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स्वास्थ्य सुरक्षा की नई शुरुआत: जालंधर में लॉन्च हुई मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना, 8 जनवरी से कार्ड निर्माण

आदमपुर  पंजाब सरकार ने नए साल में राज्य के सभी नागरिकों के लिए मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू करने का ऐलान किया है। इस योजना के तहत पंजाब के सभी नागरिकों को 10 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा मिलेगा और वे सभी सरकारी अस्पतालों और पैनल में शामिल प्राइवेट अस्पतालों में मुफ्त इलाज करवा सकेंगे। ब्लॉक आदमपुर में 8 जनवरी से लाभपात्रियों के बीमा कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस योजना के सफल क्रियान्वयन और नागरिकों को योजना के बारे में अधिक से अधिक जानकारी देने के उद्देश्य से सी.एच.सी. आदमपुर में आशा वर्कर्स की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सिविल सर्जन डॉ. राजेश गर्ग के दिशा-निर्देश और सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. कुलदीप सिंह की देखरेख में आशा वर्कर्स को योजना के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। एस.एम.ओ. डॉ. कुलदीप सिंह ने बैठक में बताया कि इस योजना के तहत कार्ड बनाने के लिए हर गांव में कैंप लगाए जाएंगे और यह कार्ड गांव में चल रहे कॉमन सर्विस सैंटर पर बनाए जाएंगे। आशा वर्कर्स को निर्देश दिया गया कि वे नागरिकों को इस योजना के बारे में जागरूक करें इस दौरान डॉ. हरप्रीत सिंह और बी.ई.ई. चंदन मिश्रा भी उपस्थित थे।

यूपी चुनावी तैयारी तेज: 6 मार्च को संशोधित मतदाता सूची जारी

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को त्रुटिरहित, पारदर्शी और अद्यतन बनाने की दिशा में भारत निर्वाचन आयोग ने अहम कदम उठाते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम की तिथियों में संशोधन कर दिया है। आयोग के इस निर्णय से मतदाता सूची में नाम जोड़ने, सुधार कराने और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया को और सुव्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, अब मतदाता सूची का आलेख्य प्रकाशन छह जनवरी 2026 को होगा, जबकि अंतिम प्रकाशन छह मार्च 2026 को किया जाएगा। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा अर्हता तिथि एक जनवरी 2026 के आधार पर चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण की समय-सारिणी में यह बदलाव किया गया है। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना और सूची को पूरी तरह त्रुटिरहित बनाना है, ताकि आगामी चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की विसंगति न रहे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, संशोधित कार्यक्रम के तहत 6 जनवरी 2026 को मतदाता सूची का आलेख्य प्रकाशन किया जाएगा। इसके बाद 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक दावे और आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। इस अवधि में नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, मृत अथवा स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने और नाम, पता या अन्य विवरणों में सुधार के लिए आवेदन किए जा सकेंगे। इसके साथ ही 6 जनवरी से 27 फरवरी 2026 तक नोटिस चरण, गणना प्रपत्रों पर निर्णय तथा प्राप्त दावों एवं आपत्तियों का विधिवत निस्तारण किया जाएगा। इस दौरान बूथ लेवल अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारी सभी आवेदनों की जांच कर निष्पक्ष निर्णय सुनिश्चित करेंगे। समस्त प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद उत्तर प्रदेश की अद्यतन और शुद्ध मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 6 मार्च 2026 को किया जाएगा। निर्वाचन विभाग ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर मतदाता सूची में अपना नाम अवश्य जांच लें और यदि किसी प्रकार की त्रुटि हो तो समय रहते दावा या आपत्ति दर्ज कराएं। निर्वाचन आयोग के इस संशोधित कार्यक्रम से मतदाता सूची की गुणवत्ता में सुधार होगा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक मजबूत आधार मिलेगा। 

Year Ender 2025: अपराधियों पर सख्ती का असर, हरियाणा में संगठित गैंग और साइबर क्राइम पर बड़ी चोट

चंडीगढ़  हरियाणा पुलिस ने 2025 में कुल अपराधों में कमी दर्ज की, संगठित गैंग्स, साइबर अपराधियों और हिंसक अपराधियों पर कड़ा प्रहार किया। साथ ही वर्ष 2026 में तकनीक, फॉरेंसिक विज्ञान और पुलिस के लास्ट माइल डोमिनेशन पर और तेजी लाने का संकल्प लिया गया है। और आंकड़ों के अनुसार 2025 में कुल अपराधों का रूझान हरियाणा में आई.पी.सी./बी.एन.एस. विशेष स्थानीय कानूनों के तहत कुल संज्ञेय अपराध 2024 के 15,574 मामलों से घटकर 2025 में 1,27,850 रह गए, यानी 7,724 मामलों की कमी (लगभग 5.7 प्रतिशत) । आई.पी.सी./बी. एन.एस. के अपराध अकेले 1,10,78 से घटकर 1,07,242 हो गए जबकि विशेष कानूनों के मामले 17 प्रतिशत से अधिक गिरे। गैंग्स पर कार्रवाई और लास्ट माइल डोमिनेशन हरियाणा पुलिस ने जमीन पर लास्ट माइल डोमिनेशन मजबूत किया। साल के आखिरी दो महीने में 4,000 से अधिक हिंसक और दोहराव वाले अपराधियों को जेल भेजकर संगठित अपराध और उगाही के नेटवर्क को कमजोर किया। इस अवधि में लगातार निगरानी, खुफिया तंत्र और तकनीकी मदद से 100 से ज्यादा हत्या की योजनाएं पहले ही पकड़ लीं, जिससे जानमाल का नुकसान रोका गया और कानून का राज मजबूत हुआ। व्यक्ति के खिलाफ हत्या के मामले 958 से घटकर 904 (करीब 5.6 प्रतिशत कम), गंभीर चोट के 3,892 से 3,524 (लगभग 9.5  प्रतिशत गिरावट), फिर भी पुलिस की तत्परता से पूरे राज्य में 100 से अधिक हत्या की साजिशें नाकाम की गई। लूट के मामले 24 प्रतिशत, छिनैती 12 प्रतिशत से अधिक और चोरी 1 प्रतिशत से ज्यादा घटीं, जो बेहतर रोकथाम और हॉटस्पॉट पर तैनाती का नतीजा है। महिलाओं के खिलाफ बलात्कार के मामले 1373 से तेजी से घटकर 1,025 (25 प्रतिशत से अधिक कमी), छेड़छाड़ और दहेज हत्या में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज हुई। अपहरण और एससी/एसटी एक्ट के मामले भी नीचे आए।  

यूपी में 75 साल में 21 मुख्यमंत्री बने, ब्राह्मणों का 6 बार शासन, 32 साल से सियासी वनवास में कौन?

लखनऊ    उत्तर प्रदेश की सियासत में लंबे समय तक सत्ता की कमान ब्राह्मण समाज के हाथों में रही है. नारायण दत्त तिवारी के बाद यूपी में कोई भी ब्राह्मण समाज से मुख्यमंत्री नहीं बन सका. सूबे में पिछले 3 दशकों से राजनीतिक पार्टियों के लिए ब्राह्मण समाज महज एक वोटबैंक बनकर रह गया है. ऐसे में बीजेपी के ब्राह्मण विधायकों की एक बैठक ने इस कड़ाके के ठंड में सियासी गर्मी बढ़ा दी है. विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान 23 दिसंबर को लखनऊ में कुशीनगर से बीजेपी विधायक पंचानंद पाठक के सरकारी आवास पर ब्राह्मण विधायकों की एक बैठक की, जिसमें 40 से ज्यादा ब्राह्मण समाज के विधायकों ने शिरकत किया था. इसके बाद सूबे में ब्राह्मण पॉलिटिक्स की फिर से चर्चा तेज हो गई. ब्राह्मण विधायकों को बैठक करने पर यूपी बीजेपी के नए अध्यक्ष पंकज चौधरी ने नसीहत और चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि इस तरह की बैठकें बीजेपी के संविधान में नहीं हैं. इसके बाद पीएन पाठक ने सोमवार देर शाम एक ट्वीट कर जवाब दिया. उन्होंने साफ कहा कि ब्राह्मण हमेंशा से समाज और सनातन धर्म का नेतृत्व करता रहा है. इस तरह से यूपी की जातीय गोलबंदी के बीचसवाल उठता है कि आखिर यूपी में किस-किस जाति के मुख्यमंत्री बने हैं. यूपी में किस जाति के कितने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश की सियासत में अब के बने मुख्यमंत्रियों पर नजर डालें तो आजादी के बाद से लेकर अभी तक कुल 21 मुख्यमंत्री हुए, इसमें सबसे ज्यादा मुख्यमंत्री (6) ब्राह्मण समाज से रहे. इसके अलावा पांच ठाकुर मुख्यमंत्री बने हैं. ब्राह्मण और ठाकुर के बाद यूपी में तीन यादव मुख्यमंत्री रहे और तीन ही वैश्य समाज से सीएम बने. इसके अलावा एक लोधी समाज से मुख्यमंत्री रहे तो दलित समाज से मायावती एकलौती सीएम रहीं. इसके अलावा जाट और कायस्थ समाज से एक-एक मुख्यमंत्री बने हैं. यूपी में 6 ब्राह्मण सीएम और 23 साल राज आजादी के बाद यूपी की सियासत में 1989 तक ब्राह्मण का सियासी वर्चस्व रहा. इस दौरान ब्राह्मण समाज से 6 मुख्यमंत्री बने. गोविंद वल्लभ पंत, सुचेता कृपलानी, कमलापति त्रिपाठी, हेमवती नंदन बहुगुणा, श्रीपति मिश्र और नारायण दत्त तिवारी बने. ये सभी कांग्रेस से थे. ब्राह्मण मुख्यमंत्रियों में सबसे ज्यादा नारायण दत्त तिवारी तीन बार यूपी के सीएम रहे तो गोविंद वल्लभ पंत दो बार मुख्यमंत्री पद संभाला. इन छह मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल को देखें तो करीब 23 साल तक प्रदेश की सत्ता की कमान ब्राह्मण समाज के हाथ में रही है. इतना लंबे समय तक किसी दूसरे समाज के सीएम सूबे में नहीं रहे, जिसके चलते 1950 से 1989 तक के समय को ब्राह्मण काल भी कहा जाता रहा है. ठाकुर, यादव और वैश्य समाज के सीएम बने ब्राह्मण के बाद यूपी में सबसे ज्यादा सीएम ठाकुर समाज से बने. ठाकुर समाज से पांच सीएम बने, जिसमें सबसे पहले त्रिभुवन नारायण सिंह और उसके बाद विश्‍वनाथ प्रताप सिंह, वीर बहादुर सिंह कांग्रेस के सीएम रहे. इसके अलावा बीजेपी के राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ ठाकुर समाज से सीएम बने. इसके योगी आदित्यनाथ दूसरी बार सीएम हैं जबकि बाकी सभी एक-एक बार सीएम रहे. सूबे में करीब 17 साल तक ठाकुर समाज के सीएम रहे. यूपी में यादव समाज से तीन सीएम बने, जिसमें सबसे पहले राम नरेश यादव जनता पार्टी की सरकार में मुख्यमंत्री थे. इसके बाद मुलायम सिंह और अखिलेश यादव सीएम बने. 13 साल तक यूपी में सत्ता की कमान यादव समाज के हाथों में रही. इसी तरह से वैश्य समाज से तीन सीएम बने. वैश्य समाज से चंद्र भान गुप्ता, बाबू बनारसी दास और राम प्रकाश गुप्ता सीएम बने. चंद्र भान गुप्ता दो बार सीएम रहे और बाकी दोनों नेता एक-एक बार. राम प्रकाश गुप्ता बीजेपी सरकार में सीएम रहे जबकि दोनों कांग्रेस से थे. जाट-लोध-दलित और कायस्थ 1-1 सीएम बने यूपी में ब्राह्मण, ठाकुर, यादव और वैश्य समाज के अलावा जाट, लोध, दलित और कायस्थ समाज से एक-एक मुख्यमंत्री रहे हैं. कायस्थ समाज से डॉ सम्‍पूर्णानन्‍द 1954 से लेकर 1960 तक दो बार सीएम बने. जाट समदाय से चौधरी चरण सिंह यूपी में दो बार मुख्यमंत्री रहे. चरण सिंह पहली बार अप्रैल 1967 मे सीएम बने और उसके बाद 1970 में बने थे. दलित समाज से मायावती एकलौती नेता हैं, जो यूपी की मु्ख्यमंत्री बनी हैं. मायावती चार बार सीएम रही. पहली बार 1995 में सीएम बनी और उसके बाद 1997, 2002 और 2007 में मुख्यमंत्री का पद संभाला. मायावती ने लगभग पौने सात साल सीएम रही हैं. लोध समाज से कल्याण सिंह दो बार यूपी के सीएम बने. पहली बार 1991 और दूसरी बार 1997 में सीएम बने. 32 साल से ब्राह्मण समाज का वनवास उत्तर प्रदेश में मंडल और कमंडल की राजनीति ने ब्राह्मण समाज को हाशिए पर धकेल किया. हालांकि, बीजेपी में अटल विहारी वाजपेयी और मुरली मनोहर जोशी से लेकर कलराज मिश्रा जैसे ब्राह्मण नेता चेहरा हुआ करते थे, पर सूबे की सत्ता में कांग्रेस की तरह उनकी हनक नहीं रही. मंडल की राजनीति ने यूपी की सियासत को ओबीसी के इर्द-गिर्द समेटकर रख दिया. 1989 के बाद से कांग्रेस सत्ता में नहीं आई है जबकि पिछले दिनों से सपा से लेकर बसपा और बीजेपी की उत्तर प्रदेश में कई बार सरकारें बनी, लेकिन सूबे को ब्राह्मण मुख्यमंत्री नहीं मिला. इस तह पिछले 32 सालों में ब्राह्मण समाज से कोई मुख्यमंत्री नहीं बना. साल 1989 के बाद अब तक कुल सात मुख्यमंत्री बने, चार बीजेपी, दो सपा और एक बसपा से. बीजेपी ने 1989 के बाद से अब तक प्रदेश में चार बार सरकार बनाई है, इसमें उसने दो ठाकुर और एक बनिया और एक लोधी राजपूत को मौका दिया. ऐसे में ब्राह्मण समाज सत्ता की बागडोर संभालने को बेचैन दिख रहा है. यही वजह है कि ब्राह्मण समाज बैठक कर अपने प्रतिनिधित्व के लिए चिंता जता रहा है.

धमतरी: नगरी क्षेत्र में नई संजीवनी, फुटहामुड़ा नहर परियोजना से सुधरेगा ग्रामीण सिंचाई परिदृश्य

 धमतरी : नगरी क्षेत्र को सिंचाई में नई संजीवनीः फुटहामुड़ा नहर परियोजना से बदलेगा ग्रामीण परिदृश्य धमतरी धमतरी जिले के नगरी विकासखंड में बहुप्रतीक्षित फुटहामुड़ा नहर निर्माण परियोजना अब तेज गति से आगे बढ़ रही है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है, जिससे किसानों के जीवन में स्थायी सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है। फुटहामुड़ा नहर परियोजना से बदलेगा ग्रामीण परिदृश्य       फुटहामुड़ा नहर का निर्माण गंगरेल जलाशय के सैंडल डैम, ग्राम फुटहामुड़ा से प्रारंभ होकर लगभग 19.74 किलोमीटर लंबाई में किया जा रहा है। परियोजना के पूर्ण होने पर नगरी विकासखंड के 22 ग्रामों के लगभग 1940 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सुनिश्चित सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इससे खरीफ के साथ-साथ रबी फसलों का रकबा भी बढ़ेगा और किसानों की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।       परियोजना के क्रियान्वयन में प्रशासनिक स्तर पर भी आवश्यक प्रगति हो चुकी है। मुख्य नहर से प्रभावित 10 ग्रामों में कुल 14.33 हेक्टेयर भूमि का भू-अर्जन पूर्ण कर लिया गया है। वहीं वन प्रकरण से प्रभावित 24.42 हेक्टेयर भूमि की अंतिम चरण की स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है। इसके साथ ही निर्माण कार्य में आने वाली सभी प्रमुख प्रशासनिक बाधाएं दूर हो गई हैं, जिससे कार्य अब निर्बाध गति से आगे बढ़ रहा है।        जिला प्रशासन एवं जल संसाधन विभाग द्वारा बताया गया कि यह परियोजना केवल सिंचाई सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी। सिंचाई सुनिश्चित होने से किसानों की आय बढ़ेगी, कृषि आधारित रोजगार के अवसर सृजित होंगे और पलायन पर भी प्रभावी रोक लगेगी।       कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने परियोजना को नगरी क्षेत्र के लिए मील का पत्थर बताते हुए कहा, “फुटहामुड़ा नहर परियोजना नगरी विकासखंड के किसानों के लिए दीर्घकालीन लाभ देने वाली योजना है। प्रशासन की प्राथमिकता है कि निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ तय समयसीमा में पूर्ण हो। यह परियोजना कृषि समृद्धि के साथ-साथ क्षेत्र के समग्र विकास को नई दिशा देगी।”        उल्लेखनीय है कि पिछले माह उच्च स्तरीय अधिकारियों द्वारा स्थल का दौरा कर निर्माण प्रगति, तकनीकी पक्षों एवं आवश्यक संसाधनों का गहन निरीक्षण किया गया था। अधिकारियों के मार्गदर्शन में अब कार्य को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा रहा है। फुटहामुड़ा नहर परियोजना नगरी अंचल में हरित क्रांति की नई शुरुआत के रूप में देखी जा रही है।

अंबिकापुर में शासकीय उचित मूल्य दुकान संचालन हेतु आवेदन की अंतिम तिथि 12 जनवरी

अंबिकापुर खाद्य अधिकारी ने बताया कि नगर पालिक निगम अम्बिकापुर के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकान संचालन हेतु पात्र संस्था/एजेन्सी को आबंटित किया जाना है। जिसमें शासकीय उचित मूल्य दुकान नमनाकला वार्ड क्र. 14 आई.डी. 391001048, मंगल पाण्डेय वार्ड क्र. 13 आई.डी. 391001005, डॉ. भीमराव अम्बेडकर वार्ड क्र. 45 आई.डी. 391001072, महारानी लक्ष्मीबाई वार्ड क्र. 04, आई.डी. 391001004, स्वामी विवेकानंद वार्ड क्र. 35, आई.डी. 391001010, शीतला वार्ड क्र. 32 आई.डी. 391001030, पटपरिया वार्ड क्र. 11 आई.डी. 391001037, एवं लरंग साय वार्ड क्र. 24 आई.डी. 391001071 संचालन हेतु आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इन शासकीय उचित मूल्य दुकानों के नवीन आबंटन के संचालन हेतु इ़च्छुक पात्र एजेन्सी अपना आवेदन पत्र विहित प्रारूप में सम्पूर्ण विवरण एवं दस्तावेज की सत्यापित छायाप्रति के साथ 12 जनवरी 2026 तक कार्यालय कलेक्टर खाद्य शाखा में जमा कर सकते हैं। समय-सीमा के बाद आवेदन पत्रों पर विचार नहीं किया जाएगा।  

डबरी से समृद्धि तकः धमतरी की महिलाओं ने मखाना खेती में देखी आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह

धमतरी : धान से आगे सोच : मखाना खेती से बदलेगी धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर डबरी से समृद्धि तकः धमतरी की महिलाओं ने मखाना खेती में देखी आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह 40 महिला किसान समूह ने मखाना प्रोसेसिंग एवं आधुनिक खेती तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया धमतरी कृषि विविधीकरण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में धमतरी जिले ने एक और ठोस कदम बढ़ाया है। विकासखंड नगरी के ग्राम सांकरा से 40 इच्छुक महिला किसान समूह का एक दल रायपुर जिले के विकासखंड आरंग अंतर्गत ग्राम लिंगाडीह पहुंचा, जहाँ उन्होंने मखाना प्रोसेसिंग एवं आधुनिक खेती तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस अध्ययन भ्रमण एवं प्रशिक्षण की संपूर्ण व्यवस्था जिला उद्यानिकी विभाग, धमतरी द्वारा की गई।  डबरी से समृद्धि तकः धमतरी की महिलाओं ने मखाना खेती में देखी आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह ख़ास कर कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा मखाना खेती को बढ़ावा देने और किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी को लेकर रुचि ले रहे है। अब जल्द ही धान से आगे सोच से मखाना खेती से धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर बदलेगी।  छोटी-छोटी डबरी से समृद्धि तक धमतरी की महिलाओं को मखाना खेती में आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह दिखायी दे रही है । शासकीय प्रयासों का प्रतिफल है कि मखाना खेती से धमतरी में आर्थिक सशक्तिकरण होगा ।          कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा के सतत प्रयासों से धमतरी जिले के ग्राम राखी, पीपरछेड़ी, दंडेसरा, राँकाडोह एवं सांकरा में लगभग 90 एकड़ क्षेत्र में डबरी चिन्हांकन कर मखाना खेती की शुरुआत हो चुकी है। महिला किसानों ने स्थानीय ओजस फार्म का भ्रमण करते हुए मखाना की खेती, कटाई, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़ी संपूर्ण श्रृंखला को नजदीक से समझा। फार्म प्रबंधक श्री संजय नामदेव ने किसानों को बताया कि मखाना की खेती के लिए जलभराव वाली डबरी, तालाब या जल संरचनाएं उपयुक्त होती हैं। उन्होंने तकनीकी पहलुओं, बीज चयन, उत्पादन लागत और बाजार संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी तथा यह भी बताया कि उचित प्रशिक्षण एवं सरकारी सहयोग से यह फसल किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है।       इस अवसर पर श्री शिव साहू ने मखाना खेती के व्यावसायिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह फसल कम जोखिम वाली है और इससे स्थायी आय का मजबूत स्रोत विकसित किया जा सकता है। महिला किसानों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मखाना खेती से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का नया अवसर दिखाई दे रहा है।       बिहार के दरभंगा निवासी मखाना प्रोसेसिंग विशेषज्ञ श्री रोहित साहनी फोड़ी ने प्रसंस्करण की बारीकियां समझाते हुए बताया कि 1 किलो मखाना बीज से लगभग 200 से 250 ग्राम पॉप तैयार होता है, जिसकी बाजार कीमत ₹700 से ₹1000 प्रति किलो तक होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसान स्वयं उत्पादन के साथ प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग करें, तो प्रति एकड़ लाभ में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।      इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रमुख वैज्ञानिक ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जानकारी देते हुए बताया कि प्रति एकड़ लगभग 20 किलो बीज की आवश्यकता होती है और औसत उत्पादन 10 किं्वटल तक प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि छह माह की अवधि वाली इस फसल में कीट-व्याधि का प्रकोप नगण्य होता है तथा चोरी जैसी समस्याएं भी नहीं होतीं, जिससे यह किसानों के लिए सुरक्षित विकल्प बनती है।      उप संचालक उद्यानिकी, धमतरी  डॉ.पूजा कश्यप साहू के मार्गदर्शन में ग्रामीण उद्यानिकी अधिकारी श्री चंद्रप्रकाश साहू एवं बीटीएम श्री पीताम्बर भुआर्य के साथ आए किसानों ने मखाना बोर्ड एवं राज्य शासन की योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। डॉ.पूजा ने बताया कि मखाना की खेती को प्रोत्साहन देने हेतु प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता एवं सब्सिडी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।         उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में सर्वप्रथम व्यावसायिक मखाना उत्पादन आरंग विकासखंड के ग्राम लिंगाडीह में स्वर्गीय श्री कृष्ण कुमार चंद्राकर द्वारा प्रारंभ किया गया था, जहाँ राज्य का पहला मखाना प्रसंस्करण केंद्र भी स्थापित हुआ।       आज मखाना उत्पादन छत्तीसगढ़ की नई कृषि पहचान बन रहा है। धमतरी की महिला किसानों का यह प्रयास न केवल कृषि नवाचार का उदाहरण है, बल्कि यह दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन,प्रशिक्षण और प्रशासनिक संकल्प से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है।

पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा: जीवन रक्षा की पहल, अब तक 118 नागरिकों को मिली सहायता

पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा : समय पर उपचार से जीवन रक्षा की प्रभावी पहल अब तक 118 नागरिक हो चुके हैं लाभान्वित भोपाल  पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा मध्य प्रदेश सरकार की संवेदनशील और दूरदर्शी स्वास्थ्य नीति का सशक्त उदाहरण है। गंभीर रूप से बीमार और आपातकालीन मरीजों को समय पर उच्च स्तरीय उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। विशेष रूप से उन परिस्थितियों में जहाँ हर मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को यह सुविधा निःशुल्क प्रदान कर सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि आर्थिक स्थिति उपचार में बाधा न बने। पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा राज्य की एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्वास्थ्य पहल के रूप में स्थापित हो चुकी है। यह सेवा इस बात का सशक्त उदाहरण है कि आपात परिस्थितियों में समय पर उपलब्ध उन्नत चिकित्सा परिवहन कितने अनमोल जीवन बचा सकता है। नवजात से वरिष्ठ नागरिक तक, सभी के लिए जीवन रक्षक पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा के अंतर्गत भोपाल से पूरे प्रदेश के लिए 24 घंटे, सातों दिन आपातकालीन चिकित्सा परिवहन की सुविधा उपलब्ध है। यह व्यवस्था गंभीर रोगियों को कम से कम समय में उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थानों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही है। सेवा प्रारंभ होने के कुछ ही महीनों में बड़ी संख्या में गंभीर मरीजों को एयरलिफ्ट कर उपचार उपलब्ध कराया गया है। इनमें नवजात शिशु, वरिष्ठ नागरिक, सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल मरीज, हार्ट अटैक एवं न्यूरोलॉजिकल आपात स्थितियां, अंग प्रत्यारोपण जैसे अति संवेदनशील मामले शामिल हैं। इन सभी परिस्थितियों में हर मिनट निर्णायक रहा, जहां एयर एम्बुलेंस ने जीवन रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। उपयोगिता में निरंतर वृद्धि पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा की उपयोगिता में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025-26 में उपयोगिता में लगभग 22 प्रतिशत की वृद्धि पाई गई। फिक्स्ड विंग एयर एम्बुलेंस की औसत उपयोगिता में 30 प्रतिशत और हेलीकॉप्टर एम्बुलेंस की उपयोगिता में 17 प्रतिशत वृद्धि हुई है। योजना प्रारंभ से अब तक कुल 118 लाभार्थियों को इस सेवा का सीधा लाभ प्राप्त हुआ है। संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया एयर एम्बुलेंस सेवा की उपयोगिता के विस्तार हेतु संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की गयी है। संशोधित प्रस्ताव में स्वीकृति एवं पात्रता की प्रक्रिया को सरल किया गया है, आपातकालीन उपचार के अतिरिक्त अंगदान हेतु परिवहन, आपदा प्रबंधन, विशेष मेडिकल टीमों को सेवा में शामिल किया गया है। प्रशासनिक समन्वय और जन-जागरूकता सेवा के प्रभावी उपयोग हेतु मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों, सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षकों एवं जिला कलेक्टरों को राज्य स्तरीय समीक्षा बैठकों एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नियमित दिशा-निर्देश प्रदान किए गए हैं। साथ ही, विभाग द्वारा आमजन में एयर एम्बुलेंस सुविधा के प्रति व्यापक जन-जागरूकता भी की गई है।  

नववर्ष 2026 के स्वागत में इंदौर के मंदिरों में धार्मिक धूम, खजराना गणेश मंदिर में 5 लाख भक्तों की उम्मीद

 इंदौर  नववर्ष का आगाज होने जा रहा है। इसे लेकर इंदौर शहर के प्रमुख मंदिरों में विशेष धार्मिक तैयारियां की जा रही हैं। श्रद्धालु नए साल का स्वागत प्रभु के दरबार में हाजिरी लगाकर करने की तैयारी कर रहे हैं। खजराना गणेश मंदिर में 5 लाख भक्तों की उम्मीद शहर के प्रमुख देवालय खजराना गणेश मंदिर में नववर्ष के अवसर पर करीब 5 लाख भक्तों के पहुंचने की संभावना है। इस बार नववर्ष की शुरुआत गुरुवार से हो रही है, जिसे भगवान विष्णु का दिन माना जाता है। इसी कारण वैष्णव भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। मंदिर के दर्शन समय और विशेष व्यवस्थाएं खजराना गणेश मंदिर में 31 दिसंबर की रात 11 बजे मंदिर के पट बंद कर दिए जाएंगे। नववर्ष के दिन 1 जनवरी को ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 4 बजे मंदिर के पट खोल दिए जाएंगे, जो देर रात तक खुले रहेंगे। पंडित अशोक भट्ट के अनुसार 31 दिसंबर को बुधवार होने के कारण बड़ी संख्या में गणेश भक्त मंदिर पहुंचेंगे। भीड़ को देखते हुए दो दिनों के लिए अतिरिक्त रैलिंग लगाई जा रही है। वीआईपी दर्शन के लिए 100 रुपये की रसीद पर सुविधा उपलब्ध रहेगी। नववर्ष की सुबह भगवान गणेश का विशेष अभिषेक और अनुष्ठान किया जाएगा। फूलों की भव्य सजावट के साथ भगवान गणेश को परिवार सहित नवीन वस्त्र धारण कराए जाएंगे। अन्य मंदिरों में भी नववर्ष की विशेष तैयारियां शहर के वेंकटेश देवस्थान छत्रीबाग, अन्नपूर्णादेवी मंदिर, बिजासन माता मंदिर, भूतेश्वर महादेव मंदिर और वैष्णोधाम मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर भी नववर्ष को लेकर विशेष पूजन, जाप और परिक्रमा की तैयारियां की गई हैं। रणजीत हनुमान मंदिर में उमड़ेगा भक्तों का सैलाब ऐतिहासिक रणजीत हनुमान मंदिर में अंग्रेजी नववर्ष 2026 की पूर्व संध्या और सूर्योदय से पहले ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। मंदिर प्रबंधन और जिला प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। नववर्ष के दिन अभिषेक के बाद सुबह साढ़े पांच बजे मंदिर के पट खोले जाएंगे, जबकि 31 दिसंबर की रात साढ़े ग्यारह बजे बंद होंगे। भक्तों द्वारा सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ किया जाएगा। ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि 20 से 25 मिनट में श्रद्धालु दर्शन कर सकें। नए साल का जश्न अब प्रभु के दरबार में समय के साथ नए साल को मनाने की परंपरा में बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां लोग होटल, रेस्टोरेंट और मनोरंजन स्थलों पर जाते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में लोग धार्मिक स्थलों का रुख कर रहे हैं। बुजुर्गों के साथ-साथ युवा भी खजराना गणेश मंदिर, रणजीत हनुमान मंदिर, अन्नपूर्णादेवी मंदिर, बिजासन माता मंदिर, महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में दर्शन-पूजन कर रहे हैं। रामायण पाठ, सुंदरकांड और हनुमान चालीसा जैसे धार्मिक आयोजनों में युवाओं की भागीदारी भी बढ़ रही है। 

फर्जी प्रचार पर शिक्षा मंत्री का हमला, बोले– ‘शिक्षकों से कुत्तों की गिनती’ का कोई आदेश नहीं

नई दिल्ली  दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में प्रेस वार्ता कर आम आदमी पार्टी (आप) पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि 'आप' के नेता लगातार सोशल मीडिया के जरिए झूठ और अफवाहें फैलाकर दिल्ली के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। प्रेस वार्ता में शिक्षा मंत्री ने कहा कि सोमवार को सोशल मीडिया पर एक संगठित अभियान चलाया गया, जिसमें यह झूठा दावा किया गया कि दिल्ली के शिक्षकों को लावारिस कुत्तों की गिनती के काम में लगाया गया है। यह दावा पूरी तरह निराधार और झूठा है। मंत्री ने आम आदमी पार्टी को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर शिक्षकों को कुत्तों की गिनती में लगाने से जुड़ा कोई आदेश या सर्कुलर मौजूद है, तो उसे तुरंत सार्वजनिक किया जाए। ऐसा न कर पाने की स्थिति में आप नेताओं को दिल्ली की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। सूद ने आगे कहा कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के तहसीलदारों और सब-रजिस्ट्रारों के निलंबन को लेकर भी झूठ फैलाकर प्रशासनिक अराजकता पैदा करने की कोशिश की। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर 'आप' को भ्रष्टाचारियों से इतना लगाव क्यों है? शिक्षा मंत्री के मुताबिक, 'आप' सरकार के कार्यकाल में इन दफ्तरों में खुलेआम भ्रष्टाचार होता था, जबकि अब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। ऐसे में 'आप' का भ्रष्ट अधिकारियों के समर्थन में खड़ा होना उनकी मंशा पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने 25 दिसंबर के आसपास किए गए एक अन्य 'एक्स' पोस्ट का भी जिक्र किया, जिसमें यह दावा किया गया था कि दिल्ली सरकार ने स्कूलों में सांता क्लॉज बनकर आने वाले बच्चों पर कार्रवाई करने का आदेश दिया है। शिक्षा मंत्री ने इसे भी पूरी तरह झूठ बताते हुए कहा कि अगर आम आदमी पार्टी के पास ऐसा कोई आदेश है, तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा। दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) से जुड़े मुद्दों पर भी मंत्री ने 'आप' पर जानबूझकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में ही डीएसएसएसबी के माध्यम से लगभग 16 हजार अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया था। इसके बावजूद गलत जानकारी फैलाना आम आदमी पार्टी की प्रशासनिक अक्षमता और विफलता को दर्शाता है। सूद ने कहा कि दिल्ली की जनता ने चुनावों में आम आदमी पार्टी के तथाकथित शिक्षा मॉडल, शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री और तथाकथित भारत रत्न के दावेदारों को पूरी तरह नकार दिया। उन्होंने 'आप' की राजनीति को फ्रॉड, फर्जीवाड़े और झूठ पर आधारित बताते हुए कड़े शब्दों में निंदा की। शिक्षा मंत्री ने कहा कि चुनावी हार के 10 महीने बाद भी 'आप' अपनी पराजय स्वीकार नहीं कर पा रही है और पूरी तरह राजनीतिक जमीन खो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने न तो दिल्ली में शिक्षा के क्षेत्र में कोई ठोस काम किया और न ही प्रशासनिक स्तर पर विकास किया। पार्टी ने सिर्फ झूठ, शोर और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति की है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार जनहित से जुड़े काम कर रही है। इसी वजह से आम आदमी पार्टी बौखलाहट में सोशल मीडिया के जरिए झूठ और अफवाहें फैलाकर सरकार की छवि खराब करने की कोशिश कर रही है, लेकिन दिल्ली की जनता सच्चाई समझती है और ऐसे प्रयासों को कभी सफल नहीं होने देगी।