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Pakistan Terror Attack: पुलिस चौकी पर आतंकियों का हमला, 9 सुरक्षाकर्मी मारे गए

इस्लामाबाद आतंकियों को पनाह देने वाले पाकिस्तान से बड़ी खबर सामने आई है। यहां के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में बड़ा आतंकी हमला हुआ है। बताया जा रहा है कि जियारत जिले में सोमवार देर रात आतंकवादियों ने एक पुलिस चौकी पर हमला बोल दिया और ताबड़तोड़ गोलीबारी करने लगे। इस हमले में दो एसएचओ समेत 9 पुलिसकर्मी मारे गए। बताया जा रहा है कि आतंकवादियों ने पांच जवानों को अगवा भी कर लिया है। वहीं, हमले के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाला और संयुक्त अभियान शुरू किया, जिसमें 15 आतंकवादी मारे गए। घटना की पुष्टि करते हुए जियारत के पुलिस अधीक्षक अब्दुल कुदूस ने बताया कि हमलावरों ने मांगी फेज-तीन क्षेत्र में स्थित पुलिस चौकी को निशाना बनाया। रात भर चली गोलीबारी बेहद भीषण रही, जिसमें दोनों तरफ से भारी मात्रा में हथियारों का इस्तेमाल हुआ। मारे गए पुलिस अधिकारियों में मांगी थाने के एसएचओ मोहम्मद हुसैन, कोवास थाने के एसएचओ सोहबत खान और एंटी-टेररिस्ट फोर्स के इंचार्ज हेड कांस्टेबल सैफुल्लाह शामिल हैं। मारे गए जवानों के शवों को जियारत जिला मुख्यालय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। हमले में टीटीपी का हाथ? बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार शाहिद रिंद ने बताया कि मांगी इलाके में आतंकवादियों के खिलाफ चलाया गया क्लियरेंस ऑपरेशन पूरा कर लिया गया है। इस अभियान में फ्रंटियर कॉर्प्स, बलूचिस्तान पुलिस, काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट, स्पेशल ऑपरेशंस विंग और एंटी-टेररिज्म फोर्स ने भाग लिया। शाहिद रिंद ने आगे बताया कि अभियान में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के 15 आतंकवादी मारे गए। रिंद ने कहा कि आतंकवादियों के खिलाफ इंटेलिजेंस आधारित अभियान और तेज किए जाएंगे। वहीं, अगवा किए गए पांच पुलिसकर्मियों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है। पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने की घटना की निंदा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी हमले की निंदा की और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। शरीफ ने कहा कि हम बलूचिस्तान की शांति को नुकसान पहुंचाने की किसी को इजाजत नहीं देंगे। शांति के दुश्मनों को पूरी तरह समाप्त किए बिना हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। वहीं, गृहमंत्री मोहसिन नकवी ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि ऐसे कायराना हमले न तो शांति भंग कर सकते हैं और न ही आतंकवाद के खिलाफ देश के दृढ़ संकल्प को कमजोर कर सकते हैं। इलाके में तनाव, सड़कें जाम हमले की खबर फैलते ही जियारत और आसपास के इलाकों में गुस्सा भड़क उठा। स्थानीय कबीलों, ट्रांसपोर्टरों, व्यापारियों और मारे गए पुलिसकर्मियों के परिजनों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बलूचिस्तान को पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा से जोड़ने वाले प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों को पूरी तरह जाम कर दिया। इस कारण सैकड़ों यात्री बसें और माल ढोने वाले वाहन सड़कों पर फंस गए। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं। जियारत के डिप्टी कमिश्नर अब्दुल कुदूस अचकजई ने कहा कि लापता जवानों की तलाश के लिए विशेष सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है और इलाके में अतिरिक्त सैन्य व पुलिस बल भेजे गए हैं।

18 साल बाद अहमदाबाद ब्लास्ट पीड़ितों को न्याय, 38 दोषियों की फांसी की सजा पर मुहर

अहमदाबाद साल 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के निर्णय को बरकरार रखा है. हाईकोर्ट ने 38 दोषियों को दी गई फांसी की सजा और 11 अन्य दोषियों को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को कायम रखा है. इसके साथ ही दोषियों की ओर से दायर सभी अपीलों को खारिज कर दिया गया. अदालत ने विस्फोटों में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।  यह फैसला गुजरात हाईकोर्ट की विशेष पीठ ने सुनाया. मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने इस केस की सुनवाई के लिए विशेष बेंच का गठन किया था. मार्च 2025 से इस मामले की नियमित आधार पर सुनवाई चल रही थी. राज्य सरकार की ओर से फांसी की सजा की पुष्टि करने की याचिका और दोषियों द्वारा सजा के खिलाफ दाखिल अपीलों पर संयुक्त सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है।  दरअसल, अहमदाबाद की विशेष अदालत ने 18 फरवरी 2022 को इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 38 दोषियों को फांसी और 11 अन्य दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. भारतीय कानून के अनुसार किसी भी निचली अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा तब तक लागू नहीं की जा सकती, जब तक संबंधित हाईकोर्ट उसकी पुष्टि न कर दे. इसी कानूनी प्रक्रिया के तहत यह मामला गुजरात हाईकोर्ट में विचाराधीन था।  इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश भी दिया है. धमाकों में मारे गए 56 लोगों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये और 200 से ज्यादा घायलों को 1-1 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। यह पूरा मामला 26 जुलाई 2008 का है, जब अहमदाबाद में एक के बाद एक करीब 70 मिनट के भीतर कुल 21 बम धमाके हुए थे. इन धमाकों में 56 लोगों की जान चली गई थी और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. बम को साइकिल पर रखे टिफिन बॉक्स में छिपाया गया था।  20 धमाके, 59 लोगों की गई थी जान 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में महज 49 मिनट के अंदर एक के बाद एक 20 धमाके हुए थे। इस सीरियल ब्लास्ट में 59 लोगों की जान चली गई थी। हमलावरों ने नरोदा, बापू नगर, सरखेज और हटकेश्वर जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों को निशाना बनाया था। अस्पतालों, बसों, सार्वजनिक स्थानों और बाजारों में बम लगाए थे। 38 आरोपियों को फांसी, 11 को उम्रकैद इस केस के 14 साल बाद 2022 में सेशन कोर्ट ने 38 आरोपियों को फांसी और 11 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अदालत ने इस मामले को सबसे दुर्लभ बताया और कहा कि मौत की सजा देना उचित है। साथ ही, मारे गए और घायल लोगों के परिवारों को मुआवजा देने का भी आदेश दिया। यह पहला मामला है, जब किसी भी केस में एक साथ 38 आरोपियों को दोषी मानते हुए अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। राज्य सरकार ने भी दायर की थी याचिका इसके बाद, सभी दोषियों ने निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ गुजरात हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। वहीं, राज्य सरकार ने भी हाई कोर्ट के समक्ष मौत की सजा के लिए याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट क्यों पहुंचा मामला? कानून के मुताबिक, किसी भी अपराधी को फांसी देने के लिए हाई कोर्ट की मंजूरी मिलना जरूरी होता है, इसीलिए सजा पाए दोषियों ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की। दोषियों के वकीलों ने पुलिस की जांच, सबूतों और कबूलनामों पर सवाल उठाए। हमलावरों ने शहर की बसों, बाजारों और अस्पताल तक को निशाना बनाया था. धमाकों के बाद अहमदाबाद और सूरत से भी बम बरामद हुए थे. आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन ने इन धमाकों की जिम्मेदारी ली थी. बताया जाता है कि यह धमाके साल 2002 में हुए गुजरात दंगों का बदला लेने के लिए किए गए थे।  इस मामले में सरकार ने 78 लोगों को आरोपी बनाकर 35 अलग-अलग केस दर्ज किए थे, जिनकी सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट बनाई गई थी. करीब 14 साल की लंबी सुनवाई के बाद फरवरी 2022 में स्पेशल कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था।  उस समय 49 दोषियों में से 38 को फांसी और 11 को उम्रकैद की सजा दी गई थी, जबकि सबूतों की कमी के चलते 28 लोगों को बरी कर दिया गया था. भारत के न्यायिक इतिहास में यह पहला मौका था जब एक साथ 38 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई थी।  इस मामले में स्पेशल कोर्ट में 1150 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे और 8 फरवरी 2022 को 6700 से ज्यादा पन्नों का फैसला सुनाया गया था. स्पेशल कोर्ट के इस फैसले को दोषियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर मंगलवार को सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है।     

सिया गोयल पहले से थी शादीशुदा! WhatsApp चैट से हुआ बड़ा खुलासा, जांच में नया मोड़

पुणे पुणे के लोहगढ़ किले से धक्का देकर केतन अग्रवाल की कथित हत्या के मामले में एक बेहद चौंकाने वाला मोड़ आया है। पुलिस जांच और डिजिटल सबूतों से खुलासा हुआ है कि मामले की मुख्य आरोपी और केतन की मंगेतर सिया गोयल ने सह-आरोपी चेतन चौधरी से गुपचुप तरीके से शादी रचा ली थी। पुलिस का मानना है कि यह शादी सगाई से महीनों पहले ही हो चुकी थी। परिवार से छिपाकर की थी 'सीक्रेट मैरिज' न्यूज18 मराठी की एक रिपोर्ट के हवाले से सामने आया है कि जांचकर्ताओं का मानना है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी ने करीब चार महीने पहले अपने-अपने परिवारों को बिना बताए गुपचुप शादी कर ली थी। इस बात का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन से रिकवर की गई वॉट्सऐप चैट्स को खंगाला। डिजिटल सबूतों से खुली साजिश की पोल जांचकर्ताओं ने मामले की तह तक जाने के लिए आरोपियों के पिछले 6 से 7 महीने के कॉल रिकॉर्ड्स, लोकेशन डेटा, वॉट्सऐप चैट और इंटरनेट सर्च हिस्ट्री की गहन जांच की है। पुलिस का दावा है कि इस डिजिटल एक्टिविटी से साफ होता है कि दोनों ने अपनी शादी की बात परिवारों से छिपाकर रखी थी। पुलिस को संदेह है कि सीक्रेट मैरिज के बाद ही केतन अग्रवाल को रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रची गई। 14 जून को फेल हो गया था हत्या का पहला प्लान पुलिस के मुताबिक, केतन अग्रवाल की हत्या की पहली कोशिश 14 जून को की गई थी, लेकिन वह नाकाम रही। जांचकर्ताओं का दावा है कि सिया ऐन मौके पर डर गई और पीछे हट गई, जिसकी वजह से वह प्लान फेल हो गया था। पुलिस का कहना है कि इसके बाद दोनों आरोपियों के बीच कई मैसेज का आदान-प्रदान हुआ, जिसमें आगे की साजिश पर चर्चा की गई। वॉट्सऐप चैट में लिखा- 'तुम भी आ जाओ, मिलकर धक्का दे देंगे' पुलिस के हाथ एक ऐसी अहम वॉट्सऐप चैट लगी है, जिसने इस हत्याकांड की पूरी कहानी साफ कर दी है। रिकवर किए गए एक मैसेज में कथित तौर पर सिया ने चेतन से कहा कि वह अकेले इस काम को अंजाम देने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है, इसलिए उसने चेतन को अपने साथ आने के लिए कहा। पुणे मर्डर केस जांचकर्ताओं के मुताबिक, सिया ने मैसेज में लिखा था: "मुझमें इसे करने की हिम्मत नहीं है, तुम भी आ जाओ- हम दोनों मिलकर उसे चट्टान से धक्का दे देंगे।" पुलिस का दावा है कि इस खौफनाक बातचीत के बाद 18 जून को कथित तौर पर दोनों ने मिलकर केतन अग्रवाल की हत्या कर दी। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जांच लगातार जारी है और यह पूरा केस कोर्ट के विचाराधीन है।

मनसा देवी मंदिर में चढ़ावे की व्यवस्था होगी पारदर्शी, पुजारियों के लिए बिना जेब वाले कुर्ते अनिवार्य

 हरिद्वार उत्तराखंड के प्रसिद्ध मां मनसा देवी मंदिर में चढ़ावे की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए मंदिर ट्रस्ट ने बड़ा फैसला लिया है. अब मंदिर में सेवा देने वाले सभी पुजारी बिना जेब वाले कुर्ते पहनेंगे. इसके साथ ही मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे की निगरानी के लिए सात सदस्यीय पर्यवेक्षण समिति का भी गठन किया गया है. मंदिर प्रशासन का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य श्रद्धालुओं के विश्वास को और मजबूत करना तथा चढ़ावे के प्रबंधन में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।  यह निर्णय हाल के दिनों में अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर सामने आए विवाद के बाद लिया गया है. हालांकि मंदिर ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था भविष्य में किसी भी तरह की अनियमितता की आशंका को खत्म करने और जवाबदेही बढ़ाने के लिए लागू की जा रही है. नई व्यवस्था के तहत पुजारियों के कुर्तों में किसी प्रकार की जेब नहीं होगी. वहीं, सात सदस्यीय समिति मंदिर में प्राप्त होने वाले दान और चढ़ावे की नियमित निगरानी करेगी. यदि जांच के दौरान किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. समिति के सभी सदस्यों को इस जिम्मेदारी के निर्वहन के लिए शपथ भी दिलाई गई है।  मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने मंदिर परिसर में इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था सर्वोपरि है. इसलिए चढ़ावे के प्रबंधन को पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह और व्यवस्थित बनाने के लिए यह पहल की गई है। 

इंडोनेशिया ने PM मोदी को दिया सर्वोच्च नागरिक सम्मान, विदेशों में मिले अवॉर्ड्स की पूरी लिस्ट

जाकर्ता  पीएम मोदी को एक और देश का सर्वोच्च सम्मान मिला है. जी हां, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच सम्मान से नवाजा गया है. इस बाबत इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने आज यानी मंगलवार को घोषणा की. उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान ‘बिंतांग आदिपूर्णा ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया’ मेडल ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया है।  यह सम्मान पीएम मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान दिया गया. इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने बताया कि यह सम्मान प्रधानमंत्री मोदी द्वारा द्विपक्षीय संबंधों और सहयोग को मजबूत करने में दिए गए योगदान के लिए दिया जा रहा है।  भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदेगा इंडोनेशिया भारत-इंडोनेशिया के बीच मंगलवार को जकार्ता में 20 समझौते हुए। सबसे अहम ब्रह्मोस डील रही। इसको लेकर दोनों देशों के बीच पिछले 4 महीने से बातचीत चल रही थी। भारत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल की अतिरिक्त यूनिट देगा। इसी के साथ फिलीपींस, वियतनाम के बाद इंडोनेशिया ब्रह्मोस खरीदने वाला तीसरा देश बन गया है। इंडोनेशिया ने ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल भारतीय 'अस्त्र' एयर-टू-एयर मिसाइल खरीदने का भी फैसला किया है। वहीं भारत इंडोनेशिया के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) विकसित करने में भी मदद करेगा। ये समझौते पीएम मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच द्विपक्षीय बैठक के दौरान हुए। मंगलवार को पीएम मोदी के इंडोनेशिया दौरे का दूसरा दिन है। राष्ट्रपति प्रबोवो ने उन्हें इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान दिया। पीएम शाम को जकार्ता में भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे। वे बुधवार को इंडोनेशिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर प्रम्बानन जाएंगे। यह मंदिर 1000 साल से ज्यादा पुराना है। किसे मिलता है इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान? गौरतलब है कि ‘बिंतांग आदिपूर्णा ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया’ मेडल ऑफ ऑनर इंडोनेशिया गणराज्य का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है. यह सम्मान उन व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने इंडोनेशिया गणराज्य की एकता, निरंतरता और समृद्धि के लिए असाधारण योगदान दिया हो।  पीएम मोदी इंडोनेशिया यात्रा पर हैं यह सम्मान उन अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों की सूची में एक और नाम है, जो पीएम मोदी को विदेशी सरकारों से मिले हैं. ये पुरस्कार भारत के राजनयिक संबंधों और रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करने के उनके प्रयासों के लिए दिए गए हैं. पीएम मोदी सोमवार को अपनी तीन देशों की यात्रा के पहले चरण में इंडोनेशिया पहुंचे. इस यात्रा का उद्देश्य भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’, ‘महासागर विजन’ और एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी इंडो-पैसिफिक के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को और मजबूत करना है।  मोदी बोले- दुनिया में उथल-पुथल, हम शांति के समर्थन में     दुनिया में मची उथल-पुथल के इस दौर में भारत का मानना ​​है कि बातचीत और कूटनीति की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा अहम हो गई है। फिलिस्तीन के मुद्दे पर, हम 'टू-स्टेट सॉल्यूशन' (दो-देश समाधान) और लंबे समय तक शांति का समर्थन करते हैं।     हमारे दोनों देशों के लिए एक सुनहरा दौर आने वाला है। हमारे इतिहास में एक जैसी संस्कृति, वर्तमान में आपसी भरोसा और भविष्य में साझा समृद्धि है। मुझे पूरा भरोसा है कि हम मिलकर 'इंडोनेशिया एमास' (स्वर्ण इंडोनेशिया) और एक विकसित भारत के सपने को साकार करेंगे।     लोकतांत्रिक मूल्य और विविधता में एकता, भारत और इंडोनेशिया दोनों की साझा ताकत रही है। हम दोनों देशों के चुनाव आयोगों के बीच MoU के जरिए अपने लोकतांत्रिक सहयोग को और मजबूत करने जा रहे हैं।     वैश्विक मुद्दों पर भी भारत और इंडोनेशिया के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। इंडो-पैसिफिक को लेकर भी हमारे नजरिए में तालमेल है। भारत ने हमेशा आसियान (ASEAN) की केंद्रीय भूमिका को खास अहमियत दी है। पीएम मोदी ने कहा– तकनीक के दौर में सप्लाई चेन मजबूत करना बेहद जरूरी है। भारत और इंडोनेशिया ने क्रिटिकल मिनरल्स और स्टील सेक्टर की सप्लाई चेन को मजबूत करने पर अहम समझौता किया है। साथ ही स्टेनलेस स्टील और रेयर अर्थ मैग्नेट के क्षेत्र में दोनों देशों की कंपनियां नई साझेदारी करेंगी। भारत का UPI जल्द ही इंडोनेशिया के पेमेंट सिस्टम से जुड़ेगा। इससे दोनों देशों के बीच कारोबार करना और यात्रा करना आसान होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि वे बुधवार को राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ योग्याकार्ता स्थित प्रांबानन मंदिर जाएंगे। एक हजार साल से अधिक पुराना यह मंदिर भारत और इंडोनेशिया की साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। मोदी बोले- इंडोनेशिया से सम्मान मिला, यहां की सरकार का शुक्रिया मोदी ने द्विपक्षीय मीटिंग के बाद कहा, आज सुबह मुझे बहुत प्यार और सम्मान के साथ इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान करोड़ों भारतीयों का है। यह इंडोनेशिया के लोगों की भावनाओं और हमारे दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, गहरे संबंधों को दर्शाता है। मैं राष्ट्रपति प्रबोवो, इंडोनेशिया सरकार और यहां के लोगों का दिल से धन्यवाद करता हूं।" हाल के साल में, भारत और इंडोनेशिया के संबंधों में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और गहराई आई है। 2018 में शुरू हुई हमारी 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' अब नई ऊंचाइयों को छू रही है। हम विकास, सुरक्षा, तकनीक, संस्कृति और शिक्षा जैसे सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं।"  

होर्मुज में फिर बढ़ा तनाव, दो व्यापारिक जहाजों पर मिसाइल हमला; वैश्विक शिपिंग पर मंडराया खतरा

नई दिल्ली ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने मंगलवार तड़के होर्मुज के पास दो व्यापारिक जहाजों पर मिसाइलें दागी हैं. यह जानकारी अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी है. इस हमले से अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने की बातचीत पर असर पड़ने की आशंका है।  यह हमला ऐसे समय हुआ है जब ईरान में लोग पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का शोक मना रहे हैं. खामेनेई की मौत ईरान युद्ध की शुरुआत में हुई थी।  रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर पिछले कुछ समय से इस इलाके में जहाजों को धमकी दे रहा था. यह पैरामिलिट्री फोर्स बातचीत की कोशिशों को कमजोर करने में जुटा है. गार्ड कोर ने जहाजों को चेतावनी दी थी कि वे उस रास्ते से न गुजरें जिसे अमेरिकी सेना ने ओमान के तट के पास सुरक्षित घोषित किया है।  मंगलवार का हमला इसी चेतावनी के बाद हुआ है और इससे इलाके में तनाव और बढ़ गया है. इस बीच यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस यानी यूकेएमटीओ ने भी एक घटना की जानकारी दी है।  UKMTO ने बताया है कि टैंकर ओमान के लिमाह के पास दक्षिण की ओर जा रहा था, तभी उसके बाईं ओर (पोर्ट साइड) टक्कर हुई, जिससे तुरंत ही आग लग गई। हालांकि इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ और ना ही पर्यावरण को कोई नुकसान पहुंचा है। अधिकारी फिलहाल इस घटना की जांच कर रहे हैं। ईरान ने किया हमला: अमेरिका अमेरिका ने हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार माना है। एक्सियोस अनुसार, दो अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ईरान की IRGC ने सोमवार रात होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों पर दो मिसाइलें दागीं। एक ऑयल टैंकर और एक कमर्शियल जहाज इसकी चपेट में आया। दोनों जहाजों को नुकसान पहुंचा लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। US एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, 2024 में यहां से हर दिन तकरीबन 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल गुजरा, जो दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का पांचवां हिस्सा है। यह जलमार्ग हालिया अमेरिका-ईरान संघर्ष का केंद्र बना हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से यातायात को नियंत्रित करना शुरू किया था। इसके बाद से यहां तनाव चल रहा है। हालांकि अमेरिका-ईरान के समझौते में होर्मुज को खोलने की बात कही गई है लेकिन इस समुद्री गलियारे में चीजें सामान्य होती नहीं दिख रही हैं। यूकेएमटीओ के मुताबिक ओमान के लीमाह से करीब आठ नॉटिकल मील पूर्व में एक घटना हुई है. एक टैंकर जहाज दक्षिण दिशा में जा रहा था तभी उसे किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल ने बाईं ओर से टक्कर मारी. इस टक्कर से जहाज में आग लग गई. राहत की बात यह है कि इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. संबंधित अधिकारी इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं।  यूकेएमटीओ ने सभी जहाजों को सावधानी से यात्रा करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत देने की सलाह दी है।  इन दोनों घटनाओं ने होर्मुज में सुरक्षा को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है. यह रास्ता दुनिया के लिए बेहद अहम माना जाता है क्योंकि यहां से बड़ी मात्रा में तेल का व्यापार होता है। 

Nirav Modi Extradition: भगोड़े हीरा कारोबारी को बड़ा झटका, आखिरी कानूनी लड़ाई हारने के बाद भारत लाने का रास्ता साफ

नई दिल्ली भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भारत लाने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है. दस्तावेजों के मुताबिक नीरव मोदी ने अपनी आखिरी कानूनी कोशिश भी हार दी है. उन्होंने यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स में जो अपील दायर की थी, उससे भी राहत नहीं मिली. सूत्रों के मुताबिक, अब नीरव मोदी के पास कोई कानूनी विकल्प नहीं बचा है. ऐसे में अब ब्रिटेन की सरकार उनके प्रत्यर्पण की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर भारत भेज सकती है।  मिल रही जानकारी के मुताबिक नीरव मोदी ने अप्रैल 2026 में यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स का दरवाजा खटखटाया था. इससे पहले ब्रिटेन की अदालतें उनकी सभी अपीलें खारिज कर चुकी थीं. अदालत ने माना था कि भारत की ओर से जेल की व्यवस्था और उनके साथ व्यवहार को लेकर दिए गए आश्वासन पर्याप्त हैं. सूत्रों का कहना है कि अब प्रत्यर्पण में कोई कानूनी बाधा नहीं बची है और ब्रिटेन की एजेंसियों ने नीरव मोदी को भारत के हवाले करने की प्रशासनिक प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।  आपको बता दें कि नीरव मोदी मार्च, 2019 से लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में बंद हैं. उन्हें सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन और ईडी ने पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भारत लाने की मांग की है. ऐसे में कूटनीतिक सूत्रों का दावा है कि अब नीरव मोदी का भारत प्रत्यर्पण कभी भी हो सकता है।  किन-किन मामलों में फंसा है नीरव मोदी? भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी भारत में तीन अलग-अलग मामलों में वांछित है. इनमें पंजाब नेशनल बैंक घोटाले की सीबीआई जांच, मनी लॉन्ड्रिंग का ईडी मामला और सबूतों- गवाहों से छेड़छाड़ का मामला शामिल है. अप्रैल, 2021 में ब्रिटेन की तत्कालीन गृह सचिव प्रीति पटेल ने उसके भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी थी. इसके बाद नीरव मोदी की सभी जमानत याचिकाएं और कानूनी अपीलें खारिज हो चुकी हैं. मार्च 2026 में उसने भारत भेजे जाने के खिलाफ आखिरी अपील भी हार दी. इसके बाद उसने फ्रांस स्थित यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जहां से भी उसे राहत नहीं मिली है और अब उसके प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो चुका है। 

WhatsApp यूजरनेम फीचर पर सरकार की चिंता, ऑनलाइन ठगी का खतरा बताया

नई दिल्ली इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY) ने वॉट्सऐप (WhatsApp) के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर (Username Feature) पर जवाब देने के लिए मेटा (Meta) को तीन दिन की अतिरिक्त मोहलत दे दी है। भारत में कंपनी के प्लेटफॉर्म्स को लेकर बढ़ती नियामकीय जांच के बीच अब मेटा (Meta) को अपना जवाब 9 जुलाई तक सौंपना होगा। दरअसल, केंद्र सरकार ने मेटा (Meta) के स्वामित्व वाले वॉट्सऐप के अलावा टेलीग्राम (Telegram) और सिग्नल (Signal) को भी नोटिस जारी कर उनके यूजरनेम फीचर (Username Feature) और धोखाधड़ी रोकने के लिए अपनाए गए सुरक्षा उपायों की जानकारी मांगी थी। सरकारी अधिकारी वॉट्सऐप के प्रस्तावित यूजरनेम सिस्टम में लागू किए जाने वाले प्रतिबंधों, वेरिफिकेशन (Verification) प्रक्रिया और यूजर्स के लिए उपलब्ध रिपोर्टिंग मैकेनिज्म (Reporting Mechanism) की भी समीक्षा कर रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की ओर से जारी नोटिस नए डिजिटल पहचान फीचर्स (Digital Identity Features) से जुड़े संभावित जोखिमों की व्यापक समीक्षा का हिस्सा हैं। सरकार विशेष रूप से इस बात का आकलन कर रही है कि कहीं ऐसे फीचर्स मौजूदा मोबाइल नंबर आधारित पहचान प्रणाली (Phone Number-based Authentication) को कमजोर तो नहीं करेंगे। क्या है पूरा मामला?  दरअसल, पूरा बवाल वॉट्सऐप में यूजरनेम फीचर को लेकर है. मेटा का इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप पर यूजरनेम बेस्ट अकाउंट को रोलआउट किया जाना है. इसके लिए कंपनी ने यूजरनेम रिजर्व करने का ऑप्शन दिया. कंपनी ने बताया कि वह इस साल के अंत तक यूजरनेम फीचर को रोल आउट कर देगी।  क्या है वॉट्सएप का यूजरनेम फीचर मेटा के मालिकाना हक वाले प्लेटफॉर्म वॉट्सएप ने हाल ही में एक नए यूजरनेम फीचर की घोषणा की थी। इस फीचर की मदद से यूजर्स अपना फोन नंबर शेयर किए बिना भी दूसरों से बातचीत कर सकेंगे। यह यूजर्स के लिए एक ऑप्शनल यूनिक आइडेंटिफायर (पहचान) की तरह काम करेगा। यह यूजरनेम हमेशा '@' सिंबल से शुरू होगा, जैसे- @Name123। इसका इस्तेमाल करके दूसरे लोग आपको मैसेज या कॉल कर सकेंगे और आपका फोन नंबर पूरी तरह से प्राइवेट रहेगा। यह यूजरनेम आपके प्रोफाइल पर दिखने वाले डिस्प्ले नेम से अलग होगा। डिस्प्ले नेम एक जैसा हो सकता है, लेकिन यूजरनेम हर अकाउंट के लिए बिल्कुल यूनिक होगा। एप में ऐसे काम करेगा यह नया सिस्टम  वॉट्सएप के लेटेस्ट वर्जन में यूजर्स 'सेटिंग्स' में जाकर, फिर 'अकाउंट' और उसके बाद 'यूजरनेम' पर क्लिक करके अपनी पसंद का यूजरनेम रिजर्व कर सकते हैं। जिन लोगों के पास आपका फोन नंबर सेव नहीं है, उन्हें ग्रुप चैट, डायरेक्ट मैसेज या कॉल के दौरान डिफॉल्ट रूप से आपका यूजरनेम ही दिखाई देगा। मेटा के मुताबिक, अगर आपकी पसंद का यूजरनेम पहले से किसी ने ले रखा है, तो आपको दूसरा नाम चुनना होगा। इसके अलावा, कुछ खास यूजरनेम बिजनेस, सरकारों या पब्लिक फिगर्स के लिए सुरक्षित रखे गए हैं, जिन्हें कोई दूसरा व्यक्ति क्लेम नहीं कर सकता है। मेटा को सरकार ने भेजा है नोटिस  इस फीचर को लेकर सरकार ने बुधवार को मेटा को नोटिस भी भेजा था. साथ ही इसे रोलाउट करने के निर्देश दिए थे. इसके अलावा 3 दिन के भीतर  जवाब देने को कंपनी को कहा गया था. सरकार को आशंका है कि यूजरनेम बेस्ड फीचर को लेकर सरकार ने साइबर ठगी के खतरे की आशंका जाहिर की. यूजरनेम से लोग कन्फ्यूज हो सकते हैं. साथ ही फर्जी नाम का इस्तेमाल कर ठगी जैसी वारदात को अंजाम दे सकते हैं और लोगों को चुना लगा सकते हैं।  मुश्किल हो सकती है यूजर बेस्ड अकाउंट की पहचान यूजरनेम बेस्ड अकाउंट की पहचान मुश्किल हो सकती है. साथ ही मिलते जुलते यूजरनेम का इस्तेमाल कर लोग साइबर ठगी कर नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसके अलावा फर्जी पहचान होने का खतरा रहेगा. साइबर ठग इस फीचर का फायदा उठा सकते हैं. इसमें असली नकली का भेद मिट जाएगा. ब्रांड और सेलिब्रिटी की नकल होने का खतरा भी बढ़ जाएगा. स्पैम मैसेज में बढ़ोतरी हो जाएगी. ईडी जैसी जांच एजेंसी के लिए एक चुनौती हो सकती है. सोशल इंजीनियरिंग अटैक का भी खतरा बढ़ेगा।  सरकार को इस फीचर से क्या परेशानी है? मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि वॉट्सएप का यह नया फीचर धोखाधड़ी, ऑनलाइन स्कैम और रूप बदलकर ठगी करने की घटनाओं को बढ़ावा दे सकता है। सरकार का मानना है कि फीचर इनेबल होने के बाद पहली बार संपर्क करने वाले व्यक्ति को यूजर का फोन नंबर नहीं दिखेगा, जिससे अपराधियों की पहचान करना मुश्किल हो जाएगा। मंत्रालय ने 1 जुलाई को भेजे अपने नोटिस में साफ कहा है कि इस फीचर के आने से ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट स्कैम और इम्पर्सनेशन हमलों के मामले काफी बढ़ सकते हैं। इससे गलत इरादे रखने वाले अपराधियों को पीड़ितों को ढूंढने और उन्हें मैसेज भेजने में आसानी हो जाएगी। इसके अलावा, इस फीचर से पहचान चुराना भी आसान हो जाएगा। अपराधी आम लोगों, सरकारी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और सरकारी एजेंसियों से मिलते-जुलते यूजरनेम रखकर लोगों को आसानी से अपना शिकार बना सकते हैं। यूजरनेम vs डिस्प्ले नेम डिस्प्ले नेम को बदला जा सकता है और वह कई लोगों का एक जैसा हो सकता है, लेकिन यूजरनेम हमेशा यूनिक (यूनिवर्सल) होगा। सुरक्षित यूजरनेम सरकार, बिजनेस और वीआईपी लोगों के नाम वाले यूजरनेम को कोई भी आम यूजर बुक नहीं कर पाएगा, ताकि धोखाधड़ी रोकी जा सके। इधर, मेटा की मैसेजिंग कंपनी व्हाट्सएप ने कहा है कि सेलिब्रिटी, और पब्लिस स्पेस में पॉपुलर लोगों के यूजरनेम को रिजर्व रखा जाएगा. यह एक ऑप्शनल सर्विस है।   

7 देशों ने मिलाया हाथ, Crude Oil Production पर लिया बड़ा फैसला; पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ेगा असर?

 नई दिल्ली मिडिल ईस्ट टेंशन लगभग खत्म हो गई है, दुनिया की तेल जरूरतों के बड़े हिस्से की आवाजाही और सप्लाई के लिए अहम होर्मुज स्ट्रेट से तेल-गैस से लदे जहाज निकलने लगे. इन सबके बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है. सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरते हुए 72 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई।  Crude Oil Price Crash और Hormuz पर हालात सामान्य होने के बीच अब तक एक-दूसरे से लड़ते झगड़ते नजर आने वाले ओपेक+ (OPEC+) देशों ने एक साथ मिलकर बड़ा फैसला लिया है, जो दुनिया के लिए राहत भरा है।  Crude की कीमतों में गिरावट जारी इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी है.  खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड की कीमत और भी ज्यादा फिसल गई. Brent Crude Oil Price 1 फीसदी के आसपास फिसलकर 71 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा था. तो वहीं WTI Crude Oil Price फिसलकर 68 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. इसके अलावा मर्बन क्रूड ऑयल की कीमत मामूली बढ़त के साथ 66 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रही थी। संकट टला, अब आई ये राहत भरी खबर अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर बात बनने और बैठकों को लेकर पॉजिटिव संकेतों के बीच पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश से लेकर ब्रिटेन तक, दुनिया के तमाम देशों में तेल-गैस का संकट खत्म होता नजर आया है. क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट ओपन है और यहां से तेल-गैस के टैंकरों की आवाजाही जारी है. यानी Oil-Gas सप्लाई चेन फिर से सुचारू नजर आ रही है. हालांकि, ये युद्ध पूर्व स्तर से अभी भी नीचे बनी हुई है, लेकिन इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव और गिरावट के रूप में दिखने भी लगा है।  इस बीच एक और राहत भरी खबर ये आई है कि ओपेक+ (OPEC+) देशों ने भी तेल को लेकर बड़ा फैसला किया है. इसमें शामिल सात देशों ने एक साथ मिलकर अगले महीने से तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया है. रिपोर्ट के मुताबिक,  सऊदी अरब और रूस की अगुवाई में प्रति दिन 1.88 लाख बैरल एक्स्ट्रा क्रू़ड ऑयल प्रोड्यूश करने को मंजूरी दी गई है. मतलब अब आने वाले समय में तेल पर्याप्त तेल बाजार में सप्लाई होगा. लगातार 5वें महीने इस बढ़ोतरी को लेकर सहमति बनी है।  एक साथ आए ये 7 ओपेक+ देश गौरतलब है कि बीते कुछ समय में ओपेक+ देशों के बीच उत्पादन कोटा, बाजार हिस्सेदारी और तेल की कीमतों को लेकर बड़े मतभेद देखने को मिल रहे थे. कुछ देश क्रूड प्राइस को लेकर प्रोडक्शन सीमित रखने पर जोर दे रहे थे, तो कुछ उत्पादन में इजाफा कर इनकम बढ़ाने पर फोकस कर रहे थे. लेकिन इन मतभेदों के बाद अब ओपेक+ में शामिल देश सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने एकमत से उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया है।  OPEC+ देशों (तेल उत्पादक) देशों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि, 'बाजार की स्थितियों पर नजर रखना और उनका आकलन करना जारी रखा जाएगा, इसके अलावा तेल बाजार की स्थिरता को बनाए रखने के अपने निरंतर प्रयासों के तहत सतर्क दृष्टिकोण अपनाने को महत्व दिया जाएगा।  क्या भारत में सस्ता होगा Petrol-Diesel?  अगर तेल उत्पादक देशों की सहमति के मुताबिक, अगले महीने से प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल क्रूज प्रोडक्शन बढ़या जाता है, तो निश्चित तौर पर कच्चे तेल की कीमतों पर और दबाव बढ़ेगा और इनमें गिरावट देखने को मिल सकती है. Crude Price Fall से इसके आयात पर निर्भर भारत जैसे देशों राहत मिलेगी, क्योंकि OMCs की लागत कम होगी और इससे पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद भी बढ़ेगी।   हालांकि, ये तुरंत सस्ता होगा कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि देश में Petrol-Diesel कितना और कब सस्ता होगा, ये कई कारकों पर निर्भर करेगा. भारत में फ्यूल प्राइस कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बदलाव के साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये में उतार-चढ़ाव, रिफाइनिंग कॉस्ट, ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट और राज्यों में लागू VAT पर भी निर्भर करते हैं. देखने वाली बात ये होगी कि प्रोडक्शन बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कितने समय के लिए नीचे बनी रहती हैं।  पेट्रोलियम मंत्री ने दिए थे ये संकेत  मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच सरकारी तेल कंपनियों को हो रहे भारी भरकम नुकसान के बीच भारत में करीब चार साल बाद अचानक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार चार बार में 7 रुपये प्रति लीटर के आसपास का इजाफा किया गया था. अब होर्मुज ओपन होने और कच्चा तेल सस्ता होने के बीच पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने बीते हफ्ते कीमतों में कटौती के संबंध में तस्वीर साफ की थी।  Hardeep Singh Puri ने कहा था कि निजी क्षेत्र की कंपनियों और OMCs के पास जो शेयर हैं, वे दो से ढाई महीने पहले खरीदे गए थे, जब कच्चे तेल की कीमतें अधिक थीं, अगर कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. इस बारे में अटकलें लगाना मेरे लिए उचित नहीं होगा।   

समंदर में बढ़ी भारत की ताकत! INS Mahendragiri की एंट्री से दुश्मनों की बढ़ेगी मुश्किलें

मुंबई  भारतीय नौसेना 11 जुलाई 2026 को अपनी समुद्री ताकत में एक और बड़ा इजाफा करने जा रही है. इस दिन विशाखापट्टनम में स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट INS महेंद्रगिरि को औपचारिक रूप से नौसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा. इसके साथ ही जुलाई के दौरान पनडुब्बी रोधी युद्ध (एंटी-सबमरीन वॉरफेयर) वॉरशिप आईएनएस मालवन का भी कमीशनिंग कार्यक्रम प्रस्तावित है. इन दोनों युद्धपोतों के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र और व्यापक इंडो-पैसिफिक में भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता को नई मजबूती मिलेगी. स्‍टील्‍थ होने की वजह से INS महेंद्रगिरि रडार को धता बताते हुए मिशन को अंजाम देने में सक्षम है।  INS महेंद्रगिरि प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित छठी स्टील्थ फ्रिगेट है. इस प्रोजेक्‍ट के युद्धपोतों को भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है, जबकि इसका निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने किया है. यह युद्धपोत अत्याधुनिक स्टील्थ तकनीक से लैस है, जिससे दुश्मन के रडार पर इसकी पहचान करना बेहद कठिन हो जाता है. करीब 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी तकनीक और उपकरणों से निर्मित महेंद्रगिरि भारत के डिफेंस मैन्‍यूफैक्चरिंग की बढ़ती क्षमता का भी प्रतीक है. इसमें आधुनिक मिसाइल सिस्‍टम, पनडुब्बी रोधी हथियार, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और अत्याधुनिक सेंसर लगाए गए हैं. यह वॉर ऑपरेशन के अलावा समुद्री निगरानी, मैरीटाइम सिक्‍योरिटी, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR), खोज एवं बचाव (सर्च एंड रेस्क्यू) तथा अन्य बहुआयामी अभियानों को प्रभावी ढंग से अंजाम देने में सक्षम होगी।  भारतीय नौसेना के अनुसार, महेंद्रगिरि का शामिल होना देश की समुद्री युद्ध क्षमता को और मजबूत करेगा. साथ ही यह आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्वदेशी युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी माना जा रहा है. इससे रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा मिलने के साथ भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता भी मजबूत होगी. इससे पहले 21 जून 2026 को भारतीय नौसेना ने तीन स्वदेशी युद्धपोतों (आईएनएस दुनागिरि, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रय) को भी बेड़े में शामिल किया था. लगातार नए स्वदेशी युद्धपोतों के शामिल होने से स्पष्ट है कि भारतीय नौसेना अपने आधुनिकीकरण कार्यक्रम को तेज गति से आगे बढ़ा रही है।  डिफेंस एक्‍सपर्ट का मानना है कि महेंद्रगिरि और मालवन जैसे अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म भारतीय नौसेना को भविष्य की समुद्री चुनौतियों से निपटने में अधिक सक्षम बनाएंगे. साथ ही हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी और समुद्री हितों की सुरक्षा को भी नई मजबूती मिलेगी. बता दें कि इंडिन नेवी ने पिछले कुछ महीनों में अपने बेड़े में कई वॉरशिप को शामिल कर चुकी है. हिन्‍द महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों पर नकेल कसने के लिहाज से इस कदम को अहम माना जा रहा है।