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पंजाब के राजपुरा में CM नायब सैनी ने किया आह्वान, कहा- समाज की भागीदारी से होगा बदलाव

राजपुरा  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि सैनी समाज को अब केवल समर्थक की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पंचायत से लेकर विधानसभा और संसद तक अपनी मजबूत एवं निर्णायक भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए हर स्तर पर प्रभावी पैरवी की जाएगी। मुख्यमंत्री शुक्रवार को पंजाब के राजपुरा में सैनी समाज वेलफेयर कमेटी द्वारा आयोजित सैनी महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर कमेटी की ओर से उनका भव्य स्वागत और अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं को शॉल भेंट कर सम्मानित भी किया। नायब सैनी ने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय और उनका आवास जनता के लिए चौबीसों घंटे खुला रहता है। जनकल्याण, सामाजिक न्याय और समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। समाज को संगठित होकर आगे बढ़ना होगा, तभी सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर उसकी भागीदारी और प्रभाव बढ़ेगा। सम्मेलन में सैनी समाज कल्याण समिति के सर्कल चेयरमैन जैलदार जसविंदर सिंह सैनी, महिन्दर सैनी, प्रधान जतिन्दर सैनी, चेयरमैन गुरनाम, अंगद सैनी, गुरदर्शन सैनी, रणबीर सिंह, सर्वजीत कौर, एमसी लक्की और दविन्दर सैनी सहित बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। पंजाब सरकार पर साधा निशाना अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान किए गए कई वादे पूरे नहीं हुए, जिसके कारण लोग स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों और आम लोगों से जुड़े कई मुद्दों पर पंजाब सरकार अपेक्षित परिणाम देने में विफल रही है। केंद्र और प्रदेश की योजनाओं का किया उल्लेख मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने गरीब, पिछड़े और वंचित वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया है। उन्होंने हरियाणा सरकार द्वारा गुरु तेग बहादुर जी के 350वें प्रकाश पर्व के अवसर पर किए गए विभिन्न कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सिरसा विश्वविद्यालय में गुरु तेग बहादुर चेयर स्थापित की गई है, जबकि फरीदाबाद, धमतान साहिब, यमुनानगर और अंबाला में भी उनके नाम से विभिन्न परियोजनाएं विकसित की गई हैं। किसानों और महिलाओं के लिए योजनाएं गिनाईं मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की सभी फसलों की एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित कर रही है। फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए किसानों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। महिलाओं को रियायती दर पर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने सहित कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की गई हैं। उन्होंने बताया कि बुजुर्गों, दिव्यांगों और विधवा महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ नियमित रूप से दिया जा रहा है। ओबीसी वर्ग को मिला मजबूत प्रतिनिधित्व नायब सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया गया तथा उच्च शिक्षा संस्थानों में ओबीसी वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने विभिन्न स्तरों पर पिछड़े वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देने का कार्य किया है।

क्या बदलने वाला है पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष? राहुल गांधी और खरगे से मुलाकात के बाद बढ़ी सियासी हलचल

अमृतसर  नई दिल्ली में राहुल गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में वीरवार को हुई कांग्रेस हाईकमान की बैठक में पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला की मौजूदगी ने सूबे में सियासी हलचल पैदा कर दी है।  दरअसल, इस बैठक में सभी प्रदेशों के प्रभारियों और अध्यक्षों को ही बुलाया गया था। इसी की चलते पंजाब के प्रभारी भूपेश बघेल और पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग भी दिल्ली पहुंचे हुए थे। पंजाब से सांसद एवं पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा राजस्थान के प्रभारी की हैसियत से बैठक में मौजूद थे मगर विजय इंदर सिंगला बैठक में क्यों और किस हैसियत से बुलाए गए थे, यह बैठक के दौरान पंजाब के कांग्रेसी नेताओं के लिए बड़ा सवाल बना रहा।   प्रदेश अध्यक्ष बदलने की अटकलें फिर तेज हाईकमान की बैठक में सिंगला की मौजूदगी से पंजाब के अध्यक्ष को बदलने की अटकलों को फिर से बल मिल गया है क्योंकि नए अध्यक्ष सिंगला का नाम ही सबसे ज्यादा चर्चा में है।  हालांकि पंजाब के प्रभारी बघेल हाईकमान के समक्ष चुनाव तक मौजूदा अध्यक्ष को बनाए रखने की बात पर अड़े हुए हैं मगर बैठक सिंगला की मौजूदगी कुछ और ही इशारा कर रही है। बैठक के दौरान राहुल गांधी और खरगे ने बघेल और वड़िंग से सूबे के मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा करते हुए विधानसभा तैयारियों के संदर्भ में फीडबैक लिया। पंजाब में खड़गे और राहुल के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी कांग्रेस  पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा है कि पंजाब में होने वाले आगामी चुनाव कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़े जाएंगे।  अपनी भूमिका के बारे में वड़िंग ने कहा कि वह हमेशा से पार्टी के एक कार्यकर्ता रहे हैं और आगे भी कार्यकर्ता के रूप में ही पार्टी की सेवा करते रहेंगे। उन्होंने कहा, पंजाब में कांग्रेस मजबूत स्थिति में है और अगली सरकार कांग्रेस की बनने जा रही है। यह पंजाब के हर कांग्रेसी का लक्ष्य है और हर कोई इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।  

जेल व्यवस्था में सुधार की पहल: MP सरकार बदलेगी 58 साल पुराने नियम, बंदियों को मिलेगा असर

भोपाल राज्य सरकार ने वर्ष 1968 के मध्य प्रदेश जेल अधिनियम में कुछ बदलाव किए हैं। इसमें अप्रासंगिक हो चुके कुछ नियम हटाकर उनकी जगह नए जोड़े गए हैं। पहली बार मैन्युअल में निर्धारित किया गया है की जेल में पांच कैदियों के बीच में एक शौचालय सीट होगी। हालांकि, अभी आठ कैदियों पर एक शौचालय बनाने के निर्देश जेल मुख्यालय की तरफ से थे। आदतन और गैर आदतन अपराधी को किया परिभाषित दूसरा बड़ा बदलाव यह कि आदतन और गैर आदतन अपराधी को पहली बार परिभाषित किया गया है। लगातार पांच वर्ष की अवधि में कम से कम दो अलग-अलग अवसरों पर एक या एक से अधिक अपराधों में सजा पा चुके अपराधी को आदतन और अन्य को गैर आदतन माना जाएगा। दोनों को रखने की व्यवस्था व कुछ और शर्तें अलग-अलग रहेंगी। भेदभाव करने वाले कैदियों को मिलेगी अनोखी सजा भोजन बनाने वाली टोली में गैर आदतन अपराधी ही होंगे। यदि कोई कैदी भेदभावपूर्ण रवैया रखते हुए टोली द्वारा तैयार खाना खाने से आपत्ति करता है तो दंडस्वरूप उस बंदी को भोजन बनाने में लगाया जाएगा और उसे समस्त कैदियों का भोजन पकाना होगा। पहली बार यह व्यवस्था की गई है कि केंद्रीय एवं जिला जेल जहां कैदियों की संख्या अधिक है वहां स्वचालित मशीनों से वस्त्रों की धुलाई का काम किया जाएगा। कैदियों के गीले कपड़ों को सुखाने के लिए व्यवस्था की जाएगी। संशोधित नियमों में दोषसिद्ध कैदियों को दो श्रेणियों में बांटने का प्रावधान किया गया है। पहली श्रेणी आदतन अपराधियों की होगी जबकि दूसरी श्रेणी गैर-आदतन अपराधियों की। नए नियमों के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति लगातार पांच वर्षों की अवधि में अलग-अलग मामलों में दो से अधिक बार सजा प्राप्त कर चुका है और उसकी सजा किसी अपील या पुनर्विचार में निरस्त नहीं हुई है, तो उसे आदतन अपराधी माना जाएगा। हालांकि पांच वर्ष की अवधि की गणना करते समय जेल में बिताए गए समय को शामिल नहीं किया जाएगा। बाकी सभी दोषसिद्ध कैदी गैर-आदतन अपराधी की श्रेणी में रखे जाएंगे। जेलों में स्वच्छता सुविधाओं को लेकर भी सरकार ने कई नए मानक तय किए हैं। अब हर सेल में शौचालय होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा प्रत्येक पांच बंदियों पर कम से कम एक शौचालय सीट उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान किया गया है। अधिकारियों के अनुसार शौचालयों में चौबीसों घंटे पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। दिव्यांग बंदियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक वार्ड में वेस्टर्न सीट वाले शौचालय भी बनाए जाएंगे। रोटी बनाने के लिए तय हुई एसओपी रोटी बनाने को लेकर भी पहली बार नियम तय किए गए हैं। आटा तय मात्रा में लेकर स्वच्छ वातावरण में गूंथा जाएगा। रोटियों के लिए लोई धीरे-धीरे और समान आकार में तैयार की जाएगी। बेलन से रोटियों को गोल आकार दिया जाएगा। गर्म तवे पर रोटियों को धीरे-धीरे सेंका जाएगा ताकि वे बाहर से न जलें और भीतर से कच्ची न रहें। रोटी बनाने में स्वचालित उपकरणों का भी उपयोग किया जा सकेगा। जो बंदी भोजन बनाने के कार्य में लगे होंगे, उन्हें सामान्य धुलाई कार्यों में शामिल नहीं किया जाएगा ताकि रसोई कार्य और स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित न हो। कपड़े धोने और स्वच्छता पर विशेष जोर नियम 640 में संशोधन के अंतर्गत हर बंदी को सप्ताह में साबुन उपलब्ध कराया जाएगा। बंदियों के कपड़े, कंबल और बिस्तरों की नियमित धुलाई होगी। अस्पताल में भर्ती बंदियों के कपड़ों और बिस्तरों की अलग से सफाई कराई जाएगी। बड़े जिला जेलों में आवश्यकता के अनुसार स्वचालित वाशिंग मशीनों का उपयोग किया जा सकेगा। गीले कपड़ों को सुखाने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी। एमपी की जेलों में 48 हजार कैदी मध्य प्रदेश की 132 जेलों में क्षमता से अधिक करीब 45,500 से 48,000 कैदी बंद हैं, जिनमें से लगभग 50% विचाराधीन हैं। राज्य के जेलों की कुल तय क्षमता लगभग 30,000 है, जिसके कारण जेलों में अत्यधिक भीड़भाड़ की स्थिति है। यूपी और बिहार के बाद मध्यप्रदेश ही ऐसा राज्य है जहां जेलों में क्षमता से अधिक कैदी बंद हैं। जेल सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम राज्य सरकार का मानना है कि इन संशोधनों से जेलों में स्वच्छता, स्वास्थ्य सुरक्षा और बंदियों के जीवन स्तर में सुधार होगा। साथ ही आदतन अपराधियों की स्पष्ट पहचान, भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता मानकों और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। यह संशोधन राज्य की जेलों को आधुनिक और मानवीय व्यवस्थाओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नियमों में यह भी कहा गया है कि सभी शौचालयों में प्लास्टिक की बाल्टी और बड़े मग की व्यवस्था की जाएगी। बैरकों के भीतर और बाहर पर्याप्त संख्या में शौचालय तथा मूत्रालय बनाए जाएंगे। हाथ धोने के लिए हर शौचालय के बाहर पानी और साबुन की व्यवस्था अनिवार्य होगी। जेल कर्मचारियों और बंदियों के लिए अलग-अलग शौचालय बनाए जाएंगे। महिला कर्मचारियों के लिए भी सुरक्षित स्थानों पर पृथक शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। भोजन बनाने की व्यवस्था में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। अब केवल गैर-आदतन और स्वस्थ बंदियों को ही भोजन तैयार करने वाली टोली में शामिल किया जाएगा। भोजन बनाने से पहले सभी बंदियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा। रसोई में प्रवेश करने वाले बंदियों को स्वच्छ वस्त्र पहनना अनिवार्य होगा। भोजन तैयार करने से पहले और बाद में हाथ धोना भी जरूरी किया गया है। यदि कोई बंदी अस्वच्छ परिस्थितियों में भोजन बनाता पाया गया या भोजन को दूषित करने की कोशिश करता है तो उसे तत्काल उस कार्य से हटा दिया जाएगा। पहली बार रोटी बनाने को लेकर भी विस्तृत दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। आटा स्वच्छ वातावरण में गूंथा जाएगा और रोटियों के लिए समान आकार की लोइयां तैयार की जाएंगी। रोटियों को ठीक तरीके से बेलकर गर्म तवे पर संतुलित तापमान में सेंका जाएगा ताकि वे कच्ची या जली हुई न रहें। आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित मशीनों का उपयोग भी किया जा सकेगा। जेल विभाग का कहना है कि इससे भोजन की गुणवत्ता बेहतर होगी और सभी बंदियों को एक समान भोजन उपलब्ध कराया जा सकेगा। सुबह का नाश्ता तैयार करने वाले बंदियों को भी विशेष सुविधा देने का प्रावधान किया गया है। नए नियमों के अनुसार आवश्यकता होने … Read more

असोला भाटी अभयारण्य में बढ़ी तेंदुओं की मौजूदगी, कैमरा ट्रैप में जोड़े बार-बार रिकॉर्ड

नई दिल्ली  दिल्ली के असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में तेंदुओं की बढ़ती मौजूदगी ने वन अधिकारियों को खासा उत्साहित कर दिया है। अब यहां आए दिन तेंदुए देखे जा रहे हैं। खास तौर पर कैमरा ट्रैप में लगातार तेंदुओं के जोड़े रिकॉर्ड हो रहे हैं। इसे अधिकारी अभयारण्य में बेहतर होते प्राकृतिक आवास और समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत मान रहे हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि असोला भाटी क्षेत्र में तेंदुओं की संख्या 2022 के लगभग 12-14 से बढ़कर अब करीब 16 हो गई है। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि यह आंकड़ा ‘कैमरा ट्रैप’ रिकॉर्ड और एरिया निगरानी पर आधारित है और विस्तृत गणना के बाद ही इसकी पुष्टि हो सकती है। असोला वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी से गुड न्यूज वन्यजीव अधिकारियों को जिस बात ने सबसे ज्यादा उत्साहित किया है, वह है अभयारण्य के भीतर जलाशयों के पास तेंदुओं के जोड़ों का बार-बार दिखना। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे नजारे बेहद दुर्लभ हैं क्योंकि तेंदुए आमतौर पर एकांत प्रिय होते हैं और वे आमतौर पर केवल प्रणय काल, प्रजनन के दौरान या फिर शावकों के पालन-पोषण के समय ही साथ दिखाई देते हैं। क्या कह रहे वन विभाग के अधिकारी वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कुछ साल पहले तेंदुए इतनी बार दिखना असामान्य था। आज हमारे ‘कैमरा ट्रैप’ लगभग हर रोज उन्हें रिकॉर्ड कर रहे हैं। तेंदुओं के जोड़े भी बार-बार दिख रहे हैं, जो काफी महत्वपूर्ण है। वन्यजीवों की आबादी में बढ़ोतरी सिर्फ तेंदुओं तक सीमित नहीं है। अधिकारियों ने कहा कि चीतल और जंगली सूअर भी काफी देखे जा रहे हैं, जबकि मोर तो इतने हैं कि अब वे अभयारण्य के कई हिस्सों में आम तौर पर दिख जाते हैं। इसलिए खास है ये उपलब्धि     एक अधिकारी ने कहा कि मोर अब लगभग हर जगह दिखते हैं। उनकी आबादी काफी बढ़ी है और कुछ रास्तों पर तो वे पूरे झुंड में नजर आते हैं।     अधिकारियों के मुताबिक वन्यजीव गतिविधि में यह वृद्धि अभयारण्य के भीतर व्यापक पारिस्थितिक सुधार का संकेत है।     कई प्रजातियों की बढ़ती मौजूदगी यह दर्शाती है कि भोजन, पानी और आश्रय अब परिदृश्य में अधिक सुलभ होते जा रहे हैं।     एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मोर, फ्रैंकोलिन और हिरण जैसी प्रजातियां आवास की गुणवत्ता के महत्वपूर्ण संकेतक होती हैं।     अधिकारी ने कहा कि कुछ प्रजातियां ऐसी होती हैं जिन्हें हम संकेतक प्रजाति कहते हैं।     उनकी मौजूदगी से हम समझ सकते हैं कि आवास बेहतर हो रहा है या बिगड़ रहा है।     मोर, फ्रैंकोलिन और हिरण जैसी प्रजातियों की बढ़ोतरी बताती है कि आवास की स्थिति सुधर रही है। अधिकारियों ने बताया कैसे बदल रही स्थिति अधिकारी इस बदलाव का श्रेय पिछले कई वर्षों में किए गए आवास प्रबंधन उपायों को देते हैं। अभयारण्य में 200 से अधिक जलकुंड बनाए और संधारित किए गए हैं, जिससे वन्यजीवों को साल भर पानी मिलता रहता है। साथ ही कई साल पहले किए गए वृक्षारोपण अब घने हरे-भरे क्षेत्र में तब्दील हो चुके हैं और अनेक पेड़ घना छत्र बना चुके हैं। चीतल और जंगली सूअर की भी बढ़ी संख्या अधिकारियों ने बताया कि चीतल और जंगली सूअर की संख्या काफी बढ़ी है, जिससे तेंदुए जैसे शिकारियों के लिए अभयारण्य के भीतर रहने के अनुकूल हालात बने हैं। ऐतिहासिक रूप से तेंदुए असोला भाटी क्षेत्र को हरियाणा के अरावली के जंगलों और दिल्ली को जोड़ने वाले एक बड़े गलियारे के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं। यह आवाजाही जारी है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि हाल के ‘कैमरा ट्रैप’ रिकॉर्ड से संकेत मिलता है कि कुछ जानवर अब अभयारण्य में अधिक समय बिताने लगे हैं।  

मानसून से पहले महंगाई का झटका, हरी सब्जियों के बढ़ते दामों ने बिगाड़ा रसोई का बजट

रांची राजधानी रांची में बदलते मौसम और मानसून की दस्तक के साथ हरी सब्जियों की कीमतों में अचानक आई तेजी ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। बाजारों में टमाटर से लेकर अधिकांश सब्जियां 40 से 50 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही हैं, जबकि कुछ चुनिंदा सब्जियों के दाम आसमान छूने लगे हैं। महंगाई का सीधा असर निम्न मध्यम और मध्यम वर्गीय परिवारों की रसोई पर पड़ रहा है, जिससे घरेलू बजट पूरी तरह प्रभावित हो गया है। सब्जी विक्रेताओं के अनुसार एक सप्ताह पहले तक 10 से 15 रुपये प्रति किलो बिकने वाली भिंडी अब 30 से 40 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। वहीं स्थानीय टमाटर 50 से 55 रुपये प्रति किलो और हाइब्रिड टमाटर 50 से 70 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है। फ्रेंच बीन की कीमत सबसे अधिक बढ़ी है और यह 40 से 50 रुपये प्रति पाव तक बिक रही है। बीन की कीमत 150 से 200 रुपये केजी तक पहुंच गई है। आलू और प्याज को छोड़कर लगभग सभी सब्जियों के दामों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। रांची में बुंडू, तमाड़, जोन्हा, सिल्ली, झालदा, बेड़ो समेत आसपास के क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में सब्जियों की आपूर्ति होती है। यहां से आने वाली खेप नागाबाबा खटाल, मोरहाबादी, लालपुर, डोरंडा, रेलवे स्टेशन बाजार और बहुबाजार जैसी प्रमुख मंडियों तक पहुंचती है। अंतिम फसल और कम आपूर्ति बनी महंगाई की वजह सब्जी व्यापारी ने कहा कि वर्तमान में कई सब्जियों की अंतिम फसल बाजार में आ रही है। मानसून शुरू होने के बाद कई हरी सब्जियों की खेती और उत्पादन प्रभावित हो जाता है, जिससे बाजार में आपूर्ति कम हो जाती है। यही कारण है कि हर वर्ष इस अवधि में सब्जियों के दाम बढ़ जाते हैं। विक्रेताओं का कहना है कि जब तक नई फसल तैयार होकर बाजार में नहीं आती, तब तक कीमतों में राहत मिलने की संभावना कम है। सब्जियों के क्या हैं, रेट सब्जी का नाम     भाव (रुपये प्रति किलो) फ्रेंच बीन                   40 – 50 टमाटर                       50 – 60 झींगी / तोरई                40 – 60 खीरा                            30 – 40 भिंडी                            30 – 40 कद्दू                              20 सफेद आलू                    15 लाल आलू                      20 प्याज                            25 बैंगन                            40 पटल                             40 शिमला मिर्च                   50 – 70 बोदी                                40     पहले 300 रुपये में सब्जियां पूरी होती थी, अब हालत ऐसी हैं, कि 500 रुपये में भी थैला नहीं भरता है।     प्रति दिन 200 रुपये में पर्याप्त सब्जियां मिल जाती थीं, लेकिन अब 400 रुपये खर्च करने के बाद 2 दिन में सब्जियां खत्म हो रही।     बारिश तक महंगाई की समस्या बनी, महंगी सब्जी खरीद ही नहीं रही।     पहले टमाटर की चटनी बनती थी, अब सब्जी में आधा कटा टमाटर इस्तेमाल कर रही।  

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोले- केंद्र और राज्य के समन्वय से विकास को मिलेगी नई गति

केंद्र-राज्य समन्वय से विकास को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की सौजन्य भेंट रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सौजन्य मुलाकात की।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का शाल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय एवं निरंतर संवाद की भावना ने विकास कार्यों को नई गति प्रदान की है। इसी सहयोगात्मक दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंच रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच मजबूत साझेदारी से अधोसंरचना विकास, उद्योग, रोजगार, कौशल विकास तथा जनसेवा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसर निर्मित हो रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आपसी सहयोग और समन्वय से छत्तीसगढ़ के विकास को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में सहायता प्राप्त होगी। इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल उपस्थित थे।

बिजली बिल से मिलेगी राहत, 14 जून से शुरू होगी बिहार की सोलर रूफटॉप महायोजना

पटना  बिहार के गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सम्राट सरकार एक बेहद शानदार और बड़ी राहत देने वाली योजना की शुरुआत करने जा रही है। राज्य के लाखों परिवारों को अब हर महीने भारी-भरकम बिजली बिल से पूरी तरह मुक्ति मिलने वाली है। सूबे के 10 लाख गरीब परिवारों (कुटीर ज्योति उपभोक्ताओं) के घरों की छतों पर सोलर रूफटॉप यानी सोलर प्लेट लगाने की महायोजना की शुरुआत 14 जून से होने जा रही है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद इस बेहद महत्वाकांक्षी योजना का भव्य उद्घाटन करेंगे। इस योजना के जमीन पर उतरते ही गरीब परिवारों के घरों में न सिर्फ मुफ्त बिजली की रोशनी जगमगाएगी, बल्कि राज्य में हरित ऊर्जा को भी एक नया और मजबूत पंख मिलेगा। पहले चरण में ढाई लाख घरों पर लगेंगी सोलर प्लेट इस योजना को लेकर ऊर्जा विभाग ने अपनी सभी प्रशासनिक और तकनीकी तैयारियां पूरी तरह से पूरी कर ली हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस महाअभियान की शुरुआत पहले चरण में 2.50 लाख गरीब परिवारों के घरों की छतों पर सोलर प्लेट लगाने से होगी। इन ढाई लाख परिवारों के घरों को सौर ऊर्जा से लैस करने के लिए सरकार कुल 1512 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च करने जा रही है। केंद्र सरकार की लोकप्रिय 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के तहत इस पूरी स्कीम को जमीन पर उतारा जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, एक घर की छत पर लगने वाले इस सोलर रूफटॉप से करीब 1.1 किलोवाट बिजली का बंपर उत्पादन होगा, जो एक गरीब परिवार की दैनिक जरूरतों के लिए पूरी तरह पर्याप्त होगा। ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल का बड़ा एलान बिहार के ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने इस योजना के भविष्य के रोडमैप का खुलासा करते हुए बताया कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि अगले दो वर्षों के भीतर सूबे के करीब 58 लाख गरीब परिवारों के घरों की छतों पर सोलर रूफटॉप लगाने का एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान में एक परिवार के घर की छत पर इस पूरे सिस्टम को इंस्टॉल करने में लगभग 60 हजार रुपये की राशि का खर्च आएगा। ऊर्जा मंत्री ने याद दिलाया कि इससे पहले 'जल-जीवन-हरियाली अभियान' के तहत बिहार के सभी प्रमुख सरकारी भवनों पर सोलर रूफटॉप लगाकर बिजली उत्पादन का काम पहले ही सफलतापूर्वक शुरू किया जा चुका है। अब इसी कड़ी में आम और गरीब जनता को सीधे तौर पर इस मुफ्त बिजली क्रांति से जोड़ा जा रहा है।

माता वैष्णो देवी यात्रा होगी आसान, 16 जून से दोबारा पटरी पर लौटेगी वंदे भारत एक्सप्रेस

अमृतसर अमृतसर से श्री माता वैष्णो देवी कटरा के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस 16 जून से दोबारा शुरू होने जा रही है। करीब सात महीने के अंतराल के बाद ट्रेन सेवा बहाल होने से श्रद्धालुओं और यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी। गुरदासपुर और बटाला से होकर जाएगी रेलवे प्रशासन ने ट्रेन का नया रूट और समय-सारिणी भी जारी कर दी है। नई व्यवस्था के तहत ट्रेन अब गुरदासपुर और बटाला होकर संचालित होगी। इससे इन क्षेत्रों के यात्रियों को भी सीधे वंदे भारत सेवा का लाभ मिलेगा। रेलवे ने ट्रेन का साप्ताहिक अवकाश दिवस भी बदल दिया है। अब यह ट्रेन शनिवार को नहीं चलेगी और सप्ताह में छह दिन संचालित होगी।  पांच घंटे 35 मिनट में पहुंचाएगी कटरा रेलवे द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार ट्रेन संख्या 26405 अमृतसर से शाम 4:25 बजे रवाना होगी और रात 10 बजे श्री माता वैष्णो देवी कटरा पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 26406 कटरा से सुबह 6:40 बजे प्रस्थान कर दोपहर करीब 12:20 बजे अमृतसर पहुंचेगी। यात्रा का समय लगभग पांच घंटे 35 मिनट रहेगा।  नए रूट पर ट्रेन के प्रमुख ठहराव बटाला, गुरदासपुर, पठानकोट और जम्मू तवी स्टेशन होंगे। इससे पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच रेल संपर्क और मजबूत होगा।  रेलवे अधिकारियों के अनुसार सेवा बहाल होने से माता वैष्णो देवी जाने वाले श्रद्धालुओं को तेज, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का विकल्प मिलेगा। वंदे भारत एक्सप्रेस के दोबारा संचालन से अमृतसर, गुरदासपुर, बटाला और पठानकोट क्षेत्र के यात्रियों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। आगामी यात्रा सीजन और धार्मिक पर्यटन को भी इससे बढ़ावा मिलेगा।

चुनावी तैयारियों में जुटी भाजपा, हाईकमान ने पंजाब नेताओं से मांगी रिपोर्ट; जल्द बनेगी नई रणनीति

चंडीगढ़  पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने भी अपनी चुनावी तैयारी और तेज कर दी है।  चुनाव से पहले भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं की नई टीम फील्ड में उतरेगी जबकि सूबे के सीनियर भाजपा लीडर टीम की अगुवाई करेंगे। इसके अलावा सूबे में जल्द चुनावी कमेटियों का भी गठन किया जाएगा। शुक्रवार देर शाम भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन व राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने पंजाब के वरिष्ठ नेताओं अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों, पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़, विधायक अश्वनी शर्मा, संगठन मंत्री श्री मंथरि श्री निवासलु, महासचिव अनिल सरीन, केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, पूर्व मंत्री मनोरंजन कालिया, मनप्रीत बादल, विजय सांपला, सोम प्रकाश समेत अन्य के साथ दिल्ली में बैठक की। बताया जा रहा है कि बैठक में अमित शाह भी मौजूद थे। स्थानीय नेताओं से लिया फीडबैक इस बैठक में भाजपा नेताओं से पंजाब के सियासी हालातों पर फीडबैक लिया गया जबकि उन्हें सूबे में चुनावी तैयारियों को तेज करने के भी निर्देश दिए गए। सूत्र बताते हैं कि भाजपा हाईकमान ने माझा, दोआबा व मालवा में पार्टी की वर्तमान स्थिति, भाजपा के कैडर, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पार्टी की पकड़ इत्यादि विषयों पर चर्चा की। पंजाब भाजपा के नेताओं ने हाल ही में हुए निकाय चुनाव और गत वर्ष हुए पंचायत चुनाव में पार्टी की स्थिति के बारे में भी हाईकमान को बताया। चूंकि अब पंजाब को नए प्रदेशाध्यक्ष मिले हैं, इसलिए सभी जिलों में नई संगठनात्मक टीम भी तैयार करने पर बात हुई। वरिष्ठ नेताओं को निर्देशित किया गया कि वे अब फील्ड में पूरी तरह सक्रिय रहते हुए कार्यकर्ताओं में जोश भरें। चुनाव के मद्देनजर मेनिफेस्टो कमेटी के गठन पर भी विमर्श हुआ। चुनावी कमेटियों को जल्द गठित करने पर विचार हुआ ताकि वे जल्द अपना काम शुरू कर सकें। नबीन का पंजाब दाैरा अहम भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन 20 से 22 जून तीन दिन तक पंजाब में रहेंगे। वे यहां सूबे के व्यापारियों और कार्यकर्ताओं से मिलेंगे जबकि अमृतसर स्थित श्री हरिमंदिर साहिब में माथा टेकेंगे। बताया जा रहा है कि वे प्रमुख डेरों के प्रतिनिधियों से भी मिल सकते हैं।  नितिन नबीन के पंजाब दौरे के बड़े सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है। उनके दौरे की अंतिम रूपरेखा अभी तय की जा रही है। वे दुर्ग्याणा मंदिर में दर्शन करने के साथ-साथ जलियांवाला बाग में शहीदों को श्रद्धांजलि देने भी जा सकते हैं। वे सूबे में स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर जमीनी हकीकत का जायजा लेंगे। 

यूपी की पंचायतों में वित्तीय अनियमितता का खुलासा, नियमों को दरकिनार कर करोड़ों का भुगतान

लखनऊ उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने से ठीक पहले ग्राम पंचायतों में सरकारी धन के भुगतान को लेकर बड़ा खेल सामने आया है। कानपुर की 35 ग्राम पंचायतों में नियमों को दरकिनार कर करीब 38.41 लाख रुपये का मनमाने तरीके से भुगतान कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद पंचायतीराज निदेशालय ने गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए थे। डीपीआरओ मनोज कुमार ने सभी ग्राम पंचायत सचिवों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। 26 मई को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होना था। इससे पहले पंचायत खातों में बची धनराशि को खर्च करने की होड़ मच गई। इसी जल्दबाजी में कई ग्राम पंचायतों में नियमों को ताक पर रखकर भुगतान कर दिए गए। कानपुर की 590 ग्राम पंचायतों में से 565 पंचायतों ने नियमों का पालन किया लेकिन घाटमपुर, सरसौल, भीतरगांव, चौबेपुर, कल्याणपुर, पतारा, शिवराजपुर और बिधनू ब्लॉकों की 35 ग्राम पंचायतों में एक अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच करीब 38.41 लाख रुपये का भुगतान मनमाने तरीके से कर दिया। मॉनीटरिंग हुई तो पता चला कि भुगतान निर्धारित गेट-वे पोर्टल के बजाय बाहरी कंप्यूटरों और अन्य स्थानों से किए गए। नियम 15वें वित्त आयोग और राज्य वित्त आयोग की धनराशि से होने वाले सभी विकास कार्यों का भुगतान केवल ग्राम सचिवालय में स्थापित कंप्यूटर से, निर्धारित आईपी एड्रेस से ही होंगे। प्रदेश के 74 जिले में 22.11 करोड़ का भुगतान मनमाने भुगतान का मामला सिर्फ कानपुर तक सीमित नहीं है। प्रदेश भर के 74 जिलों की 2542 ग्राम पंचायतों में करीब 22.11 करोड़ रुपये के भुगतान नियमों को दरकिनार कर करने का खुलासा हुआ है। इसके बाद पंचायती राज निदेशक ने सभी जिलों के डीपीआरओ से जवाब मांगा है और संबंधित सचिवों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है ग्राम प्रधान बनाए गए हैं प्रशासक यूपी में पहली बार ग्राम प्रधानों को प्रशासक पद की जिम्मेदारी दी गई है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में देरी के कारण ग्राम पंचायतों की बागडोर ग्राम प्रधानों के हाथ में ही रखे जाने का निर्णय लिया गया है। 26 मई को ग्राम प्रधानों का पांच वर्ष का कार्यकाल खत्म हो रहा था। ऐसे में 27 मई से निर्वतमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में काम कर रहे हैं। छह महीने या पंचायत चुनाव होने के बाद नई ग्राम पंचायत की प्रथम बैठक की तिथि तक जो भी पहले हो प्रधानों को प्रशासक पद की जिम्मेदारी दी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यह फैसला किया गया है। यूपी में वर्ष 2021 में कुल 58195 ग्राम पंचायत प्रधान निर्वाचित हुए थे। उनकी पहली बैठक 27 मई 2021 को हुई थी। ऐसे में ग्राम प्रधानों का पांच वर्ष का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो गया था।