसके पास मजबूत और सक्षम सैन्य शक्ति होती है। भारतीय वायुसेना के प्रमुख के अनुसार आर्थिक, कूटनीतिक या तकनीकी शक्ति कितनी भी मजबूत क्यों न हो, यदि उसके पीछे सशक्त सैन्य बल नहीं है, तो कोई भी राष्ट्र दूसरे देशों के दबाव में आ सकता है। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला और इराक इसके ताजा उदाहरण हैं। वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित 22वें सुब्रतो मुखर्जी सेमिनार को संबोधित किया। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि सैन्य शक्ति राष्ट्रीय शक्ति का अंतिम निर्णायक तत्व होती है। इसके बिना कोई भी देश सुरक्षित नहीं रह सकता। सेमिनार को संबोधित करते हुए वायुसेना प्रमुख ने कहा कि वेनेजुएला और इराक इसके उदाहरण हैं, जहां कमजोर सैन्य स्थिति के कारण बाहरी हस्तक्षेप और दबाव देखने को मिला। उन्होंने कहा कि अंततः वही देश सुरक्षित रहता है जिसके पास मजबूत और सक्षम सैन्य शक्ति होती है। एयर चीफ मार्शल सिंह ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सिर्फ सैन्य शक्ति होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे प्रयोग करने की इच्छाशक्ति भी उतनी ही आवश्यक है। यदि कोई देश केवल संयम दिखाता है, लेकिन उसकी शक्ति स्पष्ट नहीं है, तो उस संयम को कमजोरी के रूप में देखा जाता है। वहीं, जब कोई देश मजबूत होकर संयम दिखाता है, तभी वह संयम क्षमता और आत्मविश्वास के रूप में स्वीकार किया जाता है। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि हाल के वर्षों में जिस सैन्य शक्ति ने अपेक्षित परिणाम दिए हैं, वह हवाई शक्ति है। चाहे संघर्ष वाले क्षेत्रों से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान हो, आतंकवादी ढांचों और उनके संरक्षकों पर सटीक प्रहार करना हो, या फिर कुछ ही घंटों में पाकिस्तान के बेस व दुश्मन के ठिकानों पर कार्रवाई कर स्पष्ट संदेश देना हो, इन सभी मामलों में हवाई शक्ति ने निर्णायक भूमिका निभाई है। वायु सेना प्रमुख ने हवाई शक्ति को कम समय में तेज, सटीक और प्रभावी कार्रवाई करने की क्षमता वाला बताया। अपनी इसी क्षमता के कारण हवाई शक्ति आधुनिक सैन्य रणनीति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक बन चुकी है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यदि भारत को एक प्रभावशाली और विश्वसनीय शक्ति के रूप में स्थापित रहना है, तो वायु शक्ति पर निरंतर ध्यान और निवेश आवश्यक है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भारतीय वायुसेना के संस्थापक एयर मार्शल सुब्रतो मुखर्जी को याद करते हुए कहा कि उन्होंने सीमित संसाधनों, अनिश्चितताओं और कठिन परिस्थितियों में भी वायुसेना की मजबूत नींव रखी। उन्होंने कहा कि सुब्रतो मुखर्जी की दूरदृष्टि ने भारतीय वायुसेना को सही दिशा दी और जैसा कहा जाता है कि अच्छी शुरुआत आधी सफलता होती है। वायुसेना प्रमुख ने बताया कि आज भारतीय वायुसेना पहले से कहीं बेहतर स्थिति में है और संसाधन भी लगातार बेहतर हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में वे अपने पूर्ववर्ती वायुसेना प्रमुखों की तुलना में अधिक सक्षम वातावरण में कार्य कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद आत्मसंतोष से बचना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय वायुसेना को पिछली सफलताओं पर नहीं रुकना चाहिए, बल्कि भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए स्वयं को और अधिक सशक्त, आधुनिक और तैयार बनाना होगा। यह आयोजन सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज द्वारा ‘राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्यताओं’ पर मंथन किया गया था।

अरावली व अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: नई परिभाषा पर रोक बरकरार

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (21 जनवरी) को कहा कि अवैध खनन से अपूरणीय क्षति हो सकती है, इसलिए वह अरावली में खनन और संबंधित मुद्दों की व्यापक एवं समग्र जांच के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों की एक समिति गठित करेगा। मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी और न्यायमित्र के. परमेश्वर को चार सप्ताह के भीतर खनन क्षेत्र के विशेषज्ञ पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों के नाम सुझाने का निर्देश दिया, ताकि विभिन्न पहलुओं की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जा सके। इसके साथ ही पीठ ने कहा कि समिति इस न्यायालय के निर्देशन और निगरानी में कार्य करेगी।   उच्चतम न्यायालय ने अपने उस आदेश को भी विस्तारित किया, जिसमें अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की एक समान परिभाषा को स्वीकार करने वाले 20 नवंबर के निर्देशों को स्थगित रखा गया था। कोर्ट ने कहा कि उस परिभाषा पर रोक जारी रहेगी। सुनवाई के दौरान न्यायालय को सूचित किया गया कि छिटपुट स्थानों पर अवैध खनन हो रहा है, और पीठ ने राजस्थान सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज के इस आश्वासन को रिकॉर्ड में लिया कि इस तरह का कोई भी अनधिकृत खनन नहीं होगा। SC ने स्वतः संज्ञान लिया था अरावली पहाड़ियों की परिभाषा को लेकर उठे विवाद के बीच, उच्चतम न्यायालय ने ‘अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की परिभाषा तथा उससे जुड़े मुद्दे’ शीर्षक से इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया था। अरावली की नई परिभाषा को लेकर जारी बवाल के बीच, न्यायालय ने पिछले साल 29 दिसंबर को अपने 20 नवंबर के उन निर्देशों को स्थगित कर दिया था, जिनमें इन पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की एक समान परिभाषा को स्वीकार किया गया था। कोर्ट ने क्या कहा था? इन निर्देशों में अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की एक समान परिभाषा स्वीकार की गई थी। न्यायालय ने कहा था कि कुछ गंभीर अस्पष्टताओं का समाधान ज़रूरी है, जिनमें यह आशंका भी शामिल है कि 100 मीटर ऊंचाई और पहाड़ियों के बीच 500 मीटर की दूरी के मानक से अरावली का बड़ा हिस्सा पर्यावरण संरक्षण से बाहर हो सकता है। न्यायालय ने 20 नवंबर को अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की एक समान परिभाषा को स्वीकार कर लिया था और विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने तक दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में फैले इसके क्षेत्रों के भीतर नए खनन पट्टे देने पर प्रतिबंध लगा दिया था।