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धरती के गर्भ में संकट! तिब्बत के नीचे दरक रही भारतीय प्लेट, बड़े भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट की आशंका

 नई दिल्ली पृथ्वी की सतह हमेशा हिलती-डुलती रहती है, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाली खोज की है. भारत की मुख्य टेक्टॉनिक प्लेट (इंडियन प्लेट) तिब्बत के नीचे दो हिस्सों में फट रही है. इससे भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट और बड़े भूगर्भीय बदलाव हो सकते हैं. अमेरिका की कोलोराडो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है. अगर यह जल्दी हुआ, तो हिमालय क्षेत्र में लाखों लोगों का जीवन खतरे में पड़ सकता है.  क्या हो रहा है? प्लेट टूटने की कहानी पृथ्वी की ऊपरी सतह कई प्लेटों (टेक्टॉनिक प्लेट्स) में बंटी है, जो धीरे-धीरे हिलती हैं. भारत की प्लेट अफ्रीका से अलग होकर उत्तर की ओर बढ़ रही है. अब नई रिसर्च बताती है कि यह प्लेट तिब्बत के नीचे 100 किलोमीटर गहराई पर दो हिस्सों में बंट रही है. ऊपरी हिस्सा हिमालय की ओर धकेल रहा है, जबकि निचला हिस्सा मंगोलिया की ओर खिसक रहा है. नेचर जियोसाइंस जर्नल में छपी इस स्टडी के मुताबिक, यह प्रक्रिया 50 लाख साल पहले शुरू हुई थी, लेकिन अब तेज हो गई है. वैज्ञानिकों ने सिस्मिक वेव्स (भूकंप की लहरों) का अध्ययन किया, जो दिखाता है कि प्लेट के बीच में एक 'रिफ्ट' (फटाव) बन रहा है. यह फटाव 200-300 किलोमीटर लंबा है. अगर यह बढ़ा, तो तिब्बत का पठार और हिमालय की चोटियां बदल सकती हैं. वैज्ञानिकों की चेतावनी: बड़े खतरे सिर पर मंडरा रहे स्टडी के प्रमुख वैज्ञानिक ब्रैडेन चाउ ने कहा कि यह प्लेट टूटना हिमालय के निर्माण का नया चरण हो सकता है. लेकिन इससे बड़े भूकंप आ सकते हैं, जो 8 या 9 तीव्रता के होंगे. कोलोराडो यूनिवर्सिटी की टीम ने 20 साल के डेटा का विश्लेषण किया. वे कहते हैं कि तिब्बत के नीचे प्लेट का निचला हिस्सा पिघल रहा है, जैसे आइसक्रीम गर्मी में पिघलती है. इससे मैग्मा ऊपर आ सकता है, जो ज्वालामुखी पैदा करेगा. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के डॉ. आरके सिंह कहते हैं कि यह भारत के लिए खतरा है. हिमालय पहले ही भूकंप संवेदनशील है. 2005 का कश्मीर भूकंप (7.6 तीव्रता) इसी प्लेट की वजह से था. अगर फटाव बढ़ा, तो दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों तक झटके महसूस होंगे. स्टडी के अनुसार, यह बदलाव अगले 10-20 लाख साल में होगा, लेकिन छोटे-छोटे भूकंप अब ही बढ़ सकते हैं. टेक्टॉनिक्स प्लेट का खेल टेक्टॉनिक प्लेट्स पृथ्वी की बाहरी परत (क्रस्ट) के टुकड़े हैं, जो मैग्मा पर तैरते हैं. भारत की प्लेट हर साल 5 सेंटीमीटर उत्तर की ओर बढ़ती है. तिब्बत के नीचे यह 'सबडक्शन' (नीचे धंसना) के बजाय 'रिफ्टिंग' (टूटना) कर रही है.      कैसे पता चला? भूकंप की लहरें प्लेट के अंदर से गुजरते हुए बदल जाती हैं. वैज्ञानिकों ने GPS डेटा और सैटेलाइट इमेज से देखा कि तिब्बत ऊंचा हो रहा है.     क्यों हो रहा? प्लेट का दबाव ज्यादा हो गया. ऊपरी हिस्सा हिमालय को ऊंचा कर रहा है (हर साल 5 मिमी), लेकिन निचला हिस्सा फिसल नहीं पा रहा.     क्या होगा? फटाव से नई प्लेट्स बनेंगी, जो हिमालय को और ऊंचा या चपटा कर सकती हैं. यह प्रक्रिया धीमी है, लेकिन असर लंबा चलेगा. संभावित प्रभाव: जीवन पर क्या असर पड़ेगा?     भूकंप का खतरा: हिमालय बेल्ट में 80% दुनिया के बड़े भूकंप आते हैं. भारत, नेपाल, चीन में लाखों घर ढह सकते हैं. 2015 नेपाल भूकंप में 9,000 मौतें हुईं.     ज्वालामुखी और बाढ़: मैग्मा ऊपर आने से नए ज्वालामुखी. ग्लेशियर पिघलने से गंगा-ब्रह्मपुत्र नदियां बाढ़ लाएंगी.     मानव जीवन: 10 करोड़ से ज्यादा लोग हिमालय क्षेत्र में रहते हैं. दिल्ली-NCR तक झटके. अर्थव्यवस्था को 1 लाख करोड़ का नुकसान.     पर्यावरण: हिमालय की जैव विविधता खतरे में. जलवायु बदलाव तेज होगा. विशेषज्ञ कहते हैं कि यह प्राकृतिक है, लेकिन हमें तैयार रहना होगा. भूकंपरोधी इमारतें बनाएं. मॉनिटरिंग बढ़ाएं. भारत क्या कर रहा है? तैयारी की दिशा भारत सरकार ने GSI को और फंड दिए हैं. नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) अब तिब्बत बॉर्डर पर 50 नए सेंसर लगाएगा. प्रधानमंत्री ने कहा कि हिमालय हमारा खजाना है, इसे बचाना हमारा कर्तव्य है. चीन के साथ डेटा शेयरिंग पर बात हो रही है, क्योंकि तिब्बत उनका क्षेत्र है. आगे क्या? उम्मीद की किरण वैज्ञानिक कहते हैं, यह बदलाव पृथ्वी का सामान्य चक्र है. लेकिन चेतावनी समय पर मिली है. अगर हम सतर्क रहे, तो नुकसान कम कर सकते हैं. हिमालय की चोटियां कह रही हैं कि मैं बदल रहा हूं, लेकिन मजबूत रहूंगा. दुनिया के वैज्ञानिक अब इस पर नजर रखेंगे.

लाभार्थियों के लिए खबर: पीएम किसान योजना की अगली किस्त जल्द आएगी, फटाफट करें ये जरूरी काम

नई दिल्ली प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना केन्द्र सरकार की एक बड़ी योजना है, जिसके तहत 9.70 करोड़ किसानों को सालाना 6,000 रूपए दिए जाते है । यह राशि हर 4 माह में 3 समान किस्तों में 2-2 हजार के रूप में दी जाती है। यह पैसा डीबीटी ट्रांसफर के जरिए सीधे किसानों के खाते में भेजा जाता है। यह लाभ उन किसानों को मिलता है, जिनके पास 2 हेक्टेयर तक जमीन है और जो भारत के नागरिक है।अबतक 20 किस्तें जारी हो चुकी है और अब किसानों को 21वीं किस्त का इंतजार है। ध्यान रहे अगली किस्त का लाभ केवल उन किसानों को मिलेगा जिन्होंने ई केवाईसी, भू-सत्यापन, फॉर्मर रजिस्ट्री और मोबाईल आधार से लिंक करवा लिया है और जिनका बैंक खाते में डीबीटी ऑप्शन ऑन है।किसी भी प्रकर की समस्या आने पर किसान ईमेल आईडी pmkisan-ict@gov.in ,हेल्पलाइन नंबर- 155261 या 1800115526 (Toll Free) या फिर 011-23381092 पर संपर्क कर सकते है। नवंबर में जारी होगी पीएम किसान की 21वीं किस्त? पीएम किसान योजना के नियमानुसार, पहली किस्त अप्रैल-जुलाई के बीच , दूसरी किस्त अगस्त से नवंबर के बीच और तीसरी किस्त दिसंबर से मार्च के बीच जारी की जाती है, ऐसे में 4 महीने के हिसाब से देखें तो नवंबर में अगली किस्त का समय पूरा होगा, हालांकि अभी फाइनल डेट को लेकर कोई अधिकारिक बयान या अपडेट सामने नहीं आया है। संभावना है कि बिहार चुनाव के नतीजों के बाद नवंबर के दूसरे या तीसरे हफ्ते में किस्त की राशि जारी की जा सकती है। बता दे कि अबतक बाढ़ प्रभावित 4 राज्यों पंजाब, उत्तराखंड जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के किसानों के खाते में 21वीं किस्त के 2000-2000 रुपए भेज दिए गए है, अन्य को भी जल्द भेजे जाएंगे। PM KISAN: Rs 2000 चाहिए तो फटाफट पूरे कर लें ये 5 काम     कैसे करें eKYC : सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट https://pmkisan.gov.in पर जाएं। किसान कॉर्नर” अनुभाग पर जाएं और “ई-केवाईसी” विकल्प पर क्लिक करें। अपना आधार नंबर और पंजीकृत मोबाइल नंबर दर्ज करें। सत्यापन के बाद मोबाइल नंबर पर एक OTP भेजा जाएगा। OTP दर्ज करें और ईकेवायसी हो जाएगा।     कैसे करें मोबाईल आधार से लिंक: यदि उनके मोबाइल नंबर से आधार नंबर नहीं लिंक है और फिंगर नहीं लग रहा है, तो वह प्ले स्टोर पर जाकर पीएम किसान सामान निधि ऐप को डाउनलोड करके फेस के माध्यम से eKYC कर सकते हैं।     कैसे होगा भूमि सत्यापन: निकटतम कृषि विभाग के कार्यालय में जाएं और आवश्यक आवेदन फॉर्म प्राप्त कर निर्देशानुसार आवश्यक दस्तावेज़ जमा करें।इसमें आपकी पीएम किसान रजिस्ट्रेशन नंबर, खेत के संबंधित दस्तावेज़ (खसरा / खतौनी) आदि शामिल हो सकते हैं। आवेदन और दस्तावेज़ों की समीक्षा के बाद आपका चयन किया जाएगा।अगर आपका आवेदन स्वीकृत होता है, तो आपको लैंड सीडिंग कर दिया जाएगा।     कैसे करें बैंक सीडिंग: किसान को अपने खाते पर एनपीसीआई करवाना होगा।एनपीसीआई लिंक करने के लिए बैंक पासबुक और आधार कार्ड लेकर अपने नजदीकी बैंक शाखा पर संपर्क कर सकते हैं।     कैसे करें फॉर्मर रजिस्ट्री :अधिकारिक वेबसाइट http://www.upfr.agristack.gov.in पर जाएं। मोबाइल नंबर व आधार नंबर डालें और ओटीपी से वेरिफिकेशन करें। इसके बाद अपनी जमीन और बैंक अकाउंट की डिटेल दर्ज करें। जानकारी सबमिट करें और रजिस्ट्री नंबर प्राप्त करें। PM Kisan : लिस्ट में कैसे चेक करें अपना नाम     प्रधानमंत्री किसान सम्‍मान निधि योजना की आधिकारिक वेबसाइट https://pmkisan.gov.in/ पर जाएं।     इसके बाद farmer corner पर क्लिक करें,फॉर्मर कॉर्नर पर क्लिक करने के बाद एक नया पेज खुल जाएगा।     यहां beneficiary list के विकल्प का चयन करें। इसके बाद एक फॉर्म खुलेगा।     इसमें पहले राज्‍य, फिर जिला, ब्‍लॉक और गांव का नाम चुनें।     सभी जानकारी को भरने के बाद get report पर क्लिक करें।     इस प्रक्रिया को पूरी करते ही आपके सामने आपके गांव के पीएम किसान योजना के लाभार्थियों की लिस्‍ट खुल जाएगी।     लिस्‍ट में अगर आपका नाम है, तो आपके खाते में भी पैसे आएंगे।

रूस का रुख नरम! इस्तांबुल में यूक्रेन से वार्ता के लिए तैयार मास्को

इस्तांबुल  मास्को यूक्रेन के साथ शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कभी भी बातचीत को तैयार है। तुर्की में रूस के अंतरिम प्रभारी के हवाले से रूसी मीडिया एजेंसी तास ने जानकारी दी है। अंतरिम प्रभारी एलेक्सी इवानोव ने संवाददाताओं को बताया कि रूस इस्तांबुल में यूक्रेन के साथ शांति प्रक्रिया पर बातचीत फिर से शुरू करने के लिए तैयार है। 16 मई, 2 जून, 23 जुलाई को भी इस्तांबुल में दोनों देशों के बीच वार्ता हुई थी लेकिन नतीजे कुछ खास सकारात्मक नहीं आए थे। तास के अनुसार उन्होंने कहा, "रूसी पक्ष ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि हम यूक्रेनी पक्ष और यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल के साथ सीधी बातचीत जारी रखने के लिए तैयार हैं। हमारे तुर्की साझेदारों ने भी लगातार इस बात पर जोर दिया है कि इस्तांबुल मंच हमारे लिए उपलब्ध है, यहां दरवाजे खुले हैं।" राजनयिक ने आगे कहा, "अगर कीव राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाता है, तो हम किसी भी समय ऐसी बातचीत के लिए तैयार हैं।" इवानोव ने बताया कि रूसी पक्ष ने पिछले दौर की बातचीत के दौरान कई प्रस्ताव रखे थे। उन्होंने आगे कहा, "तीन ऑनलाइन कार्य समूहों की स्थापना सहित कई पहलों को आगे बढ़ाया गया था। दुर्भाग्य से, हमें अभी तक यूक्रेनी पक्ष से इन पहलों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।" बता दें, जुलाई के बाद से दोनों पक्षों के बीच आमने-सामने कोई वार्ता नहीं हुई है। हाल के दिनों में ये ऐसा दूसरा संकेत है जो रूस की ओर से शांति की वकालत करता है। रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन के करीबी और रूस के खास दूत किरील दिमित्रियेव ने 24 अक्टूबर को ही सीएनएन को दिए इंटरव्‍यू में संकेत दिया था कि रूस, यूक्रेन और अमेरिका अब 'कूटनीतिक समाधान के काफी करीब' हैं। दिमित्रियेव अमेरिकी अधिकारियों के साथ बैठक के लिए अमेरिका में थे। उन्‍होंने कहा, 'रूस वास्तव में सिर्फ संघर्षविराम नहीं चाहता बल्कि इस संघर्ष का अंतिम समाधान चाहता है। संघर्षविराम अक्सर कम समय के होते हैं। कई लोग इसका इस्तेमाल पुनःसैन्यीकरण और संघर्ष को फिर से शुरू करने के लिए कर सकते हैं।'

दिल्ली ब्लास्ट पर कैबिनेट का सख्त रुख, आतंकी घटना की निंदा करते हुए पारित किया प्रस्ताव

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट मीटिंग हुई। इस बैठक में दिल्ली में हुए ब्लास्ट मामले में पर चर्चा की गई और आतंकियों का सिंडेकेट खत्म करने का प्रण लिया गया। वहीं, कैबिनेट ने इस ब्लास्ट में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी और 2 मिनट का मौन रखा। कैबिनेट की बैठक के बारे में ब्रीफिंग करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति के प्रति अटूट प्रतिबद्धता दोहराई है। केंद्रीय कैबिनेट ने इस घटना की निंदा की कैबिनेट ब्रीफिंग में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कैबिनेट इस नृशंस और कायराना कृत्य की स्पष्ट रूप से निंदा करता है, जिसके कारण निर्दोष लोगों की जान गई है। कैबिनेट सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराता है। दिल्ली ब्लास्ट के दोषियों को मिलेगी कड़ी सजा केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लाल किले के पास हुए दिल्ली विस्फोट की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कैबिनेट निर्देश देता है कि इस घटना (दिल्ली विस्फोट) की जांच अत्यंत तत्परता और पेशेवर तरीके से की जाए ताकि अपराधियों, उनके सहयोगियों और उनके प्रायोजकों की पहचान की जा सके और उन्हें बिना किसी देरी के न्याय के कटघरे में लाया जा सके। 'हर स्थिति पर रखी जा रही नजर' बताया गया कि सरकार के उच्चतम स्तर पर स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है। मंत्रिमंडल राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा के प्रति अपनी स्थायी प्रतिबद्धता के अनुरूप, सभी भारतीयों के जीवन और कल्याण की रक्षा के लिए सरकार के दृढ़ संकल्प की पुष्टि करता है।  

Cyber Slavery Racket का भंडाफोड़! CBI ने दो एजेंट पकड़े, फर्जी नौकरी के नाम पर युवाओं को म्यांमार भेजा

नई दिल्ली केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी रैकेट का पर्दाफाश करते हुए म्यांमार में स्थित साइबर अपराध घोटाले के परिसरों (Cyber Crime Scam Compounds) में अवैध रूप से भारतीय नागरिकों की तस्करी से संबंधित दो मामले दर्ज किए हैं। इस मामले में दो मुख्य एजेंटों को गिरफ्तार किया गया है। ये मामले मानव तस्करी और गलत तरीके से बंधक बनाने (Wrongful Confinement) जैसे गंभीर अपराधों से संबंधित हैं, जिनके लिए आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। हाल ही में, भारत सरकार ने म्यांमार से साइबर गुलामी (Cyber Slavery) के शिकार हुए कई पीड़ितों को छुड़ाने में मदद की थी। सीबीआई की जाँच में पता चला कि विदेशी स्कैम कंपाउंडों की ओर से कई एजेंट भारत में सक्रिय थे। सीबीआई ने ऐसे ही दो एजेंटों की पहचान की, जिन्होंने राजस्थान और गुजरात से पीड़ितों को फंसाकर इन कंपाउंडों में भेजा था। इन दोनों आरोपियों को बचाए गए पीड़ितों के साथ भारत लौटते ही तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया। थाईलैंड के रास्ते म्यांमार तक जालः जाँच से पता चला है कि अंतर्राष्ट्रीय संगठित सिंडिकेट भोले-भाले भारतीय नागरिकों को विदेशों में उच्च-वेतन वाली नौकरियों और आकर्षक रोजगार के अवसरों का झूठा वादा करके फंसाता है। उन्हें अक्सर थाईलैंड के रास्ते म्यांमार ले जाया जाता है। एक बार देश से बाहर ले जाने के बाद, उन्हें म्यांमार में एक जगह पर गलत तरीके से बंधक बना लिया जाता है और बड़े पैमाने पर साइबर धोखाधड़ी (Cyber Fraud) अभियानों में भाग लेने के लिए मजबूर किया जाता है। इन धोखाधड़ियों में डिजिटल अरेस्ट स्कैम, निवेश घोटाले और रोमांस फ्रॉड शामिल हैं, जो दुनिया भर के लोगों, यहाँ तक कि भारतीय नागरिकों को भी निशाना बनाते हैं। तस्करी के शिकार लोगों को धमकी, कैद और शारीरिक शोषण का शिकार बनाया जाता है, और उन्हें अपनी इच्छा के विरुद्ध अवैध साइबर अपराध गतिविधियों में शामिल होने के लिए विवश किया जाता है। इन पीड़ितों को ही आमतौर पर "साइबर गुलाम" (Cyber Slaves) कहा जाता है। सीबीआई ने कहा है कि वह घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समन्वय से साइबर गुलामी और अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी के इस उभरते खतरे का मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्ध है। सीबीआई ने सभी नागरिकों, विशेषकर युवा नौकरी तलाशने वालों से आग्रह किया है कि वे सोशल मीडिया, ऑनलाइन विज्ञापनों या अनधिकृत एजेंटों के माध्यम से दिए जा रहे विदेशी रोजगार के किसी भी प्रस्ताव के खिलाफ अत्यधिक सावधानी बरतें।

बाबा वेंगा की 2026 भविष्यवाणियां: आने वाला साल बदल सकता है दुनिया का नक्शा!

नई दिल्ली  बुल्गारिया की प्रसिद्ध भविष्‍यवक्‍ता बाबा वेंगा को “बाल्कन की अंधी भविष्यवक्ता” कहा जाता है। 1911 में जन्मी बाबा वेंगा ने अपने जीवनकाल में सैकड़ों ऐसी भविष्यवाणियां कीं जो बाद में सच साबित हुईं जैसे 9/11 हमला, ब्रेक्जिट, और सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाएं। अब 2026 को लेकर उनकी भविष्यवाणियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं, जिनमें उन्होंने पृथ्वी पर बड़े तकनीकी, प्राकृतिक और आध्यात्मिक बदलावों की भविष्यवाणी की है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बनेगा मानवता के लिए चुनौती बाबा वेंगा की भविष्यवाणी के अनुसार, 2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इतना विकसित हो जाएगा कि वह मानव नियंत्रण से बाहर चला जाएगा। यह काल विज्ञान और प्रौद्योगिकी के चरम का प्रतीक होगा लेकिन साथ ही मानवता के लिए बड़ी चेतावनी भी है। ज्योतिष दृष्टि से देखें तो शनि और राहु की युति इस समय तकनीक से जुड़ी उथल-पुथल और मानव मूल्यों की परीक्षा का संकेत देती है। भूकंप और ज्वालामुखियों की सक्रियता बढ़ेगी बाबा वेंगा ने बताया कि 2026 में पृथ्वी का 7-8% भाग प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हो सकता है। भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट और समुद्री तूफानों की घटनाएं बढ़ेंगी। हिंदू शास्त्रों के अनुसार, जब पृथ्वी तत्व पर ग्रहों का दबाव बढ़ता है, तब ऐसे भू-आकृतिक परिवर्तन देखने को मिलते हैं। यह समय मानवता को प्रकृति के संतुलन और पर्यावरण संरक्षण की ओर पुनः सोचने पर विवश करेगा। आर्थिक अस्थिरता और महंगाई की संभावना बाबा वेंगा की भविष्यवाणी के मुताबिक, कुछ देशों की अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट देखने को मिलेगी। महंगाई बढ़ेगी,और सोने की कीमतें आसमान छू सकती हैं। यह ग्रहों के अनुसार शनि की स्थिति में अस्थिरता और वैश्विक मंदी का संकेत है। भारत जैसे देशों में भी निवेश और व्यापारिक निर्णयों में सावधानी बरतने की जरूरत रहेगी। 2026 में एलियंस से हो सकता है पहला संपर्क बाबा वेंगा ने एक अनोखी भविष्यवाणी की 2026 में मानव जाति एलियंस से संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर सकती है। यह घटना मानव इतिहास में एक नई दिशा दे सकती है। ज्योतिषीय रूप से यह वह समय होगा जब कुंभ युग (Aquarian Age) के प्रभाव से ब्रह्मांडीय ज्ञान और नई ऊर्जा तरंगें पृथ्वी पर उतरेंगी। परिवर्तन का वर्ष होगा 2026 2026 केवल विज्ञान या राजनीति का नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरण और चेतना परिवर्तन का वर्ष होगा। बाबा वेंगा की भविष्यवाणियां यह याद दिलाती हैं कि मानवता को तकनीक के साथ संतुलन और प्रकृति के प्रति विनम्रता रखनी होगी। यह समय भय का नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और जागरण का संकेत है।

बांग्लादेश लौटने को तैयार शेख हसीना! वापसी की रखी बड़ी शर्त, नोबेल विजेता यूनुस पर जमकर बरसीं

ढाका  बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश वापसी की इच्छा जताई है, लेकिन उन्होंने इसके लिए शर्तें भी रखी हैं। उनका कहना है कि वे तभी स्वदेश लौटेंगी जब देश में भागीदारीपूर्ण लोकतंत्र बहाल हो और उनकी पार्टी आवामी लीग पर लगी पाबंदी हटाई जाए। हसीना स्वतंत्र, निष्पक्ष तथा समावेशी चुनावों की मांग कर रही हैं। यह बयान उस समय आया है जब आवामी लीग ने 13 नवंबर को बड़े पैमाने पर हड़ताल का एलान किया है। भारत के किसी गुप्त स्थान पर रह रही शेख हसीना ने इंटरव्यू में वर्तमान अंतरिम सरकार और उसके प्रमुख मुहम्मद यूनुस पर भारत के साथ संबंधों को खराब करने तथा चरमपंथी तत्वों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। अपनी विदेश नीति की तुलना अंतरिम सरकार से करते हुए उन्होंने कहा कि ढाका और नई दिल्ली के बीच के 'व्यापक एवं गहन' रिश्तों को यूनुस की मूर्खतापूर्ण कार्रवाइयों का डटकर मुकाबला करना चाहिए। हसीना ने भारत सरकार को शरण प्रदान करने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि वे भारत सरकार तथा उसके लोगों के उदार स्वागत के लिए बेहद कृतज्ञ हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश लौटने की उनकी प्रमुख शर्त वही है जो बांग्लादेशी जनता की इच्छा है, भागीदारीपूर्ण लोकतंत्र की बहाली। अंतरिम प्रशासन को आवामी लीग पर प्रतिबंध हटाना होगा तथा स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव आयोजित करने होंगे। बांग्लादेश की सबसे लंबे समय तक शासित प्रधानमंत्री रह चुकी हसीना ने 5 अगस्त 2024 को हिंसक सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के कई हफ्तों के बाद देश छोड़ दिया था। इस विशाल आंदोलन के दबाव में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा और अंत में भारत पहुंचना पड़ा, जिससे यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार का गठन संभव हुआ। जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी सरकार ने प्रदर्शनों को सही ढंग से नियंत्रित नहीं किया, तो 78 वर्षीय नेता ने कहा कि निश्चित रूप से स्थिति हमारे नियंत्रण में नहीं थी और यह दुखद है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन भयावह घटनाओं से कई सबक मिले हैं, लेकिन कुछ जिम्मेदारी उन तथाकथित छात्र नेताओं की भी है जिन्होंने भीड़ को भड़काया। हसीना ने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें दावा किया गया कि उन्होंने अगले साल फरवरी के चुनावों का बहिष्कार करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि आवामी लीग के बिना कोई भी चुनाव वैध नहीं होगा। उनका मानना है कि लाखों लोग उनका समर्थन करते हैं…यह हमारे देश के लिए एक सुनहरा अवसर गंवाना होगा, जहां जनता की सच्ची सहमति से शासन करने वाली सरकार की सख्त जरूरत है। मुझे भरोसा है कि यह मूर्खतापूर्ण प्रतिबंध हटा लिया जाएगा, चाहे सत्ता में हो या विपक्ष में, आवामी लीग को बांग्लादेश की राजनीतिक प्रक्रिया का अभिन्न अंग बनना चाहिए। हसीना ने कहा कि भारत हमेशा से बांग्लादेश का सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय साझेदार रहा है। उन्होंने यूनुस सरकार पर 'मूर्खतापूर्ण एवं आत्मघाती' कूटनीतिक चूक करके नई दिल्ली के साथ संबंधों को जोखिम में डालने का इल्जाम लगाया। उनका कहना था कि यूनुस की भारत विरोधी नीति मूर्खतापूर्ण और स्वयं को नुकसान पहुंचाने वाली है, जो उन्हें एक कमजोर शासक के रूप में चित्रित करती है, जो अनिर्वाचित, अव्यवस्थित और चरमपंथियों के भरोसे पर टिका है।  

हिन्दुत्व की रक्षा के लिए बना ‘सनातन धर्म परीक्षण बोर्ड’, तिरुपति लड्डू विवाद से उठे सवाल

नई दिल्ली  आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर में लड्डू (प्रसादम) में इस्तेमाल होने वाले कथित नकली घी विवाद के बीच राज्य के उप मुख्यमंत्री पवन कल्याण ने हिन्दुत्व और सनातन धर्म की रक्षा के लिए 'सनातन धर्म परीक्षण बोर्ड' की स्थापना का आह्वान किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर मंगलवार को साझा की गई एक पोस्ट में पवन कल्याण ने कहा कि सनातनियों की भावनाओं और प्रथाओं का मजाक उड़ाया जा रहा है और उन्हें कमतर आंका जा रहा है, इससे भक्तों का विश्वास कम हो रहा है। उप-मुख्यमंत्री ने लिखा, "वैश्विक हिंदू समुदाय के लिए, तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम एक तीर्थस्थल से कहीं बढ़कर है; यह एक पवित्र आध्यात्मिक प्रवास है। तिरुपति लड्डू सिर्फ एक मिठाई नहीं है; यह एक साझा भावना है। हम इसे दोस्तों, परिवार और अजनबियों के बीच समान रूप से बाँटते हैं, क्योंकि यह हमारी सामूहिक आस्था और गहन विश्वास का प्रतीक है।" सालाना लगभग 2.5 करोड़ भक्त तिरुमाला आते हैं उन्होंने आगे लिखा, “औसतन, हर साल लगभग 2.5 करोड़ भक्त तिरुमाला आते हैं और जब सनातनियों की भावनाओं और प्रथाओं का मजाक उड़ाया जाता है या उन्हें कमतर आंका जाता है, तो यह न केवल आहत करने वाला होता है; बल्कि यह दुनिया भर के लाखों लोगों के विश्वास और श्रद्धा को भी चकनाचूर कर देता है। धर्मनिरपेक्षता दोतरफा होनी चाहिए।” सभी हितधारकों की सहमति से बने बोर्ड सनातन धर्म के लिए एक संरक्षण निकाय की स्थापना का आह्वान करते हुए, उन्होंने कहा कि बोर्ड का गठन सभी हितधारकों की सहमति से किया जाना चाहिए। उन्होंने लिखा, "हमारी आस्था की सुरक्षा और सम्मान से समझौता नहीं किया जा सकता। हमारा सनातन धर्म सबसे प्राचीन और निरंतर विकसित होती सभ्यताओं में से एक है, और अब समय आ गया है कि हम सभी हितधारकों की सहमति से सनातन धर्म परीक्षण बोर्ड की स्थापना करें।" 5 साल में 250 करोड़ के नकली घी का इस्तेमाल एक अन्य एक्स पोस्ट में उन्होंने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि 2019 से 2024 के बीच तिरुपति लड्डुओं में 250 करोड़ रुपये के मिलावटी घी का इस्तेमाल किया गया है। यह मामला तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के पूर्व कार्यकारी अधिकारी धर्म रेड्डी के मिलावटी घी मामले में विशेष जांच दल (SIT) के समक्ष पेश होने के बाद आया है। उनसे मिलावटी घी की खरीद के संबंध में पूछताछ की गई है। चंद्रबाबू पिछली सरकार पर रहे हमलावर इस बीच, SIT ने TTD के पूर्व अध्यक्ष वाईवी सुब्बा रेड्डी को ऑनलाइन नोटिस जारी कर 13 नवंबर को पूछताछ के लिए पेश होने का निर्देश दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने एक हफ्ते का समय मांगा है और कहा है कि वह 15 नवंबर के बाद पेश होंगे। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली टीडीपी ने कथित मिलावट के लिए पिछली वाईएसआरसीपी सरकार की आलोचना की है। टीडीपी ने एक्स पर लिखा, "घी बनाने के लिए दूध की जरूरत होती है। खासकर तिरुमला के लड्डुओं में इस्तेमाल होने वाले शुद्ध घी के लिए, यह गाय के दूध से बनाया जाता है। लेकिन YSRCP सरकार के दौरान, लड्डुओं में इस्तेमाल होने वाला मिलावटी घी कथित तौर पर असली दूध का इस्तेमाल किए बिना, रसायनों और जानवरों की चर्बी से और नकली तेलों से बनाया गया था।"

दिल्ली HC ने DU से पूछा—PM मोदी की डिग्री सार्वजनिक करने में दिक्कत क्या है?

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री का मामला फिर सुर्खियों में है। दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) को निर्देश दिया कि अपील में देरी माफ करने की अर्जी पर अपना ऑब्जेक्शन तीन हफ्ते में दाखिल करें। यह अपीलें CIC के 2016 के उस फैसले को चुनौती देती हैं, जिसमें मोदी की डिग्री की जानकारी सार्वजनिक करने का आदेश दिया गया था। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने मामले की सुनवाई की। अपीलकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट शादान फरासत ने दो मुख्य मुद्दे उठाए। पहला, क्या RTI एक्ट की धारा 8 के तहत डिग्री की जानकारी छिपाई जा सकती है। दूसरा, क्या इसे सार्वजनिक करना बड़े जनहित में है। कोर्ट ने नोट किया कि अपीलें देरी से दाखिल हुई हैं। DU की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वे देरी और मामले की योग्यता दोनों पर विस्तृत जवाब देंगे। बेंच ने कहा, "ऑब्जेक्शन दाखिल करें।" अपीलकर्ताओं को जवाब के लिए दो हफ्ते का समय मिलेगा। अगली सुनवाई 16 जनवरी 2026 को होगी। सिंगल जज ने क्यों पलटा CIC का आदेश? 25 अगस्त 2024 को जस्टिस सचिन दत्ता ने CIC के दिसंबर 2016 के फैसले को रद्द कर दिया। CIC ने DU को 1978 के सभी BA पास छात्रों के रिकॉर्ड दिखाने का आदेश दिया था, जिसमें पीएम मोदी भी शामिल थे। जज ने कहा कि डिग्री और मार्कशीट पर्सनल जानकारी हैं। इन्हें RTI की धारा 8(1)(j) के तहत संरक्षित रखा जाएगा। बिना बड़े जनहित के खुलासा नहीं हो सकता। यूनिवर्सिटी और छात्र का रिश्ता विश्वास पर आधारित है। थर्ड पार्टी को रिकॉर्ड दिखाना गोपनीयता का उल्लंघन होगा। कौन है अपीलकर्ता? इस मामले में AAP नेता संजय सिंह, RTI कार्यकर्ता नीरज शर्मा और एडवोकेट मोहम्मद इरशाद अपीलकर्ता हैं। कोर्ट ने पूछा कि क्या CBSE इस मामले में पक्षकार है, क्योंकि एक जुड़े केस में स्मृति ईरानी की 10वीं-12वीं मार्कशीट मांगी गई थी। अपीलकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि CBSE इस अपील में शामिल नहीं है।  

दिल्ली कार ब्लास्ट में पायल घोष की स्कूल फ्रेंड की मौत, एक्ट्रेस बोलीं – अब तक यकीन नहीं हो रहा

नई दिल्ली दिल्ली के लाल किले के पास सोमवार, 10 नवंबर को हुए कार ब्लास्ट ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है. इस हादसे में 12 लोगों की जान गई है और कई अन्य लोग घायल हैं. इसी हादसे में एक्ट्रेस पायल घोष ने अपनी करीबी स्कूल फ्रेंड सुनीता मिश्रा को खो दिया है, उनकी भी जान चली गई है. बता दें कि इसस बम धमाके से ठीक एक हफ्ते पहले एक्ट्रेस पायल घोष ने अपनी दोस्त सुनीता मिश्रा से बातचीत किया था. इस बारे में मीडिया से बात करते हुए एक्ट्रेस ने कहा- ‘मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा कि वो अब नहीं रहीं. हमने एक हफ्ते पहले ही बात की थी. वो जिंदगी से भरी हुई थीं, हमेशा मुस्कुराती थीं, हमेशा सकारात्मकता फैलाती थीं. इतनी दयालु आत्मा का इतने क्रूर तरीके से चले जाना अवास्तविक लगता है.’ अपने रिश्ते पर एक्ट्रेस पायल घोष  ने आगे कहा- ‘वो सिर्फ दोस्त नहीं थीं. वो परिवार थी. हम साथ बड़े हुए. सपने, हंसी और संघर्ष शेयर किए. उन्हें इस तरह खोना. इसके लिए शब्द नहीं हैं.’ एक्ट्रेस ने इस कठिन समय में पीड़ित परिवारों के समर्थन और एकजुटता के लिए जनता से अपील किया है.