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MP के इस शहर में 100 ई-बसों की शुरुआत, यात्रियों के लिए नई सुविधाएं और 10 रूट तय

ग्वालियर ग्वालियर शहर में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में बड़ी तैयारी चल रही है। केंद्र सरकार की पीएम-ई बस सेवा के तहत ग्वालियर को मिलने वाली 100 इलेक्ट्रिक बसें डिपो का काम पूरा होते ही सड़कों पर दौड़ेंगी। इन बसों को इंटेलिजेंट ट्रांजिट मैनेजमेंट सिस्टम (आइटीएमएस) और पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम (पीआईएस) से लैस किया जाएगा, जिससे उनकी हर गतिविधि स्मार्ट सिटी के कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से लाइव मॉनिटर की जा सकेगी। निगम के अधिकारियों ने धार के पीथमपुर में तैयार हो रही बसों का निरीक्षण भी कर लिया है। हालांकि जलालपुर आइएसबीटी और रमौआ डिपो पर सिविल और इलेक्ट्रिकल कार्य देरी से शुरू होने के कारण परियोजना में कुछ विलंब हो सकता है। ऐसे में अब ई-बसों के मई-जून 2026 तक शहर में शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। बसों का संचालन अब नगर निगम की जगह राज्य सरकार की होल्डिंग कंपनी के माध्यम से किया जाएगा, जिसकी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। केंद्र सरकार करेगी सिस्टम का टेंडर बसों में लगाए जाने वाले आइटीएमएस और पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम के लिए टेंडर और कंपनी का चयन केंद्र सरकार द्वारा किया जाएगा। बसों में स्पीकर सिस्टम भी होगा, जिससे किसी भी आपात स्थिति में कंट्रोल रूम से ड्राइवर और कंडक्टर को सीधे निर्देश दिए जा सकेंगे। ऐसे चलेगी ई-बस सेवा पीएम-ई बस सेवा के तहत शहर में कुल 100 बसें चलाई जाएंगी। पहले चरण में 60 बसें और दूसरे चरण में 40 बसें आएंगी। सभी बसें 9 मीटर लंबी मिडी इलेक्ट्रिक बसें होंगी। इनका संचालन जलालपुर आइएसबीटी और रमौआ डिपो से होगा और यहीं बनाए जा रहे चार्जिंग स्टेशन से बसों को चार्ज किया जाएगा। 10 रूट किए गए फाइनल शहर में बस संचालन के लिए 10 रूट तय किए जा चुके हैं। अधिकारियों ने इन रूटों का निरीक्षण कर नागरिकों से सुझाव भी लिए हैं। बसें आते ही इन्हीं रूटों पर संचालन शुरू किया जाएगा। 15.50 करोड़ से बन रहे डिपो और चार्जिंग स्टेशन ई-बस सेवा के संचालन और रखरखाव के लिए रमौआ और आइएसबीटी डिपो पर करीब 15.50 करोड़ रुपए से सिविल और इलेक्ट्रिकल कार्य कराए जा रहे हैं। इसमें रमौआ डिपो पर सिविल व आंतरिक इलेक्ट्रिकल कार्य 4.29 करोड़, चार्जिंग के लिए एचटी कनेक्शन 7.31 करोड़, आइएसबीटी में सिविल व आंतरिक इलेक्ट्रिकल कार्य 1.16 करोड़ और बाहरी इलेक्ट्रिकल कनेक्शन के लिए 2.73 करोड़ रुपए शामिल हैं। 58.14 रुपए प्रति किलोमीटर का भुगतान बस संचालन के लिए एजेंसी को नगर निगम 58.14 रुपए प्रति किलोमीटर का भुगतान करेगा। इसमें केंद्र सरकार 22 रुपए प्रति किलोमीटर देगी, जबकि शेष 36.14 रुपए नगर निगम को वहन करना होगा। निगम को उम्मीद है कि बसों से होने वाले कलेक्शन से इस खर्च की भरपाई हो जाएगी। बसों में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं पीएम-ई बसें पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल होंगी। इनमें सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन, डिजिटल डिस्प्ले और पैसेंजर सूचना प्रणाली जैसी सुविधाएं होंगी। बस जिस स्थान से गुजरेगी, उस क्षेत्र की जानकारी डिस्प्ले स्क्रीन पर दिखाई देगी। ये बसें एक बार चार्ज होने पर लगभग 180 किलोमीटर तक चल सकेंगी। नोडल अधिकारी मुनीष सिकरवार के अनुसार पीथमपुर में बसों का निरीक्षण किया जा चुका है और बसें तैयार हैं। रमौआ और आइएसबीटी में चार्जिंग स्टेशन का कार्य पूरा होते ही संभावित रूप से मई-जून तक बसें ग्वालियर में आ सकती हैं। पहले चरण में 60 बसें आएंगी।  

दूध वाले की 60,000 करोड़ की ठगी, मिडिल क्लास को पड़ा भारी, क्या मिलेगा पैसा वापस?

रूपनगर एक दूध बेचने वाला व्यक्ति जिसने 60,000 करोड़ के घोटाले को अंजाम देकर पूरे देश की इकोनॉमी को ही हिला कर रख दिया, जब भी देश में बड़े-बड़े घोटालों की बात आती है तो इस व्यक्ति और स्कैम का नाम भी जरूर आता है. करोड़ों रुपये के इस घोटाले ने निवेशकों की नींद उठा दी. हम बात कर रहे हैं पीएसीएल (PACL) यानी पर्ल एग्रोटेक कॉरपोरेशन लिमिटेड स्कैम को दूध बेचने वाले निर्मल सिंह भंगू ने अंजाम दिया था. ये मामला अब एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में है, क्योंकि 20 मार्च 2026 को ED ने बड़ी कार्रवाई की. ED ने पंजाब और दिल्ली में PACL से जुड़ी 126 अचल संपत्तियां जब्त कीं, जिनकी कीमत 5,046.91 करोड़ रुपये है. इस एक्शन के साथ इस केस में कुल जब्त संपत्तियों का मूल्य बढ़कर 22,656.91 करोड़ रुपये हो गया है. ED का कहना है कि यह एक ही मामले में अब तक की सबसे बड़ी अटैचमेंट है और ये एजेंसी के इतिहास की सबसे बड़ी कार्रवाई।  इस घोटले की शुरुआत पंजाब के रूपनगर जिले के बेला गांव में रहने वाले निर्मल सिंह भंगू ने की. वह दूध का कारोबार करते था. 1990 के दशक में उन्होंने PACL लिमिटेड शुरू की. कंपनी ने खुद को कृषि भूमि बेचने और विकसित करने वाली फर्म बताया. लोग छोटी-छोटी किस्तों में या कैश में पैसे देते थे, और बदले में कृषि जमीन का प्लॉट मिलने का वादा किया जाता था. कंपनी जिस जमीन में निवेश का दावा करती थी, उसके कोई पुख्ता कागज या सेल डीड निवेशकों को नहीं दिखाए जाते थे. लोगों को सिर्फ एक साधारण रिसीट दी जाती थी, जो असल में ज्यादा भरोसेमंद नहीं होती थी।  10 साल में पैसा 4 गुना करने का वादा कंपनी कहती थी कि वह देश के किसी भी हिस्से में जमीन खरीदेगी, लेकिन निवेशकों को इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता था क्योंकि उन्हें फिक्स रिटर्न का लालच दिया जाता था. कंपनी का दावा था कि 5 साल बाद निवेशक चाहें तो पैसा ले सकते हैं या जमीन हासिल कर सकते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग सिर्फ रिटर्न पर ही ध्यान देते थे. इतना ही नहीं, 10 साल में पैसा 4 गुना करने का वादा भी किया जाता था, जिसने लोगों को तेजी से आकर्षित किया। पोंजी स्कीम से निवेशकों को लुभाया यह एक पोंजी स्कीम थी और इसे उसी तरीके से चलाया गया. शुरुआत में कंपनी ने कुछ निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया, जिससे लोगों का भरोसा बढ़ा और वे दूसरों को भी जोड़ने लगे. दरअसल, नए निवेशकों के पैसे से पुराने निवेशकों को भुगतान किया जा रहा था. ज्यादा रिटर्न देखकर और लोग इसमें पैसा लगाने लगे. स्कीम को फैलाने के लिए कंपनी ने पिरामिड मॉडल अपनाया, जिसमें हर व्यक्ति को अपने नीचे नए लोगों को जोड़ना होता था. एजेंट्स को मोटा कमीशन दिया जाता था, जिससे वे अपने जान-पहचान के लोगों को इसमें शामिल करते गए. लोगों को आकर्षित करने के लिए कंपनी बड़े-बड़े सेमिनार भी आयोजित करती थी, जहां निवेश के फायदे गिनाए जाते थे।  कंपनी दावा करती थी कि वह 1983 से काम कर रही है, जबकि हकीकत में इसकी शुरुआत 1996 में हुई थी. 1983 में पर्ल्स ग्रुप की एक दूसरी कंपनी PGF शुरू हुई थी, जिसका सहारा लेकर लोगों का भरोसा जीता गया. निवेशकों को यह भी कहा जाता था कि अगर कंपनी बंद हो जाए तो वे अपनी रसीद लेकर कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री (MCA) में जा सकते हैं, क्योंकि कंपनी वहां रजिस्टर्ड है. लेकिन सच्चाई यह थी कि वह रसीद किसी कानूनी सुरक्षा की गारंटी नहीं देती थी और निवेशकों के लिए बेकार साबित हुई।  एग्रीकल्चरल इनकम का लालच कंपनी ने देश भर में 70 लाख एजेंट्स की मदद ली. ये एजेंट ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में घूम-घूमकर लोगों को लुभाते थे. टैक्स-फ्री “एग्रीकल्चरल इनकम” का लालच दिया जाता था. कुल मिलाकर कंपनी ने 60,000 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाए, जिसमें से करीब 48,000 करोड़ रुपये निवेशकों को आज तक नहीं लौटाए गए. इस घोटले से प्रभावित लोग 5.5 करोड़ से ज्यादा हैं और इसमें ज्यादातर गांव और मिडिल क्लास के परिवार वाले हैं, जिन्होंने अपनी सारी जमा-पूंजी इसमें लगा दी।  सुप्रीम कोर्ट ने लिया अहम फैसला 1998-99 के दौरान ऐसी कई स्कीमों की शिकायतें मिलने के बाद सेबी ने “कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम (CIS) रेगुलेशन” लागू किया. इसके तहत कंपनियों को निवेशकों से जुटाए गए पैसे का सही इस्तेमाल करना होता है और उससे मिलने वाला रिटर्न ट्रांसपरेंट तरीके से देना होता है. जांच में सेबी ने पाया कि PACL और PGF इन नियमों का पालन नहीं कर रही थीं, जिसके बाद सेबी ने दोनों कंपनियों को बंद करने और निवेशकों का पैसा लौटाने का निर्देश दिया।  मामला आगे बढ़ने पर सेबी सुप्रीम कोर्ट पहुंची और 25 फरवरी 2013 को कोर्ट ने साफ कहा कि यह कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम (CIS) है, इसलिए सेबी को जांच और कार्रवाई का अधिकार है. इस दौरान PACL के प्रमोटर्स निवेशकों के पैसों से अपनी संपत्तियां बढ़ाते रहे. कंपनी ने P7 नाम का एक न्यूज चैनल भी शुरू किया, जिससे लोगों का भरोसा बनाए रखा गया. इतना ही नहीं, कंपनी आईपीएल टीम किंग्स इलेवन पंजाब की स्पॉन्सर भी रह चुकी थी और क्रिकेटर ब्रेट ली को ब्रांड एंबेसडर बनाया गया था. लंबे समय तक मामला कोर्ट में चलता रहा, इसी बीच कंपनी ने तेजी से पैसे जुटाए और करीब 5.5 करोड़ लोग इस घोटाले का शिकार हो गए, जिनमें पंजाब, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के लोग बड़ी संख्या में शामिल थे।  निर्मल सिंह भंगू की गिरफ्तारी 22 अगस्त 2014 को सेबी ने जांच के बाद कंपनी को निवेशकों का पैसा लौटाने का आदेश दिया, लेकिन PACL ने इसका पालन नहीं किया. इसके बाद मामला ED के पास गया, जिसने कंपनी के प्रमुख निर्मल सिंह भंगू से पूछताछ शुरू की और उनकी संपत्तियां अटैच करनी शुरू कर दीं. जांच में ऑस्ट्रेलिया में करीब 500 करोड़ रुपये की संपत्ति समेत कई अन्य असेट्स का पता चला, जिसके बाद रिफंड की प्रक्रिया शुरू की गई. 2016 में CBI ने निर्मल सिंह भंगू को गिरफ्तार किया. जांच के दौरान करीब 1300 संदिग्ध बैंक खाते मिले और लगभग 280 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गईं. साथ … Read more

गर्मी की छुट्टियों में स्पेशल ट्रेनें और बढ़ेगा AC कोच, अब आसानी से मिलेगा सीट

सागर  रेलवे ने गर्मी के मौसम में यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला किया है। इस पहल से यात्रियों को काफी राहत मिलेगी, जिससे उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने में कोई परेशानी नहीं होगी। एसएमटी-गोरखपुर-सीएसएमटी प्रतिदिन स्पेशल ट्रेन 01079 सीएमएमटी से गोरखपुर स्पेशल ट्रेन 1 से 14 अप्रेल तक (14 ट्रिप) एवं समर के समय 15 से 30 अप्रैल तक (16 ट्रिप) प्रतिदिन सीएमएमटी स्टेशन से रात 10.30 बजे चलेगी जो. अगले दिन शाम 6.15 बजे बीना जंक्शन पहुंचकर तीसरे दिन सुबह 10 बजे गोरखपुर स्टेशन पहुंचेगी। इसी प्रकार 01080 गोरखपुर से सीएमएमटी स्पेशल 3 से 16 अप्रेल तक (14 ट्रिप) एवं समर के अवसर पर 17 अप्रेल से 2 मई तक (16 ट्रिप) प्रतिदिन गोरखपुर स्टेशन से दोपहर 2.30 बजे चलेगी, जो अगले दिन सुबह 6.10 बजे बीना रुकते हुए तीसरे दिन रात 12.40 बजे सीएमएमटी स्टेशन पहुंचेगी। इस ट्रेन में कुल 22 कोच रहेंगे। ट्रेन दोनों तरफ से दादर, ठाणे, कल्याण, नासिक रोड, मनमाड, जलगांव, भुसावल, खंडवा, इटारसी, भौपाल, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, उरई, कानपुर, सेंट्रल, लखनऊ, गोंडा, बस्ती एवं खलीलाबाद स्टेशनों पर रुकेगी। एलटीटी-बनारस-एलटीटी द्वि-साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन 01073 एलटीटी से बनारस स्पेशल ट्रेन 1 से 9 अप्रैल तक (4 ट्रिप) एवं समर सीजन में 15 से 30 अप्रैल तक (6 ट्रिप) द्वि- साप्ताहिक (बुधवार एवं गुरुवार) लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्टेशन से दोपहर 12.15 बजे चलेगी, जो अगले दिन सुबह 7.55 बजे बीना पहुंचकर रात 11.30 बजे बनारस स्टेशन पहुंचेगी। इसी प्रकार 01074 बनारस से एलटीटी स्पेशल ट्रेन 3 से 11 अप्रैल तक (4 ट्रिप) एवं समर सीजन में 17 अप्रैल से 2 मई तक (6 ट्रिप) द्वि-साप्ताहिक (शुक्रवार एवं शनिवार) बनारस स्टेशन से सुबह 5.30 बजे चलेगी, जो रात 10.25 बजे बीना पहुंचकर अगले दिन शाम 4.40 बजे लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्टेशन पहुंचेगी। इस ट्रेन में कुल 22 कोच रहेंगे। ट्रेन दोनों तरफ से ठाणे, कल्याण, इगतपुरी, नासिक रोड, जलगांव, भुसावल, खंडवा, इटारसी. रानी कमलापति बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, उरई गोविंदपुरी, फतेहपुर एवं सूबेदारगंज (प्रयागराज) स्टेशनों पर रुकेगी। अहमदाबाद-कोलकाता में बढ़ाया गया एसी कोच रेलवे ने समर सीजन में यात्रियों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए बीना जंक्शन से होकर जाने वाली अहमदाबाद-कोलकाता-अहमदाबाद एक्सप्रेस एक थर्ड एसी कोच मई माह से अगले आदेश तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। 19413/14 अहमदाबाद-कोलकाता-अहमदाबाद एक्सप्रेस में 27 मई को अहमदाबाद से एवं 30 मई को कोलकाता से इस ट्रेन में अब 6 थर्ड एसी कोच होंगें। 

मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल में खाली पड़े 60% पद, 187 में से सिर्फ 73 कर्मचारी ही कार्यरत

भोपाल  मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB), जो विभिन्न शासकीय विभागों के लिए भर्ती प्रक्रिया संचालित करता है, खुद अपने ही विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। हालात यह हैं कि मंडल में स्वीकृत 187 पदों के मुकाबले सिर्फ 73 कर्मचारी ही कार्यरत हैं, जबकि 114 पद अब भी खाली पड़े हैं। यानी करीब 60% पद रिक्त हैं। मंडल का मुख्य कार्य अलग-अलग सरकारी विभागों के लिए भर्ती करना है, लेकिन अपने ही यहां कर्मचारियों की कमी के कारण यह काम प्रभावित हो रहा है। कई अहम पद जैसे अतिरिक्त संचालक, नियंत्रक, संयुक्त संचालक, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, प्रोग्रामर, सहायक संचालक, लेखा अधिकारी और अधीक्षक के पद खाली हैं।  डिप्टी कंट्रोलर के 5 पदों में से 4 खाली हैं, जबकि जूनियर अकाउंट्स ऑफिसर के 2 पदों में से 1 पद रिक्त है। सहायक ग्रेड-1 के 13 में से 10 पद, सहायक ग्रेड-2 के 28 में से 15 पद और सहायक ग्रेड-3 के 41 में से 23 पद खाली हैं। डाटा एंट्री ऑपरेटर के 5 में से 2 पद भी रिक्त हैं। इसके अलावा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के अधिकांश पद भी खाली पड़े हैं।   अतिरिक्त प्रभार से चल रहा काम कई महत्वपूर्ण पदों पर अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देकर काम चलाया जा रहा है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय शुक्ला मंडल के अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं, जबकि अजॉय कटेसरिया निदेशक का अतिरिक्त जिम्मा देख रहे हैं। भर्ती परीक्षाओं पर भी असर स्टाफ की कमी का असर मंडल की कार्यप्रणाली पर भी पड़ रहा है। पिछले साल मंडल ने 16 परीक्षाएं आयोजित की थीं, जबकि इस साल 22 परीक्षाएं कराने की योजना है। कर्मचारियों की कमी के कारण कई काम आउटसोर्स कर्मचारियों से कराए जा रहे हैं और निगरानी भी प्रभावित हो रही है। मंडल में पद खाली रहने की एक बड़ी वजह भर्ती परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताएं भी मानी जा रही हैं, जिसके चलते व्यवस्था प्रभावित हुई है। 

कानपुर मेट्रो के कॉरिडोर-1 के शेष हिस्से में जल्द शुरू होंगी यात्री सेवाएं, कॉरिडोर-2 का भी तेज गति से हो रहा निर्माण

कानपुर मेट्रो के कॉरिडोर-1 और 2 का विस्तारीकरण प्रगति पर, मार्च 2027 तक होगा पूरा कानपुर मेट्रो के कॉरिडोर-1 के शेष हिस्से में जल्द शुरू होंगी यात्री सेवाएं, कॉरिडोर-2 का भी तेज गति से हो रहा निर्माण कानपुर मेट्रो के विस्तार से शहर को मिलेगी आधुनिक यातायात व्यवस्था और औद्योगिक विकास को रफ्तार लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सतत विकास के विजन के अनुरूप प्रदेश के प्रमुख शहरों में तेज, भविष्योन्मुखी और प्रदूषण रहित मेट्रो परियोजनाओं का विकास किया जा रहा है। इस क्रम में औद्योगिक नगरी कानपुर में मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के तहत विकसित हो रही मेट्रो परियोजना तेजी से अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। जिसके तहत कानपुर मेट्रो परियोजना के कॉरिडोर-1 में आईआईटी कानपुर से कानपुर सेंट्रल तक मेट्रो सेवा का सुगम परिचालन हो रहा है, शेष भाग का कार्य इस वर्ष तक पूरा हो जाएगा। जिसमें बारादेवी से नौबस्ता तक पांच एलिवेटेड स्टेशनों में टेस्टिंग और ट्रायल रन चल रहा है। वहीं कॉरिडोर-2 के तहत सीएसए यूनिवर्सिटी से बर्रा मेट्रो स्टेशन तक निर्माण कार्य भी तेज गति से चल रहा है, जिसके मार्च 2027 तक पूरा होने की संभावना है। कॉरिडोर-1 के 5 एलिवेटेड स्टेशनों में चल रहा है ट्रायल रन कानपुर मेट्रो का कॉरिडोर-1, जो आईआईटी से नौबस्ता तक लगभग 23 किलोमीटर लंबा है, इसमें से 15.4 किलोमीटर का सेक्शन परिचालन में है। शेष हिस्से में अंडरग्राउंड व एलिवेटेड दोनों सेक्शन का निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है। इसके तहत झकरकट्टी से ट्रांसपोर्ट नगर तक दो अंडरग्राउंड स्टेशनों का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, इनमें फिनिशिंग का कार्य भी समाप्ति की ओर है। टीबीएम सुरंग की अप लाइन में ट्रैक बिछाया जा चुका है, जबकि डाउन लाइन में कार्य अंतिम चरण में है। वहीं, बारादेवी से नौबस्ता तक पांच एलिवेटेड स्टेशनों का भी संरचनात्मक कार्य पूरा हो चुका है, फिनिशिंग का कार्य तेज गति से चल रहा है। इस सेक्शन में जनवरी 2026 से ट्रेन टेस्टिंग और ट्रायल रन किया जा रहा है, जिससे जल्द ही इस हिस्से में यात्री सेवाएं शुरू होने की उम्मीद है। सीएसए यूनिवर्सिटी से बर्रा तक कॉरिडोर-2 में हो रहा तेज गति से विकास कानपुर मेट्रो परियोजना के तहत सीएसए यूनिवर्सिटी से बर्रा तक लगभग 8.6 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर-2 का निर्माण कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस कॉरिडोर के तहत रावतपुर से डबल पुलिया तक तीन भूमिगत स्टेशनों का निर्माण कार्य जारी है, टीबीएम सुरंग का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इसके अलावा सीएसए यूनिवर्सिटी/विजय नगर से बर्रा तक पांच एलिवेटेड स्टेशनों का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। ये सभी निर्माण कार्य मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कानपुर मेट्रो परियोजना के पूरा होने से शहर की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इससे न केवल ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या में कमी आएगी, बल्कि शहर के आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी। कानपुर मेट्रो परियोजना, शहर को आधुनिक, सुगम और पर्यावरण अनुकूल परिवहन प्रणाली प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

एमपी हाईकोर्ट का अहम फैसला, पति की संपत्ति और नौकरी पर दावे को लेकर दिया आदेश

जबलपुर  भारतीयों में आजकल बिना विधिवत तलाक लिए दूसरी शादी करने का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। कई समाजों में बहुविवाह की भी प्रथा है जिसका सहारा लेकर इसे मान्यता देने की कोशिश की जाती है। इस पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। पति की संपत्ति और नौकरी के दावे पर एमपी हाईकोर्ट MP High Court ने बड़ा फैसला देते हुए दूसरी पत्नी की याचिका खारिज कर दी। महिला ने आदिवासी समाज की प्रथाओं का जिक्र किया था जिसपर कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बिना ठोस साक्ष्य के बहुविवाह की परंपरा मान्य नहीं की जा सकती है। इसी के साथ दूसरी पत्नी का दावा भी खारिज कर दिया। आदिवासी समाज में बहुविवाह की प्रथा है। इसका हवाला देकर शहडोल की पाव जनजाति की महिला मुन्नी बाई ने खुद को भगत सिंह की दूसरी पत्नी बताते हुए पति की मौत के बाद मिले नौकरी से जुड़े लाभ और उनकी संपत्ति देने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इधर पहली पत्नी फूलमती ने खुद को अकेली वैध पत्नी बताते हुए कहा कि सरकारी सेवा अभिलेख में भी पत्नी के तौर पर उनका ही नाम दर्ज है। जबलपुर हाईकोर्ट ने केस की सुनवाई करते हुए कहा है कि बिना प्रमाण के किसी समाज में बहुविवाह की परंपरा को मान्यता नहीं दी जा सकती। सिर्फ आदिवासी परंपरा का हवाला देकर किसी महिला को पति की संपदा या नौकरी में अधिकार नहीं मिल सकता। इसके साथ शहडोल की महिला की याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे दावे के लिए ठोस साक्ष्य जरूरी हैं। दरअसल, मुन्नी बाई ने याचिका दायर कर कहा था, वह भगत सिंह की दूसरी पत्नी है। वे पाव जनजाति से हैं। इसमें बहुविवाह की परंपरा है। उन पर हिन्दू विवाह अधिनियम लागू नहीं होता। उसने पति की मृत्यु के बाद संपत्ति में हिस्सा और नौकरी से जुड़े लाभ देने की मांग की थी। पहली पत्नी फूलमती ने इसका विरोध किया। दस्तावेज में पहली पत्नी का नाम पहली पत्नी फूलमती की ओर से तर्क दिया गया, वह अकेली वैध पत्नी है। सरकारी सेवा अभिलेख में भी पत्नी के तौर पर उनका नाम दर्ज है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ता ने कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया है। कोई मान्य दस्तावेज, परंपरा का प्रमाण भी नहीं पेश किए। इसके बाद फैसला सुनाया।

उत्तर बस्तर कांकेर में जल संरक्षण और आजीविका पर कार्य करने वाली महिलाओं ने साझा किया अपना अनुभव

उत्तर बस्तर कांकेर : आजीविका और जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले समूह की महिलाओं ने साझा किए अनुभव संकेतकों पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले हुए सम्मानित उत्तर बस्तर कांकेर ग्रामों में जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे कार्यकर्ताओं, सामुदायिक सदस्यों, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों एवं अन्य हितधारकों के अनुभवों को साझा करने शुक्रवार 20 मार्च को जिला पंचायत एवं गैर शासकीय संगठन प्रदान के संयुक्त तत्वावधान में जिला पंचायत के सभाकक्ष में "प्रेरणा से प्रगति" नामक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और पंचायत स्तर पर जल संरक्षण और संवर्धन पर चर्चा की गई, साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री हरेश मंडावी ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम समुदाय एवं ग्राम पंचायतों को प्रेरित करने के साथ-साथ उनके कार्यों को नई दिशा मिलती है। उन्होंने पंचायत उन्नति सूचकांक (पीएआई) के महत्व, ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) की प्रभावशीलता तथा महिला स्वयं सहायता समूहों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही यह भी बताया कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में एक डिजिटल टूल विकसित कर ग्राम पंचायत विकास योजना की प्रक्रिया को डिजिटाइज किया गया है, जिसके माध्यम से जिले की प्रगति अब ऑनलाइन रूप से देखी जा सकती है। इस डिजिटल व्यवस्था से योजनाओं की निगरानी, पारदर्शिता एवं समयवद्ध क्रियान्वयन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों, स्व सहायता समूह की महिलाओं एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के कैडरों ने अपने अनुभव साझा किए। कई प्रतिभागियों ने बताया कि किस प्रकार जल संसाधन आधारित आजीविका गतिविधियों जैसे मत्स्य पालन, सब्जी उत्पादन एवं अन्य कृषि आधारित कार्यों के माध्यम से उनकी आय में वृद्धि हुई है तथा जीवन स्तर में सुधार आया है। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट कार्य करने वाले संकुल स्तरीय संघ, उच्च पंचायत उन्नति सूचकांक प्राप्त करने वाली तथा बेहतर ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार करने वाली ग्राम पंचायतों एवं सक्रिय राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन कैडरों का सम्मान किया गया। विशेष रूप से आजीविका संवर्धन हेतु जल क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली दीदियों को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने जल संसाधनों के प्रभावी उपयोग से न केवल अपनी आय में वृद्धि की है, बल्कि अन्य समुदाय सदस्यों के लिए भी प्रेरणा का कार्य किया है। इस अवसर पर जिला एवं जनपद पंचायतों के अधिकारी कर्मचारी और समूह की महिलाएं उपस्थित थीं।

250 करोड़ का जेट विमान खरीदी मध्यप्रदेश सरकार ने, जल्द मिलेगी किराए के विमान से छुटकारा

 भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार को जल्द ही किराए के विमान से मुक्ति मिल जाएगी। राज्य सरकार ने 250 करोड़ का जेट विमान खरीदा है जिसकी जल्द डिलीवरी होगी। कनाडा में सरकार का नया विमान लगभग तैयार हो चुका है। भोपाल लाने के पहले इसका परीक्षण किया जाएगा। इसके लिए पायलट व दो इंजीनियर जून में कनाडा जाएंगे। विमान की जांच के ही इस काम में 50 लाख रुपए लगेंगे। अभी सरकार के पास खुद का विमान नहीं है। जरूरत के वक्त राज्य सरकार द्वारा किराए से विमान लिए जा रहे हैं। कनाडा में राज्य सरकार का नया जेट विमान (चैलेंजर 3500) लगभग तैयार हो गया है। इसे तैयार कर रही बाम्बार्डियर कंपनी जून 2026 के अंत तक सरकार को सौंपने जा रही है। डिलीवरी लेने से पहले विमान की तकनीकी जांच की जाएगी जिसके लिए सरकार ने समिति गठित कर दी है। विमान की तकनीकी जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम चिह्नित की गई है। ये निजी विशेषज्ञ हैं, जो जांच के लिए 50 लाख रुपए ले रहे हैं। विमान की जांच टीम में विमानन विभाग में पदस्थ पायलट विश्वास राय, तकनीकी विशेषज्ञ जेपी शर्मा और रश्मि सिंह शामिल हैं। 250 करोड़ का है विमान, एक बार में करीब 3500 किमी का सफर तय करेगा राज्य सरकार के नए विमान की कीमत 250 करोड़ है। यह अत्याधुनिक जेट विमान है जिसमें अनेक खूबियां हैं। नया विमान 870 प्रति किमी तक की रफ़्तार से उड़ान भर सकता है। विमानन विशेषज्ञों के अनुसार यह जेट विमान एक बार में करीब 3500 किमी का सफर तय करेगा। एक वरिष्ठ अफसर ने इसे अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस विमान बताया है। अधिकारी के अनुसार ​इसमें 8 से 10 यात्री सफर कर सकते हैं। विमान में दो कैबिन क्रू अलग से होंगे। नया जेट विमान आते ही राज्य सरकार को किराए से राहत मिल जाएगी बता दें, अभी सरकार के पास खुद का विमान नहीं है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के हवाई दौरों या अन्य अनिवार्य सेवाओं के लिए जरूरत के वक्त राज्य सरकार द्वारा किराए से विमान लिए जा रहे हैं। इसपर हर महीने लाखों रुपए खर्च हो रहे हैं। नया जेट विमान आते ही राज्य सरकार को किराए से राहत मिल जाएगी।

लाडली लक्ष्मी योजना में तीन बेटियों को मिलते हैं 1.43 लाख रुपए, क्या हैं शर्तें?

भोपाल  भारतीय समाज में हर घर में बेटियों को मां लक्ष्मी का रूप माना जाता है। यही कारण है कि उसके जन्म लेते ही, हर कोई कह उठता है, लक्ष्मी आई है… आजकल अस्पताल से घर पहुंचने पर इस नवजात लक्ष्मी और इसे जन्म देने वाली मां का स्वागत ढोल-नगाड़ों के साथ किया जाता है, गृहप्रवेश का यह तरीका धूमधाम से मनाया जाने लगा है। इस बीच मध्य प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री लाडली लक्ष्मी योजना लक्ष्मी स्वरूप बेटी के साथ घर में पहुंच जाते हैं 1.43 लाख रुपए। अगर आपके यहां भी आज हुआ है बेटी का जन्म तो जरूर जानें क्या है मध्य प्रदेश सरकार की यह खास योजना, कैसे कर सकते हैं आवेदन और किन दस्तावेजों की पड़ेगी जरूरत, कैसे आपकी बेटी को मिलेगा 1.43 लाख रुपए का लाभ… यहां जानें लाडली लक्ष्मी योजना क्या है मध्य प्रदेश में बेटियों के जन्म को प्रोत्साहित करने के साथ ही, उनके भविष्य को संवारने में मदद के लिए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री लाडली लक्ष्मी योजना (Ladli Laxmi Yojana) लॉन्च की थी। इस योजना के तहत बेटियों को अलग-अलग चरणों में आर्थिक मदद दी जाती है। बेटियों को लखपति बनाने के उद्देश्य के लिए छठी क्लास में एडमिशन लेने से 21 साल की उम्र तक प्रदेश सरकार की ओर से कुल 1,43,000 रुपए दिए जाने का प्रावधान किया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग में संचालित की जा रही इस योजना के तहत पहले 1,18,000 रुपए दिए जाते थे, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 1,43,000 रुपए कर दिया गया। वर्तमान में लाडली बहना योजना के तहत यही बढ़ी हुई राशि मिल रही है। मुख्यमंत्री Ladli Laxmi Yojana के प्रमुख उद्देश्य     प्रदेश में लिंगानुपात में सुधार लाना     बेटियों के जन्म पर समाज में सकारात्मक सोच पैदा करना     परिवार नियोजन को प्रोत्साहित करना, खासतौर पर 2 बेटियों के जन्म के बाद बेटे की इच्छा रखने वालों को हतोत्साहित करना     कन्या भ्रूण हत्या/शिशु हत्या को रोकना।     बाल विवाह जैसी कुरीतियों पर रोक लगाना Ladli Laxmi Yojana के लाभ क्या-क्या     बेटी के नाम से 1,43,000 रुपए का प्रमाण पत्र दिया जाएगा क्लास – स्कॉलरशिप (रुपए)     छठी में प्रवेश पर – 2000     9वीं में प्रवेश – 4000     11वीं में प्रवेश – 6000     12वीं में प्रवेश – 6000     ग्रेजुएशन या प्रोफेशनल कोर्स में एडमिशन (न्यूनतम 2 साल) 25,000 (2 किस्तों में कोर्स के पहले और आखिरी साल में)21 साल की उम्र होने पर 1,00,000 रुपए नोट: 1 लाख रुपए की राशि तभी मिलेगी, अगर बेटी 12वीं की परीक्षा देगी या अगर शादी हो गई है तो बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत शादी की उम्र के नियम का पालन किया गया हो। Ladli Laxmi Yojana के लिए कौन कर सकता है आवेदन जानें पात्रता शर्तें सामान्य स्थिति     1 जनवरी 2006 या उसके बाद जन्मी बेटियों को इसका लाभ मिल सकेगा।     बेटी का पंजीकरण पास के आंगनवाड़ी केंद्र में कराना अनिवार्य है।     बेटी के माता-पिता मूल रूप से मध्य प्रदेश निवासी होने चाहिएं     माता-पिता इनकम टैक्स न भरते हों।     माता-पिता की 2 या उससे कम संतान होनी चाहिए, दूसरी संतान के बाद परिवार नियोजन अपनाया गया हो, तभी इस योजना का लाभ मिल सकता है।     पहली संतान अगर बेटी होती है, तो बिना परिवार नियोजन के भी लाभ मिलेगा जबकि दूसरी संतान से जन्मीं बेटी को लाभ मिलने के लिए परिवार नियोजन अपनाना अनिवार्य है, तभी योजना का लाभ लिया जा सकेगा। विशेष परिस्थितियों में     जिस परिवार में अधिकतम 2 संतान हैं और माता या पिता का निधन हो गया है तो बच्ची के जन्म के 5 साल तक रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है।     अगर महिला या पुरुष दूसरी शादी करते हैं तो पहले से 2 बच्चे हैं तो फिर लाभ नहीं मिलेगा     अगर पहली प्रसूति में ही एक साथ 3 बच्चियां होती हैं, तो तीनों को ही लाडली लक्ष्मी योजना का लाभ मिलेगा     जेल में बंद महिला कैदियों या दुष्कर्म पीड़िता की बेटियों को भी योजना के तहत लाभ मिलेगा     अगर स्वास्थ्य कारण से परिवार नियोजन नहीं हुआ है तो, 1 साल की जगह 2 साल तक आवेदन स्वीकार करने का अधिकार कलेक्टर को दिया गया है।     देरी से मिले आवेदनों पर फैसला लेने का अधिकार जिला कलेक्टर के पास होगा।     अनाथालय में प्रवेश के 1 साल में और बालिका की उम्र 5 वर्ष पूर्ण होने से पूर्व या गोद लेने वाले माता-पिता द्वारा गोद लेने के 1 साल के अंदर आवेदन करना होगा। कैसे मिलेगा लाडली लक्ष्मी योजना का पैसा लाडली लक्ष्मी योजना का पैसा चरणबद्ध तरीके से बेटी के खाते में ट्रांसफर किया जाएगा। यह पैसा DBT के माध्यम से भेजा जाएगा। Ladli Laxmi Yojana के लिए कैसे करें आवेदन, जानें स्टेप बाय स्टेप 1 – मुख्यमंत्री लाडली लक्ष्मी योजना के लिए आप पोर्टल ladlilaxmi.mp.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं     पोर्टल पर आपको ऊपर दायीं ओर 'आवेदन करें' का विकल्प दिखेगा, इस पर क्लिक करें     अब लाडली लक्ष्मी योजना की पात्रता और जरूरी दस्तावेजों की लिस्ट खुल जाएगी     नीचे स्वघोषणा को तीनों प्वाइंट को पढ़कर टिक करें और 'आगे बढ़ें' पर क्लिक करें 2 – अब अपने समग्र आईडी की जानकारी देनी होगी (Ladli Laxmi Yojana)     सबसे पहले लाडली बेटी की समग्र आईडी भरिए     फिर परिवार यानी माता-पिता की समग्र आईडी भरिए     अब पहली बेटी या दूसरी बेटी या जुड़वां बेटियों के लिए आवेदन कर रहे हैं, उस बॉक्स का चयन करें     समग्र से जानकारी प्राप्त करें ऑप्शन पर क्लिक करें 3- इसके बाद परिवार की पूरी जानकारी भरें     फिर मांगा गया अन्य विवरण भरें और आगे बढ़ें     अब जरूरी दस्तावेज को अपलोड करें     आप नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र, CSC या लोक सेवा केंद्र जाकर भी ऑनलाइन फॉर्म भरवा सकते हैं। Ladli Laxmi Yojana के लिए क्या हैं जरूरी दस्तावेज     बालिका का माता-पिता के साथ फोटो     मूल निवासी/स्थानीय/माता या … Read more

योगी सरकार 22 मार्च को 1,228 नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को सौंपेगी नियुक्ति पत्र

योगी सरकार 1,228 नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को 22 मार्च को सौंपेगी नियुक्ति पत्र  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को लोकभवन में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में 492 अभ्यर्थियों को सौंपेंगे पत्र  736 नवचयनित अभ्यर्थियों को लाइव प्रोग्राम के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि सौंपेंगे नियुक्ति पत्र 13 राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं 2 संस्थानों में दी जाएगी नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को तैनाती    लखनऊ  योगी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में लगातार ठोस और दूरदर्शी कदम उठा रही है। इसी कड़ी में योगी सरकार रविवार को 1,228 नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित करेगी। इनमें से 492 नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोकभवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में नियुक्ति पत्र वितरित करेंगे जबकि शेष को लाइव प्रोग्राम के दौरान 13 राजकीय मेडिकल कॉलेज और 2 संस्थानों में जनप्रतिनिधियों द्वारा नियुक्ति पत्र सौंपे जाएंगे। बता दें कि योगी सरकार ने इस वर्ष प्रदेश के डेढ़ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने का निर्णय लिया है। इसी के तहत कई विभागों में भर्ती प्रक्रिया चल रही है जबकि विभिन्न विभागों में भर्ती का विज्ञापन निकालने की तैयारी अंतिम चरण में है।  13 राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं दो संस्थानों को मिलेंगे नर्सिंग अधिकारी अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अमित कुमार घोष ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभाग में खाली पदों पर नियुक्ति करने के निर्देश दिए थे ताकि प्रदेश के ज्यादा से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी मिल सके। इसी के तहत चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से 13 राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं 2 चिकित्सा संस्थानों में रिक्त नर्सिंग अधिकारियों के पदों के लिए भर्ती निकाली गई थी। ऐसे में लोक सेवा आयोग, प्रयागराज द्वारा चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग में 1,228 नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। योगी सरकार रविवार को सभी नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्त पत्र वितरित करेगी। सीएम योगी 492 नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को सौंपेंगे नियुक्ति पत्र चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग की सचिव एवं महानिदेशक डॉ. सारिका मोहन ने बताया कि 13 राजकीय मेडिकल कॉलेज क्रमश: आगरा, कानपुर, प्रयागराज, मेरठ, झांसी, गोरखपुर, अंबेडकरनगर, कन्नौज, आजमगढ़, जालौन, सहारनपुर, बांदा एवं बदायूं के साथ 2 संस्थान जेके कैंसर संस्थान तथा हृदय रोग संस्थान कानपुर के लिए 1,228 नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसमें 1,097 महिला अभ्यर्थी और 131 पुरुष अभ्यर्थी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को लोकभवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में 492 नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित करेंगे। वहीं, सभी 13 राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं 2 संस्थानों में लाइव प्रोग्राम के दौरान जनप्रतिनिधियों द्वारा 736 नवचयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे।  अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर 94 नवचयनित मुख्य सेविकाओं को वितरित किए गए थे नियुक्ति पत्र योगी सरकार ने इस वर्ष प्रदेश के युवाओं को डेढ़ लाख सरकारी नौकरी देने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में रविवार को 1,228 नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे। इसके अलावा 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 94 नवचयनित मुख्य सेविकाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए थे। वहीं, हाल ही में उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं पदोन्नति बोर्ड की ओर से दरोगा एवं समकक्ष के 4,543 पदों की परीक्षा संपन्न कराई गई। इसके अलावा विभिन्न विभागों की ओर से भी भर्ती प्रक्रिया चल रही है।