samacharsecretary.com

WHO सबसे ताजा… एक साल में 70 अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से ट्रंप का नाता टूटा, US ने किया औपचारिक अलगाव

वाशिंगटन अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से औपचारिक रूप से अलग होने की प्रक्रिया पूरी कर ली है. संघीय अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले दिन इस 78 साल पुरानी सदस्यता को खत्म करने का ऐलान किया था, और अब यह फैसला पूरी तरह लागू हो गया है. हालांकि, यह अलगाव पूरी तरह साफ नहीं माना जा रहा है. इसी के साथ अपने दूसरे कार्यकाल के पहले साल में ट्रंप लगभग 70 ग्लोबल संस्थाओं या अंतरराष्ट्रीय समझौतों से नाता तोड़ चुके हैं. बीमारियों से निपटने की क्षमता पर पड़ेगा असर WHO के मुताबिक अमेरिका पर अभी भी संगठन के 130 मिलियन डॉलर से ज्यादा बकाया हैं. ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने भी माना है कि कई अहम मुद्दे अभी सुलझे नहीं हैं, जैसे अन्य देशों से मिलने वाला हेल्थ डेटा, जिससे अमेरिका को किसी नई महामारी की शुरुआती चेतावनी मिल सकती थी.  विशेषज्ञों का कहना है कि WHO से बाहर निकलने का असर वैश्विक स्तर पर नई बीमारियों से निपटने की क्षमता पर पड़ेगा और इससे अमेरिकी वैज्ञानिकों व दवा कंपनियों के लिए नए टीके और दवाएं विकसित करना भी मुश्किल हो जाएगा. जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के पब्लिक हेल्थ लॉ एक्सपर्ट लॉरेंस गोस्टिन ने इसे 'अपने जीवनकाल का सबसे विनाशकारी राष्ट्रपति फैसला' बताया है. अमेरिका से WHO को मिलती है बड़ी फंडिंग WHO संयुक्त राष्ट्र की विशेष स्वास्थ्य एजेंसी है, जो एमपॉक्स, इबोला और पोलियो जैसी बीमारियों से निपटने के वैश्विक प्रयासों का कोऑर्डिनेशन करती है. यह गरीब देशों को तकनीकी सहायता देती है, वैक्सीन और दवाओं के वितरण में मदद करती है और मानसिक स्वास्थ्य व कैंसर समेत सैकड़ों बीमारियों के लिए दिशानिर्देश तय करती है.  दुनिया के लगभग सभी देश इसके सदस्य हैं. अमेरिका WHO की स्थापना में अग्रणी रहा है और लंबे समय तक इसका सबसे बड़ा दानदाता भी रहा है. अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, अमेरिका हर साल औसतन 111 मिलियन डॉलर सदस्य शुल्क और करीब 570 मिलियन डॉलर स्वैच्छिक योगदान देता रहा है. कई यूएन और नॉन-यूएन संस्थाओं से रिश्ता खत्म WHO से अलगाव के साथ ही ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका को 66 से अधिक अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकालने का फैसला किया है. इनमें 31 संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी संस्थाएं और 35 गैर-यूएन संगठन शामिल हैं. व्हाइट हाउस का कहना है कि इनमें से कई संस्थाएं जलवायु, लेबर, प्रवासन और विविधता से जुड़े ऐसे मुद्दों पर काम कर रही थीं, जिन्हें प्रशासन ने ‘वोक एजेंडा’ करार देते हुए अमेरिका के हितों के खिलाफ बताया है. संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी जिन 31 संस्थाओं से अमेरिका बाहर निकल रहा है, उनमें आर्थिक और सामाजिक मामलों का विभाग, अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और पश्चिम एशिया के लिए आर्थिक आयोग, अंतरराष्ट्रीय कानून आयोग, अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र, पीसबिल्डिंग कमीशन और फंड, UN Women, UNFCCC यानी जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन, UN Population Fund, UN Water, UN University समेत कई अहम इकाइयां शामिल हैं. इसके अलावा 35 गैर-यूएन संगठनों से भी अमेरिका अलग हो रहा है. इनमें इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC), इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी, इंटरनेशनल सोलर अलायंस, इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर, ग्लोबल फोरम ऑन माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस और कई क्षेत्रीय व पर्यावरण से जुड़े संगठन शामिल हैं. पेरिस जलवायु समझौते से बनाई दूरी जनवरी 2025 में सत्ता में लौटने के तुरंत बाद ट्रंप ने पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका को दूसरी बार बाहर निकालने का भी ऐलान किया था. यह फैसला 27 जनवरी 2026 से लागू होगा, जिसके बाद अमेरिका कार्बन कटौती से जुड़े किसी भी कानूनी दायित्व से मुक्त हो जाएगा. इतना ही नहीं, प्रशासन ने पेरिस समझौते की बुनियाद माने जाने वाले UNFCCC से भी बाहर निकलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. चूंकि यह एक सीनेट-स्वीकृत संधि है, इसलिए इस फैसले को कानूनी चुनौती मिलने की संभावना भी जताई जा रही है. हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने साफ किया है कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और शरणार्थी एजेंसी UNHCR का सदस्य बना रहेगा, क्योंकि इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय हितों के लिए जरूरी माना गया है.

इंडिया-US संबंध ऐतिहासिक गिरावट पर! भारतीय-अमेरिकी नेता ने बताई तनाव की असली वजह

वॉशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत और अमेरिका के संबंधों में काफी कड़वाहट देखने को मिली है। दोनों देशों में जारी तनाव के बीच व्यापार को लेकर बातचीत भी जारी है। हाल ही में दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय अधिकारी वार्ता भी देखने को मिली है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे थे कि भारत और अमेरिका के बीच जल्द ही व्यापार पर बात पक्की हो जाएगी। हालांकि, इस सिलसिले में भारतीय-अमेरिकी नेता जसदीप सिंह जस्सी का कहना है कि दोनों देशों के बीच संबंध लगभग दो दशकों में अपने सबसे निचले स्तर पर आ गए हैं। जसदीप सिंह जस्सी सिख्स ऑफ अमेरिका और सिख्स फॉर ट्रंप के फाउंडर हैं। उन्होंने गुरुवार को कहा कि ट्रंप सरकार ने अपने अभियान के मुख्य वादों को इतनी तेजी से पूरा किया है, वैसा आधुनिक अमेरिकन राजनीति में बहुत कम देखने को मिला है। एक इंटरव्यू के दौरान जसदीप जस्सी ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप का पहला साल बहुत बढ़िया रहा है। मुझे लगता है कि उन्होंने इतिहास के किसी भी दूसरे राष्ट्रपति से ज्यादा काम किया है। जो दूसरे राष्ट्रपति 10 साल में करते, वह उन्होंने एक साल में कर दिया।” हाल ही में अमेरिका में अवैध प्रवासी कानून को लेकर काफी सख्ती बरती जा रही है। जस्सी ने अमेरिका के इमिग्रेशन एनफोर्समेंट को एक बड़ी कामयाबी बताया और कहा कि ट्रंप ने अमेरिकी सीमा को सुरक्षित करने का अपना वादा पूरा किया। उन्होंने कहा, “उन्होंने वादा किया था कि वह गैरकानूनी इमिग्रेशन को रोकेंगे और बॉर्डर बंद कर देंगे, और उन्होंने आज वह कर दिया है। अमेरिका में जीरो बॉर्डर क्रॉसिंग है। बाइडेन सरकार के कार्यकाल के दौरान हमारे यहां हर दिन 10,000 क्रॉसिंग होती थीं।” जस्सी ने अमेरिका में अपराध के खिलाफ ट्रंप सरकार के सख्त रवैये की सराहना की और अमेरिका के बड़े शहरों में नेशनल गार्ड फोर्स की तैनाती का जिक्र किया। जेसी ने कहा, “उन्होंने अपराध पर रोक लगाने का वादा किया था, और उन्होंने वह किया भी है। बाल्टीमोर जैसे शहरों में आपराधिक आंकड़ों के रिकॉर्ड कम हो रहे हैं।” जस्सी ने व्यापार, रोजगार और महंगाई के चलन पर जोर देते हुए कहा कि अमेरिका ट्रेड डेफिसिट में 35 फीसदी की कमी आई है। उन्होंने इसे रिकॉर्ड पर सबसे बड़ी गिरावट बताया और कहा कि ट्रंप सरकार ने एक साल में प्राइवेट सेक्टर में 6,80,000 नई नौकरियां बनाई हैं और महंगाई के दबाव को कम करने में मदद की है। उन्होंने कहा, “हमने पिछले तीन सालों की तुलना में किराने के सामान की सबसे कम कीमतें देखी हैं। थैंक्सगिविंग के आसपास पूरे देश में गैस की कीमतों में तेजी से गिरावट आई।" इसके अलावा, जस्सी ने टैरिफ रेवेन्यू का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सालाना 75,000 डॉलर से कम कमाने वाले अमेरिकियों या शादीशुदा जोड़ों के लिए 150,000 डॉलर को 2,000 डॉलर का चेक मिलने की उम्मीद है। भारतीय अमेरिकी समुदाय को लेकर जस्सी ने कहा कि स्वाभाविक नागरिक, स्थायी निवासी और उनके अमेरिका में जन्मे बच्चों को दूसरे अमेरिकियों की तरह फायदा हो रहा है। वे भारतीय अमेरिकी हैं, उनके बच्चे यहीं पैदा हुए हैं, और उनका भविष्य अमेरिका में है। अमेरिका के मजबूत होने और बिजनेस के फलने-फूलने के साथ, भारतीय अमेरिकी भी फलेंगे-फूलेंगे। हालांकि, जस्सी ने भारत और अमेरिका के संबंधों पर चिंता भी जाहिर की है। उन्होंने कहा, "हम सभी को उम्मीद थी कि भारत-यूएस इस साल अपने संबंध मजबूत करेंगे। लेकिन बदकिस्मती से, यह रिश्ता बहुत गंभीर हालत में है। मैंने इसे लगभग 20 सालों में इतना नीचे नहीं देखा।"

भारत-जापान दोस्ती का बड़ा फायदा: भारतीयों के लिए विदेश यात्रा के नए रास्ते खुले

नई दिल्ली हाल ही में जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी तीन दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी मुलाकात की थी। दोनों नेताओं की यह मुलाकात भू-राजनीतिक उतार-चढ़ाव से जूझ रहे दो हिंद-प्रशांत दिग्गजों के बीच खास रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी की मजबूती को दर्शाती है। इसके साथ ही भारतीयों के लिए जापान की यात्रा करना अब और भी आसान होगा। हाल ही में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के साथ मुलाकात के बाद जानकारी सामने आई है कि भारतीयों के लिए जापान ने अपने वीजा में बदलाव किया है। इसके तहत जापान समेत कई देशों की यात्रा करने वाले भारतीयों के समय और पैसों की बचत होगी। जापान के वैलिड वीजा के आधार पर भारतीय यात्री सात अन्य देशों की यात्रा कर सकेंगे। वैलिड जापान वीजा वाले भारतीय पासपोर्ट होल्डर यूरोप, एशिया, मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अमेरिका में कुछ जगहों पर जा सकते हैं। यह देश की शर्तों पर निर्भर करता है। इनमें जॉर्जिया, फिलीपींस, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, ताइवान, मोंटेनेग्रो और मेक्सिको शामिल हैं। भारत-जापान 2027 में अपनी रणनीतिक साझेदारी के 75 साल पूरे करेगा और इसके साथ ही इस साल जापान की फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक (एफओआईपी) स्ट्रैटेजी की 10वीं सालगिरह है। ऐसे में इस मुलाकात के दौरान दोनों मंत्रियों ने 2026 की पहली तिमाही में लॉन्च के लिए जापान-भारत प्राइवेट-सेक्टर डायलॉग ऑन इकोनॉमिक सिक्योरिटी को हरी झंडी दिखाई। इसमें प्राथमिकता वाले पांच क्षेत्रों, सेमीकंडक्टर, जरूरी मिनरल, इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (आईसीटी), क्लीन एनर्जी और फार्मास्यूटिकल्स, पर फोकस किया गया है। दोनों देशों ने यह कदम वैश्विक निर्भरता को कम करने के लिए उठाया है, ताकि भारत-जापान की अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी बैटरी और चिप्स के लिए रेयर अर्थ का स्थिर सप्लाई सुनिश्चित हो सके। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में, जापान-इंडिया एआई कोऑपरेशन इनिशिएटिव (जेएआई) में बड़े स्तर पर सहयोग बढ़ाने के लिए जापान-भारत एआई स्ट्रेटेजिक डायलॉग की स्थापना को बूस्ट किया है। क्वाड सहयोग को फिर से सुनिश्चित करते हुए दोनों देशों के मंत्रियों ने समुद्री डोमेन अवेयरनेस, कम्युनिकेशन की सुरक्षित समुद्री लाइनों और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर में साझा प्राथमिकताओं पर जोर दिया।

गोवा की याद दिलाएगा ऊना: गोविंद सागर का ‘अंदरोली’ खुला एडवेंचर प्रेमियों के लिए

ऊना ऊना जिले की बंगाणा तहसील में गोविंद सागर झील से सटा अंदरोली क्षेत्र अब एडवेंचर टूरिज्म और वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों का नया केंद्र बनकर तेजी से उभर रहा है। उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने बताया कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के मार्गदर्शन एवं निर्देशों के अनुरूप गोविंद सागर झील में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सुनियोजित ढंग से ठोस कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि कुटलैहड़ टूरिज्म डेवलपमेंट सोसाइटी के माध्यम से मेफील्ड एडवेंचर्स कंपनी के साथ वाटर स्पोर्ट्स संचालन का करार किया गया है। कंपनी ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए वाटर स्पोर्ट्स सुविधाएं उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है, जिससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को वास्तविक गति मिली है। उपायुक्त ने कहा कि देवभूमि हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत सदैव पर्यटकों को आकर्षित करती रही है। अब प्रदेश सरकार के निरंतर प्रयासों से साहसिक खेलों और पर्यटन के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं तेजी से विकसित हो रही हैं। प्राकृतिक सौंदर्य और रोमांच का अद्भुत संगम चारों ओर पहाड़ों से घिरी गोविंद सागर झील की मनोहारी छटा और जल-पर्यटन की नई गतिविधियों ने अंदरोली क्षेत्र को पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलानी शुरू कर दी है। यहां बोटिंग, कयाकिंग, जेट स्की, एटीबी राइड, हॉट एयर बैलून, स्पीड बोट और ड्रैगन राइड सहित विभिन्न वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे पर्यटकों को एक नया और रोमांचक अनुभव मिल रहा है।   उपायुक्त ने बताया कि भविष्य में यहां बनाना-बम्पर राइड, वाटर जेटोवेटर, शिकारा, 100 से अधिक सीटर क्रूज, जिप लाइन, पैरा मोटरिंग, फ्लोटिंग जेट्टी तथा पैराग्लाइडिंग जैसी गतिविधियां भी उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि यह पहल पर्यटन को नया आयाम देने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और व्यावसायिक अवसर भी सृजित करेगी। उपायुक्त ने स्वयं लिया रोमांचक अनुभव, परिवार सहित आने की अपील उपायुक्त जतिन लाल ने हाल ही में स्वयं गोविंद सागर झील के अंदरोली क्षेत्र में परिवार सहित पहुंचकर हॉट एयर बैलून राइड सहित विभिन्न एडवेंचर गतिविधियों का आनंद लिया। उन्होंने कहा कि यह सुविधा अब परिवार, बच्चों और पर्यटकों के लिए घूमने-फिरने तथा वाटर स्पोर्ट्स व साहसिक गतिविधियों का बेहतरीन विकल्प बन चुकी है। उन्होंने कहा कि पहले लोग इन गतिविधियों के लिए दूर-दराज पर्यटन स्थलों का रुख करते थे या सुविधाएं न होने के कारण निराश रहते थे, लेकिन अब अंदरोली में ही यह अवसर सहज रूप से उपलब्ध है। उपायुक्त ने आमजन से अपील की कि वे परिवार एवं बच्चों के साथ आएं और सुरक्षित वातावरण में इन गतिविधियों का आनंद लें। पारदर्शी प्रक्रिया से मिला संचालन अनुबंध उपायुक्त ने बताया कि वाटर स्पोर्ट्स संचालन के लिए प्रतिस्पर्धी व पारदर्शी निविदा प्रक्रिया अपनाई गई थी। इसमें मेफील्ड एडवेंचर्स ने 80 लाख 500 रुपये की सर्वाधिक बोली लगाकर संचालन अनुबंध प्राप्त किया। पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से संपन्न करने हेतु अतिरिक्त उपायुक्त ऊना की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा सभी औपचारिकताएं पूर्ण की गईं। एडीबी से 10 करोड़ का निवेश प्रस्तावित उन्होंने बताया कि अंदरोली क्षेत्र को एडवेंचर टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने के लिए एशियन विकास बैंक (एडीबी) की सहायता से 10 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है, जिससे पर्यटन सुविधाओं के विस्तार और क्षेत्र को व्यवस्थित पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी। इसके अतिरिक्त गोविंद सागर पर मंदली-लठियाणी पुल व सड़क निर्माण परियोजना से क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिससे पर्यटन को नई गति मिलेगी। गौरतलब है कि बीते वर्षों में पुलिस विभाग द्वारा आयोजित एडवेंचर स्पोर्ट्स मीट ने भी इस क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई थी, जिसमें देशभर से आए प्रतिभागियों ने साहसिक गतिविधियों में भाग लिया था। पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से उभरेगा ऊना जिला उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की प्राथमिकता है कि पर्यटन को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर सृजित किए जाएं। गोविंद सागर झील में वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों की शुरुआत इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था सशक्त होगी और ऊना जिला पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूती से उभरेगा। मुख्यमंत्री के विजन को मिल रहा धरातल पर स्वरूप : विवेक शर्मा कुटलैहड़ के विधायक विवेक शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का स्पष्ट विजन है कि पर्यटन को प्रदेश के आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनाया जाए। कुटलैहड़ विस के अंदरोली में गोविंद सागर झील में वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों की शुरुआत इसी विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे क्षेत्र में युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर बनने के साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

मंदिर का मालिक बनने का दावा ठुकराया, HC ने पुजारी को दिया कानूनी झटका

अहमदाबाद गुजरात हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ किया है कि किसी भी मंदिर का पुजारी ज़मीन का मालिक नहीं होता, बल्कि वह केवल देवता का सेवक होता है। अदालत ने एक ऐसे पुजारी की अपील खारिज कर दी, जो सार्वजनिक रास्ते पर बने गणेश मंदिर की ज़मीन पर अपना मालिकाना हक जताना चाहता था। जस्टिस जे.सी. दोशी की पीठ ने ये फैसला सुनाते हुए कहा कि सिर्फ वर्षों तक पूजा-पाठ करने से किसी पुजारी को मंदिर की ज़मीन पर अधिकार नहीं मिल जाता और न ही वह मंदिर को तोड़े जाने से रोक सकता है। रमेशभाई उमाकांत शर्मा बनाम आशाबेन कमलेशकुमार मोदी और अन्य के मामले में जस्टिस जेसी दोशी ने कहा कि पुजारी को मंदिर को गिराने से रोकने या ज़मीन पर मालिकाना हक का दावा करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। अपील खारिज करते हुए, कोर्ट ने पुजारी की सीमित भूमिका को साफ तौर पर समझाया। कोर्ट ने क्या कहा? हाई कोर्ट ने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा, “पुजारी भूमिस्वामी नहीं होता, वह केवल देवता का सेवक होता है। सेवक होने के नाते वह यह दावा नहीं कर सकता कि उसकी मौजूदगी मालिक की तरफ से थी और वह ‘अतिक्रमण द्वारा स्वामित्व’ (Adverse Possession) में बदल गई।” अदालत ने यह भी कहा कि धार्मिक सेवा कभी भी कानूनी स्वामित्व का आधार नहीं बन सकती। क्या है पूरा मामला? मामला तब शुरू हुआ जब एक महिला ज़मीन मालिक ने अपनी संपत्ति के पास सार्वजनिक रास्ते पर बने गणेश मंदिर पर आपत्ति जताई और सिविल कोर्ट में मंदिर हटाने की मांग की। ट्रायल कोर्ट और पहली अपीलीय अदालत दोनों ने मंदिर को हटाने का आदेश दिया। इसके बाद मंदिर के पुजारी ने गुजरात हाई कोर्ट में अपील दाखिल की। पुजारी का तर्क था कि वह कई वर्षों से वहां पूजा कर रहा है, इसलिए उसे 'एडवर्स पजेशन’ के तहत ज़मीन का मालिक माना जाना चाहिए। ‘एडवर्स पजेशन’ का दावा क्यों खारिज हुआ? हाई कोर्ट ने कहा कि किसी जमीन पर मालिकाना हक पाने के लिए यह साबित करना जरूरी होता है कि कब्जा खुला हो, लगातार हो और असली मालिक के खिलाफ हो लेकिन इस मामले में पुजारी खुद मानता है कि वह सबकी जानकारी और सहमति से पूजा कर रहा था। यानी उसका कब्ज़ा न तो विरोध में था और न ही ज़बरदस्ती का। अदालत ने कहा कि ऐसे हालात में मालिकाना हक का दावा कानूनी रूप से टिक नहीं सकता। ट्रस्ट या देवता की ओर से भी कोई दावा नहीं बार एंड बेंच के मुताबिक, कोर्ट ने यह भी नोट किया कि न तो मंदिर ट्रस्ट, न ही देवता की ओर से कोई प्रतिनिधि विवादित जमीन पर अधिकार जताने सामने आया। पुजारी ने अकेले ही दावा किया, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सार्वजनिक सड़कों या सरकारी ज़मीन पर बने अनधिकृत धार्मिक ढांचों को संरक्षण नहीं दिया जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने चेतावनी दी कि ऐसे निर्माण आम लोगों के अधिकारों का हनन करते हैं और कानून का दुरुपयोग कर अतिक्रमण को बचाने की कोशिश की जाती है, जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

‘ये मोदी की गारंटी है’: सबरीमाला मामले में PM ने किया बड़ा वादा

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबरीमाला मंदिर में सोना चोरी को लेकर केरल के लोगों से बड़ा वादा किया है। शुक्रवार को उन्होंने कहा कि अगर भाजपा राज्य में सत्ता में आती है, तो सबरीमाला सोने मामले की जांच की जाएगी और दोषियों को जेल भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मोदी की गारंटी है। पीएम मोदी ने यह टिप्पणी केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में की, जहां उन्होंने विभिन्न विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया और नई ट्रेन सेवाओं को हरी झंडी दिखाई।   पीएम मोदी ने कहा, 'पूरे देश में हम सबकी भगवान अयप्पा में अटूट आस्था है। हालांकि, एलडीएफ सरकार ने सबरीमाला मंदिर की परंपराओं को नुकसान पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। अब यहां से सोने की चोरी की खबरें सामने आ रही हैं। मंदिर से, भगवान के ठीक पास से सोना चुराए जाने की रिपोर्ट्स हैं। मैं एक बात स्पष्ट करना चाहता हूं कि जैसे ही यहां भाजपा की सरकार बनेगी, इन आरोपों की गहन जांच होगी और दोषियों की जगह जेल में होगी।' सबरीमाला मामले को लेकर राजनीतिक तूफान प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी सबरीमाला सोने की चोरी मामले के विवाद के बीच आई है, जो राजनीतिक तूफान में बदल चुका है। यह मामला मंदिर के गर्भगृह के दरवाजे के फ्रेम और रक्षक मूर्तियों को ढकने वाली प्लेटों से सोने के गबन से संबंधित है। इसकी जांच फिलहाल केरल पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) की ओर से की जा रही है, जो राज्य उच्च न्यायालय के आदेश पर काम कर रही है। पीएम मोदी ने दावा किया कि दशकों से एलडीएफ और यूडीएफ दोनों ने तिरुवनंतपुरम की उपेक्षा की है, जिससे यह शहर बुनियादी सुविधाओं और अवसंरचना से वंचित रह गया है। उन्होंने कहा, ‘वामपंथी और कांग्रेस लगातार हमारे लोगों की जरूरतों को पूरा करने में विफल रहे हैं। हालांकि, हमारी भाजपा टीम ने तिरुवनंतपुरम के विकास की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। शहर के लोगों से मैं कहना चाहता हूं – विश्वास रखें, जिस बदलाव की लंबे समय से प्रतीक्षा थी, वह आखिरकार आने वाला है।’  

डोनाल्ड ट्रंप की नियुक्ति: भारतीय मूल के नेता को मिली बोर्ड ऑफ पीस में बड़ी भूमिका

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण और वहां शांति स्थापित करने के उद्देश्य से एक नए अंतरराष्ट्रीय निकाय का गठन किया है। इसे उन्होंने 'बोर्ड ऑफ पीस' नाम दिया गया है। इस बोर्ड के 'फाउंडिंग एग्जीक्यूटिव बोर्ड' में उन्होंने भारतीय मूल के एक शख्स को बड़ी जिम्मेदारी दी है। उस शख्स का नाम अजय बंगा है। अजय बंगा वर्तमान में वर्ल्ड बैंक के प्रेसिडेंट (अध्यक्ष) हैं। यह नियुक्ति कुछ दिन पहले ही हो गई थी। वाइट हाउस ने बताया कि ट्रंप खुद इस 'बोर्ड ऑफ पीस' के चेयरमैन हैं। यह कदम ट्रंप के 20-सूत्रीय गाजा पीस प्लान के फेज-2 का हिस्सा है।   'बोर्ड ऑफ पीस' क्या है और इसका काम क्या होगा? यह बोर्ड ट्रंप के उस 20-सूत्रीय शांति योजना का हिस्सा है, जिसका मकसद गाजा में चल रहे संघर्ष को समाप्त कर वहां विकास के नए रास्ते खोलना है। इसका मकसद गाजा में इंफ्रास्ट्रक्चर का पुनर्निर्माण करना, अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना और प्रशासनिक व्यवस्था को सुधारना है। अजय बंगा की भूमिका की बात करें तो वह एक वित्तीय विशेषज्ञ हैं। वर्ल्ड बैंक के प्रमुख के तौर पर बंगा की भूमिका बेहद अहम होगी। उन्हें गाजा के लिए निवेश आकर्षित करने, बड़ी फंडिंग जुटाने और आर्थिक रणनीतियां बनाने की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इस बोर्ड की अध्यक्षता खुद डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। उनके अलावा इसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर जैसे बड़े नाम शामिल हैं। यह नियुक्ति क्यों मायने रखती है? अजय बंगा को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने वर्ल्ड बैंक के लिए नॉमिनेट किया था, लेकिन अब रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी उन पर भरोसा जता रहे हैं। यह बंगा की वैश्विक स्वीकार्यता और उनकी आर्थिक कूटनीति की क्षमता को दर्शाता है। गाजा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर उन्हें शामिल करना यह बताता है कि अमेरिका वहां के पुनर्निर्माण को एक बड़े आर्थिक प्रोजेक्ट के तौर पर देख रहा है। कौन हैं अजय बंगा? अजय बंगा कॉर्पोरेट जगत और वैश्विक अर्थव्यस्था का एक जाना-माना नाम हैं। मास्टरकार्ड को नई ऊंचाइयों पर ले जाने से लेकर वर्ल्ड बैंक की कमान संभालने तक, उनका सफर प्रेरणादायक रहा है। उनका पूरा नाम अजयपाल सिंह बंगा है। वे 1959 में महाराष्ट्र के पुणे (खड़की छावनी) में एक सिख परिवार में पैदा हुआ। उनके पिता, हरभजन सिंह बंगा, भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल थे। इस कारण उनकी स्कूली शिक्षा भारत के अलग-अलग शहरों (सिकंदराबाद, शिमला, दिल्ली) में हुई। उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया और फिर IIM अहमदाबाद से मैनेजमेंट (MBA) की डिग्री हासिल की। करियर का सफर बंगा ने 1981 में नेस्ले इंडिया के साथ अपना करियर शुरू किया और वहां 13 साल तक काम किया। इसके बाद वे पेप्सिको से जुड़े, जहां उन्होंने भारत में 'पिज्जा हट' और 'केएफसी' जैसे ब्रांड्स को लॉन्च करने में अहम भूमिका निभाई। 1996 में वे सिटीग्रुप से जुड़े और धीरे-धीरे एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के CEO बने। 2010 में वे मास्टरकार्ड के CEO बने। उनके नेतृत्व में कंपनी ने न सिर्फ भारी मुनाफा कमाया, बल्कि टेक्नोलॉजी और डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में क्रांति ला दी। वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष मई 2023 में वे वर्ल्ड बैंक के 14वें अध्यक्ष चुने गए। वह इस पद पर पहुंचने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी हैं। वर्ल्ड बैंक में उनका फोकस जलवायु परिवर्तन, गरीबी उन्मूलन और विकासशील देशों को आर्थिक मदद देने पर रहा है। भारत सरकार ने उन्हें 2016 में 'पद्म श्री' से सम्मानित किया था। बराक ओबामा के कार्यकाल में वे साइबर सुरक्षा पर राष्ट्रपति के सलाहकार आयोग के सदस्य भी रह चुके हैं। कुल मिलाकर ट्रंप ने अजय बंगा को विशेष रूप से आर्थिक रणनीति, फंड मोबिलाइजेशन और रिकंस्ट्रक्शन पोर्टफोलियो में योगदान के लिए चुना गया है, क्योंकि विश्व बैंक के प्रमुख के तौर पर उनके पास वैश्विक विकास फंडिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर का गहरा अनुभव है।

SIR विवाद पर ममता बनर्जी का बड़ा बयान: तनाव ऐसा कि बंगाल में रोज 3-4 आत्महत्याएं

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर शुक्रवार को बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि राज्य में जारी एसआईआर अभ्यास के चलते फैली चिंता के कारण हर दिन तीन से चार लोग आत्महत्या कर रहे हैं। सुभाष चंद्र बोस की जयंती के उपलक्ष्य में कोलकाता में रेड रोड पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा, 'निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार को इन मौतों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। अब तक 110 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। प्रतिदिन तीन से चार लोग SIR की वजह से अत्यधिक चिंता के कारण आत्महत्या कर रहे हैं।’ आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में मतदाता सूचियों का एसआईआर अभ्यास जारी है। ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर पश्चिम बंगाल के खिलाफ साजिश रचने का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाषचंद्र बोस और बीआर आंबेडकर जैसे देश के महान व्यक्तित्वों का अपमान किया जा रहा है। इसस पहले, ममता बनर्जी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने केंद्र सरकार से इस महान स्वतंत्रता सेनानी से जुड़े सभी शेष दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की अपील की। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर श्रद्धांजलि ममता बनर्जी ने कहा कि दशकों बीत जाने के बावजूद नेताजी के लापता होने का रहस्य अब तक अनसुलझा है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'देशनायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर मैं उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि और नमन अर्पित करती हूं। यह हम सभी का दुर्भाग्य है कि नेताजी के लापता होने का रहस्य आज तक नहीं सुलझा है। 1945 के बाद उनके साथ क्या हुआ, यह हम नहीं जानते। यह सभी के लिए अत्यंत दुख की बात है।' बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस से संबंधित सभी राज्य स्तरीय फाइलें बहुत पहले ही सार्वजनिक कर दी थीं। उन्होंने कहा कि मैं भारत सरकार से एक बार फिर अपील करती हूं कि नेताजी से संबंधित सभी जानकारियों को सार्वजनिक किया जाए।  

अमेरिकी मीडिया ने खोली ट्रंप पहल की परतें, ‘पीस बोर्ड’ निकला सिर्फ दिखावा?

नई दिल्ली डोनाल्ड ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस की पोल अमेरिकी मीडिया ने ही खोल दी है। अमेरिका के अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने उनके इस प्लान को वनमैन शो बताया है। अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए अखबार की यह टिप्पणी आईना दिखाने वाली है, जो अपने द्वारा तय एजेंडे को चलाने के लिए बोर्ड ऑफ पीस शुरू करना चाहते हैं। अखबार ने लिखा है कि डोनाल्ड ट्रंप की यह संस्था वन मैन पावर शो है। इसके तहत डोनाल्ड ट्रंप को ही अधिकार होगा कि वह किसी भी मसले पर वीटो कर सकते हैं। वह अनिश्चितकाल तक इस बोर्ड का चेयरमैन खुद को घोषित कर चुके हैं। इसके अलावा बोर्ड का एजेंडा भी वही तय करेंगे। उनके द्वारा ही तय किया जाएगा कि कौन इसमें रहेगा और नहीं।   इतना ही नहीं डोनाल्ड ट्रंप जब भी चाहें इस बोर्ड को भंग कर सकते हैं और अपना उत्तराधिकारी तय कर सकते हैं। इस बोर्ड ऑफ पीस के गठन का जो ड्राफ्ट है, उसके आर्टिकल 3.2 में ही लिखा गया है कि पहले चेयरमैन डोनाल्ड ट्रंप होंगे। अखबार लिखता है कि कई अधिकारी और एक्सपर्ट मानते हैं कि यह वनमैन शो है। अखबार ने लिखा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद बनी व्यवस्था को बदलकर डोनाल्ड ट्रंप नया सिस्टम लाना चाहते हैं और खुद को ही उसके केंद्र में रखने का विचार है। कैंब्रिज इंटरनेशनल लॉ प्रोफेसर मार्क वेलर ने कहा कि यह तो सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र पर हमला है और उसके वजूद पर खतरा पैदा करना है। सऊदी अरब, मिस्र, इजरायल, बेलारूस, पाकिस्तान समेत कई देश इससे जुड़े हैं। हंगरी भी इससे जुड़ा है और उसने तो डोनाल्ड ट्रंप की शान में कसीदे पढ़े हैं। हंगरी के पीएम विक्टर ऑर्बन ने फेसबुक पर लिखा, 'जहां ट्रंप, वहां शांति। मिस्टर ट्रंप ने मुझे बोर्ड का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है और मैंने निसंदेह इससे जुड़ूंगा। यह मेरे लिए गर्व की बात है।' मार्क वेलर कहते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की यह कोशिश है कि वह पूरी दुनिया को ही अपने इर्द-गिर्द घुमाएं। दरअसल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ही नवंबर में गाजा में शांति प्रस्ताव के लिए एक बोर्ड का गठन की बात रखी थी। इस प्रस्ताव के तहत यह कहा गया था कि 2027 तक यह बोर्ड काम करेगा। यह बोर्ड गाजा में हालात सामान्य करेगा। अब तक बोर्ड ऑफ पीस की शक्तियां निर्धारित नहीं की गई हैं, लेकिन जैसे हालात हैं उसके अनुसार ऐसा लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप वन मैन शो बनाने की कोशिश में हैं। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को एक स्पीच में कहा था कि संयुक्त राष्ट्र संघ उम्मीदें पूरी नहीं कर पाया है। उनका कहना था कि इस संस्था में बहुत क्षमता थी, लेकिन वह उम्मीदें पूरी नहीं कर सकी है। एक बयान से साफ हो गए ट्रंप के इरादे, तब से ही आशंकाएं उनका कहना था कि बोर्ड ऑफ पीस दुनिया के विवादों को खत्म करेगा। यही नहीं भविष्य में यूएन की ही जगह ले सकता है। इससे उनके इरादे स्पष्ट हो गए, लेकिन दुनिया भर के देशों में इसे लेकर चिंता भी बढ़ गई कि आखिर डोनाल्ड ट्रंप संयुक्त राष्ट्र को क्यों खत्म करना चाहते हैं। इसके अलावा अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में एकछत्र राज कायम करने की कोशिशों की भी आलोचना हो रही है।  

स्वास्थ्य को लेकर उठे सवाल, हाथ के निशान पर ट्रंप की सफाई—क्या है पूरा मामला?

नई दिल्ली दुनिया भर के दिग्गज नेताओं के बीच दावोस में 'बोर्ड ऑफ पीस' के गठन में जुटे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपनी सेहत को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। समारोह के दौरान उनके बाएं हाथ पर गहरे नीले रंग के निशान देखे गए, जिससे सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उनकी सेहत को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद इन चर्चाओं पर विराम लगाते हुए इसे एक मामूली घटना बताया है। हाथ पर मौजूद निशानों को लेकर उठ रहे सवालों पर जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा कि यह चोट केवल एक दुर्घटना का परिणाम है। उन्होंने पत्रकारों से कहा, "मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं। मेरा हाथ टेबल के कोने से टकरा गया था। मैंने इस पर थोड़ा सा मरहम लगाया है। डॉक्टर कहते हैं कि मुझे कुछ भी लेने की जरूरत नहीं है, लेकिन मैं कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।" ट्रंप ने इन निशानों का संबंध अपनी नियमित दवाओं से भी जोड़ा। उन्होंने बताया कि वह अपने दिल की सेहत के लिए रोजाना 325 मिलीग्राम की बड़ी एस्पिरिन लेते हैं। ट्रंप के अनुसार, इस दवा की वजह से त्वचा संवेदनशील हो जाती है और हल्का सा टकराने पर भी नीला निशान पड़ जाता है। उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज में कहा, "मैं चाहता हूं कि मेरे दिल में खून का बहाव अच्छा और पतला रहे। अगर आप अपना दिल अच्छा रखना चाहते हैं तो एस्पिरिन लें, लेकिन इसके साथ थोड़े नीले निशान सहने के लिए भी तैयार रहें।" वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने भी राष्ट्रपति के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि 'बोर्ड ऑफ पीस' कार्यक्रम के दौरान ट्रंप का हाथ मेज के कोने से टकरा गया था। अधिकारियों ने राष्ट्रपति की पहले और बाद की तस्वीरें साझा करते हुए यह साबित करने की कोशिश की कि यह निशान अचानक लगी चोट का ही हिस्सा है। ट्रंप के निजी चिकित्सक डॉ. सीन बारबाबेला ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति प्रतिदिन 325 मिलीग्राम एस्पिरिन लेते हैं। मेयो क्लिनिक जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के अनुसार, दिल की सुरक्षा के लिए आमतौर पर 75 से 100 मिलीग्राम की खुराक पर्याप्त मानी जाती है। अधिक खुराक से रक्त अधिक पतला हो जाता है, जिससे चोट लगने पर निशान पड़ने का खतरा बढ़ जाता है।