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केदारनाथ हेली सेवा की बुकिंग 10-12 अप्रैल से शुरू, IRCTC के जरिए होगी पूरी प्रक्रिया

देहरादून  उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) ने घोषणा की है कि केदारनाथ धाम के लिए हेली सेवा की बुकिंग 10 से 12 अप्रैल के बीच शुरू कर दी जाएगी। यूकाडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि इस बार यात्रा को सुरक्षित, पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए कई बड़े बदलाव किए गए हैं। टिकटों की कालाबाजारी और धोखाधड़ी को रोकने के लिए यूकाडा ने इस बार 100% ऑनलाइन टिकटिंग का निर्णय लिया है।शुरुआत में 20-20 दिनों के स्लॉट के लिए टिकट खोले जाएंगे। मौसम और यात्रियों के दबाव का आकलन करने के बाद ही अगले चरणों की बुकिंग शुरू की जाएगी। इस बार कुल आठ रूटों पर हेली सेवाओं का संचालन होगा, जिसके लिए अलग-अलग ऑपरेटरों का चयन किया जा चुका है। इनमें चिप्सन एविएशन, राजस एयरो स्पोर्ट्स, थम्बी एविएशन, पिलग्रिमेज एविएशन, यूनाइटेड हेली चार्टर्स, हिमालयन हेली सर्विसेज, ट्रांसभारत एविएशन और एरो एयरक्राफ्ट शामिल है। चरणबद्ध तरीके से होगी बुकिंग यात्रियों की भारी भीड़ और हिमालयी क्षेत्र के अनिश्चित मौसम को देखते हुए बुकिंग को स्लॉट में बांटा गया है। शुरूआत में 20-20 दिनों के स्लॉट के लिए टिकट खोले जाएंगे। मौसम और यात्रियों के दबाव का आकलन करने के बाद ही अगले चरणों की बुकिंग शुरू की जाएगी। 8 रूट और 8 ऑपरेटर, 3 कंपनियां पहली बार देंगी सेवा इस बार कुल आठ रूटों पर हेली सेवाओं का संचालन होगा, जिसके लिए अलग-अलग ऑपरेटरों का चयन किया जा चुका है। इनमें चिप्सन एविएशन, राजस एयरो स्पोर्ट्स, थम्बी एविएशन, पिलग्रिमेज एविएशन, यूनाइटेड हेली चार्टर्स, हिमालयन हेली सर्विसेज, ट्रांसभारत एविएशन और एरो एयरक्राफ्ट शामिल है। खास बात यह है कि इनमें से तीन कंपनियां पहली बार चारधाम रूट पर अपनी सेवाएं देने जा रही हैं। पिछली यात्राओं में यात्रियों को रिफंड मिलने में हुई देरी पर यूकाडा ने सख्त रुख अपनाया है।  डॉ. आशीष चौहान ने स्पष्ट किया कि क्लेम व्यवस्था में रिफंड की प्रक्रिया को पहले से अधिक आसान और तेज बनाया गया है। साथ ही जिन ऑपरेटरों के खिलाफ रिफंड या सेवा में लापरवाही की शिकायत मिलेगी, उन्हें तुरंत नोटिस जारी कर दंडित किया जाएगा।     क्लेम व्यवस्था: रिफंड की प्रक्रिया को पहले से अधिक आसान और तेज बनाया गया है।     कार्रवाई: जिन ऑपरेटरों के खिलाफ रिफंड या सेवा में लापरवाही की शिकायत मिलेगी, उन्हें तुरंत नोटिस जारी कर दंडित किया जाएगा।     एडवाइजरी: यात्रियों के अधिकारों और नियमों की जानकारी के लिए जल्द ही एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की जाएगी।

ईरान ने सीजफायर की शर्तों को किया खारिज, होर्मुज को बंद करने और 45 दिन के युद्धविराम पर नहीं हुआ सहमति

तेहरान   ईरान और अमेरिका को एक मसौदा प्रस्ताव मिला है, जिसमें 45 दिन के युद्धविराम और होर्मुज को फिर से खोलने की बात कही गई है ताकि युद्ध समाप्त करने का रास्ता निकाला जा सके. पश्चिम एशिया के दो अधिकारियों ने यह जानकारी दी. अधिकारियों के मुताबिक यह प्रस्ताव मिस्र, पाकिस्तान और तुर्किये के मध्यस्थों की ओर से तैयार किया गया है, जो संघर्ष को रोकने के प्रयास में जुटे हैं. उनका मानना है कि 45 दिन की यह अवधि दोनों देशों के बीच व्यापक वार्ता के लिए पर्याप्त समय देगी, जिससे स्थायी युद्धविराम पर सहमति बन सके।  अधिकारियों ने बताया कि यह प्रस्ताव देर रात ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और पश्चिम एशिया में अमेरिका के दूत स्टीव विटकॉफ को भेजा गया, लेकिन अमेरिका की इस पर प्रतिक्रिया नहीं आई है. वहीं रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने होर्मुज को खोलने से लेकर 45 दिन के अस्थायी सीजफायर के लिए भी इनकार कर दिया है. ईरान के वरिष्ठ अधिकारी ने न्यू एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि ईरान को लगता है कि अमेरिका परमानेंट सीजफायर नहीं करना चाहता।  क्या है युद्धविराम की शर्तें?     पहले चरण में करीब 45 दिन का युद्धविराम लागू करने का प्रस्ताव है, जिसके दौरान स्थायी शांति समझौते पर बातचीत होगी. अगर बातचीत के लिए और समय चाहिए हुआ, तो इस सीजफायर को बढ़ाया भी जा सकता है।      दूसरे चरण में युद्ध को पूरी तरह खत्म करने का अंतिम समझौता किया जाएगा. सूत्रों का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलना और ईरान के उच्च स्तर के समृद्ध यूरेनियम का समाधान -जैसे उसे देश से बाहर भेजना या उसकी मात्रा कम करना, सिर्फ अंतिम समझौते के बाद ही संभव होगा।  इस प्रस्ताव की शर्तों की जानकारी सबसे पहले समाचार वेबसाइट एक्सियोस ने दी. ईरान का कहना है कि वह तब तक लड़ाई जारी रखेगा जब तक उसे वित्तीय क्षतिपूर्ति और भविष्य में फिर से हमले न होने का आश्वासन नहीं मिल जाता।  समझौता इतना भी आसान नहीं ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध में अब तक किसी तरह के समझौते की सूरत नहीं बन पाई. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि कोई भी पक्ष अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं है. युद्ध के 24वें दिन तक ट्रंप समझौते के मूड में थे, लेकिन एक बार फिर से वे काफी एग्रेसिव हो चुके हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सप्ताह ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों पर बमबारी की धमकी दी है. ईरान भी लगातार कह रहा है कि वो अमेरिका के ग्राउंड ऑपरेशन का इंतजार कर रहा है।  ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध में अब तक किसी तरह के समझौते की सूरत नहीं बन पाई. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि कोई भी पक्ष अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं है. युद्ध के 24वें दिन तक ट्रंप समझौते के मूड में थे, लेकिन एक बार फिर से वे काफी एग्रेसिव हो चुके हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सप्ताह ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों पर बमबारी की धमकी दी है. ईरान भी लगातार कह रहा है कि वो अमेरिका के ग्राउंड ऑपरेशन का इंतजार कर रहा है। 

US-ईरान के बीच सीजफायर की उम्मीद, ईरान ने भेजा मध्यस्थों को शांति प्रस्ताव

तेहरान  मिडिल-ईस्ट में तनाव में भारी बढ़ोतरी के साथ जंग अपने 33वें दिन में प्रवेश कर चुका है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी धमकियां तेज़ कर दी हैं, जबकि तेहरान ने इस पर तीखा जवाब दिया है. ऐसे में जंग खतरनाक रूप लेती जा रही है।  Axios ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थों का एक ग्रुप 45 दिनों के संभावित संघर्ष-विराम की शर्तों पर चर्चा कर रहा है, जिससे जंग स्थायी रूप से रुक सकती है।  एक्सियोस ने बातचीत की जानकारी रखने वाले चार अमेरिकी, इज़रायली और क्षेत्रीय सूत्रों के हवाले से यह बात कही है।  सीजफायर पर क्या बात हुई? एक्सियोस में संवाददाता बाराक रविद की रिपोर्ट में कहा गया है कि दो फेज़ वाली डील की शर्तों पर बातचीत जारी है. पहले फेज़ में 45 दिन का संभावित सीज़फ़ायर होगा, जिसके दौरान युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने पर बातचीत की जाएगी।  रिपोर्ट में कहा गया है कि दूसरे फेज़ में युद्ध खत्म करने पर एक समझौता होगा. अगर बातचीत के लिए और वक्त की ज़रूरत हुई, तो सीज़फ़ायर बढ़ाया जा सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया कि ईरान के लिए होर्मुज स्ट्रेट खोलने या ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का सामना करने की उनकी डेडलाइन मंगलवार शाम है।  पर्दे के पीछे क्या चल रहा? रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी, मिस्र और तुर्की के मीडिएटर के ज़रिए बातचीत हो रही है और ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच भेजे गए टेक्स्ट मैसेज के ज़रिए भी हो रही है. एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने हाल के दिनों में ईरान को कई प्रपोज़ल दिए, लेकिन अभी तक ईरानी अधिकारियों ने उन्हें स्वीकार नहीं किया है।  सूत्रों ने कहा कि मीडिएटर पार्टियों के साथ दो-फ़ेज़ वाली डील की शर्तों पर चर्चा कर रहे हैं. पहला फ़ेज़ संभावित 45-दिन का सीज़फ़ायर होगा, जिसके दौरान युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने पर बातचीत की जाएगी. एक सूत्र ने कहा कि अगर बातचीत के लिए और समय की ज़रूरत हुई तो सीज़फ़ायर बढ़ाया जा सकता है।  दूसरे फ़ेज़ में युद्ध खत्म करने पर एक एग्रीमेंट होगा. सूत्रों ने कहा कि मीडिएटर सोचते हैं कि होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से फिर से खोलना और ईरान के बहुत ज़्यादा एनरिच्ड यूरेनियम का समाधान या तो इसे देश से हटाकर या डाइल्यूशन करके सिर्फ़ एक फ़ाइनल डील का नतीजा हो सकता है।  होर्मुज़ को लेकर ईरान का सख्त रुख! ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने 5 अप्रैल, रविवार को होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और इज़रायल को कड़ी चेतावनी जारी की है. आईआरजीसी ने सोशल मीडिया पर कहा कि फारस की खाड़ी में नई सुरक्षा व्यवस्था बन रही है और यह अहम समुद्री रास्ता अब पहले जैसा नहीं रहेगा।  वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईस्टर रविवार के दिन पलटवार की चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर यह रास्ता नहीं खोला गया, तो मंगलवार को ईरान के पावर प्लांट और पुलों को निशाना बनाया जाएगा. होर्मुज़ पर ईरान के नियंत्रण के चलते वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है और इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। 

रुपया हुआ मजबूती से ऊंचा, डॉलर के मुकाबले 12 साल की सबसे बड़ी वृद्धि, RBI के कदमों का असर

नई दिल्ली रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के सख्त कदमों के बाद रुपये ने 12 साल की सबसे बड़ी तेजी दर्ज की है, जिससे बाजार में नई हलचल पैदा हो गई है। आज 6 अप्रैल को रुपया 0.3% मजबूत होकर 92.83 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। इससे पहले गुरुवार को इसमें 1.8% की तेज छलांग दर्ज की गई थी, जो सितंबर 2013 के बाद सबसे बड़ी एक दिन की बढ़त है। ब्लूमबर्ग ने सीआर फॉरेक्स के प्रबंध निदेशक अमित पबारी के हवाले से बताया है कि 10 अप्रैल की समयसीमा से पहले बैंक अपनी डॉलर की स्थिति समाप्त करेंगे, जिससे रुपया और मजबूत होकर 91.50 से 92 के दायरे में पहुंच सकता है। शुक्रवार को गुड फ्राइडे के कारण स्थानीय बाजार बंद थे। RBI के सख्त फैसलों से बदला खेल रुपये की मजबूती के पीछे सबसे बड़ा कारण RBI के हालिया कड़े कदम हैं। केंद्रीय रिजर्व बैंक ने बैंकों की डॉलर पोजीशन $100 मिलियन तक सीमित की और ऑफशोर ट्रेडिंग के बड़े माध्यम NDF पर रोक लगाई साथ ही सट्टेबाजी वाले सौदों पर भी सख्ती बढ़ाई। आरबीआई के इन कदमों से बाजार में डॉलर की मांग घटी और रुपया मजबूत हुआ। ईरान युद्ध का असर अब भी बना खतरा हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान तनाव अभी भी रुपये के लिए बड़ा जोखिम बना हुआ है। तेल की कीमतों में तेजी, भारत का बढ़ता आयात बिल और देशी निवेशकों की बिकवाली, जैसे ये सभी फैक्टर रुपये पर दबाव बना सकते हैं। पिछले एक साल में कितना कमजोर हुआ रुपया तेजी के बावजूद, रुपया पिछले एक साल में करीब 8.2% गिर चुका है और एशिया की कमजोर मुद्राओं में शामिल रहा है। रुपये को सपोर्ट देने के लिए RBI को भारी हस्तक्षेप करना पड़ा, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार में भी गिरावट आई है। RBI की बैठक पर टिकी बाजार की नजर अब निवेशकों की नजर RBI की आगामी मौद्रिक नीति बैठक पर है। खास तौर पर गवर्नर संजय मल्होत्रा के बयान महत्वपूर्ण होंगे। यह तय करेगा कि रुपया आगे और मजबूत होगा या दबाव में आएगा। समिति की बैठक सोमवार से शुरू होगी और बुधवार को इसके नतीजे की घोषणा की जाएगी। क्या फिर कमजोर होगा रुपया? विशेषज्ञों के अनुसार, अगर ईरान युद्ध लंबा चलता है तो रुपया फिर दबाव में आ सकता है। मुथूट फिनकॉर्प लिमिटेड की मुख्य अर्थशास्त्री अपूर्व जावडेकर का कहना है, "मुझे उम्मीद है कि अगर ईरान युद्ध लंबा चलता है, जिससे कम से कम एक तिमाही तक तेल की कीमतें ऊंची रहेंगी, तो रुपया 96 प्रति डॉलर के स्तर तक कमजोर हो जाएगा, जब तक कि आरबीआई और हस्तक्षेप न करे।" एशियाई देशों की करेंसी पर दबाव भारत अकेला नहीं है। थाईलैंड, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर जैसे देश भी ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं, जिससे उनकी मुद्राएं भी दबाव में हैं। RBI के सख्त कदमों से रुपये को मजबूती जरूर मिली है, लेकिन वैश्विक हालात, खासकर तेल और युद्ध आगे की दिशा तय करेंगे। निवेशकों को अभी सतर्क रहने की जरूरत है।

मणिपुर में सुरक्षा बलों का बड़ा ऑपरेशन, भारत-म्यांमार बॉर्डर के पास 4 उग्रवादी पकड़े गए

 इंफाल मणिपुर में सुरक्षा बलों को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है, जहां अलग-अलग प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े चार उग्रवादियों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के मुताबिक, ये कार्रवाई दो अलग-अलग जिलों में की गई. इस ऑपरेशन में स्थानीय पुलिस के साथ-साथ सुरक्षा बलों और दिल्ली पुलिस की भी अहम भूमिका रही. खास बात यह है कि इनमें से कुछ गिरफ्तारियां भारत-म्यांमार सीमा के पास हुई हैं, जो लंबे समय से उग्रवादी गतिविधियों का संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है. इस कार्रवाई से इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा संदेश गया है।  पुलिस के बयान के अनुसार, शनिवार को सुरक्षा बलों और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने तेंगनौपाल जिले में भारत-म्यांमार सीमा के पास स्थित यांगौबुंग गांव के आसपास से दो उग्रवादियों को गिरफ्तार किया. इनकी पहचान थोखचोम इंगोचा सिंह (31) और थोखचोम रघुनाथ मेइती (48) के रूप में हुई है. बताया जा रहा है कि ये दोनों अलग-अलग प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े हुए थे और लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की नजर में थे. इस इलाके में अक्सर उग्रवादी गतिविधियों की खबरें सामने आती रही हैं।  इसी दिन एक अन्य कार्रवाई में इम्फाल ईस्ट जिले के पैलेस कंपाउंड इलाके से एक और उग्रवादी को गिरफ्तार किया गया. इस आरोपी की पहचान लैशराम इनाओटोम्बा सिंह (19) के रूप में हुई है. पुलिस के अनुसार, यह युवक भी एक प्रतिबंधित संगठन से जुड़ा हुआ था और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल था. सुरक्षा एजेंसियों को उसके बारे में पहले से इनपुट मिले थे, जिसके आधार पर उसे पकड़ने की योजना बनाई गई थी।  इसके बाद रविवार को भी सुरक्षा बलों ने अभियान जारी रखा और इम्फाल ईस्ट जिले के संजेनबाम खुनौ इलाके में एक और उग्रवादी को उसके घर से गिरफ्तार किया गया. हालांकि पुलिस ने इस आरोपी की पहचान सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन शुरुआती जांच में उसके भी एक प्रतिबंधित संगठन से जुड़े होने की बात सामने आई है. इस तरह दो दिनों में चार अलग-अलग उग्रवादियों की गिरफ्तारी सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता मानी जा रही है।  पीटीआई के मुताबिक, पुलिस का कहना है कि इन गिरफ्तारियों से राज्य में सक्रिय उग्रवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है. सुरक्षा एजेंसियां अब इन आरोपियों से पूछताछ कर उनके नेटवर्क, फंडिंग और अन्य साथियों के बारे में जानकारी जुटा रही हैं. मणिपुर में लंबे समय से उग्रवाद एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, खासकर सीमावर्ती इलाकों में। ऐसे में इस तरह की कार्रवाई से न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती है, बल्कि आम लोगों में भी भरोसा बढ़ता है।   

क्या ईरान में 45 दिन का युद्ध विराम होगा? पाकिस्तान समेत कई देशों की पेशकश पर निर्भर स्थिति

वाशिंगटन अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध से मची वैश्विक उथल-पुथल के बीच एक अच्छी खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच सीजफायर कराने के लिए पाकिस्तान सहित अन्य मध्यस्थों ने पूरा जोर लगाया है और 45 दिनों के सीजफायर प्लान पर बातचीत शुरू हो गई है। बता दें कि बीते 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद से यह जंग जारी है। ईरान ने जवाब में इजरायल और खाड़ी देशों पर मिसाइलें बरसाई हैं। वहीं इस युद्ध की वजह से ईंधन आपूर्ति को लेकर भी चिंताएं बढ़ी हुई हैं। इस बीच एक्सियोस ने रविवार को चार अमेरिकी, इजरायली और क्षेत्रीय सूत्रों के हवाले से बताया कि अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थों का एक समूह 45 दिन के संभावित सीजफायर की शर्तों पर चर्चा कर रहा है। इस सीजफायर प्लान से युद्ध का हमेशा के लिए अंत भी हो सकता है। क्या है सीजफायर प्लान? रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्यस्थ दो चरणों वाले एक समझौते की शर्तों पर चर्चा कर रहे हैं। इसमें बताया गया है कि पहला चरण 45 दिन का संभावित सीजफायर होगा, जिसके दौरान युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने पर बातचीत की जाएगी। वहीं दूसरा चरण युद्ध को समाप्त करने के समझौते पर आधारित होगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर बातचीत के लिए और समय की जरूरत पड़ी, तो सीजफायर की अवधि बढ़ाई जा सकती है। एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे मध्यस्थ युद्धविराम के लिए जुटे सभी मध्यस्थ एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने एपी को बताया है कि संघर्षविराम कराने की उनकी सरकार की कोशिशें सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इससे सीजफायर को लेकर उम्मीदें एक बार फिर लौटी हैं। वही क्षेत्र के दो अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान के अलावा तुर्किये और मिस्र के मध्यस्थ भी अमेरिका और ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के प्रयास में जुटे हुए हैं। ईरान ने रखी हैं शर्तें एक्सियोस ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि होर्मुज को पूरी तरह से खोलने और ईरान के पास अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम होने जैसे मुद्दों को केवल एक अंतिम समझौते के हिस्से के रूप में ही सुलझाया जा सकता है। इसके अलावा मध्यस्थ अमेरिका के लिए विश्वास-बहाली के उपायों पर काम कर रहे हैं और उन कदमों की तलाश कर रहे हैं जिन्हें अमेरिका ईरान की कुछ मांगों को पूरा करने के लिए उठा सकता है। वही ईरान ने युद्ध खत्म करने के शर्त के रूप में युद्ध का हर्जाना और सुरक्षा की गारंटी समेत कई मांगें रखी हैं। ट्रंप ने दी है डेडलाइन इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ईरान को एक बार फिर धमकी देते हुए कहा कि ईरान के साथ सोमवार तक समझौता होने की प्रबल संभावना है। हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा है कि अगर ईरान ने तेजी नहीं दिखाई तो अमेरिका और तेजी से हमले करेगा। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा कि अगर ईरान समझौते की दिशा में तेजी नहीं दिखाता है तो वह सब कुछ उड़ा देने और तेल पर नियंत्रण करने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने वार्ता जारी रखने के लिए ईरानी वार्ताकारों को राहत दी है। इससे पहले ट्रंप ने रविवार सुबह एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोला गया तो ईरान के ऊर्जा संयंत्रों और पुलों पर हमले किए जाएंगे। ट्रंप ने अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए ईरान को चेतावनी दी कि अगर जलमार्ग को समुद्री यातायात के लिए नहीं खोला गया, तो ईरान को 'नरक बना दिया जाएगा। ईरान ने दिया दो टूक जवाब वहीं ईरान ने ट्रंप को दो टूक जवाब दे दिया है। ईरान के संस्कृति मंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकियों को खारिज करते हुए उन्हें 'अस्थिर और भ्रम में रहने वाला व्यक्ति' करार दिया। सैयद रजा सालिही-अमीरी ने रविवार को एक साक्षात्कार में कहा, ''ईरानी समाज उनके बयानों पर आम तौर पर ध्यान नहीं देता क्योंकि उसका मानना है कि उनमें व्यक्तिगत, व्यवहारिक एवं भाषाई संतुलन का अभाव है और वह लगातार परस्पर विरोधी रुख अपनाते रहते हैं।'' सालिही-अमीरी ने कहा, ''ऐसा लगता है कि ट्रंप एक ऐसे व्यक्ति बन गए हैं, जिसका पूरा विश्लेषण न तो ईरानी कर पा रहे हैं और न ही अमेरिकी।'' उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज ‘दुनिया के लिए खुला है, लेकिन ईरान के दुश्मनों के लिए बंद है।’

ईरान ने युद्ध के बीच भारत की कूटनीति की सराहना, विदेश नीति पर गर्व महसूस किया

नई दिल्ली ईरान ने भारत की कूटनीति की तारीफ की है। सुप्रीम लीडर के भारत में प्रतिनिधि अब्दुल माजिद हकीम इलाही का कहना है कि भारत बड़ी भूमिका निभा सकता है। खास बात है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान को अल्टीमेटम दे दिया है। वहीं, इसके बाद ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध और तेज होने के आसार हैं। हालांकि, ट्रंप का दावा है कि सोमवार को डील हो सकती है। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, इलाही ने कहा है, 'भारतीय कूटनीति बहुत अच्छी है और वे इस मुद्दे में अधिक बड़ी भूमिका भी निभा सकते हैं।' उनका बयान ऐसे समय पर आया है, जब अमेरिका और ईरान को युद्ध के बीच 1 महीने से ज्यादा समय हो गया है। विदेश नीति की भी हुई थी तारीफ कुछ दिनों पहले ही भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने कहा, 'भारत निश्चित रूप से तनाव कम करने में एक प्रभावी और सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। ग्लोबल साउथ के एक प्रमुख देश के रूप में और अपनी संतुलित विदेश नीति के कारण, भारत तनाव कम करने और बातचीत को बढ़ावा देने में मदद करने के लिए एक विशेष स्थान रखता है।' उन्होंने कहा, 'भारत के सभी पक्षों के साथ ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध हैं, जो इसे गलतफहमियों को कम करने और राजनयिक रास्तों को मजबूत करने में एक भरोसेमंद खिलाड़ी के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाते हैं।' जयशंकर को मिलाया ईरानी विदेश मंत्री ने फोन भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से बात की थी। उन्होंने जानकारी दी, 'ईरान के विदेश मंत्री अराघची का फोन आया। मौजूदा स्थिति पर चर्चा हुई।' जयशंकर ने कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी से भी रविवार को बात की थी। खबर है कि दोनों के बीच बातचीत में पश्चिम एशिया की स्थिति और एनर्जी सप्लाई का मुद्द उठा था। विदेश मंत्री ने संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से भी फोन पर बातचीत की। ट्रंप की धमकी ट्रंप ने रविवार को ईरान को सात अप्रैल तक का समय देकर कहा है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोला तो वह अब ईरान के बिजली घरों और पुलों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएगा। उन्होंने सात अप्रैल 'मंगलवार' को 'पावर प्लांट डे' और 'ब्रिज डे' घोषित कर दिया है। उन्होंने पोस्ट किया है, ईरान में मंगलवार 'पावर प्लांट डे' और 'ब्रिज डे' होगा, सब कुछ एक साथ। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ होगा। समुद्री रास्ता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल यहीं से गुजरता है। फरवरी 2026 में युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने इस रास्ते पर कड़ा नियंत्रण कर लिया है। इससे दुनिया भर में तेल की आपूर्ति बाधित हुई है और कीमतें काफी ज्यादा बढ़ गयी हैं। ट्रंप का 'इसे खोल दो' कहना इसी वैश्विक संकट को खत्म करने की अंतिम चेतावनी है।

487 किलोमीटर रूट पर कवच परीक्षण पूरा, दक्षिण मध्य रेलवे ने बड़ी सफलता हासिल की

हैदराबाद  दक्षिण मध्य रेलवे ने 2025-26 के दौरान 487 किलोमीटर रूट के लिए कवच क्षेत्र परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जो रेलवे बोर्ड द्वारा निर्धारित लक्ष्य से अधिक है।  कवच स्वदेशी रूप से विकसित एक सुरक्षा प्रणाली है, जिसे मानवीय त्रुटि के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है। यह किसी खतरे के सिग्नल को पार करने वाली ट्रेन के लिए स्वचालित रूप से ब्रेक लगा सकता है और स्पीड एवं सिग्नल की लगातार निगरानी करके सुरक्षित ट्रेन संचालन सुनिश्चित करने में मदद करता है। दक्षिण मध्य रेलवे (एससीआर) ने रविवार को कहा कि उसने सुरक्षा बढ़ाने के उपायों पर विशेष जोर दिया है और इस दिशा में पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान एससीआर नेटवर्क में कवच 4.0 की स्थापना के लिए कदम उठाए गए। जोन ने रेलवे बोर्ड के 402 रूट किलोमीटर के लक्ष्य को पार करते हुए 487 रूट किलोमीटर की दूरी के लिए फील्ड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। एससीआर ने एक बयान में कहा कि सावधानीपूर्वक योजना और प्रभावी कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप यह शानदार उपलब्धि हासिल हुई है। जोन ने ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम भी शुरू कर दिया है, जिससे पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान 357 किलोमीटर के लक्ष्य के मुकाबले 479 रूट किलोमीटर (आरकेएम) की दूरी के लिए सेक्शन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है। कवच 4.0 इंस्टॉलेशन का फील्ड परीक्षण काजीपेट पेद्दामपेट (101 मार्ग किमी), मल्काजगिरि कामारेड्डी (106 मार्ग किमी), चारलापल्ली रघुनाथपल्ली (79 मार्ग किमी), गुंतकल रायचूर (120 मार्ग किमी), और मुदखेड परभणी (81) के बीच खंडों में आयोजित किया गया था। इन खंडों में लोको कवच का परीक्षण भी सफलतापूर्वक किया गया। पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान एससीआर ने काजीपेट बलहरशाह, विजयवाड़ा दुव्वाडा और वाडी रेनिगुंटा के बीच 479 रकमाल की दूरी के विभिन्न खंडों में ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम को चालू किया है। ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग एक ऐसी रेल संचालन प्रणाली है, जिसमें ट्रेनों की आवाजाही स्वचालित स्टॉप सिग्नलों द्वारा नियंत्रित होती है। ये सिग्नल ट्रेनों के गुजरने पर स्वचालित रूप से संचालित होते हैं। एबीएस प्रणाली का उद्देश्य एक ही दिशा में चलने वाली ट्रेनों को पीछे से टक्कर के जोखिम के बिना सुरक्षित रूप से एक-दूसरे का अनुसरण करने में सक्षम बनाना है। इससे रेलवे लागत कम होती है, खंड की क्षमता में सुधार होता है और ट्रेनों की औसत गति भी बढ़ती है। इस प्रणाली को शुरू में एससीआर नेटवर्क के उच्च घनत्व वाले और प्रमुख मुख्य मार्गों पर चालू किया जा रहा है। एससीआर के महाप्रबंधक संजय कुमार श्रीवास्तव ने क्षेत्रीय और मंडल स्तर पर सिग्नल और दूरसंचार विंग के अधिकारियों के असाधारण योगदान की सराहना की है, जिसकी बदौलत जोन ने ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग और कवच फील्ड परीक्षणों को रिकॉर्ड स्तर पर सफलतापूर्वक पूरा किया है। महाप्रबंधक ने यह भी कहा कि सुरक्षा को मजबूत करने के लिए चालू वित्तीय वर्ष के दौरान कवच और एबीएस को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।  

IMD का अलर्ट: 80KM की तेज़ हवाओं के साथ बंगाल-सिक्किम में होगी मूसलधार बारिश, UP-बिहार में भारी बारिश

कलकत्ता  देश में मौसम का मिजाज इस समय पूरी तरह बदला हुआ है. आसमान में बादल हैं, हवाओं में तेजी है और कई इलाकों में अचानक बारिश हो रही है. कहीं ओले गिर रहे हैं तो कहीं बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है. 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से चल रही हवाओं ने हालात को और गंभीर बना दिया है. बंगाल और सिक्किम जैसे इलाकों में भारी बारिश और बादल फटने जैसे हालात बनने की आशंका जताई जा रही है. वहीं उत्तर प्रदेश और बिहार में अगले 72 घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं. मौसम विभाग (IMD) ने साफ संकेत दिए हैं कि यह बदलाव सामान्य नहीं है. लगातार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी ने पूरे देश के मौसम को अस्थिर बना दिया है. इसका असर हर क्षेत्र में अलग-अलग रूप में दिखाई दे रहा है।  बारिश, आंधी और ओलावृष्टि ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. खेतों में खड़ी फसलें सबसे ज्यादा खतरे में हैं और किसान लगातार आसमान की ओर देख रहे हैं. तेज हवाओं के साथ गिरने वाले ओले फसलों को सीधे नुकसान पहुंचा रहे हैं. शहरों में भी हालात सामान्य नहीं हैं. कई जगहों पर पेड़ गिरने, बिजली बाधित होने और जलभराव जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं. कई राज्यों में मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।      पिछले 24 घंटों के दौरान देश के कई हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ली है और इस बदलाव ने लोगों को चौंका दिया है. अरुणाचल प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ इलाकों में 7 से 11 सेंटीमीटर तक भारी बारिश दर्ज की गई है, इससे स्थानीय स्तर पर जलभराव की स्थिति भी बनी है. वहीं उत्तर भारत के कई राज्यों में ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने जनजीवन को प्रभावित किया है. 50 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवाओं ने हालात को और गंभीर बना दिया है, इससे कई जगहों पर पेड़ और बिजली के खंभे गिरने की घटनाएं भी सामने आई हैं. बिजली गिरने की घटनाएं भी बढ़ी हैं, इससे जान-माल का खतरा बना हुआ है. मौसम के इस अचानक बदलाव ने लोगों को सतर्क रहने के लिए मजबूर कर दिया है।      IMD का कहना है कि इस समय कई वेदर सिस्टम एक साथ सक्रिय हैं, जो इस अस्थिर मौसम के पीछे मुख्य कारण हैं. पश्चिमी विक्षोभ लगातार उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर रहे हैं और उनकी तीव्रता भी अधिक बनी हुई है. इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाएं पूर्वी और मध्य भारत में नमी बढ़ा रही हैं, इससे गरज-चमक और बारिश की घटनाएं तेज हो गई हैं. इन दोनों वेदर सिस्टम के टकराव के कारण वातावरण में अस्थिरता बढ़ गई है. यही वजह है कि देशभर में मौसम तेजी से बदल रहा है और कई क्षेत्रों में एक साथ अलग-अलग तरह की मौसमीय गतिविधियां देखने को मिल रही हैं।  दिल्ली-NCR में फिर बिगड़ेगा मौसम दिल्ली-NCR में मौसम लगातार बदलता नजर आ रहा है और इसका सीधा असर लोगों की दिनचर्या पर पड़ रहा है. 6 अप्रैल को मौसम कुछ हद तक साफ रह सकता है, इससे लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन यह राहत ज्यादा समय तक टिकने वाली नहीं है. 7 और 8 अप्रैल को एक बार फिर मौसम बिगड़ने के संकेत हैं. इन दिनों आसमान में आंशिक बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं. इसके साथ ही तेज हवाएं चलने की संभावना भी है, जो तापमान को नीचे लाने में मदद करेंगी।  उत्तर प्रदेश में भारी बारिश     उत्तर प्रदेश में मौसम ने अचानक करवट ली है और इसका असर राज्य के लगभग सभी हिस्सों में देखने को मिल रहा है. कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जिसमें लखनऊ, कानपुर, झांसी, सहारनपुर, अलीगढ़ और आसपास के क्षेत्र शामिल हैं. इन इलाकों में तेज बारिश के साथ आंधी चलने की संभावना जताई गई है. हवाओं की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, इससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है. इसके अलावा ओलावृष्टि की भी आशंका है, जो खासतौर पर किसानों के लिए बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि इससे गेहूं और अन्य फसलों को नुकसान हो सकता है।      मौसम विभाग के अनुसार राज्य में पश्चिमी विक्षोभ का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है और यह प्रणाली लगातार सक्रिय बनी हुई है. नम हवाओं के टकराव से गरज-चमक की घटनाएं बढ़ रही हैं और अचानक बारिश हो रही है. आने वाले दिनों में तापमान में गिरावट की संभावना है, इससे गर्मी से राहत मिल सकती है, लेकिन मौसम का यह अस्थिर रूप लोगों के लिए परेशानी भी पैदा कर सकता है. किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएं और मौसम अपडेट पर नजर बनाए रखें।  बिहार में मौसम का बदलाव     बिहार में भी मौसम ने रुख बदल लिया है और आने वाले कुछ दिन राज्य के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं. कई जिलों में यलो अलर्ट जारी किया गया है. इसमें पटना, गया, भोजपुर, पश्चिम और पूर्वी चंपारण जैसे इलाके शामिल हैं. इन क्षेत्रों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई गई है. इसके साथ ही तेज हवाएं चल सकती हैं, जिनकी रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. बिजली गिरने की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं, इससे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।      6 और 7 अप्रैल को कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है, इससे फसलों को नुकसान हो सकता है. इसके बाद तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने की संभावना है, इससे लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाओं के कारण हो रहा है. इन दोनों के प्रभाव से राज्य में नमी बढ़ गई है और मौसम अस्थिर हो गया है।  राजस्थान में मौसम ने ली … Read more

सरकार का बड़ा कदम: LPG संकट को दूर करने के लिए ‘छुटकू’ सिलेंडरों की बढ़ी आपूर्ति

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध का 5वां हफ्ता चल रहा है और हाल-फिलहाल ये थमता नजर नहीं आ रहा है. रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को नई धमकी देकर टेंशन को और बढ़ा दिया है. इसके साथ ही होर्मुज पर राहत की उम्मीद भी कम हो गई है, जिसकी वजह से दुनिया के तमाम देशों में तेल-गैस का संकट गहरा गया है. भारत में भी एलपीजी किल्लत देखने को मिली, लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से LPG प्रोडक्शन बढ़ाने, आयात में डायवर्सिफिकेशन समेत अन्य उपायों के जरिए स्थिति को बिगड़ने नहीं दिया।  हालांकि, इस बीच एलपीजी गैस एजेंसियों के बार लंबी-लंबी कतारें जरूरी लगी नजर आई हैं, लेकिन सरकार की ओर से साफ किया गया है कि भारत के पास पर्याप्त स्टॉक है और पैनिक बायिंग (LPG Panic Buying) की जरूरत नहीं है. अब एलपीजी संकट का तोड़ निकालते हुए सरकार ने डिमांड पूरी करने के लिए 5 किलोग्राम वाले LPG Cylinders की सप्लाई तेज कर दी है।  6.6 लाख सिलेंडरों की बिक्री एलपीजी डीलर्स के काउंटर पर ही ये 5 किलोग्राम वाले छोटे एलपीजी सिलेंडर उपबल्ध कराए गए हैं और इनकी बिक्री में लगातार तेजी देखने को मिल रही है. पेट्रोलियम मिनिस्ट्री की ओर से जानकारी देते हुए बताया गया है कि बीते 23 मार्च से अब तक देश में करीब 6.6 लाख सिलेंडर बेचे जा चुके हैं।  पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सब्सिडी वाले घरेलू 14.2 किलोग्राम के सिलेंडरों के विपरीत इन 5 किलोग्राम की एलपीजी बोतलों को FTL Cylinder कहा जाता है. ये मार्केट रेट्स पर उपबल्ध हैं और किसी भी नजदीकी गैस डीलर से इन्हें लिया जा सकता है।  सिर्फ ID प्रूफ की जरूरत सबसे खास बात ये है कि इन छोटे सिलेंडरों को खरीदने के लिए किसी भी तरह के एड्रेस प्रूफ को दिखाने की भी जरूरत नहीं है. आपके पास सिर्फ वैध पहचान पत्र (Identity Proof) होना चाहिए और उसके दिखाने के बाद आपको ये दे दिया जाता है. सरकार ने एलपीजी की डिमांड को पूरा करने के लिए इन सिलेंडरों की आपूर्ति में बढ़ोतरी की है।  जमाखोरी पर सरकार का एक्शन इससे पहले बीते शनिवार को भी सरकार की ओर से बयान जारी कर लोगों से पेट्रोल, डीजल और LPG की घबराहट में खरीदारी करने से बचने की अपील की गई. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सरकार पेट्रोलियम उत्पादों और कुकिंग गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठाए जा रहे हैं।  इसके साथ ही तेल-LPG की जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ लगातार एक्शन जारी है. इसके तहत 3,700 से अधिक छापे मारे गए हैं और एलपीजी डिस्ट्रिब्यूटर्स को लगभग 1,000 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं. इसके अलावा अब तक 36 डीलरों को निलंबित किया जा चुका है।  'पूरी क्षमता से काम कर रहीं रिफाइनरियां' सरकार ने साफ किया है कि घरों और ट्रांसपोर्टेशन के लिए पूरी सप्लाई बनाए रखी जा रही है, जबकि फर्टिलाइजर्स प्लांटों को सप्लाई 6 अप्रैल से औसत खपत के लगभग 90 फीसदी तक बढ़ने की उम्मीद है, जिसमें आने वाले LNG कार्गो से मदद मिलेगी।  मंत्रालय के मुताबिक, देश की सभी रिफाइनरियां पर्याप्त कच्चे तेल के भंडार के साथ पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और पूरे देश में पेट्रोल पंप पूरी तरह से भरे हुए हैं।