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ईरान-अमेरिका तनाव फिर बढ़ा: ट्रंप ने सिचुएशन रूम में की अहम बैठक, नई शर्तें भेजीं

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान के बीच डील में अभी भी डोनाल्ड ट्रंप हैं। ट्रंप ने शुक्रवार को सिचुएशन रूम में नेशनल सिक्योरिटी टीम के साथ मीटिंग की थी। सूत्रों के मुताबिक यह मीटिंग करीब दो घंटे तक चली थी, लेकिन इसमें क्या हुआ, इस बारे में तत्काल कोई जानकारी नहीं मिल पाई। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप ईरान के साथ डील में कई शर्तों में बदलाव करना चाहते हैं। इसमें, होर्मुज और न्यूक्लियर मटीरियल से जुड़ी शर्तें शामिल हैं। बताया जाता है कि नई शर्तों को वापस ईरान के पास भेज दिया गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ एक बहुत अच्छे समझौते के करीब पहुंच रहा है। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई पर लौट आएगा। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में कहाकि अगर आप जल्दबाजी करेंगे, तो आप कोई अच्छा समझौता नहीं कर पाएंगे। मुझे लगता है कि धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से हम वह पा रहे हैं जो हम चाहते हैं। अगर हमें वह नहीं मिला जो हम चाहते हैं, तो हम इसे एक अलग तरीके से खत्म करेंगे। ईरान का क्या कहना इस बीच, तस्नीम समाचार एजेंसी ने बताया कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया कि उसने रविवार सुबह देश के क्षेत्रीय जल क्षेत्र के ऊपर एक अमेरिकी एमक्यू-1 प्रीडेटर मल्टी-रोल ड्रोन का पता लगाया और उसे मार गिराया। एजेंसी ने आईआरजीसी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि आज सुबह-सवेरे एक अमेरिकी सेना का एमक्यू1 ड्रोन ईरानी क्षेत्रीय जल क्षेत्र में घुस आया था, लेकिन तुरंत उसका पता चल गया और आईआरजीसी के हवाई रक्षा प्रणाली से दागी गयीं मिसाइलों से उसे मार गिराया गया। क्यों आया था अमेरिकी ड्रोन एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अमेरिकी ड्रोन ईरानी क्षेत्रीय जल क्षेत्र में शत्रुतापूर्ण हरकतें करने के इरादे से घुसा था। उल्लेखनीय है कि अमेरिका और इजरा ल ने 28 फरवरी को ईरान में ठिकानों पर हमले शुरू किए थे, जिसमें 3,000 से अधिक लोग मारे गये थे। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजरायल और पश्चिम एशिया में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले किये । फिर अमेरिका और ईरान ने आठ अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा की। शांति स्थापित करने को लेकर दोनों देशों ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद में बातचीत की, जो बेनतीजा रही और फिर से दुश्मनी शुरू होने की कोई रिपोर्ट नहीं मिली। हालांकि, अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर दी।

भीषण गर्मी पर पीएम मोदी की अपील: पानी पिएं, धूप से बचें और देसी शीतल पेयों को अपनाएं

 नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को मन की बात रेडियो कार्यक्रम में देश के सामने अपनी बातों को रखा। पीएम मोदी ने शुरुआत 134वें एपिसोड की शुरुआत हाल ही में हुए नेशनल एथलेटिक्स फेडरेशन कॉम्पटीशन से किया। उन्होंने इस दौरान एथलीट गुरिंदरवीर सिंह, अनिमेष कुजूर से बात की। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले ही झारखंड के रांची में हुए सीनियर एथलेटिक्स कॉम्पटीशन में करीब 800 एथलीट्स ने हिस्सा लिया। इसमें कुल मिलाकर चार राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूटे। पीएम ने कहा कि वह इन सभी एथलीट्स को इसके लिए बधाई देना चाहते हैं। इसके बाद प्रधानमंत्री ने दोनों एथलीट्स से बात की और उनकी जर्नी के बारे में जाना। पीएम ने गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर का जिक्र करते हुए कहा कि हमने संगीत में जुगलबंदी देखी है कि एक चुनौती दे और दूसरी उठा ले। फिर तीसरी बार कर ले। लेकिन अनिमेष कजूर और गुरिंदरवीर सिंह ने एथलेटिक्स के क्षेत्र में ऐसा करके देश का नाम रोशन किया है। गर्मी को लेकर पीएम की देशवासियों से अपील प्रधानमंत्री मोदी ने देश में पड़ रही भीषण गर्मी को लेकर भी देश वासियों के सामने अपनी पुरानी अपील को दोहराया। उन्होंने कहा, "मेरे प्यारे देशवासियों, इस समय देश के ज्यादातर हिस्सों में भीषण गर्मी पड़ रही है। तेज धूप, गर्म हवाएं चल रही हैं। ऐसे में मौसम में सभी को अपना ध्यान रखने की जरूरत है। पानी पीते रहिए। धूप में अगर निकलना ही पड़े तो थोड़ा संभल कर निकलिए। सरकार ने देश भर के लिए जो गाइडलाइंस दी हैं। उनको भूलिएगा नहीं। पीएम मोदी ने कहा, साथियों हमारे यहां गर्मी से लड़ने का तरीका कई बार हमारी रसोइयों में भी मिल जाता है। आपने देखा होगा जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है। वैसे-वैसे घर की रसोई का स्वाद बदल जाता है। रसोई का प्रकार भी बदल जाता है। कहीं मटके का पानी निकल आता है, कहीं दही जमने लगता है, तो कहीं आम उबलने लगता है और फिर शुरू होता है देशी पेय का दौर… देशी पेय से आप सभी भी परिचित होंगे। उत्तर भारत में आप जाएंगे तो आपको आम पन्न मिलेगा। कच्चे आम का स्वाद और गर्मी से राहत। पंजाब और हरियाणा में लस्सी मिल जाएगी। बड़े गिलास वाली लस्सी। राजस्थान और गुजरात में छाछ। बिहार झारखंड में सत्तू का शरबत, उसकी तो बात कही क्या है। पेट भी भरे और ताकत भी दे। इसके बाद पीएम मोदी ने देश के अन्य हिस्सों के प्रमुख शीतल पेय पदार्थों का जिक्र करते हुए उन्हें भारत की एकता का परिचायक बताया। आमों की तमाम किस्मों की दी जानकारी प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में देश में पैदा होने वाली तमाम आम की किस्मों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "साथियों, गर्मी आते ही एक और चर्चा घर में शुरू हो जाती है और वह है आम की। आम, चर्चा का विषय होता ह। भारत में शायद ही कोई ऐसा घर होगा, जहां गर्मियों में आम की बात न होती हो। हर इलाके में अपना आम और उसका अपना स्वाद होता है। अपनी खुशबू होती है। महाराष्ट्र के कोंकण में हापुस, अलफांसो, गुजरात का केसर, यह तो आमरस की जान है। उत्तर प्रदेश का दशहरी और मेरी काशी का लंगड़ा। वैसे, लंगडा आम की खास बात यह होती है कि वह पकने के बाद भी हरे रंग का ही रहता है। बिहार का जर्दालू जिसकी खुशबू दूर से पहचान में जा जाती है। चौसा और मालदा हर नाम के साथ लोगों की यादें जुड़ी हुई हैं। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने दक्षिण भारत के बंगनपल्ली, तोतापरी, नीलम, मलगोवा, बंगाल का हिमसागर, ओडिशा और आंध्र प्रदेश का सुवर्णरेखा का भी जिक्र किया। नीदरलैंड्स से ताई तांबे की ऐतिहासिक प्लेट्स की बात प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कार्यक्रम हालिया नार्डिक देशों की यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "प्यारे देशवासियों बीते दिनों मुझे यूरोप के नीदरलैंड्स जाने का अवसर मिला। वहाँ मैं कई बैठकों में शामिल हुआ। इसी दौरान ऐसा समय भी आया, जिसने हर भारतीय को गर्व से भर दिया। नीदरलैंड्स में आयोजित एक विशेष समारोह में चोल काल की प्राचीन ताम्र प्लेट्स भारत को वापस सौंपी गईं। उस कार्यक्रम में नीदरैंड्स के प्रधानमंत्री भी मौजूद थे। इन प्लेट्स को लेकर मुझे देश विदेश से लगातार संदेश मिल रहे हैं। सभी इनको लेकर खुशी जता रहे हैं, गर्व व्यक्त कर रहे हैं। दुनियाभर के तमिल समुदाय के लोग इससे उत्साहित हैं। खगोल विज्ञान में युवाओं की बढ़ रही रुचि प्रधानमंत्री मोदी ने इसके बाद युवाओं की खगोलशास्त्र में बढ़ती रुचि का भी जिक्र किया। उन्होंने जोर दिया कि प्राचीन काल से भी भारत में खगोल शास्त्र को लेकर विशेष दिलचस्पी रही है। अब इस दौर में भी युवा इसी तरफ मुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आपने देखा होगा कि पिछले कुछ समय से देश में एस्ट्रोनॉमी क्ल्ब्स तेजी के साथ लोकप्रिय हो रहे हैं। खगोल मण्डल नाम की एक टीम ने 30 घंटेका एक बहुत इनेवेटिव कोर्स लॉन्च किया है।

वोटर लिस्ट में बड़ा फेरबदल: SIR से लाखों नाम होंगे वेरिफाई, 3 महीने में आएगी फाइनल लिस्ट

नई दिल्ली चुनाव आयोग ने SIR के तीसरे फेज का काम शुरू कर दिया है। वोटर ल‍िस्‍ट को अपडेट करने के ल‍िए बूथ लेवल पर वोटरों के वेर‍िफ‍िकेशन की प्रक्र‍िया शुरू कर दी गई है। वोटरों की डिटेल्‍स, प्रूफ करने वाले कागज और वोटर कार्ड जांचने का काम महीनेभर चलेगा। उसके हफ्तेभर बाद वोटर ल‍िस्‍ट का ड्राफ्ट जारी क‍िया जाएगा। यह कच्‍चा ल‍िस्‍ट होगा, इसमें फेरबदल हो सकेगा। जो लोग वोटर वेर‍िफ‍िकेशन में गलती से छूट जाएंगे, उन्‍हें ड्राफ्ट ल‍िस्‍ट से पता चल जाएगा और फ‍िर इसमें अपना नाम जुड़वाने के ल‍िए अपील कर सकेंगे। या फ‍िर कागज सही होने के बावजूद ज‍िन्‍हें वेर‍िफाई नहीं क‍िया जाएगा, वे लोग कंपलेन कर सकेंगे, प्रूफ दे सकेंगे। वोटरों को इसके ल‍िए एक महीने का समय दिया गया है। ऐसे ज‍ितने भी अपील होंगे, क्‍लेम होंगे, सबको दुबारा वेरिफाई क‍िया जाएगा और इसे एक महीने में कर ल‍िया जाएगा। यानी क्‍लेम‍ करने के ल‍िए वोटरों को एक महीने का समय और फ‍िर एक महीना कर्मचार‍ियों को द‍िया जाएगा दुबारा व‍ेर‍िफाई करने के ल‍िए। इसके बाद वोटरों की फाइनल ल‍िस्‍ट जारी कर दी जाएगी। यानी हर राज्‍य में तीन महीना और एक हफ्ता लग जाएगा। क‍िस राज्‍य में कब SIR, कब आएगी नई वोटर ल‍िस्‍ट ? 19 राज्‍यों और केंद्र शास‍ित प्रदेशों में 37.74 करोड़ वोटरों की गहन जांच और सत्‍यापन का काम द‍िसंबर में जाकर खत्‍म होगा। इन सभी राज्‍यों में एकसाथ SIR नहीं होगा, ग्रुप में होगा। 30 मई से ओडिशा और उत्‍तर पूर्व के तीन राज्‍यों स‍िक्किम, मण‍िपुर, म‍िजोरम में SIR शुरू हो चुका है और वहां 6 सितंबर को फाइनल ल‍िस्‍ट आ जाएगी। उत्‍तराखंड में 8 जून को SIR शुरू होगा, 15 स‍ितंबर को फाइनल वोटर ल‍िस्‍ट आएगी। आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हर‍ियाणा और चंडीगढ़ में 15 जून से शुरू होगा, फाइनल ल‍िस्‍ट आएगी 22 स‍ितंबर को। 25 जून से पंजाब और तंलंगाना में होगा, ल‍िस्‍ट आएगी 1 अक्‍टूबर को। द‍िल्‍ली, महाराष्‍ट्र, कर्नाटक, झारखंड और मेघालय में 30 जून से SIR होगा, 7 अक्‍टूबर को फाइनल वोटर ल‍िस्‍ट आ जाएगी। नागालैंड में 16 अगस्‍त से, त्रिपुरा में 15 स‍ितंबर से SIR होगा। ल‍िस्‍ट आएगी 22 नवंबर और 23 द‍िसंबर को। SIR क्‍या होता है, क्‍यों जरूरी है? सभी लोगों का नाम वोटर ल‍िस्‍ट में होना चाह‍िए और कोई भी छूटना नहीं चाह‍िए। बशर्ते वह सही हो। बस यहीं शुरू हो जाती है स्‍क्रूटनी की ड्यूटी। पात्रता है क‍ि आप वोटर हों। क्‍या सभी लोग वोटर हैं? नहीं। भारत के नागर‍िक हों और कम से कम 18 साल के हों। 18 साल के होते ही आप खुद अप्‍लाई कर वोटर कार्ड बनवा सकते हैं। बस नागर‍िकता प्रूफ करने वाले मान्‍य कागज जमा करने होते हैं। फि‍र अलग से इतने बड़े स्‍तर पर अभियान क्‍यों? आप जहां के वोटर होते हैं उसी लोकेशन पर हमेशा नहीं रहते। आप जब दूसरी जगह श‍िफ्ट हो जाते हैं तो वहां के वोटर बन जाते हैं, वहां के वोटर ल‍िस्‍ट में आपका नाम जुड़ जाता है। पर कानून और न‍ियम होने के बावजूद अक्‍सर होता है क‍ि पुराने ल‍िस्‍ट में भी आपका नाम पड़ा रह जाए। बच्‍चे बड़े होते हैं, वोटर बनते हैं, और वोटर ल‍िस्‍ट में नए नाम जुड़ते चले जाते हैं। पर बुजुर्ग वोटर जब गुजर जाते हैं, या जो लोग असमय चले जाते हैं, उनका नाम भी वोटर ल‍िस्‍ट में पड़ा रह जाता है। ये तो हुए वाज‍िब और व्‍यावहार‍िक कारण। कई लोग जानबूझकर अलग-अलग जगहों के लिए वोटर कार्ड बनवा लेते हैं। क‍िसी पार्टी, नेता को वोट देकर ज‍िताने के चक्‍कर में या आइडेंटिटी कार्ड के ल‍िए। अलग-अलग आइडेंटिटी से सरकारी योजनाओं का ज्‍यादा फायदा लेने के लिए भी ऐसा क‍िया जाता है। एक और बड़ा मामला है, नागर‍िक नहीं हो और वोटर कार्ड बनवा ल‍िया हो। अभी सबसे बड़ा व‍िवाद का प्‍वाइंट यही है। एक से ज्‍यादा वोटर कार्ड और ब‍िना नागर‍िकता के वोटर कार्ड, दोनों कानूनन जुर्म हैं और ये डुप्लिकेट कार्ड की कैटेगरी मे आते हैं। ऐसा भी होता है क‍ि आपने वोटर कार्ड तो बनवा ल‍िया, पर क‍िसी कारण से उस क्षेत्र के वोटर ल‍िस्‍ट में आपका नाम नहीं जुड़ा हो। इस तरह चार कैटेगरी- ऐबसेंट, श‍िफ्टेड, डेड और डुप्लिकेट के डेटा को अपडेट करना जरूरी हो जाता है और इसी एक्‍सरसाइज को SIR कहते हैं, स्‍पेशल इंटेंसिव र‍िवीजन सुप्रीम कोर्ट ने क्‍यों कहा क‍ि SIR सही है? संव‍िधान और चुनाव से जुड़े कानून चुनाव आयोग को SIR कराने का अध‍िकार देते हैं। क‍िसी क्षेत्र में वोटरोंं का बदलना बहुत सामान्‍य है और यह चुनाव आयोग की ड्यूटी है क‍ि सही वोटरों की पहचान सुन‍िश्‍च‍ित करे। इसके ल‍िए SIR की जो प्रक्र‍िया आयोग ने अपनाई, उस पर भी सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगा दी है। चुनाव आयोग ने SIR को जरूरी बताते हुए कहा था क‍ि पिछले 20 वर्षों में तेजी से हुए शहरीकरण और पलायन के कारण वोटर ल‍िस्‍ट में बड़े पैमाने पर नाम जोड़े गए, हटाए गए। एक वोटर का नाम एक से ज्‍यादा ल‍िस्‍ट में आने, दो वोटर कार्ड होने जैसी गड़बड़‍ियां बढ़ गई थी। हालांक‍ि अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है क‍ि वोटर ल‍िस्‍ट से नाम कटने या नाम नहीं जुड़ने का यह मतलब नहीं क‍ि वह नागर‍िक नहीं है। चुनाव आयोग क‍िसी को नागर‍िक होने या न होने का सर्टिफ‍िकेट नहीं देता। SIR का इंपैक्‍ट स‍िर्फ वोटर ल‍िस्‍ट तक ही रहेगा। ज‍िनका नाम ल‍िस्‍ट से बाहर हुआ है, उसे आयोग अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दे और सही साबित होने पर उसे दोबारा शाम‍िल करना सुन‍िश्चित करे। बिहार में हुए SIR के ख‍िलाफ दायर केस में सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। इससे मौजूदा SIR की प्रक्रि‍या और चुनाव आयोग को बल म‍िला है। जहां SIR, वहां कब हैं चुनाव? 2027 में 7 राज्‍यों में व‍िधानसभा चुनाव होंगे। पंजाब, उत्‍तराखंड, गोवा, मण‍िपुर में मार्च से पहले चुनाव होंगे, मई से पहले उत्‍तर प्रदेश में और द‍िसंबर से पहले गुजरात और ह‍िमाचल प्रदेश में। उत्‍तर प्रदेश में SIR हो चुका है, फाइनल वोटर ल‍िस्‍ट अप्रैल में आ चुकी है। पंजाब, उत्‍तराखंड, मण‍िपुर में इसी फेज में SIR है। ह‍िमाचल प्रदेश में SIR बाकी है और अभी वाले शेड्यूल में नहीं है। वहां फरवरी 2027 में जनगणना पूरी … Read more

झपटमारी पर फास्ट ट्रैक एक्शन: रंगेहाथ पकड़ा आरोपी, 14 दिन में चार्जशीट और त्वरित सजा

नई दिल्ली  शाहबाद डेयरी में 1 मई की रात पीड़ित ने पर्स छीनते हुए झपटमार को रंगेहाथ पकड़ा। पुलिस ने तेजी से जांच कर 6 मई को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। कोर्ट ने तारीख पर तारीख वाले फिल्मी जुमले को दरकिनार करते हुए रोजाना सुनवाई की और 16 मई को फैसला सुना दिया। पुलिस कमिश्नर ने दिए निर्देश महज दो हफ्ते में आरोपी दोषी करार दिया गया, जो दिल्ली पुलिस के लिए एक नजीर बन गई। पुलिस कमिश्नर सतीश गोलछा ने सभी जिलों को ऐसे ही स्पीडी इन्वेस्टिगेशन, स्पीडी ट्रायल और स्पीडी जस्टिस पर काम करने के निर्देश दे दिए, जिस पर अमल होने लगा है। दो हफ्ते में चार्जशीट दाखिल करने को कहा गया पुलिस अफसरों के मुताबिक, रंगेहाथ पकड़े गए आरोपियों के अलावा जिन केसों में संभव हो सके उनमें एक से लेकर दो हफ्ते के भीतर चार्जशीट दाखिल करने को कहा गया है। इसके बाद प्रॉसिक्यूशन (सरकारी वकील) के साथ तालमेल कर फास्ट ट्रैक सुनवाई सुनिश्चित करने और जल्द से जल्द दोषी साबित करने पर जोर दिया गया है। ज्यादातर केसों में आरोपी को मिल जाती है जमानत दरअसल सात साल से कम सजा वाले अधिकतर केसों में आरोपी को जमानत मिल जाती है। ऐसे में जांच अधिकारी के सामने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने की समयसीमा का बंधन नहीं रहता है। अफसर कहते हैं कि इसके बाद कोर्ट में भी ऐसे केसों की सुनवाई कई साल तक चलती है। इससे शिकायतकर्ता या गवाह के मुकरने या बयानों में विरोधाभास होने से आरोपी को सजा नहीं हो पाती है। जल्द सजा करवाने पर दिया जा रहा जोर तेजी से जांच, तुरंत चार्जशीट दाखिल करने और सुनवाई होने से मुकरने या बयानों में विरोधाभास की गुंजाइश कम रहती है, जिससे सजा की दर में भी इजाफा होगा। इसलिए झपटमारी, चोरी या अन्य छोटे अपराधों में आरोपी के मौके या तुरंत बाद रंगेहाथ पकड़े जाने पर दो हफ्तों में चार्जशीट करने और जल्द सजा करवाने पर जोर है। सभी जिलों में शुरू हुआ एक्शन पुलिस अफसरों ने बताया कि सभी जिलों ने ऐसे मामलों में अमल करना शुरू कर दिया है। सिर्फ छोटे अपराध ही नहीं बल्कि गंभीर अपराधों में भी अगर संभव हो सकता है तो उनमें भी जल्द जांच कर आरोप पत्र दाखिल करने और सजा करवाने के निर्देश दिए गए हैं। क्या है 'ताबड़तोड़ न्याय' का मकसद अगर किसी केस में आरोपी को कोर्ट बरी कर देता है तो जिलों के डीसीपी से खुद फैसले की समीक्षा करने को कहा गया है, ताकि अगर कोई कमी रह गई हो तो उसे आगे के केसों में ना दोहराई जाए। 'ताबड़तोड़ न्याय' का मकसद आरोपी को कोर्ट से सजा दिलवाना भी है। इन केसों में हुआ ताबड़तोड़ इंसाफ 14 मई: टैक्सी ड्राइवर का पर्स छीनने वाले को सिपाही ने पीछा कर रंगेहाथ पकड़ा था। आईपी एस्टेट थाना पुलिस ने चार दिन में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। स्पीडी ट्रायल के तहत 26 मई को आरोपी को दोषी करार दिया। 16 मईः पालम गांव में 80 हजार कैश-जूलरी की चोरी हुई। पुलिस ने चार घंटे में आरोपी को अरेस्ट किया। 10 दिन की सुनवाई के बाद 26 मई को अदालत ने पेश साक्ष्यों और गवाह के बयान पर आरोपी को दोषी ठहरा दिया। 3 फरवरी: आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन पर 5200 रुपये निकालकर आरोपी फरार हो गया। लूट का केस दर्ज कर पहाड़गंज पुलिस ने आरोपी को पकड़ा। 23 मार्च को चार्जशीट पेश की और 23 मई को दोषी करार दिया गया।  

बंगाल में हड़कंप: कल्याण बनर्जी घायल, चंडीतला थाने के सामने बवाल

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल के हुगली स्थित चंडीतला पुलिस स्टेशन के सामने तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी पर हमले की जानकारी सामने आई है. टीएमसी सांसद ने आरोप लगाया है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला किया और उनके सिर पर पत्थर या गेंद जैसी चीज (वस्तु) मारकर चोट पहुंचाई है. जबकि बीजेपी का कहना है कि वह घायल नहीं  हुए हैं, सिर्फ ड्रामा कर रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, कल्याण बनर्जी अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के संबंध और गिरफ्तार टीएमसी नेता, कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग को लेकर चंडीतला थाना ज्ञापन देने पहुंचे थे. इसी दौरान ज्ञापन सौंपने से पहले ही तृणमूल और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नारेबाजी शुरू हो गई. बीजेपी-टीएमसी के बीच नारेबाजी बताया जा रहा है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने तृणमूल समर्थकों के खिलाफ "चोर-चोर" के नारे लगाए, जिसके बाद माहौल और गर्म हो गया. किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात किए गए. बताया जा रहा है कि इसी दौरान किसी ने उन पर गेंद या पत्थर जैसी चीज से हमला कर दिया, जिससे उनके सिर में चोट लग गई. कल्याण बनर्जी सिर पर भीगा हुआ रूमाल रखे कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि चंडीतला थाने में डिपुटेशन (ज्ञापन) देने जाते वक्त उन पर हमला किया गया. उन्होंने घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने जा रहे लोगों पर हमला किया गया. ध्यान भटकाना चाहते हैं कल्याण: बीजेपी वहीं, बीजेपी ने कल्याण के खुद के चोट लगने के दावों को झूठा करार दिया है. बीजेपी का कहना है कि वह (कल्याण बनर्जी) ड्रामा कर रहे हैं. उन्हें चोट

हीटवेव के बीच पीएम मोदी ने दिया स्वास्थ्य मंत्र, बोले- पानी पीते रहें और आम पन्ना-लस्सी का लें आनंद

नई दिल्ली  भारत के विभिन्न हिस्सों में तापमान में भारी बढ़ोतरी को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से आग्रह किया है कि वे यथासंभव अधिक से अधिक सावधानियां बरतें। प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को ' मन की बात ' कार्यक्रम के 134वें एपिसोड में कहा, 'इस समय देश के ज्यादातर हिस्सों में बहुत गर्मी पड़ रही है। तेज धूप और गर्म हवाएं, ऐसे मौसम में अपना ध्यान रखना बहुत जरूरी है। पानी पीते रहिए। धूप में अगर निकलना ही पड़े तो थोड़ा संभल कर निकलें। इस दिशा में सरकार के अलग-अलग विभागों ने जो गाइडलाइन जारी की हैं, वो भी भूलिएगा नहीं।' अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि हमारे यहां गर्मी से लड़ने का तरीका कई बार रसोई में भी मिलता है। आपने भी देखा होगा कि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, वैसे-वैसे घर की रसोई का स्वाद बदल जाता है, रसोई का प्रकार बदल जाता है। कहीं मटके का पानी निकल आता है, कहीं दही जमने लगता है, तो कहीं कच्चे आम उबलने लगते हैं और फिर देसी पेय का दौर शुरू होता है। उन्होंने कहा, 'भारत के पारंपरिक ग्रीष्मकालीन पेय देश के विभिन्न क्षेत्रों की रीति-रिवाजों और संस्कृतियों में गहराई से रचे-बसे हैं। हर पेय एक अनूठी कहानी कहता है, जो मिलकर भारत की जीवंत विविधता को प्रदर्शित करते हैं और 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को सुदृढ़ करते हैं।' प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ राज्यों के उदाहरण देते हुए कहा, 'देसी पेय से आप भी परिचित हैं। अगर आप उत्तर भारत में जाएंगे तो काफी जगह आपको मिलेगा आम पन्ना, कच्चे आम का स्वाद और गर्मी से राहत भी। पंजाब-हरियाणा जाइए तो बड़े गिलास वाली लस्सी मिल जाएगी। राजस्थान और गुजरात में छाछ, जैसे हर खाने की साथी बन जाती है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में सत्तू के शरबत की बात है, जिससे पेट भी भरता है और ताकत भी मिलती है।' इस दौरान पीएम मोदी ने कोंकण और गोवा के कोकम शरबत, दक्षिण भारत के पानकम, सम्बारम और ओडिशा के बेल पना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये सिर्फ पेय नहीं, बल्कि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की परंपरा का हिस्सा है। देशवासियों के नाम अपने संदेश में पीएम मोदी ने कहा कि आप भी गर्मी के दौरान देसी पेजयलों का खूब आनंद लीजिए।

75,000 मील प्रति घंटे की रफ्तार से आया उल्कापिंड, न्यू इंग्लैंड में गूंजी जोरदार सोनिक बूम

 नई दिल्ली  शनिवार दोपहर पूर्वोत्तर अमेरिका के आसमान में एक विशाल उल्कापिंड के फटने से जोरदार धमाका हुआ। नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार, इस विस्फोट से पैदा हुई सोनिक बूम की ताकत करीब 300 टन टीएनटी के बराबर थी। इस जोरदार आवाज और कंपन ने कई राज्यों के निवासियों को चौंका दिया। यह घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर 2:06 बजे हुई। चमकीला उल्कापिंड उत्तर-पूर्वी मैसाचुसेट्स और दक्षिण-पूर्वी न्यू हैम्पशायर के ऊपर आसमान में ही टूटकर बिखर गया। इसके फटने से इतनी तेज आवाज हुई कि पूरे न्यू इंग्लैंड क्षेत्र में गूंज सुनाई दी और कई इलाकों में इमारतें तक हिल गईं। नासा की डिप्टी न्यूज चीफ जेनिफर डोरेन ने कहा कि यह उल्कापिंड फिलहाल सक्रिय किसी भी उल्का बौछार का हिस्सा नहीं था। यह एक प्राकृतिक खगोलीय पिंड था, न कि अंतरिक्ष का कचरा या किसी सैटेलाइट के वापस धरती पर गिरने का मामला। इसके टूटने से करीब 300 टन टीएनटी के बराबर ऊर्जा निकली, जिससे यह भयंकर आवाज पैदा हुई। 75,000 मील प्रति घंटे की रफ्तार नासा के आंकड़ों के मुताबिक, जब इस उल्कापिंड ने पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया, तब इसकी रफ्तार करीब 1,20,700 किलोमीटर प्रति घंटा थी। जमीन से लगभग 64 किलोमीटर ऊपर आते ही यह भीषण दबाव के कारण टुकड़ों में बंट गया। अमेरिकन मीटियोर सोसाइटी ने बताया कि यह खगोलीय चट्टान लगभग तीन फीट चौड़ी थी। इसने बोस्टन के उत्तर में, मैसाचुसेट्स और न्यू हैम्पशायर की सीमा के पास वायुमंडल में प्रवेश किया। इस घटना की गवाही देने वाले लोगों की रिपोर्ट दक्षिण में डेलावेयर से लेकर उत्तर में मॉन्ट्रियल तक से मिली हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने दिन के उजाले में एक बेहद चमकदार आग का गोला देखने, तेज विस्फोट की आवाज सुनने और जमीन हिलने का दावा किया। आम उल्कापिंडों से काफी बड़ा था आकार अमेरिकन मीटियोर सोसाइटी के प्रोग्राम मॉनिटर रॉबर्ट लंसफोर्ड ने कहा कि यह घटना आम तौर पर दिखने वाले उल्कापिंडों से बहुत बड़ी थी। उन्होंने कहा कि यह निश्चित रूप से एक सामान्य फायरबॉल से बड़ा था। लंसफोर्ड के अनुसार, इस बात की संभावना बहुत कम है कि इसका कोई भी हिस्सा जमीन तक पहुंचा हो। उन्होंने कहा कि यह जानने के लिए कि क्या इसका कोई टुकड़ा जमीन पर गिरा, हमें इसके रास्ते और गति की और अधिक जानकारी चाहिए होगी। लेकिन अगर यह पूरी तरह हवा में नहीं जला होगा, तो इसका मलबा समुद्र में गिरा होगा। वैसे, अधिकांश उल्कापिंड जमीन पर पहुंचने से पहले ही जलकर राख हो जाते हैं। सोनिक बूम था वजह विस्फोट की भयानक आवाज के बाद घबराए स्थानीय लोगों ने इमारतों के हिलने की शिकायत पुलिस और यूएस जियोलॉजिकल सर्वे से की। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए कई वीडियो में लगातार दो तेज धमाकों की आवाजें सुनी जा सकती हैं, हालांकि जमीन पर नुकसान या आग लगने का कोई निशान नहीं मिला। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे ने पुष्टि की कि उन्हें क्षेत्र भर के निवासियों से कई शिकायतें मिली हैं, क्या आपने इसे महसूस किया? हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि कोई भूकंपीय गतिविधि का पता नहीं चला, जिससे भूकंप को इस कंपन का कारण होने की संभावना से इनकार किया जा सकता है। नासा ने भी अंत में दोहराया कि यह महज एक प्राकृतिक अंतरिक्षीय घटना थी।

सिद्धारमैया युग का अंत, अब डीके शिवकुमार संभालेंगे कर्नाटक की कमान

 नई दिल्ली  सालों की राजनीतिक जोड़-तोड़ और सिद्दरमैया के साथ जबरदस्त सत्ता की खींचतान के बाद डीके शिवकुमार आखिरकार कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनने का अपना बरसों पुराना सपना पूरा करने जा रहे हैं। वह 3 जून को दोपहर 3.30 बजे लोक भवन के ग्लास हाउस में राज्य के 25वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे। पार्टी सदस्यों ने बताया कि यह तारीख शिवकुमार के निजी ज्योतिषी बेलूर द्वारकानाथ से सलाह-मशविरा करने के बाद तय की गई। शाम 4 बजे का निकला शुभ मुहूर्त ज्योतिष में गहरा विश्वास रखने वाले शिवकुमार को सलाह दी गई थी कि वह उस दिन शाम करीब 4.05 बजे शुरू होने वाले शुभ मुहूर्त में शपथ लें। इस समय को इसलिए भी चुना गया है ताकि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और एआईसीसी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी इस मौके पर मौजूद रह सकें। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जब नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हुई तो बातचीत के आखिरी दौर में प्रियंका ने अहम भूमिका निभाई। इस मौके की राजनीतिक अहमियत के बावजूद कांग्रेस ने कोई भव्य समारोह न करने का फैसला किया है। सादा समारोह रखने का क्यों लिया गया फैसला? राज्य कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीसी चंद्रशेखर ने कहा, “हमने शुरू में इस कार्यक्रम को विधान सौध की भव्य सीढ़ियों पर आयोजित करने की योजना बनाई थी, जिसमें राज्य के अलग-अलग हिस्सों से 15,000 से 20,000 लोग शामिल होते लेकिन महंगाई और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण लोगों को हो रही परेशानियों को देखते हुए हमने ऐसा न करने का फैसला किया।” उन्होंने आगे कहा, “शिवकुमार ने भी इस बात पर जोर दिया कि यह एक सादा कार्यक्रम होना चाहिए, जो जनसेवा के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता को दर्शाता हो। चूंकि ये काम-काज वाला दिन है, इसलिए हम जनता को होने वाली किसी भी असुविधा से भी बचना चाहते थे।” डीके शिवकुमार को चुना गया विधायक दल का नेता शनिवार को विधान सौध में हुई एक बैठक में शिवकुमार को सर्वसम्मति से कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया। अब सबका ध्यान कैबिनेट गठन पर है। सीएलपी नेता के तौर पर शिवकुमार का चुनाव 17 सालों में नेतृत्व में आया पहला बदलाव है। इस पूरी अवधि में यह पद सिद्दरमैया के पास था। सीएलपी की बैठक में सिद्दरमैया ने खुद शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव रखा, जबकि पूर्व गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके बाद विधायकों ने सर्वसम्मति से इसे मंजूरी दे दी। बाद में कांग्रेस के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने इसकी औपचारिक घोषणा की। बैठक के तुरंत बाद शिवकुमार ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात की और औपचारिक रूप से सरकार बनाने का दावा पेश किया। कैबिनेट गठन पर सभी का ध्यान अब सभी का ध्यान कैबिनेट गठन पर है। अगर मंगलवार से पहले बातचीत पूरी हो जाती है तो शिवकुमार के साथ कई मंत्रियों के शपथ लेने की संभावना है। चंद्रशेखर ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे कार्यक्रम स्थल पर न जाएं और उन्हें भरोसा दिलाया कि शिवकुमार कांग्रेस कार्यकर्ताओं और जनता से मिलने के लिए जिलों का दौरा करेंगे। सिद्दरमैया के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद कांग्रेस पार्टी के अलग-अलग गुटों को साथ लेते हुए जाति, समुदाय और क्षेत्रीय हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि 'अहिंदा' सामाजिक गठबंधन फॉर्मूले के तहत कई उपमुख्यमंत्री बनाने की योजना पर फिर से विचार किया जा रहा है, क्योंकि इस पद के लिए दावेदारों की संख्या बहुत ज्यादा है। नई कैबिनेट में अहम मंत्रालयों को लेकर भी चर्चा चल रही है, जिसमें सिद्दरमैया के बेटे यतींद्र को कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि निवर्तमान मुख्यमंत्री अपने बेटे को कैबिनेट में शामिल करने के पक्ष में नहीं हैं।

‘भारत एक शक्तिशाली देश है’ अमेरिकी रक्षा मंत्री ने की भारतीय सेना के आधुनिकीकरण की सराहना

नई दिल्ली  अमेरिका ने भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति का लोहा मानते हुए उसे शक्तिशाली देश बताया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा, भारत अपने भारी रक्षा उद्योग और सैन्य तंत्र का तेजी से विकास कर अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। सेना का आधुनिकीकरण कर उसे लंबी और सफल सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार कर रहा है। हेगसेथ ने यह बात रक्षा और कूटनीतिक मामलों के महत्वपूर्ण वार्षिक कार्यक्रम शांग्रीला डायलाग में कही है। इस वर्ष कार्यक्रम में विश्व के 44 प्रमुख देशों के नेता, सैन्य विशेषज्ञ, कूटनीतिज्ञ और अन्य प्रमुख हस्तियां शिरकत कर रही हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा, भारत शक्तिशाली देश है और वह अपनी सेना का आधुनिकीकरण कर रहा है। ऐसा कर वह हिंद महासागर क्षेत्र में शक्ति संतुलन कायम कर रहा है। भारत रक्षा उत्पादन में अपनी क्षमता बढ़ा रहा है, हम भी उसके साथ मिलकर रक्षा उत्पादन करने के लिए संकल्पित हैं। हेगसेथ ने क्या कहा? हेगसेथ ने बताया कि अमेरिका अपने रक्षा उत्पादन का फलक बढ़ा रहा है और उसे विश्व के कई देशों तक फैला रहा है। वहां पर वह उन देशों के साथ मिलकर रक्षा उत्पादन करेगा। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा- उनके जापान, दक्षिण कोरिया, आस्ट्रेलिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों से मजबूत रक्षा संबंध हैं। कार्यक्रम में हेगसेथ ने कहा, एशिया-प्रशांत क्षेत्र विश्व का सबसे ज्यादा महत्व और उथल-पुथल वाला इलाका है। इसलिए अमेरिका का क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान है। लेकिन क्षेत्रीय देश अपने रक्षा खर्च को लेकर गंभीर नहीं हैं। ऐसे देशों को अपना रक्षा खर्च बढ़ाकर समानुपातिक होना चाहिए। कहा, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में चीन के साथ अमेरिका के संबंध बेहतर हुए हैं। लेकिन अपनी और अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा के साथ हम कोई समझौता नहीं करेंगे। हेगसेथ ने स्वीकार किया कि पश्चिम एशिया और यूरोप में चल रहे युद्ध और तनाव से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी गतिविधियां कम हुई हैं। लेकिन यह स्थिति अस्थायी है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र अमेरिका की दीर्घ अवधि की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल है।

वैश्विक मंच पर भारत का दबदबा, अमेरिकी रक्षा मंत्री ने समुद्री शक्ति की जमकर तारीफ की

नई दिल्ली अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सिंगापुर में कहा कि भारत एक ताकतवर देश है और अपनी सेना को आधुनिक बना रहा है. साथ ही उन्होंने दावा किया कि पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति कराने में अहम भूमिका निभाई. हालांकि भारत इस दावे को पहले से नकारता आया है।  सिंगापुर में हर साल एक बड़ी सुरक्षा बैठक होती है जिसे शांगरी-ला संवाद कहते हैं. इसमें दुनियाभर के रक्षा मंत्री और सेना के बड़े अधिकारी आते हैं. इस साल 44 देश इसमें शामिल हुए. शनिवार को अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने यहां भाषण दिया और कई बड़ी बातें कहीं।  डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाक के बीच शांति कराई, हेगसेथ का दावा हेगसेथ ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति कराने में मदद की. बात यह है कि पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक आतंकी हमला हुआ था जिसमें 26 लोग मारे गए थे. इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन तक सैन्य टकराव हुआ. फिर दोनों देशों के बीच सीजफायर यानी युद्ध विराम हुआ।  ट्रंप और अमेरिका बार-बार यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने यह शांति कराई. लेकिन भारत शुरू से यह कहता आया है कि यह समझौता सीधे भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ. किसी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं थी. भारत ने किसी भी बाहरी मध्यस्थता को साफ नकारा है।  हेगसेथ ने यह भी कहा कि दोनों देश एक दूसरे को खतरे की नजर से देखते रहेंगे और दोनों अपनी सुरक्षा के लिए मिसाइल जैसी ताकत बढ़ाना चाहेंगे. लेकिन अमेरिका इनमें से किसी को अपना दुश्मन नहीं मानता।  पाकिस्तान की भी तारीफ, ईरान से शांति वार्ता में निभा रहा भूमिका हेगसेथ ने पाकिस्तान की भी खूब तारीफ की. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के फील्ड मार्शल और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ शांति वार्ता में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. यह एक अनोखा और अच्छा विकास है।  दरअसल पाकिस्तान इस वक्त अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ी शांति वार्ता में बीच का रास्ता बना रहा है. इस्लामाबाद दोनों देशों का भरोसेमंद दोस्त माना जाता है. पिछले महीने इस्लामाबाद में दोनों पक्षों की बैठक हुई लेकिन कोई डील नहीं हो पाई. पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने कहा है कि अगली बैठक जल्द ही इस्लामाबाद में होगी।  भारत की तारीफ, अमेरिका के साथ मिलकर हथियार बनाने की बात हेगसेथ ने भारत को लेकर कई अच्छी बातें कहीं. उन्होंने कहा कि भारत एक ताकतवर देश है और अपनी सेना को लगातार आधुनिक बना रहा है. भारत खासतौर पर हिंद महासागर में ताकत का संतुलन बनाए रखने में मदद कर रहा है।  उन्होंने यह भी बताया कि भारत बड़ी और भारी सैन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी फैक्ट्री और सप्लाई की व्यवस्था तैयार कर रहा है. अमेरिका ने भारत के साथ मिलकर हथियार और सैन्य उपकरण बनाने का वादा किया है. इसे को-प्रोडक्शन कहते हैं यानी दोनों देश साथ मिलकर बनाएंगे।  अमेरिका की बड़ी इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी क्या है? हेगसेथ ने यह भी बताया कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र यानी इंडो-पैसिफिक दुनिया का सबसे अहम इलाका है. अमेरिका इस इलाके में शांति और संतुलन बनाए रखना चाहता है. वह नहीं चाहता कि कोई एक देश पूरे इलाके पर अपना दबदबा बना ले. उन्होंने सीधे चीन का नाम लेते हुए कहा कि कोई भी देश, चीन सहित, इस इलाके में अपना वर्चस्व नहीं थोप सकता।  हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका चीन से कोई टकराव नहीं चाहता और ट्रंप के समय से अमेरिका-चीन के रिश्ते पहले से बेहतर हुए हैं।  अमीर देश अपनी सुरक्षा का खर्च खुद उठाएं हेगसेथ ने एक और बड़ी बात कही. उन्होंने कहा कि जो देश पैसे वाले हैं वे अपनी सुरक्षा का खर्च खुद उठाएं. अमेरिका अब उनके लिए पैसे नहीं लगाएगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका को सहयोगी चाहिए, न कि ऐसे देश जो सिर्फ उस पर निर्भर हों. जापान, साउथ कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, फिलीपींस और भारत जैसे देशों की उन्होंने तारीफ की कि वे अपनी रक्षा में खुद निवेश कर रहे हैं।