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गंदे वीडियो दिखाने वाले शिक्षक भिंड में गिरफ्तार, छात्राओं ने दी शिकायत

 भिंड  भिंड जिले में देहात थाना अंतर्गत विक्रमपुरा सरकारी स्कूल में शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक शिक्षक पर कक्षा में छात्राओं को मोबाइल पर अश्लील वीडियो दिखाने और आपत्तिजनक हरकतें करने का आरोप लगा है। घटना का खुलासा तब हुआ जब तीन छात्राओं ने हिम्मत जुटाकर इसकी शिकायत पुलिस से की। पुलिस ने छात्राओं की शिकायत पर आरोपित शिक्षक रामेंद्र सिंह कुशवाह को गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ पाक्सो एक्ट, धमकी देने और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। छात्राओं ने पुलिस को बताया कि शिक्षक कक्षा में पढ़ाते समय मोबाइल पर अश्लील वीडियो दिखाता था और अनुचित व्यवहार करता था। जब छात्राओं ने घर जाकर शिकायत करने की बात कही तो आरोपी ने उन्हें डराया और धमकाया। डर के कारण छात्राएं कई दिनों तक स्कूल नहीं गईं। स्वजन की पूछताछ में खुला मामला बताया जाता है, कि जब छात्राओं ने स्कूल जाना बंद किया तो स्वजनों ने उनसे कारण पूछा। पूछताछ में छात्राओं ने पूरी घटना बताई। उन्होंने कहा कि मोबाइल पर सर गंदे वीडियो दिखाते हैं। इसके बाद स्वजन स्कूल पहुंचे और प्राचार्य से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर वे छात्राओं को लेकर देहात थाने पहुंचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने कक्षा 8वीं की एक छात्रा को मुख्य फरियादी बनाया और अन्य छात्राओं के बयान भी दर्ज किए। डीईओ ने आरोपित शिक्षक को निलंबित किया पुलिस की कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग ने देर रात आरोपी शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जिला शिक्षा अधिकारी आरडी मित्तल ने बताया कि उच्च श्रेणी शिक्षक (उच्च पद प्रभार) मूल पद सहायक शिक्षक शासकीय माध्यमिक विद्यालय विक्रमपुरा बीटीआइ परिसर भिंड में पदस्थ रामेंद्र सिंह कुशवाह को शिक्षक की सामाजिक गरिमा को धूमिल करने पर मप्र सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में शिक्षक को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा। पाक्सो एक्ट में केस दर्ज     छात्रा की शिकायत पर आरोपी शिक्षक रामेंद्र सिंह कुशवाह के खिलाफ पाक्सो एक्ट, धमकी देने और एससी-एसटी एक्ट सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है।- मुकेश शाक्य, टीआई थाना देहात तुरंत निलंबन का आदेश जारी किया     शिक्षक द्वारा की गई हरकत शिक्षक समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली है। पुलिस कार्रवाई के बाद विभाग ने तुरंत निलंबन आदेश जारी किया है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। – आरडी मित्तल, डीईओ भिंड  

गुजरात में बस्तर की गूंज: एकता परेड में छत्तीसगढ़ की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र

नए छत्तीसगढ़ की झलक देख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हुए प्रभावित एकता नगर (गुजरात), गुजरात के एकता नगर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर आज आयोजित एकता परेड में इस वर्ष छत्तीसगढ़ की झांकी “बस्तर की धरती – संस्कृति, सृजन और प्रगति की गाथा” ने सभी का मन मोह लिया। यह झांकी छत्तीसगढ़ के जनजातीय जीवन, परंपराओं और विकास यात्रा का जीवंत प्रतीक बनकर उभरी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परेड में सम्मिलित सभी झांकियों का अवलोकन किया और विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक झलकियों की सराहना की। प्रधानमंत्री की उपस्थिति में प्रदर्शित छत्तीसगढ़ की झांकी ने अपने सौंदर्य, प्रतीकात्मकता और सशक्त संदेश से सबका ध्यान आकर्षित किया। झांकी के अग्रभाग में पारंपरिक वेशभूषा में सजे माड़िया जनजाति के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत गौर नृत्य ने बस्तर की आन-बान और सामूहिकता की भावना को सजीव कर दिया। उनके पास रखी पारंपरिक तुरही बस्तर के पर्वों की गूंज और लोक उल्लास की प्रतीक बनी। वहीं, नंदी का चित्रण बस्तर की गहरी लोक आस्था और शिव उपासना की परंपरा को अभिव्यक्त करता नजर आया। झांकी के मध्य भाग में बस्तर के विकास और परिवर्तन की यात्रा को कलात्मक रूप में दर्शाया गया। कभी नक्सलवाद से प्रभावित यह क्षेत्र अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में बस्तर आज तेजी से बदलते भारत का प्रतीक बन चुका है। अब यहाँ बंदूक की नहीं, विकास की गूंज सुनाई देती है। झांकी के अंतिम भाग में टोकरी लिए महिला की प्रतिमा बस्तर की स्त्री शक्ति, श्रम और सृजनशीलता का प्रतीक बनी। संपूर्ण झांकी की ढोकरा शिल्पकला से की गई सजावट ने बस्तर के शिल्पकारों की अद्भुत कलात्मकता और परंपरागत कौशल को दर्शाया। छत्तीसगढ़ की यह झांकी न केवल अपनी संस्कृति और कला में समृद्ध है, बल्कि यह बस्तर में हो रहे सकारात्मक बदलाव की कहानी भी कहती है। झांकी ने दिखाया कि आज का नया बस्तर परंपरा, प्रकृति और विकास का सुंदर संगम बन चुका है। कभी दुर्गम और पहुँच से दूर रहने वाले इलाकों में अब सड़कों का जाल बिछ गया है, जिन पर बच्चों के स्कूल जाने की चहल-पहल सुनाई देती है और स्कूलों में घंटियाँ बजने लगी हैं। गांवों में बिजली की रौशनी और इंटरनेट की पहुँच ने नई आशाएँ जगाई हैं। युवाओं में कुछ करने, आगे बढ़ने का जोश दिखाई देता है। महिलाएँ आत्मनिर्भर बन रही हैं—हस्तशिल्प, वनोपज , विभिन्न विकासात्मक योजनाओं ने उनके जीवन में नई दिशा दी है। लोग अब विकास पर भरोसा करने लगे हैं। यह झांकी इस विश्वास का प्रतीक है कि बस्तर अब सिर्फ़ अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं के लिए ही नहीं, बल्कि शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे क्षेत्रों में तेज़ी से आगे बढ़ते एक नए युग के लिए भी जाना जा रहा है। एकता परेड के लिए झांकियों का चयन गृह सचिव की अध्यक्षता में गठित एक उच्चस्तरीय समिति और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने देशभर के राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और केंद्रीय संगठनों के प्रजेंटेशन देखे। हर राज्य ने अपनी थीम, मॉडल और विचार समिति के सामने प्रस्तुत किए। इसी प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ की झांकी को उसकी मौलिकता, सांस्कृतिक समृद्धि और विकास के जीवंत चित्रण के लिए चयनित किया गया। अंतिम सूची में छत्तीसगढ़ के साथ एनएसजी, एनडीआरएफ, अंडमान-निकोबार द्वीप, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, मणिपुर, पुद्दुचेरी और उत्तराखंड की झांकियाँ शामिल हुईं।

कांग्रेस में अनुशासन की नई परिभाषा: राव नरेंद्र का बड़ा सांगठनिक कदम

चंडीगढ़  हरियाणा कांग्रेस अब नए तेवर में दिखाई दे रही है। प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने संगठन को ‘कागजी’ नहीं, ‘जमीनी’ रूप देने की ठान ली है। उन्होंने सभी जिलाध्यक्षों को एक विस्तृत पत्र भेजकर कार्यकारिणी गठन का स्पष्ट और सटीक फॉर्मूला तय कर दिया है ताकि न तो पदाधिकारियों में भ्रम रहे और न जिम्मेदारी में किसी तरह की ढील की कोई गुंजाइश बचे। पार्टी नेतृत्व से मिले ‘फ्री-हैंड’ के साथ ही हरियाणा कांग्रेस में अब ‘अनुशासन और जवाबदेही’ का नया दौर शुरू हो गया है। प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने संगठन के भीतर कसावट लाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। एक ऐसा कदम जो प्रदेश कांग्रेस की कार्यसंस्कृति को बदलने की क्षमता रखता है। पत्र में राव ने यह भी तय कर दिया गया है कि अब हर माह संगठन के हर स्तर पर रिपोर्टिंग और समीक्षा होगी। राजनीतिक हलकों में इस कदम को राव का ‘संगठनिक मास्टरस्ट्रोक’ कहा जा रहा है क्योंकि क्योंकि इससे कई निष्क्रिय जिलों में हरकत और स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा देखने को मिल रही है। राव नरेंद्र सिंह का यह कदम आंतरिक संगठनात्मक राजनीति के बीच एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि लंबे समय से कुछ जिलों में निष्क्रियता और गुटबाज़ी बनी हुई थी। अब हर माह की समीक्षा प्रणाली से यह साफ हो जाएगा कि कौन जिलाध्यक्ष वास्तव में सक्रिय है और कौन सिर्फ नाम के लिए पद संभाले हुए है। राव की रणनीति यह भी है कि 2029 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस संगठन ‘जाग्रत और जवाबदेह’ दोनों हो जाए। राव नरेंद्र सिंह ने हरियाणा कांग्रेस को सिर्फ पदों के ढांचे से निकालकर एक प्रणाली में बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया है। उनका मॉडल अब हर महीने हर स्तर पर नतीजे मांगेगा। यानी कांग्रेस संगठन अब खुद पर नजर रखेगा। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह हरियाणा कांग्रेस में लंबे समय बाद पहली बार है जब ‘रिपोर्टिंग कल्चर’ को अनिवार्य बनाया गया है। संगठन के लिए ‘मॉडल ब्लूप्रिंट’ पत्र के मुताबिक, हर जिले में अब कांग्रेस का ढांचा एकदम स्पष्ट होगा। चार उपाध्यक्ष, एक महासचिव (संगठन), आठ महासचिव, एक कोषाध्यक्ष और सोलह सचिव मिलाकर कुल 31 सदस्यीय कार्यकारिणी बनेगी। राव ने जिला अध्यक्षों को यह छूट भी दी है कि वे चाहें तो वरिष्ठ नेताओं और प्रदेश अध्यक्ष के साथ चर्चा कर कार्यकारिणी के सदस्य चुन सकते हैं, ताकि संगठनात्मक फैसले ‘एकतरफा नहीं, सामूहिक’ हों। इसी फार्मूले पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों का गठन भी किया जाएगा। राव ने कहा – ‘संगठन केवल चेहरों का जमावड़ा नहीं, बल्कि ज़िम्मेदारियों का तंत्र है। हर पद पर काम दिखना चाहिए, न कि सिर्फ नाम।’ पानीपत शहरी की फाइल अभी खुलनी बाकी कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे में 33 जिलाध्यक्ष बनाए जा सकते हैं। इनमें 32 नियुक्तियां हो चुकी हैं, जबकि पानीपत शहरी जिलाध्यक्ष की कुर्सी अब भी खाली है। राव ने संकेत दिए हैं कि यह नियुक्ति भी जल्द होगी, ताकि प्रदेश का पूरा संगठनात्मक नक्शा तैयार हो सके। इस बीच कई जिलाध्यक्षों ने पहले ही ब्लॉक स्तर की गतिविधियां तेज़ कर दी हैं। इसमें हस्ताक्षर अभियान से लेकर सदस्यता विस्तार तक शामिल हैं।   3 नवंबर को ‘कांग्रेस की क्लास’ राव नरेंद्र सिंह ने अब 3 नवंबर को चंडीगढ़ स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में सभी जिलाध्यक्षों की बैठक बुलाई है। यह बैठक केवल औपचारिक नहीं, बल्कि ‘रिपोर्ट कार्ड मीटिंग’ होगी। जिलाध्यक्षों को अपने-अपने जिलों में किए गए कार्यों की रिपोर्ट पेश करनी होगी। खासकर ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ अभियान, ब्लॉक कार्यकारिणी गठन और स्थानीय जनसंपर्क गतिविधियों की स्थिति पर रिपोर्ट देनी होगी। बैठक में हरियाणा मामलों के प्रभारी बीके हरिप्रसाद, पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा और दोनों सह-प्रभारी भी मौजूद रहेंगे। राजनीतिक रूप से यह बैठक राव की नेतृत्व क्षमता और जिलाध्यक्षों की निष्ठा दोनों की परीक्षा मानी जा रही है। ‘हर महीने जवाबदेही’ का फार्मूला राव नरेंद्र सिंह ने संगठन को निष्क्रियता से निकालने के लिए एक सख्त शेड्यूल लागू किया है। इसके तहत 1 से 5 तारीख के बीच ब्लॉक कांग्रेस की बैठकें होंगी। 6 से 10 तारीख के बीच जिलाध्यक्षें को जिला स्तर की बैठकें करनी होंगी। इन बैठकों की समीक्षा हर माह 11 से 15 तारीख के बीच प्रदेशाध्यक्ष के साथ होने वाली बैठक में की जाएगी। यानी अब हर माह कांग्रेस संगठन के भीतर ‘संगठनात्मक गतिविधियों की पल्स’ मापी जाएगी। राव का संदेश साफ है – ‘जो सक्रिय रहेगा, वही आगे बढ़ेगा। जो सिर्फ राजनीति करेगा, उसे संगठन नहीं बचाएगा।’ ग्राउंड लेवल पर वर्करों को मिलेगा मंच राव ने जिलाध्यक्षों को यह भी निर्देश दिया है कि वे ब्लॉक स्तर पर हर माह कार्यकर्ता बैठकें करें और संगठन में नए लोगों को जोड़ें। उनका जोर है कि कांग्रेस की असली ताकत ब्लॉक नहीं, बूथ पर तैयार होती है। इसलिए कार्यकर्ताओं को ‘न्याय यात्रा’ और ‘हस्ताक्षर मुहिम’ जैसे अभियानों से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पार्टी जनता के मुद्दों पर सड़क तक उतरी दिखे।

BJP में 9 महीने की खींचतान खत्म, जिलाध्यक्ष ने नई कार्यकारिणी बनाई

गुना नौ महीने से बहुप्रतीक्षित गुना भाजपा की जिला कार्यकारिणी में महामंत्री पद पाने की दौड़ में लगी जोड़-तोड़ की राजनीति को उस समय विराम लग गया जब गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिकरवार ने अपने नौ महीने के कार्यकाल के बाद अपनी जिला कार्यकारिणी घोषित कर दी। इस 22 सदस्यीय कार्यकारिणी में 9 केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थकों को महत्वपूर्ण पद मिले है। विधायक के एक समर्थक को मिली जगह, बागी बाहर विधायक पन्नालाल शाक्य के एक मात्र समर्थक संतोष धाकड़ को महामंत्री पद से नवाजा गया है। वहीं सिंधिया समर्थक के रूप में पूर्व पार्षद रविन्द्र रघुवंशी और चन्द्रप्रकाश अहिरवार को महामंत्री बनाया गया है। इस कार्यकारिणी में आपस में लड़ने वाले भाजपा के उपाध्यक्ष आरएन यादव और हीरेन्द्र सिंह चौहान बंटी बना को बाहर का रास्ता दिखाया है। इस समाज ने किया कार्यकारिणी का विरोध इस कार्यकारिणी के बनते ही विरोध के स्वर शुरू हो गए हैं। गुर्जर समाज के सीताराम गुर्जर ने कहा कि इस कार्यकारिणी में गुर्जर समाज को स्थान नहीं देकर हमारे समाज के साथ धोखा किया है। जबकि यह समाज जिले में बहुतायत संख्या में है। भाजपा की जिला कार्यकारिणी को घोषित न किए जाने को लेकर पत्रिका ने 25 अक्टूबर के अंक में खबर प्रकाशित की थी।  जिला कार्यकारिणी में इन नेताओं मिले ये पद     जिला उपाध्यक्षः गिर्राज भार्गव,प्रबल प्रताप सिंह, महेन्द्र किरार, शिवपाल परमार, सुशील दहीफले, जगदीश मीना रिटायर्ड आरटीओ, गायत्री भील. गोमती ओझा     जिला महामंत्रीः संतोष धाकड़, रविन्द्र रघुवंशी, चन्द्रप्रकाश अहिरवार     जिला मंत्रीः कुसुमलता कुशवाह, रुद्र देव सिंह, श्रीकृष्ण भोला सोनी, अनिल जैन रुपश्री, सुनीता बंजारा, वीर बहादुर यादव, उमा लोधी, आशा शर्मा     कोषाध्यक्ष- मोहित नामदेव     सह कोषाध्यक्ष- राजेश साहू     कार्यालय मंत्री- सुरेन्द्र जीत सिंह     सह कार्यालय मंत्री बृज नारायण शर्मा     सह कार्यालय मंत्री- शंभू सेन     मीडिया प्रभारी अंकुर श्रीवास्तव     सह मीडिया प्रभारी-ओमप्रकाश राठौर

जशपुर से यूपी जा रही थी गोवंश तस्करी की खेप, कोरबा पुलिस ने पकड़ा गिरोह

कोरबा कोरबा थाना उरगा पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से पशुओं की तस्करी कर उनकी जान लेने के लिए ले जा रहे पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह घटना जशपुर जिले से जुड़ी है, जहां पिकअप वाहन में 8 बैलों को उत्तर प्रदेश के बूचड़खाने ले जाया जा रहा था। इस खुलासे के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक पिकअप वाहन में मवेशियों को भरकर ले जाया जा रहा है, जिससे तस्करी की आशंका थी। सूचना के आधार पर, थाना उरगा पुलिस की टीम ने ग्राम सराईपाली, पंचायत रिवापार में घेराबंदी कर दबिश दी। इस दौरान, एक सफेद रंग के पिकअप वाहन में 7 बैल अवैध रूप से परिवहन करते हुए पाए गए। पूछताछ में पता चला कि ये लोग बैलों को जशपुर जिले से उत्तर प्रदेश में बूचड़खाने ले जा रहे थे। मौके पर पुलिस ने वाहन को रोककर जांच की तो पाया गया कि मवेशियों के परिवहन के संबंध में कोई भी वैध दस्तावेज या अनुमति पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया। पुलिस ने तत्काल वाहन चालक और उसके साथियों को हिरासत में ले लिया और पशुओं को सुरक्षित किया।

लखनऊ संभाग के उन्नाव, रायबरेली और लखनऊ में भी शनिवार से की जाएगी खरीद

पूर्वी उत्तर प्रदेश में पहली नवंबर से होगी धान खरीद  लखनऊ संभाग के उन्नाव, रायबरेली और लखनऊ में भी शनिवार से की जाएगी खरीद  धान (कॉमन)-2369 और (ग्रेड ए) का 2389 रुपये प्रति कुंतल एमएसपी तय पूर्वी उत्तर प्रदेश में 28 फरवरी 2026 तक चलेगी खरीद   पश्चिम उत्तर प्रदेश में पहली अक्टूबर से चल रही धान खरीद 48 घंटे के भीतर किसानों को भुगतान करा रही योगी सरकार दो महीने में 2.17 लाख से अधिक किसानों ने करा लिया पंजीकरण लखनऊ  खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत पहली नवंबर से पूर्वी उत्तर प्रदेश में धान खरीद शुरू होगी, 28 फरवरी 2026 तक चलेगी। इस अवधि में लखनऊ संभाग के उन्नाव, रायबरेली और लखनऊ में भी धान खरीद होगी। वहीं पहली अक्टूबर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और लखनऊ संभाग के हरदोई, लखीमपुर खीरी, सीतापुर जनपद में धान खरीद चल रही है। डबल इंजन सरकार ने इस वर्ष धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि भी की है। धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (कॉमन)-2369 और (ग्रेड ए) का 2389 रुपये प्रति कुंतल तय किया गया है। वहीं योगी सरकार की नीतियों पर समर्थन जताते हुए दो महीने में 2.17 लाख से अधिक किसानों ने बिक्री के लिए पंजीकरण भी करा लिया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश व लखनऊ संभाग के इन जनपदों में पहली नवंबर से शुरू होगी खरीद पूर्वी उत्तर प्रदेश के संभागों में पहली नवम्बर से धान खरीद शुरू होगी। यह खरीद पूर्वी उत्तर प्रदेश के चित्रकूट, कानपुर, अयोध्या, गोरखपुर, देवीपाटन, बस्ती, आजमगढ़, वाराणसी, मीरजापुर व प्रयागराज संभाग में होगी। इसके साथ ही लखनऊ संभाग के लखनऊ, रायबरेली व उन्नाव में भी पहली नवंबर से खरीद होगी, जो 28 फरवरी 2026 तक चलेगी। दो महीने में 2.17 लाख से अधिक किसानों ने करा लिया पंजीकरण धान बिक्री के लिए पहली सितंबर से पंजीकरण प्रारंभ हो गया था। 31 अक्टूबर (सुबह 11 बजे) तक 2,17,625 किसानों ने पंजीकरण करा लिया। वहीं पश्चिम उत्तर प्रदेश के 17 हजार से अधिक किसानों से एक महीने के भीतर 1.06 लाख मीट्रिक टन से अधिक की धान खरीद की जा चुकी है। योगी सरकार के निर्देश पर तेज गति से चल रहे कार्य की बदौलत 3920 क्रय केंद्र भी खुल गए हैं।  fcs.up.gov.in या UP KISAN MITRA  पर पंजीकरण अनिवार्य  धान बिक्री के लिए किसानों का पंजीकृत होना अनिवार्य है। किसानों को खाद्य व रसद विभाग की वेबसाइट fcs.up.gov.in या मोबाइल ऐप UP KISAN MITRA पर पंजीकरण कराना होगा। खरीद पंजीकृत किसानों से ही होगी। खाद्य व रसद विभाग के मुताबिक किसान किसी भी सहायता या जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 18001800150 नंबर पर कॉल या अपने जनपद के जिला खाद्य विपणन अधिकारी, तहसील के क्षेत्रीय विपणन अधिकारी व ब्लॉक के विपणन निरीक्षक से भी संपर्क साध सकते हैं। योगी सरकार ने 48 घंटे के भीतर किसानों को भुगतान का निर्देश दिया है।    

घोषणापत्र लॉन्च कर 26 सेकेंड में गायब हुए NDA, कांग्रेस ने कहा – जनता को दिखा दिया सच

पटना बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर एनडीए के ‘संकल्प पत्र 2025’ पर विपक्ष ने जबरदस्त हमला बोला है। कांग्रेस के वरीय पर्यवेक्षक अशोक गहलोत ने इसे झूठ का पुलिंदा करार दिया। उन्होंने कहा, “सिर्फ 26 सेकेंड में घोषणापत्र जारी किया गया और फिर मीडिया के सवालों से बचकर भाग खड़े हुए। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।” पटना के होटल मौर्या में आयोजित प्रेस वार्ता में गहलोत ने सवाल उठाते हुए कहा, “बीस साल से सरकार में रहकर एनडीए ने क्या काम किए, कौन-से वादे पूरे हुए, इसका जवाब क्यों नहीं दे रहे? और इस मौके पर नीतीश कुमार कहां थे? क्या वे बीमार हैं, या फिर उन्हें खुद अपने वादों पर भरोसा नहीं रहा?” गहलोत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस से भागने का लगाया आरोप उन्होंने कहा कि कांग्रेस जो वादे कर रही है, उसे निभाने का साहस रखती है। गहलोत ने कहा, “हम हर वादा कैबिनेट से पास कराकर पूरा करेंगे। जनता अब जुमले नहीं, जवाब चाहती है।” मोकामा कांड की जांच हो: अनुपम कांग्रेस नेता अनुपम ने मोकामा में हुई हत्या की घटना पर कहा कि “एनडीए प्रत्याशी के काफिले में हथियार कहां से आया? इसकी न्यायिक जांच जरूरी है।” आरजेडी बोली- एनडीए का घोषणापत्र एक थका हुआ भाषण है कांग्रेस की बातों का समर्थन देते हुए आरजेडी प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा कि एनडीए का घोषणापत्र एक थका हुआ भाषण है जिसमें न योजना है, न नीयत। उन्होंने कहा, “महागठबंधन के काम को कॉपी करके अपने नाम पर बेचने की कोशिश की जा रही है। मगर जनता अब समझ चुकी है कि असली मुद्दा रोजगार, शिक्षा और उद्योग का है, और उस पर एनडीए के पास कोई जवाब नहीं।” गगन ने तंज करते हुए कहा, “नीतीश कुमार अब एनडीए में मुख्यमंत्री कम, मेहमान ज्यादा लग रहे हैं। बीजेपी ने उन्हें किनारे कर दिया है, और जनता इसे साफ देख रही है।”  

पंजाब के निलंबित DIG भुल्लर को जेल भेजा गया, CBI ने रिमांड की नहीं की मांग

चंडीगढ़  भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किए गए पंजाब के निलंबित DIG एचएस भुल्लर को शुक्रवार को अदालत ने 14 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। CBI ने भुल्लर का रिमांड बढ़ाने की मांग नहीं की, जिसके बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया। भुल्लर की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से करवाई गई। CBI ने 16 अक्टूबर को एचएस भुल्लर को रिश्वत लेते हुए रंगे-हाथों गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद CBI ने उनके आवास पर करीब 21 घंटे तक सर्च ऑपरेशन चलाया। इसमें 7 करोड़ 36 लाख 50 हजार रुपए नकद, लगभग 2 करोड़ 32 लाख रुपए मूल्य के सोने-चांदी के गहने और 26 महंगी ब्रांडेड घड़ियां बरामद की गई थीं। इस कार्रवाई के बाद CBI ने भुल्लर के कथित बिचौलिये कृष्णु को भी हिरासत में लिया था, जो फिलहाल CBI रिमांड पर है। शुक्रवार को अदालत में पेशी के दौरान CBI ने भुल्लर का रिमांड नहीं मांगा, बल्कि न्यायिक हिरासत की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अब भुल्लर को 14 नवंबर को दोबारा CBI कोर्ट में पेश किया जाएगा। संपत्ति पुश्तैनी और नौकरी से पहले की भुल्लर के वकील एचएस धनोआ ने अदालत में कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ गलत तथ्य सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे हैं। उन्होंने अदालत से सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही झूठी जानकारियों को नियंत्रित करने की अपील भी की। धनोआ ने कहा कि भुल्लर की सारी संपत्ति उनकी नौकरी शुरू होने से पहले की है और पुश्तैनी है। उन्होंने दावा किया कि समय आने पर सभी दस्तावेज और तथ्य अदालत में प्रस्तुत किए जाएंगे। CBI की जांच जारी CBI अधिकारियों के अनुसार, भुल्लर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच जारी है। एजेंसी फिलहाल जप्त किए गए दस्तावेजों, नकदी और कीमती सामानों की जांच-पड़ताल कर रही है। भुल्लर की गिरफ्तारी ने पंजाब पुलिस विभाग में हलचल मचा दी है और मामले ने राज्य में उच्च अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एकता के संदेश के साथ दौड़ा पूरा जिला — बलौदाबाजार-भाटापारा में ‘रन फॉर यूनिटी’ आयोजित

बलौदाबाजार-भाटापारा राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर आज जिले के सभी थाना क्षेत्रों में ‘रन फॉर यूनिटी’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सौहार्द को बनाए रखना, नागरिकों में एकता की भावना को सशक्त करना तथा अपराध एवं नशा मुक्त समाज के निर्माण के लिए जनजागरण फैलाना रहा। पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता के निर्देशन में सुबह 7:30 बजे से जिलेभर में रन फॉर यूनिटी कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, स्कूली छात्र-छात्राएं और आम नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम के पश्चात साइबर सुरक्षा, यातायात जागरूकता एवं नशा मुक्ति विषयों पर व्याख्यान आयोजित किया गया। इसमें विशेषज्ञों ने लोगों को डिजिटल युग में सतर्क रहने, यातायात नियमों का पालन करने और नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को राष्ट्रीय एकता दिवस की शपथ भी दिलाई गई, जिसमें देश की अखंडता और एकता को बनाए रखने का संकल्प लिया गया।

हाई कोर्ट ने कहा, बहू को घर में रहने का अधिकार, संपत्ति का नहीं

 नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐसा फैसला सुनाया जो परिवार के झगड़ों में बुजुर्ग माता-पिता की शांति को सबसे ऊपर रखता है। कोर्ट ने कहा कि बुजुर्गों को अपने घर में शांति और गरिमा से रहने का पूरा अधिकार है। परिवारिक विवाद में भी यह हक कोई नहीं छीन सकता। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। इसमें बहू को सास-ससुर के स्व-अर्जित घर से बाहर निकालने का निर्देश था। बहू का घर में रहने का हक कोर्ट ने घरेलू हिंसा से महिलाओं की रक्षा कानून (PWDV एक्ट) के तहत बहू के रहने के अधिकार को माना, लेकिन जोर देकर कहा कि यह सिर्फ 'कब्जे का हक' है, मालिकाना हक नहीं। जजों की बेंच ने टिप्पणी की, "कानून को ऐसा चलना चाहिए कि सुरक्षा भी बनी रहे और शांति भी।" अदालत ने दोनों पक्षों के हक को संतुलित करने पर जोर दिया गया। क्या है मामला? विवादित संपत्ति एक ही मकान थी। इसमें सीढ़ियां और रसोई साझा थे। कोर्ट ने कहा कि ऐसे में अलग रहना व्यावहारिक नहीं है। बुजुर्ग दंपति ने बहू के लिए वैकल्पिक घर का प्रस्ताव दिया। इसमें 65,000 रुपये मासिक किराया, मेंटेनेंस, बिजली-पानी बिल और सिक्योरिटी डिपॉजिट शामिल थे। सब खर्च वे खुद वहन करेंगे। कोर्ट ने अपील खारिज करते हुए कहा, “हक टकराने पर नाजुक संतुलन जरूरी है। किसी की गरिमा या सुरक्षा प्रभावित न हो।” PWDV एक्ट महिलाओं को बेघर होने से बचाता है। लेकिन बुजुर्गों को जीवन के अंतिम वर्ष शांतिपूर्वक बिताने का हक भी मजबूत है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि चार हफ्तों में बहू के लिए दो कमरों वाला फ्लैट ढूंढा जाए। इलाका पुराने घर जैसा हो। उसके दो हफ्ते बाद बहू को विवादित घर खाली करना होगा।