samacharsecretary.com

साइबर फ्रॉड का बड़ा नेटवर्क बेनकाब, कंबोडिया में चल रहे 36 हजार भारतीय सिम, 5,300 से हुई ठगी

जोधपुर/ लुधियाना प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कंबोडिया से संचालित एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए राजस्थान और पंजाब में एक साथ छापेमारी की है.  यह कार्रवाई जोधपुर, नागौर, किशनगढ़ (अजमेर) और लुधियाना सहित कुल 7 ठिकानों पर की गई.  जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क फर्जी और दुरुपयोग किए गए सिम कार्डों के जरिए भारत में साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था, जिसमें स्थानीय सिम वेंडरों ने आम लोगों के आधार और पहचान दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर हजारों सिम बिना उनकी जानकारी के एक्टिवेट किए। जांच में खुलासा हुआ है कि हजारों भारतीय सिम कार्ड फर्जी तरीके से एक्टिव कर विदेशी नेटवर्क तक पहुंचाए जा रहे थे, जिनका इस्तेमाल भारत में बड़े पैमाने पर साइबर धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा था।जांच के दौरान एजेंसी ने करीब 2.3 लाख संदिग्ध मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया। इसमें सामने आया कि लगभग 36 हजार भारतीय सिम कार्ड कंबोडिया में सक्रिय थे। भारत के लोगों से करते थे ठगी  जांच में सामने आया कि राजस्थान के सिम विक्रेताओं ने आम लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर करीब 36 हजार फर्जी सिम कार्ड एक्टिवेट किए, जिन्हें मलेशिया के रास्ते कंबोडिया भेजकर देशभर में सैकड़ों करोड़ रुपये की ठगी की जा रही थी. लगभग 2.3 लाख मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया गया, जिनमें कई नंबर साइबर फ्रॉड गतिविधियों में इस्तेमाल होते मिले. यह सिम कार्ड पहले भारत से मलेशिया भेजे जाते थे, और वहां से इन्हें कंबोडिया में बैठे साइबर ठगों तक पहुंचाया जाता था, जहां से भारतीय नागरिकों को कॉल कर ठगी की जाती थी।  5300 सिम भारत में साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल इनमें से करीब 5300 सिम कार्ड सीधे तौर पर भारत में साइबर फ्रॉड के मामलों में इस्तेमाल किए गए। जांच एजेंसियों के अनुसार इन नंबरों के जरिए देशभर में सैकड़ों करोड़ रुपए की ठगी को अंजाम दिया गया।ईडी ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जोधपुर साइबर पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की। 5 जून को शुरू हुई इस कार्रवाई के तहत राजस्थान के किशनगढ़, नागौर और जोधपुर के साथ पंजाब के लुधियाना में कुल सात स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया।छापेमारी के दौरान ईडी ने बड़ी संख्या में दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और 14 मोबाइल फोन जब्त किए हैं। मलेशियाई नागरिकों के जरिए भेजी जाती थीं सिम ईडी के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। सिम विक्रेता टेलीकॉम कंपनियों की पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) आईडी का उपयोग कर लोगों को नया सिम लेने या मोबाइल नंबर पोर्ट कराने के बहाने बुलाते थे।कम पढ़े-लिखे और जागरूकता की कमी वाले लोगों के दस्तावेज लेकर उनके नाम पर अतिरिक्त सिम कार्ड भी सक्रिय कर दिए जाते थे। बाद में इन सिम कार्डों को मलेशियाई नागरिकों के जरिए कंबोडिया भेजा जाता था। पुलिस अधिकारी बनकर करते थे कॉल   पूरे रैकेट में ठगी का तरीका बेहद संगठित था, जिसमें फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर 'डिजिटल अरेस्ट' करते थे. मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग्स केस में फंसाने की धमकी दी जाती थी, और शेयर बाजार या क्रिप्टो निवेश में भारी मुनाफे का लालच देकर लोगों से पैसे ऐंठे जाते थे. कॉल के लिए भारतीय (+91) नंबरों का इस्तेमाल होने से पीड़ित इसे भरोसेमंद समझकर जाल में फंस जाते थे. ठगी की रकम म्यूल बैंक खातों के जरिए हवाला और क्रिप्टो चैनलों से विदेश भेज दी जाती थी।  मलेशिया के एजेंटों को सप्लाई किया  जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ POS सिम वेंडरों और एजेंटों की मिलीभगत से यह पूरा नेटवर्क चल रहा था, जिन्होंने टेलीकॉम कंपनियों की आईडी का दुरुपयोग कर अतिरिक्त सिम एक्टिवेट किए और उन्हें कमीशन के बदले मलेशियाई एजेंटों को सप्लाई किया. छापेमारी के दौरान कई बैंक खातों, संदिग्ध दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की पहचान हुई है, जबकि कई चल और अचल संपत्तियां भी जांच के दायरे में आई हैं.  एक संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क है और मामले में आगे और बड़े खुलासों की संभावना है। 

नेपाल के फैसले ने बढ़ाई कारोबारियों की टेंशन, भारतीय आमों पर रोक से बाजार में हलचल तेज

काठमांडू  भारत के साथ तल्खी के बीच नेपाल ने एक और बड़ा फैसला लिया है। खबर है कि पड़ोसी मुल्क ने भारतीय आमों की देश में एंट्री पर रोक लगा दी है। हालांकि, कहा जा रहा है कि इसकी वजह कीटनाशक हैं। वहीं, एक और कारण स्थानीय फलों को प्रोत्साहित करना भी माना जा रहा है। नेपाल सरकार के इस फैसले से बाजार में व्यापारी सप्लाई में आ रही परेशानियों का सामना कर रहे हैं। क्यों लगा दी रोक पीटीआई भाषा के अनुसार, कथित रूप से अत्यधिक कीटनाशक पाए जाने और सीमावर्ती क्षेत्रों में 'क्वारंटीन' सुविधाओं के अभाव का हवाला देते हुए भारत से किए जाने वाले आम के आयात पर रोक लगाई गई है। अधिकारियों ने बताया कि सरकार ने ऐसे आमों के आयात पर अंकुश लगाया है जिनमें कीटनाशकों की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई और इसके साथ ही सीमावर्ती इलाकों में पर्याप्त 'क्वारंटीन' सुविधाओं की कमी भी इस फैसले का एक प्रमुख कारण है। नेपाल के बाजार की हालत टाइट राइजिंग नेपाल की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय आमों पर रोक के बाद जनकपुरधाम के बाजारों में घरेलू स्तर पर उगाए गए आमों से भरे हुए हैं। वहीं, कई फल विक्रेताओं का कहना है कि इस फैसले के चलते वह सप्लाई और बिजनेस को लेकर काफी परेशान हैं। इस रोक के चलते नेपाल के स्थानीय बाजारों में घरेलू स्तर पर उत्पादित आम की उपलब्धता बढ़ गई है। गर्मी के मौसम में आम की मांग आमतौर पर काफी अधिक रहती है। क्या बोले व्यापारी नेपाल की वेबसाइट से बातचीत में व्यापारियों ने बताया है कि घरेलू उत्पाद को बढ़ाना देना सही है, लेकिन लंबी रणनीति के बगैर रोक लगाने के चलते व्यापार में मुश्किलें खड़ी हो गईं हैं। खास बात है कि नेपाली आमों का उत्पादन सिर्फ करीब दो महीनों तक रहता है, जिसके चलते भारतीय आयात मुल्क की आम की जरूरतों को पूरा करने के लिए अहम है। बाजार में हो सकती है कमी जनकपुरधाम के फल और सब्जी व्यापारी संघ के महासचिव भुवनेश्वर पुर्बे ने वेबसाइट को बताया कि गर्मियों में आम की मांग बहुत बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि भारतीय आयात पर रोक से बाजार में कमी हो सकती है। उन्होंने कहा कि सप्तरी, सिराहा, महोत्तरी, धनुषा और सर्लाही जैसे जिलों से रोजाना 50 टन से ज्यादा आम जनकपुरधाम पहुंच रहा है, लेकिन सिर्फ स्थानीय पैदावार से पूरे बाजार की मांग को पूरा करना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा है कि आयात पर पूरी तरह बैन लगाने के बजाए सरकार को क्वारंटीन सिस्टम को मजबूत करना चाहिए। साथ ही सुझाव दिया कि भारतीय फलों को क्वालिटी टेस्टिंग के बाद भारतीय फलों को आने की अनुमति देनी चाहिए। केले के मामले में लग चुकी है चोट उन्होंने बताया कि भारतीय केले सस्ते होते हैं, लेकिन सप्लाई में रोक आने के बाद कीमतें बढ़ गईं हैं। अब जब सर्दियों में घरेलू उत्पादन कम हो जाता है, तो व्यापारी भारतीय केले के आयात पर निर्भर होते हैं। व्यापारियों ने चेतावनी भी दी है कि अगर रोक लंबे समय तक जारी रहती है, तो ग्राहकों को ज्यादा दाम चुकाने होंगे और कारोबारियों को बड़ा आर्थिक नुकसान होगा। जापान ने भी लगाई है रोक जापान सरकार ने कीट नियंत्रण में कमी और 'वेपर हीट ट्रीटमेंट' (VHT) मानकों पर खरा न उतरने का हवाला देते हुए 25 मार्च 2026 के बाद जारी सर्टिफिकेट वाली खेप पर रोक लगा दी है। करीब दो दशकों के लंबे अंतराल के बाद जापान ने ये कदम उठाया है। भारत के अमरोहा जिले से लगभग 12 हजार हेक्टेयर में फैले आम के बागों से हर साल भारी मात्रा में फल खाड़ी देशों, अमेरिका, जापान और यूरोप को निर्यात किया जाता है। स्थानीय निर्यातकों का कहना है कि जापान की यह कार्रवाई एक चेतावनी की तरह है, जिससे निपटने के लिए अब कीट नियंत्रण और पैकेजिंग के वैश्विक मानकों पर और अधिक गंभीरता से ध्यान देना होगा।

डोनाल्ड ट्रंप का पलटवार! अपाचे हादसे के बाद अमेरिका ने ईरान पर किए हमले, होर्मुज में क्या-क्या हुआ?

वाशिंगटन ईरान जंग में जिसका डर था, वो हो गया. ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध की आग एक बार फिर भड़क गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ने होर्मुज को बदलापुर बना दिया है. जिस बात के लिए डोनाल्ड ट्रंप इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को बार-बार रोक रहे थे. अपाचे हेलीकॉप्टर के गिरने के बाद खुद वो गलती कर बैठे. जी हां, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर ताबड़तोड़ अटैक कर दिया है. अमेरिका का ईरान पर यह अटैक सीजफायर के बीच हुआ है. होर्मुज के पास गिराए गए अपाचे हेलीकॉप्टर का ट्रंप ने ईरान पर अटैक करके जवाब दिया है. हालांकि, तेहरान ने भी बदला लेने की कसम खाई है. इसका मतलब है कि युद्ध की आग अब और भड़कने वाली है।  दरअसल, मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ जवाबी सैन्य कार्रवाई का आदेश दे दिया है. यह कदम उस घटना के बाद उठाया गया, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास एक अमेरिकी AH-64 अपाचे हेलिकॉप्टर गिर गया था. अमेरिका का दावा है कि इसके पीछे ईरान का हाथ था, जबकि तेहरान इस आरोप से इनकार कर रहा है. इस बीच अमेरिकी सेना ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए हैं. अमेरिका ने मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट के पास एक अमेरिकन अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर गिराए जाने के कुछ घंटों बाद ईरान पर हमला किया।  अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस हमले को सेल्फ डिफेंस स्ट्राइक बताया है. उसने कहा कि ईरान पर यह ताजा हमला ट्रंप के ऑर्डर पर वाशिंगटन टाइम के हिसाब से शाम 5 बजे शुरू हुआ और इसका मकसद ईरानी हमले का प्रोपोर्शनल जवाब देना था. यह कदम तब उठाया गया जब ट्रंप ने ईरान पर अपाचे को मार गिराने का आरोप लगाया और कसम खाई कि ज़रूरत पड़ने पर अमेरिका इस हमले का जवाब देगा।   ट्रंप का बड़ा एक्शन, ईरान पर अमेरिकी हमले शुरू; मिडिल ईस्ट में बढ़ा युद्ध का खतरा बहरहाल, इस घटनाक्रम ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. तेल बाजार से लेकर वैश्विक सुरक्षा तक… हर क्षेत्र पर इसके असर की आशंका जताई जा रही है. आइए जानते हैं इस पूरे मामले के कुछ बड़े अपडेट्स. ट्रंप ने दिया सैन्य कार्रवाई का आदेश: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों और सैन्य उपकरणों पर हमला किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इसी के बाद ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई को मंजूरी दी गई. अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर गश्त कर रहे अमेरिकी सेना के एक अपाचे हेलिकॉप्टर को मार गिराए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई।  अपाचे हेलिकॉप्टर घटना बनी बड़ी वजह: दरअसल, अमेरिका का ईरान पर यह अटैक अपाचे के गिराए जाने का बदला है. ईरान पर आरोप है कि उसने अमेरिकी AH-64 अपाचे हेलिकॉप्टर मार गिराया है. इससे ट्रंप भड़क उठे. उन्होंने अपाचे का बदला लेने के लिए ही ईरान पर अटैक करवाया. अमेरिका का दावा है कि इसके पीछे ईरान या उससे जुड़े समूहों की भूमिका थी. कुल मिलाकर अपाचे वाली घटना ही नई जंग की वजह बनी।  ईरान के कई ठिकाने निशाने पर: अमेरिकी सेना ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, रडार केंद्रों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया. शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार कई रणनीतिक ठिकानों पर मिसाइल और हवाई हमले किए गए. अमेरिका ने अब्बास समेत 3 ईरानी ठिकानों पर एक साथ हमला किया. इसके बाद तो ईरान में हर तरफ धमाकों की गूंज सुनाई देने लगी।  तेहरान में बढ़ी हलचल: अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की राजधानी तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. सैन्य ठिकानों पर अलर्ट जारी कर दिया गया है. लोगों में खौफ का मंजर है. गौरतलब है कि अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान पर इजरायल के साथ मिलकर अटैक किया था।  ईरान ने दी कड़ी चेतावनी: अमेरिकी हमलों पर ईरान ने भी पलटवार की कसम खाई है. ईरान ने साफ कहा है कि वह किसी भी हमले का जवाब देगा. तेहरान का कहना है कि अगर अमेरिका ने कार्रवाई जारी रखी तो पूरे क्षेत्र में हालात और बिगड़ सकते हैं. इस बीच तेहरान ने भी पलटवार किया है. उसने भी कुछ मिसाइलें दागी हैं।  होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा खतरा: मिडिल ईस्ट का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर जंग का अखाड़ा बन गया है. अपाचे हेलिकॉप्टर क्रैश के बाद अमेरिका ने ईरान पर दोबारा हमला बोल दिया है. इससे दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तनाव बढ़ गया है. यहां किसी भी सैन्य टकराव का असर वैश्विक तेल सप्लाई पर पड़ सकता है।  बेंजामिन नेतन्याहू को रोक खुद गलती कर रहे ट्रंप: डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले ही इजरायल को ईरान के खिलाफ नई जंग नहीं छेड़ने के लिए चेताया था. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगर इजरायल ईरान पर अटैक करता है तो वह उसे अकेले जंग लड़नी पड़ेगी. मगर अपाचे के गिरने के बाद ट्रंप खुद आपा खो बैठे और ईरान पर अटैक कर दिया।  होर्मुज में फिर मचेगा हाहाकार: ईरान जंग पर अमेरिका अब तक शांत था. वह किसी तरह सीजफायर को मान रहा था और ईरान से डील चाहता था. मगर अपाचे के गिरने से ट्रंप का सब्र जवाब दे गया. भड़के डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अटैक करके नई जंग छेड़ दी है. इसका मतलब है कि होर्मुज में अब और हड़कंप मचेगा. इससे तेल और गैस की चिंता और बढ़ जाएगी। 

मौसम का कहर! तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश का अलर्ट, IMD ने लोगों को किया सतर्क

नई दिल्ली  देश के कई राज्यों में मौसम तेजी से बदल रहा है। मॉनसून अपने पुराने अंदाज में आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने देश के कई राज्यों में मूसलाधार बारिश और तूफान का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मॉनसून की उत्तरी सीमा इस समय हरनाई, सोलापुर, कलबुर्गी, नंद्याल, चेन्नई और सिलिगुड़ी से होकर गुजर रही है। अगले 4 से 5 दिनों के दौरान मॉनसून के महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश के बचे हुए हिस्सों, पूरे तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल के कुछ और इलाकों के साथ-साथ छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और ओडिशा में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं। इसके प्रभाव से जहां दक्षिण और पूर्व भारत में भारी बारिश का दौर शुरू हो गया है, वहीं उत्तर भारत को भीषण गर्मी से राहत मिलने वाली है। उत्तर भारत के मैदानी और पहाड़ी राज्यों में 11 और 12 जून को मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। दिल्ली-NCR, पंजाब और हरियाणा में 11 और 12 जून को 50 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली विनाशकारी आंधी के साथ बारिश की संभावना है। 13 से 16 जून के बीच भी धूल भरी आंधी और हल्की बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। वहीं, लखनऊ सहित पूरे उत्तर प्रदेश में 10 से 16 जून के बीच बारिश के आसार हैं। विशेष रूप से 12 जून को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ओले गिरने और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 70 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी चलने का अलर्ट है। जयपुर सहित पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान में 11 से 13 जून के बीच भीषण आंधी और धूल का गुबार छाए रहने की आशंका है। 14 से 16 जून के बीच तेज हवाओं के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में 11 और 12 जून को व्यापक स्तर पर बारिश होगी। साथ ही जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में इन दो दिनों में भारी ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की गई है। मुंबई में भारी बारिश, एमपी में ओले मुंबई सहित कोंकण और गोवा के इलाकों में मॉनसून सक्रिय हो चुका है। यहां 10 और 11 जून को भारी बारिश के साथ 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में भी 12 जून तक आंधी-बारिश का दौर रहेगा। भोपाल और इंदौर सहित मध्य प्रदेश में 12 जून को ओलावृष्टि और 50-70 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की संभावना है। वहीं छत्तीसगढ़ और विदर्भ में 11 और 12 जून को तेज आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया गया है। कर्नाटक में अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट 10 जून को तटीय कर्नाटक में अत्यंत भारी बारिश होने की आशंका है। बेंगलुरु सहित आंतरिक कर्नाटक में 10 से 12 जून के बीच भारी बारिश और तेज हवाएं चलने का अनुमान है। केरल, माहे और तमिलनाडु के कई हिस्सों में 10 से 12 जून के बीच भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। हैदराबाद सहित तेलंगाना और तटीय आंध्र प्रदेश में 10 से 13 जून के बीच गरज-चमक के साथ 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ चलने की संभावना है। तेलंगाना में आज भारी बारिश भी हो सकती है। असम-मेघालय में बाढ़ जैसी स्थिति का खतरा पूर्वोत्तर राज्यों में अगले 7 दिनों (10-16 जून) तक मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में 10 से 14 जून के बीच अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। कोलकाता सहित गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल में 10 और 11 जून को तथा बिहार-झारखंड में 11 और 12 जून को 50-70 किमी/घंटे की रफ्तार से भीषण आंधी और बारिश होगी। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में आज बहुत भारी बारिश का अलर्ट है, जबकि बिहार में 12 जून तक भारी बारिश हो सकती है।

10 रुपये की ओवरचार्जिंग पड़ी भारी, उपभोक्ता शिकायत के बाद सरकार को देना पड़ा 25 हजार का मुआवजा

कोच्चि  अक्सर कई जगहों पर प्रिंट रेट (MRP) से ज्यादा पैसे वसूल लिए जाते हैं और लोग इसे मामूली बात मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन केरल में एक ग्राहक से बीयर की बोतल पर 10 रुपये ज्यादा वसूलना सरकारी शराब निगम को भारी पड़ गया। कंज्यूमर कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए केरल स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन (KSBC) को ग्राहक को 25,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। क्या है पूरा मामला? केरल के पथानामथिट्टा में एक शख्स ने KSBC के आउटलेट से 650 ml की एक बीयर की बोतल खरीदी। इस बीयर की बोतल पर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) 170 रुपये छपा था, लेकिन आउटलेट के कर्मचारियों ने इसके लिए 180 रुपये (यानी 10 रुपये अतिरिक्त) का बिल थमाया। जब ग्राहक ने रेट में इस अंतर का विरोध किया, तो कर्मचारियों ने बदसलूकी की। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिल में जो राशि लिखी है, वही देनी होगी और अगर कोई आपत्ति है तो जाकर शिकायत दर्ज करा दें। इसके बाद परेशान ग्राहक ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कंज्यूमर कोर्ट (उपभोक्ता आयोग) का दरवाजा खटखटाया और मुआवजे की मांग की। शराब निगम ने दी ये दलील कंज्यूमर कोर्ट में KSBC ने 180 रुपये वसूलने की बात तो स्वीकार की, लेकिन इसके बचाव में कई तर्क पेश किए। निगम का कहना था कि केरल सरकार ने 'सोशल सिक्योरिटी सेस' (सामाजिक सुरक्षा उपकर) लागू किया था और शराब की कीमतों में संशोधन हुआ था, जिस वजह से 10 रुपये ज्यादा लिए गए। निगम ने दलील दी कि गोदामों और सप्लाई चेन में पहले से रखी करोड़ों शराब की बोतलों पर नई कीमत का लेबल (Re-labeling) लगाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था। निगम ने लीगल मेट्रोलॉजी नियमों का हवाला देते हुए कहा कि पुराने स्टॉक को नई कीमत पर बेचने की सरकारी अनुमति थी और आउटलेट पर नई कीमतों का नोटिस भी लगाया गया था। साथ ही, ग्राहक पर ही काम में बाधा डालने और कर्मचारियों से दुर्व्यवहार करने का आरोप भी मढ़ दिया। कंज्यूमर कोर्ट की अहम टिप्पणी पथानामथिट्टा उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष जॉर्ज बेबी और सदस्य निषाद थंकप्पन की बेंच ने 3 जून को सुनाए गए अपने आदेश में निगम की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि नियम 18(2) स्पष्ट रूप से रिटेलर्स को पैकेट पर छपे रिटेल प्राइस से अधिक कीमत पर सामान बेचने से रोकता है। 170 रुपये की MRP वाली बोतल 180 में बेचना सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है। किसी भी ग्राहक से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि उसे सरकार के अंदरूनी आदेशों या फाइलों की जानकारी हो। एक उपभोक्ता के तौर पर ग्राहक केवल पैकेट पर दी गई जानकारी पर भरोसा करता है। बोतल पर छपा MRP ही ग्राहक और विक्रेता के बीच कॉन्ट्रैक्ट प्राइस है। कोर्ट ने कहा कि MRP से ज्यादा पैसा वसूलना 'कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019' के तहत 'सर्विस में कमी' और 'अनुचित व्यापार व्यवहार' है। क्या सुनाया गया फैसला? अदालत ने माना कि इस अवैध वसूली की वजह से ग्राहक को भारी मानसिक परेशानी और असुविधा का सामना करना पड़ा। इस तरह के ट्रेंड को रोकने के लिए आयोग ने सख्त फैसला सुनाते हुए KSBC को आदेश दिया कि ग्राहक से वसूले गए 10 रुपये अतिरिक्त राशि को शिकायत दर्ज करने की तारीख से 9% सालाना ब्याज के साथ वापस किया जाए। मानसिक परेशानी और असुविधा के लिए 15,000 रुपये का मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा कानूनी खर्च के तौर पर 10,000 रुपये भी चुकाने होंगे। कुल मिलाकर कॉरपोरेशन को 30 दिन के भीतर ग्राहक को 25,000 रुपये का भुगतान करना होगा।

राफेल के बाद सेना को मिला बड़ा हथियार, 23,000 करोड़ के रक्षा सौदे से दुश्मनों की बढ़ी चिंता

नई दिल्ली भारतीय सेना की मारक क्षमता बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है. हाल ही में भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों की बड़ी डील को मंजूरी मिलने के बाद अब थल सेना के लिए भी खजाना खुलता दिख रहा है. सेना 23,000 करोड़ रुपये की लागत से 300 अतिरिक्त K9 वज्र-टी स्वचालित तोपें खरीदने की तैयारी में है. अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो चीन और पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर भारतीय सेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।  पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी सैन्य ताकत को तेजी से आधुनिक बनाया है. वायुसेना को पहले 36 राफेल लड़ाकू विमान मिले. इसके बाद भारतीय नौसेना के लिए भी राफेल मरीन विमानों की खरीद को मंजूरी दी गई. अब एयरफोर्स के लिए और 114 राफेल खरीदे जा रहे हैं. अब सरकार का फोकस थल सेना की मारक क्षमता बढ़ाने पर है. इसी रणनीति के तहत K9 वज्र तोपों की बड़ी खरीद की तैयारी चल रही है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत की टू-फ्रंट वार यानी चीन और पाकिस्तान दोनों से एक साथ निपटने की रणनीति का हिस्सा है।  रक्षा सूत्रों के अनुसार भारतीय सेना ने 300 अतिरिक्त K9 वज्र-टी हॉवित्जर खरीदने का प्रस्ताव तैयार किया है. इस सौदे की अनुमानित लागत करीब 23,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है. प्रस्ताव जल्द ही रक्षा खरीद बोर्ड (DPB) के सामने रखा जा सकता है. मंजूरी मिलने पर यह भारतीय सेना के इतिहास की सबसे बड़ी तोपखाना खरीद परियोजनाओं में शामिल होगी।  K9 वज्र ने पिछले कुछ वर्षों में सेना का भरोसा जीता है. मूल रूप से इसे रेगिस्तान और मैदानी इलाकों में युद्ध के लिए विकसित किया गया था. लेकिन पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तनाव के दौरान इसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी तैनात किया गया.कठिन मौसम और पहाड़ी इलाकों में भी इसके प्रदर्शन ने सेना को प्रभावित किया. यही कारण है कि सेना अब इसकी संख्या तेजी से बढ़ाना चाहती है।  K9 वज्र-टी एक 155 मिमी और 52 कैलिबर की आधुनिक स्वचालित तोप है. यह ट्रैक वाले प्लेटफॉर्म पर चलती है. इसलिए टैंकों और बख्तरबंद वाहनों के साथ तेजी से आगे बढ़ सकती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है शूट एंड स्कूट क्षमता. यानी दुश्मन पर गोले बरसाने के तुरंत बाद यह अपनी जगह बदल सकती है. इससे दुश्मन के जवाबी हमले से बचना आसान हो जाता है. आधुनिक युद्ध में यह क्षमता बेहद अहम मानी जाती है।  भारतीय सेना के पास फिलहाल 100 K9 वज्र तोपें हैं. इसके अलावा 2024 में 100 और तोपों की खरीद को मंजूरी दी गई थी. इस सौदे की कीमत 7,629 करोड़ रुपये थी. अगर नया प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो सेना के पास K9 वज्र का विशाल बेड़ा तैयार हो जाएगा. इससे भारतीय तोपखाने की ताकत में ऐतिहासिक बढ़ोतरी होगी।  K9 वज्र का निर्माण भारत में किया जाता है. इसे लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और दक्षिण कोरिया की हनव्हा एयरोस्पेस की साझेदारी में तैयार किया जाता है. इसमें स्वदेशी सामग्री का हिस्सा लगातार बढ़ाया गया है. इसलिए यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। 

PM मोदी के ऐतिहासिक रिकॉर्ड पर शक्ति प्रदर्शन, 35 पार्टियों के 75 नेता जुटेंगे, भविष्य की रणनीति पर होगा मंथन

 नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगुवाई वाली केंद्र सरकार के 12 साल पूरे हो गए हैं.देश के पहले प्रधानमंत्री रहे पंडित जवाहर लाल नेहरू का रिकॉर्ड पीएम मोदी ने मोदी तोड़ दिया है. यह रिकॉर्ड आजादी के बाद निर्वाचित सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहने का है. पंडित नेहरू चुनाव जीतकर 4398 दिन प्रधानमंत्री रहे थे जबकि नरेंद्र मोदी का बतौर पीएम का 4399वां दिन है।  पीएम मोदी भारत के प्रधानमंत्री के रूप में 12 साल का ऐतिहासिक कार्यकाल पूरा करने पर पूरे देश में जश्न का माहौल है. मोदी सरकार के अब तक के कार्यकाल की उपलब्धियों को बीजेपी लोगों के सामने रख रही है और उपलब्धियों का जश्न भी मना रही है. इस मौके पर दिल्ली में बीजेपी और एनडीए के सभी सहयोगी दल के नेता दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाली बैठक में शिरकत करेंगे।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिकॉर्ड बनाने उपलक्ष्य में भारत मंडपम में हो रही बैठक में एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सहित प्रमुख नेता शामिल होंगे. एनडीए की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धियों की सराहना करते हुए एक प्रस्ताव पास किया जाएगा।  35 दल के 75 नेता करेंगे शिरकत पीएम मोदी ने 1952 के आमचुनावों के बाद चुने हुए प्रधानमंत्री के तौर पर जवाहर लाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4,399 दिनों का कार्यकाल पूरा लिया है जबकि जवाहर लाल नेहरू  4,398 दिन तक पीएम रहे थे. इस तरह से नरेंद्र मोदी भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं।  मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर दिल्ली के भारत मंडपम में एक जश्न रखा गया है,  जिसमें बीजेपी और उसके सहयोगी दल के नेता हिस्सा लेंगे. बैठक में एनडीए के 22 शासित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और उप-मुख्यमंत्रियों के अलावा गठबंधन के सभी सहयोगी दलों के नेता शिरकत करेंगे।  बैठक में एनडीए के 35 सहयोगी दलों के करीब 75 वरिष्ठ नेता शामिल होंगे, जिनमें मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, पार्टी अध्यक्ष और गठबंधन के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल होंगे. बैठक की अध्यक्षता बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन करेंगे. इसके अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह,जेपी नड्डा और शिवराज सिंह चौहान जैसे केंद्रीय मंत्रियों के कार्यक्रम में शामिल होंगे।  वहीं, एनडीएमें शामिल पार्टियों के केंद्रीय मंत्रियों में टीडीपी से के राम मोहन नायडू, जेडीयू से केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह,जेडीएस से एचडी कुमारस्वामी और अपना दल-सोनेलाल से अनुप्रिया पटेल इस बैठक में शामिल होंगी. इसके अलावा राज्यों के सहयोगी दल के नेता भी शिरकत करेंगे।  एनडीए की बैठक का एजेंडा क्या होगा एनडीए बैठक में आगामी राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक मुद्दों सहित मोदी सरकार के 12 पूरे होने पर चर्चा होने की संभावना है. एनडीए के नेता और केंद्र और राज्य सरकारों के नेता 'विकसित भारत' के  सपने को साकार करने के लिए और सुधार लाने के तरीकों पर अपने विचार रखेंगे।  मोदी की अगुवाई में होने वाली बैठक में 'ईज ऑफ लिविंग' और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने पर एनडीए नेता अपनी बात रख सकते हैं. बैठक में राष्ट्रीय विकास कार्यक्रमों, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने के मोदी सरकार के विजन की समीक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा. बैठक में इस बात पर भी चर्चा होने डंबल इंजन की सरकार चल रही, उन राज्यों में विकास योजनाओं को लेकर राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर तालमेल कैसे बनाया जाए।  पिछले दिनों केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि केंद्रीय मंत्रियों को लोगों के लिए 'ईज ऑफ लिविंग' की दिशा में काम करना चाहिए. पीएम मोदी ने कहा था कि भले ही सरकार 2014 से सत्ता में है, लेकिन 2026 में भविष्य के लक्ष्यों और उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए. माना जा रहा है कि इस पर विस्तार के चर्चा हो सकती है।  बैठक में मोदी के लिए आएगा प्रस्ताव एनडीए की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धियों की सराहना करते हुए एक प्रस्ताव पास किया जाएगा. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू एक विशेष प्रस्ताव पेश करेंगे, जिसका समर्थन नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो करेंगे।  एनडीए के तरफ से लाए जाने वाले विशेष प्रस्ताव में 12 साल तक निर्वाचित रूप से प्रधानमंत्री पद पर बने रहने के लिए नरेंद्र मोदी को बधाई दी जाएगी और उनके नेतृत्व के लिए एनडीएका आभार जताया जाएगा  प्रस्ताव को औपचारिक रूप से स्वीकार किए जाने से पहले गठबंधन के नेता चर्चा में हिस्सा लें. प्रस्ताव पास होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक को संबोधित कर सकते हैं।  एनडीए की बैठक को मोदी करेंगे संबोधित  दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाली एनडीए बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे. बैठक में मोदी सरकार के 12 साल की उपलब्धि पर चर्चा किए जाने के साथ ये बैठक करीब 3 घंटे तकतक चलेगी. मोदी सरकार के कामकाज पर प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद पीएम मोदी एनडीए नेताओं को संबोधित करेंगे। 

रूस से कारोबार पड़ा भारी! EU की नई पाबंदियों के निशाने पर भारत-चीन की 50 कंपनियां

लंदन  यूरोपीय यूनियन ने भारत, चीन समेत दुनिया के कई देशों में स्थित 50 कंपनियों को झटका दिया है. ईयू ने यूक्रेन पर हमले के चलते रूस पर 21वें प्रतिबंध पैकेज की घोषणा की है. इन प्रतिबंधों ने अचानक इन आधा सैकड़ा कंपनियों के सामने संकट खड़ा कर दिया है. EU की ओर से ऐलान किया गया है कि वह भारत और अन्य देशों की उन 50 कंपनियों पर एक्सपोर्ट कंट्रोल के उपाय लागू करेगा, जो रूस की सेना के साथ सीधे कारोबार करती हैं।  भारत, चीन, तुर्की समेत यहां असर  यूरोपीय यूनियन के इस ऐलान का असर भारत और चीन के साथ ही किर्गिस्तान, कजाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात में स्थित कंपनियों पर पड़ेगा और इन पर निर्यात प्रतिबंध लगाए जाएंगे. ईयू ने ये फैसला रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से लिया है, लेकिन इससे सिर्फ रूस ही नहीं, तमाम देश प्रभावित होंगे. नई लिस्ट में ड्रोन निर्माण से जुड़ी कंपनियां भी शामिल हैं, जिनपर निर्यात प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।  तैयार हो रही सबसे बड़ी लिस्ट प्रस्तावित 21वें प्रतिबंध पैकेज की घोषणा करते हुए यूरोपीय संघ की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि काजा कल्लास ने कहा कि ये उपाय यूक्रेन में मॉस्को के सैन्य अभियान को वित्तपोषित करने और बनाए रखने की क्षमता पर लगाम लगाने के लिए किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा, 'हम धीरे-धीरे रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था की नींव को ध्वस्त करते जा रहे हैं, अब ब्रुसेल्स दो साल से अधिक समय में रूस पर प्रतिबंधों की सबसे बड़ी लिस्ट तैयार कर रहा है।  90 बैंकों की संपत्ति जब्त होगी! ईयू के प्रस्तावित पैकेज में उन बैंकों, हथियार निर्माताओं, तेल व्यापारियों, रिफाइनरियों और क्रिप्टो ऑपरेटरों को टारगेट किया गया है. जो तीसरे देशों में स्थित हैं और उन पर रूस को मौजूदा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने का आरोप है. कल्लास के मुताबिक, करीब 90 बैंकों की संपत्ति जब्त की जा सकती है, जबकि रूस और अन्य देशों के 30 से अधिक बैंकों के साथ लेनदेन पर और प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. इसके अलावा 11 क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म पर भी ट्रांजैक्शन बैन लगाने की तैयारी है. इस बीच उन्होंने ये भी कहा कि यूरोपीय संघ रूसी एनर्जी एक्सपोर्ट से होने वाले राजस्व को कम करने के लिए रूसी तेल की कीमत सीमा पर अस्थायी रोक लगाने की कोशिश भी कर रहा है।  निशाने पर रूस को समर्थन देने वाली कंपनियां काजा कल्लास ने एक सोशल मीडिया पोस्ट पर भी इन प्रतिबंधों से जुड़ी जानकारी शेयर की. इसमें उन्होंने कहा कि, 'हम रूस के सैन्य-औद्योगिक तंत्र (Military-Industrial Complex) को समर्थन देने वाली तमाम कंपनियों को भी निशाना बना रहे हैं. नई सूची में ड्रोन निर्माण क्षेत्र से जुड़ी 30 से अधिक संस्थाओं को शामिल किया जाएगा. इसके साथ ही 50 कंपनियों पर नए एक्सपोर्ट कंट्रोल उपाय लागू किए जाएंगे।  उन्होंने कहा कि हम रूस की उत्पादन क्षमता को और बाधित करने के लिए अतिरिक्त निर्यात प्रतिबंध भी लगाएंगे. इनमें निकेल पाउडर, धातुएं और हाई परफॉर्मेंस मिश्रधातुएं शामिल हैं. इसके अलावा, कुछ नई वस्तुओं के आयात पर भी प्रतिबंध लगाया जाएगा, जिनमें ऑटो पार्ट्स, कई कीमती धातुओं के अयस्क (Precious Metals Ores) और रसायन शामिल होंगे।   

एक टिकट और बदल गई जिंदगी! UAE लॉटरी में करोड़ों जीतकर चर्चा में आया सिक्योरिटी गार्ड

दुबई  अबू धाबी के रुवैस इंडस्ट्रियल एरिया में ईद-उल-अजहा की छुट्टी वाली रात 26 साल का नेपाली युवक तैयब खान अपनी नाइट शिफ्ट में तैनात थे. गेट पर आने-जाने वालों की जांच करना और सुरक्षा व्यवस्था संभालना उनकी रोजमर्रा की जिम्मेदारी थी. चार साल पहले बेहतर भविष्य की तलाश में नेपाल से UAE पहुंचे तैयब को अंदाजा भी नहीं था कि एक ईमेल उनकी जिंदगी बदल देगा।  ड्यूटी के दौरान उनके फोन पर एक ईमेल आया. पहले तो उन्हें लगा कि शायद कोई छोटा-मोटा इनाम मिला होगा, लेकिन जैसे ही उन्होंने मेल खोला, उनके होश उड़ गए. गल्फ न्यूज के मुताबिक, UAE Lottery के Lucky Day ड्रा में उनके ग्रुप ने Dh30 मिलियन (करीब 70 करोड़ रुपये से अधिक) का ग्रैंड जैकपॉट जीत लिया था।  दोस्तों के साथ खरीदा था टिकट तैयब यह रकम अकेले नहीं जीते. उन्होंने अपने चार नेपाली दोस्तों के साथ मिलकर 2024 से नियमित रूप से लॉटरी टिकट खरीदना शुरू किया था. पांचों दोस्तों ने अपने ग्रुप का नाम 'Future Millionaires' रखा था. हर हफ्ते सभी Dh50-50 (करीब 1,100 रुपये) जमा करते और एक टिकट खरीदते थे।  उनकी यह छोटी-सी कोशिश आखिरकार रंग लाई और पांचों दोस्त रातोंरात करोड़पति बन गए. Dh30 मिलियन की रकम पांचों में बराबर बंटी, जिससे तैयब के हिस्से में करीब Dh6 मिलियन (करीब 14-15 करोड़ रुपये) आए।  अब क्या करेंगे तैयब? लॉटरी जीतने के बाद तैयब ने कहा कि वह सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी छोड़ने की योजना बना रहे हैं. उनका पहला लक्ष्य नेपाल में अपने परिवार के लिए एक बड़ा घर बनवाना है. इसके अलावा वह लंबे समय से खरीदना चाह रहे महिंद्रा थार और एक रोलेक्स घड़ी भी लेना चाहते हैं.तैयब ने यह भी बताया कि वह दुबई में रियल एस्टेट में निवेश करने और अपना खुद का बिजनेस शुरू करने की योजना बना रहे हैं।  आखिर क्या है UAE Lottery? तैयब जिस लॉटरी के जरिए करोड़पति बने, वह UAE की आधिकारिक और लाइसेंस प्राप्त राष्ट्रीय लॉटरी है. इसके सबसे लोकप्रिय गेम Lucky Day में एक एंट्री की कीमत Dh50 होती है. खिलाड़ी कुछ नंबर चुनते हैं और तय तारीख पर ड्रा निकाला जाता है. सभी नंबर मैच होने पर करोड़ों रुपये का जैकपॉट मिलता है।  वर्तमान में Lucky Day का ग्रैंड प्राइज Dh30 मिलियन है. यानी 70 करोड़ रुपये. इसके अलावा छोटे और मध्यम स्तर के कई इनाम भी दिए जाते हैं. UAE में यह लॉटरी सरकारी नियमन के तहत संचालित होती है और हजारों प्रवासी कर्मचारी इसमें भाग लेते हैं।  मेहनत, दोस्ती और किस्मत की कहानी तैयब खान की कहानी सिर्फ एक लॉटरी जीतने की नहीं है. यह उन लाखों प्रवासी कामगारों की कहानी भी है, जो अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए घर से हजारों किलोमीटर दूर काम करते हैं. चार साल की मेहनत, दोस्तों का साथ और एक छोटे से सपने ने उनकी जिंदगी बदल दी।  तैयब की जीत यह भी दिखाती है कि कभी-कभी साधारण जिंदगी जीने वाले लोगों की किस्मत भी अचानक ऐसा मोड़ ले सकती है, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की होती। 

PAK सेना का सीमा पार हमला, अफगानिस्तान में 11 मासूम बच्चों सहित 13 की जान गई

काबुल  अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव एक बार फिर गहरा गया है. बीती रात पाकिस्तानी सेना के लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान की हवाई सीमा का उल्लंघन किया. पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में स्थित आम नागरिकों के घरों को निशाना बनाकर भारी बमबारी की है।  इस हवाई हमले में महिलाओं और बच्चों समेत कई नागरिक हताहत हुए हैं. अफगान प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, पाकिस्तानी हमलावर सेना ने कल रात एक बार फिर अफगानिस्तान की संप्रभुता का खुलेआम उल्लंघन किया।  जबीउल्लाह ने आगे बताया कि पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान के तीन प्रमुख प्रांतों- कुनार, खोस्त और पक्तिका में रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया. इन इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों के घरों पर अंधाधुंध बमबारी की गई, जिससे कई घर पूरी तरह तबाह हो गए।  हमले में बच्चों-महिलाओं समेत 13 की मौत इस हमले में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है. बमबारी में कुल 13 लोग मारे गए हैं, जिन्हें अफगान प्रशासन ने शहीद घोषित किया है. मरने वालों में सबसे ज्यादा संख्या मासूम बच्चों की है. इस हमले में 11 बच्चे, एक महिला और एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत हो गई. इसके अलावा हमले में 14 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।  घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कइयों की हालत नाजुक बनी हुई है. सोशल मीडिया पर इस हमले के बाद की कुछ दर्दनाक तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें पीड़ित बच्चों की स्थिति देखी जा सकती है।  अफगानिस्तान ने जताई कड़ी आपत्ति इस हमले के बाद अफगान सरकार का गुस्सा फूट पड़ा है। प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने अपने बयान में इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है. उन्होंने कहा, 'हम इस अमानवीय अपराध और हमले की कड़े से कड़े शब्दों में पुरजोर निंदा करते हैं.' अफगानिस्तान ने इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन और आम नागरिकों के खिलाफ एक क्रूर अपराध बताया है।  अफगानिस्तान के पूर्व प्रेसिडेंट हामिद करजई ने इस हमले की निंदा की है. उन्होंने शहीदों के परिवारों के साथ गहरा दुख और एकजुटता दिखाते हुए, एक बार फिर कहा कि पाकिस्तान इस इलाके में अपनी गलत नीतियों और दुश्मनी भरी कार्रवाइयों के नतीजों से जूझ रहा है. उसे ये समझना चाहिए कि वो उन नीतियों पर कायम रहकर और उन्हें आगे बढ़ाकर अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर पाएगा।  करजई के मुताबिक पाकिस्तान की भलाई अफगानिस्तान के प्रति युद्ध और तबाही की अपनी नीति को छोड़ने और इसके बजाय अच्छे पड़ोसी और सभ्य रिश्ते चुनने में है।