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8th Pay Commission में अहम बदलाव, केंद्र सरकार ने अंबिका आनंद को निदेशक पद पर किया नियुक्त

नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission)  को लेकर एक अहम खबर सामने आई है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने व्यय विभाग के अंतर्गत आठवें केंद्रीय वेतन आयोग में दो अधिकारियों – स्मिता मोल एम एस और अंबिका आनंद की  नियुक्ति को लेटरल ट्रांसफर के आधार पर मंजूरी दे दी है। स्मिता मोल एम एस, फिलहाल नागरिक उड्डयन मंत्रालय में उप सचिव के पद पर कार्यरत हैं और उन्हें 8वें CPC में उप सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं, अंबिका आनंद, इस्पात मंत्रालय में वर्तमान में निदेशक के पद पर कार्यरत हैं, उन्हें 8वें सीपीसी में निदेशक नियुक्त किया गया है। क्या होगा दोनों अधिकारियों का कार्यकाल स्मिता मोल एम एस का कार्यकाल आयोग के साथ ही समाप्त हो जाएगा और इसे 14 अप्रैल, 2029 तक बढ़ाया जा सकता है, जो केंद्रीय कर्मचारी योजना के तहत उनके चार साल के कार्यकाल की शेष अवधि के बराबर है, या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो। वहीं, अंबिका आनंद का कार्यकाल भी आयोग के साथ ही समाप्त होगा और केंद्रीय कर्मचारी योजना के तहत उनके स्वीकार्य पांच वर्षीय कार्यकाल की शेष अवधि के अनुरूप, 13 अक्टूबर, 2030 तक या अगले आदेश तक बढ़ाया जा सकता है। इन नियुक्तियों से पहले, सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग में दो वरिष्ठ अधिकारियों को संयुक्त सचिव के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दी थी। इनमें अमित सतीजा (आईएएस) और नीरज कुमार गयागी (आईडीएएस) को व्यय विभाग के अधीन कार्यरत आयोग में संयुक्त सचिव के रूप में नियुक्त किया गया था। इससे पहले खबर आई थी कि नेशनल काउंसिल की स्टाफ साइड ने आयोग को अपना 51 पेज का मेमोरेंडम तय समय से पहले भेज दिया है। जेसीएम के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि, "कर्मचारियों की जरूरतों और बढ़ती महंगाई को ध्यान में रखते हुए कई अहम प्रस्ताव दिए गए हैं।" सैलरी-एरियर की ये है डिटेल केंद्रीय कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का बेसब्री से इंतजार है। यह वेतन आयोग 18 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा। सिफारिशों के लागू होने से पहले वेतन आयोग से जुड़ी कुछ ऐसी बातें हैं जो केंद्रीय कर्मचारियों को जान लेना जरूरी है। उदाहरण के लिए यह जानना जरूरी है कि कितने केंद्रीय कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। इसके अलावा, सैलरी और एरियर को वेतन आयोग कैसे निर्धारित करते हैं। 8वें वेतन के बारे में दरअसल, केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और पेंशन को संशोधित करने के लिए हर 10 साल में गठित किया जाता है। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। इसके सदस्यों में प्रोफेसर पुलक घोष और पंकज जैन शामिल हैं। वेतन आयोग विभिन्न मंत्रालयों, कर्मचारी संघों, पेंशनभोगियों और अन्य संबंधित पक्षों से विचार और सुझाव इकट्ठा करता है। ये सुझाव इकट्ठा हो जाने के बाद वेतन आयोग सैलरी स्ट्रक्चर, पेंशन फॉर्मूलों और भत्तों के पैटर्न का विश्लेषण और अध्ययन करता है और उसके बाद ही अंतिम सिफारिशें देता है। वेतन आयोग का कब गठन हुआ? बता दें कि 8वें वेतन आयोग की घोषणा पिछले साल जनवरी महीने में की गई थी। इसके लिए संदर्भ की शर्तें (ToR) पिछले साल नवंबर में जारी की गई थीं। तब से ही सैलरी ग्रोथ, बकाया, संशोधनों और पेंशन स्ट्रक्चर में प्रस्तावित बदलावों के लागू होने को लेकर काफी अटकलें लगाई जा रही हैं। इस बीच, वेतन आयोग के पास अपनी सिफारिशें जमा करने के लिए कुल 18 महीने का समय है। बता दें कि 7वें वेतन आयोग को बनने से लेकर लागू होने तक 2.5 साल लगे और 6वें वेतन आयोग को 2 साल जबकि 5वें वेतन आयोग को 3.5 साल लगे। बहरहाल, अब वेतन आयोग की 24 अप्रैल 2026 को देहरादून में एक बैठक भी होने वाली है। फिटमैंट फैक्टर की अहम भूमिका वेतन आयोग वेतन को लेकर जो भी सिफारिशें करेगा उसमें फिटमैंट फैक्टर की अहम भूमिका होगी। फिटमेंट फैक्टर एक ऐसा मल्टीप्लायर है जो पुरानी बेसिक पे को नई (संशोधित) बेसिक पे में बदलता है। इस मामले में फैक्टर जितना ज्यादा होगा सैलरी और पेंशन में उतनी ही अधिक बढ़ोतरी होगी। इसका असर प्रोविडेंट फंड में किए जाने वाले योगदान, ग्रेच्युटी से जुड़ी गणनाओं और बेसिक पे से जुड़े रिटायरमेंट के अन्य लाभों पर भी पड़ता है। आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का फायदा केंद्र सरकार के लगभग 50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख रिटायर्ड पेंशनभोगियों को मिलने की उम्मीद है। कहने का मतलब है कि एक करोड़ से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। बता दें कि वेतन आयोग की सिफारिशें एक जनवरी 2026 से प्रभावी होने की उम्मीद है। कहने का मतलब है कि केंद्र सरकार के इन कर्मचारियों को एरियर के तौर पर मोटी रकम मिल सकती है।  

अरबपति परिवार की महिला जिम ट्रेनर बनी शिकार, आरोपी की गिरफ्तारी

 सूरत ये हैरान कर देने वाली कहानी सूरत के एक जिम की है. यहां अरबपति फैमिली की एक महिला काफी समय से वर्कआउट के लिए जा रही थी. जिम के ट्रेनर ने महिला से नजदीकियां बढ़ानी शुरू कीं और धीरे-धीरे अपनी बातों में उलझाकर प्रेमजाल में फंसा लिया. यह सब करीब सात साल तक चलता रहा. ट्रेनर ने तस्वीरें लेकर ब्लैकमेलिंग का खेल शुरू कर दिया. यह मामला तब सामने आया, जब पीड़िता के पति ने हिम्मत दिखाते हुए पुलिस से शिकायत की. अब आरोपी पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है।  दरअसल, सूरत के एक अरबपति परिवार की महिला सिटीलाइट इलाके के एक जिम में कसरत करने जाती थी. वहां जिम ट्रेनर के रूप में शब्बीर असगर ट्रंकवाला नाम का व्यक्ति काम कर रहा था. उसने महिला को अपनी बातों में बहला-फुसलाकर प्रेमजाल में फंसा लिया. यह युवक पिछले 7 साल से महिला के संपर्क में था. जब महिला के पति को अपना वैवाहिक रिश्ता टूटता दिखा, तो उन्होंने जिम ट्रेनर से संपर्क किया।  पिछले सात महीनों के दौरान उन्होंने जिम ट्रेनर से बातचीत भी की थी, लेकिन वह ब्लैकमेलिंग पर उतर आया था. आरोपी शब्बीर ने महिला के साथ कुछ निजी तस्वीरें खींच ली थीं. इसके बाद वह फोटो वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करने लगा था. जब महिला के पति ने शब्बीर से बात की, तो उसने तस्वीरों को वायरल करने की धमकी दी. इसके बदले में उसने महिला के पति से 5 लाख रुपये की मांग की और पति को जान से मारने की धमकी भी दी।  कुछ दिनों पहले ही सूरत पुलिस की SOG टीम ने जिम ट्रेनरों के साथ बैठक कर उन्हें महिलाओं से बिना काम के दूर रहने और मैसेज न करने के निर्देश दिए थे. महिला के पति ने इस मीटिंग की खबरें देखीं तो उन्होंने तुरंत SOG पुलिस से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई. सूरत पुलिस ने एक्शन लेते हुए आरोपी शब्बीर असगर ट्रंकवाला को अरेस्ट कर लिया।  शिकायत में महिला के पति ने बताया कि उन्होंने बार-बार जिम ट्रेनर शब्बीर से मुलाकात कर उससे तस्वीरें वायरल न करने को कहा था. इसके बावजूद ट्रेनर ने एक बार उनके ही मोपेड का कांच तोड़कर महिला के पति के गले पर लगा दिया और जान से मारने की धमकी दी. इसी के साथ पांच लाख रुपये मांगे।  सूरत पुलिस की एसओजी टीम के डीसीपी राजदीप सिंह नकुम ने बताया कि कुछ दिनों पहले एसओजी ने जिम ट्रेनर और संचालकों की मीटिंग बुलाई थी. उन्हें चेतावनी दी गई थी कि जो भी ट्रेनर नियुक्त करते हैं, उनकी कैरेक्टर जांच जरूर करवाएं, उसके बाद ही काम पर रखें. साथ ही, ट्रेनर के रूप में कार्य करने वाले व्यक्तियों के लिए यह निर्देश था कि वे जिम में आने वाली महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार का संबंध न बनाएं, यह न केवल गलत है, बल्कि आचार संहिता के भी विरुद्ध है।  आरोपी ने महिला के पति से कहा- मैं तुम्हारी पत्नी को नहीं छोड़ूंगा इसके बाद एक पीड़ित पुलिस के पास पहुंचे और उन्होंने शिकायत में कहा कि उनकी पत्नी लगभग सात साल से सैटेलाइट क्षेत्र के जिम में जा रही थी. वहां शब्बीर असगर ट्रंकवाला नाम के व्यक्ति से उसका अफेयर हो गया था. शब्बीर अब पत्नी को छोड़ने को तैयार नहीं है।  पीड़ित के अनुसार, आरोपी ने धमकी दी थी कि मैं तुम्हारी पत्नी को नहीं छोड़ूंगा, मेरे पास तुम्हारी पत्नी के आपत्तिजनक फोटो और वीडियो हैं, जिन्हें वायरल कर दूंगा. अगर तुमने 5 लाख नहीं दिए. इसके बाद आरोपी दोबारा मिला और पैसों को लेकर दबाव बनाया. आरोपी शब्बीर कांच का व्यवसाय करता है, उसने कांच का टुकड़ा पीड़ित की गर्दन पर रखकर डराते-धमकाते हुए 50,000 रुपए ऐंठ लिए. इसके बाद से पीड़ित दहशत में था. हालिया मीटिंग देखकर पीड़ित ने हिम्मत जुटाई और पुलिस ने मामले की शिकायत की। 

परिसीमन में कोई बदलाव नहीं, दक्षिण राज्यों को नहीं होगा नुकसान, जानें किस राज्य को कितनी सीटें मिलेंगी

नई दिल्ली लोकसभा में सीटें बढ़ने की तैयारी है। गुरुवार को संसद में महिलाओं को आरक्षण देने के लिए बिल पेश होने जा रहा है। इसी बीच खबरें हैं कि सभी राज्यों में लोकसभा में हिस्सेदारी 50 फीसदी बढ़ जाएगी। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। विधेयकों में सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव दिया गया था, जिसे लेकर दक्षिण के कुछ राज्यों में सीटों की संख्या को लेकर चिंताएं बनी हुईं थीं। सरकार जो तीन विधेयक लाने जा रही है उनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 व केंद्र शासित कानून (संशोधन) विधेयक 2026 शामिल हैं। न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार के सूत्र बताते हैं कि लोकसभा में सभी राज्यों की हिस्सेदारी में 50 प्रतिशत का इजाफा होगा। सरकार महिलाओं के आरक्षण के लिए संविधान में संशोधन बिल ला रही है। इसके लिए सत्र 16 अप्रैल से शुरू हो रहा है, जो 18 अप्रैल तक चलेगा। दक्षिण राज्यों को क्या मिलेगा रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया, '2011 की जनगणना अब कोई जरूरी शर्त नहीं होगी। इसका मतलब है कि अनुपात के हिसाब से कुछ भी नहीं बदलेगा। इससे दक्षिण भारतीय राज्यों की यह चिंता दूर हो जाएगी कि संसद में उनकी हिस्सेदारी या सीटें कम हो सकती हैं।' उन्होंने कहा, 'दक्षिण भारतीय राज्यों के लिए कुछ भी नुकसान नहीं है। जो अनुपात आज है, वो बरकरार रहेगा।' दक्षिणी राज्यों की चिंता दक्षिणी राज्यों के कई नेता, खासकर तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश के नेताओं ने परिसीमन को लेकर चिंता जताई थी. उनका कहना था कि जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों को राजनीतिक रूप से नुकसान नहीं होना चाहिए. सरकारी सूत्रों का यह बयान इन चिंताओं का जवाब माना जा रहा है. सूत्रों ने स्पष्ट किया कि परिसीमन का उद्देश्य किसी राज्य को लाभ या नुकसान पहुंचाना नहीं है, बल्कि लोकसभा की क्षमता बढ़ाना और लोकतंत्र को और अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाना है. हालांकि, अंतिम रूप से सीटों का आवंटन और नए क्षेत्रों का निर्धारण परिसीमन आयोग द्वारा किया जाएगा. सरकार ने कहा है कि आयोग को भी मौजूदा अनुपात बनाए रखने के निर्देश दिए जाएंगे. यह फैसला संसद के विशेष सत्र में चर्चा के दौरान सामने आया है, जहां परिसीमन और महिलाओं के आरक्षण से संबंधित विधेयक पेश किए जाने की तैयारी है. सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह व्यवस्था संघीय ढांचे को मजबूत रखते हुए लोकसभा को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास है. दक्षिणी राज्यों को आश्वासन दिया गया है कि उनकी राजनीतिक आवाज कम नहीं होगी।  तमिलनाडु सीएम ने दी थी चेतावनी मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने मंगलवार को चेतावनी दी थी कि अगर परिसीमन प्रक्रिया में राज्य के हित को नुकसान पहुंचाने वाला कोई कदम उठाया गया या उत्तरी राज्यों की राजनीतिक ताकत में अनुचित वृद्धि की गई, तो तमिलनाडु में बड़े पैमाने पर आंदोलन होंगे, 'पूरी ताकत से विरोध प्रदर्शन' होंगे जिससे राज्य ठप पड़ सकता है। स्टालिन ने कहा कि देश को एक बार फिर '1950 और 1960 के दशक की द्रमुक देखने को मिल सकती है।' पहले भी लगाए थे आरोप स्टालिन ने 14 अप्रैल को आरोप लगाया था कि महिला आरक्षण पर मसौदा विधेयक से पता चलता है कि यह एक 'षड्यंत्र' है, जो परिसीमन लागू होने पर तमिलनाडु और उत्तरी राज्यों के बीच अंतर को बढ़ाएगा। तेलंगाना भी सक्रिय मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने दक्षिणी राज्यों और पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर एक 'हाइब्रिड मॉडल' का प्रस्ताव रखा है। जिसके तहत प्रस्तावित अतिरिक्त सीट में से 50 प्रतिशत सीट आनुपातिक आधार पर आवंटित की जाएंगी और शेष सीट GSDP (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) और अन्य मानदंडों के आधार पर आवंटित की जाएंगी।

अंडमान सागर में बड़ा हादसा: 300 रोहिंग्याओं से भरी नाव पलटी, 250 लोगों की मौत की आशंका

ढाका संयुक्त राष्ट्र (UN) ने  एक बेहद दुखद घटना की जानकारी दी है। अंडमान सागर में रोहिंग्या शरणार्थियों और बांग्लादेशी नागरिकों से भरी एक नाव पलट गई है, जिसमें बच्चों सहित लगभग 250 लोगों के डूबने या लापता होने की आशंका है। जीवित बचे लोगों ने बताया कि इस नाव पर महिलाओं, बच्चों, चालक दल के सदस्यों और संदिग्ध मानव तस्करों सहित लगभग 300 लोग ठसाठस भरे हुए थे। हादसा कब, कहां और कैसे हुआ? शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस नाव में लगभग 280 लोग सवार थे। यह नाव 4 अप्रैल को दक्षिणी बांग्लादेश के 'टेकनाफ' इलाके से मलेशिया के लिए निकली थी। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के अनुसार, समुद्र में तेज हवाओं, खराब मौसम और नाव में क्षमता से बहुत अधिक लोगों के भरे होने के कारण यह बीच समुद्र में पलट गई। बचाव कार्य और एक खौफनाक आपबीती बांग्लादेश तट रक्षक (BCG) के अनुसार, उनका एक जहाज 'एम.टी. मेघना प्राइड' इंडोनेशिया जा रहा था, उसने 9 अप्रैल को समुद्र से 9 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया। इनमें एक महिला भी शामिल है। ये लोग अंडमान द्वीप समूह के पास गहरे पानी में ड्रम और लकड़ियों के सहारे अपनी जान बचाते हुए पाए गए। आधिकारिक समाचार एजेंसी एए के मुताबिक 280 लोगों अवैध तरीके से बोर्ट में बैठकर मलेशिया की ओर जा रहे थे. लेकिन अंडमान सागर की लहरों को कुछ और ही मंजूर था. समंदर की उफनती लहरों के कारण ऐसा हुआ. उन चीखों की गवाह बनीं, जो मदद के लिए उठीं और फिर हमेशा के लिए खामोश हो गईं. ये बोट बांग्‍लादेश के कॉक्स बाजार से शुरू चली थी. इस हादसे में बाल-बाल बचे रफीकुल इस्लाम ने बताया कि नाव पर क्षमता से कहीं ज्यादा लोग सवार थे, जिनमें 13 क्रू मेंबर और मानव तस्कर भी शामिल थे. रफीकुल ने दावा किया कि नाव पलटने से पहले ही करीब 25 से 30 लोग भीड़ और दम घुटने के कारण दम तोड़ चुके थे. इसके बाद समंदर की विशाल लहरों ने नाव को अपनी चपेट में ले लिया और देखते ही देखते सब कुछ खत्म हो गया।  बचाए गए 9 लोगों में से 6 तस्‍कर टेकनाफ मॉडल पुलिस स्टेशन के प्रभारी सैफुद्दीन इस्लाम के अनुसार, बांग्लादेशी जहाज ने 9 अप्रैल को हिंद महासागर से 9 लोगों को रेस्क्यू किया था. जांच में पता चला कि बचाए गए 9 लोगों में से 6 कथित मानव तस्कर हैं जिन्हें अब जेल भेज दिया गया है. पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और जांच जारी है कि इस अवैध यात्रा के पीछे और कौन-कौन से सिंडिकेट शामिल हैं।  UNHCR और IOM की चेतावनी संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने एक संयुक्त बयान जारी कर इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि यह त्रासदी रोहिंग्या शरणार्थियों की बेबसी और उनके दीर्घकालिक समाधान की कमी का नतीजा है. बांग्लादेश वर्तमान में लगभग 1.3 मिलियन रोहिंग्याओं की मेजबानी कर रहा है, जो म्यांमार के सैन्य दमन के बाद वहां रह रहे हैं।  40 वर्षीय रफीकुल इस्लाम इस हादसे में बाल-बाल बचे हैं। उन्होंने बताया कि मानव तस्करों ने उन्हें मलेशिया में नौकरी दिलाने का लालच देकर नाव पर चढ़ाया था। उन्होंने बताया कि यात्रियों ने समुद्र में चार दिन और रातें बिताईं और इस दौरान हालात तेजी से बिगड़ते गए। गश्ती दलों की नजर से बचने के लिए, तस्करों ने यात्रियों को मछली और जाल रखने वाले बेहद तंग स्टोरेज कम्पार्टमेंट में छिपने के लिए मजबूर किया। इस्लाम ने बताया कि वहां सांस लेने के लिए मुश्किल से ही कोई ऑक्सीजन थी। नाव पलटने से पहले कम से कम 30 लोगों की दम घुटने से मौत हो चुकी थी। हम सांस तक नहीं ले पा रहे थे। जब नाव पलटी, तो सैकड़ों लोग समुद्र में गिर गए। इस्लाम के अनुसार, हादसे के समय नाव पर लगभग 240 लोग सवार थे, जिनमें करीब 20 महिलाएं और कई बच्चे शामिल थे। इनमें से मुट्ठी भर लोग ही जिंदा बच सके। रफीकुल ने बताया- हममें से कई लोगों को नाव के निचले हिस्से में रखा गया था, जहां कुछ लोगों की तो वहीं मौत हो गई। नाव से जो तेल रिसा था, उससे मैं जल गया। हादसा होने के बाद रेस्क्यू होने तक वे लगभग 36 घंटे तक समुद्र में तैरते रहे। ये लोग खतरनाक समुद्री यात्रा क्यों कर रहे थे? म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों को लंबे समय से जुल्म और हिंसा का सामना करना पड़ा। इस समय म्यांमार के रखाइन राज्य में सेना और एक विद्रोही गुट 'अराकान आर्मी' के बीच भीषण जंग चल रही है। जान बचाने के लिए 10 लाख से ज्यादा रोहिंग्या बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में बने विशाल शिविरों में रह रहे हैं, जहां हालात बेहद खराब और अमानवीय हैं। मलेशिया जाने की चाहत मलेशिया एक अपेक्षाकृत अमीर देश है, जहां कंस्ट्रक्शन और खेती के काम के लिए एशिया के गरीब हिस्सों से मजदूर जाते हैं। तस्कर इन्ही मजबूर लोगों से पैसे लेकर उन्हें खतरनाक और खचाखच भरी नावों से अवैध तरीके से ले जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र (UNHCR) ने क्या कहा? संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि यह घटना म्यांमार के लोगों के लंबे समय से बेघर होने और उनकी समस्या का कोई स्थायी समाधान न होने का एक भयानक परिणाम है। यह त्रासदी याद दिलाती है कि म्यांमार में हालात सुधारने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है, ताकि रोहिंग्या शरणार्थी सुरक्षित और सम्मान के साथ अपनी मर्जी से अपने घर लौट सकें। यह कोई पहली घटना नहीं है। अंडमान सागर, जो म्यांमार, थाइलैंड और मलेशिया के बीच फैला है, वह ऐसे कई हादसों का गवाह बनता रहता है। पिछले साल मई में भी म्यांमार तट के पास दो नावों के डूबने से 427 रोहिंग्या लोगों के मारे जाने की आशंका जताई गई थी। गहराता मानवीय संकट और हताशा यह त्रासदी रोहिंग्या शरणार्थियों की उस गहरी हताशा को उजागर करती है, जिसके चलते वे मलेशिया, इंडोनेशिया और थाइलैंड जैसे देशों में जाने के लिए जान की बाजी लगा रहे हैं। सहायता एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि मानवीय सहायता में लगातार हो रही कमी के कारण स्थिति और खराब हो रही है। कॉक्स बाजार में … Read more

CBSE 10वीं का परिणाम घोषित, जानें मार्कशीट डाउनलोड करने का तरीका

नई दिल्ली सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने आज सीबीएसई 10वीं का रिजल्ट रिजल्ट 2026 घोषित कर दिया है। जिन उम्मीदवारों ने सीबीएसई 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा दी है, वह सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर सीबीएसई 10वीं रिजल्ट 2026 देख सकते हैं। CBSE 10वीं कक्षा के रिजल्ट results.cbse.nic.in, cbse.nic.in, cbseresults.nic.in, digilocker.gov.in और results.gov.in पर देखे जा सकते हैं। सीबीएसई 10वीं रिजल्ट 2026 मार्कशीट डाउनलोड CBSE ने आज 10वीं क्लास का रिजल्ट घोषित कर दिया है। छात्रों अपने लॉगिन क्रेडेंशियल के माध्यम से अपनी मार्कशीट डाउनलोड कर सकते हैं। CBSE बोर्ड की मार्कशीट cbse.gov.in, results.cbse.nic.in, DigiLocker और Umang App पर जारी की जाएंगी। CBSE 10वीं का रिजल्ट 2026 मार्कशीट में क्या-क्या होगा? CBSE 10वीं क्लास की डिजिटल मार्कशीट में उम्मीदवार का नाम, रोल नंबर, जन्मतिथि, फोटो, स्कूल का नाम, माता-पिता का नाम, विषयवार प्राप्त अंक, कुल प्राप्त अंक, प्राप्त ग्रेड और पास होने की स्थिति जैसी जानकारी शामिल होगी। रिजल्ट जारी होने के बाद, छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी मार्कशीट ध्यान से देखें। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें CBSE 10वीं का रिजल्ट 2026 मोबाइल पर कैसे देखें? स्टेप 1: सबसे पहले सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in या results.cbse.nic.in पर जाएं। स्टेप 2: होमपेज पर उपलब्ध CBSE 10वीं रिजल्ट 2026 लिंक पर क्लिक करें। स्टेप 3: रोल नंबर, स्कूल नंबर, एडमिट कार्ड ID और जन्मतिथि (DOB) डालें। स्टेप 4: सबमिट बटन पर क्लिक करें। स्टेप 4: CBSE बोर्ड रिजल्ट 2026 स्क्रीन पर दिखाई देगा। स्टेप 5: मार्कशीट की PDF देखें और डाउनलोड करें। स्टेप 6: भविष्य के संदर्भ के लिए प्रिन्ट आउट ले लें। CBSE 10वीं का रिजल्ट 2026 घोषित होने के बाद क्या करें? CBSE के रिजल्ट घोषित होने के बाद छात्रों को 11वीं कक्षा या किसी अन्य परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन करने की जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है। छात्रों को अपने-अपने स्कूलों में 11वीं कक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन करने से पहले, दूसरी बोर्ड परीक्षा का इंतजार करना होगा।  

पवन खेड़ा की बढ़ी मुश्किलें, SC ने अग्रिम जमानत पर लगाई रोक, तुषार मेहता ने दी अहम दलील

नई दिल्ली कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगता दिख रहा है. पवन खेड़ा को तेलंगाना हाईकोर्ट में मिली जमानत के खिलाफ दायर असम सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मिली अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही पवन खेड़ा को नोटिस जारी कर तीन हफ्ते में जवाब मांगा है।  सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदूरकर की बेंच के सामने असम सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तीखे सवाल उठाए. उन्होंने कहा, ‘अपराध असम में हुआ, मामला भी वहीं दर्ज है, तो तेलंगाना हाईकोर्ट ने जमानत क्यों दी?’ उन्होंने यह भी पूछा कि पवन खेड़ा ने असम हाईकोर्ट का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया।  तुषार मेहता ने कोर्ट से तेलंगाना हाईकोर्ट के 10 अप्रैल के आदेश पर रोक लगाने की मांग की, जिसमें खेड़ा को एक सप्ताह के लिए ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दलीलें सुनने के बाद फिलहाल उस आदेश पर रोक लगा दी है।  सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पवन खेड़ा ने अग्रिम जमानत की अवधि बढ़ाने की मांग की है, जिस पर अब अदालत विचार करेगी।  जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच ने इन बातों को सुनने के बाद यह माना कि कानूनी प्रक्रिया के हिसाब से मामला असम की अदालत का ही बनता है. अब पवन खेड़ा के पास कोई और रास्ता नहीं बचा है, उन्हें राहत के लिए असम की कोर्ट का दरवाजा खटखटाना ही पड़ेगा।  यह पूरा मामला तब शुरू हुआ था जब पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी के खिलाफ कुछ गंभीर बातें कही थीं. इसी को लेकर असम में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी. अब मामला वापस वहीं पहुंच गया है जहां से शुरू हुआ था. आने वाले तीन हफ्ते पवन खेड़ा के लिए काफी भागदौड़ भरे हो सकते हैं क्योंकि उन्हें अब सुप्रीम कोर्ट को जवाब देने के साथ-साथ असम की कोर्ट में भी अपना पक्ष रखना होगा।  क्या है पूरा मामला? दरअसल, यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के खिलाफ कथित मानहानिकारक टिप्पणियों से जुड़ा है. असम पुलिस ने खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है, जिसमें मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसे आरोप शामिल हैं।  तेलंगाना हाईकोर्ट ने खेड़ा को यह राहत इस आधार पर दी थी कि वे असम जाकर सक्षम अदालत में नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकें. सुनवाई के दौरान खेड़ा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी थी कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध का है और इसमें गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है।  वहीं, असम सरकार ने तेलंगाना हाईकोर्ट में ही इस याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाया था और कहा था कि खेड़ा दिल्ली के निवासी हैं, ऐसे में असम के बाहर राहत मांगने का कोई ठोस आधार नहीं बनता।  यह मामला राजनीतिक रूप से भी काफी संवेदनशील बन गया है. असम विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस और भाजपा के बीच इस मुद्दे पर तीखा टकराव देखने को मिला था. कांग्रेस ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया, जबकि भाजपा ने आरोपों को गंभीर बताते हुए कार्रवाई को सही ठहराया।  अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई के बाद यह तय होगा कि पवन खेड़ा को मिली राहत बरकरार रहती है या नहीं, और क्या उन्हें असम हाईकोर्ट का रुख करना होगा। 

TCS मामले में बड़ा खुलासा: 9 FIR में यौन उत्पीड़न, धार्मिक दबाव और मलेशिया भेजने की साजिश, HR निदा खान पर सवाल

नासिक नासिक की एक प्रमुख आईटी कंपनी में महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न का चौंकाने वाला मामला अब मानव तस्करी और जबरन धर्मांतरण तक पहुंच गया है. पुलिस ने कंपनी की एचआर अधिकारी समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया है. कुल नौ मामले दर्ज किए गए हैं. आरोपियों पर नौकरी, प्रेम और मदद का लालच देकर युवतियों का यौन शोषण करने का आरोप है।  पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी 2022 से दोस्ती के नाम पर युवतियों के साथ जाल बुन रहे थे. उन्होंने मानसिक और भावनात्मक दबाव बनाकर उनका शोषण किया. अब जांच में नया मोड़ आया है. पुलिस को पता चला है कि आरोपी पीड़ित युवतियों को मलेशिया बेचने की योजना बना रहे थे. वीडियो कॉल पर मलेशिया भेजने की चर्चा हुई थी. एक पीड़िता को सीधे मलेशिया भेजने की तैयारी चल रही थी, जिसमें पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी थी. मामले की जांच कर रही एसआईटी को महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं. जांच में विदेशी फंडिंग, वित्तीय लेन-देन और बड़े रैकेट की आशंका जताई जा रही है. कुछ अधिकारियों को संदेह है कि इस पूरे मामले का राष्ट्रीय सुरक्षा से भी संबंध हो सकता है. पुलिस का मानना है कि अन्य कई महिलाओं को भी इसी तरह निशाना बनाया गया होगा।  कौन है निदा खान? निदा खान इस पूरे मामले की केंद्र बिंदु बन गई है. वह नासिक स्थित कंपनी की HR मैनेजर हैं और कंपनी की इंटरनल कमिटी (POSH एक्ट के तहत यौन उत्पीड़न रोकथाम समिति) का हिस्सा थीं. आरोप है कि कई शिकायतें उनके पास पहुंचीं, लेकिन उन्होंने उन्हें नजरअंदाज कर दिया या ऊपर नहीं भेजा. जांचकर्ताओं के मुताबिक POSH प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया. निदा खान सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी (SPPU) की पूर्व छात्रा हैं. उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार वे HR मैनेजर के पद पर काम कर रही थीं. पुलिस के अनुसार निदा खान और तौसिफ अत्तर को इस मामले का मास्टरमाइंड माना जा रहा है. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि निदा खान फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी तलाश में तकनीकी और खुफिया जानकारी का इस्तेमाल कर रही है. पुलिस ने अंडरकवर ऑपरेशन चलाया था. सात महिला पुलिसकर्मी हाउसकीपिंग स्टाफ बनकर कंपनी में काम करती रहीं और आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी. इसी ऑपरेशन के आधार पर कई शिकायतें सामने आईं और नौ एफआईआर दर्ज हुईं।  आरोपों की गंभीरता आरोपियों पर यौन उत्पीड़न, जबरन धर्मांतरण, मानव तस्करी और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप लगे हैं. पीड़ित युवतियों का कहना है कि उन्हें नामाज पढ़ने, गोमांस खाने और धर्म बदलने के लिए दबाव डाला गया. कंपनी के अंदर ही कुछ कर्मचारियों ने इस जाल को फैलाया. TCS कंपनी ने आरोपी कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है. एसआईटी आरोपियों के बैंक लेन-देन, विदेशी संपर्क और संभावित रैकेट की गहराई से जांच कर रही है. पुलिस ने पीड़ितों के बयान दर्ज किए हैं. मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और SC/ST एक्ट की धाराओं के तहत कार्रवाई हो रही है।  TCS मामले में साजिश का खुलासा नासिक के TCS BPO कैंपस में कथित धर्म परिवर्तन और यौन उत्पीड़न का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है. अब तक इस मामले में 9 अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें कई चौंकाने वाले आरोप सामने आए हैं. यह पूरा मामला एक पैटर्न की तरफ इशारा करता है, जिसमें महिला कर्मचारियों को निशाना बनाकर उनके साथ यौन शोषण और धार्मिक दबाव बनाया गया।  9 FIR में खुली साजिश की परतें पहली एफआईआर के अनुसार जुलाई 2022 से फरवरी 2026 के बीच आरोपियों दानिश शेख, तौसीफ अत्तर और निदा खान ने एक महिला कर्मचारी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई. आरोप है कि हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की गई. साथ ही तौसीफ अत्तर ने शादी का झांसा देकर कई बार शारीरिक संबंध बनाए. दानिश शेख पर भी कार्यालय में जबरन छूने और नजदीकी बढ़ाने की कोशिश करने का आरोप है।  सरी एफआईआर में मई 2023 से मार्च 2026 के बीच रजा मेमन और शाहरुख कुरैशी पर एक महिला कर्मचारी को घूरने, छूने और उसकी निजी जिंदगी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है. पीड़िता ने कई बार शिकायत की, लेकिन कंपनी के अधिकारी ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे आरोपियों को बढ़ावा मिला।  तीसरी एफआईआर में शफी शेख पर मीटिंग के दौरान महिला कर्मचारी को घूरने और अश्लील व्यवहार करने का आरोप है. इसके अलावा तौसीफ अत्तर ने भी निजी जीवन को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां कीं और शारीरिक नजदीकी बढ़ाने की कोशिश की।  चौथी एफआईआर के अनुसार मई 2025 से दिसंबर 2025 के बीच तौसीफ अत्तर ने महिला कर्मचारी से उसकी निजी जिंदगी से जुड़े सवाल पूछे और अश्लील इशारे किए. इसके अलावा हिंदू देवी-देवताओं को लेकर अपमानजनक टिप्पणी भी की गई, जिससे पीड़िता और अन्य कर्मचारी आहत हुए।  पांचवीं एफआईआर में आरोप है कि 2022 से मार्च 2026 के बीच तौसीफ अत्तर, दानिश, शाहरुख शेख और रजा मेमन ने मिलकर पीड़िता पर नमाज पढ़ने का दबाव बनाया और उसे मांस खाने के लिए मजबूर किया. साथ ही हिंदू धर्म और देवी-देवताओं का अपमान किया गया और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया गया।  छठी एफआईआर में सितंबर 2024 से फरवरी 2026 के बीच आसिफ अंसारी और शफी शेख पर महिला कर्मचारी के शरीर को लेकर अश्लील टिप्पणी करने और गलत तरीके से छूने का आरोप है. इसके साथ ही तौसीफ अत्तर पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का भी आरोप लगा है।  सातवीं एफआईआर के अनुसार जून 2025 से मार्च 2026 के बीच आसिफ अंसारी, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन, तौसीफ अत्तर और शफी शेख ने महिला कर्मचारी का पीछा किया, अश्लील टिप्पणियां कीं और छेड़छाड़ की। साथ ही धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप भी लगाए गए।  आठवीं एफआईआर में जनवरी 2025 से अब तक रजा मेमन और शफी शेख पर महिला कर्मचारी से उसकी इच्छा के खिलाफ निजी बातें करने, शादी का प्रस्ताव देने और शरीर को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है. दोनों पर बार-बार शारीरिक संपर्क बनाने की कोशिश करने का भी आरोप है।  नौवीं एफआईआर में जनवरी 2026 से 1 अप्रैल 2026 के बीच रजा मेमन और शाहरुख कुरैशी पर अश्लील टिप्पणियां करने, इशारे करने और पीड़िता की निजी … Read more

लोकसभा में सांसदों की संख्या बढ़कर 850 होगी, 3 नए बिलों के मसौदे दिए गए

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने देश के लोकतांत्रिक ढांचे में बड़े बदलाव लाने वाले तीन प्रमुख विधेयकों का मसौदा सांसदों को दिया है. केंद्र सरकार संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 जल्‍द पास कराने की तैयारी कर रही है. ये विधेयक आगामी जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 करने, निर्वाचन क्षेत्रों के नए सिरे से निर्धारण (Delimitation) और महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने का वैधानिक मार्ग प्रशस्त करते हैं. सरकार के इस कदम के साथ ही दशकों से लंबित सीटों के पुनर्गठन और भाषाई व क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की नई व्यवस्था पर औपचारिक मुहर लगने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।  वर्ष 2026 में पेश किए गए ये तीनों विधेयक भारत के चुनावी ढांचे और सीटों के पुनर्निर्धारण (Delimitation) में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव करते हैं:     संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 (Bill 107): यह विधेयक लोकसभा में सीटों की संख्या को अधिकतम 815 (राज्यों से) और 35 (केंद्र शासित प्रदेशों से) तक बढ़ाने का प्रावधान करता है . इसके अलावा, यह ‘जनसंख्या’ की परिभाषा में बदलाव करता है ताकि निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण संसद द्वारा निर्धारित नवीनतम जनगणना के आधार पर किया जा सके।      परिसीमन विधेयक, 2026 (Bill 108): यह नवीनतम जनगणना के आंकड़ों के आधार पर लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों के आवंटन और निर्वाचन क्षेत्रों के विभाजन के लिए एक परिसीमन आयोग के गठन का प्रावधान करता है . आयोग में सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश अध्यक्ष होंगे।      केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 (Bill 109): यह विधेयक पुडुचेरी, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के कानूनों में संशोधन करता है ताकि उन्हें नए परिसीमन नियमों और महिला आरक्षण (संविधान के अनुच्छेद 334A) के अनुरूप बनाया जा सके . इसके तहत पुडुचेरी में नामांकित सदस्यों की संख्या बढ़ाकर पांच करने का प्रस्ताव है, जिनमें से दो महिलाएं होंगी।  सांसदों को सौंपे गए तीनों विधेयक (संविधान संशोधन, परिसीमन, और केंद्र शासित प्रदेश कानून) यह स्पष्ट करते हैं कि भारत की चुनावी राजनीति अब तक के सबसे बड़े बदलाव की दहलीज पर है. इन दस्तावेजों के आधार पर मुख्य निष्कर्ष निम्नलिखित हैं: 1. लोकसभा का ऐतिहासिक विस्तार (850 सीटें) विधेयकों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा लोकसभा की सदस्य संख्या में भारी वृद्धि है।  ·         नई संरचना: संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के अनुसार, लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रस्ताव है. इसमें 815 सदस्य राज्यों से और 35 सदस्य केंद्र शासित प्रदेशों से होंगे।  ·         क्यों है यह बड़ा: वर्तमान में लोकसभा की अधिकतम संख्या 550 (प्रभावी 543) है. 300 से अधिक सीटों की यह वृद्धि पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक विस्तार है।  2. ‘जनसंख्या’ की नई परिभाषा और जनगणना का आधार अब तक सीटों का आवंटन 1971 की जनगणना के आधार पर अटका हुआ था।  ·         नया फॉर्मूला: बिल 107 के माध्यम से अनुच्छेद 82 और 170 में संशोधन प्रस्तावित है. इसके तहत जनसंख्या का अर्थ अब वह नई जनगणना होगी जिसके आंकड़े संसद द्वारा निर्धारित किए जाएंगे।  ·         तात्पर्य: यह स्पष्ट संकेत है कि 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना ही नई सीटों के आवंटन का आधार बनेगी।  3. परिसीमन आयोग परिसीमन विधेयक, 2026 (Bill 108) एक शक्तिशाली परिसीमन आयोग के गठन का मार्ग प्रशस्त करता है।  ·         कार्य: यह आयोग तय करेगा कि जनसंख्या के अनुपात में किस राज्य को कितनी अतिरिक्त सीटें मिलेंगी।    संतुलन: इसमें न्यायिक और प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों और चुनाव आयोग को शामिल किया गया है. यह आयोग उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच जनसंख्या आधारित प्रतिनिधित्व के असंतुलन को भी संबोधित करेगा।  4. महिला आरक्षण का व्यावहारिक क्रियान्वयन तीसरा विधेयक (Bill 109) केंद्र शासित प्रदेशों (दिल्ली, पुडुचेरी, जम्मू-कश्मीर) के कानूनों में बदलाव लाता है।   आरक्षण का लिंक: यह सुनिश्चित करता है कि 106वें संविधान संशोधन (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के तहत प्रस्तावित 33% महिला आरक्षण नए परिसीमन के साथ ही लागू हो. नामांकन: पुडुचेरी जैसे क्षेत्रों में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।  5. एक नया राजनीतिक युग इन बिलों का विश्लेषण बताता है कि यह केवल सीटों की संख्या बढ़ाना नहीं है बल्कि: ·         प्रतिनिधित्व में सुधार: बढ़ती जनसंख्या के बावजूद एक सांसद पर कम आबादी का बोझ होगा, जिससे जमीनी स्तर पर काम बेहतर होगा।  ·         आधुनिक संसद: नई संसद की क्षमता (करीब 888 सीटें) के अनुरूप यह ढांचा तैयार किया गया है।  ·         चुनौती: उत्तर और दक्षिण के राज्यों के बीच सीटों के वितरण को लेकर होने वाली राजनीतिक बहस के लिए सरकार ने कानूनी ढाल तैयार कर ली है। 

पाकिस्तान को दिवालिया होने से बचाने के लिए अरबों डॉलर देगा यह मुस्लिम देश, UAE ने किए पैसे वसूलने के प्रयास

इस्लामाबाद कैश के भारी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। सऊदी अरब ने पाकिस्तान की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को डूबने से बचाने के लिए एक बार फिर बड़ा आर्थिक पैकेज देने का वादा किया है। अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की 'स्प्रिंग मीटिंग्स' में हिस्सा लेने गए पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने मीडिया को संबोधित करते हुए यह अहम घोषणा की। वित्त मंत्री ने बताया कि सऊदी अरब ने पाकिस्तान के लिए 3 अरब डॉलर की अतिरिक्त वित्तीय सहायता का ऐलान किया है। इसके साथ ही, पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक में सऊदी अरब के पहले से जमा 5 अरब डॉलर के डिपॉजिट की अवधि को भी बढ़ा दिया है। पाक वित्त मंत्री औरंगजेब कई आर्थिक और कूटनीति बैठकों में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। उन्होंने इन बैठकों के साइडलाइन पर सऊदी फंड फॉर डेवलपमेंट (एसएफडी) के सीईओ सुल्तान बिन अब्दुलरहमान अल-मरशद से मुलाकात भी की थी, जिसमें दोनों देशों के बीच निरंतर सहयोग पर जोर दिया गया। ऐन वक्त पर मिली संजीवनी और UAE का दबाव पाकिस्तान के लिए सऊदी अरब की यह मदद एक 'लाइफलाइन' की तरह है। हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पाकिस्तान से अपना 3.5 अरब डॉलर का पुराना कर्ज चुकाने की मांग कर दी थी, जिसकी मियाद इस महीने खत्म हो रही है। UAE के इस कदम से पाकिस्तान पर डिफॉल्ट यानी दिवालिया होने का भारी खतरा मंडराने लगा था। ऐसे नाजुक वक्त में सऊदी अरब (और कतर) ने आगे आकर यह सुनिश्चित किया है कि पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार खाली न हो। IMF की शर्तों को पूरा करने में मिलेगी मदद पाकिस्तान इस वक्त IMF के साथ एक नए बेलआउट पैकेज को लेकर बातचीत कर रहा है। IMF की यह सख्त शर्त रही है कि पाकिस्तान के प्रमुख सहयोगी देश जैसे सऊदी अरब और चीन अपना पैसा पाकिस्तान के बैंक में बनाए रखें, ताकि देश का विदेशी मुद्रा भंडार एक सुरक्षित स्तर पर रहे। सऊदी अरब द्वारा 5 अरब डॉलर के डिपॉजिट को रोके रखने और 3 अरब डॉलर अतिरिक्त देने से पाकिस्तान का पक्ष IMF के सामने काफी मजबूत हो गया है। मध्य पूर्व का संकट और ऊर्जा सुरक्षा वर्तमान में मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने का खतरा है। पाकिस्तान अपनी ऊर्जा और ईंधन जरूरतों के लिए पूरी तरह से आयात पर निर्भर है। तेल महंगा होने से पाकिस्तान का आयात बिल तेजी से बढ़ेगा। सऊदी फंड से मिला यह नया पैसा पाकिस्तान को महंगे तेल और जरूरी चीजों जैसे भोजन, उर्वरक का आयात करने के लिए एक महत्वपूर्ण 'बफर' प्रदान करेगा। रेमिटेंस (विदेशों से आने वाली मुद्रा) अभी तक प्रभावित नहीं हुई है, लेकिन 40-50% रेमिटेंस खाड़ी देशों से आती है। पाकिस्तान आईएमएफ से अगली किश्त लगभग 1.3 अरब डॉलर की उम्मीद कर रहा है, जिसकी मंजूरी इस महीने या अगले महीने होने की संभावना है। निवेशकों के भरोसे में होगी वृद्धि वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब वाशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों, चीनी वित्त मंत्री और सऊदी समकक्षों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। इस वित्तीय पैकेज की घोषणा से वैश्विक निवेशकों और रेटिंग एजेंसियों में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के प्रति थोड़ा भरोसा बहाल होगा। इससे पाकिस्तान की मुद्रा (पाकिस्तानी रुपया) को भी डॉलर के मुकाबले स्थिरता मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर यह सहायता पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को तुरंत मजबूती देगी, जिससे यूएई का कर्ज चुकाने के बाद भी रिजर्व 2-3 महीने के आयात स्तर पर बने रहेंगे। आईएमएफ लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी। निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा। सऊदी अरब के इस कदम ने न सिर्फ पाकिस्तान को एक तात्कालिक आर्थिक संकट से उबार लिया है, बल्कि यह भी साबित किया है कि रणनीतिक मोर्चे पर रियाद अभी भी इस्लामाबाद का सबसे भरोसेमंद सहयोगी है।

ईरान को 12 साल लगेगा सिर्फ मरम्मत करने में, US से संघर्ष ने किया इतना नुकसान

तेहरान  अमेरिका और इजरायल के साथ हुए युद्ध से हुए नुकसान से उबरने में ईरान को 10 साल से ज्यादा का समय लगेगा। खबर है कि ईरान के सेंट्रल बैंक ने इससे जुड़ी जानकारियां सरकार के सामने रख दी हैं। साथ ही अर्थव्यवस्था को संभालने की अपील की है। कहा जा रहा है कि ईरान की अहम रिफाइनरी समेत कई जगहों को खासा नुकसान हुआ है। साथ ही मुल्क में तेजी से महंगाई बढ़ने की भी आशंका जताई जा रही है। ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की पहले से ही नाजुक अर्थव्यवस्था को 40 दिनों के युद्ध के दौरान जमकर नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान को भेजे गए एक आकलन में वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया है कि इस नुकसान को ठीक करने में 12 साल तक का समय लग सकता है। कितना हुआ नुकसान, महंगाई होने वाली है युद्ध के दौरान कई बड़े एयरपोर्ट्स को नुकसान पहुंचा। जबकि, तेल ठिकानों, रिफाइनरीज और पेट्रोकेमिकल संस्थानों को भी निशाना बनाया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने चेताया है कि उत्पादन क्षमता को हुए नुकसान के चलते आने वाले महीनों में महंगाई तेजी से बढ़ सकती है। राष्ट्रपति को भेजे गए आकलन में बताया गया है कि औद्योगिक इनपुट सप्लाई ऐसे ही कम बनी रही तो महंगाई में 180 प्रतिशत का इजाफा हो सकता है। अमेरिका से सुलह की सलाह रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दुल नसीर हेम्मती ने राष्ट्रपति से अर्थव्यवस्था को स्थिर करने की अपील की है। साथ ही उन्होंने इंटरनेट सुविधा को पूरी तरह से बहाल करने और अमेरिका के साथ समझौता करने की सलाह भी दी है। इंटरनेट ने दिया बड़ा झटका युद्ध के दौरान ईरान में लंबे समय तक इंटरनेट बंद रहा था। कहा जा रहा था कि इंटरनेट बंद करने का फैसला साइबर अटैक से बचने के लिए लिया गया था। अब ईरान की डिजिटल इकोनॉमी मुल्क की जीडीपी का 5-6 प्रतिशत है। अब ऐसे में इंटरनेट के बंद होने के चलते पेमेंट सिस्टम, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स ठप हो गए थे। क्यों नहीं हो पाया समझौता ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने विफल शांति वार्ता के बाद सोमवार को कहा कि लंबी बैठक से कोई सबक नहीं सीखा गया। समझौते के करीब पहुंचने के बावजूद वार्ता विफल हो गई। एक्स पर पोस्ट में उन्होंने लिखा कि ईरान ने पूरी निष्ठा से इस बैठक में भाग लिया लेकिन अमेरिका की मांगे बढ़ती मांगों, लक्ष्य और नाकेबंदी के चलते ये वार्ता टूट गई। दूसरे दौर की बातचीत की कोशिश भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने सोमवार को कहा है कि अमेरिका कोई गैर कानूनी मांग न करे और तेहरान की शर्तों को माने, तो हम अमेरिका के साथ दूसरे दौर की वार्ता के लिए तैयार हैं। भारत में ईरानी राजदूत ने आरोप लगाया कि वार्ता के दौरान अमेरिकी पक्ष ने गैरकानूनी मांगें रखीं, जिसके कारण बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल सका। अमेरिका कीी नाकेबंदी के सवाल पर उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान की क्षमताओं से भली-भांति परिचित है। ये पता होना चाहिए कि होर्मुज ईरान के जल क्षेत्र में आता है। पश्चिम एशिया संकट पर उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में ईरान और भारत का साझा भविष्य जुड़ा है।