samacharsecretary.com

पंजाब से दो नेताओं को मिल सकती है मंत्रिमंडल में जगह

नई दिल्ली  मोदी कैबिनेट का विस्तार इस महीने के आखिरी में या फिर अगले महीने हो सकता है। केंद्र सरकार के तीसरे कार्यकाल का यह पहला मंत्रिमंडल विस्तार होने जा रहा है। इसमें उन राज्यों पर भी फोकस हो सकता है, जिसमें आने वाले सालों में विधानसभा चुनाव होने हैं। उत्तर प्रदेश, पंजाब जैसे राज्यों में अगले साल ही चुनाव हैं और यूपी में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पार्टी मजबूत स्थिति में है, जबकि पंजाब में अकेले दम पर जीतने की तैयारी कर रही है। इसी वजह से केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को राज्यसभा टिकट नहीं दिया गया और उन्हें संभवत: विधानसभा चुनाव लड़वाया जा सकता है। इसके अलावा भी कई दिग्गज पंजाब के नेताओं को चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी है। वहीं, चर्चाएं हैं कि कैबिनेट विस्तार में पंजाब से दो बड़े नेताओं को जगह मिल सकती है। एक हैं भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और दूसरे अभी हाल ही में आम आदमी पार्टी से आए लोकप्रिय राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा। सूत्रों के अनुसार, इन दोनों नेताओं को पंजाब कोटे से मोदी मंत्रिमंडल में मंत्री बनाया जा सकता है। अमृतसर से आते हैं तरुण चुघ, इस बार MP से जाएंगे राज्यसभा तरुण चुघ की गिनती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसेमंद नेताओं में होती है। वह पंजाब के अमृतसर जिले से आते हैं और एचआर में एमबीए की डिग्री हासिल की है। वह लंबे समय से आरएसएस से जुड़े रहे हैं और इस समय पार्टी के महासचिव हैं। वहीं, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना, लद्दाख में भाजपा के इनचार्ज हैं। उन्होंने राज्य BJP सचिव और राज्य भाजपा ट्रेनिंग सेल के इंचार्ज के तौर पर काम किया। 1997 में भाजपा युवा विंग पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष और युवा मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य के तौर पर भी काम कर चुके हैं। सूत्रों की मानें तो मोदी सरकार में तरुण चुघ को कोई अहम मंत्रालय दिया जा सकता है। युवाओं के मुद्दे उठाने वाले राघव चड्ढा पर भी अटकलें पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट और बड़ी संख्या में युवाओं में लोकप्रिय राघव चड्ढा का भी नाम उन नेताओं में शामिल हैं, जिनके मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होने की संभावना है। राघव एक समय आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के करीबी हुआ करते थे, लेकिन पिछले दिनों उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर ली। उनको मिलाकर सात आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों ने भाजपा का दामन थामा। इसमें हरभजन सिंह, संदीप पाठक, स्वाति मालीवाल समेत तमाम अन्य सांसदों के नाम हैं। राघव लंबे समय से युवाओं पर केंद्रित मुद्दों को सदन में उठाते रहे हैं, जिसकी वजह से सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हुए और इंस्टाग्राम पर उनकी रील्स को लाखों युवाओं ने देखा।  हालांकि, जब आप छोड़ी तो फॉलोवर्स भी कम हुए। हालांकि, अब अगले साल पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए और चर्चित चेहरा राघव चड्ढा को अहम मंत्रालय भी मिल सकता है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को यूपी भाजपा अध्यक्ष बनाया गया है तो ऐसे में उनकी भी मंत्रिमंडल से छुट्टी होना तय है। कयास लगाए जा रहे हैं कि उनकी जगह पर राघव को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। राघव पढ़े-लिखे और पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और इस मंत्रालय के लिए तमाम योग्य सांसदों में से एक हैं।  

इंडिया गठबंधन बैठक से पहले ममता की दिल्ली में सियासी सक्रियता तेज

पश्चिम बंगाल बंगाल का चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी का किला ध्वस्त हो चुका है। ममता ने न सिर्फ सत्ता गंवाई, बल्कि उनकी पार्टी, टीएमसी में भगदड़ मची हुई है। घर को बिखरता देख अब दीदी को इंडिया गठबंधन की याद सताने लगी हैं। वह दिल्ली में होने वाली इंडिया गठबंधन की बैठक में हिस्सा लेने पहुंच रही हैं। बता दें कि एक वक्त था जब ममता ने इंडिया गठबंधन को दरकिनार किया था। लेकिन बदलते हालात में अपनी साख बचाने के लिए ममता बनर्जी अब फिर से इंडिया गठबंधन का सहारा लेती नजर आ सकती हैं। जानकारों के मुताबिक इस बैठक के जरिए ममता बनर्जी न सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहती हैं, बल्कि अपनी पार्टी के अंदर भी अपनी स्थिति को मजबूत करना चाहती हैं अभिषेक पहले ही पहुंच चुके गौरतलब है कि विपक्ष की बैठक 8 जून को नई दिल्ली में होने वाली है। इस बैठक में टीएमसी चीफ ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के पहुंचने का अनुमान है। ममता बनर्जी के रविवार को दिल्ली पहुंचने और मंगलवार तक यहां रुकने का अनुमान है। वहीं, अभिषेक बनर्जी पहले ही राजधानी में पहुंच चुके हैं। ममता की दिल्ली यात्रा ऐसे वक्त में हो रही है, जब वह अपनी पार्टी के लिए रिकवरी का रास्ता तैयार कर रही हैं। बता दें कि बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी ने 15 साल पुरानी सत्ता गंवा दी है। भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस को शिकस्त देकर बंगाल में पहली बार सत्ता हासिल की है। सोनिया से कर सकती हैं मुलाकात बताया जाता है कि ममता बनर्जी अपनी पार्टी के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पकड़ को मजबूत बनाना चाहती हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता के हवाले से यह बात कही है। इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि दिल्ली यात्रा के दौरान ममता सोनिया गांधी से मुलाकात के मौके भी तलाशेंगी। हालांकि गांधी परिवार की तरफ से इसको लेकर पुष्टि नहीं की गई है। असल में पिछले कुछ वक्त में टीएमसी और कांग्रेस के बीच रिश्ते बहुत अच्छे नहीं रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा दरार तो इंडिया गठबंधन के नेतृत्व के फैसले को लेकर आई थी। पुराने बयान भारी न पड़ जाएं बंगाल के एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहाकि जब ममता जीत रही थीं तो वह जो भी मन में आता था कांग्रेस के लिए बोल देती थीं। उन्होंने राहुल गांधी की भी आलोचना की और कांग्रेस नेतृत्व से इंडिया गठबंधन का नेतृत्व छीनने की भी कोशिश की। अब उनका खराब समय आया है तो कांग्रेस उनका साथ तो नहीं छोड़ेगी, लेकिन हम करीबी दोस्तों की तरह भी नहीं रहेंगे। गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर बदलाव किए हैं। इस बदलाव में अभिषेक बनर्जी तो पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बने हुए हैं। लेकिन दो अन्य संयुक्त राष्ट्रीय महासचिव के रूप में राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन और डोना सेन को भी जोड़ा गया है। माना जा रहा है कि यह कदम डिसीजन मेकिंग का दायरा बढ़ाने और अभिषेक बनर्जी को लेकर बढ़ती आलोचना को देखते हुए उठाया गया है। आठ जून को है बैठक बता दें कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक आठ जून को होगी। इसमें नीट परीक्षा से जुड़े विवाद, शिक्षा व्यवस्था, महंगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि, चुनाव से जुड़े मुद्दों तथा संसद के मानसून सत्र के लिए साझा रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। कांग्रेस की पहल पर हो रही इस बैठक को विपक्षी दलों के बीच समन्वय मजबूत करने की कोशिश बताया जा रहा है। बैठक सोमवार आठ जून को यहां कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में होगी। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) ने बैठक में शामिल नहीं होने की घोषणा की है। आम आदमी पार्टी पहले ही इंडिया गठबंधन से दूरी बना चुकी है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल बैठक के एजेंडे और इसकी तैयारियों को लेकर विभिन्न विपक्षी नेताओं से लगातार संपर्क में है। विपक्षी दल जनता से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने और संसद से लेकर सड़क तक संयुक्त संघर्ष की रणनीति पर सहमति बनाने का प्रयास कर सकते हैं।

कांग्रेस पर CPI(M) का हमला, विपक्षी गठबंधन में बढ़ा तनाव

नई दिल्ली इंडिया ब्लॉक की सोमवार (8 जून) को प्रस्तावित बैठक से ठीक पहले मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं. द्रमुक (DMK) द्वारा कांग्रेस की मौजूदगी के कारण इस बैठक से दूर रहने की घोषणा के बाद अब CPI (M) ने भी कांग्रेस की कार्यशैली पर भारी नाराजगी जताई है. CPI(M) ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि केरल में उसके नेताओं द्वारा लगाए गए BJP के साथ ‘डील’ के आरोप गठबंधन की मूल भावना के खिलाफ हैं. उधर, सूत्रों का ये भी कहना है कि झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस द्वारा उम्मीदवार उतारे जाने से बाद से हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा भी नाखुश है. CPI(M) महासचिव एम.ए. बेबी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगा है. साथ ही इस पत्र की कई कॉपियां गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों को भी भेजी हैं. बेबी ने पत्र में राहुल, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के बयानों पर ऐतराज जताया है. उन्होंने कहा कि केरल विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान कांग्रेस ने बार-बार ये प्रचार किया कि CPI(M) और BJP के बीच राजनीतिक समझौता है तथा तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच खास डील है. CPI(M) ने इसे विपक्षी गठबंधन की भावना के खिलाफ बताया है. माकपा नेता ने इन आरोपों को पूरी तरह से एक मनगढ़ंत और झूठी कहानी करार दिया है जिसे वो किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं कर सकते. उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व को याद दिलाया कि केरल की धरती पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और बीजेपी के खिलाफ सीधे राजनीतिक लड़ाई लड़ते हुए माकपा ने अपने सैकड़ों समर्पित कार्यकर्ताओं को खोया है. BJP के खिलाफ बना था इंडिया ब्लॉक बेबी ने अपने पत्र में कहा कि INDIA ब्लॉक BJP के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई के लिए बना था और ऐसे वक्त में सहयोगी दलों पर ही संदेह जताना गठबंधन की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाता है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन आरोपों पर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई तो 8 जून की गठबंधन बैठक से पहले ही एकता पर सवाल खड़े हो जाएंगे. कांग्रेस के रवैये पर कड़े सवाल उठाने के बावजूद CPI(M) ने विपक्षी एकजुटता और समन्वय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है. एमए बेबी ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी संसद के अंदर मोदी सरकार की तानाशाही, सांप्रदायिक और जनविरोधी नीतियों का मजबूती से विरोध करने के लिए अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर काम करती रहेगी. DMK-AAP ने किया किनारा वहीं, दिल्ली में होने वाली इस रणनीतिक बैठक में ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव और राहुल गांधी जैसे शीर्ष नेताओं के शामिल होने की संभावना है. हालांकि, कांग्रेस के साथ मतभेदों के चलते द्रमुक (DMK) के इस बैठक में शामिल होने की उम्मीद न के बराबर हैं. दूसरी ओर आम आदमी पार्टी ने भी इस बैठक से दूरी बना ली हैं, जिससे विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं. JMM भी नाखुश उधर, झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनावों में दो राज्यसभा सीटों में से एक पर कांग्रेस द्वारा अपने उम्मीदवार प्रणव झा की घोषणा करने पर जेएमएम भी कांग्रेस से उतना ही नाराज है. सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ जेएमएम राज्य की दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारना चाहती थी, क्योंकि जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन के पास दोनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल है. शुक्रवार को जेएमएम नेतृत्व की बैठक के बाद पार्टी के कई नेताओं ने कहा कि पार्टी दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतार सकती है. हालांकि, शनिवार को जेएमएम ने पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम को एक सीट से अपना अधिकारिक उम्मीदवार बनाए जाने की घोषणा की. झामुमो के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने इसकी घोषणा की. 'TVK वैकल्पिक दोस्त' इसी बीच शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने गठबंधन में किसी भी तरह की फूट या बिखराव के दावों को पूरी तरह खारिज किया है. राउत ने कहा कि भले ही डीएमके ने इस बैठक से दूरी बना ली हो, लेकिन विपक्ष को तमिलनाडु में टीवीके (TVK) के रूप में एक मजबूत वैकल्पिक मित्र मिल गया है.

बहरामपुर सीट विवाद पर हंगामा, गांगुली और पठान ने खारिज किए दावे

नई दिल्ली  पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद टीएमसी चीफ ममता बनर्जी इन दिनों सुर्खियों में हैं। अब बहरामपुर लोकसभा सीट को लेकर हंगामा मचा हुआ है। बवाल ऐसा मचा कि सौरव गांगुली और यूसुफ पठान दोनों को सफाई देनी पड़ी। दरअसल, बंगाल के अखबार में छपी खबर में दावा किया गया कि विधानसभा सीट हारने के बाद अब ममता बनर्जी सांसद बनकर दिल्ली की राजनीति में सक्रिय होना चाहती हैं। वह बहरामपुर सीट से लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहती हैं। ये वही सीट है जहां से यूसुफ पठान सांसद हैं। खबर पर क्यों मच गया हंगामा? खबर में दावा किया गया कि ममता बनर्जी ने सौरव गांगुली से कहा कि वह यूसुफ पठान से बात करें कि वह इस सीट को छोड़ दें, जिससे कि वहां पर उपचुनाव हों और वह सांसद बनकर दिल्ली पहुंच सकें। इतना ही नहीं यहां तक दावा किया गया कि यूसुफ पठान ने सौरव गांगुली के इस आग्रह को ठुकरा दिया। इसके बाद इस खबर को लेकर हंगामा मच गया। सौरव और यूसुफ को देनी पड़ी सफाई इस हंगामे के बाद दोनों पूर्व क्रिकेटरों को सफाई देनी पड़ी। सौरव गांगुल ने यूसुफ पठान को सीट छोड़ने का मैसेज भेजने की खबर को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि मीडिया में प्रकाशित ये दावे तथ्यों की जांच के बिना और लापरवाही से प्रकाशित किए गए हैं। ममता बनर्जी की ओर से उन्हें कभी कोई संदेश यूसुफ पठान तक पहुंचाने के लिए नहीं कहा गया। गांगुली ने यह भी कहा कि उनका राजनीति से किसी भी स्तर पर कोई संबंध नहीं रहा है। वहीं, यूसुफ पठान ने कहा, "कुछ समय से यह खबर वायरल हो रही है कि ममता बनर्जी ने मुझसे बहरामपुर लोकसभा सीट से सांसद पद से इस्तीफा देने को कहा है, ताकि वह वहां से लोकसभा चुनाव लड़ सकें। ममता बनर्जी ने मुझसे कभी ऐसा नहीं कहा। यहां तक कि हमारी पिछली मुलाकात में भी उन्होंने इसका जिक्र नहीं किया। न ही उन्होंने पार्टी के किसी आधिकारिक नेता के जरिए ऐसा कोई संदेश भेजा है। यह दावा पूरी तरह से झूठा है और मुझे दुख है कि बिना किसी आधिकारिक खबर के भी सोशल मीडिया और सभी मीडिया हाउस में इस पर चर्चा और बहस हो रही है। इसलिए, न तो ममता बनर्जी और न ही पार्टी के किसी नेता ने मुझसे मेरी सांसद सीट से इस्तीफा देने के लिए कहा है।"

TMC में फिर उठे असंतोष के सुर, दिल्ली तक पहुंचा विवाद; ममता बनर्जी की बढ़ सकती है मुश्किल

कलकत्ता ममता बनर्जी के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के भीतर हुई बड़ी टूट के बाद अब पार्टी के सांसदों को लेकर भी हलचल तेज हो गई है. चर्चा यह है कि विधानसभा के बाद अब लोकसभा-राज्यसभा में भी बगावत की आहट सुनाई दे सकती है. यही वजह है कि डैमेज कंट्रोल के लिए पार्टी नेतृत्व पूरी तरह एक्टिव हो गया है।  दरअसल, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में करीब 60 विधायकों के अलग होने के बाद TMC पहली बार इतने बड़े अंदरूनी संकट से जूझती दिख रही है. विधानसभा में यह बगावत इतनी बड़ी रही कि स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता भी मान्यता दे दी. अब सवाल उठ रहा है कि क्या यही सियासी हलचल संसद तक भी पहुंचेगी? न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने भी इस आशंका को खुलकर सामने रखा है. उन्होंने कहा कि जिस तरह इतने कम समय में बड़ी संख्या में विधायक अलग हुए हैं, वैसी प्रतिक्रिया लोकसभा में भी देखने को मिल सकती है. हालांकि, उन्होंने राज्यसभा को लेकर साफ भविष्यवाणी नहीं की, लेकिन यह जरूर कहा कि ऐसी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।  दूसरी तरफ, सीनियर टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने पार्टी में किसी भी बड़ी टूट के दावे को सिरे से खारिज किया है. उनका आरोप है कि बीजेपी संसद के भीतर भी वही खेल दोहराने की फिराक में है जो उसने बंगाल विधानसभा में किया. हालांकि, उन्हें पूरा भरोसा है कि ममता बनर्जी पहले भी ऐसे कई मुश्किल हालात से बखूबी निकली हैं व इस बार भी शानदार वापसी करेंगी।  सबसे ज्यादा चर्चा बारासात सांसद काकोली घोष दस्तीदार को लेकर हो रही है. पार्टी के भीतर उनकी नाराजगी पहले से चर्चा में रही है. लोकसभा में चीफ व्हिप पद से हटाए जाने के बाद उन्होंने कई बार नेतृत्व को लेकर नाराजगी जाहिर की. यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में उनके नाम की चर्चा तेज है, हालांकि उन्होंने खुद किसी बगावत की पुष्टि नहीं की है. सूत्रों की मानें तो हालात संभालने के लिए ममता बनर्जी ने पिछले दो दिनों में कई नाराज विधायकों और सांसदों से खुद बात की. पार्टी की कोशिश है कि मामला आगे बढ़ने से पहले ही सुलझा लिया जाए. संसद में भी दो सबसे भरोसेमंद सांसदों को बाकी सहयोगियों से लगातार संपर्क बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।  फिलहाल TMC के पास लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं. दलबदल कानून के तहत अगर दो-तिहाई सांसद किसी अलग गुट के साथ जाते हैं, तो उनकी सदस्यता बच सकती है. इसी वजह से दो तरह की चर्चाएं चल रही हैं. पहली, 'ऋतब्रत मॉडल', जिसमें सांसद अलग गुट बनाकर खुद को असली TMC बताने की कोशिश करें. दूसरी, किसी दूसरी पार्टी के साथ विलय का रास्ता।  हालांकि, पार्टी का चुनाव चिह्न और संगठन पर दावा सिर्फ सांसदों या विधायकों की संख्या से तय नहीं होगा. इसके लिए चुनाव आयोग के सामने यह साबित करना होगा कि संगठन के भीतर असली बहुमत किसके साथ है. अभी के लिए इतना साफ है कि बंगाल की लड़ाई अब सिर्फ विधानसभा तक सीमित नहीं दिख रही।   

कांग्रेस में भीतरघात की चर्चा तेज, तीसरी राज्यसभा सीट जीतने की रणनीति में जुटी BJP

भोपाल  मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव की तस्वीर दो सीटों पर लगभग साफ हो चुकी है, लेकिन तीसरी सीट को लेकर सियासी हलचल लगातार बढ़ते जा रही है। भाजपा ने जहां अपने दो उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं, वहीं पार्टी ने चार नामांकन फॉर्म लेकर राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि भाजपा तीसरी सीट पर भी कोई बड़ा दांव चल सकती है। जानकारी के अनुसार, प्रदेश नेतृत्व को भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के फैसले का इंतजार है। इसके बाद पार्टी तय करेंगी कि तीसरी सीट पर पार्टी सीधे उम्मीदवार उतारेगी या फिर किसी निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन देकर चुनावी मुकाबले को रोचक बनाएगी। इन अटकलों के बीच कांग्रेस ने भी विधायकों को एकजुट करने बैठक बुलाई है।   मीनाक्षी नटराजन की एंट्री के बाद बदला समीकरण कांग्रेस द्वारा मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने के बाद भाजपा के लिए तीसरी सीट पर रणनीति बनाने की संभावनाएं और बढ़ गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस ने कमलनाथ या दिग्विजय सिंह जैसे बड़े नेताओं को मैदान में उतारा होता तो भाजपा शायद अतिरिक्त जोखिम लेने से बचती। मीनाक्षी नटराजन के नाम की घोषणा के बाद अब भाजपा के भीतर तीसरी सीट पर चुनावी गणित साधने की कवायद तेज हो गई है। पार्टी के रणनीतिकार कांग्रेस के भीतर संभावित असंतोष और क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं का भी आकलन कर रहे हैं।  आदिवासी चेहरे पर भी विचार सूत्र बताते हैं कि भाजपा तीसरी सीट के लिए किसी आदिवासी चेहरे को आगे बढ़ाने के विकल्प पर भी गंभीरता से विचार कर रही है। प्रदेश में आदिवासी राजनीति का बढ़ता महत्व और आगामी चुनावों को देखते हुए यह फैसला राजनीतिक रूप से बड़ा संदेश देने वाला हो सकता है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि भाजपा किसी निर्दलीय उम्मीदवार को मैदान में उतारकर पर्दे के पीछे से समर्थन दे सकती है और चुनावी समीकरणों को अपने पक्ष में मोड़ने का प्रयास करेगी।  क्या कहता है चुनावी गणित? विधानसभा में वर्तमान में 228 सदस्य मतदान के पात्र हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 57 वोटों की आवश्यकता है। भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 63  विधायक हैं। दो सीटों पर अपने उम्मीदवारों को निर्वाचित कराने के बाद भाजपा के पास लगभग 50 वोट बचेंगे। ऐसे में तीसरी सीट जीतने के लिए उसे अतिरिक्त सात वोटों की जरूरत होगी। यही वजह है कि कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग की आशंका और भाजपा की संभावित रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हैं। 8 जून तक बना रह सकता है सस्पेंस राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि भाजपा फिलहाल सभी विकल्पों पर विचार कर रही है और अंतिम फैसला नामांकन की अंतिम तिथि के आसपास लिया जा सकता है। ऐसे में 8 जून तक तीसरी राज्यसभा सीट को लेकर सस्पेंस बने रहने की पूरी संभावना है। फिलहाल इतना तय है कि दो सीटों का चुनाव भले ही औपचारिक नजर आ रहा हो, लेकिन तीसरी सीट को लेकर पर्दे के पीछे राजनीतिक बिसात पूरी तरह बिछ चुकी है।  मंत्री के बयान से गर्माई सियासत प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचे लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने पार्टी के घोषित उम्मीदवारों पर भरोसा जताते हुए कहा कि भाजपा ने ऐसे प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है, जिन्होंने जमीन पर रहकर संगठन के लिए लंबे समय तक काम किया है। राज्यसभा की संभावित तीसरी सीट पर भाजपा उम्मीदवार उतारने की अटकलों के बीच जब उनसे सवाल किया गया तो उन्होंने रहस्यमयी अंदाज में जवाब दिया। राकेश सिंह ने कहा, "आपसे किसने कहा कि हम प्रत्याशी उतार रहे हैं, और यह भी किसने कहा कि हम प्रत्याशी नहीं उतार रहे हैं। समय का इंतजार कीजिए।" वहीं कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान पर टिप्पणी करते हुए राकेश सिंह ने कहा कि कांग्रेस की कलह उनका आंतरिक मामला है, लेकिन उनकी स्थिति किसी से छिपी नहीं है।  

कैलाश विजयवर्गीय का बड़ा दावा, कांग्रेस की अंदरूनी कलह से BJP जीतेगी तीसरी सीट

भोपाल  . राज्यसभा चुनावों के कारण राजधानी भोपाल में नेताओं की चहलपहल बढ़ गई है। भाजपा के राज्यसभा चुनाव के दोनों प्रत्याशी आज शनिवार को विधिवत नामांकन दाखिल कर रहे हैं। इसको लेकर शुक्रवार शाम ही पार्टी ने अपने स्तर पर पूरी तैयारी कर ली है। भाजपा द्वारा दोनों प्रत्याशियों के लिए नामांकन फॉर्म के 4-4 सेट तैयार करवाए गए हैं। एक सेट में 10 विधायकों को प्रस्तावक बनाया गया है। इस प्रकार कुल आठ सेट में 80 विधायकों को प्रस्तावक बनाया गया है। इधर कांग्रेस में राज्यसभा उम्मीदवार बनाई गईं मीनाक्षी नटराजन का कई नेता विरोध कर रहे हैं। इसे देखते हुए बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने तो अपनी मंशा भी स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा है कि पार्टी हमें उम्मीदवार दे तो तीसरी सीट भी जीतेंगे। बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव में नामांकन की कागजी प्रक्रिया पूरी कर ली है। दोनों प्रत्याशी तरुण चुघ व रजनीश अग्रवाल शनिवार सुबह पार्टी मुख्यालय से नामांकन दाखिल करने जाएंगे। इसके लिए सभी विधायकों को प्रदेश कार्यालय में सुबह 8 बजे उपस्थित होने को कहा गया है।  कैलाश के बड़े बोले- कहा तीसरी सीट भी जिताएंगे राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी चयन के बाद अब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया है कि पार्टी अगर तीसरा उम्मीदवार देगी तो उसे भी जिता लेंगे। इंदौर में भाजपा कार्यालय के भूमिपूजन के दौरान ये बड़े बोले मंत्री कैलाश के थे। उन्होंने पार्टी का आभार जताते हुए कहा, पार्टी ने बड़े नेताओं को टिकट दिया है। दोनों हमेशा पर्दे के पीछे रहते हुए काम करते रहे हैं। ये मप्र के लिए सौभाग्य है कि दिल्ली के बड़े नेता को यहां से टिकट मिला है। उन्होंने कहा, ये दोनों सीटें तो हम जीतेंगे ही। कांग्रेस ने राज्यसभा सीट के लिए मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया गौरतलब है कि कांग्रेस ने राज्यसभा सीट के लिए मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया है। उनके नाम पर एमपी कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता सहमत नहीं हैं। ऐसे में पार्टी में अंदरूनी कलह बढ़ गई है। कांग्रेस की इस भीतरघात का बीजेपी फायदा उठाने की जुगत में है। एमपी में पार्टी में मचे इस घमासान से विधायकों में क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ते जा रहा है।

क्या CM विजय बनेंगे INDIA गठबंधन का नया चेहरा? DMK की जगह TVK की एंट्री की चर्चाएं तेज

चेन्नई  द्रविड़ मुनेत्र कषगम(DMK) के इंडिया गठबंधन से बाहर निकलने और 08 जून की बैठक का बहिष्कार करने के फैसले के बाद तमिलगा वेट्टरी कषगम(TVK) गठबंधन में डीएमके की पार्टी की जगह ले सकती है और उम्मीद है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय इस अवसर का लाभ उठाकर राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखें। टीवीके का कांग्रेस के साथ गठबंधन और मजबूत हो गया है, क्योंकि विजय ने अपने मंत्रिमंडल में दो मंत्री पद और एक राज्यसभा सीट देकर इसे और पुख्ता किया है जबकि वह(यह सीट अपनी पार्टी के लिए भी रख सकते थे)। अब उनकी रुचि कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के साथ मिलकर राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका निभाने में है। इससे पहले  कांग्रेस के तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडनकर ने सचिवालय में विजय से मुलाकात की थी। कहा जा रहा है कि विजय का इंडिया गठबंधन में प्रवेश और संभवतः द्रमुक के जाने से पैदा हुए खाली स्थान को भरना इस चर्चा का मुख्य विषय था। श्री विजय की उपस्थिति उनके विशाल जनाधार को देखते हुए गठबंधन को और अधिक मजबूती प्रदान कर सकती है, क्योंकि कांग्रेस और टीवीके दोनों का एक साझा लक्ष्य धर्मनिरपेक्षता की रक्षा करना है। विजय से राहुल गांधी को भी मिलेगी ताकत लोकसभा में 22 और राज्यसभा में 08 सांसदों वाले द्रमुक का गठबंधन से अलग होना एक अस्थायी झटका हो सकता है, लेकिन विजय का इंडिया गठबंधन में शामिल होना इसे 'स्टार पावर' और एक नया आकर्षण प्रदान करेगा। कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार इससे राहुल गांधी के हाथों को मजबूत करने में काफी मदद मिलेगी। इसके अलावा श्री गांधी और श्री विजय के बीच का विशेष बंधन आने वाले लोकसभा चुनावों में राजनीतिक परिदृश्य को बदलने में सहायक सिद्ध होगा। विजय पहले ही तमिलनाडु के राजनीतिक नक्शे को बदल चुके हैं, और उनकी पार्टी टीवीके का लक्ष्य उस धर्मनिरपेक्ष स्थान पर कब्जा करना है, जिस पर कभी डीएमके का दावा हुआ करता था। कांग्रेस का साथ होने से उनके पास भाजपा का मुकाबला करने के लिए आवश्यक धर्मनिरपेक्ष साख मौजूद है। द्रमुक के लिए अब तक कांग्रेस ही वह पार्टी थी जिसने उसे धर्मनिरपेक्षता का आवरण प्रदान किया था। इसके अलावा श्री विजय का फिल्मी करिश्मा तमिलनाडु की सीमाओं से कहीं आगे तक फैला हुआ है। पड़ोसी राज्य केरल में उनके प्रशंसकों की विशाल संख्या है और कुछ हद तक आंध्र प्रदेश तथा कर्नाटक में भी उनके प्रशंसक मौजूद हैं। चुनावों के समय कांग्रेस के लिए यह स्थिति अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है।

तमिलनाडु की राजनीति में नया मोड़: अन्नामलाई ने बनाई अलग राह, नई पार्टी के गठन की घोषणा

नई दिल्ली  तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने शुक्रवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद राज्य में अपनी एक नई पार्टी बनाने के संकेत दिए। अन्नामलाई ने कहा कि, उनकी राजनीतिक पार्टी तमिलनाडु में अगला विधानसभा चुनाव लड़ेगी. भाजपा से इस्तीफा देने का बाद उन्होंने कहा कि, वे एक आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं। भाजपा से इस्तीफा देने के बाद के अन्नामलाई ने कहा कि, उनके लिए पहले यह दुविधा वाली बात थी कि, वह बीजेपी के आदमी हैं या तमिलियन. पूर्व भाजपा नेता ने कहा कि, उन्होंने 4 दिसंबर 2025 को पार्टी को बताया कि वह इस्तीफा देने जा रहे हैं. पार्टी ने उन्हें चुनाव खत्म करने और फिर जाने को कहा।  बता दें कि, तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने शुक्रवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया जिसे भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने स्वीकार कर लिया. ऐसा बताया जा रहा है कि अन्नामलाई ने हाल में दिल्ली यात्रा के दौरान अपना इस्तीफा सौंपा था।  भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, "भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी की तमिलनाडु इकाई के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई द्वारा पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से दिया गया इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। अन्नामलाई इस्तीफे की संभावना और नयी राजनीतिक पार्टी बनाने की अटकलों के बीच पार्टी नेतृत्व से मुलाकात के लिए दिल्ली आए थे. उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मंगलवार को मुलाकात कर इस विषय पर चर्चा की थी।  ऐसा बताया जा रहा है कि नैनार नागेंद्रन को उनकी जगह भाजपा की तमिलनाडु इकाई का अध्यक्ष पद नियुक्त किए जाने और राज्य में 2026 के विधानसभा चुनावों की तैयारी के तहत अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के साथ चुनावी गठबंधन फिर से बहाल किए जाने के बाद से अन्नामलाई नाराज थे।  अन्नामलाई ने गुरुवार को घोषणा की थी कि वह पांच जून को यानी आज सोशल मीडिया पर बातचीत के दौरान अपने विचार साझा करेंगे. वह राष्ट्रीय राजधानी की अपनी यात्रा के बारे में संभवतः स्पष्टीकरण देंगे तथा राष्ट्रीय राजधानी की अपनी यात्रा, इस्तीफे और नयी राजनीतिक पार्टी शुरू करने की संभावित योजना के बारे में भी स्थिति स्पष्ट करेंगे. आज उन्होंने नई पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया। 

पार्टी के तेजतर्रार प्रवक्ता से राज्यसभा उम्मीदवार तक: पवन खेड़ा को मिला कांग्रेस का बड़ा इनाम

 नई दिल्ली सियासत में संघर्ष कभी बेकार नहीं जाता, बशर्ते आप सही वक्त पर सही पिच पर बैटिंग कर रहे हों. राजनीति में ये कदम आपके लिए बंद पड़े दरवाजों को खोल देता है. कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. कांग्रेस ने राज्यसभा चुनावों के लिए अपने 7 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है, जिसमें पवन खेड़ा का नाम शामिल हैं. इस तरह पार्टी उन्हें कर्नाटक से संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) भेज रही है।  बीजेपी और मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस के तेज तर्रार प्रवक्ता पवन खेड़ा फ्रंटफुट पर लगातार मोर्चा खोला रखे थे. बीजेपी के 'एक्शन' पर आक्रामक तरीके से पवन खेडा के 'रिएक्शन' और कांग्रेस का 'पॉलिटिकल कैलकुलेशन' ने क्या राज्यसभा का टिकट कंफर्म करा दिया है?  राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने गुरुवार को अपने सात उम्मीदावरों के नाम का ऐलान किया है, जिसमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ पवन खेड़ा और मंसूर खान को कर्नाटक से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है. कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस विधायकों की संख्या के आधार पर पवन खेड़ा का राज्यसभा जाना तय है।   पवन खेड़ा की तपस्या पूरी हुई? यह वही पवन खेड़ा हैं, जिन्हें साल 2022 में राजस्थान से राज्यसभा टिकट न मिलने पर मायूसी हाथ लगी थी. तब पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां करते हुए लिखा था. 'शायद मेरी तपस्या में कुछ कमी रह गई.' लेकिन तब और अब के राजनीतिक हालात में जमीन-आसमान का अंतर है. पवन खेडा कल टीवी डिबेट्स का चेहरा थे, वो अब बीजेपी के खिलाफ 'लड़ाई के प्रतीक' बन चुके हैं. ऐसे में कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा भेजने का फैसला लिया।  पिछले कुछ समय में जिस तरह से पवन खेड़ा ने खुद को पार्टी के संकटमोचक और सबसे मुखर चेहरे के रूप में स्थापित किया, उसने कांग्रेस आलाकमान को अपना मुरीद बना लिया. ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व पर यह नैतिक दबाव था कि जो नेता फ्रंटफुट पर रहकर गांधी परिवार और पार्टी के लिए तमाम मुकदमे झेल रहा है, उसे तरजीह दी जाए. इस तरह उनकी 'तपस्या' न सिर्फ पूरी हुई, बल्कि राहुल गांधी की कोर टीम ने उनके नाम पर सबसे पहले मुहर लगाई।  फ्रंटफुट पर 'लड़ाई लड़ने' का इनाम कांग्रेस आलाकमान ने अपने प्रवक्ताओं और कार्यकर्ताओं को एक साफ संदेश दिया है कि जो नेता पार्टी के लिए जमीन और कानूनी मोर्चों पर लाठियां या मुकदमे झेलेगा, संगठन उसके साथ खड़ा रहेगा. पवन खेड़ा लगातार बीजेपी और पीएम मोदी के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए गए एक बयान के बाद जिस तरह असम पुलिस ने दिल्ली एयरपोर्ट पर ड्रामाई अंदाज में पवन खेड़ा को फ्लाइट से उतारा था और गिरफ्तार किया, उसने रातों-रात उन्हें कांग्रेस का 'पोस्टर बॉय' बना दिया था।  हाल ही में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी पर अघोषित विदेशी संपत्ति और फर्जी पासपोर्ट के आरोपों को लेकर उनके खिलाफ असम में कई एफआईआर दर्ज हुईं. असम पुलिस ने उनके घर पर दबिश तक दी और उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जाकर राहत मिली. इस कानूनी लड़ाई में डटे रहने के कारण पार्टी ने उन्हें यह बड़ा इनाम दिया है. इस 'बदले वाली कार्रवाई' ने पवन खेड़ा के लिए राज्यसभा का रास्ता साफ कर दिया है।  संसद में मुखर 'वक्ता' की जरूरत पवन खेड़ा कांग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन हैं. वे टीवी डिबेट्स और प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेहद तार्किक और तीखे हमलों के लिए जाने जाते हैं. कांग्रेस को राज्यसभा में एक ऐसे चेहरे की जरूरत थी जो मल्लिकार्जुन खड़गे और जयराम रमेश के साथ मिलकर सदन के भीतर मोदी सरकार को पुरजोर तरीके से घेर सके.  इसीलिए कांग्रेस ने पवन खेड़ा को राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया है।  राहुल और खड़गे के 'गुड बुक्स' में  पवन खेड़ा को गांधी परिवार और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे दोनों का बेहद करीबी और वफादार माना जाता है. पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के समय से राजनीति के केंद्र में रहे पवन खेड़ा ने मुश्किल वक्त में भी कभी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा.  दिल्ली में शीला दीक्षित के सीएम रहते हुए पवन खेड़ा उनके निजि सचिव के तौर पर काम कर रहे थे, उसके बाद से कांग्रेस के राष्ट्रीय टीम का हिस्सा हैं. राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने जिस तरह इस मामले को हाथों-हाथ लिया, उससे साफ है कि खेड़ा अब गांधी परिवार के गुड बुक्स में टॉप पर हैं। कर्नाटक से उनके साथ खुद मल्लिकार्जुन खड़गे भी राज्यसभा जा रहे हैं, जो दर्शाता है कि उन्हें सबसे सुरक्षित सीट से संसद भेजने का फैसला शीर्ष नेतृत्व की मर्जी से हुआ है. साल 2022 के राज्यसभा चुनावों के दौरान जब कांग्रेस ने बाहरी या अन्य नेताओं (जैसे इमरान प्रतापगढ़ी, प्रमोद तिवारी) को तरजीह दी थी, तब पवन खेड़ा के साथ-साथ पार्टी के भीतर भी कई आवाजें उठी थीं. इस बार खेड़ा को टिकट देकर आलाकमान ने उस पुराने असंतोष और 'तपस्या' वाले नैरेटिव को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है।