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भारतीय रेलवे में हलाल मीट पर विवाद, सिख संगठन की याचिका पर NHRC ने जारी किया नोटिस

  नई दिल्ली     भारतीय रेलवे की थाली में परोसे जाने वाले नॉनवेज भोजन को लेकर झटका बनाम हलाल विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है. सिख संगठनों की ओर से दायर याचिका पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने रेलवे बोर्ड, FSSAI और संस्कृति मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी किया है. NHRC ने अपने नोटिस में कहा है कि अगर रेलवे में केवल हलाल मांस परोसा जा रहा है, तो यह उपभोक्ताओं के भोजन के विकल्प के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है. साथ ही, इसे सिख धर्म की आचार संहिता यानी सिख रहत मर्यादा के खिलाफ भी बताया गया है. NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने इस मुद्दे पर कहा, "सिख रहत मर्यादा सिखों को हलाल मांस के सेवन से रोकती है. अगर सिख उपभोक्ताओं को यह जानकारी नहीं दी जा रही कि उन्हें किस तरह का मांस परोसा जा रहा है, तो यह उनके अधिकारों का सीधा उल्लंघन है." आयोग ने संस्कृति मंत्रालय से यह भी कहा है कि वह सभी खाने-पीने की दुकानों और संस्थानों को निर्देश दे कि वे स्पष्ट रूप से यह दिखाएं कि परोसा जाने वाला मीट हलाल है या झटका. NHRC का मानना है कि पारदर्शिता न होना धार्मिक स्वतंत्रता और उपभोक्ता अधिकारों के खिलाफ है. FSSAI को भेजे गए नोटिस में आयोग ने कहा है कि नॉनवेज फूड के सर्टिफिकेशन में इसका साफ तौर पर जिक्र होना चाहिए कि मीट झटका है या हलाल. इससे उपभोक्ता अपनी धार्मिक और व्यक्तिगत मान्यताओं के अनुसार निर्णय ले सकेंगे. प्रियंक कानूनगो ने रोजगार से जुड़े पहलू पर भी गंभीर चिंता जताई. उन्होंने कहा, "दारुल उलूम देवबंद के अनुसार हलाल वही माना जाता है जिसमें पशु बलि केवल मुसलमान द्वारा दी गई हो. इससे हिंदू दलित समुदायों को रोजगार के अवसरों से वंचित किया जाता है, जो परंपरागत रूप से पशु बलि और मांस बिक्री से जुड़े रहे हैं." उन्होंने यह भी कहा कि ग्राहकों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उन्हें किस तरह का नॉनवेज परोसा जा रहा है. अपने बयान में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उदाहरण देते हुए कहा, "यहां तक कि मुस्लिम देश की एविएशन कंपनी एतिहाद एयरलाइंस भी यात्रियों को हलाल और हिंदू झटका भोजन का विकल्प देती है." क्यों है विवाद? कानूनगो ने बताया कि हमने उन्हें एक नोटिस के माध्यम से पूछा है कि रेलवे में जो ठेकेदार भोजन बेचते हैं या सप्लायर मांस की सप्लाई करते हैं, वह हलाल पद्धति से है या झटका पद्धति से. यह इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि दारुल उलूम देवबंद के अनुसार हलाल पद्धति से जानवर का वध सिर्फ मुसलमान ही कर सकते हैं. उन्होंने कहा, सरकारी एजेंसी होने के नाते रेलवे जो खाना बेच रही है, उसमें मांस किस पद्धति से तैयार किया जा रहा है, यह स्पष्ट होना चाहिए. झटका पद्धति से मांस का वध हिंदू तथा अन्य दलित समुदाय करते हैं. सभी वर्गों के लोगों के जीविका के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रकार के मांस की बिक्री होनी चाहिए. ट्रेन के खाने पर लगेगा स्टिकर? प्रियंक कानूनगो ने आगे कहा कि रेलवे के साथ-साथ FSSAI को भी नोटिस जारी कर पूछा गया है कि ऐसी संभावनाओं पर विचार किया जाए, जहां भारत में बिकने वाली मांसाहारी सामग्री पर यह स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट किया जाए कि यह सभी धर्मों के लोग खा सकते हैं या नहीं. किसी के लिए प्रतिबंध है तो उसे स्पष्ट रूप से बता दिया जाए. उन्होंने कहा कि भारत में एक अन्य अल्पसंख्यक समुदाय सिख समुदाय है. सिख धर्म मानने वालों के लिए पवित्र नियम पुस्तिका है, जिसमें आर्टिकल 24 में स्पष्ट लिखा है कि सिखों को इस्लामी हलाल पद्धति से तैयार किया गया मीट नहीं खाना चाहिए. यह उनके लिए प्रतिबंधित है. यदि एक विशेष पद्धति से तैयार मीट सिख समुदाय के लिए प्रतिबंधित है, तो अंजाने में उन्हें वही भोजन देना धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ है और मानवाधिकार का उल्लंघन है.

अब सरकारी कर्मचारियों को अपनी सैलरी का 15% बुजुर्ग माता-पिता के लिए देना होगा, अनदेखी पर कटौती

हैदराबाद  कलयुग के इस दौर में जहां आधुनिकता की चकाचौंध में अक्सर बूढ़े माता-पिता को उनके ही घर में बेगाना कर दिया जाता है, वहां तेलंगाना सरकार ने एक ‘श्रावण कुमार’ वाली भूमिका अपनाई है. मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने सोमवार को एक ऐसी घोषणा की, जिसने उन संतानों की नींद उड़ा दी है जो अपने माता-पिता को बेसहारा छोड़ देते हैं. अब गुहार और मिन्नतों का दौर खत्म हुआ क्योंकि सरकार ने सीधा प्रहार जेब पर किया है. यह महज एक प्रशासनिक आदेश नहीं बल्कि उन थकी हुई आंखों को इंसाफ दिलाने की कोशिश है जो उम्र के आखिरी पड़ाव पर अपनों का साथ तलाशती हैं. तेलंगाना की धरती से उठी यह गूंज अब पूरे देश के लिए एक नजीर बनने जा रही है.  बुजुर्गों की अनदेखी करने वाले सरकारी कर्मचारियों पर नकेल कसने के लिए तेलंगाना सरकार एक ऐतिहासिक और मानवीय फैसला लेने जा रही है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने स्पष्ट कर दिया है कि जो कर्मचारी अपने माता-पिता की देखभाल नहीं करेंगे, उनके वेतन से सीधे तौर पर कटौती की जाएगी। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने इस प्रस्तावित कानून की रूपरेखा साझा की। उन्होंने कहा कि यह कदम समाज में बुजुर्गों के प्रति गिरती जिम्मेदारी और उनके सम्मान को बचाने के लिए उठाया जा रहा है। तेलंगाना सरकार के नए फैसलों से जुड़े सवाल 1. क्या निजी क्षेत्र के कर्मचारियों पर भी यह 10% सैलरी वाला नियम लागू होगा? फिलहाल यह घोषणा सरकारी कर्मचारियों के लिए की गई है. सरकार इसके लिए जल्द ही एक विस्तृत कानून (Act) लाने वाली है. 2. सैलरी कटवाने के लिए माता-पिता को कहाँ शिकायत करनी होगी? इसके लिए सरकार एक विशेष शिकायत तंत्र विकसित कर रही है, जिसकी जानकारी कानून बनने के साथ साझा की जाएगी. 3. ‘प्रणाम’ केंद्र क्या हैं? ये वरिष्ठ नागरिकों के लिए बनाए गए विशेष डे-केयर सेंटर हैं, जहाँ उनके मनोरंजन, स्वास्थ्य और सामाजिक मेलजोल का ध्यान रखा जाएगा. 4. ट्रांसजेंडर को-ऑप्शन सदस्य का क्या लाभ होगा? इससे ट्रांसजेंडर समुदाय को स्थानीय शासन में अपनी आवाज उठाने और अपनी समस्याओं को सीधे सरकार तक पहुँचाने का मौका मिलेगा. 5. क्या दिव्यांगों के लिए रोजगार में कोई विशेष आरक्षण है? हाँ, मुख्यमंत्री ने शिक्षा और रोजगार में दिव्यांगों के लिए विशेष कोटा प्रदान करने की प्रतिबद्धता दोहराई है. वेतन से होगी 15% तक कटौती मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार आगामी बजट सत्र में एक विशेष विधेयक (Bill) पेश करने की तैयारी में है। इस कानून के लागू होने के बाद:     जो कर्मचारी अपने माता-पिता की उपेक्षा करेंगे, उनके वेतन से 10 से 15 फीसदी की कटौती की जाएगी।     काटी गई यह राशि बिना किसी देरी के सीधे माता-पिता के बैंक खाते में हस्तांतरित (Transfer) कर दी जाएगी।     सीएम ने कड़े शब्दों में कहा, "जो लोग अपने जन्मदाताओं की देखभाल नहीं कर सकते, वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी कभी नहीं निभा पाएंगे।" 'प्रणाम' डे केयर सेंटर और सख्त कार्रवाई सरकार केवल वेतन कटौती तक ही सीमित नहीं रहेगी। वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान के लिए अन्य घोषणाएं भी की गईं:     प्रणाम सेंटर: बुजुर्गों के लिए 'प्रणाम' नाम से अत्याधुनिक डे केयर सेंटर बनाए जाएंगे।     त्वरित शिकायत निवारण: बुजुर्ग माता-पिता द्वारा अपने बच्चों के खिलाफ की गई शिकायतों पर त्वरित और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।     सम्मानजनक जीवन: सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का हर बुजुर्ग गरिमापूर्ण जीवन जी सके। ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए भी बड़ी घोषणा सामाजिक न्याय की दिशा में कदम बढ़ाते हुए सीएम रेड्डी ने ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए भी एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने घोषणा की कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में प्रत्येक नगर निगम में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए एक सह-सदस्य पद (Co-option member post) आरक्षित किया जाएगा।  

भारत का पिनाका रॉकेट सिस्टम अमेरिकी रिपोर्ट में सराहा गया, पढ़ें इसकी ताकत और क्षमता

नई दिल्ली भारत के नए पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR-120) ने भारतीय सेना की युद्ध रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सेना अब अंधाधुंध फायरिंग से आगे बढ़कर सटीक और गहरे लक्ष्य पर प्रहार की क्षमता हासिल कर रही है। अमेरिका की एक पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि यह नया रॉकेट सिस्टम पारंपरिक तोपखाने को दूर से मार करने वाले प्रभावी प्रतिरोधक हथियार में बदल देता है। इससे सीमावर्ती इलाकों तक सीमित प्रभाव के बजाय दुश्मन के भीतर गहरे तक असर डालना संभव होगा। रिपोर्ट के अनुसार, डीआरडीओ ने पिछले साल एलआरजीआर-120 का सफल परीक्षण किया था, जिसमें रॉकेट ने 120 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्यों को बेहद सटीकता से भेदा। यह पूरी तरह स्वदेशी हथियार प्रणाली है और इसे मौजूदा पिनाका लॉन्चरों से ही दागा जा सकता है, जिससे लागत भी कम होती है। एलआरजीआर-120 में इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (आईएनएस), बीच रास्ते में अपडेट और अंतिम चरण की गाइडेंस का इस्तेमाल किया गया है, जिससे उच्च सटीकता सुनिश्चित होती है। पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर (एमबीआरएल) से एक साथ आठ गाइडेड रॉकेट दागे जा सकते हैं। इनका इस्तेमाल दुश्मन के कमांड सेंटर, तोपखाने और लॉजिस्टिक ठिकानों पर सटीक हमलों के लिए किया जा सकता है। फ्रांस ने दिखाई रुचि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फ्रांस ने पिनाका सिस्टम में रुचि दिखाई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय हथियार बाजार में इस भारतीय प्रणाली की मांग बढ़ने के संकेत मिलते हैं। हालांकि, अमेरिका के एचआईएमएआरएस की रेंज अधिक है, लेकिन पिनाका भारत को लंबी दूरी के हमलों में बड़ी मजबूती देता है और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को भी बढ़ावा देता है। भविष्य में रेंज बढ़ाने की योजना रिपोर्ट के मुताबिक, पिनाका एक स्थिर प्रणाली नहीं है। भविष्य में इसकी रेंज बढ़ाने की योजना है और 200 से 300 किलोमीटर तक की क्षमता वाले संस्करणों पर भी चर्चा चल रही है। इससे चीन और पाकिस्तान से मिलने वाली चुनौतियों के बीच भारत की सैन्य तैयारियां और मजबूत होंगी।

चीन-पाकिस्तान की मिसाइल फोर्स से भारत को कितनी चुनौती, जानिए सैन्य संतुलन की पूरी तस्वीर

 नई दिल्ली दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में तनाव बढ़ता जा रहा है, जहां पाकिस्तान और चीन अपनी मिसाइल ताकत को तेजी से मजबूत कर रहे हैं. SIPRI 2025, अमेरिकी पेंटागन की 2025 रिपोर्ट, CSIS और अन्य स्रोतों के अनुसार, दोनों देशों की रॉकेट और मिसाइल फोर्स भारत के लिए गंभीर खतरा बनी हुई हैं. ये मिसाइलें परमाणु या सामान्य हथियार ले जा सकती हैं. दो-मोर्चे पर युद्ध की स्थिति में भारत की सुरक्षा को चुनौती दे सकती हैं.  पाकिस्तान की रॉकेट-मिसाइल फोर्स: नई ARFC की शुरुआत पाकिस्तान ने अगस्त 2025 में आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड (ARFC) बनाई, जो मुख्य रूप से सामान्य (नॉन-न्यूक्लियर) मिसाइलों और रॉकेट्स पर फोकस करती है. ये फैसला मई 2025 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद लिया गया. जहां पाकिस्तान को लंबी दूरी के सटीक हमलों की कमी महसूस हुई. ARFC चीन की PLARF की तर्ज पर बनाई गई है. इसमें फतह सीरीज की मिसाइलें प्रमुख हैं.  पाकिस्तान की फोर्स छोटी लेकिन तेजी से बढ़ रही है. अनुमानित 100-200 लॉन्चर हैं, जिनमें SRBM और MRBM शामिल हैं. SIPRI 2025 करीब 170 परमाणु वॉरहेड हैं. प्रमुख मिसाइलें…     फतह-1 (140 किमी रेंज), फतह-2 (250-400 किमी), फतह-4 (750 किमी क्रूज मिसाइल, 2025 में टेस्ट) और फतह-5 (2026 में संभावित टेस्ट, 1000 किमी रेंज).     अन्य: गजनवी (290 किमी), शाहीन-3 (2750 किमी, पूरे भारत को कवर). ये मिसाइलें सटीक, मोबाइल और सैचुरेशन अटैक (बहुत सारी एक साथ) के लिए डिजाइन की गई हैं. पाकिस्तान चीन से टेक्नोलॉजी ले रहा है, जैसे PL-15 मिसाइलें. चीन की रॉकेट-मिसाइल फोर्स: दुनिया की सबसे बड़ी और तेजी से बढ़ती चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फोर्स (PLARF) दुनिया की सबसे शक्तिशाली मिसाइल फोर्स है. पेंटागन 2025 रिपोर्ट के अनुसार, इसमें 1250+ ग्राउंड-बेस्ड बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें हैं. परमाणु वॉरहेड 600+ हैं, जो 2030 तक 1000+ हो सकते हैं. मुख विशेषताएं 900+ छोटी दूरी (SRBM), 1300 मध्यम दूरी (MRBM), 500 इंटरमीडिएट (IRBM), 400+ ICBM (जैसे DF-41, 12,000+ किमी रेंज). हाइपरसोनिक मिसाइलें (DF-17, 5+ मैक स्पीड), एंटी-शिप और सटीक गाइडेंस वाली. नए साइलो (320+), सबमरीन-लॉन्च JL-3 और स्पेस-बेस्ड अर्ली वॉर्निंग सिस्टम. चीन की फोर्स मात्रा, टेक्नोलॉजी और रेंज में बहुत आगे है, जो भारत के उत्तरी इलाकों को आसानी से निशाना बना सकती है. भारत की मिसाइल फोर्स: स्थिति और तुलना भारत की मिसाइल फोर्स मजबूत है, लेकिन संख्या और कुछ टेक्नोलॉजी में पीछे. SIPRI 2025 के अनुसार परमाणु वॉरहेड 180 हैं. प्रमुख मिसाइलें…     अग्नि सीरीज: अग्नि-1 (700 किमी), अग्नि-5 (5000+ किमी, MIRV क्षमता).     ब्रह्मोस (सुपरसोनिक क्रूज, 290-800 किमी), प्रलय (500 किमी).     कुल लॉन्चर 200-300+. तुलना      पाकिस्तान से: भारत क्वालिटी और रेंज में आगे, लेकिन पाकिस्तान की नई ARFC सैचुरेशन अटैक से चुनौती दे सकती है.     चीन से: चीन की संख्या (हजारों मिसाइलें) और हाइपरसोनिक टेक भारत से बहुत आगे. भारत की अग्नि-5 पूरे चीन को कवर करती है, लेकिन मात्रा में कमी है. भारत के लिए दो-मोर्चे की चुनौती पाकिस्तान पश्चिम से सीधा खतरा है- ARFC और फतह सीरीज सीमा पर तेज हमले कर सकती हैं. 2025 संघर्ष में पाकिस्तान ने मिसाइलों का इस्तेमाल किया. चीन उत्तर से (तिब्बत) पूरे भारत को निशाना बना सकता है. हाइपरसोनिक मिसाइलें S-400 जैसी डिफेंस को बायपास कर सकती हैं. दोनों मिलकर हमला करें तो भारत को दो मोर्चों पर लड़ना पड़ेगा- मिसाइलों की बाढ़ से डिफेंस ओवरलोड हो सकता है. भारतीय सेना प्रमुख ने भी रॉकेट-मिसाइल फोर्स बनाने की जरूरत बताई है. भारत की प्रतिक्रिया और भविष्य भारत अपनी इंडिजेनस मिसाइलों (अग्नि वेरिएंट, हाइपरसोनिक टेस्ट), S-400/S-500 डिफेंस और ब्रह्मोस विस्तार पर काम कर रहा है. रॉकेट-मिसाइल फोर्स बनाने की योजना है. लेकिन पाकिस्तान-चीन की बढ़ती ताकत से मिसकैलकुलेशन का खतरा है, जो छोटे संघर्ष को बड़ा युद्ध बना सकता है. कुल मिलाकर, पाकिस्तान की फोर्स फोकस्ड और सीधी चुनौती है, जबकि चीन की विशाल और एडवांस्ड. भारत को अपनी डिफेंस को लगातार मजबूत करना होगा ताकि रणनीतिक संतुलन बना रहे.

डायबिटीज से जूझता भारत, 2030 तक दूसरी सबसे बड़ी आर्थिक चुनौती बनेगा ये रोग

 नईदिल्ली  भारत डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के टाइम बम पर खड़ा है. लेंसेट इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में लगभग 10 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं. 2030 तक यह आंकड़ा दोगुना होने की आशंका है. अब नेचर जर्नल में प्रकाशित एक नई रिपोर्ट ने बेहद भयावह भविष्यवाणी की है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले 30 सालों में यानी मोटा-मोटी 2050 तक डायबिटीज देश के लिए इतना परेशान करने वाला होगा कि यह देश पर अर्थव्यवस्था का दूसरा सबसे बड़ा बोझ बन जाएगा. रिपोर्ट में क्या है इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एप्लायड सिस्टम एनालिसिस और वियना यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनोमिक्स ने मिलकर 204 देशों मे डायबिटीज के बर्डन को लेकर यह अध्ययन किया है. इसी अध्ययन में बताया गया है कि डायबिटीज के कारण अगले 30 सालों में दुनिया की अर्थव्यवस्था पर 10 ट्रिलियन डॉलर का बोझ बढ़ने वाला है. 1 ट्रिलियन एक हजार अरब होता है. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह कितना बड़ा बोझ है. रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका, भारत और चीन पर डायबिटीज का सबसे ज्यादा खर्च होने वाला है. डायबिटीज़ से होने वाला सबसे बड़ा आर्थिक बोझ संयुक्त राज्य अमेरिका पर होगा जहां यह 2.5 ट्रिलियन डॉलर खर्च होगा. इसके बाद भारत को इस पर 1.6 ट्रिलियन डॉलर खर्च करना होगा और चीन को 1 ट्रिलियन डॉलर खर्च करना होगा. कैसे साल दर साल बढ़ रहे हैं केस दो-तीन दशक पहले भारत में सिर्फ कॉलरा, टायफॉयड, डेंगू मलेरिया जैसी इंफेक्शन वाली बीमारियों के बारे में ही चर्चा होती थी. डायबिटीज के बारे में तो अधिकांश लोग जानते भी नहीं थे लेकिन 2000 के बाद जब शहरीकरण ने तेजी से अपना पैर पसारना शुरू कर दिया, नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों की बाढ़ आ गई है. भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक अचानक 2000 में डायबिटीज के 3.2 करोड़ मरीज सामने आ गए. 2007 में यह दोगुना हो गया. 2017 में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में डायबिटीज मरीजों की संख्या बढ़कर 7.3 करोड़ हो गई. फिलहाल यह माना जाता है कि भारत में 10 करोड़ लोग डायबिटीज की बीमारी से पीड़ित हैं लेकिन 10 करोड़ से कहीं ज्यादा प्री-डायबिटीज के शिकार हैं. यह आंकड़ा तो बहुत कम है, असली चिंता इस बात की है कि भारत में अधिकांश लोगों को पता ही नहीं कि उन्हें डायबिटीज की बीमारी है. यही कारण है नेचर जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन हम सब के लिए आंख खोलने वाला है. क्यों बढ़ रहे हैं डायबिटीज के मामले     परंपरागत भोजन में कमी-1960 से 70 के दशक तक भारतीयों का भोजन एकदम शुद्ध अनाज पर आधारित था. रिफाइंड, कृत्रिम रुप से बने भोजन, पैकेटबंद फूड, प्रोसेस्ड फूड न के बराबर था. इसमें फाइबर की मात्रा अधिक होती थी जिसके कारण कई क्रोनिक बीमारियों का खतरा कम रहता था. लेकिन औद्योगिकरण के बाद चावल और गेहूं पॉलिस्ड होने लगा जिसके बाद फाइबर की मात्रा में कमी आने लगी. वहीं रिफाइंड और तेल का प्रयोग ज्यादा होने लगा. इस कारण से हमारे परंपरागत भोजन में कटौती आने लगी.     प्रोसेस्ड फूड-पिछले दो दशक से लोगों के भोजन में प्रोसेस्ड और रिफाइंड फूड का चलन बढ़ा है. रिफाइंड तेल, चीनी, चीज, बटर, मैदा से बनी चीजें आदि खूब खाया जाने लगा है. हर दिन पिज्जा, बर्गर, सॉफ्ट ड्रिंक, सोडा, बिस्किट, चॉकलेट आदि लोगों के जीवन का हिस्सा बनने लगे हैं. अधिकांश चीजों में इन प्रोसेस्ड चीजों को इस्तेमाल होता है और इसे हम खाते हैं. ये प्रोसेस्ड चीजें डायबिटीज, शुगर आदि बीमारियों का सबसे बड़ा कारण है.     फिजिकल एक्टिविटी में कमी-शारीरिक रूप से सक्रिय न होना इन क्रोनिक बीमारियों की बहुत बड़ी वजह है. पहले के लोग हमेशा किसी न किसी तरह के काम में लगे रहते थे. गांवों में खेतों में काम में पूरा परिवार लगा रहता था. मशीनों का इस्तेमाल बहुत कम होता था. किन आज लोगों के पास समय का बहुत अभाव है. अधिकांश लोग ऑफिस में चेयर पर बैठकर काम करते हैं. सुबह से लेकर शाम तक की ड्यूटी होती है जिनकी वजह से समय नहीं मिल पाता. वहीं शहरीकरण शारीरिक गतिविधियों को और अधिक प्रभावित किया है. जब तक आप शारीरिक गतिविधियां नहीं करेंगे डायबिटीज, हार्ट डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों का खतरा नहीं घटेगा.     तनाव और डिप्रेशन-आधुनिकरण के बाद लोगों में तनाव और डिप्रेशन की समस्या काफी बढ़ गई है. लोगों के उपर काम का बोझ बहुत ज्यादा रहता है जिसके कारण उनके उपर दबाव बहुत अधिक होता है. वहीं लोगों की महत्वाकांक्षा बहुत बढ़ गई जिसके कारण वह उन चीजों को पाने के लिए वह किसी भी बद तक जाने के लिए तैयार रहते हैं. तनाव के कारण शरीर में खतरनाक केमिकल की बाढ़ जाती है जो कई क्रोनिक बीमारियों की वजह बनती है.     पॉल्यूशन-क्रोनिक बीमारियों के बढ़ने की बड़ी वजह पॉल्यूशन भी है. औद्योगिकीकरण के बाद लाखों फैक्ट्रियों से खतरनाक रसायन निकल रहे हैं जो हवा में घुलकर हमारी सांसों में आते हैं और हमें बीमार करते हैं. फिर इन बीमारियों से कैसे छुटकारा पाएं इस विषय पर जब हमने मोरेंगो एशिया अस्पताल में डायबेट्स एंड मेटाबोलिक डिसॉर्डर के डायरेक्टर डॉ. पारस अग्रवाल से बात की तो उन्होंने कहा कि डायबिटीज के खतरे को टालना बहुत आसान है. बस जो चीजें डायबिटीज के जोखिम को बढ़ाता है, उन्हें अपने जीवन से निकाल दीजिए. पुराने वाली लाइफस्टाइल अपना लीजिए. जैसा हमारे पूर्वज खाते-पीते और रहते थे, वैसा जीवन अपना लीजिए. मसलन शुद्ध अनाज, हरी सब्जियां, दाल, फल, सीड्स आदि का सेवन कीजिए. आज की जितनी खाने पीने की चीजें और वो प्रोसेस्ड है, उन्हें मत खाइए और अपनी शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाइए. रोज कम से कम आधा घंटा एक्सरसाइज कीजिए. खूब वॉक कीजिए. खूब पानी पीजिए, पर्याप्त नींद लीजिए और तनाव को भगाकर खुश रहिए. इन आदतों से सिर्फ डायबिटीज ही नहीं, हार्ट डिजीज, किडनी डिजीज और लिवर डिजीज का जोखिम भी कम हो जाएगा.

महिलाओं का भरोसा खो चुकीं ममता बनर्जी, झूठ पर टिकी है राजनीति– सुकांत मजूमदार

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हालिया बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री और पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि इस बार राज्य की महिलाएं ममता बनर्जी के खिलाफ वोट करेंगी। सुकांत मजूमदार ने आईएएनएस से कहा कि ममता बनर्जी को झूठ बोलने की आदत बहुत पहले से है। किसी भी तरह से महिलाओं को निशाना बनाने का सवाल ही नहीं है। महिलाएं ही इस बार ममता बनर्जी के खिलाफ वोट करने जा रही हैं। राज्य की महिलाएं मौजूदा हालात से चिंतित हैं और बदलाव चाहती हैं। भाजपा नेता ने आगे कहा कि महिलाओं को इस बात का डर है कि कहीं पश्चिम बंगाल की स्थिति बांग्लादेश जैसी न हो जाए। उन्होंने दावा किया कि इसी आशंका के चलते महिलाओं ने मन बना लिया है कि वे ममता बनर्जी के खिलाफ मतदान करेंगी। राज्य की जनता, खासकर महिलाएं, अब सच्चाई को समझ रही हैं। सुकांत मजूमदार ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि अनाप-शनाप बोलना ममता बनर्जी की आदत बन चुकी है। इस बार पश्चिम बंगाल की जनता ममता बनर्जी को सबक सिखाने वाली है। लोग अब मौजूदा सरकार से परेशान हो चुके हैं और बदलाव की दिशा में कदम उठाएंगे। दरअसल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि चुनाव आयोग ने एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स का इस्तेमाल कर मतदाता सूची से नाम काटे हैं। इस आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए सुकांत मजूमदार ने कहा कि एआई का इस्तेमाल करना कोई अपराध नहीं है। अगर उन्हें एआई नहीं आता, तो वे इसका इस्तेमाल न करें। आज हर जगह एआई का उपयोग हो रहा है। हम भी एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं और हमारे बच्चे भी स्कूलों में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी का जितना ज्यादा इस्तेमाल होगा, व्यवस्था उतनी ही पारदर्शी और मजबूत होगी।

ट्रंप का ईरान को दो टूक संदेश: बातचीत बंद, आर्थिक शिकंजा कसा, आंदोलनकारियों के साथ खड़े

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने ईरानी अधिकारियों के साथ होने वाली सभी बैठकों को रद्द कर दिया है, ईरान से जुड़े कारोबार पर नए टैरिफ लागू कर दिए हैं और ईरान में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों से आंदोलन जारी रखने की अपील की है। ट्रंप का कहना है कि यह फैसला ईरान में प्रदर्शनकारियों पर हो रही हिंसा के कारण लिया गया है। डेट्रॉइट इकोनॉमिक क्लब में अपने भाषण में ट्रंप ने कहा, "जब तक प्रदर्शनकारियों की बेमतलब हत्याएं बंद नहीं होतीं, मैंने ईरानी अधिकारियों के साथ सभी बैठकें रद्द कर दी हैं।" उन्होंने कहा कि ईरान में जो हो रहा है, वह अस्वीकार्य है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाब देना होगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने 'ईरानी देशभक्तों' को संबोधित करते हुए उनसे आंदोलन जारी रखने को कहा। उन्होंने कहा, "सभी ईरानी देशभक्तों से मेरी अपील है कि प्रदर्शन करते रहिए। अगर संभव हो तो अपनी संस्थाओं पर नियंत्रण हासिल कीजिए।" ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि दोषियों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। ईरान में मौतों के आंकड़ों पर ट्रंप ने कहा कि अलग-अलग रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं। मुझे पांच तरह के आंकड़े सुनने को मिल रहे हैं, लेकिन एक मौत भी बहुत ज्यादा है। जवाबदेही तय होगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। आर्थिक मोर्चे पर ट्रंप ने बताया कि ईरान पर नया दबाव तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। उन्होंने कहा, "आपने देखा कि मैंने ईरान के साथ कारोबार करने वाले हर व्यक्ति और देश पर टैरिफ लगा दिए हैं। यह आज से लागू हो गया है।" ट्रंप ने टैरिफ को अपनी विदेश नीति का मुख्य हथियार बताया और कहा कि इसका मकसद ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करना है। ट्रंप ने 'मेक ईरान ग्रेट अगेन' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए ईरान के मौजूदा नेतृत्व की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईरान एक महान देश है, लेकिन मौजूदा शासकों ने उसे नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि बाहरी दबाव से ईरान में बदलाव आएगा और कहा, "मैं बस इतना कहता हूं कि मदद रास्ते में है।" ट्रंप ने टैरिफ को लंबी सैन्य कार्रवाई का बेहतर विकल्प बताया। उनके मुताबिक, व्यापारिक दबाव से पहले भी कई मामलों में नतीजे मिले हैं। उन्होंने ईरान को अन्य विदेशी नीति कार्रवाइयों के साथ जोड़ते हुए परमाणु ठिकानों पर हमलों और आतंकी नेताओं के खिलाफ अभियानों का जिक्र किया। ट्रंप ने यह भी कहा कि जो देश अमेरिका की व्यापार और सुरक्षा संबंधी मांगों का विरोध करते हैं, उन पर भी टैरिफ लगाए जाते हैं। ट्रंप के अनुसार, टैरिफ कूटनीति से ज्यादा असरदार दबाव बनाते हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच दशकों से औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। ईरान का परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और मानवाधिकार रिकॉर्ड लंबे समय से तनाव की वजह रहे हैं। अमेरिका पहले भी प्रतिबंधों, टैरिफ और द्वितीयक प्रतिबंधों के जरिए ईरान पर दबाव बनाता रहा है ताकि सीधे सैन्य टकराव से बचते हुए अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत रखी जा सके।

कांग्रेस प्रवक्ता की टिप्पणी पर BJP का हंगामा, अमित शाह को लेकर बोले- राज्य में फैल सकती है अशांति

बेंगलुरु कर्नाटक में कांग्रेस के प्रवक्ता एम. लक्ष्मण के खिलाफ कथित रूप से भड़काऊ और भ्रामक बयान देने को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है। यह शिकायत भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एम. ए. सलीम से मुलाकात कर की है। शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि एम. लक्ष्मण ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री वी. सोमन्ना के खिलाफ बिना किसी सबूत के गंभीर आरोप लगाए, जिससे राज्य में अशांति फैलने और जनता में डर और नफरत पैदा होने की आशंका है।   शिकायत के अनुसार, 8 जनवरी 2026 को मैसूर स्थित कांग्रेस भवन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एम. लक्ष्मण ने दावा किया कि अमित शाह के इशारे पर ही बेल्लारी में दंगा हुआ, जिसमें कांग्रेस कार्यकर्ताओं के शव मिले। लक्ष्मण ने यह भी दावा किया कि केंद्रीय मंत्री वी. सोमन्ना ने अमित शाह का संदेश कुछ नेताओं तक पहुंचाया था। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेन्स के दौरान भाजपा पर “शव गिराकर राजनीति करने” जैसी बेहद आपत्तिजनक आरोप भी लगाए थे। उन्होंने कहा था कि अगर अमित शाह का संदेश लाने वाले केंद्रीय मंत्री वी. सोमन्ना की ब्राउन मैपिंग की जाए, तो साजिश का पर्दाफाश हो जाएगा। उन्होंने दावा किया था कि वी. सोमन्ना के बेल्लारी जाने और जनार्दन रेड्डी और श्रीरामुलु से बातचीत करने के बाद ही दंगा हुआ। शांति भंग होने का खतरा भाजपा प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि ये बयान बिना किसी दस्तावेज़, सबूत या ठोस आधार के दिए गए हैं। शिकायत में प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि ऐसे झूठे बयान (i) जनता के बीच डर, चिंता और अशांति पैदा कर सकते हैं। (ii) सरकार के खिलाफ नफरत और अविश्वास पैदा करने के इरादे से दिए गए हैं। (ii) केंद्र और राज्य सरकारों और जनता के बीच शांति और सद्भाव को बिगाड़ सकते हैं, और (iv) उच्च पदस्थ केंद्रीय मंत्रियों के खिलाफ झूठे आरोप फैलाकर लोगों को भड़का सकते हैं। पहले से लंबित हैं मामले प्रतिनिधिमंडल ने यह भी दावा किया कि एम. लक्ष्मण इससे पहले भी इस तरह के बयान दे चुके हैं और उनके खिलाफ मानहानि के कई मामले पहले से अदालतों में लंबित हैं। भाजपा नेताओं ने पुलिस से मांग की है कि एम. लक्ष्मण के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति को राजनीतिक फायदे के लिए समाज की शांति और सौहार्द बिगाड़ने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए। फिलहाल, पुलिस ने शिकायत को संज्ञान में ले लिया है और मामले की जांच की जा रही है।  

तीन फेज़ में बंगाल चुनाव का ऐलान, डबल फोर्स के साथ सख्त तैयारी में चुनाव आयोग

कोलकाता पश्चिम बंगाल में अगले कुछ महीनों में चुनाव होने वाले हैं और इलेक्शन कमिशन ने इसकी तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बीच जानकारी मिली है कि इलेक्शन तीन ही राउंड में इस बार कराए जा सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो यह आयोग की बड़ी सफलता होगी क्योंकि 2021 में राज्य में 8 राउंड में वोटिंग हुई थी। आमतौर पर पश्चिम बंगाल में सुरक्षा को लेकर संवेदनशील स्थिति होती है। इसके अलावा चुनावी व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। इसलिए इलेक्शन के राउंड ज्यादा होते थे, लेकिन इस बार कम चरणों में ही इन्हें निपटाने की तैयारी है। 2021 में ज्यादा राउंड होने की एक वजह कोरोना भी था, लेकिन ऐतिहासिक तौर पर भी बंगाल में ज्यादा राउंड में वोटिंग होती रही है।   चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बंगाल में अर्ध सैनिक सुरक्षा बलों के करीब ढाई लाख जवान तैनात हो सकते हैं। यह आंकड़ा पहले के मुकाबले करीब डबल होगा। इसका मकसद यही है कि कम चरणों में चुनाव कराए जा सकें। इसके अलावा राजनीतिक हिंसा के लिहाज से भी बंगाल एक संवेदनशील राज्य रहा है। फिलहाल राज्य चुनाव आयोग की ओर से तैयारियां की जा रही हैं। इसके बाद जल्दी ही केंद्रीय चुनाव आयोग का एक प्रतिनिधिमंडल बंगाल का दौरा करेगा और तैयारियों का जायजा लेगा। इस संबंध में 5 जनवरी को एक मीटिंग भी हुई थी। इसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने सभी राज्यों के चुनाव अधिकारियों से बात की थी, जहां इस साल चुनाव होने हैं। सूत्रों का कहना है कि इसी दौरान बंगाल के चुनाव अधिकारियों ने दिल्ली में हुई मीटिंग में बताया कि आखिर कितने राउंड घटाए जा सकते हैं। पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने बताया कि राज्य तीन राउंड में वोटिंग के लिए तैयार है। इसके लिए सुरक्षा बलों की संख्या में थोड़ा इजाफा करना होगा। फिलहाल चुनावी पंडित इसके भी आकलन में जुट गए हैं कि यदि राउंड कम हुए तो इससे किसे फायदा मिलेगा। भाजपा सूत्र तो इससे उत्साहित दिख रहे हैं। उनका मानना है कि लंबे चलने वाले चुनाव में ममता बनर्जी के पास एडवांटेज रहता है। वह कभी बांग्ला कार्ड चलती हैं तो कभी कोई और मुद्दा ले आती हैं। लंबे चुनाव में उनके पास अपने खिलाफ बनी ऐंटी इनकम्बैंसी की काट के लिए मौका होता है। लेकिन यदि चुनाव की अवधि कम हो तो ऐसा नहीं हो पाता। बता दें कि 2021 में बंगाल में चुनाव 27 मार्च से 29 अप्रैल तक चले थे और फिर 2 मई को नतीजे आए थे। इस बार राज्य की 294 सीटों पर अप्रैल के आखिरी सप्ताह या फिर मई की शुरुआत में वोट डाले जा सकते हैं।  

ईरान संकट गहराया: बिगड़ते हालात पर भारत का अलर्ट, नागरिकों को तत्काल निकलने की सलाह

तेहरान ईरान में विरोध प्रदर्शन के चलते हालात बेकाबू हो गए हैं। अब तक इन प्रदर्शनों में दो हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई है। बिगड़ते हालात के बीच भारत ने ईरान में रह रहे अपने लोगों से तुरंत ईरान छोड़ने की अपील की है। ईरान में स्थित भारतीय दूतावास ने सभी भारतीय नागरिक- टूरिस्ट, बिजनेसमैन, छात्र आदि से देश छोड़ने के लिए कह दिया है। दूतावास ने कहा है कि वे कमर्शियल फ्लाइट्स समेत उपलब्ध ट्रांसपोर्ट के साधनों का इस्तेमाल करके ईरान छोड़ दें। यह फैसला बदलती स्थिति को देखते हुए लिया गया है।   दूतावास ने ईरान में सभी भारतीय नागरिकों और PIO को सावधानी बरतने की सलाह दी है, और उनसे उन इलाकों से दूर रहने को कहा है जहां विरोध प्रदर्शन या धरने हो रहे हैं। नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे ईरान में भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें और किसी भी नई जानकारी के लिए स्थानीय मीडिया रिपोर्ट पर नजर रखें। दूतावास ने भारतीय नागरिकों से अपने इमिग्रेशन डॉक्यूमेंट्स तैयार रखने का आग्रह किया है। एडवाइजरी में कहा गया है, "ईरान में सभी भारतीय नागरिकों से अनुरोध है कि वे अपने यात्रा और इमिग्रेशन डॉक्यूमेंट्स, जिसमें पासपोर्ट और आईडी शामिल हैं, अपने पास तैयार रखें। इस संबंध में किसी भी सहायता के लिए उनसे भारतीय दूतावास से संपर्क करने का अनुरोध किया जाता है।"