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भारत का बड़ा कदम: होर्मुज नाकेबंदी के बीच रूसी तेल की खरीद अब सरल, 2030 तक की किचकिच खत्म

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी से उभरे तेल-गैस संकट के बीच भारत ने बड़ा रणनीतिक दांव खेला है. भारत सरकार ने रूसी तेल की सप्लाई को निर्बाध बनाए रखने के लिए समुद्री बीमा देने वाली रूसी कंपनियों की संख्या बढ़ा दी है, जिससे आने वाले वर्षों तक तेल आयात में आने वाली बाधाएं काफी हद तक खत्म हो जाएंगी।  डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) के फैसले के मुताबिक, अब 8 की जगह 11 रूसी बीमा कंपनियों को भारत के बंदरगाहों पर आने वाले जहाजों को कवर देने की मंजूरी दी गई है. ये कंपनियां प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी (P&I) कवर प्रदान करेंगी, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए बेहद जरूरी होता है।  भारत ने खत्म किया सबसे बड़ा रोड़ा दरअसल, रूस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के चलते यूरोप की बड़ी बीमा कंपनियों ने रूसी तेल ढोने वाले जहाजों को कवर देना कम कर दिया था. ऐसे में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि वह अपने लिए वैकल्पिक इंश्योरेंस व्यवस्था तैयार करे. अब रूसी कंपनियों को मंजूरी देकर भारत ने इस समस्या का बड़ा समाधान निकाल लिया है।  गज़प्रोम इंश्योरेंस और रोसगोस्त्राख जैसी प्रमुख कंपनियों को फरवरी 2027 तक बीमा सेवाएं देने की अनुमति दी गई है, जबकि VSK, सोगाज़ और अल्फास्ट्राखोवानी जैसी कुछ कंपनियों को 2030 तक की लंबी मंजूरी मिल गई है. यह संकेत है कि भारत ने सिर्फ तात्कालिक नहीं, बल्कि दीर्घकालिक समाधान पर भी काम किया है।  इसके अलावा सोग्लासिए, स्बरबैंक इंश्योरेंस, उगोरिया इंश्योरेंस ग्रुप और ASTK इंश्योरेंस जैसी कंपनियों का रजिस्ट्रेशन भी बढ़ाया गया है. वहीं दुबई स्थित इस्लामिक प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी क्लब को भी फरवरी 2027 तक सेवाएं देने की अनुमति देकर भारत ने गैर-पश्चिमी विकल्पों का दायरा और बढ़ा दिया है।  होर्मुज की टेंशन पर लगाम यह फैसला ऐसे समय आया है, जब होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी ने दुनियाभर में तेल सप्लाई की चिंता बढ़ा दी है. दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है, और किसी भी बाधा का सीधा असर भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर पड़ता है।  भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है. हाल के वर्षों भारत ने सस्ते रूसी तेल का आयात काफी बढ़ा दिया है. ऐसे में बीमा कवर की उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी था, क्योंकि बिना बीमा के कोई भी जहाज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑपरेट नहीं कर सकता।  विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह कदम वैश्विक अस्थिरता के बीच एक ‘सेफ्टी कवच’ की तरह काम करेगा. इससे न सिर्फ रूसी तेल की सप्लाई बनी रहेगी, बल्कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को भी बिना रुकावट पूरा कर सकेगा. कुल मिलाकर, होर्मुज संकट और पश्चिमी दबाव के बीच भारत ने एक ऐसा रास्ता निकाल लिया है, जिससे 2030 तक तेल सप्लाई से जुड़ी बड़ी ‘किचकिच’ खत्म होती नजर आ रही है। 

केदारनाथ धाम के कपाट आज सुबह 8 बजे होंगे खुलेंगे, भक्तों की भीड़ लगनी शुरू

गौरीकुंड  ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ की यात्रा अपने सबसे पावन पड़ाव पर पहुंच चुकी है. बम-बम भोले के जयकारों और आर्मी बैंड की सुरीली धुन के बीच बाबा केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली अब केदारपुरी के बिल्कुल करीब है. केदारनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले पूरी केदारपुरी को कई क्विंटल फूलों से किसी दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है।   फाटा से गौरीकुण्ड तक भक्ति का सैलाब बाबा केदारनाथ की डोली सोमवार को फाटा से अपने सफर पर निकली और बड़ासू, शेरसी, रामपुर, सीतापुर होते हुए शाम करीब 4 बजे गौरीकुण्ड पहुंची. सोनप्रयाग से लेकर गौरीकुण्ड तक श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं और अक्षत के साथ बाबा की पालकी का जोरदार स्वागत किया।  सोमवार की रात बाबा की डोली ने गौरी माई मंदिर, गौरीकुण्ड में विश्राम किया.  इससे पहले डोली शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर से रवाना होकर गुप्तकाशी पहुंची थी, जहां आर्मी बैंड की धुन ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया।  शाम धाम पहुंचें बाबा, आज होगा महा-अभिषेक कल सुबह विशेष पूजा-अर्चना के बाद डोली गौरीकुण्ड से केदारनाथ धाम के लिए रवाना .  हजारों की संख्या में पैदल यात्री इस डोली के पीछे-पीछे चल रहे हैं.  उम्मीद है कि शाम तक डोली मंदिर परिसर में पहुंची .  वहीं, भक्तों की नजरें आज सुबह 8:00 बजे के उस ऐतिहासिक पल पर टिकी हैं, जब मंत्रोच्चार के बीच केदारनाथ मंदिर के कपाट आम जनता के लिए खोल दिए जाएंगे।  पैदल मार्ग पर भारी जाम और अव्यवस्था आस्था के इस महाकुंभ में जहां जोश हाई है, वहीं व्यवस्थाएं पस्त नजर आ रही हैं.  गौरीकुण्ड से केदारनाथ तक के संकरे पैदल मार्ग पर इस वक्त पैर रखने की जगह नहीं है.  हजारों यात्रियों का हुजूम एक साथ आगे बढ़ रहा है, जिससे रास्ते में जगह-जगह भयंकर जाम की स्थिति बनी हुई है।  यात्रा मार्ग पर सबसे बड़ी मुसीबत घोड़े-खच्चर बन गए हैं. इनकी बेतरतीब आवाजाही और संकरे रास्तों पर इनके कारण पैदल चल रहे यात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. यात्रियों का कहना है कि पशुओं के दबाव के कारण जाम खुल नहीं रहा है, जिससे बुजुर्गों और बच्चों की सांसें फूल रही हैं।  केदारघाटी हुई शिवमय बेशक रास्ते कठिन हैं और जाम की चुनौती बड़ी है, लेकिन भक्तों का हौसला कम नहीं हुआ है. गुप्तकाशी से लेकर गौरीकुण्ड तक पूरा इलाका शिव के रंग में रंगा नजर आ रहा है।  तीन दिन पहले बाबा केदार ने छोड़ा शीतकालीन गद्दीस्थल बाबा केदारनाथ की पंचमुखी डोली रविवार, 19 अप्रैल को अपने शीतकालीन गद्दीस्थल उखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर से रवाना हुई थी। 20 किलोमीटर का सफर तय कर डोली फाटा पहुंची, जहां आर्मी बैंड की धुन और स्कूली बच्चों के जयकारों के साथ डोली का स्वागत किया गया। इसके बाद डोली सोमवार सुबह फाटा से निकली और शाम को गौरीकुंड पहुंची। यहां से मंगलवार सुबह बाबा की पंचमुखी डोली केदारनाथ धाम के लिए रवाना हो चुकी है। बाबा केदार की डोली 178 दिन ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ में विराजमान रही। इससे पहले, 23 अक्टूबर 2025 (भैया दूज) को सुबह 8:30 बजे केदारनाथ धाम के कपाट बंद किए गए थे। कपाट बंद होने के बाद बाबा की डोली रामपुर और गुप्तकाशी होते हुए तीन दिनों की पैदल यात्रा पूरी कर 25 अक्टूबर 2025 को ऊखीमठ पहुंची थी, जहां छह महीने तक उनकी शीतकालीन पूजा-अर्चना हुई। 149 दिन बाद बद्रीनाथ धाम पहुंचेंगे भगवान बद्री विशाल बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खुलने जा रहे हैं। इसे देखते हुए चमोली पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। धाम में आतंकवादी निरोध दस्ता (एटीएस) की तैनाती भी की गई है। भगवान बद्री विशाल की डोली मंगलवार, 21 अप्रैल को जोशीमठ से धाम के लिए रवाना होगी। करीब 42 किलोमीटर का सफर तय करके डोली बुधवार शाम बद्रीनाथ धाम पहुंचेगी। 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। भगवान बद्रीनाथ की गद्दी करीब 6 महीने तक जोशीमठ के नरसिंह मंदिर में विराजमान रही। बद्रीनाथ धाम के कपाट 25 नवंबर 2025 को दोपहर करीब 2:56 बजे बंद हुए थे। कपाट बंद होने के बाद भगवान की गद्दी पांडुकेश्वर होते हुए अपने शीतकालीन प्रवास जोशीमठ पहुंची थी, जहां पूरी सर्दियों में उनकी विशेष पूजा-अर्चना हुई। दो दिन पहले खुले थे कपाट रविवार से चारधाम यात्रा शुरू हुई थी। दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर गंगोत्री और 12 बजकर 35 मिनट पर यमुनोत्री के कपाट खोल दिए गए थे। इससे पहले गंगोत्री धाम के कपाट 22 अक्टूबर 2025 (अन्नकूट, गोवर्धन पूजा) को सुबह 11:36 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए थे। वहीं, यमुनोत्री धाम के कपाट भाई दूज पर 23 अक्टूबर 2025 को दोपहर 12:30 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए थे।

रिपोर्ट का दावा: US से भारत को 12 अरब डॉलर तक टैरिफ रिफंड, व्यापार को मिलेगी रफ्तार

नई दिल्ली अमेरिका में भारत से जुड़े टैरिफ रिफंड की राशि 10 से 12 अरब डॉलर के बीच होने की उम्मीद है। यह रिफंड अमेरिकी अधिकारियों द्वारा डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ के लिए 166 अरब डॉलर की क्लेम विंडो खोलने के बाद दिया जा रहा है, जिसे अमेरिकी अदालतों ने रद्द कर दिया था। यह जानकारी ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव की ओर से जारी रिपोर्ट में दी गई। रिफंड की प्रक्रिया 20 अप्रैल को शुरू हुई और क्लेम केवल अमेरिका स्थित आयातकों द्वारा ही दायर किए जा सकते हैं, जिसका अर्थ है कि भारतीय निर्यातकों के पास रिफंड प्राप्त करने का कोई सीधा कानूनी रास्ता नहीं है। भारतीय कंपनियों को रिफंड का कोई हिस्सा पाने के लिए अब अमेरिकी खरीदारों के साथ बातचीत पर निर्भर रहना होगा। निर्यातकों को छूट साझा करने के लिए डील, कीमतों में बदलाव या भविष्य के अनुबंधों में बेहतर शर्तों की मांग करनी पड़ सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़ा रिफंड एक बड़े अवसर की ओर इशारा करता है, लेकिन चेतावनी दी गई है कि भारतीय निर्यातकों के लिए कोई भी वास्तविक लाभ उनकी बातचीत की ताकत और अमेरिकी भागीदारों के साथ वाणिज्यिक शर्तों को फिर से शुरू करने की उनकी क्षमता पर निर्भर करेगा। भारत से जुड़े रिफंड में सबसे अधिक हिस्सेदारी कपड़ा और परिधान, इंजीनियरिंग सामान और रसायन क्षेत्रों की होने की संभावना है, क्योंकि टैरिफ में अचानक बढ़ोतरी होने पर ये क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुए थे। टैरिफ के पहले चरण में उन व्यवसायों को शामिल किया गया है जिनकी प्रविष्टियों को अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है, या आयात संबंधी आवेदन अभी भी सीमा शुल्क समीक्षा के अधीन हैं, और वे प्रविष्टियां, जिन्हें पिछले 80 दिनों के भीतर अंतिम रूप दिया गया है। इससे पहले अंतिम रूप दी गई प्रविष्टियों वाले व्यवसायों को क्लेम दाखिल करने से पहले बाद के चरणों का इंतजार करना होगा।

एयर विजिट में बड़ा संदेश: भारत-अमेरिका रिश्ते मजबूत, इंडो-पैसिफिक सुरक्षा पर जोर

वाशिंगटन सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने होनोलूलू में यूनाइटेड स्टेट्स आर्मी पैसिफिक के कमांडिंग जनरल, जनरल रोनाल्ड पी. क्लार्क और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग मजबूत करने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए एक साझा दृष्टिकोण आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। जब जनरल द्विवेदी हवाई स्थित यूएस मिलिट्री बेस पर पहुंचे, तो फोर्ट शैफ्टर में उन्हें 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया गया और उन्होंने ओहू द्वीप का हवाई दौरा भी किया। भारतीय सेना के अतिरिक्त जन सूचना महानिदेशालय (एडीजीपीआई) ने एक्स पोस्ट में इसकी जानकारी दी। बताया, "जनरल उपेंद्र द्विवेदी, सीओएएस, को यूएस आर्मी पैसिफिक की अपनी मौजूदा यात्रा के दौरान, हवाई के फोर्ट शैफ्टर में 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया गया। उन्होंने अमेरिकी आर्मी पैसिफिक के कमांडिंग जनरल, जनरल रोनाल्ड पी. क्लार्क और अन्य वरिष्ठों के साथ बातचीत की। इस दौरान भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग मजबूत करने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए एक साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने पर जोर रहा। सीओएएस ने ओहू द्वीप का हवाई दौरा भी किया, जिससे उन्हें ट्रेनिंग इकोसिस्टम और बहु-क्षेत्रीय परिचालन तत्परता की जानकारी मिली।" इस महीने की शुरुआत में, भारत और अमेरिका ने अपनी वायु सेनाओं के प्रमुखों के बीच हुई उच्च-स्तरीय बातचीत के दौरान अपनी रणनीतिक रक्षा साझेदारी की फिर से पुष्टि की; इस बातचीत का मुख्य एजेंडा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आपसी तालमेल, प्रशिक्षण और क्षेत्रीय प्रतिरोधक क्षमता पर जोर देना था। यूएस वायु सेना के चीफ ऑफ स्टाफ, जनरल केनेथ विल्सबैक ने 8 अप्रैल को भारतीय वायु सेना के प्रमुख, एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह की आधिकारिक यात्रा की मेजबानी की थी। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सिंह का जॉइंट बेस एनाकोस्टिया-बोलिंग में पूरे सम्मान के साथ स्वागत किया गया और बाद में उन्होंने पेंटागन में वायु सेना के सचिव, ट्रॉय मिंक और विल्सबैक के साथ बैठक भी की। बातचीत के दौरान, यूएस वायु सेना के वरिष्ठ अफसरों ने बताया कि भारत के साथ अपनी रक्षा साझेदारी को वाशिंगटन बहुत महत्व देता है; उन्होंने इसे "एक स्वतंत्र, खुला, शांतिपूर्ण और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र" सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण बताया। विल्सबैक ने समान विचारधारा वाले साझेदारों के साथ बहुपक्षीय अभ्यासों में भारत के नेतृत्व और भागीदारी की सराहना की, और इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के सहयोग का विस्तार करना क्षेत्रीय प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने की कुंजी होगी। विल्सबैक ने कहा, "एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह की इस महत्वपूर्ण समकक्ष यात्रा की मेजबानी करना हमारे लिए सम्मान की बात थी। पेंटागन में हमने आधुनिकीकरण के प्रयासों, भविष्य के प्रशिक्षण अवसरों और एक स्वतंत्र, खुले और समृद्ध इंडो-पैसिफिक की साझा प्रतिबद्धता पर मंथन किया।" वार्ताओं में भारत द्वारा एमक्यू-9बी स्काई गार्डियन विमान की खरीद पर भी चर्चा हुई, जिसमें अमेरिकी वायुसेना ने यह सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता जताई कि भारतीय सशस्त्र बल इस प्लेटफॉर्म का डिलीवरी के बाद "सुगमता और प्रभावी ढंग से उपयोग" कर सकें। विल्सबैक ने भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण प्रयासों का समर्थन करने के लिए अमेरिकी वायुसेना की तत्परता को रेखांकित किया और रक्षा औद्योगिक सहयोग के पारस्परिक लाभों की ओर इशारा किया था। पेंटागन की बैठकों के बाद स्टाफ-स्तरीय वार्ताएं हुईं, जिनमें कई परिचालन क्षेत्रों पर चर्चा की गई, जैसे नेशनल गार्ड ब्यूरो का स्टेट पार्टनरशिप प्रोग्राम, एयर नेशनल गार्ड का एडवांस्ड एयरलिफ्ट टैक्टिक्स ट्रेनिंग सेंटर और एमक्यू-9 के पूर्ण-स्पेक्ट्रम संचालन। एयरचीफ मार्शल सिंह ने कहा कि इस तरह की सहभागिताएं दोनों वायुसेनाओं के बीच संयुक्त क्षमताओं को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा, "ऐसे अवसर हमारी संयुक्त इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाने और हमारी वायुसेनाओं के बीच रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।" एयरचीफ मार्शल सिंह ने कोलोराडो के पीटरसन स्पेस फोर्स बेस का दौरा किया, जहां उन्हें नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड के मिशन के बारे में जानकारी दी गई, जिसमें उत्तरी अमेरिका के लिए एयरोस्पेस और समुद्री चेतावनी शामिल है।

Ashwagandha पर नया नियम: पत्तियों के इस्तेमाल पर बैन, क्या जड़ है सुरक्षित? पूरी जानकारी

नई दिल्ली फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने खाने-पीने की चीजों में अपनी निगरानी बढ़ा दी है। पिछले कुछ दिनों से कई मिलावटी चीजों को पकड़ने के बाद अब FSSAI ने अश्वगंधा की पत्तियों के इस्तेमाल पर सीधी रोक लगाई है। उन्होंने सख्त निर्देश दिए है कि अश्वगंधा का इस्तेमाल सिर्फ उसकी जड़ और एक्सट्रैक्ट तक ही सीमित रखा जाए, पत्तियों के इस्तेमाल पर कंपनियों पर कार्रवाई होगी। उन्होंने साफ कर दिया है कि अश्वगंधा का इस्तेमाल फिर चाहे कच्चा हो या उसका एक्सट्रैक्ट उसकी अनुमति नहीं है। FSSAI के साथ आयुष मंत्रालय ने भी दवा और प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियों को यही निर्देश जारी किए हैं। एडवाइजरी जारी करते हुए सरकार ने सभी हेल्थ सप्लीमेंट बनाने वाली कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपने खाद्य उत्पादों पर साफ-साफ लेबल के साथ लिखेंगे कि उनमें अश्वगंधा का कितने प्रतिशत इस्तेमाल किया गया है। क्या है अश्वगंधा अश्वगंधा (Ashwagandha) आयुर्वेद की सबसे शक्तिशाली और प्रसिद्ध जड़ी-बूटियों में से एक है। इसे पुराने समय से लोग दवाइयों के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। 'अश्वगंधा' शब्द दो संस्कृत शब्दों से बना है, अश्व (घोड़ा) और गंध (महक)। ऐसा कहा जाता है कि इससे घोड़े के पसीने जैसी महक आती है और इसे खाने से उसके जैसी ताकत। इसका पौधा छोटा और झाड़ीदार होता है, जिसमें पीले फूल और लाल फल निकलते हैं। आयुर्वेद में सालों से इसकी जड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे फायदेमंद माना जाता है। पत्तियों पर क्यों लगाई रोक? अश्वगंधा की पत्तियों में रिएक्टिव विथानोलाइड्स की मात्रा ज्यादा होती है, जो शरीर के लिए टॉक्सिक माने जाता है। इसका सेवन करने से लिवर, पेट और नसों से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। सेहत को मद्देनजर यूरोपीय कंट्री पोलैंड और हंगरी ने पहले से ही इन पत्तियों के इस्तेमाल पर रोक लगा रखी है। दवा बनाने वाली कंपनियां सस्ते होने की वजह से इसकी पत्तियों का इस्तेमाल कर रही थी क्योंकि जड़ काफी महंगी मिलती है। अश्वगंधा की जड़ खाने के फायदे अश्वगंधा की जड़ खाने से सेहत को कई तरह के फायदे मिलते हैं लेकिन इसके सेवन का तरीका भी सही होना चाहिए। ज्यादा खाने से ये खतरनाक भी हो सकता है। चलिए आपको इसके फायदे और नुकसान बताते हैं। फायदे-     तनाव कम करना- रिसर्च के मुताबिक, अश्वगंधा शरीर में कोर्टिसोल (Cortisol) के स्तर को कम करता है, जो कि एक स्ट्रेस हार्मोन है। इससे दिमाग शांत रहता है और स्ट्रेस लेवल कंट्रोल में रहता है।     मांसपेशियां होंगी मजबूत- एथलीट और जिम जाने वाले लोग ताकत बढ़ाने के लिए इसे खाते हैं। इसे खाने से मसल्स मजबूत हो जाती है।     नींद की कमी- अश्वगंधा की जड़ का सेवन करने से अनिद्रा की समस्या नहीं रहती। अगर आपको कम नींद आती है, तो ये ठीक कर देगा।     स्पर्म क्वालिटी- अश्वंगधा पुरुषों के लिए काफी फायदेमंद होती है। यह टेस्टोस्टेरोन लेवल को बढ़ाकर प्रजनन क्षमता को बेहतर करती है। साथ ही स्पर्म क्वालिटी को सुधारती है। नुकसान-     हड्डियों में दर्द- ज्यादा अश्वगंधा खाने से हड्डियों में दर्द या थायरॉइड की समस्या हो सकती है।     ब्लड प्रेशर के मरीज- अश्वगंधा बीपी वाले मरीजों को बिल्कुल नहीं लेना चाहिए। इसे खाने से ब्लड प्रेशर घट या बढ़ सकता है, जो जानलेवा हो सकता है।     लिवर पर असर- ज्यादा अश्वगंधा का सेवन आपके लिवर पर असर डाल सकता है। साथ ही पेट संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।

चुनाव से पहले बंगाल में बैन: बाइक रैली और डबल राइडिंग पर रोक, जानें वजह

कोलकाता पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव सुनिश्चित करने के लिए राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) के कार्यालय ने मोटरसाइकिल के उपयोग पर कड़े प्रतिबंध लगाये हैं। आयोग द्वारा 20 अप्रैल को जारी अधिसूचना के अनुसार, मतदान से 48 घंटे पहले किसी भी प्रकार की बाइक रैली की अनुमति नहीं होगी। आयोग के सूत्रों के अनुसार, यह देखा गया है कि चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद भी राजनीतिक दल बाइक रैलियां निकालते हैं, जिनके जरिए कई मामलों में मतदाताओं को डराने-धमकाने की कोशिश की जाती है। जिला चुनाव अधिकारियों (DEOs), पुलिस कमिश्नरों और पुलिस अधीक्षकों को संबोधित एक आदेश में CEO ने कहा कि मोटरसाइकिल रैलियों पर पूरी तरह से बैन है, इसमें कोई छूट नहीं है। एक चुनाव अधिकारी ने कहा, "आयोग मतदाताओं को डराने-धमकाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगा, इसलिए बाइक रैलियों पर प्रतिबंध लगाया गया है।" इसके अलावा, इस अवधि में शाम छह बजे से सुबह छह बजे तक मोटरसाइकिलों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी, सिवाय आपात स्थितियों जैसे चिकित्सा या जरूरी पारिवारिक कारणों के। बाइक पर पीछे बैठने पर भी रोक इस आदेश में कहा गया है कि सुबह छह बजे से शाम छह बजे के बीच भी पिलियन राइडिंग (पीछे बैठकर सफर) पर रोक रहेगी, हालांकि चिकित्सा आपात स्थिति या आवश्यक कार्य जैसे स्कूल बच्चों को ले जाने की स्थिति में छूट दी जा सकती है। चुनाव आयोग के निर्देशों के मुताबिक, हालांकि, मतदान के दिन सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक सीमित छूट दी जाएगी, जिसमें परिवार के सदस्यों को मतदान और आवश्यक कार्यों के लिए दोपहिया वाहन पर यात्रा की अनुमति होगी। संकरी गलियों से कैश या शराब ले जाने पर लगेगी रोक CEO के दफ़्तर के एक अधिकारी ने बताया कि राजनीतिक पार्टियां कभी-कभी संकरी गलियों और उप-गलियों से कैश या शराब ले जाने के लिए मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल करती हैं, जहाँ आमतौर पर मुख्य सड़कों पर चार-पहिया वाहनों पर नजर रखने वाली चौकियाँ नहीं होतीं। उनके अनुसार, "इन पाबंदियों का मकसद मतदाताओं को प्रलोभन देने के इस तरीके को खत्म करना और बिना किसी हिंसा के चुनाव का माहौल सुनिश्चित करना है।" अधिकारियों को इन निर्देशों का व्यापक प्रचार करने और जिला पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय कर सख्ती से लागू करने के निर्देश दिये गये हैं। यह कदम मतदान से पहले के 48 घंटे के मौन अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की डराने-धमकाने की गतिविधियों, अवैध जुटान और चुनाव प्रक्रिया में बाधा को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। ऐप-आधारित डिलीवरी करने वालों के लिए मुश्किल चुनाव आयोग के इस आदेश से ऐप-आधारित डिलीवरी करने वालों पर इसके लागू होने को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। इनमें से कई लोग अपनी रोजी-रोटी के लिए मोटरसाइकिलों पर निर्भर हैं और पूरी रात काम करते हैं। इस निर्देश में बाइक चलाने वालों की इस श्रेणी का कोई खास ज़िक्र नहीं है। आदेश में DEOs और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया के साथ-साथ ज़िला और ब्लॉक-स्तर के प्रचार तंत्र के ज़रिए इन पाबंदियों का व्यापक प्रचार करें, और इनके सख़्त पालन और निगरानी के लिए आपस में तालमेल बिठाएँ। आदेश में कहा गया है, "किसी भी ऐसे उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा जिससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया में कोई रुकावट या बाधा पैदा हो।"

रॉबर्ट पेप ने समझाई ईरान की मजबूती, ‘चौथी सबसे बड़ी ताकत’ बनने की वजह

तेहरान  क्या दुनिया अब तक ईरान को समझने में बहुत बड़ी भूल कर रही थी? क्या पश्चिमी देश जिस ईरान को एक ‘कमजोर’ देश मान रहे थे, वह असल में दुनिया का एक नया पावर सेंटर बन चुका है? मशहूर अमेरिकी रणनीतिकार और अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ रॉबर्ट पेप ने कहा, दुनिया का नजरिया अब ईरान को लेकर पूरी तरह से बदल रहा है. उन्‍होंने एक्‍स पर ल‍िखा, ईरान अब वो नहीं, जो हम उसे समझ रहे थे।  ज‍िस वक्‍त ईरान अमेर‍िका के सामने सीना ठोककर खड़ा है, ठीक उसी वक्‍त रॉबर्ट पेप ने यह बातें कहीं. अमेरिकी टीवी शो ‘मॉर्निंग जो’ की एक चर्चा का हवाला देते हुए उन्‍होंने कहा कि अब तक पश्चिमी मीडिया में इस बात पर बहस होती थी कि ईरान कितना कमजोर हो चुका है. लेकिन अब अचानक पूरी बहस का रुख बदल गया है. अब वहां चर्चा इस बात पर हो रही है कि ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) का क्या होगा और ईरान के साथ नेगोशिएशन कैसे किया जाए. पेप के मुताबिक, अब दुनिया समझ गई है कि ईरान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।  बहुत बड़ा चेंज आ गया     पेप का कहना है कि यह वैश्विक नजरिए में एक बहुत बड़ा और गहरा बदलाव है. दुनिया अब ईरान को ‘सुलझाई जाने वाली एक समस्या’ के रूप में नहीं देख रही है. बल्कि अब उसे एक ऐसी ‘बड़ी ताकत’ के रूप में देखा जा रहा है, जिसका लोहा मानना ही पड़ेगा. पेप के मुताबिक, दुनिया में नए ‘पावर सेंटर’ यानी शक्ति के केंद्र इसी तरह से उभरते हैं. उन्होंने बताया कि दो हफ्ते पहले ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के अपने लेख में उन्होंने ठीक यही बात कही थी।      तब पेप ने लिखा था कि ईरान बिखर नहीं रहा है, बल्कि ‘होर्मुज’ का इस्तेमाल करके वह एक टिकाऊ ताकत बन रहा है. तब लोगों को उनकी बात अजीब लगी थी, लेकिन आज वही बात एक सच्चाई बन चुकी है. रॉबर्ट पेप ने समझाया कि आखिर ईरान के हाथ में ऐसी कौन सी चाबी है. इसका जवाब है ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’. यह दुनिया का वो संकरा समुद्री रास्ता है, जहां से हर दिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता है. यह पूरी दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का करीब 25 फीसदी है।      एशिया से लेकर खाड़ी देशों की पूरी अर्थव्यवस्था इसी एक समुद्री रास्ते पर टिकी हुई है. पेप कहते हैं कि जो भी देश इस ‘चोकपॉइंट’ को कंट्रोल करेगा, वह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने की ताकत रखेगा. ईरान की इस नई ताकत के पीछे उसकी एक बेहद स्मार्ट रणनीति है. पेप इसे ‘दबदबा’ नहीं, बल्कि ‘डिनायल’ की नीति कहते हैं।      ईरान को इस समुद्री रास्ते को पूरी तरह से बंद करने की कोई जरूरत नहीं है. वह सिर्फ अपनी मिसाइलों, ड्रोन्स, समुद्री सुरंगों और अपनी शानदार भौगोलिक स्थिति का इस्तेमाल करके वहां एक लगातार बना रहने वाला ‘खतरा’ पैदा कर रहा है. इस रास्ते पर सिर्फ ‘अनिश्चितता’ का खौफ पैदा करना ही दुनिया का व्यवहार बदलने के लिए काफी है. ईरान बिना रास्ता ब्लॉक किए ही अपना काम निकाल रहा है।  वेस्‍ट के ल‍िए यह कड़वी सच्‍चाई रॉबर्ट पेप ने पश्चिमी देशों और अमेरिका के सामने एक बहुत बड़ी सच्चाई रखी है. उनका कहना है कि इस स्थिति ने दुनिया के सामने एक गहरी चुनौती पेश कर दी है. अब दो ही विकल्प बचे हैं. या तो पूरी दुनिया ईरान को ग्लोबल पावर के ‘चौथे केंद्र’ के रूप में स्वीकार कर ले, या फिर ईरान के इस दबदबे को तोड़ने के लिए एक ऐसी जंग छेड़े, जिसकी भयंकर कीमत पूरी दुनिया को चुकानी पड़ेगी. पेप इसे ‘द एस्केलेशन ट्रैप’ यानी बढ़ते तनाव का जाल कहते हैं। 

चिप मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट देने की प्लानिंग, सरकार ला सकती है ISM 2.0

नई दिल्ली केंद्र सरकार देश में तेजी से सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विस्तार के लिए मई तक इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 'आईएसएम 2.0' लाने की तैयारी कर रही है। इसका प्रस्तावित परिव्यय एक लाख करोड़ रुपए से 1.2 लाख करोड़ रुपए के बीच रहने का अनुमान है। एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के मुताबिक, आईएसएम 2.0 को लेकर मंत्रालयों के बीच बातचीत चल रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, वित्त मंत्रालय से मंजूरी का इंतजार कर रहा है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि आईएसएम 2.0 में प्रस्तावित परिव्यय पहले चरण से काफी अधिक होने का अनुमान है, जो कि पहले 76,000 करोड़ रुपए था। सूत्रों ने आगे बताया कि आईएसएम 2.0 के तहत, सरकार का लक्ष्य कार्यक्रम के दायरे को चिप निर्माण और डिजाइन से आगे बढ़ाकर सेमीकंडक्टर उपकरण, कच्चे माल और अन्य महत्वपूर्ण इनपुट के लिए समर्थन को शामिल करना है, साथ ही पूर्ण-स्टैक बौद्धिक संपदा के निर्माण और आपूर्ति श्रृंखला की लचीलता को मजबूत करने पर भी ध्यान केंद्रित करना है। सरकार यह कदम ऐसे समय पर उठा रही है, जब वैश्विक अस्थिरता के कारण ग्लोबल आपूर्ति श्रृंखलाओं में लगातार व्यवधान देखने को मिल रहे हैं। गैस आपूर्तिकर्ता, विशेष रसायन निर्माता, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और अन्य इकोसिस्टम के भागीदार जैसे सहायक खिलाड़ी इस संशोधित ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है। दूसरे चरण की एक प्रमुख विशेषता संशोधित डिजाइन-लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई 2.0) योजना है, जिसके तहत विदेशी कंपनियों को भारतीय कंपनियों के साथ देश के भीतर सेमीकंडक्टर रिसर्च और डेवलपमेंट में साझेदारी करने की अनुमति मिलने की संभावना है। इस पहल से इनोवेशन को गति मिलने और आने वाले वर्षों में 50 तक फैबलेस सेमीकंडक्टर डिजाइन फर्मों के उदय को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। मार्च 2025 में भारत के पहले 'नैनो इलेक्ट्रॉनिक्स रोडशो' में, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा था कि घरेलू सेमीकंडक्टर मांग बाजार 2030 तक 110 अरब डॉलर तक बढ़ने की उम्मीद है।

मोहन भागवत की Z प्लस सिक्योरिटी का खर्च RSS उठा रहा, हाई कोर्ट में याचिका दाखिल, जज ने किया ये बयान

नागपुर  RSS यानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को मिली Z प्लस सुरक्षा को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल हुई। इस याचिका के जरिए मांग की गई थी कि सुरक्षा पर हो रहे खर्च का भुगतान संघ की तरफ से ही किया जाना चाहिए। हालांकि, उच्च न्यायालय ने याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता की मंशा पर भी सवाल उठाए हैं। 40 से 45 लाख रुपये महीने का खर्च उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के समक्ष दायर जनहित याचिका में दावा किया गया कि सुरक्षा कवर की लागत कथित तौर पर 40 लाख से 45 लाख रुपये प्रति माह बताई गई है, जो सार्वजनिक धन का दुरुपयोग और राज्य के खजाने का नुकसान है क्योंकि आरएसएस एक पंजीकृत संगठन नहीं है। याचिका को खारिज करते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर और जस्टिस अनिल किलोर की पीठ ने याचिका दायर करने के पीछे याचिकाकर्ता के मकसद और इरादे पर सवाल उठाए। याचिकाकर्ता के वकील ने यह जानकारी दी। याचिका में क्या नागपुर निवासी ललन सिंह द्वारा अपने वकील अश्विन इंगोले के माध्यम से दायर याचिका में यह दलील दी गई कि करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग ऐसे व्यक्ति को 'जेड-प्लस' श्रेणी की वीवीआईपी सुरक्षा प्रदान करने के लिए किया जा रहा है, जिसका संगठन 'पंजीकृत' नहीं है। याचिकाकर्ता ने सरकार की तरफ से भागवत को दी गई उच्च स्तरीय सुरक्षा के लिए उनसे शुल्क की भरपाई का अनुरोध किया था। मुकेश अंबानी केस का दिया हवाला उन्होंने 2023 में उच्चतम न्यायालय द्वारा उद्योगपति मुकेश अंबानी से संबंधित एक मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया, जिसमें शीर्ष अदालत ने भारत सरकार की नीति के अनुसार उन्हें 'जेड-प्लस' श्रेणी की सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया था। साथ ही इसका पूरा खर्च उनके परिवार द्वारा उठाया जाना था। मोहन भागवत को कब मिली थी जेड प्लस सिक्योरिटी जून 2015 में संघ प्रमुख भागवत की सुरक्षा को बढ़ाकर जेड प्लस श्रेणी का कर दिया गया था। इसके साथ ही उनके सुरक्षा घेरे को संभालने का जिम्मा CISF यानी सेंट्रल आर्म्ड इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्सेज के पास आ गया था। इससे पहले उनकी सुरक्षा में महाराष्ट्र पुलिस की टुकड़ियां तैनात थीं। खास बात है कि पहली बार साल 2012 में यूपीए सरकार के दौरान भागवत को जेड प्लस सिक्योरिटी देने के आदेश दिए गए थे। तब सुशील कुमार शिंदे देश के गृहमंत्री थे।

अमित शाह ने बंगाल में किया आह्वान, ‘कमल का बटन दबाओ, भाजपा सरकार बनाओ, घुसपैठियों को भगाओ’

कलकत्ता पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनावी जंग गरमाई हुई है. दोनों राज्यों में सत्ता बचाने और हासिल करने की कोशिशें तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जिसमें पहले चरण में 152 सीटों पर 23 अप्रैल को और दूसरे चरण में 142 सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान होगा. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. सभी राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे 4 मई को आएंगे।  पश्चिम बर्धमान में बोले अमित शाह- बंगाल से हर घुसपैठिए को निकाल देंगे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बर्धमान में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि यह चुनाव सिर्फ भाजपा के उम्मीदवार को विधायक बनाने या अपने कार्यकर्ता को मुख्यमंत्री बनाने के लिए नहीं है.  शाह ने कहा, “ये चुनाव पूरे बंगाल को घुसपैठियों से मुक्त करने के लिए है. उन्होंने जनता से वादा किया कि 23 तारीख को कमल के निशान पर बटन दबाकर 5 तारीख को भाजपा की सरकार बना दो. फिर हम बंगाल से एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुनकर बाहर निकाल देंगे. अमित शाह ने कहा कि भाजपा बंगाल में कानून का राज कायम करेगी और राज्य को अवैध घुसपैठ से पूरी तरह मुक्त करेगी।  आसनसोल में बोलीं दिल्ली की सीएम- अब डर से आगे निकले बंगाल दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आसनसोल में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए लोगों से अपील की कि अब बंगाल को डर और आतंक से आगे निकलना चाहिए.  रेखा गुप्ता ने कहा कि बंगाल अब टीएमसी के गुंडों की पक्षपात वाली राजनीति को बर्दाश्त नहीं करेगा।  गुंडों व माफिया को चुन- चुन कर जेल में डालेंगे लोगों से बेखौफ मतदान करने की अपील करते हुए शाह ने कहा कि 23 मई को ममता का कोई भी गुंडा आपका बाल बांका नहीं कर पाएगा। टीएमसी के किसी भी गुंडे से किसी को डरने की जरूरत नहीं है। भाजपा सरकार बनते ही टीएमसी के गुंडों व माफिया को चुन- चुन कर जेल में डालेंगे। शाह ने कहा कि यह चुनाव घुसपैठियों को निकालने का चुनाव है। उन्होंने पूछा कि क्या ममता बनर्जी और उनका भतीजा ऐसा कर सकती है। घुसपैठियों को चुन-चुन कर बाहर निकलेंगे उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी सरकार ने बीएसएफ को भारत- बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन तक नहीं दी। शाह ने पार्टी के संकल्प पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि हमने तय किया है कि भाजपा सरकार बनने के 45 दिनों के अंदर अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बिना तारबंदी वाले हिस्सों में बाड़ लगाने के लिए जरूरी भूमि बीएसएफ को सौंप दी जाएगी। उन्होंने फिर दोहराया कि भाजपा का वादा है कि न सिर्फ बंगाल से बल्कि पूरे देश से हम घुसपैठियों को चुन- चुन कर बाहर निकलेंगे। बंगाल की अस्मिता की रक्षा टीएमसी नहीं कर सकती उन्होंने आगे कहा कि बंगाल की अस्मिता की रक्षा टीएमसी नहीं कर सकती। कविगुरु रवींद्र नाथ टैगोर की विरासत को यूनेस्को के धरोहर में शामिल करने का काम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया। बांग्ला को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने का काम मोदी सरकार ने किया।शाह ने आरोप लगाया कि ममता दीदी बहुसंख्यक समाज को डरा रही है। दीदी कह रही हैं कि टीएमसी नहीं रहेगी तो बहुसंख्यक समाज का अस्तित्व नहीं रहेगा। यह कहने वाली आप कौन होती है। बहुसंख्यक समाज का अस्तित्व आपकी वजह से नहीं है। शाह ने सवाल किया कि आपके शासनकाल में मुर्शिदाबाद में हिंसा हुई, हिंदुओं को निशाना बनाया गया। रामनवमी त्योहार के दौरान शोभायात्राओं पर हमले हुए, सरस्वती पूजा करने की अनुमति नहीं दी गई, तब आप कहां थी। भ्रष्टाचारियों से घोटाले का पाई-पाई का हिसाब लेंगे शाह ने बंगाल में शिक्षक भर्ती से लेकर नगर निगम में हुए नियुक्तियों में हुए घोटाले, गाय तस्करी, राशन, मनरेगा, पीएम आवास घोटालों आदि का जिक्र करते हुए कड़ी चेतावनी दी। शाह ने कहा कि सारे भ्रष्टाचारियों को कह कर जाता हूं कि भाजपा की सरकार बनने पर घोटाले का पाई-पाई का हिसाब जनता को देना पड़ेगा। जिन्होंने गरीब जनता का हक लूटा है उनसे वापस वसूला जाएगा। भाजपा सरकार में बेखौफ घूम पाएंगी बच्चियां  महिला सुरक्षा पर घेरते हुए शाह ने कहा कि एक महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद ममता बनर्जी माताओं- बहनों की सुरक्षा नहीं कर सकीं। महिलाओं से उन्होंने आह्वान किया कि भाजपा की सरकार बना दीजिए, बच्चियां रात में एक बजे भी स्कूटी से बाहर बेखौफ घूम सकेंगी। कोई गुंडे- बदमाश उन्हें नहीं छेड़ पाएंगे। उन्होंने महिलाओं को भरोसा दिया कि भाजपा की सरकार बनने पर राज्य में न संदेशखाली न आरजी कर, न ला कालेज और न मेडिकल कालेज में दुष्कर्म जैसी घटनाएं होगी। बंगाल में बोले सचिन पायलट- कांग्रेस पूरे राज्य की हर सीट पर चुनाव लड़ रही है कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने मुर्शिदाबाद में कहा कि बंगाल की जनता ने राज्य सरकार को भी तीन मौके दिए और केंद्र सरकार को भी. लेकिन दोनों सरकारों के बीच लगातार झगड़े की वजह से आम लोगों को बिना वजह बहुत परेशानी झेलनी पड़ी. सचिन पायलट ने कहा, पहली बार कांग्रेस पूरे राज्य की हर सीट पर चुनाव लड़ रही है. कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है. उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि इस बार कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत बेहतर होगा. कांग्रेस अब बंगाल में मजबूती से वापसी कर रही है और लोगों की समस्याओं को हल करने के लिए पूरी ताकत से काम करेगी।  असम-केरल-पुडुचेरी में बंपर हुई थी वोटिंग असम में 75.91%, केरल में लगभग 78% और पुडुचेरी में 72% के आसपास वोटिंग दर्ज की गई थी।  तमिलनाडु में स्टालिन बनाम पलानीस्वामी तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा के लिए एक चरण में 23 अप्रैल को मतदान होगा.मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की डीएमके सत्ता में है.2021 में डीएमके गठबंधन ने 133 सीटें जीती थीं. मुख्य मुकाबला डीएमके और एआईएडीएमके के बीच है.एआईएडीएमके के नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) का बीजेपी के साथ गठबंधन है, जो डीएमके के लिए चुनौती बन रहा है।   बंगाल में ममता बनाम सुवेंदु-बीजेपी की टक्कर पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव दो चरणों में हो रहे हैं. पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर और दूसरे … Read more