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धर्म सम्मेलनों से समाज में एकता और राष्ट्र सेवा की भावना को मिलेगा बल: दत्तात्रेय होसबोले

धर्मशाला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने शनिवार को कहा कि पूरे देश में धर्म के सही अर्थ और कर्तव्यों के बारे में जागरूकता फैलाने और लोगों को एकजुट करने के उद्देश्य से विभिन्न धर्म सम्मेलन, स्वधर्म सम्मेलन और हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है। धर्मशाला में पत्रकारों से बातचीत करते हुए दत्तात्रेय होसबोले ने कहा, "समाज में एकता और परस्पर सहयोग की भावना को मजबूत करने के लिए ये कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जो लोग आध्यात्मिक साधना और समाज सेवा में लगे हुए हैं। वे इन सम्मेलनों में भाग लेकर राष्ट्र सेवा और आपसी एकता को बढ़ावा दे रहे हैं।" आरएसएस महासचिव ने कहा कि संघ ने समाज परिवर्तन के जो मार्ग बताए हैं, उनमें सभी लोगों को जुड़कर परस्पर सहयोग से काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य है कि भारत मां की संतान के रूप में हर व्यक्ति अपने कर्तव्य को निभाए। समाज में एकता बनी रहे और लोग राष्ट्र के लिए कार्य करने की भावना से संकल्प लेकर आगे बढ़ें। होसबोले ने कहा कि देश में कई चुनौतियां और संकट मौजूद हैं, लेकिन सरकार भी देश को अच्छी स्थिति में लाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, "धर्म सम्मेलनों का मुख्य उद्देश्य यही है कि हम सभी चुनौतियों को मिलकर पार करें और देश को मजबूत बनाएं।" आरएसएस महासचिव ने जोर देकर कहा कि इन सम्मेलनों के माध्यम से समाज में सकारात्मक सोच, आपसी भाईचारा और राष्ट्रभक्ति की भावना को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति आध्यात्मिक क्षेत्र में कार्यरत हैं, उन्हें समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। दत्तात्रेय होसबोले ने स्पष्ट किया कि संघ किसी भी प्रकार के विभाजन या द्वेष को बढ़ावा नहीं देता, बल्कि वह समाज को एक सूत्र में पिरोने और सभी को राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पित करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि हिंदू सम्मेलन, स्वधर्म सम्मेलन और धर्म सम्मेलन केवल धार्मिक चर्चा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें सामाजिक एकता, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण पर भी गहन चर्चा की जाती है।

भारत के लिए होर्मुज की जरूरत नहीं! अर्जेंटीना के बाद अब एक और मित्र भेजेगा LNG-LPG के जहाज

मुंबई   ईरान युद्ध के लंबा खिंचने की पूरी आशंका है. अमेरिका और इजरायल ने जब ईरान पर अटैक किया था, तब दावा किया गया था कि यह जंग कुछ ही हफ्तों में समाप्‍त हो जाएगी. हालांकि, ऐसा हुआ नहीं. ईरान की ओर से अभी तक ऐसा पलटवार किया गया है, जिसकी आशंका अमेरिका-इजरायल को तो छोड़िए पूरी दुनिया को नहीं थी. इसका व्‍यापक असर देखने को मिल रहा है. खासकर एनर्जी कॉरिडोर होर्मुज स्‍ट्रेट के बाधित होने से पेट्रोल और गैस की आपूर्ति बुरी तरह से प्रभावित हुई है. ऐसे में तमाम देश अब होर्मुज स्‍ट्रेट के साथ ही तेल और गैस से संपन्‍न खाड़ी के देशों का विकल्‍प तलाशने लगे हैं. भारत भी इसमें पीछे नहीं है. लैटिन अमेरिकी देश अर्जेंटिना भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सामने आया है. अब नई दिल्‍ली ने अपने दशकों पुराने परंपरागत मित्र देश रूस से LNG और LPG सप्‍लाई को लेकर बातचीत की है. रिपोर्ट की मानें तो भारत और रूस LNG की आपूर्ति बढ़ाने के लिए तैयार हैं. ऐसे में तमाम संकट के बावजूद भारत के घरों में चूल्‍हे जलते रहेंगे, फिर होर्मुज जलडमरूमध्‍य लंबे समय के लिए बाधित ही क्‍यों न रहे।  रूस की न्‍यूज एजेंसी TASS ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि नई दिल्‍ली और मॉस्‍को LNG की सप्‍लाई बढ़ाने को तैयार हैं. रिपोर्ट की मानें तो ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में भारत और रूस के बीच LNG और LPG की आपूर्ति बढ़ाने को लेकर बातचीत तेज हो गई है. रूसी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, दोनों देशों ने LNG की सप्लाई बढ़ाने की तत्परता जताई है. साथ ही भारत को LPG की आपूर्ति की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है. तेल और गैस क्षेत्र के एक सूत्र ने बताया कि भारत और रूस के बीच हुई हालिया चर्चाओं में ऊर्जा सहयोग को विस्तार देने पर सहमति बनी है. सूत्र के मुताबिक, दोनों पक्षों ने LNG की आपूर्ति बढ़ाने की इच्छा जताई है और भारत में बड़े पैमाने पर उपयोग होने वाली LPG की सप्लाई पर भी चर्चा की है. भारत में घरेलू ईंधन के रूप में LPG की मांग लगातार बढ़ रही है, ऐसे में रूस एक अहम आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर सकता है।  ऑप्‍शन की तलाश विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति में अनिश्चितता के बीच भारत वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में है. ऐसे में रूस के साथ बढ़ता ऊर्जा सहयोग भारत की रणनीतिक जरूरतों के अनुरूप माना जा रहा है. हाल के महीनों में भारत ने रूस से कच्चे तेल के आयात में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है, जिससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा संबंध और मजबूत हुए हैं. सूत्र ने यह भी संकेत दिया कि इस दिशा में आगे की बातचीत में निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी. उन्‍होंने बताया कि व्यापार जगत की भागीदारी के साथ वार्ता जारी रहने की उम्मीद है. इससे दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों और निवेश के नए अवसर खुल सकते हैं. गौरतलब है कि भारत पहले ही अर्जेंटीना समेत अन्य देशों से LNG आयात के विकल्प तलाश रहा है. ऐसे में रूस के साथ यह संभावित समझौता भारत के ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण की रणनीति को और मजबूती देगा. आने वाले समय में दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग के और विस्तार की संभावना जताई जा रही है।  संकट में सामने आया अर्जेंटिना पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण भारत में उत्पन्न LPG की कथित कमी के बीच करीब 20,000 किलोमीटर दूर स्थित दक्षिण अमेरिकी देश अर्जेंटीना ने भारत की मदद के लिए हाथ बढ़ाया. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है, क्योंकि देश के लगभग 60 प्रतिशत LPG आयात इसी मार्ग से होते हैं. समुद्री यातायात बाधित होने के चलते भारत को अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में तेजी से कदम उठाने पड़े हैं. इसी के तहत अर्जेंटीना एक अहम साझेदार के रूप में उभरा है. भारत में अर्जेंटीना के राजदूत मैरियानो ऑगस्‍टीन कॉसिनो (Mariano Agustin Cousino) ने कहा कि उनका देश भारत की ऊर्जा सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है. उन्होंने बताया कि अर्जेंटीना के पास पर्याप्त गैस भंडार हैं और दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियां इसे और गति दे सकती हैं।  खूब बढ़ी LPG की सप्‍लाई साल 2026 की पहली तिमाही में ही अर्जेंटीना ने भारत को 50,000 टन LPG निर्यात किया, जो पूरे 2025 में भेजे गए 22,000 टन से दोगुने से भी अधिक है. इनमें से लगभग 39,000 टन आपूर्ति अर्जेंटीना के बहिया ब्लांका पोर्ट से भारत पहुंच चुकी थी, जबकि 5 मार्च को अतिरिक्त 11,000 टन भेजा गया. गौरतलब है कि 2024 से पहले अर्जेंटीना ने भारत को LPG की आपूर्ति नहीं की थी, लेकिन पिछले दो वर्षों में दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग तेजी से बढ़ा है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत का अर्जेंटीना जैसे दूरस्थ देशों के साथ सहयोग बढ़ाना उसकी व्यावहारिक और दूरदर्शी ऊर्जा नीति को दर्शाता है. यह साझेदारी न केवल मौजूदा संकट का समाधान है, बल्कि भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत रणनीतिक संबंध की नींव भी रखती है। 

1 अप्रैल से लागू होगा नया नियम, डिजिटल पेमेंट के लिए करना होगा यह काम

मुंबई  मॉल या स्थानीय दुकान पर बहुत से लोग पेमेंट करने के लिए डिजिटल ट्रांजैक्शन या UPI का सहारा लेते हैं. अब डिजिटल ट्रांजैक्शन को लेकर एक नियम बदलने जा रहा है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आदेश के बाद बैंकों को टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) लागू करना होगा. सितंबर 2025 में जारी किए गए आदेश में 1 अप्रैल 2026 डेडलाइन लगी रखी है।  1 अप्रैल 2026 के बाद से ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए सिर्फ एक वन टाइम पासवर्ड (OTP) पर निर्भर रहना काफी नहीं होगा. सभी ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए कम से कम दो अलग और इंडिपेंडेंट वेरिफिकेशन फैक्टर से वेरिफाई करना होगा. क्रेडिट कार्ड में पहले से टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन पहले से लागू है. ये जानकारी मीडिया रिपोर्ट से मिली है।  ये होंगे ऑथेंटिकेशन के तरीके      पर्सनल आइडेंटिफिकेशन नंबर (PIN)     बायोमेट्रिक जैसे फिंगरप्रिंट या फेस रिकग्निशन     बैंकिंग ऐप के अंदर जनरेट होने वाले वर्चुअल टोकन     SMS आधारित OTP  इन्हें उदाहरण के रूप में समझें तो पेमेंट के लिए दो काम करने पड़ेंगे.     OTP + PIN (स्टैटिक)     बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन + डिवाइस बाइंडिंग     टोकन आधारित ऑथेंटिकेशन + पासवर्ड जैसे किसी दुकान से सामान खरीदा और पेमेंट के लिए उसको अपना डेबिट कार्ड दिया. इसके बाद जैसे ही सेल्स पर्सन पॉइंट ऑफ सेल (POS) से स्वाइप करेगा, उसके बाद यूजर्स को पिन एंटर करने के साथ अब OTP भी देना होगा. अब ऑनलाइन ट्रांजैक्शन को दो तरह से ऑथेंटिकेट करना होगा।  अब 1 अप्रैल के बाद से हर एक ट्रांजैक्शन के लिए कम से कम दो तरीकों से ऑथेंटिकेट करना होगा. ऐसे में साइबर साइबर ठगों पर लगाम लगेगी और अनऑथराइज्ड ट्रांजैक्शन पर लगाम लगेगी।  साइबर ठगों पर लगाम लगाने की कोशिश  साइबर ठगी के ऐसे बहुत से केस हैं, जहां विक्टिम के पर्सनल मोबाइल पर आने वाले बैंक ओटीपी को साइबर ठगों ने चालाकी से हासिल कर लिया. फिर उनके बैंक खाते को खाली कर डाला. फिशिंग स्कैम, सिम स्कैम और बहुत से स्कैम हाल के दिनों में बढ़े हैं।  इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन पर भी लागू होगा नियम RBI के दिशा-निर्देश में यह  साफ किया गया है कि 1 अक्टूबर 2026 तक इंटरनेशनल कार्ड-नॉट-प्रेजेंट ट्रांजैक्शन पर भी इसी तरह के ऑथेंटिकेशन नियम लागू किए जाएंगे। 

8वें वेतन आयोग का बड़ा ऐलान: कब होगा लागू, सैलरी में कितनी बढ़ेगी वृद्धि?

 नई दिल्‍ली 8वें वेतन आयोग को लेकर सरकार ने एक बड़ा अपडेट जारी किया है. लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए सरकार ने 8वें वेतन आयोग को लेकर कुछ स्‍पष्‍टता दी है, लेकिन अभी पूरी जानकारी उपलब्‍ध नहीं है. संसद में सरकार ने बताया है कि कबतक आठवां वेतन आयोग लागू हो सकता है।  वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि सरकार ने 3 नवंबर, 2025 को औपचारिक रूप से 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की स्थापना की. उन्होंने आगे कहा कि आयोग को केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की सैलरी, भत्ते और पेंशन पर अपनी सिफारिशें रिपोर्ट पेश करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।  उन्‍होंने 8वें वेतन आयोग कब लागू होगा? सवाल का जवाब देते हुए कहा कि यह तभी पता चल पाएगा, जब रिपोर्ट पेश की जाएगी और उसे एक्‍सेप्‍ट किया जाएगा. इसके बाद तय हो सकेगा कि इस आयोग को कब से लागू किया जाए? खैर अभी आयोग इसपर रिपोर्ट तैयार कर रहा है।  8वें वेतन आयोग पर फीडबैक  जानकारी के मुताबिक, 8वें वेतन आयोग को लेकर आयोग एक तरह से काम नहीं कर रहा है. यह अलग-अलग कैटेगरी से एक्टिव तरीके से सुझाव पाने की कोशिश कर रहा है. माईगॉव पोर्टल पर 18 तरह के सवाल अपलोड किए गए हैं. मंत्रालयों, विभागों, राज्य सरकारों, कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, यूनियनों, शिक्षाविदों और यहां तक ​​कि लोगों से भी फीडबैक मांगा गया है. फीडबैक देने का लास्‍ट डेट 31 मार्च 2026 है और सिर्फ ऑनलाइन तरीके से ही फीडबैक लिया जाएगा।  कब होगा सैलरी में इजाफा?  सैलरी को लेकर कहा गया है कि 8वां वेतन आयोग लागू होने में भले ही देरी हो जाए, लेकिन 1 जनवरी 2026 से ही इसे प्रभावी माना जाएगा. हालांकि कर्मचारियों तक इसका लाभ पहुंचने में ज्‍यादा समय लग सकता है. जेनजेडसीएफओ के संस्थापक सीए मनीष मिश्रा ने संभावित देरी की वजह बताई है।  उनका कहना है कि यह सच है कि कागजों पर 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होने वाला है, लेकिन व्यवहार में बढ़ी हुई सैलरी संभवतः कर्मचारियों के बैंक खातों में 2026 के अंत तक या वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान ही पहुंचेगी, ठीक वैसे ही जैसे पिछले वेतन आयोगों के बाद देरी हुई थी।  कर्मचारियों को मिलेगी बकाया राशि  उन्‍होंने यह भी बताया कि 8वें वेतन आयो के तहत बकाया भुगतान की भी संभावना है. संशोधित वेतन का भुगतान भले ही बाद में किया जाएग, लेकिन इसका कैलकुलेशन 1 जनवरी 2026 से की जाएगी. इसी दिन 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल समाप्‍त हो रहा है।  कितनी बढ़ जाएगी सैलरी?  वेतन बढ़ोतरी की बात करें तो अभी तक कोई अधिकारिक जानकारी इसे लेकर नहीं आई है, लेकिन शुरुआती अनुमानों से बढ़ोतरी का संकेत मिलता है. कर्मा मैनेजमेंट ग्लोबल कंसल्टिंग सॉल्यूशंस के मैनेजिंग डायरेक्‍टर और मुख्य विजन अधिकारी प्रतीक वैद्य ने कहा कि उम्‍मीद पिछले रुझानों और वर्तमान आर्थिक के हिसाब से दिख रही हैं।  उन्‍होंने कहा कि सैलरी बढ़ोतरी के दो फैक्‍टर नजर आ रहे हैं, जिसमें पूर्व आयोग का कार्य और आज की अर्थव्‍यवस्‍था शामिल हैं. 6वें वेतन आयोग के तहत करीब 40 फीसदी सैलरी बढ़ी थी, जबकि 7वें वेतन आयोग के तहत 23 से 25 फीसदी के आपास बढ़ोतरी देखी गई थी, जिसमें 2.57 फिटमेंट फैक्‍टर है. इसी बात पर 8वां वेतन आयोग के तहत भी सैलरी निर्भर करती है।  एक्‍सपर्ट ने कहा कि यह सिर्फ अनुमान है, अंतिम फैसला कई आंकड़ों पर निर्भर करता है. उन्‍होंने समझाया कि 8वें आयोग के लिए ज्‍यादातर अनुमानां में 20 से 35 फीसदी की बढ़ोतरी की बात कही गई है, जिसमें फिटमेंट फैक्‍टर 2.4 से 3 के बीच और बेसिक सैलरी शामिल है. लेकिन अंतिम आंकड़ा अगले 12 से 18 महीनों में महंगाई, टैक्‍स की उपलब्‍धता और राजनीतिक इच्‍छा पर निर्भर करता है। 

भारत ने खेला बड़ा दांव, होर्मुज जीता, अब रूस से मिलेगा LNG का खजाना

नईदिल्ली /मॉस्को  मिडिल ईस्ट में मची भीषण तबाही की आग अब भारत की रसोई से लेकर फैक्ट्रियों तक पहुंच चुकी है. रॉयटर्स की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने अपनी तेल और गैस कंपनियों को साफ कह दिया है कि वे रूस से एलएनजी (LNG) खरीदने के लिए अपनी कमर कस लें. यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से इसे भारत का अब तक का सबसे बड़ा ‘पॉलिसी चेंज’ माना जा रहा है. मिडिल ईस्ट के बिगड़ते हालात ने दुनिया भर के देशों को मजबूर कर दिया है कि वो तेल और गैस के लिए दूसरे विकल्प तलाशें. हालांकि, भारत को हॉर्मुज के रास्ते से ‘फ्री पास’ मिला हुआ है, लेकिन सरकार एनर्जी सप्लाई के मामले में अब कोई भी रिस्क लेने के मूड में नहीं है।  Oil Prices को काबू में रखने का निकाला उपाय कतर के ‘रास लफ्फान’ गैस हब पर हमलों से उत्पादन सालों के लिए पिछड़ गया है. 19 मार्च को नई दिल्ली में रूसी ऊर्जा उप-मंत्री पावेल सोरोकिन और हरदीप सिंह पुरी के बीच हुई बैठक में एलएनजी सप्लाई फिर से शुरू करने पर सहमति बनी है।  अमेरिका से शुरू हुई क्या बात? भारत ने अमेरिका के साथ बातचीत शुरू कर दी है ताकि रूसी गैस खरीदने पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का असर न पड़े. अमेरिका पहले ही भारत को रूसी कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिनों का वेवर दे चुका है ताकि ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें काबू में रहें।  अब भारत एलएनजी के लिए भी ऐसी ही छूट चाहता है. हालांकि, जानकारों का कहना है कि इस बार रूस के साथ होने वाला सौदा 2012 के GAIL-Gazprom समझौते जितना सस्ता नहीं होगा, क्योंकि अब यह पूरी तरह ‘सेलर्स मार्केट’ है।  भारत-रूस क्रूड ऑयल ट्रेड S&P ग्लोबल और अन्य एजेंसियों ने दुनिया भर में गैस की कमी की चेतावनी दी है. होर्मुज संकट और कतर में तबाही के कारण इस साल ग्लोबल सप्लाई में 35 मिलियन टन की कमी आ सकती है. कतर और यूएई के नए गैस प्रोजेक्ट्स अब 3 से 5 साल की देरी से चल सकते हैं. भारत पहले ही फरवरी के बाद से रूस से 5-6 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीद चुका है और अब कुकिंग गैस यानी LPG के साथ-साथ एलएनजी के लिए भी रूस पर भरोसा बढ़ा रहा है। 

भारत बना ड्रोन और क्रूज मिसाइलों का काल, दुश्मन आसमान में जलकर राख होंगे

नई दिल्ली भारत की रक्षा ताकत में अब एक और बड़ा और खतरनाक इजाफा हो गया है. रक्षा मंत्रालय ने नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में 858 करोड़ रुपए के दो बड़े एग्रीमेंट साइन किए हैं.  इनका सीधा मकसद भारत के आसमान और समंदर की सुरक्षा को पूरी तरह से अभेद्य बनाना है. इंडियन आर्मी को रूस का टुंगुस्का एयर डिफेंस सिस्टम मिलने वाला है।  यह सिस्टम दुश्मन के विमानों, ड्रोन्स और क्रूज मिसाइलों को पलक झपकते ही हवा में खाक कर देगा. इसके साथ ही इंडियन नेवी के P8I एयरक्राफ्ट के मेंटेनेंस के लिए भी एक बड़ी डील हुई है. बोइंग इंडिया डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ यह करार भारत में ही होगा. इससे देश के आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया विजन को एक बहुत बड़ा बूस्ट मिलेगा. भारत अब हर तरह के खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।  ‘445 करोड़ में रूस से मिला एयर डिफेंस सिस्टम’ भारतीय सेना को अब टुंगुस्का एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम मिलेगा. इसके लिए रूस की कंपनी के साथ 445 करोड़ रुपए का बड़ा एग्रीमेंट साइन हुआ है. यह आधुनिक मिसाइल सिस्टम भारत की एयर डिफेंस पावर को कई गुना बढ़ा देगा. दुश्मन का कोई भी विमान, ड्रोन या क्रूज मिसाइल अब भारत की सीमा में घुस नहीं पाएगा. इससे रूस और भारत का रक्षा सहयोग भी और ज्यादा मजबूत हुआ है।  ‘नेवी के P8I एयरक्राफ्ट के लिए बोइंग से हुई डील’ भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए भी बड़ा कदम उठाया गया है. नौसेना के P8I विमान की जांच और मेंटेनेंस के लिए एक अहम समझौता हुआ है. यह एग्रीमेंट 413 करोड़ रुपए में बोइंग इंडिया डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ साइन किया गया है. यह काम पूरी तरह से भारत में ही किया जाएगा।  ‘मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को मिला बूस्ट’ P8I विमानों का मेंटेनेंस देश के अंदर ही होने से बहुत बड़ा फायदा होगा. इससे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को भारी ताकत मिलेगी. देश में ही मेंटेनेंस की आधुनिक सुविधाएं काफी मजबूत होंगी. भारत अब रक्षा उपकरणों के रखरखाव के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर नहीं रहेगा. यह डिफेंस सेक्टर में स्वदेशीकरण की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। 

ईंधन पर टैक्स घटा, आम लोगों को राहत: पेट्रोल ₹10 और डीजल ₹10 तक सस्ता – बिंदल

शिमला शिमला भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि 26 मार्च 2026 को जारी भारत सरकार के आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन के माध्यम से पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में ऐतिहासिक कमी की गई है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय वैश्विक संकट और पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के बीच लिया गया है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मजबूत और जनहितकारी नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है। डॉ. बिंदल ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना (Notification No. 05/2026-Central Excise एवं संबंधित संशोधन नियम 02/2026) के अनुसार पेट्रोल (Motor Spirit) पर उत्पाद शुल्क को ₹13 प्रति लीटर से घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि डीजल (High Speed Diesel) पर उत्पाद शुल्क ₹10 प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया गया है। इससे देश के 140 करोड़ नागरिकों को सीधी राहत मिलेगी और महंगाई पर नियंत्रण में मदद मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार ने दूरदर्शिता दिखाते हुए ईंधन की देश में उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक कदम भी उठाए हैं। डीजल पर ₹21.5 प्रति लीटर तथा एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर ₹29.5 प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लगाया गया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद देश में ईंधन की कमी न हो और कीमतें नियंत्रित रहें। डॉ. बिंदल ने कहा कि यह निर्णय स्पष्ट करता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हर परिस्थिति में “जनहित सर्वोपरि” के सिद्धांत पर कार्य करती है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत सरकार ने आम नागरिक को राहत देने का कार्य किया है, जो ‘ईज ऑफ लिविंग’ को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके विपरीत, डॉ. बिंदल ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जहां एक ओर केंद्र सरकार टैक्स घटाकर जनता को राहत दे रही है, वहीं प्रदेश की कांग्रेस सरकार पेट्रोल और डीजल पर ₹5 प्रति लीटर तक सेस लगाने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पूरी तरह जनविरोधी है और प्रदेश की जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार पहले ही डीजल पर ₹10.40 प्रति लीटर टैक्स लगाकर हजारों करोड़ रुपये जनता से वसूल चुकी है और अब ₹5 अतिरिक्त सेस लगाकर आम आदमी, किसान, बागवान, व्यापारी और परिवहन क्षेत्र को और अधिक प्रभावित करने की तैयारी कर रही है। डॉ. बिंदल ने कहा कि यह स्पष्ट अंतर है – एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार है जो टैक्स कम कर राहत देती है, और दूसरी ओर कांग्रेस की सरकार है जो नए-नए कर लगाकर जनता की जेब पर बोझ डालती है। उन्होंने अंत में कहा कि भाजपा इस जनविरोधी सेस का कड़ा विरोध करेगी और हिमाचल प्रदेश की जनता के हितों की रक्षा के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी।

गूगल पर घिरा विवाद: एपस्टीन केस के पीड़ितों ने डेटा दिखाने का लगाया आरोप

वॉशिंगटन सीएनबीसी के मुताबिक जेफरी एपस्टीन के पीड़ित एक समूह ने गूगल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। गूगल पर आरोप है कि कंपनी के एआई टूल्स और सर्च इंजन ने उनकी पर्सनल पहचान और कॉन्टैक्ट जानकारी ऑनलाइन दिखा दी। इसकी वजह से उन्हें शोषण, धमकियां और फिर से मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा। जाने डोई नामक एक पीड़ित ने अपनी तरह अन्य पीड़ितों के हवाले से अमेरिका के फेडरल कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि गूगल प्लेटफॉर्म के जरिए नाम, ईमेल एड्रेस और फोन नंबर समेत बहुत ही संवेदनशील जानकारी दिखा दी गई है। हालांकि, इसे हटाने के लिए कई बार अपील भी की गई थी। शिकायत के मुताबिक ये खुलासे तब हुए जब पीड़ितों ने अपनी जानकारी प्राइवेट रखने की कोशिश की थी। मुकदमे में इस मामले का पता 2025 के आखिर और 2026 की शुरुआत में अमेरिकी न्यायिक विभाग द्वारा बड़ी संख्या में डॉक्यूमेंट्स जारी करने के बाद लगाया गया है। जारी किए गए रिकॉर्ड में लगभग 100 एपस्टीन पीड़ितों की अनजाने में पहचान हो गई थी। हालांकि सरकार ने बाद में गलती को पहचाना और मटीरियल वापस लेने की कोशिश की, लेकिन संवेदनशील डेटा पहले ही ऑनलाइन फैल चुका था। पीड़ितों का आरोप है कि गूगल ने इस समस्या के बारे में अलर्ट किए जाने के बाद भी अपने सर्च रिजल्ट्स और एआई-जेनरेटेड रिस्पॉन्स के जरिए यह जानकारी दिखाना जारी रखा। शिकायत में कहा गया है कि लगातार इस खुलासे से पीड़ितों को नया तनाव हो गया है। मुकदमे में कहा गया है, “अजनबी उन्हें कॉल करते हैं, ईमेल करते हैं, उनकी फिजिकल सेफ्टी के लिए खतरा पैदा करते हैं और उन पर एपस्टीन के साथ मिलकर साजिश करने का आरोप लगाते हैं जबकि असल में वे (पीड़ित शिकायतकर्ता) एपस्टीन के शिकार हैं।” यह कानूनी कार्रवाई एआई तकनीक, प्राइवेसी और उन प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर बढ़ती चिंताओं को दिखाती है जो संवेदनशील जानकारी इकट्ठा करते हैं और दिखाते हैं। दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक का नाम लेकर, मुकदमा बिना फिल्टर वाले एआई रिस्पॉन्स और सर्च रिजल्ट के संभावित नतीजों को दिखाता है जो पहले से ही संवेदनशील या नुकसानदायक डेटा को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि इस केस के नतीजे का असर टेक कंपनियों के पर्सनल डेटा को संभालने के तरीके पर पड़ सकता है, खासकर उन मामलों में जब अपराध के शिकार या संवेदनशील सरकारी रिकॉर्ड शामिल हों। पीड़ित ऐसे उपाय ढूंढ रहे हैं जो आगे के खुलासे को रोक सकें और उनकी पहचान के बार-बार सामने आने से होने वाली परेशानी के लिए गूगल को जिम्मेदार ठहरा सकें।

फ्यूल मैनेजमेंट फेलियर पर थाई पीएम ने मानी गलती, देश से मांगी माफी

बैंकॉक थाइलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नवीराकुल ने ईंधन संकट की जिम्मेदारी लेते हुए देश से माफी मांगी है। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दोनों हाथ जोड़कर कहा कि मिस मैनेजमेंट के चलते आम लोगों को तकलीफ उठानी पड़ी, जिसका उन्हें कष्ट है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के साथ हुए अहम समझौते की भी जानकारी दी। बैंकॉक स्थित गवर्नमेंट हाउस में पश्चिम एशिया में एक महीने से जारी संघर्ष के बाद के हालात पर चर्चा करने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई। उन्होंने बताया कि थाईलैंड ने ईरान के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत उसके तेल टैंकर अब होर्मुज से सुरक्षित गुजर सकेंगे। पीएम ने बताया कि इस समझौते से देश में ईंधन को लेकर बनी चिंता कम होगी। मीडिया के सामने ही प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नविराकुल ने थाईलैंड में ईंधन कुप्रबंधन के लिए माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व संकट की वजह से हुई दिक्कतें सोच से ज्यादा लंबी चलीं। उन्होंने प्राइस कैपिंग के विचार का उल्लेख भी किया। 'बैंकॉक पोस्ट' के अनुसार, प्रेस के सामने वो हाथ जोड़कर खड़े हुए और कहा, "फ्यूल मैनेजमेंट से हुई गड़बड़ी के लिए मैं लोगों से माफी मांगता हूं।" अपने फैसले को सही करार देते हुए कहा कि पंपों पर प्राइस कैप खत्म करने से पड़ोसी देशों में तेल की स्मगलिंग रोकने और फ्यूल की कमी को कम करने में मदद मिलेगी। दरअसल, बुधवार रात, थाई लोग छह-बहत (टीएचबी/थाई मुद्रा) प्रति लीटर की कीमत बढ़ने से हैरान थे। इसके बाद स्टेट ऑयल फ्यूल फंड की घोषणा के बाद गुरुवार सुबह 5 बजे नई कीमतें लागू होने से पहले पेट्रोल भरवाने की होड़ मच गई, जिससे देश भर में सर्विस स्टेशनों पर लंबी लाइनें लग गईं। अचानक हुई बढ़ोतरी को लेकर सरकार की बहुत आलोचना हुई। हालांकि ऑयल फ्यूल फंड ऑफिस ने बाद में इस तेज बढ़ोतरी को कई वजहों का नतीजा बताया, पीएम अनुतिन शनिवार तक इस फैसले पर चुप थे। 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ यूएस-इजरायल संघर्ष शुरू होने के बाद पहले 15 दिनों में, सरकार ने जनता पर बोझ कम करने के लिए फ्यूल की कीमतों पर कैप लगाने की कोशिश की, यह अनुमान लगाते हुए कि युद्ध ज्यादा दिन नहीं चलेगा। युद्ध के पहले तीन हफ्तों में ऑयल फंड ने कीमतों पर सब्सिडी देने में 20 बिलियन बहत खर्च किए, और एक बार जब रोजाना की सब्सिडी की लागत 2 बिलियन बहत तक पहुंच गई तो परेशानी शुरू हो गई। अनुतिन ने कहा, "जैसे हालात है उसमें ये सब जल्द खत्म नहीं होने वाला, इसलिए सरकार को कुछ उपायों में बदलाव करना पड़ा है, और कम आय वाले मजदूरों, किसानों और (ट्रांसपोर्ट) ऑपरेटर्स पर ध्यान देना पड़ा है।" उन्होंने बताया कि प्राइस-कैप खत्म करने का मतलब पूरी तरह से फ्लोटिंग कीमतें नहीं हैं, बल्कि सब्सिडी रेट को कम करना है—24 बहत प्रति लीटर से 16 बहत तक। यह ग्लोबल मार्केट की स्थितियों को बेहतर ढंग से दिखाएगा। पीएम ने कहा कि 77 मिलियन लीटर रोजाना की रिफाइनिंग कैपेसिटी के साथ, थाईलैंड के पास 67 मिलियन लीटर के औसत फ्यूल कंजम्पशन को पूरा करने के लिए काफी आपूर्ति है, लेकिन हाल ही में पैनिक बाइंग ने रोजाना की डिमांड को 82 मिलियन लीटर तक बढ़ा दिया है—जो औसत से 22 फीसदी ज्यादा है। अनुतिन के मुताबिक अब हालात काबू में हैं, लेकिन जनता से अपील की गई कि वे रोज एक लीटर बचाने की कोशिश करें।

संघर्ष के साये में तेल आपूर्ति जारी, भारत आ रहे जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरेंगे

नई दिल्ली पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए पेट्रोलियम उत्पाद लेकर आ रहे दो और जहाजों के शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की संभावना है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। हाल ही में ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते संघर्ष के बाद इस जलमार्ग पर 'पूर्ण नियंत्रण' होने का दावा किया है, जिससे क्षेत्र में अनिश्चितता और बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार, भारतीय नौसेना के युद्धपोत प्रमुख बंदरगाहों के पास तैनात किए गए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर जहाजों को सहायता दी जा सके। आने वाले दिनों में और जहाजों के इस रास्ते से भारत पहुंचने की उम्मीद है। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि यह जलमार्ग भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे 'मित्र देशों' के लिए खुला हुआ है। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने शुक्रवार को बताया कि एलपीजी से भरे चार जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत पहुंच चुके हैं। मंत्रालय ने यह भी भरोसा दिलाया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए संबंधित देशों के साथ लगातार संपर्क में है ताकि जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके। एक संयुक्त मंत्रालयी प्रेस ब्रीफिंग में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने कहा कि सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और सभी संबंधित पक्षों के साथ समन्वय कर रही है। उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटों में खाड़ी क्षेत्र में किसी भारतीय जहाज या भारतीय नाविक से जुड़ी कोई घटना सामने नहीं आई है और सभी सुरक्षित हैं। सिन्हा ने यह भी कहा कि इस समय फारस की खाड़ी में करीब 20 भारतीय झंडे वाले जहाज काम कर रहे हैं, जिनमें लगभग 540 भारतीय क्रू मेंबर मौजूद हैं और सभी सुरक्षित हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश के सभी बंदरगाहों पर कामकाज सामान्य रूप से चल रहा है और कहीं भी जाम या रुकावट की कोई जानकारी नहीं है। हालांकि, कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि संघर्ष शुरू होने के बाद इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही सीमित कर दी गई है। ईरान केवल कुछ जहाजों को ही गुजरने की अनुमति दे रहा है, जिससे देरी हो रही है और कुछ जहाज फंसे हुए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का एक बेहद अहम ऊर्जा मार्ग है, जहां से लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक पेट्रोलियम व्यापार गुजरता है। इसलिए यहां का कोई भी तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर डाल सकता है।