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सीमाओं पर बढ़ी चीनी हलचल: तिब्बत में UAV बेस व रनवे तैयार, भारत को दोतरफा संदेश!

बीजिंग  चीन एक बार फिर भारत के प्रति दोहरा रवैया अपना रहा है। एक ओर वह दोस्ती की बातें करता है, दूसरी ओर LAC के पास अपने सैन्य और लॉजिस्टिक ढांचे को तेज़ी से मजबूत कर रहा है। तिब्बत में चीन की गतिविधियाँ लगातार बढ़ रही हैं नई सड़कें, हवाई पट्टियाँ, सैन्य अड्डे और UAV परीक्षण केंद्र इसका हिस्सा हैं। सीमा पर चीन का बड़ा खेल भारत से लगती चीन की LAC पर हाल के महीनों में कई रणनीतिक बदलाव देखे गए हैं। चीन अपनी सेना की रसद क्षमता, कनेक्टिविटी, और तेज़ तैनाती की क्षमता को और मजबूत करने में जुटा है। सैनिकों और हथियारों की तेज आवाजाही के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और सीमा के बेहद पास तकनीकी और सैन्य तैनाती के कारण भारत-चीन के संबंधों पर कई नए सवाल खड़े हो रहे हैं। भारत और चीन के बीच सीमा तनाव कोई नई बात नहीं है। 2017  में डोकलाम संघर्ष और 2020 में गलवान घाटी के खूनी संघर्ष के बाद दोनों पक्षों में बातचीत हुई, लेकिन जमीनी हालात अब भी सामान्य नहीं हो पाए हैं। इसके उलट, चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियाँ स्थिति को और संवेदनशील बना रही हैं।   तिब्बत में चीन का तेज सैन्य विस्तार: चीन तिब्बत को अपनी रणनीतिक ढाल की तरह विकसित कर रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार: 1. UAV (ड्रोन) परीक्षण केंद्र     4300 मीटर की ऊँचाई पर बना यह केंद्र     सैनिकों के लिए ऊँचाई वाली लड़ाई में बड़ी मदद     चीन की हाई-टेक युद्ध रणनीति का हिस्सा 2. नया सैन्य अड्डा     720 मीटर लंबा रनवे     4 बड़े हैंगर     यह बेस चीनी सेना का लॉजिस्टिक हब बनेगा     कठिन इलाके में तेज़ सप्लाई सुनिश्चित करेगा 3. तिब्बत में भारी निवेश: चीन ने अपनी 14वीं पंचवर्षीय योजना के तहत तिब्बत के लिए 30 अरब अमेरिकी डॉलर का बजट तय किया था। इसके तहत:      हाईवे नेटवर्क को दोगुना     नई सरकारी परियोजनाएँ     रेल नेटवर्क में बड़े सुधार चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग तिब्बत को रणनीतिक मोर्चे के रूप में विकसित करने में लगातार रुचि दिखा रहे हैं। सिर्फ भारत नहीं, दक्षिण चीन सागर में भी चीन का विस्तार बढ़ रहा है। चीन की नज़र सिर्फ भारतीय सीमा पर नहीं है। दक्षिण चीन सागर में भी वह आक्रामक तरीके से विस्तार कर रहा है।चीन के कदम साफ बताते हैं कि वह बुनियादी ढांचे के विकास का इस्तेमाल अपने रणनीतिक और सैन्य विस्तार के लिए कर रहा है। तिब्बत से लेकर दक्षिण चीन सागर तक, उसकी गतिविधियाँ भारत और दुनिया के लिए लगातार चुनौती पेश कर रही हैं।  

H1B विवाद पर सफाई: ट्रंप के बयान की गलत व्याख्या हुई, व्हाइट हाउस ने विदेशी टैलेंट के समर्थन की पुष्टि की

वाशिंगटन  व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की H1B  वीजा के मुद्दे पर ‘‘बहुत गहरी और व्यावहारिक राय'' है और वह अमेरिकी कर्मचारियों के स्थान पर अन्य देशों के कर्मियों को रोजगार दिए जाने का समर्थन नहीं करते हैं। अमेरिकी कर्मचारियों के स्थान पर H1B  वीज़ा धारकों को रोजगार दिए जाने और इस पर ट्रंप के रुख के बारे में पूछे जाने पर लेविट ने कहा कि इस मुद्दे पर राष्ट्रपति के रुख को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। एच-1बी वीजा के मुद्दे पर लेविट ने कहा कि ट्रंप ‘‘इस मुद्दे पर बहुत व्यावहारिक राय रखते हैं। वह देखना चाहते हैं कि क्या विदेशी कंपनियां अमेरिका में खरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं और क्या वे बैटरी जैसी वस्तुएं बनाने के लिए विदेशी कर्मचारियों को अपने साथ ला रही हैं। वह यह देखना चाहते हैं कि शुरुआत में ही उन विनिर्माण सुविधाओं और कारखानों को चालू किया जा सके।" उन्होंने कहा कि ट्रंप हमेशा से ही अमेरिकी कर्मचारियों को ही इन नौकरियों में देखना चाहते हैं, और उन्होंने देश में निवेश करने वाली विदेशी कंपनियों से कहा है कि ‘‘अगर उन्हें अमेरिका में कारोबार करना है तो बेहतर होगा कि वे मेरे लोगों को नौकरी पर रखें। राष्ट्रपति के रुख को लेकर काफी गलतफहमी रही है।''   लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति अमेरिकी विनिर्माण उद्योग को पहले से कहीं बेहतर देखना चाहते हैं। लेविट ने कहा, ‘‘शुल्क के प्रभावी इस्तेमाल और दुनिया भर में अच्छे व्यापार समझौतों को कम करने के ज़रिए वह यह काम कर रहे हैं। इसीलिए उन्होंने हमारे देश में खरबों डॉलर का निवेश आकर्षित किया है। इससे यहां पर अच्छी तनख्वाह वाली अमेरिकी नौकरियां पैदा हो रही हैं।'' ट्रंप ने एच-1बी वीजा कार्यक्रम का बचाव करते हुए कहा था कि अमेरिका को दुनिया भर से प्रतिभाओं को लाना होगा, क्योंकि देश में "कुछ खास प्रतिभाएं" नहीं हैं। ट्रंप के एमएजीए (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) समर्थकों द्वारा एच-1बी वीजा पर की गई तीखी प्रतिक्रिया के बीच राष्ट्रपति स्पष्ट कर चुके हैं कि वह देश में कुशल पेशेवर प्रवासियों का ‘स्वागत' करेंगे, जो अमेरिकी पेशेवरों को ‘चिप' और ‘मिसाइल' जैसे जटिल उत्पादों को विकसित करना "सिखाएंगे"। ट्रंप ने स्वीकार किया था कि उन्हें अपने समर्थकों से इस पर ‘‘थोड़ी नाराजगी'' झेलनी पड़ सकती है, जो आव्रजन पर प्रतिबंधों का समर्थन करते हैं।    

जाफ़र एक्सप्रेस पर हथियारबंदों की फायरिंग, डेढ़ महीने में छह हमले—पाक रेल में बढ़ा ख़तरा

पेशावर  पाकिस्तान के बलूचिस्तान स्थित बोलान पास में जाफ़र एक्सप्रेस पर एक बार फिर हमला हुआ है। क्वेटा से पेशावर जा रही ट्रेन पर आब-ए-गुम के पास हथियारबंद लोगों ने फायरिंग की। ट्रेन में मौजूद रेलवे पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसके बाद हमलावर अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, डेढ़ महीने में यह छठा हमला है। 7 अक्टूबर को शिकारपुर में पटरी पर हुए धमाके में 7 लोग घायल हुए थे, जबकि 24 सितंबर को मस्तुंग के स्पिज़ेंड क्षेत्र में बम धमाके में 12 यात्री घायल हुए थे। इससे पहले मार्च 2025 में BLA की मेजीद ब्रिगेड ने इसी ट्रेन को बोलान पास में हाईजैक कर 400 यात्रियों को बंधक बना लिया था। उग्रवादियों ने 20 सुरक्षा कर्मियों की हत्या का दावा भी किया था। लगातार हमलों ने इस रूट की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 

डॉक्टरों ने रचा इतिहास: मां की किडनी से 11 वर्षीय बच्चे का देश का पहला ट्रांसप्लांट

नई दिल्ली दिल्ली के वीएमएमसी और सफदरजंग अस्पताल ने अपनी किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा में बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है. 19 नवंबर 2025 को यहां पहली बार एक बच्चे का सफलतापूर्वक किडनी ट्रांसप्लांट किया गया. यह न सिर्फ सफदरजंग अस्पताल में पहला बाल चिकित्सा (पेडियाट्रिक) किडनी ट्रांसप्लांट है बल्कि किसी भी केंद्रीय सरकारी अस्पताल में होने वाला ऐसा पहला ऑपरेशन भी है. 11 साल के बच्चे को बचाया गया मरीज 11 साल का बच्चा था जो बाइलैटरल हाइपोडिसप्लास्टिक किडनी नामक एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित था. ये स्थिति करीब डेढ़ साल पहले पता चली थी, जब उसे गंभीर हालत में सफदरजंग अस्पताल लाया गया था और इलाज के दौरान उसे कार्डियक अरेस्ट तक हो गया था. जांच में पता चला कि उसकी किडनियां फेल हो चुकी थीं और तब से वो अस्पताल में नियमित डायलिसिस पर था. मां ने दी किडनी, बच्चे की सेहत में तेजी से सुधार डॉ. पवन वासुदेवा ने बताया कि बच्चों का किडनी ट्रांसप्लांट बेहद चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि बच्चे के शरीर में बड़े वेसल्स से किडनी जोड़ने और वयस्क किडनी के लिए उचित जगह बनाने जैसे कठिन कदम शामिल होते हैं. मरीज को किडनी उसकी 35 साल की मां ने दी. डॉक्टरों के अनुसार किडनी अच्छी तरह काम कर रही है, बच्चा अब डायलिसिस से मुक्त है और जल्द ही घर भेज दिया जाएगा. गरीब परिवार के लिए जीवनदान डॉ. संदीप बंसल ने कहा कि बच्चे का परिवार उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर से है और उसके पिता दिहाड़ी मजदूर हैं. निजी अस्पताल में यह ऑपरेशन करीब 15 लाख रुपये का आता इसलिए परिवार करीब-करीब उम्मीद छोड़ चुका था.अस्पताल प्रशासन ने ये भी बताया कि ट्रांसप्लांट के बाद लगने वाली महंगी इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं भी अस्पताल बच्चे को मुफ्त उपलब्ध कराएगा. ये उपलब्धि न सिर्फ अस्पताल बल्कि देश की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी एक बड़ी सफलता मानी जा रही है.अस्पताल के निदेशक डॉ. संदीप बंसल ने बताया कि ये उपलब्धि अस्पताल की मेडिकल टीम की कड़ी मेहनत और समर्पण का नतीजा है. इस टीम ने किया ऑपरेशन  सर्जिकल ट्रांसप्लांट टीम का नेतृत्व यूरोलॉजी और रीनल ट्रांसप्लांट विभाग के प्रमुख डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. पवन वासुदेवा ने किया. उनके साथ प्रोफेसर डॉ. नीरज कुमार भी टीम में शामिल थे. बच्चे का इलाज कर रही बाल रोग (पेडियाट्रिक) टीम का नेतृत्व डॉ. शोभा शर्मा ने किया. उनके साथ डॉ. श्रीनिवासवरदन और विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप के देबता भी जुड़े रहे. एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. सुशील ने किया, जिनके साथ डॉ. ममता और डॉ. सोनाली थीं.

ईसाई अफसर की कट्टरता पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा— सेना में ऐसी मानसिकता बर्दाश्त नहीं

नई दिल्ली  सशस्त्र बलों में धार्मिक आचरण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भारतीय सेना से बर्खास्त किए गए ईसाई अफसर सैमुअल कमलेसन की याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने उनके आचरण को घोर अनुशासनहीनता करार देते हुए कहा कि ऐसे कैंटैंकरस (झगड़ालू) व्यक्ति सेना में नहीं हो सकते।   मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा- यदि किसी सेना अधिकारी का यही रवैया होगा तो फिर क्या कहा जाए! यह घोर अनुशासनहीनता है। वह चाहे जितने भी अच्छे अधिकारी रहे हों, लेकिन भारतीय सेना के लिए मिसफिट हैं… सेना के पास आज जितनी बड़ी जिम्मेदारियां हैं, उनमें ऐसे व्यक्तियों को जगह नहीं दी जा सकती। क्या है मामला? तीसरी घुड़सवार सेना रेजिमेंट के पूर्व लेफ्टिनेंट सैमुअल कमलेसन भारतीय सेना अधिकारी थे जिन्हें मार्च 2017 में बर्खास्त कर दिया गया था क्योंकि उन्होंने एक ईसाई अधिकारी होने के नाते अपनी रेजिमेंट में धार्मिक परेड (मंदिर और गुरुद्वारे) में भाग लेने से इनकार कर दिया था। इस संबंध में उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारी के आदेश का पालन करने से इनकार कर दिया था। आदेश यह था कि वे पंजाब में स्थित एक गुरुद्वारे के भीतर जाकर पूजा-सम्बंधी अनुष्ठान (पूजा/पुजा) करें। 2017 में कमीशन पाए लेफ्टिनेंट कमलेसन को सिख स्क्वाड्रन में तैनात किया गया था, जहां रेजिमेंटल परेड के दौरान वह मंदिर और गुरुद्वारे के अंतरकक्ष में प्रवेश करने से लगातार इनकार करते रहे। कमलेसन का तर्क था कि- ईसाई होने के नाते वह मंदिर या गुरुद्वारे के मुख्य गर्भगृह में नहीं जा सकते। उनका यह कदम सैनिकों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने के लिए भी था ताकि किसी को न लगे कि वह किसी धार्मिक अनुष्ठान में गलत तरीके से भाग ले रहे हैं। हालांकि, सेना का कहना था कि कमांडिंग अधिकारियों ने कई बार उन्हें समझाया, ईसाई पादरी ने भी स्पष्ट किया कि ‘सर्व-धर्म स्थल’ में जाना ईसाई धर्म के विरुद्ध नहीं है, लेकिन इसके बावजूद अधिकारी ने अपना रवैया नहीं बदला। इस आधार पर 2021 में उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। दिल्ली हाई कोर्ट पहले ही कर चुका था याचिका खारिज मई 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने भी कमलेसन की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि उन्होंने अपने धर्म को वरिष्ठ अधिकारी के वैध आदेश से ऊपर रखा, जो कि स्पष्ट रूप से अनाचार और अनुशासनहीनता है। कोर्ट ने इसे भारतीय सेना की मौलिक सैन्य भावना के विपरीत बताया था। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? आज सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची ने कहा- जब आपका अपना पादरी आपको सलाह देता है, तो आपको उसी पर चलना चाहिए। आप अपनी निजी समझ के आधार पर यह नहीं तय कर सकते कि आपकी वर्दी में रहते हुए आपका धर्म क्या अनुमति देता है और क्या नहीं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी की- यह व्यक्ति सेना में किस तरह का संदेश दे रहा है? यह भारी अनुशासनहीनता है… ऐसे लोगों का सेना में कोई स्थान नहीं। सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणियां सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने तर्क दिया कि सेना में जाट, राजपूत आदि जातिगत रेजिमेंट होने पर उसे ‘धर्मनिरपेक्ष’ कैसे कहा जा सकता है? लेकिन पीठ इस तर्क से सहमत नहीं हुई। CJI सूर्यकांत ने कहा- सेना पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष संस्थान है। आप अपनी निजी धार्मिक व्याख्या के आधार पर आदेश का पालन नहीं करने का अधिकार नहीं रखते। आपने पादरी की बात तक नहीं मानी। यह सैनिकों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम है। न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची ने कहा- आपने अपने धर्म की निजी व्याख्या कर ली। जबकि ईसाई धर्म का कोई ‘आवश्यक तत्व’ ऐसा नहीं है जो मंदिर या गुरुद्वारे में प्रवेश को प्रतिबंधित करता हो। कमलेसन के वकील ने दावा किया कि बाइबिल के फर्स्ट कमांडमेंट में ‘दूसरे देवताओं’ के आगे झुकने से मना किया गया है। इस पर कोर्ट ने कहा- यह आपकी व्यक्तिगत समझ है। पादरी ने भी कहा कि ड्यूटी के हिस्से के रूप में ‘सर्व धर्म स्थल’ में जाना गलत नहीं है। कानूनी अधिकारों और अनुशासन पर टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा- संविधान आपको अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है, लेकिन वर्दी में रहते हुए आपका व्यवहार सैन्य अनुशासन से बंधा होता है। निजी आस्था के नाम पर सेना के आदेश की अवहेलना नहीं की जा सकती।

जुबिन गर्ग केस में बड़ा खुलासा: हत्या के एंगल पर 7 सहयोगी अरेस्ट, CM ने सदन में दी जानकारी

दिसपुर  असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि गायक जुबिन गर्ग की सिंगापुर में समुद्र में तैरते समय हुई मौत ‘स्पष्ट तौर पर हत्या’ का मामला है। गर्ग की मौत की परिस्थितियों की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मामले में हत्या की धाराएं भी जोड़ दी हैं। शर्मा ने असम विधानसभा में गायक जुबिन गर्ग की मौत के मुद्दे पर चर्चा के लिए विपक्ष द्वारा लाए गए कार्य स्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा पर यह बात कही। कार्य स्थगन प्रस्ताव को मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के अनुरोध पर विधानसभा अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया था।  शर्मा ने कहा- प्रारंभिक जांच के बाद असम पुलिस को यकीन हो गया था कि यह गैर इरादतन हत्या का मामला नहीं है बल्कि यह स्पष्ट तौर पर हत्या है। उन्होंने कहा- इसीलिए, उनकी मौत के तीन दिन के भीतर ही मामले में बीएनएस की धारा 103 जोड़ दी गई। उन्होंने बताया कि राज्य पुलिस की सीआईडी ​​के तहत गठित एसआईटी ने अब तक इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है, 252 गवाहों से पूछताछ की है और 29 वस्तुएं जब्त की हैं। शर्मा ने दावा किया कि एक आरोपी ने गर्ग की हत्या की और अन्य ने उसकी मदद की। हत्या के मामले में चार-पांच लोगों पर मामला दर्ज किया गया है। सीएम ने विधानसभा को बताया कि मामले में अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से- श्यामकानु महंता, सिद्धार्थ शर्मा (ज़ुबीन के मैनेजर), शेखर ज्योति गोस्वामी (बैंडमेट), अमृतप्रभा महंता (को-सिंगर), ये सभी वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। इसके अलावा, ज़ुबीन के चचेरे भाई संदीपान गर्ग और उनके दो पीएसओ- नंदेश्वर बोरा और परेश बैश्य को भी गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा- दिसंबर में हत्या के मामले में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद, जांच का दायरा बढ़ाकर लापरवाही, आपराधिक विश्वासघात और अन्य पहलुओं को भी शामिल किया जाएगा। शर्मा राज्य के गृह मंत्री भी हैं। उन्होंने दावा किया कि एसआईटी एक ठोस आरोपपत्र दाखिल करेगी और अपराध के पीछे का मकसद राज्य के लोगों को झकझोर देगा। जुबिन गर्ग की 19 सितंबर को सिंगापुर में समुद्र में तैरते समय मौत हो गई थी।

मोहन भागवत का भावुक संबोधन: राम राज्य स्थापित, याद किए विशेष नाम

नई दिल्ली  राम मंदिर पर धर्मध्वजा को फहराया गया है। 161 फीट की ऊंचाई पर इस केसरिया ध्वज को फहराए जाने के बाद मोहन भागवत ने संबोधित किया। संघ प्रमुख ने कहा कि इसके साथ ही राम मंदिर का निर्माण संपूर्ण हो गया है और इससे उन लोगों की आत्मा को तृप्ति मिली होगी, जिन्होंने इसके लिए संघर्ष किया और अपनी आंखों के सामने सपना साकार होते नहीं देख सके। मोहन भागवत ने कहा कि यह धर्म ध्वज वही है, जो रामराज्य के दौरान लहराया गया था। विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक रहे अशोक सिंहल, महंत रामचंद्र दास परमहंस और विष्णु हरि डालमिया जैसे लोगों का नाम लिया और कहा कि उनकी आत्मा को संतुष्टि मिली होगी। आरएसएस लीडर ने कहा कि अब हमारा यही संकल्प होना चाहिए कि यह धर्म ध्वजा और ऊंची प्रतिष्ठा हासिल करे। हम ऐसे समाज का निर्माण करें, जिसमें समरसता हो और देश समृद्धि के शिखर पर पहुंचे। हिंदू समाज ने लगातार 500 साल और फिर बाद के लंबे आंदोलन में हमने साबित किया कि निरंतरता रहे तो सब हासिल होता है। यही बात हमें भगवान कृष्ण और सूर्य समझाते हैं। सूर्य हर दिन सतत निकलता है और ढलता है। लेकिन उसकी प्रक्रिया कभी रुकती नहीं। ऐसे ही हिंदू समाज भी नहीं रुका और हम 500 साल बाद इस केसरिया ध्वज को अयोध्या के राम मंदिर में देख रहे हैं। मोहन भागवत ने कहा कि हमने जैसा सपना देखा था, उससे भी सुंदर यह मंदिर बन गया है। उन्होंने कहा कि दिवंगत पवित्र आत्माओं की कल्पा जैसी थी, उससे भी दिव्य यह मंदिर है। यह ध्वजा है। हम जो दृश्य देख रहे हैं, यह हमारे जन्म की सफलता है और सपनों के साकार होने जैसा है। मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू समाज ने सदियों तक संघर्ष किया और तब यह शुभ अवसर आया है। इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल समेत कई गणमान्य लोग मौजूद थे। धर्म ध्वजा को पीएम मोदी ने फहराया और उसके बाद कार्यक्रम को भी संबोधित किया।  

बंगाल में SIR को लेकर हंगामा: BJP कार्यकर्ताओं और BLOs में तीखी झड़प, माहौल गर्म

कोलकाता  कोलकाता में भाजपा कार्यकर्ताओं का पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के सामने BLO के एक फोरम के प्रदर्शनकारियों से आमना-सामना हो गया। इस दौरान पुलिस ने बीच-बचाव किया। सीनियर अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। बीएलओ अधिकार रक्षा समिति के कई सदस्य सीईओ कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे थे। उनका आरोप था कि मतदाता सूची के एसआईआर के दौरान उन पर काम का अत्यधिक बोझ है। मामला तब बिगड़ गया जब कोलकाता नगर निगम पार्षद सजल घोष के नेतृत्व में लगभग 50 भाजपा कार्यकर्ता रात 11 बजे मौके पर पहुंचे। सीईओ कार्यालय में बंद चुनाव आयोग के अधिकारियों को डराकर SIR को रोकने के तृणमूल कांग्रेस के कथित प्रयास के खिलाफ नारे लगाने लगे।   रिपोर्ट के मुताबिक, स्थिति तब बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारी बीएलओ ने जवाबी नारे लगाए। भाजपा पर पश्चिम बंगाल में वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने के लिए निर्वाचन आयोग के साथ मिलीभगत से काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ता शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे BLO को आतंकित करने और भड़काने की कोशिश कर रहे थे, जो केवल सीईओ से मिलना चाहते थे। घोष ने दावा किया, ‘प्रदर्शनकारी बीएलओ नहीं हैं। वे तृणमूल समर्थित संगठनों के नेता हैं।’ एक-दूसरे पर जमकर किए कटाक्ष बीएलओ फोरम के सदस्यों ने आरोपों को खारिज कर दिया। जब दोनों समूह मीडियाकर्मियों के सामने एक-दूसरे पर कटाक्ष कर रहे थे, तभी उपायुक्त इंदिरा मुखर्जी के नेतृत्व में पुलिस बल उनके बीच खड़ा हो गया ताकि वे टकराव होने से रोक सकें। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल सोमवार रात करीब 11.40 बजे अपने कार्यालय से बाहर निकले। वे बीएलओ के धरने के कारण कार्यालय में ही थे। उन्होंने देर रात के घटनाक्रम पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। तनाव उस समय कम हुआ, जब उन्हें और निर्वाचन आयोग के अन्य अधिकारियों को पुलिस ने उनके आवासों तक पहुंचाया।  

ज्वालामुखी की राख ने 4500 KM की दूरी तय की, पढ़ें 5 अहम सवालों के जवाब

इथियोपिया        अफ्रीका के एक दूरस्थ कोने में मौजूद एक ज्वालामुखी 12 हजार साल बाद अचानक फट पड़ा. और उसकी राख 4,500 किलोमीटर दूर भारत की राजधानी दिल्ली तक पहुंच रहा है. 23 नवंबर 2025 को इथियोपिया के अफार इलाके में हायली गुबी ज्वालामुखी में विस्फोट हुई. यह ज्वालामुखी इतने सालों से सोया हुआ था, लेकिन अब इसने आसमान में 14 किलोमीटर ऊंची राख की चादर बिछा दी है.  आइए समझते हैं यह राख इतनी दूर कैसे पहुंची? क्या इससे दिल्ली का प्रदूषण बढ़ेगा? अन्य महत्वपूर्ण सवालों के जवाब खोजते हैं. पहले घटना की पूरी जानकारी समझते हैं, फिर 5 सवालों पर नजर डालते हैं. हायली गुबी ज्वालामुखी: कौन है यह 'सोया हुआ राक्षस'? हायली गुबी एक शील्ड ज्वालामुखी है, जो इथियोपिया के अफार क्षेत्र में स्थित है. यह एर्ता अले ज्वालामुखी श्रृंखला का सबसे दक्षिणी हिस्सा है. अफार क्षेत्र को 'पृथ्वी का नर्क' भी कहा जाता है, क्योंकि यहां तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. यह पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट वैली का हिस्सा है – जहां पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटें (प्लेटें जो पृथ्वी की सतह को बनाती हैं) लगातार अलग हो रही हैं. विस्फोट का समय और आकार: 23 नवंबर 2025 को भारतीय समयानुसार दोपहर 2 बजे यह फटा. राख का गुबार समुद्र तल से 14 km ऊपर चला गया. वैज्ञानिकों के अनुसार, इससे पहले 12000 साल (होलोसीन काल) में इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है. सैटेलाइट डेटा से पता चला कि इसमें सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) गैस की भारी मात्रा थी. वैज्ञानिक कारण: ज्वालामुखी फटने से पहले, एर्ता अले के नीचे 50 किलोमीटर लंबी मैग्मा की दीवार (मैग्मा डैम) टूट गई. इससे घंटों पहले 4.7 तीव्रता का भूकंप आया था. पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट में सुपर प्लूम (गर्म मैग्मा का विशाल गुबार) का दबाव बढ़ रहा था, जो प्लेटों के अलग होने से पैदा होता है. यह रिफ्ट वैली अफ्रीका महाद्वीप को दो भागों में बांटने वाली प्रक्रिया का हिस्सा है. स्थानीय प्रभाव: राख पास के गांव अफदेरा पर गिरी. कोई मौत नहीं हुई, लेकिन चरवाहों को चिंता है कि राख से चरागाह खराब हो जाएंगे और पशु बीमार पड़ सकते हैं. दनाकिल रेगिस्तान में कुछ पर्यटक फंस गए. विमानन पर असर: राख लाल सागर पार यमन और ओमान की ओर बढ़ी, फिर पूर्व की ओर पाकिस्तान, उत्तरी भारत और चीन तक. भारत में कई उड़ानें रद्द हुईं – जैसे एयर इंडिया की मुंबई-हैदराबाद और इंडिगो की कन्नूर-अबू धाबी. डीजीसीए ने एयरलाइंस को चेतावनी दी कि राख इंजन को नुकसान पहुंचा सकती है. अब सवाल आता है – यह राख दिल्ली कैसे पहुंची? और क्या इससे हमारी हवा खराब हो जाएगी? आइए, 5 प्रमुख सवालों के सरल जवाब समझते हैं, वैज्ञानिक कारणों के साथ. 1. साढ़े 4 हजार किलोमीटर दूर से दिल्ली कैसे पहुंची ज्वालामुखी की राख? हायली गुबी से दिल्ली की दूरी लगभग 4,500 किलोमीटर है. राख इतनी दूर पहुंचने का मुख्य कारण है वायुमंडलीय हवाओं की जेट स्ट्रीम.   वैज्ञानिक कारण: ज्वालामुखी विस्फोट से राख बारीक कणों (जैसे कांच और चट्टान के टुकड़े) के रूप में निकलती है. यह इतनी ऊंची (14 किमी) जाती है कि स्ट्रेटोस्फीयर (उपरी वायुमंडल) में पहुंच जाती है. यहां जेट स्ट्रीम नाम की तेज हवाएं (100-130 किमी/घंटा की रफ्तार) चलती हैं, जो पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हैं.  23 नवंबर को राख लाल सागर पार यमन-ओमान पहुंची, फिर अरब प्रायद्वीप से पाकिस्तान होते हुए राजस्थान में घुसी. 24 नवंबर रात 11 बजे तक यह दिल्ली पर छा गई. सैटेलाइट मैप्स (जैसे टूलूज VAAC) से पता चला कि यह 15,000 से 45,000 फीट ऊंचाई पर बह रही थी. अगर हवाएं न होतीं, तो राख बस 50-100 किमी दूर गिर जाती. याद कीजिए 2010 का आइसलैंड विस्फोट – उसकी राख भी यूरोप भर में फैली थी. 2. क्या इससे दिल्ली का प्रदूषण बढ़ जाएगा? नहीं, ज्यादा चिंता की कोई बात नहीं. राख ऊंचाई पर है, इसलिए सतह पर प्रदूषण का बड़ा असर नहीं पड़ेगा. वैज्ञानिक कारण: दिल्ली का AQI पहले से ही खराब (स्मॉग से) है, लेकिन यह राख स्ट्रेटोस्फीयर में है, जहां हवा साफ रहती है. IMD के निदेशक एम. मोहपात्रा ने कहा कि यह नीचे नहीं उतरेगी, इसलिए PM2.5 या PM10 पर ज्यादा प्रभाव नहीं. हां, आकाश धुंधला दिख सकता है. विजिबिलिटी कम हो सकती है. सल्फर डाइऑक्साइड गैस बादल बनाकर बारिश ला सकती है, जो प्रदूषण धो दे. लंबे समय में, SO₂ एसिड रेन पैदा कर सकती है, लेकिन यहां मात्रा कम है. कुल मिलाकर, स्थानीय प्रदूषण (कारें, फैक्टरियां) से ज्यादा खतरा नहीं. 3. ज्वालामुखी इतने साल बाद क्यों फटा? क्या कारण था? 12,000 साल की नींद टूटने का राज है पृथ्वी के अंदर की उथल-पुथल. वैज्ञानिक कारण: हायली गुबी पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट का हिस्सा है, जहां अफ्रीकी प्लेट दो भागों में बंट रही है. नीचे सुपर प्लूम नाम का गर्म मैग्मा का विशाल भंडार दबाव बना रहा था. विस्फोट से पहले मैग्मा की 50 किमी लंबी दीवार टूटी, जो एर्ता अले से मैग्मा लाई. भूकंप (4.7 तीव्रता) ने इसे ट्रिगर किया. वैज्ञानिक कहते हैं, यह रिफ्ट वैली की नया महाद्वीप बनने की प्रक्रिया है – लाखों साल बाद यहां नया समुद्र बन सकता है. पहले के विस्फोट अनदेखे रह गए क्योंकि इलाका दूरदराज है. 4. स्थानीय लोगों और पर्यावरण पर क्या असर पड़ा? इथियोपिया में तत्काल खतरा कम है, लेकिन लंबे समय के प्रभाव चिंताजनक हैं.     वैज्ञानिक कारण: राख मिट्टी की उर्वरता कम कर देती है, क्योंकि इसमें सिलिका (कांच जैसे कण) होते हैं जो पानी सोख लेते हैं.     चरवाहों के लिए खतरा: पशु राख की वजह से सांस की बीमारी पा सकते हैं. दनाकिल रेगिस्तान में पर्यटक फंस गए, क्योंकि राख से सड़कें फिसलन भरी हो गईं.     पर्यावरण पर: SO₂ से एसिड रेन हो सकती है, जो फसलों को नुकसान पहुंचाए. लेकिन कोई मौत नहीं हुई, क्योंकि इलाका कम आबादी वाला है. वैज्ञानिक अब राख के नमूने ले रहे हैं ताकि इतिहास की जांच हो सके. 5. क्या यह रिफ्ट वैली में बाढ़ का कारण बन सकता है? सुपर प्लूम का क्या रोल? यह सवाल दिलचस्प है – हायली गुबी रिफ्ट वैली के उत्तरी छोर पर है. सुपर प्लूम से बाढ़ का कनेक्शन हो सकता है, लेकिन सीधा नहीं. वैज्ञानिक कारण: … Read more

अफगानिस्तान में आतंक की बारिश, बच्चों समेत 9 की दर्दनाक मौत

काबुल  पाकिस्तान के पेशावर में आतंकी हमला हुआ, पाकिस्तान खुद के बुने जाल में फंस रहा है. हालांकि इस देश की जड़ों में जो आतंक बसा है वो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है. अब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर हमला कर दिया है. अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत के एक रिहायशी इलाके में पाकिस्तानी सेना के हमले में नौ बच्चों समेत दस लोग मारे गए. अफगान सरकार ने मंगलवार को यह जानकारी दी है. घरों को बनाया गया निशाना अधिकारियों के अनुसार, यह हमला आधी रात के कुछ समय बाद हुआ और इसमें एक स्थानीय निवासी के घर को निशाना बनाया गया, जिससे सीमा पर दुश्मनी बढ़ने की चिंता फिर बढ़ गई है. तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने बताया कि यह हमला मंगलवार को सुबह करीब 12:00 बजे खोस्त के गुरबुज जिले के मुगलगई इलाके में हुआ. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी हमलावर सेनाओं ने एक लोकल नागरिक, वालियत खान, काजी मीर के बेटे के घर पर बमबारी की, इस हमले में 9 बच्चे (पांच लड़के और चार लड़कियां) और एक महिला की मौत हो गई और उनका घर तबाह हो गया. पहले भी पाकिस्तान ने किया था अटैक मुजाहिद ने यह भी बताया कि उसी रात कुनार और पक्तिका प्रांतों में अलग-अलग हवाई हमले हुए, जिनमें चार आम नागरिक घायल हो गए. खोस्त में हुआ ताजा हमला लोगों में डर पैदा कर रहा है कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच सीमा पर फिर से हिंसा का नया दौर शुरू हो सकता है. अक्टूबर में दोनों देशों के बीच भारी झड़पों के बाद कुछ समय के लिए लड़ाई रुकी हुई थी, लेकिन अब फिर तनाव बढ़ गया है. इससे पहले, 9 अक्टूबर को पाकिस्तान ने काबुल, खोस्त, जलालाबाद और पक्तिका में एयरस्ट्राइक की थी. इसके बाद अफगान तालिबान ने भी जवाबी कार्रवाई की. दोनों देशों में हुई थी गोलीबारी तालिबान सेनाओं ने 11 और 12 अक्टूबर की रात के बीच अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर कई पाकिस्तानी मिलिट्री पोस्ट पर हमला किया, जिससे भारी गोलीबारी हुई. हमलों के बाद, तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उनका ऑपरेशन खत्म हो गया है, हालांकि पाकिस्तानी अधिकारियों ने किसी भी सीजफायर की घोषणा को खारिज कर दिया और अपनी मिलिट्री कार्रवाई जारी रखी. उस समय तालिबान के एक प्रवक्ता ने कन्फर्म किया था कि लड़ाई 12 अक्टूबर की सुबह तक जारी रही. दोनों देशों ने कहा कि उन्होंने एक-दूसरे को भारी नुकसान पहुंचाया है और कई बॉर्डर पोस्ट को तबाह कर दिया है या उन पर कब्जा कर लिया है.