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युद्ध क्षमता पर खतरा! चीनी सेना को लेकर चौंकाने वाला खुलासा

बीजिंग चीनी सेना पर एक बड़े संकट ने दस्तक दे दी है। हाल ही में सामने आई कुछ रिपोर्ट्स में उसे लेकर चौंकाने वाले दावे किए गए हैं। इस दावे के मुताबिक चीन की सेना में चल रही भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई से उसकी सैन्य कमान व्यवस्था में दरार आ रही है और इससे उसकी तेजी से आधुनिक हो रही सैन्य ताकत की तैयारी प्रभावित हो सकती है। यह दावा लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) ने अपनी वार्षिक ‘मिलिट्री बैलेंस’ रिपोर्ट में किया है। रिपोर्ट के मुताबिक व्यापक जांच के कारण पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के वरिष्ठ स्तर पर गंभीर कमियां पैदा हो गई हैं और जब तक खाली पद नहीं भरे जाते, तब तक संगठनात्मक स्तर पर दिक्कत बनी रहेगी। चीन की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की कार्रवाई के कारण यह दरार सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC), क्षेत्रीय थिएटर कमांड, हथियार खरीद एजेंसियों और रक्षा अकादमिक संस्थानों तक फैल चुकी है और यह प्रक्रिया अभी पूरी भी नहीं हुई है। यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब हाल ही में चीन के दो सबसे वरिष्ठ जनरल भी अनुशासनात्मक जांच के घेरे में आए हैं। इसे कई दशकों में चीन की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक इस तरह की कार्रवाई का निकट भविष्य में असर लगभग तय है। हालांकि IISS ने यह भी कहा है कि यह प्रभाव अस्थायी हो सकता है और सैन्य आधुनिकीकरण की प्रक्रिया तेज गति से जारी रहने की संभावना है। चीन का रक्षा बजट बढ़ा लेकिन चुनौती बरकरार IISS के मुताबिक चीन का रक्षा खर्च एशिया के अन्य देशों की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। 2025 में एशिया के कुल रक्षा खर्च में चीन की हिस्सेदारी करीब 44 प्रतिशत पहुंच गई। रिपोर्ट में इस बात के संकेत है कि जहां चीन अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने की रणनीति जारी रखे हुए है, लेकिन कमान ढांचे में आई कमी उसकी संचालन क्षमता को प्रभावित कर सकती है।  

न्यूक्लियर ताकत पर किम जोंग उन का बड़ा बयान, कहा- देश को छेड़ा तो अंजाम होगा भयानक

उत्तर कोरिया उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने चेतावनी दी कि अगर उनकी सुरक्षा को खतरा हुआ तो परमाणु-संपन्न देश दक्षिण कोरिया को 'पूरी तरह से मिटा' सकता है। उन्होंने सियोल के साथ बातचीत करने से एक बार फिर इनकार कर दिया। सरकारी मीडिया ने गुरुवार को यह जानकारी दी। हालांकि, सत्तारूढ़ पार्टी की एक बैठक के समापन के दौरान उन्होंने अगले पांच वर्षों के लिए अपने नीतिगत लक्ष्यों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए वॉशिंगटन से बातचीत के लिए अपने रास्ते खुले रखे। हाल के वर्षों में किम ने सियोल के प्रति अपनी बयानबाजी को और तीखा कर दिया है और उसके साथ कूटनीति के प्रति अपनी अस्वीकृति पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे सैन्य संघर्ष की आशंका नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य एक व्यापक रणनीति को आगे बढ़ाना है। इसके तहत किम के परमाणु हथियारों और मॉस्को तथा बीजिंग के साथ संबंधों के बल पर उत्तर कोरिया की अधिक मजबूत और प्रभावशाली भूमिका स्थापित करना है। आधिकारिक न्यूज एजेंसी ने कहा कि किम ने अपनी परमाणु-संपन्न सेना को मजबूत करने के लिए नई हथियार प्रणालियों को विकसित करने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में उनके परमाणु और मिसाइल के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास ने देश को परमाणु हथियार संपन्न देश के रूप में उभारा है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका लंबे समय से रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करना चाहता है तो उसे उत्तर कोरिया के प्रति अपनी कथित "शत्रुतापूर्ण" नीतियों को छोड़ना होगा। दक्षिण कोरिया ने क्या कहा दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने कहा कि उत्तर कोरिया का अंतर-कोरियाई संबंधों को शत्रुतापूर्ण रूप में परिभाषित किया जाना खेदजनक है और सियोल शांति के प्रयासों को 'धैर्यपूर्वक' जारी रखेगा। ठप है अमेरिका से बातचीत विशेषज्ञों ने पहले ही अनुमान लगाया था कि किम दक्षिण कोरिया के प्रति अपने कड़े रुख को और संस्थागत रूप दे सकते हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ 2019 में वार्ता विफल होने के बाद से उत्तर कोरिया का अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ कूटनीतिक संवाद ठप है। किम ने दक्षिण कोरिया को 2024 में स्थायी दुश्मन घोषित कर संबंधों को और तनावपूर्ण बना दिया था। किम जोंग उन फिर बने नेता उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन को सोमवार को सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी के शीर्ष पद पर फिर से निर्वाचित किया गया था। उत्तर कोरिया की आधिकारिक कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) ने बताया कि हजारों प्रतिनिधियों की 'एकमत इच्छा' से किम को पार्टी का महासचिव चुना गया। वर्ष 2016 से हर पांच वर्ष में आयोजित इस कांग्रेस में शीर्ष नेता का चुनाव होता है।  

धामी का वार—चुनाव आते ही कांग्रेस की ‘टूलकिट राजनीति’ शुरू

सतपुली (पौड़ी) मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जैसे-जैसे चुनाव का समय निकट आ रहा है, कांग्रेस के अर्बन नक्सल और टूल किट गैंग सक्रिय हो गए हैं। एआइ के माध्यम से सरकार की छवि को खराब करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं, लेकिन जनता कांग्रेस के इस झांसे में नहीं आएगी। उन्होंने कांग्रेस पर राज्य की डेमोग्राफी बिगाड़ने का भी आरोप लगाया। कहा कि प्रदेश में सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश में विभिन्न कानूनों को इसलिए लागू किया है, ताकि उत्तराखंड की भावी पीढ़ी भविष्य में स्वयं को सुरक्षित महसूस करे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी गुरुवार को बिलखेत (सतपुली) में तीन-दिवसीय नयार घाटी एडवेंचर फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के हित में सरकार जो भी फैसले लेती है, कांग्रेस को उन तमाम फैसलों में एतराज होता है। कहा कि कांग्रेस कार्यकाल में राज्य की पूरी डेमोग्राफी बदल गई और कांग्रेस सरकार आंखों पर पट्टी बांधे बैठी रही। वर्तमान सरकार ने जहां घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई की, वहीं अवैध रूप से कब्जाई जमीनों को भी अतिक्रमण मुक्त करवाया। कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश की भावी पीढ़ी स्वयं को सुरक्षित महसूस करे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भाजपा विकास की राजनीति कर रही है, जबकि कांग्रेस झूठ और षडयंत्र कर सत्ता तक पहुंचना चाहती है। नयार घाटी की सुंदरता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संपूर्ण क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और साहसिक संभावनाओं के कारण अत्यंत अद्वितीय है। प्रकृति ने इस क्षेत्र को सौंदर्य व रोमांच का अनुपम संगम प्रदान किया है, जिससे यह साहसिक पर्यटन व युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए आदर्श स्थल बन रहा है। कहा कि यहां के विकास के लिए सरकार सकारात्मक रूप से कार्य करेगी, ताकि स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हो सकें। मुख्यमंत्री ने जिले में हुए विभिन्न विकास कार्यों का भी जिक्र किया। कहा कि सरकार का निरंतर प्रयास शासन-प्रशासन को जन-जन तक पहुंचाकर जनसमस्याओं का निराकरण करना है। कहा कि राज्य का समग्र सामाजिक विकास सरकार का प्रमुख लक्ष्य व संकल्प है। उन्होंने कहा कि विकास के साथ-साथ राज्य की सामाजिक व सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ बनाए रखना, लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करना, सांस्कृतिक विरासतों का संरक्षण करना भी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि सरकार प्रदेश को पर्यटन व एडवेंचर डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। कहा कि नयार घाटी एडवेंचर फेस्टिवल नयार घाटी की अपार प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध संस्कृति और साहसिक पर्यटन की असीम संभावनाओं का सशक्त परिचय है। कहा कि यह महोत्सव स्थानीय स्तर पर रोजगार के द्वार खोलेगा। विधायक राजकुमार पोरी ने कहा कि यह महोत्सव जनपद पौड़ी को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाएगा। इस मौके पर गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष पं.राजेद्र अणथ्वाल, जिला पंचायत अध्यक्ष रचना बुटोला, कल्जीखाल की ब्लाक प्रमुख गीता देवी, द्वारीखाल की ब्लाक प्रमुख बीना राणा, जिला पंचायत सदस्य महेंद्र राणा, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार, मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुणवंत, संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी, जिला पर्यटन विकास अधिकारी खुशाल सिंह नेगी, डीएसटीओ रामसलोने, भाजपा पौड़ी के जिलाध्यक्ष कमल किशोर रावत, कोटद्वार के जिलाध्यक्ष राजगौरव नौटियाल सहित बड़ी संख्या में स्थानीय जन मौजूद रहा। सतपुली में बनेगा पैराग्लाइडिंग प्रशिक्षण केंद्र गुरुवार को सतपुली पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नयार घाटी में पैराग्लाइडिंग प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना करने की घोषणा की। उन्होंने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विकासखंड पोखड़ा में रसल्वांण दीवा मंदिर स्थलीय कार्य, विकासखंड बीरोंखाल में कालिंका मंदिर स्थलीय कार्य, विकासखंड एकेश्वर में एकेश्वर महादेव मंदिर स्थलीय कार्य व विकासखंड पाबौ में चंपेश्वर महादेव मंदिर से जुड़े विकास कार्यों की घोषणा की।  

कोर्ट में पलटा मामला: ‘पाकिस्तानी’ कहे गए व्यक्ति ने दिखाया भारतीय पासपोर्ट, जज ने लगाई फटकार

हैदराबाद तेलंगाना हाई कोर्ट ने बुधवार को एक 33 वर्षीय व्यक्ति को अपनी रिट अपील वापस लेने की अनुमति दे दी। इस व्यक्ति को पहले पाकिस्तानी नागरिक घोषित किया जा चुका था, लेकिन अदालत में उसने अचानक अपना एक भारतीय पासपोर्ट पेश कर दिया, जिसके बारे में उसका दावा था कि यह उसे 2022 में जारी किया गया था। क्या है पूरा मामला? रिपोर्ट के मुताबिक, हैदराबाद के याकूतपुरा निवासी सैयद अली हुसैन रिजवी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसने अदालत से मांग की थी कि हैदराबाद पुलिस की स्पेशल ब्रांच के अधिकारियों द्वारा उसके घर पर की जा रही पूछताछ और दौरों पर रोक लगाई जाए। रिजवी का आरोप था कि पुलिस उसे देश में रहने के लिए लंबी अवधि के वीजा के लिए आवेदन करने को मजबूर कर रही है, जबकि वह हैदराबाद में ही पैदा हुआ, वहीं पला-बढ़ा और उसकी शादी भी एक भारतीय नागरिक से हुई है। सरकार और पुलिस की दलीलें गृह विभाग के सरकारी वकील महेश राजे ने अदालत के सामने कई अहम तथ्य रखे। पाकिस्तानी रिकॉर्ड: रिजवी का जन्म कराची में हुआ था। उसकी मां गोहर फातिमा के पाकिस्तानी पासपोर्ट में उसका नाम 'इमरान आबिद उर्फ इमरान हुसैन' दर्ज था। वे रिजवी के जन्म के तीन साल बाद फरवरी 1994 में भारत आए थे। पासपोर्ट का कोई रिकॉर्ड नहीं: सरकारी वकील ने बताया कि रिजवी को कभी कोई भारतीय पासपोर्ट जारी नहीं किया गया। यहां तक कि खुद रिजवी ने अपने हलफनामे में यह बात मानी थी कि उसने कभी भारतीय पासपोर्ट के लिए आवेदन नहीं किया है। वीजा के लिए खुद किया था आवेदन: सरकार ने बताया कि रिजवी ने 5 जुलाई 2025 को खुद को पाकिस्तानी नागरिक घोषित करते हुए लॉन्ग-टर्म वीजा (LTV) के लिए आवेदन किया था। अदालत में क्या हुआ? बुधवार को सुनवाई के दौरान, चीफ जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जी. एम. मोहिउद्दीन की डिवीजन बेंच के सामने रिजवी के वकील एस. श्रीधर ने अचानक अपने मुवक्किल का भारतीय पासपोर्ट पेश कर दिया। इस पर सरकारी अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास इस पासपोर्ट का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। जब सरकार ने वीजा आवेदन की बात उठाई, तो रिजवी के वकील ने कहा कि पुलिस ने जबरन उनके मुवक्किल से उस आवेदन पर हस्ताक्षर करवाए थे। बेंच ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए पूछा कि क्या यह 'अहम बात' (जबरन हस्ताक्षर वाली) कभी हलफनामे में बताई गई थी? वकील के पास इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। अदालत ने मौखिक रूप से कहा- अगर उसके पास पासपोर्ट था, तो पुलिस के घर आने पर उसने उन्हें क्यों नहीं दिखाया? वह अब भी उन्हें दिखा सकता है… अगर आप उन्हें पासपोर्ट दिखाते हैं और वे संतुष्ट हो जाते हैं, तो मामला यहीं खत्म हो जाता है। हर दिन नया तथ्य सामने आ रहा है… आप जो पासपोर्ट दिखा रहे हैं, उसमें नाम उसकी मां के पासपोर्ट में दर्ज नाम से अलग है। क्या आप उम्मीद करते हैं कि हम इन सबमें पड़ें और कोई टिप्पणी करें? कोर्ट का अंतिम फैसला अदालत के तीखे सवालों के बाद, याचिकाकर्ता के वकील ने रिट अपील वापस लेने की बात कही। बेंच ने अपने अंतिम आदेश में कहा कि अदालत इस पासपोर्ट की प्रामाणिकता की जांच नहीं कर सकती। इसके साथ ही, अदालत ने अधिकारियों को कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने की छूट दे दी। इससे पहले, पिछले महीने एक सिंगल-जज बेंच ने भी यह कहते हुए मामले में दखल देने से इनकार कर दिया था कि पुलिस के दौरे वीजा नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए थे और इन्हें दंडात्मक कार्रवाई नहीं माना जा सकता।  

सुप्रीम कोर्ट में NCERT मुद्दे पर केंद्र झुका, माफी के बावजूद CJI बोले—‘जवाबदेही तय होगी’

नई दिल्ली राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की कक्षा 8वीं की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। गुरुवार को भी सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बिना शर्त और पूर्ण माफी मांगी है। आपको बता दें कि यह विवाद 24 फरवरी, 2026 को जारी की गई नई सिलेबस के बाद शुरू हुआ, जिसने न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने वाले अंशों के कारण कोर्ट को नाराज कर दिया। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने इस मामले पर बेहद सख्त रुख अपनाया। न्यूज के अनुसार, सीजेआई ने कहा, "ऐसा लगता है कि न्यायपालिका को बदनाम करने के लिए यह एक गहरी और सुनियोजित साजिश रची गई है।" उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए शिक्षा सचिव और NCERT के निदेशक से जवाब तलब किया है कि उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई क्यों न की जाए। साथ ही केंद्र सरकार से ऑनउलब्ध पीडीएफ फाइल को जल्द से जल्द हटाने का आदेश दिया है। क्या था विवादित अध्याय? विवाद की जड़ कक्षा 8वीं की पुस्तक "एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड, वॉल्यूम II" का अध्याय नंबर 4 है। जिसका शीर्षक है 'हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका'। इस अध्याय में न्यायपालिका के भीतर भ्रष्टाचार पर कुछ ऐसी बातें शामिल की गई थी, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने आपत्तिजनक और अनुचित पाया। चौतरफा आलोचना और कानूनी दबाव के बाद NCERT ने एक आधिकारिक बयान जारी कर माफी मांगी है। परिषद ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका का वे सर्वोच्च सम्मान करते हैं और उसे संविधान का रक्षक मानते हैं। 38 बिकी हुई कॉपियों को ढूंढ रहा है मंत्रालय मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस विवादित पुस्तक की कुल 2.25 लाख प्रतियां छपी थीं। गनीमत यह रही कि भारी संख्या में वितरण से पहले ही विवाद सामने आ गया। कुल 2,24,962 प्रतियां अभी भी गोदामों में सुरक्षित हैं जिन्हें वापस मंगा लिया गया है। सिर्फ 38 प्रतियां बाजार में बिक चुकी हैं। शिक्षा मंत्रालय और NCERT अब उन्हें ट्रैक करके वापस लेने की कोशिश कर रहे हैं। स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निर्देश दिया है कि अगली सूचना तक इन पुस्तकों का वितरण पूरी तरह से बंद रहेगा। सरकार अब इस बात की जांच कर रही है कि संवेदनशील विषयों पर पाठ्यसामग्री तैयार करने वाली विशेषज्ञ समिति से इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।  

मंदिर भूमिपूजन में राष्ट्रपति बोलीं—‘भेदभाव नहीं, सबके लिए है भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद’

जमशेदपुर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को जमशेदपुर के कदमा (मरीन ड्राइव) में प्रस्तावित श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया। उन्होंने इस अवसर पर अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा, ''भगवान जगन्नाथ की कृपा पूरी मानवता पर बिना किसी भेदभाव के समान रूप से बरसती है।” राष्ट्रपति ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘जय जगन्नाथ’ के उद्घोष से की और कहा कि महाप्रभु का दरबार भेदभाव से परे है। यहां जाति, वर्ग या ऊंच-नीच का कोई स्थान नहीं। उन्होंने लोकप्रचलित उक्ति 'जगन्नाथ के भात, जगत पसारे हाथ' का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परंपरा साझा जीवन-मूल्यों और सामूहिकता की प्रतीक है, जहां सभी एक साथ महाप्रसाद ग्रहण कर समरसता का अनुभव करते हैं। मंदिर निर्माण के भूमिपूजन के समय को उन्होंने ईश्वरीय संयोग बताया। उन्होंने कहा कि जैसे रथयात्रा में प्रभु अपनी इच्छा से नंदीघोष रथ पर विराजमान होते हैं, उसी प्रकार इस शिलान्यास का भी यही उचित समय था। उन्होंने विश्वास जताया कि यह केंद्र सामाजिक जागरण का माध्यम बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अब नीलांचल के प्रभु का आशीर्वाद जमशेदपुर की धरती पर भी स्थायी रूप से स्थापित होगा। झारखंड की पूर्व राज्यपाल रहीं राष्ट्रपति ने जगन्नाथ संस्कृति को जनजातीय और गैर-जनजातीय परंपराओं के अद्भुत समन्वय का प्रतीक बताया। सबर जनजाति के राजा विश्वावसु और ब्राह्मण विद्यापति की कथा का उल्लेख करते हुए उन्होंने सामाजिक एकात्मता की विरासत को रेखांकित किया। ‘दारुब्रह्म’ स्वरूप का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लकड़ी के देवता के रूप में भगवान जगन्नाथ प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण-सम्मत जीवनशैली का संदेश देते हैं, जो आदिवासी समाज की मूल चेतना से जुड़ा है। मंदिर के भूमि पूजन कार्यक्रम में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। ट्रस्ट अध्यक्ष एस.के. बेहरा के अनुसार, करीब 100 करोड़ रुपए की लागत से ढाई एकड़ में विकसित होने वाली इस परियोजना में मुख्य मंदिर डेढ़ एकड़ और आध्यात्मिक-सांस्कृतिक केंद्र एक एकड़ में बनाया जाएगा। मंदिर की वास्तु-शैली श्री जगन्नाथ मंदिर पुरी से प्रेरित होगी। 4 वर्षों में मंदिर और दो वर्षों में आध्यात्मिक केंद्र पूरा करने का लक्ष्य है। यहां गीता, भागवत जैसे ग्रंथों के अध्ययन के माध्यम से युवाओं में नैतिकता, अनुशासन और आत्मविश्वास का विकास करने की योजना है।

जेफ्री एपस्टीन केस: वायरल फोटो में स्टीफन हॉकिंग नजर आने पर उठे सवाल

वाशिंगटन जब से एपस्टीन फाइल जारी हुई हैं, तब से अमेरिका समेत दुनियाभर में हड़कंप मचा हुआ है। कई नामी-गिरामी लोगों के नाम सामने आ चुके हैं। अब स्टीफन हॉकिंग की एक तस्वीर सामने आई है, जिसने हंगामा खड़ा कर दिया है। जेफरी एपस्टीन की फाइलों से सामने आई इस फोटो में स्टीफन हॉकिंग दो बिकिनी पहनी महिलाओं के बीच में हैं। हॉकिंग के बगल में लेटीं दोनों महिलाओं की पहचान उजागर नहीं हुई है। एक महिला हॉकिंग के दाएं ओर है, तो दूसरी बाएं ओर लेटी है। तीनों के हाथों में पेय पदार्थ है और स्टीफन हॉकिंग वाला ग्लास उनके अलावा महिला ने भी पकड़ रखा है। दोनो महिलाओं के चेहरे को काले रंग से ढक दिया गया है, ताकि पहचान सामने न आए। दोनों ने ब्लैक कलर की बिकिनी पहन रखी है। जेफरी एपस्टीन की फाइलों के नए बैच से सामने आई इस तस्वीर के बारे में यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो सका कि तस्वीर कब और कहां ली गई थी, लेकिन इसका खुलासा होने के बाद यह सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैलने लगी। स्टीफन के परिवार ने द पोस्ट को एक बयान में बताया, “प्रोफेसर हॉकिंग ने 20वीं सदी में फिजिक्स में सबसे बड़ा योगदान दिया, साथ ही वे मोटर न्यूरॉन बीमारी से सबसे लंबे समय तक बचने वाले व्यक्ति भी थे। यह एक ऐसी बीमारी थी जो उन्हें कमजोर कर देती थी और जिसके कारण उन्हें वेंटिलेटर, वॉइस सिंथेसाइज़र, व्हीलचेयर और चौबीसों घंटे मेडिकल केयर पर निर्भर रहना पड़ता था।” साल 2018 में हुई थी हॉकिंग की मौत बयान में आगे कहा कि उनकी तरफ से गलत व्यवहार का कोई भी इशारा गलत और बहुत दूर की कौड़ी है। हॉकिंग की 50 साल तक बीमारी से लड़ने के बाद साल 2018 में 76 साल की उम्र में मौत हो गई। वह दुनिया भर में मशहूर साइंटिस्ट्स के एक ग्रुप में शामिल थे, जिन्होंने मार्च 2006 में एपस्टीन द्वारा फंडेड और होस्ट किए गए एक कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया था- यह उस बदनाम फाइनेंसर पर फ्लोरिडा में प्रॉस्टिट्यूशन के लिए लालच देने का आरोप लगने से पांच महीने पहले की बात है। कैरिबियन आइलैंड सेंट थॉमस पर हुई थी कॉन्फ्रेंस यह कॉन्फ्रेंस कैरिबियन आइलैंड सेंट थॉमस पर हुई थी, जो एपस्टीन के बदनाम प्राइवेट आइलैंड के पास है। बता दें कि हॉकिंग का नाम एपस्टीन की फाइलों में तब भी आया था, जब वर्जीनिया गिफ्रे ने आरोप लगाया था कि साइंटिस्ट ने एक बार वर्जिन आइलैंड्स में एक नाबालिग ग्रुप पार्टी में हिस्सा लिया था। फाइलों में मौजूद ईमेल के मुताबिक, एपस्टीन ने गिफ्रे के दोस्तों को कैश इनाम देने की पेशकश की थी, अगर वे उसके दावे को गलत साबित करने में मदद कर सकें। हालांकि, हॉकिंग पर कभी भी किसी गलत काम का ऑफिशियली आरोप नहीं लगाया गया और उनकी मौत 2019 में एपस्टीन के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार होने से पहले हुई थी।

Sahara Refund: सहारा निवेशकों के लिए खुशखबरी: 45 दिन में 10 लाख तक का रिफंड पाने का तरीका

 नई दिल्ली अगर आपने सहारा इंडिया (Sahara India) की किसी स्कीम में पैसा लगाया था और अभी तक आपको रिफंड नहीं मिला है, तो आपके लिए बड़ी राहत की खबर है. अब आप क्लेम कर 10 लाख रुपये तक रिफंड पा सकते हैं.  केंद्र सरकार ने सहारा रिफंड पोर्टल (Sahara Refund Portal) पर फिर से आवेदन करने का मौका दिया है. दरअसल, जिन लोगों ने पहले से ही क्लेम किया हुआ है, लेकिन किसी गलती या दस्तावेज की कमी की वजह से रिफंड नहीं मिला है, वे अब उसे सुधारकर दोबारा जमा कर सकते हैं. इस बीच अब क्लेम की राशि बढ़ाकर 10 लाख रुपये तक कर दी गई है. पहले ये राशि अधिकतम 50 हजार रुपये थी. आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक 19 नवंबर 2025 से 10 लाख रुपये तक रिफंड की सुविधा शुरू की गई है.  सहारा रिफंड को लेकर बिग अपडेट यानी अब सहारा इंडिया निवेशक 10 लाख रुपये तक के दावों के लिए दोबारा अप्लाई कर सकते हैं. केवल ये ध्यान रखना है कि अगर आपने पहले से क्लेम कर रखा है, तो 45 दिन के बाद री-क्लेम कर सकते हैं. पहले अगर आपके दावे में कोई जानकारी गलत थी, दस्तावेज साफ नहीं थे या बैंक डिटेल में गड़बड़ी थी, तो आप उसे सही करके दोबारा आवेदन कर सकते हैं. यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और इसके लिए आपको CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल पर जाना होगा.  सरकार का कहना है कि सही तरीके से दोबारा जमा किए गए दावों को 45 वर्किंग डे के भीतर जांचकर निपटाया जाएगा. इससे पहले कई लोगों को 50,000 रुपये तक की रकम वापस भी मिल चुकी है. लेकिन जिनके आवेदन में कमी पाई गई थी, उन्हें सुधार करने का मौका दिया जा रहा है. अप्लाई का फुल प्रोसेस आवेदन करते समय ध्यान रखें कि सभी जानकारी सही भरें. आधार नंबर, मोबाइल नंबर और बैंक खाता विवरण बिल्कुल सही होना चाहिए. गलत जानकारी देने पर क्लेम फिर से अटक सकता है. वहीं अगर आपने 50 हजार रुपये तक के लिए क्लेम कर चुके हैं तो 45 दिन के बाद स्टेट्स चेक करें.   रीसबमिशन के लिए पोर्टल (https://mocresubmit.crcs.gov.in/resubmission/#/home) पर जाएं. अगर आपको रीसबमिशन प्रक्रिया में कोई तकनीकी कठिनाई या मदद चाहिए, तो आप पोर्टल के हेल्पडेस्क से सहायता ले सकते हैं. इसके लिए पोर्टल हेल्पलाइन नंबर 011-20909044 और 011-20909045 पर संपर्क कर सकते हैं.  सरकारी अनुमान के मुताबिक सहारा-SEBI खाते में करीब 26,000 करोड़ रुपये जमा है, जिसमें से 5,000 करोड़ रुपये रिफंड के लिए अलग किए गए थे. केंद्र सरकार ने साल 2022 में बताया था कि सहारा इंडिया ग्रुप की कंपनियों में कुल निवेशकों का संख्या करीब 13 करोड़ है, और इन निवेशकों के 1.12 लाख करोड़ रुपये से अधिक फंसे हुए हैं.  रीसबमिशन से जुड़ी मुख्य बातें फिलहाल,10 लाख रुपये तक के दावों को दोबारा प्रस्तुत करने की प्रक्रिया जारी है। एक बार जब आप अपना क्लेम सही तरीके से दोबारा जमा कर देते हैं, तो इसे 45 वर्किंग डेज के भीतर प्रोसेस कर दिया जाएगा। यह पूरा प्रोसेस डिजिटल और पारदर्शी तरीके से की जा रही है। अब तक 50000 रुपये तक क्लेम प्रोसेस्ड CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल में जमा किए गए एप्लीकेशन प्रोसेस हो गए हैं और हर एप्लीकेशन पर 50,000 रुपये या उससे कम का पेमेंट उन एलिजिबल डिपॉजिटर्स को किया गया है, जिनके क्लेम वेरिफाई हो सके। जिन डिपॉजिटर्स के क्लेम में कमियों की वजह से वेरिफाई नहीं हो सके, उन्हें “CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल” के जरिए कमी के मैसेज भेजे गए हैं। यह CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल (रीसबमिशन) कमियों को ठीक करने के बाद क्लेम को फिर से जमा करने के लिए शुरू किया गया है। ये डिपॉजिटर्स अपने हर कमी वाले क्लेम की कमियों को ठीक कर सकते हैं और रीसबमिशन पोर्टल के जरिए आगे की प्रोसेसिंग के लिए अपने क्लेम को फिर से जमा कर सकते हैं, जिसे पोर्टल पर लोड को मैनेज करने के लिए धीरे-धीरे कमियों वाले डिपॉजिटर्स के लिए खोला गया है। पोर्टल ऑनलाइन क्लेम दोबारा जमा करने के 45 वर्किंग डेज के अंदर दोबारा जमा किए गए क्लेम को प्रोसेस करेगा। डिपॉजिटर्स से रिक्वेस्ट है कि वे रीसबमिशन एप्लीकेशन फ़ॉर्म में चारों सोसाइटियों से जुड़ी कमियों वाले सभी क्लेम दोबारा जमा करें। केवल पोर्टल के जरिए ऑनलाइन दोबारा जमा किए गए क्लेम ही माने जाएंगे। इसके लिए आप सीधे इस लिंक पर जा सकते हैं: https://mocresubmit.crcs.gov.in/resubmission/#/home कहां करें संपर्क? अगर आपको किसी तकनीकी सहायता या जानकारी की आवश्यकता हो, तो आप पोर्टल हेल्पडेस्क नंबर 01120909044 और 01120909045 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, समितियों के नंबर 0522 6937100, 0522 3108400, 0522 6931000 और 08069208210 पर भी फोन किया जा सकता है। संपर्क करने का समय सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक, सोमवार से शुक्रवार (केंद्र सरकार की छुट्टियों को छोड़कर) है।

40,000 करोड़ के घोटाले में ED ने लिया बड़ा कदम, अनिल अंबानी सामने हुए

नई दिल्ली  उद्योगपति और रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी की कानूनी मुश्किलें लगातार गहराती जा रही हैं. गुरुवार, 26 फरवरी 2026 को अनिल अंबानी दिल्ली स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुख्यालय पहुंचे, जहाँ उन्होंने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCOM) और उससे जुड़ी कंपनियों द्वारा किए गए कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अपना बयान दर्ज कराया. अंबानी सुबह करीब 11 बजे केंद्रीय जांच एजेंसी के दफ्तर पहुंचे. सूत्रों के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय की स्पेशल टास्क फोर्स (मुख्यालय) ने उनसे कई घंटों तक पूछताछ की. यह पूछताछ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है. ₹3,716 करोड़ का निजी आवास 'अबोड' कुर्क अनिल अंबानी की यह पेशी उस बड़ी कार्रवाई के ठीक बाद हुई है, जिसमें ED ने मुंबई के पॉश इलाके पाली हिल स्थित उनके आलीशान निजी आवास 'अबोड' (Abode) को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) कर लिया है. इस संपत्ति की अनुमानित कीमत लगभग 3,716.83 करोड़ रुपये है. इससे पहले भी इस संपत्ति के एक हिस्से को कुर्क किया गया था, लेकिन अब पूरी इमारत जांच एजेंसी के घेरे में है. इस ताज़ा कार्रवाई के साथ ही, रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप की अब तक कुर्क की गई कुल संपत्तियों का मूल्य 15,700 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है. पिछले साल भी एजेंसी ने नवी मुंबई स्थित 'धीरूभाई अंबानी नॉलेज सिटी' (DAKC) की 132 एकड़ जमीन कुर्क की थी, जिसकी कीमत 4,462 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई थी. क्या है पूरा मामला? यह पूरा मामला सीबीआई (CBI) द्वारा दर्ज की गई उस एफआईआर (FIR) पर आधारित है, जिसमें रिलायंस कम्युनिकेशंस, अनिल अंबानी और अन्य पर आपराधिक साजिश (120-B), अमानत में खयानत (406) और धोखाधड़ी (420) के आरोप लगाए गए हैं. ED की जांच के अनुसार, RCOM और उसकी सहयोगी कंपनियों ने घरेलू और विदेशी बैंकों से भारी-भरकम कर्ज लिया था. वर्तमान में समूह पर बैंकों का कुल बकाया 40,185 करोड़ रुपये है. जांच एजेंसी का आरोप है कि इस पैसे का इस्तेमाल उसी काम के लिए नहीं किया गया जिसके लिए कर्ज लिया गया था. इसके बजाय, फंड को अन्य समूह कंपनियों के कर्ज चुकाने (एवरग्रीनिंग), संबंधित पक्षों को ट्रांसफर करने या म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए डाइवर्ट किया गया. SBI ने घोषित किया 'फ्रॉड' संसद में भी इस मुद्दे की गूंज सुनाई दी है. वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने पुष्टि की थी कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार रिलायंस कम्युनिकेशंस और इसके प्रमोटर अनिल अंबानी के खातों को 'फ्रॉड' (धोखाधड़ी) के रूप में वर्गीकृत किया है. केवल SBI ही नहीं, केनरा बैंक ने भी आरोप लगाया है कि RCOM ने उनके साथ 1,050 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की है. कुल मिलाकर पांच बड़े बैंकों ने समूह के खातों को संदिग्ध माना है. शेल कंपनियों और विदेशी संपत्तियों की जांच जांच का दायरा केवल घरेलू बैंकों तक सीमित नहीं है. ED उन "अघोषित विदेशी बैंक खातों" और विदेशी संपत्तियों की भी जांच कर रही है, जिनका लिंक अंबानी परिवार से होने का संदेह है. इसके अलावा, यस बैंक (Yes Bank) के साथ हुए संदिग्ध लेनदेन भी रडार पर हैं, जहाँ रिलायंस म्यूचुअल फंड ने कथित तौर पर 'क्विड प्रो को' (Quid Pro Quo) के तहत यस बैंक के AT-1 बॉन्ड में 2,850 करोड़ रुपये का निवेश किया था. रिलायंस इंफ्रा में भी बड़ी गड़बड़ी का शक जांच में यह भी सामने आया है कि रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने सेबी (SEBI) के नियमों को ताक पर रखकर एक अघोषित संबंधित पार्टी (C-Company) के माध्यम से करोड़ों रुपये डाइवर्ट किए. एजेंसी का मानना है कि लोन डाइवर्जन का यह आंकड़ा 10,000 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है.

जस्टिस Yashwant Varma केस में बड़ा अपडेट: जांच कमेटी बदली, अब ये तीन चेहरे सुलझाएंगे मामला

नई दिल्ली कैश कांड में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच कमेटी में बड़ा बदलाव हुआ है. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने के कारणों की जांच के लिए बनाई गई तीन सदस्यों वाली कमेटी का पुर्नगठन किया है. यह कैश कांड वाला यह मामला पिछले साल मार्च में जस्टिस यशवंत वर्मा के राजधानी स्थित आवास से जली हुई नकदी मिलने से जुड़ा है. तब जस्टिस यशवंत वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट में तैनात थे. दरअसल, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बुधवार को जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच करने वाली तीन सदस्यों वाली कमेटी में बदलाव किया है. यह कमेटी ‘कैश कांड’ के आरोपों की जांच कर रही है, जिसमें जस्टिस वर्मा के दिल्ली आवास से जले हुए नोटों के बंडल मिलने का मामला है. मूल कमेटी पिछले साल अगस्त में बनी थी. मगर अब इसमें एक नए सदस्य की एंट्री हुई है. यह बदलाव इसलिए हुआ क्योंकि पुरानी कमेटी के एक सदस्य जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव 6 मार्च को रिटायर हो रहे हैं. अब नई कमेटी ही इस कांड की जांच आगे बढ़ाएगी और रिपोर्ट देगी. कमेटी में कौन-कौन? यह कमेटी पिछले साल मार्च में जस्टिस यशवंत वर्मा के घर से जले हुए कैश के बंडल मिलने के बाद उन्हें हटाने की मांग के तहत की गई थी. इस कमेटी में ये तीन सदस्य हैं- जस्टिस अरविंद कुमार, सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया; जस्टिस चंद्रशेखर, चीफ जस्टिस ऑफ द बॉम्बे हाईकोर्ट; और बी.वी. आचार्य, सीनियर एडवोकेट, कर्नाटक हाईकोर्ट. जस्टिस अरविंद कुमार और आचार्य पिछली कमेटी का भी हिस्सा थे, लेकिन जस्टिस चंद्रशेखर नए सदस्य हैं. उन्होंने मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव की जगह ली है. कैसे बनी थी यह कमेटी यह कमेटी जजेस (इंक्वायरी) एक्ट 1968 के तहत बनी है. इसका काम जस्टिस वर्मा को हटाने के आधारों की जांच करना है. पिछले साल 152 सांसदों ने मिलकर इम्पीचमेंट मोशन दिया था, जिसमें विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के सदस्य शामिल थे. स्पीकर ओम बिरला ने इसे मंजूर किया और कमेटी बनाई. अब पुनर्गठन के बाद कमेटी के सदस्य इस प्रकार हैं:     जस्टिस अरविंद कुमार: जस्टिस अरविंद कुमार सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के जज हैं. वे मूल कमेटी में भी थे और जांच की अगुवाई कर रहे हैं. जस्टिस अरविंद कुमार अनुभवी हैं और कई बड़े मामलों में फैसले दे चुके हैं. उनकी मौजूदगी से जांच निष्पक्ष रहेगी.     जस्टिस श्री चंद्रशेखर: जस्टिस अरविंद कुमार बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस हैं. यशवंत वर्मा मामले की जांच कमेटी में वे नए सदस्य हैं और जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव की जगह ले रहे हैं. जस्टिस चंद्रशेखर मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं और कानूनी मामलों में विशेषज्ञ हैं. उनका आना कमेटी को और मजबूत बनाएगा.     बी.वी. आचार्य: बी.वी. आचार्य कर्नाटक हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट हैं. वे भी मूल कमेटी के सदस्य हैं. आचार्य सीनियर वकील हैं और कई हाई-प्रोफाइल मामलों में शामिल रहे हैं. उनकी कानूनी समझ जांच में मदद करेगी. क्या है जस्टिस वर्मा कैश कांड? कैश कांड मार्च 2025 की घटना है. होली के मौके पर जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास में आग लगी थी. फायर ब्रिगेड ने आग बुझाते समय जले हुए और आंशिक रूप से जले नोटों के बंडल पाए थे.  यह कैश लाखों या करोड़ों का बताया गया, लेकिन इसका कोई रिकॉर्ड नहीं था. जस्टिस यशवंत वर्मा उस समय भोपाल में थे और उन्होंने कहा कि यह कैश उनका नहीं है. इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें काम से हटा दिया और जांच शुरू हुई. बाद में उनका ट्रांसफर इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया. यह कांड भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है और न्यायपालिका में पारदर्शिता पर सवाल उठाता है. फिलहाल, इसकी जांच जारी है.