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आरक्षण पर नई बहस: SC ने तेलंगाना सरकार के फैसले को ठहराया असंवैधानिक

नई दिल्ली  तेलंगाना में आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ाए जाने को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी है। तेलंगाना सरकार के फैसले को हाई कोर्ट ने खारिज किया था, जिसे शीर्ष अदालत में रेवंत रेड्डी सरकार ने चैलेंज किया था। अब उसे शीर्ष अदालत में भी झटका लगा है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने अर्जी खारिज करते हुए कहा कि जाति आधारित आरक्षण की 50 फीसदी की तय सीमा है और उसका उल्लंघन नहीं किया जा सकता। 1992 के इंदिरा साहनी केस में सुप्रीम कोर्ट ने जातिगत आरक्षण की 50 फीसदी सीमा का आदेश दिया था। तेलंगाना सरकार ने अदालत में यह दलील दी कि उसने 42 फीसदी ओबीसी आरक्षण तय किया है, जो एक नीतिगत निर्णय है। इससे राज्य के पिछड़े वर्गों को स्थानीय निकाय में उचित प्रतिनिधित्व मिल सकेगा। इस आरक्षण के साथ ही राज्य में कुल कोटा 67 फीसदी हो जाता है। इसी पर आपत्ति जताते हुए ओबीसी आरक्षण बढ़ाने के प्रस्ताव को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था। अब ऐसा ही फैसला सुप्रीम कोर्ट ने भी दिया है। इस तरह हाई कोर्ट की ओर से आरक्षण बढ़ाने के फैसले पर लागू की गई अंतरिम रोक अगले आदेश तक जारी रहेगी। उच्च न्यायालय ने 9 अक्तूबर को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार 4 सप्ताह में जवाब देने का मौका दिया था। अब हाई कोर्ट की सुनवाई पर रहेगी नजर, राज्य सरकार को देना है जवाब अब एक बार फिर से हाई कोर्ट की सुनवाई पर नजर होगी कि अब राज्य सरकार का क्या जवाब होगा और उस पर अदालत का रुख क्या रहेगा। तेलंगाना सरकार की ओर से ओबीसी कोटा 42 फीसदी किए जाने को कई संगठनों और लोगों की ओर से चैंलेंज किया गया था। इन लोगों का कहना था कि जातिगत आरक्षण की लिमिट 50 फीसदी है, जो इस फैसले से बढ़कर 67 फीसदी हो जाता है। इसलिए इसे रोका जाना चाहिए। फिलहाल शीर्ष अदालत के फैसले पर तेलंगाना सरकार का कोई रिएक्शन नहीं आया है।  

ट्रंप का बड़ा दावा: 8 महीने में 8 युद्ध रोके, कहा – मेरी वजह से बचे लाखों लोग

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दोहराया कि उन्होंने वैश्विक संघर्षों को सुलझाने में बड़ी भूमिका निभाई. साथ ही एक बार फिर भारत- पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाने का श्रेय लिया. बॉलरूम डिनर कार्यक्रम में ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने आठ महीनों में आठ युद्धों को रुकवाया. अपने कार्यों के प्रभाव के बारे ट्रंप ने कहा कि वह पुरस्कार या मान्यता से ज्यादा संघर्ष के दौरान इंसानों की जान को महत्व देते हैं. उन्होंने आगे कहा, 'लेकिन आप जानते हैं कि मुझे किस चीज की परवाह है? मैंने शायद करोड़ों लोगों की जान बचाई है.' ट्रंप की यह टिप्पणी रविवार (स्थानीय समय) को उनके द्वारा पहले की गई टिप्पणियों से मिलती-जुलती थी, जब उन्होंने दोहराया था कि उन्होंने कई लंबे समय से चले आ रहे वैश्विक संघर्षों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. 13 अक्टूबर को मिडिल ईस्ट की यात्रा के दौरान एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने गाजा युद्धविराम को आठवाँ संघर्ष बताया, जिसे उन्होंने सफलतापूर्वक समाप्त करने में मदद की थी. ट्रंप ने कहा था, 'यह मेरा आठवाँ युद्ध होगा जिसे मैंने सुलझाया है. मैंने सुना है कि अब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच एक युद्ध चल रहा है. मैंने कहा था, मुझे वापस आने तक इंतजार करना होगा. मैं एक और युद्ध समाप्त कर रहा हूँ क्योंकि मैं युद्ध सुलझाने में माहिर हूँ.' उन्होंने अपने पिछले राजनयिक हस्तक्षेपों पर विचार किया. इसमें भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने का उनका दावा भी शामिल था. उन्होंने कहा, 'भारत और पाकिस्तान के बारे में सोचिए. उन युद्धों के बारे में सोचिए जो वर्षों से चल रहे थे. एक युद्ध 31 वर्षों तक चला, एक 32 वर्षों तक चला, एक 37 वर्षों तक चला, जिसमें हर देश में लाखों लोग मारे गए और मैंने इनमें से अधिकांश युद्धों को एक दिन के भीतर ही निपटा दिया.' ट्रंप ने कहा कि शांति प्रयासों के जरिए लोगों की जान बचाने में भूमिका निभाना उनके लिए सम्मान की बात है. उन्होंने आगे कहा कि उनके प्रयास किसी पहचान या पुरस्कार से प्रेरित नहीं थे. उन्होंने कहा, 'ऐसा करना सम्मान की बात है. मैंने लाखों लोगों की जान बचाई. मैंने यह नोबेल पुरस्कार के लिए नहीं किया. मैंने यह जान बचाने के लिए किया.' उनकी यह टिप्पणी नोबेल शांति पुरस्कार पर नए सिरे से चर्चा के बीच आई है. यह टिप्पणी उन्होंने 11 अक्टूबर को वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार विजेता घोषित किए जाने के बाद की थी. ट्रंप ने दावा किया कि मचाडो ने व्यक्तिगत रूप से उनसे संपर्क किया और यह पुरस्कार उनके सम्मान में समर्पित किया. उन्होंने कहा, 'जिस व्यक्ति को नोबेल पुरस्कार मिला, उसने आज मुझे फोन किया और कहा, 'मैं इसे आपके सम्मान में स्वीकार कर रही हूँ क्योंकि आप वास्तव में इसके हकदार थे.' हालाँकि, मैंने यह नहीं कहा, 'इसे मुझे दे दो'. मुझे लगता है कि उन्होंने ऐसा किया होगा. मैं इस दौरान उनकी मदद करता रहा हूँ.' मचाडो को लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने और वेनेजुएला में तानाशाही से लोकतंत्र की ओर शांतिपूर्ण संक्रमण का नेतृत्व करने के उनके प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया. शांति प्रयासों पर अपनी टिप्पणियों के सिलसिले में ट्रंप ने अपने रिकॉर्ड को मौजूदा रूस-यूक्रेन संघर्ष से जोड़ते हुए दोहराया कि उन्होंने कूटनीति के जरिए कई युद्ध समाप्त किए हैं. उन्होंने कहा, 'मैंने सात युद्ध रोके. यह एक युद्ध है और यह बहुत बड़ा युद्ध है.' उन्होंने उन संघर्षों का जिक्र किया जिनके हल होने का उन्होंने दावा किया था, इनमें आर्मेनिया, अजरबैजान, कोसोवो और सर्बिया, इजराइल और ईरान, मिस्र और इथियोपिया, रवांडा और कांगो शामिल हैं. ट्रंप की शांति पहलों का समर्थन करते हुए, इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा,डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार दीजिए. वह इसके हकदार हैं!

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग मंदिर पहुंचे PM मोदी, चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण ने दिया साथ

नंद्याल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज आंध्र प्रदेश दौरे पर हैं, जहां वह कई परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे. आंध्र प्रदेश पहुंचते ही सीएम चंद्रबाबू नायडू ने उनका स्वागत किया. इस दौरान पीएम मोदी ने नंद्याल जिले के श्रीशैलम में स्थित श्री भ्रामराम्बा मल्लिकार्जुन स्वामी वरला देवस्थानम के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज आंध्र प्रदेश दौरे पर हैं, जहां वह कई परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे. आंध्र प्रदेश पहुंचते ही सीएम चंद्रबाबू नायडू ने उनका स्वागत किया. इस दौरान पीएम मोदी ने नंद्याल जिले के श्रीशैलम में स्थित श्री भ्रामराम्बा मल्लिकार्जुन स्वामी वरला देवस्थानम के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की. इस दौरान उन्होंने बिहार की मशहूर मधुबनी पेंटिंग से सजा हुआ अंगवस्त्र पहना. यह अंगवस्त्र बिहार की कला, संस्कृति और परंपरा के प्रति उनके गहरे लगाव और गर्व का प्रतीक है. मधुबनी पेंटिंग, जो बिहार के मिथिला इलाके की बेहद मशहूर लोक कला है, अपने नेचुरल रंगों, मोटी लाइनों और ज्योमेट्रिक पैटर्न के लिए जानी जाती है. प्रधानमंत्री मोदी की मंदिर से जो तस्वीरें सामने आई हैं, उसमें वह आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण के साथ बैठे नज़र आ रहे हैं. तीनों नेताओं का साथ आना केवल धार्मिक भाव-प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति में कई स्तरों पर बड़े संकेत देती है.  तीनों नेता साथ आकर दक्षिण भारत में बीजेपी-टीडीपी-जनसेना एकता का सार्वजनिक प्रदर्शन है. साथ आकर मतदाताओं को यह संदेश भी दे रहे हैं कि वे पारंपरिक मूल्यों और धार्मिक भावनाओं के संरक्षक हैं. इसके साथ ही राज्य-केंद्र संबंधों की मजबूत छवि को पेश किया जा रहा है.  मल्लिकार्जुन मंदिर में पूजा-अर्चना प्रधानमंत्री मोदी ने पारंपरिक तरीके से पूजा करते हुए पंचामृत से रुद्राभिषेक किया. पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण होता है, जो भगवान शिव को समर्पित खास अभिषेक में इस्तेमाल किया जाता है. पूजा के दौरान मंदिर के पुजारियों ने उन्हें मंदिर के इतिहास और महत्व के बारे में विस्तार से बताया. मंदिर दर्शन के बाद प्रधानमंत्री ने कुरनूल में 13,430 करोड़ रुपये से ज्यादा की कई विकास प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और उद्घाटन किया, जिनमें एनर्जी, डिफेंस, रेलवे और पेट्रोलियम जैसे अहम सेक्टर शामिल थे. बिहार की संस्कृति और कला का प्रेम मधुबनी कला को पीएम मोदी ने न सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों में भी बढ़ावा दिया है. वे कई देशों के नेताओं को मधुबनी पेंटिंग गिफ्ट करके इस कला को ग्लोबल पहचान दिलाने में मदद करते रहे हैं. साथ ही, बिहार की इस सांस्कृतिक परंपरा के प्रति उनका प्यार और सपोर्ट बिहार की जनता के बीच गहरा सम्मान और जुड़ाव बनाता है. पीएम मोदी का यह कदम न सिर्फ बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान और आस्था को दिखाता है, बल्कि बिहार के लोगों के साथ उनकी मजबूत पहचान और विकास की प्रतिबद्धता को भी उजागर करता है. 

रेल आपूर्तिकर्ताओं के लिए चेतावनी — घटिया सामग्री पर बैन व ब्लैकलिस्टिंग की तैयारी

नई दिल्ली रेल मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने रेल कंपनियों को कड़ी चेतावनी दी है. उन्‍होंने सीधे शब्‍दों में कहा है कि गुणवत्ता में सुधार कीजिए नहीं तो ब्‍लैकलिस्‍ट कर दिया जाएगा. CII के एक कार्यक्रम में बोलते हुए अश्विनी वैष्‍णव ने कहा कि ऐसे किसी भी मैन्‍युफैक्‍चरर और सप्‍लायर को बर्दाश्‍त नहीं किया जाएगा, जो रेलवे को बेकार माल सप्‍लाई करते हैं. उन्‍होंने आगे कहा कि ऐसी कंपनियों पर सख्‍त रवैया अपनाते हुए ब्‍लैकलिस्‍ट कर दिया जाएगा.  इस कार्यक्रम में रेल मंत्री ने मैन्‍युफैक्‍चरिंग प्रॉसेस के ऑडिट का आदेश दिया और 2400 किलोवाट की हाइड्रोजन बेस्‍ड ट्रेन के लॉन्‍च करने के साथ ग्रीन एनर्जी में एक बड़ी छलांग का ऐलान किया, जो पूरी तरह से भारत में डेवलप हुई है.  गुणवत्ता में बदलाव करने की जरूरत ट्रैक और उपकरण आपूर्तिकर्ताओं की सभा को संबोधित करते हुए वैष्णव ने कहा कि मुझे पता है कि कई कलपुर्जा निर्माता इसे पसंद नहीं करेंगे, लेकिन यह हमारे यात्रियों की सुरक्षा के लिए बहुत-बहुत महत्वपूर्ण है. कड़े शब्दों में लिखे एक निर्देश में वैष्‍णव ने प्रोडक्‍ट्स के सेलेक्‍शन से लेकर सप्‍लाई तक गुणवत्ता नियंत्रण में पूरी तरह से बदलाव करने के लिए कहा.  ब्‍लैकलिस्‍ट कर दिया जाएगा वैष्‍णव ने कहा कि जो सुधार नहीं करेंगे, वे हार जाएंगे. मैं आप सभी से प्रक्रियाओं में सुधार करने के लिए आह्वान करता हूं. वैष्णव ने कहा कि उन्होंने रेलवे बोर्ड को ऐसे अधिकारियों की नियुक्ति करने का निर्देश दिया है जो गुणवत्ता की जांच करने में परफेक्‍ट हों. उन्होंने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष की ओर इशारा करते हुए कहा कि उन्हें घटिया उपकरण बनाने और रेलवे को आपूर्ति करने वाले लोगों को प्रतिबंधित, सूची से हटाना और कभी-कभी ब्‍लैकलिस्‍ट भी करना चाहिए. निर्दयी बनें.  उन्होंने आगे कहा कि घटिया सामग्री सप्लाई करने वालों पर कोई रहम नहीं किया जाएगा. चाहे सिग्नलिंग हो, अर्थिंग हो, ट्रैक उपकरण हों, या लोकोमोटिव के पुर्जे हों. सभी प्रोडक्‍ट्स में 10 गुना सुधार चाहिए.  लोग 1950 या 60 के दशक की सेवाओं से खुश नहीं रेल मंत्री ने RDSO की भूमिका पर भी जोर दिया, जो पिछले 3 सालों से स्‍पेसिफिकेशन अपग्रेडशन पर काम कर रहा है. अब उन्होंने कहा कि यह काम बहुत तेजी से आगे बढ़ना चाहिए. वैष्‍णव ने कहा कि यह एक महत्‍वाकांक्षी समाज है. लोग 1950 या 60 के दशक की सेवाओं से खुश नहीं होंगे. 2025 की दुनिया विश्‍वस्‍तरीय रेल यात्रा की हकदार है और इसकी मांग भी करती है.  इस दौरान रेल मंत्री ने भारत की पहली 2400 किलोवाट की हाइड्रोजन ट्रेन का प्रदर्शन किया और इसे एक साहसिक कदम बताया. उन्होंने कहा कि हमने इस तकनीक का आयात न करने का एक कठिन फैसला लिया है. हम नई तकनीकों में सबसे आगे होंगे. 

गुजरात में भाजपा का मास्टरस्ट्रोक! 10 नए मंत्री बनाए जाएंगे, चुनावी मिशन 2027 की तैयारी शुरू

अहमदाबाद  साल 2027 में गुजरात विधानसभा के चुनाव होने हैं। इससे 2 साल पहले चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए भूपेंद्र पटेल की कैबिनेट में बड़ा फेरबदल होने जा रहा है। राज्य की कैबिनेट का विस्तार 17 अक्तूबर को होगा। BJP के एक सीनियर नेता की माने तो इस कैबिनेट विस्तार में राज्य को करीब 10 नए मंत्री मिल सकते हैं। इसके अलावा मौजूदा मंत्रियों में से करीब आधे को बदला जा सकता है। एक सरकारी रिलीज में कहा गया है कि गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की कैबिनेट का विस्तार शुक्रवार को सुबह 11.30 बजे होगा। आपको बताते चलें कि गुजरात की मौजूदा कैबिनेट में CM पटेल समेत 17 मंत्री हैं। इनमें 8 कैबिनेट रैंक के मंत्री हैं, जबकि इतने ही राज्य मंत्री हैं। इस कैबिनेट विस्तार में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा के भी शामिल होने की उम्मीद है। यह कैबिनेट फेरबदल सरकार के लगभग तीन साल पूरे होने पर और नगर निगमों, नगर पालिकाओं, जिला पंचायतों और तालुका पंचायतों के लिए राज्य भर में होने वाले लोकल बॉडी चुनावों से कुछ महीने पहले हो रहा है। गुरुवार की कैबिनेट मीटिंग के दौरान, मुख्यमंत्री उन मंत्रियों से इस्तीफा मांग सकते हैं जिन्हें या तो हटा दिया जाएगा या उन्हें दूसरे पोर्टफोलियो दिए जाएंगे। भाजपा के सीनियर अधिकारियों ने कहा कि जिन मंत्रियों को हटाया जाएगा, उन्हें पार्टी के राज्य संगठन में पद दिए जा सकते हैं। नए बने भाजपा अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा अपनी कोर टीम के नाम फाइनल कर रहे हैं। आपको बताते चलें कि भूपेंद्र पटेल ने 12 दिसंबर 2022 को दूसरी बार गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। गुजरात में 182 सदस्यों वाली विधानसभा है। इस हिसाब से 15 प्रतिशत यानी 27 मंत्री कैबिनेट में मंत्री हो सकते हैं। ऐसा संविधान के अनुच्छेद 164(1A) के तहत होता है। इसके मुताबिक- किसी राज्य में मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) का आकार उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के 15% से अधिक नहीं होगा।  

रूसी तेल पर ट्रंप के आरोपों को भारत का जवाब – पहले देशहित, बाकी बाद में

नई दिल्ली डोनाल्ड ट्रंप के रूसी तेल वाले दावे पर भारत का जवाब आ गया है. भारत ने साफ कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता भारत के लोग हैं और कुछ नहीं. ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत का तेल आयात भारत के हितों की रक्षा के आधार पर तय होता है. भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना भारत की प्राथमिकता है. दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उन्हें पीएम मोदी ने भरोसा दिलाया है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा. इसी दावे पर विदेश मंत्रालय ने बयान दिया है. ट्रंप के बयान पर भारतीय विदेश मंत्रालय का बयान विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, ‘भारत तेल और गैस का एक प्रमुख आयातक देश है. अस्थिर वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना हमारी निरंतर प्राथमिकता रही है. हमारी आयात नीतियां पूरी तरह इसी उद्देश्य से निर्देशित होती हैं. ऊर्जा की स्थिर कीमतें सुनिश्चित करना और आपूर्ति को सुरक्षित रखना हमारी ऊर्जा नीति के दो प्रमुख लक्ष्य रहे हैं. इसके तहत हमने अपने ऊर्जा स्रोतों का विस्तार किया है और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार विविधीकरण किया है.’ अमेरिका संग संबंधों पर क्या कहा? विदेश मंत्रायल ने आगे भारत संग संबंधों पर कहा, ‘जहां तक अमेरिका का संबंध है, हम कई वर्षों से अपनी ऊर्जा खरीद को बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं. पिछले एक दशक में इसमें लगातार प्रगति हुई है. वर्तमान प्रशासन ने भारत के साथ ऊर्जा सहयोग को और गहरा करने में रुचि दिखाई है. इस विषय पर बातचीत जारी है.’ डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा था?  डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान समाचार एजेंसी एएनआई की ओर से पूछे गए एक सवाल के जवाब में दिया. एएनआई ने एक सवाल किया कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति भारत को एक विश्वसनीय साझेदार मानते हैं? इस पर ट्रंप ने कहा, ‘हां, बिल्कुल. वह (पीएम मोदी) मेरे मित्र हैं. हमारे बीच बहुत अच्छे संबंध हैं. भारत रूस से तेल खरीद रहा है, इससे मैं खुश नहीं था. हालांकि, उन्होंने अब मुझे आश्वासन दिया है कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा. यह एक बड़ा कदम है. अब हमें चीन से भी यही करवाना होगा.’ क्यों निराश हैं ट्रंप? ट्रंप यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने में अपनी असमर्थता के कारण निराश हैं. इस युद्ध की शुरुआत लगभग चार साल पहले रूस के आक्रमण से हुई थी. उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रति असंतोष व्यक्त किया है, जिन्हें वह सुलह की राह में सबसे बड़ी बाधा बताते रहे हैं. ट्रंप का शुक्रवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मिलने का कार्यक्रम है. चीन के बाद भारत रूसी तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है और ट्रंप ने इसके दंड के तौर पर अगस्त में भारत पर शुल्क बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया था.  

बिहार से सबक: चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में SIR पर कर सकता है ढील

नई दिल्ली बिहार में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर उठे विवादों और कानूनी चुनौतियों के बाद, चुनाव आयोग (EC) अब इस प्रक्रिया में बड़े बदलाव करने जा रहा है। इसका उद्देश्य मतदाताओं की परेशानियों को कम करना और प्रक्रिया को मतदाता अनुकूल बनाना है। बिहार में SIR के दौरान दस्तावेजों की जटिल मांग, फॉर्म न भरने पर नामों की बड़ी संख्या में हटाई गई प्रविष्टियां (डिलीशन) और बहुत कम समय सीमा जैसी समस्याओं को लेकर मतदाताओं में असंतोष था। अब आयोग इन तीनों बिंदुओं पर लचीलापन लाने की योजना बना रहा है। दस्तावेजों की अनिवार्यता में ढील बिहार में पहली बार हर मतदाता से नए दस्तावेजों की मांग की गई थी, जिससे लोगों में भ्रम और तनाव फैला। अब आयोग इस नीति में बदलाव पर विचार कर रहा है ताकि कम से कम मतदाताओं को दस्तावेज जमा करने पड़ें। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) पुराने रजिस्टरों और पारिवारिक लिंक के आधार पर ऐसे मतदाताओं की पहचान कर रहे हैं जिनसे नए सिरे से प्रमाण पत्र नहीं मांगे जाएंगे। फॉर्म न भरने पर नाम हटाने की नीति में बदलाव बिहार में इस साल SIR के दौरान करीब 65 लाख नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे इनमें मृतक, स्थानांतरित व्यक्ति और वे लोग शामिल थे जिन्होंने एन्यूमरेशन फॉर्म या दस्तावेज जमा नहीं किए। यह प्रक्रिया पहले के रिवीजन की तुलना में असामान्य थी। अब आयोग विचार कर रहा है कि ड्राफ्ट सूची से नाम न हटाए जाएं, बल्कि हर मतदाता को अंतिम सूची प्रकाशित होने से पहले फिर से शामिल होने का अवसर दिया जाए। समय सीमा बढ़ाने पर विचार बिहार में SIR प्रक्रिया तीन महीने तक चली। 25 जून से एक महीने तक एन्यूमरेशन, फिर 30 दिन में वेरिफिकेशन, और 30 सितंबर को अंतिम सूची जारी की गई। यह कार्यक्रम विधानसभा चुनावों की घोषणा से सिर्फ छह दिन पहले पूरा हुआ। इस तंग समय सीमा ने मतदाताओं और सरकारी कर्मचारियों दोनों पर बेहद दबाव डाला। अब आयोग मानता है कि इतनी कठोर समय सीमा, वह भी चुनाव से ठीक पहले, व्यावहारिक नहीं है। इसलिए भविष्य के SIR में अवधि बढ़ाने का फैसला लिया जा सकता है। बंगाल, तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी में होंगे SIR चुनाव आयोग के पास अगले SIR के लिए ज्यादा समय नहीं है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में मई 2026 तक नई विधानसभा बननी है। आयोग आम तौर पर फरवरी के अंत तक चुनाव कार्यक्रम घोषित करता है, इसलिए दीपावली के तुरंत बाद इन राज्यों में SIR की घोषणा की संभावना है। हाल ही में बाढ़ या मौसम की विपरीत परिस्थितियों से प्रभावित राज्य तथा वे राज्य जहां स्थानीय निकाय चुनाव होने हैं, उनमें SIR को अगले चरण में आयोजित किया जाएगा।

तेल भुगतान में भारत का नया कदम, रूबल के साथ युआन का भी इस्तेमाल!

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जहां एक ओर बड़ा दावा कर रहे हैं कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा. वहीं दूसरी ओर रूस के उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक का कहना है कि रूस लगातार भारत को कच्चे तेल के टॉप सप्लायर्स की लिस्ट में बना हुआ है. उन्होंने तो अब यहां तक दावा किया है कि भारत Russian Oil Import के पेमेंट के लिए अब सिर्फ रूबल ही नहीं, बल्कि चीनी करेंसी युआन में भी पेमेंट करने लगा है.  नोवाक बोले- 'चीनी करेंसी में पेमेंट का हिस्सा कम'  सरकारी समाचार एजेंसी TASS को दिए एक इंटरव्यू में रूसी डिप्टी पीएम अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा कि भारत ने रूसी तेल के लिए कुछ पेमेंट चीनी युआन में करना शुरू कर दिया है, हालांकि ज्यादातर लेनदेन अभी भी रूसी करेंसी रूबल में ही किए जाते हैं. उन्होंने बड़ा दावा करते हुए बताया कि, 'मुझे पता है कि इस तरह के भुगतान शुरू हो गए हैं और मेरा मानना ​​है कि वर्तमान में यह प्रतिशत कम है.' बता दें कि पुरानी रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत रूसी तेल के लिए मुख्यतः भारतीय करेंसी Rupee में भुगतान कर रहा था. चीन के बाद दूसरा बड़ा खरीदार रिपोर्ट के मुताबिक, ऊर्जा एवं स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र (सीआरईए) के अनुसार, सितंबर में चीन के बाद भारत रूसी कच्चे तेल (Russian Crude Oil) का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार रहा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद उस पर लगाए गए पश्चिमी प्रतिबंधों ने तेल व्यापार के निपटान के लिए युआन और यूएई करेंसी दिरहम समेत वैकल्पिक मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने का काम किया है, जिन पर लंबे समय से अमेरिकी डॉलर का ही वर्चस्व रहा है. यूक्रेन युद्ध के बाद रूसी तेल की बढ़ी खरीद भारत, जो कि पारंपरिक रूप से मिडिल ईस्ट क्रूड ऑयल पर निर्भर है. इसने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद से ही रूसी तेल के अपने आयात में जोरदार बढ़ोतरी की है. इसके पीछे रूस की ओर से किफायती दरों पर क्रूड ऑयल मुहैया कराना बड़ा कारण है. पश्चिमी प्रतिबंधों और यूरोपीय डिमांड में कमी के कारण Russian Oil पर भारी छूट मिलती है, जिसके चलते भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात कम ही समय में कुल कच्चे तेल आयात तब के के 1 फीसदी से बढ़कर अब करीब 40 फीसदी हो चुका है.  Trump कर रहे हैं ये दावे एक ओर जहां रूस के डिप्टी पीएम अलेक्जेंडर नोवाक भारत की रूसी तेल खरीद बढ़ने और इसके पेमेंट के लिए चीनी करेंसी तक के इस्तेमाल की बात कह रहे हैं. तो दूसरी ओर व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के सामने भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल के निरंतर आयात पर चिंता जाहिर की है. उन्होंने आगे दावा किया कि पीएम मोदी ने आज मुझे आश्वस्त किया कि वे रूस से तेल नहीं खरीदेंगे. यह एक बड़ा कदम है. अब हमें चीन को भी यही करने के लिए कहना होगा. हालांकि ट्रंप के दावे को लेकर भारत की तरफ से अभी तक कोई बयान सामने नहीं आया है.

अमेरिका में RBI गवर्नर का बयान – Trump की टैरिफ नीति से भारत को घबराने की जरूरत नहीं

वाशिंगटन अमेरिका ने भारत पर टैरिफ बीते अगस्त महीने में बढ़ाकर 50 फीसदी (US Tariff On India) कर दिया था. इसके बाद देश में इसके असर से जुड़ी तमाम आशंकाएं भी जाहिर की जा रही है, लेकिन केंद्रीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा (RBI Governor Sanjay Malhotra) ने इस पर बड़ी बात कही है. अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में IMF और विश्व बैंक की सालाना बैठक के मौके पर उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक बुनियाद बेहद मजबूत है और अमेरिकी टैरिफ कोई बड़ी चिंता का विषय नहीं है.  'भारत के लिए टैरिफ चिंता का विषय नहीं' आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में भारत पर लगे अमेरिकी टैरिफ से जुड़ी चिंताओं को सीधे तौर पर खारिज किया है. उन्होंने कहा कि टैरिफ के बजाय भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था व्यापार दबाव का सामना जरूर कर सकती है. आईएमएफ और विश्व बैंक की बैठक के अवसर पर उन्होंने साफ किया कि भारत मुख्यतः घरेलू अर्थव्यवस्था है, इसलिए हम पर इसका प्रभाव तो पड़ता है, लेकिन यह कोई बड़ी चिंता का विषय बिल्कुल भी नहीं है. ट्रेड डील से होगा भारत को लाभ गवर्नर वार्ता सत्र में बोलते हुए संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि टैरिफ के चलते वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत की व्यापक आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है. उन्होंने कहा कि हम नीतिगत अनिश्चितताओं के दौर में हैं, जो एक ऐसा जोखिम है जिस पर सभी उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं को विचार करना चाहिए. आरबीआई गवर्नर के मुताबिक, अगर वाशिंगटन के साथ ट्रेड डील (India-US Trade Deal) जल्दी ही किसी नतीजे पर पहुंच जाती है, तो इसमें संभावित लाभ भी हो सकता है.  रुपये पर दबाव पर बोले RBI गवर्नर  Trump Tariff के असर के बीच कमजोर इंडियन करेंसी रुपया के बारे में बोलते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने अपनी बात को दोहराया. उन्होंने कहा कि, 'आरबीआई किसी स्पेशल वैल्यू टारगेट को लक्षित नहीं करता है. हमारा मानना ​​है कि बाजार ही तय करेगा कि मूल्य स्तर क्या होना चाहिए? हमारा प्रयास वास्तव में यह सुनिश्चित करना है कि रुपये की एक व्यवस्थित गति बनी रहे और किसी भी असामान्य अस्थिरता पर अंकुश लगाया जा सके.' रेपो रेट में कटौती की गुंजाइश! चर्चा के दौरान गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने आगे महंगाई पर बात करते हुए कहा कि अनुमानों में कमी के बाद महंगाई दर में नरमी का आउटलुक इकोनॉमिक ग्रोथ को और अधिक समर्थन देने के लिए नीतिगत गुंजाइश प्रदान करता है. उनके मुताबिक, रेपो रेट (Repo Rate) में और अधिक कटौती करने की गुंजाइश है, लेकिन मेरा मानना ​​है कि इसके लिए यह उपयुक्त समय नहीं है, क्योंकि इसका उम्मीद के मुताबिक प्रभाव नहीं होगा.

धनबल पर रोक: चुनाव में अनियमित खर्च, आयोग ने तीन दिन में जब्त किए 33.97 करोड़

 नई दिल्ली बिहार विधानसभा चुनाव और सात राज्यों की आठ विधानसभा में होने वाले उपचुनाव को लेकर चुनाव आयोग सख्त है। चुनाव के दौरान पैसों के दुरुपयोग और मतदाताओं को प्रभावित करने के प्रयासों पर रोक लगाने के लिए निर्वाचन आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने सभी विधानसभा क्षेत्रों में व्यय पर्यवेक्षकों की तैनाती की है। जो उम्मीदवारों के चुनावी खर्च पर पैनी नजर रखेंगे। आगामी चुनावों में धनबल, मुफ्तखोरी के साथ-साथ नशीली दवाओं, नशीले पदार्थों और शराब के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने के लिए आयोग ने दो चरणों में होने वाले बिहार विधानसभा चुनावों और 8 विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले उपचुनावों के लिए सभी प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश जारी किए हैं। एक बयान में चुनाव आयोग ने कहा कि उम्मीदवारों द्वारा किए जाने वाले चुनावी खर्च की निगरानी के लिए व्यय पर्यवेक्षकों को पहले ही तैनात कर दिया गया है और वे चुनाव की अधिसूचना के दिन अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में पहुंच गए हैं। तीन दिन में 33.97 करोड़ जब्त चुनाव आयोग ने कहा, "अपने दौरे के दौरान वे व्यय निगरानी में लगी सभी टीमों से मिलेंगे। उड़न दस्ते, निगरानी दल, वीडियो निगरानी दल मतदाताओं को लुभाने के लिए धनबल या अन्य प्रलोभनों के किसी भी संदिग्ध मामले पर नजर रखने के लिए चौबीसों घंटे सतर्क रहेंगे।" इसी के साथ चुनाव आयोग ने बताया कि चुनाव की घोषणा के बाद से विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों ने कुल 33.97 करोड़ रुपए की नकदी, शराब, ड्रग्स और मुफ्त सामान जब्त किया है। NDA में सीट बंटवारा इससे पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने बिहार चुनावों के लिए अपनी सीट-बंटवारे की घोषणा की। भाजपा और जेडीयू 101-101 सीटों पर, लोजपा (रामविलास) 29 सीटों पर, राष्ट्रीय लोक मोर्चा छह सीटों पर और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) छह सीटों पर चुनाव लड़ने जा रही है। बता दें कि बिहार चुनाव में एनडीए का मुकाबला राजद के तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले इंडिया ब्लॉक, कांग्रेस, दीपांकर भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली सीपीआई (एमएल), सीपीआई, सीपीएम और मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) से होगा। वहीं इस बार बिहार में प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी जन सुराज पार्टी के रूप में एक नए खिलाड़ी की एंट्री भी देखने को मिल रही है।