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बंगाल चुनाव: BJP के प्रमुख नेताओं को चुनाव में उतारने की योजना, CM कैंडिडेट कौन बनेगा?

कलकत्ता  भाजपा पश्चिम बंगाल और केरल में मुख्यमंत्री पद के लिए घोषित चेहरे के बगैर चुनाव लड़ेगी। पश्चिम बंगाल में सभी 294 सीटों पर और केरल में एनडीए के दलों के साथ सभी 140 सीटों पर लड़ेगी। पश्चिम बंगाल में पार्टी पूर्व सांसदों के साथ ही लोकसभा में मौजूदा सांसदों को भी विधानसभा चुनाव मैदान में उतार सकती है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने दोनों राज्यों के विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नामों के साथ चुनावी रणनीति पर भी चर्चा की है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा पश्चिम बंगाल में इस बार पूरी ताकत से चुनाव मैदान में उतरेगी और वह अपने अधिकांश मौजूदा विधायकों के साथ पूर्व सांसदों को भी चुनाव मैदान में उतार रही है। पार्टी रणनीति के तहत मौजूदा सांसदों को भी चुनाव मैदान में उतारने पर विचार कर रही है। हालांकि, पार्टी इस बार भी किसी को बतौर मुख्यमंत्री पेश नहीं करेगी। सीएम कैंडिडेट कौन? केरल को लेकर पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा एनडीए के दो सहयोगी दलों ट्वेंटी 20 और भारतीय जन धर्म सेना के साथ सभी 140 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। भाजपा खुद 90 से 100 सीटों पर लड़ेगी और बाकी 40 सीट दोनों सहयोगियों को लगभग आधी-आधी बांटेगी। भाजपा ने पिछली बार 115 सीट पर और भारतीय जन धर्म सेना ने 21 सीट पर चुनाव लड़ा था। भाजपा इस बार बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के चुनाव लड़ेगी। उसने पिछली बार मेट्रो मैन ई. श्रीधरन को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया था, लेकिन उसका खाता भी नहीं खुला था। सूत्रों का कहना है कि इस बार चुनावी पोस्टर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे के साथ केंद्र सरकार का नाम और काम रहेगा। राज्य के नेताओं में केरल भाजपा के प्रमुख राजीव चंद्रखेशर, ट्वेंटी 20 के प्रमुख साबू एम. जैकब और भारतीय जन धर्म सेना के प्रमुक टी. वेल्लापेल्ली का चेहरा भी रहेगा। केरल में भाजपा स्थानीय निकायों के नतीजों से काफी उत्साहित है। खासकर राजधानी तिरुवनंतपुरम में पार्टी ने पहली बार अपना मेयर बनाया है।

कांग्रेस की वजह से बसपा का गठन, कांशीराम के नाम पर आयोजन पर मायावती ने किया कटाक्ष

लखनऊ  बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के माध्यम से कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस को दलितों के अपमान का प्रतीक बताते हुए कहा कि जिस पार्टी ने संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का सम्मान नहीं किया, वह आज कांशीराम जी के नाम पर राजनीति करने का ढोंग कर रही है। मायावती ने कहा कि कांग्रेस के कारण ही कांशीराम को बसपा बनानी पड़ी थी। अपने समर्थकों को आगाह किया कि वे कांग्रेस के इन 'हथकंडों' से सावधान रहें। कांग्रेस और सपा पर लगाया उपेक्षा का आरोप मायावती ने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस ने दशकों तक केंद्र की सत्ता संभाली, लेकिन कभी भी बाबा साहेब अंबेडकर को 'भारत रत्न' से सम्मानित नहीं किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जो पार्टी बाबा साहेब का आदर नहीं कर सकी, वह आज मान्यवर श्री कांशीराम जी को सम्मान देने की बात कैसे कर सकती है? मायावती ने उस दौर को याद दिलाया जब कांशीराम जी का निधन हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय केंद्र में बैठी कांग्रेस सरकार ने एक दिन का भी राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया था। इतना ही नहीं, उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने भी राजकीय शोक घोषित करने की जहमत नहीं उठाई थी। मायावती के अनुसार, ये दोनों पार्टियां दलित महापुरुषों के प्रति हमेशा से संकुचित मानसिकता रखती आई हैं। दलित संगठनों और अन्य पार्टियों को दी चेतावनी बसपा प्रमुख ने न केवल कांग्रेस, बल्कि उन छोटे दलित संगठनों और पार्टियों पर भी निशाना साधा जो कांशीराम जी के नाम का इस्तेमाल अपनी राजनीति चमकाने के लिए करते हैं। उन्होंने कहा कि दूसरी पार्टियों के हाथों में खेल रहे ये संगठन मान्यवर के नाम को भुनाने की कोशिश में लगे हैं ताकि बसपा को कमजोर किया जा सके। मायावती ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे ऐसे किस्म-किस्म के हथकंडों से सचेत रहें, क्योंकि इन सबका एकमात्र उद्देश्य बसपा के आधार को हिलाना है। 15 मार्च को देशव्यापी कार्यक्रमों की अपील मायावती ने अपने ट्वीट के अंत में सभी समर्थकों और कार्यकर्ताओं से भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि कल, यानी 15 मार्च 2026 को मान्यवर श्री कांशीराम जी की जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में आयोजित होने वाले पार्टी के कार्यक्रमों को भव्य और कामयाब बनाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि बसपा ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो कांशीराम जी के सिद्धांतों पर अडिग है और दलितों, पिछड़ों व अल्पसंख्यकों के हक की लड़ाई लड़ रही है।

राज्य सरकार का महा फेरबदल, मंत्रियों के बदले जाने की खबरें और नए नाम सामने

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजनीति में महा फेरबदल का बिगुल बज गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की दिल्ली में हुई अहम बैठकों के बाद अब कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, सरकार चार से पांच नए मंत्रियों को मौका देने की तैयारी में है।  कौन-कौन हो सकते हैं शामिल? गोपाल भार्गव: नौ बार के विधायक, अनुभव के साथ मजबूत दावेदार। मालिनी गौड़: इंदौर की प्रभावी महिला नेता। बृजेंद्र सिंह यादव: सिंधिया खेमे से संभावित। शैलेंद्र कुमार जैन, प्रदीप लारिया, अर्चना चिटनीस, कमलेश शाह: लगातार चर्चा में बने हुए। आदिवासी कोटे से भी किसी वरिष्ठ विधायक को मौका मिलने की संभावना। खाली पद और रणनीति मध्य प्रदेश में फिलहाल 31 सदस्यीय मंत्रिमंडल है, और चार पद खाली हैं। नई नियुक्तियों के जरिए क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को मजबूत करने की कोशिश होगी। संगठन में बदलाव कुछ मौजूदा मंत्रियों को संगठन में राष्ट्रीय जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं, जबकि नॉन-परफॉर्मिंग मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। नजर: नई नियुक्तियां नवरात्रि के आसपास की जा सकती हैं। राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज, आने वाले दिनों में हो सकता है बड़ा राजनीतिक शिफ्ट।

बंगाल चुनाव 2026: BJP ने तय किए 140 उम्मीदवार, रणनीति में बदलाव की उम्मीद

कलकत्ता पश्चिम बंगाल लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने तैयारियां तेज कर दी हैं। गुरुवार को दिल्ली में भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हुई। खबर है कि इस मीटिंग में बंगाल चुनाव के लिए करीब 140 उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए गए हैं। संभावना है कि अप्रैल के आखिर में ही बंगाल में चुनाव कराए जा सकते हैं। भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नवीन के पदभार संभालने के बाद चुनाव समिति की यह पहली बैठक थी। यह बैठक पीएम नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर ही थी। आमतौर पर भाजपा मुख्यालय में ही ऐसी बैठकें होती थीं, लेकिन इस बार पीएम मोदी के आवास पर यह बैठक हुई। राज्य में 294 विधानसभा सीटें हैं और भाजपा लगभग आधी सीटों पर सहमति बना चुकी है। माना जा रहा है कि इस संबंध में जल्दी ही ऐलान हो सकता है। भाजपा का फोकस है कि पहली लिस्ट जारी करने में बढ़त हासिल कर ली जाए। इसके अलावा कई पूर्व सांसदों को विधानसभा में उतारने का भी प्लान है। पहली लिस्ट में जिन लोगों के नाम आ सकते हैं, उनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष और पूर्व केंद्रीय मंत्री निसिथ प्रमाणिक और शुभेंदु अधिकारी शामिल हैं। हालांकि एक बदलाव पिछली बार के मुकाबले यह है कि मौजूदा सांसदों को नहीं उतारा जाएगा। 2021 के चुनाव में भाजपा 77 सीटों पर जीत हासिल करके मुख्य विपक्षी दल बन गई थी। हालांकि कई विधायकों के पार्टी छोड़ने के चलते फिलहाल राज्य में उसके पास 65 की ही संख्या है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि ज्यादातर विधायकों को फिर से टिकट मिल सकता है। एक रणनीति यह भी बदली है कि इस बार सिलेब्रिटी या फिर टीएमसी छोड़कर आने वाले लोगों को मौके नहीं दिए जाएंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि दलबदलुओं के फिर से दूसरे खेमे में जाने की संभावना अधिक रहती है। इसके अलावा सिलेब्रिटी स्टेटस रखने वाले लोग भी कुछ समय बाद राजनीतिक सक्रियता कम कर देते हैं। ऐसी स्थिति में पार्टी के पुराने नेताओं और वफादारों को ही मौका दिया जाएगा। ऐसा इसलिए ताकि कैडर उत्साहित रहे और जनता के बीच यह छवि भी बने कि भाजपा में आम कार्यकर्ताओं का सम्मान किया जाता है। क्यों भाजपा ने इस बार बदल दी 2021 वाली रणनीति 2021 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर उतरे कई नेताओं ने बाद में पाला बदल लिया था। ऐसे में भाजपा ने शायद सबक सीखा है। तब भाजपा ने टीएमसी से आए कई नेताओं और फिल्मी कलाकारों को खूब मौके दिए थे। उम्मीदवारों के चयन में जिताऊ फैक्टर को ध्यान में रखा गया है। इसके अलावा संगठन क्षमता, जाति समीकरण और संगठन के लिए प्रतिबद्धता जैसे फैक्टरों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। गौरतलब है कि भाजपा ने राज्य में चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया है। हाल ही में अमित शाह ने एक रैली में वादा किया था कि भाजपा के सत्ता में आते ही सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू कर दिया जाएगा।

थरूर ने अय्यर को दिया करारा जवाब, नेहरू पर टिप्पणी से लेकर तंज तक छिड़ी सियासी बहस

ईरान ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध को लेकर भारत के स्टैंड पर सरकार को कांग्रेस घेरने में जुटी है। इस बीच उसके ही दो वरिष्ठ नेता आपस में उलझे हुए हैं और सार्वजनिक रूप से खुले खत लिखकर एक-दूसरे पर बरस रहे हैं। पहले मणिशंकर अय्यर ने फ्रंटलाइन पत्रिका में एक लेख लिखकर शशि थरूर पर नेहरूवादी नीति से भटकने का आरोप लगाया था। इजरायल और अमेरिका पर उनके रुख की आलोचना की थी। अब उन्हें जवाब देते हुए शशि थरूर ने भी विस्तार से पोस्ट लिखा है। एक्स पर ही जवाब देते हुए थरूर ने लिखा है कि असहमति होने में कुछ गलत नहीं है। लोकतंत्र की यही खूबी है कि लोग अलग-अलग राय रख सकते हैं। इसके आगे उन्होंने मणिशंकर अय्यर को आड़े हाथों लेते हुए लिखा, 'सिर्फ इसलिए कि कोई विदेश नीति को थोड़ा अलग तरीके से देखता है, उसकी नीयत या देशभक्ति पर सवाल उठाना ठीक नहीं है। आपने मेरे विचारों और मेरे चरित्र के बारे में जो सार्वजनिक टिप्पणी की है, उसका जवाब देना जरूरी हो गया है।' वह लिखते हैं कि मैंने हमेशा अंतरराष्ट्रीय मामलों को भारत के राष्ट्रीय हित के नजरिए से देखा है। मेरे लिए भारत की सुरक्षा, भारत की अर्थव्यवस्था और दुनिया में भारत की इज्जत सबसे ऊपर है। दुनिया की राजनीतिक हकीकत को समझना और भारत के हितों को ध्यान में रखकर फैसला लेना कोई 'मोरल सरेंडर' नहीं है — यह जिम्मेदार स्टेटक्राफ्ट है। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा सिद्धांत और व्यवहारिकता का संतुलन रही है। जवाहर लाल नेहरू की गुटनिरपेक्ष नीति से लेकर आज की बहु-ध्रुवीय कूटनीति तक भारत का मकसद हमेशा एक ही रहा है, अपनी संप्रभुता की रक्षा करना और दुनिया में न्याय की बात करना। संसद में हो या संसद के बाहर, मेरा रिकॉर्ड इसी संतुलन को दिखाता है। देशभक्ति पर किसी एक पीढ़ी का अधिकार नहीं है। और न ही गांधी जी या नेहरू जी को समझने का अधिकार किसी एक समूह के पास है। असली सम्मान यही है कि उनके विचारों को आज के समय की हकीकत के साथ समझकर लागू किया जाए। इसके आगे वह लिखते हैं, ‘इतिहास में भी भारत ने कई बार ऐसा किया है कि किसी देश की गलत कार्रवाई को तुरंत सार्वजनिक रूप से नहीं ललकारा, क्योंकि हमारे अपने राष्ट्रीय हित उससे जुड़े हुए थे। उदाहरण के लिए, सोवियत यूनियन के साथ हमारे रिश्ते इतने महत्वपूर्ण थे कि हंगरी, चेकोस्लोवाकिया और अफगानिस्तान के मामलों में भी भारत ने बहुत संतुलित रुख अपनाया। आज भी खाड़ी देशों के साथ भारत के बहुत बड़े हित जुड़े हैं। लगभग 200 अरब डॉलर का व्यापार, हमारी ऊर्जा सुरक्षा और करीब 90 लाख भारतीय वहां काम कर रहे हैं। ऐसे में विदेश नीति बनाते समय इन सब बातों को ध्यान में रखना पड़ता है।’ सरेंडर वाली बात पर भी मणिशंकर अय्यर को खूब सुनाया अय्यर के सरेंडर वाले कॉमेंट पर भी थरूर ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यथार्थ को समझना किसी के आगे झुकना नहीं होता। आज अमेरिका में ऐसी सरकार है जो अंतरराष्ट्रीय कानून को हमेशा उसी तरह प्राथमिकता नहीं देती जैसे हम देना चाहते हैं। लेकिन अगर हम उसे खुलकर चुनौती देते हैं तो उसके परिणाम भी हो सकते हैं। अपने हाल के लेख में मैंने साफ लिखा है कि यह युद्ध अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं और इसे तुरंत खत्म होना चाहिए। लेकिन साथ ही मैंने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ हमारे कई महत्वपूर्ण हित जुड़े हैं, उन्हें खतरे में डालना समझदारी नहीं होगी। विदेश नीति आखिरकार राष्ट्रीय हित के बारे में ही होती है, केवल भाषण देने या दिखावे की राजनीति करने के बारे में नहीं। क्या सरकार देती है विदेश जाने का पैसा? थरूर ने दिया जवाब उन्होंने एक के बाद एक सभी आरोपों पर जवाब दिया और यह भी बताया कि उनकी विदेश यात्राओं को सरकार प्रायोजित ना बताया जाए। वह लिखते हैं, 'मेरी विदेश यात्राओं को लेकर जो आरोप लगाए गए हैं, वे बिल्कुल बेबुनियाद हैं। ऑपरेशन सिंदूर को छोड़कर मेरी बाकी विदेश यात्राएं निजी रही हैं। न उन्हें सरकार आयोजित करती है, न सरकार उनका खर्च उठाती है। दुनिया भर के कई विश्वविद्यालय और संस्थान मुझे बुलाते हैं, जितने निमंत्रण आते हैं, उनमें से ज्यादातर को मैं अपने काम के कारण स्वीकार भी नहीं कर पाता। इसके बाद जहां तक क्षेत्रीय राजनीति की बात है, मेरे विचार सालों से एक जैसे रहे हैं। अय्यर पर कसे तीखे तंज, बोले- अब जवाब देना जरूरी था अय्यर पर दोहरे रवैये के लिए तंज भी शशि थरूर ने कसा। उन्होंने लिखा, 'आपने कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में मेरा समर्थन किया, उसके लिए मैं आपका आभारी हूं। फिर जब आपको पार्टी से निलंबित किया गया था, तब मैंने भी आपके समर्थन में आवाज उठाई थी। मुझे खुशी है कि वह निर्णय बाद में ठीक किया गया। आपने अपने पत्र के अंत में 'रास्ते अलग होने' की बात कही। सच यह है कि आपरेशन सिंदूर पर मेरे बोलने के बाद से ही आप लगातार मेरे बारे में कई टिप्पणियां कर रहे थे। मैंने अब तक सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया नहीं दी थी, लेकिन आपकी हाल की टिप्पणियों के बाद जवाब देना जरूरी हो गया, इसलिए दे रहा हूं।'  

निशिकांत दुबे का राहुल गांधी पर हमला: कहा– PM मोदी से हर वक्त विदेशी नेताओं को कोसने की उम्मीद रखते हैं

नई दिल्ली भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर एक बार फिर से निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि राहुल चाहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह, दोपहर और शाम को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को गाली दें। इसी से उनकी आत्मा को शांति मिलेगी। निशिकांत दुबे ने कहा, ''इस देश में समस्या है कि विकसित भारत 2047 कैसे बनेगा, देश का विकास कैसे होगा। प्रधानमंत्री उसी के लिए पूरे देश को मिशन मोड में ले जा रहे हैं। लेकिन गांधी परिवार का जो इतिहास रहा है, श्रीलंका में लड़ाई चल रही थी, उसमें भारतीय सेना को राजीव गांधी जबरदस्ती ले गए और उसका नतीजा यह रहा कि विदेश में पहली बार वहां के सैनिकों ने हमारे प्रधानमंत्री पर हमला किया।'' उन्होंने आगे कहा, ''राहुल गांधी के पूरे साल दो साल के बयान हैं, उसको सुनिए। वे चाहते हैं कि पीएम मोदी सुबह ट्रंप को गाली दें, दोपहर में पुतिन को गाली दें और शाम को चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग को गाली दें। इन तीनों को गाली देने के बाद उनकी आत्मा को शांति मिल जाएगी। उसके बाद चीन अमेरिका और रूस हमारा बॉयकॉट कर देगा और हमला कर देगा, तब उनके कलेजे को ठंडक मिलेगी। क्योंकि सोरोस का जो एजेंडा है, भारत को तोड़ने का, वह सफल हो जाएंगे।'' एलपीजी की अनुपलब्धता पर चल रही बहस का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि जहां कई पड़ोसी देश इसकी कमी का सामना कर रहे हैं, वहीं भारत कहीं बेहतर स्थिति में है। उन्होंने दावा किया, ''आपको यह समझना चाहिए: पाकिस्तान लगभग चार दिन से एक तरह से बंद है। वहां लगभग 90 प्रतिशत रेस्टोरेंट बंद हैं। बांग्लादेश में लगभग 95 प्रतिशत रेस्तरां बंद हो गए हैं। श्रीलंका में लगभग 98 प्रतिशत रेस्तरां बंद हैं और वहां गाड़ियां भी नहीं चल रही हैं।'' राहुल गांधी को बताया लीडर ऑफ प्रोपगेंडा इससे पहले, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को 'लीडर ऑफ अपोजिशन' के बजाय 'लीडर ऑफ प्रोपगेंडा' करार देते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने मंगलवार को कहा कि राहुल गांधी को देश और मीडिया गंभीरता से नहीं लेता। लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाए गए विपक्ष के संकल्प पर चर्चा में भाग लेते हुए दुबे ने कहा कि जब भाजपा विपक्ष में थी तो सदन में कई बार ऐसे मौके आए, जब टकराव की स्थिति बनी थी। उन्होंने कहा कि उस समय विपक्षी सदस्यों को परेशान किया गया था, लेकिन भाजपा ने मौजूदा विपक्ष की तरह तुच्छ राजनीति नहीं की। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब कोई 'इग्नोरेंट' (अज्ञानी) आदमी 'ऐरोगेंस' (अहंकार) का शिकार हो जाए तो वह 'लीडर ऑफ अपोजिशन' (एलओपी) के बजाय 'लीडर ऑफ प्रोपगेंडा' हो जाता है। दुबे ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस अब तक 95 चुनाव हार चुकी है और मीडिया तथा देश उन्हें गंभीरता से नहीं ले रहा। उन्होंने कहा कि वे (कांग्रेस) 12 साल से सरकार में नहीं आ पा रहे, अपने हिसाब से संस्थाओं को नहीं चला पा रहे, इसलिए ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव लाया है।  

ओम बिरला पर विपक्ष का तंज: शेरो-शायरी के जरिए साधा निशाना

नई दिल्ली संसद में बजट सत्र के दूसरे चरण की कार्यवाही के दौरान बुधवार को लोकसभा में जबरदस्त हंगामा होने के पूरे आसार है। सदन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा जारी है। आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह चर्चा में हिस्सा लेंगे। इससे पहले मंगलवार को दोनों ओर से आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी रहा। विपक्ष ने जहां ओम बिरला पर सरकार की आवाज बनने जैसे गंभीर आरोप लगा दिए, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने कहा है कि ओम बिरला ने कभी पक्षपातपूर्ण व्यवहार नहीं किया। हंगामे के बाद दोनों सदनों की कार्रवाई बुधवार तक के लिए स्थापित कर दी गई थी। ओम बिरला को पद से हटाने पर तुला विपक्ष, चाहिए होंगे कितने वोट? बता दें कि ओम बिरला के खिलाफ यह अविश्वास प्रस्ताव बीते फरवरी माह में ही लाया गया था जिस पर लगभग 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे। इस प्रस्ताव पर बहस के लिए 10 घंटे का समय तय किया गया है, जिसके बाद इस पर सांसदों के मत लिए जाएंगे। प्रस्ताव पास कराने के लिए विपक्ष को सिंपल मेजोरिटी यानि साधारण बहुमत की आवश्यकता है। तू लाख बेवफा है मगर सर उठा के चल… TMC सांसद का शायराना अंदाज टीएमसी संसद सयानी घोष ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि सरकार सदन में बेरोजगारी, एपस्टीन फाइल्स, SIR जैसे मुद्दों पर चर्चा नहीं होने देती है। वहीं ओम बिरला के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें खेद हैं कि वह पहली बार सांसद बनी हैं लेकिन उन्हें ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करता पड़ा है। इस दौरान उनका शायराना अंदाज देखने भी को मिला। उन्होंने अपना वक्तव्य खत्म करते हुए कहा, "तू लाख बेवफा है मगर सर उठा के चल, दिल रो पड़ेगा तुझको पशेमां देखकर।" किसी नेता के अहंकार की संतुष्टि के लिए लाया गया है प्रस्ताव- रविशंकर प्रसाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए विपक्ष द्वारा लाया गया प्रस्ताव उनके खिलाफ अविश्वास के लिए नहीं, बल्कि 'किसी' के अहंकार की संतुष्टि के लिए लाया गया है। विपक्ष द्वारा बिरला के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए प्रसाद ने कहा, ''लोकसभा अध्यक्ष के पद के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को किसी के अहंकार की संतुष्टि का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।'' प्रसाद ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधते हुए कहा, ''यह प्रस्ताव बिरला के खिलाफ अविश्वास के लिए नहीं, बल्कि किसी के अहं की संतुष्टि के लिए लाया गया है।'' कांग्रेस ने ओम मोदी की गैरमौजूदगी पर उठाए सवाल कांग्रेस सांसद के सी वेणुगोपाल ने लोकसभा में पीएम मोदी की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाए हैं। अपना नाम लिए जाने पर भड़के राहुल गांधी लोकसभा में चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष द्वारा बार बार अपना नाम लिए जाने पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भड़क उठे। उन्होंने कहा है कि देश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब नेता प्रतिपक्ष को सदन में बोलने नहीं दिया गया। और बार बार मेरा नाम लिया जा रहा है।

राज्यसभा के लिए 26 नेता निर्वाचित, शरद पवार-सिंघवी शामिल; हरियाणा और बिहार में चुनाव से तय होंगे नतीजे

नई दिल्ली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) प्रमुख शरद पवार और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले समेत 26 उम्मीदवार सोमवार (9 मार्च) को राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए। नाम वापसी की आखिरी तारीख बीत जाने के बाद, अब उच्च सदन की 11 सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होगा। बिहार में पांच, ओडिशा में चार और हरियाणा में दो सीटे हैं जहां चुनाव होगा। इन द्विवार्षिक चुनावों में बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा के लिए चुने जाने की पूरी संभावना है। 10 राज्यों में खाली हुई 37 सीटों के लिए कुल 40 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया था। नाम वापसी के बाद, अब बिहार, ओडिशा और हरियाणा में एक-एक सीट के लिए कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। 11 सीटों के लिए अब कुल 14 उम्मीदवार चुनावी मैदान में बचे हैं। भाजपा ने नियुक्त किए केंद्रीय पर्यवेक्षक भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार (9 मार्च) को बिहार, हरियाणा और ओडिशा में राज्यसभा चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की एक अधिसूचना जारी की। बिहार: केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा और छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा। हरियाणा: गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी। ओडिशा: महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले। राज्यों में चुनावी समीकरण और कड़ा मुकाबला बिहार (5 सीटें) बिहार में एक सीट के लिए दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा क्योंकि राजद (RJD) ने व्यवसायी से राजनेता बने अपने मौजूदा सांसद अमरेंद्र धारी सिंह को फिर से उम्मीदवार बनाया है। एनडीए के उम्मीदवार: केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर (हैट्रिक की कोशिश में), रालोमो (RLM) अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (लगातार दूसरे कार्यकाल की उम्मीद में) और भाजपा के प्रदेश महासचिव शिवेश कुमार अपना संसदीय पदार्पण कर रहे हैं। नीतीश कुमार का ऐतिहासिक कदम: नीतीश कुमार ने पिछले सप्ताह राज्यसभा जाने के अपने फैसले की घोषणा की थी, जिससे राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री (20 वर्ष) के रूप में उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है। राजद का समीकरण: राजद के पास 25 विधायक हैं और कांग्रेस-वाम दलों सहित महागठबंधन के 10 अन्य विधायकों का समर्थन है। पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) और बसपा (BSP) की मदद से छह वोटों की अपनी कमी को पूरा करने की उम्मीद कर रही है। बिहार विधानसभा सचिव ख्याति सिंह के अनुसार, छह उम्मीदवारों में से किसी ने भी अपना नामांकन वापस नहीं लिया, जिसके कारण राज्य में एक दशक से अधिक समय में पहली बार मतदान की आवश्यकता पड़ रही है। ओडिशा (4 सीटें) ओडिशा में भी एक सीट के लिए मुकाबला तय है। भाजपा उम्मीदवार: प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और मौजूदा राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार। बीजद उम्मीदवार: संतरूप मिश्रा और प्रख्यात यूरोलॉजिस्ट डॉ. दातेश्वर होता। भाजपा के समर्थन से दिलीप रे ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा है, जिससे यहां क्रॉस-वोटिंग की संभावना बढ़ गई है। हरियाणा (2 सीटें) हरियाणा में भी एक सीट के लिए कड़ा मुकाबला होना है, जहां पहले भी क्रॉस-वोटिंग का इतिहास रहा है। कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं और एक सीट जीतने के लिए विपक्षी पार्टी को केवल 31 पहली पसंद वाले वोटों की आवश्यकता है। मैदान में उम्मीदवार: भाजपा से संजय भाटिया, कांग्रेस से करमवीर सिंह बौद्ध और निर्दलीय सतीश नांदल। नांदल ने 2019 में भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था और अब वह मैदान में तीसरे उम्मीदवार के रूप में उतरे हैं। विभिन्न राज्यों से निर्विरोध चुने गए उम्मीदवार चुनावों के इस दौर के बाद राज्यसभा में भाजपा की सीटें बढ़ने की उम्मीद है और वह उच्च सदन में सबसे अधिक सीटों वाली पार्टी बनी रहेगी। लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष एम. थंबीदुरई और कांग्रेस के जाने-माने वकील अभिषेक मनु सिंघवी भी उन नेताओं में शामिल हैं जो उच्च सदन के लिए निर्विरोध चुने गए हैं। महाराष्ट्र (7 सीटें): सभी सात उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। इनमें सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के छह और विपक्षी महाविकास अघाड़ी के उम्मीदवार शरद पवार शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले, भाजपा नेता विनोद तावड़े, रामराव वडकुटे (भाजपा), नागपुर की पूर्व मेयर माया इवनाते (भाजपा), एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की ज्योति वाघमारे और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार निर्विरोध निर्वाचित हुए। पश्चिम बंगाल (5 सीटें): सत्तारूढ़ टीएमसी (TMC) के चार उम्मीदवार – बाबुल सुप्रियो, पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी राजीव कुमार, सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी और अभिनेत्री कोयल मल्लिक निर्विरोध चुने गए। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा भी निर्विरोध जीते। असम (3 सीटें): सत्तारूढ़ एनडीए के तीन उम्मीदवार- जोगेन मोहन और तेरश गोवाला के साथ-साथ यूपीपीएल (UPPL) के प्रमोद बोरो- निर्विरोध निर्वाचित हुए। तेलंगाना (2 सीटें): कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक सिंघवी और वेम नरेन्दर रेड्डी निर्विरोध चुने गए। तमिलनाडु (6 सीटें): सभी छह उम्मीदवार निर्विरोध जीते। अन्नाद्रमुक (AIADMK) के मौजूदा सांसद एम. थंबीदुरई, पीएमके नेता अंबुमणि रामदास, सत्तारूढ़ द्रमुक (DMK) के तिरुची शिवा और जे कॉन्स्टेंटाइन रवींद्रन, कांग्रेस के एम क्रिस्टोफर तिलक और डीएमडीके के कोषाध्यक्ष एल.के. सुधीश निर्वाचित हुए। छत्तीसगढ़ (2 सीटें): भाजपा की लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस की फूलो देवी नेताम निर्विरोध जीतीं, क्योंकि दो सीटों के लिए केवल यही दो उम्मीदवार मैदान में थीं। हिमाचल प्रदेश (1 सीट): मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के करीबी विश्वासपात्र कांग्रेस उम्मीदवार अनुराग शर्मा निर्विरोध निर्वाचित हुए।  

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर AAP का बयान, केजरीवाल केस की सुनवाई के बीच BJP कनेक्शन पर विवाद

नई दिल्ली कथित शराब घोटाले से जुड़े केस की सुनवाई कर रहीं हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर आम आदमी पार्टी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। 'आप' ने सवाल किया है कि भाजपा और जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के बीच क्या रिश्ता है? कथित शराब घोटाले से जुड़े केस की सुनवाई कर रहीं हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर आम आदमी पार्टी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। 'आप' ने सवाल किया है कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से क्या रिश्ता है? आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भाजपा नेताओं के बयानों के मायने तलाशते हुए जज को लेकर यह सवाल उठाया है। कथित शराब घोटाले के केस में ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी को अरविंद केजरीवाल समेत सभी 23 आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया था। सीबीआई ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी है और जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच इसकी सुनवाई कर रही है। सोमवार को जस्टिस स्वर्ण कांता ने फौरी तौर पर सीबीआई को राहत दी तो भाजपा नेताओं ने उम्मीद जाहिर की कि ‘पिक्चर अभी बाकी’ है। अब इसी को आधार बनाकर 'आप' ने जज की निष्पक्षता पर सवाल उठा दिए हैं। पूर्व मंत्री और आप के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस वीरेंद्र सचदेवा का एक बयान सुनाया और दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा का ट्वीट दिखाया। उन्होंने कहा, ‘जिस तरीके से दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा कह रहे हैं कि निश्चित सजा मिलेगी, इनके मंत्री कपिल मिश्रा कह रहे हैं कि पिक्चर अभी बाकी है। इन्हें कैसे पता कि पिक्चर अभी बाकी है। पिक्चर में क्या बाकी है, यह कपिल मिश्रा को कैसे पता, यह तो अभी हाई कोर्ट की जज साहिबा को भी नहीं पता होगा। अभी वह केस पढ़ेंगी तब पता चलेगा।’ कपिल मिश्रा की वजह से हो गया था जज का ट्रांसफर: भारद्वाज भारद्वाज ने कहा कि वीरेंद्र सचदेवा कैसे कह सकते हैं कि निश्चित तौर पर सजा मिलेगी। क्या ये सीधे तौर पर यह कहने की कोशिश कर रहे हैं कि इन्हें मालूम है कि इस मुकदमे में क्या होगा। इन्हें पता है कि पिक्चर आगे क्या है? क्या ये कहना चाह रहे हैं कि हम जो फैसला चाहेंगे वह जस्टिस स्वर्ण कांता से करा लेंगे? 'आप' नेता ने कपिल मिश्रा का प्रभाव बताते हुए आरोप लगाया कि हाई कोर्ट के एक जज ने उनके खिलाफ एफआईआर का आदेश दिया और अगले दिन अदालत में तलब किया तो रात को ही उनका ट्रांसफर हो गया। जज का पूछ लिया भाजपा से रिश्ता सौरभ भारद्वाज ने कई सवालों के बीच जस्टिस का भाजपा से रिश्ता भी पूछ लिया। उन्होंने कहा, 'कपिल मिश्रा का यह कहना कि पिक्चर अभी बाकी है, यह कुछ सवाल पैदा करता है। क्या जस्टिस क्या करेंगी यह इनको मालूम है? इनका क्या सवाल आता है। जस्टिस स्वर्ण कांता का भाजपा से क्या रिश्ता है,यह इन लोगों को बताना चाहिए। वीरेंद्र सचदेवा और कपिल मिश्रा कैसे कह सकते हैं कि पिक्चर अभी बाकी है। मैं आपके सामने गंभीर सवाल रख रहा हूं।'

INDIA मीटिंग में राहुल गांधी बने निशाने पर, वामपंथी दल बोले– गठबंधन ऐसे नहीं चलेगा

नई दिल्ली सोमवार को अलायंस की मीटिंग में दिल्ली में थी, जिसमें संसद सत्र को लेकर चर्चा होनी थी। लेकिन इस दौरान लेफ्ट पार्टियों ने सीधे राहुल गांधी पर ही हमला बोल दिया। इन दलों ने ऐतराज जताया कि राहुल गांधी केरल में जिस तरह से लेफ्ट पार्टियों पर हमला बोल रहे हैं, वह ठीक नहीं है। केरल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और मुकाबले में लेफ्ट के नेतृत्व में एलडीएफ गठबंधन है तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस का यूडीएफ है। चुनाव से पहले बयानबाजी का दौर तेज है, लेकिन इसका असर दिल्ली तक दिख रहा है और INDIA गठबंधन में भी तनाव पैदा हो रहा है। सोमवार को अलायंस की मीटिंग में दिल्ली में थी, जिसमें संसद सत्र को लेकर चर्चा होनी थी। लेकिन इस दौरान लेफ्ट पार्टियों ने सीधे राहुल गांधी पर ही हमला बोल दिया। इन दलों ने ऐतराज जताया कि राहुल गांधी केरल में जिस तरह से लेफ्ट पार्टियों पर हमला बोल रहे हैं, वह ठीक नहीं है। इससे INDIA अलायंस की एकता प्रभावित होगी और संबंध में कड़वाहट आ जाएगी। वामपंथी दलों के सांसद जॉन ब्रिट्स और पी. संतोष कुमार ने मीटिंग में आपत्ति जताई कि राहुल गांधी कम्युनिस्ट पार्टी और भाजपा के बीच गठजोड़ की बात कैसे कर सकते हैं। दरअसल राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि केरल में भाजपा और कम्युनिस्ट दलों के बीच तालमेल है। यही नहीं उन्होंने आरोप लगाते हुए एक टर्म भी दी थी- कम्युनिस्ट जनता पार्टी। वामपंथी दलों के नेताओं को सबसे ज्यादा यह टर्म ही चुभी है, जिसमें उन्हें कम्युनिस्ट जनता पार्टी कहा गया। वामपंथी नेताओं ने कहा कि इस तरह सहयोगी दलों पर टिप्पणियां करने से गठबंधन कैसे चल पाएगा। वहीं वामपंथी नेताओं की शिकायत पर कुछ और दलों के नेताओं ने दखल दिया। उन्होंने कहा कि यह मीटिंग तो संसद सत्र के एजेंडे को लेकर बुलाई गई है। ऐसे में इस फोरम पर दो दलों के आपसी संबंधों को लेकर बात नहीं करनी चाहिए। यही नहीं कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी मीटिंग के दौरान लेफ्ट सांसदों के रुख पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस मसले पर बाद में बात की जाएगी और हम बताएंगे कि आखिर राहुल गांधी के कहने का क्या मतलब था। उन्होंने कहा कि मीटिंग में इस तरह राहुल गांधी की स्पीच के एक हिस्से को मुद्दा बनाना ठीक नहीं है। राहुल गांधी भी बैठक में थे मौजूद, वामपंथी नेताओं की आपत्ति पर क्या बोले इस दौरान राहुल गांधी भी मौजूद थे और उन्होंने भी यही कहा कि इस पर बाद में बात की जाएगी। इस दौरान ज्यादातर नेताओं ने यही कहा कि हमें फिलहाल बैठक में संसद के एजेंडे पर फोकस करना चाहिए। गौरतलब है कि अगले कुछ महीनों में ही केरल में इलेक्शन होने वाले हैं। बीते लगातार दो कार्यकाल से वामपंथी नेतृत्व वाली सरकार केरल की सत्ता पर काबिज है। यहां भाजपा तीसरे नंबर की पार्टी है, जबकि कांग्रेस मुकाबले में रही है। ऐसे में कांग्रेस को लगता है कि इस बार वह सत्ता हासिल कर लेगी। केरल की ही वायनाड लोकसभा सीट से राहुल गांधी सांसद रहे हैं। फिलहाल यहां का प्रतिनिधित्व उनकी बहन प्रियंका वाड्रा करती हैं।