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सियासी घमासान तेज: बीजेपी बोली– राहुल गांधी का रवैया लोकतंत्र के खिलाफ

नई दिल्ली भाजपा सांसदों ने कांग्रेस पर सदन में शोर करने और कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला काम सदन के अंदर किया है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, "लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला काम सदन के अंदर हुआ। राहुल गांधी ने समझ लिया कि ये कांग्रेस पार्टी का दफ्तर है। देश के खिलाफ बोलना कभी सकारात्मक सोच का काम नहीं है। राहुल गांधी के नेतृत्व में देश के खिलाफ एक साजिश के तहत ये हुआ है।" उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी नाटक करने वालों का अड्डा बन गई है। जैसे नाटक में झूठ और भ्रम फैलाए जाते हैं, वही काम राहुल गांधी कर रहे हैं। यह एक ऐसा काम है, जो लोकतंत्र को शर्मसार करता है। राहुल गांधी सोचते हैं कि संसद कांग्रेस पार्टी का ऑफिस है और इस बिल्डिंग में हमारे अलावा कोई और राज नहीं कर सकता है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उस लेटर पर निशाना साधा, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें लोकसभा में बोलने नहीं दिया गया। मंत्री रिजिजू ने कहा, "मैंने इसका जवाब दे दिया है। उन्होंने कहा था कि वह नियमों के बाहर बोलेंगे। हमने दो दिन इंतजार किया, लेकिन दूसरों को भी बोलने का मौका मिलना चाहिए। वह मनमाने ढंग से नहीं बोल सकते। यह भारत की संसद है, यहां नियमों के अनुसार ही बोलना पड़ता है।" भाजपा सांसद अरुण गोविल ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, "उनके व्यवहार की जितनी निंदा की जाए कम है। इस तरह का व्यवहार अगर एक सांसद करे तो बहुत शर्मनाक है। राहुल गांधी सदन में क्या बोलते हैं और कैसे व्यवहार करते हैं, उनको खुद नहीं पता होता है।" भाजपा सांसद शशांक मणि ने 8 विपक्षी सांसदों के निलंबन पर कहा, "उनके खिलाफ कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि उन्होंने संसद की मर्यादा का हनन किया। जो उन पर कार्रवाई की गई है, वो सही है। इस प्रकार से कोई और भी हंगामा करेगा तो मुझे पूरा विश्वास है कि अध्यक्ष इस प्रकार की कार्रवाई करेंगे।" भाजपा सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने कहा, "कांग्रेस के आरोप बेबुनियाद हैं। जिस तरह से राहुल गांधी और उनके समर्थक गठबंधन ने बर्ताव किया, वह एक ऐसा काम है, जो संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।"

Manipur Political Update: राष्ट्रपति शासन हटाने का ऐलान, केंद्र के फैसले से नई सियासी हलचल

नई दिल्ली मणिपुर में राष्ट्रपति शासन समाप्त कर दिया गया है। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में मंगलवार को आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर इसकी घोषणा की। यह फैसला 4 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा। नोटिफिकेशन के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 356 के खंड (2) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मणिपुर राज्य में 13 फरवरी 2022 को लागू की गई राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा को वापस ले लिया है। इस आदेश के साथ ही राज्य में केंद्रीय शासन की व्यवस्था समाप्त हो गई है।

मलेशिया दौरे पर जाएंगे पीएम मोदी, रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने की तैयारी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7-8 फरवरी 2026 को मलेशिया की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। इस दौरान वह मलेशिया के प्रधानमंत्री के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत करेंगे। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मलेशिया के प्रधानमंत्री दातो सेरी अनवर इब्राहिम ने आमंत्रित किया है। यह प्रधानमंत्री की मलेशिया की तीसरी यात्रा होगी और अगस्त 2024 में भारत-मलेशिया द्विपक्षीय संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा दिए जाने के बाद पहली यात्रा होगी। इस यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ द्विपक्षीय चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ-साथ उद्योग और व्यापार प्रतिनिधियों से भी बातचीत करेंगे। प्रधानमंत्री की यात्रा के साथ ही 10वां भारत-मलेशिया सीईओ फोरम भी आयोजित किया जाएगा। भारत और मलेशिया ऐतिहासिक, सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों पर आधारित दीर्घकालिक मित्रता साझा करते हैं। मलेशिया में 29 लाख से अधिक भारतीय प्रवासी समुदाय की उपस्थिति से यह संबंध और भी मजबूत होता है, जो विश्व में तीसरा सबसे बड़ा है। भारत-मलेशिया संबंध बहुआयामी और विकसित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री की आगामी यात्रा दोनों नेताओं के लिए व्यापार और निवेश, रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग से लेकर डिजिटल और वित्तीय प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, संस्कृति, पर्यटन, और जन-संबंधों तक फैले द्विपक्षीय सहयोग के संपूर्ण दायरे की समीक्षा करने का अवसर प्रदान करती है। साथ ही पारस्परिक लाभ के लिए भविष्य में होने वाले सहयोग की रूपरेखा तैयार करने का भी अवसर देती है।

NEW START संधि समाप्ति पर: अमेरिका–रूस पर नहीं रहेगी लगाम, क्या बढ़ेगा परमाणु युद्ध का जोखिम?

नई दिल्ली अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों पर लगी जो आखिरी बड़ी पाबंदी थी, वह 5 फरवरी को खत्म होने वाली है। ऐसा पहली बार होगा जब दुनिया के दो सबसे बड़े परमाणु शक्ति संपन्न देशों पर कोई कानूनी लगाम नहीं रहेगी। ऐसे में ये जानना जरूरी है कि आखिर यह न्यू स्टार्ट संधि क्या है, जिसकी वजह से दुनिया फिर से परमाणु हथियारों की खतरनाक दौड़ में फंसती दिख रही है। चलिए जानते हैं कि इस समझौते पर किसने हस्ताक्षर किए थे और इसमें क्या-क्या प्रावधान हैं।   न्यू स्टार्ट संधि पर 2010 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव (जो उस समय व्लादिमीर पुतिन के सहयोगी थे और रूस के राष्ट्रपति का एक कार्यकाल पूरा कर चुके) ने हस्ताक्षर किए थे। उस समय दोनों देशों के बीच संबंधों में नई शुरुआत हो रही थी। यह संधि 2011 में लागू हुई। इस समझौते में सामरिक परमाणु हथियारों ( Strategic Nuclear Weapons) पर सख्त सीमाएं तय की गईं। ये वे हथियार हैं जो परमाणु युद्ध में दोनों पक्ष एक-दूसरे के महत्वपूर्ण राजनीतिक, सैन्य और औद्योगिक केंद्रों पर हमला करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। संधि में शॉर्ट नोटिस पर मौके पर निरीक्षण ( On Site Inspections) की व्यवस्था है, ताकि दोनों पक्ष यह सुनिश्चित कर सकें कि दूसरा पक्ष संधि का पालन कर रहा है। लेकिन 2023 में यूक्रेन युद्ध में अमेरिका के समर्थन के कारण रूस ने अपनी भागीदारी निलंबित कर दी। इससे निरीक्षण रुक गए, और दोनों पक्षों को एक-दूसरे की गतिविधियों के बारे में केवल अपने खुफिया आकलन पर निर्भर रहना पड़ा। हालांकि, दोनों ने कहा कि वे संधि की संख्यात्मक सीमाओं का पालन जारी रखेंगे, जो अब तक लागू हैं। संधि की अवधि क्यों नहीं बढ़ाई जा रही? संधि में स्पष्ट है कि इसे केवल एक बार बढ़ाया जा सकता है (5 साल के लिए) और यह बढ़ोतरी 2021 में जो बाइडेन के राष्ट्रपति बनते ही हो चुकी है। संधि अब 5 फरवरी 2026 को समाप्त हो रही है। पिछले साल सितंबर में पुतिन ने प्रस्ताव दिया था कि दोनों पक्ष अनौपचारिक रूप से एक और साल के लिए युद्धक हथियारों की सीमा का पालन करें। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी थी। हालांकि उन्होंने इसे अच्छा विचार बताया था, लेकिन बाद में कहा कि अगर खत्म होती है तो खत्म हो जाए। अमेरिका में इस पर मतभेद क्यों? अब सवाल उठता है कि अमेरिका में इस पर मतभेद क्यों है। दरअसल, कुछ लोग मानते हैं कि समझौता स्वीकार करने से हथियारों की होड़ रुक सकती है और आगे बातचीत के लिए समय मिलेगा। वहीं, अन्य का कहना है कि चीन के तेजी से बढ़ते परमाणु हथियारों को देखते हुए अमेरिका को अब इन सीमाओं से मुक्त हो जाना चाहिए, ताकि अपना शस्त्रागार मजबूत कर सके; वरना कमजोरी का संकेत जाएगा। संधि खत्म होने से क्या फर्क पड़ेगा? अगर मॉस्को और वाशिंगटन लंबी दूरी के परमाणु हथियारों पर आपसी सीमाओं का पालन बंद कर देते हैं, तो आधे से अधिक सदी पुराना हथियार नियंत्रण का दौर खत्म हो जाएगा। कोई उत्तराधिकारी संधि नहीं बनी है, जिससे खालीपन पैदा हो गया है। विशेषज्ञ चिंतित हैं कि इससे परमाणु जोखिम बढ़ सकता है, खासकर यूक्रेन और मध्य पूर्व के युद्धों के कारण बढ़े तनाव में। संधियां सिर्फ संख्याएं सीमित नहीं करतीं, बल्कि हथियारों की अनियंत्रित दौड़ रोकने के लिए पारदर्शी ढांचा भी प्रदान करती हैं। संधि न होने पर दोनों पक्ष क्या कर सकते हैं? दोनों को अपनी मिसाइलों की संख्या बढ़ाने और सैकड़ों अतिरिक्त रणनीतिक युद्धक हथियार तैनात करने की आजादी मिल जाएगी। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी और रसद चुनौतियों के कारण यह रातोंरात नहीं होगा, बड़े बदलाव में कम से कम एक साल लग सकता है। लंबे समय में चिंता यह है कि अनियंत्रित हथियारों की दौड़ शुरू हो जाएगी, जहां दोनों पक्ष दूसरे की योजनाओं के सबसे खराब परिदृश्य पर आधारित हथियार बढ़ाते रहेंगे। नई संधि के लिए क्या शर्तें होंगी? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कहते हैं कि उन्हें एक नई, बेहतर संधि चाहिए, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह लंबी और जटिल प्रक्रिया होगी। नई संधि में अल्प और मध्यम दूरी के हथियार, रूस की नई प्रणालियां (जैसे बुरेवेस्तनिक क्रूज मिसाइल और पोसाइडन टॉरपीडो) को भी शामिल करना पड़ सकता है। इसके अलावा, इसमें कौन शामिल होगा, इस पर सहमति नहीं है। ट्रंप रूस और चीन दोनों के साथ निरस्त्रीकरण चाहते हैं, लेकिन चीन कहता है कि उनके शस्त्रागार रूस से कई गुना छोटे हैं, इसलिए बातचीत अवास्तविक है। रूस ब्रिटेन और फ्रांस (नाटो सदस्य) की परमाणु शक्तियों को भी शामिल करने की मांग करता है, जिसे वे ठुकराते हैं।  

SIR मुद्दे पर ममता का दर्द: CJI से बोलीं— ‘न्याय के लिए भटक रही हूं, हाल बंधुआ मजदूर जैसा’

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में हुए स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के मुद्दे पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में तब अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला, जब खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दलीलें रखने के लिए पेश हुईं। उन्होंने एसआईआर का विरोध करते हुए सीजेआई सूर्यकांत की बेंच के सामने कहा कि हमें कहीं भी न्याय नहीं मिल रहा, हमने चुनाव आयोग को छह चिट्ठियां लिखी हैं। मैं एक बंधुआ मजदूर हूं। उन्होंने चुनाव आयोग पर पश्चिम बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाया। 'बार एंड बेंच' वेबसाइट के अनुसार, ममता की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान भी पेश हुए और कहा कि अपमैप्ड वोटर 32 लाख हैं। लॉजिकल गड़बड़ी वाली लिस्ट में 1.36 करोड़ हैं। 63 लाख सुनवाई पेंडिंग है अभी। उन्होंने बड़ी संख्या में अनमैप्ड वोटर्स का जिक्र करते हुए कहा कि सुधार के उपायों के लिए बहुत कम समय बचा है। ममता के वकील की तरफ से कुछ उदाहरण भी पेश किए गए, जिसमें बताया गया कि कैसे नामों में गड़बड़ी आई। वकील ने कहा कि हमने आपको असली वोटर्स के उदाहरण दिए हैं। कृपया अपेंडिक्स एक देखें.. चिराग टिबरेवाल। उनकी गड़बड़ी पिता के नाम में मिसमैच थी क्योंकि पिता के नाम में बीच में कुमार आता है। मुझे नोटिस देकर बुलाया गया था। फिर आते हैं अजीमुद्दीन खान…पिता का नाम बंगाली में अलाउद्दीन खान दिखाता है… तो बंगाली से इंग्लिश में… इसमें गलती हो सकती है। 'मैं एक बंधुआ मजदूर हूं, हमें कहीं न्याय नहीं मिल रहा' सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने भी दलीलें रखीं। उन्होंने कहा, ''मैं आपकी दया के लिए आभारी हूं। जब न्याय दरवाजे के पीछे रो रहा था, तब हमें लगा कि हमें कहीं से भी न्याय नहीं मिल रहा। हमने चुनाव आयोग को छह चिट्ठियां लिखीं। मैं एक बंधुआ मजदूर हूं। मैं यही पसंद करती हूं। मैं अपनी पार्टी के लिए लड़ रही हूं।'' पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि मैं आपको फोटो दिखाती हूं और यह तस्वीर मेरी नहीं है। यह बड़े अखबारों ने छापी है। एसआईआर प्रक्रिया सिर्फ डिलीट करने के लिए है। मान लीजिए शादी के बाद एक बेटी ससुराल जाती है। सवाल किए जाते हैं कि वह पति का सरनेम क्यों इस्तेमाल कर रही है। ये लोग यही कर रहे हैं। कुछ बेटियां जो ससुराल चली गई, उनके नाम डिलीट कर दिए गए। गरीब लोग कभी कभी फ्लैट खरीदते हैं, कभी-कभी वे शिफ्ट हो जाते हैं। ऐसे के भी नाम डिलीट कर दिए गए। चुनाव से पहले बंगाल को निशाना बनाया जा रहा उन्होंने आरोप लगाया कि यह गलत मैपिंग हो रही है। चुनाव से ठीक पहले सिर्फ पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है। वे दो महीने में ही वह काम करना चाहते हैं, जिसमें दो साल लग जाते हैं। बीएलओ ने आत्महत्या कर ली और उन्होंने चुनाव अधिकारियों पर यह आरोप लगाया। पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया गया, असम को क्यों नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी करते हुए जवाब देने को कहा है। सोमवार को इस मामले की फिर से सुनवाई होगी। बता दें कि बनर्जी अपने वकीलों के साथ कोर्ट रूम नंबर एक में मौजूद रहीं। मंगलवार को मुख्यमंत्री के नाम पर एक गेट पास जारी किया गया था। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और विपुल एम पंचोली की बेंच ने बनर्जी और तीन अन्य लोगों की याचिकाओं पर सुनवाई की। इन याचिकाओं को मोस्तारी बानू और टीएमसी सांसदों डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन ने दायर किया है।  

कास्ट सेंसस को लेकर सरकार ने खोले पत्ते, संसद में बताया कब और कैसे होंगे सवाल जारी

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के तहत जाति गणना पर उपजे गतिरोध को दूर करते हुए स्पष्ट किया है कि जनगणना के दूसरे चरण में जाति से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी। जनगणना के साथ-साथ जाति गणना कराने के अपने इरादे को जताते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी देते हुए बताया कि भारत में जनगणना की प्रक्रिया परंपरागत रूप से दो चरणों में पूरी की जाएगी। उन्होंने बताया कि जनगणना के पहले चरण में हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन (HLO)का काम संपन्न होगा। इसके तहत इस चरण में हर घर की आवासीय स्थिति, संपत्ति, सुविधाएं और बुनियादी ढांचा जैसी जानकारियां जुटाई जाएंगी।। राय ने बताया कि सरकार ने मतगणना के इस चरण से जुड़े प्रश्नों को 22 जनवरी 2026 को अधिसूचित कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस चरण के बाद दूसरा चरण- जनसंख्या गणना (Population Enumeration – PE) का होगा। इसमें प्रत्येक व्यक्ति से संबंधित जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और अन्य व्यक्तिगत जानकारियां ली जाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसी चरण में जाति की गणना भी की जाएगी। जाति गणना पर राज्यों की मांग गृह राज्य मंत्री ने बताया कि जाति गणना को लेकर कई राज्यों और संगठनों से सुझाव और मांगें मिली हैं, जिनमें तमिलनाडु राज्य की ओर से भेजे गए अभ्यावेदन भी शामिल हैं। उन्होंने उन मांगों और जाति गणना पर उपजे गतिरोध को दूर करते हुए कहा कि दूसरे चरण के लिए प्रश्नावली, जिसमें जाति से जुड़े प्रश्न भी शामिल होंगे, जनगणना शुरू होने से पहले तय कर अधिसूचित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और स्थापित प्रक्रिया के तहत होगी। क्या है खास बात? दरअसल, लंबे समय से जाति आधारित जनगणना को लेकर देश में राजनीतिक और सामाजिक बहस चल रही है क्योंकि जाति जनगणना को लेकर नीति और तकनीकी मैकेनिज़्म अभी तक अंतिम रूप में सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों और न्यायालय ने भी कहा है कि डेटा की सत्यता और भरोसेमंद रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त जांच-प्रक्रियाएँ बनानी होंगी। बहरहाल, जनगणना 2027 में जाति को शामिल करने की पुष्टि को एक अहम नीतिगत कदम माना जा रहा है। इससे भविष्य की कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक नीतियों को दिशा मिल सकती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि दूसरे चरण की प्रश्नावली में जाति से जुड़े सवाल किस स्वरूप में रखे जाते हैं। 2027 की जनगणना 16वें राष्ट्रीय सर्वेक्षण के रूप में होगी। हिमालयी और बर्फ़ीले इलाकों में पहले चरण की गिनती 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी, जबकि बाकी देश में मुख्य गणना 1 मार्च 2027 से रेफरेंस डाटा के साथ शुरू होगी। यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल तरीके से की जाएगी, जिसमें मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए लोगों को अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प मिलेगा।  

राज्य को मिला नया मुख्यमंत्री: युमनाम खेमचंद सिंह ने ली शपथ, डिप्टी सीएम और मंत्री भी शामिल

मणिपुर हिंसाग्रस्त मणिपुर को लंबे राष्ट्रपति शासन के बाद अपना नया मुख्यमंत्री मिल गया है। मार्शल आर्ट के धुरंधर मैतेई समुदाय के युमनाम खेमचंद सिंह ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के तौर पर आज शपथ ली। इससे पहले आज उन्होंने मणिपुर के राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया।   वहीं, भाजपा विधायक नेमचा किपगेन ने मणिपुर के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। किपगेन कुकी समुदाय से हैं। इसके अलावा, नागा पीपुल्स फ्रंट के विधायक एल डिखो ने भी उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। भाजपा के गोविंदास कोंथौजम और एनपीपी केके लोकेन सिंह ने मंत्री पद की शपथ ली। नेमचा किपगेन ने नई दिल्ली स्थित मणिपुर भवन से डिजिटल माध्यम से शपथ ली। शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री खेमचंद ने क्या कहा? मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद खेमचंद ने पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा, मणिपुर विकसित भारत 2047 में अहम भूमिका निभाएगा। मणिपुर में 36 समुदाय हैं और हम राज्य में शांतिपूर्ण माहौल लाने की उम्मीद करते हैं।  भाजपा विधायक दल की बैठक में क्या हुआ? विधायक दल की मंगलवार को बैठक हुई, जिसमें खेमचंद (62 वर्षीय) को भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया था। राष्ट्रीय राजधानी में पार्टी मुख्यालय में भाजपा विधायक दल की डेढ़ घंटे बैठक चली, जिसमें खेमचंद के नाम पर सहमति बनी थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, पर्यवेक्षक तरुण चुघ की उपस्थिति में भाजपा मुख्यालय में विस्तार से हुई विधायक दल की बैठक में कई नामों पर विचार हुआ था।    बीरेन सिंह की पसंद को नहीं मिली तवज्जो चर्चा थी कि कुकी बनाम मैतेई समुदाय के बीच संतुलन साधने के लिए नई सरकार में कुकी समुदाय को उपमुख्यमंत्री की कुर्सी मिलेगी। हालांकि, मुख्यमंत्री के मामले में लिए गए निर्णय से साफ था कि पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की पसंद को तवज्जो नहीं मिली। बीरेन सात बार के विधायक मैतेई समुदाय के ही गोविंद दास को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कुकी बनाम मैतेई में खूनी संघर्ष के बीच बीरेन ने कई बार केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशों की अवहेलना की। हालांकि, बीरेन को राज्यसभा भेजने का आश्वासन दिया गया है। नए सीएम के सामने बड़ी चुनौती मणिपुर में अगले साल मार्च में ही विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में नए सीएम के सामने सबसे बड़ी चुनौती मैतेई बनाम कुकी संघर्ष के बीच ऐसा संतुलन साधना है, जिससे विधानसभा चुनाव में भाजपा को नुकसान न हो। पार्टी चाहती है कि आगामी चुनाव से पहले मणिपुर में जमीनी स्तर पर शांति बहाली हो। उल्लेखनीय है कि मणिपुर में फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन लागू था। मई 2023 में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा को संभालने को लेकर आलोचनाओं के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। मणिपुर विधानसभा का 12वीं विधानसभा का सातवां सत्र 6 फरवरी से शुरू होने की संभावना है। 

CM से वकील बनीं ममता बनर्जी, सुप्रीम कोर्ट में SIR मामले पर खुद करेंगी दलील—बन सकता है इतिहास

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हैं। वह वकील के तौर पर शीर्ष अदालत में पहुंची हैं। आज का दिन अदालत के इतिहास में अनोखा है क्योंकि पहली बार कोई मौजूदा सीएम सुप्रीम कोर्ट में वकील की हैसियत से दलीलें देगा। पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की ओर से चल रहे वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण को अदालत में चुनौती दी गई है। इस पर सुनवाई जारी है और इसी मामले में दलीलें देने के लिए ममता बनर्जी शीर्ष अदालत पहुंची हैं। चीफ मिनिस्टर ने अदालत में इंटरलॉक्युटरी ऐप्लिकेशन भी दाखिल की है। इसमें उन्होंने अदालत में पेश होने और निजी तौर पर दलीलें देने की मांग रखी है। मंगलवार को ही ममता बनर्जी के नाम का गेट पास सुप्रीम कोर्ट में बन गया था। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार SIR वाले केस की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच कर रही है। इस बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली शामिल हैं। इस मामले में ममता बनर्जी के अलावा तीन और याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इनमें से दो तो टीएमसी के सांसद ही हैं- डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन। ममता बनर्जी ने बंगाल में SIR को लेकर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि आखिर विपक्ष की सत्ता वाले तीन राज्यों में ही यह क्यों हो रहा है, जबकि असम में इसकी प्रक्रिया नहीं चल रही है, जहां भाजपा की सरकार है। यह याचिका 28 जनवरी को दाखिल हुई थी, जिसमें बंगाल सरकार ने कहा था कि चुनाव आयोग की कार्यवाही गैर-संवैधानिक है। बंगाल सरकार की दलील है कि SIR की पूरी प्रक्रिया जल्दबाजी में और अपारदर्शी तरीके से कराई जा रही है। इसकी कोई जरूरत नहीं है। ममता बनर्जी और अन्य याचियों की विशेष आपत्ति इस बात को लेकर है कि आखिर Logical Discrepancy वाली कैटेगरी में जिन वोटर्स के नाम डाले गए हैं, उनका ऑनलाइन प्रकाशन क्यों नहीं किया गया है। ममता बनर्जी का कहना है कि इन लोगों के नाम लिस्ट में ना डालने से साफ है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। उनका कहना है कि वोटर लिस्ट से यदि किसी का भी नाम कटता है तो उसके बारे में जानकारी देनी चाहिए और उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका भी मिलना चाहिए। बता दें कि ममता बनर्जी की चुनाव आयोग में भी एक मीटिंग हुई थी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से ही वह बैठक के दौरान भिड़ गई थीं। उन्होंने चुनाव आयोग को चेतावनी देते हुए कहा कि मैं बंगाल से यहां 1 लाख लोगों को ला सकती हूं।  

सुप्रीम कोर्ट में SIR केस की चर्चा, ममता बनर्जी ने रखीं दलीलें, CJI ने उठाए अहम मुद्दे

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर जारी विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. सीएम ममता बनर्जी ने खुद अदालत में अपनी बात रखने की कोशिश की. हालांकि, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने बीच में ही उन्हें टोकते हुए कहा कि उनकी ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और श्याम दीवान पहले ही सभी दलीलें रख चुके हैं. बता दें कि इस मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी सोमवार को होगी. चुनाव आयोग पर ममता के आरोप बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी ने कहा कि वह न्याय के लिए अदालत आई हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने चुनाव आयोग को तमाम फैक्ट्स बताए थे, लेकिन उन्हें नहीं सुना गया. इस पर CJI ने साफ किया कि आपकी नई याचिका में कुछ नए मुद्दे जरूर हैं, लेकिन जो बातें आप कह रही हैं, वे आपके वकील पहले ही अदालत के सामने रख चुके हैं. वोटर्स के नाम हटाए जा रहे हैंः ममता बनर्जी सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने रवींद्रनाथ टैगोर की स्पेलिंग में बदलावों का जिक्र करते हुए लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की बात कही. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है और राज्य में बड़े पैमाने पर वोटर्स के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं. वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने अदालत को बताया कि फाइनल वोटर लिस्ट के लिए अब सिर्फ 11 दिन बचे हैं और यह प्रक्रिया 14 फरवरी तक पूरी होनी है, जबकि इस मामले की सुनवाई के लिए केवल चार दिन का समय बचा है. उन्होंने कहा कि राज्य में करीब 32 लाख ‘अनमैप्ड वोटर्स’ हैं और लगभग 3.26 करोड़ नामों में ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ पाई गई है, जो कुल मतदाताओं का करीब 20 प्रतिशत है. श्याम दीवान ने मांग की कि चुनाव आयोग को ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी लिस्ट’ में शामिल हर मतदाता का नाम सार्वजनिक करना चाहिए. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों के बावजूद कई मामलों में केवल नाम, उम्र और लिंग दर्ज हैं, लेकिन यह नहीं बताया गया कि मतदाता का नाम सूची से क्यों हटाया गया. लोगों को यह जानने का अधिकार है कि वे वोटर लिस्ट में क्यों नहीं हैं. इस पर CJI ने कहा कि उन्हें बताया गया था कि यह प्रक्रिया सिर्फ एक सामान्य सूचना नहीं है, बल्कि संबंधित लोगों को व्यक्तिगत नोटिस भी दिए जा रहे हैं. अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि यह समय कृषि और त्योहारों का है, ऐसे में कई लोग अपने गृह जनपद से बाहर हैं. CJI ने सवाल किया कि जब बंगाल में बीएलओ पर दबाव और मौतों की बातें सामने आ रही हैं, तो असम जैसे राज्यों में ऐसा क्यों नहीं हो रहा. 'बंगाल को टारगेट किया जा रहा है' ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि अन्य राज्यों में चुनाव आयोग सभी दस्तावेज स्वीकार कर रहा है, लेकिन पश्चिम बंगाल के मामले में उन्हें खारिज किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह सब ऐसे समय हो रहा है, जब त्योहार और फसल कटाई का मौसम है और बड़ी संख्या में लोग राज्य से बाहर हैं. इस दौरान ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को ‘व्हाट्सऐप कमीशन’ तक कह दिया. उन्होंने कहा, “इलेक्शन कमीशन… सॉरी, व्हाट्सऐप कमीशन यह सब कर रहा है. लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं. बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है.” सुनवाई के अंत में CJI ने कहा कि अदालत समय बढ़ाने का निर्देश दे सकती है. उन्होंने ममता बनर्जी से कहा कि अदालत को उनके वकील श्याम दीवान की काबिलियत पर पूरा भरोसा है और उन्होंने अपने लिए श्रेष्ठ वकील चुने हैं. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई सोमवार को तय की है. CJI ने कहा कि चुनाव आयोग आज उठाए गए मुद्दों पर निर्देश लेकर अदालत के समक्ष आए. वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार को उपलब्ध ग्रुप-बी अधिकारियों की सूची पेश करने को कहा गया है. सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि चुनाव आयोग की ओर से अधिकारियों के प्रति ‘होस्टिलिटी’ को लेकर लिखित आशंका जताई गई है. अदालत में क्या-क्या हुआ, यहां देखें ECI के वकील: 'मेरी इंस्ट्रक्शन यह थी कि सिर्फ स्पेलिंग की मामूली गलती पर नोटिस जारी नहीं किया जाएगा.' CJI: 'राज्य का एग्जीक्यूटिव हेड भी आज यहां मौजूद है. क्या यह संभव नहीं कि राज्य बंगला भाषा के विशेषज्ञ उपलब्ध कराए, जो समिति के साथ बैठकर स्थानीय उच्चारण और स्पेलिंग पर सलाह दें?' ममता बनर्जी: 'मैं इस पर सफाई दे सकती हूं, क्योंकि मैं उसी राज्य से हूं.' CJI: 'इसमें कोई संदेह नहीं कि आप वहीं से हैं.' ममता बनर्जी: 'बेंच का धन्यवाद कि मुझे बोलने की अनुमति दी गई. 'समस्या यह है कि वकील तब लड़ते हैं, जब सब कुछ खत्म हो चुका होता है. जब हमें न्याय नहीं मिलता, तब न्याय दरवाजों के पीछे रोता रहता है. मैंने चुनाव आयोग को छह पत्र लिखे, लेकिन एक का भी जवाब नहीं आया.'  'मैं कोई खास व्यक्ति नहीं हूं. मैं एक बंधुआ मजदूर जैसी हूं. मैं अपनी पार्टी के लिए नहीं लड़ रही हूं, मैं एक साधारण नागरिक हूं.' CJI: 'पश्चिम बंगाल सरकार ने भी याचिका दायर की है. सुप्रीम कोर्ट के सर्वश्रेष्ठ वकील राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं—कपिल सिब्बल, गोपाल और श्याम दीवान. हमारी मदद के लिए सर्वश्रेष्ठ लीगल टीम मौजूद है. 19 जनवरी को जब मामला आया था, तब श्री सिब्बल ने पश्चिम बंगाल सरकार और नागरिकों की समस्याएं बहुत स्पष्टता से रखी थीं. सभी मुद्दे चिन्हित हो चुके हैं. हर समस्या का समाधान होता है. हमें यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी निर्दोष नागरिक बाहर न रह जाए. 'सिर्फ तीन आधार ऐसे हैं, जिन पर किसी को आपत्ति नहीं होगी— पहला, दोषसिद्ध व्यक्ति. दूसरा, जो राज्य या देश से बाहर जा चुके हैं. तीसरा, गैर-नागरिक.'  लेकिन बंगाल में नामों का उच्चारण अलग तरीके से होता है. आजकल AI-आधारित रिकॉर्डिंग हो रही है. ऐसी तकनीकी या भाषाई गलती के कारण किसी असली नागरिक को बाहर नहीं किया जाना चाहिए. ECI: 'हमें अभी तक याचिका की कॉपी नहीं मिली है. हमें यह भी नहीं पता कि असली समस्या क्या है. हमें जवाब देने के लिए एक हफ्ते का समय दिया जाए.' CJI: 'आपको कॉपी इसलिए नहीं दी गई क्योंकि यह मामला पहली … Read more

भारत-चीन व्यापार ने छुआ नया स्तर, US के साथ डील के बीच राजदूत ने दिया बयान

नई दिल्ली भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील फाइनल होने की खबरों के बीच चीनी राजदूत ने भी एक खुशखबरी दी है। चीनी राजदूत शू फेइहोंग ने मंगलवार को बताया जी कि भारत-चीन द्विपक्षीय व्यापार 2025 में 155 अरब अमेरिकी डॉलर के 'रिकॉर्ड उच्च स्तर' पर पहुंच गया है। यह पिछले साल की तुलना में हुए व्यापार से करीब 12 प्रतिशत से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि चीन को भारत का निर्यात भी 9.7 फीसदी बढ़ गया है, जो आर्थिक सहयोग की कई संभावनाओं को रेखांकित करता है। राजदूत चीनी नव वर्ष के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने इस दौरान कहा है कि चीन भारत के ब्रिक्स की अध्यक्षता करने का समर्थन करता है और भारत के साथ बहुपक्षीय समन्वय को मजबूत करने के लिए तत्पर है। उन्होंने कहा कि चीन 'ग्लोबल साउथ' के विकास को आगे बढ़ाने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं द्विपक्षीय संबंधों की दिशा पर बात करते हुए, जू ने कहा कि पिछले साल तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद चीन और भारत के संबंधों में लगातार सुधार हुआ है। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तियानजिन में एक सफल बैठक की, जिससे चीन-भारत संबंध 'रीसेट और नई शुरुआत' से सुधार के एक नए स्तर पर पहुंचे।”