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पति नहीं दे रहा था खर्च, सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी को दिया निर्देश: सैलरी से 25,000 पत्नी के खाते में डालो

नई दिल्ली आदेशों के बाद भी पत्नी और बच्ची को गुजारा नहीं दे रहे व्यक्ति को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। खबर है कि अदालत ने व्यक्ति के एम्पलॉयर को ही उसकी सैलरी काटने और सीधे महिला के खाते में रकम डालने के निर्देश दिए हैं। शीर्ष न्यायालय ने पाया कि कपल करीब 4 सालों से अलग रह रहा है और पत्नी अकेली ही बच्चे का भरण पोषण कर रही है। बच्ची से मिलने तक नहीं आया पिता जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ मामले की सुनवाई कर रही थी। लाइव लॉ के अनुसार, अदालत ने पाया कि व्यक्ति ने पूर्व में जारी आदेशों का पालन नहीं किया है। कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया है कि 4 साल की बच्ची का ध्यान महिला ही अकेली रख रही है। इतना ही नहीं बच्ची का पति बीते चार सालों से उससे मिलने तक नहीं आया है। कोर्ट की कोई बात नहीं मानी रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने इससे पहले दोनों को शादी खत्म करने के लिए रकम की संभावनाएं तलाशने के लिए कहा था। अंतरिम राहत के तौर पर पति को 25 हजार रुपये पत्नी को देने के आदेश दिए गए थे। ये रकम मध्यस्थता प्रक्रिया में महिला और उनके बच्चे आने-जाने के खर्च के लिए थी। हालांकि, कोर्ट के इस आदेश का भी पालन नहीं हुआ। बेंच को सूचित किया गया कि मजिस्ट्रेट कोर्ट की तरफ से जारी एक अंतरिम आदेश 2024 में जारी किया गया था। साथ ही बताया गया कि पति पर करीब 1.38 लाख रुपये का बकाया हो गया था। पति ने किया परेशानी का दावा सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पति की तरफ से दिए गए हलफनामे की भी जांच की, जिसमें उसने सैलरी 50 हजार रुपये बताई थी। साथ ही कहा था कि वह आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहा है। जज ने उससे पूछा कि क्या वह 2.5 लाख रुपये जमा कराना चाहता है, जिसमें अंतरिम गुजारे का एरियर भी शामिल है। इसपर उसने भुगतान से इनकार कर दिया। कोर्ट का फैसला कोर्ट ने कहा, 'ऐसी परिस्थितियों में, हमारे पास प्रतिवादी-पति के नियोक्ता को यह निर्देश देने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है कि पति के वेतन से 25,000 रुपये प्रति माह काटे जाएं। यह राशि सीधे RTGS के माध्यम से उसकी पत्नी के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी।' बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि वह खासतौर से बच्चे की चिंता है। कोर्ट ने पाया कि महिला अपने रिश्तेदार के पास रहकर बच्ची को खुद ही पाल रही हैं।

ममता बनर्जी का केंद्र पर हमला: राज्यपाल के इस्तीफे को बताया ‘अमित शाह की राजनीतिक चाल’

कोलकाता पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राज्यपाल सीवी आनंदबोस के इस्तीफे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि यह सब गृह मंत्री अमित शाह के दबाव की वजह से हो रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले इस तरह का फैसला अमित शाह ही ले सकते हैं। बनर्जी ने कहा कि सीवी आनंदबोस ने किसलिए इस्तीफा दिया इसको लेकर कुछ स्पष्ट नहीं कहा जा कता लेकिन इतना साफ है कि राजनीतिक फायदे को देखते हुए ही इस तरह का परिवर्तन किया जा रहा है। नवंबर 2027 तक था कार्यकाल सीएम बनर्जी ने कहा कि उन्हें शाह से पता चला है कि बोस के जाने के बाद तमिलनाडु के राज्यपाल एवं पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) आरएन रवि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पद का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे। बोस ने दिल्ली से बताया, ''हां, मैंने इस्तीफा दे दिया है। मैं साढ़े तीन साल तक बंगाल का राज्यपाल रहा हूं; यह मेरे लिए पर्याप्त है।' उन्होंने हालांकि अचानक इस्तीफा देने के कारणों का खुलासा नहीं किया, जिससे राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गईं क्योंकि उनका कार्यकाल नवंबर 2027 तक था। बनर्जी ने कहा कि शाह ने थोड़ी देर पहले ही उन्हें इस फैसले के बारे में बताया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की हरकतें देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खतरा हैं। इस तरह से एकतरफा फैसले किसी राज्य के हित में नहीं हैं बल्कि पार्टी विशेष के हित में हैं। 'लोक भवन' के अधिकारियों ने पुष्टि की कि त्यागपत्र राष्ट्रपति भवन भेजा जा चुका है। बोस ने 17 नवंबर, 2022 को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभाला था। उन्होंने अपने कार्यकाल की समाप्ति से लगभग 20 महीने पहले ही पद छोड़ दिया। इसके साथ ही वह पश्चिम बंगाल के लगातार दूसरे ऐसे राज्यपाल बन गए जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले ही पद छोड़ दिया। बनर्जी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि वह अचानक हुए इस घटनाक्रम से ''स्तब्ध और बेहद चिंतित'' हैं और दावा किया कि उन्हें इसके कारणों का पता नहीं है। उन्होंने कहा, ''हालांकि, यदि बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्यपाल बोस पर केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से राजनीतिक कारणों से दबाव डाला गया हो तो मुझे हैरानी नहीं होगी।' टीएमसी चीफ बनर्जी ने कहा, ''मुझे केंद्रीय गृह मंत्री (अमित शाह) से पता चला है कि आरएन रवि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में सीवी आनंद बोस का स्थान लेंगे।' लोकतांत्रिक ढांचे पर प्रहार मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि शाह ने उन्हें बोस की जगह रवि के आने की जानकारी दी, लेकिन इस मामले में उनसे परामर्श नहीं किया गया। उन्होंने कहा, "केंद्र को सहकारी संघवाद के सिद्धांतों का सम्मान करना चाहिए और ऐसे एकतरफा फैसले लेने से बचना चाहिए जो लोकतांत्रिक परंपराओं और राज्यों की गरिमा को ठेस पहुंचाते हों।' इस बीच बीजेपी की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने संघीय भावना पर हमले के बारे में बनर्जी की टिप्पणियों को ''बेबुनियाद'' करार दिया। उन्होंने कहा, ''राजभवन में बदलाव होना आम बात है। मैंने सुना है कि उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया है। इस बारे में मुझे कुछ नहीं कहना है। तृणमूल कांग्रेस सिर्फ इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रही है।'' यह घटनाक्रम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समय पर सामने आया है, क्योंकि निर्वाचन आयोग द्वारा जल्द ही पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों का कार्यक्रम घोषित किये जाने की उम्मीद है। अपने कार्यकाल के दौरान, बोस ने कई बार राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना की और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के साथ उनका अक्सर टकराव होता रहता था। गुरुवार शाम को दिल्ली से उनके अचानक इस्तीफे ने राजनीतिक विश्लेषकों और राज्य प्रशासन दोनों को आश्चर्यचकित कर दिया। लोक भवन के अधिकारियों ने बताया कि बोस दिन में पहले दिल्ली गये थे और वहीं से उन्होंने राष्ट्रपति भवन को अपना त्यागपत्र भेजा था। इस घटनाक्रम ने बोस के पूर्ववर्ती जगदीप धनखड़ के पद से इस्तीफा देने की यादें ताजा कर दीं, जिन्होंने राज्यपाल के रूप में अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया था, क्योंकि वह 2022 में उपराष्ट्रपति चुने गए थे। धनखड़ ने पिछले साल अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था।  

नेपाल की राजनीति में नया चेहरा: बालेन शाह PM पद की दौड़ में, भारत को लेकर क्या सोचते हैं?

नई दिल्ली पिछले साल सितंबर में जेन-जी (Gen-Z) के नेतृत्व में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद नेपाल ने अपनी नई सरकार चुनने के लिए मतदान किया है। इस चुनाव में सबसे अधिक चर्चा का केंद्र रहे हैं काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह। उन्होंने झापा-5 से चुनाव लड़ने के लिए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। 35 साल के बालेन शाह अब न केवल युवाओं के पसंदीदा उम्मीदवार हैं, बल्कि उन्हें नेपाल के अगले प्रधानमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदारों में से एक माना जा रहा है। बालेन शाह का राजनीतिक सफर जितना प्रभावशाली रहा है, उतना ही विवादों से घिरा भी। नवंबर 2025 में उनके एक फेसबुक पोस्ट ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी थी। उस पोस्ट में उन्होंने अमेरिका, भारत और चीन के साथ-साथ नेपाल के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों (यूएमएल, कांग्रेस, माओवादी आदि) के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। हालांकि पोस्ट बाद में हटा ली गई, लेकिन इसके स्क्रीनशॉट ने उनकी छवि एक अराजक विद्रोही के रूप में स्थापित कर दी। इससे पहले वे नेपाल के शासन केंद्र सिंह दरबार को आग लगाने की धमकी देकर भी विवादों में रहे थे। कौन हैं बालेंद्र शाह? एक आयुर्वेदिक डॉक्टर के बेटे बालेन की रुचि बचपन से ही कविता में थी, जो आगे चलकर रैप संगीत में बदल गई। अमेरिका के प्रसिद्ध रैपर्स टुपैक शकुर और 50 सेंट से प्रभावित बालेन ने नेपाल के संगीत जगत में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने नेपाल से सिविल इंजीनियरिंग की और भारत के कर्नाटक स्थित विश्वेश्वरैया तकनीकी विश्वविद्यालय से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की। 2019 में उनका गाना 'बलिदान' काफी लोकप्रिय हुआ, जिसमें उन्होंने नेपाल की राजनीतिक व्यवस्था पर तीखा प्रहार किया था। बालेन ने 'परिवर्तन का समय' के नारे के साथ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में काठमांडू के मेयर का चुनाव जीता था। मेयर रहते हुए उन पर सड़कों को साफ करने के नाम पर रेहड़ी-पटरी वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के आरोप भी लगे। पिछले साल जब तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा, तब बालेन ने युवाओं से कहा था, "प्रिय जेन-जी, तुम्हारे हत्यारे का इस्तीफा आ गया है। अब तुम्हारी पीढ़ी को देश का नेतृत्व करना होगा।" दिसंबर 2025 में बालेन शाह ने रबी लामिछाने के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) का दामन थाम लिया और पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने। क्या है बालेन और RSP का विजन? राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने अपने घोषणापत्र में आर्थिक सुधारों को प्राथमिकता दी है। पार्टी ने 12 लाख नई नौकरियां पैदा करने और युवाओं के विदेश पलायन को रोकने का वादा किया है। नेपाल की प्रति व्यक्ति आय को 1,447 से बढ़ाकर 3,000 डॉलर करने और जीडीपी को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। चुनाव प्रचार के दौरान बालेन शाह को तब आलोचना का सामना करना पड़ा जब वे झापा-5 में लगभग 4 करोड़ नेपाली रुपये की लैंड रोवर डिफेंडर कार में घूमते देखे गए। उनके आलोचकों का कहना है कि वे पारंपरिक राजनेताओं को चुनौती देने का दावा तो करते हैं, लेकिन उनकी जीवनशैली अब उन्हीं की तरह वैभवशाली हो गई है। नेपाल अब चुनाव के नतीजों का इंतजार कर रहा है। एक रैपर और सोशल मीडिया स्टार से देश के संभावित शीर्ष नेता तक बालेन शाह का यह सफर 2026 के चुनावों की सबसे बड़ी कहानी बन चुका है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नेपाल का युवा वर्ग उन्हें वास्तव में सत्ता की कुर्सी तक पहुँचा पाता है।  

OPS पर फिर गरमाई बहस: 8वें वेतन आयोग में क्या बहाल होगी पुरानी पेंशन योजना?

नई दिल्ली केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए पेंशन सुधार को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही कर्मचारी संगठनों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को पूरी तरह बहाल करने की मांग दोबारा उठाई है। कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि नई प्रणालियों में पेंशन की निश्चितता नहीं है, इसलिए सरकार को कर्मचारियों की पुरानी व्यवस्था वापस लानी चाहिए। क्या है डिटेल कर्मचारी संगठनों केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और श्रमिकों का परिसंघ और अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी संघ (AIDEF) ने इस संबंध में अपनी मांगें राष्ट्रीय परिषद-संयुक्त परामर्श तंत्र (NC-JCM) की स्टाफ साइड की ड्राफ्टिंग कमेटी को सौंप दी हैं। यूनियनों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि नेंशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और हाल ही में लाई गई यूनिफाइड पेंशन सिस्टम (UPS) दोनों को खत्म कर फिर से OPS लागू किया जाए। दरअसल, UPS को लेकर कर्मचारियों की प्रतिक्रिया उम्मीद से काफी कम रही है। सरकार ने संसद में जानकारी दी थी कि 30 नवंबर 2025 तक सिर्फ 1,22,123 केंद्रीय कर्मचारियों ने ही UPS को चुना है। इसमें नए भर्ती कर्मचारी, मौजूदा कर्मचारी और कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारी भी शामिल हैं। जबकि कुल पात्र कर्मचारियों की संख्या लगभग 23 से 25 लाख मानी जाती है। यानी कुल कर्मचारियों में से केवल 4–5% ने ही UPS को अपनाया है। यूनियन नेताओं ने क्या कहा यूनियन नेताओं का कहना है कि यह कम संख्या इस बात का संकेत है कि कर्मचारियों को नई पेंशन व्यवस्था पर भरोसा नहीं है। उनका तर्क है कि OPS में कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद अंतिम वेतन का करीब 50% पेंशन और उस पर महंगाई भत्ता (DA) भी मिलता था। जबकि NPS में पेंशन बाजार के रिटर्न पर निर्भर करती है, जिससे भविष्य की आय अनिश्चित हो जाती है। हालांकि सरकार का रुख अब तक साफ रहा है। सरकार का कहना है कि OPS को दोबारा लागू करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार के मुताबिक NPS लंबी अवधि में सरकारी खजाने पर पड़ने वाले पेंशन के भारी बोझ को संतुलित करने के लिए जरूरी है। इसी कारण NPS को पूरी तरह खत्म करने के बजाय सरकार ने बीच का रास्ता निकालते हुए UPS का विकल्प दिया, जिसमें न्यूनतम पेंशन का कुछ भरोसा दिया गया है। सबसे बड़ा पेंशन का मुद्दा अब जब 8वें वेतन आयोग की चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं, तो माना जा रहा है कि पेंशन का मुद्दा सबसे बड़ा विवादित विषय बन सकता है। कर्मचारी संगठन इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में हैं, जबकि सरकार वित्तीय संतुलन का हवाला दे रही है। ऐसे में आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि वेतन आयोग की सिफारिशों में पेंशन व्यवस्था को लेकर क्या बड़ा बदलाव सामने आता है।

इजरायल ने 90 दिन पहले खामेनेई को मारने की बनाई थी योजना

तेहरान  इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने 5 मार्च 2026 को एक टीवी इंटरव्यू में बड़ा खुलासा किया है कि देश ने पिछले साल नवंबर में ही अयातुल्ला अली खामेनेई को मारने का फैसला कर लिया था. यह फैसला प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ एक बहुत छोटी और गोपनीय बैठक में लिया गया था। शुरू में योजना थी कि यह काम छह महीने बाद यानी मध्य 2026 में किया जाएगा लेकिन बाद में हालात इतने तेजी से बदल गए. अमेरिका और इजरायल ने मिलकर फरवरी के अंत में ही हमला शुरू कर दिया. इस हमले के पहले ही घंटों में खामेनेई की मौत हो गई, जो दुनिया के इतिहास में किसी देश के सबसे बड़े नेता को हवाई हमले से मारने का पहला मामला बन गया है. अब यह संयुक्त हवाई अभियान एक हफ्ते से ज्यादा चल चुका है. पूरे क्षेत्र में युद्ध की आग फैल गई है। नवंबर 2025 में क्या हुआ और नेतन्याहू ने क्यों लिया यह फैसला रक्षा मंत्री काट्ज ने इजरायल के चैनल 12 टीवी को बताया कि नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने एक बहुत छोटे समूह के साथ बैठक बुलाई थी. इसमें सिर्फ चुनिंदा लोग थे. उस बैठक में नेतन्याहू ने साफ कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को खत्म करना हमारा लक्ष्य है।  उस समय योजना बनाई गई कि यह ऑपरेशन मध्य 2026 में किया जाएगा क्योंकि इजरायल को लगता था कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइलें इजरायल के लिए अस्तित्व का खतरा बन चुकी हैं. इजरायल का मानना है कि ईरान हथियार बना रहा है जो इजरायल को पूरी तरह नष्ट कर सकता है. इसलिए इस खतरे को जड़ से खत्म करने का फैसला किया गया। जनवरी 2026 में योजना क्यों बदली गई और US को कब बताया गया काट्ज ने आगे बताया कि दिसंबर के बाद जनवरी 2026 में ईरान में बड़े-बड़े विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. ईरान के लोग अपने नेता और सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए थे. इजरायल को डर था कि यह दबाव झेल रहे शासक किसी भी समय इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर हमला कर सकते हैं। इसलिए योजना को तेज कर दिया गया. इजरायल ने इस पूरे प्लान को अमेरिका को बताया. दोनों देशों ने मिलकर तैयारी शुरू कर दी. रक्षा मंत्री ने कहा कि हम नहीं चाहते थे कि ईरान पहले हमला कर दे इसलिए प्लान को बदला गया। 28 फरवरी 2026 को शनिवार के दिन अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर बड़ा हवाई अभियान शुरू किया. पहले ही कुछ घंटों में खामेनेई को उनके घर और दफ्तर वाले इलाके में मार दिया गया. यह हमला इतना सटीक था कि ईरान के कई बड़े सैन्य नेता भी उसी में मारे गए। हमले ने पूरे क्षेत्र को युद्ध में झोंक दिया अब यह अमेरिका-इजरायल का संयुक्त हवाई हमला एक हफ्ते से ज्यादा चल रहा है. शुरू के दिनों में ही ईरान के कई बड़े नेता मारे गए जिससे ईरान का शासन हिल गया है. ईरान ने जवाब में इजरायल पर मिसाइलें दागीं गल्फ देशों और इराक में भी हमले किए। इजरायल ने ईरान के करीबी सहयोगी हिजबुल्लाह पर लेबनान में हमले तेज कर दिए हैं. पूरा मध्य पूर्व अब युद्ध की आग में जल रहा है. ईरान की सरकार ने कहा है कि वह लड़ाई जारी रखेगी. लेकिन इजरायल का कहना है कि हमारा मकसद सिर्फ खतरा खत्म करना है। इजरायल के असली लक्ष्य क्या हैं – परमाणु कार्यक्रम और शासन बदलना इजरायल ने साफ कहा है कि उसका मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट को पूरी तरह खत्म करना है. इजरायल को लगता है कि ईरान ये हथियार बना लेगा तो इजरायल के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं बचेगी। इसके अलावा इजरायल चाहता है कि ईरान में शासन बदल जाए यानी वहां मौजूदा सरकार गिर जाए और एक नई सरकार आए जो शांतिप्रिय हो. रक्षा मंत्री काट्ज ने कहा कि अगर ईरान नया नेता चुनता है तो वह भी इजरायल का निशाना बनेगा क्योंकि इजरायल किसी भी ऐसे नेता को बर्दाश्त नहीं करेगा जो इजरायल को नष्ट करने की सोचे। ईरान की स्थिति और भविष्य में क्या हो सकता है ईरान ने अब तक कोई संकेत नहीं दिया है कि वह सत्ता छोड़ेगा या बातचीत करेगा. उल्टे ईरान ने इजरायल और अमेरिका पर कई जगहों पर हमले किए हैं जिससे तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है. गल्फ के देश डर में हैं. इजरायल और अमेरिका का कहना है कि अभियान तब तक चलेगा जब तक ईरान का परमाणु खतरा पूरी तरह खत्म न हो जाए. यह पूरा मामला दशकों पुरानी इजरायल-ईरान दुश्मनी का सबसे बड़ा मोड़ है।  

कविंद्र गुप्ता बने हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल, 13 साल में RSS से जुड़कर जेल गए, शिव प्रताप शुक्ल को तेलंगाना का गवर्नर नियुक्त किया गया

शिमला  लद्दाख के उप-राज्यपाल कविंद्र गुप्ता हिमाचल प्रदेश के नए गवर्नर नियुक्त किए गए। हिमाचल के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को तेलंगाना का गवर्नर बनाया गया है। राष्ट्रपति कार्यालय ने गुरुवार देर रात इस बाबत आदेश जारी किए। लद्दाख और हिमाचल समेत 9 राज्यों में गवर्नर बदले गए। यह फेरबदल पश्चिम बंगाल के गवर्नर डॉ. सीवी आनंद बोस के इस्तीफा देने के बाद किया गया। हिमाचल के नए गवर्नर कविंद्र गुप्ता जम्मू-कश्मीर विधानसभा के स्पीकर और जम्मू के मेयर रह चुके हैं। इसके बाद उन्हें जुलाई 2025 में लद्दाख का उप-राज्यपाल बनाया गया। उन्होंने पिछले साल 18 जुलाई को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के तीसरे उप राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। उन्होंने करीब 9 महीने तक इस पद सेवाएं दी और बीते कल अपने पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद उन्हें हिमाचल प्रदेश के गवर्नर की जिम्मेदारी दी गई है। 3 बार मेयर रह चुके जम्मू शहर के जानीपुर निवासी 66 वर्षीय कुलविंद्र गुप्ता निरंतर 3 बार जम्मू के महापौर भी रह चुके हैं। उन्होंने BJP की राज्य इकाई के महासचिव के तौर पर भी काम किया था।इसके अलावा 1993 से 1998 तक वह लगातार दो बार भारतीय जनता युवा मोर्चा की जम्मू कश्मीर इकाई के अध्यक्ष भी रहे। कविंद्र गुप्ता साल 2014 के विधानसभा चुनाव में गांधी नगर सीट से पहली बार MLA चुने गए थे। इसके बाद, उन्हें विधानसभा स्पीकर चुना गया। उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत विश्व हिंदू परिषद के सेक्रेटरी के तौर पर काम करते हुए हुई थी और इमरजेंसी के दौरान करीब 13 महीने वह जेल में भी रहे थे। अब तेलंगाना गवर्नर का जिम्मा संभालेंगे शुक्ल वहीं, हिमाचल के राज्यपाल शिव प्रताप शुल्क को तेलंगाना गवर्नर का जिम्मा दिया है। शुल्क ने 18 फरवरी 2023 को हिमाचल के राज्यपाल के तौर पर शपथ ली थी। उन्होंने लगभग 3 साल तक हिमाचल गवर्नर के तौर पर सेवाएं दी। इन प्रदेशों में भी बदले गवर्नर राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी आदेशों के अनुसार- तरनजीत सिंह संधु को दिल्ली का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। तेलंगाना के राज्यपाल जिश्नु देव वर्मा को महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। नंद किशोर यादव को नगालैंड और लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन को बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया। तमिलनाडू के राज्यपाल आरएन रवि अब से पश्चिम बंगाल और केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर तमिलनाडु के राज्यपाल का काम संभालेंगे, जबकि दिल्ली के राज्यपाल वीके सक्सेना को लद्दाख का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

कर्नाटक बजट में अल्पसंख्यकों पर खास ध्यान, शिक्षा-कल्याण के लिए खोला खजाना

बेंगलुरु कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को विधानसभा में राज्य का बजट पेश करते हुए अल्पसंख्यक समुदायों के लिए शिक्षा, कल्याण और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई नई योजनाओं की घोषणा की। इन योजनाओं का उद्देश्य अल्पसंख्यक छात्रों के लिए शैक्षिक सुविधाओं का विस्तार करना, कौशल विकास को बढ़ावा देना और आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित करना है। अपने बजट भाषण में मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों की बढ़ती मांग को देखते हुए छात्रावास सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अधिक मांग वाले जिलों में 150 क्षमता वाले 25 नए पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास शुरू किए जाएंगे। सीएम ने कहा कि मौजूदा 25 छात्रावासों की क्षमता में 50 और छात्रों की बढ़ोतरी की जाएगी। बजट पेश करते हुए, उन्होंने कहा कि सरकार माइनॉरिटी स्टूडेंट्स और कम्युनिटीज़ के लिए एजुकेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर और सोशल सपोर्ट सिस्टम को बढ़ाएगी, साथ ही एंटरप्रेन्योरशिप और स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देगी। स्कूलों का उन्नयन और उच्च शिक्षा की तैयारी उन्होंने कहा कि 2026-27 में 25 नए संत शिशुनाला शरीफ रेजिडेंशियल स्कूल शुरू किए जाएंगे। इसके लिए चालू वित्तीय वर्ष में 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने बजट भाषण में कहा कि 117 मौलाना आज़ाद मॉडल स्कूलों और उर्दू स्कूलों को 600 करोड़ रुपये की लागत से कर्नाटक पब्लिक स्कूलों के तौर पर अपग्रेड करने का काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस साल, 400 करोड़ रुपये की लागत से इसी मॉडल के तहत और 100 स्कूलों को अपग्रेड किया जाएगा। लर्निंग सेंटर्स और सिटीज़न सर्विस सेंटर्स का ऐलान सिद्धारमैया ने कहा कि 25 मोरारजी देसाई रेजिडेंशियल स्कूलों में PUC साइंस और कॉमर्स स्ट्रीम शुरू की जाएंगी। इसके अलावा 18 APJ अब्दुल कलाम रेजिडेंशियल स्कूलों में कॉमर्स स्ट्रीम शुरू की जाएगी। सिद्धारमैया ने कहा कि इसके अलावा, माइनॉरिटी रेजिडेंशियल स्कूलों के चुने हुए काबिल PUC स्टूडेंट्स को K-CET, JEE और NEET एग्जाम के लिए अच्छी कोचिंग देने के लिए सेंटर्स ऑफ़ एक्सीलेंस के तौर पर चार रेजिडेंशियल स्कूल बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के बीच लगातार सीखने को बढ़ावा देने के लिए लर्निंग सेंटर्स और सिटीज़न सर्विस सेंटर्स भी बनाए जाएंगे। चार नए वर्किंग विमेन हॉस्टल्स बनेंगे उन्होंने कहा कि वर्किंग विमेन हॉस्टल्स की डिमांड ज़्यादा है, इसलिए बेंगलुरु में 100 लोगों की कैपेसिटी वाले चार नए वर्किंग विमेन हॉस्टल्स शुरू किए जाएंगे। सिद्धारमैया ने कहा कि सरकार ने जैन, बुद्धिस्ट और सिख कम्युनिटीज़ के बड़े डेवलपमेंट के लिए 100 करोड़ रुपये भी रखे हैं। उन्होंने बुद्धिस्ट कम्युनिटी के धम्मचारियों को 6,000 रुपये महीने का मानदेय देने की घोषणा की। डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी अल्पसंख्यक छात्रों में से 5,000 छात्रों को लैपटॉप खरीदने के लिए 50,000 रुपये देने का भी उन्होंने ऐलान किया। आर्थिक सशक्तिकरण और स्वरोजगार मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक युवाओं को स्वरोजगार के अवसर देने के लिए सरकार फास्ट फूड ट्रक या मोबाइल किचन कियोस्क उपलब्ध कराएगी। इसके तहत परियोजना लागत का 75% या अधिकतम 3 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी। इसके अलावा महिला स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देने के लिए अल्पसंख्यक महिला सहकारी समितियां भी स्थापित की जाएंगी। अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं जैन, बौद्ध और सिख समुदायों के समग्र विकास के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान। बौद्ध समुदाय के धम्माचारियों को प्रति माह 6,000 रुपये मानदेय। हुब्बली और कलबुर्गी में नए हज भवनों का निर्माण। वक्फ संस्थानों के 31 महिला पीयू कॉलेजों को डिग्री कॉलेज में अपग्रेड किया जाएगा। सवनूर में एक नया महिला पीयू कॉलेज शुरू होगा। व्यावसायिक क्षेत्रों में स्थित वक्फ संपत्तियों का पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकास किया जाएगा। बीजेपी ने किया विरोध इन घोषणाओं पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। भारतीय जनता पार्टी की कर्नाटक इकाई ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार “तुष्टिकरण की राजनीति” कर रही है और राज्य के खजाने का बड़ा हिस्सा अपने वोट बैंक को सुरक्षित रखने के लिए खर्च कर रही है।  

साइबर वॉर में AI टूल का आगाज, RBI का MuleHunter फर्जी बैंक खातों को करेगा खत्म

 नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सहायक फर्म Reserve Bank Innovation Hub ने एक एडवांस्ड AI टूल तैयार किया है, जो साइबर क्रिमिनल्स, स्कैमर्स और डिजिटल अरेस्ट करने वालों पर नकेल कसेगा. इस AI टूल का नाम MuleHunter.AI है. यह AI टूल हर महीने लगभग 20,000 म्यूल अकाउंट्स का पता लगाकर उन्हें बंद कर रहा है। डिजिटल अरेस्ट, साइबर फ्रॉड और अन्य ऑनलाइन फर्जीवाड़ों के पीछे के एक विशाल फर्जी बैंक अकाउंट का नेटवर्क होता है, जिसे म्यूल अकाउंट भी कहते हैं। इन फर्जी अकाउंट (म्यूल अकाउंट) का यूज ठगी गई रकम ट्रांसफर को एक जगह से दूसरी जगह पर भेजने में इस्तेमाल किया जाता है. कई साल से साइबर क्रिमिनल्स म्यूल अकाउंट नेटवर्क का यूज करके भोले-भाले लोगों को शिकार बना रहे हैं। म्यूल अकाउंट को पकड़ना क्यों मुश्किल है म्यूल अकाउंट को पकड़ना इसलिए मुश्किल होता है क्योंकि ये बहुत थोड़े समय के लिए होते हैं. जैसे ही म्यूल अकाउंट को ओपन किया जाता है, उसके कुछ दिन बाद ही बंद कर दिया जाता है. ज्यादातर म्यूल अकाउंट को फर्जी डॉक्यूमेंट के आधार पर ओपन किया जाता है। अमित शाह भी कर चुके हैं तारीफ  केंद्रीय गृह मंत्री अमित ने हाल ही में बढ़ते हुए साइबर अपराधों के खिलाफ इसको एक अहम हथियार बताया है. ये टूल सिर्फ साइबर ठगी को ट्रैक नहीं करता है, बल्कि उसकी धड़कन को समझता है। म्यूल अकाउंट को कर देगा फ्रीज  साइबर ठगी के बाद जैसे ही म्यूल अकाउंट के जरिए रुपये को एक अकाउंट से दूसरे बैंक अकाउंट और फिर तीसरे बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किया जाता है. यह सिस्टम उसको ट्रैक करता है और ट्रांजैक्शन को रोक देता है. साथ ही बैंक अकाउंट को फ्रीज कर देता है।  कई बैंकों में यूज हो रहा सिस्टम  बताते चलें कि यह टूल अभी करीब दो दर्जन बैंक सिस्टम में यूज जा रहा है. MuleHunter.AI टूल का असली मकसद साइबर ठगों के खातों की पहचान करना और उनको बंद करना है। MuleHunter.AI क्या है     इसे Reserve Bank Innovation Hub ने डेवलप किया है, जो भारतीय रिजर्व बैंक की सहायक कंपनी है.      यह एक स्पेशल सिस्टम है, जो म्यूल अकाउंट्स के नेटवर्क को खत्म करने के लिए खासतौर से तैयार किया गया है.      अन्य सिस्टम के तहत घटना के बाद धोखाधड़ी पकड़ते हैं. यह टूल गोल्डन ऑवर में ही अपराध पकड़ लेता है.  कैसे काम करता है ये सिस्टम      यह टूल संदिग्ध लेनदेन को पैसा निकलने से पहले ही फ्रीज करने की काबिलियत रखता है.      यह मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करता है और तुरंत काम होता है.      यह बैंक खातों में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को डिटेक्ट करता है.      खास पैटर्न के आधार पर यह खातों के मिसयूज की तुरंत पहचान कर लेता है.  I4C ने कई लाख म्यूल अकाउंट की पहचान की  इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर (I4C) के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 तक 26.5 लाख लेयर-1 म्यूल अकाउंट्स की पहचान की गई थी. करीब 20,000 करोड़ रुपये साइबर क्रिमिमनल्स द्वारा लूटे जाने वाले पैसे में से 8,189 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस मिल चुके हैं। सबसे ज्यादा म्यूल अकाउंट कहां मिले हरियाणा के नूंह में 2025 में 1,000 से ज्यादा म्यूल अकाउंट पकड़े जा चुके हैं. वहीं जामताड़ा में 350 से ज्यादा ऐसे खाते पकड़े जा चुके हैं। होम मिनिस्ट्री ने दी है डेडलाइन  होम मिनिस्ट्री ने दिसंबर 2026 तक सभी फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट को MuleHunter प्लेटफॉर्म से कनेक्ट होने की डेडलाइन दी है. इसमें बैंक सरकारी फाइनेंशियल एजेंसियां भी हैं।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने रद्द किया फैमिली कोर्ट का आदेश, वॉट्सएप चैट से तलाक नहीं, पत्नी पर क्रूरता के आरोप साबित करने होंगे

मुंबई बॉम्बे हाई कोर्ट ने नासिक फैमिली कोर्ट की ओर से पति को दिया गया तलाक का फैसला रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि केवल WhatsApp या SMS संदेशों के आधार पर पत्नी पर मानसिक क्रूरता साबित नहीं की जा सकती, खासकर तब जब पत्नी को अपना पक्ष रखने का मौका ही नहीं दिया गया हो। इससे पहले, नासिक फैमिली कोर्ट ने पति की याचिका मंजूर करते हुए उसे तलाक दे दिया था। कोर्ट ने पति की गवाही और पति-पत्नी के बीच हुई व्हाट्सऐप व एसएमएस बातचीत को सबूत माना था। पति का आरोप था कि उसकी पत्नी उस पर पुणे में शिफ्ट होने का दबाव डालती थी, उसके परिवार का अपमान करती थी और इन संदेशों से उसे मानसिक क्रूरता का सामना करना पड़ा।  बॉम्बे हाई कोर्ट ने तलाक के एक मामले में अहर फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने नासिक फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को रद्द करते हुए कहा कि किसी भी मामले में फैसला सुनाने से पहले दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए। पत्नी को अपनी सफाई देने का अवसर दिए बिना तलाक देना सही नहीं है। बता दें कि नासिक फैमिली कोर्ट ने पति की याचिका स्वीकार करते हुए उसे तलाक दे दिया था। कोर्ट ने पति के बयान और पति-पत्नी के बीच हुए व्हाट्सऐप और एसएमएस संदेशों को मुख्य सबूत माना था। पति ने लगाए थे यह आरोप पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी उस पर पुणे शिफ्ट होने का दबाव बना रही थी। उसने कोर्ट में पत्नी के साथ की गई व्हाट्सऐप चैट भी साझा की थी। साथ ही उसने आरोप लगाया था कि उसके ससुराल वालों के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। इससे उसे मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। नासिक फैमिली कोर्ट ने पति के हक में फैसला सुनाते हुए कहा था कि अगर पत्नी पति पर माता-पिता को छोड़कर अलग रहने के लिए दबाव बनाती है और ससुराल वालों के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करती है तो इसे मानसिक क्रूरता माना जा सकता है। इसी आधार पर कोर्ट ने पति को तलाक दे दिया था। अगर पत्नी पति पर माता-पिता को छोड़कर अलग रहने के लिए दबाव बनाती है और ससुराल वालों के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करती है तो इसे मानसिक क्रूरता माना जा सकता है। हाई कोर्ट ने फैसले नासिक कोर्ट के फैसल पर जताई आपत्ति नासिक कोर्ट के इस फैसले पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने असहमति जताई। हाई कोर्ट ने कहा कि पत्नी को इन मैसेजों के बारे में अपनी बात रखने या उन्हें चुनौती देने का कोई मौका नहीं दिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल व्हाट्सऐप चैट को आधार बनाकर तलाक का फैसला नहीं दिया जा सकता। जब तक दोनों पक्षों की बात नहीं सुनी जाती ऐसा निर्णय उचित नहीं माना जाएगा। हाई कोर्ट ने मामले को फिर से नासिक फैमिली कोर्ट को भेज दिया है। अब पत्नी को भी अपना पक्ष रखने और सबूत पेश करने का पूरा अवसर दिया जाएगा।  

मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर: अमेरिका-इजरायल के बाद एक और देश की ईरान पर अटैक की तैयारी

इजरायल अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर रहे ईरान की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। खबर है कि अब अजरबैजान ने ड्रोन हमले की बदला लेने की कसम खाई है। साथ ही मुल्क के राष्ट्रपति ने अटैक का जवाब देने के निर्देश अपनी सेना को दे दिए हैं। खबर है कि अजरबैजान ने ईरान से सफाई देने की भी मांग की है। ईरान ने कतर, कुवैत, सऊदी अरब समेत कई मुल्कों में हमले किए हैं। भड़क गया अजरबैजान राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने ईरान पर 'आतंकवाद और आक्रामकता का निराधार कृत्य' करने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि उनकी सेना को जवाबी कार्रवाई की तैयारी और उसे लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। अजरबैजान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ईरान ने नखचिवान की ओर चार ड्रोन भेजे थे, जिनमें से एक को अजरबैजानी सेना ने निष्क्रिय कर दिया, जबकि अन्य ने नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाया, जिनमें एक स्कूल भी शामिल था जहां कक्षाएं चल रही थीं। बड़ी बैठक हुई रॉयटर्स के अनुसार, राष्ट्रपति अलीयेव ने सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा, 'हम अजरबैजान के खिलाफ इस बगैर उकसावे के किए गए आतंकवादी कृत्य और आक्रमण को सहन नहीं करेंगे। हमारे सशस्त्र बलों से तैयारी करने और उचित जवाबी कार्रवाई करने के निर्देश दे दिए गए हैं।' उन्होंने कहा, 'हम किसी भी दुश्मन ताकत के खिलाफ अपनी शक्ति दिखाने के लिए तैयार हैं। उन्हें ईरान में ये नहीं भूलना चाहिए।' बातचीत की मांग एक्सियोस से बातचीत में अजरबैजान के अमेरिका में राजदूत खजार इब्राहिम ने कहा कि उनका मुल्क उचित उपाय कर रहा है। जब पूछा गया कि क्या वह अगले हमले को लेकर चिंतित हैं। इसपर उन्होंने कहा कि यह चिंता की बात नहीं है। उन्होंने कहा, 'इसके बजाय हम हिसाब लगा रहे हैं, तथ्य जुटा रहे हैं और हम फैसले ले रहे हैं।' एजेंसी वार्ता के अनुसार, अजरबैजान के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि ईरान की ओर से दागे गए कई ड्रोन उनके क्षेत्र में गिरे हैं। इनमें से एक ड्रोन ने हवाई अड्डे की टर्मिनल बिल्डिंग को क्षतिग्रस्त किया है, जबकि दूसरा एक स्कूल भवन के पास जाकर गिरा। मंत्रालय ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जतायी और साथ ही ईरान से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि इस तरह की घटना दोबारा न हो। साथ ही मंत्रालय ने अजरबैजान में ईरान के राजदूत को अपनी कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर करने के लिए तलब किया। ईरान क्या बोला ईरान के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ ने अजरबैजान की ओर ड्रोन भेजने से इनकार किया है। ईरान ने बार-बार युद्ध में तेल और अन्य नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने से इनकार किया है, हालांकि उसके ड्रोन और मिसाइल हमलों ने इन स्थलों को निशाना बनाया है।