samacharsecretary.com

‘छोटी बहन’ कहकर PM मोदी ने किया स्वागत, भारत-जापान के बीच फार्मा, डिफेंस और टेक्नोलॉजी पर बड़ी डील

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज जापानी समकक्ष सनाए ताकाइची के साथ अहम द्विपक्षीय बैठक की। बैठक के बाद उन्होंने जापानी पीएम को अपनी छोटी बहन और दूरदर्शी नेता बताया। दोनों देशों के बीच कितने करार हुए? दोनों प्रधानमंत्रियों ने किन बातों को खास तौर पर रेखांकित किया?  भारत और जापान के बीच आज अहम द्विपक्षीय समझौते हुए। दोनों देशों के बीच हुए वार्षिक सम्मेलन के बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के अलावा फार्मा सेक्टर से जुड़े समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए। इसके बाद दोनों प्रधानमंत्रियों ने संयुक्त प्रेस वार्ता भी की। अपनी गर्मजोशी और प्रधानमंत्री पद से इतर इंसानी रिश्ते के लिए दुनियाभर में मशहूर पीएम मोदी ने जापानी समकक्ष को अपनी छोटी बहन बताया। पीएम मोदी ने क्या कहा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा 'मेरी छोटी बहन, प्रधानमंत्री सनाए तकाइची, दोनों प्रतिनिधिमंडलों के सम्मानित सदस्य, मीडिया के सदस्य, नमस्कार और कोनिचिवा (इसका मतलब जापानी भाषा में हैलो होता है)।  उन्होंने आगे कहा कि भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री तकाइची की भारत की पहली यात्रा पर उनका स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। वह जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं। इसके  साथ ही एक दूरदर्शी और व्यापक रूप से सम्मानित नेता भी हैं। वे नारा प्रांत से आती हैं, जो भारत और जापान की साझा बौद्ध विरासत का एक प्रमुख केंद्र है।' शिखर वार्ता के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई बड़े फैसलों का ऐलान किया. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सनाए ताकाइची की भारत यात्रा दोनों देशों के संबंधों में नया अध्याय लिख रही है. उन्होंने ताकाइची को ‘जापान फर्स्ट प्रधानमंत्री’ और दूरदर्शी नेता बताते हुए कहा कि भारत और जापान मुक्त, खुला और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के साझा विजन पर काम कर रहे हैं. इस दौरान रक्षा, निवेश, तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा, सप्लाई चेन और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में कई अहम समझौतों पर सहमति बनी।  भारत-जापान रिश्तों को नई ऊंचाई देने वाले बड़े फैसले     16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बीते एक साल में भारत और जापान के बीच 120 नए कारोबारी समझौते हुए हैं. अब दोनों देशों का लक्ष्य अगले 10 सालों में भारत में 10 ट्रिलियन येन के जापानी निवेश को आकर्षित करना है. यह निवेश विनिर्माण, बुनियादी ढांचे, आधुनिक तकनीक और औद्योगिक विकास को नई गति देगा।      रक्षा सहयोग भी इस सम्मेलन का सबसे बड़ा आकर्षण रहा. भारत और जापान ने अपने पहले रक्षा सह-विकास (Defence Co-development) प्रोजेक्ट पर साइन किए. इसके तहत दोनों देश संयुक्त रूप से रक्षा तकनीकों का विकास करेंगे. सरकार का मानना है कि इससे क्षेत्रीय शांति, समुद्री सुरक्षा और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूती मिलेगी. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए इस समझौते को बेहद अहम माना जा रहा है।  आर्थिक सुरक्षा और सप्लाई चेन पर बनी नई रणनीति दोनों नेताओं ने वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए आर्थिक सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा पर साझा रोडमैप तैयार करने का भी ऐलान किया. इस योजना के तहत सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स और उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाया जाएगा. साथ ही दोनों देशों ने मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन तैयार करने पर भी सहमति जताई, ताकि वैश्विक संकटों के दौरान उद्योगों पर असर कम पड़े।  ग्रीन एनर्जी में नई शुरुआत, बायोगैस मिशन लॉन्च प्रधानमंत्री मोदी ने ‘गोवर्धन पहल’ के तहत भारत-जापान बायोगैस इनिशिएटिव की शुरुआत का भी ऐलान किया. इस पहल के जरिए देशभर में आधुनिक बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जाएंगे. इससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे. जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की ग्रामीण क्षमता को जोड़ने की दिशा में इसे बड़ा कदम माना जा रहा है।  भारत-जापान में किन मुद्दों पर सहमति बनी? बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने रक्षा सहयोग, फार्मास्युटिकल क्षेत्र, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सप्लाई चेन, निवेश और उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की. दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।  प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और जापान के बीच सिर्फ आर्थिक साझेदारी ही नहीं, बल्कि विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों और साझा हितों का भी मजबूत रिश्ता है. उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में यह साझेदारी दोनों देशों के विकास के साथ-साथ पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता और समृद्धि में भी अहम भूमिका निभाएगी।  इंडो-पैसिफिक पर साझा रणनीति दोनों देशों ने स्पष्ट किया कि वे मुक्त, खुले और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के पक्षधर हैं. समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान को लेकर दोनों नेताओं ने साझा प्रतिबद्धता दोहराई. रक्षा अभ्यास, समुद्री सहयोग और आधुनिक तकनीकों में साझेदारी बढ़ाने पर भी सहमति बनी।  प्रधानमंत्री मोदी ने सनाए ताकाइची को ‘छोटी बहन’ क्यों कहा? प्रधानमंत्री मोदी ने यह संबोधन दोनों देशों के बीच विश्वास, आत्मीयता और मजबूत रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक बताते हुए दिया. यह भारत-जापान संबंधों की गहराई और व्यक्तिगत नेतृत्व स्तर पर बेहतर तालमेल को भी दर्शाता है।  भारत-जापान शिखर सम्मेलन में सबसे बड़ा समझौता कौन-सा रहा? सबसे अहम समझौता दोनों देशों के पहले रक्षा सह-विकास प्रोजेक्ट पर हुआ. इसके अलावा 10 ट्रिलियन येन निवेश लक्ष्य, आर्थिक सुरक्षा रोडमैप और भारत-जापान बायोगैस इनिशिएटिव भी बड़े फैसलों में शामिल रहे।  भारत को इन समझौतों से क्या फायदा होगा? जापानी निवेश बढ़ने से भारत में रोजगार, विनिर्माण, हाई-टेक उद्योग, बुनियादी ढांचे और हरित ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी. वहीं रक्षा और तकनीकी सहयोग भारत की रणनीतिक क्षमता को भी बढ़ाएगा।  इंडो-पैसिफिक' क्षेत्र पर पीएम मोदी ने क्या कहा? प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'प्रधानमंत्री तकाइची की इस यात्रा के साथ, हम अपनी 'विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' का एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं। आज, भारत और जापान दोनों ही दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। एक स्वतंत्र, समृद्ध और नियमों पर आधारित 'इंडो-पैसिफिक' क्षेत्र हमारी साझा प्राथमिकता है। इस क्षेत्र की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक और बाजार-आधारित अर्थव्यवस्थाओं के तौर पर, हमने आज कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। 

ISRO Headquarters Bomb Threat: बेंगलुरु मुख्यालय खाली, धमकी के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

बेंगलुरु कर्नाटक की राजधानीबेंगलुरु में स्थित इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) के हेडक्वार्टर को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। सूचना मिलने के बाद अलर्ट जारी किया गया। मौके पर पुलिस और बम स्क्वाड हेडक्वार्टर में जांच-पड़ताल की। पुलिस के मुताबिक, ISRO के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन के ऑफिस को धमकी भरा ईमेल आया था। इसके बाद इसरो के कैंपस को खाली कराया गया। कई टीमें संदिग्ध वस्तुओं की जांच की। अधिकारियों के अनुसार इसरो को धमकी भरा मेल गाजियाबाद से भेजा गया था। वहां पर उस व्यक्ति का पता लगाकर उसे पकड़ लिया गया है। कैंपस खाली करवाकर सर्च ऑपरेशन पुलिस के मुताबिक एहतियात के तौर पर सभी कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया गया और इमारत की बारीकी से तलाशी ली जा रही है। एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान कोई संदिग्ध चीज नहीं मिली और बाद में धमकी को झूठा करार दिया गया है। पुलिस ने ईमेल भेजने वाले से पूछताछ कर रही है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का मुख्यालय बेंगलुरु, कर्नाटक में न्यू बीईएल रोड पर स्थित 'अंतरिक्ष भवन' में स्थित है। 29 जून को बम धमकी के फर्जी ईमेल भेजने वाला पकड़ा गया इससे पहले दिल्ली पुलिस ने कई संगठनों और एक एयर इंडिया की उड़ान को बम की धमकी वाले फर्जी ईमेल भेजने के आरोप में एक व्यक्ति को पकड़ा है। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि यह व्यक्ति गाजियाबाद का निवासी है। 36 वर्षीय आरोपी 2008 से मानसिक बीमारी का इलाज करा रहा है। 29 जून को भेजे गए इन ईमेल में राष्ट्रीय जांच एजेंसी, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय  सहित कई उच्च सुरक्षा प्रतिष्ठानों में बम होने का दावा किया गया था। नई दिल्ली से न्यूयॉर्क जाने वाली एयर इंडिया की उड़ान के लिए भी एक धमकी भरा ईमेल भेजा गया। इससे तत्काल सुरक्षा जांच शुरू हुई और कई एजेंसियों को सतर्क किया गया। पुलिस ने बताया कि सभी संबंधित संगठनों और सुरक्षा एजेंसियों को सूचित किया गया था। मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया और धमकियां फर्जी पाई गईं। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की, जिसमें ईमेल के डिजिटल ट्रेल को ट्रैक किया गया। तकनीकी जांच के दौरान, पुलिस ने दो मेल खातों का विश्लेषण किया। इन खातों का उपयोग ईमेल भेजने के लिए किया गया था। ईमेल ट्रेल की विस्तृत जांच से जांचकर्ताओं को खातों से जुड़े एक मोबाइल नंबर तक पहुंचने में मदद मिली। तकनीकी निगरानी का उपयोग करते हुए, पुलिस दल ने 30 जून को संदिग्ध को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के संयोग नगर में खोज निकाला। पुलिस मौके पर पहुंची और उसके निवास पर संदिग्ध निशांत त्यागी की जांच की। पुलिस के अनुसार, त्यागी ने ओपन स्कूलिंग के माध्यम से अपनी शिक्षा पूरी की थी। उसने 2010 में स्नातक डिग्री कार्यक्रम में दाखिला लिया था लेकिन उसे पूरा नहीं किया। मानसिक स्वास्थ्य और आगे की जांच प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वह कथित तौर पर 2008 से मानसिक बीमारी से पीड़ित है। वह वर्षों से विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में इलाज करा रहा है। उसके परिवार के सदस्यों ने भी पुलिस को उसके लंबे चिकित्सा इतिहास के बारे में बताया। पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान कोई विस्फोटक या संदिग्ध सामग्री बरामद नहीं हुई। ईमेल भेजने के पीछे के मकसद और परिस्थितियों का पता लगाने के लिए जांच जारी है, जिसके परिणाम के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसरो का गतिविधियों का होता है प्रबंधन इसरो का मुख्यालय होने के कारण इस इलाके की सुरक्षा व्यवस्था काफी चाक चौबंद रहती है। बेंगलुर से इसरो की सभी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष गतिविधियों का प्रबंधन किया जाता है। इसकी स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई थी। मूल इकाई (INCOSPAR) के रूप में यह 1962 में अस्तित्व में आया था और 1972 में इसे अंतरिक्ष विभाग (DOS) के अंतर्गत लाया गया। अंतरिक्ष भवन जो कि इसरो का प्रशासनिक केंद्र है। यह लगभग 4.3 एकड़ (17,400 वर्ग मीटर) के परिसर में फैला हुआ है। इसरो के मुख्यालय को उड़ाने की धमकी देने वाले शख्स की गिरफ्तारी के बाद बेंगलुरु पुलिस उत्तर प्रदेश पुलिस के संपर्क में है। अरेस्ट किए गए शख्स से पूछताछ करने के साथ उसका बैकग्राउंड खंगाला जा रहा है। 

रूस में ईंधन संकट के बीच भारत बना सहारा, पेट्रोल-डीजल सप्लाई शुरू होने की खबर

नई दिल्ली भारत ने रूस के साथ अपनी पुरानी दोस्ती का फर्ज एक बार फिर से निभाया है. जब पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद रूस का कच्चा तेल खरीदने से ज्यादातर देश पीछे हट गए थे, तब भारत ने बड़ी मात्रा में रूसी तेल खरीदकर उसका साथ दिया था. अब एक बार फिर भारत मुश्किल वक्त में रूस के काम आया है. फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार भारत रूस से कच्चा तेल नहीं खरीद रहा, बल्कि उसकी ईंधन की कमी दूर करने के लिए उसे गैसोलीन यानी पेट्रोल की सप्लाई कर रहा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन के हमलों से पैदा हुए फ्यूल संकट के बीच रूस ने भारत से समुद्री रास्ते के जरिए गैसोलीन का आयात शुरू कर दिया है।  रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों की वजह से रूस की कई ऑयल रिफाइनरियां प्रभावित हुई हैं. इसके चलते देश में पेट्रोल की भारी कमी हो गई है. कई इलाकों में राशनिंग करनी पड़ रही है, पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें लग रही हैं और गैसोलीन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं. ऐसे हालात में रूस ने भारत से समुद्री रास्ते के जरिए गैसोलीन मंगाना शुरू कर दिया है।  भारत से रवाना हुए पहले टैंकर रिपोर्ट के अनुसार, भारत से अब तक कम से कम 60 हजार मीट्रिक टन गैसोलीन रूस के लिए भेजा जा चुका है. दो टैंकरों में करीब 30 हजार से 40 हजार टन तक का फ्यूल लोड किया गया है. हालांकि अभी यह साफ नहीं हुआ है कि भारत की कौन सी रिफाइनरी इस सप्लाई को पूरा कर रही है।  हर महीने 4 लाख टन फ्यूल आयात करेगा रूस रूस की योजना सिर्फ भारत पर निर्भर रहने की नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक वह भारत के अलावा बेलारूस समेत दूसरे देशों से भी हर महीने करीब 4 लाख टन गैसोलीन आयात करना चाहता है. बेलारूस पहले ही अपनी सप्लाई बढ़ा चुका है और जून के पहले पखवाड़े में उसने रूस को रेल मार्ग से भेजे जाने वाले गैसोलीन की मात्रा लगभग तीन गुना कर दी है।  यूक्रेन के हमलों से बढ़ा संकट रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) भी मान चुके हैं कि यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने देश की रिफाइनिंग क्षमता को प्रभावित किया है. गर्मियों में रूस में रोजाना करीब 1.10 लाख टन गैसोलीन की खपत होती है. ऐसे में घरेलू उत्पादन कम होने से सरकार को आयात का सहारा लेना पड़ रहा है. रूस की संसद ने हाल ही में टैक्स नियमों में बदलाव कर फ्यूल आयात को बढ़ावा देने और सब्सिडी देने का भी फैसला किया है।  रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बना भारत दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ भारत रूस को गैसोलीन भेज रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारत रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार भी बना हुआ है. शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक जून में भारत ने रूस से रोजाना करीब 27 लाख बैरल कच्चा तेल आयात किया, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर है. जून में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से ज्यादा रही. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बने तनाव के बीच भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद और बढ़ा दी है। 

उत्तराखंड में भारी बारिश से बिगड़े हालात, चारधाम यात्रा प्रभावित; बदरीनाथ हाईवे बंद

रुद्रप्रयाग उत्तराखंड में मॉनसून की धमाकेदार एंट्री हो चुकी है। राज्य के सभी हिस्सों में बारिश हो रही है। खासकर पहाड़ी जिलों में तेज बारिश का सिलसिला जारी है। चारधाम यात्रा के मुख्य पड़ाव रुद्रप्रयाग में लगातार बारिश हो रही है। जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। यहां अलकनंदा और भागीरथी नदी का संगम है। दोनों नदियां खतरे के निशान के करीब पहुंच गई हैं। उधर, बदरीनाथ नेशनल हाईवे गुलाबकोटी में मलबा आने और सड़क धसने के कारण बंद हो गया है। गुरुवार को रुद्रप्रयाग जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी (DDMO) नंदन सिंह राजवार ने बताया कि ऊपरी हिमालयी इलाकों में बारिश के बाद पानी का बहाव बढ़ रहा है और इलाके में जलस्तर पर कड़ी नजर रखी जा रही है। राजवार ने कहा कि अभी जलस्तर समुद्र तल से 622 मीटर ऊपर है, जबकि चेतावनी का स्तर 626 मीटर और खतरे का स्तर 627 मीटर है। वाट्सएप पर भेजे जाएंगे अलर्ट उन्होंने कहा कि जैसे ही जलस्तर चेतावनी के निशान तक पहुंचेगा, WhatsApp ग्रुप के ज़रिए अलर्ट जारी किए जाएंगे, गाड़ियों से सार्वजनिक घोषणाएँ की जाएँगी और निवासियों को आगाह करने के लिए ज़मीनी टीमें तैनात की जाएँगी। रुद्रप्रयाग में बुधवार से लगातार बारिश हो रही है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रहती है, तो दोनों नदियों का जलस्तर और बढ़ सकता है और खतरे के निशान के करीब पहुंच सकता है। बदलती स्थिति को देखते हुए, जिला आपदा नियंत्रण कक्ष नदियों के जलस्तर पर कड़ी नज़र रख रहा है। प्रशासन ने नदी के किनारे रहने वाले निवासियों और तीर्थयात्रियों से सतर्क रहने और ज़रूरत न होने पर नदी के किनारे या अन्य जोखिम वाले इलाकों में न जाने की अपील की है। मौसम विभाग ने 4 जुलाई तक जारी किया है अलर्ट देहरादून में भारत मौसम विज्ञान विभाग ने रुद्रप्रयाग जिले में 4 जुलाई तक के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है और ज़िला प्रशासन ने निवासियों से सतर्क रहने का आग्रह किया है। रुद्रप्रयाग के अलावा आज देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल और बागेश्वर जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का 'ऑरेंज अलर्ट' है। वहीं, हरिद्वार, उत्तरकाशी और चमोली के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है। बदरीनाथ नेशनल हाईवे बंद भारी बारिश के कारण बदरीनाथ नेशनल हाईवे गुलाबकोटी में मलबा आने से बंद हो गया है। यहां पर संबंधित विभागों ने सड़क खोलने का काम सुचारु कर दिया है, लेकिन अभी भी रुक रुक कर बारिश जारी है। बता दें कि बुधवार देररात्रि लगभग 2 के बाद पगनो गांव की ओर से भारी बरसाती नाला आने के कारण मलबा व बोल्डर आने से बदरीनाथ नेशनल हाईवे में 50 मीटर से अधिक सड़क में मालबा फैला हुआ है। सड़क पर काफी बोलडर भी आ रखे हैं। जिस कारण से अभी तक सड़क सुचारू नहीं हो पाई है। सड़क खोलने का काम जारी है।

‘पाकिस्तान से आए लोग शरणार्थी नहीं थे’, मोहन भागवत ने बंटवारे पर दिया बड़ा बयान

नागपुर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि 1947 के बंटवारे के बाद भारत आए लोग शरणार्थी नहीं थे, बल्कि संघर्ष करने वाले योद्धा थे, जिन्होंने अपनी मातृभूमि और धर्म के प्रति प्रेम के कारण भारी कठिनाइयों और दर्द का सामना किया। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने नए बने पाकिस्तान में कई पीढ़ियों से बनाई और बढ़ाई गई अपनी संपत्ति, जमीन और कारोबार को पीछे छोड़ दिया और भारत आना चुना।  भागवत  नागपुर में सिंधी समुदाय द्वारा चलाए जा रहे संगठन 'सिंधु एजुकेशन सोसाइटी' के 75वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में लोगों को संबोधित किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख ने कहा कि बंटवारे के बाद, लोगों ने सोच-समझकर दूसरी तरफ से भारत आने का फैसला किया, क्योंकि वे उस जमीन पर रहना चाहते थे जो भारत है, जहां वे बिना किसी डर के अपने धर्म का पालन कर सकें।  आरएसएस प्रमुख ने कहा कि विभाजन के बाद लोगों ने सोच-समझकर सीमा पार से भारत आने का फैसला किया, क्योंकि वे भारत भूमि में रहना चाहते थे, जहां वे बिना भय के अपने धर्म का पालन कर सकें। उन्होंने कहा कि यद्यपि वे विस्थापित हुए थे, लेकिन वे शरणार्थी नहीं थे, उस समय उनके लिए ‘शरणार्थी’ शब्द का इस्तेमाल करना गलत था। वे मातृभूमि और अपने धर्म के प्रति प्रेम के कारण संघर्ष करने वाले योद्धा थे। वे उस लड़ाई में केवल अपनी गलतियों के कारण नहीं हारे थे। 'उन्होंने करियर चुना, न ही संपत्ति' मोहन भागवत ने कहा कि हम सभी भारत को एकजुट बनाए रखने की वह लड़ाई हार गए थे, लेकिन उन्होंने क्या चुना? उन्होंने न तो करियर चुना और न ही संपत्ति। उन्होंने देश और अपने धर्म को चुना। आरएसएस प्रमुख ने सिंधु एजुकेशन सोसाइटी की 75 वर्ष की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे पड़ाव किसी भी संस्था को अपने कार्यों की समीक्षा करने और अपने उद्देश्यों को याद करने का अवसर प्रदान करते हैं। जीवन की कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों के सामने हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि दोबारा उठ खड़े होने का प्रयास करना चाहिए। मोहन भागवत ने कहा कि परिस्थितियों या भाग्य के सामने स्वयं को असहाय नहीं समझना चाहिए। कठिन समय से निकलने का प्रयास करने वाला व्यक्ति ही अंततः सफल होता है, जबकि कठिनाइयों से भागने वाला पहले ही अपनी हार स्वीकार कर चुका होता है। उन्होंने कहा कि रोजगार के लिए शिक्षा प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, लेकिन यही शिक्षा का अंतिम उद्देश्य नहीं होना चाहिए। भागवत ने कहा कि सही और गलत में अंतर करने की क्षमता विकसित करने के लिए मूल्य आधारित शिक्षा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसी शिक्षा केवल पुस्तकों से नहीं, बल्कि शिक्षकों के आचरण और विद्यार्थियों में उनके द्वारा विकसित किए जाने वाले मूल्यों से भी मिलती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य अच्छे इंसानों का निर्माण करना और ऐसी पीढ़ी तैयार करना है, जो समाज के कल्याण के प्रति सजग हो। उन्होंने बताया कि वे शरणार्थी नहीं थे, हालांकि वे विस्थापित हुए थे, लेकिन उस समय उनके लिए यह शब्द गलत इस्तेमाल किया गया था. वे संघर्षरत योद्धा थे जिन्होंने अपनी मातृभूमि और अपने धर्म के प्रति प्रेम के कारण संघर्ष किय।  भागवत ने कहा कि हम सभी, भारत को एकजुट रखने की वह लड़ाई हार गए. लेकिन उन्होंने क्या चुना? उन्होंने करियर नहीं चुना, उन्होंने धन नहीं चुना. उन्होंने देश को चुना, उन्होंने अपने धर्म को चुना।  RSS प्रमुख ने सिंधु एजुकेशन सोसाइटी की 75 साल की यात्रा का जिक्र किया और कहा कि ऐसे पड़ाव किसी संस्था द्वारा किए गए कामों की समीक्षा करने और उसके लक्ष्यों को याद करने का मौका देते हैं।  वहीं, जीवन की कठिनाइयों के बारे में बात करते हुए, उन्होंने जोर दिया कि विपरीत परिस्थितियों में हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि फिर से उठने की कोशिश करनी चाहिए। 

‘बम बम भोले’ से गूंजा जम्मू, अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था रवाना, श्रद्धालुओं में दिखा जबरदस्त उत्साह

 जम्मू  जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बृहस्पतिवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यहां भगवती नगर आधार शिविर से अमरनाथ यात्रा के पहले जत्थे को कश्मीर स्थित पहलगाम और बालटाल आधार शिविरों के लिए रवाना किया।करीब 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा मंदिर के लिए 57 दिनों की वार्षिक तीर्थयात्रा तीन जुलाई से शुरू होगी। यात्रा अनंतनाग जिले के पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे नुनवान-पहलगाम मार्ग और गांदरबल जिले के 14 किलोमीटर लंबे, लेकिन अधिक खड़ी चढ़ाई वाले बालटाल मार्ग से एक साथ आरंभ होगी। इसका समापन 28 अगस्त को होगा। अधिकारियों ने बताया कि उपराज्यपाल सिन्हा ने तीर्थयात्रियों के काफिले को रवाना करने से पहले भगवती नगर आधार शिविर में विशेष पूजा-अर्चना की।इस अवसर पर उनके साथ पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात, विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा, भाजपा सांसद जुगल किशोर शर्मा, भाजपा के स्थानीय विधायक, वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी तथा विभिन्न धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। ‘बम-बम भोले’, ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय बर्फानी बाबा की’ के जयघोष के बीच पांच हजार से अधिक तीर्थयात्री कड़े सुरक्षा प्रबंध में सुरक्षित वाहनों के काफिले में दोनों आधार शिविरों के लिए रवाना हुए।समारोह के बाद उपराज्यपाल सिन्हा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘हर-हर महादेव! बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए यात्रा शुरू हो गई है। जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से श्री अमरनाथ जी यात्रा-2026 के लिए तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को रवाना किया। अमरनाथ यात्रा गहन आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक है।’’ पहला जत्था बालटाल और पहलगाम बेस कैंप के लिए भेजा गया है. इन दोनों मार्गों से श्रद्धालु 3 जुलाई से पवित्र अमरनाथ गुफा की ओर अपनी यात्रा शुरू करेंगे. इस वर्ष यात्रा 3 जुलाई से 28 अगस्त तक चलेगी. 57 दिनों तक चलने वाली यह धार्मिक यात्रा रक्षाबंधन के दिन संपन्न होगी।  जयपुर से पहुंचे श्रद्धालुओं में दिखा खास उत्साह यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के चेहरों पर बाबा बर्फानी के दर्शन की खुशी साफ दिखाई दी. जी मीडिया से बातचीत करते हुए राजस्थान के जयपुर से आए Genz Group के सदस्यों ने ज़ी मीडिया से बातचीत में कहा कि लोग अक्सर छुट्टियां बिताने या घूमने के लिए अलग-अलग जगहों का रुख करते हैं, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ा सौभाग्य बाबा अमरनाथ के दर्शन करना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना है।  कड़ी सुरक्षा के बीच रवाना हुआ यात्रा काफिला यात्रा को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं. श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को सीआरपीएफ की सुरक्षा में रवाना किया गया. सुरक्षा बलों के वाहन पूरे काफिले के आगे और पीछे मौजूद रहे ताकि यात्रा पूरी तरह सुरक्षित रहे. यात्रा में शामिल प्रत्येक सरकारी और निजी वाहन की पहले विस्तृत जांच की गई. जांच पूरी होने के बाद ही वाहनों को काफिले में शामिल किया गया और उन पर सत्यापन का विशेष टैग लगाया गया।  ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम से रखी जा रही निगरानी इस बार यात्रा मार्ग पर बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है. सेना, सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पूरे रूट पर तैनात हैं. संवेदनशील इलाकों में ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे, एंटी-ड्रोन सिस्टम और अन्य आधुनिक निगरानी उपकरणों की मदद से चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है.प्रशासन ने यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की हैं. जम्मू से लेकर पवित्र गुफा तक विभिन्न स्थानों पर ठहरने की व्यवस्था, लंगर, चिकित्सा सेवाएं, एम्बुलेंस, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और हेल्प डेस्क उपलब्ध कराए गए हैं।  हर साल उमड़ती है आस्था की विशाल भीड़ प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे केवल वैध पंजीकरण और RFID कार्ड के साथ ही यात्रा करें तथा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करें, ताकि यात्रा सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके. हिमालय की ऊंची पहाड़ियों में स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग के दर्शन के लिए हर वर्ष देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. प्रशासन को इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है, जिसके मद्देनजर सुरक्षा और सुविधाओं के विशेष इंतजाम पहले से किए गए हैं।  उन्होंने कहा कि इस मार्ग पर बढ़ाया गया प्रत्येक कदम भगवान शिव के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और भक्ति का प्रतीक है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षित और आध्यात्मिक रूप से संतोषजनक यात्रा की कामना की।तीर्थयात्रियों ने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा किए गए प्रबंधों पर संतोष व्यक्त किया। पहली बार यात्रा पर आए सूरत के सुरेश कुमार ने प्रशासन और सेना की ओर से उपलब्ध कराई गई सुविधाओं तथा सहयोग की सराहना की। जूनागढ़ अखाड़े के बाबा गोगा नाथ ने इस यात्रा को भगवान का आशीर्वाद बताते हुए साधु-संतों और श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं की प्रशंसा की।काशी से 20 साधुओं के साथ आए संत सुखम दास ने कहा कि बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। दास पिछले 32 वर्षों से अमरनाथ यात्रा पर जाते आ रहे हैं।उत्तराखंड के श्रद्धालु वैभव ने पहले जत्थे का हिस्सा बनने पर खुशी जताते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर पूरा भरोसा व्यक्त किया। जयपुर की रजनी देवी ने भी श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड और प्रशासन द्वारा किए गए प्रबंधों की सराहना की। अधिकारियों ने बताया कि श्रद्धालुओं के काफिले को भारी सुरक्षा के बीच रवाना किया गया। उनकी सुरक्षित आवाजाही के लिए जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा नियंत्रण के विशेष उपाय लागू किए गए हैं।यातायात प्रबंध से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि राजमार्ग के विभिन्न हिस्सों में दो जुलाई से 28 अगस्त तक यातायात प्रतिबंध प्रभावी रहेंगे। इसके लिए प्रतिदिन यातायात परामर्श और वाहनों के आवागमन का समय निर्धारित किया गया है। इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा के लिए 3.90 लाख से अधिक श्रद्धालु पंजीकरण करा चुके हैं, जबकि जम्मू में तत्काल पंजीकरण की सुविधा भी शुरू कर दी गई है।पूरे जम्मू क्षेत्र को बहुस्तरीय सुरक्षा बलों की तैनाती और तकनीक आधारित निगरानी के साथ व्यापक सुरक्षा के दायरे में रखा गया है। भाजपा सांसद जुगल किशोर शर्मा ने अमरनाथ यात्रा को देश की सबसे महत्वपूर्ण तीर्थयात्राओं में से एक बताते हुए विश्वास जताया कि यह यात्रा शांतिपूर्ण और सुचारू ढंग से संपन्न होगी।विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने भी तीर्थयात्रियों का स्वागत किया … Read more

WhatsApp Username Feature बना चिंता का कारण, बढ़ते साइबर फ्रॉड के डर से सरकार करेगी समीक्षा

 नई दिल्ली WhatsApp ने हाल ही में अपना नया यूजरनेम फीचर लॉन्च किया है. इस फीचर की मदद से अब लोग अपना मोबाइल नंबर बताए बिना भी किसी दूसरे यूजर से बात कर सकेंगे।  कंपनी का कहना है कि इससे यूजर्स की प्राइवेसी पहले से ज्यादा मजबूत होगी. लेकिन भारत सरकार इस फीचर को लेकर सतर्क हो गई है. सरकार को आशंका है कि अगर इसका गलत इस्तेमाल हुआ तो ऑनलाइन फ्रॉड और फर्जी पहचान वाले मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है।  WhatsApp का यूजरनेम फीचर स्कैमर्स के लिए फायदेमंद तो नहीं? सरकारी सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार वॉट्सऐप नए यूजरनेम फीचर के गोपनीयता और सुरक्षा पहलुओं की जांच करने की तैयारी में है. सरकार यह समझना चाहती है कि कहीं यह फीचर साइबर अपराधियों के लिए नई सुविधा तो नहीं बन जाएगा।  अगर जांच में कोई गंभीर खामी या सुरक्षा से जुड़ी समस्या सामने आती है, तो वॉट्सऐप की पेरेंट कंपनी मेटा को नोटिस भी भेजा जा सकता है। वॉट्सऐप का यह फीचर टेलीग्राम की तरह काम करता है. पहले किसी नए शख्स से वॉट्सऐप पर बात करने के लिए मोबाइल नंबर जरूरी होता था. अब यूजर सिर्फ अपने यूजरनेम के जरिए भी बातचीत शुरू कर सकता है।  इसका फायदा यह होगा कि आपका मोबाइल नंबर सामने वाले व्यक्ति को नहीं दिखेगा. कंपनी का कहना है कि इससे प्राइवेसी बेहतर होगी और अनजान लोगों के साथ नंबर शेयर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।  किसी के नाम से यूजरनेम बना कर लोगों के साथ हो सकती है ठगी हालांकि सरकार की चिंता दूसरी भी है. अधिकारियों का मानना है कि अगर कोई शख्स किसी दूसरे के नाम जैसा यूजरनेम बना ले या अपनी असली पहचान छिपाकर लोगों से संपर्क करे, तो ऑनलाइन ठगी के नए तरीके सामने आ सकते हैं।  टेलीग्राम पर पहले भी फर्जी यूजरनेम और नकली प्रोफाइल के जरिए लोगों को धोखा देने के कई मामले सामने आ चुके हैं. इसी वजह से सरकार वॉट्सऐप के नए फीचर को लेकर एक्स्ट्रा सावधानी बरत रही है।  सोशल मीडिया पर भी कुछ लोगों ने भी इस फीचर को लेकर चिंता जताई है. उनका कहना है कि प्राइवेसी बढ़ाना अच्छी बात है, लेकिन अगर पहचान छिपाना आसान हो गया तो स्कैमर्स इसका फायदा उठा सकते हैं. खासकर ऐसे यूजरनेम जो किसी कंपनी, सेलिब्रिटी या दूसरे व्यक्ति से मिलते-जुलते हों, वे लोगों को आसानी से भ्रमित कर सकते हैं।  वॉट्सऐप अपनी ओर से कुछ सुरक्षा उपाय भी दिए हैं. कंपनी का कहना है कि हर यूजरनेम यूनिक होगा और कुछ हाई-प्रोफाइल नाम पहले से सुरक्षित रखे जाएंगे ताकि उनकी नकल न की जा सके।  इसके अलावा वॉट्सऐप किसी तरह की पब्लिक यूजरनेम डायरेक्टरी भी नहीं बना रहा है. यानी किसी व्यक्ति का यूजरनेम तभी इस्तेमाल किया जा सकेगा, जब वह आपको पहले से पता हो। 

18% आबादी, लेकिन सिर्फ 4% जल संसाधन! क्या बड़े जल संकट की ओर बढ़ रहा है भारत?

 नई दिल्ली भारत इस समय दुनिया के सबसे बड़े जल संकट की ओर बढ़ रहा है. आबादी और पानी के संसाधनों के बीच का असंतुलन देश के भविष्य, इंफ्रास्ट्रक्चर और अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन चुका है. दुनिया की लगभग 18% आबादी भारत में रहती है, लेकिन हमारे पास दुनिया के कुल पीने वाले पानी का सिर्फ 4% हिस्सा ही मौजूद है।  तेजी से हो रहे शहरीकरण, औद्योगीकरण और जलवायु परिवर्तन के दबाव के कारण मौजूदा संसाधनों पर बोझ बढ़ रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि पानी की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर बढ़ रहा है, जिसके लिए आने वाले दशक में भारी निवेश की ज़रूरत होगी।  PL Capital की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत में पानी की मांग उपलब्ध आपूर्ति से दोगुनी हो सकती है. इससे अगले 10 सालों में वॉटर ट्रीटमेंट, वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग, सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और स्टोरेज सिस्टम में लगभग ₹20 लाख करोड़ के निवेश का मौका बन सकता है।  आर्थिक उतार-चढ़ाव के साथ बदलने वाले कई इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के उलट, पानी की सुरक्षा में निवेश मुख्य रूप से स्ट्रक्चरल कारणों से बढ़ रहा है. बढ़ती आबादी, शहरों का विस्तार, औद्योगिक विकास, भूजल में कमी और पर्यावरण से जुड़े कड़े नियम ये सभी भारत के सीमित मीठे पानी के संसाधनों पर दबाव बढ़ा रहे हैं।  PL Capital में एडवाइजरी के चीफ बिजनेस ऑफिसर विक्रम कसात ने कहा, "भारत में पानी एक अहम रणनीतिक संसाधन बनता जा रहा है. इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े दूसरे ट्रेंड्स, जो आर्थिक चक्रों से जुड़े हो सकते हैं, उनके उलट पानी की सुरक्षा में निवेश स्ट्रक्चरल और पॉलिसी पर आधारित होता है और टिकाऊ विकास के लिए ज़रूरी है।  सीवेज को ट्रीट करने की क्षमता कम  भारत में अभी हर दिन 72,000 मिलियन लीटर से ज़्यादा सीवेज पैदा होता है, लेकिन इसे ट्रीट करने की क्षमता काफी नहीं है. इस वजह से बड़ी मात्रा में बिना ट्रीट किया हुआ वेस्टवॉटर नदियों और दूसरे जल स्रोतों में बहा दिया जाता है. आने वाले सालों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग सुविधाओं का विस्तार इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले खर्च का एक बड़ा हिस्सा बनने की उम्मीद है।  रिपोर्ट में पानी की ज्यादा खपत वाले कई उद्योगों के उभरने की ओर भी इशारा किया गया है, जिनसे अच्छी क्वालिटी वाले इंडस्ट्रियल पानी की मांग बढ़ने की उम्मीद है. डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन, ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट और स्पेशलिटी केमिकल्स इन सभी में बहुत ज़्यादा शुद्ध पानी की ज़रूरत होती है. इससे पानी को शुद्ध करने और रीसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनियों के लिए नए मौके बन रहे हैं।  PL Capital की एक नई थीम-बेस्ड रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत में पानी की मांग उपलब्ध सप्लाई से दोगुनी हो सकती है. इससे अगले 10 सालों में वॉटर ट्रीटमेंट, वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग, सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और स्टोरेज सिस्टम में ₹20 लाख करोड़ के निवेश का मौका बन सकता है।  इकोनॉमिक साइकल के साथ बदलने वाले कई इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के उलट, वॉटर सिक्योरिटी में निवेश अब स्ट्रक्चरल वजहों से बढ़ रहा है. आबादी का बढ़ना, शहरों का विस्तार, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट, ग्राउंडवॉटर का कम होना और पर्यावरण से जुड़े कड़े नियम ये सभी भारत के सीमित मीठे पानी के संसाधनों पर दबाव बढ़ा रहे हैं। 

Electric Vehicle News: EV चार्जिंग के लिए सुरक्षित नहीं 45% भारतीय घर, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

 नई दिल्ली देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिए जाने के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. भारत के लगभग 45% घरों को सुरक्षित रूप से EV चार्ज करने के लिए अपने इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की सख्त जरूरत है।  यह जानकारी 'द नेट-ज़ीरो ट्रांज़िशन स्टार्ट्स एट होम: इनेबलिंग EV-रेडी रेजिडेंसेस इन इंडिया' नाम की एक नई रिपोर्ट से मिली है. यह रिपोर्ट भारत के टियर-1, टियर-2 और टियर-3 शहरों में रहने वाले लोगों के अनुभवों पर आधारित है, इसके लिए स्वतंत्र घरों, अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स, झुग्गी-बस्तियों और किराए के मकानों में लगे 80,000 से अधिक घरेलू EV चार्जर्स के डेटा का अध्ययन किया गया है।  ये रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब सरकारें EV को अपनाने के लिए कड़े कदम उठा रही हैं, जैसे दिल्ली सरकार ने जनवरी 2027 से नए पेट्रोल-सीएनजी तिपहिया वाहनों और अप्रैल 2028 से पेट्रोल दोपहिया वाहनों के पंजीकरण पर रोक लगाने का फैसला किया है।  रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में केवल 55 प्रतिशत संभावित EV खरीदारों के पास ही घरेलू चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है, जबकि आवासीय चार्जिंग ही इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने का सबसे प्राथमिक माध्यम है. रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि देश में EV से जुड़ी बिजली की खपत साल 2024 में कुल राष्ट्रीय मांग के महज 0.2 प्रतिशत से बढ़कर साल 2035 तक लगभग 6 प्रतिशत हो जाएगी।    पिछले एक दशक में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है, लेकिन घरों में चार्जिंग की सुविधा अभी भी बेहद असमान है. रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षित और भरोसेमंद चार्जिंग के लिए हर घर को एक न्यूनतम मानक पूरा करना जरूरी है, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी के कारण लोग सामान्य पावर सॉकेट, अस्थायी एक्सटेंशन केबल और साझा बिजली कनेक्शन जैसे असुरक्षित तरीकों पर निर्भर हैं।  असुरक्षित चार्जिंग से जुड़े बड़े खतरे शोधकर्ताओं ने कड़ी चेतावनी दी है कि घरेलू स्तर पर किए जाने वाले इस तरह के अनौपचारिक या जुगाड़ू चार्जिंग इंतजामों से आग लगने का भारी खतरा रहता है, साथ ही इलेक्ट्रिकल फॉल्ट और महंगे उपकरणों को नुकसान पहुंच सकता है. जब इन सामान्य सर्किट्स पर अत्यधिक लोड पड़ता है, तो इससे वोल्टेज में भारी उतार-चढ़ाव, तारों का जरूरत से ज्यादा गर्म होना , ट्रांसफार्मर का खराब होना और स्थानीय इलाकों में बिजली गुल होने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. इसके अलावा, असुरक्षित तरीके से की जाने वाली चार्जिंग से न सिर्फ वाहन के चार्ज होने की निरंतरता प्रभावित होती है, बल्कि गाड़ी की बैटरी भी समय से पहले तेजी से खराब हो सकती है। 

AI पर बढ़ा भारतीयों का विश्वास, 85% उपभोक्ताओं ने जताया भरोसा; रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

नई दिल्ली   भारत में 85 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर मजबूत भरोसा जताया है और भविष्य को आकार देने में इसकी भूमिका को लेकर उत्साह दिखाया है। वहीं, 94 प्रतिशत लोगों का मानना है कि तकनीक ने उनके जीवन को पहले से बेहतर बनाया है। यह जानकारी मंगलवार को जारी अश्योरेंट इंक. की एक रिपोर्ट में सामने आई। इस रिपोर्ट के अनुसार, टेक्नोलॉजी सेंटिमेंट इंडेक्स में भारत को 74 अंक मिले हैं, जो वैश्विक औसत से काफी अधिक है। यह दर्शाता है कि भारतीय उपभोक्ताओं में नई तकनीकों के प्रति विश्वास मजबूत है और वे अगली पीढ़ी के डिजिटल अनुभवों को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय उपभोक्ता अब ऐसे एआई-सक्षम उपकरणों को तेजी से अपनाने के लिए तैयार हैं, जो उनकी उत्पादकता बढ़ाने, बेहतर संचार और रोजमर्रा के कामों को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, स्मार्टफोन, कंप्यूटर और अन्य कनेक्टेड डिवाइस अब काम, मनोरंजन, संचार और वित्तीय लेनदेन जैसी दैनिक जरूरतों का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं की अपेक्षा है कि उन्हें हर समय बिना किसी रुकावट के सहज और भरोसेमंद डिजिटल अनुभव मिलें। अश्योरेंट इंटरनेशनल के अध्यक्ष फेडेरिको बुंगे ने कहा कि दुनिया भर में कनेक्टेड तकनीक लोगों के दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बनती जा रही है। अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तकनीकी अनुभव लोगों की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार खुद को ढालें, ताकि नवाचार के साथ सरलता, भरोसा और विश्वसनीयता भी बनी रहे। उन्होंने कहा कि भारत में यह बदलाव बेहद तेजी से हो रहा है, जहां के डिजिटल रूप से जागरूक उपभोक्ता एआई-आधारित नवाचारों को तेजी से अपना रहे हैं और ऐसे निर्बाध अनुभव चाहते हैं जो उनके दैनिक जीवन में बिना किसी परेशानी के शामिल हो जाएं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब कनेक्टिविटी या स्टोरेज जैसी तकनीकी समस्याएं सामने आती हैं, तो वे लोगों की दिनचर्या को प्रभावित करती हैं। ऐसे में डिवाइस का भरोसेमंद प्रदर्शन और समय पर तकनीकी सहायता उपभोक्ताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, डिवाइस प्रोटेक्शन प्लान अब उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाने और कंपनियों के ब्रांड मूल्य को मजबूत करने का अहम माध्यम बन रहे हैं। भारत में 97 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने कहा कि यदि उन्हें अपनी जरूरत के अनुसार अनुकूलित (कस्टमाइजेबल) प्रोटेक्शन प्लान मिलें, तो वे नया डिवाइस खरीदने और उसके साथ सुरक्षा योजना लेने के लिए अधिक इच्छुक होंगे। अश्योरेंट इंडिया की कंट्री डायरेक्टर हरिनी कन्नन ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे गतिशील और भविष्य की ओर तेजी से बढ़ने वाले कनेक्टेड उपभोक्ता बाजारों में से एक है। उन्होंने कहा कि भारतीय उपभोक्ता बड़े पैमाने पर नई तकनीकों को अपना रहे हैं और चाहते हैं कि तकनीक बिना किसी परेशानी के उनके जीवन का हिस्सा बने। ऐसे में कंपनियों के लिए बेहतर प्रोटेक्शन और सर्विस अनुभव प्रदान कर खुद को प्रतिस्पर्धियों से अलग साबित करने का बड़ा अवसर मौजूद है।