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हूतियों से अमेरिका की कथित सीक्रेट डील, यमन में बढ़त ने सऊदी अरब को डाला मुश्किल में

दुबई  यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ जूझ रहे सऊदी अरब के सामने अब नई मुश्किल खड़ी होती दिख रही है. सऊदी अरब के सबसे बड़े सहयोगी अमेरिका और ईरान समर्थित हूतियों के बीच सीधे संपर्क की खबर सामने आई है. दोनों पक्षों के बीच ओमान में बातचीत हुई है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि अमेरिका और हूतियों के बीच कोई औपचारिक डील हुई है या नहीं।  मामला इसलिए अहम है क्योंकि हूतियों ने पिछले हफ्ते यमन के लाल सागर वाले इलाके में तेजी से बढ़त बनाई और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के पास कई द्वीपों पर कब्जा कर लिया. यह रास्ता सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए बेहद अहम है. इसी दौरान हूती ड्रोन और मिसाइल सऊदी शहरों और तेल से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बना रहे हैं. यहां तक कि मक्का में भी हूती ड्रोन को लेकर अलर्ट जारी हुआ।  अमेरिका-हूती के बीच ओमान में बातचीत रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के अधिकारियों और हूती प्रतिनिधियों के बीच पिछले वीकेंड ओमान की राजधानी मस्कट में मुलाकात हुई. यह बैठक ओमान की मध्यस्थता में हुई बताई गई है।  हूती प्रतिनिधिमंडल में मोहम्मद अब्दुलसलाम और अब्देलमलिक अल-अजीरी जैसे वरिष्ठ नेता शामिल थे. रिपोर्टों के मुताबिक, हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिया कि वे अमेरिकी जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे और 2025 में हुए सीजफायर का पालन करेंगे।  बताया गया है कि हूतियों ने इजरायली जहाजों को निशाना बनाने की बात कही, लेकिन सऊदी जहाजों और सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों को निशाना बनाने की धमकी जारी रखी. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कहा है कि अमेरिका हूतियों के साथ सीधे बातचीत कर रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका को लगता है कि वह हालात पर नजर बनाए हुए है।  क्या अमेरिका ने हूतियों से डील कर ली? अभी तक अमेरिका या हूतियों की तरफ से किसी औपचारिक समझौते की पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच किसी तरह की समझ बनने के संकेत जरूर मिले हैं।  पूर्व अमेरिकी राजनयिक नबील खौरी ने इसे एक तरह की अनौपचारिक समझ बताया है. उनके मुताबिक, हूती अमेरिकी प्रशासन को यह भरोसा दे सकते हैं कि लाल सागर में अमेरिकी और दूसरे अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा. खतरा मुख्य रूप से सऊदी जहाजों और सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों को रहेगा।  अमेरिका के लिए भी यह समझ अहम हो सकती है. ईरान के साथ जंग में उलझे अमेरिका के पास हूतियों के खिलाफ लंबे समय तक सैन्य अभियान चलाने के लिए पहले जैसी क्षमता नहीं है. ऐसे में लाल सागर में जहाजों की आवाजाही बनी रहे और अमेरिकी जहाज सुरक्षित रहें, तो वॉशिंगटन के लिए हूतियों से सीधी जंग से बचना अहम हो सकता है।  सऊदी अरब पर बढ़ा दबाव इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा दबाव सऊदी अरब पर पड़ता दिख रहा है. सऊदी समर्थित यमनी लड़ाके हूतियों को रोकने में अब तक कामयाब नहीं हुए हैं. सऊदी अरब के कई हवाई हमले भी हूतियों की पकड़ को निर्णायक रूप से खत्म नहीं कर पाए।  दूसरी तरफ पाकिस्तान और तुर्की ने भी यमन में सीधे लड़ाकू अभियान चलाने से इनकार किया है. अमेरिका और ब्रिटेन ने भी हूती ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की सऊदी मांग को स्वीकार नहीं किया है. यहां तक कि रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सऊदी ने खुफिया मदद के लिए इजरायल से भी संपर्क किया है।  ऐसे में अगर अमेरिका और हूतियों के बीच किसी तरह की समझ बनती है और हूती अमेरिकी या दूसरे अंतरराष्ट्रीय जहाजों को छोड़कर सऊदी जहाजों को निशाना बनाते रहते हैं, तो सऊदी अरब पर दबाव और बढ़ सकता है।  यानी फिलहाल यह औपचारिक डील है या सिर्फ एक अनौपचारिक समझ, यह साफ नहीं है. लेकिन इतना जरूर है कि हूतियों के खिलाफ जंग में सऊदी अरब को अपने सबसे बड़े सहयोगियों से अपेक्षित सैन्य मदद नहीं मिल रही है और उसे बढ़ते खतरे का सामना ज्यादा अकेले करना पड़ सकता है। 

भारतीय वायुसेना को मिलेंगे नए तेजस और HTT-40 ट्रेनर विमान, HAL का बड़ा कार्यक्रम आज

 बेंगलुरु  हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) आज 18 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में भारतीय वायु सेना (IAF) को लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस के फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस (FOC) ट्विन सीटर ट्रेनर और HTT-40 बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट सौंपे जाएंगे।  पवन हंस लिमिटेड (पीएचएल) को ध्रुव नेक्स्ट जनरेशन (एनजी) हेलिकॉप्टर दिए जाएंगे. यह कार्यक्रम रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू की उपस्थिति में होगा. वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार और HAL सीएमडी रवि के. सहित कई अधिकारी रहेंगे।  यह समारोह भारत की आत्मनिर्भरता यात्रा में एक मील का पत्थर है. यह दिखाता है कि HAL और उसके उद्योग साझेदार घरेलू एयरोस्पेस इकोसिस्टम को मजबूत करने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. देश अब सैन्य और नागरिक दोनों क्षेत्रों के लिए एडवांस प्लेटफॉर्म डिजाइन, विकसित और निर्माण करने में सक्षम हो रहा है।  क्या-क्या सौंपे जाएंगे LCA तेजस के ट्विन सीटर ट्रेनर अंतिम दो विमान हैं जो मूल 40 विमानों के ऑर्डर को पूरा करेंगे. यह ऑर्डर 2006 और 2010 में दिया गया था. इनमें 32 सिंगल सीटर और 8 ट्विन सीटर शामिल थे. अंतिम दो ट्रेनर एफओसी कॉन्फिगरेशन में हैं. इससे आईएएफ को लड़ाकू पायलटों के प्रशिक्षण के लिए स्वदेशी जेट मिलेंगे जो असली तेजस फाइटर जैसा अनुभव देते हैं।  HTT-40 बेसिक ट्रेनर भी पहली खेप में दिए जाएंगे. यह स्वदेशी टर्बोप्रॉप ट्रेनर है. इसके लिए 70 विमानों का ऑर्डर है. पहले इंजन सप्लाई में देरी हुई थी लेकिन अब डिलीवरी शुरू हो रही है. यह शुरुआती पायलट ट्रेनिंग के लिए महत्वपूर्ण है।   ध्रुव एनजी हेलिकॉप्टर नागरिक उपयोग के लिए हैं. पवन हंस ने 10 हेलिकॉप्टर ऑर्डर किए थे. इनमें से चार इस समारोह में दिए जाएंगे. ये ऑफशोर ऑपरेशन, इमरजेंसी मेडिकल सर्विस और यात्री परिवहन में काम आएंगे. इनमें आधुनिक ग्लास कॉकपिट और सुरक्षा फीचर हैं।  आत्मनिर्भरता और उद्योग का विस्तार सरकार एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर में स्वदेशी डिजाइन, विकास और निर्माण को उच्च प्राथमिकता दे रही है. इन प्लेटफॉर्मों का शामिल होना विदेशी निर्भरता कम करने की दिशा में एक और कदम है. HAL अब सिर्फ सैन्य विमान नहीं बल्कि नागरिक हेलिकॉप्टर भी बना रहा है. इससे उद्योग की क्षमता बढ़ रही है।  तेजस प्रोग्राम लंबे समय से चल रहा है. एमके-1ए के बड़े ऑर्डर भी पाइपलाइन में हैं. HTT-40 पायलट ट्रेनिंग को स्वदेशी बनाएगा. ध्रुव एनजी नागरिक उड्डयन को मजबूत करेगा. यह सब मिलकर भारत को वैश्विक एयरोस्पेस हब बनाने में मदद करेगा।  18 सितंबर का समारोह सिर्फ डिलीवरी नहीं बल्कि देश की तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन है. रक्षा और नागरिक क्षेत्रों में स्वदेशी प्लेटफॉर्म आने से आत्मनिर्भरता मजबूत होगी. HAL और उसके साझेदार आगे और ज्यादा उन्नत विमान और हेलिकॉप्टर बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं. यह घटना भारतीय रक्षा और उड्डयन उद्योग के लिए गर्व का क्षण है। 

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर तेजी से काम, तैयार हो रहे शानदार स्टेशन और सुरंगें

अहमदाबाद देश में पहली बुलेट ट्रेन (India's First Bullet Train) चलाने की तैयारी जोरों पर है. इसके लिए जो रेलवे स्टेशन तैयार किए जा रहे हैं उनपर काम रॉकेट की रफ्तार से चल रहा है. रेलवे मंत्रालय से लेकर रेल मंत्री तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब एक्स) पर इससे जुड़े अपडेट शेयर करते रहते हैं. Ministry Of Railway ने वापी-सूरत सेक्शन में बनाए जा रहे बुलेट ट्रेन रेलवे स्टेशन से लेकर इस ट्रैक पर सुरंगों के निर्माण से जुड़ा एक वीडियो शेयर किया है, जो तेजी से वायरल (Railway Viral Video) हो रहा है।  रेलवे के Video में क्या खास?  मिनिस्ट्री ऑफ रेलवे की ओर से एक एक्स पोस्ट में वापी-सूरत सेक्शन पर बुलेट ट्रेन के ट्रैक और स्टेशन पर जारी काम का वीडियो शेयर किया है. इसमें साफ देखने को मिल रहा है कि कैसे इस हाई स्पीड रेल रूट में ट्रैक पर तेज रफ्तार से बुलेट ट्रेन को चलाने के लिए पहाड़ों को काटकर सुरंगें बनाने का काम किया जा रहा है, कैसे नदी के ऊपर ब्रिज ट्रैक बिछाया जा रहा है और इलेक्ट्रिफिकेशन का काम युद्धस्तर पर जारी है. इसके साथ ही बुलेट ट्रेन के मल्टी स्टोरी स्टेशन (Multi Story Bullet Train Station) की भी झलक रेलवे ने दिखाई है. इस वीडियो के कैप्शन में रेलवे ने लिखा, 'बुलेट ट्रेन का काम बहुत तेजी के साथ चल रहा है।  सूरत-वापी बुलेट ट्रेन सेक्शन कितना लंबा?  भारत की पहली बुलेट ट्रेन अगले साल संभावित 15 अगस्त से ट्रैक पर तेज रफ्तार से दौड़ती हुई नजर आएगी और इसके संकेत रेल मंत्री ने भी दिए हैं. ये देश की अपनी पहली Bullet Train होगी और ये पहली बार 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर शुरू की जाएगी. इसका 348 किलोमीटर का हिस्सा गुजरात में आता है और जिस वापी-सूरत सेक्शन का वीडियो रेलवे मिनिस्ट्री ने शेयर किया है, वो करीब 100 किलोमीटर का है।  बुलेट ट्रेन रूट पर 12 स्टॉपेज  अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन कॉरिडोर जहां 508 किलोमीटर लंबा है, तो वहीं इस सेक्शन में रेलवे की ओर से बुलेट ट्रेन के 12 स्टॉपेज तय किए गए हैं. पहला Bullet Train स्टेशन साबरमती रखा गया है, तो वहीं आखिरी मुंबई है. इनमें साबरमती-मुंबई (BKC) के अलावा ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद शामिल हैं।  इस स्पीड से चलेगी बुलेट ट्रेन बुलेट ट्रेन जब फुल स्पीड में होगी, तो 320 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी, जबकि अहमदाबाद से मुंबई के बीच औसतन 300 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बुलेट ट्रेन अगले साल से दौड़ेगी. बता दें, फिलहाल सबसे हाई स्पीड ट्रेनों के जरिये मुंबई से अहमदाबाद के बीच यात्रा करने में लगभग 6 घंटे का समय लगता है. बुलेट ट्रेन की शुरुआत के बाद यह दूरी महज 2 घंटे में पूरी की जा सकेगी. इससे न केवल यात्रियों के कीमती समय की बचत होगी, बल्कि दोनों राज्यों के बीच व्यापारिक गतिविधियां भी बढ़ने वाली हैं। 

PNS हुनैन को लेकर बड़ा दावा, समुद्र में गश्त करने वाले पाकिस्तानी पोत पर उठे सवाल

मुंबई  मंगलवार को जब अरब सागर में पाकिस्तान के PNS हुनैन की टक्कर भारतीय नौसेना के कोलकाता क्लास डिस्ट्रायर से हुई, तो यह कमजोर बनाम ताकतवर वाली स्थिति जैसी थी. एक और जहां PNS हुनैन 2,600 टन का ऑफशोर पेट्रोल वेसल (समुद्र में गश्त करने वाला जहाज़) है, वहीं INS कोलकाता भारत के सबसे ताकतवर और आधुनिक युद्धपोतों में से एक है और इसका वज़न PNS हुनैन से लगभग तीन गुना ज्यादा यानी कि 7,400 टन ज़्यादा है. साफ है कि पाकिस्तान ने भारत से पंगा लेने के लिए गलत और जहाज चुना था अगर उस वक्त भारत के युद्धपोत ने पलटकर पाकिस्तानी पोत को टक्कर मारी होती तो ये जहाज साफ डूब सकता था।  इस टक्कर का नतीजा सबके सामने था. पाकिस्तानी जहाज के अगले हिस्से में ज़बरदस्त टक्कर का निशान बन गया और उसे मरम्मत के लिए बंदरगाह लौटना पड़ा, जबकि भारतीय डिस्ट्रॉयर अपने ऑपरेशनल मिशन पर आगे बढ़ता रहा. विदेश मंत्रालय ने बताया कि INS कोलकाता को कोई ढांचागत नुकसान नहीं हुआ।  डिफेंस एनालिस्ट संदीप उन्नीथन ने इंडिया टुडे को बताया कि दोनों युद्धपोतों के बीच "बहुत बड़ा" अंतर है।  उन्नीथन ने कहा, "हुनैन एक ऑफशोर पेट्रोल वेसल है, जिसमें कुछ और मिसाइलें लगाकर उसकी मारक क्षमता थोड़ी बढ़ाई गई है. INS कोलकाता भारतीय नौसेना के सबसे बड़े फ्रंटलाइन जहाज़ों में से एक है. वह जहाज़ विशालकाय और शक्तिशाली है।  इस घटना से राजनयिक तनाव पैदा हो गया है और दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को तलब किया है. भारत ने कहा कि युद्धपोत उत्तरी अरब सागर में नियमित निगरानी मिशन पर था, तभी पाकिस्तानी जहाज ने उसका पीछा करना शुरू कर दिया. PNS हुनैन पाकिस्तान नौसेना के 'सी स्पार्क' अभ्यास के तहत उस इलाके में मौजूद था।  सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तानी जहाज़ तेज़ी से आगे बढ़ रहा था, तभी बहुत पास से गुज़रने की कोशिश में वह INS कोलकाता से टकरा गया. खबरों के अनुसार, PNS हुनैन में एक बड़ा डेंट पड़ गया और शायद उसमें दरार भी आ गई. OSINT अकाउंट 'War and Gore' ने दावा किया कि इस घटना में पाकिस्तान के चार लोग घायल हुए. हालांकि पाकिस्तान की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।  उन्नीथन ने कहा कि यह घटना पाकिस्तान के लिए बहुत बुरी साबित हो सकती थी. उन्होंने कहा, "अगर INS कोलकाता अपने क्रू की सुरक्षा के लिए मुड़कर पाकिस्तानी जहाज़ को टक्कर मार देता, तो वह पलटकर डूब जाता. पाकिस्तान ने बहुत खतरनाक पैंतरेबाज़ी की थी।    दोनों जहाजों के बीच फ़र्क सिर्फ़ साइज़ का नहीं है, बल्कि इस बात का है कि ये जहाज़ किस तरह की लड़ाई के लिए बनाए गए हैं।  INS कोलकाता में हथियारों और सेंसर का एक एडवांस्ड सिस्टम लगा है, जिसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक ज़मीन-से-ज़मीन पर मार करने वाली मिसाइलें शामिल हैं. इसमें लंबी दूरी तक मार करने वाली ज़मीन-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलें, 360-डिग्री रडार, 76-mm की गन और AK-630 क्लोज़-इन वेपन सिस्टम भी लगे हैं।  दुश्मन की पनडुब्बियों से निपटने के लिए, इसमें टॉरपीडो लॉन्चर, रॉकेट लॉन्चर और आगे की तरफ़ लगा सोनार सिस्टम है. INS कोलकाता दो हेलीकॉप्टर (आमतौर पर सीकिंग और चेतक) भी ऑपरेट कर सकता है।  उन्नीथन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि INS कोलकाता को इस तरह डिज़ाइन किया गया था कि वह भारी हमले और कई बार टकराने के बावजूद लड़ाई में टिक सके।  इसकी ताकत और क्षमता 2021 में मुंबई से टकराए चक्रवात 'ताउते' के दौरान दिखी थी. चक्रवात के समय हवा की रफ़्तार 120 km/h तक पहुंच गई थी और लहरें नौ मीटर तक उठ रही थीं।  उन्नीथन ने बताया, "उस समय भारतीय नौसेना ने जो दो जहाज़ भेजे थे, वे INS कोलकाता और INS कोच्चि थे. इस साइज़ के यही दो जहाज़ ऐसे हैं जो तूफ़ान के बीच से गुज़रकर लोगों को बचा सकते हैं।  सीधे शब्दों में कहें तो INS कोलकाता बिल्कुल अलग तरह का जहाज़ है. जैसा कि X पर एक यूज़र ने बहुत सही बात कही, "आप डिस्ट्रॉयर से भागते हैं, उसकी तरफ़ नहीं दौड़ते! 'माउंटेन रैट्स' (Mountain Rats) नाम के X हैंडल से पोस्ट करने वाले एक डिफेंस एनालिस्ट ने कहा, "कितनी बेवकूफ़ी है कि 2500 टन का जहाज 7500 टन के डिस्ट्रॉयर से भिड़ने का फ़ैसला करता है।  हालांकि, यह पहली बार नहीं था जब किसी पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज़ ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में कोई दुस्साहस करने की कोशिश की हो. 16 जून, 2011 को अदन की खाड़ी में PNS बाबर भारतीय युद्धपोत INS गोदावरी के बहुत करीब से गुज़रा था. ऐसा लगता है कि पाकिस्तान इससे कोई सबक नहीं सीख रहा है। 

CBSE में तीसरी भाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, अगले साल से लागू करने को कहा

नईदिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की 3 भाषा नीति को अचानक लागू करने पर एक बार फिर सवाल उठाया है. कोर्ट ने कहा कि छठी क्लास के बच्चों के लिए तीसरी भाषा को अगले साल से लागू किया जाना चाहिए. इससे बच्चों को मानसिक रूप से तैयार होने का समय मिलेगा. CBSE ने विचार के लिए समय मांगा। सुप्रीम कोर्ट में  सुनवाई के दौरान कक्षा 9 के छात्रों को भी राहत देने की मांग उठी। इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “हर कोई बिना कुछ पढ़े मुफ्त में डिग्री चाहता है। यही संस्कृति हम बढ़ावा दे रहे हैं… कक्षा 9 एक परिपक्व कक्षा है।” याचिका में क्या मांग की गई है? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह व्यवस्था छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है तथा कुछ राज्यों की भाषा नीतियों से भी टकरा सकती है। वहीं, सीबीएसई का कहना है कि नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप यह कदम भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने और बहुभाषी शिक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया है। यह मामला सीबीएसई की तीन भाषा नीति से जुड़ा है, जिसके तहत कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई का प्रावधान किया गया है। मामले में कक्षा 6 के छात्रों के लिए भी राहत पर पहले अदालत ने सीबीएसई से अपने रुख पर दोबारा विचार करने को कहा था। छटी क्लास के बच्चों को मिले छूट: SC पीठ ने सालिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता से कहा, 'इस वर्ष कक्षा-छह पर विचार करें… यदि उन्हें कुछ समायोजन दिया जा सकता है।' एसजी मेहता ने अदालत से याचिकाओं की सुनवाई को टालने का अनुरोध किया क्योंकि अतिरिक्त सालिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी उपलब्ध नहीं थीं। हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया कि संबंधित अधिकारी पीठ के सुझाव पर विचार करेंगे। एक याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि इस मामले में अधिक स्थगन के कारण देरी नहीं होनी चाहिए क्योंकि छात्रों को अंततः परीक्षा देनी है और इससे उनके माता-पिता में चिंता बढ़ रही है। सुप्रीम कोर्ट एक समूह की याचिकाओं की सुनवाई कर रहा था जो कक्षा-नौ के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य करने वाली सीबीएसई की नीति को चुनौती दे रही थीं, जिसमें दो भारतीय भाषाएं शामिल हैं, जो एक जुलाई से लागू होनी थीं। क्या है सीबीएसई की 3 भाषा नीति? 20 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई नीति से उत्पन्न समस्याओं के समाधान की आवश्यकता पर यह कहते हुए जोर दिया कि बच्चों को किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं आना चाहिए। पीठ ने यह भी नोट किया कि एक पहलू जो विचार करने की आवश्यकता है, वह यह है कि उपलब्ध भाषा विकल्पों के संबंध में पर्याप्त मानव संसाधन बुनियादी ढांचा कैसे बनाया जाए। उसने कहा, 'यदि आपने कक्षा-छह को प्रारंभिक बिंदु के रूप में चुना है, तो आप इस वर्ष इसके छात्रों को राहत देने पर विचार कर सकते हैं। आप इसे अगले वर्ष से लागू कर सकते हैं।' सीबीएसई द्वारा जारी एक परिपत्र के अनुसार, कक्षा नौ के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन, जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल हैं, एक जुलाई से अनिवार्य कर दिया गया है। क्या है मामला?     सीबीएसई ने 2026-27 शैक्षणिक सत्र से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य की है। इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल करना जरूरी है।     इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई हैं।     याचिकाकर्ताओं ने नीति लागू करने के तरीके और सीबीएसई के अधिकार को लेकर सवाल उठाए।     मामले में कोर्ट ने केंद्र, सीबीएसई और एनसीईआरटी से जवाब मांगा और छात्रों पर अतिरिक्त पढ़ाई के दबाव को लेकर भी चर्चा हुई है।     आज इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है।  

UPI चार्ज का पूरा गणित समझें, ₹2,000, ₹3,000, ₹10,000 और ₹50,000 पर कितना शुल्क?

नई दिल्‍ली केंद्र सरकार ने यूपीआई पेमेंट प्राप्‍त करने पर MDR चार्ज लागू कर दिया है. यह चार्ज चुनिंदा व्‍यापारियों पर लागू किया गया है. आम आदमी या ग्राहक और छोटे व्‍यापारियों पर यह चार्ज नहीं लगेगा. सर्कुलर के अनुसार, जिन कारोबारियों की मंथली यूपीआई से पेमेंट 1 लाख रुपये से ज्‍यादा का है, उनपर ये चार्ज लागू किया जाएगा. यूपीआई चार्ज का ये नया नियम 15 अक्‍टूबर से प्रभावी माना जाएगा।  सर्कुलर में कहा गया है कि अगर आप एक बड़े कारोबारी हैं तो आपको अधिकतम 300 रुपये का मर्चेंट डिस्‍काउंट रेट (MDR) देना होगा. इससे ज्‍यादा का एमडीआर नहीं वसूला जाएगा. यहां आपको एक कैलकुलेशन के माध्‍यम से समझाया जा रहा है कि कितने रुपये के पेमेंट पर कितना MDR चार्ज देना होगा?  2000 रुपये का पेमेंट सरकार ने 2000 रुपये तक का पेमेंट हासिल करने पर किसी भी तरह का कोई भी MDR चार्ज नहीं लागू किया है. अगर आप इससे ज्‍यादा का पेमेंट प्राप्‍त करते हैं तो आपको एमडीआर देना पड़ेगा, जो आपके पेमेंट का 0.4 फीसदी होगा।  मान लीजिए आपने 2001 रुपये का पेमेंट रिसीव किया और आपकी मंथली QR कोड से पेमेंट 1 लाख रुपये से ज्‍यादा है तो आपको 8 रुपये का चार्ज देना होगा।  3000 रुपये के पेमेंट पर कितना चार्ज?  अगर आपको मंथली UPI पेमेंट 1 लाख रुपये से ज्‍यादा का मिला है और इस दौरान आपको 3000 रुपये का पेमेंट मिला है तो आपके 3000 रुपये के UPI पर MDR 12 रुपये का चार्ज देना होगा।   10 हजार रुपये के UPI पर चार्ज MDR नियमों के तहत आने वाले किसी व्‍यापारी को 10 हजार रुपये का ट्रांजेक्‍शन मिला है तो उसे 40 रुपये का चार्ज देना होगा।  50,000 रुपये के UPI पर चार्ज अगर आपकी भी QR कोड से पेमेंट 1 लाख रुपये से ज्‍यादा की होती है तो आप पर MDR चार्ज लागू होगा. यानी अगर आपको 50,000 रुपये का पेमेंट हासिल हुआ है तो उसपर एमडीआर चार्ज पर 200 रुपये लागू होगा।  ₹ 75,000 और उससे ज्‍यादा के पेमेंट पर चार्ज  अगर आपको 75000 रुपये का ट्रांजेक्‍शन हासिल हुआ है या उससे ज्‍यादा का ट्रांजेक्‍शन मिला है तो आपको अधिकतम 300 रुपये का एमडीआर चार्ज देना होगा. सरकार इससे ज्‍यादा का एमडीआर चार्ज नहीं लागू करेगी। 

आदित्य ठाकरे की बढ़ीं मुश्किलें? दिशा सालियान के पिता ने भेजा ₹500 करोड़ का मानहानि नोटिस

मुंबई सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की मौत के मामले में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) और महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को 500 करोड़ रुपये का कानूनी नोटिस भेजा गया है। नोटिस में दिशा के पिता सतीश सालियन ने दोनों से हर्जाने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इन दोनों नेताओं ने उनकी इस कानूनी लड़ाई को राजनीति से प्रेरित बताने की कोशिश की। आपको बता दें कि दिशा सालियन की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक ऊंची बिल्डिंग से गिरने से हुई थी। पुलिस ने इस घटना को दुर्घटना माना और एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) दर्ज की। इसके छह दिन बाद एक्टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की मौत हो गई। दिशा के पिता ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और FIR दर्ज करने के साथ-साथ नए सिरे से जांच की मांग की थी। याचिका में आदित्य ठाकरे, डिनो मोरिया और सूरज पंचोली समेत कई लोगों पर आरोप लगाए गए। इस घटना के करीब छह साल बाद सीबीआई ने कोर्ट के आदेश पर जांच शुरू कर दी है। 500 करोड़ रुपये का नोटिस 500 करोड़ रुपये के इस कानूनी नोटिस में आदित्य ठाकरे पर सतीश सालियन के इरादों पर सवाल उठाने और उनकी इस कानूनी लड़ाई को राजनीति से प्रेरित बताने का आरोप लगाया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि आदित्य ठाकरे ने उनकी इस कानूनी लड़ाई को दुर्भावनापूर्ण बताया था। वकील द्वारा भेजे गए लीगल नोटिस में लिखा है, “मेरे मुवक्किल सतीश सालिया पर ये सारे आरोप झूठे, बेबुनियाद, गैर-जिम्मेदाराना और गंभीर रूप से मानहानि करने वाले हैं। ये आरोप बिना किसी विश्वसनीय सबूत के आधार पर लगाए गए हैं। सतीश सालियान की ईमानदारी और विश्वसनीयता पर सीधा सवाल उठाया गया। एक दुखी पिता को एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर दिखाया गया है जो गलत, दुर्भावनापूर्ण और राजनीतिक मकसद के लिए न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहा है। वह सिर्फ अपनी बेटी के कथित गैंगरेप और हत्या की कानूनी जांच चाहता हैं।” इस कानूनी नोटिस में आदित्य ठाकरे पर यह गलत दावा करने का भी आरोप लगाया गया है कि सीबीआई ने दिशा सालियन मामले की जांच पहले ही कर ली थी और उन्हें क्लीन चिट दे दी थी। ठाकरे ने आरोप लगाया था कि सालियन का इस्तेमाल उन्हें परेशान करने के लिए एक हथियार के तौर पर किया जा रहा था। अनिल देशमुख ने इस दावे का समर्थन किया। 23 मार्च 2025 को अनिल देशमुख ने कहा था कि दिशा सालियन केस आदित्य ठाकरे को बदनाम करने की एक साजिश थी। सार्वजनिक माफी की मांग सतीश सालियन ने बिना शर्त, स्पष्ट और पूरी तरह से लिखित और सार्वजनिक माफी की मांग की है। इस माफीनामे को सभी प्रमुख प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित और प्रसारित किया जाना चाहिए। वीडियो माफीनामा कम से कम तीन मिनट लंबा होना चाहिए और इसे दोनों नेताओं के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया जाना चाहिए।

PM मोदी के कार्यकाल में केंद्रीय कर्मचारियों से जुड़े 5 अहम फैसले, वेतन-पेंशन पर पड़ा असर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। अपने 12 साल के कार्यकाल में बतौर प्रधानमंत्री उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए हैं जिसका फायदा बड़े वर्ग को मिला है। पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान केंद्रीय कर्मचारियों के हित में भी कई अहम फैसले लिए। इन फैसलों की वजह से ना सिर्फ केंद्रीय कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव आया बल्कि फ्यूचर प्लानिंग को लेकर भी एक नया विकल्प मिला। आइए पीएम मोदी के 5 बड़े फैसले के बारे में जान लेते हैं। वेतन आयोग का गठन पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने 8वें वेतन आयोग का गठन किया। यह वेतन आयोग अपनी सिफारिशें अगले साल की पहली छमाही तक सरकार को सौंप देगा। इसके बाद सरकार सिफारिशों को लागू करेगी। बता दें कि सातवें वेतन आयोग को लागू भी मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में ही किया गया था। हालांकि, इसका गठन यूपीए (UPA) सरकार द्वारा 28 फरवरी 2014 को किया गया था। तब डॉ. मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री थे। UPS यानी यूनिफाइड पेंशन स्कीम सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों को यूनिफाइड पेंशन स्कीम का विकल्प दिया। साल 2024 में मंजूर UPS को 1 अप्रैल 2025 से लागू किया गया। यह नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के अंतर्गत ही एक विकल्प के रूप में लाया गया है। इस स्कीम के तहत 25 साल की न्यूनतम अर्हक सेवा पूरी करने वाले कर्मचारी को रिटायरमेंट से पहले के आखिरी 12 महीनों के औसत मूल वेतन का 50 फीसदी सुनिश्चित पेंशन के रूप में मिलेगा। वहीं, कम से कम 10 साल की सेवा पूरी करने पर न्यूनतम पेंशन ₹10,000 प्रति माह तय की गई है। कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को उसकी पेंशन का 60 फीसदी पारिवारिक पेंशन मिलेगी। इसके अलावा सुनिश्चित पेंशन, पारिवारिक पेंशन और न्यूनतम पेंशन पर महंगाई राहत (DR) भी दी जाएगी। रिटायरमेंट के समय ग्रेच्युटी के अलावा शर्तों के साथ एक एकमुश्त भुगतान भी मिलेगा। HRA में बदलाव मोदी सरकार के कार्यकाल में केंद्रीय कर्मचारियों के हाउस रेंट अलाउंस(HRA) की दरों में भी बदलाव किया गया। 7वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत शहरों को X, Y और Z कैटेगरी में बांटा गया और HRA की शुरुआती दरें क्रमशः 24%, 16% और 8% तय की गईं। बाद में महंगाई भत्ता (DA) बढ़ने के साथ HRA की दरों में भी बढ़ोतरी का प्रावधान रखा गया। जब DA 25% हुआ, तो HRA की दरें बढ़कर 27%, 18% और 9% हो गईं। इसके बाद DA 50% पहुंचने पर HRA बढ़कर 30%, 20% और 10% हो गया। बता दें कि वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों का डीए 60 पर्सेंट है। NPS कर्मचारियों के लिए बढ़ाया योगदान केंद्र सरकार के NPS कर्मचारियों के लिए सरकार का योगदान 10% से बढ़ाकर 14% किया गया। बता दें कि केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम को साल 2004 में ही बंद कर दिया गया था। CGHS में बदलाव पिछले 12 वर्षों में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना यानी CGHS में कई अहम बदलाव हुए हैं। 7वें वेतन आयोग के बाद CGHS के मासिक योगदान और अस्पताल में वार्ड की पात्रता को वेतन स्तर से जोड़ा गया। इमरजेंसी की स्थिति में CGHS से जुड़े अस्पतालों में इलाज की सुविधा को भी व्यवस्थित किया गया है।

मास्टर सर्कुलर्स और सतर्कता मैनुअल 2026 पर प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम

हैदराबाद एनएमडीसी लिमिटेड के सतर्कता विभाग ने 17 सितंबर 2026 को हैदराबाद में केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) द्वारा आयोजित "मास्टर सर्कुलर्स और सतर्कता मैनुअल 2026" पर दक्षिण क्षेत्र के संगठनों के सतर्कता अधिकारियों के लिए प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में  सह-मेजबानी की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि,  प्रवीण कुमार सिन्हा, पूर्व विशेष निदेशक, सीबीआई द्वारा प्रतिभागियों से वर्चुवल रूप में संबोधित किया गया, जिन्होंने सीवीसी द्वारा जारी मास्टर परिपत्रों के महत्व और सतर्कता मैनुअल के संशोधन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने संवेदनशील पदों पर तैनात कर्मियों के रोटेशन के महत्व पर भी प्रकाश डाला, जो एक महत्वपूर्ण निवारक सतर्कता उपाय के रूप में सिद्ध है। इस अवसर पर सीवीसी के सलाहकार  राजीव वर्मा, सीवीसी के निदेशक  अजय कुमार वर्मा और ओएसडी, सीवीसी  अरविंद कुमार के साथ-साथ  सु स्‍पूर्ति रेड्डी, सीवीओ, मिधानी और बीडीएल;         पी. कृष्ण कुमार, सीवीओ, ईसीआईएल; और  सी. नीलकंठ रेड्डी, सीवीओ, एनएमडीसी लिमिटेड आदि की गरिमामयी उपस्थिति रही । सीवीसी के प्रतिष्ठित वक्ताओं ने सतर्कता मैनुअल 2026 के संबंध में बहुत ही सार्थक जानकारी दी है,  जिसमें समय समय पर लाए गए प्रमुख परिवर्तनों और सतर्कता प्रशासन के लिए उनके महत्‍व पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने हाल ही में जारी किए गए सीवीसी के मास्टर सर्कुलर्स पर भी विस्तार से बताया, जिसमें उनके महत्वपूर्ण प्रावधान और व्यावहारिक प्रासंगिकता भी शामिल है। कार्यक्रम के पूरे सत्र अत्यधिक संवादात्मक थे, जिसमें विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के प्रश्नों व संदेहों का समाधान किया और व्यावहारिक चर्चाओं के माध्यम से मूल्यवान स्पष्टीकरण प्रदान किए । इस कार्यक्रम में दक्षिण क्षेत्र के लगभग 75 सतर्कता अधिकारियों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सत्रों ने प्रतिभागियों की अद्यतन सतर्कता ढांचे की समझ को बढ़ाया और सतर्कता प्रथाओं में स्थिरता को बढ़ावा देने और संस्थागत क्षमता को मजबूत करने के लिए व्यावहारिक अंतर्दृष्टि प्रदान की। सीवीओ, एनएमडीसी ने सतर्कता अधिकारियों के लिए सीवीसी मास्टर परिपत्रों और सतर्कता मैनुअल 2026 के महत्व पर जोर दिया और साथ ही उन्‍होंने सतर्कता कार्यों में इन परिपत्रों और सतर्कता मैनुअल के प्रावधानों की पूरी समझ और उनके प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला । सतर्कता के विभागाध्‍यक्ष ने सभी प्रतिष्ठित वक्ताओं को उनके बहुमूल्य ज्ञान और अनुभव को साझा करने के लिए और प्रतिभागियों को उनकी उत्साही भागीदारी, ध्यानपूर्वक सुनने और उनकी सार्थक प्रतिभागिता के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया । इनकी प्रतिभागिता ने कार्यक्रम को अत्यधिक संवादात्मक और समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह कार्यक्रम पारदर्शिता, सत्यनिष्ठा और प्रभावी सतर्कता प्रशासन को विशेष महत्‍व देते हुए भाग लेने वाले सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (पीएसयू) की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए, अद्यतन सतर्कता मैनुअल और मास्टर सर्कुलर्स के विस्‍तृत प्रसार, क्षमता निर्माण और ज्ञान के आदान प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुआ । राष्‍ट्रगान और राष्‍ट्रीय गीत के आलापन के साथ कार्यक्रम का समापन संपन्‍न हुआ।

भारत पर 100% टैरिफ का रास्ता साफ, अमेरिकी संसद ने रूस प्रतिबंध बिल को दी मंजूरी

वाशिंगटन  अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूसी अधिकारियों और आर्थिक क्षेत्रों को लक्षित करने वाले व्यापक प्रतिबंध पैकेज को 262 मतों से 159 से पारित कर दिया. अब इसे आधिकारिक रूप से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास साइन करने के लिए भेजा गया है।  साउथ कैरोलिना के स्वर्गीय सीनेटर लिंडसे ग्राहम के सम्मान में इस कानून का नाम रखा गया था. इसे एक साल से ज़्यादा समय तक बातचीत के बाद बनाया गया. ट्रंप का समर्थन हासिल करना तब बहुत जरूरी हो गया जब इस पैकेज में ईरान पर मौजूदा प्रतिबंधों को पांच साल के लिए बढ़ाने की राष्ट्रपति की मांग को शामिल किया गया।  यह कदम ट्रंप के व्हाइट हाउस में दोबारा आने के बाद यूक्रेन को सपोर्ट करने वाला सबसे बड़ा अमेरिकी कानूनी प्रयास है. यह कदम 2024 के इमरजेंसी सहायता पैकेज के बाद लगभग दो साल तक चली पार्लियामेंट्री रुकावट के बाद उठाया गया।  यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने इस कदम की जोरदार वकालत की, वोट से पहले सीधे सांसदों से अपील की और एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, 'युद्ध के दौरान, कभी-कभी कुछ न करने से बेहतर होता है कि कोई ऐसा फैसला लिया जाए जो उतना सही न हो।  यह कानून रूसी अधिकारियों, फाइनेंशियल संस्थानों और बैंकिंग अधिकारियों के खिलाफ सजा बढ़ाता है, साथ ही उन जहाजों को भी टारगेट करता है जिनका इस्तेमाल मौजूदा पश्चिमी सीमाओं को तोड़कर रूसी एनर्जी शिपमेंट के फ्लो को बनाए रखने के लिए एक शैडो फ्लीट में किया जाता है।  इसके अलावा यह कदम राष्ट्रपति ट्रंप को रूसी पेट्रोलियम या नैचुरल गैस के पांच प्राइमरी इंपोर्टर्स पर 100 परसेंट तक टैरिफ लगाने का निर्देश देता है. इसमें उन देशों को छूट शामिल है जो रूसी नैचुरल गैस एक्सपोर्ट का 15 परसेंट से कम इंपोर्ट करते हैं और जिन्होंने उन खरीद को कम करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं।  भारत के लिए यह कानून एक नया कानूनी रास्ता बनाता है, जिससे वाशिंगटन नई दिल्ली के लगातार रूसी एनर्जी खरीदने के जवाब में भारतीय इंपोर्ट पर 100 परसेंट तक टैरिफ लगा सकेगा. क्योंकि भारत और चीन, रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से हैं, इसलिए सपोर्टर्स ने साफ तौर पर दोनों देशों को टैरिफ क्लॉज के मुख्य टारगेट के तौर पर पहचाना है. ये अमेरिकी मार्केट तक पहुंच का इस्तेमाल उन देशों के खिलाफ फायदे के तौर पर करते हैं जो रूसी एनर्जी रेवेन्यू बनाए रखते हैं और मॉस्को के मिलिट्री कैंपेन को फाइनेंस करते हैं. लेकिन यह बिल भारतीय सामान पर अलग से 100 परसेंट टैरिफ लागू नहीं करता है. इसके बजाय यह एग्जीक्यूटिव ब्रांच को तय कानूनी शर्तों के तहत ऐसे टैरिफ लगाने का अधिकार देता है, अगर यह कदम लागू होता है और बाद में ट्रंप इसे लागू कर सकते हैं।  सीनेट ने पहले 7 अगस्त को 86-11 के भारी बहुमत से इस कानून को मंजूरी दी थी, हालांकि इसके टैरिफ क्लॉज को लेकर हुए विवादों के कारण हाउस में बाद में इसकी रफ़्तार धीमी हो गई. हाउस से पास होने के बाद यह कानून अब ट्रंप के साइन के लिए उनके पास जाएगा, जिसके बाद प्रशासन के पास रूस और रूसी एनर्जी कॉमर्स में लगे देशों पर दबाव डालने के लिए सप्लीमेंट्री बैन और टैरिफ अथॉरिटी होगी।