samacharsecretary.com

UPI चार्ज का असर? पेट्रोल पंपों पर ऑनलाइन पेमेंट से बचने की अपील, कैश लेने पर जोर

नई दिल्ली  देशभर में UPI पर चार्ज के खिलाफ अब विरोध तेज होता जा रहा है। दिल्ली-NCR समेत देशभर में कई जगहों पर अब "No UPI, Only Cash" के पोस्टर लगा दिए गए हैं। दिल्ली के कई पेट्रोल और सीएनजी पंप से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जहां पर ये पोस्टर चस्पा कर दिए गए हैं। ग्राहकों से पेमेंट कैश या कार्ड में लेने की मांग की जा रही है। आपको बता दें कि पेट्रोल पंप एसोसिएशन ट्रेड यूनियन समेत कई संगठनों ने इस चार्ज का विरोध किया है और कहा है कि चार्ज लगेगा तो धीरे-धीरे सभी जगहों पर "No UPI, Only Cash" का बोर्ड लग जाएगा। दिल्ली के व्यापारियों ने किया विरोध दिल्ली के कश्मीरी गेट मार्केट के व्यापारियों ने यूपीआई ट्रांजेक्शन पर चार्ज लगाने के सरकार के फैसले का विरोध करने के लिए अपनी दुकानों पर 'नो यूपीआई' के पोस्टर लगाए हैं। व्यापारियों का ये विरोध प्रदर्शन गुरुवार को चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) के अध्यक्ष बृजेश गोयल के नेतृत्व में हुआ। पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने क्लियर कर दिया है कि इस चार्ज से ग्राहकों की ही परेशानी बढ़ेगी। क्योंकि पहले से ही काफी कम मार्जिन मिलता है। एक और बोझ पेट्रोप पंप मालिक नहीं संभाल पाएंगे और यूपीआई का ट्रांजेक्शन कम करना पड़ जाएगा। होलसेल कारोबारी भी खिलाफ दिल्ली के होलसेल मार्केट के कारोबारी भी यूपीआई ट्रांजेक्शन पर चार्ज के खिलाफ हैं। दुकानदारों ने 'नो यूपीआई' के पोस्टर लगा दिए हैं। नए चार्ज के खिलाफ प्रोटेस्ट किया गया है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष ने कहा कि ये फैसला डिजिटल इंडिया की मुहिम को बड़ा झटका साबित हो सकता है। ग्रेटर नोएडा के एक सीएनजी पंप से भी नो यूपीआई ओनली कैश के पोस्टर लगा वीडियो सामने आया है। जहां यूपीआई से पेमेंट लेने पर पेट्रोल पंप की ओर मना करते हुए सिर्फ कैश देने की अपील की गई। व्यापारियों ने कहा कि सरकार को चार्ज लगाने के बजाय UPI ट्रांजैक्शन के लिए सब्सिडी देनी चाहिए और चेतावनी दी कि अगर प्रस्तावित MDR लागू किया गया तो वे आंदोलन करेंगे।  उत्तराखंड में भी व्यापारियों का विरोध दून उद्योग व्यापार मंडल और अन्य स्थानीय व्यापारी संगठनों ने कहा कि व्यापारी पहले से ही इनकम टैक्स और GST दे रहे हैं और UPI ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त लागत उठाने को तैयार नहीं होंगे। पलटन बाजार व्यापार मंडल के अध्यक्ष पारस गुप्ता ने कहा कि व्यापारियों ने सरकार के डिजिटल ट्रांजैक्शन और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के बाद UPI पेमेंट अपनाना शुरू किया था। उन्होंने कहा, "जैसा कि सरकार शुरू से कहती आ रही है, हम पारदर्शिता लाने के लिए UPI पेमेंट स्वीकार करेंगे, ऑनलाइन काम करेंगे और ऑनलाइन पेमेंट लेंगे। लेकिन इसके बावजूद, अगर टैक्स सिर्फ हम कारोबारियों पर लगाया जाएगा और इसका नुकसान कारोबारियों को ही उठाना पड़ेगा। मैं इसका कड़ा विरोध करता हूं।" UPI ट्रांजैक्शन पर लगेगा चार्ज बता दें कि जगह-जगह से ये प्रतिक्रियाएं तब आई हैं, जब नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने मंगलवार को एक नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फ्रेमवर्क पेश किया, जिसके तहत 2,000 रुपये से ज़्यादा के UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत का MDR लगेगा, जबकि ग्राहक UPI का इस्तेमाल करके मुफ़्त में ट्रांजैक्शन करते रहेंगे। संशोधित UPI MDR फ्रेमवर्क 15 अक्टूबर, 2026 से लागू होगा और यह केवल चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा। नए फ्रेमवर्क के तहत, 2,000 रुपये से ज़्यादा के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत का MDR लगेगा, जिसमें प्रति ट्रांजैक्शन MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। 

ऑपरेशन सिंदूर के बाद 16 महीने से रनवे की मरम्मत में जुटा पाकिस्तान, अब तक अधूरा काम

लाहौर  पहलगाम हमले के बाद भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान को ऐसा चोट दिया जिससे अब तक वह उबर नहीं सका है। भारतीय वायुसेना (IAF) के जांबाजों ने इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तानी वायुसेना के सरगोधा स्थित मुसहफ एयरबेस के रनवे तो तबाह कर दिया है। इस हमले के 16 महीने बीत जाने के बाद भी आज तक मरम्मत का काम पूरा नहीं हो सका है। इसका खुलासा हाई रिजॉल्यूशन वाली सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ है। तस्वीरों से पता चलता है कि रनवे और टैक्सी-ट्रैक के इंटरसेक्शन पर नए सिरे से रीसरफेसिंग और खुदाई का काम किया जा रहा है। आपको बता दें कि सरगोधा का मुसहफ एयरबेस लाहौर से लगभग 172 किमी उत्तर-पश्चिम और अमृतसर के पास भारत-पाक सीमा से करीब 200 किमी पश्चिम में स्थित है। भारत ने पाकिस्तान के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण एयरबेस पर सीधा हमला किया था। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 12 सितंबर 2026 की वेंटोर सैटेलाइट तस्वीरों में रनवे के जंक्शन पर गहरे रंग का एक असामान्य हिस्सा देखा गया है। यह डामर से बिल्कुल अलग दिखता है। यह नई खुदाई या रीसरफेसिंग कार्य की ओर इशारा करता है। एयरबेस के उत्तर दिशा में स्थित मिसाइल हमले के पुराने गड्ढे को फिर से सबग्रेड स्तर तक खोदा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहले की गई अस्थायी मरम्मत में सतह के असमान होने, धंसने या कमजोरी जैसी समस्याएं आ गई होंगी। इसके जिसके कारण अब वहां नए सिरे से निर्माण करना पड़ रहा है। तस्वीरों में रनवे की पूरी लंबाई में चरणबद्ध तरीके से काम होता दिख रहा है। एक हिस्सा नया और समतल नजर आ रहा है, जबकि दूसरा हिस्सा अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है। सटीक हमले का असर 10 मई 2025 की उपग्रह तस्वीरों से खुलासा हुआ था कि भारतीय वायुसेना ने मुसहफ एयरबेस के मुख्य 3200 मीटर लंबे रनवे पर दो बेहद सटीक निशाने लगाए थे। इस हमले में 8-9 मीटर चौड़ा और 4-5 मीटर गहरा विशाल गड्ढा बन गया था। दूसरा हमला इससे 660 मीटर की दूरी पर किया गया था। आपको बता दें कि 10 मई 2025 को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के दस एयरबेस, रडार और जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल यूनिट्स को निशाना बनाया था। सरगोधा के मुशफ एयरबेस पर सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच हमला किया गया। वायुसेना ने कहा था कि उस दिन उसने पाकिस्तान का एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल विमान या खुफिया जानकारी इकट्ठा करने वाला विमान मार गिराया था। उसी दिन दोपहर 3:35 बजे पाकिस्तान के मिलिट्री ऑपरेशन्स के डायरेक्टर जनरल ने अपने भारतीय समकक्ष को फोन किया और सीजफायर की अपील की। ​

तेजस विमानों का बेड़ा हुआ पूरा, वायुसेना को मिली नई ताकत; स्वदेशी जेट तैयार

नई दिल्ली हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने शुक्रवार को भारतीय वायुसेना को पूरी तरह स्वदेशी 20 तेजस विमानों की डिलीवरी का अनुबंध पूरा कर लिया। अंतिम खेप में दो सीट वाले दो तेजस प्रशिक्षण विमान वायुसेना को सौंपे गए। इसके साथ ही एचएएल ने वायुसेना के लिए 70 एचटीटी-40 बेसिक प्रशिक्षण विमानों की डिलीवरी के अनुबंध की भी शुरुआत की। निजी विमानन कंपनी पवनहंस को चार ध्रुव एनजी हेलीकॉप्टर भी सौंपे गए। बेंगलुरु में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू की मौजूदगी में विमानों और हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी की गई। अधिकारियों के अनुसार, दिसंबर 2010 में रक्षा मंत्रालय और एचएएल के बीच हुए एफओसी अनुबंध के तहत 20 तेजस विमानों की आपूर्ति होनी थी। इनमें 16 एक सीट वाले लड़ाकू विमान और चार दो सीट वाले प्रशिक्षण विमान शामिल थे। पहले ही दिए जा चुके हैं 16 लड़ाकू विमान सभी 16 लड़ाकू विमानों और दो प्रशिक्षण विमानों की आपूर्ति पहले ही की जा चुकी थी। इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने कहा कि युद्ध की बदलती प्रकृति को देखते हुए स्वदेश में विकसित प्रौद्योगिकियां समय की मांग हैं। अत्याधुनिक नवाचार की आवश्यकता पर जोर देते हुए रक्षा मंत्री ने वैज्ञानिकों और इंजीनियरों से भविष्य की रक्षा जरूरतों को पूरा करने वाली प्रौद्योगिकियां विकसित करने का आग्रह किया। क्या है इन विमानों की खासियत एचटीटी-40 (हिंदुस्तान टर्बो ट्रेनर-40) स्वदेश में डिजाइन और विकसित किया गया प्रशिक्षक विमान है, जिसे भारतीय रक्षा सेवाओं की शुरुआती प्रशिक्षण जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है। एचएएल के एक बयान के अनुसार, एलसीए एफओसी प्रिशक्षु विमान एक हल्का, हर मौसम में काम करने वाला और कई तरह की भूमिकाएं निभाने वाला 4.5-जेनरेशन का विमान है, जिसे मुख्य रूप से वायुसेना की प्रशिक्षण ज़रूरतों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। बयान के अनुसार, '' इन तकनीकों ने भारत को एक उन्नत दो-सीट वाला लड़ाकू विमान क्षमता विकसित करने और उसे संचालित करने में सक्षम बनाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश में ऐसा तंत्र विकसित किया जाना चाहिए, जो असैन्य और सैन्य विमानन दोनों क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा कर सके। सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों को प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक संगठनों के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''हमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों को प्रतिद्वंद्वी के रूप में नहीं देखना चाहिए।' अत्याधुनिक नवाचार की आवश्यकता पर जोर देते हुए सिंह ने वैज्ञानिकों और अभियंताओं से भविष्य की रक्षा जरूरतों को पूरा करने वाली प्रौद्योगिकियां विकसित करने का आग्रह किया।

प्रेग्नेंसी में उल्टी से इतना डर लगा कि महिला ने लिया अबॉर्शन का फैसला, बताई पूरी कहानी

लंदन  प्रेग्नेंसी की खबर सुनकर ज्यादातर कपल्स खुश होते हैं. लंबे समय से बच्चे का इंतजार कर रहे हों तो यह पल उनके लिए और भी खास होता है. लेकिन ब्रिटेन की ब्रायोनी ट्वाइडल के लिए प्रेग्नेंट होना खुशी के बजाय डर और घबराहट लेकर आया. वजह थी उनकी उल्टी से जुड़ी ऐसी फोबिया, जिससे वह करीब 25 साल से जूझ रही थीं।  द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रायोनी को उल्टी से इतना ज्यादा डर लगता था कि किसी दूसरे व्यक्ति को उल्टी करते देखकर उन्हें पैनिक अटैक तक आ जाता था. प्रेग्नेंसी के शुरुआती दिनों में लगातार जी मिचलाने की समस्या ने उनके पुराने डर को फिर से बुरी तरह बढ़ा दिया. हालात यहां तक पहुंच गए कि उन्हें अपनी जिंदगी खत्म करने जैसे ख्याल आने लगे।  आखिरकार, प्रेग्नेंसी के आठवें हफ्ते में उन्होंने अबोर्शन कराने का फैसला किया. यह फैसला उनके और उनके पति दोनों के लिए बेहद मुश्किल था, क्योंकि वे इस बच्चे को चाहते थे. करीब दो साल बाद ब्रायोनी ने अपनी कहानी इसलिए साझा की है, ताकि ऐसी ही परेशानी से जूझ रही दूसरी महिलाएं खुद को अकेला न समझें।  बचपन से ही था उल्टी का डर ब्रायोनी बताती हैं कि उन्हें ठीक से याद नहीं कि उल्टी से डर कब शुरू हुआ. लेकिन आठ साल की उम्र की एक घटना उन्हें आज भी याद है. वह अपनी मां की कार की पिछली सीट पर बैठी थीं, तभी उनके एक दोस्त ने उनके सामने उल्टी कर दी।  इसके बाद परिवार के साथ सफर के दौरान उनके भाई को होने वाली ट्रैवल सिकनेस ने भी इस डर को और बढ़ाया. धीरे-धीरे उल्टी से बचना उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया. वह थीम पार्क जाने से बचती थीं और शराब पीने से भी परहेज करती थीं, ताकि उन्हें खुद उल्टी न हो. अगर किसी सोशल इवेंट में जाने से पहले उन्हें पता चल जाता कि वहां किसी को हाल ही में नोरोवायरस हुआ था, तो वह कार्यक्रम में जाना ही छोड़ देती थीं. ब्रायोनी को सिर्फ दूसरे लोगों के उल्टी करने से ही डर नहीं लगता था, बल्कि खुद बीमार होकर उल्टी करने का भी उन्हें बहुत डर था।  क्या है इमेटोफोबिया? उल्टी के इस असामान्य और बेहद तेज डर को इमेटोफोबिया कहा जाता है. ब्रायोनी के मुताबिक, उन्हें लंबे समय तक लगता था कि शायद वह अकेली हैं जिन्हें इस तरह का डर है।  बाद में जब उन्हें इसके बारे में पता चला तो उन्हें मालूम हुआ कि वह अकेली नहीं हैं. उनके मुताबिक, अनुमान है कि करीब 2 से 7 फीसदी लोगों को किसी न किसी स्तर पर इमेटोफोबिया हो सकता है. इनमें महिलाओं की संख्या काफी ज्यादा बताई जाती है और यह डर अक्सर बचपन के आसपास शुरू हो जाता है।  ब्रायोनी ने इस डर को काबू करने की कोशिश भी की. करीब 20 की उम्र के आखिरी वर्षों में उन्होंने NHS के जरिए CBT यानी कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी ली. थेरेपी के दौरान उन्हें धीरे-धीरे उस चीज का सामना कराया गया जिससे वह सबसे ज्यादा डरती थीं।  शुरुआत में उन्हें एक रोलरकोस्टर पर उल्टी करती लड़की का वीडियो दिखाया गया. वीडियो देखते हुए वह रोने लगीं और उन्हें पैनिक अटैक आया. लेकिन उन्होंने वही वीडियो बार-बार देखा और धीरे-धीरे उनका डर कम होने लगा. इसके बाद उन्हें एक कार में बैठकर उल्टी जैसी दिखने वाली चीज के साथ अपने डर का सामना करने की एक्सरसाइज भी कराई गई।  जनवरी 2024 में शादी के करीब दो साल बाद ब्रायोनी को लगा कि अब वह मानसिक रूप से बच्चे के लिए तैयार हैं. उन्होंने और उनके पति ने परिवार बढ़ाने की कोशिश शुरू की।  लेकिन इसी दौरान उनकी जिंदगी में कई परेशानियां भी आईं. मार्च में उन्हें पता चला कि उनके पिता को आंत का कैंसर है और उनकी दादी को ब्रेस्ट कैंसर है।  इसी दौरान उनके पति एक वीकेंड पर दोस्तों के साथ बाहर गए हुए थे और ब्रायोनी को नोरोवायरस हो गया. वह परिवार के दूसरे लोगों को संक्रमित नहीं करना चाहती थीं, इसलिए अकेले ही बीमारी से जूझने की कोशिश करती रहीं. लेकिन करीब 24 घंटे बाद उन्होंने अपने पति से घर लौटने को कहा।  बचपन के बाद पहली बार उन्हें इतनी ज्यादा उल्टी हुई कि वह खुद को रोक नहीं पाईं. करीब पांच बार उन्हें उल्टी हुई. लेकिन इस बार उन्हें कुछ अलग महसूस हो रहा था. उल्टी और मितली की समस्या जैसे खत्म ही नहीं हो रही थी. तभी उन्हें पता चला कि उनका पीरियड करीब दो हफ्ते लेट है. वह प्रेग्नेंट थीं।  ब्रायोनी ने जैसे ही परिवार को प्रेग्नेंसी की खबर दी, सभी बहुत खुश हुए. परिवार पहले ही कई मुश्किलों से गुजर रहा था और ब्रायोनी चाहती थीं कि यह खबर सबके लिए खुशी लेकर आए. लेकिन उनके मन में कुछ और ही चल रहा था।  उन्हें डर था कि प्रेग्नेंसी के साथ होने वाली मॉर्निंग सिकनेस कहीं उनके पुराने इमेटोफोबिया को फिर से न जगा दे. उन्होंने लगातार जी मिचलाने से बचने के लिए रात के दो बजे तक बैगल्स और अंगूर खाने जैसी चीजें भी आजमाईं. उल्टी भले ही नहीं हो रही थी, लेकिन लगातार तेज मितली उन्हें परेशान कर रही थी।  प्रेग्नेंसी के सातवें हफ्ते में उनकी हालत इतनी खराब हो गई कि वह डॉक्टर के पास पहुंचीं. वह मदद चाहती थीं, लेकिन उनके मुताबिक उन्हें उस समय एंटी-सिकनेस दवा नहीं दी गई और अदरक आजमाने की सलाह दी गई. ब्रायोनी के लिए यह काफी निराशाजनक था।  लगातार डर, मितली और नींद की कमी ने उनकी मानसिक हालत को और खराब कर दिया. ब्रायोनी बताती हैं कि उन्हें लगने लगा था कि वह अब आगे नहीं चल पाएंगी. उनके पति ने भी महसूस किया कि उनकी हालत गंभीर होती जा रही है. उन्होंने क्राइसिस हेल्पलाइन से संपर्क किया, लेकिन उन्हें लगा कि वहां मौजूद लोग इमेटोफोबिया और उनकी स्थिति की गंभीरता को समझ नहीं पा रहे थे।  तभी उनके पति ने उनसे कहा कि उन्हें इस प्रेग्नेंसी को जारी रखने के लिए खुद को मजबूर करने की जरूरत नहीं है. उनका कहना था कि ब्रायोनी की सुरक्षा सबसे पहले है. अबोर्शन का विकल्प सामने रखना बच्चे को लेकर कोई दबाव नहीं था, बल्कि उनकी … Read more

ईरान में फिर शुरू हुआ परमाणु सेंटर का निर्माण, इजरायली हमले के बाद तीसरी बार हो रही मरम्मत

तेहरान  ईरान के पारचिन सैन्य परिसर में स्थित तालेगान-2 लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय केंद्र रहा है. पश्चिमी खुफिया एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, यह जगह ईरान के पुराने अमाड परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी हुई थी. वहां उच्च विस्फोटक परीक्षण किए जाने के आरोप लगे थे, जो परमाणु हथियार के डिजाइन से संबंधित हो सकते थे।  ईरान हमेशा से इन आरोपों से इनकार करता आया है. कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है. इस स्थल की भूमिगत कक्ष और संरचनाएं विशेषज्ञों के लिए संदेह का विषय बनी रहीं. पारचिन परिसर स्वयं सैन्य गतिविधियों का बड़ा केंद्र माना जाता है, इसलिए यहां कोई भी गतिविधि तुरंत नजर में आ जाती है।  अक्टूबर 2024 और मार्च 2026 में इजरायली हमलों ने तालेगान-2 स्थल को भारी नुकसान पहुंचाया. इन हमलों में ऊपर की संरचनाएं नष्ट हो गईं और भूमिगत कक्ष में छेद हो गए. यह पहली बार नहीं था जब यह जगह निशाने पर आई. विशेषज्ञों के अनुसार यह विनाश और फिर से निर्माण का तीसरा चक्र है।  हर बार हमले के बाद ईरान ने स्थल को फिर से खड़ा करने की कोशिश की है. मार्च 2026 के हमले के बाद जून में मरम्मत का काम शुरू हुआ. सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ईरान अब सिर्फ मरम्मत नहीं कर रहा, बल्कि अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी जोड़ रहा है।   इनमें विस्फोट से बचाव के लिए विशेष सुरक्षा परतें, कंक्रीट के एप्रन और छेदों पर ढक्कन जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं. ये कदम दर्शाते हैं कि ईरान इस स्थल को लंबे समय तक चालू रखना चाहता है और भविष्य के संभावित हमलों से बचाने की तैयारी कर रहा है।  फिर से निर्माण की तेजी और सुरक्षा उपायों का महत्व जून से शुरू हुए मरम्मत कार्य में तेजी देखी जा रही है. भूमिगत कक्ष के क्षतिग्रस्त हिस्सों को ढकने और मजबूत करने का काम चल रहा है. कंक्रीट की परतें और सुरक्षात्मक ढांचे जोड़ने से यह साफ है कि ईरान सिर्फ पुरानी स्थिति बहाल नहीं कर रहा, बल्कि स्थल को और मजबूत बना रहा है।  इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी जैसे संगठनों ने इस पैटर्न को गहरी चिंता का विषय बताया है. उनका कहना है कि बार-बार विनाश के बावजूद स्थल को फिर से खड़ा करना सामान्य सैन्य गतिविधि से ज्यादा गंभीर संकेत दे सकता है. हालांकि, सैटेलाइट तस्वीरों से यह तय नहीं किया जा सकता कि वर्तमान काम किसी परमाणु संबंधित गतिविधि से जुड़ा है या नहीं. केवल संरचनात्मक बदलाव ही नजर आ रहे हैं. ईरान का पक्ष है कि ये सब सामान्य रक्षात्मक मरम्मत हैं और उसके परमाणु प्रयास शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए हैं।  यह घटना ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से चली आ रही बहसों को फिर से ताजा कर देती है. आईएईए लगातार ईरान से ज्यादा पारदर्शिता की मांग करता रहा है. पश्चिमी देश और इजरायल मानते हैं कि अतीत में उच्च विस्फोटक परीक्षणों का मकसद परमाणु हथियार की क्षमता विकसित करना था।  ईरान इन आरोपों को राजनीतिक दबाव बताता है. बार-बार हमले और पुनर्निर्माण का सिलसिला क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है. अगर यह स्थल वाकई किसी संवेदनशील गतिविधि के लिए इस्तेमाल होता रहा हो, तो उसकी बहाली से परमाणु अप्रसार के प्रयासों पर असर पड़ सकता है. दूसरी तरफ, अगर यह सिर्फ सैन्य विस्फोटक परीक्षण स्थल है, तो भी इसकी सुरक्षा बढ़ाया जाना ईरान की रक्षात्मक रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।   वैश्विक स्तर पर यह घटना तेल बाजार, क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक वार्ताओं को प्रभावित कर सकती है. संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य देश आईएईए की रिपोर्टों पर नजर रखे हुए हैं. ईरान अगर अंतरराष्ट्रीय निगरानी बढ़ाने को तैयार नहीं होता, तो प्रतिबंधों या अन्य दबाव बढ़ने की आशंका बनी रहती है. साथ ही, बार-बार होने वाले हमले मध्य पूर्व में संघर्ष को नया रूप भी दे सकते हैं।  आगे की निगरानी तालेगान-2 स्थल का तेजी से पुनर्निर्माण ईरान की दृढ़ता को दिखाता है कि वह बाहरी हमलों के बावजूद अपनी सैन्य सुविधाओं को बनाए रखना चाहता है. सुरक्षा उपायों का विस्तार इस बात का संकेत है कि भविष्य के खतरों को लेकर तैयारी की जा रही है. विशेषज्ञों की चिंता जायज है क्योंकि इतिहास में यह जगह संदेह के घेरे में रही है. फिर भी, वर्तमान तस्वीरों से परमाणु गतिविधि की पुष्टि नहीं होती।  आने वाले महीनों में सैटेलाइट निगरानी, आईएईए की जांच और कूटनीतिक विकास तय करेंगे कि यह पुनर्निर्माण कितना सामान्य है या कितना चिंताजनक. फिलहाल यह घटना ईरान-इजरायल तनाव और परमाणु मुद्दे की जटिलता को एक बार फिर रेखांकित करती है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सतर्क रहकर तथ्यों पर आधारित प्रतिक्रिया देनी होगी ताकि तनाव और न बढ़े। 

PM Kisan 24th Installment: ₹2,000 पाने के लिए अभी निपटा लें ये 3 जरूरी काम

 नई दिल्ली आप भी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं? अगर चाहते हैं कि ₹2,000 की ये किस्त बिना किसी रुकावट के आपके खाते में पहुंचे, तो सिर्फ तारीख का इंतजार न करें. इसके लिए अभी कुछ जरूरी चीजें चेक कर लें. ई-केवाईसी (e-KYC), जमीन का सत्यापन और आधार से बैंक अकाउंट की लिंकिंग में कोई कमी रह गई तो किस्त अटक सकती है।  प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की किस्तें आम तौर पर करीब चार महीने के अंतराल पर जारी की जाती हैं. 23वीं किस्त 20 जून 2026 को जारी की गई थी. ऐसे में अगली यानी 24वीं किस्त अक्टूबर में जारी होने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि, अभी सरकार की ओर से 24वीं किस्त जारी करने की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है।  इसलिए किसानों को आधिकारिक तारीख का इंतजार करने के साथ-साथ अपने रिकॉर्ड भी चेक कर लेने चाहिए. अगर योजना से जुड़ी जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं है, तो किस्त के भुगतान में परेशानी हो सकती है।  पहला काम: ई-केवाईसी जरूर करा लें अगर आपने अभी तक ई-केवाईसी नहीं कराई है, तो इसे जल्द पूरा कर लें. पीएम किसान योजना के लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी जरूरी है. ई-केवाईसी पूरी नहीं होने पर किस्त का भुगतान अटक सकता है. पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप के जरिए ई-केवाईसी की स्थिति चेक कर सकते हैं. अगर आपको ऑनलाइन प्रक्रिया में परेशानी हो रही है, वे नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) की मदद भी ले सकते हैं।  दूसरा काम: लैंड वेरिफिकेशन चेक करें किस्त के लिए जमीन से जुड़े रिकॉर्ड का सही होना भी जरूरी है. पीएम किसान के तहत लाभ उन्हीं किसान परिवारों को मिलता है जिनके नाम खेती योग्य जमीन का रिकॉर्ड दर्ज है. इसलिए किसान यह जांच लें कि योजना में दर्ज जमीन की जानकारी सही है या नहीं और जमीन का सत्यापन पूरा हुआ है या नहीं।  अगर जमीन के रिकॉर्ड में नाम, खाता या दूसरी जानकारी को लेकर कोई गड़बड़ी है, तो उसे संबंधित राज्य के राजस्व विभाग या संबंधित अधिकारी के जरिए ठीक कराया जा सकता है. जमीन से जुड़ी जानकारी का सत्यापन पूरा नहीं होने पर भी किस्त प्रभावित हो सकती है।  तीसरा काम: आधार-बैंक खाता लिंकिंग पीएम किसान की रकम सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है. इसके लिए बैंक खाते का आधार से लिंक यानी आधार सीडेड होना जरूरी है. अगर आपका बैंक खाता आधार से लिंक नहीं है, तो किस्त के भुगतान में दिक्कत आ सकती है. किसान अपने बैंक में जाकर आधार लिंकिंग की स्थिति चेक करा सकते हैं. साथ ही यह भी देख लें कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना में दर्ज बैंक खाते की जानकारी सही है या नहीं. खाते में नाम या दूसरे विवरण में गलती होने पर भी भुगतान अटक सकता है।  पैसा नहीं आया तो ऐसे चेक करें स्टेटस अगर 24वीं किस्त जारी होने के बाद आपके खाते में पैसा नहीं आता है, तो सबसे पहले पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर अपना लाभार्थी स्टेटस चेक करें. वहां भुगतान की स्थिति और बैंक से जुड़ी जानकारी देखी जा सकती है. किसान यह भी जांच सकते हैं कि उनका नाम बेनिफिशियरी लिस्ट (लाभार्थी सूची) में है या नहीं. अगर कोई जानकारी गलत है या जरूरी प्रक्रिया अधूरी है, तो उसे संबंधित विभाग के जरिए ठीक कराया जा सकता है।  क्या है प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि? प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना यानी PM-KISAN फरवरी 2019 में शुरू की गई थी. इस योजना का उद्देश्य पात्र किसान परिवारों को खेती से जुड़ी जरूरतों के लिए आर्थिक मदद देना है. शुरुआत में यह योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए थी, लेकिन बाद में इसका दायरा बढ़ाकर खेती योग्य जमीन रखने वाले सभी पात्र किसान परिवारों तक किया गया. इसके तहत पात्र किसान परिवार को सालाना ₹6,000 दिए जाते हैं. यह रकम ₹2,000 की तीन बराबर किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है. इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान परिवार के नाम खेती योग्य जमीन का रिकॉर्ड होना चाहिए और लाभार्थी का सत्यापन राज्य या केंद्रशासित प्रदेश की ओर से किया जाता है।  कुछ श्रेणियों के लोगों को योजना से बाहर रखा गया है, जैसे कुछ संवैधानिक पदों पर रहने वाले व्यक्ति, सरकारी कर्मचारी और आयकर देने वाले लोग. लाभ लेने के लिए आधार से जुड़ी जानकारी, बैंक खाता, जमीन का रिकॉर्ड और ई-केवाईसी जैसी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं. 20 जून 2026 को जारी 23वीं किस्त में 9.44 करोड़ से ज्यादा किसानों को करीब ₹18,880 करोड़ की राशि दी गई थी. योजना की शुरुआत से 23 किस्तों में अब तक ₹4.46 लाख करोड़ से ज्यादा की रकम किसानों को दी जा चुकी है।   

पैरासिटामोल 500mg और टेल्मिसार्टन 40mg क्वालिटी टेस्ट में फेल, अस्पतालों ने रोका इस्तेमाल

नागपुर नागपुर में महाराष्ट्र फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की क्वालिटी टेस्ट में दो आम इस्तेमाल होने वाली दवाएं पैरासिटामोल और ब्लड प्रेशर की एक दवा फेल हो गई हैं. इसके बाद सरकारी अस्पतालों ने इनको मरीजों को देने पर रोक लगा दी है औरस्टॉक को वापस मंगा लिया है. ये दवाएं गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) और इंदिरा गांधी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल को सप्लाई की गई थीं. इस घटना ने दवाओं की क्वालिटी और उन्हें लेने से पहले टैबलेट की जांच करने की अहमियत को लेकर चिंता बढ़ा दी है।  रिपोर्ट्स के मुताबिक, FDA ने रूटीन टेस्टिंग के दौरान सैंपल लिए थे. टेस्ट के नतीजों के बाद प्रभावित स्टॉक का डिस्ट्रीब्यूशन रोकने और उसे वापस मंगाने के निर्देश दिए गए. इन दवाओं में पैरासिटामोल 500 mg और टेल्मिसार्टन 40 mg शामिल थीं, जिसका इस्तेमाल हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है. रिपोर्ट्स में बताया गया है कि दवाएं इंदौर की एक दवा कंपनी ने बनाई थी।  1.25 लाख पैरासिटामोल टैबलेट वापस मंगवा ली गईं TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल को FDA से सूचना मिलने के बाद लगभग 1.25 लाख पैरासिटामोल टैबलेट वापस मंगवा ली गईं. ये टैबलेट जुलाई में सप्लाई की गई थीं और टेस्ट के नतीजे मिलने के बाद अस्पताल ने इनका मरीजों को देने पर रोक लगा दी है. जिन पैरासिटामोल टैबलेट की बात हो रही है, उन्हें 'Parasev 500' के नाम से बेचा गया था और वे बैच नंबर PTTC-108 की थीं. सैंपल के ज़रूरी क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर खरा न उतरने के बाद, एहतियात के तौर पर बाकी स्टॉक वापस मंगा लिया गया. दोनों अस्पतालों ने कुल मिलाकर एक लाख से ज्यादा टैबलेट खरीदी थीं, जबकि अकेले GMCH के पास वापस मंगाए जाने के समय प्रभावित स्टॉक में से लगभग 25,000 टैबलेट मौजूद थीं।  दूसरी दवा टेल्मिसार्टन 40 mg थी, जो आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए दी जाती है. प्रभावित बैच की पहचान CHPLT 416 के तौर पर की गई. टैबलेट पर दिखने वाले दागों के अलावा, यह दवा डिसोल्यूशन टेस्ट में भी फेल हो गई. यह जरूरी है क्योंकि दवा के सही ढंग से काम करने के लिए टैबलेट का अपना एक्टिव इंग्रीडिएंट ठीक से रिलीज करना ज़रूरी होता है. अस्पतालों को निर्देश दिया गया कि वे इसका वितरण रोक दें और वार्ड व फार्मेसी से उपलब्ध स्टॉक वापस मंगा लें.इन दवाओं को खराब क्लालिटी का बताया गया है, हालांकि ये नकली नहीं है।  घटिया और नकली दवा में होता है अंतर घटिया दवा एक असली दवा होती है जो जरूरी क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर खरी नहीं उतरती. इसमें दवा के रूप-रंग, असर, शुद्धता, घुलने की क्षमता, स्टेबिलिटी या क्वालिटी से जुड़े दूसरे पैरामीटर्स में कमी हो सकती है,  वहीं, नकली दवा में गलत इंग्रीडिएंट हो सकता है, एक्टिव इंग्रीडिएंट बहुत कम या बिल्कुल नहीं हो सकता है, या फिर उसकी पहचान या बनाने वाली कंपनी के बारे में गलत जानकारी हो सकती है। 

₹2,000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर लगेगा 0.4% MDR, लेकिन ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा पैसा

नई दिल्ली यूपीआई चार्ज को लेकर सियासी घमासान है. सरकार साफ कर चुकी है कि यूपीआई फीस का बोझ आम लोगों पर नहीं पड़ेगा. बावजूद इसके गफलत की स्थिति है. लोगों को डर सता रहा है कि आखिरकार इसका असर आम आदमी पर ही पड़ेगा. यूपीआई फीस भले ही मर्चेंट पर लागू हो, मगर यूजर्स से ही इसकी वसूली होगी. यही कारण है कि यूपीआई चार्ज को लेकर सरकार के इस फैसले पर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है. बहरहाल, 2000 रुपए से अधिक के कमर्शियल यूपीआई पेमेंट पर चार्ज का असर आम जनता पर न पड़े, इसके लिए सरकार पूरी कोशिश में लगी है. सूत्रों की मानें तो सरकार पेमेंट एग्रीगेटर्स के साथ बातचीत कर रही है ताकि यूपीआई फीस का बोझ आम ग्राहकों पर न पड़े।  दरअसल, नया नियम यह है कि अब ₹2000 से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर 0.4% MDR लागू होगा. यह नियम 15 अक्टूबर से लागू होगा. सरकार यह साफ कर चुकी है कि यह शुल्क ग्राहकों से नहीं, कारोबारियों से लिया जाएगा. यानी आम यूजर्स के लिए पेमेंट सिस्टम पहले की तरह ही होगा. उसके ऊपर फीस का कोई बोझ नहीं पड़ने वाला है. मगर अब क्योंकि लोगों में डर है कि कंपनियां इस चार्ज की वसूली आम यूजर्स से कर सकती है. इसलिए सरकार अब यह सुनिश्चित करने के लिए निगरानी व्यवस्था बना रही है कि दुकानदार या कारोबारी यूपीआई फीस का यह बोझ ग्राहकों पर न डालें।  केंद्र सरकार ने क्या कदम उठाया सरकारी सूत्रों ने  बताया कि केंद्र सरकार ने यूपीआई इकोसिस्टम में पेमेंट एग्रीगेटर्स और दूसरे स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत शुरू कर दी है. इसका मकसद यह पक्का करना है कि हाल ही में लागू किए गए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का बोझ ग्राहकों पर न डाला जाए।  मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार कर रही सरकार समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्रालय एक मॉनिटरिंग सिस्टम भी तैयार कर रहा है ताकि यह देखा जा सके कि मर्चेंट इस फीस का बोझ ग्राहकों पर न डालें. ऐसी चिंताएं हैं कि नए चार्ज से बड़े पेमेंट के लिए यूपीआई इस्तेमाल करने वाले लोगों की लागत बढ़ सकती है।  15 अक्टूबर से बदल रहा यूपीआई पेमेंट नियम दरअसल, नए नियमों के तहत 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई ट्रांजेक्शन पर 0.4% एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा. यह फीस मर्चेंट यानी कारोबारी देंगे, ग्राहक नहीं. 75,000 रुपये या उससे अधिक के ट्रांजेक्शन के लिए यह चार्ज ज़्यादा से ज़्यादा 300 रुपये होगा।  वित्त मंत्रालय का क्या अनुमान इस बीच वित्त मंत्रालय का अनुमान है कि 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर 15 अक्टूबर से 0.4 प्रतिशत ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) लागू होने से नकदी लेनदेन नहीं बढ़ेगा. सूत्रों ने कहा कि इस फैसले से यूपीआई लेनदेन की कुल मात्रा का सिर्फ चार प्रतिशत प्रभावित होगा और इससे यूपीआई के इस्तेमाल में कमी आने की संभावना नहीं है. उन्होंने कहा कि रुपे डेबिट कार्ड से होने वाले लेनदेन किसी भी राशि के लिए पूरी तरह निशुल्क हैं। 

EPFO का बड़ा बदलाव, ₹25,000 हुई EPF वेज लिमिट; 51 लाख कर्मचारियों को फायदा, जानें 5 फायदे

 नई दिल्ली हर महीने सैलरी से होने वाला PF डिडक्शन कई कर्मचारियों को हाथ में आने वाले वेतन से अनचाही कटौती जैसा लगता है. लेकिन यही रकम समय के साथ रिटायरमेंट की बड़ी बचत बन सकती है. अब ऐसे कर्मचारियों की संख्या बढ़ने वाली है, जिन्हें नौकरी के साथ PF, पेंशन और इंश्योरेंस जैसी सामाजिक सुरक्षा का फायदा मिल सकेगा।  सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) के दायरे को बढ़ाने के लिए वेज लिमिट में बड़ा बदलाव किया है. इसका असर खास तौर पर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा, जिनकी मंथली सैलरी अब तक तय सीमा से ज्यादा होने की वजह से अनिवार्य EPF कवरेज से बाहर रह जाती थी।  ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 हुई वेज लिमिट कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत एम्प्लॉयी प्रोविडेंट फंड (EPF) की वेज लिमिट (Wage Limit) को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 मंथली कर दिया गया है. यानी अब ₹15,000 से ₹25,000 तक की मंथली सैलरी वाले सभी कर्मचारियों को EPF के दायरे में लाया जा सकेगा. सरकार को उम्मीद है कि इस बदलाव से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी EPFO के दायरे में आएंगे. इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में नौकरीपेशा लोगों को औपचारिक सोशल सिक्योरिटी सिस्टम से जुड़ने का मौका मिलेगा. अब सवाल है कि एक कर्मचारी के लिए इसका सीधा असर क्या होगा? कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के इस फैसले से कर्मचारियों को होने वाले 5 बड़े फायदे समझिए… 1. रिटायरमेंट के लिए सेविंग्स फंड एम्प्लॉयी प्रोविडेंट फंड का सबसे बड़ा फायदा लंबी अवधि की बचत है. कर्मचारी की नौकरी के दौरान हर महीने PF में योगदान जमा होता रहता है. इस रकम पर सरकार की तरफ से 8.25% सालाना की दर से ब्याज भी मिलता है. हालांकि, ब्याज की दर फिक्स नहीं है और सरकार समय-समय पर इसे बढ़ा या घटा सकती है. इसके बावजूद EPF पर मिलने वाली ब्याज बैंकों की एफडी से अच्छी ही रहती है. आपकी सैलरी से हर महीने कटने वाली पीएफ की रकम लंबे समय तक जमा रहने पर एक बड़ा रिटायरमेंट कॉर्पस तैयार होता है. वेज लिमिट बढ़ने से अब ज्यादा कर्मचारी इस सिस्टम में शामिल हो सकेंगे. खास तौर पर वे कर्मचारी जो पहले ₹15,000 की सीमा से ऊपर वेतन होने के कारण अनिवार्य EPF कवरेज से बाहर रह जाते थे, उन्हें नियमित रिटायरमेंट सेविंग का रास्ता मिल सकता है।  2. EPS के जरिए पेंशन का फायदा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़ने का दूसरा बड़ा फायदा कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) से जुड़ा है. पात्र कर्मचारियों को नियमों के मुताबिक रिटायरमेंट के बाद पेंशन का लाभ मिल सकता है. EPS सिर्फ रिटायरमेंट तक सीमित नहीं है. तय नियमों और पात्रता के तहत इसमें दिव्यांगता पेंशन और परिवार के लिए पेंशन जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं. यानी EPFO की सदस्यता नौकरी खत्म होने के बाद भी वित्तीय सुरक्षा का एक आधार दे सकती है।  3. नौकरी के साथ इंश्योरेंस कवर भी EPFO की सदस्यता के साथ एम्प्लॉई डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (EDLI) का कवर भी जुड़ा होता है. यह कर्मचारी को जीवन बीमा से जुड़ी वित्तीय सुरक्षा देता है. इसका मतलब है कि EPF में शामिल होने वाला कर्मचारी सिर्फ अपनी रिटायरमेंट सेविंग नहीं बनाता, बल्कि कुछ परिस्थितियों में उसके परिवार के लिए भी आर्थिक सुरक्षा का इंतजाम होता है. वेज लिमिट बढ़ने से यह सुरक्षा ज्यादा कर्मचारियों तक पहुंच सकती है।  4. सोशल सिक्योरिटी सिस्टम का दायरा बढ़ेगा वेज लिमिट बढ़ने का एक बड़ा असर यह है कि ज्यादा कर्मचारी औपचारिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन सकेंगे. पहले ₹15,000 से ज्यादा वेतन के साथ नई नौकरी शुरू करने वाले कई कर्मचारी अनिवार्य EPF कवरेज से बाहर रह जाते थे. अब ₹15,000 से ₹25,000 की वेज सीमा के बीच आने वाले कर्मचारियों के लिए कवरेज का दायरा बढ़ेगा. इससे नौकरीपेशा लोगों को बचत, पेंशन और इंश्योरेंस जैसी सुविधाओं के एक ही सिस्टम से जुड़ने का मौका मिलेगा।  5. भविष्य की वित्तीय सुरक्षा और मजबूत होगी इस बदलाव का फायदा सिर्फ आज की सैलरी या PF कटौती तक सीमित नहीं है. EPF, EPS और EDLI मिलकर कर्मचारी को लंबी अवधि में कई तरह की वित्तीय सुरक्षा देते हैं. नियमित PF योगदान से रिटायरमेंट के लिए फंड बनता है, EPS के जरिए पात्रता के अनुसार पेंशन का रास्ता खुलता है और EDLI के जरिए इंश्योरेंस कवर मिलता है. यानी एक कर्मचारी के लिए यह व्यवस्था नौकरी के दौरान बचत और भविष्य की सुरक्षा, दोनों का आधार बन सकती है।  किन कर्मचारियों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर? अगर आपकी मंथली सैलरी ₹15,000 से ₹25,000 के बीच है और आप अब तक वेज लिमिट की वजह से अनिवार्य EPF कवरेज से बाहर थे, तो यह बदलाव आपके लिए खास मायने रखता है. नई व्यवस्था के तहत ऐसे सभी कर्मचारी अब EPFO के दायरे में आ जाएंगे. सरकार को उम्मीद है कि वेज लिमिट बढ़ने से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी सोशल सिक्योरिटी सिस्टम से जुड़ेंगे. EPFO ने भी कहा है कि बदलती सैलरी और कर्मचारी ढांचे को देखते हुए कवरेज का दायरा बढ़ाना जरूरी है. सीधी बात यह है कि वेज लिमिट बढ़ने से सिर्फ EPF में शामिल होने वाले कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ेगी, बल्कि ज्यादा नौकरीपेशा लोगों को रिटायरमेंट बचत, पेंशन और इंश्योरेंस जैसी सुरक्षा का फायदा मिल सकता है। 

दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का ऐलान, प्रयागराज समेत इन स्टेशनों पर रुकेगी; जानें रूट-टाइमिंग

नई दिल्ली भारतीय रेलवे दूसरी स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस शुरू करने की योजना बना रही है। यह हाई स्पीड ट्रेन दिल्ली और वाराणसी के बीच चलेगी जो कि प्रयागराज और कानपुर से होकर गुजरेगी। इस बात की संभावना है कि दीवाली से पहले इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई जा सकती है। इसका ट्रायल इसी महीने शुरू होने की संभावना है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेन वाराणसी कैंट से रात 9:20 बजे चलेगी और रात 10:45 बजे प्रयागराज पहुंचेगी। यह कानपुर सेंट्रल से रात 12:35 बजे पहुंचेगी और सुबह 5 बजे नई दिल्ली। वापसी की यात्रा में यह नई दिल्ली से रात 9:20 बजे चलेगी और सुबह 5 बजे वाराणसी पहुंचेगी। इस ट्रेन की स्पीड 130 किमी/घंटा से 160 किमी/घंटा के बीच होने की उम्मीद है। इसकी वजह से दिल्ली, प्रयागराज और वाराणसी के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। इस नई चमचमाती ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे। वहीं, इसमें 823 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। इसमें 11 AC थ्री-टियर कोच, चार AC टू-टियर कोच और एक फर्स्ट AC कोच शामिल होंगे। ट्रेन में वंदे भारत सर्विस वाली आधुनिक सुविधाएं होंगी। आपको बता दें कि हावड़ा-कामाख्या रूट के बाद भारतीय रेलवे की योजना के अनुसार यह दूसरी स्लीपर वंदे भारत सर्विस होगी। रेलवे बोर्ड ने अभी तक ट्रेन नंबर, किराया और सर्विस शुरू होने की तारीख की घोषणा नहीं की है। पुतिन ने वंदे भारत के स्लीपर ट्रेनसेट का मॉडल देखा आपको बता दें कि वंदे भारत एक्सप्रेस भारतीय रेल का एक सफल मॉडल है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत मंडपम में आयोजित 'इन्नोप्रोम' प्रदर्शनी में रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के स्टॉल का दौरा किया और वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट का मॉडल देखा। आरवीएनएल और रूसी कंपनी ट्रांसमैशहोल्डिंग (टीएमएच) ने मिलकर 'किनेट रेलवे सॉल्यूशंस लिमिटेड' नाम का एक भारत-रूस संयुक्त उपक्रम बनाया है। यह कंपनी महाराष्ट्र में अपनी मराठवाड़ा फैक्टरी में 120 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट बनाएगी, जिनमें से हर एक में 16 डिब्बे होंगे। भविष्य में 160 किमी की रफ्तार से चलेगी ट्रेन शुरुआती चरण में इस हाई तकनीक ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 130 किमी प्रति घंटा तय की गई है। अमर उजाला की खबर के अनुसार, मिशन रफ्तार प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद भविष्य में इसकी रफ्तार 160 किमी प्रति घंटा की जाएगी। इस आधुनिक ट्रेन का ठहराव सफर के दौरान प्रयागराज के अलावा कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर भी होगा। ट्रेन की प्राइमरी मेंटेनेंस की जिम्मेदारी उत्तर रेलवे संभालेगा। वाराणसी और नई दिल्ली से रात 9.20 बजे चले ट्रेन वाराणसी और नई दिल्ली से इसे रात 9:20 बजे चलाया जा सकता है। दोनों ही स्टेशनों पर पहुंचने का समय भी सुबह पांच बजे प्रस्तावित है। 16 कोच की ट्रेन में 823 यात्री करेंगे सफर यह ट्रेन 16 कोच की होगी, जिसमें में 823 यात्री कर सफर सकेंगे। इसमें एसी थर्ड टियर के 11, एसी सेकंड टियर के चार और फर्स्ट एसी का एक कोच रहेगा। क्षेत्रीय रेल उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति (जेडआरयूसीसी) एनसीआर के सदस्य सांसद प्रवीण पटेल का कहना है इससे यात्रियों का सफर और ज्यादा आरामदायक हो जाएगा।