samacharsecretary.com

मोहन भागवत का कांग्रेस पर निशाना: हिंदू धर्म का उदाहरण देते हुए दिया जवाब

नई दिल्ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के रजिस्ट्रेशन पर कांग्रेस के सवाल के बाद आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने जवाब दिया है कि आखिर उन्होने संगठन का रजिस्ट्रेशन क्यों नहीं करवाया। मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस की स्थापना 1925में ही हो गई थी। ऐसे में क्या ब्रिटिश सरकार के साथ इसका रजिस्ट्रेशन करवाना चाहिए था? मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस की पहचान व्यक्तियों के संगठन के तौर पर है। भागवत बेंगलुरु के एक कार्यक्रम में पत्रकारों के सवालों के जवाब दे रहे थे। मोहन भागवत ने कहा, आजादी के बाद भारत सरकार ने रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं किया था। हम विशेष पहचान रखने वाले संगठन हैं और यह जनता का निकाय है। इसे आयकर से भी छूट दी गई है। उन्होंने कहा, हमें तीन बार बैन किया गया। इसका मतलब सरकार ने हमें मान्यता दी है। अगर हमारी मान्यता ही ना होती तो फिर बैन कैसे किया जाता? उन्होंने कहा कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और अदालतें भी आरएसएस को बॉडी ऑफ इंडिविजुअल्स के रूप में मान्यता देती हैं। बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जिनका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। जैसे कि हिंदू धर्म का भी कोई रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। केवल भगवा झंडे को सम्मान देने के आरोपों पर भागवत नेकहा कि भगवा को आरएसएस में गुरु के तौर पर सम्मान दिया जाता है। वहीं भारत के तिरंगे का सम्मान किसी मायने में कम नहीं है। हम हमेशा तिरंगे का सम्मान करते हैं और उसकी सुरक्षा का संकल्प लेते हैं। बतादें कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा था कि आरएसएस को बैन कर देना चाहिए। यहीं देश में फसाद की जड़ है। खरगे के बेटे और कर्टाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खरगे ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर मांग की थी कि सार्वजनिक स्थानों पर आरएसएस की शाखाओं को बैन कर दिया जाए। उन्होंने आरएसएस के रजिस्ट्रेशन नंबर को लेकर भी सवाल किया था। एक दिन पहले ही मोहन भागवत ने कहा था कि आरएसएस का लक्ष्य हिंदू समाज को सत्ता के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र के गौरव के लिए संगठित करना है और हिंदू भारत के लिए ‘‘जिम्मेदार’’ हैं। उन्होंने कहा कि भारत में कोई "अहिंदू" नहीं है, क्योंकि सभी एक ही पूर्वजों के वंशज हैं और देश की मूल संस्कृति हिंदू है। उन्होंने कहा, "शायद उन्हें यह बात पता नहीं है, या उन्होंने यह बात भुला दी है।" उन्होंने कहा, "जानबूझकर या अनजाने में, हर कोई भारतीय संस्कृति का पालन करता है, इसलिए कोई भी अहिंदू नहीं है, और प्रत्येक हिंदू को यह समझना चाहिए कि वह हिंदू है, क्योंकि हिंदू होने का मतलब भारत के लिए जिम्मेदार होना है।"  

भारत-अमेरिका की संयुक्त कार्रवाई में सफलता, जॉर्जिया से पकड़े गए हरियाणा के दो कुख्यात अपराधी

जॉर्जिया सुरक्षा एजेंसियों और हरियाणा पुलिस को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी सफलता मिली है। विदेशों में छिपे गैंगस्टरों के खिलाफ चलाए गए एक विशेष ऑपरेशन के तहत भारत के दो मोस्ट वांटेड अपराधी वेंकटेश गर्ग और भानु राणा को क्रमश: जॉर्जिया और अमेरिका में हिरासत में ले लिया गया है। ये दोनों गैंगस्टर हरियाणा और पंजाब में कई संगीन आपराधिक मामलों में वांछित थे। जॉर्जिया में वेंकटेश गर्ग गिरफ्तार कुख्यात गैंगस्टर वेंकटेश गर्ग को जॉर्जिया में हिरासत में लिया गया है। वह लंबे समय से विदेश भागकर अपने आपराधिक नेटवर्क को सक्रिय रखे हुए था। वेंकटेश गर्ग कुख्यात गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू के गैंग से जुड़ा हुआ है। इसे भारत वापस लाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। उसे जल्द ही जॉर्जिया से प्रत्यर्पित (Extradited) किया जाएगा। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए हरियाणा पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में एक विशेष टीम जॉर्जिया पहुंच चुकी है।  अमेरिका में पकड़ा गया कुख्यात अपराधी भानु राणा दूसरी तरफ हरियाणा का कुख्यात गैंगस्टर भानु राणा अमेरिका में हिरासत में लिया गया है। यह गिरफ्तारी भारत की ओर से दिए गए इनपुट और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का हिस्सा है। भानु राणा को भी जल्द ही अमेरिका से डिपोर्ट करके भारत भेजा जाएगा।  लॉरेंस बिश्नोई गैंग कनेक्शन पुलिस जांच में सामने आया है कि भानु राणा लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा हुआ है। उसका नेटवर्क हरियाणा, पंजाब और दिल्ली तक फैला हुआ है। पंजाब में हुए एक ग्रेनेड हमले की जांच में उसका नाम सामने आया था। जांच एजेंसियों के अनुसार अमेरिका में बैठे उसके कुछ संपर्क भी इस नेटवर्क से जुड़े थे। पुलिस पहले ही भानु राणा के कई साथियों को गिरफ्तार कर चुकी है और उसके खिलाफ कई मामलों में चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि विदेशों में छिपे गैंगस्टरों के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा।  

गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के नए नियम, मछुआरों को मिलेगा फिशर आईडी कार्ड

  नई दिल्ली केंद्र सरकार ने समुद्री संसाधनों के बेहतर उपयोग और मछुआरों की सहायता के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के तहत गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए नए नियमों को अधिसूचित किया है। इन नियमों का मकसद मछुआरों, सहकारी समितियों और छोटे स्तर के मछुआरों को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही नए बदलावों का मकसद विदेशी जहाजों को भारतीय जलसीमा में मछली पकड़ने से रोकना भी है। क्या है नए नियमों की खास बातें? सरकार की ओर से बनाए गए नए नियमों के मुताबिक अब कोई भी विदेशी मछली पकड़ने वाला जहाज भारतीय समुद्री सीमा में मछली नहीं पकड़ सकेगा। इससे देश के छोटे मछुआरों के हितों की रक्षा होगी। नए नियमों में यह भी कहा गया है कि गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए अब मछुआरा सहकारी समितियों और मछली पालक उत्पादक संगठनों (FFPOs) को प्राथमिकता दी जाएगी। ये संगठन आधुनिक तकनीक से लैस नावों का इस्तेमाल कर सकेंगे। मछुआरों से जुड़ी सरकार की नई व्यवस्था में ‘मदर-चाइल्ड वेसल’ की भ्ी अवधारणा लाई गई है। इसकी सहायता से समुद्र के बीच में ही मछलियों का आदान-प्रदान संभव होगा। यह व्यवस्था खासकर अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप जैसे द्वीपों के लिए फायदेमंद साबित होगी। यह क्षेत्र भारत के ईईजेड का 49% हिस्सा रखते हैं। सरकार की ओर से अधिसूचित नए नियमों में पर्यावरण की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया है। नए नियमों में एलईडी लाइट से मछली पकड़ना, पेयर ट्रॉलिंग और बुल ट्रॉलिंग जैसी हानिकारक प्रथाओं पर रोक लगा दी गई है। साथ ही, मछलियों को पड़नने के लिए कानूनी रूप से उनकी न्यूनतम लंबाई तय की जाएगी और राज्यों के साथ मिलकर मत्स्य प्रबंधन योजनाएं बनाई जाएंगी। मछुआरों को अब एक्सेस पास भी जारी किया जाएगा। अब बड़े और मोटर चालित जहाजों को EEZ में मछली पकड़ने के लिए ‘एक्सेस पास’ लेना होगा। यह पास मुफ्त में ReALCRaft पोर्टल से ऑनलाइन जारी किया जएएगा। छोटे और पारंपरिक मछुआरों को इससे छूट दी गई है। नए नियमों में कहा गया है कि सभी गहरे समुद्र में जाने वाले जहाजों में ट्रांसपोंडर लगाना अनिवार्य होगा। साथ ही, मछुआरों को QR कोड वाले आधार या फिशर ID कार्ड दिए जाएंगे। इससे सुरक्षा एजेंसियों को निगरानी में मदद मिलेगी। निर्यात को मिलेगा बढ़ावा ReALCRaft पोर्टल को एमपीईडीए और ईआईसी से जोड़ा जा रहा है। इससे मछलियों की पकड़ और स्वास्थ्य प्रमाणपत्र जारी किए जा सकें। इससे भारतीय समुद्री उत्पादों की वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। मछुआरों को मिलेगा सरकारी सहयोग सरकार मछुआरों को ट्रेनिंग, अंतरराष्ट्रीय दौरे, प्रोसेसिंग, मार्केटिंग और ब्रांडिंग में मदद देगी। साथ ही, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और मत्स्य एवं जलकृषि अवसंरचना विकास निधि (FIDF) के तहत कर्ज की सुविधा भी दी जाएगी। भारत की समुद्री ताकत भारत के पास 11,099 किलोमीटर लंबा समुद्री तट और 23 लाख वर्ग किलोमीटर का EEZ क्षेत्र है, जो 50 लाख से ज्यादा मछुआरों की आजीविका का आधार है। भारत मछली उत्पादन और जलकृषि में दुनिया में दूसरे स्थान पर है, और हर साल करीब 60,000 करोड़ रुपये का समुद्री उत्पाद निर्यात करता है। अब तक क्यों नहीं हो पाया ईईजेड का पूरा उपयोग? हालांकि भारत के पास विशाल समुद्री क्षेत्र है, लेकिन गहरे समुद्र में मौजूद ट्यूना जैसी कीमती मछलियों का दोहन अब तक सीमित रहा है। वहीं, श्रीलंका, मालदीव, इंडोनेशिया और यूरोपीय देश भारतीय महासागर से बड़ी मात्रा में ट्यूना मछली पकड़ते हैं। नए नियमों से क्या बदलेगा? ये नियम भारत को समुद्री उत्पादों के वैश्विक व्यापार में और मजबूत बनाएंगे। साथ ही, यह एक ऐसा मॉडल पेश करते हैं जिसमें तकनीक, पारदर्शिता और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। इससे न केवल मछुआरों को फायदा होगा, बल्कि समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की भी रक्षा होगी।  

Aadhaar Data Vault पेश: डिजिटल भारत को मिलेगी मजबूत डेटा सुरक्षा कवच

नई दिल्ली भारत में डिजिटल सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में UIDAI ने एक नई पहल की है। अब आपके Aadhaar नंबर और उससे जुड़े eKYC डेटा को सुरक्षित रखने के लिए Aadhaar Data Vault लॉन्च किया गया है। यह आधुनिक डिजिटल स्टोरेज सिस्टम विशेष एन्क्रिप्शन तकनीक के जरिए आपकी संवेदनशील जानकारी को चोरी और गलत इस्तेमाल से बचाएगा। डेटा की सुरक्षा का नया तरीका ADV में सभी Aadhaar नंबर टोकनाइजेशन के माध्यम से एन्क्रिप्टेड फॉर्म में सुरक्षित होंगे, जिससे असली नंबर कहीं भी लीक नहीं होगा। केवल अधिकृत एजेंसियां ही सीमित रूप से इस डेटा तक पहुंच पाएंगी। साथ ही, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और ऑडिट ट्रेल्स की मदद से डेटा सुरक्षा को और भी मजबूत बनाया गया है। कौन-कौन कर पाएंगे इसका उपयोग बैंक, फिनटेक कंपनियां और सरकारी संस्थाएं, जो Aadhaar के जरिए पहचान की प्रक्रिया करती हैं, ADV का उपयोग अनिवार्य रूप से करेंगी। इसका उद्देश्य पर्सनल डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना और डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव करना है। नागरिकों के लिए भरोसे की गारंटी अब यूजर्स को भरोसा मिलेगा कि उनका संवेदनशील डेटा पूरी तरह सुरक्षित है। Aadhaar KYC या ऑथेंटिकेशन करते समय डेटा हमेशा एन्क्रिप्टेड रहेगा, जिससे प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जाएगा। डिजिटल भारत के लिए एक बड़ा कदम Aadhaar Data Vault डिजिटल भारत मिशन को मजबूती देगा और साइबर खतरों से बचाव में मदद करेगा। यह कदम भारत की पहचान सुरक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाएगा और आपके डिजिटल वजूद को संरक्षित रखेगा। ADV के साथ अब निवेश, बैंकिंग, सरकारी योजनाओं और अन्य डिजिटल सेवाओं में आपकी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी, जिससे नागरिकों को डिजिटल दुनिया में अधिक सुरक्षा और भरोसा मिलेगा।  

ट्रंप के फैसले से 4.2 करोड़ अमेरिकियों की खाद्य सहायता पर खतरा, सुप्रीम कोर्ट ने दी अस्थायी रोक की मंजूरी

अमेरिका में लाखों गरीब परिवारों के लिए बुरी खबर है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने नवंबर महीने के लिए मिलने वाली फूड सहायता की आधी राशि रोक दी है और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले को अस्थायी मंजूरी दे दी है. यह राहत "सप्लिमेंटल न्यूट्रिशन असिस्टेंस प्रोग्राम" (SNAP) के तहत दी जाती है, जिससे करीब 4.2 करोड़ अमेरिकियों को हर महीने खाने का सामान मिलता है. दरअसल, सरकार में चल रहे शटडाउन (सरकारी कामकाज बंद होने) की वजह से फंड्स की कमी बताई जा रही है. प्रशासन ने कहा कि फिलहाल सिर्फ 4.65 अरब डॉलर की आंशिक फंडिंग ही संभव है, जबकि प्रोग्राम की पूरी फंडिंग के लिए करीब 9 अरब डॉलर की जरूरत होती है. सुप्रीम कोर्ट की जज केतानजी ब्राउन जैक्सन ने कहा कि यह आदेश सिर्फ तब तक लागू रहेगा जब तक निचली अदालत इस मामले पर फैसला नहीं दे देती. कोर्ट ने कहा कि प्रशासन को कुछ समय दिया जा रहा है ताकि वह स्थिति संभाल सके. इससे पहले रोड आइलैंड के एक जज जॉन मैककोनेल ने सरकार को आदेश दिया था कि वह तुरंत पूरी राशि जारी करे. उन्होंने कहा था कि सरकार गरीबों की मदद रोककर राजनीतिक खेल खेल रही है लेकिन ट्रंप प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करते हुए कहा कि निचली अदालत का आदेश "शटडाउन की अराजकता को और बढ़ा देगा." सरकार के इस रुख की आलोचना भी हो रही है. डेमोक्रेसी फॉरवर्ड नामक संगठन ने कोर्ट में कहा कि ट्रंप प्रशासन गरीब अमेरिकियों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है. फिलहाल कोर्ट ने प्रशासन को राहत दे दी है, लेकिन इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ेगा जो हर महीने इसी सहायता से अपना पेट पालते हैं. अब आगे फैसला फर्स्ट सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स करेगा कि ट्रंप प्रशासन को पूरी SNAP राशि देनी होगी या नहीं. गरीब तबके में चिंता है कि अगर फंडिंग समय पर नहीं आई, तो लाखों लोगों के सामने "खाने के लाले" पड़ सकते हैं.

भविष्य की तकनीक: जमीन पर उड़ने वाला पुष्पक विमान, 4 घंटे में 1000 किलोमीटर और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन

मुंबई दुनिया के कई देश हाई-स्‍पीड ट्रेन प्रोजेक्‍ट पर काम कर रहे हैं. भारत में भी मुंबई से अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन चलाने की योजना पर तेजी से काम हो रहा है. हाई-स्‍पीड ट्रेन प्रोजेक्‍ट का काफी काम पूरा हो चुका है. बुलेट ट्रेन की लिस्‍ट में जल्‍द ही एक एक और नया नाम जुड़ने वाला है. यूरोप में भी साल 2040 तक हाई-स्‍पीड रेल का नेटवर्क बिछाने की योजना है. यूरोपीय कमीशन की ओर से इसका ऐलान किया गया है. प्रोजेक्‍ट के पूरा होने पर तकरीबन आधे समय में गंतव्‍य तक ट्रेन से यात्रा पूरी की जा सकेगी. यूरोप के कई देशों को बुलेट ट्रेन से कनेक्‍ट करने की योजना है. यूरोप में रेल यात्रा एक बार फिर बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है. यूरोपीय आयोग (European Commission) ने महाद्वीप के कई प्रमुख शहरों और देशों को जोड़ने वाले एक नए हाई-स्पीड ट्रेन नेटवर्क की योजना को हरी झंडी दे दी है. इस परियोजना का लक्ष्य यात्रा समय को आधा करना और सीमा-पार कनेक्टिविटी को आसान बनाना है. इसे यूरोप का रेल पुनर्जागरण कहा जा रहा है, जो यात्रियों के लिए तेज, सस्ती और पर्यावरण हितैषी परिवहन सुविधा का नया युग लेकर आएगा. 250 KMPH की स्‍पीड यूरोपीय आयोग द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव के अनुसार, यह हाई-स्पीड रेल नेटवर्क पूरी तरह साल 2040 तक ऑपरेट होगा. हालांकि, कई प्रमुख रूट 2030 से ही शुरू हो जाएंगे. इन ट्रेनों की गति 250 किलोमीटर प्रति घंटा तक होगी, जिससे यात्रा समय में भारी कमी आएगी. बर्लिन से कोपेनहेगन की यात्रा, जो अभी लगभग 7 घंटे लेती है, साल 2030 तक सिर्फ 4 घंटे में पूरी होगी. सोफिया से एथेंस की यात्रा में भी बड़ा बदलाव होगा. जहां अभी करीब 14 घंटे लगते हैं, वहीं साल 2035 तक यह समय 6 घंटे हो जाएगा. प्रस्तावों में पेरिस से लिस्बन (मैड्रिड के रास्ते) और वारसॉ से टालिन (रीगा के रास्ते) जैसी नई सीधी हाई-स्पीड लिंक भी शामिल हैं. लंबी दूरी की यात्रा अब और आसान यूरोप भर में यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह नेटवर्क क्रांतिकारी साबित होगा. यूरोपीय कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार, प्राग से रोम की यात्रा सिर्फ 10 घंटे में संभव होगी. स्टॉकहोम से कोपेनहेगन की यात्रा 4 घंटे में सिमट जाएगी. इन तेज ट्रेनों और सुगम कनेक्टिविटी से पर्यटन के साथ-साथ व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलेगा. पर्यावरण हित में बड़ा कदम यह पूरी परियोजना यूरोपीय आयोग की महत्वाकांक्षी Trans-European Transport Network (TEN-T) योजना का हिस्सा है. TEN-T का उद्देश्य रेलवे, सड़क, पोर्ट और हवाई यातायात सहित पूरे महाद्वीप में एकीकृत परिवहन ढांचा विकसित करना है. हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से यूरोप में कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आने की उम्मीद है, क्योंकि लोग विमान और कार की तुलना में रेल यात्रा को तरजीह देंगे. पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लंबी दूरी की यात्राओं में ट्रेनें विमान का विकल्प बनती हैं, तो इससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में हजारों टन की कमी आ सकती है. यात्रियों की जेब पर क्या असर? अभी लागत का पूरा विवरण सामने नहीं आया है. यूरोपीय आयोग के अधिकारी केवल यही कह रहे हैं कि हाई-स्पीड रेल यात्रियों के लिए सस्ती और सुलभ विकल्प के तौर पर उपलब्ध होगी. यात्रा समय कम होने से यह नेटवर्क बजट फ्लाइट्स का भी मजबूत विकल्प बनेगा. संक्षेप में यूरोप में ट्रेन से यात्रा अब न केवल तेज़ और सुविधाजनक होगी, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहतर साबित होगी. तेज ट्रेनों का यह नेटवर्क महाद्वीप के शहरों को पहले से कहीं ज्यादा निकट ले आएगा और रेल यात्रा को एक बार फिर यूरोप की जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बना देगा.

हथियारबंद महिला जासूसों ने किया चौंकाने वाला काम, मुस्लिम देश का गुप्त राज हुआ दुनिया के सामने

यरूशलेम  बात जब मैदान-ए-जंग की आती है तो कोई भी चाल बेईमानी नहीं होती. कई बार देश एक-दूसरे के टॉप सीक्रेट्स निकलवाने के लिए ‘अप्सराओं’ को जमीन पर उतार देते हैं. इन अप्सराओं को ‘हनीट्रैप’ का मास्टरमाइंड कहा जाता है. कुछ ऐसा ही एक मुस्लिम देश के साथ हुआ था लेकिन इस बार एक नहीं बल्कि ऐसी कई अप्सराएं एक साथ उतर आई थीं. इतनी खूबसूरती एक साथ देखकर इस मुस्लिम देश ने मदहोशी में अपनी इज्जत ही लुटा दी थी. इसके बाद दुनिया के सामने वो राज खुला जिसे सुनकर हर कोई कांप गया. खुफिया एजेंसी ने भर्ती के लिए रखी थी ये शर्त इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद ने एक वक्त पर लेडी ब्रिगेड में खूबसूरत और खौफनाक अप्सराएं हायर की थीं. उन्हें टीम में लेने के लिए शर्त ये थी कि उनकी खूबसूरती के आगे दुश्मन सुध-बुध खो दे. फिर उन्हें मोसाद की ट्रेनिंग देकर खौफनाक बनाया गया. इसके बाद ये अप्सराएं ईरान की जमीन पर उतारी गईं. इन हसीनाओं ने सबसे पहले ईरान के 9 न्यूक्लियर साइंटिस्ट्स को अपना निशाना बनाया था. उनसे राज खुलवाए फिर उनके लिए नर्क के दरवाजे खोल दिए. Israel को 1 साल तक सप्लाई किए सीक्रेट बताया जाता है मोसाद की इस लेडी ब्रिगेड ने इतनी सफाई से काम किया उनका ये राज आज भी कोई नहीं जानता है. उन अप्सराओं ने अफसरों के दिल नहीं घरों में भी जगह बनाई थी. उनके परिवार से मिलीं और 1 साल तक ईरान के सीक्रेट इजरायल को सप्लाई करती रहीं. इजरायल को इन 9 न्यूक्लियर साइंटिस्ट्स के खाने-पीने, रहने और आने-जाने तक की सारी खबर मिलती रही. यही वजह है कि नेतन्याहू ने ठीक उन जगहों पर ही सटीक एयरस्ट्राइक की, जहां पर इन्हें छुपाकर रखा गया था. जब तक ईरान को इन अप्सराओं की कुछ खबर चलती वो हवा में गायब हो चुकी थीं. इस लेडी ब्रिगेड को ही ‘हथियार वाली अप्सराएं’ कहा जाता है. बताया जाता है कि ये दुश्मन की आंखों के सामने रहती हैं लेकिन कभी दिखाई नहीं देती हैं. मोसाद को इनकी वजह से ही ईरान का टॉप सीक्रेट पता चला था. अब दुनिया के सामने ये सच आ चुका है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा था, जिसे उसने कभी खुलकर एक्सेप्ट नहीं किया.

सेना की तैयारी में खुलासा: भारत का डिफेंस स्ट्रैटेजी चीन-पाक और तुर्की के लिए चुनौतीपूर्ण

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने अपने डिफेंस सिस्‍टम को अपग्रेड और मजबूत करने में जुटा है. दुनिया के तमाम देश अब ऐसे वेपन सिस्‍टम डेवलप करने लगे हैं, जिससे घर बैठे हजारों किलोमीटर दूर स्थित टार्गेट को तबाह किया जा सके. इसके तहत लंबी दूरी की मिसाइल्‍स डेवलप किए जा रहे हैं. इसे आमतौर पर इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) भारत भी इसमें पीछे नहीं है. अग्नि सीरीज के तहत कई मिसाइलें विकसित की गई हैं, जिनका रेंज 2000 किलोमीटर से 5500 किलोमीटर तक है. अभी तक अग्नि-5 तक मिसाइल बनाई गई हैं. अग्नि-5 को आईसीबीएम का दर्जा हासिल है. अब इसी सीरीज में एक और महाबली तैयार किया जा रहा है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत के फ्यूचर डिफेंस प्‍लान को डिकोड किया है. उन्‍होंने अग्नि-VI को डेवलप करने की बात कही है. अग्नि-VI की जद में चीन, पाकिस्‍तान के साथ तुर्की जैसे देश भी होंगे. एक्‍सपर्ट का तो यह भी मानना है कि अग्नि-VI की रेंज में अमेरिका भी होगा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अग्नि-VI मिसाइल को लेकर बड़ी बात कही है. उन्‍होंने अग्नि-VI के डेवलपमेंट पर काम चलने की बात कही है. अग्नि-V के रेंज को देखते हुए डिफेंस एक्‍सपर्ट का मानना है कि अग्नि-VI की मारक क्षमता 10000 से 12000 किलोमीटर तक हो सकती है. यदि ऐसा है तो अग्नि-VI की जद में पूरा चीन, पाकिस्‍तान और तुर्की जैसे देश आ जाएंगे. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की ने सीधे तौर पर पाकिस्‍तान का साथ दिया था. यह वही तुर्की है, जिसकी मदद करने में भारत ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी. बता दें कि कुछ साल पहले तुर्की में विनाशकारी भूकंप आया था, जिसमें व्‍यापक पैमाने पर तबाही मची थी. अग्नि-VI के डेवलप होने के बाद पाकिस्‍तान के दोनों जिगरी यार इसकी जद में आ जाएंगे. अग्नि-VI है बहुत खास DRDO के पूर्व प्रमुख वीके सारस्वत ने कहा था कि अग्नि-VI एक फ़ोर्स मल्टीप्लायर साबित होगी. रिपाोर्ट की मानें तो अग्नि-VI का वजन 65–70 टन हो सकता है. यह अग्नि-V से भारी होगी. अग्नि-V का पहला परीक्षण अप्रैल 2012 में किया गया था. डॉ. सारस्वत ने एयरो इंडिया-2013 में कहा था कि अग्नि-VI की मारक क्षमता (रेंज) बताई नहीं जा सकती है. उन्होंने कहा था कि DRDO ने इसके डिज़ाइन का काम पूरा कर लिया है और अब हार्डवेयर बनाने पर काम चल रहा है. अग्नि-V की रेंज 5,000 किलोमीटर से ज्‍यादा है. उन्होंने यह भी बताया था कि विमान से लॉन्च की जाने वाली एंटी-रेडिएशन मिसाइल (शत्रु के राडार सिस्टम को नष्ट करने वाली) भी एक महत्वाकांक्षी परियोजना है और हाल ही में प्रदर्शित की गई पानी के नीचे से लॉन्च होने वाली मिसाइल BO5/K-15 भी इसी सीरीज का हिस्सा है. डिफेंस मिनिस्‍टर राजनाथ सिंह ने S-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम और पांचवीं पीढ़ी के Su-57 फाइटर जेट खरीद पर भी भारत की रणनीति का खुलासा किया है.  S-400 और Su-57 की खरीद पर क्‍या बोले राजनाथ दरअसल, केंद्र सरकार ने रक्षा सशक्तीकरण और स्वदेशी उत्पादन को लेकर कई अहम संकेत दिए हैं. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि रूसी S-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम की जरूरत बनी हुई है. उन्‍होंने कहा कि रूस की तरफ से यदि इसे उपलब्ध कराया गया तो भारत भविष्‍य में इसकी और यूनिट्स खरीद सकता है. इस बीच, रूसी उन्नत लड़ाकू विमान Su-57 के भारत में उत्पादन पर बातचीत अभी भी चल रही है. बता दें कि सुखोई-57 पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट है. दूसरी तरफ, डीआरडीओ भी एडवांस्‍ड वेपन सिस्‍टम को तेजी से डेवलप करने में जुटा है. अग्नि-VI बैलिस्टिक मिसाइल के साथ ही न्यूक्लियर कैपेबल सैन्य पनडुब्बी का विकास और सेनाओं के थिएटर स्तरीय कमान स्‍ट्रक्‍चर (theaterization) पर काम जारी है. रक्षा विशेषज्ञों की मानें तो न्यूक्लियर सबमरीन से देश की मैरीटाइम सिक्‍योरिटी को अत्‍यधिक मजबूती मिलेगी. ड्रोन और फाइटर जेट इंजन ड्रोन तकनीक पर भारत ने पिछले कुछ वर्षों में भारी निवेश और विकास देखा है. डिफेंस मिनिस्‍टर कहते हैं कि स्वदेशी ड्रोन प्लेटफ़ॉर्म पर तेज काम चल रहा है जो दोनों भूमिकाओं (निगरानी (surveillance) और स्‍ट्राइक) को अंजाम दे सकेंगे. ये आधुनिक यूएवी (Unmanned Aerial Vehicles) सीमापार खतरों का पता लगाने के लिए आईटीसी (intelligence, targeting, and connectivity) और तात्कालिक कार्रवाई में सहायक होंगे. विशेषज्ञ यह भी जोड़ते हैं कि स्वदेशी विकास से निर्भरता कम होगी और सप्‍लाई चेन पर नियंत्रण बढ़ेगा. राजनाथ सिंह ने फाइटर जेट को देश में ही डेवलप करने को लेकर भी बड़ी बात कही है. उन्‍होंने बताया कि अगले एक साल के भीतर देश में प्रयोग में आने वाले सभी फाइटर जेट इंजनों का उत्पादन भारत में ही होगा. इसके लिए आवश्यक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को एक्‍वीसीजन कॉन्‍ट्रैक्‍ट को अनिवार्य शर्त बनाया जा रहा है, ताकि विशेषज्ञता और विनिर्माण क्षमताएं घरेलू उद्योग में सुदृढ़ हों. इससे आत्मनिर्भरता के साथ-साथ रोजगार और स्पेयर-पार्ट्स की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी.

4.2 करोड़ लोगों के राशन पर संकट टला? एसएनएपी कटौती मामले में ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

नई दिल्ली अमेरिका में अब तक का सबसे लंबा सरकारी शटडाउन जारी है। शटडाउन की वजह से कर्मचारियों के वेतन, हवाई सेवा समेत अन्य चीजों पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सप्लीमेंट न्यूट्रिशन असिस्टेंट प्रोग्राम (एसएनएपी) में कटौती के फैसले को अस्थायी तौर से मंजूरी दी है। ट्रंप सरकार ने अमेरिका में रहने वाले गरीबों को मिलने वाले भोजन की आधी राशि रोक दी। हालांकि, निचली अदालत ने इस रोक को हटाकर तुरंत फंड जारी करने का आदेश दिया था, जिसके बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की तरफ अपना रुख किया। निचली अदालत ने प्रशासन को शुक्रवार तक पूरा एसएनएपी भुगतान जारी करने का आदेश दिया था। इस मामले में फैसला सुनाते हुए एससी की जज के. ब्राउन ने कहा कि यह आदेश केवल तब तक ही लागू रहेगा, जब तक निचली अदालत इस मामले में अपना फैसला नहीं सुना देती है। तब तक सरकार के पास स्थिति को संभालने का वक्त है। इस मामले में आखिरी फैसला फर्स्ट सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स की तरफ से दिया जाएगा। सर्किट कोर्ट का जो भी आदेश होगा, उसे ट्रंप सरकार को स्वीकार करना पड़ेगा। विस्कॉन्सिन, ओरेगन, हवाई, कैलिफोर्निया, कंसास, न्यू जर्सी, पेंसिल्वेनिया और वाशिंगटन सहित कई राज्यों के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के प्रभावी होने से पहले ही पूर्ण लाभ जारी करना शुरू कर दिया था। एसएनएपी अमेरिका में गरीब लोगों के लिए चलाया जाता है। इस कार्यक्रम के तहत लगभग आठ में से एक अमेरिकी, जो कि निम्न-आय वाले परिवार हैं, को मदद मिलती है। एसएनएपी अमेरिका का सबसे बड़ा खाद्य सहायता कार्यक्रम है, जो करीब 42 मिलियन लोगों को भोजन खरीदने में मदद करता है। इन लाभार्थियों में अधिकतर लोग गरीबी रेखा पर या उससे नीचे जीवन यापन करते हैं। विस्कॉन्सिन में अदालत के आदेश के तुरंत बाद 337,000 परिवारों को 104 मिलियन डॉलर से अधिक की राशि उपलब्ध करा दी गई। ओरेगन के गवर्नर ने कहा कि राज्य के कर्मचारियों ने यह सुनिश्चित करने के लिए रात भर काम किया कि परिवारों को शुक्रवार तक खाना मिल सके।

‘ईज ऑफ डूइंग’ से पहले जरूरी ‘ईज ऑफ जस्टिस’ : प्रधानमंत्री का बड़ा बयान

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजधानी दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट में कानूनी सहायता वितरण तंत्र को मजबूत करने पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कानूनी सहायता वितरण तंत्र की मजबूती और कानूनी प्रक्रिया देश से जुड़ा ये कार्यक्रम हमारी न्यायिक व्यवस्था को नई मजबूती देगा। मैं 20वीं नेशनल कॉन्फ्रेंस की आप सभी को शुभकामनाएं देता हूं। उन्होंने कहा कि अब न्याय सबके लिए पहुंच योग्य हो गया है। अब समय से न्याय होता है और किसी भी तरह की सामाजिक या आर्थिक पृष्ठभूमि देखे बिना हर व्यक्ति तक पहुंचता है। तभी वह सामाजिक न्याय की नींव बनता है। कानूनी सहायता इस बात में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है कि न्याय सभी के लिए पहुंच योग्य हो। पीएम मोदी ने कहा कि 'ईज ऑफ डूइंग' और 'ईज ऑफ लिविंग' तभी संभव है जब 'ईज ऑफ जस्टिस' भी सुनिश्चित हो। पिछले कुछ सालों में 'ईज ऑफ जस्टिस' को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं और आगे भी हम इस दिशा में तेजी लाएंगे। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता (मीडिएशन) हमेशा हमारी सभ्यता का हिस्सा रही है। नया मीडिएशन एक्ट इसी परंपरा को आगे बढ़ा रहा है, उसे आधुनिक स्वरूप दे रहा है। मुझे विश्वास है कि इस प्रशिक्षण मॉड्यूल के माध्यम से सामुदायिक मध्यस्थता के लिए ऐसे रिसोर्स तैयार होंगे, जो विवादों को सुलझाने, सद्भाव बनाए रखने और मुकदमेबाजी को कम करने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी आज समावेशन और सशक्तिकरण का माध्यम बन रही है। न्याय वितरण में ई-कोर्ट परियोजना भी इसका एक शानदार उदाहरण है। जब लोग कानून को अपनी भाषा में समझते हैं तो इससे बेहतर अनुपालन होता है और मुकदमेबाजी कम होती है। इसके साथ ही ये भी आवश्यक है कि निर्णय और कानूनी दस्तावेज को स्थानीय भाषा में उपलब्ध कराया जाए। पीएम मोदी ने कहा कि यह वाकई बहुत सराहनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 80 हजार से अधिक जजमेंट्स को 18 भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने की पहल की है। मुझे पूरा विश्वास है कि यह प्रयास आगे हाईकोर्ट और जिला स्तर पर भी जारी रहेगा।