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अगले 48 घंटे बेहद अहम! IMD की चेतावनी, कई राज्यों में मूसलाधार बारिश और मौसम का बड़ा बदलाव

नई दिल्ली देश में मौसम का रुख एक बार फिर पूरी तरह बदल चुका है. केरल में दस्तक देने के बाद मानसून ने महाराष्ट्र में अपनी मजबूत एंट्री कर ली है. यह एंट्री भले ही तय समय के आसपास हुई हो, लेकिन इसके असर ने पूरे देश को अलर्ट मोड पर ला दिया है. एक तरफ जहां किसानों के चेहरे पर राहत की उम्मीद दिख रही है, वहीं दूसरी तरफ कई राज्यों में मौसम विभाग की चेतावनियों ने चिंता बढ़ा दी है।  IMD के ताजा अपडेट के मुताबिक आने वाले दिनों में मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा और कई राज्यों को अपनी चपेट में लेगा. अरब सागर से लेकर बंगाल की खाड़ी तक मौसम प्रणाली सक्रिय हो चुकी है, जिसका सीधा असर उत्तर, पूर्व और दक्षिण भारत में देखने को मिलेगा।  अल-नीनो की परिस्थितियों के बावजूद दक्षिण-पश्चिम मॉनसून मूसलाधार बारिश करवाता हुआ तेजी से आगे बढ़ रहा है। मॉनसून अब महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पूर्वोत्तर के सभी राज्यों को कवर कर चुका है। मौसम विभाग ने कहा है कि आने वाले सात दिन कई राज्यों पर भारी पड़ सकते हैं। केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, सिक्किम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, नागालैंड, मेघालय और पश्चिम बंगाल के उप-हिमालयी क्षेत्रों में भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं IMD ने उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली में भी पश्चिमी विक्षोभ के असर और बारिश का अलर्ट जारी किया है। 11 से 12 जून तक उत्तर भारत में बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है। इन राज्यों में होने वाली है मॉनसून की एंट्री मॉनसून अब तेजी से आगे बढ़ते हुए पूर्वोत्तर के राज्यों के बचे हुए हिस्से को कवर करने वाला है। वहीं दो से तीन दिन में ही यह ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल को भी पूरी तरह से कवर कर लेगा। रिपोर्ट के मुताबिक 5 जुलाई तक मॉनसून पूरे देश को कवर करेगा। महाराष्ट्र के कई हिस्सों में भी मॉनसून पहुंच चुका है और झमाझम बारिश हो रही है। पश्चिमी विक्षोभ कराएगा बारिश मौसम विभाग के अपडेट के मुताबिक पश्चिमी हिमालयी इलाके में सक्रिय होने वाला पश्चिमी विक्षोभ अगले तीन से चार दिन में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में भी बारिश करवाने वाला है। इन राज्यों में 9 से 14 जून तक हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसके अलावा 10 से 14 जून के बीच पूर्वी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी राजस्थान में भी बारिश हो सकती है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान में 11 और 12 जून को तेज हवाओँ के साथ बारिश हो सकती है। दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में 11 और 12 जून को धूलभरी आंधी चल सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक हवाओँ की गति 50 से 60 किमी प्रतिघंटे तक पहुंचने की संभावना है। यूपी-बिहार का मौसम मौसम विभाग के मुताबिक 10 से 14 जून के बीच उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर शुरू होगा। इसके अलावा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 9 से 14 जून के बीच मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। 10 जून के बाद बिहार के पटना, सिवान, भागलपुर, मुंगेर जिलों में मध्यम बारिश हो सकती है। झारखंड, बिहार और गंगा के आसपास के क्षेत्रों में 10 से 15 जून के बीच आंधी के साथ तेज बारिश की संभावना है। दिल्ली का मौसम आईएमडी के अनुसार, हालांकि बारिश से कुछ स्थानों पर थोड़ी राहत मिली। सुबह साढ़े आठ बजे तक 24 घंटे की कुल वर्षा के आंकड़ों के अनुसार, केवल पालम और आयानगर में हल्की बारिश हुई लेकिन सुबह साढ़े आठ बजे से शाम साढ़े पांच बजे के बीच किसी भी वेधशाला में बारिश दर्ज नहीं की गई। आईएमडी के अनुसार, 10 जून तक अधिकतम तापमान धीरे-धीरे बढ़कर 43 डिग्री तक पहुंच सकता है, और उसके बाद 11 जून से आंधी की वजह से तापमान में गिरावट आ सकती है। देशभर में मौसम का सिस्टम एक्टिव, तेज हवाओं और बारिश का खतरा     मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार वर्तमान में कई चक्रवाती परिसंचरण अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय हैं. यही वजह है कि मौसम का मिजाज बेहद अस्थिर हो गया है. कहीं तेज धूप के बाद अचानक बारिश हो रही है तो कहीं आंधी-तूफान ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं।      अगले 2 से 3 दिनों में मानसून के और आगे बढ़ने की संभावना है. इसके बाद यह छत्तीसगढ़, ओडिशा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम तक पहुंच सकता है.हवाओं की गति कई जगहों पर 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है।  दिल्ली-NCR में मौसम का बदलाव और तेज हवाओं का असर दिल्ली-NCR में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है. 7 जून को आंशिक बादल छाए रहने के साथ तेज हवाओं और बारिश की संभावना जताई गई है. अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री के बीच रह सकता है, लेकिन आंधी और बारिश के चलते शाम तक राहत मिल सकती है. मौसम विभाग ने यहां 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी दी है. कई इलाकों में अचानक मौसम बिगड़ सकता है, जिससे यातायात और जनजीवन प्रभावित होने की संभावना है।  उत्तर प्रदेश में मौसम का बदलता रुख और आंधी-तूफान का अलर्ट उत्तर प्रदेश में मौसम अगले कुछ दिनों तक काफी सक्रिय रहने वाला है. पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में रुक-रुककर बारिश और गरज-चमक की स्थिति बनी रहेगी. 9 से 12 जून के बीच कई जिलों में तेज बारिश की संभावना है. IMD ने राज्य के कई जिलों में 70 से 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की चेतावनी दी है. लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर और मेरठ जैसे शहरों में मौसम अचानक बदल सकता है. गर्मी और उमस के बीच यह बारिश कुछ राहत भी दे सकती है, लेकिन बिजली गिरने का खतरा बना रहेगा।  बिहार में मौसम का मिजाज और बारिश की गतिविधियां बिहार में 7 और 8 जून को मौसम काफी सक्रिय रहने वाला है. कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ आंधी-तूफान की स्थिति बन सकती है. पटना, गया, दरभंगा, पूर्णिया और भागलपुर जैसे जिलों में तेज हवाएं चलने की संभावना है. 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, … Read more

LPG उपभोक्ताओं के लिए बड़ा अपडेट! उज्ज्वला योजना में बदले नियम, करोड़ों लाभार्थियों की बढ़ी चिंता

  नई दिल्ली केंद्र सरकार ने  प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को बड़ा झटका (PM Ujjwala Yojna Rule Change) देते हुए सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की संख्या में बड़ी कटौती की है. देश में हाल ही में तेल वितरण कंपनियों द्वारा 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी किए जाने के बाद, अब सरकार ने ये बड़ा फैसला लिया है।  उज्ज्वला योजना के नियमों में बदलाव के बाद अब PMUY के लाभार्थियों को पहले चार रिफिल पर प्रति सिलेंडर 300 रुपये का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) मिलेगा. उज्ज्वला योजना वाले एक आम परिवार में औसतन साल भर में लगभग चार रिफिल की खपत होती है, पहले PMUY लाभार्थियों को साल में 9 रिफिल पर सब्सिडी मिलती थी।  2016 से अब तक 10.5 करोड़ कनेक्शन  प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई 2016 में मोदी सरकार द्वारा की गई थी. पेट्रोलियम मिनिस्ट्री के मुताबिक, PMUY के जरिए खाना पकाने के लिए साफ-सुथरा ईंधन लाखों घरों तक पहुंचा है, जिससे महिलाओं को सशक्त बनाने और भारतीय परिवारों के जीवन स्तर में सुधार में मदद मिली. इस योजना का जरूरतमंदों को पूरा फायदा पहुंचा. इस सरकारी स्कीम की शुरुआत के बाद से अब तक गरीब परिवारों की महिलाओं को 10.5 करोड़ से ज्यादा मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए।  सरकार देती ही 300 रुपये सब्सिडी उज्ज्वला योजना की शुरुआत के बाद सरकार ने एलपीजी को किफायती बनाए रखने के लिए मई 2022 में इस 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर 200 रुपये की सब्सिडी देने की शुरुआत की थी और इसे अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 300 रुपये प्रति सिलेंडर कर दिया था, जो लगातार लाभार्थियों को मिल रही हैं और LPG Subsidy का ये पैसा हर रिफिल के बाद लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे जमा किया जाता है. पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों को देखें, तो सरकार ने अब तक एलपीजी सब्सिडी के रूप में 52,000 करोड़ रुपये दिए हैं।  घाटे के बाद भी सब्सिडी राहत जारी मिडिल ईस्ट टेंशन और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से गहराए तेल-गैस संकट के बीच सरकारी तेल विपणन कंपनियां हर घरेलू गैस सिलेंडर पर करीब 700 रुपये का घाटा उठा रही हैं. इस बीच सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी भी की गई, लेकिन सरकार ने 300 रुपये प्रति सिलेंडर सब्सिडी देना जारी रखा है, जो उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए बड़ी राहत है. जहां आम ग्राहकों के लिए 14.2 किलो वाला सिलेंडर 942 रुपये का है, तो वहीं सब्सिडी के साथ उज्ज्वला योजना में पहले चार सिलेंडरों के लिए प्रति रिफिल 642 रुपये का भुगतान करना होता है।  12 से 9 और अब सिर्फ 4 सिलेंडर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत शुरुआत में लाभार्थियों को सालाना 12 रियायती सिलेंडर दिए जाते थे, जिनकी संख्या बीते साल घटाकर 9 कर दी गई थी और अब बड़ा फैसला लेते हुए इसे चार एलपीजी सिलेंडर तक सीमित कर दिया गया है. पेट्रोलियम मिनिस्ट्री की ओर से इस कदम को वित्तीय सहायता को वास्तविक औसत घरेलू खपत के स्तर के अनुरूप बनाने वाला बताया गया है।  लाभार्थियों को कितना घाटा?  तेल मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खानूजा के मुताबिक, संशोधित पात्रता उज्ज्वला परिवारों की औसत सालाना गैस खपत को ध्यान में रखकर तय की गई है. हालांकि, प्रति रिफिल सब्सिडी की राशि अपरिवर्तित रखी गई है. ताजा बदलाव के बाद प्रति लाभार्थी वार्षिक सहायता की अधिकतम सीमा 1,200 रुपये हो गई है. लाभार्थियों पर असर की बात करें, तो अब तक 300 रुपये की सब्सिडी के साथ 9 एलपीजी सिलेंडर पर उन्हें सालाना 2700 रुपये की मदद मिलती थी, लेकिन अब इसमें एक झटके में 1500 रुपये की कमी कर दी गई है।  सरकार की ओर से ग्लोबल एलपीजी प्राइस हाइक का हवाला देते हुए LPG Cylinder Price Hike और उज्ज्वला योजना के तहत रियायती सिलेंडरों की संख्या में कटौती के फैसले का बचाव किया है. बयान में कहा गया कि संशोधित सब्सिडी स्ट्रक्चर से सरकार पर वित्तीय बोझ कम करने में मददगार होगा, साथ ही खाना पकाने के लिए एलपीजी पर निर्भर परिवारों को सहायता मिलती रहेगी। 

12 वर्षों का सफर और नया इतिहास, सबसे लंबे समय तक पीएम रहने के मामले में नेहरू से आगे निकले मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजाद भारत में सबसे लंबे समय तक पीएम पद पर बने रहने के नेहरू के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है. वो देश के सबसे लंबे कार्यकाल तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने वाले नेता बन गए हैं. 9 जून 2024 को ही उन्होंने एनडीए के तीसरे कार्यकाल में पीएम पद की शपथ ली थी और उनके सत्ता में रहने के 12 साल भी आज पूरे हो रहे हैं. पीएम मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी और आज 9 जून 2026 तक उनके कार्यकाल के 4398 दिन पूरे हो गए हैं. अब वो सबसे लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री बन गए हैं।  एनडीए 10 जून को दिखाएगा ताकत  एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की 10 जून को बैठक होगी और इसमें एकजुटता के साथ शक्ति प्रदर्शन होगा.आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेदेपा प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू रखेंगे प्रस्ताव. अन्य सहयोगी दलों के नेता प्रस्ताव का करेंगे समर्थन. प्रस्ताव में बतौर प्रधानमंत्री पिछले बारह साल की उपलब्धियों का ज़िक्र किया जाएगा।  पंडित नेहरू का 12 साल का रिकॉर्ड भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 13 मई 1952 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी. नेहरू लगातार 4397 दिन यानी 12 साल 14 दिन तक प्रधानमंत्री रहे थे. पीएम मोदी ने 9 जून को सबसे लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री का नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दिया. निर्वाचित प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने 4398 दिन यानी 12 साल 15 दिन पूरे कर लिए हैं. नेहरू हालांकि 15 अगस्त 1947 को प्रधानमंत्री बने थे लेकिन 1952 में लोकसभा चुनाव के पहले तक वो पांच साल अंतरिम सरकार के प्रमुख थे. नेहरू तब तक चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री नहीं बने थे।  मोदी सरकार के 12 वर्ष और 22 राज्यों में NDA शासन संगठनात्मक विस्तार पर चर्चा भाजपा सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा ने बैठक के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि बैठक दोपहर में शुरू हुई. शाम देर तक चली. उन्होंने बताया कि यह बैठक पीएम मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल की सफलताओं और एनडीए के 22 राज्यों में शासन को रेखांकित करने के लिए बुलाई गई थी, जो संगठन के व्यापक विस्तार का प्रतीक है। युवा, महिला और वंचित वर्गों पर फोकस भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि नितिन नबिन की अध्यक्षता में हुई भाजपा की बैठक में संगठनात्मक विस्तार, युवाओं को जोड़ने, महिलाओं के सशक्तिकरण और एससी/एसटी समुदायों के विकास पर चर्चा हुई. बैठक में पार्टी के संगठन को मजबूत करने, युवा वर्ग को मुख्यधारा में लाने, महिला सशक्तिकरण और अनुसूचित जाति/जनजाति के उत्थान जैसे मुद्दों पर फोकस किया गया।  आगामी चुनावों की रणनीति पार्टी सूत्रों के अनुसार, बैठक में 26 मई 2026 तक मोदी सरकार के 12 वर्षों के उपलक्ष्य में जन-संपर्क अभियान तेज करने और आगामी विधानसभा व राज्यसभा चुनावों के लिए रणनीति तैयार करने पर मंथन हुआ. संगठनात्मक समन्वय बढ़ाने के लिए 10 जून को एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों की एक हाई-प्रोफाइल बैठक प्रस्तावित है, जिसमें भावी राजनीतिक एजेंडे पर चर्चा होगी।  नेहरू 1947 से 27 मई 1964 तक प्रधानमंत्री पद  पर रहे. ऐसे में नेहरू का पूरा टाइम तो 6130 दिन होता है. लेकिन इसमें से करीब 5 साल वो अंतरिम सरकार के प्रमुख के तौर पर प्रधानमंत्री रहे. पीएम मोदी ने 25 जुलाई 2025 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लगातार 4077 दिनों के प्रधानमंत्री के लंबे कार्यकाल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा था।  शासन में सबसे लंबे वक्त का रिकॉर्ड पीएम मोदी ने मार्च 2026 में एक बड़ा इतिहास बनाया था. गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री रहने के दोनों कार्यकालों को मिला दें तो वह 8931 दिनों से अधिक समय तक सत्ता में रहने वाले भारत के पहले नेता बन गए थे. उन्होंने तब सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन चामलिंग (8930 दिन) के रिकॉर्ड को तोड़ा था।  सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री पीएम मोदी भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सत्ता संभालने वाले पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री भी हैं. वो गैर कांग्रेसी सरकार के ऐसे पहले नेता हैं, जिन्होंने लगातार दो बार पूर्ण बहुमत की सरकार चलाई और अब तीसरी बार एनडीए सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं।  लगातार तीन बार चुनाव जीतने वाले दूसरे प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के बाद 2024 में नरेंद्र मोदी देश के दूसरे ऐसे प्रधानमंत्री बने थे, जिन्होंने लगातार तीन लोकसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) में अपने नेतृत्व में गठबंधन या पार्टी को जीत दिलाकर लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी. वो भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिनका जन्म देश की आजादी के बाद (17 सितंबर 1950) हुआ. इस तरह वो आजाद भारत में जन्मे पहले पीएम है. उनसे पहले के सभी प्रधानमंत्री 1947 से पहले जन्मे थे।  मोदी सरकार में लोगों को मिले कौन-कौन से लाभ? प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार हमेशा अंत्योदय से प्रेरित रही है और उसका प्रयास हमेशा यह सुनिश्चित करना रहा है कि विकास के लाभ उन लोगों तक पहुंचें जो दशकों से पीछे छूट गए हैं। पीएम ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि यह खुशी की बात है कि गरीबों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में प्रौद्योगिकी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पीएम मोदी ने कहा कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सहायता सीधे और पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंच रही है। इससे भ्रष्टाचार कम हुआ है, कार्यकुशलता बढ़ी है और शासन में विश्वास मजबूत हुआ है। इसी तरह गरीब कल्याण को आगे बढ़ाने का सफर मानव सशक्तिकरण और विकसित भारत के हमारे सपने को साकार करने की दिशा में एक सामूहिक आंदोलन बन गया है। केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं से लोगों को वित्तीय सुरक्षा मिली: शाह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास और जन-धन जैसी केंद्रीय योजनाओं ने करोड़ों नागरिकों को बैंकिंग सुविधाओं और वित्तीय सुरक्षा से जोड़ा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के तीसरे कार्यकाल के दूसरे वर्ष के समापन पर एक संदेश में शाह ने कहा कि गरीब कल्याण मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अमित शाह ने कहा कि सरकार ने अन्न योजना, … Read more

चरित्र पर सवाल नहीं उठाए जा सकते! सहमति से बने संबंधों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान

हैदराबाद सुप्रीम कोर्ट ने अपनी एक टिप्पणी में कहा है कि आपसी सहमति से दो अविवाहित व्यस्कों के बीच बने शारीरिक संबंध किसी व्यक्ति के खराब चरित्र का प्रमाण नहीं हो सकता है. न्यायाधीश मनमोहन और मनोज मिश्रा की पीठ ने यह टिप्पणी तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड को एक ऐसे उम्मीदवार की नियुक्ति का निर्देश देते हुए की, जिसका पुलिस कांस्टेबल के रूप में चयन एक आपराधिक मामले की वजह से रद्द कर दिया गया था।  इस उम्मीदवार पर शादी का झांसा देकर रेप का आरोप लगा था, जो बाद में अदालत के बाहर सुलझ गया था. लेकिन तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड ने उस आरोप को देखते हुए खराब चरित्र का आधार देकर उम्मीदवार की भर्ती को रोक दिया था. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, "सहमति से बने दो अविवाहित वयस्कों के बीच शारीरिक संबंध अपने आप में किसी व्यक्ति के चरित्र के खराब होने का आधार नहीं हो सकता है और न ही ऐसा होना चाहिए. ऐसा कोई कानून नहीं है जो सहमति से बने दो अविवाहित वयस्कों को अपनी पसंद का संबंध रखने से रोकता हो।  उम्मीदवार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी इस मामले में उम्मीदवार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीदवार की ओर से दायर अपील को स्वीकार कर लिया और तेलंगाना उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें बोर्ड को पुलिस कांस्टेबल के पद पर उसकी नियुक्ति पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया गया था. तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड ने उनकी नियुक्ति इस आधार पर रद्द कर दी थी कि उनके खिलाफ 2014 में दर्ज विवाह का वादा करके बलात्कार का मामला दर्ज कराया गया था।  हर संबंध शादी में तबदील नहीं होता है सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस उम्मीदवार का अपनी पड़ोसी के महिला के साथ संबंध था. आरोप लगने के बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता भी हो गया था. साल 2015 में लोक अदालत में इसका निपटारा भी हो गया था. आईपीसी की धारा 376 के तहत कोई आरोप नहीं लगाया गया था. ऐसे में उस आधार पर उम्मीदवार को भर्ती न करने का फैसला सही नहीं है।  कोर्ट ने कहा "हर रिश्ता शादी में तब्दील नहीं होता है. इसलिए, केवल इसलिए कि रिश्ता शादी में तब्दील नहीं हुआ, यह मानने का कोई आधार नहीं है कि एक पक्ष ने दूसरे को धोखा दिया है. इस आधार पर यह भी नहीं कहा जा सकता है कि उस व्यक्ति का चरित्र खराब था। 

परमाणु शक्ति में भारत की बढ़त, हथियारों की संख्या 190 हुई; पाकिस्तान की क्षमता पर भी रिपोर्ट में खुलासे

नई दिल्ली वैश्विक स्तर पर बढ़ते जियो-पॉलिटिकल टेंशन और महाशक्तियों के बीच अविश्वास के माहौल के बीच परमाणु हथियारों को लेकर बेहद चौंकाने वाली और रिपोर्ट सामने आई है. रक्षा क्षेत्र पर नजर रखने वाली प्रतिष्ठित वैश्विक संस्था 'स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट' (SIPRI) ने अपनी सालाना 'सिपरी ईयरबुक 2026' जारी कर दी है. परमाणु हथियारों की संख्या और उनके प्रभाव को कम करने के लिए दशकों से किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय प्रयास अब पूरी तरह से उल्टे होते दिख रहे हैं।  दुनिया के कई देश अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बार फिर परमाणु हथियारों पर अपनी निर्भरता बढ़ा रहे हैं. उनका मॉडर्न कर रहे हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर परमाणु युद्ध या किसी गलतफहमी के कारण होने वाले परमाणु एस्केलेशन का खतरा बहुत अधिक बढ़ गया है।  इस रिपोर्ट की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन के लिहाज से भारत ने एक नया मुकाम हासिल कर लिया है. भारत का परमाणु हथियार भंडार साल 2025 के 180 वॉरहेड्स से बढ़कर साल 2026 में 190 वॉरहेड्स तक पहुंच गया है।  इस बढ़ोतरी के साथ ही भारत रणनीतिक रूप से अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान से काफी आगे निकल गया है, जिसकी परमाणु क्षमता इस दौरान बिना किसी बदलाव के 170 वॉरहेड्स पर ही रुकी हुई है. सिपरी की यह रिपोर्ट दिखाती है कि भारत तेजी से और बहुत ही परिपक्वता के साथ अपनी रणनीतिक क्षमताओं का विस्तार कर रहा है।  भारत की छलांग और पाकिस्तान की स्थिरता भारत और पाकिस्तान दोनों ही अपने परमाणु बलों और मिसाइल डिलीवरी सिस्टम को लगातार आधुनिक बना रहे हैं, लेकिन संख्या बल के मामले में भारत अब स्पष्ट बढ़त बना चुका है. जहां भारत के पास अब 190 परमाणु हथियार हैं. वहीं पाकिस्तान के पास केवल 170 वॉरहेड्स हैं. रिपोर्ट में भारत को लेकर एक बहुत ही महत्वपूर्ण और ऑपरेशनल शिफ्ट का जिक्र किया गया है।  भारत और चीन जैसे उभरते हुए परमाणु संपन्न देश अब शांति काल के दौरान भी अपनी मिसाइलों पर छोटी संख्या में परमाणु वॉरहेड तैनात कर सकते हैं. यह भारत की ऑपरेशनल रेडीनेस में आए एक बड़े बदलाव को दर्शाता है. भारत अब किसी भी अप्रत्याशित संकट की स्थिति में बेहद कम समय में जवाबी कार्रवाई करने के लिए खुद को तैयार कर चुका है. हाल के वर्षों में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए टकरावों ने परमाणु प्रतिरोध और संकट की स्थिति में स्थिरता से जुड़े पुराने सिद्धांतों को कड़ी चुनौती दी है, जिसके कारण दोनों ही देश सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर हैं।  मामूली गिरावट के बीच आधुनिकीकरण की आंधी यदि हम पूरी दुनिया के स्तर पर देखें, तो सिपरी का अनुमान है कि जनवरी 2026 तक दुनिया का कुल परमाणु भंडार 12187 वॉरहेड्स था. अगर इसकी तुलना एक साल पहले यानी 2025 से की जाए, तो तब यह संख्या 12241 थी. कुल संख्या में मामूली गिरावट जरूर दर्ज की गई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट भ्रामक हो सकती है।  देश अपने पुराने और सेवामुक्त हो चुके परमाणु हथियारों को नष्ट करने की प्रक्रिया को धीमा कर रहे हैं. नए, अधिक घातक परमाणु प्रणालियों की तैनाती को तेज कर रहे हैं, जिससे आने वाले समय में यह ट्रेंड पूरी तरह पलट सकता है और कुल संख्या फिर से बढ़ सकती है।  इस समय दुनिया भर के कुल 12,187 परमाणु हथियारों में से लगभग 9,745 वॉरहेड्स को सैन्य भंडारों में संभावित उपयोग के लिए पूरी तरह तैयार रखा गया है. इनमें से लगभग 4,012 वॉरहेड्स को मिसाइलों और लड़ाकू विमानों पर सक्रिय रूप से तैनात किया जा चुका है।  सबसे डराने वाली बात यह है कि दुनिया भर में करीब 2,100 से 2,200 परमाणु वॉरहेड्स को 'हाई ऑपरेशनल अलर्ट' पर रखा गया है, यानी ये वो हथियार हैं जिन्हें महज कुछ ही मिनटों के आदेश पर दागा जा सकता है. इस श्रेणी में सबसे ज्यादा हथियार रूस और अमेरिका के पास हैं।  कौन सा देश है किस पायदान पर?   परमाणु हथियारों की होड़ में आज भी शीतयुद्ध के दो सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी यानी रूस और अमेरिका ही सबसे आगे खड़े हैं. वैश्विक स्तर पर इन दोनों देशों का ही दबदबा है…     रूस: रूस इस समय दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु शक्ति संपन्न देश बना हुआ है, जिसके पास कुल 5420 वॉरहेड्स का विशाल भंडार है।      अमेरिका: अमेरिका इस सूची में दूसरे स्थान पर है, जिसके पास वर्तमान में 5,042 वारहेड्स मौजूद हैं।      चीन: भारत का पड़ोसी देश चीन भी अपने परमाणु बेड़े को बहुत आक्रामक तरीके से बढ़ा रहा है. चीन का परमाणु भंडार 600 से बढ़कर 620 वॉरहेड्स हो गया है।      फ्रांस: इस साल की रिपोर्ट में फ्रांस ने सबको चौंकाया है. फ्रांस ने अपने भंडार में सबसे तेज बढ़ोतरी करते हुए इसे 290 से सीधे 370 वॉरहेड्स तक पहुंचा दिया है।      ब्रिटेन: यूनाइटेड किंगडम (UK) ने अपनी रणनीतिक क्षमता को स्थिर रखा है. उसके पास वर्तमान में 225 वॉरहेड्स हैं।      इजरायल: मिडिल ईस्ट में जारी भारी युद्ध और तनाव के बावजूद इजरायल का अनुमानित परमाणु भंडार बिना किसी बदलाव के 90 वॉरहेड्स पर ही बना हुआ है।      उत्तर कोरिया: अपनी सनकी मिसाइल नीतियों के लिए जाना जाने वाला उत्तर कोरिया भी लगातार घातक हथियार बना रहा है. उसका भंडार 50 से बढ़कर 60 वॉरहेड्स हो गया है।  दुनिया के ये सभी नौ देश (अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इजरायल) अपने परमाणु शस्त्रागार को नया रूप दे रहे हैं. कई नई परमाणु-सक्षम प्रणालियों को सेना में शामिल कर रहे हैं।  सिपरी के निदेशक करीम हग्गाग ने इस पूरी स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी दी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के उपकरण के रूप में परमाणु हथियारों पर बढ़ती निर्भरता वैश्विक शांति के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है. सैन्य प्रौद्योगिकी में नए विकास, वैश्विक स्तर पर हथियारों के नियंत्रण के समझौतों का कमजोर होना और महाशक्तियों के बीच बढ़ती राजनीतिक और सैन्य प्रतिद्वंद्विता ने दुनिया को एक बेहद खतरनाक चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। 

जनगणना में पूछे जाएंगे 33 सवाल, क्या जवाब देना अनिवार्य है? जानिए गलत जानकारी देने के परिणाम

नई दिल्ली जनगणना 2027 की प्रक्रिया पूरे जोर-शोर से जारी है। सबसे पहले मकानों की गणना की जा रही है। इसके लिए लोगों से 33 सवाल पूछे जा रहे हैं। मकानों की गणना के दौरान भी घर-परिवार और रहन-सहन के बारे में पूछे जाने वाले सवालों को लेकर लोगों के मन में कई तरह की आशंकाएं भी रहती हैं। एक तो यह कि क्या सभी सवालों का जवाब देना जरूरी है? दूसरा यह कि अगर किसी सवाल का गलत जवाब दिया गया तो क्या ऐक्शन हो सकता है? क्या है जनगणना की रूपरेखा जनगणना 2027 की रूपरेखा दो प्रमुख चरणों में बंटी है। सबसे पहले हाउसिंग सेंसस हो रहा है। इसके लिए जनगणना अधिकारी एक-एक घर तक पहुंच रहे हैं और उनकी स्थिति, सुविधाएं और घर में रहने वाले लोगों से जुड़ी बुनियादी जानकारियां इकट्ठी कर रहे हैं। इन जानकारियों के लिए परिवार के मुखिया से 33 सवाल किए जाते हैं और उन्हें ऑनलाइन दर्ज कर लिया जाता है। रजिस्ट्रार जनरल का कहना है कि इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य जमीनी हकीकत का को ठीक से समझना और मुख्य जनगणना के कार्य को आसान करना है। इसके बाद 1 फरवरी से जनगणना का दूसरा चरण शुरू होगा। क्यों पूछे जा रहे हैं 33 सवाल जनगणना के पहले चरण में यह पता लगाने का प्रयास है कि लोगों के जीवन का स्तर क्या है। इसी वजह से जो 33 सवाल किए जा रहे हैं उनमें सुविधाओं की जानकारी को मुख्य रखा गया है। इसमें घर में कितने लोग रहते हैं, फर्श कैसी है, दीवार की छत किस सामग्री से बनी है, पीने की पानी की क्या सुविधा है, घर का मुखिया कौन है। ऐसे सवाल शामिल किए गए हैं। इन सवालों में पानी, शौचालय, इंटरनेट, मोबाइल जैसे सुविधाओं को ध्यान में रखा गया है। इसके अलावा कार,बाइक, साइकल और वाहनों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। जिससे लोगों के जीवन स्तर के सही आंकड़े जुटाए जा सकें। जवाब ना देने पर क्या होगा सवाल है कि अगर कोई जनगणना में पूछे गए सवालों का जवाब नहीं देता है तो क्या होगा। देश के नागरिक होने के नाते कोई भी सवालों का जवाब देने से इनकार नहीं कर सकता। वहीं जनगणना अधिकारी की भी जिम्मेदारी होती है को वह इन जानकारियों को पोर्टल पर ही अपडेट करे और कहीं प्रचारित ना करे। अगर कोई जानकारी गलत देता है तो सेंसस ऐक्ट 1948 के मुताबिक उस पर जुर्माना भी लग सकता है। हालांकि इससे नागरिकता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार के लिए आपके सवाल इसलिए भी जरूरी हैं ताकि जिन सुविधाओँ तक आपकी पहुंच नहीं हैं, उन्हें भविष्य में सुलभ बनाया जा सके। सरकार का कहना है कि नागरिकों के हित में ही ये सवाल किए जा रहे हैं। क्या हैं जनगणना के 33 सवाल? 1. भवन संख्या 2. जनगणना घर संख्या 3- फर्श में उपयोग की गई सामग्री 4. घऱ की दीवार में उपयोग की गई सामग्री 6. घर के छत में उपयोग की गई प्रमुख सामग्री 7. घर का उपयोग 7. घर की स्थिति (नया या पुराना) 8. घर में रहने वाले लोगों की संख्या 9. परिवार में आम तौर पर उपलब्ध रहने वालों की संख्या 10. परिवार के मुखिया का नाम 11- परिवार के मुखिया का लिंग 12. परिवार के मुखिया की जाति 13. घर किराये का या खुद का 14. आवासीय कमरों की संख्या 15. परिवार में रहने वाले विवाहितों की संख्या 16. पीने के पानी का स्रोत 17. प्रकाश की व्यवस्था 18. शौचालय की उपलब्धता 19. शौचालय का प्रकार 20. जल निकासी की व्यवस्था 21. स्नान की सुविधा 22. रसोईघर में एलपीजी या पीएनजी कनेक्शन 23. खाना पकाने के लिए मुख्य ईंधन 24. रेडियो या ट्रांजिस्टर 25. टेलीविजन 26. इंटरनेट 27. लैपटॉप या कंप्यूटर 28. मुख्य रूप से खाया जाने वाला अनाज 29. कार जीप की उपलब्धता 30. मोबाइल नंबर

टिकट बुकिंग में बड़ा बदलाव! अगस्त से लागू होगा रेलवे का नया रिजर्वेशन सिस्टम, जानिए क्या बदलेगा

नई दिल्ली भारतीय रेलवे अगस्त महीने से अपने करीब 40 साल पुराने रिजर्वेशन सिस्टम को बदलने जा रहा है. 1986 से इस्तेमाल हो रहे पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) की जगह अब नया और आधुनिक सिस्टम लाया जाएगा. रेलवे का दावा है कि इससे टिकट बुकिंग पहले से ज्यादा तेज, आसान और भरोसेमंद हो जाएगी. साथ ही यात्रियों को कई नई सुविधाएं भी मिलेंगी।  रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में रेल भवन में इस प्रोजेक्ट का रिव्यू किया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि नए सिस्टम में बदलाव के दौरान यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो. रेलवे अगस्त से चरणबद्ध तरीके से ट्रेनों को नए रिजर्वेशन सिस्टम पर शिफ्ट करना शुरू करेगा।  1986 में शुरू हुआ था मौजूदा सिस्टम भारतीय रेलवे का मौजूदा पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम 1986 में शुरू किया गया था. पिछले चार दशकों में इसमें कुछ छोटे-मोटे बदलाव जरूर हुए, लेकिन इसकी मूल संरचना लगभग वैसी ही बनी रही. इस दौरान यात्रियों की संख्या और ऑनलाइन टिकट बुकिंग में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में रेलवे को एक ज्यादा सक्षम और आधुनिक सिस्टम की जरूरत महसूस हो रही थी।  रेलवे ने साल 2002 में इंटरनेट के जरिए टिकट बुकिंग की सुविधा शुरू की थी. आज हालात यह हैं कि लगभग 88 प्रतिशत टिकट ऑनलाइन बुक किए जाते हैं. ऐसे में नए सिस्टम को इसी बढ़ती डिजिटल मांग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।  ज्यादा क्षमता वाला होगा नया सिस्टम रेलवे के मुताबिक नया पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम आधुनिक तकनीक पर आधारित है और मौजूदा सिस्टम की तुलना में कहीं ज्यादा क्षमता के साथ काम करेगा. इससे टिकट बुकिंग के दौरान सर्वर पर पड़ने वाला दबाव कम होगा और यात्रियों को वेबसाइट या ऐप पर बेहतर अनुभव मिलेगा।  त्योहारों या तत्काल टिकट बुकिंग के समय अक्सर वेबसाइट धीमी पड़ने या तकनीकी दिक्कतों की शिकायतें आती हैं. रेलवे का कहना है कि नया सिस्टम ऐसी समस्याओं को काफी हद तक कम करेगा।  RailOne ऐप की लोकप्रियता बढ़ी रेलवे का यह बदलाव उसकी डिजिटल रणनीति का हिस्सा है. जुलाई 2025 में लॉन्च किए गए रेलवन ऐप को एक साल से भी कम समय में 3.5 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है।  इस ऐप के जरिए यात्री टिकट बुक और कैंसिल कर सकते हैं, ट्रेन की लाइव लोकेशन देख सकते हैं, प्लेटफॉर्म और कोच की जानकारी हासिल कर सकते हैं, शिकायत दर्ज करा सकते हैं और कई दूसरी रेलवे सेवाओं का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।  रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, इस ऐप के जरिए हर दिन करीब 9.29 लाख टिकट बुक किए जा रहे हैं. इनमें लगभग 7.2 लाख अनारक्षित और 2.09 लाख आरक्षित टिकट शामिल हैं।  AI बताएगा टिकट कन्फर्म होने की संभावना नए सिस्टम की सबसे खास सुविधाओं में से एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित वेटिंग टिकट प्रेडिक्शन फीचर है. यह सुविधा यात्रियों को बताती है कि उनकी वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने की कितनी संभावना है।  रेलवे के अनुसार, इस फीचर की सटीकता पहले करीब 53 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 94 प्रतिशत तक पहुंच गई है. इससे यात्रियों को यात्रा की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी और अनिश्चितता कम होगी।  करोड़ों यात्रियों को मिलेगा फायदा भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है और हर दिन लाखों लोग इसकी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में अगस्त से शुरू होने वाला यह बदलाव रेलवे के डिजिटल इतिहास की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है।  करीब 40 साल पुराने रिजर्वेशन सिस्टम को बदलकर रेलवे अब पूरी तरह आधुनिक तकनीक की ओर बढ़ रहा है. उम्मीद है कि नया सिस्टम टिकट बुकिंग को ज्यादा तेज, स्मार्ट और भरोसेमंद बनाएगा, जिसका फायदा देशभर के करोड़ों रेल यात्रियों को मिलेगा। 

कर्मचारियों के लिए खुशखबरी? 8वें वेतन आयोग को लेकर 14 लाख रुपये एरियर की अटकलें तेज

नई दिल्ली 8th Pay Commission: 8वें पे कमीशन ने एक बार फिर से लोगों को सुझाव देने की डेडलाइन को आगे बढ़ा दिया है। अब 15 जून तक सभी स्टेकहोल्डर्स अपना सुझाव 8वें वित्त आयोग को दे सकते है। पहले यह डेडलाइन 5 मार्च 2026 थी। उसके बाद डेडलाइन को बढ़ाकर 30 अप्रैल किया गया। फिर इसे आगे बढ़ाते हुए 31 मई कर दिया गया था। इस प्रक्रिया में लगातार आगे बढ़ा जा रहे डेडलाइन की वजह से लग रहा है कि पे कमीशन अपनी रिपोर्ट जमा करने में अभी समय लेगा। ऐसे में कर्मचारियों के बीच देरी वजह से एरियर को लेकर भी खूब चर्चाएं हो रही हैं। 14 लाख रुपये तक मिलेगा एरियर? रिपोर्ट्स के अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों को 5 लाख रुपये से 14 लाख रुपये तक एरियर मिल सकता है। बता दें, पे कमीशन का गठन हर 10 साल पर होता है। 7वां वित्त आयोग 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो गया था। ऐसे में 8वां वित्त आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू हो चुका है। लेकिन पे कमीशन की रिपोर्ट तैयार ना होने की वजह से अभी भी कर्मचारियों को 7वें पे कमीशन के हिसाब से ही सैलरी मिल रही है। एक बार आयोग की रिपोर्ट लागू हो जाए उसके बाद कर्मचारियों को 8वें पे कमीशन के हिसाब से सैलरी मिलेगी। क्योंकि पे कमीशन 1 जनवरी से प्रभावी है। इसलिए एक बड़ा अमाउंट एरियर के तौर पर कर्मचारियों को मिलेगा। कैसे तय होगा एरियर का भुगतान सबकुछ फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करेगा। 8वां वेतन आयोग कितना फिटमेंट फैक्टर रखता है उसी के आधार पर आगे का फैसला होगा। 7वें वित्त आयोग के दौरान 2.57 फिटमेंट फैक्टर रखा गया था। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार 8वें पे कमीशन के दौरान 3.68 फिटमेंट फैक्टर रह सकता है। अगर यह फिटमेंट फैक्टर लागू होता है तो बेसिक पे 18000 रुपये से बढ़कर 66240 रुपये के स्तर पर पहुंच जाएगा। मंथली सैलरी में सरकारी कर्मचारियों के 48240 रुपये की बढ़ोतरी होगी। अगर 10 महीने का एरियर देखें तो यह 482400 रुपये के स्तर पर पहुंचता है। कैबिनेट सचिव के पोस्ट के अधिकारी का बेसिक पे इस समय 7वें पे कमीशन के अनुसार 482400 रुपये है। अगर 3.68 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है तब की स्थिति में बेसिक पे बढ़कर 920000 रुपये के स्तर पर पहुंच सकता है। मंथली सैलरी 670000 रुपये बढ़ जाएगी। ऐसे में महज 2 महीने का ही एरियर 1340,000 रुपये हो जाता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 2.28 से 2.86 फिटमेंट फैक्टर रखा जा सकता है।

बारिश ने बढ़ाई रफ्तार, 12 राज्यों में मेहरबान हुआ मॉनसून; यूपी-बिहार में भी बदलेगा मौसम

नई दिल्ली दक्षिण-पश्चिम मॉनसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब तक 12 राज्यों तक पहुंच चुका है। केरल से प्रवेश करने के बाद कर्नाटक, तमिलनाडू, आंध्र प्रदेश के अलावा पूर्वोत्तर के राज्यों में झमाझम बारिश शुरू हो गई है। वहीं महाराष्ट्र में भी मॉनसून का असर देखने को मिल रहा है। उत्तर भारत में इन दिनों हीटवेव का असर देखा जा रहा है। हलाांकि मौसम विभाग ने एक राहत की खबर सुनाई है। 11 जून से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में भी पश्चिमी विक्षोभ ऐक्टिव हो सकता है। ऐसे में दिल्ली-यूपी समेत उत्तर भारत में भी बारिश का अनुमान है। राजस्थान में गिरे ओले राजस्थान के श्रीगंगानगर में धूलभरी आंधी के बाद बारिश शुरू हुई और फिर ओलावृष्टि होने लगी। मौसम विभाग के मुताबिक 8 जून को भी कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। मध्य प्रदेश के इंदौर में भी तेज आंधी के साथ हल्की बारिश हुई है। करवट लेने वाला है मौसम दिल्ली एनसीआर में फिलहाल 9 और 10 जून को हीटवेव जारी रहने का अनुमान है। 10 जून से मौसम करवट ले सकता है। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दो दिनों में ही दिल्ली एनसीआर का तापमान 45 डिग्री तक पहुंच सकता है। इन राज्यों में मूसलाधार बारिश मौसम विभाग के मुताबिक मॉनसून की वजह से कर्नाटक और केरल में बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। वहीं पूर्वोत्तर में भी झमाझम बारिश हो रही है। मॉनसून त्रिपुरा, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, असम और नगालैंड, मिजोरम तक पहुंच चुका है। यहां कई जगहों पर भारी बारिश और भूस्खलन की चेतावनी दी गई है। 5 जुलाई तक मॉनसून पूरे देश को कवर कर लेगा। अगले दो दिन कैसा रहेगा मौसम मौसम विभाग के मुताबिक अगले दो दिन पूर्वोत्तर और दक्षिण के राज्यों में बारिश जारी रहेगी। वहीं ओडिशा, बिहास, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी आंधी के साथ बारिश हो सकती है। राजस्थान के पूर्वी हिस्से में 40 से 50 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। 10 जून को केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल और अंडमान निकोबार में भी तूफान के साथ बारिश का अनुमान है। यूपी में कब होगी बारिश उत्तर प्रदेश में मौसम के दो रंग देखने को मिल रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हीटवेव का असर देखा जा रहा है। यहां 9 और 10 जून को भी लू जारी रहेगी। वहीं 10 जून के बाद बारिश की संभावना है। पूर्वी यूपी में आंधी के साथ हल्की बारिश हो सकती है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में 8 और 9 जून को हल्की बारिश हो सकती है। 11 जून को पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के बाद उत्तराखंड में बारिश की गितिविधियां तेज होंगी। बिहार का मौसम बिहार में भी 10 जून के बाद ही बारिश का अनुमान लागाय गया है। 11 जून को भी कई जगहों पर गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। गर्मी की लिहाज से फिलहाल दो दिन भारी बताए गए हैं। झारखंडा में 8 जून को भी 40 से 60 किमी की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। साथ ही हल्की बारिश हो सकती है।

21 जून की Re-NEET परीक्षा पर NTA का सख्त पहरा, एयरफोर्स से पेपर ट्रांसपोर्ट; सुरक्षा के खास इंतजाम

 नई दिल्ली देश में नीट (NEET) परीक्षा को लेकर मचे देशव्यापी बवाल और पेपर लीक के कड़े अनुभवों से सबक लेते हुए केंद्र सरकार इस बार सुरक्षा के ऐसे पुख्ता इंतजाम कर रही है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी. आगामी नीट री-एग्जा को पूरी तरह 'लीक-प्रूफ' और सुरक्षित बनाने के लिए अब देश की सबसे भरोसेमंद ताकत यानी भारतीय वायुसेना (IAF) को मैदान में उतार दिया गया है।  'इंडिया टुडे' को टॉप सोर्सेज (शीर्ष सूत्रों) से मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, नीट री-टेस्ट के दौरान प्रश्नपत्रों को लीक होने से बचाने और उनकी सुरक्षित डिलीवरी के लिए भारतीय वायुसेना लॉजिस्टिक सपोर्ट (लॉजिस्टिक्स सहायता) प्रदान करेगी।  आसमान से होगी प्रश्नपत्रों की सुरक्षित लैंडिंग: 18 जगहों से उठेंगे पैकेट्स सूत्रों के मुताबिक, इस बार प्रश्नपत्रों के ट्रांसपोर्टेशन की जिम्मेदारी किसी प्राइवेट कूरियर या सामान्य सरकारी डाक के भरोसे नहीं छोड़ी जा रही है. सुरक्षा का घेरा इतना कड़ा है कि नीट री-टेस्ट के प्रश्नपत्रों (Question Papers) को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का जिम्मा खुद भारतीय वायुसेना के जिम्मे होगा.सूत्रों ने बताया है कि वायुसेना देश के 18 चुनिंदा और महत्वपूर्ण स्थानों से प्रश्नपत्रों के पैकेट्स को अपनी कस्टडी में लेगी और उन्हें तय समय पर सुरक्षित केंद्रों तक पहुंचाएगी।  रिपोर्ट्स के अनुसार, यह सुरक्षा व्यवस्था केवल पेपर सेटिंग तक सीमित नहीं है। प्रश्नपत्रों के परिवहन और सुरक्षित भंडारण के लिए भी बहुस्तरीय रणनीति अपनाई गई है। सरकार भारतीय वायुसेना (Air Force) की मदद से प्रश्नपत्रों को विभिन्न केंद्रों तक पहुंचाने की योजना पर काम कर रही है, ताकि किसी भी स्तर पर लीक या छेड़छाड़ की आशंका को खत्म किया जा सके। इसके अलावा पारंपरिक बैंक स्ट्रॉन्ग रूम के बजाय अधिक सुरक्षित स्थानों की भी पहचान की जा रही है। NTA ने सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर भी कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। हाल के दिनों में टेलीग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर री-एग्जाम का कथित पेपर बिकने के दावों के बाद एजेंसी सतर्क हो गई है। NTA ने ऐसे दावों को पूरी तरह फर्जी और भ्रामक बताते हुए चेतावनी दी है कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 21 जून को होने वाली यह पुनर्परीक्षा देश और विदेश के कुल 551 भारतीय शहरों तथा 14 विदेशी शहरों में आयोजित की जाएगी। परीक्षा पहले की तरह पेन-एंड-पेपर मोड में होगी। NTA ने उम्मीदवारों के लिए सिटी इंटिमेशन स्लिप भी जारी कर दी है, जबकि एडमिट कार्ड अलग से जारी किए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षा केवल छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि NTA और पूरे परीक्षा तंत्र की विश्वसनीयता की भी परीक्षा है। इसलिए इस बार “जीरो-ट्रस्ट सिक्योरिटी मॉडल” पर जोर दिया जा रहा है, जिसमें किसी एक व्यक्ति को पूरी प्रक्रिया की जानकारी न हो और हर स्तर पर निगरानी बनी रहे। 'हर चुनौती से निपटने के लिए हैं तैयार' सुरक्षा एजेंसियों और रक्षा सूत्रों का कहना है कि नीट परीक्षा की शुचिता को बनाए रखने के लिए सरकार किसी भी स्तर का जोखिम नहीं लेना चाहती. वायुसेना के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा को बिना किसी गड़बड़ी के संपन्न कराने के लिए जिस भी तरह के सहयोग या सपोर्ट की आवश्यकता होगी, उसके लिए सेना पूरी तरह मुस्तैद और तैयार है।  इस कदम का सीधा मकसद सॉल्वर गैंग और लीक माफियाओं के उस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना है, जो प्रिंटिंग प्रेस से लेकर परीक्षा केंद्र के बीच के रास्ते में पेपर लीक की वारदातों को अंजाम देते थे।