samacharsecretary.com

रक्षा मंत्रालय ने 79 हजार करोड़ की रक्षा खरीद को दी मंजूरी, MRSAM मिसाइलें और MQ-9B ड्रोन होंगे शामिल

 नई दिल्ली रक्षा मंत्रालय की डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने करीब 80 हजार करोड़ रुपये की रक्षा खरीद और अपग्रेड प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है. यह फैसला भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना की युद्ध क्षमता को मजबूत करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. इसमें पुराने हथियारों का अपग्रेड, नए आधुनिक हथियारों की खरीद और स्वदेशी विकास शामिल हैं. मुख्य मंजूरियां क्या हैं? टी-90 भीष्म टैंकों का ओवरहॉल: करीब 200 टी-90 टैंकों का स्वदेशी तरीके से मिड-लाइफ अपग्रेड और ओवरहॉल किया जाएगा. यह काम डिफेंस पब्लिक सेक्टर यूनिट (DPSU) करेगी. इससे टैंकों की उम्र बढ़ेगी. लड़ाई में ताकत बढ़ेगी. एमआई-17 हेलीकॉप्टरों का अपग्रेड: मीडियम लिफ्ट हेलीकॉप्टर एमआई-17 का मिड-लाइफ अपग्रेड होगा. इससे हेलीकॉप्टरों की ऑपरेशनल तैयारी और भरोसेमंदी बढ़ेगी.  लोइटरिंग मुनिशन (कामिकाज़ ड्रोन): आधुनिक युद्ध के लिए लोइटरिंग मुनिशन (सुसाइड ड्रोन) खरीदने की मंजूरी. ये ड्रोन दुश्मन के ठिकाने पर घूमकर सटीक हमला करते हैं. एमआरएसएएम मिसाइलें: भारतीय नौसेना और वायुसेना के लिए मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (MRSAM) खरीदी जाएंगी. इससे हवाई और समुद्री रक्षा मजबूत होगी. Astra मार्क-2 और मीटियोर मिसाइलें: वायुसेना के लिए बहुत बड़ी संख्या में Astra मार्क-2 एयर-टू-एयर मिसाइलें (200 किमी से ज्यादा रेंज) विकसित और खरीदी जाएंगी. साथ ही कुछ मीटियोर मिसाइलें भी ली जाएंगी. स्पाइस-1000 बम: इजरायल से बड़ी संख्या में स्पाइस-1000 एयर-टू-ग्राउंड गाइडेड बम खरीदने पर चर्चा हुई. ये बहुत सटीक हमले करते हैं. पिनाका रॉकेट का विकास: 120 किलोमीटर रेंज वाली नई पिनाका रॉकेट का विकास मंजूर. खास बात यह है कि इन्हें मौजूदा 45 किमी और 80 किमी रेंज वाली पिनाका लॉन्चर से ही दागा जा सकेगा. एयर-टू-एयर रिफ्यूलर और AWACS: हवाई रिफ्यूलिंग टैंकर और एयरबॉर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) की खरीद के लिए RFP (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) में बदलाव मंजूर. ये लंबी दूरी के हवाई ऑपरेशन के लिए जरूरी हैं. सी गार्जियन ड्रोन का लीज: अमेरिका से दो MQ-9B हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (HALE) सी गार्जियन ड्रोन को 3 साल के लिए लीज पर लेने का फैसला जल्द. भारत पहले ही 31 ऐसे ड्रोन खरीदने का सौदा कर चुका है, जिनकी डिलीवरी 2028 से शुरू होगी. इन फैसलों का महत्व     आधुनिकीकरण: पुराने टैंक और हेलीकॉप्टरों को नया जीवन मिलेगा.     आधुनिक युद्ध क्षमता: ड्रोन, लोइटरिंग मुनिशन और लंबी रेंज मिसाइलें से सटीक और तेज हमले संभव.     स्वदेशी बढ़ावा: टी-90 ओवरहॉल, पिनाका और Astra जैसे प्रोजेक्ट से आत्मनिर्भर भारत को बल.     लंबी दूरी की ताकत: रिफ्यूलर, AWACS और लंबी रेंज हथियारों से वायुसेना की पहुंच बढ़ेगी. DAC की बैठक में रक्षा मंत्रालय के बड़े अधिकारी और तीनों सेनाओं के प्रमुख शामिल थे. ये फैसले भारतीय सशस्त्र बलों की युद्ध तैयारी को नई ऊंचाई देंगे. सीमाओं पर मजबूत संदेश देंगे. आगे इन प्रस्तावों को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की मंजूरी मिलने के बाद ठेके दिए जाएंगे.

बीए की किताब में पीएम मोदी और सावरकर पर अध्याय, छात्रों को पढ़ाई जाएगी ‘मन की बात’

बड़ौदरा गुजरात की एक यूनिवर्सिटी में बीए (इंग्लिश) के स्टूडेंट अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर वाला चैप्टर पढ़ेंगे। महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय (MSU) में नई शिक्षा नीति 2020 के तहत शुरू किए गए बीए (इंग्लिश) माइनर कोर्स में पीएम मोदी के मन की बात को भी शामिल किया गया है। खबर के मुताबिक, एमएसयू में फैकल्टी ऑफ आर्ट्स ने बीए माइनर कोर्स की शुरुआत की है। इसमें एनालाइजिंग एंड अंडरस्टैडिंग नॉन-फिक्शनल राइटिंग्स शीर्षक के तहत पीएम मोदी की लिखी 'ज्योतिपुंज' और सावरकर की 'इनसाइड द एनिमी कैंप' को शामिल किया गया है। कोर्स को मौजूदा अकादमिक वर्ष 2025-26 से लागू किया गया है। नए सिलेबस में और क्या-क्या पढ़ाया जाएगा? पाठ्यक्रम के तहत मोदी की ‘ज्योतिपुंज’ को एक जीवनीपरक कृति के रूप में पढ़ाया जाएगा, जबकि सावरकर की ‘इनसाइड द एनिमी कैंप’ का आत्मकथात्मक रचना के तौर पर शामिल किया जाएगा। सिलेबस में श्री अरबिंदो, पंडित दीन दयाल उपाध्याय और स्वामी विवेकानंद के लेखों को भी अपनाया गया है। इनके अलावा पीएम मोदी के रेडियो संबोधन 'मन की बात' के चुनिंदा एपिसोड्स को भी स्थान मिला है। यूनिवर्सिटी का क्या कहना है? एमएसयू के अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर हितेश डी. रविया ने टीओआई से कहा, 'यह पाठ्यक्रम अंग्रेजी अध्ययन को भारत की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप ढालने के लिए तैयार किया गया है। यह एक आत्मविश्वासी भारतीय दृष्टिकोण है जिसमें भारत के अपने विचारकों, नेताओं और विचारों को पढ़ाया जा रहा है, इसके बजाय कि सिर्फ औपनिवेशिक या यूरोपीय साहित्यिक परंपराओं तक सीमित रहा जाए।'  

किम केओन-ही पर 1.79 करोड़ रुपये की घूस लेने का आरोप, भ्रष्टाचार के मामले में 15 साल की सजा की संभावना

सोल South Korea की पूर्व प्रथम महिला किम केओन ही मौजूदा समय गंभीर कानूनी संकट में फंसी हुई हैं. किम केओन ही महाभियोग का सामना कर चुके पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल की पत्नी हैं. किम पर राज्य के अहम मामलों में कथित तौर पर दखल देने, प्रभाव का गलत इस्तेमाल करने और महंगे उपहार व पैसों के बदले घूस लेने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या किम केओन ही ने अपने पद और पति की राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए किया? कि  पर आरोप है कि उन्होंने कारोबारी और प्रभावशाली लोगों से महंगे गिफ्ट्स स्वीकार किए और बदले में सरकारी फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश की. एक विशेष अभियोजक ने सोमवार (29 दिसंबर) को बताया कि इस मामले की जांच रविवार को पूरी कर ली गई है. यह जांच पिछले एक साल से जारी थी. जांच के दायरे में पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल द्वारा मार्शल लॉ लगाए जाने का फैसला भी शामिल रहा. इसके अलावा, इस दौरान पूर्व राष्ट्रपति और उनकी पत्नी से जुड़े कई गंभीर विवादों और आरोपों की भी पड़ताल की गई. यह मामला दक्षिण कोरिया की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ था और जांच पूरी होने के बाद अब आगे की कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं. अभियोजन पक्ष ने की कड़ी सजा की मांग अभियोजन पक्ष ने किम केओन-ही के खिलाफ गंभीर आरोपों के चलते कड़ी सजा की मांग की है. अभियोजन ने अदालत से अनुरोध किया है कि किम केओन-ही को 15 साल की जेल की सजा दी जाए. उन पर बिचौलिया बनकर विभिन्न सौदे कराने, घूस लेने और सरकारी नियुक्तियों में अवैध रूप से हस्तक्षेप करने जैसे आरोप लगाए गए हैं. फिलहाल किम केओन-ही हिरासत में हैं. उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें बेबुनियाद बताया है. हालांकि, इस महीने की शुरुआत में हुई एक अदालत की सुनवाई के दौरान किम ने मामले के कारण जनता को हुई असुविधा और परेशानी के लिए माफी जरूर मांगी थी. अदालत अब मामले में अगली सुनवाई और अंतिम फैसले की तैयारी कर रही है. यूनिफिकेशन चर्च पर भी रिश्वत के आरोप इस मामले में यूनिफिकेशन चर्च की प्रमुख हान हक-जा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. जांच एजेंसियों ने उन पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. अभियोजन पक्ष का दावा है कि चर्च ने अपने प्रभाव का विस्तार करने और किम पर दबाव या प्रभाव बनाने के उद्देश्य से महंगे उपहार दिए थे. इनमें दो लग्ज़री Chanel बैग और एक कीमती हीरे का हार शामिल बताया जा रहा है. इसके अलावा, अभियोजन का आरोप है कि चर्च की ओर से कुल 2 लाख डॉलर (लगभग 200,000 डॉलर) की रिश्वत दी गई. आरोपों के मुताबिक, यह रकम और महंगे तोहफे किम को प्रभावित करने के लिए दिए गए थे, ताकि चर्च को अपने हितों में लाभ मिल सके. दक्षिण कोरिया में उठा सियासी तूफान इस मामले ने दक्षिण कोरिया की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है. विपक्षी दल इसे सत्ता के दुरुपयोग का बड़ा उदाहरण बता रहे हैं, जबकि सरकार और यून सुक येओल के समर्थक आरोपों को राजनीतिक साजिश करार दे रहे हैं. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला देश की न्याय व्यवस्था और राजनीतिक नैतिकता के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होगा. फिलहाल जांच जारी है और पूरे देश की नजरें इस हाई-प्रोफाइल केस पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर न सिर्फ पूर्व राष्ट्रपति के राजनीतिक भविष्य पर, बल्कि दक्षिण कोरिया की सियासत की दिशा पर भी पड़ सकता है. 

अमित शाह का बयान: बांग्लादेशी घुसपैठिए कांग्रेस के लिए वोट बैंक, असम को मुक्त करने के लिए पांच साल और दें

बोरदुवा  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह बांग्लादेशी घुसपैठियों को अपना वोट बैंक मानती है. चुनाव वाले राज्य असम के अपने दौरे के दौरान, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को विरोधी कांग्रेस पर कड़ा हमला किया. उन्होंने कांग्रेस को बांग्लादेशी घुसपैठियों का रक्षक बताया. शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी की बांग्लादेशी घुसपैठियों को वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल करने की पॉलिसी ने असम के मूल निवासियों, उनकी पहचान और उनकी पुरखों की जमीनों को खतरा पैदा कर दिया है. हां नागांव जिले के बोरदुवा (बटद्रवा) में एक रैली को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र न केवल असम से बल्कि पूरे भारत से भी पड़ोसी देश से आने वाले सभी अवैध अप्रवासियों की पहचान करेगा. शाह ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न केवल असम के लोगों की सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा सुनिश्चित की है, बल्कि राज्य के हर तरह के विकास पर भी ध्यान दिया है. बता दें कि, गृह मंत्री अमित शाह ने यहां नागांव जिले में वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव के जन्मस्थान, बटद्रवा थान के 227 करोड़ रुपये के पुनर्विकास परियोजना का उद्घाटन किया. इस दौरान शाह ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक मौका है कि श्रीमंत शंकरदेव के जन्मस्थान को 'अतिक्रमण से मुक्त' कर दिया गया है. शाह ने आगे कहा कि, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की नेतृत्व वाली असम सरकार ने बांग्लादेशी घुसपैठियों से 1 लाख बीघा से ज्यादा जमीन मुक्त करवाया है. असम में 2026 की शुरुआत में चुनाव होने वाले हैं, इसलिए शाह ने लोगों से भाजपा को वोट देने की अपील करने का मौका नहीं छोड़ा. उन्होंने रैली में लोगों से कहा, "असम को घुसपैठियों से मुक्त बनाने के लिए भाजपा को और पांच साल दीजिए." उन्होंने कहा, ''हम न सिर्फ असम से बल्कि पूरे भारत से भी सभी बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान करेंगे.'' शाह ने आगे कहा कि शंकरदेव ने 'एक भारत' का नारा दिया था, जिसे अब प्रधानमंत्री मोदी पालन कर रहे हैं. इस बात पर जोर देते हुए कि असम पूर्वोत्तर का ग्रोथ इंजन बन गया है और इस इलाके को विकास की ओर ले जा रहा है, शाह ने बताया कि इन 11 सालों में पीएम मोदी 80 बार पूर्वोत्तर इलाकों का दौरा किया, जिसमें से मोदी 36 बार वे असम आए हैं, जिससे पता चलता है कि भाजपा सरकार पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास पर ध्यान दे रही है. रैली को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि, प्रधानमंत्री ने असम में शांति और विकास पक्का करने के लिए कदम उठाए हैं, जो सिर्फ कागज पर नहीं बल्कि हकीकत है. उन्होंने कहा कि पिछले 11 सालों में भाजपा सरकार ने राज्य में अलग-अलग मिलिटेंट ग्रुप के साथ शांति समझौते किए हैं और इन समझौतों के 92 प्रतिशत क्लॉज पूरे किए गए हैं.

चीन ने बनाई दुनिया की सबसे लंबी टनल, 4 घंटे की यात्रा अब सिर्फ 20 मिनट में पूरी होगी

बीजिंग  चीन ने इंजीनियरिंग और तकनीक के क्षेत्र में एक बार फिर वैश्विक कीर्तिमान स्थापित करते हुए दुनिया की सबसे लंबी एक्सप्रेस-वे टनल का निर्माण पूरा कर लिया है। शिनजियांग प्रांत में स्थित इस 'तियानशान शेंगली टनल' की कुल लंबाई 22.13 किलोमीटर है। इस सुरंग के शुरू होने से दुर्गम पर्वतीय रास्तों पर होने वाला 4 घंटे का सफर अब मात्र 20 मिनट में पूरा हो सकेगा। समय और दूरी में भारी कटौती यह विशाल टनल 324 किलोमीटर लंबे उरुमकी-युली एक्सप्रेस-वे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस पूरे प्रोजेक्ट के तैयार होने से उरुमकी और कोरला के बीच लगने वाला समय भी 7 घंटे से घटकर केवल 3 घंटे रह गया है। करीब 60 हजार करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार यह प्रोजेक्ट चीन की ढांचागत शक्ति का प्रमाण है। अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा इस निर्माण के साथ चीन ने अपना ही पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इससे पहले दुनिया की सबसे लंबी एक्सप्रेस-वे टनल का खिताब चीन की ही 18.04 किलोमीटर लंबी सुरंग के नाम था। वर्ष 2020 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट अपनी चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के कारण चर्चा में रहा, लेकिन पाँच साल के कड़े परिश्रम के बाद अब यह यातायात के लिए तैयार है।  

भारतीय समुदाय के लिए खतरा: बांग्लादेश में हादी के साथियों ने जारी किया 24 दिन का अल्टीमेटम

ढाका  इंकलाब मंच के प्रवक्ता उस्मान हादी की मौत के मामले में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार घर में ही घिर गई है। अब मंच ने 24 दिनों में हत्या का ट्रायल पूरा करने का अल्टीमेटम दिया है। साथ ही तीन मांग भी रखी हैं, जिनमें बांग्लादेश में रहकर काम कर रहे भारतीयों के परमिट रद्द करने के लिए कहा गया है। हालांकि, इन मांगों को लेकर अंतरिम सरकार ने प्रतिक्रिया नहीं दी है। द डेली स्टार के अनुसार, इंकलाब मंच के सचिव अब्दुल्लाह अल जब्बार ने रविवार को ढाका के शाहबाग से यूनुस सरकार को अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा, 'हत्यारे, मास्टरमाइंड, सहयोगी, भागने में मदद करने वालों और पनाह देने वालों समेत पूरे स्क्वॉड का ट्रायल अगले 24 दिनों में पूरा हो जाना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'बांग्लादेश की संप्रभुता को बचाने के लिए भारतीयों को जारी वर्क परमिट भी रद्द किए जाने चाहिए।' मंच की मांग है कि अगर भारत शरण पाए दोषियों को लौटाने से इनकार करता है, तो उनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में केस दर्ज कराया जाए। हत्यारों के भारत में प्रवेश के दावे खारिज मेघालय की सुरक्षा एजेंसियों ने बांग्लादेश पुलिस के उन दावों को रविवार को सिरे से खारिज कर दिया कि हादी के हत्यारे भारतीय राज्य में दाखिल हो गए हैं। मेघालय में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के प्रमुख, महानिरीक्षक (IG) ओ पी उपाध्याय ने कहा कि ये दावे निराधार और भ्रामक हैं। उपाध्याय ने पीटीआई-भाषा से कहा, 'इस बात का कोई सबूत नहीं है कि किसी व्यक्ति ने हलुआघाट सेक्टर से मेघालय में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार की हो। बीएसएफ को ऐसी किसी घटना की न तो सूचना मिली है और न ही ऐसी कोई रिपोर्ट मिली है।' मेघालय पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि गारो पर्वतीय क्षेत्र में संदिग्धों की मौजूदगी के दावे की पुष्टि करने के लिए 'कोई जानकारी या खुफिया प्रमाण नहीं' है। अधिकारी ने कहा कि स्थानीय पुलिस इकाइयों को इस तरह की किसी गतिविधि की सूचना नहीं मिली है और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय जारी है। ढाका महानगर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिन में दावा किया था कि हादी हत्याकांड के दो मुख्य संदिग्ध 'स्थानीय सहयोगियों की मदद से' हलुआघाट सीमा के रास्ते मेघालय में प्रवेश कर गए हैं।

ऑपरेशन सिंदूर का कहर: पाकिस्तानी सेना फुल-स्केल वॉर के डर से कांपी, जरदारी को मिली बंकर में जाने की सलाह

इस्लामाबाद   पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत के ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान अब तक उबर नहीं पा रहा है। समय-समय पर उसे ऑपरेशन सिंदूर में भारत द्वारा किए गए हमलों की याद आ जाती है। पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार ने माना है कि 10 मई की सुबह भारत ने उसके नूर खान एयरबेस पर हमला किया था। भारत ने पाकिस्तान पर कितने करारे हमले किए थे, इसकी भी डार ने खुद जानकारी दी। डार ने बताया कि 36 घंटे में भारत ने 80 ड्रोन से हमले किए थे। डार ने यह भी कहा कि मई के संघर्ष के दौरान इस्लामाबाद ने पाकिस्तान और भारत के बीच मीडिएशन के लिए रिक्वेस्ट नहीं की थी, लेकिन दावा किया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने नई दिल्ली से बात करने की इच्छा जताई थी। भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया, जिसमें पहलगाम हमले के बदले में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था।  पाक‍िस्‍तान के राष्‍ट्रपत‍ि आस‍िफ अली जरदारी ने एक द‍िन पहले कहा क‍ि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमें बंकर में जाने की सलाह दी गई थी. वे अपनी शेखी बघार रहे थे क‍ि इतने विकट हालात के बावजूद वे बंकर में नहीं गए. लेकिन इसी बीच उन्‍होंने पाक‍िस्‍तान के डर का भी खुलासा कर द‍िया. तो आख‍िर ऐसा हुआ क्‍या?. इससे साफ पता चलता है क‍ि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तानी सेना को भारत की ओर से एक बड़े और चौतरफा (Full-scale) हमले का डर सता रहा था. इस खौफ के चलते रावलपिंडी स्थित पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय (GHQ) में हड़कंप मच गया था. पाकिस्तानी सेना को आशंका थी कि पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले के जवाब में भारत द्वारा शुरू किया गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ सिर्फ आतंकी कैंपों तक सीमित नहीं रहेगा. उन्हें डर था कि यह हवाई ताकत, साइबर ऑपरेशन, गुप्त कार्रवाई और जमीनी हमलों के साथ एक बड़े युद्ध में बदल सकता है. यह घबराहट पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व तक में महसूस की गई थी. राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने खुद खुलासा किया है कि मई में तनाव बढ़ने पर उन्हें बंकर में जाने की सलाह दी गई थी. शनिवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए, जरदारी ने बताया कि उनके मिलिट्री सेक्रेटरी ने उन्हें स्थिति की गंभीरता के बारे में बताया था और चेतावनी दी थी कि “जंग शुरू हो चुकी है” क्योंकि भारतीय बलों ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत सटीक हमले शुरू कर दिए थे.     जरदारी ने कहा, मेरे मिलिट्री सेक्रेटरी ने मुझसे कहा कि युद्ध शुरू हो गया है और सुझाव दिया कि हम बंकरों में चले जाएं. मैंने मना कर दिया. अगर शहादत लिखी है, तो यहीं होगी. नेता बंकरों में नहीं मरते. मुझे कई दिन पहले ही इस संघर्ष का आभास हो गया था. सेना का सरकार पर अविश्वास राष्ट्रपति को किसी सुरक्षित ठिकाने पर भेजने की सलाह पाकिस्तान के सत्ता ढांचे के उस जाने-पहचाने पैटर्न को दिखाती है, जहां सरकार को छिपा द‍िया जाता है और सारे फैसले आर्मी करती है. जरदारी का बंकर में जाने से मना करना केवल व्यक्तिगत साहस नहीं, बल्कि नागरिक सत्ता की धमक के तौर पर देखा गया. राष्ट्रपति को कभी-कभी सेना की सलाह के खिलाफ फैसले लेने के लिए जाना जाता है, जो पाकिस्तान के इतिहास में बहुत कम देखने को मिलता है. एटॉमिक ‘रेड-लाइन’ और आर्थिक तबाही का डर     सिर्फ जवाबी हमले का ही डर नहीं था, पाकिस्तानी सेना आंतरिक अस्थिरता को लेकर भी चिंतित थी. उन्हें डर था कि देश की इकॉनमी बर्बाद हो सकती है. जनता विद्रोह कर सकती है और राज्‍यों में फूट पड़ सकती है. इस सैन्य कार्रवाई ने रावलपिंडी को अपनी न्‍यूक्‍ल‍ियर रेड लाइन की समीक्षा करने पर मजबूर कर दिया, क्योंकि उन्हें डर था कि भारत पाकिस्तान की परमाणु सीमा से ठीक नीचे रहकर भी बड़ी कार्रवाई कर सकता है.     पाकिस्तानी आर्मी लीडरश‍िप इस बात से सबसे ज्‍यादा डरा हुआ था क‍ि कहीं भारत अटैक के साथ साथ इंफॉर्मेशन वॉरफेयर न करने लगे. क्‍योंक‍ि इससे निपटने के ल‍िए उसके पास कोई इंतजाम नहीं थे.     बंकर वाली घटना ने यह साबित कर दिया है कि ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल पाक सेना के अंदर रणनीतिक डर पैदा किया, बल्कि दबाव के समय देश की राजनीतिक व्यवस्था में उनके भरोसे की कमी को भी उजागर कर दिया. क्या था ऑपरेशन सिंदूर? 7 मई की सुबह, इंडियन आर्मी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में 9 आतंकी शिविरों पर सटीक हमले किए थे. यह कार्रवाई पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी. पहला चरण: अपने शुरुआती चरण में, भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान और पीओके में जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े आतंकी शिविरों को ध्वस्त किया. इन हमलों में जैश प्रमुख मसूद अजहर के 10 परिवार वालों और चार करीबी सहयोगियों सहित 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए. दूसरा चरण: लेकिन जब पाकिस्तान ने भारतीय शहरों और प्रमुख प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की योजना सहित जवाबी सैन्य कार्रवाई का प्रयास किया, तो भारत ने हमले तेज कर दिए. 9-10 मई की रात को अंजाम दिए गए दूसरे निर्णायक चरण में, भारतीय बलों ने नूर खान, सरगोधा, जैकोबाबाद, मुरीद और रफीकी सहित कई प्रमुख पाकिस्तानी एयरबेस पर हमला बोल दिया. इसमें पाकिस्तान को इतना नुकसान हुआ कि इस्लामाबाद आज भी सार्वजनिक रूप से उसका हिसाब देने में संघर्ष कर रहा है. यह संघर्ष चार दिनों तक चला था, जिसमें फाइटर जेट, मिसाइल और तोपखाने का जमकर इस्तेमाल हुआ था.

राजस्थान में बवंडर, दिल्ली में झमाझम बारिश—कई राज्यों में बदलेगा मौसम का मिज़ाज

नई दिल्ली  भारत के अधिकांश राज्यों में कड़ाके की ठंड का दौर जारी है। इसी बीच अब IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने उत्तर प्रदेश समेत 5 राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी कर दिया है। हालांकि, संभावनाएं जताई जा रही हैं कि आने वाले तीन दिनों में उत्तर पश्चिम भारत को ठंड से कुछ राहत मिल सकती है। राजधानी दिल्ली सोमवार को भी कोहरे की चादर में छिपी रही। IMD ने सोमवार को बताया है कि पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिम उत्तर प्रदेश और राजस्थान में 31 दिसंबर से 1 जनवरी तक बारिश के आसार हैं। वहीं, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, गिलगिट, बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद में 29 दिसंबर को बारिश और 30 दिसंबर से 2 जनवरी तक बारिश या बर्फबारी हो सकती है। इस दौरान हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी बर्फबारी या बारिश की संभावनाएं हैं। नए साल के जश्न में ‘रंग में भंग’ पड़ सकता है. मौसम विभाग ने दो दिन पहले ही इसको लेकर चेतावनी जारी कर दी है. दरअसल, दिल्ली और आसपास के राज्यों में बारिश का पूर्वानुमान है. मौसम विभाग ने बताया कि 31 दिसंबर से 1 जनवरी के बीच दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश होने की संभावना है. एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इससे दिल्ली को भारी प्रदूषण से राहत मिलेगी. अब सवाल उठता है कि अचानक बारिश का पूर्वानुमान क्यों जारी किया गया है? दरअसल, एक नए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) की वजह से बारिश का यह अलर्ट जारी हुआ है. मौसम विभाग जयपुर ने बताया कि राजस्थान में एक नया और मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है. इसका प्रभाव 31 दिसंबर और 1 जनवरी तक रहने की संभावना है. विभाग के अनुसार, इसके असर से दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, पूर्वी और उत्तरी राजस्थान में बारिश हो सकती है. बीकानेर और शेखावाटी संभाग के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश या ‘मावठ’ का असर दिखने भी लगा है. बता दें कि यह बेमौसम बरसात रबी की फसलों के लिए वरदान मानी जाती है और यह किसानों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं है. वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से होगी बारिश IMD ने बताया है कि पश्चिमी हिमालयी इलाके में एक वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक्टिव हो रहा है. इस सिस्टम की वजह से, 31 दिसंबर की शाम को दिल्ली NCR में हल्के बादल छाए रहने की उम्मीद है. ये बादल 1 जनवरी तक बने रहने की उम्मीद है. कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जिससे बाहर नए साल के जश्न पर असर पड़ सकता है. ये राज्य झेलेंगे ठंड और कोहरे की दोहरी मार 31 दिसंबर तक हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिम उत्तर प्रदेश में सुबह और रात में घना कोहरा छा सकता है। वहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 1 जनवरी तक ऐसा मौसम बना रह सकता है। 30 दिसंबर तक पूर्वी मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और 1 जनवरी तक उप हिमालयी पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और ओडिशा में घना कोहरा छाया रहेगा। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में 29 दिसंबर को शीत दिवस के आसार हैं। वहीं, हिमाचल प्रदेश में 31 दिसंबर से 1 जनवरी तक शीत दिवस की संभावनाएं हैं। IMD ने बताया है कि 30 दिसंबर को पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्से शीत लहर का सामना कर सकते हैं। दिल्ली को प्रदूषण से मिलेगी राहत? दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से बुरा हाल है. पिछले हफ्ते में दो दिनों के लिए दिल्ली में वायु प्रदूषण से राहत मिली थी. पिछले कुछ दिनों से प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, जहां AQI 400 से ऊपर दर्ज किया गया है. कोहरे और शीत लहर के साथ प्रदूषण ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश प्रदूषित कणों को धोकर हटा सकती है, जिससे अस्थायी तौर पर एयर क्वालिटी में सुधार हो सकता है. हालांकि, यह सुधार लंबे समय तक नहीं रह सकता है. साल के अंत में बारिश इस मौसमी बदलाव का सबसे ज्यादा असर उत्तर और पश्चिमी राजस्थान में देखने को मिलेगा. जहां साल के अंत में बारिश की संभावना है, वहीं, जनवरी के पहले हफ्ते में इन इलाकों में मौसम का मिजाज फिर बदलेगा. घना कोहरा छाने के आसार हैं. मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि सुबह और रात के समय घने कोहरे के कारण विजिबिलिटी कम हो सकती है, जिससे सड़क यातायात प्रभावित हो सकता है.

रिंग रोड विवाद: अनुमति के बिना बनी सड़क, उग्रवादियों के नाम पर नामकरण, NGT ने किया रोक लगा

इंफाल मणिपुर में बिना राज्य सरकार की अनुमति के बनाई जा रही एक ‘रिंग रोड’ का मामला सामने आने के बाद प्रशासन और सरकार में हड़कंप मच गया है. यह सड़क राज्य के छह जिलों से होकर गुजरती बताई जा रही है और रिपोर्ट्स के अनुसार इसके कुछ हिस्सों को स्थानीय स्तर पर जर्मन रोड और टाइगर रोड कहा जा रहा है, जिनका नाम कुकी उग्रवादियों के उपनामों से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है. इस मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सड़क निर्माण पर तत्काल रोक लगा दी है.  रिंग रोड के निर्माण कार्य पर रोक: NGT रिपोर्ट के मुताबिक, 23 दिसंबर को एनजीटी ने मणिपुर सरकार को आदेश दिया कि इस रिंग रोड पर किसी भी तरह का निर्माण कार्य आगे न बढ़ाया जाए. साथ ही एनजीटी ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि ये सड़क जिन 6 जिलों से होकर गुजरती है वहां जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को आदेश के सख्त अनुपालन के लिए निर्देश जारी करें. बताया गया है कि यह सड़क स्थानीय वन क्षेत्रों और पहाड़ी इलाकों से होकर गुजरती है और यह इंफाल में एशियाई विकास बैंक की सहायता से बन रही अधिकृत रिंग रोड से अलग है जिसे राज्य सरकार की मंजूरी प्राप्त है. एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि विवादित सड़क को किसी भी तरह से आधिकारिक परियोजना से नहीं जोड़ा जा सकता. बता दें, ये पूरा मामला तब उजागर हुआ जब मणिपुर के मैतेई समुदाय के नागरिक संगठन कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (COCOMI) ने कोलकाता स्थित एनजीटी कार्यालय में याचिका दायर की. याचिका में आरोप लगाया गया कि जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में बिना किसी पर्यावरणीय और भू-वैज्ञानिक प्रभाव आकलन के सड़क निर्माण किया जा रहा है जो कानून का गंभीर उल्लंघन है. याचिकाकर्ताओं ने एनजीटी से मांग की कि इस अवैध निर्माण पर तुरंत रोक लगाई जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. एनजीटी ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद इस मामले को गंभीर जनहित से जुड़ा मानते हुए अंतरिम आदेश जारी किया है. एनजीटी के अनुसार, याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि चुराचांदपुर, कांगपोकपी, नोनी और उखरूल सहित कई जिलों के वन और पहाड़ी इलाकों से गुजरने वाली इस सड़क का निर्माण कुकी समुदाय के कुछ लोगों द्वारा किया जा रहा था. हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के अधीन है. स्थानीय गांव के एक निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि मणिपुर में यह स्थिति बेहद चिंताजनक है. उनका कहना था कि बिना किसी सरकारी अनुमति के सड़कें बनाई जा रही हैं और उन्हें उग्रवादियों के नाम से जोड़ा जा रहा है, जिससे आम लोगों में गुस्सा और असंतोष बढ़ रहा है. याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि इस सड़क का निर्माण मणिपुर संकट के दौरान शुरू हुआ था और इसकी जानकारी सबसे पहले सोशल मीडिया के जरिए सामने आई थी. सोशल मीडिया पर  उद्घाटन की तस्वीरें, एक विधायक की मौजूदगी और टाइगर रोड नाम से बने गेट की तस्वीरें भी सामने आई थीं. याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस सड़क का इस्तेमाल गुप्त आवाजाही के लिए किया जा सकता है. इसके जरिए अवैध ड्रग्स, तस्करी, छोटे हथियार, गोला-बारूद और अवैध प्रवासियों की आवाजाही की आशंका जताई गई है. एनजीटी ने इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं. फिलहाल, एनजीटी के आदेश के बाद सड़क निर्माण पर रोक लगा दी गई है और राज्य सरकार से इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है. 

अरावली हिल्स मामले में सुप्रीम कोर्ट का यू-टर्न, पुराने आदेश पर रोक लगाकर नई समिति गठित करने का निर्देश

नई दिल्ली अरावली पर्वत श्रृंखला की परिभाषा तय करने वाले आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 20 नवंबर को सुनाया गया फैसला अगली सुनवाई तक लागू नहीं होगा। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच मामले की सुनवाई कर रही थी। सीजेआई ने कहा कि अरावली पहाड़ियों के अध्ययन और सर्वे के लिए एक नई समिति बनाई जाएगी। सीजेआई ने कहा कि इसपर पुनः विचार किया जाना है कि क्या 100 मीटर से ऊंची पहाड़ियों को ही अरावली का हिस्सा मानने से अवैध खनन तो नहीं शुरू हो जाएगा। कोर्ट ने कहा कि उस इलाके की पहचान करने के लिए परिभाषा तय करनी है जो कि अरावली का हिस्सा नहीं हैं। बता दें कि 20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की एक जैसी परिभाषा को स्वीकार करते हुए मुहर लगा दी थी। कोर्ट ने दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात तक फैली इस पर्वत श्रृंखला में विशेषज्ञों की रिपोर् आने तक खनन पट्टों पर रोक लगा दी थी। अरावली को लेकर सबसे बड़ा विवाद इसकी भौगोलिक सीमा और परिभाषा को लेकर है। पहाड़ियों की स्पष्ट परिभाषा न होने के कारण कई बार निर्माण कार्यों और खनन को लेकर नियमों का उल्लंघन होता है। इससे पहले, न्यायालय ने अरावली में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के खिलाफ निर्णय लिया था। न्यायालय का मानना था कि इस तरह का निषेध अवैध खनन गतिविधियों को जन्म दे सकता है। क्या थी नई परिभाषा? अदालत ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एक समिति की सिफारिशों को स्वीकार किया था। समिति के अनुसार, ‘‘अरावली पहाड़ी’’ को उन चिह्नित अरावली जिलों में मौजूद किसी भी भू-आकृति के रूप में परिभाषित किया जाएगा, जिसकी ऊंचाई स्थानीय निचले बिंदु से 100 मीटर या उससे अधिक हो। वहीं, ‘‘अरावली पर्वतमाला’’ एक-दूसरे से 500 मीटर के भीतर दो या अधिक ऐसी पहाड़ियों का समूह होगा।