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राजधानी रांची में सभी पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द, जानिए क्या है वजह

रांची झारखंड राज्य स्थापना का सिल्वर जुबली और झारखंड उच्च न्यायालय के स्थापना के 25 वर्षों के कार्यक्रम के मद्देनजर राजधानी रांची में सुरक्षा एवं विधि-व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए रांची पुलिस का अवकाश रद्द कर दिया गया है। 11 से 16 नवम्बर तक सभी पुलिसकर्मियों और अधिकारियों का अवकाश रद्द रांची एसएसपी राकेश रंजन ने आदेश जारी किया है जिसमें बताया गया है कि 11 से 16 नवम्बर तक सभी पुलिसकर्मियों और अधिकारियों का अवकाश तत्काल प्रभाव से रद्द रहेगा। केवल विशेष परिस्थिति में ही छुट्टी दी जाएगी और पूर्व में स्वीकृत अवकाश के लिए भी अनुमति लेना आवश्यक होगा। आदेश के अनुसार, इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बलों की तैनाती की जाएगी ताकि सुरक्षा व्यवस्था प्रभावी ढंग से सुनिश्चित की जा सके। पुलिस प्रशासन ने जनता से की सहयोग अपील सभी थाना, ओपी, शाखा प्रभारी, परिचारी प्रवर एवं संबंधित डीएसपी को निर्देश दिया गया है कि वे अपने अधीनस्थ पुलिसकर्मियों से तुरंत संपर्क स्थापित करें और उन्हें 10 नवम्बर तक अपने कर्तव्य स्थल पर लौटने का निर्देश दें। साथ ही इस संबंध में प्रतिवेदन भी मांगा गया है। यह फैसला झारखंड स्थापना दिवस और उच्च न्यायालय के सिल्वर जुबली समारोह को सफल बनाने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह मजबूत बनाने के लिए किया गया है। पुलिस प्रशासन ने जनता से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि सुरक्षा कारणों से ये आवश्यक कदम उठाए गए हैं।  

उत्तर भारत में बढ़ेगी ठंड! 21 से 25 नवंबर तक नया पश्चिमी विक्षोभ देगा दस्तक

कन्नौज   मौसम विभाग के अनुसार कानपुर मंडल में अगले कुछ दिनों तक आसमान बिल्कुल साफ रहेगा। दिन में तेज धूप निकलेगी। जिससे दिन का तापमान औसत के आसपास रहेगा। गंगा के मैदानी क्षेत्रों में उत्तर और पश्चिमी दिशाओं से आने वाली दवाओं का असर दिखाई पड़ेगा। रात के तापमान में लगातार गिरावट आएगी। 21 से 25 नवंबर के बीच उत्तर भारत के मौसम को नया पश्चिमी विक्षोभ प्रभावित करेगा। मौसम वैज्ञानिक डॉक्टर एसएन सुनील पांडे ने बताया कि फिलहाल देश में कोई सक्रिय मौसम प्रणाली मौजूद नहीं है। न्यूनतम तापमान में उत्तर पश्चिम हवाओं के कारण गिरावट बनी रहेगी। मौसम विभाग के अनुसार आज रात का न्यूनतम तापमान 12 डिग्री के आसपास रहने का अनुमान है। इस हफ्ते तापमान 11 डिग्री नीचे तक पहुंच सकता है। इस बीच बारिश की कोई संभावना नहीं है। कैसा रहेगा आज रात और कल का मौसम? मौसम विभाग के अनुसार आज रात का न्यूनतम तापमान 12 डिग्री रहने का अनुमान है। पश्चिम दिशा से आने वाली हवाएं मौसम को प्रभावित करेंगी। सोमवार, 10 नवंबर का तापमान 12 से 27 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। आसमान मुख्य रूप से साफ रहेगा। पश्चिम दिशा से आने वाली हवाएं मौसम को प्रभावित करेंगी। 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। रात में मौसम साफ रहेगा। 7 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। बारिश की कोई संभावना नहीं है।   कैसा रहेगा 16 नवंबर तक का मौसम? मौसम विभाग के अनुसार 11 नवंबर मंगलवार का तापमान 12 से 28 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। आसमान साफ रहेगा। जबकि 12 और 13 नवंबर का तापमान 12 से 27 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। 14, 15 और 16 नवंबर का तापमान 11 से 26 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। इस दौरान आसमान साफ रहेगा। बारिश की कोई संभावना नहीं है। इस दौरान उत्तर और पश्चिम दिशा से आने वाली हवाएं मौसम पर अपना प्रभाव डालेंगी। रात का तापमान 11 डिग्री तक पहुंच रहा है।

गरीब परिवारों को सशक्त करने की तैयारी: रेखा गुप्ता सरकार की नई योजना पर काम तेज़

नई दिल्ली दिल्ली के झुग्गीवासियों को जल्द बड़ी सौगात मिलने जा रही है। दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार झुग्गीवासियों को उज्ज्वला योजना से जोड़ने का ऐलान किया है। उज्ज्वला योजना से झुग्गीवासियों के जुड़ जाने के बाद गरीब परिवारों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन और रसोई सामान मिलेगा। सीएम रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि अब राजधानी की झुग्गियों में रहने वाले परिवारों को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से जोड़ा जाएगा। इस फैसले के तहत उन परिवारों को मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन दिए जाएंगे जो अब तक लकड़ी, कोयला या मिट्टी के तेल से खाना बनाते हैं। मुख्यमंत्री ने दिल्ली शेल्टर बोर्ड (DUSIB) के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जल्द से जल्द झुग्गी-झोपड़ियों में सर्वे कर यह पता लगाया जाए कि किन परिवारों को अब तक इस योजना का लाभ नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि हर गरीब परिवार को साफ और सुरक्षित ईंधन उपलब्ध कराया जाए, ताकि महिलाओं और बच्चों की सेहत पर धुएं का असर न पड़े। सीएम रेखा गुप्ता ने बताया कि लकड़ी और कोयले से खाना पकाने पर न सिर्फ घरों में धुआं फैलता है, बल्कि इससे दिल्ली का वायु प्रदूषण भी बढ़ता है। ऐसे में रसोई गैस का उपयोग न केवल स्वास्थ्य के लिए बेहतर है बल्कि पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद साबित होगा। सरकार ने साफ किया है कि पात्र परिवारों को एलपीजी सिलेंडर, गैस स्टोव और पाइप जैसी सभी जरूरी वस्तुएं मुफ्त दी जाएंगी, ताकि किसी को कोई परेशानी न हो। देशभर में करोड़ों परिवार इस योजना से हो चुके हैं लाभान्वित- सीएम मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा है कि सर्वे कार्य को तेजी से पूरा कर सूची तैयार की जाए और अधिक से अधिक झुग्गी परिवारों को इस योजना से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि यह कदम गरीबों के जीवन में स्वच्छता, सेहत और सम्मान का नया अध्याय खोलेगा। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसे वर्ष 2016 में शुरू किया गया था। इस योजना का मकसद है कि देश के हर गरीब परिवार को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन देकर परंपरागत ईंधनों से मुक्ति दिलाई जाए। अब तक देशभर में करोड़ों परिवार इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं।

मौसम अलर्ट: छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में शीतलहर का असर, तापमान में भारी गिरावट की संभावना

रायपुर राज्य में ठंडी हवा का असर होने लगा है. उत्तरी सीमा के कुछ क्षेत्रों में तापमान में खासी गिरावट के बाद शीतलहर चलने की संभावना है. इधर पिछले चौबीस घंटे में शहर के न्यूनतम तापमान में दो डिग्री की कमी आई है. अगले दो से तीन दिन तक शहर में ठंड बढ़ने की संभावना बनी हुई है. पिछले चौबीस घंटे में राजद्य में सबसे कम तापमान 11 डिग्री के करीब अंबिकापुर का दर्ज किया गया. नवंबर के दूसरे सप्ताह में राज्य में ठंड की शुरुआत हो चुकी है. इस बार उत्तर-पूर्व से आने वाली शुष्क हवा के असर से  तापमान में गिरावट होने लगा है. इसके साथ वातावरण में मौजूद नमी में हुई गिरावट से मौसम रूखा होने लगा है. हवा की दिशा में बदलाव होने की वजह से न्यूनतम तापमान में आने वाली कमी से पिछले दो तीन दिन से बढ़ती ठंड महसूस हो रही है. पिछले चौबीस घंटे में तो राज्य के न्यूनतम तापमान में दो से तीन डिग्री की कमी आई है. अंबिकापुर का पारा जो 13 डिग्री से अधिक था वह गिरकर 11 डिग्री से नीचे चला गया. रायपुर का न्यूनतम तापमान 20 से 18 डिग्री के करीब पहुंचा गया. मौसम विभाग ने तापमान में आ रही गिरावट को ध्यान में रखते हुए अगले दो से तीन दिनों में राज्य की उत्तरी सीमा के कुछ क्षेत्रों में शीतलहर की संभावना जताई गई है. रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ? राजधानी रायपुर में आज मौसम विभाग ने आसमान मुख्यत: साफ रहने की संभावना जताई है. अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस रह सकता है.

Toll Tax से छूट जैसा अनुभव: NHAI ने लॉन्च की स्मार्ट पास सर्विस, सफर होगा आसान

ग्वालियर  भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने देशभर के वाहन चालकों के लिए एक बड़ी राहत की घोषणा की है। अब हाइवे पर बार-बार टोल देने की झंझट से मुक्ति मिलेगी। एनएचएआइ ने ‘वार्षिक फास्टैग सर्विस’ शुरू की है, जिसके तहत महज 3000 रुपए में सालभर में 200 बार टोल क्रॉस करने की सुविधा मिलेगी। इस नई स्कीम से ग्वालियर और आसपास के चार प्रमुख टोल प्लाजा – मेहरा, पनिहार, बरेठा और छौंदा – जुड़ गए हैं। यह सुविधा विशेष रूप से गैर-वाणिज्यिक वाहनों के लिए है। इस ‘वार्षिक फास्टैग पास’ का लाभ उठाने के लिए वाहन मालिकों को एनएचएआइ की ‘राजमार्ग यात्रा’ ऐप के जरिए रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इस प्रकार, अब किसी भी सरकारी दफ्तर या एजेंसी के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, सारा काम मोबाइल से ही संभव है। एनएचएआइ ने यह स्कीम देशभर के सभी 1150 टोल प्लाजा पर 15 अगस्त 2025 से लागू कर दी है। ग्वालियर के ये टोल प्लाजा हुए शामिल छौंदा टोल प्लाजा (ग्वालियर-मुरैना मार्ग): एकल यात्रा शुल्क 100 रुपए। सामान्य स्थिति में 30 बार टोल क्रॉस करने पर 3000 रुपए खर्च होते हैं। बरेठा टोल प्लाजा (ग्वालियर-भिंड मार्ग): एकल यात्रा शुल्क 75 रुपए। सामान्य स्थिति में 40 बार टोल क्रॉस करने पर 3000 रुपए खर्च होते हैं। मेहरा टोल प्लाजा (ग्वालियर-आगरा/झांसी मार्ग): एकल यात्रा शुल्क 100 रुपए। सामान्य स्थिति में 30 बार टोल क्रॉस करने पर 3000 रुपए खर्च।   पनिहार टोल प्लाजा (ग्वालियर-शिवपुरी मार्ग): एकल यात्रा शुल्क 120 रुपए। सामान्य स्थिति में 25 बार टोल क्रॉस करने पर 3000 रुपए खर्च। कैसे करें एक्टिवेट ‘राजमार्ग यात्रा’ ऐप डाउनलोड करें, वाहन नंबर और फास्टैग को ऐप में रजिस्टर करें, Annual FASTag Pass विकल्प चुनें और 3000 रुपए का भुगतान करें। इसके बाद एक्टिवेशन हो जाएगा। एनएचएआइ के मैनेजर प्रशांत मीणा ने बताया, वार्षिक फास्टैग योजना ग्वालियर के चारों प्रमुख टोल प्लाजा से जुड़ चुकी है। वाहन मालिकों को अब कोई पेपरवर्क नहीं करना होगा, सब कुछ ऑनलाइन रहेगा। इससे हाईवे ट्रैफिक में तेजी आएगी और लोगों का समय व पैसा दोनों बचेंगे।

सूबेदार व SI पदों के लिए आवेदन का अंतिम दिन: जल्दी करें फॉर्म सबमिट

भोपाल मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में नौकरी की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर सामने आया है। विभाग में सब-इंस्पेक्टर (SI) और सूबेदार के कुल 500 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। इच्छुक और पात्र उम्मीदवारों के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि कल, 10 नवंबर 2025 निर्धारित की गई है। जो उम्मीदवार अब तक आवेदन नहीं कर पाए हैं, वे तुरंत मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) की आधिकारिक वेबसाइट esb.mp.gov.in पर जाकर या डायरेक्ट लिंक के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। कौन कर सकता है आवेदन? इस भर्ती के लिए ग्रेजुएट (स्नातक) अभ्यर्थी पात्र हैं। उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से ग्रेजुएशन पूरा होना आवश्यक है। आयु सीमा: सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए अधिकतम आयु 33 वर्ष और आरक्षित वर्ग के लिए 38 वर्ष निर्धारित है। आयु की गणना 10 नवंबर 2025 को आधार मानकर की जाएगी। आरक्षित वर्ग को नियमानुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी। आवेदन प्रक्रिया 1. उम्मीदवार esb.mp.gov.in वेबसाइट पर जाएं। 2. होम पेज पर हिंदी या अंग्रेजी भाषा का चयन करें। 3. “Online Form – Subedar & Sub-Inspector Recruitment Test For Police H.Q., Home (Police) – 2025 Start From” लिंक पर क्लिक करें। 4. मांगी गई जानकारी भरकर रजिस्ट्रेशन करें। 5. लॉग इन कर शेष डिटेल भरें और आवेदन फॉर्म को पूरा करें। 6. निर्धारित फीस जमा करने के बाद फॉर्म को सबमिट कर दें। फीस का विवरण जनरल वर्ग एवं अन्य राज्यों के उम्मीदवार: ₹500 OBC, SC, ST उम्मीदवार: ₹250 इसके अलावा ₹60 पोर्टल शुल्क अतिरिक्त देना होगा। (ध्यान रखें, बिना फीस जमा किए आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।) महत्वपूर्ण सलाह अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि आवेदन करने से पहले ऑफिशियल नोटिफिकेशन को ध्यानपूर्वक पढ़ें और अंतिम समय की तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए आज ही आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।

निवेशक-हितैषी नीतियों से मध्यप्रदेश में ऊर्जा सेक्टर को नई उड़ान: मंत्री शुक्ला

भोपाल  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश स्वच्छ और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में उभर रहा है। मध्यप्रदेश के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देश के लिए वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा उत्पादन और वर्ष 2070 तक ‘नेट ज़ीरो कार्बन फुटप्रिंट’ का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। मध्यप्रदेश इस राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने में पूर्ण समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहा है। मंत्री श्री शुक्ला ने बताया कि प्रदेश ने बीते 12 वर्षों में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 19 गुना वृद्धि की है। मध्यप्रदेश की कुल ऊर्जा उत्पादन क्षमता में आज 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हरित ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त हो रहा है। यह अभूतपूर्व उपलब्धि राज्य की ऊर्जा नीति, तकनीकी नवाचारों और निवेशक-हितैषी दृष्टिकोण का परिणाम है। ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक प्रगति राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। मध्यप्रदेश अपनी भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता के कारण देश के अग्रणी ऊर्जा सरप्लस राज्यों में शामिल है। राज्य की नीति प्रधानमंत्री श्री मोदी के ‘स्वच्छ ऊर्जा – आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को साकार कर रही है। अभूतपूर्व निवेश और रोजगार सृजन जीआईएस–भोपाल के दौरान प्रदेश की ‘टेक्नोलॉजी एग्नोस्टिक’ रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी ने देश-विदेश के निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है। इस नीति के कारण अब तक ₹5.72 लाख करोड़ से अधिक का निवेश प्राप्त हुआ है, जिससे 1.46 लाख से अधिक रोजगार अवसर सृजित होंगे। अवाडा एनर्जी, एमकेसी इंफ्रास्ट्रक्चर, एनएसएल रिन्यूएबल पॉवर, टोरेंट पॉवर और जिंदल इंडिया रिन्यूएबल एनर्जी जैसी प्रतिष्ठित कंपनियां प्रदेश में व्यापक निवेश करने जा रही है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जीआईएस-भोपाल का शुभारंभ करते हुए कहा था कि देश के ऊर्जा क्षेत्र में पिछले दशक में जबरदस्त प्रगति हुई है। उन्होंने इस उपलब्धि में मध्यप्रदेश की भूमिका की सराहना करते हुए कहा था कि राज्य की कुल 31 हजार मेगावाट विद्युत क्षमता में लगभग 30 प्रतिशत हरित ऊर्जा का योगदान है। हरित ऊर्जा के नए केंद्र है रीवा और ओंकारेश्वर रीवा सोलर पार्क ने देश में स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में नये मानदंड स्थापित किये हैं। यह देश के सबसे बड़े सौर ऊर्जा पार्कों में से एक है और यहाँ से दिल्ली मेट्रो को भी बिजली आपूर्ति की जा रही है। इसी क्रम में ओंकारेश्वर में देश का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्लांट (278 मेगावाट) स्थापित किया गया है। इससे जलाशयों के उपयोग से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को नई दिशा मिली है। मंत्री श्री शुक्ला ने बताया कि हाल ही में मुरैना में स्थापित ‘सोलर प्लस बैटरी स्टोरेज’ परियोजना ने एक नया इतिहास रचा है। यहाँ केवल ₹2.70 प्रति यूनिट की दर से 24 घंटे हरित ऊर्जा उपलब्ध होगी। यह परियोजना भारत में ‘राउंड-द-क्लॉक ग्रीन पॉवर सप्लाई’ की दिशा में पहला बड़ा कदम है, जो कोयला आधारित संयंत्रों के समतुल्य ‘पीक-ऑवर्स’ में बिजली आपूर्ति करने में सक्षम है। सांची बना प्रदेश का पहला सौर शहर राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सांची को मध्यप्रदेश का पहला सौर शहर घोषित किया गया है। यह परियोजना ‘नेट ज़ीरो कार्बन सिद्धांत’ पर आधारित होगी, अर्थात जितनी ऊर्जा का उपभोग होगा, उतनी ही हरित ऊर्जा का उत्पादन भी किया जाएगा। यह पहल प्रदेश के साथ पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनेगी। नर्मदापुरम में ऊर्जा उपकरण निर्माण का केंद्र नर्मदापुरम जिले में नवकरणीय ऊर्जा उपकरणों और पॉवर उपकरणों के लिए समर्पित निर्माण क्षेत्र डेडिकेटेड मैन्यूफैक्चरिगं जोन) विकसित किया जा रहा है। इससे राज्य में औद्योगिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी और हजारों नए रोजगार सृजित होंगे। वर्ष 2030 तक 20 गीगावाट हरित ऊर्जा का लक्ष्य वर्तमान में मध्यप्रदेश में 5 प्रमुख सौर परियोजनाएँ कार्यरत हैं, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 2.75 गीगावाट (2,750 मेगावाट) है। राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक 20 गीगावाट अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य तय किया है। नीतिगत सुधार और तकनीकी नवाचार मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने ‘टेक्नोलॉजी एग्नोस्टिक’ रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी लागू की है। इसमें सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए निवेशकों को आकर्षक और अनुकूल अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। कुसुम-सी योजना के अंतर्गत लगभग 18,000 मेगावाट क्षमता के लिए निविदाएँ प्राप्त हुई हैं, जिनमें किसानों, एमएसएमई और निजी डेवलपर्स ने व्यापक भागीदारी की है। इस योजना में किसानों को दिन के समय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये 100% फीडर सोलरीकरण का प्रावधान किया गया है। पंप हाइड्रो और बायोफ्यूल परियोजनाओं को बढ़ावा मध्यप्रदेश में पंप हाइड्रो परियोजनाओं और बायोफ्यूल परियोजनाओं को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। अब तक 14 हजार 850 मेगावाट क्षमता की पंप हाइड्रो परियोजनाओं के लिए आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 8 हजार 450 मेगावाट परियोजनाओं का पंजीयन हो चुका है। इसी प्रकार, कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) और बायोमास पैलेट परियोजनाओं के लिए प्रतिदिन 6 हजार 500 टन से अधिक क्षमता की परियोजनाएँ प्रस्तावित हैं।  

जालंधर में 13 नवंबर से लागू होगा नया सिस्टम, जानें कैसे बदलेगी आपकी रोजमर्रा की जिंदगी

जालंधर  शहर में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन की व्यवस्था को लेकर नगर निगम ने फिर से बड़ा कदम उठाया है। निगम ने 143 करोड़ रुपये के दो टेंडर जारी किए हैं, जिनके तहत सेंट्रल, नॉर्थ, कैंट और वेस्ट हलकों में आने वाले सभी वार्डों में एक समान तरीके से कचरा उठाने की व्यवस्था की जाएगी। इसके बाद अब पूरे शहर से एक समान शुल्क (यूजर चार्ज) लिया जाएगा। निगम की योजना के अनुसार, नई एजेंसी अगले तीन साल तक घरों से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग उठाने का काम करेगी। इसके अलावा, कचरे की प्रोसेसिंग और निस्तारण की जिम्मेदारी भी इन्हीं एजेंसियों को सौंपी जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, पहले अलग-अलग जोनों में कचरा उठाने के अलग-अलग रेट तय थे, लेकिन अब पूरे शहर में एक जैसी दरें लागू होंगी। निगम के डोर-टू-डोर कलेक्शन प्रोजेक्ट पर 13 नवंबर से काम शुरू होने की संभावना है। इस दौरान यूनियन के विरोध को देखते हुए निगम ने लोगों से सहयोग की अपील की है। निगम का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने से शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार होगा और स्वच्छता स्तर बेहतर बनेगा। 

शहरों को मिलेगी स्वच्छ हवा: सरकार ने मंज़ूर की 972 नई इलेक्ट्रिक बसें

केन्द्रीय शहरी कार्य मंत्रालय ने दी मंजूरी भोपाल  प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में डीजल ईंधन से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोकने के लिये सार्वजनिक परिवहन सेवा में इलेक्ट्रिक बसों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। केन्द्रीय शहरी कार्य मंत्रालय ने प्रदेश के 8 नगर निगमों में 972 पीएम ई-बस सेवा को मंजूरी दी है। यह बसें शीघ्र संचालित हों, इसके लिये नगरीय निकायों द्वारा बस डिपो और चार्जिंग से जुड़े सभी अधोसंरचना कार्य तेजी से किये जा रहे हैं। प्रदेश में बस डिपो अधोसंरचना निर्माण के लिये संबंधित नगरीय निकायों को केन्द्र सरकार द्वारा 60 प्रतिशत और राज्य सरकार द्वारा 40 प्रतिशत राशि प्रदाय की जा रही है। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में चार्जिंग पाइंट अधोसंरचना निर्माण के लिये केन्द्र सरकार द्वारा 100 प्रतिशत राशि प्रदाय की जा रही है। नगरीय निकायों में स्वीकृत पीएम ई-बसें केन्द्रीय शहरी कार्य मंत्रालय ने जिन नगर निगमों में ई-बसों की मंजूरी दी है, इनमें भोपाल में 195, इंदौर में 270, ग्वालियर में 100, जबलपुर में 200, उज्जैन में 100, सागर में 32, देवास में 55 और सतना में 20 ई-बसें शामिल हैं। नगरीय निकायों में ई-बस सेवा का संचालन जल्द शुरू हो, इसके लिये नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने संबंधित निकायों को बस डिपो और चार्जिंग स्टेशन से जुड़े अधोसंरचना के सभी कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिये गये हैं।  

हवाई सफर हुआ और आसान: विन्ध्य क्षेत्र को मिली एटीआर 72 उड़ान की सौगात

भोपाल  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी जब कहते थे कि वह दिन भी अब दूर नहीं जब हमारे देश के 'हवाई चप्पल वाले लोग भी हवाई जहाज में उड़ान भरेंगे' तब विरोधी इसे महज जुमला कहकर बात हवा में उड़ा देते थे। ऐसे लोगों को आज रीवा आकर देखना चाहिए कि सपना किस तरह यथार्थ के धरातल पर उतरकर चरितार्थ होता है। आज का दिन कई पीढ़ियों की परिकल्पना और सपने को यथार्थ में परिवर्तित होने का दिन है जब एटीआर 72 वायुयान दिल्ली के लिए उड़ान भरेगा। उड्डयन विभाग के हमारे केन्द्रीय मंत्री, माननीय मुख्यमंत्री, विन्ध्य के सांसद, विधायक गण व नागरिक विन्ध्य के विकास के इस मंगलाचरण के साक्षी होंगे। हम यहीं रुकने वाले नहीं है शीघ्र ही इंदौर से वायुमार्ग से जुड़ने वाले हैं। अगले चरण में मुंबई, पुने, बेंगलुरु जैसे शहरों से सभी इसी एयरपोर्ट से उड़ान भरेंगे। हमसे मीडिया के लोग पूछते हैं कि इसके आगे और क्या? मेरा जवाब है एयरबस, सिर्फ 500 मीटर का रनवे और बढ़ा देंगे। प्रधानमंत्री जी ने रीवा में हवाई सेवा के विस्तार के लिए जिस तरह से अपनी रुचि प्रदर्शित की है उसके लिए हम विन्ध्यवासी उनके प्रति चिर ऋणी रहेंगे। 9 सितंबर 2024 को डीजीसीए ने रीवा एयरपोर्ट से 72 सीटर विमान के लिए लायसेंस जारी किया था। 20 अक्टूबर 2024 को माननीय प्रधानमंत्री जी ने रीवा एयर पोर्ट का वर्चुअल उद्घाटन किया इसके साथ ही रीव- दिल्ली और रीवा -इंदौर के लिए हवाई उड़ान का पथ प्रशस्त हुआ। इस के लिये इंडिगो और एलायंस एयर को प्रस्ताव भेजा गया। आज का दिन इसी प्रयत्न का प्रतिफल है। हमारे तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह जी चौहान रीवा में 15 फरवरी 2023 को हवाई अड्डे की आधारशिला रखी थी। इसके साथ ही रीवा भविष्य में उत्तरमध्य भारत का सबसे महत्वपूर्ण एयर ट्रैफिक डेस्टिनेशन बनकर उभरेगा की यात्रा पर चल पड़ा। दो वर्ष पूर्व इंदौर में आयोजित ग्लोबल इनवेस्टर्स मीट में विश्वभर के उद्यमियों के बीच तत्कालीन केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जी ने सगर्व यह घोषणा की थी कि हम मध्यप्रदेश का छठवे हवाईअड्डे को निर्मित और विकसित करने जा रहे हैं। उनकी इस घोषणा ने दुनियाभर के उन उद्योगपतियों के ध्यान को आकृष्ट किया जो यहाँ पावर व माइनिंग सेक्टर, वाइल्ड लाइफ टूरिज्म, फूड प्रोसेसिंग इन्डस्ट्रीज की संभावनाओं को देखते हैं। शिक्षा व स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश करने वालों के लिए यह अवसरों का दरवाजा खोलने वाला है। मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि रीवा का हवाईअड्डा चरणबद्ध तरीके से विकसित होने की प्रक्रिया में है। पाँच साल के भीतर ही रीवा का हवाईअड्डा बोइंग की लैंडिंग और अन्तर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए बनकर तैय्यार रहेगा। देश में श्री मोदी जी और प्रदेश में श्री मोहन यादव जी के कुशल और फलदायी नेतृत्व के अनुभव को देखते हुए मैं यह विश्वास पूर्वक कह सकता हूँ कि अगले पाँच वर्षों के भीतर यह सब पूर्णरूपेण यथार्थ के धरातल पर उतर जाएगा। विन्ध्य की आशाओं के केन्द्र रीवा के विकास का श्रेष्ठ व उन्नत दौर है जो स्वतंत्रता के अमृतकाल में प्रारंभ हो रहा है। मैं जब कहता हूँ कि अब रीवा मध्यप्रदेश के ही नहीं देश के समुन्नत और श्रेष्ठ महानगरों की श्रेणी में कदमताल मिलाकर चल पड़ा है तो इसके पीछे ठोस आधार है। 1956 तक रीवा विन्ध्य प्रदेश की राजधानी रहा है और तब इसकी हैसियत भोपाल, लखनऊ, पटना और भुवनेश्वर जैसे शहरों के समकक्ष थी। कांग्रेस सरकार ने राजनीतिक द्वेषवश रीवा से एक प्रदेश की राजधानी का गौरव छीन लिया। 1956 से 2004 तक यह उपेक्षित और अभिशप्त पड़ा रहा। विन्ध्य में आज जो प्राकृतिक संसाधन हैं वो कल भी थे। आम नागरिकों में विकास की ललक और अपेक्षाएं कल भी वैसी ही थीं। केन्द्र में अटलजी और उसके बाद मोदीजी की नेतृत्व की व प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने आहत और उपेक्षित विन्ध्यवासियों की पीड़ा और भावनाओं को समझा। आज यह क्षेत्र कई मामलों देश में अग्रगण्य है। जब मैं कहता हूँ कि रीवा एयरपोर्ट उत्तरमध्य भारत का सबसे महत्वपूर्ण एयरपोर्ट होगा तो मेरी दृष्टि के सामने सिंगरौली का पावर काम्प्लेक्स उभरकर सामने आता है। सिंगरौली में थर्मल प्लांटस में 20,000 मेगावाट से ज्यादा विद्युत उत्पादन होता है। देश का यह सबसे बड़ा पावर काम्प्लेक्स है। रीवा से सिंगरौली तक विश्वस्तरीय सड़क इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित होकर पूर्णता के करीब है। जो यात्री पाँच घंटे में बनारस पहुँचते थे वे दो घंटे में रीवा एयरपोर्ट के लाउंज में होंगे। विन्ध्य की 29 बड़ी औद्योगिक इकाईयां 225 किमी की परिधि में फैली हैं और प्रायः सभी नेशनल हाइवेज से जुड़ी हैं। अपने रीवा का हाइवेज जंक्शन पहले ही विकसित हो चुका है। इन औद्योगिक इकाइयों के अधिकारियों के लिए रीवा एयरपोर्ट कितनी बड़ी सहूलियत बनने जा रहा है यह अब उनसे ही पूछ सकते हैं। विन्ध्य की वाइल्डलाइफ टूरिज्म का विश्व में स्थान है। यहाँ का सफेद बाघ दुनियाभर के चिड़ियाघरों में दहाड़ रहा है। टीवी में दिखने वाला हर दूसरा बाघ या तो बांधवगढ़ का है या कि पन्ना का। पर्यटकों के लिए यह कितना आसान हो जाएगा। रीवा में 750 मेगावाट का सोलर पावर काम्प्लेक्स एशिया के बड़े पावर प्रोडक्शन यूनिट में शामिल है। रीवा में खूबसूरत जल प्रपातों की श्रृंखला है। भगवान राम का तपोवन चित्रकूट और माँ शारदा के धाम मैहर कौन नहीं आना चाहेगा। बाणसागर का वृस्तित जल प्रक्षेत्र और उसके द्वीप विकसित होने पर हनुवंतिया के आकर्षण से आगे का प्राकृतिक सौंदर्य प्रस्तुत करेंगे। अपना विन्ध्य पावर हब की तरह सीमेंट का भी प्रोडक्शन काम्प्लेक्स है।