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रूस ने टेलीग्राम के CEO पावेल डुरोव के खिलाफ आतंकी गतिविधियों का मामला दर्ज किया

 मास्को रूस ने लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम (Telegram) के फाउंडर पावेल डुरोव के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के आरोप में आपराधिक मामला दर्ज किया है. रूस के सरकारी अखबार 'रोस्सिस्काया गजेटा' (Rossiyskaya Gazeta) ने यह जानकारी दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, यह जांच रूस की सुरक्षा एजेंसी फेडरल सिक्योरिटी सर्विस (FSB) के सबूतों के आधार पर शुरू की गई है. अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, पावेल डुरोव की भूमिका की जांच रूस की आपराधिक संहिता की धारा 205.1 (आतंकी गतिविधियों में सहायता) के तहत की जा रही है. फिलहाल डुरोव की ओर से इस मामले पर कोई त्वरित प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है. हालांकि, टेलीग्राम ने रूस के उन आरोपों को खारिज किया है, जिनमें कहा गया था कि यह ऐप आपराधिक गतिविधियों का अड्डा है और उस पर पश्चिमी व यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों का प्रभाव है. टेलीग्राम का दावा है कि उसके दुनिया भर में 1 अरब से अधिक एक्टिव यूजर्स हैं और वह अपने यूजर्स की निजता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करता है. रूस के स्टेट कम्युनिकेशन रेगुलेटर ने टेलीग्राम पर कुछ प्रतिबंध लगाए हैं. अधिकारियों का कहना है कि कंपनी अपने प्लेटफॉर्म से 'कट्टरपंथी सामग्री' हटाने में विफल रही है. रूस में टेलीग्राम सार्वजनिक और निजी संवाद के लिए बेहद लोकप्रिय प्लेटफॉर्म है, जिसका उपयोग आम नागरिकों के साथ-साथ पत्रकार और सरकार के आलोचक भी करते हैं. इसी बीच, मास्को प्रशासन रूसियों को एक नए, सरकारी समर्थन वाले मैसेजिंग ऐप MAX की ओर स्थानांतरित करने की कोशिश कर रहा है, जिसे लगभग एक साल पहले लॉन्च किया गया था. पावेल डुरोव के खिलाफ कार्रवाई को टेलीग्राम पर दबाव बढ़ाने और घरेलू विकल्प को बढ़ावा देने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है. डुरोव फिलहाल दुबई में रहते हैं. टेलीग्राम ऐप का हेडक्वार्टर भी यहीं है.

अब ‘केरल’ नहीं ‘केरलम’! राज्य के नाम बदलाव पर केंद्र की हरी झंडी

केरल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 'सेवातीर्थ' में हुई मंत्रिमंडल की पहली बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए सूचना और प्रसारण मंत्री अश्चिनी वैष्णव ने पत्रकारों को बताया कि भाषाई आधार पर राज्यों के गठन के बाद से ही केरल के नाम को बदलने की मांग की जा रही थी। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति 'केरल नाम परिवर्तन विधेयक, 2026' के मसौदे को केरल विधानसभा की स्वीकृति के लिए भेजेंगी। इसके बाद संविधान के अनुच्छेद तीन के तहत राष्ट्रपति इस विधेयक पर केरल विधानसभा का मत प्राप्त करेंगी। केंद्रीय मंत्री ने आगे बताया कि राज्य विधानसभा की स्वीकृति के बाद केंद्र सरकार इस पर आगे कार्रवाई करेगी और इस विधेयक को संसद में पारित कराने के लिए पेश किया जायेगा। इससे पहले केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को केरल का नाम केरलम् करने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसमें कहा गया था कि मलयालम भाषा में राज्य का नाम केरलम् है। एक नवंबर 1956 को राज्यों का गठन भाषाई आधार पर किया गया था। बता दें कि 1 नवंबर को केरल परिवार दिवस मनाया जाता है। इस प्रस्ताव में कहा गया कि राष्ट्र के स्वाधीनता संग्राम के समय से ही मलयालम भाषी लोगों के लिए एक एकीकृत राज्य के गठन की मांग थी, लेकिन संविधान की पहली अनुसूची में हमारे राज्य का नाम केरल अंकित किया गया। केरल विधानसभा के प्रस्ताव में कहा गया है, " यह सभा केन्द्र सरकार से सर्वसम्मति से आग्रह करती है कि वह संविधान के अनुच्छेद तीन के तहत केरल के नाम को केरलम् करने के लिए तत्काल कदम उठाए।" गौरतलब है कि केरल में इस साल चुनाव भी होने हैं। इसके बाद केरल सरकार ने केन्द्र सरकार से इस संबंध में कार्रवाई का अनुरोध किया था। इस पर केन्द्रीय गृह मंत्रालय में विचार किया गया और प्रस्ताव को गृहमंत्री अमित शाह के अनुमोदन के बाद इस पर कैबिनेट के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया। इस प्रस्ताव पर कानून और न्याय मंत्रालय के कानूनी और विधायी विभाग की राय के बाद इसे मंत्रिमंडल के समक्ष लाया गया था।  

ईरान में हेलिकॉप्टर हादसा, 4 सैनिकों की मौत, परमाणु प्लांट के शहर में मलबा फैलने से हड़कंप

 इस्फहान ईरान में युद्ध के माहौल के बीच सेना का एक हेलिकॉप्टर इस्फहान प्रांत में क्रैश कर गया है. सेना का हेलिकॉप्टर एक फ्रूट होलसेल मार्केट में क्रैश हुआ है. इस हादसे में अबतक 4 लोगों की मौत हो गई है. हेलिकॉप्टर क्रैश के बाद ईरान के न्यूक्लियर प्लांट वाले प्रांत इस्फहान में हेलिकॉप्टर का मलबा फैल गया है.  इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़ी तस्नीम न्यूज़ एजेंसी ने बताया कि हेलिकॉप्टर ईरानी आर्मी की एविएशन यूनिट का था और यह इस्फ़हान प्रांत के खोमेनी शाहर काउंटी के दारचेह शहर के फल और सब्ज़ी मार्केट एरिया में क्रैश हो गया. एजेंसी ने कहा कि क्रैश की वजह टेक्निकल गड़बड़ी थी. इस घटना में पायलट और को-पायलट के अलावा मार्केट के दो व्यापारी भी मारे गए.  रॉयटर्स ने बताया कि ईरान का एयर सेफ्टी रिकॉर्ड खराब है, यहां बार-बार क्रैश होते हैं, जिनमें से कई एयरक्राफ्ट 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले खरीदे गए थे और मेंटेनेंस के लिए ओरिजिनल स्पेयर पार्ट्स नहीं थे. पिछले हफ़्ते ईरान की रेगुलर एयर फ़ोर्स का एक US-बिल्ट F-4 फाइटर विमान पश्चिमी हमादान प्रांत में क्रैश हो गया था. जिसमें एक पायलट की ट्रेनिंग फ़्लाइट के दौरान मौत हो गई.ईरान की न्यूज एजेंसियां ये तो जरूर कह रही हैं कि हादसे की वजह तकनीकी गड़बड़ी है, लेकिन इसकी सही वजह नहीं पता चल पाई है.  यह क्रैश ऐसे समय में हुआ है जब US ने ईरान पर हमले की धमकी दी है. बता दें कि ईरान और अमेरिका के बीच यूरेनियम एनरिचमेंट और न्यूक्लियर हथियार रखने को लेकर चल रही बात अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है. इस मुद्दे पर वॉशिंगटन और तेहरान के बीच काफी मतभेद है.  इस समय अमेरिकी खतरे को देखते हुए ईरानी मिलिट्री हाई अलर्ट पर है क्योंकि ट्रंप देश भर में अमेरिका की मिलिट्री ताकत बनाते हुए ईरान पर हमला करने के ऑप्शन पर विचार कर रहे हैं. पिछले हफ्ते ईरान की रेगुलर एयर फोर्स का एक US-बिल्ट F-4 फाइटर प्लेन पश्चिमी प्रांत हमादान में क्रैश हो गया था, जिसमें एक ट्रेनिंग फ्लाइट के दौरान एक पायलट की मौत हो गई थी.

राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति का ऐलान, गृह मंत्रालय ने PRAHAAR के तहत खतरों पर दी जानकारी

नई दिल्ली गृह मंत्रालय (MHA) ने पहली बार नेशनल काउंटर टेररिज्म पॉलिसी (राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति) जारी की है. 'PRAHAAR' (प्रहार) नाम की इस डॉक्यूमेंटेड पॉलिसी में कहा गया है कि भारत सीमा पार से राज्य-प्रायोजित आतंकवाद से प्रभावित है, जिसमें जिहादी आतंकवादी संगठनों के साथ-साथ उनके मुखौटा संगठन भी भारत में आतंकी हमलों की साजिश, समन्वय, सुविधा और उन्हें अंजाम देने में लगे हुए हैं. मंत्रालय ने  कहा कि CBRNED (केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल, न्यूक्लियर, एक्सप्लोसिव, डिजिटल) सामग्री तक पहुंचने और उसका इस्तेमाल करने की आतंकवादी कोशिशों को बाधित करना और रोकना भारत में आतंकवाद विरोधी (CT) एजेंसियों के लिए चुनौती बनी हुई है. साथ ही, यह भी कहा कि सरकारी और गैर-सरकारी कारकों द्वारा ड्रोन और रोबोटिक्स का खतरनाक उद्देश्यों के लिए गलत इस्तेमाल करने का खतरा भी चिंता का एक और विषय है. क्रिमिनल हैकर्स और देश साइबर अटैक के जरिये भारत को निशाना बनाते रहते हैं. काउंटर टेररिज्म पॉलिसी डॉक्यूमेंट में कहा गया है, "भारत अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) जैसे वैश्विक आतंकी समूहों के निशाने पर रहा है, जो स्लीपर सेल के जरिये देश में हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहे हैं." आगे कहा गया है कि दूसरे देशों की जमीन से काम करने वाले हिंसक चरमपंथियों ने आतंकवाद को बढ़ावा देने की साजिशें रची हैं. डॉक्यूमेंट में कहा गया है, "सीमा पार से उनके हैंडलर अक्सर पंजाब और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों और हमलों को आसान बनाने के लिए ड्रोन समेत नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं. भारत में आतंकी हमलों को अंजाम देने और उन्हें आसान बनाने के लिए लॉजिस्टिक्स और भर्ती के लिए आतंकवादी समूह तेजी से संगठित आपराधिक नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं." गृह मंत्रालय के मुताबिक, प्रोपेगैंडा, संचार, फंडिंग और आतंकी हमले को निर्देशित करने के लिए, ये आतंकवादी समूह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ-साथ 'इंस्टेंट मैसेजिंग एप्लीकेशन' का भी इस्तेमाल करते हैं. पॉलिसी में कहा गया है कि एन्क्रिप्शन, डार्क वेब, क्रिप्टो वॉलेट आदि जैसी तकनीक में विकास ने इन समूहों को गुमनाम रूप से काम करने को आसान बनाया है. आतंकवादी हमलों की रोकथाम पॉलिसी डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में जॉइंट टास्क फोर्स ऑन इंटेलिजेंस (JTFI) के साथ मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) का संचालन, देश भर में CT से जुड़े इनपुट्स को अच्छे से और रियल टाइम में शेयर करने और बाद में रुकावट से बचाने के लिए नोडल प्लेटफॉर्म बना रहेगा. इसमें कहा गया है, "आईबी में एमएसी/जेटीएफआई के तंत्र के तहत केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस बलों के साथ सीटी संचालन के लिए घनिष्ठ साझेदारी बनाई गई है." पॉलिसी में आगे कहा गया है कि हाल के दिनों में, गैर-कानूनी हथियार सिंडिकेट और आतंकवादी समूहों के बीच साठगांठ सामने आई है, और इससे निपटने के लिए, अलग-अलग भारतीय राज्यों में इंटेलिजेंस एजेंसियों के साथ-साथ संबंधित सुरक्षा एजेंसियों द्वारा मिलकर दखल दिया जा रहा है. डॉक्यूमेंट में कहा गया है, "भारतीय कानूनों के तहत कानूनी ढांचे के जरिये आतंकी फंडिंग नेटवर्क को बाधित करने पर विशेष जोर दिया गया है." पॉलिसी में आगे कहा गया है कि भारत को जल, जमीन और हवा, तीनों मोर्चों पर आतंकवादी खतरों का सामना करना पड़ रहा है. इसमें आगे कहा गया है, "भारतीय सीमा की सुरक्षा करने वाले बलों (डिफेंस, सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स) के साथ-साथ इमिग्रेशन अथॉरिटीज भारतीय सीमा को सुरक्षित करने के लिए स्टेट-ऑफ-द-आर्ट टूल्स और टेक्नोलॉजी से लैस हैं. भारतीय अर्थव्यवस्था के जरूरी क्षेत्रों जैसे पावर, रेलवे, एविएशन, पोर्ट्स, डिफेंस, स्पेस और परमाणु ऊर्जा को सरकारी और नॉन-स्टेट कारकों से बचाने के लिए क्षमता का विकास किया गया है. प्रतिक्रिया पॉलिसी डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि किसी भी हमले पर स्थानीय पुलिस सबसे पहले जवाब देती है, जिसे स्पेशल स्टेट और सेंट्रल एंटी-टेरर फोर्स मदद करती हैं. पॉलिसी में कहा गया है, "आतंक के खतरे के नजरिये से कमजोर राज्यों ने हमलों का जवाब देने के लिए स्पेशल CT फोर्स बनाई हैं. नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) गृह मंत्रालय के तहत नोडल नेशनल काउंटर-टेरर फोर्स है, जो बड़े आतंकी हमलों का जवाब देने में राज्य बल की मदद करने के साथ-साथ ऐसे राज्य बल की क्षमता निर्माण भी करता है." क्षमताओं का एकत्रीकरण पॉलिसी में कहा गया है कि सिक्योरिटी और लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों का आधुनिकीकरण CT रिस्पॉन्स में अहम रोल निभाता है. इसमें कहा गया, "CT एजेंसियों के लिए नई स्किल्स और रणनीति की ट्रेनिंग के अलावा, लेटेस्ट टूल्स, टेक्नोलॉजी और वेपनरी नियमित रूप से हासिल की जाती हैं. ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट के ट्रेनिंग मॉड्यूल और इंफ्रास्ट्रक्चर को और आधुनिक बनाने की कोशिश की गई है. साथ ही ट्रेनिंग फैकल्टी को अपग्रेड करके, आतंकी गतिविधियों से निपटने के लिए सर्वोत्तम कार्यप्रणाली पर ट्रेनिंग देने की कोशिश की गई है." भारतीय युवाओं को भर्ती करने की कोशिश में आतंकवादी समूह पॉलिसी डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि आतंकवादी समूह लगातार भारतीय युवाओं को भर्ती करने की कोशिश कर रहे हैं. इन कोशिशों को नाकाम करने के लिए, भारतीय इंटेलिजेंस और लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियां ​​लगातार आतंकवादी समूहों के इरादों को नाकाम कर रही हैं. एक बार पहचाने जाने के बाद, इन युवाओं पर एक ग्रेडेड पुलिस कार्रवाई की जाती है, जिसका उद्देश्य कई हितधारकों वाली सेटिंग में कट्टरपंथी बनाने और हिंसक अतिवाद की समस्या को पूरी तरह से खत्म करना है. कट्टरपंथी बनाने के स्तर के आधार पर व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाती है. समुदाय और धार्मिक नेताओं की भूमिका इसमें कहा गया है कि समुदाय और धार्मिक नेता, उदारवादी प्रचारक और NGOs कट्टरपंथ और चरमपंथी हिंसा के बुरे नतीजों के बारे में जागरूकता फैलाने में लगे हुए हैं. इसके अलावा, युवाओं को रचनात्मक तरीके से शामिल किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शांति और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए खतरा बन सकने वाले मुद्दों पर रोक लगाई जा सके. जेलों में कट्टरपंथ को रोकने के लिए, जेल स्टाफ को समय-समय पर सावधान किया जाता है कि वे हार्ड कोर कैदियों द्वारा कमजोर कैदियों को कट्टरपंथी बनाने की हरकतों को रोकें.

मौसम की सटीक भविष्यवाणी के लिए AI बना गेमचेंजर, डॉ. रविचंद्रन का बड़ा दावा

 नई दिल्ली मौसम विज्ञान में एक बड़ा बदलाव आने वाला है. पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन ने  AI इम्पैक्ट समिट 2026 में कहा कि पारंपरिक भौतिकी आधारित मॉडलों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के साथ मिलाकर ही जलवायु की बढ़ती अनिश्चितताओं से निपटा जा सकता है. नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट 2026 में 'जलवायु extremes को संभालने और टिकाऊ सिस्टम बनाने के लिए AI का उपयोग' टॉपिक पर एक पैनल डिस्कशन के दौरान उन्होंने बताया कि पुराने मॉडल बड़े इलाकों के मौसम की भविष्यवाणी में माहिर हैं, लेकिन आज के मौसम में छोटे-छोटे स्थानीय बदलाव और समय के साथ होने वाले उतार-चढ़ाव को समझने के लिए AI जरूरी है. हाथी और चींटी की दिलचस्प मिसाल पेश की डॉ. रविचंद्रन ने वैज्ञानिकों के सामने आने वाली चुनौती को एक मजेदार उदाहरण से समझाया. उन्होंने कहा, "पहले हमें सिर्फ 'हाथी' को ट्रैक करना पड़ता था, यानी बड़े पैमाने के मौसम सिस्टम. लेकिन अब जलवायु परिवर्तन की वजह से हमें उस हाथी पर बैठी 'चींटी' को भी देखना है. हमें बड़े स्थान की गति और छोटे-छोटे स्थानीय समय के बदलाव दोनों को समझना होगा. उनका मतलब था कि भौतिकी के मॉडल बड़े स्तर पर अच्छा काम करते हैं, लेकिन AI छोटे स्तर पर, समय के साथ होने वाले बदलावों को बेहतर तरीके से पकड़ लेता है. खासकर बादल फटने (cloudburst) जैसी घटनाओं की भविष्यवाणी अभी बहुत मुश्किल है. दोनों को मिलाकर ही सटीक पूर्वानुमान संभव होगा. इसके लिए कई पहलुओं पर काम करना होगा. मॉडल में कमियां कम करें उन्होंने कहा कि पुराने मॉडल में कई धारणाएं होती हैं, जिनसे गलतियां बढ़ती हैं. AI इन गलतियों को कम कर सकता है और शुरुआती हालात को बेहतर बना सकता है. 150 साल पुराना डेटा खोलें भारत मौसम विभाग (IMD) के पास 150 साल का बहुत बड़ा डेटा है।.डॉ. रविचंद्रन ने कहा कि इसे युवा शोधकर्ताओं और अलग-अलग क्षेत्र के विशेषज्ञों के लिए खोल देना चाहिए. छोटे स्तर पर पूर्वानुमान AI की मदद से बड़े मॉडल को 1 किलोमीटर तक छोटा करके स्थानीय स्तर पर सटीक मौसम बता सकते हैं. यह लोगों की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा बदलाव होगा.  उन्होंने कहा कि AI पर भरोसा तभी बनेगा जब उसकी जांच-पड़ताल अच्छे से हो. सार्वजनिक सुरक्षा के लिए AI के नतीजों को सही साबित करना बहुत जरूरी है. इसके लिए सभी क्षेत्रों को साथ मिलकर काम करना होगा. डॉ. रविचंद्रन ने कहा कि अब सिर्फ एक विभाग या एक तरीके से सोचना बंद करना होगा. हमें जीव विज्ञान के विशेषज्ञ, डेटा साइंटिस्ट और कई क्षेत्रों के शोधकर्ताओं को साथ लाना होगा. अलग-अलग नजरिए से डेटा देखने से ही जलवायु के प्रति मजबूत भारत बन सकता है. बता दें कि यह पैनल डिस्कशन इंडियन AI रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (IAIRO), अत्रिया यूनिवर्सिटी, C-DAC, IITM/MoES और लोकनीति ने आयोजित की थी इसमें डॉ. रविचंद्रन के अलावा इंजी. मनीष भारद्वाज (राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव), डॉ. शिवकुमार कल्याणरमण (अनुसंधान राष्ट्रीय फाउंडेशन के CEO), प्रो. अमित शेठ (IAIRO के संस्थापक निदेशक और यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ कैरोलिना के प्रोफेसर, डॉ. प्रफुल चंद्रा (अत्रिया यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और डीन रिसर्च), डॉ. कार्तिक काशीनाथ (NVIDIA, अमेरिका के डिस्टिंग्विश्ड साइंटिस्ट), प्रो. देव नियोगी (यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास एट ऑस्टिन के प्रोफेसर), संदीप सिंघल (अवाना कैपिटल के सीनियर एडवाइजर) और डॉ. अक्षरा कागिनलकर (अत्रिया यूनिवर्सिटी में क्लाइमेट चेंज सेंटर की प्रोफेसर) शामिल थे.

एसी और स्लीपर कोच फुल, फ्लाइट महंगी; होली के लिए देहरादून से यात्रा मुश्किल

देहरादून होली से पहले ट्रेनें फुल हैं, फ्लाइट के किराए महंगे हो चुके हैं और बसों में सीटों को लेकर मारामारी मची है। देहरादून से देश के अलग-अलग हिस्सों के लिए चलने वाली कई ट्रेनों में नो रूम इन ट्रेनों में वेटिंग टिकट भी जारी नहीं होगा।रेलवे के आरक्षण सिस्टम के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, होली से ठीक पहले की तारीखों में यात्रियों का दबाव चरम पर है। देहरादून से दिल्ली, प्रयागराज, अमृतसर, कोटा, गोरखपुर और गुजरात की ओर जाने वाली अधिकांश ट्रेनों में एसी और स्लीपर दोनों श्रेणियों में लंबी वेटिंग चल रही है। कई ट्रेनों में वेटिंग तीन अंकों तक पहुंच चुकी है और कुछ में ‘नो रूम’ का स्टेटस दिख रहा है। 3 मार्च के बाद कुछ ट्रेनों में आंशिक राहत जरूर दिखाई दे रही है, लेकिन 6 से 10 मार्च के बीच वापसी की तारीखों में फिर से आरएसी और वेटिंग तेजी से बढ़ रही है, जिससे साफ है कि त्योहार के बाद लौटने वाली भीड़ भी उतनी ही ज्यादा रहने वाली है। पहले जानिए ट्रेनों की स्थिति… हरादून-कोटा एसी एक्सप्रेस में भारी दबाव देहरादून से कोटा जाने वाली देहरादून-कोटा एसी एक्सप्रेस में होली से पहले जबरदस्त दबाव है। 28 फरवरी को थर्ड एसी (3A) में 26 और सेकंड एसी (2A) में 15 वेटिंग चल रही है। 1 मार्च को भी 3A में वेटिंग और 2A में आरएसी की स्थिति बनी हुई है। 2 मार्च को 3A में RAC 29 है, जबकि 2A में कुछ सीटें उपलब्ध हैं। हालांकि 3 मार्च को 3A में 98 और 2A में 18 सीटें खाली हैं, जिससे आंशिक राहत मिल रही है। लेकिन 6 से 8 मार्च के बीच फिर से 3A में आरएसी शुरू हो गई है, जो त्योहार के बाद लौटने वाली भीड़ का संकेत है। अमृतसर रूट पर भी सीटों की किल्लत देहरादून-अमृतसर एक्सप्रेस में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। 28 फरवरी को 3A में 27 और स्लीपर में RAC 31 की स्थिति है। 1 और 2 मार्च को भी दोनों श्रेणियों में लंबी वेटिंग बनी हुई है। 3 से 5 मार्च तक 3A में लगातार वेटिंग चल रही है। हालांकि 6 और 7 मार्च को स्लीपर में कुछ सीटें उपलब्ध हैं, लेकिन एसी कोच में दबाव बना हुआ है। इससे साफ है कि पंजाब की ओर जाने वाले यात्रियों की संख्या अधिक है। प्रयागराज (सूबेदारगंज) लिंक एक्सप्रेस लगभग फुल देहरादून से सूबेदारगंज (प्रयागराज) जाने वाली लिंक एक्सप्रेस में भी टिकट मिलना मुश्किल हो गया है। 28 फरवरी को 3A में 65 और 2A में 49 वेटिंग दर्ज की गई है। 1 और 2 मार्च को भी वेटिंग लंबी बनी हुई है। 3 मार्च को 3A में 19 और 2A में 11 वेटिंग है। स्लीपर क्लास में 28 फरवरी को वेटिंग 128 तक पहुंच गई है। 4 मार्च को 2A में कुछ सीटें उपलब्ध हैं, लेकिन 3A में आरएसी चल रहा है। वहीं 12 और 13 मार्च को भी आरएसी की स्थिति बनी हुई है, जिससे वापसी के दौरान भी भीड़ अधिक रहने का अनुमान है। काठगोदाम और दिल्ली रूट पर भी बढ़ा दबाव देहरादून-काठगोदाम एक्सप्रेस में 28 फरवरी को स्लीपर में 101 और फर्स्ट एसी में 4 वेटिंग है। 3 मार्च को स्लीपर में RAC 11 है, जबकि 6 मार्च को कुछ सीटें उपलब्ध हैं। देहरादून-नई दिल्ली जनशताब्दी एक्सप्रेस में अधिकांश तारीखों पर सीटें उपलब्ध हैं, लेकिन 5 मार्च को चेयर कार में 30 वेटिंग दर्ज की गई है। देहरादून-शताब्दी एक्सप्रेस में 28 फरवरी से 3 मार्च के बीच चेयर कार और एग्जीक्यूटिव क्लास में सीटें उपलब्ध हैं, जिससे यात्रियों को कुछ राहत मिल सकती है। वंदे भारत एक्सप्रेस में भी होली से पहले वेटिंग देहरादून से दिल्ली और आनंद विहार के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस में भी होली से पहले वेटिंग बढ़ गई है। 1 मार्च को चेयर कार में 98 तक वेटिंग दर्ज की गई है। 28 फरवरी को चेयर कार और एग्जीक्यूटिव क्लास दोनों में वेटिंग है। हालांकि 2 और 3 मार्च को कुछ सीटें उपलब्ध हैं, लेकिन 8 मार्च को फिर से वेटिंग शुरू हो गई है। गोरखपुर और गुजरात रूट की ट्रेनों में भी लंबी वेटिंग देहरादून-गोरखपुर राप्ती गंगा एक्सप्रेस में स्लीपर और एसी दोनों कोच में लंबी वेटिंग चल रही है। 26 फरवरी को स्लीपर में “नो रूम” की स्थिति है। मार्च के पहले सप्ताह में भी वेटिंग 70 से अधिक बनी हुई है। इसी तरह बंगाल जाने वाली कुंभ एक्सप्रेस और गुजरात के ओखा जाने वाली उत्तरांचल एक्सप्रेस में भी 2A, 3A और स्लीपर में लंबी वेटिंग दर्ज की गई है। कई तारीखों में इन ट्रेनों में भी नो रूम का स्टेटस दिख रहा है। फ्लाइट के किराए में भी जबरदस्त बढ़ोतरी रेलवे में भीड़ बढ़ने के साथ ही हवाई किराए में भी जबरदस्त उछाल आया है। जौलीग्रांट एयरपोर्ट से दिल्ली जाने वाली इंडिगो फ्लाइट का सामान्य किराया करीब 3000 रुपए है, लेकिन 28 फरवरी और 1 मार्च को यह बढ़कर 4174 से 5749 रुपए तक पहुंच गया है। मुंबई के लिए सामान्य किराया 7961 रुपए है, जो 28 फरवरी को 9301 और 1 मार्च को 9660 रुपए तक पहुंच गया। अहमदाबाद के लिए 5536 रुपए का किराया 28 फरवरी को 10,501 रुपए दिखा रहा है। बेंगलुरु के लिए सामान्य 8413 रुपए का किराया 9463 रुपए तक पहुंच गया है। जयपुर के लिए 4423 रुपए का किराया बढ़कर 8938 रुपए तक हो गया। बसों में भी सीटों के लिए मारामारी, किराया दोगुना देहरादून से लखनऊ और कानपुर जाने वाली स्लीपर वॉल्वो बसों में 28 फरवरी से सीटों को लेकर मारामारी है। आम दिनों में 1500 रुपए के आसपास रहने वाला किराया होली के आसपास 2500 से 3000 रुपए तक पहुंच गया है। बस ऑपरेटरों का कहना है कि एडवांस बुकिंग पहले ही फुल हो चुकी है और अब स्पॉट बुकिंग पर किराया ज्यादा लिया जा रहा है। 3 मार्च को आंशिक राहत, वापसी में भी भीड़ रेलवे के आंकड़ों से साफ है कि 28 फरवरी से 2 मार्च तक सबसे ज्यादा दबाव है। 3 मार्च को कई ट्रेनों में सीटें उपलब्ध हैं। हालांकि 6 से 10 मार्च के बीच वापसी की भीड़ के कारण फिर से वेटिंग बढ़ रही है। यात्रियों को सलाह दी जा … Read more

बजट का बड़ा दांव: गुजरात को 29 गुना ज्यादा फंड, 2027 में दौड़ेगी बुलेट ट्रेन

अहमदाबाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के गृह राज्य गुजरात को केंद्रीय बजट में रेल इंफ्रा को मजबूत करने के लिए 29 गुना अधिक धनराशि मिली है। भारतीय रेलवे में रिकॉर्ड आवंटन से विकास को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। गुजरात के रेल बजट में 17,366 करोड़ का ऐतिहासिक आवंटन मिला है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पहले मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के दौड़ने की तारीख का पहले ही ऐलान कर चुके हैं। गुजरात में 15 अगस्त, 2027 को पहली बुलेट ट्रेन चलेगी। 2027 गुजरात के लिए चुनावी साल है। इसी वर्ष के अंत में गुजरात में विधानसभा चुनाव भी होंगे। गुजरात को मिले 17,366 करोड़ रेलवे ने बजट में मिली 29 गुना धनराशि कहां पर खर्च की जाएगी। इसकी जानकारी साझा की है। यह धनरशि मोटे तौर पर सुरक्षा, बुलेट ट्रेन और आधुनिक स्टेशनों से गुजरात में रेल परिवहन का नया युग लेने जाने पर खर्च की जाएगी। रेलवे के अनुसार गुजरात को कुल 17,366 करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं।यह धनराशि साल 2009–14 के मुकाबले 29 गुना है। तब गुजरात के लिए औसत वार्षिक रेल बजट आवंटन 589 करोड़ रुपये था, जो अब 2026–27 में बढ़कर 17,366 करोड़ रुपये हो गया है। रेलवे के अनुसार गुजरात में वर्तमान में 1,28,748 करोड़ रुपये की लागत से रेलवे अवसंरचना परियोजनाएं प्रगति पर हैं। इनमें नई रेल लाइनों का निर्माण, स्टेशनों का पुनर्विकास तथा प्रमुख सुरक्षा उन्नयन शामिल हैं। रेल नेटवर्क मजबूत करने पर फोकस पश्चिम रेलवे के अनुसार डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के अंतर्गत पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और पंजाब को जोड़ता है। सूरत में पूर्वी और पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर को जोड़ा जाएगा तथा वहां एक महत्वपूर्ण जंक्शन विकसित किया जाएगा। यह पूर्व–पश्चिम कॉरिडोर गुजरात के पश्चिमी तट के बंदरगाहों को देश के विभिन्न राज्यों से जोड़ेगा। इसके माध्यम से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को भी बेहतर कनेक्टिविटी प्राप्त होगी। 100 फीसदी इलेक्ट्रीफिकेशन गुजरात ने 100% रेल विद्युतीकरण का लक्ष्य हासिल कर लिया है। राज्य में 87 स्टेशनों पर निर्माण कार्य जारी है। मुंबई अहमदाबाद बुलेट ट्रेन (हाई स्पीड रेल) परियोजना तीव्र गति से प्रगति कर रही है। दूसरी सुरंग की ब्रेकथ्रू प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण होगी तथा व्यावसायिक संचालन अगले वर्ष प्रारंभ करने का लक्ष्य निर्धारित है। इसके अलावा अमृत स्टेशन योजना के तहत गुजरात के 87 रेलवे स्टेशनों को 6,058 करोड़ रुपये की लागत से व्यापक पुनर्विकास हेतु चिन्हित किया गया है। इनमें से 19 स्टेशनों- सामाख्याली, डाकोर, हापा, जाम जोधपुर, मोरबी, ओखा, पालीताना और पोरबंदर सहित का पुनर्विकास कार्य पूर्ण हो चुका है। इससे यात्री सुविधाओं और स्टेशनों की सौंदर्यात्मक गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अभी दौड़ रही 6 वंदे भारत एक्सप्रेस गुजरात में अभी 6 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें चल रही हैं। गुजरात के पास अभी 1 अमृत भारत एक्सप्रेस और एक नमो भारत एक्सप्रेस ट्रेन है। गुजरात में 2014 के बाद से गुजरात के रेलवे नेटवर्क का तीव्र विस्तार हुआ है। लगभग 2,900 किलोमीटर नई रेलवे लाइनें बिछाई गई हैं, जो कई यूरोपीय देशों के कुल रेल नेटवर्क से अधिक है। राज्य में 4,005 किलोमीटर रेल मार्गों का 100% विद्युतीकरण पूर्ण हो चुका है, जिससे हरित और ऊर्जा-कुशल संचालन सुनिश्चित हुआ है। 1,177 फ्लाईओवर का निर्माण रेलवे के अनुसार इस सब के अलावा लेवल क्रॉसिंग समाप्त करने के उद्देश्य से 1,177 फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए गए हैं, जिससे सुरक्षा में वृद्धि और सड़क-रेल यातायात में सुगमता आई है। रेल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए भारतीय रेलवे गुजरात में स्वदेशी ‘कवच’ ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम लागू कर रहा है। स्वीकृत 1,842 रूट किलोमीटर में से 96 रूट किलोमीटर पर ‘कवच’ स्थापित किया जा चुका है, जबकि 1,674 रूट किलोमीटर पर कार्य प्रगति पर है। यह रेल सुरक्षा मानकों में महत्वपूर्ण उन्नति को दर्शाता है।

पुतिन का बड़ा सैन्य संदेश: Su-34 बना दुनिया का पहला फाइटर जेट जो रूस से अमेरिका तक कर सकता है हमला

मॉस्को रूस दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिनकी ताकतवर फाइटर जेट बनाने में महारत मानी जाती है। लड़ाकू विमानों को लेकर रूस की अमेरिका और पश्चिम के दूसरे देशों से प्रतिद्वंद्विता रही है। रूस का ऐसा ही लड़ाकू विमान Su-34 है, जो अमेरिका जैसे देशों का भी ध्यान खींचता रहा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी हवा में देर तक रहने की क्षमता और बड़ा फ्यूल टैंक है। ये एक ऐसा विमान है, जो रूस से अमेरिका तक उड़ान भर सकता है। मिलिट्री वॉच मैगजीन के मुताबिक, रूसी Su-34 स्ट्राइक फाइटर दुनिया में कहीं भी सबसे लंबी ऑपरेशनल रेंज वाला टैक्टिकल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है। इसकी एंड्योरेंस (हवा में रहने की क्षमता) कई तरह के स्ट्रेटेजिक बॉम्बर्स के बराबर है। यह लंबे समय तक घूमने से लेकर डीप पेनेट्रेशन मिशन जरूरतों के लिए ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी देता है। अलग से फ्यूल टैंक की नहीं होती जरूरत पश्चिमी के फाइटर्स के उलट रूसी फाइटर्स को एक्सटर्नल फ्यूल टैंक ले जाते बहुत कम देखा जाता है क्योंकि उनकी लंबी रेंज इंटरनल फ्यूल का इस्तेमाल करती है। इससे वे बिना ड्रैग लगाए लंबी दूरी पर असरदार तरीके से काम कर सकते हैं। ऐसे फ्यूल टैंकों का इस्तेमाल करके उपलब्ध वेपन हार्डपॉइंट की संख्या को कम कर सकते हैं। Su-34 का तीन PTB-3000 3,000 लीटर एक्सटर्नल फ्यूल टैंक के साथ कम देखा जाना बताता है कि एयरक्राफ्ट इंटरकॉन्टिनेंटल रेंज पर ऑपरेशन के लिए कॉन्फिगर होने की एक खास क्षमता है। Su-34 को सोवियत Su-27 एयर सुपीरियोरिटी फाइटर के डेरिवेटिव के तौर पर डेवलप किया गया था, जो 20वीं सदी में सबसे लंबी रेंज वाला फाइटर टाइप था। Su-34 की अमेरिका तक रेंज रूस के Su-34 फाइटर Su-27 से 50 प्रतिशत ज्यादा भारी है। इसका बड़ा साइज ज्यादा फ्यूल एफिशिएंट AL-31FM2 इंजन का इंटीग्रेशन और रेंज को ज्यादा आसान बनाता है। Su-27 की इंटरनल फ्यूल पर मैक्सिमम फेरी रेंज 4,000 किलोमीटर थी। Su-34 की रेंज 4,800-5,000 किलोमीटर है। 5000 की यह क्षमता और भी बढ़ सकती है। इंटरकॉन्टिनेंटल रेंज को 5,500 किलोमीटर से ज्यादा रेंज माना जाता है। इससे Su-34 इस बड़े माइलस्टोन के करीब पहुंच गया। तीन 3,000 लीटर के ड्रॉप टैंक ले जाने पर Su-34 की फेरी रेंज को टैंकों के वजन और ड्रैग को ध्यान में रखते हुए 8,000 किलोमीटर बढ़ाया जा सकता है। इससे Su-34 मॉस्को से वाशिंगटन डीसी तक उड़ सकता है। यानी यह विमान रूस से सीधे अमेरिका पहुंचने की क्षमता रखता है। बिना रीफ्यूलिंग के उड़ान Su-34 बिना एरियल रीफ्यूलिंग सपोर्ट के इंटरकॉन्टिनेंटल दूरियों पर उड़ सकता है। एयरक्राफ्ट ऐसी रेंज पर ऑपरेट करते समय कुछ ऑपरेशनल इस्तेमाल भी बनाए रख सकता है। इलेक्ट्रॉनिक, रडार और फोटो रेकी के लिए पॉड्स को इंटीग्रेट करने की जेट की क्षमता इसे बिना हथियार लोड के जरूरी भूमिका निभाने में मदद करती है। चेंगदू एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन के चीनी छठी पीढ़ी के फाइटर के आने से Su-34 दुनिया के सबसे लंबी दूरी के फाइटर के तौर पर अपनी जगह खो सकता है। चीनी जेट दुनिया के सबसे बड़े फाइटर के तौर पर Su-34 से आगे निकल सकता है। इसके बावजूद Su-34 की अहमियत बनी रहेगी क्योंकि इसमें नई मिसाइल टाइप को इंटीग्रेट किया जा रहा है।

₹1.25 करोड़ का GST नोटिस और पहचान की चोरी का खतरा: ऐसे सुरक्षित रखें अपना आधार–पैन

नई दिल्ली आधार और पैन कार्ड का गलत हाथों में पड़ जाना आपके लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है। इसका उदाहरण हाल ही में सामने आया एक फ्रॉड केस है। उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में एक मिट्टी के बर्तन बनाने वाले को 1.25 करोड़ का GST नोटिस मिला है। जी हां, 2 रुपये के मिट्टी के कप और मिट्टी की छोटी-मोटी चीजें बेचकर अपना गुजारा चलाने वाले को 1.25 करोड़ रुपये का GST नोटिस आना आम बात नहीं है। यह कुछ और नहीं बल्कि आधार और पैन कार्ड के गलत इसेमाल का नतीजा है। हरचंदपुर इलाके के रहने वाले मोहम्मद सईद का दावा है कि उसने कभी कोई कंपनी या बड़ा बिजनेस नहीं चलाया है और उसे शक है कि उसके नाम पर एक नकली फर्म बनाई गई है और इसके लिए उसके आधार और पैन डिटेल्स का गलत इस्तेमाल किया गया है। मिट्टी के बर्तन बनाने वाले को मिला 1.25 करोड़ का नोटिस 1.25 करोड़ रुपये का गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) नोटिस मिलने के बाद सईद और उनके परिवार ने लोकल अधिकारियों से संपर्क किया। सईद के अनुसार, नोटिस में जिस कंपनी का जिक्र किया गया है, वे उसके बारे में कुछ नहीं जानते हैं। सईद ने कहा, “हम हर दिन कुछ दर्जन मिट्टी के कप और छोटे बर्तन बेचते हैं। हमने कभी सोचा भी नहीं था कि हम करोड़ों का बिजनेस कर पाएंगे। अगर मेरे डॉक्यूमेंट्स का गलत इस्तेमाल हुआ है, तो इसकी सही जांच होनी चाहिए।” किसी को नहीं दिए अपने डॉक्यूमेंट नोटिस के मुताबिक, सईद के नाम पर एक फर्म रजिस्टर्ड है, जिस पर काफी टैक्स देनदारी दिखाई गई है। परिवार का कहना है कि उन्हें सईद से जुड़े किसी भी GST रजिस्ट्रेशन या कमर्शियल एक्टिविटी के बारे में कभी नहीं बताया गया। सईद के अनुसार, उसने कभी किसी को अपने डॉक्यूमेंट्स नहीं दिए और बिजनेस के लिए उनका इस्तेमाल नहीं किया है। होना चाहिए मजूबत KYC वेरिफिकेशन सिस्टम परिवार ने एडमिनिस्ट्रेशन से इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने के लिए डिटेल्ड साइबर और फाइनेंशियल जांच करने की अपील की है। इस घटना से एक बार फिर जरूरी डॉक्यूमेंट्स की सुरक्षा और GST रजिस्ट्रेशन की मॉनिटरिंग को लेकर चिंता बढ़ा दी है। एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि डिजिटल ट्रांजैक्शन और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के जमाने में, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के डॉक्यूमेंट्स का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए ज्यादा सख्त नो योर कस्टमर (KYC) वेरिफिकेशन सिस्टम जरूरी हैं। आधार और पैन का हुआ गलत इस्तेमाल बता दें कि हाल के सालों में, देश भर में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां आधार और PAN डिटेल्स का गलत इस्तेमाल कंपनियां बनाने और इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम करने के लिए नकली इनवॉइस बनाने के लिए किया गया है। यह भी ऐसा ही कुछ मामला लग रहा है।

पैक्स सिलिका: भारत की भागीदारी से बदला वैश्विक समीकरण, जानें सदस्य देश

नई दिल्ली  भारत शुक्रवार को अमेरिका की अगुवाई वाले ‘पैक्स सिलिका’ अलायंस में औपचारिक रूप से शामिल हो गया। AI इंपैक्ट समिट के दौरान दोनों देशों ने इस पहल से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। दिसंबर 2025 में जब इस अलायंस की औपचारिक घोषणा हुई थी, तब भारत इसका हिस्सा नहीं था। अब इस रणनीतिक गठबंधन में शामिल होकर भारत तकनीक के क्षेत्र में अमेरिका के विश्वसनीय साझेदारों में शामिल हो गया है। इस कदम को AI, सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनिरल्स की सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में भारत-अमेरिका सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। कार्यक्रम में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर, अंडर सेक्रेटरी जैकब हेलबर्ग और केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव सहित दोनों देशों के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। आइए, जानते हैं, क्‍या है पैक्‍स‍ सलिका और इसका मकसद क्‍या है। क्या है पैक्स सिलिका? पैक्स सिलिका अमेरिकी सरकार का एक प्रमुख रणनीतिक फ्रेमवर्क है। इसके तहत अमेरिका अपने विश्वसनीय साझेदार देशों के साथ तकनीक और औद्योगिक इकोसिस्टम का साझा नेटवर्क विकसित कर रहा है। इसे वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन पर चीन के प्रभुत्व को चुनौती देने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। पैक्स सिलिका में कौन-कौन से देश? इसका मुख्य उद्देश्य AI और सेमीकंडक्टर इंडस्‍ट्री के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद ग्‍लोबल सप्लाई चेन तैयार करना है। तकनीकी विकास के लिए आवश्यक क्रिटिकल मिनरल्स की लगातार आपूर्ति इस रणनीति का अहम हिस्सा है। दिसंबर में बने इस समूह में जापान, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और इस्राइल सहित कई देश शामिल हैं। अब भारत के औपचारिक रूप से जुड़ने के बाद इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ गई है। क्यों बनाया गया यह गठबंधन यह गठबंधन पूरी चिप निर्माण प्रक्रिया को सुरक्षित करने के लिए बनाया गया है। यानी खदानों से निकलने वाले जरूरी खनिजों से लेकर चिप बनाने वाली फैक्ट्रियों तक और उन डेटा सेंटर्स तक, जहां अडवांस AI चलाया जाता है- हर स्तर पर सुरक्षा और भरोसेमंद सप्लाई सुनिश्चित करना इसका उद्देश्य है। क्या इससे और गहरे होंगे रिश्ते? भारत ऐसे समय इस पहल में शामिल हुआ है जब हाल के महीनों में भारत-अमेरिका संबंधों में ट्रेड डील और अन्य वैश्विक मुद्दों को लेकर कुछ असहजता देखी गई थी। हालांकि हाल ही में दोनों देशों के बीच एक अंतरिम समझौते पर सहमति बनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से द्विपक्षीय सहयोग, खासकर इमरजिंग टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में, और गहरा होगा। चीन के दबदबे को संतुलित करने की रणनीति में भारत की भूमिका मजबूत होगी।