samacharsecretary.com

पटाखा प्लांट विस्फोट चीन: 37 की मौत, पांच गंभीर रूप से घायल, राहत कार्य जारी

चांग्शा   चीन के हुनान प्रांत में एक पटाखा प्लांट में हुए भीषण धमाके में हुई मौत का आंकड़ा बढ़ गया है। धमाके में मरने वालों की संख्या अब 37 हो गई है। स्थानीय अधिकारी की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, धमाके के बाद एक व्यक्ति लापता है और 51 लोग घायल हुए हैं। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, 51 घायलों में से पांच की हालत गंभीर बनी हुई है। स्थानीय समयानुसार, यह घटना सोमवार को दिन के चार बजकर 43 मिनट पर ये धमाका हुआ, जिसे 2019 से अब तक का सबसे बड़ा ब्लास्ट माना जा रहा है। हुनान का लियुयांग चीन की पटाखों की राजधानी के तौर पर जाना जाता है। यह डिवाइस की घरेलू सप्लाई का 60 फीसदी और एक्सपोर्ट का लगभग 70 फीसदी बनाता है। 2019 में पूर्वी चीन के जिआंगसु प्रांत में एक केमिकल प्लांट में बड़ा धमाका हुआ था, जिसमें लगभग 78 लोग मारे गए थे। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, हुनान प्रांत के लिउयांग में हुए धमाके के बाद के हालात की निगरानी के लिए वाइस-प्रीमियर झांग गुओकिंग को भेजा है। झांग ने कहा कि स्टेट काउंसिल, यानी चीन की कैबिनेट, हादसे के कारणों की जांच करने और क्रिमिनल सजा दिलाने में मदद के लिए एक जांच टीम बनाएगी। झांग ने सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले पटाखे बनाने वालों को सजा देने का वादा किया है। इसके साथ ही उन रेगुलेटर्स को भी सजा देने का वादा किया है जो कंपनियों की निगरानी करने के बजाय उन पर जुर्माना लगाते हैं। सबसे ज्यादा उम्र के पीड़ित की उम्र 68 साल थी, जबकि सबसे कम उम्र के पीड़ित की उम्र बीस साल के आस-पास थी। ज्यादातर घायलों को इमरजेंसी इलाज के लिए लियूयांग पीपल्स हॉस्पिटल और लियूयांग ट्रेडिशनल चाइनीज मेडिसिन हॉस्पिटल ले जाया गया। इससे पहले चांग्शा शहर के स्वास्थ्य आयोग के कम्युनिस्ट पार्टी सेक्रेटरी लियू जियायोंग ने कहा कि घायलों में से छह इंटेंसिव केयर में हैं। चेन ने कहा कि मौके पर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन काफी हद तक पूरे हो चुके हैं। ऑपरेशन में फायर, इमरजेंसी रिस्पॉन्स, पब्लिक सिक्योरिटी और स्वास्थ्य विभाग के 1,500 से ज्यादा लोग शामिल थे।

बहुमत का आंकड़ा जुटाने के बाद विजय ने राज्यपाल से की मुलाकात, सरकार गठन की तैयारी तेज

तमिलनाडु  TVK प्रमुख विजय ने गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात की और तमिलनाडु में सरकार बनाने का दावा पेश किया है। तीन दिनों में विजय की राज्यपाल से यह तीसरी मुलाकात है। पहले दो बार में राज्यपाल ने विजय को जरूरी बहुमत का आंकड़ा लाने के लिए कहा था। पहले सिर्फ कांग्रेस ने विजय को समर्थन दिया था। अब सीपीआई, सीपीआईएम, वीसीके और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने विजय की टीवीके का समर्थन करने का फैसला किया है। इसके बाद, विजय के पास 120 की संख्या हो गई है। तमिलनाडु में डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल दोनों वामपंथी दलों- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआईएम) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने कहा कि यह (समर्थन देने का) निर्णय भाजपा को राज्य में पिछले दरवाजे से प्रवेश करने से रोकने के लिए लिया गया है। हालांकि, राज्य के अधिकारों के मामले में वे (वाम दल) डीएमके के साथ बने रहेंगे। वाम दलों ने घोषणा की कि वे टीवीके मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं बनेंगे। दोनों के दो-दो विधायक हैं। उन्होंने दिनभर की चर्चा के बाद अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी को अपना समर्थन देने की घोषणा की। उनके समर्थन के साथ, टीवीके प्रमुख ने बाद में तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात की और सरकार बनाने के अपने दावे को दोहराया। तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) की 108 सीटें हैं, लेकिन यह बहुमत के आंकड़े से 10 कम है। टीवीके ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) के सहयोगी वामदलों, और विदुथलाई चिरुथैगल काची (वीसीके) से संपर्क किया था तथा 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बाद सरकार बनाने के लिए उनका समर्थन मांगा था। सीपीआई, सीपीआईएम और वीसीके, प्रत्येक के दो-दो विधायक हैं। वाम दलों ने राज्यपाल को संबोधित पत्र में टीवीके को अपना समर्थन देने की जानकारी दी। पांच विधायकों वाली कांग्रेस ने पहले ही टीवीके को समर्थन दे दिया है। विधानसभा चुनावों में टीवीके 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार, पार्टी संस्थापक विजय को अपनी जीती हुई दो सीटों में से एक को छोड़ना होगा। विजय को चेन्नई के पेरम्बूर और तिरुचिरापल्ली पूर्व सीटों में से एक को छोड़ना पड़ेगा।

अमित शाह ने किया ऐलान, सुवेंदु अधिकारी होंगे पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री

कोलकाता  गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को बंगाल के सीएम के रहस्य से पर्दा हटा दिया. उन्होंने सुवेंदु अधिकारी के नाम का ऐलान करते हुए कहा कि बंगाल के अगले मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ही होंगे. साथ ही उन्होंने नाम से पहले चले मंथन के बारे में बात करते हुए कहा कि आज भाजपा की ओर से पश्चिम बंगाल विधानसभा सदस्यों की एक मीटिंग रखी गई. उन्होंने कहा कि मुझे और मोहन चरण माझी जी (ओडिशा के सीएम) को पर्यवेक्षक के तौर पर हमें यहां भेजा गया. सभी प्रस्ताव और समर्थन एक ही नाम के मिले हैं, कोई दूसरा नाम नहीं आया है. मैं सुवेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता के रुप में निर्वाचित करता हूं।  पश्चिम बंगाल दशकों तक वामपंथ और फिर तृणमूल कांग्रेस के ‘मां-माटी-मानुष’ के नारे के बीच अपनी जमीन तलाश रही भारतीय जनता पार्टी ने आखिरकार बंगाल के दुर्ग को फतह कर लिया है. प्रचंड बहुमत के साथ मिली इस ऐतिहासिक जीत के बाद अब सरकार गठन की तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है. बंगाल की कमान राज्य के कद्दावर नेता और ‘भूमिपुत्र’ सुवेंदु अधिकारी को मिलना तय माना जा रहा है. भाजपा आलाकमान की ओर से बस इसका औपचारिक ऐलान होना बाकी है. साथ ही खबर ये आ रही है कि भाजपा बंगाल में कोई भी उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) नहीं बनाएगी. पार्टी का यह फैसला साफ तौर पर सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व पर पूर्ण विश्वास और राज्य में सत्ता के एक सशक्त केंद्र को स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।  पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज इतिहास रच दिया गया है. कोलकाता में हुई बीजेपी विधायक दल की बैठक में शुभेंदु अधिकारी के नाम पर अंतिम मुहर लग गई है. खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुभेंदु के नाम का ऐलान किया. अमित शाह और ओडिशा के सीएम मोहन चरण माझी की मौजूदगी में विधायकों ने सर्वसम्मति से शुभेंदु को अपना नेता चुना. शुभेंदु अधिकारी कल यानी 9 मई को सुबह 11 बजे कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।  श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना हुआ पूरा- अमित शाह अमित शाह ने अपने संबोधन में पार्टी के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का विशेष जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आज बंगाल की धरती पर बीजेपी की सरकार बनना डॉ. मुखर्जी के संघर्षों और उनके बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि है. शाह के मुताबिक, जिस राष्ट्रवाद की नींव उन्होंने रखी थी, आज उसी पर चलकर बंगाल में पहली बार पूर्ण बहुमत की बीजेपी सरकार बनने जा रही है।  शाम 6:30 बजे राज्यपाल से मिलेंगे शुभेंदु अधिकारी, पेश करेंगे दावा कोलकाता में विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद अब सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है. शुभेंदु अधिकारी आज यानी शुक्रवार शाम 6:30 बजे राज्यपाल आर.एन. रवि से मुलाकात करेंगे. इस दौरान वे बीजेपी विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपेंगे और आधिकारिक तौर पर पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।    9 मई का दिन बंगाल के लिए बेहद खास है, क्योंकि इस दिन रवींद्र जयंती मनाई जाती है. इसी शुभ अवसर पर राज्य की पहली बीजेपी सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे. भवानीपुर में ममता बनर्जी को मात देने वाले शुभेंदु के साथ दो डिप्टी सीएम भी बनाए जाने की चर्चा है, जिससे राज्य में नए राजनीतिक समीकरण देखने को मिल सकते हैं।   बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने 7 मई को राज्य विधानसभा को भंग कर दिया है. कोलकाता गजट में जारी आधिकारिक अधिसूचना का हवाला देते हुए बताया गया है कि विधानसभा को भंग करने का यह कदम पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की शानदार जीत के बाद उठाया गया है।  चुनाव के बाद प्रदेश के कई हिस्‍सों से हिंसक टकराव की घटनाएं सामने आ रही हैं. मुख्‍यमंत्री पद के प्रबल दावेदारों में शामिल बीजेपी के दिग्‍गज नेता सुवेंदु अधिकारी के निकट सहयोगी और पीए चंद्रनाथ रथ की हत्‍या ने माहौल को और गरमा दिया है. इन सबके बीच बंगाल में नई सरकार के गठन की कवायद तेज हो गई है. पश्चिम बंगाल में भाजपा की संभावित पहली सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. पार्टी का नया मंत्रिमंडल अनुभवी नेताओं और राजनीति में नए चेहरों का मिश्रण हो सकता है. मुख्यमंत्री पद की दौड़ में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी सबसे प्रमुख दावेदारों में माने जा रहे हैं. भाजपा विधायक दल की बैठक शुक्रवार को कोलकाता में होगी, जिसमें विधायक दल का नेता चुने जाने की संभावना है. इस अहम बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और ओडिशा के मुख्‍यमंत्री मोहन चरण माझी करेंगे. चुनाव में जीत के बाद अमित शाह पहली बार बंगाल पहुंच रहे हैं।  अमित शाह शुक्रवार को कोलकाता पहुंचेंगे और बैठक से पहले राज्य भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ प्रारंभिक चर्चा करेंगे. शाम 4 बजे नवनिर्वाचित विधायकों के साथ औपचारिक बैठक होगी, जहां मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि शीर्ष नेतृत्व इस बार सरकार और संगठन दोनों में वैचारिक प्रतिबद्धता तथा संगठनात्मक अनुभव को प्राथमिकता देना चाहता है. भाजपा के संभावित मंत्रिमंडल में कई नए चेहरों को जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है. ‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें पहली बार विधायक बनीं रत्ना देबनाथ का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है, जो आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले की पीड़िता की मां हैं. इसके अलावा भारत सेवाश्रम संघ के संत रहे उत्पल महाराज, पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश कुमार और पूर्व एनएसजी कमांडो दिपांजन चक्रवर्ती भी मंत्री पद की दौड़ में बताए जा रहे हैं. भाजपा इन चेहरों के जरिए सामाजिक और भावनात्मक संदेश देने की कोशिश कर सकती है।  मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, माणिकतला से विधायक तपस रॉय को विधानसभा अध्यक्ष बनाए जाने पर विचार हो रहा है. वहीं पार्टी महिला नेतृत्व को भी आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है और एक महिला विधायक को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. हालांकि भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने स्पष्ट किया कि फिलहाल सभी नाम चर्चा के स्तर पर … Read more

चार पार्टियों के समर्थन से सरकार गठन में विजय का रास्ता आसान, जादुई आंकड़ा पूरा

चेन्नई तमिलनाडु की राजनीति में सरकार गठन को लेकर जारी हलचल के बीच थलपति विजय को बड़ा राजनीतिक समर्थन मिला है. वामपंथी दलों कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI), सीपीएम और वीसीके ने विजय की टीवीके को समर्थन देने का फैसला किया है. इस तरह विजय की टीवीके जो 108 सीटों के साथ बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, अब उसे बहुमत का आंकड़ा भी मिल गया है।  तो इस तरह अब 118 के जादुई आंकड़ों पर बात करें तो विजय के पास 108 सीटें हैं. लेकिन विजय दो सीटों पर जीते थे. वहीं कांग्रेस के समर्थन से उन्हें कांग्रेस की पांच सीटें मिल गईं. इस तरह विजय के पास 113 सीटों का आंकड़ा हुआ. अब सीपीआई के दो विधायक, सीपीएम के दो विधायक और वीसीके के भी दो विधायक विजय की टीवीके के साथ हैं. इस तरह इन चार दलों के समर्थन से विजय के पास बहुमत का जादुई आंकड़ा न सिर्फ पूरा हो गया है बल्कि एक अधिक भी हो गया है।  टीवीके- 108 इंडियन नेशनल कांग्रेस-  5 कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया- 2 कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)- 2 विदुथलाई चिरिथागकुल काची- 2 टोटल – 119 बता दें कि थलपति विजय अब चार राजनीतिक दलों के सहयोग से सरकार बनाने जा रहे हैं. उनकी पार्टी तमिलिगा वेट्री कझगम (TVK) को अब कई दलों का खुला समर्थन मिला है. जानकारी के मुताबिक, आधारव अर्जुन पट्टिनपक्कम स्थित विजय के आवास पहुंचे हैं. वहीं CPI की वर्किंग कमेटी की बैठक में TVK को समर्थन देने का फैसला लिया गया है।  इसके अलावा CPI(M) की राज्य कमेटी की बैठक में भी विजय की पार्टी को समर्थन देने पर सहमति बनी है. सूत्रों के अनुसार, विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) ने भी TVK का समर्थन करने पर हामी भर दी है. बताया जा रहा है कि इन सभी दलों के नेता शाम 4:30 बजे संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं. माना जा रहा है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में विजय को समर्थन देने का औपचारिक ऐलान किया जाएगा. तमिलनाडु में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति के बीच यह घटनाक्रम सरकार गठन की दिशा में अहम माना जा रहा है।   टीवीके को मिला सीपीएम का साथ शुक्रवार को TVK चीफ विजय के लिए राहत की खबर आई। सूत्रों के अनुसार, सीपीएम ने TVK-कांग्रेस गठबंधन का समर्थन देने का फैसला किया है। इसके साथ ही विजय के पास 115 विधायक हो चुके हैं। अब उन्हें 3 विधायकों का इंतजार है। राज्यपाल ने उन्हें 10 मई तक का समय दिया है।  VCK, CPM, CPI ने किया TVK-कांग्रेस गठबंधन का समर्थन, थलपति विजय के पास 118 का जादुई आंकड़ा तमिलनाडु में अब TVK चीफ थलपति विजय की सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है। 2-2 विधायकों वाले VCK, CPM, CPI ने कांग्रेस-TVK गठबंधन को समर्थन देने का फैसला किया है। साथ ही बीजेपी ने भी मतदान से दूर रहने के संकेत दिए हैं। इसके बाद विजय के लिए बहुमत हासिल करने का मार्ग प्रशस्त हो चुका है।  चेन्नई में लोकभवन के सामने TVK कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन टीवीके कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को लोकभवन के सामने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी तमिलनाडु के गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से विजय को शपथ दिलाने की मांग कर रहे थे। बाद में पुलिस ने उन कार्यकर्ताओं को मौके से हटा दिया। TVK कार्यकर्ता सुरेश ने कहा कि अगर विजय को मुख्यमंत्री बनने का मौका नहीं दिया गया, तो भविष्य में और भी प्रदर्शन किए जाएंगे। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत न मिलने के बाद से विजय की TVK तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए दूसरी पार्टियों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस के पांच विधायकों के समर्थन से, गठबंधन के पास अब 112 सीटें हैं, जो 234 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत के जादुई आंकड़े 118 से अभी भी छह कम हैं। इस बीच, AIADMK के राष्ट्रीय प्रवक्ता कोवई सत्यन ने TVK के सबसे बड़ी पार्टी होने के दावों पर निशाना साधा और कांग्रेस के साथ उसके गठबंधन की आलोचना की।

नंदीग्राम आंदोलन से चमके शुभेंदु अधिकारी, अब भाजपा ने सौंपी बंगाल की कमान

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान हो गया है। भाजपा विधायक शुभेंदु अधिकारी राज्य के अगले सीएम होंगे। कोलकाता में आयोजित भाजपा विधायक दल की बैठक में शुभेंदु के नाम पर मुहर लगी। उनके नाम पर आठ प्रस्ताव और समर्थन प्राप्त हुए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुभेंदु के नाम का ऐलान किया और कहा कि दूसरे नाम के लिए भी विधायकों को पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन सभी से सिर्फ शुभेंदु का ही नाम मिला। सीएम पद की रेस में शुभेंदु ही सबसे आगे चल रहे थे। कई अन्य नामों पर भी अटकलें लगीं, लेकिन शुभेंदु का ही पलड़ा भारी माना जा रहा था। कांग्रेस से की शुरुआत शुभेंदु अधिकारी का पूरा परिवार राजनीति से जुड़ा है। उनके पिता शिशिर अधिकारी दिग्गज नेता रह चुके हैं और मनमोहन सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे। शुभेंदु के एक भाई सांसद और दूसरे विधायक हैं। शुभेंदु ने अपने राजनैतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की और 1995 में कांथी नगरपालिका में पार्षद चुने गए थे। जब ममता बनर्जी ने 1997 में कांग्रेस से अलग होकर टीएमसी बनाई, तब शुभेंदु अधिकारी भी उनके साथ तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इसके बाद, 2006 में, अधिकारी कांथी दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए चुने गए। उसी वर्ष वे कांथी नगरपालिका के अध्यक्ष भी बने। नंदीग्राम आंदोलन में निभाई अहम भूमिका साल 2007 में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन की अगुवाई की। दरअसल, बंगाल की तत्कालीन लेफ्ट सरकार ने एसईजेड स्थापित करने के लिए एक गांव में दस हजार एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने की योजना बनाई थी। ममता बनर्जी ने इसके खिलाफ आंदोलन किया और उसमें शुभेंदु अधिकारी ने उनका साथ दिया। पूरे आंदोलन के दौरान अधिकारी की अहम भूमिका रही। इसी आंदोलन से ममता बनर्जी की पहली बार सरकार पश्चिम बंगाल में बनी। शुभेंदु की गिनती ममता के करीबी नेताओं में की जाने लगी। वह ममता सरकार में मंत्री भी रहे। इसके अलावा, तमलुक लोकसभा सीट से 2009 और 2014 में सांसद बने। छह साल पहले भाजपा में हुए शामिल तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक के बढ़ते प्रभाव की वजह से शुभेंदु नाराज हुए और साल 2020 में उन्होंने पार्टी छोड़ दी। 17 दिसंबर 2020 को उन्होंने टीएमसी की सदस्यता से इस्तीफा दिया। 19 दिसंबर 2020 को, उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा ज्वाइन कर ली। धीरे-धीरे वह अमित शाह के भरोसेमंद नेताओं की लिस्ट में शामिल हो गए। 2021 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु ने नंदीग्राम से ममता बनर्जी को हराकर सभी को चौंका दिया। भले ही भाजपा को 77 सीटें मिलीं, लेकिन पार्टी का जनाधार राज्य में लगातार बढ़ता गया। 2026 विधानसभा चुनाव में शुभेंदु ने भवानीपुर से भी चुनाव लड़ा और ममता बनर्जी को 15 हजार से ज्यादा वोटों से पराजित कर दिया। अब वे राज्य के अगले व भाजपा के पश्चिम बंगाल में पहले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं।

मौसम का कहर: 22 राज्यों में बारिश, उत्तराखंड में तूफान की चेतावनी

नई दिल्ली  भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD)ने देश के कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक आंधी, तूफान और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। आईएमडी के मुताबिक, उत्तराखंड में आज 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली आंधी चलने की संभावना है। इसकी रफ्तार 70 किमी तक जा सकती है। इसके बाद 11 से 13 मई के दौरान जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। हालांकि, इस दौरान बिजली और तेज हवाओं की संभावना है। मौसम विभाग का कहना है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में 12 और 13 मई को, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 11 मई को बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। इसके अलावा, असम, मेघालय और त्रिपुरा में 9 मई तक गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश होगी। भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा 8 मई की सुबह जारी रिपोर्ट के मुताबिक, 12 और 13 मई को अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 9 मई तक बारिश जारी रहेगी। इस दौरान भीषण आंधी की संभावना है। आपको बता दें कि बिहार और ओडिशा में 11 मई तक दौरान गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ छिटपुट बारिश होने के आसार हैं। आईएमडी का कहना है कि मध्य प्रदेश में भी आज आंधी और बारिश की संभावना है। वहीं, छत्तीगढ़ में अगले 3 दिनों तक गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में अगले 3 दिनों तक मौसम खराब रहने और तेज हवाएं चलने का अनुमान है। केरल और तमिलनाडु में अगले 7 दिनों के दौरान छिटपुट स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं, कर्नाटक में आज भारी बारिश हो सकती है। तटीय कर्नाटक में 10 और 11 मई को बिजली कड़कने के साथ बारिश का अनुमान है।

जानिए कौन-कौन नेता बन सकते हैं बंगाल में BJP के पहले मंत्रिमंडल में

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य मुख्यमंत्री कौन होगा और नया मंत्रिमंडल कैसा होगा. 294 सीटों वाली विधानसभा में 207 सीटें जीतकर बीजेपी ने न केवल ममता बनर्जी के 15 साल के सियासी किले को ढहाया है बल्कि बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत भी की है।  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की देखरेख में शुक्रवार शाम को होने वाली विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री के नाम पर फाइनल मुहर लगनी है तो साथ ही लोगों की निगाहें मंत्रिमंडल के स्वरूप पर भी है।  बंगाल की पहली बार बनने वाली बीजेपी सरकार में सीएम के साथ डिप्टीसीएम भी होंगे या फिर मुख्यमंत्री रहेंगे. इसके अलावा बंगाल मंत्रिमंडल कैसा हो सकता है और कौन से चेहरे इसमें शामिल हो सकते हैं?   बंगाल कैसा होगा मंत्रिमंडल का स्वरूप? बंगाल में बीजेपी का मंत्रिमंडल 'सोशल इंजीनियरिंग' और 'क्षेत्रीय संतुलन' का एक बेहतरीन संतुलन बनाने की कवायद है. बीजेपी का टारगेट उत्तर बंगाल से लेकर जंगलमहल और मतुआ समुदाय से लेकर शहरी मध्यवर्ग तक प्रतिनिधित्व देकर साधने का है. उत्तर बंगाल, जहां पर पार्टी का प्रदर्शन शानदार रहा है, जंगलमहल और दक्षिण बंगाल के प्रभावी जिलों को विशेष प्राथमिकता दी सकती है।  बीजेपी के मंत्रिमंडल में पुराने अनुभवी नेताओं के साथ-साथ उन युवा चेहरों को भी जगह दी जाएगी जिन्होंने जमीनी स्तर पर टीएमसी के खिलाफ लड़ाई लड़ी है. इसके अलावा बीजेपी की जीत में महिला और दलित कार्ड का अहम रोला था. ऐसे में बंगाल सरकार के मंत्रिमंडल में महिलाओं और अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) के नेताओं की बड़ी भागीदारी बीजेपी दे सकती है।  बंगाल की नई कैबिनेट को इस तरह बनाने का प्लान है ताकि वैचारिक प्रतिबद्धता और जमीनी स्तर पर लोगों को जोड़े रखा जा सके. बीजेपी और संघ के बीच हाल ही में हुई समन्वय बैठकों में आरएसएस ने वैचारिक एकता को प्राथमिकता देने पर ज़ोर दिया था.बीजेपी ऐसे नेताओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिनका संघ के साथ काम करने का लंबा इतिहास रहा है।  पार्टी ज़्यादा से ज़्यादा अनुभवी नेताओं को कैबिनेट में शामिल करने की है. इस तरह से बीजेपी की बंगाल में गठन होने वाली कैबिनेट में पार्टी के पुराने नेताओं और राजनीति में नए आए चेहरों का संतुलन बनाने की है।  मंत्री बनने की रेस में कौन-कौन नेता शामिल हैं?  भवानीपुर में ममता बनर्जी को हराने के बाद शुभेंदु अधिकारी का कद पार्टी में सबसे ऊपर है. अगर वे मुख्यमंत्री नहीं बनते हैं, तो भी वे सरकार के सबसे शक्तिशाली गृह या वित्त मंत्री बनाया जा सकता है, क्योंकि उनके पास प्रशासन का लंबा अनुभव है. इसके सामिक भट्टाचार्य बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हैं और एक प्रबुद्ध चेहरा, जो मंत्री पद की रेस में है।  डिजाइनर से नेता बनीं अग्निमित्रा पॉल ने महिला वोट बैंक को साधने में बड़ी भूमिका निभाई है. ऐसे में सीएम नहीं बनती है तो मंत्री बनना लगभग उनका तय है.  बीजेपी के दिग्गज नेता दिलीप घोष के पास सांगठनिक अनुभव भी सरकार के काम आ सकता है. ऐसे में घोष को मंत्री बनाया जा सकता है।  पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री निशीथ प्रमाणिक, बैरकपुर के विधायक अर्जुन सिंह, मुर्शिदाबाद से दो बार विधायक रह चुके गौरी शंकर घोष, वीएचपी की बंगाल इकाई के पूर्व अध्यक्ष श्रुति शेखर गोस्वामी, पूर्व सांसद रूपा गांगुली, वकील कौस्तव बागची, दीपक बर्मन, सजल घोष, इंद्रनील खान और जोएल मुर्मू भी कैबिनेट की रेस में शामिल हैं।    बीजेपी से पहली बार विधायक बने लोगों में आरजी कर मामले की पीड़ित की मां रत्ना देबनाथ,भारत सेवाश्रम संघ के भिक्षु उत्पल महाराज (जिन्हें राजनीति में आने के कारण संघ से निकाल दिया गया था), पूर्व IPS अधिकारी राजेश कुमार और पूर्व एनएसजी कमांडो दीपंजन चक्रवर्ती शामिल हैं।  बीजेपी कैसे साधेगी सामाजिक समीकरण ?  बंगाल में मतुआ वोट बैंक बीजेपी की जीत का बड़ा आधार रहा है. इस समुदाय से कम से कम 2-3 मंत्री बनाए जा सकते हैं. असीम सरकार या मुकुटमणि अधिकारी जैसे मतुआ समाज के नेताओं को मंत्री बनाया जा सकता है. इसी तरह से उत्तर बंगाल बीजेपी का गढ़ रहा. यहां से निशिथ प्रामाणिक और दीपक बर्मन को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।  बांकुड़ा, पुरुलिया और झाड़ग्राम इलाके से किसी बड़े आदिवासी नेता को कैबिनेट में शामिल किया जाएगा ताकि 'वनवासी' कार्ड को मजबूती मिले, इसमें ज्योतिरमय सिंह महतो या उनके किसी करीबी विधायक को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।  शाह के 'मास्टर प्लान' में कौन बैठेगा फिट अमित शाह की रणनीति स्पष्ट है कि बंगाल में सरकार ऐसी होनी चाहिए जो 2026 के सियआसी जनादेश को 2029 के लोकसभा चुनाव और आगे तक बनाए रखे. मंत्रियों के चयन में उनकी व्यक्तिगत छवि पर विशेष ध्यान दिया जा कता है. कोलकाता और सिलीगुड़ी जैसे शहरी केंद्रों के विकास के लिए विजनरी नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।  बंगाल में बीजेपी की पहली सरकार केवल मंत्रियों का समूह नहीं, बल्कि पार्टी का वह 'बंगाल मॉडल' होगी, जिसका वादा उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान किया था. अब देखना यह है कि राजभवन में होने वाले शपथ ग्रहण में अमित शाह की लिस्ट में किसका-किसका नाम चमकता है।  बंगाल में शपथ ग्रहण का कार्यक्रम 9 मई को रखा गया है. बताया जा रहा है कि 9 मई को रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती (पचीसे बैसाख) के शुभ अवसर पर यह नई सरकार शपथ लेगी, जो बंगाली अस्मिता से जुड़ने का एक बड़ा संदेश देने की रणनीति है। 

राज्य कर्मचारियों के लिए खुशखबरी: अरुणाचल प्रदेश सरकार ने बढ़ाया महंगाई भत्ता

ईटानगर केंद्र सरकार ने अप्रैल महीने में अपने कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) में 2 फीसदी की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 60 फीसदी हो गया है.केंद्र सरकार के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी के बाद अब राज्‍य सरकारें भी अपने कर्मचारियों को तोहफा देने लगी हैं।  अरुणाचल प्रदेश सरकार ने अब 7वें वेतन आयोग के तहत सेवारत कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) और पेंशनधारकों के लिए महंगाई राहत (DR) में दो प्रतिशत की  बढ़ोतरी का ऐलान किया है. बीते 6 मई को अरुणाचल प्रदेश ने इसका ऐलान किया।  राज्‍य सरकार पर पड़ेगा इतना बोझ  अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के एक बयान में कहा गया है कि DA और DR में बढ़ोतरी एक जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएगी. सरकारी बयान में कहा गया है कि मई 2026 से बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता और महंगाई राहत, मासिक वेतन और पेंशन के साथ दिया जाएगा. इससे राज्य भर में 69,248 नियमित कर्मचारी और 40,477 पेंशनभोगी लाभ मिलेगा. इस बढ़ोतरी के कारण सालान बोझ करीब 100.54 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।  किसे मिलेगा महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का लाभ?  इसके अलावा, कर्मचारियों को जनवरी से अप्रैल तक की अवधि का बकाया भी आने वाली सैलरी के साथ भेजा जाएगा. बकाया पर कुल वित्तीय बोझ करीब 33.51 करोड़ रुपये होने का अनुमान है. बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता अरुणाचल प्रदेश सरकार के तहत काम करने वाले अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों, राज्‍य सरकार में काम करने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों और राज्‍य सरकार के सभी रेगुलर कर्मचारियों को दिया जाएगा।  इस राज्‍य सरकार ने भी की है बढ़ोतरी  अरुणाचल के अलावा, अप्रैल में एक और राज्‍य सरकार ने महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का तोहफा दिया है. राजस्थान सरकार ने राज्य कर्मियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते में दो प्रतिशत की वृद्धि की है. राजस्‍थान सरकार के इस फैसले से 12 लाख से ज्‍यादा कर्मचारियों और पेंशनर्स को लाभ मिलेगा. सातवें वेतन आयोग के तहत महंगाई भत्ता और महंगाई राहत अब 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गया है और यह निर्णय एक जनवरी 2026 से प्रभावी होगा।   राज्‍य सरकार के इस फैसले से लगभग 7.02 लाख राज्य कर्मचारी और 5.44 लाख पेंशनभोगी को लाभ होगा. इस फैसले से राज्य सरकार पर लगभग 1,156 करोड़ रुपये का एक्‍स्‍ट्रा बोझ पड़ने की संभावना है। 

नया कोरोना वायरस थाईलैंड में मिला, स्वास्थ्य अधिकारियों ने जताई चिंता

बैंकाक  थाईलैंड में चमगादड़ों के अंदर एक नया कोरोना वायरस मिला है जो इंसानों को संक्रमित कर सकता है. टोक्यो यूनिवर्सिटी के वायरस एक्सपर्ट्स की टीम ने यह खोज की है. यह वायरस SARS-CoV-2 (कोविड-19 पैदा करने वाले वायरस) से मिलता है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अभी यह तुरंत कोई बड़ी महामारी नहीं फैलाएगा, लेकिन भविष्य में खतरा हो सकता है. इस खोज से वैज्ञानिकों को वायरस की निगरानी बढ़ाने की चेतावनी मिली है।  टोक्यो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर केई सातो की अगुवाई वाली टीम ने थाईलैंड के चाचोएंगसाओ प्रांत में घोड़ों की नाल जैसे कान वाले चमगादड़ों (Horseshoe bats) में यह नया वायरस पाया. यह वायरस Clade B नामक ग्रुप का है. यह SARS-CoV-2 संबंधित कोरोनावायरस का नया समूह है. शोधकर्ताओं ने चमगादड़ों के नमूने लेकर लैब में टेस्ट किए. अध्ययन 6 मई 2026 को प्रतिष्ठित जर्नल 'Cell' में प्रकाशित हुआ।  इस वायरस की जेनेटिक्स कोविड-19 वायरस से काफी करीब है. प्रयोगों में पता चला कि यह मानव कोशिकाओं के ACE2 रिसेप्टर से जुड़ सकता है, यानी यह इंसानों में घुसने की क्षमता रखता है. लेकिन अच्छी बात यह है कि यह वायरस धीरे बढ़ता है और जानवरों में संक्रमण नहीं फैला पाया।  वायरस कितना खतरनाक है? प्रोफेसर केई सातो और उनकी टीम के अनुसार, यह वायरस अभी इंसानों के लिए तत्काल खतरा नहीं है. मौजूदा कोविड-19 के टीके और दवाएं इस नए वायरस के खिलाफ प्रभावी पाई गई हैं. प्रयोगशाला परीक्षणों में यह वायरस कमजोर साबित हुआ।  फिर भी वैज्ञानिक चिंतित हैं क्योंकि चमगादड़ों में वायरस लगातार बदलते रहते हैं. अगर इसमें छोटा-सा बदलाव आया तो यह ज्यादा संक्रामक और खतरनाक बन सकता है. थाईलैंड और आसपास के इलाकों में चमगादड़ों के नेटवर्क के जरिए यह वायरस युन्नान (चीन) और उत्तरी लाओस से आया हो सकता है।  प्रकृति में हजारों तरह के वायरस मौजूद हैं. चमगादड़ वायरसों के बड़े भंडार हैं. एशिया में चमगादड़ों पर लगातार निगरानी रखनी चाहिए. अभी कोई इंसान इस नए वायरस से संक्रमित होने की खबर नहीं है. फिर भी स्वास्थ्य अधिकारी सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं. अगर कोई व्यक्ति चमगादड़ों या उनके मल-मूत्र वाले इलाकों के पास जाता है तो सावधानी बरतनी चाहिए।  सीख क्या है इस खोज से? कोविड-19 महामारी के बाद पूरी दुनिया जान गई है कि वायरस कितनी तेजी से फैल सकते हैं. इस नए वायरस की खोज समय पर हुई है. इससे पहले भी थाईलैंड में RacCS203 नाम का एक और SARS-CoV-2 संबंधित वायरस मिल चुका है।  वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसी खोजों से हम भविष्य की महामारियों को रोक सकते हैं. नियमित निगरानी, शोध और तैयारियां बहुत जरूरी हैं. आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन जंगलों, गुफाओं या चमगादड़ों वाले इलाकों में सावधानी जरूर बरतनी चाहिए। 

तमिलनाडु में बड़ी संख्या में इस्तीफे, बंगाल की तरह 100+ अधिकारी छोड़ रहे पद

चेन्नई तमिलनाडु में नई सरकार के गठन को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच एक बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। राज्य सरकार की पैरवी करने वाले 100 से अधिक विधि अधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। आपको बता दें कि इससे पहले पश्चिम बंगाल में भी कई अधिकारियों ने अपनी नौकरी छोड़ दी थी। वहां तृणमूल कांग्रेस को बेदखल कर भारतीय जनता पार्टी पहली बार सत्ता में आई है। तमिलनाडु में एडवोकेट जनरल पी.एस. रमन के नेतृत्व वाले इन अधिकारियों ने अपना इस्तीफा सौंप दिया है। दरअसल, सरकारी वकीलों और विधि अधिकारियों की नियुक्तियां काफी हद तक राजनीतिक होती हैं। परंपरा के अनुसार, जब भी राज्य में सत्ता परिवर्तन होता है या नई सरकार आने वाली होती है तो पिछली सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी पद छोड़ देते हैं ताकि नई सरकार अपनी पसंद के वकीलों को नियुक्त कर सके। अभी काम करते रहेंगे सभी वकील इस्तीफे के बावजूद, इन अधिकारियों को एक सप्ताह और पद पर बने रहने का निर्देश दिया गया है। सरकार नहीं चाहती कि अदालत में राज्य का पक्ष रखने वाला कोई न हो। सामान्य तौर पर नई सरकार अंतरिम व्यवस्था के तौर पर तीन-चार वकीलों की नियुक्ति करती है, लेकिन विजय की पार्टी (TVK) की सरकार बनने पर मचे सस्पेंस के कारण अभी तक ऐसी कोई नियुक्ति नहीं हुई है। एक विधि अधिकारी ने बताया, "राज्य को अदालत में बिना प्रतिनिधित्व के नहीं छोड़ा जा सकता, इसलिए हम तब तक काम जारी रखेंगे जब तक नई सरकार अपने अधिकारियों की नियुक्ति नहीं कर लेती।" नियम के मुताबिक, जैसे ही नई सरकार शपथ लेगी वह अपनी पार्टी से जुड़े अनुभवी वकीलों को इन महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त करेगी। वर्तमान में तमिलनाडु सरकार की ओर से अदालतों में पैरवी करने वाले 100 से अधिक अधिकारियों की टीम है, जिनका भविष्य अब नई सरकार के स्वरूप पर निर्भर करता है।