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आसनसोल हत्या मामले के बाद राहुल गांधी का टीएमसी पर तीखा प्रहार, कानून व्यवस्था पर सवाल

नई दिल्‍ली पश्चिम बंगाल चुनाव में इस बार बीजेपी ही नहीं, कांग्रेस के टारगेट पर भी ममता बनर्जी नजर आ रही हैं. पिछले कुछ चुनाव में ऐसा देखने को नहीं मिला था,  लेकिन 23 अप्रैल को हुए पहले चरण के मतदान के बाद आसनसोल में एक कांग्रेस कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई. पश्चिम बंगाल कांग्रेस का आरोप है कि टीएमसी से जुड़े गुंडों ने ही पार्टी कार्यकर्ता की हत्या की है, जो राज्य में खत्म हो चुके कानून व्यवस्था का परिचायक है. हालांकि, बंगाल की राजनीति में दखल रखने वाले मानते हैं कि ममता पर हमला कर कांग्रेस अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रही है. राहुल का ममता पर बड़ा हमला इस घटना के बाद राहुल गांधी के X पर पोस्ट लिखकर पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ टीएमसी पर बहुत बड़ा आरोप लगाया है. राहुल गांधी ने लिखा- "कांग्रेस के कार्यकर्ता देबदीप चटर्जी की चुनाव बाद TMC से जुड़े गुंडों द्वारा की गई हत्या बेहद निंदनीय है शोकाकुल परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं. पश्चिम बंगाल में आज लोकतंत्र नहीं, TMC का गुंडा राज चल रहा है. वोट के बाद विरोधी आवाज़ों को डराना, मारना, मिटाना- यही TMC का चरित्र बन चुका है. भारत की अहिंसक परंपरा को कलंकित करने वाली इस राजनीति के सामने हम झुकेंगे नहीं. न्याय होकर रहेगा.' अबतक बचते रहे थे राहुल बंगाल में हुए पिछले कुछ चुनावों को देखें तो राहुल गांधी ने राज्य में न के बराबर चुनाव प्रचार किया था. 2021 के विधानसभा चुनाव में जहां उन्होंने महज 2 जनसभाएं की थीं, वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में तो वो राज्य में प्रचार करने तक नहीं गए. 2021 की दोनों जनसभाओं में वो ममता बनर्जी और टीएमसी पर ज़्यादा हमला करने से बचते नज़र आए थे और उनके केंद्र में प्रमुख रूप से बीजेपी ही रही थी. मगर इस बार थोड़ी तस्वीर बदली हुई नज़र आ रही है. इस बार भी राहुल गांधी केवल दो दिन ही चुनाव प्रचार करने गए हैं और अभी तक 5 जनसभाएं की हैं, लेकिन टीएमसी और ममता बनर्जी पर उनका हमला इसबार ज़्यादा तीखा नज़र आ रहा है. अपनी सभी सभाओं में वो कहते आ रहे हैं कि बंगाल में टीएमसी के चलते बीजेपी की ताक़त बढ़ी और केवल कांग्रेस ही बीजेपी का मुक़ाबला कर सकते हैं. उन्होंने यहां तक कहा कि बीजेपी और ममता में सांठ गांठ है और जहां बाक़ी विपक्षी नेताओं पर मोदी सरकार केस करवा रही है, ममता के खिलाफ कोई केस नहीं है. क्या हो सकती है वजह? राहुल गांधी का ममता और टीएमसी का हमला ऐसे समय में आया है, जब कुछ ही दिनों पहले महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन बिल पर कांग्रेस और टीएमसी ने मिलकर मोदी सरकार का विरोध किया था और बिल पारित नहीं हो पाया था. इतना ही नहीं, दो दिनों पहले ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए जो राज्यसभा में नोटिस दिया गया है. उसपर भी कांग्रेस और टीएमसी सांसदों के हस्ताक्षर हैं. ऐसे में राहुल गांधी के बदले हुए तेवर की लेकर चर्चा शुरू हो गई है. कुछ जानकारों का मानना है कि कांग्रेस बंगाल में अपनी खोई हुई ज़मीन पाना चाहती है और इसके लिए टीएमसी के वोट बैंक को तोड़ना ज़रूरी है. इस वोट बैंक में सबसे अहम है अल्पसंख्यक मुसलमानों का वोट. बार-बार ये कहकर कि कांग्रेस ही बीजेपी का मुक़ाबला कर सकती है, राहुल उसी वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रहे हैं. एक चर्चा ये भी है कि बंगाल में इस बार टीएमसी को बीजेपी से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में यदि राज्य में कोई अप्रत्याशित परिणाम आता है, तो बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस ज़्यादा बड़ी प्रतिद्वंदी नजर आनी चाहिए , न कि टीएमसी.

AAP को बड़ा झटका: राघव चड्ढा समेत 7 सांसद बीजेपी में शामिल

नई दिल्ली राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और हरभजन सिंह समेत सात सांसदों के बीजेपी में शामिल होने से आम आदमी पार्टी (AAP) को तगड़ा झटका लगा है। इस मामले को लेकर AAP नेताओँ और जानकारों का कहना है कि अब पार्टी राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से इन सांसदों के खिलाफ एक्शन की मांग कर सकती है। बता दें कि पंजाब में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। चुनाव से पहले यह आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा झटका है। इसका असर निश्चित तौर पर विधानसभा चुनाव में दिखाई देगा। राज्यसभा सांसद और AAP के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने कहा कि वह इन सांसदों के खिलाफ ऐक्शन के लिए उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन को पत्र लिखेंगे और सातों सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग करेंगे। संजय सिंह ने कहा, जिस तरह से सात सांसद बीजेपी में गए हैं, यह असंवैधानिक और संसदीय नियमों के खिलाफ है। मैं राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखूंगा और मांग करूंगा कि इन सांसदों को अयोग्य ठहराया जाए। दल बदल कानून का सहारा लेना चाहती है AAP उन्होंने कहा, 'दलबदल विरोधी कानून के अनुसार राज्यसभा और लोकसभा में किसी तरह का अलग गुट मान्य नहीं होता, चाहे उसमें दो-तिहाई सदस्य ही क्यों न हों।' उन्होंने यह भी कहा कि इन सात सांसदों का भाजपा में जाना पूरी तरह "असंवैधानिक" और "गैरकानूनी" है। संवैधानिक स्तर पर मामला उठाना चाहती है AAP आम आदमी पार्टी इस पूरे मामले को संवैधानिक स्तर पर आगे बढ़ाना चाहती है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी राष्ट्रपति से मुलाकात करने के लिए अपॉइनमेंट मांगा है। जानकारों का कहना है कि आम आदमी पार्टी चाहती है कि इन सभी सांसदों से राज्यसभा की सदस्यता वापस ले ली जाए। इसके लिए वह ‘राइट टु रीकॉल’ का इस्तेमाल करना चाहती है। हालांकि जानकारों का कहना है कि संविधान में इस तरह का प्रावधान नहीं है। अगर जनता चाहे तो चुने गए प्रतिनिधि को कार्यकाल खत्म होने से पहले हटा सकती है। इसे 'राइट टु रिकॉल' कहते हैं। शुक्रवार को एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में, आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सदस्य भाजपा में शामिल हो गए, जिनमें से छह पंजाब से हैं। ये सात सांसद राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, स्वाति मालीवाल और विक्रमजीत साहनी हैं। आम आदमी पार्टी (आप) के सूत्रों के अनुसार, मान ने शनिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के लिए समय मांगा, ताकि वे सांसदों की ''सदस्यता समाप्त करने'' के मुद्दे पर अपनी पार्टी का पक्ष रख सकें।

स्वाती मालिवाल ने AAP छोड़ी, बीजेपी में शामिल हो कर केजरीवाल पर किए आरोप

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (AAP) को शुक्रवार को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा। AAP के 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ दी है। बीजेपी ज्वाइन करने के बाद स्वाति मालीवाल ने AAP चीफ अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला करते हुए उन पर मारपीट करवाने, संसद में उनकी आवाज दबाने और भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी वाली पार्टी चलाने का आरोप लगाया। अरविंद केजरीवाल हैं गद्दार- स्वाति मालीवाल स्वाति मालीवाल ने कहा कि अगर आज के समय में कोई गद्दार है, तो वह अरविंद केजरीवाल हैं। उन्होंने बताया, “जब अरविंद केजरीवाल ने आंदोलन शुरू किया था, तब वह ₹2 की पेन लेते थे, फटी हुई शर्ट पहनते थे, खटारा गाड़ी में घूमते थे। यह सब देखकर हम बहुत प्रेरित होते हैं, देश के लोग भी उनसे काफी प्रभावित हुए। लेकिन जैसे ही उनके पास सत्ता आई, उन्होंने तुरंत अपने लिए 100 करोड़ का घर बनवा लिया।” स्वाति मालीवाल ने कहा, “मैंने AAP छोड़कर BJP जॉइन कर ली है। 2006 से मैं अरविंद केजरीवाल के साथ काम कर रही हूं और हर आंदोलन में उनका साथ दिया है। लेकिन अरविंद केजरीवाल ने मुझे मेरे ही घर में एक गुंडे से पिटवाया। जब मैंने इसके खिलाफ आवाज उठाई तो मुझे धमकाया गया और उन्होंने इस घटना के बारे में दर्ज FIR वापस लेने के लिए मुझ पर बहुत दबाव डाला। पार्टी ने मुझे दो साल तक संसद में बोलने का कोई मौका नहीं दिया, यह बहुत शर्मनाक है। अरविंद केजरीवाल महिला विरोधी हैं।” आम आदमी पार्टी से अलग होने की घोषणा करते हुए मालीवाल ने कहा कि उन्होंने 2006 से केजरीवाल के साथ काम किया और विभिन्न आंदोलनों में उनका समर्थन किया, लेकिन आरोप लगाया कि उन्हें पार्टी के भीतर उत्पीड़न और दबाव का सामना करना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि उनके घर पर उन पर हमला किया गया, विरोध करने पर उन्हें धमकाया गया और घटना के संबंध में दर्ज FIR वापस लेने के लिए उन पर दबाव डाला गया। मालीवाल ने पार्टी पर दो साल तक संसद में बोलने का अवसर न देने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 2006 से मैं अरविंद केजरीवाल के साथ काम कर रही हूं और हर आंदोलन में उनका समर्थन किया है। हालांकि, अरविंद केजरीवाल ने मुझे मेरे ही घर में गुंडों से पिटवाया। जब मैंने इसके खिलाफ आवाज उठाई तो मुझे धमकाया गया और उन्होंने घटना के संबंध में दर्ज FIR वापस लेने के लिए मुझ पर बहुत दबाव डाला। पार्टी ने मुझे दो साल तक संसद में बोलने का कोई अवसर नहीं दिया; यह बहुत शर्मनाक है। अरविंद केजरीवाल महिला विरोधी हैं। मालीवाल ने पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) के शासन की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार दूर से नियंत्रित है और पंजाब को उनका निजी एटीएम बताया। उन्होंने कहा कि अब वे पंजाब में आ चुके हैं और राज्य सरकार को दूर से नियंत्रित किया जा रहा है, जिससे पंजाब उनका निजी एटीएम बन गया है। पंजाब में रेत खनन और नशीली दवाओं का सेवन चरम पर है। जो भी नेता इनके खिलाफ आवाज उठाते हैं, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाती है। अरविंद केजरीवाल भ्रष्टाचार और 'गुंडागर्दी' के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने केजरीवाल की तुलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करते हुए मोदी को दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेता बताया और महिला आरक्षण विधेयक और आतंकवाद विरोधी अभियानों जैसे ऐतिहासिक निर्णयों के लिए उन्हें और गृह मंत्री अमित शाह की सराहना की।  ‘पंजाब को केजरीवाल ने बनाया पर्सनल ATM’ स्वाति मालीवाल ने AAP नेतृत्व पर कई बड़े आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “अब, वे पंजाब में घुस आए हैं, और राज्य सरकार को रिमोट से कंट्रोल किया जा रहा है, पंजाब को उनका पर्सनल ATM बना दिया गया है। पंजाब में रेत माइनिंग और ड्रग्स का इस्तेमाल चरम पर है। जो भी नेता उनके खिलाफ आवाज उठाते हैं, उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाती हैं। अरविंद केजरीवाल करप्शन और गुंडागर्दी के लिए जाने जाते हैं।” मालीवाल सहित 7 सांसदों ने BJP में किया विलय, RS के चेयरमैन को सौंपी चिट्ठी राघव चड्ढा सहित आप के सात राज्यसभा सांसदों ने बीजेपी में विलय कर लिया है. इसकी चिट्ठी राज्यसभा के सभापति को सौंप दी गई है. राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी. आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सदस्य राघव चड्डा और संदीप पाठक ने शुक्रवार (24 अप्रैल) को ऐलान किया कि वे और पार्टी के पांच अन्य राज्यसभा सदस्य BJP में शामिल हो रहे हैं।  राघ चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ''आज, भारत के संविधान के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए, राज्यसभा में आम आदमी पार्टी (AAP) के दो-तिहाई से अधिक सांसदों ने बीजेपी में विलय कर लिया है. सात सांसदों ने उस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे राज्यसभा के सभापति को सौंपा गया. मैंने, दो अन्य सांसदों के साथ, व्यक्तिगत रूप से हस्ताक्षरित दस्तावेज़ सौंपे।  AAP अब पुरानी वाली पार्टी नहीं रही- राघव चड्ढा राघव चड्ढा ने कहा, ''हम अपना करियर बनाने के लिए राजनीति में नहीं आए थे. हमलोग अपना करियर छोड़कर देश के लिए राजनीति में आए थे. देश के लिए इस पार्टी में काम नहीं हो पा रहा है वो इसलिए कि आम आदमी पार्टी अब पुरानी वाली पार्टी नहीं रही. पिछले कुछ सालों से लगातार आप लोग मुझसे पूछ रहे थे कि राघव जी आप पार्टी की गतिविधियों से अलग क्यों नजर आते हैं. पार्टी से किनारा क्यों कर लिया, तब मैं कुछ बोलता नहीं था. मैं प्रयास कर रहा था कि चीजें बेहतर हों लेकिन आज मैं आपको इसका कारण बताता हूं कि क्यों मैंने पार्टी की गतिविधियों से अपने आप को अलग कर लिया. वजह ये है कि मैं उनके गुनाह में शामिल नहीं होना चाहता था।  राघव चड्ढा ने की केंद्र सरकार की तारीफ उन्होंने केंद्र सरकार की तारीफ भी की. उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में जो सरकार चल रही है, उसने कई मजबूत ऐसे फैसले लिए हैं, जिसे नेता फैसले लेने से डरते थे. चाहे वो आतंकवाद की जड़ें उखाड़कर फेंकना हो या भारत को विश्व की टॉप इकोनॉमी में लाना हो. इस नेतृत्व पर जनता ने एक बार नहीं बल्कि तीन-तीन बार मुहर … Read more

के. कविता ने नई पार्टी TRS की शुरुआत की, BRS से सस्पेंड होने के बाद लिया बड़ा कदम

हैदराबाद   तेलंगाना जागृति संगठन की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बेटी के. कविता ने शनिवार को ‘तेलंगाना राष्ट्र सेना’ (टीआरएस) नामक नए राजनीतिक दल की शुरुआत की। कविता ने हैदराबाद के बाहरी इलाके में आयोजित एक कार्यक्रम में अपनी पार्टी के नाम की घोषणा की। बता दें कि सितंबर 2025 में कविता को बीआरएस से तब निलंबित कर दिया गया था जब उन्होंने अपने चचेरे भाई एवं पार्टी नेता टी. हरीश राव और रिश्तेदार जे. संतोष कुमार पर बीआरएस के शासन के दौरान निर्मित कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना को लेकर अपने पिता और बीआरएस अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव की छवि को ‘‘खराब’’ करने का आरोप लगाया था। निलंबन के बाद से वह तेलंगाना जागृति नामक अपने नेतृत्व वाले सांस्कृतिक संगठन के बैनर तले सार्वजनिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं…  कविता ने आरोप लगाया कि राज्य की पिछली सरकारों ने किसानों, युवाओं, बिजनेसमैन और पिछड़े समुदायों की उम्मीदों को तोड़ा है. उनकी नई पार्टी का मकसद सबका विकास और आत्मनिर्भरता होगा।  'जनता के करीब होगा शासन' के. कविता ने बताया कि उनकी पार्टी का सिद्धांत शासन को जनता के करीब ले जाना है. वो उन स्थानीय समस्याओं को तरजीह देंगी जिन्हें अक्सर बड़े राजनीतिक दल नजरअंदाज कर देते हैं. उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी जाति, धर्म या समुदाय के भेदभाव के बिना सभी की सेवा करेगी।  BRS और BJP पर हमला कविता ने आरोप लगाया कि BRS और BJP दोनों ही तेलंगाना में विपक्ष की भूमिका निभाने में नाकाम रहे हैं. उन्होंने पीटीआई से बात करते हुए कहा, 'BRS पार्टी 1,000 साल बाद भी नहीं बदलेगी. वहां उन लोगों का कोई जिक्र नहीं है जिन्होंने तेलंगाना को राज्य बनाने के लिए लड़ाई लड़ी थी। 

राघव चड्ढा समेत चार नेताओं ने बीजेपी जॉइन की, मिठाई खिलाकर स्वागत किया नितिन नवीन और अशोक मित्तल ने

नई दिल्ली  राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करके आम आदमी पार्टी (AAP) से अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया है. राघव ने भारी मन से कहा कि आम आदमी पार्टी अपने उन आदर्शों और बुनियादी मूल्यों से पूरी तरह भटक गई है, जिनके लिए इसे बनाया गया था. उन्होंने अपनी स्थिति तय करते हुए कहा, "मैं आम आदमी पार्टी से दूर जा रहा हूं और जनता की ओर बढ़ रहा हूं।  राघव चड्ढा ने एक बेहद चुटीली और सीधी टिप्पणी करते हुए खुद को 'गलत पार्टी में सही आदमी' बताया. उन्होंने कहा कि पार्टी के अंदर अब वे घुटन महसूस कर रहे थे क्योंकि पार्टी का मौजूदा स्वरूप उसके शुरुआती सिद्धांतों से मेल नहीं खाता।  राघव चड्ढा ने बताया कि हमारे साथ दो तिहाई ज्यादा AAP के राज्यसभा सांसद हमारे साथ हैं. उन्होंने साइन भी कर दिया है. इसमें हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजेंद्र गुप्ता, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी और अशोक मित्तल सहित कई नेताओं राघव चड्ढा के साथ शामिल हैं।  राघव चड्ढा के आम आदमी पार्टी छोड़ने पर अरविंद केजरीवाल का पहला रिएक्शन आ गया है. पूरी ख़बर को आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं. राघव चड्ढा, संदीप सिंह और अशोक मित्तल बीजेपी दफ्तर पहुंच चुके हैं. वे पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात करके औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता लेंगे।  राज्यसभा में AAP के पास राज्यसभा में 10 सांसद हैं. 7 पंजाब से और 3 दिल्ली से हैं. ताजा इस्तीफा होने के बाद अब AAP के पास राज्यसभा में सिर्फ तीन सांसद बचे हैं. इनमें संजय सिंह (दिल्ली), एनडी गुप्ता (दिल्ली) और जल कार्यकर्ता बलबीर सिंह सिच्चेवाल (पंजाब) हैं।  संदीप पाठक ने भी छोड़ी पार्टी AAP नेता संदीप पाठक ने कहा कि मैंने अपने जीवन में नहीं सोचा था कि ये स्थिति आएगी पर ये आई। 10 साल से इस पार्टी से मैं जुड़ा रहा और आज मैं AAP से अपने रास्ते अलग कर रहा हूं। संदीप पाठक भी बीजेपी में शामिल हो गए हैं। स्वाति मालीवाल भी हुई बीजेपी में शामिल राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। वह भी बीजेपी का दामन थाम चुकी है। पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह भी भाजपा में शामिल हो गए हैं। अशोक मित्तल ने भी पार्टी का दामन छोड़ दिया है। राजेंद्र गुप्ता भी बीजेपी में शामिल हुए। 2 अप्रैल को उपनेता पद से हटाए गए थे आम आदमी पार्टी ने बीते 2 अप्रैल को उन्हें राज्यसभा में पार्टी के उप नेता के पद से हटा दिया था। इस बारे में राज्यसभा सचिवालय को पार्टी की तरफ से पत्र लिखा गया था। इसमें कहा गया था कि चड्ढा को पार्टी के कोटे से बोलने का टाइम न दिया जाए। पार्टी ने उनकी जगह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के अशोक मित्तल को उप नेता बनाया था। हालांकि, मित्तल ने भी आज पार्टी का दाम छोड़ दिया।  आम आदमी पार्टी पर लगाया गंभीर आरोप दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि, कि उन्होंने और राज्यसभा में आप के दो-तिहाई सदस्यों ने फैसला किया है कि वे संविधान के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए खुद को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि आम आदमी पार्टी, जिसे उन्होंने अपने खून-पसीने से खड़ा किया और अपनी जिंदगी के 15 साल दिए, अब अपने सिद्धांतों और मूल्यों से भटक चुकी है। उनके मुताबिक, पार्टी अब देश के हित के बजाय निजी फायदे के लिए काम कर रही है। राघव चड्ढा ने यह भी कहा कि पिछले कुछ समय से उन्हें लग रहा था कि वह गलत पार्टी में सही व्यक्ति हैं। इसी वजह से उन्होंने पार्टी से अलग होने का फैसला लिया है और अब वह जनता के और करीब जाने की बात कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देने से पहले राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि, राजनीति में आने से पहले वह एक प्रैक्टिस करने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) थे। उन्होंने बताया कि जब यह मंच बना था, तब इसमें अलग-अलग क्षेत्रों के लोग जुड़े थे—कुछ वैज्ञानिक थे, तो कुछ शिक्षाविद। उन्होंने कहा कि आज आम आदमी पार्टी (आप) छोड़ने वालों में एक विश्व स्तर का क्रिकेटर, एक पद्म श्री सम्मान पाने वाला व्यक्ति और एक सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हैं। इन सभी लोगों ने भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने के लक्ष्य के साथ अपना सब कुछ छोड़कर इस पार्टी को बनाया था। राघव चड्ढा ने बताया कि वह इस पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं और पार्टी को अच्छी तरह समझते हैं। उनके अनुसार, उन्होंने और उनके साथियों ने पूरी मेहनत और ईमानदारी से दिल्ली में पार्टी को खड़ा किया, पंजाब में उसे मजबूत बनाया और दूसरे राज्यों में भी फैलाने की कोशिश की। लेकिन अब उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि जिस पार्टी की शुरुआत भ्रष्टाचार खत्म करने के मकसद से हुई थी, वही आज भ्रष्ट और समझौता करने वाले लोगों के हाथों में फंस गई है। उनका कहना है कि इसी वजह से जो लोग देश सेवा के इरादे से पार्टी में आए थे, वे अब या तो पार्टी छोड़ चुके हैं या धीरे-धीरे छोड़ रहे हैं। राघव चड्ढा के मुताबिक, सभी सांसदों ने इस संबंध में दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और इन्हें राज्यसभा के सभापति को सौंप दिया गया है. उन्होंने कहा कि तीन सांसद उनके साथ मौजूद हैं, जबकि अन्य में हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल शामिल हैं।  1. स्वाति मालीवाल: जनवरी 2024 में निर्वाचित. 2. अशोक कुमार मित्तल: पंजाब. 3. संजीव अरोड़ा: पंजाब 4. संदीप पाठक: पंजाब 5. हरभजन सिंह: पंजाब 6. बलबीर सिंह सीचेवाल: पंजाब 7. विक्रमजीत सिंह साहनी: पंजाब

AAP के 50 विधायकों में टूट का डर, कांग्रेस ने किया बड़ा अलर्ट

चंडीगढ़   आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार को अरविंद केजरीवाल को बड़ा झटका दिया है। चड्ढा आम आदमी पार्टी के दो तिहाई राज्यसभा सांसदों को साथ लेकर भाजपा में शामिल होने वाले हैं। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पंजाब से लेकर नई दिल्ली तक उथल-पुथल मची हुई है। इसी बीच पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने आम आदमी पार्टी को सलाह दी है कि वह सचेत रहे, क्योंकि हो सकता है कि उसके 50 विधायक भी जल्दी ही भाजपा में शामिल हो जाएं। एएनआई से बात करते हुए पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने पैसा देखकर लोगों को राज्यसभा सीट दे दी। ऐसे में इन लोगों की कोई विचारधारा नहीं थी। ऐसे में ऐसा संभव था कि वह अलग होंगे, यह तो होना ही था। उन्होंने कहा, "पार्टी ने पैसा देखकर लोगों को राज्यसभा सांसद बना दिया। इनकी कोई विचारधारा तो थी नहीं। ऐसे में वह जैसे आए थे, वह वैसे ही चले गए। मुझे तो डर है कि ऐसे ही आम आदमी पार्टी के 50 विधायक भी न चले जाएं। यह तो केवल सांसद गए हैं। जब विचारधारा नहीं है, आप को लोग पैसा देखकर, इंडस्ट्री देखकर राज्यसभा सदस्य बनाओगे। और उनसे कई तरीके की मदद लोगे, तो यह होना ही था।" कार्यकर्ताओं को बनाना चाहिए था राज्यसभा सांसद: वारिंग कांग्रेस पंजाब सांसद ने कहा कि आम आदमी पार्टी को ऐसे लोगों को राज्यसभा भेजना चाहिए था, जिनकी विचारधारा पता थी। उन्हें कार्यकर्ताओं को यह सीट देनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, "जब भी पार्टी विचारधारा का व्यक्ति नहीं चुनती हैं, तो ऐसा ही होता है। वैसे भी इन राज्यसभा सांसदों की पंजाब में कोई कीमत नहीं है। ऐसा माल चाहें आम आदमी पार्टी के पास रहे, चाहें वह भाजपा के पास चला जाए। हमें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है।" यह अन्य पार्टियों के लिए सबक: वारिंग कांग्रेस पंजाब अध्यक्ष वारिंग ने कहा कि इस घटनाक्रम से अन्य पार्टियों को भी सबक लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब भी लोगों को बड़े पदों की जिम्मेदारियां दें, उसके पहले उनकी विचारधारा की जांच कर लें। अगर केवल पैसे वाले लोगों को ऐसे पद दिए जाएंगे, तो वह लोग छोड़कर भागेंगे ही। उन्होंने कहा, "कांग्रेस ने कभी भी ऐसे लोगों को राज्यसभा नहीं भेजा। कांग्रेस ने कार्यकर्ता को और विचारधारा से मेल खाने वाले व्यक्तियों को ही राज्यसभा भेजा है। इन राज्यसभा सांसदों को शामिल करके भाजपा यह न सोचे कि उन्होंने पंजाब फतह कर लिया है, क्योंकि इन सांसदों से वैसे भी पंजाब में नफरत ही थी।"

मायावती कर रहीं SIR के नफा-नुकसान का विश्लेषण, बसपा नई रणनीति के तहत कैंडिडेट का चयन कर रही है

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव की हलचल तेज हो गई है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव मिशन-2027 का बिगुल फूंक चुके हैं और एक के बाद एक चुनावी घोषणाएं भी शुरू कर दी है. बीजेपी भी सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए हरसंभव कोशिश में जुटी है और सीएम योगी भी सड़क पर उतरकर सपा-कांग्रेस को महिला विरोधी कठघरे में खड़े करने में जुटे हैं।  सपा और बीजेपी के बीच सिमटती यूपी की सियासत को बसपा प्रमुख मायावती त्रिकोणीय बनाने की कवायद में है, जिसके लिए पार्टी नेताओं के साथ लगातार बैठकें भी कर रही हैं. मायावती ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपने संभावित उम्मीदवारों के नाम का ऐलान भी शुरू कर दिया था, लेकिन अब एसआईआर प्रक्रिया के बाद उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया है।  2027 का चुनाव बसपा के लिए सियासी वजूद को बचाए रखने का है. यही वजह है कि मायावती सूबे में हुई एसआईआर अभियान से हुए फायदे और नुकसान का आकलन कर रही है, उसके लिहाज से पार्टी उम्मीदवारों का सेलेक्शन करेगी. इसके लिए मायावती ने काम भी शुरू कर दिया है. ऐसे में सवाल उठता है कि मायावती क्या बसपा को दोबारा से खड़ा कर पाएंगी?  बसपा कैंडिडेट सेलेक्शन में जुटी मायावती मायावती ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपनी चुनावी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है. मायावती के नेतृत्व में बसपा अपनी पुरानी सोशल इंजीनियरिंग को फिर से अपनाने की कोशिश में है. बसपा ने 2027 के लिए उम्मीदवारों के नाम का ऐलान शुरू कर दिया था. सूबे की 40-50 सीटों पर बसपा ने विधानसभा प्रभारी बनाकर  संभावित उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की हरी झंडी दे दी थी, लेकिन एसआईआर प्रक्रिया के बाद उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया है।  यूपी में हुए मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान से हुए फायदे-नुकसान का बसपा आकलन कर रही है. मायावती ने पिछले दिनों अपने 15 हजार बूथ कमेटियों से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है, जिसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी. बसपा ने एसआईआर अभियान में सक्रिय रूप से भाग लिया था ताकि उसके समर्थकों का नाम मतदाता सूची में बरकरार रहे. बसाप इसी आधार पर चुनावी रणनीति बनाएगी और 2027 के लिए प्रत्याशी चयन होगा।  एसआईआर के लिहाज से कैंडिडेट का चयन बसपा के एक बड़े नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पिछले दिनों लखनऊ में हुई बैठक में मायावती ने बूथ कमेटियों से रिपोर्ट मांगी है. एसआईआर अभियान में जिन पदाधिकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई, उन्हें टिकट चयन में तवज्जो दी जाएगी. खासकर जिलों में जिन संभावित प्रत्याशियों को प्रभारी बनाया गया था, उनके बारे में रिपोर्ट मिलने के बाद उनकी दावेदारी पर फैसला लिया जाएगा।  बसपा सुप्रीमो मायावती खुद इस मामले की गहनता से समीक्षा कर रही हैं. उन्होंने बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल से इस बाबत सभी जिलों से रिपोर्ट मंगाने को कहा है। खासकर पार्टी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या कम होने के बारे में बताने को कहा गया है ताकि जिनके नाम मतदाता सूची में शामिल होने से रह गए हैं, उनको आगे जुड़वाया जा सके।  कास्ट समीकरण से उम्मीदवारी पर मुहर मायावती के नेतृत्व में बसपा अपनी पुरानी सोशल इंजीनियरिंग को फिर से अपनाने की कोशिश में है. 2027 के लिए बसपा के कैंडिडेट सेलेक्शन के लिए सीट के समीकरण का भी आकलन किया जा रहा, खासकर जाति केमिस्ट्री देखी जा रही है. मायावती ने रणनीति बनाया है कि एसआईआर से सीट पर किस समाज के वोट घटे हैं और मौजूदा समय में किस समाज से वोट बढ़े हैं, उसके आकलन पर टिकट वितरण किया जा रहा।  बसपा ने मिशन-2027 के लिए प्लान बनाया है कि प्रत्येक विधानसभा सीट पर चार-चार दावेदारों का पैनल बनाकर उनको कसौटी पर परखा जा रहा है. इन्हीं में से एक को पहले विधानसभा क्षेत्र प्रभारी और बाद में प्रत्याशी घोषित कर दिया जाएगा. बसपा इस काम के लिए अपने वरिष्ठ नेताओं की एक पूरी टीम लगा रखी है,जिसमें पार्टी के मंडल और जोनल कोऑर्डिनेटर शामिल है।  मायावती अपने जोनल कोऑर्डिनेटर के जरिए सीट के जातीय समीकरण की रिपोर्ट लेती हैं और उसके बाद कैंडिडेट के चयन के लिए तय करती हैं कि किस जाति का होना चाहिए. इसके लिए जोनल कोऑर्डिनेटर को फिर उस जाति से उम्मीदवार के तलाश करने का टारगेट देती हैं. इसके बाद चार नाम का पैनल बनाकर दिया जाता है, जिसमें से मायावती किसी एक नाम को अपनी मंजूरी देती है. इसके बाद जोनल कोऑर्डिनेटर उसे प्रभारी बनाने के ऐलान करती हैं, जो चुनाव के समय प्रत्याशी होगा।  2007 के फार्मूले से 2027 जीतने का प्लान  उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव मायावती ने अकेले दम पर लड़ने का प्लान बनाया है. बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल साफ कहा कि बसपा इस बार पारंपरिक गठबंधनों से अलग राह पर चलेगी और समय से पहले कैंडिडेट घोषित कर दिए जाएंगे. प्देश अध्यक्ष का यह बयान बसपा की पुरानी 'सोशल इंजीनियरिंग' रणनीति की पुनर्वापसी का संकेत है,जिसके सहारे 2007 में पार्टी ने प्रचंड बहुमत हासिल किया था।  बसपा का फोकस मुस्लिम-ब्राह्मण-दलित समीकरण पर है. इस तरह आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बसपा संगठन और प्रत्याशियों का पैमाना तैयार किया है. ब्राह्मण और मुस्लिम कैंडिडेट को चुनावी मैदान में उतारकर और दलितों को संगठन के माध्यम से जोड़कर काम करने की योजना बनाई गई है. बसपा ने 2007 में इसी दांव से सत्ता पर काबिज हुई थी।  मायावती ने 2007 में परंपरागत दलित वोटों के साथ-साथ ब्राह्मण और मुस्लिम वोटरों को लेकर मैदान में उतरीं और इस सोशल इंजीनियरिंग ने विपक्षी दलों को चुनावी रण में धराशाई कर दिया. अब मायावती उसी फॉर्मूले को फिर आजमाना चाह रही हैं।  मायावती पिछले 3 महीने में हुई सभी बैठकों मैं यह बात कहती रही हैं कि ब्राह्मण-मुस्लिम और दलित गठजोड़ के साथ वह 2027 के विधानसभा चुनाव में जाएंगी और एक बार फिर से सत्ता में पूर्ण बहुमत के साथ वापसी करेंगी. अब लखनऊ से दिल्ली  वापस आ गई हैं, जहां से पश्चिमी यूपी के सियासी समीकरण को मजबूत करने की कवायद करेंगी?   

राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए कांग्रेस की रणनीति, कमलनाथ के नाम की चर्चा, और ये भी नाम हो सकते हैं उम्मीदवार

भोपाल  मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर कांग्रेस में गहन मंथन चल रहा है। आंकड़े के हिसाब से पार्टी भले ही मजबूत हो, लेकिन परिस्थितियां कुछ ओर ही बता रही हैं। ऐसे में दिल्ली दरबार कोई भी रिस्क लेने के मूड में नहीं है। उन्हें समझ आ रहा है कि कमलनाथ ही हैं जो कि सीट जीत कर दे सकते हैं। हालांकि राहुल गांधी की पहली पसंद मीनाक्षी नटराजन को ही बताया जा रहा है तो दिग्विजय सिंह चाहते हैं कि पीसी शर्मा को मौका दिया जाए। मध्यप्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं जिसके चुनाव होना हैं। विधायकों की संख्या के हिसाब से दो पर भाजपा की एक तरफा जीत होनी है तो तीसरी सीट के लिए 58 वोट चाहिए और कांग्रेस के पास कुल 66 वोट थे, लेकिन विधायक मुकेश मल्होत्रा को वोटिंग का अधिकार नहीं है तो दतिया विधायक राजेंद्र भारती भी संकट में है। गहन मंथन जारी इसके अलावा निर्मला सप्रे का वोट भी नहीं मिलेगा। इस गणित से 63 वोट ही बच रहे हैं जिससे रिस्क फेक्टर बड़ा हो गया। वहीं, हरियाणा में क्रॉस वोटिंग कराके भाजपा खेल कर चुकी है। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए कांग्रेस में प्रत्याशी को लेकर गहन मंथन चल रहा है। कांग्रेस सुप्रीमो व लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की पहली पसंद मीनाक्षी नटराजन है जो मध्य प्रदेश के मंदसौर से सांसद भी रह चुकी हैं और वर्तमान में मैनेजमेंट संभाल रही हैं।  रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में बदली हुई परिस्थितियों को देखते हुए पार्टी अपने वरिष्ठ नेता कमलनाथ को मैदान में उतार सकती है। उनके खड़े होने पर कांग्रेस का कोई भी विधायक क्रॉस वोटिंग नहीं कर पाएगा। तीसरी सीट फिर से पार्टी के खाते में आ जाएगी नहीं तो राज्यसभा से आकड़ा फिर कम हो जाएगा। इधर, एक समीकरण ये भी चल रहा है कि भाजपा अगर आदीवासी कार्ड खेलती है तो कमलनाथ खुद भी बाला बच्चन के नाम को आगे बढ़ा सकते हैं जिसके लिए वे खुद भी लॉबिंग कर सकते हैं। दिग्गी का पीसी शर्मा पर दांव वैसे तो राज्यसभा जाने के लिए कांग्रेस के कई नेता उत्साहित हैं। दलित कोटे से सज्जनसिंह वर्मा भी चाहते हैं कि उन्हें पार्टी मौका दे तो मौजूदा राज्यसभा सदस्य दिग्जिय सिंह ने पीसी शर्मा का नाम आगे किया जो कि कमलनाथ सरकार में मंत्री भी थे। वे ब्राह्मण समाज को उपकृत कर पार्टी की पकड़ को मजबूत होने का दावा कर रहे हैं। इधर, कमलेश्वर पटेल का नाम भी दावेदारों की सूची में दर्ज हो गया है। खींचतान में हो न जाए नुकसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बीच खींचतान जगजाहिर है। दोनों नेता एक-दूसरे को बिलकुल पसंद नहीं करते हैं। सिंघार की पटरी तो दिग्विजय सिंह से भी नहीं बैठती है, ये बात सिंह को भी समझ में आ गई थी। बड़ी बात ये है कि नाथ के आने पर पटवारी और सिंघार दोनों खुलकर मदद कर सकते हैं। उन्हें मालूम है कि नाथ सभी विधायकों से समन्वय बनाकर अपनी सीट को सुरक्षित कर लेंगे। ये भी हो सकता है कि भाजपा अपना प्रत्याशी भी नहीं उतारे।

‘झालमुड़ी खाई, मिर्ची TMC को लगी…’, पश्चिम बंगाल में बोले पीएम मोदी, तंज कसते हुए

कृष्णानगर  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर में एक जनसभा को संबोधित किया. यहां हुई विजय संकल्प सभा में पीएम मोदी ने टीएमसी सरकार और सीएम ममता बनर्जी पर हमला बोला और उनकी सरकार की नीतियों-नियमों की आलोचना की. जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने चुनावी माहौल पर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि झालमुड़ी मैंने खाई है, पर मिर्ची टीएमसी को लग रही है।  टीएमसी पर पीएम मोदी का निशाना असल में अभी हाल ही में पीएम मोदी ने पश्चिम बंगाल में झालमुड़ी खाई थी, जो चर्चा का विषय बन गई थी. इसी पर सीएम ममता ने पीएम पर निशाना साधते हुए कहा था कि 'यह कोरा नाटक था, झालमुड़ी की दुकान में माइक लगा दिया, फिर एसपीजी से झालमुड़ी बनवाई ताकि एक ड्रामा रचा जा सके! कभी चुनाव के समय वह गुफा में चले जाते हैं, कभी खुद को चायवाला बताते हैं! उन्होंने 10 रुपये निकालकर झालमुड़ी खाई, जरा सोचिए. वह झालमुड़ी पहले से ही उनके लिए तैयार की गई थी. अगर ऐसा नहीं था, तो दुकान के अंदर कैमरा क्यों लगाया गया था? उनसे पूछिए. सब ड्रामा है!' चार मई को मिठाई भी बंटेगी और झालमुड़ी भी पीएम मोदी ने ऐसी ही बयानों पर हमला बोलते हुए कहा कि चार मई को मिठाई भी बंटेगी और झालमुड़ी भी बांटी जाएगी. पीएम मोदी ने कहा कि, राज्य में पहले चरण की वोटिंग चल रही है और वह सभी मतदाताओं का अभिनंदन करते हैं. प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की कि इस बार मतदान का नया रिकॉर्ड बनाया जाना चाहिए।  पीएम मोदी ने चुनावी हिंसा के मुद्दे पर भी बात की. उन्होंने कहा कि पिछले 50 वर्षों में यह पहला चुनाव है, जिसमें हिंसा काफी कम देखने को मिली है. उन्होंने इसे चुनाव आयोग की बड़ी सफलता बताया।  अपने भाषण के दौरान पीएम मोदी ने स्थानीय संस्कृति का भी जिक्र किया और ‘झालमुरी’ को लेकर तंज कसते हुए कहा कि 4 मई को बंगाल में बीजेपी की जीत का जश्न मनाया जाएगा, जिसमें मिठाई भी बांटी जाएगी और झालमुरी भी. उन्होंने कहा कि “मैंने सुना है कि झालमुरी ने कुछ लोगों को झन्नाटेदार झटका दिया है. मैंने झालमुरी खाई है, लेकिन ‘झाल’ टीएमसी को लगा है।  प्रधानमंत्री के इस बयान को तृणमूल कांग्रेस पर सीधा हमला माना जा रहा है. रैली के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और पीएम मोदी ने एक बार फिर बंगाल में सत्ता परिवर्तन का भरोसा जताया। 

शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान: बंगाल में बदलाव नहीं हुआ तो सनातन धर्म खत्म हो जाएगा

कलकत्ता  पश्चिम बंगाल की 152 विधानसभा सीटों पर आज पहले चरण में मतदान चल रहा है। बंगाल में दो राउंड में वोटिंग होनी है और अगले राउंड का मतदान 29 अप्रैल को होगा। राज्य के नेता विपक्ष और भाजपा के सीनियर लीडर शुभेंदु अधिकारी ने भी मतदान किया और इस दौरान मीडिया वालों से बात करते हुए हिंदू कार्ड भी चल दिया। उन्होंने कहा कि इस बार परिवर्तन होगा। यही नहीं इसके आगे बोलते हुए उन्होंने कहा कि यदि बंगाल में इस बार बदलाव नहीं हुआ तो फिर सनातन बंगाल में खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग अच्छा काम कर रहे हैं। फिर भी हर जगह कुछ गुंडे घूम रहे हैं। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि हमारे पोलिंग एजेंट को ही अरेस्ट कर लिया गया है। इस मामले में सख्त ऐक्शन तुरंत लिया जाना चाहिए। शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में अपना वोट डाला। इस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग की ओर से किए इंतजामों की तारीफ की। उन्होंने जनता से बढ़-चढ़कर मतदान करने और शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि मैं शांतिपूर्ण मतदान की प्रार्थना करता हूं। मुझे उम्मीद है कि इस बार टीएमसी ज्यादा व्यवधान नहीं पहुंचा पाएगी। मतदान से पहले की रात बहुत महत्वपूर्ण होती है। हम चुनाव आयोग और केंद्रीय सुरक्षा बलों का धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने व्यवस्था को बनाए रखने में बड़ा सहयोग दिया। नंदीग्राम वही विधानसभा सीट है, जहां से 2021 में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराकर चुनाव जीता था। इस बार ममता बनर्जी ने भबानीपुर से चुनाव लड़ा है और शुभेंदु अधिकारी वहां से भी मैदान में उतरे हैं। उन्होंने एक बार फिर से यह संदेश देने की कोशिश की है कि ममता बनर्जी को वही टक्कर दे सकते हैं अथवा हरा भी सकते हैं। नंदीग्राम में पहले राउंड में ही मतदान हो रहा है तो वहीं भबानीपुर सीट पर दूसरे चरण में वोटिंग होगी। ममता का बांग्ला कार्ड बनाम भाजपा का हिंदू कार्ड भाजपा को उम्मीद है कि इस बार वह सत्ता हासिल कर सकती है। वहीं ममता बनर्जी लगातार बांग्ला कार्ड चल रही हैं, जबकि भाजपा हिंदू कार्ड के सहारे चुनावी वैतरणी पार करना चाहती है। पहले भी ममता बनर्जी बांग्ला कार्ड चलती रही हैं। इस बार उन्होंने यह आरोप मढ़ दिया है कि यदि भाजपा सत्ता में आई तो फिर बंगालियों का अंडा और मछली खाना मुश्किल हो जाएगा। इसके बाद से हालात ऐसे बन गए हैं कि भाजपा के नेता कई जगहों पर मछली खा रहे हैं और इसकी तस्वीरें जारी कर रहे हैं।